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सिगरेट-तंबाकू होंगे और महंगे, केंद्र सरकार ने 40% GST के ऊपर नया एक्‍साइज ड्यूटी लागू किया

 नई दिल्‍ली केंद्र सरकार ने तंबाकू प्रोडक्‍ट्स पर एक्‍स्‍ट्रा एक्‍साइज ड्यूटी लगाने का ऐलान किया है, जो देशभर में 1 फरवरी 2026 से लागू हो जाएंगे. यह लागू होते ही सिगरेट, तंबाकू और इससे जुड़े प्रोडक्‍ट्स महंगे हो जाएंगे. वित्त मंत्रालय ने तंबाकू,  सिगरेट, पान-मसाला के इस नए नियम को 31 दिसंबर की देर रात नोटिफाई कर दिया.  यह एक्‍स्‍ट्रा एक्‍साइज ड्यूटी 40% GST दर के ऊपर है. पान-मसाले पर केंद्र सरकार ने सेस भी लगाया है. यह भी 40 फीसदी जीएसटी दर से ऊपर है. नए नियमों के तहत, सरकार ने पैकिंग मशीनों की सहायता से निर्मित और पाउच में पैक किए गए चबाने वाले तंबाकू, जर्दा सुगंधित तंबाकू और गुटखा को केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम की धारा 3A के तहत नोटिफाई किया है.  सिगरेट पर इतनी ड्यूटी नए नियम के तहत सिगरेट की लंबाई के आधार पर हर 1000 स्टिक्‍स पर 2050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक की एक्‍साइड ड्यूटी लागू होगी. इसके ऊपर 40 फीसदी जीएसटी भी लागू किया जाएगा यानी इनकी कीमत दोगुना बढ़ेगी. इस बदलाव के साथ सरकार का उद्देश्‍य तंबाकू प्रोडक्‍ट्स पर टैक्‍स व्‍यवस्‍था को और ज्‍यादा मुश्किल करना है.  बीड़ी पर 18 फीसदी टैक्‍स  जहां सिगरेट और पान मसाला पर 40 फीसदी GST लगेगा, वहीं बीड़ी पर टैक्‍स 18 फीसदी ही रखा गया है. इसके अलावा, पान मसाला मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट्स पर नया हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस लागू किया जाएगा. यह सेस मशीनों की क्षमता के आधार पर वसूल किया जाएगा. यह फैसला टैक्‍स चोरी को रोकने के लिए लिया गया है.  40 फीसदी जीएसटी के ऊपर नया सेस और ड्यूटी केंद्र सरकार ने सिन गुड्स पर 40 फीसदी का टैक्‍स लागू कर दिया है. लेकिन अब इसके ऊपर लगने वाले पुराने कंम्‍पसेशन सेस को खत्‍म करने जा रह है. हालांकि इसकी जगह पर नया सेस लागू होगा, जो 'हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस' और 'एडिशनल एक्साइज ड्यूटी' होगा. यह 1 फरवरी 2026 से लागू होगा. दिसंबर 2025 में ही इन दो बिलों की मंजूरी मिल चुकी थी और संसद में बिल पास किया गया था.  शेयरों में बड़ी गिरावट इस खबर के आने के बाद  सिगरेट बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली. गोल्ड फ्लेक और क्लासिक जैसे ब्रांड बनाने वाली मार्केट लीडर कंपनी ITC का शेयर 8.62% गिरकर 402 रुपए से 368 रुपये पर आ गया. वहीं गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के शेयरों में 12% की गिरावट आई है. FMCG इंडेक्स में भी इसका असर दिख रहा है और यह 3 फीसदी तक टूट चुका है. 

2026 में मध्य प्रदेश को मिलेगा बड़ा तोहफा, युवाओं और किसानों के लिए विशेष योजनाएं, परिवहन का विस्तार

भोपाल  नव वर्ष का उत्साह हर तरफ चरम पर है। इस बार साल 2026 विशेष महत्व रखने वाला है। किसानों की आय में बढ़ोतरी के लिए सरकार नई पहल शुरू करेगी। किसान कल्याण को देखते हुए ये वर्ष कृषि वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। इसके अंतर्गत किसान कल्याण के कई कार्यक्रम आयोजित होंगे। खेत और गांव को आगे बढ़ने के नए मौके सृजित किए जाएंगे।  वहीं, युवाओं की बात करें तो 40 हजार पदों पर पुलिस की नई भर्तियां होने की संभावना है। इससे प्रदेश की कानून व्यवस्था और सुरक्षा प्रणाली मजबूत होगी। तो चलिए यहां आपको क्रमश: बता रहे हैं क्या-क्या नई सौगातें मिलेंगी।  कृषि वर्ष 2026 को ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ टैगलाइन के साथ मनाया जाएगा कृषि वर्ष को लेकर सीएम डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में एक बैठक में महत्वपूर्ण घोषणा की है। इस बैठक में सीएम ने कहा था कि वर्ष 2026 को मध्य प्रदेश में कृषि वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। किसानों को लाभ पहुंचाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता होगी। कृषि से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को रोजगार और स्वावलंबन के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। प्रदेश में कृषि में नवाचार की व्यापक संभावनाएं हैं। धान की खेती को प्राथमिकता देते हुए, गेहूं, चना, दलहन, तिलहन और हॉर्टीकल्चर के क्षेत्रों में नवाचारों से किसानों को अवगत कराने के लिए उन्हें विभिन्न देशों का भ्रमण भी कराया जाएगा। कृषि वर्ष 2026 को ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ टैगलाइन के साथ मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों की आय को दोगुने से अधिक बढ़ाना और कृषि को लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक-आधारित रोजगार मॉडल में बदलना है। आत्मनिर्भर किसान, उन्नत खेती, बाजार से बेहतर जुड़ाव और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य और वानिकी जैसे क्षेत्रों को एकीकृत करते हुए जिला-आधारित क्लस्टर विकास मॉडल लागू किया जाएगा। इसके तहत प्राकृतिक खेती, डिजिटल सेवाएं, प्रसंस्करण और निर्यात उन्मुख कृषि के माध्यम से किसानों की शुद्ध आय बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। ग्रामीण युवाओं के लिए ड्रोन सेवा, एफपीओ प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण और हाइड्रोपोनिक्स जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तैयार किए जाएंगे। मध्य प्रदेश विधानसभा पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस हो जाएगी नए साल 2026 की शुरुआत में कई खुशखबरी सामने आ रही हैं। पहली, विधानसभा पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस हो जाएगी। बजट सत्र में विधायकों को सभी जरूरी दस्तावेज़, प्रश्न-उत्तर और नोट्स टैबलेट पर उपलब्ध कराए जाएंगे। उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा भी बजट प्रस्तुति टैबलेट के माध्यम से पेश करेंगे। सदन में हर विधायक की टेबल पर स्थायी टैबलेट लगाए जाएंगे, जिससे पूरी कार्यवाही बिना कागज के संचालित होगी। इसके साथ ही, मध्य प्रदेश की कैबिनेट भी ई-कैबिनेट होगी और बैठक का एजेंडा टैब पर भेजा जाएगा। नए साल में युवाओं को इन भर्तियां मिलेंगे नए अवसर एमपी में पुलिस में चालीस हजार भर्तियां की जाएंगी। एमपी पुलिस बोर्ड के द्वारा ये भर्तियां आयोजित होंगी। लेकिन इसका अभी तक कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन अभी तक जारी नहीं किया गया है। जबकि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सहायक प्रोफेसर भर्ती 2026 की अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती के अंतर्गत आयोग द्वारा विभिन्न विषयों में कुल 949 पदों पर नियमित नियुक्तियां की जाएंगी। इस भर्ती के लिए इच्छुक और पात्र अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाएगी, जिसे उम्मीदवार एमपीपीएससी के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से पूरा कर पाएंगे। वहीं, मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने पूरे साल का भर्ती परीक्षा कैलेंडर जारी किया है. साल की शुरुआत में ग्रुप-1, ग्रुप-2 और ग्रुप-5 के तहत स्टाफ नर्स की संयुक्त भर्ती परीक्षा के लिए नोटिफिकेशन जारी होने की संभावना है.युवाओं के लिए यह बेहतर मौका हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए ऑफिशियल वेबसाइट esb.mp.gov.in पर विजिट करें। पुलिस के करीब 22 हजार 500 पदों पर भर्ती होनी है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस को जल्द से जल्द मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए घोषणा करते हुए कहा कि अब प्रदेश में मप्र पुलिस भर्ती बोर्ड का गठन किया जाएगा। इससे पुलिस भर्तियों में तेजी, पारदर्शिता और परफेक्शन आएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 के लिए स्वीकृत पदों की भर्ती मप्र पुलिस भर्ती बोर्ड की ओर से कर्मचारी चयन मंडल, भोपाल द्वारा की जायेगी। आगामी वर्षों की भर्तियां 'पुलिस भर्ती बोर्ड' द्वारा की जायेंगी। पूर्व में  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा था कि पुलिस, जेल और नगर सेना एवं सुरक्षा तीनों विभागों के शहीदों की विधवाओं और बच्चों के लिए स्नातक स्तर के सभी कोर्सेस में विभिन्न प्राथमिकता श्रेणियों में एक अतिरिक्त सीट पर आरक्षण दिया जाएगा। पुलिस भर्ती पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष हमने 7,500 रिक्त पदों पर भर्ती की अनुमति दी है। पुलिस के करीब 22 हजार 500 पदों पर भर्ती होनी है। इसलिए अब हर साल 7,500-7,500 पदों पर भर्ती कर तीन साल में पुलिस विभाग के सभी रिक्त पद भर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वीवीआईपी ड्यूटी में तैनात सुरक्षा कर्मचारियों सहित उप पुलिस अधीक्षक और इससे उच्च अधिकारियों को भी अब छठवें वेतनमान का पद पात्रतानुसार निर्धारित विशेष भत्ता एवं जोखिम भत्ता दिया जाएगा। गृह विभाग से जुड़ी सभी सेवाओं के आधुनिकीकरण एवं भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए बहुत जल्द गृह एवं वित्त विभाग की संयुक्त बैठक कर सभी लंबित मसलों का समुचित समाधान निकाला जाएगा। MP: सरकार के 15 लाख कर्मचारियों की बल्लेबले दूसरी बड़ी खुशखबरी कर्मचारियों के लिए है। मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत राज्य सरकार अपने 15 लाख से अधिक कर्मचारियों और उनके परिवारों को कैशलेस हेल्थ कवरेज प्रदान करेगी। इस योजना में सामान्य बीमारी पर 5 लाख रुपये और गंभीर बीमारी या बड़े ऑपरेशन पर 10 लाख रुपये तक इलाज की सुविधा शामिल होगी। योजना स्थायी, अस्थायी, संविदा कर्मचारी, शिक्षक वर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी, नगर सैनिक, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता समेत कुल लगभग 15 लाख लोगों के लिए लागू होगी। कर्मचारी अपनी मासिक सैलरी या पेंशन से 250 से 1000 रुपये तक का अंशदान देंगे, जो सरकार के हिस्से के साथ मिलकर बीमा प्रीमियम में तब्दील होगा। वर्तमान व्यवस्था में कर्मचारियों को इलाज का पूरा खर्च अपने जेब से करना पड़ता है … Read more

वंदे भारत स्लीपर और बुलेट ट्रेन का इंतजार खत्म, गुवाहाटी-कोलकाता होगा पहला रूट, अश्विनी वैष्णव ने किया एलान

नई दिल्ली   भारतीय रेलवे के इतिहास में जल्द ही एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को यह जानकारी दी। रेल मंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि 15 अगस्त 2027 को देश को पहली बुलेट ट्रेन मिल जाएगी। अश्विनी वैष्णव ने मजाकिया लहजे में कहा कि आप अभी से बुलेट ट्रेन की टिकट खरीद लीजिए, अगले साल बुलेट ट्रेन भी आ जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है। रेल मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की पूरी टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन पूरा हो गया है। इसका पहला रूट गुवाहाटी-कोलकाता प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आने वाले दिनों में इस रूट पर पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। यह रेलवे के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। वैष्णव ने आगे कहा कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन यात्रियों को लंबी दूरी की रात की यात्राओं पर वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं, सुरक्षा और एक आधुनिक यात्रा का अनुभव प्रदान करेगी। पिछले साल नवंबर में ही प्रधानमंत्री मोदी ने अपने गुजरात दौरे के दौरान मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की प्रगति का भी जायजा लिया था। इसके लिए पीएम मोदी सूरत बुलेट ट्रेन स्टेशन पर पहुंचे थे, जहां उन्होंने काम में लगे इंजीनियरों और कर्मचारियों से बातचीत भी की थी। रात के सफर में मिलेगी वर्ल्ड-क्लास सुविधा रेल मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन लंबी दूरी की रात की यात्राओं के लिए डिजाइन की गई है। यह ट्रेन यात्रियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं, बेहतर सुरक्षा और एक आधुनिक यात्रा का अनुभव प्रदान करेगी। इसे भारतीय रेलवे के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है, जो प्रीमियम यात्रा को और सुगम बनाएगी। 15 अगस्त 2027 को चलेगी पहली बुलेट ट्रेन वंदे भारत के साथ-साथ रेल मंत्री ने देश की पहली बुलेट ट्रेन को लेकर भी बड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 2027 को भारत को अपनी पहली बुलेट ट्रेन मिल जाएगी। वैष्णव ने मजाकिया अंदाज में कहा, "आप अभी से बुलेट ट्रेन की टिकट खरीद लीजिए, अगले साल बुलेट ट्रेन भी आ जाएगी।" उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार इस प्रोजेक्ट को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए पूरी गंभीरता से जुटी हुई है। पीएम मोदी ने लिया तैयारियों का जायजा प्रोजेक्ट की प्रगति को लेकर रेल मंत्री ने बताया कि पिछले साल नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद गुजरात दौरे के दौरान मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का निरीक्षण किया था। पीएम मोदी सूरत बुलेट ट्रेन स्टेशन पहुंचे थे, जहां उन्होंने काम की बारीकी से जांच की और वहां मौजूद इंजीनियरों व कर्मचारियों का उत्साहवर्धन किया। प्रधानमंत्री ने इस दौरान कर्मचारियों से बातचीत करते हुए कहा था कि यह प्रोजेक्ट न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश के गर्व का विषय है। यह हाई-स्पीड ट्रेन परियोजना भारत के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को आधुनिक बनाने में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगी, जिससे यात्रियों को तेज और सुविधाजनक सफर का लाभ मिलेगा।  इससे जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें पीएम मोदी सूरत स्टेशन पर काम की बारीकी से जांच करते हुए नजर आए। इस दौरान उन्होंने इंजीनियरों और कर्मचारियों से बातचीत की। उन्होंने पूछा कि काम में किसी तरह की परेशानी तो नहीं आ रही है और प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए किस तरह से काम किए जा रहे हैं? इस दौरान कर्मचारियों ने बताया कि हर स्तर पर पूरी मेहनत और बारीकी के साथ काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी कर्मचारियों की मेहनत की सराहना की और कहा कि यह प्रोजेक्ट न सिर्फ गुजरात बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। हाई-स्पीड ट्रेन परियोजना देश के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को आधुनिक बनाने में एक अहम कदम है और इससे यात्रियों को तेज और सुविधाजनक सफर मिलेगा।

2026 में राज्यसभा में NDA की बढ़ी हुई ताकत, इन नेताओं को हो सकती है मुश्किल

नई दिल्ली साल 2026 में राज्यसभा की रिक्त हो रही 72 सीटों के लिए होने वाले चुनाव प्रमुख नेताओं के भविष्य के साथ केंद्रीय राजनीति में सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस की रणनीति को भी प्रभावित करेंगे। विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं की दलीय स्थिति को देखते हुए भाजपा और NDA और मजबूत होगा, वहीं कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की दिक्कतें बढ़ेंगी। हालांकि राज्यसभा के अंकगणित में बहुत ज्यादा बदलाव तो नहीं आएगा, लेकिन NDA अपने बहुमत को और मजबूत करेगा और भाजपा की संख्या भी बढ़ जाएगी। इससे संसद के दोनों सादनों में विधायी कामकाज के लिए सरकर की सहूलियत और बढ़ जाएगी। वहीं विपक्ष की सरकर को घेरने के रणनीति कमजोर पड़ेगी। राज्यसभा की अधिकृत जानकारी के अनुसार, सदन में अभी भाजपा के 103 सांसद हैं और NDA के 126 सांसद हैं। 2026 में भाजपा के 30 सांसदों का कार्यकाल पूरा होगा और उसके 32 सांसदों का आना पक्का है। जोड़-तोड़ के साथ पार्टी तीन सीटें और जीत सकती है। पार्टी के सहयोगी दलों के चार सांसद बढ़ेंगे, जिनमें तेलुगु देशम,जनसेना,शिवसेना व एनसीपी का एक-एक सांसद बढ़ जाएगा। हालांकि दो सांसद कम भी होंगे। तब भी कुल मिलाकर NDA लाभ की स्थिति में रहेगा। मनोनीत सांसद पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई भी मार्च में रिटायर हो रहे हैं। उनकी जगह जो भी आएगा उसके भी सरकार का समर्थन करने की संभावना है। कई दिग्गजों का कार्यकाल पूरा होगा इन राज्यसभा चुनावों का महत्व इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि इसमें कई दिक्कत नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इनमें केंद्र सरकार में मंत्री एवं विभिन्न दलों के प्रमुख नेता शामिल है। अगर मंत्री फिर से चुनकर नहीं आते हैं तो उनका सरकार में रहना मुश्किल हो जाएगा और अन्य प्रमुख नेताओं के लिए भी दिक्कतें बढ़ेगी। जिन प्रमुख नेताओं कार्यकाल पूरा हो रहा है उनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा, दिग्विजय सिंह, शरद पवार, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बी एल बर्मा, जॉर्ज कुरियन आदि शामिल है। इनके अलावा प्रेमचंद गुप्ता, राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा, प्रियंका चतुर्वेदी, रामदास अठावले, रामगोपाल यादव, नीरज शेखर, राम जी, शक्ति सिंह गोहिल, अभिषेक मनु सिंघवी, थंबी दुरई, तिरुचि शिवा और मनोनीत सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई शामिल है। सबसे ज्यादा दस सीटें उत्तर प्रदेश में रिक्त होंगी 2026 में जिन 72 सीटों के लिए चुनाव होंगे उनमें अप्रैल में 37 सीटों के लिए, जून में 23 सीटों के लिए, जुलाई में एक सीट के लिए और नवंबर में 11 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। अप्रैल माह में जिन 37 सीटों के लिए चुनाव होंगे, उनमें असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल शामिल है, जबकि नवंबर में होने वाले 11 सीटों के चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश की 10 सीटें होगी। इसके अलावा जून में होने वाले 23 सीटों के चुनाव में आंध्र प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य हैं। बिहार की 5 सीटें रिक्त हो रही है, जिनमें जेडीयू की दो, राजद की दो और आरएलएम की एक सीट शामिल है। चुनाव के बाद जेडीयू और भाजपा दो-दो सीटें और उनका सहयोगी एक सीट जीत सकता है। झारखंड में दो रिक्त हो रही सीटों में झामुमो की एक पहले से ही खाली है और भाजपा की एक सीट और होगी। नए समीकरण में दोनों को एक-एक सीट मिल सकती है। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 10 सीटें खाली हो रही है। इनमें भाजपा की आठ, सपा की एक और बसपा की एक है। चुनाव के बाद भाजपा सात और सपा को दो सीटें मिलना तय हैं। भाजपा सहयोगी दलों से मिलकर एक सीट और जीत सकती है, लेकिन बसपा का राज्यसभा से सफाया होना लगभग तय है। उत्तराखंड में एक सीट खाली होगी और एक सीट भाजपा के पास ही रहेगी। अन्य राज्यों में आंध्र प्रदेश की चार सीटें रिक्त होंगी, जिनमें तेलुगू देशम की एक और वायएसआरसीपी की तीन सीटें शामिल है। चुनाव के बाद तेलुगू देशम को दो, भाजपा को एक और जनसेना को एक सीट मिलने की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में भाजपा की एक सीट रिक्त हो रही है और भाजपा का ही एक सांसद फिर से चुनकर आएगा। असम में तीन सीटें रिक्त होने जा रही हैं, जिनमें भाजपा की दो और निर्दलीय एक सांसद शामिल है। चुनाव के बाद भाजपा के दो और कांग्रेस के एक सांसद का चुनाव जाना तय है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के ही दोनों सांसद रिटायर हो रहे हैं। चुनाव के बाद भाजपा व कांग्रेस को एक -एक सीट मिलने की संभावना है। गुजरात में चार सीटें रिक्त हो रही है, जिनमें तीन भाजपा की और एक कांग्रेस की है। चुनाव के बाद चारों सीटें भाजपा के पास आएंगी। हरियाणा में दोनों सीटें भाजपा की रिक्त हो रही है, लेकिन चुनाव के बाद भाजपा की एक ही सीट आएगी एक सीट कांग्रेस के पास जाएगी। हिमाचल में भाजपा की एक सीट खाली हो रही है और यह सीट कांग्रेस के पास जाएगी। कर्नाटक की चार खाली हो रही सीटों में भाजपा की दो, कांग्रेस की एक और जद एस की एक सीट है। विधानसभा की दलीय स्थिति में कांग्रेस तीन सीटें और भाजपा को एक सीट मिलने की संभावना है। मध्य प्रदेश की तीन रिक्त होने वाली सीटों भाजपा की दो व कांग्रेस की एक सीट हैा। यहां पर फिर से भाजपा दो कांग्रेस को एक सीट मिलेगी। महाराष्ट्र में सात सीटें खाली हो रही है, जिनमें भाजपा की दो, शिवसेना उद्धव ठाकरे एक, राकांपा शरद पवार दो, कांग्रेस एक, रिपब्लिक रिपब्लिकन पार्टी एक शामिल है। चुनाव के बाद भाजपा के तीन, राकांपा एक, शिवसेना के एक, आरपीआई की एक और कांग्रेस को एक सीट मिलने की स्थिति बन सकती है। पश्चिम बंगाल की पांच खाली होने वाली सीटों में तृणमूल कांग्रेस की चार व एक माकपा की है। इस बार तृणमूल कांग्रेस को चार व एक भाजपा को मिलेगी। मणिपुर में भाजपा की एक सीट खाली होगी और वह भाजपा को ही मिलेगी। यही स्थिति मेघालय में होगी जहां एनपीपी की एक सीट खाली होगी और फिर से उसका ही सांसद चुना जाएगा। मिजोरम में एमएनएफ … Read more

किसानों की मेहनत से भारत ने बनाई नई ऊंचाई, चीन भी रह गया पीछे, जानें क्यों है यह बड़ी खबर

नई दिल्ली  नए साल की शुरुआत इससे बेहतर नहीं हो सकती. जब हम और आप जश्न में डूबे हैं, तभी भारत के खेतों से एक ऐसी खबर आई है, जिसने हर हिंदुस्तान का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है. यह खबर सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वाभिमान, संघर्ष और जीत की एक महागाथा है. भारत अब चावल उत्पादन में चीन को पछाड़कर दुनिया का नंबर 1 देश बन गया है. जी हां, वही चीन जो अब तक कृषि और मैन्‍यूफैक्‍चर‍िंग में दुनिया का सिरमौर माना जाता था, उसे हमारे अन्नदाताओं ने अपनी मेहनत के दम पर पीछे छोड़ दिया है. खुद कृष‍ि मंत्री श‍िवराज सिंह चौहान ने यह खुशखबरी शेयर की है. यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक और भावुक करने वाली है क्योंकि एक वक्त था जब भारत अपनी आबादी का पेट भरने के लिए अमेरिका के जहाजों का इंतजार करता था, और आज वही भारत दुनिया के कुल चावल उत्पादन का 28 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अपने खेतों में उगा रहा है. आज की युवा पीढ़ी शायद उस दर्द को महसूस न कर पाए, लेकिन हमारे बुजुर्गों की आंखों में वो मंजर आज भी तैरता है. 1960 के दशक की बात है. भारत आजाद तो हो गया था, लेकिन हमारे पास अपने लोगों को खिलाने के लिए पर्याप्त अनाज नहीं था. अकाल और सूखे ने देश की कमर तोड़ दी थी. हालत यह थी कि भारत को अमेरिका के साथ PL-480 समझौते के तहत अनाज मांगना पड़ता था. अमेरिका से जो गेहूं आता था, वह लाल रंग का होता था और अक्सर उसकी गुणवत्ता इतनी खराब होती थी कि उसे वहां जानवरों को खिलाया जाता था. लेकिन भूख से जूझ रहे भारत के पास कोई विकल्प नहीं था. इसे ‘शिप टू माउथ’की स्थिति कहा जाता था यानी जब जहाज बंदरगाह पर आएगा, तभी देश के लोगों के मुंह तक निवाला पहुंचेगा. तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देश की नाजुक हालत को देखते हुए देशवासियों से सप्ताह में एक दिन उपवास रखने की अपील की थी. वह भारत की बेबसी का दौर था. दुनिया के कई देशों को लगता था कि भारत कभी अपनी भूख नहीं मिटा पाएगा और बिखर जाएगा. 2026 का भारत… अब हम दुनिया को खिलाते हैं अब उस ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर को हटाकर आज के रंगीन और समृद्ध भारत को देखिए. आज वही भारत, किसी के आगे हाथ नहीं फैलाता, बल्कि दुनिया का पेट भरता है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्‍स पर ल‍िखा, अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का विषय है कि भारत ने चावल उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है. चीन को पीछे छोड़ते हुए भारत चावल उत्पादन में विश्व का सबसे अग्रणी देश बना है. सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि आज दुनिया में चावल की जितनी खेती होती है, उसका 28 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले भारत का है. यानी दुनिया की हर चौथी चावल की थाली में भारतीय चावल की महक है. चीन को पछाड़ना क्यों है बड़ी बात? चीन, दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश होने के साथ-साथ कृषि तकनीकों में भी काफी आगे रहा है. दशकों से चावल उत्पादन में चीन का दबदबा था. चीन के पास हाइब्रिड चावल की उन्नत तकनीक और प्रति हेक्टेयर ज्यादा उपज की क्षमता थी. ऐसे में, भारत का चीन से आगे निकलना यह साबित करता है कि अब हम तकनीक और उत्पादन क्षमता में महाशक्तियों को टक्कर दे रहे हैं. यह भारत की फूड स‍िक्‍योरिटी के साथ-साथ खाद्य आत्‍मनिर्भरता की जीत है. अब हमें अपनी शर्तों पर दुनिया से व्यापार करने की ताकत मिल गई है. यह चमत्कार हुआ कैसे?     ‘शिप टू माउथ’ से ‘वर्ल्ड लीडर’ बनने तक का यह सफर आसान नहीं था. इसके पीछे कई दशकों का संघर्ष और मौजूदा सरकार की रणनीतियां शामिल हैं. कृषि मंत्री ने इस सफलता का श्रेय तीन प्रमुख स्तंभों को दिया है. सबसे बड़ा श्रेय हमारे किसान भाइयों और बहनों को जाता है. चाहे पंजाब-हरियाणा के खेत हों, या दक्षिण भारत के धान के कटोरे, या फिर पूर्वी भारत के उपजाऊ मैदान, किसानों ने सर्दी, गर्मी और बरसात की परवाह किए बिना खेतों में सोना उगाया है. मंत्री ने इसे अन्नदाताओं के अथक परिश्रम का परिणाम बताया.     अब खेती केवल परंपरा नहीं, साइंस बन गई है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिकों ने चावल की ऐसी किस्में विकसित कीं जो कम पानी में ज्यादा उपज देती हैं, और जो बीमारियों से लड़ सकती हैं. उन्नत वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों ने उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई.     सरकार की नीतियों ने उत्प्रेरक का काम किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘बीज से बाजार तक’ की रणनीति अपनाई गई. स्‍वॉयल हेल्‍थ कार्ड, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, और एमएसपी (MSP) में लगातार वृद्धि ने किसानों को सुरक्षा और प्रोत्साहन दिया. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पीएम मोदी के सतत प्रयासों के आज “ठोस और सकारात्मक परिणाम” दिख रहे हैं. विश्व पटल पर भारत की धमक भारत पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है. वैश्विक चावल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 40% से अधिक है. अब उत्पादन में नंबर 1 बनने के बाद, दुनिया के कई देश अपनी खाद्य सुरक्षा के लिए भारत पर निर्भर होंगे. भारत का बासमती चावल खाड़ी देशों से लेकर अमेरिका और यूरोप तक अमीरों की पहली पसंद है. यह भारत की सॉफ्ट पावर है. जब दुनिया में कोरोना का संकट आया या युद्ध के कारण सप्लाई चेन टूटी, तब भारत ने कई गरीब देशों को अनाज भेजा. अब नंबर 1 बनकर भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज और सहारा बनकर उभरेगा.