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रायपुर साहित्य उत्सव 2026: कॉलेज विद्यार्थियों के लिए सभी जिलों में आयोजित होंगी कविता और कहानी प्रतियोगिताएं

रायपुर : रायपुर साहित्य उत्सव 2026 :कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए सभी जिलों में होगीं कविता-कहानी प्रतियोगिताएं पुरस्कार भी मिलेंगे, जिले के विजेताओं को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल किया जायेगा विद्यार्थियों से 30 दिसंबर तक ली जायेगी स्वरचित कहानियां और कविताएं रायपुर नवा रायपुर में अगले महीने होने वाले साहित्य उत्सव के पहले प्रदेश के सभी जिलों में महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं के लिए कहानी एवं कविता प्रतियोगिताएं आयोजित होगी। इन दोनों प्रतियोगिताओं में जिला स्तर पर विजेताओं को पुरस्कार भी मिलेंगे। जिले के विजेताओं को राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में शामिल किया जायेगा और सर्वोत्कृष्ठ कहानी तथा कविता को रायपुर साहित्य उत्सव में पुरस्कृत किया जायेगा। इस प्रतियोगिता के लिये जिलेवार नोडल अधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं।  प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेेने के इच्छुक छात्र-छात्राएं अपनी स्वरचित कविता और कहानी 30 दिसंबर 2025 तक जिले के नोडल अधिकारी कार्यालय में जमा करा सकते हैं। 30 दिसंबर के बाद मिली कहानियों-कविताओं को प्रतियोगिता में शामिल नहीं किया जायेगा। प्रदेश की समृद्धशाली साहित्यिक विरासत को लोगों तक पहुंचानें और साहित्य लेखन में युवाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए नवा रायपुर में 23-25 जनवरी 2026 तक रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन होगा।  साहित्य उत्सव के तहत जिलेवार महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए आयोजित होने वाली कविता-कहानी प्रतियोगिताओं में पहले पुरस्कार के रूप में 5,100 रूपए, दूसरे पुरस्कार के रूप में 3,100 रूपए और तीसरे पुरस्कार के रूप में 1,500 रूपए की धनराशि दी जाएगी। इसी तरह दोनों प्रतियोगिताओं में 1000-1000 रूपए के तीन-तीन प्रोत्साहन पुरस्कार भी दिए जायेंगे। जिला स्तर पर प्रथम पुरस्कार प्राप्त कहानी-कविताओं को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल किया जायेगा। राज्य स्तर पर पहले पुरस्कार के रूप में 21,000 रूपए, दूसरे पुरस्कार के रूप में 11,000 रूपए और तीसरे पुरस्कार के रूप में 7,000 रूपए की धनराशि दी जाएगी। इसी तरह दोनों प्रतियोगिताओं में राज्य स्तर पर 5,100-5,100 रूपए के तीन-तीन प्रोत्साहन पुरस्कार भी दिए जायेंगे।  प्रतियोगिता में शामिल की जाने वाली कविता न्यूनतम 8 छंदों की मौलिक, अप्रकाशित तथा टंकित होनी चाहिए। इसी तरह कहानी 1200 शब्दों में मौलिक, अप्रकाशित और टंकित होनी चाहिए।  प्रतिभागी किसी महाविद्यालय-विश्वविद्यालय का विद्यार्थी हो एवं उसकी आयु 40 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। प्रतिभागी को अपने महाविद्यालय का परिचय पत्र अथवा प्राचार्य का प्रमाणपत्र भी लगाना होगा। प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल का निर्णय अंतिम और सर्वमान्य होगा। पुरस्कारों की घोषणा जनवरी 2026 में की जाएगी और पुरस्कृत प्रतिभागियों को 23, 24, 25 जनवरी 2026 को होने वाले रायपुर साहित्य उत्सव में पुरस्कृत किया जाएगा। प्रविष्टी जमा करते समय कविता-कहानी के प्रारंभ में ऊपर एवं लिफाफे पर “युवा हिंदी कविता-कहानी लेखन प्रतियोगिता“ अवश्य अंकित करना होगा। पुरस्कृत कविताओं-कहानियों  का संकलन कर प्रकाशित किया जाएगा जिसका विमोचन रायपुर साहित्य उत्सव के मंच पर किया जाएगा।

शीतकालीन व बजट सत्र दिल्ली से बाहर करने की मांग तेज, सांसद ने दिए नए विकल्प

नई दिल्ली  बीजू जनता दल के सांसद मानस रंजन मंगराज ने मांग की है कि संसद का सत्र दिल्ली से बाहर लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पलूशन हर साल बहुत अधिक रहता है। ऐसी स्थिति में संसद का शीतकालीन सत्र और बजट सत्र दिल्ली से बाहर लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हर साल ही हवा खराब हो जाती है और यह आपदा मानव जनित है। शून्य काल के दौरान ओडिशा के सांसद ने कहा कि दिल्ली में पलूशन हर साल ही बढ़ रहा है। इससे निपटने के लिए ओडिशा जैसा फॉर्मूला अपनाना चाहिए। मानस मंगराज ने कहा कि ओडिशा में प्राकृतिक आपदाओं से हर साल ही सरकार निपटती है और कभी कोई बड़ा संकट सामने नहीं आता। उन्होंने कहा, 'हम ओडिशा से आते हैं। एक ऐसा राज्य जहां अकसर चक्रवात आते हैं और बाढ़ आती है। इसके अलावा अन्य आपदाएं भी आती हैं। इनसे हम नियमित तौर पर निपटते हैं। इसलिए हम समझते हैं कि दिल्ली में यह कैसा संकट है। लेकिन दिल्ली का संकट हमें परेशान करता है।' उन्होंने कहा कि दिल्ली में सांसदों को पलूशन का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा संसद सदस्यों के साथ लगे कर्मचारियों को भी इसका सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम इन लोगों की परेशानी को नजरअंदाज नहीं कर सकते। यह सामान्य नहीं है, जिसे नजरअंदाज कर दिया जाए। मानस मंगराज ने कहा कि ऐसे कई शहर हैं, जहां की हवा साफ है। ऐसी स्थिति में वहां पर संसद का सेशन चलाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर, हैदराबाद, गांधीनगर, बेंगलुरु, गोवा और देहरादून में सत्र चला सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि चक्रवात की स्थिति में ओडिशा से कुछ घंटों के अंदर ही लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकता है तो फिर भारत सरकार भी लोगों की सेहत का ध्यान रखने के लिए सांसदों और अन्य स्टाफ को दूसरी लोकेशन पर ले जा सकती है। उन्होंने कहा कि मेरे प्रस्ताव में किसी तरह की राजनीति नहीं है। यह हमारे जीवन और गरिमा का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि संसद से ही यह राह निकलनी चाहिए, जिससे संदेश जाए कि जीवन का अधिकार सबसे अहम है। उन्होंने कहा कि हर साल ही दिल्ली में सर्दियां ऐसी रहती हैं। इसके लिए कुछ ऐक्शन प्लान बनाना ही होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बयान: प्रदेश की इंडस्ट्रियल ग्रोथ रेट देश में सबसे अधिक, रोजगार और उद्योगों के विकास पर जोर

प्रदेश की इंडस्ट्रियल ग्रोथ रेट देश में सर्वाधिक, रोजगार के अवसर और उद्योगों के विकास पर जोर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सरकार के सफलतम 2 वर्ष पूर्ण होने पर 13-14 दिसंबर को भोपाल और इंदौर में होंगे विशेष कार्यक्रम भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार के सफलतम 2 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 13 दिसंबर को भोपाल और 14 दिसंबर को इंदौर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रदेश में सरकार बनने के बाद गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण के लिए कई उल्लेखनीय निर्णय लिए गए। राज्य में कृषि के लिए सिंचाई का रकबा दोगुना करने के उद्देश्य से जल गंगा संवर्धन अभियान और कई बड़ी परियोजनाओं के माध्यम से प्रयास जारी हैं। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए उद्योगों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। हमारी इंडस्ट्रियल ग्रोथ रेट देश में सबसे अधिक है। 'अच्छे कार्य में साथ, लेकिन कुछ गलत होगा तो बर्दाश्त नहीं' मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में सुशासन पर आधारित व्यवस्थाएं संचालित हों, इसके लिए अच्छे कार्य में सदैव साथ हैं और अगर कहीं भी कुछ गलत होगा तो उसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। मध्यप्रदेश की धरती से नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में विगत दिनों उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल हुई है। प्रदेश में नक्सलियों का सबसे बड़ा सरेंडर बालाघाट में कराया गया है। भविष्य में नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के लिये रवाना होने से पहले इंदौर में मीडिया से चर्चा कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोपहर में आंध्र प्रदेश के सत्य साईं जिले के धर्मावरम में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मशताब्दी वर्ष के समापन पर अटल ज्योति संदेश यात्रा कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे।  

न्यू ईयर से पहले बुरी खबर: केंद्रीय कर्मचारियों का DA बढ़ना अब अधर में?

नई दिल्ली  केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को नए साल में अपनी सैलरी में मामूली बढ़ोतरी से ही संतोष करना पड़ सकता है। जनवरी 2026 से लागू होने वाला महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) संशोधन इस बार सिर्फ 2 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। अगर ऐसा हुआ तो केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 58% से बढ़कर 60% हो जाएगा। यह पिछले सात वर्षों में सबसे कम बढ़ोतरी होगी। बता दें कि महंगाई भत्ते की गणना औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के आधार पर होती है। जुलाई 2025 से अक्टूबर 2025 तक सूचकांक लगातार बढ़ा है। यह मुद्रास्फीति के बढ़ने का संकेत है। इसके बावजूद बढ़ोतरी इतनी तेज नहीं है कि भत्ते को 61% तक कर दिया जाए। यह 7वें वेतन आयोग के 10-वर्षीय चक्र से बाहर होने वाला पहला संशोधन होगा। 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रहा है जबकि 8वें वेतन आयोग ने अभी अपना काम शुरू किया है। इसके संदर्भ-शर्तों (ToR) में लागू करने की तारीख का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। आयोग के पास रिपोर्ट देने के लिए 18 माह हैं और आमतौर पर नई वेतन संरचना लागू होने में रिपोर्ट के बाद 1–2 साल लग जाते हैं। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को 8वें वेतन आयोग के लाभ 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत में मिल सकते हैं। टेंशन में केंद्रीय कर्मचारी कर्मचारियों की बड़ी चिंता यह है कि जनवरी 2026 से नई वेतन संरचना लागू होगी या नहीं क्योंकि सरकार ने संसद में इस पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इस वजह से यह लगभग तय माना जा रहा है कि महंगाई भत्ता मौजूदा संरचना के अनुसार ही अगले कुछ वर्षों तक जारी रहेगा, जब तक 8वां वेतन आयोग पूरी तरह लागू नहीं हो जाता। भत्ते में यह मामूली बढ़ोतरी इसलिए भी अहम है क्योंकि 8वें वेतन आयोग के लागू होने पर उस समय का DA बेसिक पे में जोड़ा जाता है और DA फिर शून्य से शुरू होता है। यानी जनवरी 2026 से लेकर जुलाई 2027 तक होने वाले चार भत्ता संशोधन सीधे तौर पर नई वेतन संरचना में आपकी बेसिक सैलरी तय करेंगे।  

इटली के डिप्टी पीएम तजानी ने पीएम मोदी से मुलाकात को बताया सकारात्मक, जॉर्जिया मेलोनी ने दिया 2026 का निमंत्रण

नई दिल्ली इटली के डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी इस समय भारत के तीन दिवसीय दौरे पर हैं. बुधवार शाम उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई, जिसे तजानी ने बहुत पॉजिटिव और उपयोगी बताया.  इस मुलाकात के दौरान तजानी ने पीएम मोदी को इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की ओर से 2026 में इटली आने का निमंत्रण भी दिया. तजानी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के इटली के दौरे को लेकर 'हां' में तो जवाब मिला है. लेकिन, अभी समय तय नहीं किया गया है. विदेश मंत्री तजानी ने कहा कि भारत–इटली रिश्ते नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं और आने वाले सालों में दोनों देशों के सहयोग में और तेजी आएगी. भारत और इटली एक दूसरे के लिए बेहद महत्वपूर्ण साझेदार हैं और आने वाला समय दोनों देशों के लिए बेहतर संभावनाएं लेकर आएगा.  इटली की पीएम मेलोनी के भारत दौरे पर क्या बोले तजानी? जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी भारत कब आएंगी? इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्री तजानी ने कहा कि हम लोगों ने यह अभी तया नहीं किया है कि वह 2026 में कब भारत आएंगी. इटली के प्रतिनिधित्व और प्रधानमंत्री मोदी के बीच क्या बातचीत हुई? मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन, सांस्कृतिक जुड़ाव, व्यापार, तकनीक और कूटनीतिक साझेदारी पर विस्तार से बात की. तजानी ने खास तौर पर कहा कि भारत रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने में बेहद अहम भूमिका निभा सकता है. उनके अनुसार भारत का वैश्विक स्तर पर बढ़ता प्रभाव इस दिशा में मदद कर सकता है. कब-कब हुई जॉर्जिया मेलोनी और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाक़ात? नवंबर 2022 – बाली, इंडोनेशिया (G20 शिखर सम्मेलन): प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद मेलोनी की मोदी से पहली मुलाकात बाली में हुई. यह भारत–इटली संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत मानी गई. 2–3 मार्च 2023 – नई दिल्ली: मेलोनी की पहली आधिकारिक भारत यात्रा में दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की, जो द्विपक्षीय संबंधों में सबसे बड़ा कदम माना जाता है. सितंबर 2023 – नई दिल्ली (G20 शिखर सम्मेलन): इस मुलाकात में नेताओं की सहजता और तालमेल ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरीं.  14 जून 2024 – पुगलिया, इटली (G7 शिखर सम्मेलन): मेजबान के तौर पर मेलोनी ने मोदी का स्वागत किया और उन्हें तीसरे कार्यकाल के लिए बधाई दी. बैठक में व्यापक वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई. 18 नवंबर 2024 – रियो डी जनेरियो, ब्राजील (G20 शिखर सम्मेलन): दोनों नेताओं ने इस दौरान “इंडिया–इटली ज्वाइंट स्ट्रैटेजिक एक्शन प्लान 2025–2029” की घोषणा की. जून 2025 – कनानास्किस, कनाडा (G7 शिखर सम्मेलन): यहां हुई अनौपचारिक बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर #Melodi हैशटैग ट्रेंड करता रहा. 23 नवंबर 2025 – जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका (G20 शिखर सम्मेलन): मुलाकात में आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ “इंडिया–इटली ज्वाइंट इनिशिएटिव” की घोषणा की गई.

छत्तीसगढ़ में स्वरोजगार का नया क्षितिज – सशक्त होता ग्रामीण-शहरी आर्थिक तंत्र

रायपुर : विशेष लेख : सरकार का संकल्प – आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का निर्माण छत्तीसगढ़ में स्वरोजगार का नया क्षितिज – सशक्त होता ग्रामीण-शहरी आर्थिक तंत्र रायपुर सरकार का संकल्प – आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का निर्माण छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख रूप से कुटीर उद्योगों को केंद्रीकृत किया गया है। ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में युवाओं, महिलाओं तथा बेरोजगार लोगों को रोजगार एवं स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य के 28 जिलों में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है, जिनसे स्थानीय स्तर पर उद्यम स्थापित होंगे और आर्थिक गतिविधियाँ मजबूत होंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जनकल्याणकारी सोच और खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव के प्रयासों से यह क्षेत्र नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय – विकास को जन-जन तक पहुँचाने वाले नेतृत्वकर्ता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपनी सरलता, सहजता, दृढ़ता और ग्रामीण विकास के प्रति संवेदनशीलता के लिए जाने जाते हैं। उनका यह स्पष्ट मानना है कि छत्तीसगढ़ का वास्तविक सामर्थ्य गाँवों में निहित है, जहाँ परंपरा, कौशल और संसाधन प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। वे मानते हैं कि स्व-रोजगार ही आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे मजबूत माध्यम है। उनके नेतृत्व में सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि स्व-रोजगार योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक पहुंचे और कुटीर, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जाए। खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव -ग्रामोद्योग के पुनर्जागरण के निर्माता गजेंद्र यादव अपने ऊर्जा से भरे कार्यशैली, जमीनी समझ और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों के लिए पहचाने जाते हैं। वे लगातार यह प्रयास कर रहे हैं कि परंपरागत कौशलों को आधुनिक बाजार से जोड़ा जाए, जिससे स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को अधिक अवसर मिल सकें। उनकी पहल से कुटीर उद्योगों में नई संभावनाएँ विकसित हुई हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता का वातावरण मजबूत हुआ है। उनके नेतृत्व में खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने कई अभिनव कदम उठाए हैं, जिससे हजारों लोगों को आजीविका के नए साधन प्राप्त हुए हैं। कुटीर उद्योगों को नई ऊर्जा देने वाली दो प्रमुख योजनाएँ मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (CMEGP) यह राज्य शासन की अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है जो मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के अजा, अजजा एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करती है। इस योजना का उद्देश्य उन लोगों को छोटे उद्योग स्थापित करने हेतु प्रेरित करना है, जो अपने कौशल के आधार पर सेवा या विनिर्माण क्षेत्रों में कारोबार शुरू करना चाहते हैं। सेवा क्षेत्र जैसे साइकिल और मोबाइल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रॉनिक/इलेक्ट्रिक मरम्मत, ब्यूटी पार्लर, फोटोकॉपी, वीडियोग्राफी, टेंट हाउस, च्वाइस सेंटर और होटल जैसी गतिविधियों में उद्यम स्थापित करने हेतु ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा एक लाख रूपए निर्धारित है। वहीं विनिर्माण क्षेत्र जैसे दोना-पत्तल निर्माण, फेब्रिकेशन, डेयरी उत्पाद, साबुन, मसाला, दलिया, पशुचारा, फ्लाई ऐश ब्रिक्स और नूडल्स निर्माण जैसे उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु 3 लाख रूपए तक का ऋण प्रदान किया जाता है। इन दोनों ही श्रेणियों में 35 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है, ताकि प्रारंभिक आर्थिक बोझ कम हो सके। योजना के अंतर्गत हितग्राही को केवल 5 प्रतिशत स्वयं का अंशदान करना होता है। यह योजना विशेषकर ग्रामीण युवाओं को उद्यम स्थापना के लिए प्रेरित करती है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) यह केंद्र शासन की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ में प्रभावी रूप से किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य विभिन्न वर्गों-अजा, अजजा, ओबीसी तथा सामान्य वर्ग को उद्यमिता के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराना है। इस योजना में सेवा क्षेत्र के लिए 20 लाख रूपए तक और विनिर्माण क्षेत्र के लिए 50 लाख रूपए तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे मध्यम स्तर के उद्यम भी आसानी से शुरू किए जा सकें। अनुदान की दृष्टि से यह योजना अत्यंत सहायक है। ग्रामीण क्षेत्रों के हितग्राहियों को 35 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाता है। सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को ग्रामीण क्षेत्र में 25 प्रतिशत तथा शहरी क्षेत्र में 15 प्रतिशत का अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। आवेदन प्रक्रिया पूर्णतः ऑनलाइन है, जिसे च्डम्ळच् पोर्टल के माध्यम से सरलता से भरा जा सकता है। यह योजना विशेष रूप से उन युवाओं के लिए है जो बड़े पैमाने पर उद्यम शुरू करने की क्षमता रखते हैं लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी से जूझते हैं। आवेदन हेतु आवश्यक दस्तावेज आवेदन करने वाले आवेदकों को कुछ आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं जिनमें पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र, ग्राम पंचायत से प्राप्त अनापत्ति प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, बैंक पासबुक की छायाप्रति और पैन कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा आवश्यकता पड़ने पर अन्य दस्तावेज भी जमा करने पड़ते हैं। ये दस्तावेज आवेदक की पात्रता और परियोजना की विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हैं। आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की ओर मजबूत कदम छत्तीसगढ़ में CMEGP और PMEGP जैसी योजनाएँ स्वरोजगार को एक संगठित और सशक्त दिशा प्रदान कर रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव की दूरदर्शिता, समर्पण और सतत प्रयासों के कारण आज हजारों युवाओं के सपने साकार हो रहे हैं। राज्य सरकार की ये पहल न केवल रोजगार बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक संरचना को मजबूती प्रदान कर रही हैं। कोईे भी व्यक्ति अपना उद्योग शुरू करना चाहता है, उसके लिए यह अत्यंत उपयुक्त समय है। अधिक जानकारी एवं आवेदन हेतु खादी एवं ग्रामोद्योग शाखा, कार्यालय रायपुर से संपर्क किया जा सकता है।                                                                                                                                    • लक्ष्मीकांत कोसरिया, उप संचालक

महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं के प्रमुखों के साथ बैठक की गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

एमपीएसपी के शताब्दी वर्ष तक हो सौ संस्थाओं का संचालन : योगी आदित्यनाथ महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं के प्रमुखों के साथ बैठक की गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिषद के शताब्दी वर्ष 2032 को लेकर तय किए लक्ष्य, दिए दिशानिर्देश शताब्दी वर्ष में सालभर होगा विविध कार्यक्रमों का आयोजन, अभी से तैयारियों में जुटने के निर्देश गोरखपुर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद (एमपीएसपी) के लिए इसके शताब्दी वर्ष 2032 तक सौ संस्थाओं के संचालन और इनमें एक लाख विद्यार्थियों को शिक्षा और कौशल से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने शताब्दी वर्ष में पूरे एक साल विविध कार्यक्रमों का आयोजन करने के लिए अभी से रूपरेखा बनाकर तैयारियों में जुट जाने के भी निर्देश दिए हैं। बुधवार को महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद का 93वां संस्थापक सप्ताह भव्यता से मनाया गया था। दिन में हुए मुख्य महोत्सव के बाद गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री ने देर शाम परिषद की सभी संस्थाओं के प्रमुखों के साथ महत्वपूर्ण बैठक कर शताब्दी वर्ष 2032 तक संस्थापक युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत लीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के सपनों और इच्छाओं को पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में श्री योगी ने कहा कि सभी संस्थाओं को अभी से शिक्षा परिषद के शताब्दी महोत्सव की तैयारियों में जुटना होगा। शताब्दी वर्ष 10 दिसंबर 2031 से 10 दिसंबर 2032 तक, पूरे एक साल मनाया जाएगा। सालभर में क्या क्या आयोजन होंगे, इसकी रुपरेखा अभी से तैयार करनी शुरू कर दी जाए। शताब्दी महोत्सव का पूरा साल यादगार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष तक शिक्षा, चिकित्सा, योग, सेवा और अन्य प्रकल्पों को मिलाकर परिषद के अंतर्गत सौ संस्थाओं का संचालन करने का लक्ष्य तय कर उस दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। शताब्दी वर्ष तक सौ बस्तियों को ‘मॉडल बस्ती’ बनाएं संस्थाएं गोरक्षपीठाधीश्वर ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं के प्रमुखों को निर्देशित किया कि वे शताब्दी वर्ष तक सौ बस्तियों को ‘मॉडल बस्ती’ बनाने का कार्य करें। इसके लिए बस्तियों को गोद लेकर वहां शिक्षा, चिकित्सा, स्वच्छता, सेवा, जागरूकता, रोजगार एवं स्वरोजगार आदि के कार्य किए जाएं। सभी तक जनकल्याण की योजनाओं का लाभ पहुंचाने में सहयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि थारू और वनटांगिया बस्तियों में परिषद की संस्थाएं पहले से कार्य करती रही हैं। इन बस्तियों के उत्थान के मानक संतृप्ति के स्तर पर होने चाहिए। वैश्विक प्रतिस्पर्धा से जुड़ें, हर संस्था किसी विशिष्टता से जानी जाए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं को वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय इस दिशा में काफी बेहतर कर कर सकता है। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष तक परिषद की सभी संस्थाओं की पहचान उनकी किसी न किसी विशिष्टता से बने, इसके लिए उन्हें किसी विशिष्ट कार्य से जुड़कर आगे बढ़ना होगा। शताब्दी वर्ष तक हों एक लाख विद्यार्थी, सबके पास हो स्किल गोरक्षपीठाधीश्वर ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के शताब्दी वर्ष तक संस्थाओं में एक लाख विद्यार्थियों के अध्ययनरत होने का भी लक्ष्य दिया। साथ ही कहा कि उस समय तक हर विद्यार्थी को किसी न किसी एक स्किल से जोड़ा जाए। हर संस्था एक-एक विद्यार्थी को अपने स्तर से स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास करे। खुद मानक बनें संस्थाओं के प्रमुख बैठक में श्री योगी ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के सभी शिक्षक और कर्मचारी परिश्रम और ईमानदारी के मानक बनें। इसके लिए संस्थाओं के प्रमुखों को खुद मानक बनकर शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए रोल मॉडल बनना होगा। आधुनिकता, प्राचीनता, परंपरा व प्रगति की संस्कृति दिखे परिसर में गोरक्षपीठाधीश्वर ने कहा कि अनुशासित परिसर संस्कृति शिक्षा परिषद की संस्थाओं की पहचान है। संस्थाओं में आधुनिक युगानुकूल विचारों के साथ पारंपरिक राष्ट्रीय और सांस्कृतिक मूल्यों का भी संरक्षण होता रहेगा। इन संस्थाओं ने भारत की परंपरा और प्रगति को दर्शाने के साथ लोक कल्याण का भी मॉडल दिया है। उन्होंने कहा कि संस्थाओं के परिसर में आधुनिकता, प्राचीनता, परंपरा व प्रगति की संस्कृति दिखनी चाहिए। संस्थाओं की कार्यपद्धति में आध्यात्मिकता का पुट होना चाहिए। नशा मुक्त परिसर बनाना सुनिश्चित करें मुख्यमंत्री ने सभी संस्थाओं के प्रमुखों को निर्देशित किया कि वे अपनी अपनी संस्थाओं के परिसर को हर प्रकार के नशा से मुक्त परिसर बनाना सुनिश्चित करें। नशा चाहे ड्रग का हो या फिर स्मार्टफोन के अत्यधिक प्रभाव का, ये कुप्रवृत्तियां हैं और विद्यार्थियों को इनसे बचाना ही होगा। विकसित भारत के लक्ष्य से खुद को जोड़ें संस्थाएं गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा वे खुद और विद्यार्थियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य से जोड़ें। प्रदेश सरकार भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। केंद्र और राज्य सरकार के लक्ष्यों के अनुरूप संस्थाएं भी अपने स्तर पर लक्ष्य तय करें जिससे 2047 तक विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत की संकल्पना को साकार किया जा सके। उन्होंने कहा कि तकनीकी, मेडिकल, पैरामेडिकल, फार्मेसी, कृषि के विद्यार्थियों का ‘विकसित भारत 2047’ में क्या योगदान होगा, इस पर कार्ययोजना बनाकर काम किया जाए। लोक कल्याण और सामाजिक उत्तरदायित्व पर हो फोकस श्री योगी ने कहा कि शिक्षा परिषद की संस्थाओं का फोकस लोक कल्याण पर भी हो। संस्थाओं को अपना सामाजिक उत्तरदायित्व भी निभाना होगा। सांस्कृतिक पुर्नजागरण के साथ देश को विश्वगुरु बनाने में अपना योगदान देना होगा। समाज के एक-एक पैसे का हो सदुपयोग बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सभी संस्थाओं को वित्तीय अनुशासन, ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ते रहना है। शताब्दी वर्ष के लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ हमें समाज के एक-एक पैसे का सदुपयोग सुनिश्चित करना होगा। बैठक में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के सभी पदाधिकारी, सदस्य और परिषद की सभी संस्थाओं के प्रमुख उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का नया दौर

विकसित उत्तर प्रदेश 2047: उत्तर प्रदेश की स्टार्टअप क्रांति को गति देते सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का नया दौर लैब सुविधा, मेंटरशिप, टेस्टिंग और नेटवर्किंग से युवाओं को वैश्विक स्तर की तकनीक का अवसर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से उस दिशा में अग्रसर है जहां नवाचार, अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीक, विकास के आधार स्तंभ बनेंगे। प्रदेश में 07 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भारत की तकनीकी अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यह स्टार्टअप क्रांति को गति देने का काम कर रहे है। सरकार का यह कदम स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बना रहा है। साथ ही उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करने की ओर कदम बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विज़न है कि नया उत्तर प्रदेश ज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के आधार पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बने। उत्तर प्रदेश सरकार ने थीम आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को स्वीकृति दी है। ये केंद्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,  ब्लॉकचेन, मेडटेक, टेलीकॉम, ड्रोन, एडिटिव, मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। प्रदेश सरकार का मानना है कि इन अत्याधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवा विश्व स्तरीय स्टार्टअप खड़े कर सकेंगे और प्रदेश को नए रोजगार अवसरों का बड़ा केंद्र बनाएंगे। सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस  में चयनित प्रोडक्ट आधारित स्टार्टअप को जो सुविधाएं प्रदान की जा रही है उनमें उच्च स्तरीय लैब, को-वर्किंग स्पेस, रिसर्च सपोर्ट, प्रोडक्ट टेस्टिंग और विशेषज्ञ मेंटरशिप शामिल हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रतिभाशाली युवा को संसाधनों के अभाव में पीछे हटना पड़े।  सरकार की ओर से इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए वित्तीय सहायता का भी मजबूत ढांचा तैयार किया है। इसमें पूंजीगत और इनके संचालन पर व्यय के लिए  अनुदान उपलब्ध कराया है। सरकार का मॉडल यह है कि पहले पांच वर्षों तक इन्हें सहायता देकर इनकी नींव को सुदृढ़ किया जाए, बाद में यह स्वयं के नवाचार और साझेदारियों के द्वारा भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें। आईटी एवं स्टार्टअप सेक्टर के कंसलटेंट सुनील गुप्ता का कहना है कि सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस का प्रभाव केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है,  बल्कि स्वास्थ्य कृषि, शिक्षा और स्वच्छता जैसे सामाजिक क्षेत्रों में भी तकनीक आधारित समाधान इनके द्वारा विकसित किए जा रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न शहरों में स्थापित 7 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्षेत्रीय विकास को भी गति दे रहे हैं।  जिससे छोटे शहरों के युवाओं को भी विश्व स्तरीय सुविधाएं अपने ही प्रदेश में ही उपलब्ध हो रही है। क्या है सेंटर आफ एक्सीलेंस… सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आधुनिक अर्थव्यवस्था का इंजन कहा जाता है । यह ऐसे विशेषीकृत संस्थान होते हैं जो किसी एक उन्नत तकनीक या क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण, उत्पाद, विकास और उद्योग सहयोग के केंद्र के रूप में काम करते हैं। यहां पर स्टार्टअप और युवा उद्यमियों को उच्च स्तरीय लैब  सुविधाएं,  प्रोडक्ट परीक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और उद्योग जगत से नेटवर्किंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं।  उत्तर प्रदेश के सात सेंटर ऑफ़ एक्सिलेंस…    – गौतमबुद्ध नगर में सीओई ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी – लखनऊ में मेडटेक सीओई – कानपुर नगर में सीओई टेलिकॉम (5जी/6जी)   – गौतमबुद्ध नगर में सीओई-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड इनोवेशन ड्रिवेन एंटरप्रेन्योरशिप (एआईआईडीई) – सहारनपुर में सीओई टेलिकॉम (5जी/6जी)  – कानपुर नगरमें सीओई अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएवी)/ ड्रोन टेक्नोलॉजी – गाज़ियाबाद में सीओई एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग

लश्कर के पहलगाम अटैक के बाद अमेरिका का सख्त संदेश: भारत से गठबंधन ही सुरक्षित रास्ता

वाशिंगटन  अमेरिकी सांसद जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का जिम्मेदार लश्कर-ए-तैयबा को बता रहे हैं। खास बात है कि अमेरिकी पक्ष यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के बीच रिश्ते मजबूत होते नजर आ रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर वाइट हाउस गए थे। हाउस फॉरेन अफेयर्स साउथ एंड सेंट्रल एशिया सबकमेटी के अध्यक्ष बिल हुइजेंगा ने भारत के साथ रिश्तों को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका का रिश्ता अब सिर्फ जरूरी नहीं रह गया है, बल्कि यह 21वीं सदी की निर्णायक साझेदारी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ऐसी दुनिया चाहता है, जहां लोकतंत्र से नियम बनें, तो भारत के साथ हमारी साझेदारी बेहद अहम है। विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने कहा, 'पहलगाम में भयानक हमले के लिए जिम्मेदार LeT और TRF को ट्रंप प्रशासन ने जुलाई 2025 में विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया है, जो आतंकवादी के खिलाफ जंग में हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है। फिर हमला कहीं भी क्यों न हुआ हो…।' चीन का भी लिया नाम हुइजेंगा ने कहा, 'चीन और रूस जैसी ताकतें बलपूर्वक सीमाएं बदल रही हैं और पड़ोसियों पर दबाव डाल रही हैं। यह इंडो-पैसेफिक से ज्यादा साफ कहीं नहीं देखा जा रहा है, जहां लगातार आक्रामक होता चीन क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक समृद्धि और व्यापार के लिए जोखिम पैदा कर रहा है। …हम ऐसा नहीं होने दे सकते। भारत इन जोखिमों को पहले से जानता है।' उन्होंने कहा, '2020 से भारत के साथ साझा सीमा में चीनी बलों ने भारतीय सैनिकों को मारा है। भारत ने भी मजबूती से जवाब दिया है, चीन के सैन्य दबाव को कमजोर किया है और भारत और पड़ोसी भूटान में चीनी प्रभाव को कम किया है। आज भारत और अमेरिका के बीच सहयोग में में रक्षा, तकनीक, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और व्यापार शामिल हैं।' ऑपरेशन सिंदूर 22 अप्रैल को आतंकवादी ने पहलगाम में 26 सैलनियों की हत्या कर दी थी। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सिंधु जल समझौता रोकने समेत कई फैसले लिए। इसके अलावा भारतीय सेना ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर का आगाज किया था, जिसके तहत पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर आतंकी ठिकानों को तबाह किया था। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच करीब 4 दिनों तक संघर्ष हुआ। पाकिस्तानी पक्ष के अनुरोध को बाद सीजफायर किया गया था।  

तेज बुखार में भी अमित शाह का जवाब तीखा, ‘वोट चोरी’ विवाद के बीच राहुल गांधी सदन छोड़ गए

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के “वोट चोरी” आरोपों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जोरदार पलटवार किया। सूत्रों के अनुसार जब गृह मंत्री लोकसभा में बोल रहे थे उस समय वह बुखार से ग्रस्त थे। उनके शरीर का तापमान 102 डिग्री था। सदन की कार्यवाही से ठीक पहले डॉक्टरों ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया और बुखार कम करने की दवाइयां दीं। बुखार के बावजूद अमित शाह ने करीब डेढ़ घंटे का भाषण दिया और विपक्ष के हर आरोप वोट चोरी, स्पेशल रिविजन इंस्पेक्शन (SIR) और चुनाव आयोग में नियुक्तियों पर विस्तृत और आक्रामक तरीके से जवाब दिया।   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अमित शाह की सराहना करते हुए कहा कि उनका भाषण उत्कृष्ट, तथ्यपूर्ण और विपक्ष के झूठों को उजागर करने वाला था। आपको बता दें कि राहुल गांधी हाल के दिनों में कई मंचों पर “वोट चोरी” का मुद्दा उठा चुके हैं और इसे “हाइड्रोजन बम” तक कह चुके हैं। बिहार चुनाव से पहले उन्होंने इस मुद्दे पर रैली भी की थी और सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र में फिर से इसे उठाया। सदन में चर्चा के दौरान गृह मंत्री शाह ने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि कोई उन्हें यह नहीं बता सकता कि उन्हें किस क्रम में क्या बोलना चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर दोहरी नीति अपनाने का भी आरोप लगाया। अमित शाह ने कहा, “जब आप जीतते हैं, नई पोशाक पहनकर शपथ लेते हैं और सूची बिल्कुल ठीक लगती है। लेकिन जब बिहार की तरह जमीन खिसक जाती है तब अचानक मतदाता सूची में गड़बड़ी दिखने लगती है। यह दोहरा चरित्र अब नहीं चलेगा।” आपको बता दें कि अमित शाह जब जवाब देने लगे तो कुछ ही देर में राहुल गांधी संसद की अगुवाई में विपक्ष संसद छोड़कर बाहर चला गया। SIR पर भी दिया विस्तार से जवाब अमित शाह ने कहा कि SIR पर संसद में चर्चा होना आवश्यक नहीं था, लेकिन उन्होंने विपक्ष की मांग मानकर बहस में हिस्सा लिया ताकि यह दिखाया जा सके कि सरकार किसी भी मुद्दे से भाग नहीं रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोप चुनाव आयोग को आधिकारिक रूप से सौंपे ही नहीं गए थे।