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सोने से पहले यह देसी ड्रिंक पीने से गैस की समस्या होगी गायब, जानें फायदे

सर्दियों में गैस-ब्लोटिंग की बढ़ रही है समस्या? सोने से पहले पिएं ये देसी ड्रिंक, ठंड का मौसम आते ही शरीर सुस्त पड़ने लगता है। एक्सरसाइज कम हो जाती है और खानपान थोड़ा ज्यादा हैवी हो जाता है। इसका नतीजा होता है – ब्लोटिंग, गैस, अपच और धीरे-धीरे बढ़ता वजन। अगर आप भी सर्दियों में इन परेशानियों से जूझ रहे हैं, तो सोने से पहले ली जाने वाली कुछ हेल्दी ड्रिंक्स आपकी मदद कर सकती हैं। ये ड्रिंक्स न सिर्फ पाचन सुधारती हैं, बल्कि पेट फूलने की समस्या कम करती हैं और वजन कंट्रोल करने में भी सहायक होती हैं। आइए जानते हैं ऐसी असरदार ड्रिंक्स के बारे में- गर्म अजवाइन का पानी अजवाइन को आयुर्वेद में पाचन के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है। यह डाइजेस्टिव एंजाइम्स को एक्टिव करती है, जिससे गैस और ब्लोटिंग में राहत मिलती है। कैसे बनाएं? एक गिलास पानी गर्म करें। इसमें 1 चम्मच अजवाइन डालकर 10–15 मिनट ढककर रखें। छानकर हल्का गर्म पी लें। स्वाद और पाचन के लिए चाहें तो कुछ बूंदें नींबू की मिला सकते हैं। अदरक-नींबू की चाय अदरक में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो पेट की सूजन कम करते हैं। नींबू मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है और टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है। कैसे बनाएं? पानी में अदरक के कुछ टुकड़े उबालें, गैस बंद कर नींबू निचोड़ें। चाहें तो थोड़ी दालचीनी भी मिला सकते हैं। इसे गर्म-गर्म पिएं। दालचीनी वाला गर्म दूध दालचीनी ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद करती है और अनहेल्दी क्रेविंग्स को कम करती है। इससे फैट मेटाबॉलिज्म भी बेहतर होता है। कैसे बनाएं? एक गिलास दूध गर्म करें, उसमें आधा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाएं। मीठे के लिए शहद या थोड़ा सा गुड़ डाल सकते हैं। सौंफ का गर्म पानी सौंफ पेट को ठंडक देती है और पाचन तंत्र को रिलैक्स करती है। गैस और भारीपन की समस्या में यह काफी असरदार है। कैसे बनाएं? 1 चम्मच सौंफ हल्की कूट लें और गर्म पानी में 5-10 मिनट भिगो दें। छानकर धीरे-धीरे पिएं। ग्रीन टी या हर्बल टी ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन्स मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं और फैट बर्न में मदद करते हैं। कैसे पिएं? ग्रीन टी या हर्बल टी बैग को गर्म पानी में ब्रू करें। बिना चीनी के धीरे-धीरे सेवन करें।  

स्कूलों की छुट्टी का ऐलान: DM ने तय किया बंद रहने का समय

शिवहर बिहार में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। बढ़ती ठंड के बीच कई जिलों में स्कूल बंद  कर दिए गए हैं। इसी बीच शिवहर जिला प्रशासन ने भी स्कूल बंद  को लेकर बड़ा आदेश जारी कर दिया है। शिक्षकों को प्रतिदिन स्कूल आना अनिवार्य शिवहर जिलाधिकारी प्रतिभा रानी ने कक्षा 1 से 8 तक के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों को 21 दिसंबर तक बंद रखने का आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार, सिर्फ बच्चों को छुट्टी रहेगी जबकि शिक्षकों को प्रतिदिन स्कूल आना अनिवार्य होगा। शिक्षक विद्यालय से संबंधित प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों का निष्पादन करेंगे। जिलाधिकारी का कहना है कि अत्यधिक ठंड के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके मद्देनजर स्कूल बंद करने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा प्रशासन ने बच्चों को ठंड से बचाने के लिए सावधानियां बरतने की अपील की है।  

यात्रियों के लिए अलर्ट: रेलवे ने जारी किए नए एंट्री निर्देश

नई दिल्ली भारतीय रेल ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि अनारक्षित ट्रेन टिकट के लिए प्रिंटेड कॉपी साथ रखना अनिवार्य करने संबंधी कोई नया नियम जारी नहीं हुआ है। यह सफाई उन मीडिया रिपोर्ट्स के जवाब में दी गई है, जिनमें नियमों में बदलाव का दावा किया गया था। रेलवे के अनुसार, मौजूदा नियम पहले की तरह ही लागू हैं। यात्रियों को ध्यान रखना होगा कि अगर उन्होंने अनारक्षित टिकट बुक किया है और उसका भौतिक प्रिंट प्राप्त किया है, तो यात्रा के दौरान इसे अपने पास रखना आवश्यक है। वहीं, डिजिटल माध्यम से टिकट बुक करने वाले यात्री मोबाइल डिवाइस पर डिजिटल टिकट दिखाकर सत्यापन करा सकते हैं। रेलवे ने दोहराया कि इस संबंध में कोई नया निर्देश जारी नहीं किया गया है और मीडिया में आई जानकारी भ्रामक है। वंदे भारत ट्रेनों में अब मिलेंगे स्थानीय व्यंजन यात्रियों के सफर को और सुखद बनाने के लिए रेलवे ने वंदे भारत ट्रेनों में विभिन्न राज्यों के पारंपरिक व्यंजन शामिल किए हैं। इसका उद्देश्य यात्रियों को स्थानीय स्वाद और भारत की सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराना है। मुख्य व्यंजन इस प्रकार हैं: महाराष्ट्र: कांदा पोहा, मसाला उपमा (22229 CSMT–MAO) आंध्र प्रदेश / दक्षिण भारत: डोंडकाया करम पोड़ी फ्राई, आंध्र कोड़ी कुरा गुजरात: मेथी थेपला (20901 MMCT–GNC), मसाला लौकी (26902 SBIB–VRL) ओडिशा: आलू फूलकोपी (22895 HWH–पुरी) केरल: सफेद चावल, पचकका चेरुपायर मेझुक्कु पेराटी, कडला करी, केरल पराठा, सादा दही, पलाडा पायसम, अप्पम (20633/34 कासरगोड–त्रिवेंद्रम, 20631/32 मंगलुरु–त्रिवेंद्रम) पश्चिम बंगाल: कोषा पनीर, आलू पोटोल भाजा, मुर्गिर झोल (20872 ROU–HWH, 22895 HWH–PURI, 22302 NJP–HWH) बिहार: चंपारण पनीर, चंपारण चिकन (22349 PNBE–RNC, 22348 PNBE–HWH) डोगरी व्यंजन: अंबल कद्दू, जम्मू चना मसाला (26401-02, 26403-04) कश्मीरी व्यंजन: टोमैटो चमन, केसर फिरनी (26401/02, 26403/04 SVDK–SINA)  

जब हद से बढ़ा मच्छरों का आतंक: युवक ने मारे मच्छर पैक किए और सीधे नगर निगम में किया प्रदर्शन

रायपुर  छत्तीसगढ़ में एक आदमी ने अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। मच्छरों के काटने के बाद उसने उसे मारकर प्लास्टिक की थैली में पैक किया। फिर उसे लेकर नगर निगम कार्यालय पहुंच गया। वहां उसने निगम के हेल्थ अधिकारी से उसकी जांच करने को कहा। उसे शंका थी कि कहीं ये मच्छर डेंगू के वाहक तो नहीं थे। रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक युवक ने अपनी शिकायत को प्लास्टिक की थैली में बंद करके अधिकारियों तक पहुंचाने का अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। रायपुर के वामनराव लाखे वार्ड में मच्छरों के काटने के बाद युवक ने मच्छरों को मारकर उन्हें करीने से पैक किया और सीधे रायपुर नगर निगम कार्यालय लेकर पहुंच गया। दौलल पटेल नाम के इस आदमी ने बताया कि उसे डर था कि उसे काटने वाले मच्छर डेंगू के वाहक हो सकते हैं। घबराकर उसने पहले डॉक्टर से सलाह ली, जिसने उसे मच्छरों की जांच करवाने की सलाह दी। सामाजिक कार्यकर्ता विजय सोना और नगर निगम के विपक्ष के नेता आकाश तिवारी के साथ पटेल ने पॉलीथीन बैग में अच्छी तरह से सील किए गए मच्छरों को नगर निगम मुख्यालय में स्वास्थ्य अधिकारी को सौंप दिया। नगर निगम के अधिकारियों ने तुरंत डॉक्टरों से संपर्क किया और आशंकाओं को दूर करने के लिए परीक्षण की व्यवस्था की। हालांकि, रिपोर्ट से कुछ राहत मिली क्योंकि ये मच्छर डेंगू फैलाने वाले नहीं बल्कि सामान्य मच्छर निकले। विपक्ष ने इस घटना को हाथोंहाथ लपक लिया। नगर निगम में विपक्ष के नेता आकाश तिवारी ने कहा कि इस घटना ने शहर की मच्छर नियंत्रण व्यवस्था की विफलता को उजागर कर दिया है। कहा कि कागज पर तो लोगों को 'स्वच्छ रायपुर, सुंदर रायपुर' का सपना दिखाया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि निवासियों को मच्छरों को मारकर नगर निगम कार्यालय लाना पड़ रहा है। वहीं, लोगों का कहना है कि मच्छरों का प्रकोप चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। लोग डेंगू और मलेरिया के भय में जी रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ साल पहले इसी इलाके के एक युवक की मच्छर के काटने से मौत हो गई थी। आकाश तिवारी ने कहा कि अगर लोगों को खुद मच्छर पकड़ने पड़ रहे हैं और अधिकारियों को समस्या साबित करनी पड़ रही है तो शहर के अन्य हिस्सों की स्थिति का तो अंदाजा ही लगाया जा सकता है। राज्य के बाकी हिस्सों की तो बात ही छोड़िए। कार्यकर्ता विजय सोना ने बताया कि उन्होंने अपने घर के पास मच्छरों के पनपने की शिकायत नगर निगम के अधिकारियों से बार-बार की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार के एक सदस्य की मच्छर जनित बीमारी से मौत हो चुकी है। रायपुर नगर निगम के अधिकारियों ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में फॉगिंग और लार्वा रोधी छिड़काव तेज किया जाएगा। हालांकि, निवासी अभी भी संशय में हैं। उनका कहना है कि मच्छर नियंत्रण पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद, खुली नालियां और खराब जल निकासी व्यवस्था मच्छरों के पनपने के लिए आदर्श स्थान बनी हुई है।

चीन की डिजिटल निगरानी में फंसा नेपाल, अमेरिकी सिस्टम से कसा शिकंजा; तिब्बतियों पर बढ़ा दमन

वाशिंगटन  काठमांडू की अव्यवस्थित गलियों और भीड़भाड़ के ऊपर, बौद्धनाथ स्तूप का सफेद गुंबद एक मूक प्रहरी की तरह खड़ा है। इसके शिखर पर सुनहरा कलश और चारों दिशाओं में बनी बुद्ध की शांत, चौकस आंखें- जो मानो नीचे घट रही हर हलचल को देख रही हों। दशकों तक ये आंखें तिब्बती शरणार्थियों के लिए सुरक्षा और आश्रय का प्रतीक रहीं जो अपनी मातृभूमि में चीनी दमन से भागकर आए थे। लेकिन आज, तिब्बती शरणार्थियों पर कहीं अधिक दुर्भावनापूर्ण आंखें नजर रख रही हैं: हजारों चीनी सीसीटीवी कैमरे यहां सड़कों के कोनों और छतों पर लगे हैं और नीचे हर हरकत पर नजर रखते हैं। इस गहन निगरानी ने एक समय विश्वव्यापी गूंज पैदा करने वाले 'फ्री तिब्बत' आंदोलन को दबा दिया है।   नेपाल अब उन कम से कम 150 देशों में शामिल है, जहां चीनी कंपनियां निगरानी तकनीक निर्यात कर रही हैं। वियतनाम में कैमरे, पाकिस्तान में सेंसरशिप फायरवॉल, केन्या में शहर-स्तरीय मॉनिटरिंग सिस्टम चीन का ही है। एल्गोरिदम और डेटा के सहारे यह तकनीक कम संसाधनों वाली सरकारों के लिए ‘किफायती पुलिसिंग’ बन गई है- लेकिन इसकी कीमत नागरिकों की आजादी से चुकानी पड़ रही है। अमेरिकी तकनीक, चीनी निगरानी इस डिजिटल अधिनायकवाद का सबसे बड़ा विडंबनापूर्ण पहलू यह है कि चीन जिन निगरानी औजारों का निर्यात कर रहा है, उनमें से कई की जड़ें अमेरिका में विकसित तकनीक से जुड़ी हैं। दशकों तक सिलिकॉन वैली की कंपनियां चीन की शर्तों के आगे झुकती रहीं। चीन की शर्त थी- हमें अपनी तकनीक दो और हम तुम्हें अपने बाजार तक पहुंच देंगे। आज भी कड़वाहट के बावजूद ये रिश्ते पूरी तरह टूटे नहीं हैं। उदाहरण के लिए, अमेजन वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस) चीनी तकनीकी दिग्गजों जैसे हिकविजन और दाहुआ को क्लाउड सेवाएं प्रदान करता है, जो उनके विदेशी विस्तार में मदद करती हैं। दोनों कंपनियां राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवाधिकार चिंताओं के कारण अमेरिकी वाणिज्य विभाग की एंटिटी लिस्ट में हैं। इसका मतलब है कि उनके साथ लेनदेन अवैध नहीं लेकिन सख्त प्रतिबंधों के अधीन हैं। एडब्ल्यूएस ने एपी को बताया कि वह नैतिक आचार संहिता का पालन करता है, अमेरिकी कानूनों का अनुपालन करता है और खुद निगरानी इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं प्रदान करता। दाहुआ ने कहा कि वे अपने उत्पादों के दुरुपयोग को रोकने के लिए उचित जांच करते हैं। हिकविजन ने भी यही कहा और कंपनी के दमन में शामिल होने या सहयोग करने के किसी भी सुझाव को स्पष्ट रूप से खारिज किया। चीनी तकनीकी फर्में अब दूरसंचार, निगरानी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का पूरा सूट प्रदान करती हैं, जिसमें बेचने वाले या उपयोग पर कम प्रतिबंध हैं। चीन खुद को कम अपराध दरों वाला वैश्विक सुरक्षा मॉडल पेश करता है, जो अमेरिका के रिकॉर्ड से विपरीत है। नेपाल में सिमटता तिब्बती जीवन एपी की जांच हजारों नेपाली सरकारी खरीद दस्तावेजों, कॉर्पोरेट मार्केटिंग सामग्री, लीक हुए सरकारी और कॉर्पोरेट दस्तावेजों तथा 40 से अधिक लोगों के साक्षात्कारों पर आधारित है, जिनमें तिब्बती शरणार्थी और नेपाली, अमेरिकी तथा चीनी इंजीनियर, कार्यकारी, विशेषज्ञ और अधिकारी शामिल हैं। एक समय नेपाल में हर साल हजारों तिब्बती शरण लेते थे। आज यह संख्या सिंगल डिजिट में सिमट गई है। तिब्बती निर्वासित सरकार के अनुसार, सख्त सीमा नियंत्रण, चीन-नेपाल के बढ़ते संबंध और अभूतपूर्व निगरानी इसकी प्रमुख वजहें हैं। 2021 की एक आंतरिक नेपाली सरकारी रिपोर्ट में दावा किया गया कि चीन ने नेपाल के भीतर और सीमा-बफर जोन में भी निगरानी प्रणालियां खड़ी कीं, जहां निर्माण प्रतिबंधित है। चीन ने इन आरोपों को मनगढ़ंत बताया। काठमांडू में लगभग सभी पुलिस कैमरों की फीड एक चार-मंजिला इमारत में जाती है। यह इमारत चीनी दूतावास से कुछ ही ब्लॉक दूर है। ठंडी हवा फेंकते पंखों के बीच नीली वर्दी में बैठे अधिकारी, रात-दिन स्क्रीन पर झिलमिलाते दृश्यों को खंगालते हैं। नीचे लगे एक बोर्ड पर अंग्रेजी और चीनी में लिखा है: चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय की ओर से शुभकामनाओं सहित। ‘वे हमें पहले ही पकड़ लेते हैं’ 49 वर्षीय सोनम ताशी कभी प्रदर्शनों में आगे रहते थे लेकिन आज बस अपने 10 साल के बेटे को सुरक्षित बाहर निकालना चाहते हैं। बच्चा नेपाल में जन्मा है, पर न शरणार्थी कार्ड है, न नागरिकता। ताशी बताते हैं कि 10 मार्च (1959 के तिब्बती विद्रोह की बरसी) या दलाई लामा के जन्मदिन जैसे दिनों से पहले संभावित प्रदर्शनकारियों को उठा लिया जाता है। 2018 में नेपाल ने ‘प्रिडिक्टिव पुलिसिंग’ की पुष्टि की थी जहां लोगों की गतिविधियों के पैटर्न से पहले ही गिरफ्तारी हो जाती है। कैमरे हर जगह हैं। यहां कोई भविष्य नहीं। ‘उन्होंने पैसे नहीं, पूरा हार्डवेयर दिया’ 2013 में नेपाल पुलिस को चीन से डिजिटल ट्रंकिंग रेडियो सिस्टम मिला- पूरी तरह उपहार था। लागत लगभग 5.5 मिलियन डॉलर। यह तकनीक सस्ती थी, उन्नत थी और सीमा क्षेत्रों तक कवरेज चाहती थी। नेपाल ने हामी भर दी। इसके बाद चीनी पुलिस दूत नियमित रूप से मुख्यालय आने लगे- ब्रोशर, प्रशिक्षण, उपकरण सब उनका था। नेपाल के सैकड़ों पुलिसकर्मी चीन में प्रशिक्षण लेने गए। ‘सेफ सिटी’ से सर्विलांस सिटी 2016 में काठमांडू की ‘सेफ सिटी’ परियोजना शुरू हुई- पहले सड़कें, फिर पर्यटन स्थल, धार्मिक परिसर, संसद और प्रधानमंत्री आवास। कैमरे केवल रिकॉर्ड नहीं करते- वे चेहरे पहचानते हैं, भीड़ में एक चेहरे को ट्रैक करते हैं, और पैटर्न सहेजते हैं। आज नेपाल में अधिकांश कैमरे चीनी कंपनियों के हैं- Hikvision, Dahua और Uniview। कई सिस्टम AI और फेसियल रिकग्निशन से लैस हैं। ऑपरेटर राजधानी में मोटरबाइक ट्रैक कर सकते हैं उनकी पहुंच विशाल है। ऑपरेटर राजधानी में मोटरबाइक ट्रैक कर सकते हैं, प्रदर्शन बनते देख सकते हैं या अलर्ट सीधे पेट्रोल रेडियो पर भेज सकते हैं। कई कैमरे नाइट विजन, फेशियल रिकग्निशन और एआई ट्रैकिंग से लैस हैं – त्योहार की भीड़ से एक चेहरा चुन सकते हैं या किसी व्यक्ति को घर के अंदर गायब होने तक फॉलो कर सकते हैं। सिस्टम न सिर्फ देखता है बल्कि याद करना सीख रहा है, गतिविधियों के पैटर्न स्टोर कर रहा है, निगरानी के नीचे जिए जा रहे जीवन का रिकॉर्ड बना रहा है। शहर के एक 34 वर्षीय तिब्बती कैफे मालिक ने शहर के बदलाव को खामोश डर से देखा। वे कहते हैं- अब आप सिर्फ निजी में तिब्बती हो सकते हैं। पब्लिक में नहीं। … Read more

श्रीनिवासन के जाने से टूटे रजनीकांत, भावुक होकर कहा– मेरा सबसे करीबी दोस्त अब इस दुनिया में नहीं

मुंबई मलयालम फिल्मों के दिग्गज एक्टर श्रीनिवासन का 69 साल की उम्र में निधन हो गया है, जिससे रजनीकांत बुरी तरह टूट गए हैं। श्रीनिवासन, रजनीकांत के करीबी दोस्त थे और दोनों का गहरा रिश्ता था। श्रीनिवासन लंबे समय से बीमार चल रहे थे, और अस्पताल में भर्ती थे। दोस्त के निधन की खबर सुनकर रजनीकांत को गहरा सदमा लगा। उन्होंने श्रीनिवासन को श्रद्धांजलि देते हुए याद किया। रजनीकांत दोस्त के निधन से भावुक रजनीकांत ने कहा कि श्रीनिवासन एक महान एक्टर और एक बहुत अच्छे इंसान थे। उन्होंने एक वॉइस मैसेज में कहा, 'यह जानकर बहुत दुख हुआ कि मेरा अच्छे दोस्त श्रीनिवासन अब नहीं रहे। वह फिल्म इंस्टीट्यूट में मेरे साथ पढ़ते थे। एक कमाल के एक्टर और एक बहुत अच्छे इंसान। उनकी आत्मा को शांति मिले।' साथ पढ़े थे रजनीकांत और श्रीनिवासन, स्ट्रगल के दिनों में सहारा मालूम हो कि श्रीनिवासन एमजीआर फिल्म एंड टेलीविजन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से पढ़े। इसमें रजनीकांत उनके सीनियर थे। दोनों का रिश्ता स्ट्रगल के दिनों से था। श्रीनिवासन ने खुद एक वाकया एक इंटरव्यू में बताया था, जिसने रजनीकांत को रुला दिया था। उसी की वजह से श्रीनिवासन ने रुला दिया था। इसकी वजह से रजनीकांत, श्रीनिवासन की एक फिल्म में काम करने को मजबूर हो गए थे और वह फिल्म ब्लॉकबस्टर रही थी। उस फिल्म का नाम था Kadha Parayumbol. जब श्रीनिवासन से लिपट गए रजनीकांत, कहा- तुमने मुझे रुला दिया श्रीनिवासन ने 2008 में 'रेडिफ' को बताया था, 'मैं उस समय मुंबई में था और फिल्म खत्म होने के ठीक बाद ही प्रीव्यू थिएटर पहुंच पाया। प्रोड्यूसर ने रजनीकांत को बताया था कि मैं वहां मौजूद रहूँगा। फिल्म खत्म होने पर मैंने उन्हें थिएटर से बाहर निकलते देखा। उनकी आंखों में आंसू भरे हुए थे। वो (रजनीकांत) मुझे ढूंढ रहे थे। वो इतने भावुक थे कि उन्होंने मुझे काफी देर तक गले लगाया। थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा-तुमने मुझे रुला दिया।' ममूटी से लेकर पृथ्वीराज सुकुमारन ने दी श्रद्धांजलि रजनीकांत के अलावा ममूटी, पृथ्वीराज सुकुमारन और दुलकर सलमान समेत साउथ फिल्मों के कई सितारों ने श्रीनिवासन के निधन पर शोक जताया और श्रद्धांजलि दी। पृथ्वीराज सुकुमारन ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, 'महान राइटर, डायरेक्टर और एक्टर को अलविदा। आपने जो हमें हंसाया और जो विचार दिए, उनके लिए धन्यवाद।' श्रीनिवासन का करियर बताया जा रहा है कि श्रीनिवासन का कई दिनों से अस्पताल में इलाज चल रहा था। अब उनके जाने से जहां साउथ फिल्म इंडस्ट्री को तगड़ा झटका लगा है, वहीं परिवार भी सदमे में है। श्रीनिवासन ने अपने 48 साल लंबे करियर में 200 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया, और अपनी एक्टिंग से सबको मुरीद बना लिया था। वह एक्टर ही नहीं, बल्कि स्क्रीन राइटर और डायरेक्टर भी थे। उन्होंने कई हिट फिल्में दीं, और मोहनलाल और प्रियदर्शन के करियर में अहम रोल निभाया।

फोन पर संबोधन: पीएम मोदी ने रैली में न पहुंच पाने पर बंगालवासियों से जताया खेद

कोलकाता  पश्चिम बंगाल के ताहिरपुर में रैली में पीएम मोदी खराब मौसम की वजह से नहीं पहुंच पाए। उनका हेलीकॉप्टर खराब मौसम की वजह से वहां लैंड नहीं कर पाया। इसके बाद पीएम मोदी ने फोन के जरिए रैली को संबोधित किया और फिर जनता से माफी मांगते हुए कहा कि मैं वहां आ ही गया था लेकिन खराब मौसम की वजह से नहीं पहुंच पाया। पीएम ने अपनी बात को पूरा करते हुए कहा कि जब वह वहां आएंगे तो फिर पूरी तरह से बंगाल के विजन के ऊपर जनता से बात करेंगे।   प्रधानमंत्री मोदी ने फोन के जरिये रैली को संबोधित करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस उनका और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का चाहे जितना विरोध करे लेकिन पश्चिम बंगाल की प्रगति नहीं रुकनी चाहिए। उनकी सरकार का उद्देश्य पिछड़ेपन से जूझ रहे बंगाल के दूर-दराज के इलाकों तक आधुनिक संपर्क सुविधाएं सुनिश्चित करना है। पीएम मोदी ने हाल के समय में बिहार चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार चुना के नतीजों ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए रास्ते खोल दिए हैं। उन्होंने बिहार की जनता से कहा कि वह एक बार राज्य में डबल इंजन सरकार बनाने का अवसर दें। पीएम ने कहा कि वह राज्य के विकास के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। ममता सरकार पर हमला बोलते हुए पीएम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस घुसपैठियों का समर्थन कर रही है। ममता दीदी एसआईआर का विरोध कर रही हैं क्योंकि वह घुसपैठियों को संरक्षण दे रही हैं और इन घुसपैठियों की पहचान को छिपाना चाहती हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बंगाल की जनता को त्रिपुरा का उदाहरण देते हुए कहा कि त्रिपुरा में एक समय तक वामपंथियों का शासन था, जिनके राज्य में त्रिपुरा लगातार पिछड़ता चला गया है। अब, जब से वहां पर भाजपा की डबल इंजन की सरकार आई है, तभी से त्रिपुरा तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि पश्चिम बंगाल पिछड़ रहा है। पीएम ने कहा, “त्रिपुरा में भी वामपंथियों का शासन था, वह गए और भाजपा की डबल इंजन की सरकार आई, इसके बाद आप देखिए कि त्रिपुरा लगातार आगे बढ़ रहा है। पश्चिम बंगाल में भी वामपंथियों का शासन था। उनके जाने के बाद लगा कि अब सब ठीक हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। तृणमूल कांग्रेस ने वामपंथियों के रास्ते पर चलते हुए, उनके ही लोगों को अपने में समाहित कर लिया और बंगाल का हाल और भी ज्यादा बुरा कर दिया।” इसके बाद पीएम मोदी ने कहा कि वह रैली स्थल पर पहुंचने वाले थे, लेकिन मौसम ने ऐसा नहीं होने दिया। ऐसे में वह जल्दी ही एक बार फिर से नादिया आएँगे और जनता के सामने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए अपने विजन को रखेंगे। इससे पहले पीएम मोदी खराब मौसम की वजह से रैली स्थल पर नहीं पहुंच पाए। बाद में खबरें आईं थी कि पीएम मोदी सड़क के रास्ते रैली स्थल पर पहुंच सकते हैं, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया। पीएम के न आने की खबर सुनकर वहां मौजूद लोगों में भी अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला, जिसे स्थानीय प्रशासन द्वारा संभाल लिया गया।

जेम्स कैमरून की ‘अवतार 3’ ने रुलाया, दर्शकों का रिएक्शन- यह फिल्म ऑस्कर डिज़र्व करती है

लॉस एंजिल्स जेम्‍स कैमरून की 'अवतार: फायर एंड ऐश' 19 दिसंबर को थिएटर्स में रिलीज हो गई है, और रिलीज होते ही गर्दा उड़ा दिया है। एडवांस बुकिंग के आंकड़ों से माना जा रहा है कि यह ओपनिंग डे पर ही वर्ल्डवाइड 2400 करोड़ की कमाई करेगी। फिल्म देखने के बाद लोग जिस तरह की बातें कर रहे हैं और तारीफ कर रहे हैं, उससे लग रहा है कि यह कमाई का जबरदस्त रिकॉर्ड बनाएगी। Avatar: The Way of Water की रिलीज के तीन साल बाद जेम्स कैमरून चौथे पार्ट 'अवतार: फायर एंड ऐश' के साथ लौटे हैं। इस फिल्म का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, और ऐसा लग रहा है कि यह इंतजार सफल रहा है। फिल्म देखने के बाद जो शुरुआती रिव्यूज आए हैं, उसके मुताबिक 'अवतार 3' को लोगों ने 'मास्टरपीस' बताया है। एक यूजर तो रो पड़ा और कहा कि यह ऑस्कर की हकदार है। कितनी कमाई करेगी 'अवतार 3', ओपनिंग डे का ऐसा रह सकता है हाल Sacnilk की रिपोर्ट के मुताबिक, 'अवतार: फायर एंड ऐश' भारत में लगभग 30 करोड़ रुपये की ओपनिंग कर सकती है। अगर इसकी तुलना पिछली रिलीज 'अवतार: द वे ऑफ वॉटर' से की जाए, तो उसने 50 करोड़ रुपये की ओपनिंग की थी और लाइफटाइम 500 करोड़ की कमाई की थी। वहीं, 'वैरायटी' की रिपोर्ट के मुताबिक, 'अवतार 3' अमेरिका में $90 मिलियन से $105 मिलियन (करीब 900 करोड़) की ओपनिंग करने के लिए तैयार है। वहीं, भारतीय बॉक्स ऑफिस पर यह आदित्य धर की 'धुरंधर' को पछाड़ सकती है, जिसने पिछले 14 दिनों से बॉक्स ऑफिस पर गर्दा उड़ा रखा है। माना जा रहा है कि 'अवतार 3' भारत में 30-35 करोड़ की ओपनिंग कर सकती है। 'अवतार' के अगले दो पार्ट 2029 और 2031 में होंगे रिलीज 'अवतार: फायर एंड ऐश' जर्मनी और फिलिपिंस में 17 दिसंबर को रिलीज हो गई थी, और अब 19 दिसंबर को भारत समेत देश के बाकी हिस्सों में रिलीज हुई है। जेम्स कैमरून पहले ही कन्फर्म कर चुके हैं कि 'अवतार' का यूनिवर्स आगे और बढ़ेगा। इस फ्रैंचाइज की दो और फिल्में साल 2029 और 2031 में रिलीज होंगी। फिलहाल, उन पर काम चल रहा है।

चौंकाने वाला बयान: आतंकी हारून इजहार बोला—मंदिरों-हिंदुओं की सुरक्षा करेंगे, बांग्लादेश में बढ़ी बेचैनी

नई दिल्ली  भारत विरोधी उकसावे और कट्टरपंथी गतिविधियों के लिए चर्चित बांग्लादेशी देवबंदी मौलवी और आतंकी नेता हारून इजहार ने एक बार फिर विवादास्पद बयान देकर हलचल मचा दी है। हारून इजहार ने दावा किया है कि बांग्लादेश में स्थित भारतीय हाई कमीशन की सुरक्षा वही और उनके समर्थक करेंगे और बांग्लादेश में किसी तरह की ‘मॉब कल्चर’ मौजूद नहीं है। इतना ही नहीं, हारून इजहार ने यह भी कहा कि बांग्लादेशी हिंदुओं और मंदिरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी वही लोग निभा रहे हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आती है। बीते दिनों यही कट्टरपंथी समूह बार-बार भारतीय हाई कमीशन और सहायक हाई कमीशनों पर हमले की कोशिश करते रहे हैं।   हाल ही में चट्टोग्राम में भारतीय सहायक हाई कमीशन को निशाना बनाकर पथराव किया गया था। इस घटना में 12 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इन्हीं आरोपियों की रिहाई की मांग को लेकर हारून इजहार खुद थाना पहुंचा था। वहीं उसने यह विवादित बयान दिया। हारून इजहार ने कहा, “मैं पूछना चाहता हूं, क्या दूतावास का कोई शीशा टूटा है? भारत एक आक्रामक और आतंकवादी देश है, लेकिन बांग्लादेश में भारतीय दूतावास एक निर्दोष संस्था है। उसकी सुरक्षा हम देंगे। यहां भारतीय हाई कमीशन के खिलाफ कोई मॉब नहीं बनेगा। पुलिस और प्रशासन बाद की बात है, हम बांग्लादेशी खुद ऐसा होने नहीं देंगे।” उसने आगे कहा, “अगर भारत सीमा पर हमला करेगा, तो हम जवाब देंगे। लेकिन हाई कमीशन निर्दोष है। अगर कोई अलग-थलग व्यक्ति कुछ करता है, तो उसकी जिम्मेदारी हम नहीं लेंगे।” भारत विरोधी धमकियों का लंबा इतिहास हारून इजहार का यह बयान ऐसे समय आया है जब उसका अतीत खुद उसके दावों पर सवाल खड़े करता है। हारून इजहार पहले खुले मंच से कह चुका है, “हमने ढाका को हिला दिया है। अगली बारी दिल्ली की है, इंशाअल्लाह।” हाल के महीनों में भी वह कई बार भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान दे चुका है। सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया रिपोर्टों में हारून इजहार के अल-कायदा और लश्कर-ए-तैयबा से संबंध होने के दावे किए जाते रहे हैं। गौरतलब है कि 2011 में हारून इजहार को लश्कर से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया था। बाद में वह कट्टरपंथी संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम के साथ सक्रिय हो गया। हालिया दौर में हिफाजत-ए-इस्लाम की ओर से बांग्लादेश में कई भारत-विरोधी कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं। ओसमान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा 18 दिसंबर को छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद पूरा बांग्लादेश हिंसा और अशांति की चपेट में आ गया। चट्टोग्राम में भी इसका असर देखने को मिला, जहां भारतीय सहायक हाई कमीशन पर हमला करने की कोशिश की गई। प्रदर्शनकारियों ने न केवल पानी की बोतलें बल्कि पत्थर भी फेंके। भीड़ ने भारतीय सहायक हाई कमिश्नर के आवास की ओर मार्च किया और बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की। हालात काबू में लाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस दौरान कट्टरपंथियों ने खुलेआम नारे लगाए कि वे भारतीय हाई कमीशन के साथ युद्ध की स्थिति में हैं।  

शिलांग कोर्ट का सख्त रुख: राजा रघुवंशी हत्याकांड में सोनम रघुवंशी की जमानत याचिका नामंजूर

इंदौर  राजा रघुवंशी हत्याकांड की मास्टरमाइंड पत्नी सोनम रघुवंशी को मेघालय के शिलांग कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने सोनम की जमानत याचिका रद्द कर दी। सोनम पर इस साल मई महीने में मेघालय में हनीमून के दौरान अपने पति और राजा रघुवंशी की हत्या कराने का आरोप है। रिपोर्ट के अनुसार, मेघायलय पुलिस द्वारा इस मामले में दायर की गई 700 से ज्यादा पन्नों की चार्जशीट में दावा किया गया है कि राजा की हत्या सोनम और उसके कथित प्रेमी राज सिंह कुशवाहा ने मिलकर प्लान की थी। चार्जशीट में भाड़े पर बुलाए गए तीन कथित हत्यारों – आकाश सिंह राजपूत, विशाल सिंह चौहान और आनंद कुर्मी के नाम भी हैं। इस मामले में एक एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज ने आरोपियों पर हत्या के आरोप भी तय किए हैं। यह अपराध उस वक्त सामने आया था जब मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में 12 मई को शादी करने वाला यह जोड़ा 23 मई को मेघालय में हनीमून के दौरान लापता हो गया था। उन्हें आखिरी बार नोंगियाट में एक होमस्टे से चेक आउट करते हुए देखा गया था। कुछ दिनों बाद, उनके द्वारा किराए पर ली गई स्कूटी सोहरारिम के पास लावारिस हालत में मिली थी। फिर उनके लापता होने के लगभग 10 दिन बाद 2 जून को राजा का शव पूर्वी खासी हिल्स में वेसावडोंग फॉल्स के पास एक गहरी खाई में मिला था। राजा की पत्नी सोनम जो 8 जून तक लापता थी, उत्तर प्रदेश के वाराणसी-गाजीपुर मेन रोड पर एक ढाबे के पास मिली थी। मेघालय पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि सोनम को 21 साल के राज कुशवाहा के साथ मिलकर अपने पति की हत्या में मुख्य आरोपियों में से एक माना जा रहा है।