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नितिन नवीन बने भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, सीएम मोहन यादव ने किया स्वागत और बधाई

भोपाल  मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव नई दिल्ली में भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की है। साथ ही सीएम ने उन्हें यशस्वी कार्यकाल के लिए बधाई भी दी है। नितिन नवीन के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद सीएम मोहन यादव की यह पहली मुलाकात है। इस मुलाकात को लेकर सीएम ने एक्स पर तस्वीर साझा करते हुए जानकारी दी है। मीडिया से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी में यह एक नए दौर की शुरुआत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सभी वरिष्ठ नेताओं ने नई पीढ़ी को अवसर दिया है। भारत युवाओं का देश है और विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का अध्यक्ष यदि युवा बनता है, तो इससे बड़ा सौभाग्य और क्या हो सकता है? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति कर रहा है और उसी दिशा में मध्यप्रदेश भी सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करते हुए आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने अपने दो वर्ष पूरे कर लिए हैं और इस दौरान सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि गरीबों, महिलाओं, युवाओं और किसानों के जीवन स्तर में सुधार लाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार समावेशी विकास के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। वहीं, केंद्रीय विधि एवं न्याय और संसदीय कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल से भी सीएम डॉ. मोहन यादव ने मुलाकात की है।  

भोपाल में अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना: NHAI ने जताई जन-सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की प्रतिबद्धता

भोपाल भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क को सुरक्षित, सुगम एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में निरंतर कार्यरत है। NHAI का उद्देश्य केवल सड़क निर्माण तक सीमित न होकर आम नागरिकों को सुरक्षित, सुविधाजनक एवं निर्बाध आवागमन उपलब्ध कराना है, जिससे जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो तथा आर्थिक एवं सामाजिक विकास को गति मिले। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल शहरी विस्तार, नए आवासीय क्षेत्रों के विकास तथा यातायात गतिविधियों में निरंतर वृद्धि के साथ एक प्रमुख शहरी केंद्र के रूप में विकसित हो रही है। इस परिप्रेक्ष्य में शहर की प्रमुख सड़कों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सुदृढ़, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इसी दिशा में अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना एक महत्वपूर्ण एवं आवश्यक पहल है। वर्तमान में अयोध्या बायपास की यातायात वहन क्षमता लगभग 40,000 वाहनों प्रतिदिन है, जबकि इस मार्ग पर वर्तमान में ही लगभग 45,000 वाहन प्रतिदिन आवागमन कर रहे हैं। आसपास विकसित हो रही आवासीय कॉलोनियों से यातायात सीधे मुख्य मार्ग पर आने के कारण इस खंड पर यातायात दबाव बढ़ता जा रहा है तथा दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। इस मार्ग पर वर्तमान में तीन ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित किए गए हैं। यह परियोजना आम नागरिकों के लिए क्यों आवश्यक है ? * अयोध्या बायपास पर चिन्हित तीन प्रमुख ब्लैक स्पॉट्स का सुधार एवं निराकरण किया जा रहा है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी एवं जन-सुरक्षा सुनिश्चित होगी। * सड़क के दोनों ओर सर्विस रोड का निर्माण किया जा रहा है, जिससे कॉलोनियों से आने-जाने वाले स्थानीय वाहनों को पृथक मार्ग उपलब्ध होगा और मुख्य कैरिज-वे पर यातायात दबाव कम होगा। * पूरे बायपास को छह लेन में विकसित किया जा रहा है। इसका डिज़ाइन इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह वर्ष 2050 तक के अनुमानित यातायात दबाव को सुचारु रूप से संभाल सके। * बेहतर एवं चौड़ी सड़क उपलब्ध होने से यात्रा समय में कमी, ईंधन की बचत तथा प्रदूषण में कमी आएगी। * उन्नत लेआउट एवं सुरक्षित डिज़ाइन से वाहनों की आवाजाही अधिक सुगम होगी तथा दुर्घटनाओं की संभावना में कमी आएगी।  पर्यावरण संरक्षण के प्रति NHAI की संवेदनशीलता एवं ठोस पहल  NHAI का यह प्रयास केवल अधोसंरचना विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि विकास एवं पर्यावरण संतुलन को समान प्राथमिकता देने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्राधिकरण प्रारंभ से ही ग्रीन हाईवे की अवधारणा में विश्वास रखता है। परियोजना के अंतर्गत जिन वृक्षों की कटाई प्रस्तावित है, उनमें से लगभग 5,000 वृक्ष टिम्बर श्रेणी के हैं। वृक्ष कटाई के विकल्पों एवं प्रतिपूरक उपायों के संबंध में केंद्रीय अधिकार समिति (CEC) को NHAI द्वारा विभिन्न विकल्प प्रस्तुत किए गए हैं।  प्रतिपूरक,विकल्प एवं अतिरिक्त पौधारोपण के प्रमुख बिंदु :  * वृक्ष कटाई के प्रतिपूरक उपाय के रूप में कुल 81,000 पौधों का रोपण किया जाएगा। * ये पौधे भोपाल शहर एवं इसके आसपास विभिन्न चिन्हित स्थानों पर लगाए जाएंगे। * अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना के साथ-साथ 10,000 पौधे अयोध्या बायपास के दोनों ओर लगाए जाएंगे। इसके अंतर्गत एवेन्यू प्लांटेशन का पुनः सघनीकरण (Re-densification) किया जाएगा, जिसमें छायादार, फलदार एवं शेड-बेयरिंग प्रजातियों के वृक्ष दोनों ओर रोपे जाएंगे। * इन सभी पौधों की 15 वर्षों तक देखरेख, संरक्षण एवं अनुरक्षण की पूर्ण जिम्मेदारी NHAI द्वारा वहन की जाएगी, जिस पर लगभग ₹20 करोड़ का अनुमानित व्यय प्रस्तावित है। इस संबंध में केंद्रीय अधिकार समिति को पूर्व में अवगत कराया जा चुका है। * इसके अतिरिक्त, नगर निगम के सहयोग से 10,000 अतिरिक्त पौधों का रोपण किया जाएगा। नगर निगम द्वारा NHAI को विभिन्न पार्क, रिक्त भूमि एवं सड़क किनारे की उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराई गई है, जहां स्थानीय, छायादार एवं उपयोगी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे।  झिरनिया एवं जागरियापुर क्षेत्र में वृहद पौधारोपण :  * पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल के तहत, भोपाल जिला प्रशासन द्वारा झिरनिया एवं जागरियापुर क्षेत्र में भूमि उपलब्ध कराई गई है। * यह भूमि राजस्व वन (Revenue Forest) की है, जो वर्तमान में रिक्त अवस्था में है। * यहां 61,000 से अधिक पौधों का रोपण किया जाएगा तथा इस क्षेत्र को विकसित वन क्षेत्र (Developed Forest Area) के रूप में विकसित किया जाएगा। * इस संबंध में भी केंद्रीय अधिकार समिति को जानकारी प्रदान की जा चुकी है। समिति के निर्देशानुसार जून 2026 तक सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली जाएंगी, ताकि अगले मानसून  के दौरान पौधारोपण कार्य समयबद्ध रूप से किया जा सके। NHAI यह भी स्पष्ट करता है कि वृक्षों की कटाई को न्यूनतम रखने के उद्देश्य से परियोजना के डिज़ाइन में आवश्यक संशोधन किए गए हैं, जिससे पहले की तुलना में कम वृक्षों की कटाई की जा रही है। यह सीमित कटाई यातायात एवं सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के दृष्टिगत आवश्यक है।  पूर्व में किए गए पौधारोपण कार्य  यह उल्लेखनीय है कि NHAI निरंतर पौधारोपण करता रहा है और इसे अपनी सामाजिक एवं पर्यावरणीय जिम्मेदारी मानता है। पिछले मानसून सत्र में भोपाल के समीप झिरनिया ग्राम के पास सोनकच्छ टोल प्लाज़ा क्षेत्र में लगभग 50,000 पौधे मियावाकी तकनीक से लगाए गए, जो वर्तमान में 10–12 फीट तक विकसित हो चुके हैं। यह पौधारोपण कम्पेन्सेटरी अफॉरेस्टेशन का भाग नहीं, बल्कि ग्रीन हाईवे पहल के अंतर्गत NHAI की नियमित जिम्मेदारी के तहत किया गया था। यह तथ्य इस बात का प्रमाण है कि NHAI पर्यावरण संरक्षण को केवल नीतिगत स्तर पर नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर भी प्रभावी रूप से लागू करता है। NHAI यह स्पष्ट करता है कि किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना की योजना बनाते समय हरित आवरण का विकास प्राधिकरण की प्राथमिकता होती है। परियोजना के क्रियान्वयन से पूर्व एवं उसके साथ-साथ अफॉरेस्टेशन, पौधारोपण एवं हरियाली विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। NHAI का मानना है कि सड़क विकास के साथ-साथ ग्रीन हाईवे का निर्माण भी उतना ही आवश्यक है, ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे। NHAI आम नागरिकों को आश्वस्त करता है कि अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना को पूरी संवेदनशीलता, पारदर्शिता एवं जिम्मेदारी के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है, जिससे जन-सुरक्षा सुनिश्चित हो, यात्रा सुगम बने, समय की बचत हो और पर्यावरण संरक्षित रहे।

पंजाब सरकार का बड़ा कदम: शहरी क्षेत्रों में नया कानून और 8 नए पार्क का विकास

जालंधर/चंडीगढ़ प्रदेश भर में वन क्षेत्र के अंतर्गत रकबे में वृद्धि के साथ-साथ आने वाली पीढय़िों के लिए स्वच्छ और हरित पर्यावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक के नेतृत्व में वन एवं वन्यजीव संरक्षण विभाग ने वर्ष 2025 के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं। इन महत्वपूर्ण पहलों में 8 वन एवं प्रकृति जागरूकता पार्कों का विकास शामिल है। इनमें से ग्रीनिंग पंजाब मिशन के तहत चार पार्क पठानकोट में, 2 पटियाला में तथा 1-1 अमृतसर और होशियारपुर में विकसित किए जा रहे हैं। कैबिनेट मंत्री श्री लाल चंद कटारूचक के नेतृत्व में वन एवं वन्यजीव संरक्षण विभाग इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य कर रहा है। उल्लेखनीय है कि पठानकोट में गांव घरोटा में 0.50 हेक्टेयर, गांव कटारूचक में 0.75 हेक्टेयर, हैबत पिंडी में 0.60 हेक्टेयर क्षेत्र में पंचायत भूमि पर तथा आई.टी.आई. बमियाल में पर्यावरण पार्क विकसित किए जा रहे हैं। इसी प्रकार पटियाला में बैरन माइनर सहित दो स्थानों पर पर्यावरण पार्क विकसित किए जा रहे हैं। अमृतसर में गांव जगदेव कलां में पर्यावरण पार्क बनाया जा रहा है, जबकि होशियारपुर के बसी पुरानी में एक वन चेतना प्रगति पर है। हैबत पिंडी में पार्क के संबंध में इंटरलॉकिंग टाइलों वाले नेचर ट्रेल का कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि झूलों और ओपन एयर शेल्टर (गज़ेबो) की स्थापना इस समय चल रही है। राज्य सरकार का यह सदैव प्रयास रहा है कि अधिक से अधिक हरियाली सुनिश्चित की जाए और साथ ही आने वाली पीढय़िों के लिए पर्यावरण संरक्षण के उपाय किए जाएं। इसी क्रम में वन एवं वन्यजीव संरक्षण विभाग, पंजाब ने ‘पंजाब प्रोटेक्शन ऑफ ट्रीज़ एक्ट, 2025’ का मसौदा तैयार किया है, जिसका उद्देश्य हरित आवरण बनाए रखना, पर्यावरणीय संतुलन सुनिश्चित करना तथा पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के साथ-साथ मिट्टी संरक्षण करना है। यह अधिनियम पंजाब के सभी शहरी क्षेत्रों में लागू होगा। 

राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं: दोषी कर्मियों की नौकरी जाएगी और संपत्ति होगी जब्त : विजय सिन्हा

मुजफ्फरपुर बिहार के उपमुख्यमंत्री तथा राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सोमवार को सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि सरकारी जमीन में दखिल खारिज या किसी भी तरह की गड़बड़ी पाई गई, तो दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की बर्खास्तगी के साथ उनकी संपत्ति भी जब्त की जाएगी। विजय सिन्हा ने आज मुजफ्फरपुर में जमीन से जुड़े मामलों के समाधान के लिए जनता दरबार का आयोजन किया। जनता दरबार में कई मामलों में सरकारी जमीन में गलत तरीके से दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) और हेराफेरी की शिकायतें भी सामने आईं, जिसके बाद उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी दी। इस जनता दरबार में जिले के विभिन्न प्रखंडों से बड़ी संख्या में फरियादी अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे। मंत्री ने एक-एक कर लोगों की समस्याएं सुनीं और कई मामलों में संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार भी लगाई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही, गड़बड़ी या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता दरबार के दौरान एक मामला जाति अंकन को लेकर सामने आया। एक व्यक्ति ने शिकायत की कि उसके खतियान में पहले 'भूमिहार ब्राह्मण' लिखा हुआ था, लेकिन अब उसे केवल 'भूमिहार' कर दिया गया है। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि इस संबंध में विभाग की ओर से पर्ची बांटी गई है। "भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' की नीति" इस पर मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ कहा कि यह किसी जाति विशेष की बैठक नहीं है, बल्कि बिहारियों की बैठक है। हम यहां किसी जाति के हित के लिए नहीं, बल्कि बिहार के लोगों के कल्याण के लिए बैठे हैं। मंत्री ने कहा कि खतियान में जो पहले से दर्ज है, वही मान्य होगा। यदि खतियान में 'भूमिहार ब्राह्मण' लिखा है तो वही रहेगा। इसमें किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा और न ही किसी अधिकारी को इसमें मनमानी करने की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि पहले जो व्यवस्था चलती थी, वही आगे भी चलेगी और इसमें किसी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा साफ है और भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम किया जा रहा है। "फरियादियों को बार-बार चक्कर लगाने पर अधिकारी होंगे जिम्मेदार" मंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जनता के साथ न्याय करना उनकी जिम्मेदारी है। यदि किसी फरियादी को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, तो इसके लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। विजय कुमार सिन्हा ने जनता से अपील की कि किसी भी जमीन संबंधी समस्या के समाधान के लिए वे सबसे पहले स्थानीय स्तर पर शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि पहले अंचल कार्यालय और संबंधित थाने में अपनी शिकायत दर्ज करें। यदि वहां समाधान नहीं होता है, तो मामला अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) और फिर जिलाधिकारी (डीएम) तक ले जाएं। इसके बावजूद अगर समस्या का समाधान नहीं होता है, तभी मंत्री स्तर पर सुनवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों की कहीं भी सुनवाई नहीं हुई है, उनकी शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाएगा। ऐसे मामलों में त्वरित कारर्वाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। जनता दरबार के दौरान कई फरियादियों ने मंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं, जिनमें भूमि विवाद, दाखिल-खारिज में देरी, सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और रिकॉर्ड में त्रुटि जैसे मामले शामिल थे। मंत्री ने कई मामलों में मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए और जल्द समाधान का भरोसा दिलाया। मंत्री के सख्त तेवर और स्पष्ट निर्देशों से जनता दरबार में मौजूद लोगों को उम्मीद की किरण दिखाई दी। लोगों ने कहा कि यदि इसी तरह जमीन मामलों में सख्ती बरती गई, तो आम लोगों को लंबे समय से चली आ रही परेशानियों से राहत मिल सकेगी।

मुलाजिमों की छुट्टी पर मान सरकार का आदेश, नए निर्देश जारी

लुधियाना  नगर निगम में फर्जी तरीके से ए.टी.पी. व एम.टी.पी. की कुर्सी पर बैठने वालों की छुट्टी होगी, जिसके तहत सरकार ने सी.डी.सी. चार्ज वापस लेने का आदेश जारी कर दिया है। इस मामले में खुलासा हुआ है कि नगर निगम में सरकार की मंजूरी के बिना एस.ई. रंजीत सिंह को एम.टी.पी. का चार्ज दिया गया है। इसके अलावा 4 रैगुलर ए.टी.पी. खाली बैठे होने के बावजूद इंस्पैक्टर गुरविंद्र सिंह लक्की, कुलजीत मांगट, नवनीत खोखर व हैड ड्राफ्ट्समैन जगदीप सिंह को ए.टी.पी. का चार्ज दिया गया है। यह हालात खाली बैठे रैगुलर ए.टी.पी. राज कुमार, रणधीर सिंह, सुनील कुमार, निरवाण को तो मजाक का पात्र बना ही रहे हैं, इससे करैंट ड्यूटी चार्ज देने बारे सरकार के निर्देशों का भी उल्लंघन हो रहा है जिसके मद्देनजर लोकल बॉडीज विभाग द्वारा नगर निगम प्रशासन को फटकार लगाई गई है। इस संबंध में जारी सर्कुलर में साफ कहा है कि किसी भी मुलाजिम को करैंट डयूटी चार्ज देने के लिए पर्सोनल विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन किया जाए जिसके आधार पर किसी भी मुलाजिम को सी.डी.सी. चार्ज देने पर रोक लगा दी गई है और जिन मुलाजिमों को एडीशनल चार्ज दिया गया है, उसे तुरंत वापस लेने के निर्देश दिए गए हैं। इस आर्डर में यह भी क्लीयर कर दिया गया है कि किसी मुलाजिम को सी.डी.सी. चार्ज देने वाले आफिसर की जिम्मेदारी होगी। अब देखना यह है कि गलत तरीके से दिया गया ए.टी.पी. व एम.टी.पी. का चार्ज वापस लेने के मामले में कमिश्नर द्वारा क्या फैसला किया जाएगा। नेताओं की सिफारिश पर तोड़े जा रहे हैं नियम जहां तक नगर निगम में ए.टी.पी. व एम.टी.पी. को सी.डी.सी. चार्ज देने के नियमों के उल्लंघन का सवाल है, उसके लिए नेताओं की सिफारिश का हवाला दिया जाता है जिसका सबूत यह है कि नगर निगम में मुलाजिमों की पोस्टिंग जोन की जगह हल्का वाइज की जा रही है और नेताओं की पसंद के मुताबिक ही कुछ देर बाद मुलाजिमों की ट्रांसफर कर दी जाती है। इस दौर में अब सी.डी.सी. चार्ज देने बारे सरकार के ऑर्डर लागू करने के मामले में अफसरों के सामने नेताओं की सिफारिश को नजरअंदाज करने की चुनौती भी आ गई है।

जुन्नारदेव में दुर्लभ घटना: महिला ने दिया चार बच्चों को जन्म, जिला अस्पताल में तैयारियां शुरू

छिंदवाड़ा  जुन्नारदेव में प्रसूति का एक दुर्लभ केस हुआ। यहां एक महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया। इनमें एक बेटा और तीन बेटियां हैं। प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव में यह दुर्लभ मामला सामने आया। जच्चा-बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हैं हालांकि उन्हें बेहतर देखभाल के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है। चारों बच्चे को अभी छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के एसएनसीयू में रखने की तैयारी की जा रही है। खास बात यह है कि महिला ने सरकारी अस्पताल में सामान्य डिलीवरी में इन चारों को जन्म दिया। जुन्नारदेव के सिविल अस्पताल में यह अनोखा प्रसव हुआ। यहां एक आदिवासी महिला ने एक साथ एक बेटा और तीन बेटियों को जन्म दिया। प्रसूता और चारों बच्चों की हालत भी सामान्य है। एक साथ चार बच्चों की किलकारियां सुनकर परिवार के लोगों के साथ ही अस्पताल में उपस्थित अन्य लोगों ने भी खुशी जाहिर की। जुन्नारदेव सिविल अस्पताल के डॉक्टर्स ने बताया कि बरेलीपार निवासी महिला प्रसव के लिए यहां आई थी। प्रसूता की नॉर्मल डिलीवरी 28 वर्षीय महिला कुन्नू इवनाती ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया। डॉक्टर्स ने बताया कि बरेलीपार निवासी प्रसूता ने नॉर्मल डिलीवरी के बाद एक बेटे और तीन बेटियों को जन्म दिया है। चारों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ्य और खतरे से बाहर प्रसव के बाद बेहतर देखभाल के लिए चारों नवजातों को जुन्नारदेव सिविल अस्पताल से छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के लिए रिफर किया गया है। तीन 108 एम्बुलेंस की मदद से जच्चा बच्चा को जिला अस्पताल ले जाया गया है। वर्तमान में चारों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ्य और खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं, जिन्हें डॉक्टरों की विशेष निगरानी में रखा गया है। सभी को जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती करने की प्रक्रिया चल रही है।

नीतीश सरकार की बड़ी पहल: छात्रवृत्ति योजनाओं से लाखों छात्रों को मिला संबल

पटना बिहार सरकार के पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की छात्रवृत्ति योजनाओं के जरिये करीब 55 लाख विद्यार्थियों को लगभग 832 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई है। बिहार सरकार का पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग राज्य के सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े तथा अत्यंत पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए लगातार प्रयासरत है। शिक्षा को प्रोत्साहन देने और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से विभाग द्वारा संचालित विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं ने वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनसे लाखों छात्र-छात्राएँ लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना विभाग की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक, मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक लगभग 53 लाख 46 हजार विद्यार्थियों को लगभग 654 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है, जिससे उन्हें अपनी प्री-मैट्रिक शिक्षा बिना किसी बाधा के जारी रखने में सहायता मिली है। यह योजना लाखों परिवारों के लिए शिक्षा का आधार बन रही है। मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 में अब तक कुल 2,76,580 लाभार्थियों को कुल 142.01 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई है। मुख्यमंत्री अत्यंत पिछड़ा वर्ग मेधावृत्ति योजना मुख्यमंत्री अत्यंत पिछड़ा वर्ग मेधावृत्ति योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 में इस योजना से अब तक कुल 1,11,670 विद्यार्थियों (50,002 बालिकाएँ और 61,668 बालक) तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक कुल 1,07,172 विद्यार्थियों (49,370 बालिकाएँ और 57,802 बालक) को लाभ मिला है। इन सभी मेधावी विद्यार्थियों को प्रत्येक को 10 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए संचालित मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग मेधावृत्ति योजना ने भी अपनी प्रतिबद्धता साबित की है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में, इस योजना के तहत कुल 78,045 लाभार्थियों तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 70639 लाभार्थियों को प्रत्येक को 10 हजार रूपये की राशि वितरित की जा चुकी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार सरकार की इन प्रमुख छात्रवृत्ति योजनाओं से अब तक लगभग 55 लाख विद्यार्थियों को लगभग 832 करोड़ रुपये का लाभ मिला है। पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, बिहार सरकार, राज्य के सामाजिक और शैक्षणिक रूप से कमजोर वर्गों को आर्थिक सहायता प्रदान करने और उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य छात्रों को उनकी शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करना और समाज में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है, जिससे एक सशक्त, शिक्षित और समावेशी बिहार का निर्माण हो सके। विभाग भविष्य में भी इन वर्गों के सर्वांगीण विकास के लिए नए आयाम स्थापित करने के लिये संकल्पित है।  

DIG भुल्लर के रिश्वत कांड की जांच तेज, गृह मंत्रालय ने लिया मामला

चंडीगढ़ रोपड़ रेंज के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर पर लगे भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के आरोप अब नई मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। सीबीआई ने उनके खिलाफ ट्रायल शुरू करने के लिए गृह मंत्रालय से मंजूरी मांगी है, क्योंकि पंजाब सरकार के पास केवल निलंबन या ट्रांसफर का अधिकार है। जांच में भुल्लर के घर से 7.36 करोड़ नकद, 2.5 किलो सोना, 24 ब्रांडेड घड़ियां और विदेशी शराब बरामद हुई थी। पहले 8 लाख रुपये की रिश्वत का मामला दर्ज हुआ था, और बाद में आय से अधिक संपत्ति का केस भी जुड़ा। भुल्लर ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि पंजाब सरकार से सेंक्शन लिए बिना सीबीआई की कार्रवाई अवैध है। इस याचिका पर अब तक तीन बार सुनवाई हो चुकी है। इसके अलावा, भुल्लर ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी भी दाखिल की थी, जिसे सुनवाई से पहले ही वापस ले लिया गया। 

कनाडा में सख्त आव्रजन नियमों का असर, 55 हजार लोगों को किया गया देश से बाहर

हलवारा आव्रजन नियमों में सख्ती और डिपोर्टेशन के कारण कनाडा की जनसंख्या में ऐतिहासिक गिरावट आई है। सरकार की ओर से 2025 में 55,000 से अधिक लोगों को डिपोर्ट करने और आव्रजन प्रतिबंधों के कारण 4 करोड़ 18 लाख की आबादी वाला कनाडा अब तक की सबसे बड़ी जनसंख्या कमी से जूझ रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार कनाडा की जनसंख्या घटकर 4 करोड़ 16 लाख हो गई है जो जनसंख्या में गिरावट के रूप में इतिहास में दर्ज की गई है। आव्रजन नीति में सख्ती से कनाडा के शिक्षा क्षेत्र पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा है। शिक्षण संस्थानों में सन्नाटा छा गया है और कई निजी स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कटौती की गई है। पगार देने में असमर्थ होने के कारण कई संस्थान सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं लेकिन हालात में सुधार की कोई उम्मीद नहीं दिखती। इससे वहां के शैक्षणिक माहौल में भी मंदी आई है। कनाडा में शरणार्थियों की बढ़ती संख्या भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। यूक्रेन, अफगानिस्तान और कई मुस्लिम देशों से आए लाखों शरणार्थियों का बोझ कनाडा की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ रहा है। इन शरणार्थियों को प्रति माह 2,000 से 2,500 डॉलर का भत्ता और रहने की सुविधाएं देने से सरकार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है। भारतीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय छात्रों से हुई अरबों डॉलर की कमाई का बड़ा हिस्सा इन शरणार्थियों की देखभाल पर खर्च हो रहा है। इससे मूल निवासियों में असंतोष बढ़ा है और बेरोजगारी दर में वृद्धि हुई है। आव्रजन नीति में बदलाव कनाडा की प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में आव्रजन नीति में बड़े बदलाव आए हैं। 2022 में, पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने 2023 से 2025 तक 15 लाख प्रवासियों को स्वीकार करने का लक्ष्य रखा था लेकिन कार्नी सरकार के आने के बाद यह लक्ष्य घटाकर 12 लाख कर दिया गया।  अक्तूबर 2024 में नए लक्ष्य के तहत 2026 और 2027 के लिए आव्रजन लक्ष्यों में भी कटौती की गई। इसके परिणामस्वरूप, कनाडा के शिक्षा और श्रम बाजार पर प्रतिकूल असर पड़ा है। कनाडा में शरणार्थी आवेदन की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। 2022 में 161,000 शरण आवेदन दर्ज किए गए थे जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 505,000 तक पहुंचने की संभावना है। इससे कनाडा की आर्थिक स्थिति पर और दबाव बढ़ा है। इसके बावजूद, शरणार्थियों के लिए पहले की उदार नीतियों का असर आज कनाडा की स्थिति पर साफ नजर आ रहा है। सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ा कनाडा में शरणार्थियों की संख्या बढ़ने से सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ा है। शरणार्थियों को भत्ता देने और आवास की व्यवस्था करने में कनाडा की सरकार को भारी खर्च उठाना पड़ रहा है, जो देश की आर्थिक हालत को और भी कमजोर कर रहा है।    

निःशुल्क कानूनी सहायता से मजबूत हुआ न्याय तंत्र, आमजन का विश्वास बढ़ा: मदन राठौड़

जयपुर राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरणों की पारदर्शी और जवाबदेशी व्यवस्था से देश के आमजन में न्याय प्रणाली पर भरोसा मजबूत हुआ है। मोदी सरकार के नेतृत्व में देशभर में निःशुल्क विधिक सहायता को एक सुदृढ़, पारदर्शी और प्रभावी प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों द्वारा सभी राज्यों से मासिक गतिविधि रिपोर्ट प्राप्त कर नियमित समीक्षा की जाती है, जबकि वार्षिक रिपोर्ट संसद के समक्ष रखी जाती है। इसके अतिरिक्त संसदीय स्थायी समिति और विभिन्न राष्ट्रीय व क्षेत्रीय बैठकों के माध्यम से भी विधिक सेवा प्राधिकरणों के कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है। राठौड़ के सवाल पर केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन में यह जानकारी दी। राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने बताया कि राजस्थान में बड़ी संख्या में जरूरतमंद नागरिकों को निःशुल्क विधिक सेवाओं का लाभ मिला है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में राजस्थान में 20,290 लोगों को, 2024-25 में 22,216 लोगों को और 2025-26 में अक्टूबर 2025 तक 16,584 लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान की गई। यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि न्याय केवल कागज़ों तक सीमित नहीं, बल्कि आम जन तक वास्तविक रूप में पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए देशभर में व्यापक विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। बच्चों, श्रमिकों, आपदा पीड़ितों और दिव्यांगजनों के लिए शिविरों के साथ-साथ सरल भाषा में बुकलेट और पंपलेट वितरित किए जा रहे हैं। ग्रामीण भारत में न्याय जागरूकता को मजबूत करने के लिए नालसा की ‘जागृति’ योजना भी शुरू की गई है। राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने “सबको न्याय” के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए विधिक सेवा प्रणाली को नई मजबूती दी है।