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ओंकारेश्वर में नए साल पर भारी भीड़ की संभावना, VIP सुविधाएं अस्थायी रूप से बंद

खंडवा  ओंकारेश्वर नर्मदा पावन क्षेत्र में नर्मदा नदी का प्रत्येक पत्थर-कंकड़ भगवान शिव का ही स्वरूप माना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अटूट विश्वास है कि ओंकारेश्वर नर्मदा में जल के स्पर्श मात्र से पुण्य प्राप्ति होती है। यहां का कण-कण शिवम हैं। यही कारण है कि 12 ज्योतिर्लिंगों में चौथा स्थान पाने वाले ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को केवल एक पल ही निहारने के लिए देश-विदेश से यहां आने वाले श्रद्धालु बेताब रहते हैं। अंग्रेजी नव वर्ष का सैलाब उमड़ने की उम्मीद है। भक्तों का मानना है कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन से कष्ट और सभी संकट नष्ट होते हैं मोक्ष की प्राप्ति होती है। डिप्टी कलेक्टर और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर प्रशासक मुकेश काशिव ने विशेष चर्चा में बताया कि नये साल के पहले दिन करीब एक लाख श्रद्धालुओं के ओंकारेश्वर आने की संभावना है। इस दिन सामान्य द्वार से ही दर्शन कर सकेंगे। प्रोटोकॉल दर्शन की सुविधा बंद रहेगी।  दर्शन के साथ ही आम नागरिकों को दर्शन होंगे। सीढ़ियों की बजाय भक्त ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के रैंप से गुजरकर दर्शन कर सकेंगे। मंदिर प्रशासक मुकेश काशिव ने बताया कि कतार में लगने वाले भक्तों को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन में दो से ढाई घंटे का समय लगेगा। एक समय में चार लोग ही ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर पाते हैं। काशिव के अनुसार बड़ी संख्या में भक्तों के आगमन को देखते हुए व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। दिसंबर अंतिम पखवाड़े से ही भक्तों की भारी भीड़ प्रत्येक दिन आ रही है। प्रशासन का लक्ष्य की देश-विदेश से आने वाले भक्तों को दर्शन और स्नान में किसी तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े। मंदिर ट्रस्ट के सभी कर्मचारी समय-समय पर अपनी सेवाएं देने में लगे हैं। ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पुनासा एसडीएम पंकज वर्मा ने कहा कि वर्तमान में प्रतिदिन 50 हजार से लेकर 60 श्रद्धालु ओंकारेश्वर ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव के दर्शन करने पहुंचे रहे हैं। नये वर्ष 2026 में यह आंकड़ा लाखों को पार कर जाएगा। स्थान की कमी के कारण मंदिर दर्शन करने में समय लगता है, क्योंकि यहां की भौगोलिक स्थिति अन्य तीर्थ स्थान की तरह नहीं है। ओंकार पर्वत पर  पहाड़ी पर भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव का मंदिर सदियों पुराना बना है। इसलिए प्रशासन भी मंदिर में ज्यादा कुछ बदलाव नहीं कर सकता है। कोरोना कल के बाद से लगातार श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंचने की संख्या बहुत ही बड़ी है। ओंकारेश्वर थाना प्रभारी अनोख सिंधिया ने बताया कि पुलिस प्रशासन ने छोटे वाहनों को रोकने के लिए कार पार्किंग सुविधा है। वैसे एक दर्जन स्थानों पर पार्किंग की सुविधा की गई है। प्रतिदिन श्रद्धालु ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के लिए आते हैं। नव वर्ष में भी यह नर्मदा नदी में स्नान के ओंकार पर्वत की परिक्रमा भी लगते हैं। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शनों का अपना महत्व है। हर भक्त यहां आकर दर्शन करने को आतुर रहता है। पुलिस विभाग की कई कंपनियां होमगार्ड के जवान स्थानीय पुलिस बल भी लगाया गया है। ओंकारेश्वर पंडा संघ के अध्यक्ष पंडित नवलकिशोर शर्मा ने बताया कि मान्यता है कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग स्वयंभू यानी खुद प्रगट होने वाला स्वरूप है। इसकी स्थापना से पुरानी कथाएं जुड़ी हैं। एक कथा के अनुसार अयोध्या के इच्छाव्कु वंश के राजा मांधाता में नर्मदा तट पर स्थित पर्वत पर भगवान शिव की कठिन तपस्या की थी। इससे प्रसन्न होकर भगवान शिव इस स्थान पर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। बड़ी संख्या में भक्ति मांधाता दीप ओंकार पर्वत की साथ किलोमीटर लंबी परिक्रमा करने आते हैं। ओंकारेश्वर मंदिर के पंडित निलेश पुरोहित ने बताया कि एक कथा यह भी है कि विंध्याचल पर्वत ने नारद मुनि से शेमारू पर्वत की प्रशंसा सुनी तो खुद की श्रेष्ठता के लिए शिव की आराधना की। उसके बाद शिव ने प्रगट होकर उसे ओंकारेश्वर और ममलेश्वर में विभाजित किया। एक अन्य कथा के अनुसार असुरों से हार जाने के बाद देवताओं ने भगवान शिव की प्रार्थना की। तब भगवान शिवा ओंकारेश्वर स्वरूप में प्रकट होकर असुरों का संहार किया। ओम के आकार के दीप पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थिति है। ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और नर्मदा नदी के स्थान से भी तीर्थ स्नान का पूर्ण मिलता है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मुख्य दीप पर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के दक्षिण तक ब्रह्मपुरी में स्थित है। शास्त्रों में उल्लेख है कि अन्य तीर्थ की यात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती जब तक वहां का जल ओंकारेश्वर में अर्पित नहीं किया जाए। मान्यता यह भी है कि भगवान शिव और माता पार्वती हर दिन इस मंदिर में रात्रि विश्राम के लिए आते हैं। इस कारण प्रतिदिन मंदिर में चौपड़ पासे से की बिछात बिछाई जाती है। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में आदि गुरु शंकराचार्य जी की 108 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। इसे देखने भी लोग आते हैं। यह आध्यात्मिक और संस्कृति का केंद्र एकात्माधाम और अद्वैत लोग संग्रहालय बनाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि यहीं शंकराचार्य ने युवा काल में अपने गुरु गोविंद भगवत्पाद से शिक्षा ग्रहण की थी।  

भारत की आर्थिक उन्नति: 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य

नई दिल्ली   भारत 4.18 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ जापान को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और अगले 2.5 से 3 वर्षों में जर्मनी को पछाड़कर तीसरी रैंक हासिल कर लेगा और 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। यह जानकारी सोमवार को एक आधिकारिक बयान में दी गई। भारतीय अर्थव्यवस्था तेज गति से विकास कर रही है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर छह तिमाही के उच्चतम स्तर पर रही है। यह दिखाता है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक उतार-चढ़ाव में भी मजबूत बनी हुई है। बयान के कहा गया, "भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और इस गति को बनाए रखने के लिए अच्छी स्थिति में है। 2047 तक – अपनी आजादी के सौवें साल तक – उच्च मध्यम-आय वाला देश बनने की महत्वाकांक्षा के साथ, देश आर्थिक विकास, संरचनात्मक सुधारों और सामाजिक प्रगति की मजबूत नींव पर आगे बढ़ रहा है।" आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान पहले के 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। भारत की घरेलू ग्रोथ कई कारणों से ऊपर की ओर जा रही है जिसमें मजबूत घरेलू मांग, इनकम टैक्स और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) का सरलीकरण, कच्चे तेल की कम कीमतें, सरकारी पूंजीगत खर्च, साथ ही अनुकूल मौद्रिक और वित्तीय स्थितियां शामिल हैं, जिन्हें कम महंगाई का भी समर्थन मिल रहा है। बयान में कहा गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था की गति में निजी क्षेत्र मजबूत भूमिका निभा रहा है और लगातार ग्रोथ को सपोर्ट कर रहा है। इसके अलावा, सरकार देश के निर्यात को आगे बढ़ाने के लिए लगातार अन्य देश के साथ व्यापारिक समझौता कर रही है। 2025 में सरकार ने यूके, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) किया है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-सितंबर 2025 के दौरान भारत के सामान और सेवाओं का कुल निर्यात बढ़कर रिकॉर्ड 418.91 अरब डॉलर हो गया। इसमें पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 5.86 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली है।

मोहन सरकार की 5 नई पहल: आयुष्मान तर्ज पर इलाज का खर्च कार्ड से सीधे कवर होगा

भोपाल  नए साल 2026 की शुरुआत मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकती है। राज्य सरकार आयुष्मान भारत की तर्ज पर एक नई और बड़ी स्वास्थ्य सुविधा योजना शुरू करने की तैयारी में है, जिससे इलाज के खर्च को लेकर कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही चिंता दूर हो सकेगी। इस प्रस्तावित योजना के तहत प्रदेश के कर्मचारियों और उनके परिवारों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलने वाली है। अब तक जहां कर्मचारियों को इलाज का पूरा खर्च पहले खुद उठाना पड़ता था और बाद में प्रतिपूर्ति के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, वहीं नई व्यवस्था में अस्पताल में सीधे कार्ड के जरिए इलाज संभव होगा। हरियाणा और राजस्थान की तरह मध्य प्रदेश में भी सरकारी कर्मचारियों के लिए एक संगठित और कैशलेस स्वास्थ्य बीमा मॉडल लागू करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है। नए साल में मोहन सरकार की 5 बड़ी सौगातें:  1. मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना: कैशलेस इलाज वर्तमान में कर्मचारियों और पेंशनर्स को इलाज का खर्च पहले खुद उठाना पड़ता है और बाद में सरकार की ओर से कुछ राशि लौटाई जाती है. उदाहरण के लिए, लिवर ट्रांसप्लांट का खर्च लगभग 20 लाख रुपए आता है, लेकिन सरकार केवल 4 लाख रुपए देती है। नई योजना में 15 लाख कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके परिवारों को कैशलेस इलाज मिलेगा। कर्मचारियों के वेतन से 3,000 से 12,000 रुपए तक वार्षिक अंशदान लिया जाएगा, बाकी राशि सरकार वहन करेगी। सामान्य बीमारियों के लिए 5 लाख और गंभीर बीमारियों के लिए 10 लाख रुपए तक इलाज का प्रावधान है। 2. 21 साल बाद सरकारी बस सेवा शुरू अप्रैल 2026 से मध्य प्रदेश में 21 साल बाद फिर से सरकारी बसें दौड़ेंगी. नई व्यवस्था 'जनबस' के नाम से शुरू होगी। 25 जिलों के 6 हजार से ज्यादा रूट पर कुल 10,879 बसें चलेंगी.ई-बसें भी होंगी शामिल नेशनल ई-बस स्कीम के तहत इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर में 582 ई-बसें चलाई जाएंगी। ये बसें मौजूदा सिटी बसों से सस्ती होंगी और ग्रामीण इलाकों तथा आदिवासी क्षेत्रों को शहरों से जोड़ेंगी। 3. पेंशन नियम में बदलाव: बेटियों को फायदा अब 25 साल से अधिक उम्र की अविवाहित, विधवा या परित्यक्ता बेटियों को भी परिवार पेंशन का लाभ मिलेगा। यह बदलाव केंद्र सरकार के नियमों के अनुरूप किया गया है और कर्मचारी आयोग की अनुशंसा पर वित्त विभाग की सहमति मिल चुकी है। 4. छुट्टियों का नया कैलेंडर और EL का फायदा 1 जनवरी 2026 से मध्य प्रदेश के 6.5 लाख से ज्यादा कर्मचारियों के लिए 48 साल पुराने अवकाश नियम बदलकर नए नियम लागू होंगे। बीमारी और मातृत्व अवकाश आसान होंगे, रोस्टर अनिवार्य होगा और EL साल में दो बार 1 जनवरी और 1 जुलाई को क्रेडिट होगी। शिक्षकों और प्रोफेसरों को भी 10 दिन की EL मिलेगी। 5. सरकारी नौकरी में दो बच्चों की शर्त खत्म लगभग 24 साल पुराने नियम को हटाकर तीन संतान वाले उम्मीदवारों को भी सरकारी नौकरी में पात्र बनाया जाएगा। पुराने मामलों में अब कार्रवाई नहीं होगी। यह बदलाव मेडिकल एजुकेशन, हेल्थ, स्कूल और उच्च शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए राहत लाएगा।  क्या है ये योजना यह प्रस्तावित मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना राज्य के अधिकारियों, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए लाई जा रही है। इसके तहत सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए पांच लाख रुपये तक और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए 10 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने की तैयारी है। योजना में प्रदेश के भीतर और बाहर के चिन्हित निजी अस्पतालों को भी जोड़ा जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर बेहतर इलाज मिल सके। कितना देना होगा अंशदान इस योजना के संचालन के लिए कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन व पेंशन से 250 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक का मासिक अंशदान लिया जाएगा। बाकी राशि सरकार द्वारा वहन की जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे इलाज का आर्थिक बोझ काफी हद तक कम होगा और कर्मचारियों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। रिटायर्ड कर्मचारियों के परिवारों को भी मिलेगा लाभ योजना का लाभ स्थायी, अस्थायी और संविदा कर्मचारियों के साथ-साथ रिटायर्ड कर्मचारियों के परिवारों को भी मिलेगा। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, आशा और ऊषा कार्यकर्ता, नगर सैनिक, कोटवार और राज्य की स्वशासी संस्थाओं में काम कर रहे कर्मचारी भी इसके दायरे में शामिल किए जा रहे हैं। अनुमान है कि इस योजना से 15 लाख से ज्यादा लोग सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे, जिससे प्रदेश के लाखों परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा की मजबूत गारंटी मिल सकेगी। एनबीटी डेस्क

स्वास्थ्य सेवाएं हो रही हैं मजबूत और व्यापक: उप मुख्यमंत्री शुक्ल, प्रदेशवासियों को दी नववर्ष की शुभकामनाएं

स्वास्थ्य मानकों में निरंतर सुधार और स्वास्थ्य सेवाएं हो रही हैं व्यापक एवं सुदृढ़: उप मुख्यमंत्री शुक्ल प्रदेशवासियों को नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं स्वास्थ्य अमले को सतत प्रयासों के लिए दी बधाई, समर्पण के साथ सेवा जारी रखने का किया आह्वान भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने समस्त प्रदेशवासियों को नव वर्ष की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के यशस्वी नेतृत्व में देश वैश्विक मंच पर अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है, भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और "विश्वगुरु" बनने के लक्ष्य के और निकट पहुँच चुका है। इसी राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप मध्यप्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में सशक्त, सक्षम और सुदृढ़ता की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश आज स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और जनकल्याण के क्षेत्र में निरंतर नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर रहा है। स्वास्थ्य मानकों में निरंतर सुधार और स्वास्थ्य सेवाएं व्यापक एवं सुदृढ़ हो रही हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में स्टेट-ऑफ-द-आर्ट चिकित्सा उपकरणों, एमआरआई, सीटी स्कैन, कैथ लैब, लिनियर एक्सेलेरेटर, बोन मैरो ट्रांसप्लांट, डायलिसिस यूनिट और सुपरस्पेशियलिटी सेवाओं का तीव्र विस्तार किया गया है। चिकित्सा शिक्षा में सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों, एमबीबीएस, पीजी और सुपरस्पेशियलिटी सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे प्रदेश के युवाओं को बेहतर अवसर मिल रहे हैं साथ ही स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ हुई हैं। उज्जैन में अत्याधुनिक मेडिसिटी का विकास किया जा रहा है। महिला एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए प्रतिबद्धता उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सभी गर्भवती माताओं से आग्रह है कि वे अनिवार्य एएनसी जाँच अवश्य कराएँ। हर माह की 9 और 25 तारीख को एएनसी जाँच अवश्य करायें। इससे मातृ और शिशु स्वास्थ्य का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि रक्तदान और अंगदान मानवता की सर्वोच्च सेवा हैं। प्रदेश सरकार इन पुनीत कार्यों को प्रोत्साहित कर रही है। युवाओं और नागरिकों से आह्वान है कि वे आगे आकर रक्तदान व अंगदान के लिए संकल्प लें। एंटीबायोटिक केवल चिकित्सक की सलाह से, निर्धारित मात्रा और अवधि तक ही लें उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर विशेष बल दे रही है। योग, संतुलित आहार, प्राकृतिक खेती से प्राप्त स्वच्छ भोजन और भारतीय जीवनशैली न केवल व्यक्ति को स्वस्थ रखते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। "स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और स्वस्थ पर्यावरण" ही विकसित मध्यप्रदेश की आधारशिला है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट में कई एंटीबायोटिक दवाएँ के कम प्रभावी होने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसका प्रमुख कारण बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का अनावश्यक और गलत उपयोग है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की है कि एंटीबायोटिक केवल चिकित्सक की सलाह से, निर्धारित मात्रा और अवधि तक ही लें। यह सावधानी न केवल आपके स्वास्थ्य, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशनों में क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान, सिकल सेल उन्मूलन मिशन, निक्षय भारत अभियान, स्वस्थ यकृत मिशन, आयुष्मान भारत योजना, नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज नियंत्रण और अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं और आगे भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश के डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ, आशा, एएनएम और सभी स्वास्थ्य कर्मियों की समर्पित सेवा सराहनीय है। उन्होंने स्वास्थ्य अमले को अथक परिश्रम, संवेदनशीलता और सतत प्रयासों के लिए बधाई दी है और इसी समर्पण के साथ सेवा जारी रखने का आह्वान किया है।  

मोहन यादव सरकार का बड़ा फैसला: नए साल में बुजुर्गों और दिव्यांगों की पेंशन बढ़ेगी

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार नए साल में प्रदेश के बुजुर्ग, दिव्यांगों को सौगात देने जा रही है. मध्य प्रदेश सामाजिक न्याय विभाग अगले साल से प्रदेश के बुजुर्ग और दिव्यांगों की पेंशन में बढ़ोत्तरी करने जा रही है. सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने इसकी जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि बुजुर्ग और दिव्यांगजनों की पेंशन में बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव विभाग द्वारा वित्त विभाग को भेजा गया है. मुख्यमंत्री भी इसको लेकर गंभीर हैं. आने वाले बजट में पेंशन बढ़ोत्तरी की जाएगी. 54 लाख हितग्राहियों को होगा फायदा सामाजिक न्याय और उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की पिछले दो साल की उपलब्धियां बताने के लिए मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा पत्रकारों से रूबरू हुए. उन्होंने बताया कि "प्रदेश में विधवा, दिव्यांग एवं वृद्धों सहित कुल 54 लाख 21 हजार 863 हितग्राहियों को हर माह 325 करोड़ प्रतिमाह का भुगतान किया जा रहा है. सामाजिक सहायता कार्यक्रम अंतर्गत पेंशन प्राप्त कर रहे कुल 54 लाख से ज्यादा हितग्राहियों का 100 फीसदी आधार के केवाइसी कराया जा चुका है. पेंशन बढ़ाने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि इसका प्रस्ताव विभाग द्वारा भेजा जा चुका है और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसको लेकर गंभीर हैं. उभयलिंगी बोर्ड की स्थापना होगी मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने बताया कि प्रदेश में जल्द ही उभयलिंगी बोर्ड की स्थापना की जाएगी. इसकी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. अगले एक हफ्ते में इसका गठन कर लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि प्रदेश में कन्या विवाह और निकाय सम्मेलन के लिए संभागवार वार्षिक चक्रीय रूप से 3 तिथियां बसंत पंचमी, अक्षय तृतीया और तुलसी विवाह और एक अन्य तिथि का कैलेंडर जारी किया गया है. इसके अलावा अनुसूचित जनजाति की परंपराओं को देखते हुए अधिसूचित अनुसूचित क्षेत्र में सामुहिक विवाह कार्यक्रम के लिए 4 तिथियों का कैलेंडर अलग से जारी किया जाएगा. इसके लिए कम से कम 11 जोड़ों और अधिकतम 200 जोड़ों की संख्या निर्धारित की गई है."

कैंसर पर नई उम्मीद: जापानी ट्री फ्रॉग से खोजा गया ताकतवर ड्रग

नईदिल्ली  कैंसर को आज भी दुनिया की सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारियों में गिना जाता है. विज्ञान और मेडिकल टेक्नोलॉजी में लगातार तरक्की के बावजूद अब तक कैंसर का पूरी तरह और स्थायी इलाज नहीं मिल पाया है. लेकिन अब जापान के वैज्ञानिकों की एक नई खोज ने उम्मीद की एक नई किरण जगा दी है. यह खोज सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन आने वाले वर्षों में यह लाखों जिंदगियां बचा सकती है. दरअसल, जापान के वैज्ञानिकों ने मेंढक, भेक (toad) और छिपकली की आंतों में पाए जाने वाले एक खास बैक्टीरिया की पहचान की है, जो इंसानों में होने वाले खतरनाक कोलोरेक्टल कैंसर को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज भविष्य में कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी से भी ज्यादा सुरक्षित और असरदार इलाज का रास्ता हो सकती है. क्या कहती है रिसर्च यह रिसर्च जापान की नागोया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने की है और इसे करीब 7 दिन पहले प्रकाशित किया गया. शोधकर्ताओं ने एक बैक्टीरिया की पहचान की है, जिसका नाम Ewingella americana है. यह बैक्टीरिया आमतौर पर मेंढक और छिपकली जैसे जीवों की पाचन प्रणाली में पाया जाता है. पहले इसे एक सामान्य और नुकसान रहित बैक्टीरिया माना जाता था, लेकिन अब यह कैंसर के खिलाफ एक शक्तिशाली हथियार बनकर उभरा है. रिसर्च टीम ने जापानी ट्री फ्रॉग, जापानी फायर-बेली न्यूट और जापानी ग्रास लिजर्ड की आंतों से कुल 45 अलग-अलग बैक्टीरियल स्ट्रेन अलग किए. इनमें से 9 स्ट्रेन में कैंसर विरोधी गुण पाए गए, लेकिन Ewingella americana सबसे ज्यादा प्रभावी साबित हुआ. क्या कमाल किया इस बैक्टीरिया ने?     सिर्फ एक डोज देने पर चूहों के ट्यूमर पूरी तरह गायब हो गए.     30 दिन बाद फिर कैंसर सेल डाले गए, तो भी अगले एक महीने में ट्यूमर नहीं बने. यह बैक्टीरिया दो तरीकों से काम करता है…     सीधे ट्यूमर पर हमला करता है.     शरीर की इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है – टी सेल, बी सेल और न्यूट्रोफिल्स को सक्रिय करता है.     ट्यूमर में ऑक्सीजन कम होती है, जहां कीमोथेरेपी दवाएं कम असर करती हैं.  लेकिन यह बैक्टीरिया ऐसे कम ऑक्सीजन वाले माहौल में भी अच्छा काम करता है. सुरक्षा और तुलना     चूहों में यह बैक्टीरिया जल्दी खून से साफ हो गया.     मौजूदा कीमो दवा डॉक्सोरूबिसिन से ज्यादा प्रभावी साबित हुआ.     कोई लंबे समय का नुकसान नहीं हुआ, स्वस्थ अंगों पर भी असर नहीं पड़ा.     वैज्ञानिकों ने कहा कि यह बैक्टीरिया क्लिनिकल ट्रायल के लिए एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है. अभी शुरुआत है यह खोज अभी सिर्फ चूहों पर हुई है. इंसानों पर काम करेगी या नहीं, इसके लिए और बहुत परीक्षण जरूरी हैं. वैज्ञानिक अब इसे अन्य प्रकार के कैंसर पर आजमाना चाहते हैं. दूसरी दवाओं के साथ मिलाकर देखना चाहते हैं और बेहतर तरीके से दवा पहुंचाने के तरीके ढूंढ रहे हैं. सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल है, क्योंकि Ewingella americana इंसानों में संक्रमण भी पैदा कर सकता है. इसलिए क्लिनिकल ट्रायल में बहुत सावधानी बरतनी होगी. फिलहाल ब्लैडर कैंसर के इलाज में एक बैक्टीरिया थेरेपी पहले से इस्तेमाल हो रही है. मेंढक जैसे जीव भविष्य में कैंसर की नई दवाएं दे सकते हैं. वैज्ञानिकों ने कहा कि प्रकृति की जैव विविधता में अभी बहुत सारी छिपी दवाएं हैं. हमें इसे बचाना होगा ताकि नई दवाएं मिलती रहें. यह शोध 'Gut Microbes' जर्नल में प्रकाशित हुआ है. यह खोज कैंसर के मरीजों के लिए एक नई उम्मीद जगाती है. कैसे काम करता है यह बैक्टीरिया? लैब में किए गए परीक्षणों के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि यह बैक्टीरिया सीधे कैंसर ट्यूमर पर हमला करता है. यह ट्यूमर के अंदर घुसकर शरीर की इम्यून सिस्टम को उसी जगह सक्रिय कर देता है. इसके बाद शरीर की T-Cells कैंसर कोशिकाओं को पहचान कर उन पर हमला करती हैं और उन्हें खत्म करने लगती हैं. इस प्रक्रिया से न सिर्फ ट्यूमर की बढ़त रुकती है, बल्कि समय के साथ उसका आकार भी छोटा होने लगता है. यानी शरीर खुद ही कैंसर से लड़ने लगता है. क्या कीमोथेरेपी से मिलेगी राहत? आज के समय में कीमोथेरेपी कैंसर का सबसे आम इलाज है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट्स बेहद दर्दनाक होते हैं. बालों का झड़ना, कमजोरी, उल्टी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं मरीजों की जिंदगी को मुश्किल बना देती हैं. अगर यह जापानी रिसर्च आगे के क्लिनिकल ट्रायल्स में सफल रहती है, तो भविष्य में बैक्टीरियल थेरेपी एक नया और सुरक्षित विकल्प बन सकती है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, अब तक के परीक्षणों में इस बैक्टीरिया के गंभीर साइड इफेक्ट नहीं देखे गए हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले समय में इस बैक्टीरिया पर और रिसर्च की जाएगी. भविष्य में इसे ब्रेस्ट कैंसर, पैंक्रियाटिक कैंसर जैसे अन्य गंभीर कैंसर के इलाज में भी आजमाया जा सकता है. 

8वां वेतन आयोग आज 1 जनवरी 2026 से लागू, सैलरी, पेंशन और DA पर होंगे अहम अपडेट

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच उत्सुकता तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार द्वारा मंजूर यह आयोग आज 1 जनवरी 2026 से लागू हुआ! इसके तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों और रिटायर्ड कर्मियों की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बदलाव किया जाएगा। सबसे ज्यादा चर्चा सैलरी बढ़ोतरी और फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि नए वेतन आयोग से लाखों परिवारों की आमदनी पर सीधा असर पड़ेगा। 2025 में 8वें वेतन आयोग पर क्या हुआ? साल 2025 में सरकार ने 8वें वेतन आयोग को लेकर तीन अहम कदम जरूर उठाए।     सरकार ने यह फैसला लिया कि केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी, पेंशन और अन्य भत्तों की समीक्षा के लिए 8वां वेतन आयोग नियुक्त किया जाएगा।     इसके बाद 8वें वेतन आयोग का औपचारिक गठन किया गया और इसके चेयरमैन व अन्य सदस्यों की नियुक्ति भी कर दी गई।     तीसरे अहम कदम के तौर पर सरकार ने 8वें वेतन आयोग के लिए Terms of Reference (TOR) को भी अधिसूचित कर दिया। TOR जारी होने से पहले सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और कर्मचारी संगठनों से बातचीत की। इसमें NC-JCM स्टाफ साइड भी शामिल रहा, जिसने TOR को लेकर अपने सुझाव नोटिफिकेशन से पहले और बाद में सरकार को सौंपे। 2026 में कर्मचारियों और पेंशनर्स को क्या मिलेगा? 7वें वेतन आयोग का 10 साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को पूरा हो जाएगा। इसके बावजूद सरकार ने अब तक यह साफ नहीं किया है कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू होगा या नहीं। हाल ही में संसद में सरकार की ओर से संकेत दिया गया कि 8वें वेतन आयोग की लागू होने की तारीख पर फैसला तब लिया जाएगा, जब आयोग अपनी सिफारिशें सौंप देगा। इसका सीधा मतलब यह है कि 1 जनवरी 2026 से ही नई सैलरी या नई पेंशन मिलना तय नहीं है। क्या बाद में एरियर मिलने की उम्मीद है? हालांकि, जब भी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होंगी, तब कर्मचारियों और पेंशनर्स को 1 जनवरी 2026 से एरियर मिलने की संभावना जरूर बनी रहेगी। इसके पीछे दो अहम वजहें मानी जाती हैं। पहली, 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रहा है, इसलिए सामान्य तौर पर नया वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाना चाहिए। दूसरी, सरकार आमतौर पर वेतन से जुड़े फैसले अगर देरी से लागू करती है, तो प्रभावी तारीख से एरियर देती है। हालांकि, एरियर और लागू होने की तारीख पर अंतिम फैसला पूरी तरह सरकार के हाथ में होगा। क्या 8वां वेतन आयोग 2026 में रिपोर्ट देगा? 8वें वेतन आयोग के 2026 में अपनी सिफारिशें सौंपने की संभावना काफी कम मानी जा रही है। वजह यह है कि आयोग का गठन हाल ही में हुआ है और सरकार ने उसे 18 महीने तक का समय दिया है। अगर आयोग तय समय के भीतर अपना काम पूरा करता है, तो 2027 में सिफारिशें सामने आ सकती हैं। इसके बाद भी इन्हें लागू करने से पहले सरकार की मंजूरी जरूरी होगी। सैलरी में बढ़ोतरी कब तक नहीं होगी?     सदस्यों की घोषणा के बाद कर्मचारियों को लगा कि जल्द ही सैलरी बढ़ जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं है।     आमतौर पर वेतन आयोग की सिफारिशें हर दस साल में लागू होती हैं।     कैबिनेट ने अपनी अधिसूचना में साफ कहा था कि 8वीं वेतन आयोग की सिफारिशें सामान्य तौर पर 1 जनवरी 2026 से लागू होने की उम्मीद है। लेकिन अभी आयोग की सिफारिशें आई ही नहीं हैं। आयोग को अपनी रिपोर्ट देने में करीब 18 महीने का समय दिया गया है। इसलिए 1 जनवरी से आपकी सैलरी में कोई तुरंत बढ़ोतरी नहीं होगी। अभी पुरानी 7वीं वेतन आयोग की व्यवस्था ही लागू रहेगी। कर्मचारी और पेंशनभोगी अभी भी मौजूदा डीए और अन्य भत्तों के हिसाब से ही पैसे पा सकेंगे। एरियर का क्या होगा? अच्छी खबर यह है कि आयोग लागू होने की तारीख 1 जनवरी 2026 ही मानी जा रही है। यानी जब भी सिफारिशें सरकार स्वीकार करेगी और नई सैलरी लागू होगी, तो 1 जनवरी 2026 से लेकर लागू होने की तारीख तक का एरियर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलेगा। पिछले वेतन आयोगों में भी ऐसा ही हुआ था। सिफारिशें आने में समय लगता है, लेकिन प्रभावी तारीख से एरियर जमा होता रहता है। इससे कर्मचारियों को एकमुश्त बड़ी रकम मिल सकती है, जब नई सैलरी लागू होगी। सैलरी हाइक कब लागू होगा? यह अभी तय नहीं है कि नई सैलरी कब से मिलनी शुरू होगी। आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, फिर सरकार उसकी समीक्षा करेगी और मंजूरी देगी। उसके बाद ही नई पे मैट्रिक्स, फिटमेंट फैक्टर और बढ़ी हुई सैलरी लागू होगी। अनुमान है कि रिपोर्ट आने के बाद 2027 या 2028 में पूरी तरह लागू हो सकता है, लेकिन एरियर 2026 से ही गिना जाएगा। कर्मचारियों को धैर्य रखना होगा, क्योंकि प्रक्रिया में समय लगता है। लाखों परिवारों की नजर इस पर टिकी है, और उम्मीद है कि नई सिफारिशें महंगाई और जीवन स्तर को ध्यान में रखकर बनेंगी।  कर्मचारियों को क्या राहत मिलती रहेगी? 8वें वेतन आयोग के लागू होने से पहले तक केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स को 7वें वेतन आयोग के नियमों के तहत महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी मिलती रहेगी। यानी जब तक नया वेतन आयोग लागू नहीं होता, तब तक DA और DR में समय-समय पर बढ़ोतरी ही कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए मुख्य राहत बनी रहेगी।