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संविधान की नई पहचान: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संथाली भाषा में किया संविधान का विमोचन

नई दिल्ली  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में संथाली भाषा में भारत का संविधान जारी किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि यह सभी संथाली लोगों के लिए गर्व और खुशी की बात है कि भारत का संविधान अब संथाली भाषा में, ओल चिकी लिपि में उपलब्ध है। इससे वे संविधान को अपनी भाषा में पढ़ और समझ सकेंगे। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि इस वर्ष हम ओल चिकी लिपि की शताब्दी मना रहे हैं। उन्होंने विधि एवं न्याय मंत्री और उनकी टीम की प्रशंसा की, जिन्होंने शताब्दी वर्ष में भारत के संविधान को ओल चिकी लिपि में प्रकाशित करवाया। भारत के राष्ट्रपति के आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट में बताया गया, "अलचिकि लिपि में लिखित संताली भाषा में भारत के संविधान का लोकार्पण करते हुए मुझे हार्दिक प्रसन्‍नता हो रही है। यह हमारे लिए गौरव एवं प्रसन्नता की बात है कि भारत का संविधान संताली भाषा में प्रकाशित हुआ है।"पोस्ट में आगे लिखा गया, "संताली भाषा में संविधान का उपलब्ध होना समस्त संताली समुदाय के लिए अत्यंत हर्ष का विषय है। ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम और बिहार में रहने वाले सभी संताली लोग अपनी मातृभाषा एवं लिपि में लिखे गए संविधान को पूरी तरह जान सकेंगे। संविधान के अनुच्छेदों को वे ठीक से समझ सकेंगे।" इस कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल मौजूद रहे। बता दें कि संथाली भाषा, जिसे 2003 के 92वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था, भारत की सबसे प्राचीन जीवित भाषाओं में से एक है। यह झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में बड़ी संख्या में आदिवासी लोगों द्वारा बोली जाती है।

MP में SIR विवाद: भाजपा प्रवक्ता हितेष वाजपेयी का वोटर लिस्ट से नाम गायब, सियासी हलचल तेज

भोपाल मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए चुनाव आयोग द्वारा किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) में 42 लाख से अधिक नाम सूची से हटाए गए हैं। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डा.हितेष वाजपेयी ने स्थान परिवर्तन के लिए निर्धारित फार्म आठ आनलाइन जमा किया पर उनका नाम प्रारूप सूची से हटा दिया गया। बूथ लेवल आफिसर (बीएलओ) ने उन्हें अनुपस्थित श्रेणी की सूची में डाल दिया। इसी तरह प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता मिथुन अहिरवार का गणना पत्रक जमा हुआ। बीएलओ ने पावती भी दी पर उनका नाम भी सूची में नहीं आया। अब कहा जा रहा है कि फार्म छह भर दें, नाम सूची में जुड़ जाएगा। ऐसे एक-दो नहीं बल्कि कई प्रकरण सामने आ रहे हैं। उधर, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि 27 अक्टूबर 2025 को सूची फ्रीज कर दी गई थी।  प्रारूप मतदाता सूची में 5.31 करोड़ मतदाताओं के नाम आए और 42 लाख से अधिक नाम मृत, अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्ट होने के कारण हटाए गए। जो नाम हटाए, उनमें कुछ को लेकर आपत्ति सामने आ रही है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता हितेष वाजपेयी ने बताया कि उन्होंने आवास परिवर्तित किया है और नियमानुसार फार्म आठ ऑनलाइन भरकर सूचना चुनाव आयोग को दी। एसआइआर के प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल एजेंट ने संपर्क नहीं किया। जब चर्चा की तो बताया कि कि आप सूची में दर्ज स्थान पर नहीं पाए गए इसलिए आपका गणना पत्रक अनुपस्थित की श्रेणी में दर्ज कर दिया है। आप नाम जुड़वाने के लिए फार्म छह भर दीजिए। जबकि, वह फर्म आठ भर चुके हैं यानी स्थान परिवर्तन की प्रक्रिया कर चुके हैं इसलिए उन्हें नए स्थान पर गणना पत्रक मिलना चाहिए था। इसी तरह कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता मिथुन अहिरवार ने बताया कि वह आनंद नगर से अवधपुरी शिफ्ट हुए हैं। वहां बूथ लेवल आफिसर ने गणना पत्रक दिए। हमनें 2003 के एसआइआर की जानकारी के साथ उसे भर दिया। इसकी पावती भी बीएलओ ने दी लेकिन जब प्रारूप सूची देखी तो उसमें नाम ही नहीं है। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री संजय कामले का कहना है कि हमारे बूथ पर भी कुछ ऐसे नाम सूची में शामिल हैं, जो स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं। अब हम आपत्ति कर रहे हैं लेकिन सवाल यह है कि जब 22 लाख से अधिक मतदाता स्थायी रूप से स्थानांतरित की श्रेणी में रखे गए हैं तो फिर ये नाम शामिल कैसे हुए। संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आरपीएस जादौन का कहना है कि एसआइआर का काम पूरी पारदर्शिता के साथ हुआ है। बूथ लेवल आफिसरों ने मतदाताओं से संपर्क भी किया। दो बार अवधि बढ़ी, तब और सघनता से जो मतदाता नहीं मिले, उनका पता करने का प्रयास किया गया। आनलाइन फार्मों के बारे में निराकरण दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा। निर्धारित प्रक्रिया अनुसार यदि फार्म होंगे तो निश्चित ही अंतिम सूची में नाम आएंगे।

13 फरवरी 2026 को रिलीज होगी रणबीर कपूर की फिल्म ‘एनिमल’

मुंबई,  बॉलीवुड के रॉकस्टार रणबीर कपूर की सुपरहिट फिल्म ‘एनिमल’ 13 फरवरी 2026 को रिलीज हुयी थी। संदीप रेड्डी वांगा के निर्देशन में बनी फिल्म ‘एनिमल’ 2023 में रिलीज हुयी थी। इस फिल्म में रणबीर कपूर, बॉबी देओल, अनिल कपूर, रश्मिका मंदाना और तृप्ति डिमरी ने अहम भूमिका निभायी है। इस फिल्म ने वर्ल्डवाईड 915 करोड़ रूपये से अधिक की कमाई की थी। अब फिल्म एनिमल अब जापान में रिलीज होने जा रही है। फिल्म ‘एनिमल’ के प्रोड्यूसर्स में शामिल भद्रकाली फिल्म्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस फिल्म का पोस्टर शेयर कर लिखा कि यह फिल्म अब जापान आ रही है और इसे वहां भी बड़े पैमाने पर रिलीज किया जाएगा। पोस्ट के अनुसार फिल्म ‘एनिमल’ 13 फरवरी 2026 को जापानी सिनेमाघरों में रिलीज होगी।  

योगी सरकार का उद्देश्य, कोई भी पात्र छात्र आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रह जाए

सामान्य वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों पर समान रूप से लागू होगी व्यवस्था लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने छात्र हित में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। समाज कल्याण विभाग ने शैक्षिक सत्र 2025–26 के अंतर्गत संचालित दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना में समय पर मास्टर डेटा लॉक न हो पाने के कारण वंचित रह गए पात्र छात्र-छात्राओं को दोबारा अवसर प्रदान किया है। इसके लिए विभाग द्वारा संशोधित समय-सारिणी जारी की गई है। सभी वर्गों के विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ यह संशोधित व्यवस्था सामान्य वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों पर समान रूप से लागू होगी। योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र छात्र आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रह जाए। पारदर्शी और समयबद्ध होगी प्रक्रिया समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बताया कि संशोधित कार्यक्रम छात्रवृत्ति प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, त्रुटिरहित एवं समयबद्ध बनाने की दिशा में एक ठोस पहल है। इससे पात्र विद्यार्थियों को योजना का लाभ समय पर मिल सकेगा। मास्टर डेटा लॉक और सत्यापन की समय-सीमा समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि संशोधित कार्यक्रम के तहत शिक्षण संस्थानों द्वारा मास्टर डेटा तैयार करने की प्रक्रिया 23 दिसंबर 2025 से 2 जनवरी 2026 तक की जाएगी। विश्वविद्यालयों एवं एफिलिएटिंग एजेंसियों द्वारा फीस एवं छात्र संख्या का सत्यापन 23 दिसंबर से 9 जनवरी 2026 तक तथा जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा मास्टर डेटा और फीस का अंतिम सत्यापन 15 जनवरी 2026 तक पूरा किया जाएगा। सामान्य, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के लिए आवेदन प्रक्रिया सामान्य, ओबीसी एवं अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र 14 जनवरी 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवश्यक अभिलेखों सहित हार्ड कॉपी 21 जनवरी 2026 तक शिक्षण संस्थानों में जमा करनी होगी। संस्थान स्तर पर सत्यापन 27 जनवरी तक, विश्वविद्यालय स्तर पर वास्तविक छात्र सत्यापन 28 जनवरी से 7 फरवरी 2026 तक तथा एनआईसी द्वारा डेटा स्क्रूटनी 9 फरवरी 2026 तक की जाएगी। छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि 18 मार्च 2026 तक पीएफएमएस के माध्यम से आधार-सीडेड बैंक खातों में अंतरित की जाएगी। अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग को विशेष राहत अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के छात्र 31 मार्च 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। सभी प्रक्रियाएं पूर्ण होने के बाद अंतिम भुगतान 22 जून 2026 तक किया जाएगा। यह व्यवस्था सामाजिक न्याय की दिशा में योगी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। तिथियों के पालन की अपील उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह ने सभी शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों और विद्यार्थियों से अपील की है कि वे निर्धारित समय-सारिणी का कड़ाई से पालन करें, ताकि छात्रवृत्ति प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके।

जमीन घोटाले का पर्दाफाश: फर्जी वसीयत के जरिए कब्जे की साजिश, राजस्व अमले पर FIR

चरखी दादरी  दादरी जिले के बाढड़ा क्षेत्र में करोड़ों रूपये की कीमत वाली पैतृक जमीन पर अवैध कब्जा कराने के लिए फर्जी वसीयत तैयार करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्कालीन कानूनगो, पटवारी, नंबरदार और कुछ अन्य व्यक्तियों सहित कुल 10 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर के आरोप में मामला दर्ज किया है। शिकायतकर्ताओं कृष्ण कुमार, निवासी गोपी (वर्तमान पता गुडाना) और राजस्थान के रमेश कुमार ने पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में बताया कि उनके पिता पूर्ण, चाचा सुबराम और दादी छन्नी देवी के नाम गांव गोपी में जमीन दर्ज थी। आरोप है कि कब्जा कराने के लिए मृतक पूर्वजों के नाम से फर्जी वसीयतनामा तैयार किया गया और राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव करा दिया गया। जांच में खुलासा हुआ कि फरवरी 2022 में हुए इंतकाल नंबर 1349, 1350 और 1351 के समय संबंधित पटवारी अजीज अहमद ने इन्हें प्रमाणित नहीं किया था। बाद में पद पर न रहते हुए भी पटवारी रविंद्र ने हस्ताक्षर कर दिए। वहीं, उस दिन दस्तावेजों पर कानूनगो अवतार के हस्ताक्षर पाए गए, जबकि उस समय वास्तविक कानूनगो कपूर सिंह कार्यालय में मौजूद था। नंबरदार फतेह सिंह पर भी अधूरे वारिसान को सत्यापित करने के आरोप हैं। 

ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था से सायबर अपराध पर कसेगा शिकंजा

‘सुशासन दिवस’ पर मध्यप्रदेश पुलिस की अभिनव पहल डिजिटल युग में न्याय प्रक्रिया को मिली गति भोपाल  पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिवस को ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाए जाने की परंपरा के अनुरूप, मध्यप्रदेश पुलिस ने सुशासन को सशक्त करने की दिशा में नवाचार के रूप में ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था प्रारंभ की है। यह व्यवस्था 01 लाख रुपये से अधिक की सायबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में लागू की गई है। ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सायबर सुरक्षित भारत’ विज़न के अनुरूप है, जिसका उल्लेख उन्होंने अक्टूबर 2024 में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में किया था। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देशभर में सायबर अपराध से निपटने के लिये ऐतिहासिक एवं तकनीक-आधारित कदम उठाए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा ई-जीरो एफआईआर प्रणाली के क्रियान्वयन से यह स्पष्ट होता है कि तकनीक के माध्यम से न्याय प्रक्रिया को तेज और आम नागरिकों के लिए अधिक सरल, सुलभ और प्रभावी बनाया जा सकता है। मध्यप्रदेश में लागू यह प्रणाली पुलिस को अपराधियों से एक कदम आगे रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। प्रदेश में बढ़ते सायबर अपराधों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तकनीक के दुरुपयोग से जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री का मानना है कि जिस प्रकार स्वच्छता को हमने अपनी संस्कृति बनाया है, उसी प्रकार सायबर स्वच्छता को भी जन-आंदोलन बनाना होगा। प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था का संचालन पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री ए. साई मनोहर के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पुलिस को अधिक तेज, तकनीक-सक्षम और नागरिक-केंद्रित बनाना है। सायबर वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी प्रहार सायबर वित्तीय धोखाधड़ी आज पुलिस के समक्ष एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। कई बार पीड़ित की जीवनभर की कमाई कुछ ही क्षणों में अपराधियों के हाथों में चली जाती है, जिससे वह स्वयं को असहाय महसूस करता है। इसी पीड़ा को समझते हुए गृह मंत्रालय द्वारा ‘ई-जीरो एफआईआर’ की अवधारणा लागू की गई है, ताकि तकनीक को अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी हथियार बनाया जा सके। कानूनी आधार : BNSS और डिजिटल परिवर्तन जुलाई 2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानून ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (बीएनएसएस) नागरिक-केंद्रित हैं। इनका मूल उद्देश्य ‘दंड नहीं, बल्कि न्याय’ पर फोकस रहना है। बीएनएसएस की धारा 173 के अंतर्गत ‘जीरो एफआईआर’ को कानूनी मान्यता प्रदान की गई है, जिससे नागरिक देश में कहीं से भी, किसी भी क्षेत्राधिकार में घटित अपराध के लिए, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ई-जीरो एफआईआर: एक क्रांतिकारी व्यवस्था ‘ई-जीरो एफआईआर’ सायबर वित्तीय धोखाधड़ी—विशेषकर ₹1 लाख से अधिक की हानि के मामलों में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को अत्यंत तेज बनाती है। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्राधिकार संबंधी बाधाओं को समाप्त कर जांच प्रक्रिया को तत्काल प्रारंभ करना है। यह प्रणाली तीन प्रमुख डिजिटल मंचों का एकीकरण करती है। नेशनल सायबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी), I4सी (भारतीय सायबर अपराध समन्वय केंद्र) और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस)। ई-जीरो एफआईआर पंजीकरण की 5-चरणीय प्रक्रिया शिकायत दर्ज करना – पीड़ित 1930 हेल्पलाइन या NCRP पोर्टल पर शिकायत करता है। ₹1 लाख से अधिक की धोखाधड़ी होने पर डेटा सीधे भोपाल स्थित केंद्रीय सायबर पुलिस हब को भेजा जाता है। ऑटोमैटिक जनरेशन – सीसीटीएनएस सर्वर के माध्यम से शिकायत स्वतः ‘ई-जीरो एफआईआर’ में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ित को तुरंत ‘ई-जीरो एफआईआर’ नंबर उपलब्ध कराया दिया जाता है। समीक्षा एवं हस्तांतरण – राज्य स्तरीय सायबर पुलिस स्टेशन द्वारा समीक्षा कर प्रकरण संबंधित क्षेत्रीय पुलिस स्टेशन को भेजा जाता है। नियमित एफआईआर में परिवर्तन – शिकायतकर्ता को 3 दिन के अंदर नजदीकी सायबर पुलिस स्टेशन में ‘ई-जीरो एफआईआर’ को नियमित एफआईआर में परिवर्तित कराना होता है। सायबर अपराध में ‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व सायबर अपराध में धोखाधड़ी के बाद के पहले 2 घंटे को ‘गोल्डन ऑवर’ माना जाता है। यदि पीड़ित तुरंत 1930 पर संपर्क करता है, तो I4C एवं बैंकों के सहयोग से अपराधी के खाते में राशि पहुंचने से पहले ही उसे फ्रीज किया जा सकता है। ई-जीरो एफआईआर के माध्यम से आईपी लॉग, ट्रांजैक्शन आईडी जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य तत्काल और कानूनी रूप से सुरक्षित किए जाते हैं। ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था के प्रमुख लाभ ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था देश में कहीं से भी कहीं भी हुई सायबर या वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराती है। इससे क्षेत्राधिकार संबंधी बाधाओं से मुक्ति मिलती है, केस की स्थिति ऑनलाइन देखने की सुविधा मिलती है, शीघ्र एफआईआर से बैंकिंग चैनल सक्रिय, हो जाते हैं, राशि वापसी की संभावना अधिक हो जाती है साथ ही पोर्टल पर सीधे स्क्रीनशॉट और रसीदें अपलोड करने की सुविधा मिलने से आवश्यक दस्तावेज हमेशा उपलब्ध बने रहते हैं।  

मोहनलाल के साथ काम करना सौभाग्य की बात : एकता कपूर

मुंबई,  बॉलीवुड की जानीमानी फिल्मकार एकता कपूर का कहना है कि दक्षिण भारतीय फिल्मों के दिग्गज अभिनेता मोहन लाल के साथ काम करना उनके लिये सौभाग्य की बात है। एकता कपूर के लिये 2025 एक बेहतरीन साल रहा है। एकता कपूर के लिए, जिन्होंने विभिन्न फॉर्मेट्स और इंडस्ट्रीज़ में अपनी पकड़ और भी मजबूत की है। भारतीय मनोरंजन की दुनिया में 30 साल पूरे करने के साथ, एकता कपूर हाल ही में कथल के लिए अपना पहला नेशनल अवार्ड जीता, नेटफ्लिक्स के साथ एक सहयोग की घोषणा की, और लोकप्रिय टीवी सीरियल क्योंकी सास भी कभी बहू थी को स्मृति ईरानी के साथ सफलतापूर्वक वापस लाया। इस साल के कई माइलस्टोन में से एक था बालाजी का मलयालम सिनेमा में प्रवेश, जिसने इस बैनर की रचनात्मक क्षमता को और विस्तारित किया। एकता कपूर ने अपने पहले मलयालम फिल्म प्रोजेक्ट में अभिनेता मोहनलाल के साथ काम करने के अपने अनुभव पर उनके प्रति अपनी श्रद्धा जताई। उन्होंने कहा कि बालाजी के लिए मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखना बहुत बड़ा सम्मान है। मोहनलाल हमारे समय के सबसे पूजनीय कलाकार हैं। जब यह प्रोजेक्ट हमारे पास आया, तो हमें लगा जैसे यह ईश्वर की ओर से एक संकेत है, और हमें आखिरकार मलयालम सिनेमा में एक ऐसे कंटेंट का हिस्सा बनने का मौका मिला, जहां सबसे अधिक उत्कृष्ट सामग्री तैयार होती है।  

प्रदूषण पर व्यंग्य बना कानूनी मुसीबत, सांता क्लॉज वीडियो को लेकर AAP नेताओं पर केस दर्ज

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस ने AAP नेता सौरभ भारद्वाज, संजय झा और आदिल अहमद खान के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह FIR सांता क्लॉज़ से जुड़ा एक वीडियो बनाकर धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में दर्ज की गई है। इस मामले में प्राप्त शिकायत के अनुसार 17 और 18 दिसंबर 2025 को इन नेताओं ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स से एक वीडियो पोस्ट किया था। यह वीडियो कनॉट प्लेस में किए गए एक राजनीतिक स्किट (प्रदर्शन) से जुड़ा है। वीडियो में सांता क्लॉज, जो कि ईसाई समुदाय के लिए एक पवित्र और सम्मानित धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीक हैं, को मजाकिया और अपमानजनक तरीके से दिखाया गया है। वीडियो में सांता क्लॉज को सड़क पर बेहोश होकर गिरते हुए दिखाया गया और उन्हें राजनीतिक संदेश देने के लिए एक प्रॉप (साधन) की तरह इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं, वीडियो में नकली CPR करते हुए सांता क्लॉज का मजाक भी उड़ाया गया, जिससे सेंट निकोलस और क्रिसमस पर्व की पवित्रता को ठेस पहुंची। शिकायत में कहा गया है कि यह सब जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से किया गया, ताकि ईसाई समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया जा सके। एडवेंट के अंतिम दिनों में धार्मिक प्रतीक का इस तरह राजनीतिक इस्तेमाल करना ईसाई धर्म का अपमान माना गया है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, सार्वजनिक रूप से किसी धार्मिक प्रतीक का मजाक उड़ाना BNS की धारा 302 का उल्लंघन है। दिल्ली पुलिस ने मामले में संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। यह मामला अधिवक्ता खुशबू जॉर्ज की शिकायत पर दर्ज किया गया है। आम आदमी पार्टी ने उन्हें भाजपा कार्यकर्ता बताया है। साथ ही भाजपा नेताओं के साथ उनके कुछ फोटोज भी शेयर किए हैं। ‘तब भाजपा के किसी ईसाई कार्यकर्ता की धार्मिक भावना आहत नहीं हुई’ उधर इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'सांता क्लॉज की स्किट पर FIR हो गई है। सोशल मीडिया और आप लोगों की ताक़त से आज भाजपा बहुत परेशान हैं। ये सोशल मीडिया की ताक़त है कि भाजपा सरकार को प्रदूषण पर जवाब देना पड़ रहा है, AQI पर चर्चा हो रही है। सांता क्लॉज की स्किट से हमने प्रदूषण के मुद्दे को जन जन तक पहुँचाया, जिससे दिल्ली और केंद्र की सरकार को काफ़ी परेशानी है। ये सोशल मीडिया की ताक़त है कि अरावली पर्वतमाला पर सरकार बैकफुट पर आई है। कुलदीप सिंह सेंगर वाला मामला और उत्तराखंड की अंकिता भंडारी वाला मामला भी उल्टा पड़ रहा है।' इसके आगे उन्होंने लिखा, 'अब डराने, धमकाने के लिए ED, CBI, दिल्ली पुलिस की FIR का दौर चल रहा है। संघियों का प्रॉपगेंडा अब एक्सपोज़ हो रहा है तो डर रहे हैं। अभी इनको और Expose करना है और भी डराना है। भाजपा के ही कार्यकर्ता अब ईसाई का मुखौटा लगाकर कह रहे है , उनकी धार्मिक भावना आहत हो गई, और पुलिस FIR दर्ज कर रही है। जब दिल्ली के लाजपत नगर में सांता क्लॉज की टोपियाँ खींची गई, धमकाया गया, गाली देकर भगाया गया, तब किसी भाजपा के ईसाई कार्यकर्ता की धार्मिक भावना आहत नहीं हुई। जिसकी धार्मिक भावना आहत हुई है उनकी भाजपा के नेताओं के साथ तस्वीर ही तस्वीर है, इनको मुफ्त की पब्लिसिटी नहीं देना।'  

छुट्टियों के ऐलान के साथ पंजाब सरकार का कड़ा आदेश, लापरवाही पर होगी कार्रवाई

अमृतसर  पंजाब सरकार द्वारा घोषित की गई सर्दियों की 24 दिसम्बर से 1 जनवरी तक छुट्टियों में छात्रों और अध्यापकों को स्कूल बुलाने वाले स्कूलों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिला शिक्षा अधिकारी सैकेंडरी राजेश शर्मा द्वारा सरकारी आदेशों को जमीनी स्तर तक पालना करवाने के लिए विशेष चैकिंग टीम का गठन किया है। अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि लिखित शिकायत प्राप्त होने पर, तथ्यों के आधार पर संबंधित स्कूल के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।जिला शिक्षा अधिकारी राजेश शर्मा ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा 24 दिसम्बर से 1 जनवरी तक सर्दियों की छुट्टियां की गई है। सरकार के ये आदेश सरकारी, निजी और एडिड स्कूलों पर लागू होते हैं। आज सरकार द्वारा घोषित अवकाश का पहला दिन था, लेकिन रणजीत एवेन्यू स्थित एक स्कूल द्वारा स्कूल लगाया गया, जिसमें छात्र और अध्यापक उपस्थित थे। विभाग के संज्ञान में आने पर उक्त स्कूल को छुट्टियों के दौरान बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने बच्चों और अध्यापको के स्वास्थ्य और जान-माल की सुरक्षा के लिए सर्दियों के दौरान छुट्टियों की घोषणा की है। यदि उक्त समय के दौरान किसी छात्र या अध्यापक को कोई नुकसान पहुंचता है तो संबंधित स्कूल का प्रमुख इसके लिए प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार होगा। सरकारी आदेशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए जिला शिक्षा उप अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया है, जो जिले भर में स्कूलों को खोलने के संबंध में प्राप्त शिकायतों पर लगातार तत्काल कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित स्कूल के खिलाफ शिकायत सही पाई जाती है तो सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी और संबंधित स्कूल की एफिलेशन रद्द करने के लिए विभाग को पत्र लिखा जाएगा।

निर्यात एवं एक जिला-एक उत्पाद पर हुई कार्यशाला

भोपाल  ग्वालियर में आयोजित हुई "मध्यप्रदेश अभ्युदय ग्रोथ समिट" में निर्यात को प्रोत्साहित करने, राज्य के उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने तथा “एक जिला-एक उत्पाद” योजना पर कार्यशाला हुई। कार्यशाला में सरकार, निर्यात प्रोत्साहन परिषदों, वित्तीय संस्थानों, उद्योग जगत तथा एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यशाला में पद्मश्री डॉ. मिलिंद कांबले संस्थापक चेयरमैन डीआईसीसीआई ने सामाजिक रूप से समावेशी उद्यमिता, स्टार्ट-अप्स एवं एमएसएमई के सशक्तिकरण तथा निर्यात से रोजगार सृजन की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने ओडीओपी पहल को स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रभावी माध्यम बताया। एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक श्री चन्द्रमौली शुक्ला ने मध्यप्रदेश को एक उभरते हुए औद्योगिक और निर्यात हब के रूप में स्थापित करने के लिये राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों, बुनियादी ढांचे के विकास तथा निवेश अनुकूल नीतियों पर प्रकाश डाला। महानिदेशक एसईपीसी डॉ. अभय सिन्हा ने “वैश्विक बाजार में मध्यप्रदेश की स्थिति” विषय पर अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने राज्य के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों, अंतर्राष्ट्रीय मांग, गुणवत्ता मानकों तथा बाजार विस्तार की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यशाला में अतिरिक्त महानिदेशक एफआईईओ श्री सुविद शाह ने मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की उपयोगिता, टैरिफ जोखिमों को कम करने तथा निर्यातकों को मिलने वाले लाभों की व्यावहारिक जानकारी साझा की। इंजीनियरिंग क्षेत्र में निर्यात की संभावनाओं पर अतिरिक्त कार्यकारी निदेशक ईईपीसी इंडिया श्री रजत श्रीवास्तव ने राज्य की औद्योगिक क्षमताओं, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी और तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता पर जोर दिया। एक्सिस बैंक के श्री आनंद सिंह, उप महाप्रबंधक एवं क्षेत्रीय प्रमुख ने निर्यात वित्त पोषण, क्रेडिट सहायता, जोखिम प्रबंधन तथा बैंक की विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। क्षेत्र-विशेष सत्रों में श्री तिलक खिंदर, प्रबंध निदेशक, रतन ब्रदर्स समूह ने मध्य प्रदेश से खेल सामग्री एवं एक्सेसरीज़ के निर्यात की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। समिट में श्री आशीष जायसवाल, स्पाइसेज़ बोर्ड ने मसालों के उत्पादन, गुणवत्ता प्रमाणन, ब्रांडिंग और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में निर्यात के अवसरों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। कार्यशाला में ओडीओपी उत्पादों के माध्यम से स्थानीय कारीगरों, किसानों, एमएसएमई इकाइयों और उद्यमियों को निर्यात से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया। समिट में निर्यात से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों और समाधानों पर चर्चा हुई।