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आयुष दवाओं की क्वालिटी टेस्टिंग के लिए 108 लैब अप्रूव, झूठे और भ्रामक विज्ञापनों पर गिरेगी गाज

 नई दिल्ली  क्या आप अपनी सेहत के लिए आयुर्वेद, सिद्ध या यूनानी दवाओं पर भरोसा करते हैं? अगर हां, तो सरकार ने इन दवाओं की विश्वसनीयता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। केन्‍द्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने जानकारी दी है कि इन दवाओं की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए 108 प्रयोगशालाओं को मंजूरी दे दी गई है। इसका सीधा मतलब है कि अब बाजार में मिलने वाली आयुष दवाओं की जांच और भी सख्ती से होगी। लैब और इंफ्रास्ट्रक्चर को मिली मजबूती आयुष मंत्री के मुताबिक, ये सभी 108 लैब 'ड्रग्स रूल्स, 1945' के तहत मंजूर यानी लाइसेंस प्राप्त हैं। बता दें, सरकार ने सिर्फ नई प्रयोगशालाओं को मंजूरी ही नहीं दी है, बल्कि मौजूदा ढांचे को भी मजबूत किया है:     देश भर में 34 स्टेट ड्रग टेस्टिंग लैबोरेटरीज की क्षमता बढ़ाई गई है।     सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेद साइंसेज (CCRAS) के तीन क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थानों को भी ड्रग्स रूल्स 1945 के नियम 160E के तहत मंजूरी दी गई है। अक्सर देखा जाता है कि दवाओं को लेकर बढ़ा-चढ़ाकर दावे किए जाते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए सरकार ने एक खास निगरानी कार्यक्रम लागू किया है, जो कि 'आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना' (AOGUSY) के तहत काम करता है। इसके लिए तीन स्तरों पर एक नेटवर्क तैयार किया गया है:     एक नेशनल फार्माकोविजिलेंस सेंटर (NPvCC)     पांच इंटरमीडियरी फार्माकोविजिलेंस सेंटर (IPvCs)     देश भर में 97 पेरिफेरल फार्माकोविजिलेंस सेंटर (PPvCs) इन सेंटर्स का मुख्य काम भ्रामक विज्ञापनों पर नजर रखना और उनकी रिपोर्ट राज्य के अधिकारियों को देना है, ताकि गलत दावे करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके। इसके अलावा, इसका मकसद उपभोक्ताओं की सुरक्षा करना है। जागरूकता और सर्टिफिकेशन पर जोर सरकार लोगों को जागरूक करने और दवाओं की क्वालिटी सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रही है:     जागरूकता अभियान: अब तक देश भर में 3,533 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जिनसे 3,18,575 लोगों को लाभ हुआ है।     सर्टिफिकेशन: आयुष मंत्रालय दवा निर्माताओं को प्रोत्साहित कर रहा है कि वे 'विश्व स्वास्थ्य संगठन' के दिशा-निर्देशों के अनुसार और 'क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया' से अपनी दवाओं का सर्टिफिकेशन हासिल करें। योजना के लिए 122 करोड़ का है बजट आयुष फार्मेसी और ड्रग टेस्टिंग लैब को उच्च स्तर का बनाने के लिए सरकार ने AOGUSY योजना के तहत साल 2021-22 से 2025-26 तक के पांच वर्षों के लिए 122.00 करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन किया है। इससे आयुष दवाओं के निर्माण और जांच की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है।  

कश्मीर को मात देती सर्दी! झारखंड के कई जिलों में ठिठुरन बढ़ी, येलो अलर्ट जारी

नई दिल्ली भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के रांची स्थित केंद्र ने सोमवार को झारखंड के कई हिस्सों में शीत लहर और घने कोहरे की स्थिति को लेकर येलो अलर्ट जारी किया। मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के बुलेटिन के अनुसार, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, खूंटी और रांची के लिए शीत लहर का येलो अलर्ट जारी किया गया है। छह जिलों में घने कोहरे के लिए अलर्ट जारी इन जिलों में मंगलवार सुबह 8:30 बजे तक भीषण ठंड का प्रकोप जारी रहने की संभावना है। रांची के पास स्थित कांके राज्य का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां तापमान 2.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अतिरिक्त, गढ़वा, पलामू, लातेहार, चतरा, हजारीबाग और कोडरमा सहित छह जिलों में घने कोहरे के साथ ‘शीत दिवस' के लिए और गिरिडीह, देवघर, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ सहित अन्य छह जिलों में केवल घने कोहरे के लिए अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विज्ञान विभाग के बुलेटिन के अनुसार, इन जिलों में दृश्यता घटकर 50 से 200 मीटर के बीच रहने का अनुमान है। इसके अलावा इन जिलों में 31 दिसंबर को सुबह 8:30 बजे तक घना कोहरा छाए रहने का भी अनुमान है। रांची मौसम विज्ञान केंद्र के उप निदेशक अभिषेक आनंद ने कहा, "झारखंड के निचले क्षोभमंडलीय स्तरों में चलने वाली उत्तर-पश्चिमी से पश्चिमी हवाओं के कारण शीतलहर की स्थिति उत्पन्न हो रही है।" आईएमडी के बुलेटिन के अनुसार, पिछले 24 घंटों में लोहरदगा में न्यूनतम तापमान 3.7 डिग्री सेल्सियस, खूंटी में चार डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि डाल्टनगंज में पारा गिरकर 6.1 डिग्री सेल्सियस तक चला गया। रांची में न्यूनतम तापमान 6.2 डिग्री सेल्सियस रहा।  

स्वाद में देसी, पहचान में ग्लोबल: जामुन-आम से बनी भारतीय वाइन ने जीता दुनिया का दिल

नई दिल्ली भारत में बनने वाली वाइन अब सिर्फ अंगूर तक सीमित नहीं रही है। फलों से तैयार की गई भारतीय वाइन, खासतौर पर बिना अंगूर वाली वाइन, अब धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी अलग पहचान बना रही हैं। घरेलू बाजार में बिक्री की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रहने के बीच अब भारतीय वाइन निर्माता अपना फोकस विदेशों की ओर बढ़ा रहे हैं, जहां ‘मेड इन इंडिया’ वाइन को नए स्वाद और नई पहचान के तौर पर देखा जा रहा है। निर्यात में रिकॉर्ड बढ़त दर्ज इकोनॉमिक टाइम्स (ET) की एक रिपोर्ट में ट्रेड रिसर्च संस्था GTRI के हवाले से बताया गया है कि मौजूदा वित्त वर्ष के पहले सात महीनों में भारत से वाइन का निर्यात बढ़कर करीब 6.7 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। हालांकि अभी भी एक्सपोर्ट में अंगूर से बनी वाइन का दबदबा बना हुआ है, लेकिन इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि अब विदेशी ग्राहक भारतीय फलों से बनी वाइन में भी तेजी से रुचि दिखा रहे हैं। जामुन, आम और सेब से बनी वाइन की बढ़ती लोकप्रियता जामुन के अलावा कश्मीरी सेब और अल्फांसो आम से तैयार की गई वाइन पहले ही विदेशी बाजारों में अपनी जगह बना चुकी हैं। पुणे स्थित एक वाइनरी ब्रिटेन (UK) को आम से बनी वाइन का निर्यात कर रही है, जबकि कश्मीरी सेब से बनी क्राफ्ट साइडर ब्रिटेन के कुछ चुनिंदा बाजारों में उपलब्ध है। इन उत्पादों ने यह साबित कर दिया है कि भारत में उगने वाले फलों की विविधता वाइन इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा अवसर बन सकती है। विदेशी बाजारों में क्यों बढ़ रही भारतीय वाइन की मांग इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी पर्यटक और ग्राहक नए-नए फ्लेवर और अनोखे स्वाद को आजमाने के लिए हमेशा उत्सुक रहते हैं। यही वजह है कि UAE, अमेरिका और यूरोप जैसे बाजारों में भारतीय वाइन की मांग लगातार बढ़ रही है। हालांकि ज्यादा टैक्स और इंपोर्ट ड्यूटी के कारण कीमतें एक चुनौती बनी रहती हैं, लेकिन इसके बावजूद यह कारोबार वाइन मेकर्स और विदेशी इंपोर्टर्स दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। जामुन वाइन की ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय एंट्री हाल ही में मुंबई से अमेरिका के लिए लगभग 800 केस वाइन की एक खास खेप भेजी गई, जिसमें जामुन से बनी भारतीय वाइन शामिल थी। यह पहली बार है जब जामुन से तैयार की गई वाइन अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंची है। महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में स्थित सेवन पीक्स वाइनरी में बनी यह वाइन अब न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी के चुनिंदा रेस्टोरेंट्स में परोसी जाएगी। जामुन जैसे आम लेकिन विशिष्ट भारतीय फल से बनी वाइन का विदेशी ग्राहकों तक पहुंचना भारतीय वाइन इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। भारत में वाइन उद्योग और सामने मौजूद चुनौतियां भारत में वाइन निर्माण अभी भी एक उभरता हुआ क्षेत्र है, जिसकी शुरुआत लगभग तीन दशक पहले हुई थी। देश का वाइन बाजार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसमें अभी भी इंपोर्टेड वाइन की हिस्सेदारी ज्यादा है। वहीं, नॉर्थ-ईस्ट भारत जैसे क्षेत्रों में कीवी और चावल से बनी पारंपरिक वाइन को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की कोशिशें जरूर हुईं, लेकिन सरकारी सपोर्ट और सब्सिडी की कमी के कारण निरंतर एक्सपोर्ट करना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है। इसके बावजूद, फलों से बनी भारतीय वाइन की बढ़ती वैश्विक मांग यह संकेत देती है कि आने वाले समय में यह सेक्टर और तेजी से आगे बढ़ सकता है।  

भोपाल का रुतबा बढ़ेगा, 1756 गांव और तहसीलों का होगा विकास, ग्रेटर भोपाल में होगा अहमदाबाद जैसा बदलाव

 भोपाल  नए साल में भोपाल सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक विशाल महानगर (मेट्रोपॉलिटन रीजन) के रूप में अपनी पहचान दर्ज कराएगा। गुजरात के अहमदाबाद की सेप्ट (सीईपीटी) यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर एक ऐसा सुपर मैप तैयार किया जा रहा है, जो भोपाल के साथ सीहोर, रायसेन, विदिशा और राजगढ़ की सीमाओं को एक सूत्र में पिरो देगा। भोपाल की धड़कन इन जिलों में एक साथ सुनाई देगी अब भोपाल की धड़कन सीहोर, रायसेन, विदिशा और राजगढ़ में एक साथ सुनाई देगी। मेट्रोपालिटन अथॉरिटी ने हर शहर को उसकी ताकत के अनुसार एक नया रोल दिया है। पांच शहर, पांच अलग पहचान     भोपाल : सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और एडमिनिस्ट्रेटिव हब।     सीहोर व रायसेन : भोपाल के नए इंडस्ट्रियल पावरहाउस।     विदिशा : दुनिया के नक्शे पर चमकता हेरिटेज हब।     राजगढ़ : खेती और उद्योग का एक अनोखा संगम। पहले चरण में 8,791 वर्ग किमी क्षेत्र फाइनल फिलहाल पहले चरण में 8,791 वर्ग किमी का क्षेत्रफल फाइनल किया गया है। जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 10 हजार वर्ग किमी किया जाएगा। बीडीए के अधिकारी इस प्रोजेक्ट को नए साल में राकेट की रफ्तार देने वाले हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा वॉटर मैनेजमेंट और कमर्शियल लैंड के सर्वे से होगा, जिससे भविष्य में पानी की किल्लत नहीं होगी और उद्योगों के लिए पर्याप्त जमीन मिलेगी। विकास के साथ ग्रीन कवच भी भोपाल अपनी हरियाली के लिए जाना जाता है। इसलिए मेट्रोपॉलिटन रीजन में उपजाऊ जमीन और पर्यावरण से कोई समझौता नहीं होगा। प्रदूषण नियंत्रण और हरियाली के लिए अलग से कैपिटल इन्वेस्टमेंट प्लान बनाया जा रहा है। कनेक्टिविटी: अब सिर्फ सड़कें नहीं, बल्कि सैटेलाइट टाउन्स और ग्रोथ सेंटर भोपाल को जोड़ेंगे। रोजगार के अवसर : पांच जिलों के जुड़ने से आइटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लाखों नौकरियां पैदा होंगी। रियल एस्टेट : आसपास के क्षेत्रों में जमीन की कीमतों और निवेश में उछाल की संभावना। इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (IMR) के विस्तार पर विचार, भविष्य में होगा बड़ा बदलाव इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (आइएमआर) के विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज है। माना जा रहा है कि इससे औद्योगिकीकरण, निवेश, रोजगार और निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी, लेकिन विशेषज्ञों का साफ कहना है कि विस्तार से पहले सुधार जरूरी है, वरना यह महत्वाकांक्षी योजना शहर के लिए भारी पड़ सकती है। शहर का क्षेत्रफल बढ़ने से आसपास के ग्रामीण इलाके शहरी दायरे में आएंगे, जिससे नए औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब और रोजगार के अवसर बन सकते हैं। इंदौर के कई उत्पाद पहले से ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान रखते हैं, जिन्हें मेट्रोपॉलिटन रीजन का फायदा मिल सकता है। जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार इंदौर को एक बड़े मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित कर रही है, जिसमें इंदौर, उज्जैन, देवास, धार और शाजापुर जिलों के लगभग 1756 गांवों और कई तहसीलें शामिल होंगी, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र का समग्र विकास, औद्योगीकरण और बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है एक्सपर्ट बोलेः योजना के बिना विस्तार विनाशकारी अर्थशास्त्री एवं डीएवीवी के प्रोफेसर कन्हैया आहूजा का कहना है कि सिर्फ क्षेत्रफल बढ़ाने से कोई शहर स्मार्ट या विकसित नहीं बनता। ट्रांसपोर्ट, जल आपूर्ति, स्वास्थ्य व इंफ्रास्ट्रक्चर की दीर्घकालिक योजना नहीं बनी तो शहर अव्यवस्थित शहर में बदल जाएगा। अवसर बड़े लेकिन चुनौतियां उससे भी बड़ी विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान हालात में इंदौर बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। यदि इन समस्याओं को दूर किए बिना मेट्रोपॉलिटन रीजन का विस्तार किया गया, तो शहरी दबाव कई गुना बढ़ जाएगा। क्या होना चाहिए प्राथमिक एजेंडा ? -पब्लिक ट्रांसपोर्ट का मजबूत नेटवर्क -मेट्रो परियोजना को पूर्ण क्षमता से चालू करना -बस परिवहन को फिर से सशक्त बनाना -जल आपूर्ति और सीवरेज सिस्टम का विस्तार -स्वास्थ्य और शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश -औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संतुलन मेट्रोपोलिटन रीजन का विस्तार इंदौर को औद्योगिक, आर्थिक और निर्यात के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है, लेकिन यह तभी संभव है, जब विस्तार से पहले सुधार और सपनों के साथ सिस्टम पर भी बराबर काम किया जाए, वरना मेट्रोपोलिटन रीजन का सपना, शहरी संकट में बदल सकता है। कहां-कहां पिछड़ रहा है इंदौर ? 1- इंफ्रास्ट्रक्चर शहर की सड़कों, फ्लाईओवर, ड्रेनेज और शहरी ढांचे का विकास बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के अनुपात में नहीं हो पाया है। कई इलाकों में ट्रैफिक जाम और जलभराव आम समस्या बन चुके हैं। 2- पब्लिक ट्रांसपोर्ट सबसे कमजोर कड़ी मेट्रो परियोजना अब भी अधूरी, बीआरटीएस बंद हो चुका है और सरकारी बस परिवहन सीमित है। नतीजा यह है कि शहर के अधिकांश नागरिक निजी वाहनों पर निर्भर हैं, जिससे ट्रैफिक और प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। 3- सड़कों और कनेक्टिविटी की कमी नईकॉलोनियों और बाहरी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी कमजोर है। सड़कों की गुणवत्ता और क्षमता दोनों ही जरूरत से कम हैं, जिससे रोजमर्रा की आवाजाही चुनौती बन गई है। 4- पानी बना सबसे बड़ा नर्मदा जल योजना का तीसरा चरण अधूरा है। वर्तमान में शहर की 35-40 प्रतिशत आबादी तक नर्मदा का पानी नहीं पहुंच रहा। यदि मेट्रोपॉलिटन रीजन का विस्तार हुआ तो जल आपूर्ति की मांग कई गुना बढ़ेगी, जो भविष्य के लिए बड़ा खतरा है। 5- स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ेगा बोझ क्षेत्र विस्तार के साथ आबादी बढ़ेगी। ऐसे में अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बढ़ना तय है। अभी से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना अनिवार्य होगा।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने दी बड़ी व्याख्या, विदेश में रहने वाले पति-पत्नी का तलाक विदेश में हो सकता है

कलकत्ता  कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी व्याख्या करते हुए कहा है कि यदि पति या पत्नी में से कोई एक विदेश में निवास कर रहा है, तो भारत में संपन्न हुई शादी के बावजूद विदेशी अदालत में तलाक के मामले की सुनवाई की जा सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून में ऐसी किसी प्रक्रिया पर पूर्ण रोक नहीं है। यह फैसला न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति सुप्रतिम भट्टाचार्य की खंडपीठ ने उस मामले में दिया, जिसमें तलाक के अधिकार क्षेत्र (ज्यूरिस्डिक्शन) को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था। मामला क्या था मामले के अनुसार, दंपती का विवाह 15 दिसंबर 2018 को कोलकाता में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। पति ने 4 सितंबर 2024 को कोलकाता की अलीपुर अदालत में तलाक की याचिका दायर की। इसके बाद 10 अक्टूबर 2024 को पत्नी ने ब्रिटेन की एक अदालत में तलाक और भरण-पोषण (मेंटेनेंस) का मामला दाखिल किया। पत्नी का कहना था कि वह वर्ष 2015 से ब्रिटेन में पहले छात्र वीजा और बाद में वर्क वीजा पर रह रही है, और पति-पत्नी के रूप में उनका अंतिम साझा निवास भी ब्रिटेन में ही था। निचली अदालत का फैसला और हाई कोर्ट की दखल ब्रिटेन की अदालत ने मई 2025 में पति को भरण-पोषण देने का आदेश दिया था, लेकिन अलीपुर की निचली अदालत ने इस आदेश पर रोक लगा दी। निचली अदालत का मानना था कि चूंकि पति ने पहले भारत में तलाक की अर्जी दी थी और पत्नी के पास ब्रिटेन की स्थायी नागरिकता नहीं है, इसलिए विदेशी अदालत को अधिकार क्षेत्र प्राप्त नहीं है। हालांकि, कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस निर्णय को पलट दिया। हाई कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां हाई कोर्ट ने कहा कि पति ने स्वयं ब्रिटेन की अदालत में उपस्थित होकर गवाही और साक्ष्य प्रस्तुत किए थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह वहां की न्यायिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल था। ऐसे में वह बाद में उस अदालत के अधिकार क्षेत्र पर सवाल नहीं उठा सकता। कोर्ट ने पति के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि ब्रिटेन में तलाक का आधार, विवाह का पूरी तरह टूट जाना, भारतीय कानून के अंतर्गत मान्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णय का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि जब वैवाहिक संबंध इस हद तक बिगड़ जाएं कि उनके सुधरने की कोई संभावना न बचे, तो इसे क्रूरता के समान माना जा सकता है और यह तलाक का वैध आधार हो सकता है। विदेशी अदालतों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यद्यपि हिंदू विवाह अधिनियम में जिला अदालत से तात्पर्य सामान्यतः भारतीय अदालतों से है, लेकिन बदलते वैश्विक परिप्रेक्ष्य में विदेशी अदालतों की सुनवाई को पूरी तरह अमान्य नहीं ठहराया जा सकता।  

2500 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली तीसरी रेल लाइन निर्माण में तेजी, 361 पुल और 4 टनल होंगे शामिल

 इटारसी भोपाल-इटारसी के बाद अब इटारसी-आमला के बीच तीसरी रेल लाइन का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। आमला से इटारसी के बीच 130 किमी क्षेत्र में तीसरी रेल लाइन बिछाने के लिए मिट्टी का बेस तैयार किया जा रहा है। जिसके बाद आगे काम होगा। 40 गांवों से ली गई 16 हेक्टेयर जमीन नर्मदापुरम और बैतूल जिले में जमीन अधिग्रहण में हुई देरी की वजह से इटारसी-आमला (Itarsi-Amla third railway line) सेक्शन में निर्माण कार्य देरी से शुरू हुआ। तीसरी रेल लाइन प्रोजेक्ट के लिए बैतूल जिले के 3 तहसीलों के 40 गांवों में रहने वाले 290 किसानों की 16.036 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई है। तीसरी रेलवे लाइन का काम पूरा होने के बाद रेल यातायात ओर बेहतर होने की उम्मीद है। खास बात यह भी है कि इस रेल रूट पर घाट सेक्शन होने की वजह से भी यातायात में परेशानी आती है। तीसरी लाइन बनने के बाद राहत मिलने की उम्मीद है। चार स्थानों पर बनेंगे टनल तीसरी लाइन के लिए मरामझिरी-धाराखौह घाट सेक्शन में चार स्थानों पर कुल 1.40 किमी लंबी सुरंग बनाई जाएगी। इटारसी से नागपुर के बीच 267 किलोमीटर की लंबाई में तीसरी लाइन बिछाई जाना है। जिसके बीच 27 रेलवे स्टेशन आएंगे। साथ ही 361 पुल-पुलियाओं का निर्माण भी किया जाएगा। प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे 2525 करोड़ से अधिक भोपाल से इटारसी तक तीसरी लाइन बिछाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। रेलवे द्वारा इटारसी से नागपुर के बीच तीसरी लाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है। प्रोजेक्ट पर 2525.73 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। वर्तमान में जो रेलवे लाइन मौजूद है, उसके समानांतर ही तीसरी लाइन बिछाने के लिए मिट्टी का बेस बनाया जा रहा है। इसलिए जरूरी तीसरी लाइन वर्तमान में रेलवे के पास नागपुर-इटारसी सेक्शन में केवल दो लाइन हैं। इन लाइनों से यात्री और और गुड्स ट्रेनों का संचालन किया जाता है। यात्री गाड़ियों को निकालने के लिए अक्सर गुड्स ट्रेनों को घंटों तक कहीं भी रोक दिया जाता है। इन्हीं समस्याओं के चलतेतीसरी लाइन बिछाई जा रही है. ताकि यात्री ट्रेनों के लिए गुड्स ट्रेनों को न रोकना पड़े और वे भी सही समय पर पहुंच सके। (MP News) बेहतर होगा रेल यातायात… रेल यातायात को बेहतर बनाने के लिए निर्माण कार्य हो रहे हैं। भोपाल-इटारसी के में तीसरी लाइन के बाद इटारसी से नागपुर के बीच भी तीसरी रेल लाइन का काम कराया जा रहा है। – नवल अग्रवाल, पीआरओ रेल मंडल भोपाल

UPPCL का ऐलान: जनवरी में यूपी के बिजली बिल पर 2.33% की राहत, यूपी वालों के लिए खुशखबरी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में नए साल पर बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ा तोहफा दिया गया है. बिजली विभाग ने साल 2026 के जनवरी महीने में बिजली के बिल पर 2.33 प्रतिशत की छूट देने की घोषणा की है. ऐसे में बिजली उपभोक्ताओं का नए साल पर बिजली का बिल कम रहेगा, जिससे उन्हें राहत मिलेगी.  दरअसल उत्तर प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी यूपीपीसीएल ने ईंधन अधिभार शुल्क को लेकर आदेश जारी किया है. जिसके तहत जनवरी महीने में बिजली के बिल में 2.33% छूट रहेगी और एक महीने के लिए बिजली की दरें कम हो जाएंगी. इससे करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं का नए साल के पहले महीने का बिल कम आएगा.  जनवरी महीने में कम आएगा बिजली का बिल उत्तर प्रदेश में यूपीपीसीएल प्रत्येक महीने विद्युत का फ्यूल सरचार्ज निर्धारित किया जाता है. आदेश के तहत अक्टूबर महीने के ईंधन अधिभार का समायोजन जनवरी 2026 में किया जाएगा. जिसका लाभ बिजली के सभी तरह के उपभोक्ताओं को मिलेगा और प्रदेश के उपभोक्ताओं को करीब 141 करोड़ रुपये का सीधा लाभ होगा.  इससे पहले सितंबर 2025 का ईंधन अधिभार दिसंबर में 5.56 प्रतिशत की दर से लिया गया था, जिससे उपभोक्ताओं को क़रीब 264 करोड़ रुपये का नुक़सान उठाना पड़ा था. यूपी राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं के पहले से ही 33,122 करोड़ रुपये सरप्लस बिजली कंपनियों के पास हैं.  अवधेश वर्मा ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में 18,592 करोड़ रुपये का सरप्लस जुड़ने की संभावना है. इससे बिजली उपभोक्ताओं को 51 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक का सरप्लस बिजली कंपनियों पर बना हुआ है. उन्होंने कहा कि जब तक ये सरप्लस बिजली कंपनियों पर है उपभोक्ताओं से तब तक अधिभार शुक्ल न वसूला जाए. बल्कि जो समायोजन करना है वो सरप्लस से ही करना चाहिए. जब ये सलप्लस खत्म हो जाए इसके बाद ही उपभोक्ताओं से ईंधर अधिभार लिया जाए. 

इंदौर में आयुर्वेदिक कॉलेज ने 220 कैंसर मरीजों को दी ओजोन थेरेपी, स्वास्थ्य में सुधार

इंदौर  इंदौर के शासकीय अष्टांग आयुर्वेदिक कॉलेज में ओजोन थेरेपी के माध्यम से देशभर के कैंसर मरीजों को लाभ मिल रहा है। गत पांच महीनों में 220 से अधिक मरीजों को यह थेरेपी दी जा चुकी है। ओजोन थेरेपी शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाकर कैंसर मरीजों को ऊर्जा प्रदान करती है। विशेषज्ञों के अनुसार ऑक्सीजन मानव शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक है। दूषित पर्यावरण, फेफड़ों की बीमारियों और अन्य कारणों से शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ओजोन थेरेपी शरीर में ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाकर रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है। अस्पताल में हर वर्ष एक हजार से अधिक मरीज कैंसर का इलाज करवाने के लिए आते हैं। इनमें कई मरीज देश के विभिन्न राज्यों से होते हैं। ओजोन थेरेपी द्वारा शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाकर बीमारियों को समाप्त किया जा सकता है, जिससे स्वस्थ जीवन जीने में मदद मिलती है। आयुर्वेदिक इलाज से मिला लाभ     सुदामा नगर निवासी 66 वर्षीय महिला लाइपोसार्कोमा कैंसर से पीड़ित हैं। उन्होंने ऑपरेशन करवाया और फिर कीमोथेरेपी भी करवाई, लेकिन समस्या कम नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने आयुर्वेदिक इलाज लेना शुरू किया और अब तक 15 ओजोन थेरेपी ले चुकी हैं, जिससे वे स्वस्थ महसूस कर रही हैं। नवीन आर्य को आंत का कैंसर है। ऑपरेशन हो चुका है और कीमोथेरेपी भी ले चुके हैं। ओजोन थेरेपी के बाद उन्हें आराम मिला है। बैतूल निवासी 55 वर्षीय महिला को स्तन कैंसर है, जिसमें गांठ बनी हुई है। उन्होंने ऑपरेशन नहीं करवाया है और इंदौर में रहकर ओजोन थेरेपी ले रही हैं, जिससे वे स्वस्थ महसूस कर रही हैं। इंदौर के 53 वर्षीय शिवदत्त जोशी को जीभ का कैंसर है। वे पिछले कुछ समय से ओजोन थेरेपी ले रहे हैं, जिससे उन्हें कैंसर की समस्या में राहत मिल रही है। पिछले पांच माह में ओजोन थेरेपी लेने वाले मरीज माह     मरीज अगस्त     41 सितंबर     102 अक्टूबर     46 नवंबर     24 दिसंबर     19 (अब तक) अन्य बीमारियों में भी सहायक यह थेरेपी अन्य बीमारियों में भी सहायक है। थेरेपी द्वारा शरीर की कोशिकाएं अधिक आक्सीजन अवशोषित करती हैं, जिससे शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। अस्पताल की यूनिट में डॉ. श्वेता वर्मा, डॉ. शेखर पटेल, भारत प्रजापति, कमलेश पटेल एवं निशा मालवीय मरीजों का इलाज कर रहे हैं। तीन हजार वर्ष पुरानी पद्धति विशेषज्ञों का कहना है कि यह चिकित्सा पद्धति नई नहीं है। लगभग तीन हजार वर्ष पहले पतंजलि योग सूत्रों में भी प्राणायाम के माध्यम से शरीर में ऑक्सीजन बढ़ाने की बात कही गई थी। आधुनिक यूरोपीय देशों में ओजोन थेरेपी का लंबे समय से उपयोग किया जा रहा है और इसे विज्ञानी रूप से लाभकारी माना गया है। सप्ताह में दो दिन की जाती है थेरेपी     ओजोन, ऑक्सीजन का एक सक्रिय रूप है, जो शरीर के रक्त, लसिका और ऊतकों में जाकर कोशिकाओं से जुड़ता है। इस थेरेपी में एक विशेष मशीन के माध्यम से शरीर में ऑक्सीजन प्रवाहित की जाती है। इससे कैंसर कोशिकाओं को समाप्त करने, शरीर को डिटॉक्स करने और घावों को भरने में सहायता मिलती है। यह थेरेपी सप्ताह में दो दिन दी जाती है। – डॉ. अखिलेश भार्गव, विभागाध्यक्ष, शल्य तंत्र विभाग  

95% मुद्दों पर सहमति के साथ रूस-यूक्रेन संघर्ष खत्म होने के करीब, जानें ट्रंप-जेलेंस्की मीटिंग में क्या हुआ

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के बीच  हुई अहम मुलाकात के बाद यूक्रेन युद्ध को लेकर उम्मीदें तेज हो गई हैं. दोनों नेताओं ने कहा है कि युद्ध खत्म करने के समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं, हालांकि अब भी एक-दो ऐसे मुद्दे हैं जो सबसे ज्यादा उलझे हुए हैं. यह बातचीत अमेरिका के फ्लोरिडा में ट्रंप के मार ए लागो रिसॉर्ट में हुई, जहां दोनों नेताओं ने करीब तीन घंटे तक बंद कमरे में चर्चा की और बाद में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की. बातचीत पर क्या बोले ट्रंप-जेलेंस्की डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि कुछ ही हफ्तों में यह साफ हो जाएगा कि शांति वार्ता सफल होगी या नहीं. उनके मुताबिक बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है और दोनों पक्षों के बीच भरोसा बढ़ा है. जेलेंस्की ने भी इसे सकारात्मक बैठक बताया और कहा कि शांति के ढांचे पर अहम सहमति बन चुकी है. सबसे बड़ा दावा सुरक्षा गारंटी को लेकर किया गया. जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी पर पूरी सहमति बन गई है. वहीं ट्रंप ने कहा कि इस पर करीब 95 फीसदी सहमति हो चुकी है और यूरोपीय देश इसमें बड़ी भूमिका निभाएंगे, जबकि अमेरिका उनका समर्थन करेगा. दोनों नेताओं ने माना कि बिना मजबूत सुरक्षा गारंटी के स्थायी शांति संभव नहीं है. किस बात पर नहीं बन पाई सहमति? हालांकि दोनों नेताओं ने माना कि डोनबास क्षेत्र को लेकर अब भी सहमति नहीं बन पाई है. रूस चाहता है कि यूक्रेन अपनी सेना को डोनबास से पूरी तरह हटा ले, जबकि यूक्रेन इसके लिए तैयार नहीं है. ट्रंप ने कहा कि यह बेहद कठिन मुद्दा है, लेकिन इस पर भी बातचीत आगे बढ़ रही है. जेलेंस्की ने साफ किया कि यूक्रेन जिस इलाके पर नियंत्रण रखता है, वह उसे छोड़ने का फैसला केवल जनता की सहमति से ही कर सकता है और इसके लिए जनमत संग्रह का विकल्प खुला है. मीटिंग से पहले ट्रंप ने की पुतिन से बातचीत इस बैठक से ठीक पहले ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भी फोन पर बातचीत हुई थी. ट्रंप ने इसे उपयोगी बताया, जबकि क्रेमलिन ने इसे दोस्ताना बातचीत कहा. रूस की तरफ से कहा गया कि यूरोप और यूक्रेन की ओर से प्रस्तावित 60 दिन का युद्धविराम युद्ध को लंबा कर सकता है और डोनबास पर फैसला जल्द होना चाहिए. रूस ने यह भी बताया कि आर्थिक और सुरक्षा मुद्दों पर काम करने के लिए संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति बनी है. मीटिंग के दौरान यूक्रेन पर होते रहे हमले यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब रूस ने कीव और अन्य यूक्रेनी इलाकों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए. इन हमलों से कीव में बिजली और हीटिंग व्यवस्था प्रभावित हुई. जेलेंस्की ने इन हमलों को शांति प्रयासों पर दबाव बनाने की कोशिश बताया, जबकि ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि पुतिन और जेलेंस्की दोनों ही शांति को लेकर गंभीर हैं. बातचीत में जापोरिज्जिया न्यूक्लियर पावर प्लांट का मुद्दा भी उठा. अमेरिका ने इस पर साझा नियंत्रण का प्रस्ताव रखा है और वहां बिजली लाइनों की मरम्मत का काम शुरू हो चुका है. अमेरिका और यूक्रेन के बीच 20 बिंदुओं की शांति योजना पर भी चर्चा हुई, जिसमें करीब 90 फीसदी मुद्दों पर सहमति बताई जा रही है. क्या यूक्रेन जाएंगे डोनाल्ड ट्रंप? ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर उनके यूक्रेन जाने से युद्ध खत्म होता है तो वह यूक्रेन जाने और वहां की संसद को संबोधित करने के लिए भी तैयार हैं. हालांकि उन्होंने इसे फिलहाल जरूरी नहीं बताया. जेलेंस्की ने उन्हें यूक्रेन आने का न्योता दिया. इस पूरी प्रक्रिया में यूरोपीय देशों की भूमिका भी बढ़ रही है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के साथ जेलेंस्की की फोन पर बातचीत हुई है और आगे यूरोपीय नेताओं के साथ संयुक्त कॉल की योजना है.

बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के मंसूबे बुलंद, बैनर लगाकर नरसंहार की धमकी दे रहे

चटगांव  बांग्लादेश में उस्मान हादी की हत्या के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. इस घटना के बाद से देश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों में डर बढ़ गया है. हाल ही में दीपू चंद्र दास की कथित तौर पर फर्जी ईशनिंदा के आरोप में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने से यह डर और गहरा गया है. एक ताजा घटना में चटगांव के राउजान उपजिला में एक बैनर सामने आया है, जिसमें हिंदू और बौद्ध समुदाय के दो लाख लोगों को मारने की साजिश का दावा किया गया है. यह बैनर उस इलाके से बरामद हुआ है, जहां मंगलवार को हिंदू समुदाय के घरों में आगजनी की गई थी. फिलहाल पुलिस ने बैनर को जब्त कर लिया है. बांग्लादेशी सम्मिलित सनातनी जागरण जोट के प्रतिनिधि कुशल बरुण चक्रवर्ती ने बताया कि उन्होंने हिंसा से पीड़ित हिंदू परिवारों से मुलाकात की है. उनके मुताबिक, बैनर में लिखा था कि हिंदू और बौद्ध समुदाय को पूरी तरह खत्म करने की योजना बनाई गई और इसके लिए फंडिंग भी की गई. इस पूरे मामले में इस्लामी कट्टरपंथी तत्व उस्मान हादी की हत्या के पीछे भारत का हाथ होने का बिना सबूत दावा कर अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं. ‘हिंदुओं और अल्पसंख्यकों का वजूद मिटा देंगे’ स्थानीय मीडिया और पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बैनर में भड़काऊ और डराने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया था. हिंदू और बौद्ध समुदाय के करीब दो लाख लोगों को मारने की साजिश का दावा किया गया. अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ खुले तौर पर हिंसा की धमकी दी गई. इलाके को साफ करने और अस्तित्व खत्म करने जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया. संदेश का मकसद डर फैलाना और सांप्रदायिक तनाव भड़काना बताया जा रहा है. यह बैनर उसी क्षेत्र से मिला, जहां मंगलवार को हिंदू समुदाय के घरों में आग लगाकर उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश की गई थी. ऐसे में पुलिस मान रही है कि बैनर और आगजनी की घटना आपस में जुड़ी हो सकती हैं. इस तरह से पोस्टर सिर्फ धमकी नहीं, सामूहिक हिंसा की मानसिक तैयारी की तरह हैं, जो अल्पसंख्यकों का मनोबल तोड़कर उन्हें डराती हैं. यूनुस हिंदुओं का नामोनिशान मिटवा देंगे क्या? बांग्लादेश में सिर्फ दिसंबर के महीने में अब तक 4 हिंदुओं की हत्याएं हो चुकी हैं, जबकि देश में हुए सत्ता परिवर्तन के दौरान से लगातार हिंदुओं को टार्गेट किया जा रहा है.     जोगेश चंद्र रॉय को 7 दिसंबर को बेरहमी से गला रेतकर मार डाला गया. जोगेश के साथ उनकी पत्नी सुबर्णा रॉय की भी हत्या कर दी गई, दोनों का शव उनके घर के अंदर से मिला.     18 दिसंबर 2025 को भालुका में दीपू चंद्र दास को ईशनिंदा के आरोप में लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला और शरीर को आग के हवाले कर दिया गया था. इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा.     इसी महीने राजबारी जिले में अमृत मंडल नामक एक हिंदू युवक को भी भीड़ के पीट-पीटकर मार डालने की खबरें आईं. 24 दिसंबर को देर रात उनके ऊपर अचानक हमला हुआ और उन्हें बचने तक का मौका नहीं मिला, 25 दिसंबर को उनकी मौत हो गई. इसके अलावा मंगलवार को हिंदुओं को घर में जिंदा जलाने के मकसद से उनके घरों में आग लगा दी गई थी और अब उन्हें नरसंहार के बैनर ने और दहशत फैला दी है. सवाल ये है कि क्या बांग्लादेश में हिंदू होना अपराध हो गया है? यूनुस के राज में हिंदुओं की यूं ही हत्या होती रहेगी और वे उन्हें मरते देखेंगे?