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पंजाब सरकार देगी सरकारी स्कूलों के छात्रों को IIT, NIT और AIIMS की मुफ्त कोचिंग

अमृतसर. पंजाब की भगवंत मान सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले मेधावी छात्रों के सपनों को नई उड़ान दी है. राज्य के सरकारी स्कूलों के 1700 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को अब आईआईटी, एनआईटी और एम्स जैसी देश की शीर्ष संस्थाओं की निःशुल्क तैयारी का अवसर मिल रहा है. यह सुविधा पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस (पेस) कार्यक्रम के तहत आयोजित विंटर रेज़िडेंशियल कोचिंग कैंपों के माध्यम से प्रदान की गई है. तीन जिलों में लगे विशेष कोचिंग कैंप शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि इन कैंपों को बठिंडा, लुधियाना और मोहाली (SAS नगर) में आयोजित किया गया था. इन केंद्रों में कुल 1728 विद्यार्थियों ने भाग लिया. बठिंडा केंद्र में 601, लुधियाना में 573 और मोहाली में 554 विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय कोचिंग दी गई. इन कैंपों में छात्राओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही, जो सरकार की समावेशी शिक्षा नीति को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि यह पहल मान सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसके तहत सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना हर होनहार विद्यार्थी को समान अवसर दिए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों के छात्रों में अपार प्रतिभा है और सही मार्गदर्शन मिलने पर वे देश की शीर्ष परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं. पेस कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों का चयन पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया से किया गया. मॉक टेस्ट, अवधारणात्मक समझ, अकादमिक निरंतरता और शिक्षकों की सिफारिश के आधार पर छात्रों का मूल्यांकन हुआ. इसके साथ ही प्रत्येक केंद्र में 20 प्रतिशत सीटें सामान्य सरकारी स्कूलों और ड्रॉप-ईयर अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रखी गईं, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके. नामी संस्थानों के विशेषज्ञों ने दिए टिप्स इन रेज़िडेंशियल कैंपों में फिजिक्सवाला, विद्या मंदिर और अवंती फेलोज़ जैसी नामी कोचिंग संस्थाओं के विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया. जेईई और नीट पैटर्न के अनुरूप पढ़ाई, डाउट-क्लियरिंग सत्र, वन-टू-वन मेंटरिंग, तनाव प्रबंधन और करियर मार्गदर्शन पर विशेष जोर दिया गया. सुरक्षित आवास, पौष्टिक भोजन, 24 घंटे निगरानी और चिकित्सा सुविधाओं ने विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल प्रदान किया. शिक्षा मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष सरकारी स्कूलों के 265 छात्रों ने जेईई मेन्स, 45 ने जेईई एडवांस्ड और 847 छात्रों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की थी. इससे साफ है कि पंजाब के सरकारी स्कूल अब देश के शीर्ष पेशेवर कोर्सेज के लिए मजबूत लॉन्चपैड बनते जा रहे हैं.

मंसूर अली खान पटौदी की 85वीं जयंती: सोहा ने पिता को किया याद, खास वीडियो ने छुआ फैंस का दिल

मुंबई भारतीय क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी की आज 85वीं बर्थ एनिवर्सरी है. उन्हें 21 साल की उम्र में भारत का क्रिकेट कप्तान नियुक्त किया गया था. उन्हें भारत के महानतम कप्तानों में से एक बताया जाता है. बर्थ एनिवर्सरी पर उनकी बेटी और एक्ट्रेस सोहा अली खान  ने अपने अब्बू के लिए एक प्यारा वीडियो शेयर कर उन्हें याद किया है. बता दें कि सोहा अली खाने अपने पिता मंसूर अली खान पटौदी की आज 85वीं बर्थ एनिवर्सरी पर उनका एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो को शेयर करते हुए एक्ट्रेस ने लिखा- ‘अब्बा, आपके जन्मदिन पर मैं उस जगह खड़ी होना चाहती थी जहां क्रिकेट आपको सबसे ज्यादा याद करता है. ईडन गार्डन्स आज भले खाली हो, लेकिन आपके लिए यह कभी चुप नहीं रहता. यह वो मैदान है जहां आपको खेलना बहुत पसंद था और जहां आपने कई बार भारत की कप्तानी की.’ एक्ट्रेस ने आगे लिखा- ‘सबसे यादगार शायद दिसंबर 1974 का टेस्ट मैच था, जब मजबूत वेस्ट इंडीज टीम के खिलाफ खेला गया. एंडी रॉबर्ट्स की एक गेंद आपके चेहरे पर लगी, जिससे गाल की हड्डी टूट गई. आप चोट लगने और खून बहने के बावजूद मैदान से बाहर गए, लेकिन फिर लौटकर आए और टीम को 85 रनों से शानदार जीत दिलाई. ईडन गार्डन्स में खेला वो टेस्ट मैच भारतीय क्रिकेट की सबसे यादगार जीतों में से एक है- हिम्मत और बहादुर कप्तानी का बेहतरीन उदाहरण. दर्शक आज भी आपको, उस क्रिकेटर को, याद करते हैं. मैं आपको याद करती हूं. हम दोनों यहीं के हैं. जन्मदिन मुबारक हो, अब्बा.’ मंसूर और शर्मिला की शादी बता दें कि मंसूर अली खान पटौदी ने एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर से शादी किया था. दोनों ने 27 दिसंबर 1968 शादी किया था. जिसके बाद इस कपल के तीन बच्चे हुए- जिनमें बेटा सैफ अली खान (एक्टर) और बेटियां सोहा (एक्ट्रेस) और सबा हैं.

पंजाब के मजदूर माता-पिता की बेटी परम पहुंची UK में गाने की रिकॉर्डिंग करने

अमृतसर. मोगा जिले के गांव दुननेके में जन्मी परमजीत उर्फ परम ने अपनी मेहनत और हुनर के दम पर अंतरराष्ट्रीय पहचान बना ली है। गरीब परिवार में जन्मी 19 वर्षीय परम ने कुछ महीनों पहले सोशल मीडिया पर अपने रैप वीडियो से धमाल मचाया। उनका गाना नहीं, बल्कि सड़कों और गलियों में किया गया रैप लोगों के दिलों को छू गया, जिसके बाद फैंस ने उन्हें प्यार से ‘दैट गर्ल’ का नाम दिया। परम का बचपन गरीबी में बीता। मां दूसरों के घर झाड़ू-पोछा और बर्तन साफ करती थीं, जबकि पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे। बावजूद इसके, परम ने बीएम कॉलेज मोगा में पढ़ाई के साथ अपने संगीत करियर को आगे बढ़ाया। उन्होंने एक क्लासमेट के साथ मोगा दाना मंडी में गाने का रियाज किया, जो उन्हें रातों-रात स्टार बना गया। सोशल मीडिया पर उन्हें लेडी सिद्धू मूसेवाला का स्वरूप बताया गया और वे पंजाब में ट्रेंड करने लगीं। यूके में नई शुरुआत अपने कॅरिअर को आगे बढ़ाने के लिए परम अब यूके पहुंच चुकी हैं, जहां वे अपने आगामी गाने की रिकॉर्डिंग कर रही हैं। इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में परम ने अपनी नई यात्रा की झलक दी। उन्होंने बताया कि वहाँ सब अच्छा है, लेकिन भारत जैसा खाना नहीं मिल रहा। चाइनीज खाने के लिए वह चाइनाटाउन पहुंचीं, लेकिन चॉपस्टिक से खाने में असफल रहीं। शूटिंग के दौरान कड़ाके की ठंड में कंबल में लिपटकर समय बिताना पड़ा। वहीं, यूके में फैंस ने उन्हें पहचानना शुरू कर दिया, और लोग उनके साथ सेल्फी लेने पहुंचे। प्रेरणा की मिसाल एक मेहनती मजदूर परिवार की बेटी ने जिस मुकाम को हासिल किया है, वह देश की लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा है। परम ने साबित किया कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, हौसला, मेहनत और आत्मविश्वास से कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं।

योगी सरकार का बड़ा फैसला: पुलिस भर्ती में आयु सीमा में तीन साल की राहत, 32,679 पदों पर होगी भर्ती

योगी सरकार का बड़ा फैसला, पुलिस भर्ती में आयु सीमा पर तीन साल की राहत 32,679 पदों पर सीधी भर्ती में सभी वर्गों को आयुसीमा में छूट उत्तर प्रदेश में युवाओं के हित में फिर आगे आई योगी सरकार लखनऊ उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं को योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ी राहत दी है। अभ्यर्थियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस में आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर प्रस्तावित सीधी भर्ती-2025 के लिए अधिकतम आयु सीमा में एकमुश्त तीन वर्ष का शिथिलीकरण प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है। लाखों युवाओं को होगा लाभ सीधी भर्ती-2025 के अंतर्गत कुल 32,679 पदों को भरे जाने के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। शासनादेश के अनुसार आरक्षी नागरिक पुलिस (पुरुष/महिला), आरक्षी पीएसी/सशस्त्र पुलिस (पुरुष), आरक्षी विशेष सुरक्षा बल (पुरुष), महिला बटालियन हेतु महिला आरक्षी, आरक्षी घुड़सवार पुलिस (पुरुष) तथा जेल वार्डर (पुरुष एवं महिला) पदों पर भर्ती प्रक्रिया में सम्मिलित होने वाले सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को यह आयु शिथिलीकरण एक बार के लिए प्रदान किया जाएगा। सरकार द्वारा यह निर्णय उत्तर प्रदेश लोक सेवा (भर्ती के लिए आयु सीमा का शिथिलीकरण) नियमावली-1992 के नियम-3 के आलोक में लिया गया है। यह फैसला 31 दिसंबर 2025 को जारी भर्ती विज्ञप्ति के अनुक्रम में 5 जनवरी 2026 को जारी शासनादेश के माध्यम से लागू किया गया है, जिससे बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों को अवसर मिलेगा जो आयु सीमा के कारण अब तक भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो रहे थे। युवाओं के हित में योगी आदित्यनाथ सरकार योगी सरकार का यह कदम साफ संदेश देता है कि प्रदेश की सरकार युवाओं की वास्तविक समस्याओं को समझती है और समाधान के लिए ठोस फैसले लेने से पीछे नहीं हटती। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को न्यायसंगत अवसर देना, रोजगार के अधिक से अधिक विकल्प उपलब्ध कराना और प्रशासनिक निर्णयों में संवेदनशीलता बनाए रखना योगी सरकार की कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है। पुलिस भर्ती में आयु सीमा शिथिलीकरण का यह निर्णय न केवल लाखों युवाओं की उम्मीदों को नया बल देगा, बल्कि यह भी दर्शाता है कि योगी आदित्यनाथ सरकार में युवाओं का भविष्य नीति निर्धारण के केंद्र में है।

ईडी का बड़ा एक्शन: छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में IAS निरंजन दास और 31 आबकारी अधिकारियों की संपत्ति कुर्क

रायपुर  छत्तीसगढ़ में चर्चित शराब घोटाले में ईडी ने आईएएस निरंजन दास समेत 30 आबकारी अधिकारियों की 38.21 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है। ईडी, रायपुर आंचलिक कार्यालय ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की चल रही जांच के तहत 2002 के पीएमएलए के तहत आईएएस निरंजन दास (तत्कालीन आबकारी आयुक्त) और 30 अन्य आबकारी अधिकारियों की 38.21 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है।  इस घोटाले में राज्य के खजाने को 2,800 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ (आगे के खुलासों के आधार पर संशोधित गणना)। इसमें 78 अचल संपत्तियां शामिल हैं जिनमें आलीशान बंगले, प्रीमियम कॉम्प्लेक्स में फ्लैट, व्यावसायिक दुकानें और विशाल कृषि भूमि शामिल हैं। इसके अलावा, 197 चल संपत्तियां भी शामिल हैं जिनमें उच्च मूल्य की सावधि जमा (एफडी), कई बैंक खातों में शेष राशि, जीवन बीमा पॉलिसियां ​​और इक्विटी शेयर और म्यूचुअल फंड का एक विविध पोर्टफोलियो शामिल है।  ईडी का दावा है कि इस घोटाले से राज्य के राजस्व को 2,800 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है, जिसकी राशि आगे की जांच में और बढ़ सकती है। 275 संपत्तियां ईडी के रडार पर ईडी द्वारा कुर्क की गई कुल 275 संपत्तियों में 78 अचल और 197 चल संपत्तियां शामिल हैं। अचल संपत्तियों की अनुमानित कीमत 21.64 करोड़ रुपये है, जिनमें आलीशान बंगले, प्रीमियम रिहायशी कॉलोनियों में फ्लैट, व्यावसायिक दुकानें और बड़े पैमाने पर कृषि भूमि शामिल है। 16.56 करोड़ रुपये मूल्य की चल संपत्तियों में एफडी, बैंक खातों में जमा राशि, जीवन बीमा पॉलिसियां, इक्विटी शेयर और म्यूचुअल फंड में निवेश शामिल हैं। समानांतर आबकारी व्यवस्था का खुलासा ईडी की जांच में सामने आया है कि वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों से जुड़ा एक आपराधिक सिंडिकेट छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग को नियंत्रित कर रहा था। तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास और तत्कालीन सीईओ अरुण पति त्रिपाठी ने मिलकर एक समानांतर आबकारी व्यवस्था खड़ी की, जिसके जरिए सरकारी नियमों को दरकिनार कर अवैध कमाई की गई। 38.21 करोड़ रुपये मूल्य की अटैच की गई संपतियों की जानकारी ''अचल संपतियां (21,64,65,015 रुपये): 78 संपत्तियां जिनमें आलीशान बंगले, प्रीमियम कॉम्प्लेक्स में फ्लैट, व्यावसायिक दुकानें और विस्तृत कृषि भूमि शामिल हैं। चल संपत्तियां (16,56,54,717 रुपये): 197 वस्तुएं जिनमें उच्च मूल्य की सावधि जमा (एफडी), कई बैंक खातों में शेष राशि, जीवन बीमा पॉलिसियां और इक्विटी शेयरों और म्यूचुअल फंडों का विविध पोर्टफोलियो शामिल है। ईडी द्वारा की गई जांच से पता चला है कि वरिष्ठ नौकरशाहों और राजनीतिक हस्तियों से जुड़े एक आपराधिक सिंडिकेट ने छतीसगढ़ आबकारी विभाग को पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया था। निरंजन दास (तत्कालीन आबकारी आयुक्त) और अरुण पति त्रिपाठी (तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सीएसएमसीएल) ने एक समानांतर आबकारी प्रणाली चलाई, जिसने राज्य के नियंत्रणों को दरकिनार करते हुए भारी मात्रा में अवैध कमाई की। इस सिंडिकेट ने सरकारी दुकानों के जरिए अवैध, गैर-कानूनी देसी शराब बनाने और बेचने की "पार्ट-बी" योजना चलाई। इस अवैध शराब का उत्पादन और बिक्री नकली होलोग्राम और गैर-कानूनी बोतलों का इस्तेमाल करके की जाती थी और इसे सरकारी गोदामों को दरकिनार करते हुए सीधे शराब बनाने की भ‌ट्टियों से दुकानों तक पहुंचाया जाता था। यह धोखाधड़ी उक्त उत्पाद शुल्क अधिकारियों की सक्रिय मिलीभगत और साजिश से की गई थी। जांच में यह साबित हुआ कि आबकारी अधिकारियों को उनके अधिकार क्षेत्र में पार्ट-बी शराब की बिक्री की अनुमति देने के लिए प्रति मामले 140 रुपये का निश्चित कमीशन दिया जाता था। अकेले निरंजन दास ने ही 18 करोड़ रुपये से अधिक की पीओसी अर्जित की, जिसके लिए उसे इस घोटाले को अंजाम देने में मदद करने के लिए प्रति माह 50 नाख रुपये की रिश्वत मिलती थी। कुल मिलाकर, 31 आबकारी अधिकारियों ने 89.56 करोड़ रुपये की पीओसी बटोरी/अर्जित की। रायपुर स्थित एसीबी ईओडब्ल्यू द्वारा आईपीसी, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने अपनी जांच शुरू की। पुलिस जांच में पता चला है कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ और आरोपियों को इसके बराबर लाभ मिला। वर्तमान कुकर्की राज्य के राजस्व की रक्षा करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की गहरी मिलीभगत को उजागर करती है।'' ‘पार्ट-बी’ योजना से अवैध शराब बिक्री जांच के अनुसार, सरकारी शराब दुकानों के जरिए ‘पार्ट-बी’ योजना चलाई गई। इसके तहत अवैध देसी शराब का निर्माण और बिक्री की गई। नकली होलोग्राम, गैर-कानूनी बोतलों का उपयोग किया गया और सरकारी गोदामों को बायपास कर सीधे भट्टियों से दुकानों तक शराब पहुंचाई गई। यह पूरी प्रक्रिया आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से संचालित होती थी। कमीशन सिस्टम से करोड़ों की कमाई ईडी की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों को प्रति केस 140 रुपये का कमीशन दिया जाता था। अकेले निरंजन दास ने 18 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित आय हासिल की, जबकि कुल 31 अधिकारियों ने मिलकर करीब 89.56 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की।

भोपाल एम्स की प्रोफेसर रश्मि वर्मा की आत्महत्या के प्रयास के बाद मौत, टॉक्सिक वर्क कल्चर पर उठे सवाल

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में इमरजेंसी एवं ट्रॉमा विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ रश्मि वर्मा की सोमवार को मौत हो गई। वह पिछले 24 दिनों से एम्स के एम्स के आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट में भर्ती थीं। जानकारी के अनुसार, डॉ रश्मि वर्मा ने सोमवार की सुबह 10 करीब अंतिम सांस ली। परिजनों को शव सौंप दिया गया है। बीते दिनों पहले उन्होंने एनेस्थीसिया का हाई डोज ले लिया था। जिसके बाद उनके पति ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. मनमोहन शाक्य उन्हें बेहोशी की हालत में लेकर एम्स पहुंचे थे। 11 दिसंबर को एम्स भोपाल में कराया था भर्ती दरअसल, डॉ. रश्मि वर्मा को 11 दिसंबर को गंभीर हालत में एम्स भोपाल में भर्ती कराया गया था। एनेस्थीसिया का ओवरडोज लेकर खुदकुशी की कोशिश की थी। परिजनों के मुताबिक, उन्हें घर पर अचेत अवस्था में पाया गया, जिसके बाद उनके पति उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर ने उन्हें सीपीआर देकर रिवाइव किया। बताया गया कि उस समय करीब 7 मिनट तक उनकी दिल की धड़कन बंद रही थी। इसके बाद से डॉ. रश्मि का इलाज एम्स के आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर चल रहा था। एम्स के अनुसार, 5 जनवरी की सुबह करीब 11 बजे डॉ. रश्मि वर्मा ने अंतिम सांस ली। उनका शव परिजनों को सौंप दिया गया। डॉ. रश्मि वर्मा ने बेहोशी की दवा (एनेस्थीसिया) का हाई डोज लिया था। उनके पति ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. मनमोहन शाक्य उन्हें बेहोशी की हालत में एम्स लेकर पहुंचे थे। 7 मिनट तक रुकी थी दिल की धड़कन एम्स पहुंचने से पहले करीब 25 मिनट का वक्त निकल चुका था। डॉक्टरों के मुताबिक, इस दौरान डॉ. रश्मि का दिल लगभग 7 मिनट तक धड़कना बंद कर चुका था। इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टरों ने तुरंत सीपीआर शुरू किया और तीन बार रेससिटेशन के बाद उनकी हार्टबीट वापस लाई जा सकी थी। हालांकि, इतने लंबे समय तक ब्रेन को ऑक्सीजन नहीं मिलने से मस्तिष्क को गंभीर क्षति पहुंच चुकी थी। एमआरआई रिपोर्ट में सामने आया गंभीर ब्रेन डैमेज घटना के 72 घंटे बाद कराई गई एमआरआई रिपोर्ट में ‘ग्लोबल हाइपोक्सिया ब्रेन’ की पुष्टि हुई थी। इसका मतलब था कि उनके पूरे मस्तिष्क को लंबे समय तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिली। डॉक्टरों के अनुसार, यह स्थिति अकसर कार्डियक अरेस्ट के बाद होती है। इसमें रिकवरी की संभावना बेहद कम रहती है। डॉ. रश्मि वर्मा 24 दिनों से एम्स के मेन आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर थीं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए थी। हर दिन उम्मीद की किरण तलाशने की कोशिश की गई, लेकिन ब्रेन डैमेज इतना गंभीर था कि सुधार नहीं हो सका। कई बार इलाज का खर्च खुद उठाती थीं डॉ. रश्मि डॉ. रश्मि वर्मा ने प्रयागराज के एमएलएन मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर से एमडी (जनरल मेडिसिन) किया था। वे एम्स भोपाल के अलावा एलएन मेडिकल कॉलेज और पीएमएस भोपाल में भी सेवाएं दे चुकी थीं। पांच साल का टीचिंग अनुभव रखने वाली डॉ. रश्मि गरीब मरीजों की मदद के लिए जानी जाती थीं और कई बार इलाज का खर्च भी खुद उठाती थीं। वर्तमान में सीपीआर ट्रेनिंग प्रोग्राम की नोडल अधिकारी भी थी। घटना के बाद हुई थी आपात बैठक, कई फैसले लिए गए थे डॉ. रश्मि की मौत के बाद एम्स के भीतर के कथित टॉक्सिक वर्क कल्चर, प्रशासनिक दबाव और नोटिस सिस्टम को लेकर सवाल और तेज हो गए हैं। घटना के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और एम्स प्रबंधन की आपात बैठक हुई थी, जिसमें ट्रॉमा एंड इमरजेंसी विभाग के एचओडी को हटाने और विभाग को दो हिस्सों में बांटने जैसे बड़े फैसले लिए गए थे। इस पूरे मामले की गोपनीय जांच के लिए हाई लेवल कमेटी गठित भी की गई थी, जिसकी अब तक रिपोर्ट सामने नहीं आई है। तमाम कोशिशों के बावजूद नहीं बची जान बीते 23 दिनों तक डॉक्टरों की टीम ने लगातार प्रयास किए, लेकिन लंबा इलाज और तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। एम्स प्रशासन ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सहकर्मियों और स्टाफ के बीच शोक की लहर है। डॉ. रश्मि वर्मा एक समर्पित चिकित्सक के रूप में जानी जाती थीं और इमरजेंसी व ट्रॉमा विभाग में उनकी सेवाओं को सराहा जाता रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, इमरजेंसी एंड ट्रॉमा विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि वर्मा 11 दिसंबर 2025 को ड्यूटी पूरी करने बाद शाम को घर लौट आईं थी। रश्मि के पति ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. रतन वर्मा रात करीब साढ़े 10 बजे उनको बेहोशी की हालत में एम्स लेकर आए। डॉ. रतन ने बताया कि घर पर सब नॉर्मल था। सब अपना-अपना काम कर रहे थे। डॉ. रश्मि के पास पहुंचे तो वो बेहोश मिलीं थीं। जिसके बाद उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था। 7 मिनट तक बंद रहा था दिल डॉ रश्मि का दिल करीब 7 मिनट तक बंद रहा, जिससे उनके दिमाग को गंभीर नुकसान पहुंचा । एमआरआई रिपोर्ट में ग्लोबल हाइपोक्सिया ब्रेन डैमेज की पुष्टि हुई थी। डॉ. रश्मि वर्मा बीते कई दिनों से वेंटिलेटर सपोर्ट पर थी। इलाज में जुटे चिकित्सकों की मानें तो उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी।

बर्फ के मैदान में बराबरी की रेस: अल्पाइन स्कीइंग में महिलाओं की बढ़ती ताकत

नई दिल्ली 'अल्पाइन स्कीइंग' विंटर ओलंपिक का एक मशहूर खेल है, जिसमें स्कीयर बर्फीले पहाड़ों पर ढलानों से तेज गति में फिसलते हुए नजर आता है। गति, संतुलन और तकनीक के इस खेल में डाउनहिल, स्लैलम, जाइंट स्लैलम और सुपर-जी जैसे इवेंट होते हैं। 'अल्पाइन' शब्द का अर्थ ऊंचे पहाड़ों से संबंधित या पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़ा है। साल 1800 के आसपास फ्रांसीसी आल्प्स जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में ढलानों पर लोग चढ़ते और उतरते थे। इसी रोमांच के चलते इस खेल का विकास हुआ। इसके बाद नॉर्वे की सेना ने ढलानों पर स्कीइंग को सैन्य कौशल के रूप में विकसित किया। यहीं से आधुनिक स्कीइंग की नींव पड़ी। 19वीं सदी के अंत में आल्प्स में स्कीइंग को एक रोमांचक गतिविधि के रूप में विकसित किया गया। 20वीं सदी की शुरुआत तक महिलाओं ने भी इसमें हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। साल 1924 में स्विट्जरलैंड में पहली महिला अल्पाइन प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। 1936 गार्मिश-पार्टेनकिर्चन शीतकालीन ओलंपिक में अल्पाइन स्कीइंग को पहली बार कंबाइंड इवेंट के रूप में शामिल किया गया, जिसमें डाउनहिल और स्लैलम शामिल थे। इसमें पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी हिस्सा लिया। 1952 हेलसिंकी ओलंपिक में जायंट स्लैलम और 1988 के कैलगरी ओलंपिक में सुपर-जी को शामिल किया गया। डाउनहिल को लंबे ट्रैक पर किया जाता है, जिसे पूरा करने में डेढ़ मिनट से ज्यादा समय लगता है। इस खेल को अल्पाइन स्कीइंग में सबसे तेज गति का इवेंट माना जाता है। सुपर जाइंट स्लैलम (सुपर-जी) इस खेल का दूसरा सबसे तेज इवेंट है, जिसकी शुरुआत साल 1982 में हुई थी। यह गेट्स की जोड़ी से बने ट्रैक पर होती है। स्कीयर अगर एक भी गेट मिस कर देता है, तो उसे अयोग्य घोषित किया जाता है। इस इवेंट में मोड़ डाउनहिल की तुलना में अधिक चौड़े होते हैं। डाउनहिल की तरह सुपर जी रेस भी एक ही राउंड में होती है। सबसे कम समय में रेस पूरी करने वाले स्कीयर को विजेता घोषित किया जाता है। स्पेशल स्लैलम सबसे छोटी रेस होती है, जिसमें 50-60 सेकेंड का समय लगता है। इसमें सबसे ज्यादा चौड़े मोड़ होते हैं। स्कीयर एक ढलान पर बने रास्ते से गेट्स के बीच होते हुए नीचे उतरता है। स्लैलम में स्कीयर को इन गेट्स को छूना पड़ता है, जिसके लिए वे खास सुरक्षा उपकरण पहनते हैं। इस इवेंट में एक ही ढलान पर दो अलग-अलग कोर्स पर दो रन होते हैं। दोनों रन के कुल समय को जोड़ा जाता है। सबसे कम समय में रेस पूरी करने वाला विजेता होता है। जाइंट स्लैलम इवेंट में मोड़ के बीच 20-30 मीटर की दूरी निर्धारित होती है, जिसे पूरा करने में आमतौर पर एक से डेढ़ मिनट लगते हैं। इसके मोड़ स्पेशल स्लैलम की तुलना में चौड़े होते हैं और रास्ता दिखाने के लिए गेट्स का इस्तेमाल किया जाता है। यह रेस भी दो रन में होती है। अल्पाइन कंबाइंड इवेंट में एक तेज रेस और एक टेक्निकल रेस होती है। दोनों रेस के समय को जोड़कर विजेता का फैसला किया जाता है। जेरेमी बुजाकोव्स्की 1964 और 1968 शीतकालीन ओलंपिक में अल्पाइन स्कीइंग में भाग लेने वाले पहले भारतीय थे। उनके बाद किशोर रहतना राय (1988), शैलजा कुमार (1988), हिमांशु ठाकुर (2014) और आरिफ खान (2022) ने भी विंटर ओलंपिक में इस खेल में देश का प्रतिनिधित्व किया। भले ही अब तक भारत इस खेल में ओलंपिक पदक हासिल नहीं कर सका है, लेकिन धैर्य, निवेश और तकनीकी तैयारी के साथ ओलंपिक पदक को 'संभव' बनाया जा सकता है।

पटना में मौर्य लोक के बकायेदार दुकानदारों का कटेगा कनेक्शन

पटना. राजधानी के हृदयस्थल मौर्य लोक काम्प्लेक्स में वर्षों से लंबित बकाया वसूली को लेकर नगर निगम ने अब सख्ती शुरू कर दी है। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने लंबे समय से ग्राउंड रेंट व मेंटेनेंस शुल्क नहीं देने वालों को नोटिस के साथ सख्त चेतावनी दी है कि वे सात दिन में बकाया भुगतान कर दें। ऐसा नहीं करने पर बिना बताए उनके प्रतिष्ठान की बिजली व पानी का कनेक्शन काट दिया जाएगा। साथ ही अनुबंध के अनुसार उन पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। हाल में मौर्य लोक काम्प्लेक्स स्थित 278 दुकानों-कार्यालयों पर बकाया मेंटिनेंस शुल्क व ग्राउंड रेंट की समीक्षा की गई थी। इसमें पाया गया कि लंबे समय से अधिसंख्य लोग इसका भुगतान नहीं कर रहे हैं। इस कारण दुकानदारों व कार्यालय स्वामियों को 3 करोड़ 66 लाख 15 हजार चार रुपये बकाया हो गया है। दोनों माध्यमों से जमा कर सकते हैं टैक्स इस गंभीर स्थिति को देखते हुए नगर आयुक्त ने सभी बकायेदारों को अंतिम चेतावनी के रूप में नोटिस जारी की है। नगर आयुक्त ने कहा कि दुकानदार व कार्यालय संचालक ऑनलाइन या ऑफलाइन, दोनों तरह से बकाया भुगतान कर सकते हैं। मौर्य लोक काम्प्लेक्स में अवस्थित सभी दुकानदार व कार्यालय संचालक नगर निगम की की वेबसाइट पीएमसी डाट बिहार डाट जीओवी डाट इन के पीआरडीएशाप्स डाट एएसपीएक्स से आनलाइन या निगम कार्यालय में बकाया राशि जमा करा सकते हैं। उन्होंने सभी दुकानदारों व कार्यालय स्वामियों से अपील की है कि वे समयसीमा के भीतर बकाया राशि का भुगतान कर कार्रवाई से बचें। 1998 से मासिक मेंटेनेंस शुल्क जमा नहीं मौर्य लोक काम्प्लेक्स के अधिसंख्य दुकानदारों व कार्यालय संचालकों ने अप्रैल 1998 से मासिक मेंटेनेंस शुल्क जमा नहीं किया है। इसके अलावा वर्ष 1999-2000 से वार्षिक ग्राउंड रेंट भी बकाया है। यह स्थिति लगभग 27 वर्षों से बनी हुई है। निगम प्रशासन के अनुसार समय-समय पर कई बार स्मारपत्र व नोटिस जारी किए गए, लेकिन बकाया राशि जमा नहीं कराई गई। निगम की आय का बड़ा हिस्सा ऐसे व्यावसायिक परिसरों से आता है।

भावांतर योजना में सोयाबीन का मॉडल रेट 4458 रुपए जारी, किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा

भावांतर योजना में सोयाबीन का मॉडल रेट 4458 रुपए जारी भोपाल भावांतर योजना 2025 के अंतर्गत  सोयाबीन विक्रेता किसानों के लिए मॉडल रेट प्रतिदिन जारी किया जा रहा है। सोमवार 5 जनवरी को 4458 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया है। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है जिन्होंने अपनी सोयाबीन की उपज मंडी प्रांगणों में विक्रय की है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर की राशि की गणना की जाएगी। मॉडल रेट और न्यूनतम समर्थन मूल्य के भावांतर की राशि राज्य सरकार द्वारा दी जा रही है। सोयाबीन का पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को 4020 रुपए प्रति क्विंटल जारी किया गया था। इसी तरह 8 नवंबर को 4033 रुपए, 9 और 10 नवंबर को 4036 रुपए, 11 नवंबर को 4056 रुपए, 12 नवंबर को 4077 रुपए, 13 नवंबर को 4130 रुपए, 14 नवंबर को 4184 रुपए, 15 नवंबर को 4225 रुपए, 16 नवंबर को 4234 रुपए, 17 नवंबर को 4236 रुपए, 18 नवंबर को 4255 रुपए, 19 नवंबर को 4263 रुपए, 20 नवंबर को 4267 रुपए, 21 नवंबर को 4271 रुपए, 22 नवंबर को 4285 रुपए, 23 एवं 24 नवंबर को 4282 रुपए, 25 नवंबर को 4277 रुपए, 26 नवंबर को 4265 रुपए, 27 नवंबर को 4252 रुपए, 28 नवंबर को 4260 रुपए, 29 नवंबर को 4240 रुपए और 30 नवंबर को 4237 रुपए प्रति क्विंटल  का मॉडल रेट जारी किया गया था। इसी तरह 1 दिसंबर को 4239 रुपए, 2 दिसंबर को 4235 रुपए, 3 दिसंबर को 4240 रुपए, 4 दिसंबर को 4235 रुपए, 5 दिसंबर को 4230 रुपए, 6 दिसंबर को 4217 रुपए, 7 दिसंबर को 4222 रुपए, 8 दिसंबर को 4219 रुपए, 9 दिसंबर को 4217 रुपए और 10 दिसंबर को 4210 रुपए प्रति क्विंटल  का मॉडल रेट जारी हुआ था। इसी प्रकार 11 दिसंबर को 4207 रुपए, 12 दिसंबर को 4202 रुपए, 13 दिसंबर को 4204 रुपए, 14 दिसंबर को 4208 रुपए, 15 दिसंबर को 4208 रुपए, 16 दिसंबर को 4209 रुपए, 17 दिसंबर को 4205 रुपए, 18 दिसंबर को 4195 रुपए, 19 दिसंबर को 4201 रुपए, 20 दिसंबर को 4191 रुपए, 21 दिसंबर को 4193 रुपए, 22 दिसंबर को 4194 रुपए, 23 दिसंबर को 4209 रुपए और 24 दिसंबर को 4213 रुपए, 25 दिसंबर को 4235 रुपए, 26 दिसंबर को 4257 रुपए, 27 और 28 दिसंबर को 4271 रुपए, 29 दिसंबर को 4267 रुपए, 30 दिसंबर को 4296 रुपए, 31 दिसंबर को 4345 रुपए, 1 जनवरी को 4380 रुपए, 2 जनवरी को 4432 रुपए, 3 जनवरी को 4439 रुपए और 4 जनवरी को 4459 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया था। राज्य सरकार की गारंटी है कि किसानों को हर हाल में सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य की 5328 रुपए  प्रति क्विंटल की राशि मिलेगी। भावांतर राशि का भुगतान भावांतर राशि का भुगतान विक्रय दिनांक से 15 दिवस के भीतर किसान के आधार लिंक्ड बैंक खाते में किया जा रहा है जो कि मॉडल रेट गणना पर निर्भर है। दिनांक 24 अक्टूबर 2025 से 6 नवंबर 2025 तक लगभग 1.33 लाख पंजीकृत किसानों को 233 करोड़ का प्रथम भुगतान 13 नवंबर, 2025 को किया गया। इसके बाद 7 नवंबर 2025 से 17 नवंबर 2025 तक लगभग 1.34 लाख पंजीकृत किसानों को 249 करोड़ का द्वितीय भुगतान  26 नवंबर, 2025 को किया गया। तृतीय चरण में 17 नवंबर 2025 से 19 दिसंबर 2025 तक विक्रय करने वाले लगभग 3.77 लाख पंजीकृत किसानों को 810 करोड़ का भुगतान 28 दिसंबर, 2025 को किया गया। इस प्रकार अभी तक 6.54 लाख पंजीकृत किसानों को भावांतर की 1292 करोड़ की राशि का भुगतान किया गया है।  

LG का नया OLED TV, मोबाइल जितनी पतली थिकनेस और शानदार फीचर्स, CES 2026 में हुआ लॉन्च

 नई दिल्ली  LG ने एक कमाल का OLED TV लॉन्च कर दिया है, जिसको लेकर कंपनी ने दावा किया है कि यह दुनिया का सबसे स्लिम OLED टीवी है. इसको कंपनी ने कंज्यूमर इलेक्ट्रोनिक शो (CES) 2026 के लिए लॉन्च किया है.  LG के इस मॉडल का नाम LG OLED evo W6 है, इसके लिए कंपनी ने LG के वॉलपेपर डिजाइन का यूज किया है, जिसको सबसे पहले साल 2017 में इंट्रोड्यूस्ड किया था. अब इस टेक्नोलॉजी को ट्रू वायरलेस कनेक्टिविटी के साथ मिलाकर बनाया गया है.  9mm थिकनेस के साथ आता है LG का यह लेटेस्ट टीवी 9mm थिकनेस के साथ आता है, जबकि सैमसंग गैलेक्सी एस 24 एफई की थिकनेस 8mm की है. ऐसे में कहा जा सकता है कि इस टीवी की थिकनेस करीब एक स्मार्टफोन के बराबर है.  पोर्ट्स के लिए अलग से जीरो कनेक्ट बॉक्स मिलेगा LG ने इस टीवी को लेकर एक अन्य दावा यह भी किया है कि यह कंपनी का सबसे एडवांस्ड पिक्चर इनोवेशन है. कंपनी ने इसको वायरलेस बनाने के लिए सभी पोर्ट्स को Zero Connect Box में शिफ्ट कर दिया है, जिसको टीवी से 10 मीटर तक रखा जा सकता है, जिसकी वजह से यह टीवी सभी वायर से दूर रहता है. न्यू डिस्प्ले सिस्टम का यूज किया गया है  LG के इस न्यू टीवी में न्यू डिस्प्ले सिस्टम का यूज किया गया है, जिसको रेडियंट कलर टेक्नोलॉजी का नाम दिया है. यह टेक्नोलॉजी ब्राइटनेस और कलर को बेहतर करती है, जिसकी वजह से रिफ्लेक्शन डाउन होता है.  पुराने OLED मॉडल की तुलना में कई गुना ज्यादा ब्राइट LG ने इसको लेकर एक अन्य दावा किया है कि पुराने OLED मॉडल की तुलना में 3.9 गुना ज्यादा ब्राइट हैं. इसके लिए कंपनी ने Brightness Booster Ultra फीचर का यूज किया है. LG टीवी के स्पेसिफिकेशन्स  LG के इस टीवी में 4K रेजोल्युशन और 165Hz रिफ्रेश रेट्स का सपोर्ट मिलेगा. इसमें 0.1ms पिक्सल रिस्पोंस टाइम मिलता है. इसमें एनवीडिया G-SYNC कंपेटेबिलिटी, AMD FreeSync प्रीमियम और ऑटो लो लेटेंसी का सपोर्ट मिलता है.  LG TV में यूज होने वाला प्रोसेसर  LG के इस लेटेस्ट टीवी में Alpha 11 AI Processor Gen3 प्रोसेसर का यूज किया गया है, जिसके साथ Neural Processing Unit (NPU) दिया है. यह पुराने वर्जन की तुलना में 5.6 गुना ज्यादा पावरफुल वर्जन है. यह टीवी webOS पर काम करता है. हालाकि कीमत को लेकर कोई जानकारी नहीं है.