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भोपाल मेट्रो में यात्रियों की कमी, शेड्यूल में बदलाव—अब ट्रेन चलेगी दोपहर से शाम तक

भोपाल  राजधानी भोपाल में जल्दबाजी में शुरू की गई मेट्रो सेवा अब सवालों के घेरे में है. एक ओर मेट्रो स्टेशनों और रूट को लेकर खामियां सामने आईं, तो दूसरी ओर आधे-अधूरे कॉरिडोर पर चलाई जा रही मेट्रो अब सवारी की कमी से जूझ रही है. हालत यह है कि संचालन के महज 15 दिन में ही भोपाल मेट्रो की रफ्तार थमने लगी है और संचालन समय व ट्रिप में कटौती करनी पड़ रही है. 21 दिसंबर से आम यात्रियों के लिए शुरु हुआ था संचालन भोपाल मेट्रो को 20 दिसंबर 2025 को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरी झंडी दिखाकर किया था. जबकि इसके अगले दिन 21 दिसंबर से आम जनता के लिए मेट्रो के गेट खोल दिए गए. शुरुआती एक-दो दिन लोगों में उत्सुकता दिखी और करीब 5 से 6 हजार यात्रियों ने मेट्रो में सफर किया. लेकिन यह उत्साह ज्यादा दिन टिक नहीं सका. दिन गुजरने के साथ यात्रियों की संख्या लगातार घटती चली गई. अब सुबह 9 बजे से नहीं होगा संचालन वर्तमान में स्थिति यह हो गई कि अब रोजाना केवल 500 से 800 यात्री ही मेट्रो का इस्तेमाल कर रहे हैं. कई बार पूरी की पूरी ट्रेन बिना यात्रियों के ही स्टेशन से गुजरती नजर आ रही है. यात्रियों की इस भारी कमी ने मेट्रो कॉर्पोरेशन की चिंता बढ़ा दी है. इसी के चलते भोपाल मेट्रो कॉर्पोरेशन ने संचालन शेड्यूल में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है. अब सुबह 9 बजे की जगह दोपहर 12 बजे से मेट्रो का संचालन होगा. अब दोपहर से शाम तक 13 ट्रिप चलेगी टाइम टेबल में बदलाव के साथ भोपाल मेट्रो में ट्रिप की संख्या भी 17 से घटाकर 13 कर दी गई है. नया शेड्यूल 5 जनवरी यानि आज से प्रभावी रहेगा. नए शेड्यूल के अनुसार, मेट्रो दोपहर 12 बजे से शाम साढ़े 7 बजे तक ही चलेगी. पहली ट्रेन दोपहर 12 बजे एम्स स्टेशन से रवाना होकर 12 बजकर 25 मिनट पर सुभाष नगर स्टेशन पहुंचेगी. इसके बाद 12 बजकर 40 मिनट पर सुभाष नगर से रवाना होकर 1 बजकर 5 मिनट पर एम्स पहुंचेगी. इस तरह मेट्रो लगभग 75 मिनट के अंतराल में अपनी राउंड ट्रिप पूरी करेगी. इस तरह घटता गया यात्रियों का ग्राफ यात्रियों के आंकड़े भी मेट्रो की गिरती साख को बयां कर रहे हैं. 21 दिसंबर से 2 जनवरी तक कुल 29 हजार यात्रियों ने भोपाल मेट्रो में सफर किया. पहले दिन 6 हजार 568 यात्रियों ने मेट्रो का इस्तेमाल किया. 22 दिसंबर को 2 हजार 896 यात्रियों. 23 को 2 हजार 163 यात्रियों, 24 को 1 हजार 787 यात्रियों, 25 को 4 हजार 264 यात्रियों, 26 को 1 हजार 473 यात्रियों, 27 को 1200 यात्रियों, 28 को 2 हजार 349 यात्रियों, 29 को 1100 यात्रियों, 30 को 967 यात्रियों, 31 को 1 हजार 113 यात्रियों, एक जनवरी को 2 हजार 23 और दो जनवरी को सिर्फ 1 हजार 65 यात्रियों ने ही सफर किया. सवारियों को आकर्षित करना बड़ी चुनौती आर्किटेक्ट और टाउन प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ का कहना है कि, ''भोपाल में मेट्रो जिस मार्ग पर चल रही है, वहां मेट्रो के अलावा बस व अन्य साधन भी मौजूद हैं. इसके साथ ही भोपाल मेट्रो में एम्स से सुभाष नगर तक करीब 7 किलोमीटर पहुंचने में 35 से 40 मिनट लग रहे हैं. जबकि इसी मार्ग पर महज 10 से 15 मिनट में किसी अन्य परिवहन से पहुंचा जा सकता है.'' कुलश्रेष्ठ ने कहा कि, ''इतने कम समय में शेड्यूल बदलने और ट्रिप घटाने को लेकर सोशल मीडिया पर भी मेट्रो को लेकर तंज कसे जा रहे हैं. फिलहाल भोपाल मेट्रो के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों को आकर्षित करना और नियमित सवारी बढ़ाना है.'' शाम को 30 मिनट बढ़ाया गया मेट्रो का समय भोपाल मेट्रो के समय में बदलाव क्यों किया गया है, इसको लेकर कोई भी अधिकारी बयान देने से बच रहे हैं. मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कार्पेारेशन के एमडी कृष्णा चैतन्य का कहना है कि, ''सुबह ठंड के कारण लोग कम निकलना पसंद कर रहे हैं. जिससे सुबह के समय लोगों की संख्या कम रहती है. लेकिन दोपहर के बाद सवारियों की भीड़ बढ़ती है. इसलिए पहले मेट्रो का संचालन शाम 7.25 बजे तक किया जा रहा था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 7.55 बजे तक किया गया है.''

माही का बड़ा फैसला: तलाक के बाद बच्चों की परवरिश अकेले करेंगी, एलिमनी नहीं ली

मुंबई  टीवी इंडस्ट्री के मोस्ट पावरफुल कपल में शुमार माही विज और जय भानुशाली अलग हो गए हैं. दोनों ने आपसी सहमति से 14 साल की शादी को खत्म कर दिया है. 4 जनवरी को माही और जय ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर पोस्ट शेयर करके तलाक का ऐलान किया. दोनों के सेपरेशन से फैंस दुखी हैं. मगर कपल का कहना है कि अलग होने के बाद भी उनके बीच दोस्ती का रिश्ता कायम रहेगा. उनके बीच कोई निगेटिविटी नहीं है.  टूट गया माही-जय का रिश्ता तलाक के बाद कई लोगों के मन में ये बड़ा सावल है कि क्या माही ने जय भानुशाली से एलिमनी डिमांड की है? कानूनी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, माही ने जय से अलग होने पर एलीमनी और मेंटेनेंस पैसा लेने से इनकार कर दिया है. सूत्र ने बताया है कि माही और जय ने अपने रिश्ते को काफी टाइम और एफर्ट्स देने के बाद आपसी सहमति से अलग होने का फैसला किया है. दोनों के रिश्ते में चीजें वर्कआउट नहीं कर रही थीं. ऐसे में दोनों का मानना है कि शांति से अलग होकर आगे बढ़ना ही सबसे सही तरीका है.  एलिमनी नहीं लेंगी माही सूत्र ने आगे ये भी बताया कि जय से अलग होने पर माही ने एलिमनी और तीनों बच्चों तारा, खुशी और राजवीर के लिए कोई मेंटेनेंस अमाउंट नहीं लिया है. तलाक का फैसला म्यूचुअल था, इसलिए दोनों ने ही बिना किसी विवाद के रिश्ते को खत्म करने का निर्णय लिया.  कपल के जो करीबी हैं उन्हें पता है कि तलाक का निर्णय लेने से पहले दोनों ने ही अपनी शादी को बचाने की काफी कोशिश की थी. लेकिन दोनों के रिश्ते में आई दूरियां नहीं मिट पाईं. ऐसे में जय और माही ने मिलकर अलग होने का फैसला लिया. दोनों ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर अलग होने की न्यूज साझा की, जिससे उनके सभी चाहनेवालों को बड़ा झटका लगा.  काम पर ध्यान दे रहीं माही तलाक के बाद माही अब अपनी पूरी एनर्जी अपने काम पर लगाना चाहती हैं. वो अपने करियर पर पूरी तरह से फोकस कर रही हैं. एक्ट्रेस नई अपॉर्चुनिटी और कमिटमेंट्स का पूरे डेडिकेशन के साथ उनका वेलकम कर रही हैं. माही के करीबी लोगों का कहना है कि एक्ट्रेस पॉजिटिव माइंडसेट के साथ काम और पर्सनल ग्रोथ पर ध्यान दे रही हैं. वो इंडेपेंटली आगे बढ़ना चाहती हैं.   माही और जय के रिश्ते की बात करें तो लंबी डेटिंग के बाद कपल ने साल 2011 में शादी रचाई थी. वो टीवी के पावर कपल में शुमार किए जाते थे. दोनों के तीन बच्चे हैं. दों बच्चों खुशी और राजवीर को उन्होंने गोद लिया है और तारा उनकी खुद की बेटी है. तलाक के बाद दोनों मिलकर अपने बच्चों की परवरिश करेंगे. उन्होंने अच्छे नोट पर रिश्ता का 'द एंड' किया है. 

बिहार के गणतंत्र दिवस समारोह में बालिकाएं बैंड बजाकर करेंगी कराटे का प्रदर्शन

पटना. शिक्षा विभाग ने गांधी मैदान, पटना में आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह (26 जनवरी) की तैयारी शुरू कर दी है। इस बार गणतंत्र दिवस समारोह का थीम ' उन्नत बिहार- उज्ज्वल भविष्य ' रखा गया है। इसी थीम पर झांकियां निकाली जाएंगी। शिक्षा विभाग ने गणतंत्र दिवस समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में चलाई जा रही योजनाओं को शामिल करेगा। स्कूलों में बालिकाओं की बैंड टीम तैयार की गई है। बालिकाओं की बैंड टीम गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होंगी, जो बैंड बजाते हुए शिक्षा विभाग की झांकी के साथ आगे बढ़ेंगी। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की लड़कियों को रानी लक्ष्मी बाई योजना के तहत कराटे में प्रशिक्षण देकर दक्ष बनाया गया है। ये लड़कियां भी शिक्षा विभाग के झांकी के साथ कराटे का प्रदर्शन करेंगी। झांकी में दिखेगी शिक्षा विभाग की योजनाएं गणतंत्र दिवस समारोह में शिक्षा विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को पोस्टर और बैनर के माध्यम से प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। जिसमें प्रारंभिक स्कूलों में बच्चों को दी जा रही मध्याह्न भोजन योजना, साइकिल व पोशाक योजना, छात्रवृत्ति योजना, आइसीटी लैब, कंप्यूटर पर पढ़ते बच्चे, टैब के माध्यम से उपस्थित दर्ज करते शिक्षक, शिक्षक नियुक्ति, सुरक्षित शनिवार, कक्षा में पढ़ते बच्चे, प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे शिक्षक, कक्षा नौ से 12 वीं के विद्यार्थियों को दी जा रही प्रतियोगी तैयारी व माक टेस्ट, पाठ्यपुस्तक आदि को शामिल किया गया है।

भारतीय महिला टीम की कप्तानी को लेकर चौंकाने वाला बयान, दिग्गज ऑलराउंडर ने बताया मंधाना का विकल्प

नई दिल्ली भारत की ऐतिहासिक महिला विश्व कप 2025 जीत के बाद अब चर्चा का केंद्र टीम का भविष्य और नेतृत्व है। मौजूदा कप्तान हरमनप्रीत कौर 36 वर्ष की हो चुकी हैं और उनके शानदार करियर के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही उत्तराधिकारी की खोज तेज हो गई है। जहां स्मृति मंधाना को लंबे समय से अगला कप्तान माना जा रहा था, वहीं दक्षिण अफ्रीका की दिग्गज ऑलराउंडर मैरिज़ेन कैप ने एक अलग नाम आगे बढ़ाकर बहस को नया मोड़ दे दिया है। उनका मानना है कि भारत को ऐसा लीडर चाहिए जो टीम को जोड़कर रख सके। हरमनप्रीत कौर के बाद कौन? लीडरशिप पर नई बहस विश्व कप जीत के बाद भारतीय महिला टीम स्थिरता और निरंतरता के दौर में है, लेकिन कप्तानी का सवाल अब टाला नहीं जा सकता। हरमनप्रीत ने कई सालों तक टीम का नेतृत्व किया है, पर उम्र और भविष्य की योजना को देखते हुए बीसीसीआई को दीर्घकालिक विकल्प की ज़रूरत है। ऐसे में लीडरशिप सिर्फ रणनीति तक सीमित नहीं, बल्कि खिलाड़ियों को साथ लेकर चलने की क्षमता भी अहम बन गई है। मैरिजेन कैप का चौंकाने वाला समर्थन 5 जनवरी 2026 को दिए एक इंटरव्यू में मैरिज़ेन कैप ने जेमिमा रोड्रिग्स को भारत की अगली कप्तान के रूप में देखने की इच्छा जताई। कैप के अनुसार, जेमिमा में वर्षों से लीडरशिप के गुण दिखाई देते रहे हैं। उन्होंने कहा कि कप्तानी केवल फील्ड सेटिंग और फैसलों तक सीमित नहीं होती, बल्कि टीम के भीतर विश्वास और एकता बनाना भी उतना ही जरूरी है—और जेमिमा इसमें स्वाभाविक रूप से आगे हैं। पर्सनैलिटी और परफॉर्मेंस का सही संतुलन कैप ने ज़ोर देकर कहा कि जेमिमा की सबसे बड़ी ताकत उनकी पर्सनैलिटी है। वह खिलाड़ियों को जोड़ती हैं, माहौल को सकारात्मक रखती हैं और हर खिलाड़ी की परवाह करती हैं। हाल ही में विश्व कप के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ खेली गई उनकी नाबाद 127 रनों की पारी ने यह भी साबित किया कि वह बड़े मंच और दबाव को संभाल सकती हैं। 25 साल की उम्र में इस तरह की परिपक्वता उन्हें नेतृत्व के लिए तैयार बनाती है। WPL 2026: जेमिमा के लिए लीडरशिप की अग्निपरीक्षा जेमिमा रोड्रिग्स को WPL 2026 सीज़न के लिए दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी सौंपे जाने के साथ ही यह चर्चा और मजबूत हो गई है। वह अनुभवी मेग लैनिंग की जगह ले रही हैं, जो अब UP वॉरियर्ज का नेतृत्व करेंगी। इस बदलाव को भारतीय क्रिकेट में एक रणनीतिक प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है, जहां जेमिमा की कप्तानी को हाई-प्रेशर लीग में परखा जाएगा। दिल्ली कैपिटल्स और भविष्य की राह दिल्ली कैपिटल्स के को-ओनर पार्थ जिंदल ने जेमिमा पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि टीम की पहली पिक से कप्तान बनने तक का उनका सफ़र प्रेरणादायक है। जब DC 10 जनवरी को मुंबई इंडियंस के खिलाफ अपना अभियान शुरू करेगी, तो सभी की निगाहें जेमिमा पर होंगी। अगर वह टीम को पहला WPL खिताब दिलाने में सफल रहती हैं, तो भारत की अगली महिला कप्तान के रूप में उनका दावा और भी मजबूत हो जाएगा।  

मनरेगा का नाम बदलने के खिलाफ पंजाब में AAP का जोरदार प्रदर्शन

अमृतसर. मनरेगा का नाम बदलने के खिलाफ और इसे कमजोर किए जाने का आरोप लगाते हुए आम आदमी पार्टी ने शनिवार को पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के सरहिंद में केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. इस विरोध प्रदर्शन में हजारों मनरेगा मजदूरों ने हिस्सा लिया. प्रदर्शन का नेतृत्व फतेहगढ़ साहिब से आम आदमी पार्टी के विधायक लखबीर सिंह राय ने किया. प्रदर्शन में शामिल हुए मनरेगा मजदूर प्रदर्शन में दलित, गरीब और मजदूर वर्ग से जुड़े बड़ी संख्या में मनरेगा कामगार शामिल हुए. लखबीर सिंह राय और आम आदमी पार्टी पंजाब की एससी विंग के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह जीपी सहित पार्टी के कई कार्यकर्ता भी मौजूद रहे. सभी ने एक सुर में कहा कि जब तक मजदूर विरोधी वीबी जी राम जी कानून वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. सभा को संबोधित करते हुए विधायक लखबीर सिंह राय ने कहा कि मोदी सरकार मनरेगा का नाम बदलकर वीबी जी राम जी करने के जरिए राजनीति कर रही है और इस योजना को कमजोर करने की कोशिश कर रही है. 'पूरे पंजाब में आंदोलन करेगी AAP' गुरप्रीत सिंह जीपी ने कहा कि पिछले 12 साल में मोदी सरकार ने पंजाब को कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने युवाओं, महिलाओं और उद्योगों से किए गए वादे पूरे नहीं किए और पंजाब के फंड रोककर विकास में बाधाएं पैदा कीं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मनरेगा मजदूरों का उत्पीड़न बंद नहीं किया गया, तो आम आदमी पार्टी पूरे पंजाब में बड़ा और तेज आंदोलन शुरू करेगी.

मुकुंदपुर टाइगर सफारी प्रबंधन पर उठे सवाल, मादा तेंदुआ की मौत से मचा हड़कंप

व्हाइट टाइगर सफारी में जश्न, जू सेंटर में सवाल: दो दिन बाद सामने आई तेंदुआ की मौत मुकुंदपुर टाइगर सफारी प्रबंधन पर उठे सवाल, मादा तेंदुआ की मौत से मचा हड़कंप  उम्र पूरी होने का दावा, लेकिन निगरानी पर सवाल: मुकुंदपुर जू सेंटर में तेंदुआ की मौत सतना  नए साल के आगमन पर जहां मार्तंड सिंह व्हाइट टाइगर सफारी एवं जू सेंटर में पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिली और करीब 18 हजार सैलानी विभिन्न प्रजातियों के वन्य जीवों का दीदार करने पहुंचे, वहीं दूसरी ओर जू सेंटर से जुड़ी एक गंभीर और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जू सेंटर में एक मादा तेंदुआ की मौत रहस्यमय परिस्थितियों में हो गई, जिसकी जानकारी प्रबंधन को दो दिन बाद लग पाई। इस घटना के सामने आने के बाद जू प्रबंधन की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जू प्रबंधन से जुड़े सूत्रों के अनुसार मादा तेंदुआ की मौत करीब दो दिन पहले ही हो चुकी थी, लेकिन इसकी भनक प्रबंधन को सोमवार को लगी। हैरानी की बात यह है कि जू सेंटर में प्रत्येक जीव और प्राणी की नियमित निगरानी का दावा करने वाला प्रबंधन दो दिनों तक इस घटना से अनजान रहा। यह लापरवाही अपने आप में कई सवाल खड़े करती है, खासकर तब जब जू सेंटर में बड़ी संख्या में पर्यटक मौजूद थे और सुरक्षा एवं देखरेख के पुख्ता इंतजाम होने का दावा किया जाता रहा है। पहले इंकार अब कर रहे स्वीकार एसडीओ  इस पूरे मामले में उप वन मंडल अधिकारी रामेश्वर टेकाम को भी घटना की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी, जो व्यवस्थागत चूक की ओर इशारा करती है। जू सेंटर के अधिकारियों का कहना है कि मृत मादा तेंदुआ की उम्र करीब 20 वर्ष थी, जो तेंदुए की औसत आयु के आसपास मानी जाती है। जानकारी के अनुसार तेंदुआ ने 2 जनवरी की तड़के करीब 3 बजकर 48 मिनट में अंतिम सांस ली। मुकुंदपुर में तैनात पशु चिकित्सक डॉ नितिन गुप्ता का कहना है कि मादा तेंदुआ ने अपनी प्राकृतिक आयु लगभग पूरी कर ली थी और मौत सामान्य प्रतीत होती है। पन्ना से आई थी मादा पन्ना नाम से ही जानते थे सब बताया गया कि मादा तेंदुआ को वर्ष 2020 में पन्ना से मुकुंदपुर लाया गया था और तब से वह जू सेंटर का हिस्सा थी। हालांकि मौत को सामान्य बताया जा रहा है, लेकिन जिस तरह से प्रबंधन को दो दिन तक इसकी जानकारी नहीं लग सकी और अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, उसने जू सेंटर की निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। हालांकि मामला आने के बाद प्रबंधन ने आधिकारिक प्रेस नोट जारी कर दिया गया। दबाएं रहा मामला  बहुप्रतीक्षित और प्रतिष्ठित मुकुंदपुर टाइगर सफारी, जो प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में अपनी पहचान बना चुका है, वहां इस तरह की लापरवाही सामने आना चिंताजनक है। वन्य जीव संरक्षण और उनकी देखरेख के दावों के बीच यह घटना व्यवस्थाओं की पोल खोलती नजर आ रही है। इसी मामले जू प्रबंधन को मामला दबाकर रखना।

खेलते समय प्रेशर IED पर रखा पैर, ग्रामीण इलाके में मासूम गंभीर घायल

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर में एक ग्रामीण बालक नक्सलियों द्वारा प्लांट किए गए IED की चपेट में आ गया. हादसे में बालक गंभीर रूप से घायल हो गया. उसके पैरों में गंभीर चोट आई है. घटना के बाद उसे 222 बटालियन केरिपु कैंप कोरचोली में प्राथिमक उपचार दिया गया और फिर बेहतर इलाज के लिए बीजापुर अस्पताल रवाना किया गया है. जानकारी के मुताबिक, ग्राम कोरचोली नदीपारा निवासी- राम पोटाम, पिता स्व. लच्छु पोटाम, उम्र 15 वर्ष, सुबह-सुबह लेंड्रा–कोरचोली जंगल क्षेत्र की तरफ घूमने गया था. इसी दौरान माओवादियों द्वारा लगाए गए प्रेशर IED की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया. बता दें, सुरक्षा बलों के जवान लगातार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सघन सर्चिंग कर माओवादियों द्वारा प्लांट किए गए IED को ढूंढकर निष्क्रिय करने में लगे हुए हैं. ताकि किसी भी ग्रामीण या सुरक्षा बलों को नुकसान न पहुंचे. लेकिन नक्सलियों ने भारी संख्या में जगह-जगह पर IED प्लांट किए हुए हैं, जिसकी चपेट में आकर कई ग्रामीण और जवान घायल हो चुके हैं.

मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने लिखी संघर्ष से सफलता तक की कहानी

यही है अभ्युदय, जौनपुर के किसान की बेटी पूजा बनी असिस्टेंट कमांडेंट  मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने लिखी संघर्ष से सफलता तक की कहानी आर्थिक कठिनाइयों के बीच शिक्षा बनी ताकत दिल्ली से जौनपुर तक का सफर पहले ही प्रयास में यूपीएससी-सीएपीएफ परीक्षा पास कर गांव और प्रदेश का नाम किया रोशन लखनऊ  सामाजिक न्याय और समान अवसर की दिशा में उत्तर प्रदेश देश में अपनी एक नई पहचान गढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी प्रतिभा संसाधनों के अभाव में पीछे न रह जाए। जौनपुर की पूजा सिंह की सफलता इसी सोच का जीवंत उदाहरण है। एक किसान परिवार में जन्मी पूजा सिंह ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के माध्यम से वह मुकाम हासिल किया है जो कभी उनके लिए दूर का सपना लगता था। पूजा कहती हैं कि “मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने मेरे सपनों को राह दी।” पूजा का जीवन संघर्ष और संकल्प की मिसाल है। उनके पिता खेती करते हैं और सीमित आय में परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बचपन से ही पूजा ने अभाव को काफी निकट से देखा। इन परिस्थितियों ने उन्हें कमजोर नहीं बनाया वरन उनकी इच्छा शक्ति को और प्रबल बनाने का काम किया। उन्होंने तय कर लिया था कि शिक्षा के माध्यम से वह न केवल अपना भविष्य संवारने का काम करेंगी, बल्कि अपने परिवार और गांव का नाम भी रोशन करेंगी। पूजा ने 12वीं तक की अपनी पढ़ाई दिल्ली से पूरी की थी। आर्थिक दबाव के कारण दिल्ली जैसे महानगर में रहकर आगे की पढ़ाई को जारी रख पाना उनके लिए संभव नहीं हो सका। ऐसे में पूजा जौनपुर लौट आईं और वहां के टीडी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। यह वह दौर था जब आर्थिक सीमाएं पूजा के सपनों के आड़े आ सकती थीं, लेकिन प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना उनके लिए संजीवनी साबित हुईं हैं। वर्ष 2024 में पूजा को मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के बारे में जानकारी मिली। मई 2024 में उन्होंने आवेदन किया और जून 2024 से अभ्युदय योजना के अंतर्गत मुफ्त कोचिंग से जुड़ गईं। यह वही योजना है जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के होनहार विद्यार्थियों के लिए शुरू किया, जिससे कि आर्थिक स्थिति उनकी प्रतिभा के रास्ते में किसी प्रकार की बाधा न बन सके। पूजा बताती हैं कि अभ्युदय योजना के अंतर्गत उन्हें अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। नियमित कक्षाएं, व्यवस्थित पाठ्यक्रम और निरंतर अभ्यास से उनकी तैयारी को नई दिशा मिली। पूजा शाम को कॉलेज के बाद डेढ़ घंटे की कक्षाओं में शामिल होती थीं। शिक्षक विषयों को सरल भाषा में समझाने के साथ-साथ बार-बार रिवीजन और नोट्स के माध्यम से विद्यार्थियों की नींव को मजबूत करते थे। पूजा कहती हैं कि उन्हें निजी कोचिंग संस्थान का सहारा लेना पड़ता तो 1-1.50 लाख रुपये तक का खर्च आता, जो उनके परिवार के लिए असंभव सा था। अभ्युदय योजना ने यह आर्थिक बोझ पूरी तरह समाप्त कर दिया। निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ने उन्हें नया आत्मविश्वास दिया और लक्ष्य पर केंद्रित रहने का अवसर प्रदान किया। समर्पित तैयारी से सफलता तक  अभ्युदय योजना का सहारा मिलने के बाद पूजा की समर्पित तैयारी का परिणाम यह रहा कि वह अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी-सीएपीएफ परीक्षा उत्तीर्ण की और असिस्टेंट कमांडेंट बनीं। उनकी यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता तक ही सीमित नहीं रही, यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों की सफलता का भी प्रमाण है। पूजा की सफलता से उनके परिवार, गांव और पूरे क्षेत्र में गर्व का भाव है। हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण पूजा सिंह कहती हैं कि मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना उन हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो संसाधनों की कमी से अपने सपनों को दबा देते हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित यह योजना आईएएस, पीसीएस, नीट, जेईई और सीएपीएफ जैसी परीक्षाओं की तैयारी को गांव-गांव की गलियों तक पहुंचा दिया है।

मुख्यमंत्री मान ने सरपंच की हत्या के आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के DGP को दिए निर्देश

अमृतसर. पंजाब के अमृतसर में एक दिन पहले रविवार को दिनदहाड़े आम आदमी पार्टी (आप) के सरपंच की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। सरपंच जर्मल सिंह वल्टोहा की हत्या मामले को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सख्ती दिखाई है। सीएम मान ने डीजीपी गौरव यादव से फोन पर बात की है और पूरे मामले की अपडेट भी ली। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि सरपंच की हत्या मामले में जो भी आरोपी हैं उनकी जल्द पहचान कर उनकी गिरफ्तारी की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। बता दें कि आप के सरपंच को अमृतसर में एक शादी समारोह में सरेआम दिनदहाड़े गोलियां मारी गई थीं। तरन तारन के विधानसभा हलका खेमकरण के आप विधायक सरवण सिंह धुन्न के करीबी सरपंच जर्मल सिंह वल्टोहा की हत्या के बाद विरोधी पार्टियों के नेता सरकार को घेर भी रहे हैं। दरअसल, विदेश बैठे गैंगस्टर प्रभदीप सिंह उर्फ प्रभ दासूवाल द्वारा छह महीने से सरपंच वल्टोहा से 30 लाख रुपये की रंगदारी मांगी जा रही थी। दो बार पहले भी उनपर हमला हो चुका था। रविवार को सरपंच जर्मल सिंह वल्टोहा शादी समारोह में शामिल होने के लिए अमृतसर के मेरी गोल्ड पैलेस में आए थे, यहां पैलेस में दाखिल होकर हमलावरों ने उनके सिर पर दो गोलियां मारकर उनकी हत्या कर दी थी।

दशकों की खामोशी टूटी: बस्तर के जंगलों में फिर दर्ज हुई बाघ की मौजूदगी

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक बार फिर जंगलों से उम्मीद की आहट सुनाई दे रही है। दशकों बाद बाघ की मौजूदगी के संकेत ने न सिर्फ वन विभाग बल्कि पूरे संभाग को चौकन्ना कर दिया है। कभी राष्ट्रीय पशु बाघ का मजबूत गढ़ रहा बस्तर, अब एक बार फिर उसी पहचान की ओर लौटता दिख रहा है। संभाग मुख्यालय जगदलपुर से सटे जंगलों में, भानपुरी और मारेगांव बायपास के आसपास बाघ के ताज़ा पगमार्क मिले हैं। खास बात यह है कि इन निशानों के साथ एक शावक का पगमार्क भी देखा गया है, जिससे यह संभावना मजबूत हो गई है कि एक बाघिन अपने नन्हे शावक के साथ नए शिकार क्षेत्र की तलाश में आगे बढ़ रही है। गौरतलब है कि बीते करीब तीन दशकों से कांगेर नेशनल पार्क क्षेत्र में बाघ की सक्रिय मौजूदगी दर्ज नहीं की गई थी। ऐसे में यह पहला मौका हो सकता है जब इस इलाके में बाघ की वापसी को लेकर ठोस संकेत सामने आए हैं। हालांकि यह खबर जितनी उत्साहजनक है, उतनी ही संवेदनशील भी। बाघ की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने विशेष निगरानी टीमें गठित कर दी हैं, जो लगातार बाघ के मूवमेंट रूट पर नजर रखे हुए हैं ताकि उसे किसी तरह का खतरा न हो। क्योंकि यह भी सच्चाई है कि छत्तीसगढ़ में बीते पांच वर्षों में बाघ की खाल तस्करी के सबसे ज्यादा मामले कांकेर जिले से सामने आए हैं। ऐसे में बस्तर जैसे प्राकृतिक पर्यावास में बाघ की वापसी, सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी भी साथ लेकर आई है। वहीं बस्तर के सीसीएफ आलोक तिवारी के अनुसार, इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में फिलहाल छह बाघों की मौजूदगी बताई जा रही है। अब देखना होगा कि क्या बस्तर के जंगल एक बार फिर बाघों का सुरक्षित घर बन पाएंगे, या यह वापसी सिर्फ एक अस्थायी दस्तक बनकर रह जाएगी।