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दिल्ली पलूशन बना वजह? सोनिया गांधी को सांस लेने में परेशानी, दोबारा कराया गया एडमिट

नई दिल्ली कांग्रेस की नेता सोनिया गांधी को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में एडमिट कराया गया है। उन्हें सीने में दर्द की समस्या थी, जिसके चलते उन्हें अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल उनकी स्थिति पूरी तरह सामान्य है और चेस्ट फिजिशियन की निगरानी में उन्हें रखा गया है। अस्पताल के एक सूत्र ने कहा कि वह रूटीन चेकअप के लिए ही आई हैं, लेकिन उन्हें खांसी की समस्या काफी ज्यादा है। विशेष तौर पर दिल्ली में बढ़े हुए पलूशन के चलते उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं होती रहती हैं। एक बार फिर से ऐसी ही समस्या उभरने की आशंका है। वह सोमवार की रात को अस्पताल पहुंची थीं और फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में हैं। बीते साल ही वह 79 वर्ष की हुई थीं।   सर गंगा राम अस्पताल के चेयरमैन डॉ. अजय स्वरूप ने बताया कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। उनकी जांच करने पर पाया गया कि उन्हें अस्थमा की समस्या थोड़ी बढ़ गई है। ऐसा सर्दी के मौसम और पलूशन के चलते हुआ है। फिलहाल एहतियात के तौर पर उन्हें एडमिट कर लिया गया है और उनकी सेहत की निगरानी की जा रही है। फिलहाल उनकी सेहत एकदम स्थिर है। उन्हें कुछ दवाएं भी दी जा रही हैं, जिनका उनकी सेहत पर अच्छा प्रभाव पड़ रहा है। उनकी सेहत का जायजा लेने के बाद एक या दो दिन में उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। 2020 में पलूशन के चलते गोवा जाने की डॉक्टरों ने दी थी सलाह इससे पहले भी सोनिया गांधी को पलूशन के चलते समस्याएं होती रही हैं। वर्ष 2020 में डॉक्टरों की सलाह पर दिल्ली के पलूशन से बचाव के लिए वह गोवा भी गई थीं। दिल्ली में एयर क्वॉलिटी ना सुधरने तक उन्हें गोवा में ही रहने की सलाह दी गई थी। चिकित्सकों की मानें तो एक बार फिर से उन्हें पलूशन के चलते समस्या बढ़ी है और उन्हें सांस लेने में दिक्कत आ रही थी।  

भारत से बढ़ता खतरा! एशले गार्डनर बोलीं— आगे ऑस्ट्रेलिया के लिए जीत आसान नहीं

 नई दिल्ली दिग्गज क्रिकेटर एशले गार्डनर का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया इस समय महिला क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ टीम है लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दशक में वनडे विश्व चैम्पियन भारतीय टीम को हराना काफी मुश्किल होगा। पिछले साल महिला विश्व कप सेमीफाइनल में भारत से हारी ऑस्ट्रेलियाई टीम का हिस्सा रही गार्डनर ने कहा कि हरमनप्रीत कौर की टीम के प्रदर्शन में जबर्दस्त सुधार आया है। नौ जनवरी से शुरू हो रही महिला प्रीमियर लीग में गुजरात जाइंट्स के लिये खेल रही गार्डनर ने कहा, ‘भारतीय टीम अगले पांच से दस साल में उन टीमों में से एक होगी जिसे हराना बहुत मुश्किल होगा।’ उन्होंने कहा, ‘ऑस्ट्रेलियाई होने के नाते मैं इससे भयभीत हूं लेकिन यहां खेल का तेजी से विकास देखकर अच्छा लग रहा है।’ गार्डनर का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया अभी भी महिला क्रिकेट में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम है। उन्होंने कहा, ‘मैं विश्व कप के बाद से मीडिया से कह रही हूं कि हमारी टीम अभी भी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम है। विश्व कप भारी दबाव वाले पलों में आपकी जीत की बानगी देते हैं। अगर हम किसी भी टीम से लगातार दस मैच खेलें तो हम आठ या नौ जीत जायेंगे। भारत से मिली हार कठिन थी लेकिन हमें पता है कि भारतीय टीम कितनी खतरनाक हो सकती है।’ महिला प्रीमियर लीग में गुजरात टीम में भारत की विश्व कप विजेता टीम में से सिर्फ तेज गेंदबाज रेणुका सिंह ठाकुर है लेकिन उनके पास बेथ मूनी, डैनी वियाट हॉज और सोफी डेवाइन जैसे धुरंधर विदेशी खिलाड़ी हैं। गार्डनर ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘अगर सभी टीमों को देखें तो विदेशी बल्लेबाजों पर काफी दारोमदार होता है। हमारी टीम में भी ऐसा ही होगा। हमारे पास हरमनप्रीत कौर या स्मृति मंधाना जैसे बल्लेबाज नहीं है लेकिन जो खिलाड़ी हमारे पास हैं, उनके साथ ही जीतना होगा। हमारे पास बेहतरीन टीम है और हम जीतेंगे।’  

बीरगंज हिंसा: मस्जिद में तोड़फोड़ से मचा बवाल, सुरक्षा बढ़ी, भारत की सीमा पर सतर्कता

काठमांडू प्रशासन का कहना है कि कर्फ्यू के दौरान सुरक्षा बलों को आदेश दिया है कि किसी भी उपद्रवी को वे गोली मार सकते हैं। आम लोगों को सलाह दी गई है कि बेहद जरूरी काम से ही बाहर निकलें। इसके अलावा आसपास में किसी तरह के उपद्रव की स्थिति में 100 नंबर पर कॉल करें। कहा जा रहा है कि इस मामले की शुरुआत दो युवकों हैदर अंसारी और अमानत अंसारी द्वारा टिकटॉक पर एक वीडियो शेयर करने के बाद हुई। इस वीडियो को लेकर हिंदू समुदाय के लोगों का कहना था कि इससे हमारी भावनाएं आहत हुई हैं। दोनों युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था। फिर यह तनाव और बढ़ गया, जब कमला इलाके में एक मस्जिद में तोड़फोड़ किए जाने की खबर आई। इसके बाद जब स्थानीय तौर पर तनाव बढ़ा तो टिकटॉक पर ही कई ऐसे वीडियो वायरल हुए, जिससे अफवाहों ने जोर पकड़ा और पूरे बीरगंज में ही तनाव की स्थिति पैदा हो गई। उपद्रव भी हुए और कुछ लोगों ने पत्थरबाजी की। अंत में पुलिस-प्रशासन ने कर्फ्यू ही लगा दिया ताकि हालात को कंट्रोल किया जा सके। प्रशासन का कहना है कि कर्फ्यू के दौरान सुरक्षा बलों को आदेश दिया है कि किसी भी उपद्रवी को वे गोली मार सकते हैं। आम लोगों को सलाह दी गई है कि बेहद जरूरी काम से ही बाहर निकलें। इसके अलावा आसपास में किसी तरह के उपद्रव की स्थिति में 100 नंबर पर कॉल करें। कहा जा रहा है कि इस मामले की शुरुआत दो युवकों हैदर अंसारी और अमानत अंसारी द्वारा टिकटॉक पर एक वीडियो शेयर करने के बाद हुई। एक टिकटॉक वीडियो के चलते शुरू हुआ था बवाल इस वीडियो को लेकर हिंदू समुदाय के लोगों का कहना था कि इससे हमारी भावनाएं आहत हुई हैं। दोनों युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था। फिर यह तनाव और बढ़ गया, जब कमला इलाके में एक मस्जिद में तोड़फोड़ किए जाने की खबर आई। इसके बाद जब स्थानीय तौर पर तनाव बढ़ा तो टिकटॉक पर ही कई ऐसे वीडियो वायरल हुए, जिससे अफवाहों ने जोर पकड़ा और पूरे बीरगंज में ही तनाव की स्थिति पैदा हो गई। उपद्रव भी हुए और कुछ लोगों ने पत्थरबाजी की। अंत में पुलिस-प्रशासन ने कर्फ्यू ही लगा दिया ताकि हालात को कंट्रोल किया जा सके।  

दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में 30 कलाकार देंगे कड़शा नृत्य की प्रस्तुति

​​​​​​​गुमला. इस वर्ष दिल्ली में 26 जनवरी गणतंत्र‎ दिवस का समारोह गुमला जिला के लिए‎ गर्व की अनुभूति कराएगा। वजह है, भारत ‎की राजधानी दिल्ली के लाल किला के‎ ग्राउंड में होने वाले ऐतिहासिक गणतंत्र‎ दिवस की परेड में झारखंड की‎ बहुचर्चित लोक नृत्य शैली कड़शा की ‎झांकी झारखंड के गुमला जिला के ‎भरनो निवासी प्रसिद्ध लोक गायिका सह‎शिक्षिका सुषमा नाग के नेतृत्व में 30 ‎कलाकारों का दल 7 जनवरी को गुमला‎ जिला के भरनो से दिल्ली के लिए‎ रवाना होगी। इसमें ‎भरनो, सिसई, बसिया, चैनपुर सहित कई ‎प्रखंडों के महिला, पुरुष कलाकार भाग ‎लेंगे। सुषमा नाग झारखंड का ‎प्रतिनिधित्व करेंगी भरनो मुख्यालय स्थित अमनपुर ‎निवासी बहुमुखी प्रतिभा की धनी सुषमा‎ नाग अपनी प्रतिभा से कई बार गुमला ‎जिला को गौरवान्वित किया ‎‎है, परंतु इस बार की उपलब्धि और बड़ी‎ है। भारत सरकार के कला संस्कृति‎ मंत्रालय के निमंत्रण पर कड़शा नृत्य में ‎‎महारत सुषमा नाग झारखंड का ‎प्रतिनिधित्व करेंगी। युद्ध‎स्तर पर की जा रही तैयारी 26 जनवरी 2026 ‎गणतंत्र दिवस समारोह स्थल लाल किला ‎में प्रस्तुत होने वाले कड़शा नृत्य की झांकी‎ को लेकर कलाकार खासे उत्साहित हैं। युद्ध‎स्तर पर तैयारी की जा रही हैं। सुषमा‎ नाग ने बताया ‎‎कि झारखंड की लोक संस्कृति की अद्भुत‎ नृत्य शैली कड़शा है। उन्होंने कहा- यह झारखंड की‎ संस्कृति, सभ्यता, समृद्धि एवं पारंपरिक‎ जीवन शैली को प्रदर्शित करती है। गणतंत्र ‎‎दिवस समारोह में कड़शा नृत्य शैली की ‎‎झांकी दिखलाने का मौका मिला‎ है। झारखंडी नृत्य शैली को वैश्विक ‎पहचान मिलेगी और झारखंडी सभ्यता ‎‎संस्कृति को पूरी दुनिया के लोग देखेंगे।‎ 2021 में जनजाति लोक नृत्य में मिला था प्रथम स्थान कड़शा का अर्थ कलश होता है, जो उरांव जनजाति का प्रतीक चिन्ह है। इस नृत्य को अतिथियों के आगमन पर विशेष तौर पर आयोजित किया जाता है। इसमें कलश में नए धान की गुथी हुई बाली को डालकर पारंपरिक वेशभूषा में आदिवासी महिलाओं द्वारा अभिवादन किया जाता है, जो एकता पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक होता है। उरांव जनजाति नृत्य शैली विभिन्न मौसमी रागों पर आधारित नृत्य शैली होती है। सुषमा नाग ने बताया कि रायपुर में 2021 में आयोजित जनजाति लोक नृत्य में इस नृत्य काे प्रस्तुत किया गया था। जहां उनकी टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया था।

पश्चिमी सिंहभूम में हाथियों का आतंक: एक ही परिवार के 3 लोगों को कुचला

गोइलकेरा. गोइलकेरा में पगलाए जंगली हाथी ने एक ही परिवार के तीन लोगों की जान ले ली। प्रखंड के आराहासा पंचायत अंतर्गत सोवां गांव में सोमवार–मंगलवार की दरमियानी रात हाथी के हमले में एक व्यक्ति और उसके दो बच्चों की मौत हो गई। मृत बच्चों में एक साल का बेटा और तीन साल की एक बेटी है। वहीं, मृतक की पत्नी ने एक दुधमुंही बच्ची के साथ भागकर किसी तरह अपनी जान बचा पाई। हाथी के हमले से अब तक सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान वन प्रमंडल के अलग अलग गांवों में नौ लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, गोइलकेरा प्रखंड के सायतबा, कितापी और बिला गांव में एक एक व्यक्ति को मौत की नींद सुलाने के बाद लगातार चौथे दिन हाथी ने सोवां में एक ही परिवार के तीन लोगों को मार डाला। जानकारी के अनुसार वन विभाग सोमवार देर रात हाथी को ट्रैक कर उसे जंगल की ओर भगाने का अभियान चला रहा था। इसी दौरान विभाग को सूचना मिली कि हाथी को बाईहातु के पास देखा गया है। टीम के वहां पहुंचने पर पता चला कि सोवां में हाथी ने एक परिवार पर हमला कर दिया है। वन विभाग के कर्मी मशाल लेकर टुंगरी पर स्थित झोंपड़ी तक पहुंचे। जहां हाथी के हमले में एक व्यक्ति और उसके बच्चे की मौत हो चुकी थी, जबकि एक बेटी घायल अवस्था में थी और उसकी सांसें चल रही थी। उसे बचाने के लिए देर रात ही विभाग द्वारा मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार में पांच लोग थे और वे टुंगरी पर झोंपड़ी बनाकर रहते थे। आसपास कोई बस्ती नहीं थी, जिससे हाथी के हमले के दौरान उन्हें कोई मदद नहीं मिल सकी। घटना से पूरे इलाके में दहशत है। निगरानी में जुटा वन विभाग, अंधेरे में हो परेशानी : हाथी को सुरक्षित और सघन जंगल में भगाने के लिए वन विभाग द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। इसमें पश्चिम बंगाल से आई एक्सपर्ट की टीम भी है। सोमवार की रात वन विभाग का 25 सदस्यीय दल हाथी को ट्रैक करने में जुटा था। इसी दौरान सोवां गांव में यह दर्दनाक हादसा हो गया। टीम मौके पर पहुंची लेकिन तमाम प्रयास के बावजूद घायल बच्ची को बचाया नहीं जा सका। वहीं, सुदूर क्षेत्र में सड़कों की खराब हालत और अंधेरे के चलते अभियान में परेशानी आ रही है। हाथी के हमले के बाद देर रात अभियान रोक कर बच्ची को अस्पताल ले जाया गया था। सुबह फिर से अभियान की शुरुआत की गई है।

फ्लाइट परमिशन में देरी पर भड़के अभिषेक बनर्जी, केंद्र पर राजनीतिक षड्यंत्र का आरोप

कोलकाता तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी के बीरभूम दौरे को लेकर मंगलवार को काफी अनिश्चितता बनी रही। नागरिक उड्डयन मंत्रालय से अनुमति न मिलने के कारण उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि भाजपा उनके कार्यक्रमों में रुकावट पैदा कर रही है। मिली जानकारी के अनुसार, अभिषेक को मंगलवार दोपहर दक्षिण 24 परगना के बेहाला से बीरभूम जिले में 'रण संकल्प सभा' में शामिल होने के लिए कोलकाता के बेहाला फ्लाइंग क्लब से हेलीकॉप्टर से रवाना होना था। उसी दौरान नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने हेलीकॉप्टर उड़ाने की परमिशन नहीं दी, जिसके चलते उन्होंने काफी देर तक इंतजार किया, इसके बाद परमिशन मिली। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि भाजपा के लोग डर रहे हैं, इसलिए हमारे कार्यक्रम में भी रुकावट पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग तृणमूल कांग्रेस से इतने डर गए हैं कि अब हमारे कार्यक्रमों में भी रोक लगाने लगे हैं। तृणमूल कांग्रेस के पदाधिकारियों ने बताया कि जिस हेलीकॉप्टर से उन्हें आज उड़ान भरनी थी, उसे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत के बाद और झारखंड सरकार के सहयोग से इंतजाम किया गया था। अभिषेक का बुधवार को बीरभूम में 'रण संकल्प सभा' ​​का कार्यक्रम है। रामपुरहाट के बिनोदपुर मैदान में सभा आयोजित करने की योजना थी। वहीं, एक सूत्र के अनुसार सांसद ने हेलीकॉप्टर उड़ाने के लिए आवश्यक अनुमति प्राप्त नहीं की थी। नतीजतन, वह दोपहर तक बेहाला फ्लाइंग क्लब में हेलीकॉप्टर का इंतजार करते रहे। उनका दावा है कि जिस तरह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बांगांव दौरे से पहले समस्याएं खड़ी की गईं, उसी तरह भाजपा अभिषेक के दौरे से पहले ‘साजिश’ रच रही थी। टीएमसी के नेताओं ने कहा कि अभिषेक के बढ़ते प्रभाव और पार्टी की सभाओं से भाजपा डरी हुई है, इसलिए इस तरह की रुकावटें पैदा की जा रही हैं। ममता बनर्जी ने भी इसी तरह की शिकायत की है कि वे खुद कई महीनों से हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल नहीं कर पा रही हैं। हालांकि अभिषेक बनर्जी काफी देर के बाद अपने हेलीकॉप्टर से बीरभूम के लिए रवाना हुए। टीएमसी का दावा है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उनके चॉपर को क्लीयरेंस नहीं दिया था।

जन्मदिन पर खास: आनंद जैसे दिग्गज को हराने वाले कृष्णन शशिकिरण की सफलता की कहानी

नई दिल्ली कृष्णन शशिकिरण का नाम शतरंज की दुनिया में प्रतिष्ठा के साथ लिया जाता है। 2002 में कृष्णन शशिकिरण ने भारतीय शतरंज के सबसे बड़े नाम विश्वनाथन आनंद को हराकर तहलका मचा दिया था। कृष्णन शशिकिरण का जन्म 7 जनवरी 1981 को चेन्नई में हुआ था। उनके पिता भी बहुत अच्छे शतरंज खिलाड़ी थे। शशिकिरण ने 9 साल की उम्र में शतरंज खेलना शुरू किया। अपने पिता के मार्गदर्शन में घरेलू सर्किट में शशिकिरण ने लगातार सफलता हासिल की। उन्होंने अंडर-18 नेशनल शतरंज चैंपियनशिप जीती। कृष्णन ने साल 1999 में अपनी पहली इंडियन नेशनल 'ए' चेस चैंपियनशिप जीती। अंतरराष्ट्रीय शतरंज में कृष्णन शशिकिरण ने 1995 में डेब्यू किया था। कृष्णन को अपने पहले मैच में चेक रिपब्लिक के टॉमस ओरल के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। कृष्णन ने कॉमनवेल्थ गेम्स में अंडर-18 का टाइटल जीता। उन्होंने दो बार ब्रिटिश अंडर 21 चेस चैंपियनशिप जीती, और 1998 के एलिस्टा चेस ओलंपियाड में इंडियन नेशनल चेस टीम को रिप्रेजेंट किया। इस इवेंट में, कृष्णन ने चौथे बोर्ड पर 8.5/11 पॉइंट्स स्कोर किए। उसी साल उन्हें अपना पहला ग्रैंड मास्टर नॉर्म मिला जब वे टोरक्वे में हुए ब्रिटिश ओपन टूर्नामेंट में छठे स्थान पर रहे। इसके बाद, उन्होंने एंडोरा ओपन चेस टूर्नामेंट और स्पेन में हुए बालगुएर ओपन चेस टूर्नामेंट जीते। वह 1998 में बेनास्क ओपन चेस टूर्नामेंट में तीसरे स्थान पर रहे। साल 1999 में उन्होंने एशियन जूनियर चेस चैंपियनशिप जीती। साल 2000 में, उन्होंने चेन्नई में हुए पेंटामीडिया कैटेगरी इलेवन ग्रैंड मास्टर टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीता। उसी साल, उन्होंने उदयपुर में हुई एशियन चेस चैंपियनशिप में ग्रैंड मास्टर टाइटल के लिए अपना दूसरा नॉर्म हासिल किया, और कोलकाता में हुए गुडरिक इंटरनेशनल ओपन चेस टूर्नामेंट में इस प्रतिष्ठित टाइटल के लिए तीसरा नॉर्म भी हासिल किया। 19 साल की उम्र में उन्होंने इंटरनेशनल ग्रैंड मास्टर का खिताब जीता। साल 2001 में उन्होंने प्रतिष्ठित हेस्टिंग्स चेस टूर्नामेंट जीता और 2002 में भी टूर्नामेंट में जीत दोहराई। कृष्णन ने उसी साल एशियन चेस चैंपियनशिप भी जीती। 2002 कृष्णन के करियर के लिए सबसे यादगार साल के रूप में आया। इस साल उन्होंने विश्व कप शतरंज टूर्नामेंट के दौरान भारतीय शतरंज के सबसे बड़े खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद को हराया था। कृष्णन की जीत ने दुनियाभर के शतरंज प्रेमियों को हैरान कर दिया था। इसके अलावा, उन्होंने डेनमार्क के कोपेनहेगन में हुए पोलिटिकेन कप में गोल्ड मेडल जीता। साल 2005 में उन्होंने कोपेनहेगन में हुए सिगमैन टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक के लिए जान टिम्मन की बराबरी की। जनवरी 2007 में, कृष्णन शशिकिरन 2700 की फिडे रेटिंग तक पहुंचे, और विश्वनाथन आनंद के बाद 2700 का आंकड़ा पार करने वाले दूसरे भारतीय शतरंज खिलाड़ी बने। उन्होंने साल 2008 में 6.5/9 के कुल स्कोर के साथ नजडॉर्फ मेमोरियल शतरंज टूर्नामेंट जीता। उसी साल, वह 18वें पैम्प्लोना इंटरनेशनल शतरंज टूर्नामेंट में 5/7 पॉइंट्स के कुल स्कोर के साथ विजेता बने। जनवरी 2009 तक फिडे रैंकिंग के अनुसार, वे दुनिया के टॉप 20 चेस प्लेयर्स में शामिल थे। कृष्णन शशिकिरन ने आधिकारिक रूप से शतरंज को अलविदा नहीं कहा है। उन्हें 2002 में भारत सरकार ने प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था।

बिहार में हाइवे-एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को अब नहीं लगेगा अड़ंगा

पटना. बिहार में हाइवे, एक्सप्रेसवे और अन्य सड़कों के निर्माण के लिए सबसे प्रमुख माने जाने वाली जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में अब रुकावट नहीं आएगी। इसके लिए नीतीश सरकार ने विशेष पहल की है। इसके तहत विभागों की आपसी असहमति को दूर करने की कोशिश की गई है। दरअसल, पथ निर्माण विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों के बीच जमीन की रिपोर्ट मांगने-देने में कई बार देरी हो जाती है। इसका असर, विभिन्न सड़क निर्माण परियोजनाओं पर पड़ता है। इसका समाधान निकालने के लिए बिहार में अब जमीन अधिग्रहण के लिए परियोजनावार राजस्व अधिकारी तैनात किए जाएंगे। पथ निर्माण ने इसका प्रस्ताव तैयार कर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेजा है। विभाग की यह कवायद सड़क परियोजनाओं के लिए तेजी से जमीन अधिग्रहण करना है, ताकि उसे समय पर पूरा किया जा सके। सरकार के शीर्ष स्तर पर जल्द ही इस प्रस्ताव पर मुहर लगने के आसार हैं। पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार अभी सड़क परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण का काम जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के माध्यम से हो रहा है। ऐसे में जब पथ निर्माण विभाग किसी खास परियोजना में जमीन अधिग्रहण की प्रगति की रिपोर्ट मांगता है तो वे जिले भर की परियोजना का हवाला देते हुए अपनी उपलब्धि गिनाने लगते हैं। साथ ही परियोजनाओं की संख्या गिनाते हुए अपनी व्यस्तता भी गिनाने लगते हैं। उनकी इस दलील के कारण यह हो रहा है कि कोई-कोई परियोजना में सालों बाद भी भी जमीन अधिग्रहण का काम पूरा नहीं हो पाता है। इसलिए अब विभाग ने तय किया है कि राज्य की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं के लिए अधिकारियों को नामित कर दिया जाए। खासकर नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे में अधिकारियों को केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राजमार्ग मंत्रालय की ओर से नामित किया जाता है। बिहार में सड़क निर्माण परियोजनाओं की बाधा दूर ऐसे में अगर पथ निर्माण विभाग किसी अधिकारी का नाम केंद्र को भेज देगा तो वे अपनी जिम्मेवारी से बच नहीं पाएंगे। ऐसे अधिकारियों की मांग पथ निर्माण विभाग ने राजस्व विभाग से की है। ये अधिकारी एडीएलओ (अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी) होंगे। ये जिलों में ही डीएलओ के अधीन काम करते हैं। अनुमंडल में बैठने वाले डीसीएलआर के समकक्ष इनकी शक्ति होती है। दोनों विभागों में बनी सहमति, जल्द निकलेगा आदेश पथ निर्माण विभाग ने राजस्व विभाग को कहा है कि वह परियोजनावार एडीएलओ दे। वे पथ निर्माण के लिए सड़क परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण करेंगे। केंद्र सरकार, पथ निर्माण के साथ ही राजस्व विभाग के साथ समन्वय कायम करने की जिम्मेदारी एडीएलओ की होगी। सूत्रों के अनुसार राजस्व विभाग और पथ निर्माण विभाग के बीच इस पर सहमति बन गई है। सरकार के शीर्ष स्तर पर जल्द ही इस बाबत विधिवत आदेश निकाला जाएगा।

Realme Pad 3 और Redmi Pad 2 Pro भारत में लॉन्च, 12000mAh बैटरी के साथ जानें कीमत और फीचर्स

नई दिल्ली  भारत में पहली बार 12 हजार एमएएच बैटरी वाले 2 टैबलेट लॉन्‍च हुए हैं। खास बात है कि रियलमी और रेडमी ने इन टैबलेट को लॉन्‍च किया है। दोनों कंपनियां एक दूसरे की प्रतिद्वंदी हैं और इन्‍होंने एक ही दिन अपने प्रोडक्‍ट पेश किए हैं। realme Pad3 में 12200mAh बैटरी है, जबकि Redmi Pad 2 Pro में 12000mAh बैटरी दी गई है। रियलमी ने अपने टैब में मीडियाटेक का चिपसेट लगाया है और रेडमी पैड में स्‍नैपड्रैगन प्रोसेसर मिलता है। इनकी कीमतें भी आसपास हैं। आइए दोनों टैबलेट के दाम और इनके फीचर्स को जानते हैं। Redmi Pad 2 Pro की शुरुआती कीमत 22,999 रुपये है। यह इसके 8GB + 128GB स्टोरेज वाले वाईफाई वेरिएंट की है। टॉप वेरिएंट 27,999 रुपये में आया है। ध्यान रखें कि ये कीमतें 2000 रुपये के बैंक डिस्काउंट के साथ हैं। इसकी सेल 12 जनवरी से शुरू हो जाएगी। realme Pad3 की शुरुआती कीमत 24999 रुपये है। यह 8GB+128GB Wifi मॉडल के दाम हैं। इसी रैम और स्‍टोरेज के साथ 5जी मॉडल की कीमत 27999 रुपये है। अगर आप 8 जीबी और 256 जीबी स्‍टोरेज मॉडल लेना चाहते हैं तो वह 5जी कनेक्‍ट‍िविटी में आएगा और कीमत 29999 रुपये है। याद रहे क‍ि यह कीमत 2 हजार रुपये के बैंक ऑफर के साथ है। realme Pad3 फीचर्स, स्‍पेसिफ‍िकेशंस realme Pad3 को स्‍टूडेंट्स, प्रोफेशनल्‍स और रोजाना इस्‍तेमाल के लिए तैयार किया गया है। डिजाइन इसकी बड़ी ताकत है। यह कॉम्‍पैक्‍ट होने के साथ-साथ बुक स्‍टाइल डिस्‍प्‍ले ऑफर करता है। दावा है कि यह किसी लैपटॉप की तरह काम करता है और एआई की तरह सोच सकता है। realme Pad3 में 2.8K बुक व्‍यू डिस्‍प्‍ले दिया गया है। यह 11.6 इंच की स्‍क्रीन है। शार्प टेक्‍स्‍ट और क्‍लीयर विजुअल्‍स पेश करती है। टीयूवी रीनलैंड सर्टिफ‍िकेशन डिस्‍प्‍ले को मिला है यानी यह आंखों को नुकसान पहुंचाने वाली ब्‍लू लाइट का कम उत्‍सर्जन करता है। दावा है कि यह डिस्‍प्‍ले पढ़ाई के साथ-साथ एंटरटेनमेंट में भी जबरदस्‍त रहने वाला है। realme Pad3 में 12200mAh की टाइटन बैटरी लगी है। यह 45W की फास्‍ट चार्जिंग के साथ 10 वॉट की रिवर्स चार्जिंग को सपोर्ट करती है। इतनी बड़ी बैटरी के बावजूद यह टैब सिर्फ 6.6mm स्‍ल‍िम है और इसका वजन 560 ग्राम है। realme Pad3 में मीडियाटेक डाइमेंस‍िटी 7300 मैक्‍स चिपसेट की ताकत है। क्‍वाड स्‍टीरियो स्‍पीकर्स दिए गए हैं। यह 5जी मोबाइल कनेक्‍ट‍िविटी को सपोर्ट करता है। Redmi Pad 2 Pro फीचर्स, स्‍पेसिफ‍िकेशंस Redmi Pad 2 Pro का डिस्‍प्‍ले साइज रियलमी के टैब से अधि‍क है। यह 12.1 इंच डिस्‍प्‍ले के साथ आता है, जो 2.5K रेजॉलूशन ऑफर करता है। डिस्‍प्‍ले में 120 हर्त्‍ज का रिफ्रेश रेट दिया गया है। डॉल्‍बी विजन सपोर्ट है। यह डिस्‍प्‍ले भी टीयूवी रीनलैंड सर्टिफाइड है और 600 निट्स की ब्राइटनैस ऑफर करता है। Redmi Pad 2 Pro में स्‍नैपड्रैगन 7एस जेन 4 चिपसेट की ताकत दी गई है। इस टैब में 12 हजार एमएएच की बैटरी लगी है जो 27 वॉट की रिवर्स चार्जिंग को सपोर्ट करती है। इस टैब में भी कुल 4 स्‍पीकर्स दिए गए हैं जो डॉल्‍बी एटमॉस साउंड को सपोर्ट करते हैं। यह वाईफाई और 5जी कनेक्‍ट‍िविटी में आता है। दावा है कि इसके 5जी वेरिएंट को सिर्फ इंटरनेट नहीं, बल्कि कॉलिंग के लिए भी इस्‍तेमाल किया जा सकता है। रेडमी टैब में ढेर सारे एआई फीचर्स लाए गए हैं। कंपनी इस टैब के साथ कीबोर्ड और स्‍टायलस पेन भी लेकर आई है, ज‍िन्‍हें आपको अलग से खरीदना होगा।

इन्वेस्ट यूपी बनी नोडल एजेंसी, आईटी से लेकर आरएंडडी तक निवेश और रोजगार को मिलेगा प्रोत्साहन

जीसीसी नीति-2024 की एसओपी-2025 को योगी कैबिनेट की हरी झंडी इन्वेस्ट यूपी बनी नोडल एजेंसी, आईटी से लेकर आरएंडडी तक निवेश और रोजगार को मिलेगा प्रोत्साहन प्रदेश को ग्लोबल सर्विस हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में योगी सरकार का बड़ा कदम जीसीसी नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश में उच्च कौशल आधारित निवेश बढ़ेंगे और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) नीति-2024 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु नियमावली-2025 को मंजूरी प्रदान की गई। इस नियमावली के लागू होने से प्रदेश को वैश्विक निवेश, उच्च स्तरीय सेवाओं और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन में नई गति मिलेगी। कैबिनेट से अनुमोदित नियमावली के अंतर्गत इन्वेस्ट यूपी को नोडल एजेंसी नामित किया गया है। यह नियमावली जीसीसी नीति-2024 के प्रख्यापन की तिथि से प्रभावी मानी जाएगी तथा राज्य सरकार द्वारा संशोधन अथवा समाप्त किए जाने तक लागू रहेगी। जीसीसी में अब तक 21 कंपनियों ने किया निवेश औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कैबिनेट के निर्णय के विषय में बताया कि प्रदेश में निवेश का माहौल बेहतर हुआ है, जिसके चलते निवेश करने के लिए उद्योग घराने और मल्टीनेशनल कंपनियां हमारे संपर्क में हैं। जीसीसी नीति हमारे लिए बहुत लाभप्रद है और आज हम इसकी एसओपी लेकर आए हैं। यूपी में जीसीसी के निवेश में लगातार वृद्धि हो रही है। चालू वित्तीय वर्ष में 21 कंपनियों ने इसमें निवेश प्रारंभ कर दिया है। इसके माध्यम से प्रदेश में व्यापक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। नियमावली के अनुसार, जीसीसी किसी भारतीय अथवा विदेशी कंपनी द्वारा स्थापित एक कैप्टिव इकाई होगी, जो सूचना प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास (R&D), वित्त, मानव संसाधन, डिजाइन, इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स और नॉलेज सर्विसेज जैसे रणनीतिक कार्यों का निष्पादन करेगी। वित्तीय प्रोत्साहनों की व्यापक व्यवस्था इस नियमावली में जीसीसी इकाइयों को आकर्षित करने के लिए कई प्रकार के वित्तीय प्रोत्साहनों का प्रावधान किया गया है। इनमें फ्रंट एंड लैंड सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी में छूट अथवा प्रतिपूर्ति, पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, संचालन व्यय (ओपेक्स) सब्सिडी, पेरोल और भर्ती सब्सिडी, ईपीएफ प्रतिपूर्ति, प्रतिभा विकास एवं कौशल प्रोत्साहन, अनुसंधान एवं नवाचार प्रोत्साहन के साथ-साथ केस-टू-केस आधार पर विशेष प्रोत्साहन शामिल हैं। वित्तीय लाभ के अतिरिक्त, जीसीसी इकाइयों को तकनीकी सहायता समूह, इंडस्ट्री लिंकेज सपोर्ट, विनियामक सहायता, आवेदन प्रकरणों का त्वरित निस्तारण, अनुमोदन एवं प्रोत्साहन वितरण की सुव्यवस्थित प्रक्रिया भी उपलब्ध कराई जाएगी। केंद्र सरकार की योजनाओं से अतिरिक्त लाभ नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि इसके अंतर्गत मिलने वाले सभी प्रोत्साहन, भारत सरकार की किसी भी योजना अथवा नीति के तहत उपलब्ध लाभों के अतिरिक्त होंगे। किसी भी विधिक विवाद की स्थिति में न्यायिक क्षेत्राधिकार केवल लखनऊ स्थित न्यायालयों का होगा। स्वीकृत प्रोत्साहन राशि का वितरण वित्त विभाग के प्रचलित नियमों एवं शासनादेशों के अनुसार किया जाएगा। निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा योगी सरकार के इस निर्णय को प्रदेश को ग्लोबल सर्विस हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। GCC नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश में उच्च कौशल आधारित निवेश बढ़ेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।