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ग्रामीणों का बड़ा फैसला, पंचायत चुनाव में शराब बांटने वाले प्रत्याशी का सामाजिक बहिष्कार

लखनऊ  यूपी के पंचायत चुनाव की तैयारियां चल रही है। प्रदेश के ग्राम पंचायतों में चुनाव को लेकर हलचल तेज है। इस बीच बागपत जनपद से एक खबर है। यहां के ढिकौली गांव में जिला जाट सभा की पंचायत में पंचों के साथ-साथ आगामी पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे प्रत्याशियों ने चुनाव के दौरान किसी भी कीमत पर शराब नहीं बांटने की शपथ ली। पंचायत में शराब बांटने वाले प्रत्याशी का सामाजिक बहिष्कार करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। जिला जाट सभा अध्यक्ष, अधिवक्ता सोमेन्द्र ढाका के आवास पर नशा मुक्त समाज के संकल्प के साथ आयोजित की गई इस पंचायत में लिए गए निर्णय के बारे में जानकारी ढाका ने मंगलवार को पीटीआई-भाषा को दी। पंचायत आयोजक सोमेंद्र ढाका ने बताया कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को शराब मुक्त बनाने के लिए यह पंचायत बुलाई गई थी, जिसमें किसान नेता अन्नू मलिक, रामछेल पंवार, विक्रम आर्य, संदीप प्रधान, विनय ढाका, जयकुमार और राजू के अलावा खाप मुखिया, प्रत्याशी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। पंचायत में समाज सुधार के लिए नशे को जड़ से खत्म करने पर जोर दिया गया और सभी से इस दिशा में संकल्प लेने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि आगामी पंचायत चुनाव में यदि कोई प्रत्याशी शराब का वितरण कर समाज को दूषित करने का प्रयास करेगा, तो उसका मिलकर बहिष्कार किया जाएगा। पंचायत में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों ने कहा कि चुनाव में हार स्वीकार्य है, लेकिन शराब बांटकर जीत हासिल करना स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने संकल्प लिया कि यदि कोई शराब के नाम पर वोट मांगने आएगा तो उसे गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।

एमपी में 23,700 करोड़ की लागत से बनेगा एक्सप्रेस-वे, यूपी-राजस्थान की दूरी होगी कम, गांवों से ली जाएगी जमीन

  भिण्ड भिण्ड चंबल संभाग के तीनों जिलो के लिए क्रांतिकारी माने जा रहे अटल प्रोग्रेस-वे (Atal Progress Way) के निर्माण पर 26 माह से बंद प्रक्रिया फिर से शुरू होगी। राज्य सरकार ने फिर से कवायद तेज करने के निर्देश जारी किए तो जिले के की उम्मीदें जाग उठीं। तीन राज्यों और पांच जिलों को सीधे प्रभावित करने वाले अटल प्रोग्रेस-वे की एनएचएआई स्तर पर निरंतर प्रक्रिया चल रही है। यही वजह है कि 11500 करोड़ रुपए का यह प्रस्ताव अब 23 हजार 700 करोड़ तक पहुंच गया है। इस मार्ग के बन जाने से कोटा के लिए सडक मार्ग से 10-11 घंटे की यात्रा छह से सात घंटे रह जाएगी। 3 राज्यों के 5 जिलों से होकर गुजरेगी रोड उत्तरप्रदेश में इटावा जिले के ननावा से शुरू होने वाला अटल प्रोग्रेस-वे मप्र में भिण्ड, मुरैना और श्योपुर होकर राजस्थान के कोटा जिले में सीमाल्या पर जुड़ेगा। सर्वाधिक करीब 168 किलोमीटर मुरैना जिले में और सबसे कम करीब 22 किलोमीटर का हिस्सा राजस्थान के खाते में आएगा। किसानो के विरोध के बाद रोका गया था काम अटल प्रोग्रेस-वे को लेकर किसानों के तीखे विरोध के चलते अक्टूबर 2023 में तब के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने यह प्रक्रिया स्थगित कर दी थी। वर्ष 2017 से चंबल एक्सप्रेस के नाम से यह कवायद चल रही थी। वर्ष 2021 में भारत माला परियोजना में इसे शामिल करके नाम बदलकर अटल प्रगति पथ कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने दो दिन पहले भोपाल में हुई बैठक के बाद इसे फिर से शुरू करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं। चार हजार हेक्टेयर भूमि चाहिए कुल खेतों से होकर निर्माण के प्रस्ताव में मध्यप्रदेश में 188.1, उत्तरप्रदेश में 180.76 एवं राजस्थान में 492.51 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होना है। इसमें राजस्थान में 70.78, मप्र में 1604 एवं उत्तरप्रदेश में 36.35 हेक्टेयर शासकीय भूमि, राजस्थान में 380.93, मप्र 1180 एवं उत्तरप्रदेश में 134.7 हेक्टेयर निजी, जल संरचनाओं से लगी राजस्थान में 40.8 हेक्टेयर राजस्थान में, 404 हेक्टेयर एमपी में और 9.71 हेक्टेयर भूमि यूपी में अधिग्रहित की जानी है। लेकिन निजी भूमि के अधिग्रहण का भिण्ड में और निजी व वन भूमि का विरोध मुरैना में हो रहा है। 454 हेक्टेयर भूमि का होना है अधिग्रहण खेतों से होकर निर्माण पर वन विभाग की 454.51 हेक्टेयर भूमि अधिगृहित की जानी है। राजस्थान में कोटा जिले के सीमाल्या गांव के पास मुंबई-बड़ोदरा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 27 से शुरू होकर मध्यप्रदेश के तीन जिलों को कवर करते हुए उत्तरप्रदेश के इटावा जिले में निनावा तक प्रस्तावित इस मार्ग के निर्माण भिण्ड और इटावा जिले के लोगों को कोटा जाने के लिए सीधा शॉर्टकट और सुगम आवागमन उपलब्ध हो सकेगा। इसके आसपास लॉजिस्टिक हथ, औद्योगिक क्षेत्र और चंबल पर्यटन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। किस जिले में कितनी प्रस्तावित लंबाई अटल प्रौग्रेस वे में जिले की 29 ग्राम पंचायतों, दो जनपदों के 41 गांव प्रभावित हो रहे हैं। इनमें अटेर में कछपुरा, उदोतगढ़, कनेरा, अहरौली काली, शुक्लपुरा, खडेरी, चौम्हों, तरसोखर, निवारी, बलारपुरा, जम्होरा, प्रतापपुराः बड़पुरा, रिदौली, गोहदूपुरा, जौरी-कोतवाल, सुरपुरा, दुल्हागन, मटघाना, भिण्ड में गोपालपुरा, भववासी, भदाकुर, नाहरा एवं सराय गांव शामिल हैं। (MP News) शासन को इस मामले में जल्द कोई निर्णय लेना चाहिए, किसान असमंजस में हैं। किसान अपनी कृषि भूमि का भी सही उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।- लक्ष्मण सिंह नरवरिया, किसान, अटेर शासन स्तर पर बैठक होने की सूचना तो मिली है. हमारे पास कोई अधिकृत जानकारी अभी नहीं आई है। अपडेट कोई होगा तो जानकारी दी जाएगी। – उमाकांत मीणा, ईई, एनएचएबाई, ग्वालियर।

DRDO को शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल BM-04 के लिए मंजूरी, 1500 KM रेंज से बढ़ेगी सुरक्षा

 नई दिल्ली रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन- DRDO को एक नई मिसाइल विकसित करने की मंजूरी मिल गई है. इस मिसाइल का नाम है BM-04. यह एक शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM) है. इसे बनाने के लिए Acceptance of Necessity (AoN) मिल चुका है. इसका मतलब है कि अब इस मिसाइल का विकास तेजी से शुरू होगा. जल्द ही इसके परीक्षण भी हो सकते हैं.  BM-04 मिसाइल क्यों खास है? यह मिसाइल भारत की मौजूदा रक्षा व्यवस्था में एक बड़ा गैप भरने वाली है. पिनाका रॉकेट की रेंज छोटी होती है (करीब 40-90 किमी). अग्नि मिसाइलें बहुत लंबी दूरी की हैं (2000 किमी से ज्यादा). BM-04 इन दोनों के बीच की दूरी कवर करेगी. इसकी रेंज 400 से 1500 km तक होगी. यह मिसाइल दुश्मन के इलाके में गहरे तक महत्वपूर्ण ठिकानों पर सटीक हमला कर सकेगी. जैसे कमांड सेंटर, हवाई अड्डे या लॉजिस्टिक्स हब. यह न्यूक्लियर हमले की जरूरत के बिना मजबूत जवाब देगी. मिसाइल की मुख्य विशेषताएं     वजन: करीब 11,500 किलोग्राम.     लंबाई: लगभग 10.2 मीटर.     चौड़ाई (डायमीटर): 1.2 मीटर.     वारहेड: 500 किलोग्राम का कन्वेंशनल (साधारण) विस्फोटक.     प्रोपल्शन: दो स्टेज का सॉलिड फ्यूल. इससे लॉन्च जल्दी और आसान होता है.     गाइडेंस: इनर्शियल नेविगेशन + जीपीएस + भारत का अपना IRNSS (नाविक).     सटीकता: 30 मीटर से कम (CEP).     डिजाइन: फिक्स्ड विंग्स और कंट्रोल फिन्स. इससे उड़ान में मन्यूवर करने की क्षमता मिलती है. दुश्मन की डिफेंस से बचना आसान.     लॉन्चर: कनिस्टर में बंद, रोड-मोबाइल ट्रक से. इससे जल्दी जगह बदल सकते हैं. सुरक्षित रहते हैं. भारत की रक्षा के लिए क्यों जरूरी? यह मिसाइल कन्वेंशनल डिटरेंस (साधारण हथियारों से रोक) को मजबूत करेगी. भारत की नई इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स को सपोर्ट करेगी. दुश्मन को पता चलेगा कि भारत बिना न्यूक्लियर हथियार इस्तेमाल किए भी मजबूत जवाब दे सकता है. डीआरडीओ ने पहले इस मिसाइल का मॉडल दिखाया था. अब AoN मिलने से असली विकास और टेस्टिंग शुरू हो गई है. यह भारत की आत्मनिर्भर रक्षा की दिशा में एक और बड़ा कदम है. भविष्य में यह मिसाइल भारतीय सेना की ताकत बढ़ाएगी.

वृद्धजनों की देखभाल के लिए केयर गिवर्स प्रशिक्षण शुरू, 53 युवा सीख रहे हैं सेवा के गुर

वृद्धजनों की देखभाल के लिये केयर गिवर्स प्रशिक्षण प्रारंभ, 53 युवा जन सीख रहे है वृद्धों की देखभाल के गुर भोपाल  वृद्धजनों की देखभाल कैसे की जाए, इस विषय पर 75 दिवसीय केयर गिवर्स प्रशिक्षण राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान (निमहर) सीहोर में प्रारंभ किया गया है। दिव्यांजन सशक्तिकरण विभाग, सामाजिकन्याय और अधिकारिका मंत्रालय भारत सरकार द्वारा अटल वयों अभ्यूदय योजनांतर्गत यह प्रशिक्षण शिविर 5 जनवरी से 26 मार्च 2026 तक संचालित किया जा रहा है। इसमें 53 युवा वृद्धों की देखभाल, उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है। प्रमुख सचिव, सामाजिकन्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने बताया कि अटल वयो अभ्यूदय योजना के अंतर्गत स्टेट एक्शन प्लान तैयार किया गया है। इसमें (NISD) नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल डिफेंस तथा लक्ष्मी बेन सुरजी फाउंडेशन मुंबई के संयुक्त तत्वाधान वरिष्ठजनों की देखभाल के लिये युवाओं को तैयार किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों द्वारा युवाजनों को बुर्जुगों की देखभाल के तरीकों, उनके अनुभव को साझा करने की प्रक्रिया और बुर्जुगों के साथ संवेदनशील बरताओं के लिय तैयार किया जाएगा। यह अपने तरह का प्रथम प्रशिक्षण है जो प्रदेश में आयोजित किया जा रहा है।  

सल्फोनिल्यूरिया दवा से डायबिटीज कंट्रोल करने में दिक्कत, नई रिसर्च में आया बड़ा खुलासा

 नई दिल्ली डायबिटीज को शुगर की बीमारी कहा जाता है. इसमें शरीर में शुगर यानी ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है. यह दुनिया के साथ-साथ भारत में भी सबसे तेजी से बढ़ती बीमारियों में से एक है. टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर बढ़ जाती है. इंसुलिन अग्न्याशय की बीटा कोशिकाएं बनाती हैं जो ब्लड शुगर कंट्रोल करती हैं. लेकिन हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ बार्सिलोना की रिसर्च में सामने आया है कि टाइप 2 डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए आमतौर पर जो दवा दी जाती है, वही दवा लंबे समय में टाइप 2 डायबिटीज को और भी बदतर कर सकती है. क्या कहती हैं रिसर्च? Diabetes, Obesity and Metabolism में पब्लिश हुई रिसर्च के मुताबिक, टाइप 2 डायबिटीज के इलाज में सल्फोनिल्यूरिया कैटेगरी की दवाएं जैसे ग्लिबेनक्लामाइड सालों से उपयोग की जा रही हैं. स्टडी के लीड प्रोफेसर एडुआर्ड मोंटान्या ने समझाया, 'टाइप 2 डायबिटीज में सालों से सल्फोनिल्यूरिया दवाएं दी जाती रही हैं जो बीटा कोशिकाओं को अधिक इंसुलिन रिलीज के लिए स्टिम्युलेट करती हैं.' 'ग्लिबेनक्लामाइड इन्हीं में से एक कॉमन दवा है जो कई देशों में जेनरिक फॉर्म में उपलब्ध है. लेकिन हमारी रिसर्च बताती है कि जब बीटा कोशिकाएं लंबे समय तक ऐसी दवा के संपर्क में रहती हैं तो उनकी सेहत और पहचान दोनों पर नेगेटिव असर पड़ सकता है.' बीटा सेल्स खो रहे हैं अपनी पहचान प्रोफेसर मोंटाण्या के अनुसार, बीटा कोशिकाएं दवाओं के कारण मरती नहीं हैं बल्कि वे अपनी पहचान खो देती हैं. टेस्टिंग में पाया गया है कि ग्लिबेनक्लामाइड के लंबे समय तक प्रयोग से उनकी जीन एक्टिविटी कम हो जाती है जो इंसुलिन प्रोडक्शन के लिए जरूरी होते हैं.' 'रिसर्च में पाया गया कि यह दवाएं कोशिकाओं के भीतर 'एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम' में तनाव पैदा करती है, जिससे उनकी पहचान खत्म होने लगती है.' दवा का असर कम होने की मिली वजह! प्रोफेसर मोंटाण्या ने कहा, 'अक्सर देखा जाता है कि शुरुआत में बेहतर असर दिखाने वाली दवाएं बाद में बेअसर हो जाती हैं और मरीजों को उसके बाद हैवी खुराक या नई दवाएं देनी पड़ती हैं.' 'दरअसल, कोशिकाओं की पहचान खोने से धीरे-धीरे ब्लड शुगर पर कंट्रोल कम होने लगता है जिससे शुगर और बढ़ने लगती है. सेल्स आइडेंटिटी लॉस, सेल डेथ की तरह स्थायी नहीं होती यानी सही ट्रीटमेंट से बीटा कोशिकाओं की पहचान और इंसुलिन बनाने की क्षमता दोबारा लौटाई जा सकती है. दवा की डोज बढा़ने का कारण आया सामने विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना बंद न करें लेकिन यह रिसर्च बताती है कि लंबे समय तक सल्फोनिल्यूरिया इस्तेमाल करने से ब्लड शुगर कंट्रोल धीरे-धीरे कमजोर हो सकता है. यही वजह है कि कई मरीजों को समय के साथ दवा की खुराक बढ़ानी या दूसरी दवा जोड़नी पड़ती है.

बांग्लादेश ने T20 वर्ल्ड कप से नाम वापस लिया, ICC के पास हैं ये संभावित कदम

ढाका  टी20 वर्ल्ड कप से पहले भारत और बांग्लादेश के बीच क्रिकेट के रिश्तों में तनाव साफ नजर आने लगा है. हालिया घटनाओं ने इस विवाद को और गहरा कर दिया है, जिसका असर अब सीधे आईसीसी टूर्नामेंट पर देखने को मिल रहा है. बांग्लादेश ने संकेत दिए हैं कि वह भारत में अपने मैच खेलने को लेकर असहज है और उसने अपने मुकाबले श्रीलंका में शिफ्ट कराने की मांग आईसीसी के सामने रखी है. इस पूरे घटनाक्रम ने इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) को एक बार फिर कड़े फैसलों की दहलीज पर ला खड़ा किया है. कैसे शुरू हुआ विवाद? दरअसल, बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं को लेकर भारत में काफी नाराजगी देखी जा रही है. इसी माहौल के बीच आईपीएल 2026 के मिनी ऑक्शन में कोलकाता नाइट राइडर्स द्वारा बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को खरीदे जाने पर भी भारी विरोध हुआ. सोशल मीडिया पर दबाव बढ़ने के बाद बीसीसीआई ने फ्रेंचाइजी को सख्त निर्देश दिए और केकेआर को आखिरकार मुस्तफिजुर को रिलीज करना पड़ा. इस फैसले के बाद हालात और बिगड़ गए. ICC के पास क्या विकल्प हैं? आईसीसी के पास इस स्थिति से निपटने के लिए कई रास्ते हैं. पहला विकल्प यह है कि वह बांग्लादेश की मांग स्वीकार कर ले और उसके सभी मुकाबले श्रीलंका में आयोजित कराए. इससे टूर्नामेंट का शेड्यूल बदलेगा और लॉजिस्टिक चुनौतियां भी बढ़ेंगी. दूसरा विकल्प यह है कि आईसीसी शेड्यूल में कोई बदलाव न करे. ऐसे में अगर बांग्लादेश भारत आने से इनकार करता है, तो उसके मुकाबले रद्द माने जा सकते हैं और विरोधी टीमों को वॉकओवर के जरिए अंक मिल सकते हैं. क्रिकेट इतिहास में ऐसा पहले भी हो चुका है. 1996 वर्ल्ड कप में सुरक्षा कारणों से ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज ने श्रीलंका में खेलने से मना किया था, जिसके बाद श्रीलंका को सीधे अंक दिए गए थे. 2003 वर्ल्ड कप में भी इंग्लैंड और न्यूजीलैंड ने कुछ मैच नहीं खेले थे और विरोधी टीमों को फायदा मिला था. अगर बांग्लादेश टूर्नामेंट से हटता है तो? सबसे सख्त स्थिति तब बनेगी जब बांग्लादेश पूरे टी20 वर्ल्ड कप से हटने का फैसला करे. ऐसी हालत में आईसीसी किसी दूसरी क्वालिफाइड टीम को उसकी जगह शामिल कर सकता है. इससे पहले 2016 अंडर-19 वर्ल्ड कप में ऐसा देखने को मिला था, जब ऑस्ट्रेलिया के हटने पर आयरलैंड को मौका दिया गया था. फिलहाल बांग्लादेश ने टी20 वर्ल्ड कप से हटने का आधिकारिक फैसला नहीं किया है, लेकिन उनके रुख ने टूर्नामेंट से पहले माहौल जरूर गर्म कर दिया है. अब सबकी नजरें आईसीसी पर हैं कि वह इस संवेदनशील और जटिल मुद्दे पर क्या फैसला लेता है.   

स्मार्ट सिटी की ओर कदम, AI कैमरों से रियल-टाइम ट्रैफिक जाम की मिलेगी जानकारी

भोपाल  आम आदमी की रोजमर्रा की परेशानियों का समाधान अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), सेंसर और डेटा आधारित तकनीकें के माध्यम से होगा। मैनिट और ट्रिपल आइ‌टी के छात्रों द्वारा विकसित नवाचार शहरों की ट्रैफिक व्यवस्था से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं तक बड़े बदलाव की नींव रख रहे हैं। स्मार्ट कैमरों और सेंसर की मदद से यह तकनीक समझ सकेगी कि किस दिशा में वाहनों का दबाव अधिक है, जिससे ट्रैफिक सिग्नल स्वत: उसी अनुसार संचालित हो सकेंगे और जाम की समस्या कम होगी। वहीं डिजिटल हेल्थ ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म के जरिए मरीज के शरीर से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा को रियल-टाइम में रिकॉर्ड किया जाएगा। जिसे डॉक्टर दूर बैठे भी देख सकेंगे। इससे समय पर इलाज संभव होगा और अस्पतालों पर दबाव भी घटेगा। स्मार्ट इंडिया हैकथॉन (एसआइएच) 2025 में छह से अधिक टीमों के आइडिया राष्ट्रीय स्तर पर चयनित हुए हैं। इन आइडियाज की खास बात यह है कि ये सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की दिक्कतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए है। वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम स्मार्ट सेंसर आधारित वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम कचरा पात्रों में लगे सेंसर से नगर निगम को अलर्ट भेजेगा कि कहां कचरा भर चुका है। इससे समय पर सफाई होगी और शहर साफ रहेंगे। वहीं, डाक विभाग के लिए विकसित एआइ आधारित समाधान से पार्सल और पत्रों की प्रोसेसिंग तेज होगी। फेक न्यूज और देशविरोधी प्रचार की पहचान मैनिट की एक टीम ने ऐसा टूल बनाया है, जो सोशल मीडिया डेटा का विश्लेषण कर संदिग्ध पोस्ट, ट्रेंड और कैंपेन को चिन्हित करेगा। यह सिस्टम पैटर्न पहचानकर बताएगा कि कौन सा कंटेंट संगठित तरीके से फैलाया जा रहा है, जिससे समय रहते कार्रवाई की जा सके। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में क्या बदलेगा ट्रिपल आईटी की टीम ने ग्रामीण इलाकों के लिए डिजिटल हेल्थ ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म बनाया है। इसमें मरीज का इलाज, जांच और दवाओं का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा। इससे बार-बार फाइल ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी और डॉक्टर दूर बैठे भी मरीज की स्थिति समझ सकेंगे। साइबर ठगी से आम लोगों की सुरक्षा डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ फर्जी ऐप्स का खतरा भी बढ़ा है। छात्रों ने फेक बैंकिंग एपीके डिटेक्शन सिस्टम तैयार किया है, जो ऐप के कोड, परमिशन और व्यवहार का विश्लेषण कर यह बताएगा कि ऐप सुरक्षित है या नहीं। स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल मैनिट की टीम ने एआइ आधारित स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम विकसित किया है। मौजूदा सिस्टम में सिग्नल तय समय पर बदलते हैं, चाहे सड़क खाली हो या जाम से भरी। नया सिस्टम रीयल-टाइम डेटा, कैमरों और सेंसर की मदद से यह समझेगा कि किस दिशा में ज्यादा वाहन हैं। उसी आधार पर सिग्नल का समय अपने आप बदलेगा। इससे जाम कम होगा, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड को रास्ता मिलेगा और ईंधन की बर्बादी भी रुकेगी।

देश का पहला ऐतिहासिक महाभारत समागम 16 से 24 जनवरी तक भारत भवन में, CM डॉ. मोहन होंगे शामिल

 भोपाल  राजधानी भोपाल के भारत भवन से शांति का संदेश दिया जाएगा। दरअसल, 16 से 24 जनवरी तक ऐतिहासिक महाभारत समागम का आयोजन होगा। नौ दिवसीय आयोजन में CM डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे।  भारत सहित इंडोनेशिया, श्रीलंका और जापान के रंग समूह लेंगे भाग वीर भारत न्यास के आयोजन में भारत सहित इंडोनेशिया, श्रीलंका और जापान के प्रतिष्ठित रंग समूह भाग लेंगे। नौ दिवसीय आयोजन में नाटक, नृत्य-नाट्य, कठपुतली कार्यशालाएं, लोक एवं शास्त्रीय प्रस्तुतियां, अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव और इमर्सिव डोम थिएटर के माध्यम से युद्ध के विरुद्ध शांति और संवाद का सशक्त संदेश दिया जाएगा।  शांति और संवाद का मंच बनेगा भोपाल का भारत भवन वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्ध, हिंसा और सभ्यताओं के टकराव के दौर में भोपाल का भारत भवन शांति और संवाद का मंच बनेगा। महाभारत समागम देश का पहला और अब तक का सबसे बड़ा सांस्कृतिक आयोजन है। जो महाभारत को केवल युद्ध कथा नहीं, बल्कि मानवता, विवेक और करुणा की महागाथा के रूप में प्रस्तुत करेगा।  युद्ध कभी समाधान नहीं नौ दिवसीय आयोजन में नाटक, नृत्य-नाट्य, लोक एवं शास्त्रीय प्रस्तुतियों के माध्यम से यह बताया जाएगा कि युद्ध कभी समाधान नहीं होता। श्रीकृष्ण के संवाद आधारित प्रयास आज की वैश्विक परिस्थितियों में भी प्रासंगिक हैं। नेपथ्य कला, अस्त्र-शस्त्र, चक्रव्यूह और पताकाओं की प्रदर्शनी दर्शकों को महाभारत के दृश्य संसार से परिचित कराएगी। महाभारत आधारित चित्र प्रदर्शनी और भारतीय कठपुतली कला भी आयोजन का अहम हिस्सा होंगी। इसके साथ ‘सभ्यताओं की सांस’ और ‘भूली बिसरी सभ्यताएं’ पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा। 

रुद्राक्ष महोत्सव: कुबेरेश्वर धाम में मंच साझा करेंगे प्रदीप मिश्रा–धीरेंद्र शास्त्री, जानें वितरण होगा या नहीं

सीहोर  कुबेरेश्वर धाम 17 फरवरी को एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक गौरव का साक्षी बनने जा रहा है। धाम पर आयोजित होने वाले भव्य रुद्राक्ष महोत्सव के अवसर पर बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का आगमन होगा। विट्ठलेश सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित यह महोत्सव महादेव की भक्ति और आध्यात्मिक चेतना को समर्पित है। इस साल महोत्सव का स्वरूप दिव्य होगा। पंडित प्रदीप मिश्रा के सानिध्य में लाखों भक्त एक साथ महादेव का पूजन और अभिषेक करेंगे। विट्ठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित समीर शुक्ला सहित अन्य ने बागेश्वर धाम पर पहुंचकर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से भेंट की और रुद्राक्ष महोत्सव पर चर्चा की। पंडित शास्त्री ने कहा कि 17 फरवरी को कुबेश्वरधाम पर होने वाले भव्य महोत्सव में वह शामिल रहेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक लाख 80 हजार वर्ग फीट में विशाल पंडाल तैयार किया गया है। इसके अलावा लगभग 10 एकड़ भूमि पर भोजनशाला का निर्माण भी किया जा रहा है, ताकि महोत्सव में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। रुद्राक्ष से शिवलिंग का निर्माण किया जाएगा महोत्सव के दौरान शिव तत्व और सनातन धर्म की महिमा पर विशेष सत्संग सत्र आयोजित किए जाएंगे। मंदिर परिसर में लाखों रुद्राक्ष से एक भव्य शिवलिंग का निर्माण किया जाएगा, जिसका श्रद्धालुओं के बीच नियमित अभिषेक किया जाएगा। विट्ठलेश सेवा समिति के जनसंपर्क प्रभारी मनोज दीक्षित ने बताया कि 17 फरवरी का दिन कुबेरेश्वर धाम के इतिहास में विशेष महत्व रखेगा, जब दोनों प्रमुख कथावाचक एक मंच पर उपस्थित रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि महोत्सव के दौरान रुद्राक्ष का वितरण नहीं किया जाएगा और पूरा आयोजन महादेव की आराधना तथा संतों के सानिध्य पर केंद्रित रहेगा। 80 हजार स्क्वायर फीट में बन रहा पंडाल: सालों से होने वाले ऐतिहासिक रुद्राक्ष महोत्सव में लाखों की संख्या में देश और विदेश के श्रद्धालु शामिल होते हैं। आयोजन के लिए एक लाख 80 हजार स्क्वायर फीट का भव्य पंडाल बनाया गया है। इसके अलावा 10 एकड़ में भोजन शाला का निर्माण किया जा रहा है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री होंगे शामिल विट्ठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित समीर शुक्ला समेत अन्य ने बागेश्वर धाम पर पहुंचकर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से भेंट कर आगामी ऐतिहासिक रुद्राक्ष महोत्सव को लेकर चर्चा की। वहीं पंडित शास्त्री ने कहा कि आगामी 17 फरवरी को कुबेरेश्वर धाम पर होने वाले भव्य महोत्सव में वह शामिल रहेंगे। गौरतलब है कि बीते कई सालों से होने वाले ऐतिहासिक रुद्राक्ष महोत्सव में लाखों की संख्या में देश और विदेश के श्रद्धालु शामिल होते है। भव्य आयोजन को लेकर एक लाख 80 हजार स्कावयर फीट का भव्य पंडाल का निर्माण किया गया है। इसके अलावा 10 एकड़ में भोजन शाला का निर्माण किया जा रहा है। शिव महापुराण एवं सत्संग महोत्सव के दौरान शिव तत्व और सनातन धर्म की महिमा पर विशेष सत्संग सत्र आयोजित होंगे। लाखों रुद्राक्ष से मंदिर परिसर में भव्य शिवलिंग का निर्माण किया जाएगा। जिसका नियमित रूप से लाखों श्रद्धालुओं के मध्य अभिषेक किया जाएगा। विशाल धार्मिक समागम यह आयोजन देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा और विश्वास का प्रमुख केंद्र बनेगा। दो महान विभूतियों का महामिलन विट्ठलेश सेवा समिति के जनसंपर्क प्रभारी मनोज दीक्षित ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि 17 फरवरी का दिन कुबेरेश्वर धाम के इतिहास में अविस्मरणीय होगा। इस दिन अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा महाराज और पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक ही मंच पर उपस्थित रहेंगे। देश के इन दो सबसे लोकप्रिय आध्यात्मिक व्यक्तित्वों का मिलन सनातन संस्कृति की एकजुटता और वैचारिक शक्ति का परिचायक होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि महोत्सव के दौरान रुद्राक्ष का वितरण नहीं किया जाएगा, बल्कि पूरा कार्यक्रम महादेव की आराधना और संतों के सानिध्य पर केंद्रित रहेगा। श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए समिति की ओर से आवास, पेयजल और सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। ताकि भक्तों को सुलभ दर्शन और सत्संग का लाभमिल सके। समिति समस्त धर्मप्रेमी जनता से इस गौरवशाली और भक्तिमय अवसर पर सादर पधारने की अपील की है।

बजट 2026 की तैयारियां: क्या रविवार को खुलेंगे शेयर बाजार? 1 फरवरी को बड़ा अपडेट

नई दिल्ली साल 2017 से केंद्र सरकार एक फरवरी को आम बजट पेश करती आ रही है. लेकिन इस बार हालात कुछ और हैं. वजह है 1 फरवरी को रविवार का दिन होना. हालांकि रिपोर्ट्स की मानें तो चाहे रविवार ही क्‍यों न हो, बजट उसी दिन पेश होने जा रहा है. और अगर देश का आम बजट (Union Budget 2026) 1 फरवरी 2026 को पेश होता है, तो यह दिन खास होने वाला है. वजह सिर्फ बजट नहीं, बल्कि यह सवाल भी है कि क्या उस दिन शेयर बाजार खुलेगा या नहीं? क्योंकि रविवार आमतौर पर शेयर बाजार के लिए छुट्टी का दिन होता है.  संसदीय कार्य समिति (CCPA) बुधवार को होने वाली बैठक में बजट सत्र की तारीखों पर आखिरी फैसला ले सकती है. अधिकारियों के अनुसार, CCPA की बैठक में संसद के बजट सत्र का कार्यक्रम और इस साल केंद्रीय बजट पेश करने की सटीक तारीख दोनों तय की जाएंगी, क्योंकि 1 फरवरी को रविवार पड़ने के कारण अनिश्चितता बनी हुई है.  सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी को संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति के संबोधन से हो सकती है. आर्थिक सर्वेक्षण 29 जनवरी को पेश किए जाने की संभावना है. 30 और 31 जनवरी को छुट्टियां रहने की संभावना है, जिससे समिति द्वारा मंजूरी मिलने पर 1 फरवरी (रविवार) को केंद्रीय बजट पेश करने कंफर्म हो पाएगा.  पहले ही शुरू हो चुकी थी तैयारियां  बजट 2026 की तैयारियों का काम पहले ही शुरू हो चुका है. बजट से पहले की परामर्श बैठकें 9 अक्टूबर, 2025 से नवंबर के मध्य तक आयोजित की गईं. 2026-27 के बजट अनुमान और 2025-26 के संशोधित अनुमानों को अस्थायी रूप से अंतिम रूप दे दिया गया है. वित्त मंत्रालय केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय से जीडीपी अनुमान जुटाने की प्रक्रिया में भी है, जिसका उपयोग बजट से पहले आखिरी गणना में किया जाएगा. गौरतलब है कि पिछले साल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना लगातार आठवां केंद्रीय बजट पेश किया, जिससे उन्होंने वित्त मंत्री के रूप में दो कार्यकाल में पेश किए गए दस बजटों के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड की बराबरी की. सरकार की घोषणा के बाद होगा अंतिम फैसला NSE के मुताबिक, बाजार खोलने या न खोलने का निर्णय केंद्र सरकार द्वारा बजट की तारीख को आधिकारिक रूप से घोषित करने के बाद ही लिया जाएगा. फिलहाल यह प्रस्ताव एक्सचेंज के अंदरूनी स्तर पर समीक्षा के दौर से गुजर रहा है. NSE ने साफ किया है कि ऑपरेशनल व्यवहार्यता (operational feasibility), सिस्टम की तैयारियां, बैंकों और ब्रोकर्स की उपलब्धता जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखकर फैसला लिया जाएगा. रविवार को ट्रेडिंग कोई नई बात नहीं अगर 1 फरवरी 2026 को शेयर बाजार खुलता है, तो यह कोई पहली बार नहीं होगा. इससे पहले भी जब बजट किसी रविवार या सार्वजनिक अवकाश के दिन पेश किया गया, तब शेयर बाजार खोले गए हैं ताकि निवेशक सरकार की घोषणाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया दे सकें. ऐसे मौकों पर सरकार और रेगुलेटर्स का मानना रहा है कि बजट जैसे बड़े आर्थिक फैसलों पर रियल-टाइम मार्केट रिस्पॉन्स जरूरी होता है, ताकि अगले ट्रेडिंग डे तक अनावश्यक उतार-चढ़ाव न बने. BSE की ओर से अभी चुप्पी जहां NSE ने इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है, वहीं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. BSE ने यह नहीं बताया है कि वह रविवार को बाजार खोलने पर विचार कर रहा है या नहीं. आमतौर पर NSE और BSE ऐसे मामलों में तालमेल के साथ फैसला लेते हैं, इसलिए माना जा रहा है कि सरकार की घोषणा के बाद दोनों एक्सचेंज एक जैसी रणनीति अपना सकते हैं. 1 फरवरी को ही क्यों पेश होता है बजट? भारत में 2017 से परंपरा बन चुकी है कि केंद्रीय बजट 1 फरवरी को ही पेश किया जाए, चाहे वह दिन कोई भी हो. इसका मकसद यह होता है कि सरकार को पूरे वित्त वर्ष की शुरुआत से पहले नीतियों को लागू करने का पर्याप्त समय मिल सके. बजट से एक दिन पहले आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) पेश किया जाता है, जिसके बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन और वरिष्ठ अधिकारी मीडिया को जानकारी देते हैं. रविवार को संसद सत्र भी होगा दुर्लभ अगर सरकार 1 फरवरी 2026 को बजट पेश करने की आधिकारिक मंजूरी देती है, तो यह संसद का एक दुर्लभ रविवार सत्र होगा. आमतौर पर संसद की कार्यवाही सप्ताहांत में नहीं होती, लेकिन बजट जैसे अहम मौकों पर अपवाद बनाए गए हैं. शेयर बाजार का सामान्य समय क्या होता है? अगर शेयर बाजार की बात करें तो भारत में इसका प्री-ओपन सेशन सुबह 9:00 से 9:15 बजे तक, नॉर्मल ट्रेडिंग सुबह 9:15 से दोपहर 3:30 बजे तक होता है. केवल सोमवार से शुक्रवार तक ही ट्रेडिंग होती है और शनिवार, रविवार के अलावा घोषित अवकाश पर बाजार बंद रहता है. लेकिन बजट जैसे खास मौकों पर इन नियमों में बदलाव किया जा सकता है. निवेशकों की नजर सरकार के फैसले पर फिलहाल निवेशकों, ब्रोकर्स और फाइनेंशियल मार्केट से जुड़े लोगों की नजर सरकार की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई है. जैसे ही बजट की तारीख को लेकर नोटिफिकेशन आएगा, NSE और BSE दोनों अपने-अपने फैसले सार्वजनिक करेंगे. बजट पेश करने के अनोखे फैक्‍ट्स  भारत में बजट पेश करने की परंपरा 26 नवंबर, 1947 से चली आ रही है, जब आर.के. शनमुखम चेट्टी ने स्वतंत्र भारत का पहला बजट प्रस्तुत किया था. दशकों से मनमोहन सिंह और पी. चिदंबरम जैसे नेताओं ने क्रमिक बजटों के  माध्यम से देश की आर्थिक नीति को आकार दिया है. भारत की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री, सीतारमण के नाम महिलाओं में सबसे अधिक बार बजट पेश करने का विश्‍व रिकॉर्ड है.  रविवार को शेयर बाजार भी खुलेगा?  अगर 1 फरवरी को रविवार के दिन बजट पेश होता है तो उस दिन शेयर बाजार भी खुल सकता है. इस दिन आप ट्रेडिंग भी कर सकेंगे. साथ ही शेयरों की खरीद और बिक्री भी की जा सकेगी. हालांकि अभी तक एक्‍सचेंजों की तरफ से 1 फरवरी को शेयर बाजार खुलने को लेकर कोई अपडेट नहीं आया है.