samacharsecretary.com

बांग्लादेश चुनाव का बिगुल बजा, 12 फरवरी को मतदाता चुनेंगे नई सरकार

ढाका बांग्लादेश में आम चुनाव को लेकर तारीख फाइनल हो चुकी है। मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिरुद्दीन ने बताया कि अगले साल 12 फरवरी (2026) को आम चुनाव के लिए मतदान होगा। साथ ही, इसी दिन जुलाई चार्टर पर जनमत-संग्रह आयोजित किए जाएंगे। बांग्लादेश की प्रमुख मीडिया आउटलेट द डेली स्टार ने चुनाव आयोग के हवाले से बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) एएमएम नासिरुद्दीन ने यह कार्यक्रम एक रिकॉर्डेड संदेश में घोषित किया। चुनाव कार्यक्रम के बारे में बताया गया कि संसदीय चुनाव के लिए नामांकन 29 दिसंबर 2025 तक दाखिल किए जाएंगे। 30 दिसंबर से 4 जनवरी 2026 तक नामांकन की स्क्रूटनी होगी। 20 जनवरी नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख है। वहीं, 21 जनवरी को प्रतीक आवंटन और अंतिम उम्मीदवार सूची जारी होगी। इसके साथ ही, 22 जनवरी से 10 फरवरी सुबह 7:30 बजे तक चुनाव प्रचार की अनुमति होगी। बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने इसे "नए बांग्लादेश के निर्माण का ऐतिहासिक अवसर" बताते हुए कहा कि चुनाव पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष होने चाहिए। निर्वाचन आयोग ने राष्ट्रपति मो. शाहाबुद्दीन से मुलाकात कर कार्यक्रम की जानकारी दी। इससे पहले आयोग ने मुख्य न्यायाधीश सैयद रफात अहमद और मुख्य सलाहकार यूनुस से भी संवाद किया। चुनावी कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई है। उम्मीदवारों को 48 घंटे के भीतर पोस्टर-बैनर हटाने के निर्देश दिए गए हैं। सलाहकारों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल प्रचार में करने पर रोक लगा दी गई है। फिलहाल, सरकार किसी भी नई विकास परियोजना को मंजूरी या उद्घाटन नहीं करेगी। चुनाव प्रचार केवल तीन सप्ताह पहले शुरू हो सकेगा। बता दें कि इस बार मतदान समय एक घंटे बढ़ाया गया है। इसके तहत सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक मतदान होगा। यह फैसला इसलिए लिया गया है, क्योंकि मतदाताओं को दो बैलेट डालने होंगे, एक चुनाव के लिए और दूसरा जनमत-संग्रह के लिए। बताया गया कि प्रवासी बांग्लादेशियों के लिए ऑनलाइन डाक मतपत्र पंजीकरण की व्यवस्था है। बुधवार शाम तक 2,97,000 प्रवासी मतदाता पंजीकृत हो चुके थे। इन बैलेटों पर केवल दलों और निर्दलीय प्रतीकों का उल्लेख होगा, नाम नहीं। निर्वाचन आयोग ने बताया कि पूरे देश में 42,761 मतदान केंद्र और 2,44,739 मतदान बूथ हैं। इन बूथों पर लगभग 12.76 करोड़ मतदाता हैं। इसके लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं। वहीं, मतपत्र और अन्य सामग्री मतदान से एक दिन पहले केंद्रों पर भेज दी जाएंगी। 

कैश संकट पर RBI का दांव मजबूत, 50,000 करोड़ के बॉन्ड खरीदकर बढ़ाई लिक्विडिटी

मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को देश के बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए 50,000 करोड़ रुपए के बॉन्ड खरीदे। इसके जरिए केंद्रीय बैंक का उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बढ़ाना है। यह खरीदारी आरबीआई द्वारा पिछले सप्ताह की गई मौद्रिक नीति की घोषणा का हिस्सा है, जिसके तहत सरकारी बॉन्ड की खरीद के माध्यम से बाजार में 1 लाख करोड़ रुपए और विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा के माध्यम से करीब 5 अरब डॉलर के बराबर की राशि बैंकिंग सिस्टम में डाली जाएगी। केंद्रीय बैंक रुपए को अधिक गिरने से रोकने के लिए बाजार में अमेरिकी डॉलर बेच रहा है, जिसके कारण बैंकिंग प्रणाली से काफी नकदी बाहर निकल गई है और इससे बाजार में ब्याज दरों में वृद्धि होने की संभावना भी बढ़ जाती है। मौद्रिक नीति के ऐलान के समय भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा था कि आरबीआई शुद्ध मांग और समय देनदारियों (एनडीटीएल) के लगभग 1 प्रतिशत के अधिशेष स्तर को स्पष्ट रूप से लक्षित किए बिना बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा, "मौद्रिक संचरण हो रहा है और हम इसे समर्थन देने के लिए पर्याप्त तरलता प्रदान करेंगे।" मल्होत्रा ​​ने कहा कि बैंकिंग सिस्टम में वर्तमान लिक्विडिटी कभी-कभी एनडीटीएल के 1 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, जो 0.6 प्रतिशत और 1 प्रतिशत के बीच रहती है, और कभी-कभी इससे भी अधिक हो जाती है। उन्होंने आगे कहा, "सटीक संख्या, चाहे 0.5, 0.6 या 1 प्रतिशत हो, मायने नहीं रखती। महत्वपूर्ण यह है कि बैंकों के पास सुचारू रूप से कार्य करने के लिए पर्याप्त भंडार हो।" केंद्रीय बैंक ने ओपन मार्केट ऑपरेशंस (ओएमओ) और फॉरेक्स बाय-सेल स्वैप के माध्यम से लिक्विडिटी उपायों की घोषणा की है। ओएमओ के तहत 1 लाख करोड़ रुपए मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद दो किस्तों में की जाएगी, प्रत्येक किस्त 50,000 करोड़ रुपए की होगी, जो 11 दिसंबर और 18 दिसंबर के बीच होगी। इसके अतिरिक्त, 16 दिसंबर को तीन साल के लिए 5 अरब डॉलर का यूएसडी/आईएनआर बाय-सेल स्वैप किया जाएगा। 

हरियाणा में राशन वितरण में बड़ा बदलाव, HPC बैठक में नई व्यवस्था को हरी झंडी

चंडीगढ़  हरियाणा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की राशन वितरण प्रणाली नए साल से हाईटैक हो जाएगी। हाई पावर परचेज कमेटी (एच.पी.सी.सी.) ने नई प्वाइंट ऑफ सेल (पी.ओ.एस.) मशीनों की मंजूरी दे दी है। नई मशीनों में फेस रीडिंग और ई-तौल की सुविधा के नए सेगमेंट जोड़े गए हैं। हालांकि इस पूरे हाईटैक सिस्टम पर हर साल सरकार का 10 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा। पहले राशन डिपो पर चलने वाली 2जी मशीनों का किराया महीने का 1250 रुपए था, जो अब प्रति मशीन के हिसाब से सरकार ने तय किया है। अब प्रति कार्ड धारक पर 3.25 रुपए किराया सरकार देगी। नई 5जी पी.ओ.एस. मशीनें फिंगरप्रिंट स्कैनर और आइरिस स्कैनर से लैस होंगी। इन मशीनों से राशन कार्ड धारकों का फिंगरप्रिंट, आंखों की पुतलियों और चेहरे की पहचान कर ई-के. वाई.सी. व राशन वितरण प्रक्रिया होगी। इस फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और लाभार्थियों को आसानी से उनका हक का राशन मिल सकेगा। इन मशीनों को सीधे इलैक्ट्रॉनिक वजन मापने से भी जोड़ा गया है। इससे जितना राशन कार्ड धारक को मिलेगा, उसका वजन खुद मशीन में दर्ज होगा, साथ ही उसकी रसीद तुरंत निकल आएगी। रसीद में दिए गए राशन का पूरा ब्यौरा छपा होगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी। राशन डिपो पर लगेंगे कैमरे, पंचकूला से शुरू हुआ पायलट प्रोजैक्ट खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने राशन डिपो को हाईटैक करने के लिए हर राशन डिपो पर सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाने का फैसला किया है। इसकी शुरूआत पंचकूला से की गई है, यहां 2 राशन डिपो पर अभी तक सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाए जा चुके हैं। यदि यहां ये प्रोजैक्ट सफल रहता है तो पूरे प्रदेश में विभाग इसे शुरू करेगा। हरियाणा में अभी 41 लाख कार्ड धारक हैं। हालांकि इनमें 26 से 27 लाख लोग ही राशन लेते हैं। 9500 राशन डिपो हैं। नई पी.ओ.एस. मशीनों से डिपो धारक और उपभोक्ताओं को होगा फायदा : नागर हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति राज्यमंत्री राजेश नागर ने कहा कि नई पी.ओ.एस. मशीनों से डिपो धारकों के साथ ही उपभोक्ताओं को भी फायदा होगा। सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है और अगले महीने से सभी डिपो धारकों के पास मशीनें पहुंच जाएगी। विभाग में पारदर्शी सिस्टम लागू करना उनकी प्राथमिकता है, इसके लिए सभी राशन डिपो पर कैमरे भी लगाए जाएंगे।

जल संरक्षण पर बड़ा कार्यक्रम: आज मंत्री जोगाराम पटेल के मुख्य आतिथ्य में होगा ‘वाटरशेड महोत्सव’

जयपुर संभाग स्तरीय वाटरशेड महोत्सव का आयोजन आज महाराणा प्रताप सभागार दुर्गापुरा, जयुपर में आयोजित होगा। अतिरिक्त मुख्य अभियंता (पदेन परियोजना प्रबंधक), वाटरशेड सेल कम डेटा सेंटर, श्री दिनेश कुमार ने बताया कि संसदीय कार्य एवं विधि न्याय मंत्री श्री जोगाराम पटेल कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत जयपुर संभाग में संचालित 29 परियोजनाओं के लाभार्थियों को योजना की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने तथा अधिक से अधिक किसानों को योजना का लाभ दिलाने के उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ परियोजना क्षेत्रों के कृषक भी सहभागिता करेंगे।

DRDO का बड़ा बयान: F-35 और Su-57 की 5th जेनरेशन जेट्स कबाड़ बनेंगे, राफेल और S-400 की भी होगी मात

बेंगलुरु  21वीं सदी में युद्ध के तौर-तरीके भी बदल चुके हैं. पैदल सेना का महत्‍व काफी सीमित हो चुका है. एयरफोर्स और नेवी की भूमिका बेहद अहम हो चुका है. सन् 1971 में इंडियन नेवी का ‘ऑपरेशन टा्रइडेंट’ हो या फिर मई 2025 का इंडियन एयरफोर्स का ऑपरेशन सिंदूर, वायुसेना और नौसेना ने दुश्‍मनों को ऐसा सबक सिखाया कि वे ताउम्र याद रखेंगे. बालाकोट एयर स्‍ट्राइक के बाद ऑपरेशन सिंदूर में एयरफोर्स ने अपने जौहर से पूरी दुनिया को चकित कर दिया. सफल ऑपरेशन के बाद तीन बड़े डेवलपमेंट हुए हैं. पहला, हाइपरसोनिक मिसाइल पर फोकस बढ़ गया है. दूसरा, ताकतवर और अत्‍याधुनिक एयर डिफेंस सिस्‍टम को विकसित करने पर ज्‍यादा ध्‍यान दिया जाने लगा है. तीसरा, अल्‍ट्रा मॉडर्न फाइटर जेट (5th और 6th जेनरेशन फाइटर जेट) के डेवलपमेंट से जुड़े प्रोजेक्‍ट में काफी तेजी लाई गई है. भारत एक तरफ पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट इंपोर्ट करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है तो दूसरी तरफ AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च कर फिफ्थ जेन कॉम्‍बैट एयरक्राफ्ट देसी तकनीक से डेवलप करने में भी जुटा है. इन सब डेवलपमेंट के बीच रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 6th जेनरेशन फाइटर जेट डेवलप करने वाली तकनीक डेवलप करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. यदि यह प्रोजेक्‍ट सफल रहता है तो वो दिन दूर नहीं जब भारत के पास देसी टेक्‍नोलॉजी से डेवलप 6th जेनरेशन फाइटर जेट होगा, जिसके सामने F-35 और Su-57 जैसे पांचवीं पीढ़ी के विमान भी पानी भरेंगे. दरअसल, DRDO के अंतर्गत आने वाले रिसर्च सेंटर इमरात (RCI) ने 6th जेनरेशन वॉरफेयर के लिए जरूरी क्‍वांटम एव‍ियोनिक्‍स सेंसर डेवलप करने के लिए प्राइवेट सेक्‍टर को औपचारिक रूप से इन्‍वाइट किया है. इस टेक्‍नोलॉजी के डेवलप होने पर भारत के लिए 6th जेनरेशन फाइटर जेट बनाना बेहद आसान हो जाएगा. बता दें कि 6th जेनरेशन फाइटर जेट किसी भी अल्‍ट्रा मॉडर्न रडार सिस्‍टम को चकमा देने में सक्षम है. साथ ही एयर डिफेंस सिस्‍टम के चक्रव्‍यू को तोड़ना भी इसके लिए कोई बड़ी बात नहीं होगी. रडार क्रॉस सेक्‍शन यानी RCS काफी कम होने की वजह से 6th जेनरेशन फाइटर जेट का रडार की पकड़ में आना फिलहाल असंभव जैसा है. ‘इंडिया डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, RCI ने भारतीय निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को क्वांटम आधारित एवियोनिक सेंसर विकसित करने के लिए औपचारिक तौर पर आमंत्रित किया है. यह तकनीक भविष्य के छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की “कोर टेक्नोलॉजी” मानी जाती है. अब सवाल उठता है कि क्वांटम एवियोनिक्स क्या है? दरअसल, क्वांटम तकनीक वह क्षमता देती है, जिससे विमान GPS बंद होने, कम्युनिकेशन जाम होने या दुश्मन के उन्नत रडार सक्रिय होने जैसी स्थिति में भी सटीक दिशा, दूरी और दुश्मन की लोकेशन के बारे में जानकारी हासिल की जा सके. फिलहाल अभी तक किसी भी जेट में यह तकनीक नहीं है. RCI किन तकनीकों पर काम कर रहा है? RCI तीन प्रमुख क्वांटम क्षेत्रों पर तेजी से काम कर रहा है -:     क्वांटम इनर्शियल नेविगेशन: बिना GPS के भी सेंटीमीटर स्तर की सटीक दिशा व लोकेशन.     क्वांटम मैग्नेटोमीटर: बेहद हल्के चुंबकीय बदलाव पकड़कर स्टील्थ विमान, पनडुब्बियां या जमीन में छिपे विस्फोटक खोजने की क्षमता.     क्वांटम रडार/लिडार: एंटैंगल्ड फोटॉन तकनीक से ऐसे स्टील्थ विमान भी दिखा सकता है जिन्हें सामान्य रडार नहीं पकड़ पाते. DRDO के कदम से भारत ग्‍लोबल एविएशन सेक्‍टर में एक बड़ा प्‍लेयर बन सकता है. एफ-35 जैसे फिफ्थ जेनरेशन के फाइटर जेट से ज्‍यादा ताकतवर विमान डेवलप करने की प्रक्रिया का यह पहला कदम है. क्या होगा फायदा?     जैम या स्पूफ न होने वाला नेविगेशन     स्टील्थ विमानों की दूर से पहचान     विमान से ही पनडुब्बियों और भूमिगत खतरों का पता     कम्युनिकेशन बंद होने पर भी फॉर्मेशन में उड़ान प्राइवेट सेक्‍टर को क्‍यों किया इन्‍वाइट? इन क्वांटम सेंसरों को लड़ाकू विमान में लगाने के लिए उन्हें बेहद मजबूत, तापमान सहने योग्य और छोटे आकार में बनाना होगा. यह बड़ा तकनीकी चुनौती है, इसलिए RCI ने पहली बार निजी कंपनियों को TDF और iDEX जैसे प्रोग्रामों के तहत साथ जुड़ने के लिए बुलाया है. क्वांटम तकनीक के लिए जरूरी क्षेत्रों जैसे अल्ट्रा हाई वैक्यूम सिस्टम, फोटॉनिक चिप्स, सिंगल-फोटॉन डिटेक्टर और क्रायोजेनिक कूलिंग के क्षेत्र में भारतीय स्टार्टअप पहले से ही अच्छा काम कर रहे हैं. RCI इन्हीं कंपनियों के साथ साझेदारी कर तकनीक को आगे बढ़ाना चाहता है. RCI का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में ऐसे क्वांटम सेंसर तैयार करना है, जिन्हें भारत के भावी लड़ाकू विमानों और शुरुआती चरण में बन रहे छठी पीढ़ी के प्लेटफॉर्म में इस्‍तेमाल किया जा सके.

यूजिनी बुशार्ड का बिकिनी लुक, बीच पर मस्ती करते हुए दिखाई दीं, पहले रैकेट से मचाती थी धमाल

न्यूयॉर्क टेनिस कोर्ट को अलविदा कह चुकीं कनाडा की यूजिनी बुशार्ड एक बार फिर सुर्खियों में हैं. रैकेट भले ही हाथ से छूट गया हो, पर उनका ग्लैम गेम अभी भी फुल स्विंग में है. उनकी ताजा इंस्टाग्राम तस्वीरों ने इंटरनेट को चकाचौंध कर दिया.. 31 साल की पूर्व विम्बलडन फाइनलिस्ट टाइनी लेपर्ड प्रिंट बिकिनी में मियामी की धूप में नहाती, लक्जरी बोट पर बेहद आत्मविश्वास और स्टाइल के साथ पोज देती नजर आईं जैसे ही बुशार्ड ने ये तस्वीरें शेयर कीं, कमेंट सेक्शन में धमाका हो गया. फैन्स लाइक्स और रिएक्शंस की झड़ी लगा बैठे- किसी ने उत्साह में लिखा, 'Christmas came early!' तो कोई बस सन्न रह गया और बोल पड़ा, 'Good lord…' वहीं कई प्रशंसकों ने उन्हें प्यार से नवाजते हुए कहा, 'Beautiful champion Genie.' कुछ ही मिनटों में पोस्ट ने सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा कर दिया. टेनिस से संन्यास लिए अभी कुछ ही महीने हुए हैं, लेकिन बुशार्ड की लाइफ पूरी तरह नए रंगों में खिल रही है. ताजा तस्वीरों में वे मियामी की सुनहरी धूप में लक्जरी बोट पर दोस्तों संग आराम फरमाती दिखती हैं- चेहरे पर वही दमकती, कॉन्फिडेंट मुस्कान, जिसे दुनिया ने पहली बार विम्बलडन 2014 में देखा था. कोर्ट भले छूट गया हो, लेकिन उनका ग्लैम और चार्म आज भी उतना ही चमकदार है.         उनका लेपर्ड प्रिंट बिकिनी लुक कैज़ुअल ग्लैमर का ऐसा तड़का पेश करता है, जो उनके पोस्ट-टेनिस फेज की नई, बेफिक्र और आत्मविश्वासी ऊर्जा को पूरी तरह उभार देता है. यूजर्स के लिए बोनस यह था कि बुशार्ड ने पूरा फोटो डंप शेयर किया- क्लोज-अप, कैंडिड और सन-किस्ड पलों से भरा हुआ.                  2014 में 20 साल की उम्र में विम्बलडन फाइनल खेलने वाली बुशार्ड को उस वक्त टेनिस का अगला ग्लोबल सुपरस्टार माना जा रहा था. वही साल- ऑस्ट्रेलियन ओपन और फ्रेंच ओपन की सेमीफाइनल रन. दुनिया की नंबर 5 रैंक… लेकिन इसके बाद चोटें और लगातार संघर्ष. करियर फिसलता गया और फिर मॉडलिंग व ब्रांडिंग की दुनिया ने उन्हें नई पहचान दी.                        आज भी बुशार्ड की लोकप्रियता कम नहीं हुई है. 2.3 मिलियन फॉलोअर्स उनकी हर पोस्ट पर टूट पड़ते हैं. पिकलबॉल, मॉडलिंग और सोशल मीडिया- Genie का नया अवतार पुराने ग्लैमर से कहीं ज्यादा चमकदार लगता है. उनकी मियामी वाली ये बिकिनी तस्वीरें इसका एक और सबूत हैं कि कोर्ट से भले ही वो दूर हों, लेकिन फैन्स के दिलों में उनका खेल और उनका करिश्मा दोनों आज भी टॉप पर हैं. (

महाकाल मंदिर में 1 जनवरी से फूलों की भारी माला पर प्रतिबंध, नया आदेश जारी

उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भगवान महाकाल को फूलों की बड़ी व भारी माला पहनाने पर रोक लगाने की तैयारी कर ली गई है। मंदिर के उद्घोषणा कक्ष से भक्तों को नए नियम की जानकारी देने के लिए लगातार उद्घोषण की जा रही है। मंदिर समिति का भक्तों से अनुरोध है कि वे भगवान के लिए अजगर माला नहीं खरीदें। एक जनवरी से इस पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का क्षरण रोकने के लिए वर्ष 2017 में लगी एक जनहित याचिका पर सुनाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ज्योतिर्लिंग के क्षरण की जांच तथा उसे रोकने के उपाय करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) तथा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआइ) के विशेषज्ञों की टीम गठित की थी। विशेषज्ञों ने वर्ष 2019 से जांच शुरू की तथा ज्योतिर्लिंग की सुरक्षित रखने के लिए अनेक सुझाव दिए। इसमें एक सुझाव भगवान महाकाल को फूलों की छोटी माला तथा समिति मात्रा में फूल अर्पण का था। लेकिन पिछले कुछ समय से विशेषज्ञों के सुझाव को दरकिनार करते हुए भगवान को फूलों की मोटी व बड़ी माला पहनाई जा रही थी। मंदिर के आसपास हारफूल की दुकानों पर भी 10 से 15 किलो वजनी मालाओं का विक्रय किया जा रहा था। 500 से 2100 रुपये तक बिकने वाली इन अजगर मालाओं को भक्त खरीद रहे थे। मंदिर के भीतर इन्हें भगवान को पहनाया भी जा रहा था। मामले में नईदुनिया ने 28 नवंबर को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था, इसके बाद मंदिर प्रशासन ने इस पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। प्रवेश द्वार पर पड़ताल के बाद मिलेगा प्रवेश नया नियम लागू होने के बाद मंदिर के विभिन्न द्वारों पर तैनात गार्ड भक्तों द्वारा भगवान को अर्पण करने के लिए लाई जा रही पूजन सामग्री की जांच करेंगे। बड़ी व भारी फूल माला को गेट पर ही अलग रखवा दिया जाएगा। किसी भी सूरत में बड़ी फूल माला मंदिर के भीतर जाने नहीं दी जाएगी। यह व्यवस्था एक जनवरी से सख्ती से लागू होगी। बड़ी व भारी फूल माला पर लगेगी रोक     सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी के सुझाव पर भगवान महाकाल को फूलों की बड़ी व भारी माला अर्पित करने पर रोक लगाई जा रही है। एक जनवरी से इस पर सख्ती से रोक रहेगी। – प्रथम कौशिक, प्रशासक, श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति  

इंदौर में पहली बार दिखा ऐसा एक्शन, नगर निगम ने ढोल बजाकर और पीले चावल देकर शुरू की बकाया वसूली मुहिम

इंदौर  इंदौर में इस बार राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर नगर निगम ने ऐसा तरीका अपनाया है, जिसे देखकर लोग हैरान भी हो रहे हैं और खुश भी। आमतौर पर कर बकायादारों को नोटिस भेजे जाते हैं, लेकिन इस बार निगम की टीमें ढोल-ताशे बजाते हुए मोहल्लों और बाजारों में घूम रही हैं। कर्मचारियों ने दुकानदारों और करदाताओं को पीले चावल देकर 13 दिसंबर की लोक अदालत में आने का निमंत्रण दिया। राजवाड़ा और किशनपुरा जैसे व्यस्त बाजारों में बुधवार सुबह यह नजारा लोगों के लिए बिल्कुल अलग था। व्यापारियों ने भी नगर निगम की इस अनोखी पहल का स्वागत किया। 13 दिसंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव ने बताया कि 13 दिसंबर को वर्ष की अंतिम राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित होगी। शहर के सभी 22 जोनल कार्यालय, रजिस्टार कार्यालय और निगम मुख्यालय में विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में लोग अपना संपत्तिकर (Property Tax), जलकर (Water Tax) और बकाया अधिभार (Surcharge) कम राशि में निपटा सकेंगे। मकसद यह है कि ज्यादा से ज्यादा लोग एक ही दिन में अपने बकाए चुका सकें। राजवाड़ा में दुकान-दुकान पहुंचा निगम का न्यौता जोन 3 की टीम, सहायक राजस्व अधिकारी अनिल निगम के निर्देशन में, बुधवार को राजवाड़ा और किशनपुरा के बाजारों में निकली। कर्मचारियों ने ढोल-ताशे बजाकर दुकान-दुकान व्यापारियों को बताया कि लोक अदालत में बकाया अधिभार पर बड़ी छूट मिल रही है। व्यापारी भी इस तरीके से काफी प्रभावित दिखे। उनका कहना था कि यह तरीका नोटिस या मैसेज की तुलना में ज्यादा असरदार है, क्योंकि लोग तुरंत ध्यान देते हैं और बात समझ भी जाते हैं। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अलग काउंटर लोक अदालत वाले दिन नगर निगम करदाताओं की सुविधा के लिए खास इंतजाम करेगा। सभी जोनल कार्यालयों में भुगतान के लिए विशेष काउंटर, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अलग डेस्क, पीने के पानी की सुविधा, बैठने की व्यवस्था रखी जाएगी। इसके अलावा बकाया राशि के बिल और अधिभार में दी जा रही छूट की जानकारी भी वहीं तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी। जानिए कितनी मिलेगी छूट 1. संपत्ति कर पर छूट 50,000 तक पुरानी बकाया राशि होने पर, आपको ब्याज में पूरी 100% छूट मिलेगी। अगर बकाया राशि 50,000 से 1 लाख के बीच है, तो आपको ब्याज में आधी छूट मिलेगी और अगर बकाया राशि 1 लाख से ज़्यादा है, तो भी आपको ब्याज में 25% की छूट मिलेगी। 2. जलकर पर छूट पानी के बिल की 10,000 तक की बकाया राशि पर, आपको ब्याज में पूरी 100% छूट मिलेगी। अगर बकाया राशि 10,000 से 50,000 के बीच है, तो आपको ब्याज में 75% की बड़ी छूट मिलेगी और अगर बकाया राशि 50,000 से ज़्यादा है, तो भी आपको ब्याज में 50% की छूट मिलेगी। इस बात का ध्यान रखें यह छूट केवल 13 दिसंबर, लोक अदालत वाले दिन ही लागू होगी।

योगी सरकार ने 138 बेटियों का किया कन्यादान, मुस्लिम जोड़ों का हुआ निकाह, मौलवियों ने पढ़ा निकाह

लखनऊ  योगी आदित्यनाथ सरकार ने गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह का आर्थिक बोझ कम करने की दिशा में एक सराहनीय पहल की है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत  आगरा जिले के चार विकास खंडों-सैंया, खेरागढ़, जगनेर और शमशाबाद में कुल 138 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस योजना के अंतर्गत सरकार प्रति जोड़े एक लाख रुपये की सहायता राशि एवं सामग्री उपलब्ध करा रही है। मुस्लिम जोड़ों का निकाह मौलवियों द्वारा संपन्न कराया गया सामूहिक विवाह समारोह में सभी जोड़ों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ एक-दूसरे का हाथ थामा। सैंया में 43, खेरागढ़ में 27, जगनेर में 27 और शमशाबाद में 41 शादियां कराई गईं। सभी विकास खंडों में भव्य पंडाल सजाए गए थे। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हिंदू जोड़ों ने सात फेरे लिए। वहीं अल्पसंख्यक समुदाय (मुस्लिम) के जोड़ों का निकाह मौलवियों द्वारा संपन्न कराया गया। समारोह में हजारों लोग हुए शामिल समारोह में हजारों लोगों ने शामिल होकर माहौल को उत्सव जैसा बना दिया। जिला समाज कल्याण अधिकारी जी.आर. प्रजापति ने बताया कि प्रति जोड़ा 60 हजार रुपये कन्या के खाते में डीबीटी के रूप में 25 हजार रुपये की गृहस्थी सामग्री और 15 हजार रुपये आयोजन पर खर्च किए जा रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने भी शिरकत की कार्यक्रम में विधायक भगवान सिंह कुशवाह, विधायक छोटेलाल वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी शिरकत की और नवविवाहितों को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि यह योजना गरीब और मजदूर परिवारों को अपनी बेटियों की शादी में आर्थिक तनाव से मुक्त करती है। जिले में इस वर्ष कुल 951 जोड़ों की शादी कराने का लक्ष्य निर्धारित है। 10 से 13 दिसंबर के बीच विभिन्न विकास खंडों में 800 से अधिक जोड़ों के विवाह संपन्न कराने की तैयारी की गई है।

भारत ने 17-20 दिसंबर के लिए जारी किया NOTAM, बंगाल की खाड़ी में 2520 किमी तक नो-फ्लाई जोन

विशाखापत्तनम भारत सरकार ने बंगाल की खाड़ी में एक संभावित मिसाइल परीक्षण के लिए खतरे का क्षेत्र (डेंजर जोन) बढ़ाने की अधिसूचना जारी की है. यानी  नोटिस टू एयरमेन (NOTAM) जारी किया है. यह नो-फ्लाई जोन लगभग 2520 किलोमीटर तक फैला हुआ है, जो हवाई जहाजों और समुद्री यातायात के लिए अस्थाई प्रतिबंध लगाता है. परीक्षण की तारीखें 17 से 20 दिसंबर 2025 तय हैं. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा आयोजित यह परीक्षण भारत की रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत करने का हिस्सा है. संभावित रूप से K-4 सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) का परीक्षण हो सकता है, जो परमाणु-सक्षम है और 3500 KM तक मार कर सकती है. यह क्षेत्र विशाखापत्तनम तट के पास बंगाल की खाड़ी में है, जहां भारत के परमाणु-सबमरीन INS अरिहंत और उसके बाद की सबमरीन तैनात हैं. पिछले परीक्षणों की तरह, यह जोन पहले से ज्यादा बड़ा है, जो मिसाइल की उन्नत रेंज और सटीकता का संकेत देता है. परीक्षण का समय और दायरा: क्यों इतना बड़ा क्षेत्र?     तारीखें: 17 से 20 दिसंबर 2025 तक, सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक सक्रिय रहेगा.     क्षेत्र: बंगाल की खाड़ी में 2520 किमी का दायरा, जिसमें हिंद महासागर की ओर फैलाव है. यह अक्टूबर के परीक्षण (1480 किमी) से दोगुना है.     प्रभाव: इस दौरान नागरिक उड़ानें और जहाज इस क्षेत्र से बचेंगे. भारतीय नौसेना और वायुसेना निगरानी करेंगे. वैज्ञानिक रूप से, इतना बड़ा जोन इसलिए जरूरी है क्योंकि मिसाइल परीक्षण में डेब्री (मलबा) और प्रभाव क्षेत्र बहुत दूर तक फैल सकता है. K-4 मिसाइल की रेंज 3000-3500 किमी है, जो इसे चीनी नौसेना के खिलाफ एक मजबूत हथियार बनाती है. यह मिसाइल ठोस ईंधन से चलती है. सबमरीन से लॉन्च होने पर 20-30 मीटर गहराई से फायर की जा सकती है. K-4 SLBM – भारत की 'सीकिंग थ्रेट रिड्यूसर' DRDO के अधिकारियों ने नाम का खुलासा नहीं किया, लेकिन सैटेलाइट विशेषज्ञ डेमियन साइमन और रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, यह K-4 SLBM का परीक्षण लगता है.      क्या है K-4? यह भारत की दूसरी पीढ़ी की सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल है, जो अग्नि मिसाइल सीरीज पर आधारित है. इसका वजन 17 टन, लंबाई 12 मीटर और यह MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल)  तकनीक से लैस हो सकती है, यानी एक मिसाइल से कई लक्ष्य हिट कर सकती है.     क्षमता: 3500 किमी रेंज, परमाणु हथियार ले जाने की ताकत. यह INS अरिहंत जैसी सबमरीन से लॉन्च होती है.     महत्व: यह परीक्षण भारत को 'नो फर्स्ट यूज' नीति के तहत  सेकंड स्ट्राइक करने की क्षमता देगा. हाल के चीनी अनुसंधान जहाजों की गतिविधियों के बीच यह समय पर है.     पिछले परीक्षण: अक्टूबर 2025 में 2520 किमी जोन अग्नि-प्राइम का था, लेकिन नवंबर में 3485 किमी जोन K-4 का था (जो रद्द हो गया). दिसंबर 11 को 1190 किमी का छोटा परीक्षण हुआ, लेकिन अब यह बड़ा जोन SLBM पर फोकस दिखाता है. चीन की गतिविधियों के बीच मजबूत संदेश हिंद महासागर में चीनी 'रिसर्च वेसल्स' (जैसे शेन हाई यी हाओ) की मौजूदगी बढ़ी है. ये जहाज जासूसी का काम कर सकते हैं.भारत का यह परीक्षण क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने का संकेत है. अमेरिका और फ्रांस जैसे सहयोगी देशों को सूचित किया गया है. कोई खतरा नहीं, लेकिन सावधानी जरूरी     सुरक्षा: NOTAM से सभी को पहले से पता चल जाता है, इसलिए दुर्घटना का जोखिम कम है.      पर्यावरण: मिसाइल परीक्षण में रासायनिक ईंधन से थोड़ा प्रदूषण होता है, लेकिन DRDO के नियम सख्त हैं.     लाभ: सफल परीक्षण से भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, निर्यात के अवसर भी. यह परीक्षण भारत को वैश्विक मिसाइल क्लब में मजबूत बनाएगा. अगले साल K-5 (5,000 किमी रेंज) का इंतजार है.