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डेंटल कॉलेज मेस में मिली गंदगी, चावल में इल्ली, मरे हुए मेंढक और एक्सपायरी फूड प्रोडक्ट का इस्तेमाल

राजनांदगाव. छत्तीसगढ़ के राजनांदगाव शहर के सुंदरा गांव स्थित छत्तीसगढ़ डेंटल कॉलेज में उस समय हड़कंप मच गया, जब छात्रों के भोजन में मरा हुआ मेंढक मिलने की शिकायत सामने आई. इस गंभीर लापरवाही ने कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामले की सूचना मिलते ही खाद्य विभाग की टीम ने कॉलेज परिसर स्थित हॉस्टल की मेस का निरीक्षण किया. जांच के दौरान रसोई और भंडार कक्ष में गंदगी का अम्बार मिला. टीम को मौके से कई खाद्य पैकेट एक्सपायरी डेट के भी मिले, जिन्हें छात्रों को परोसे जाने की आशंका जताई जा रही है. निरीक्षण के समय कार्य प्रबंधन की अनुसूची अनुपस्थिति भी सामने आई, जिससे नाराजगी और बढ़ गई. टीम के अधिकारियों ने कहा कि इसकी लापरवाही बच्चों की सेहत और जीवन से सीधा खिलवाड़ है. खाद्य विभाग की टीम ने की जांच शिकायत मिलते ही खाद्य विभाग की टीम कॉलेज परिसर पहुंची और मेस का निरीक्षण किया. जांच के दौरान रसोई और भंडार कक्ष में गंदगी का आलम देखने को मिला. टीम ने मौके पर पनीर, दाल और अन्य खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए. इसके साथ ही कॉलेज प्रशासन को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है. मिली अनियमितताएं और एक्सपायरी सामान जांच में कई अनियमितताएं सामने आईं. टीम को एक पैकेट एक्सपायरी सूजी मिला, जिसे लापरवाही माना गया. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन खामियों को नोटिस में दर्ज किया जाएगा और सुधार के लिए निर्देश दिए जाएंगे. फिलहाल, कॉलेज प्रबंधन भी यह पता लगाने में जुटा है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई? छात्रों में आक्रोश, प्रबंधन पर सवाल खाने में मेंढक मिलने की घटना के बाद छात्रों में नाराजगी है. वे कॉलेज प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं. छात्रों का कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है. कई छात्रों ने मेस की सफाई और भोजन की गुणवत्ता पर पहले भी सवाल उठाए थे. कारण बताओ नोटिस जारी छात्रों की शिकायत के बाद फूड एवं सेफ्टी विभाग ने मेस का अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान मेस में कई एक्सपायरी खाद्य सामग्री भी पाई गई। विभाग ने स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों में गंभीर खामियां पाए जाने पर मेस का संचालन करने वाली संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई छात्रों के स्वास्थ्य के साथ संभावित खिलवाड़ को देखते हुए की गई है। डीन बोले- शिकायत की जांच होगी छत्तीसगढ़ डेंटल कॉलेज के डीन डॉक्टर एसके नंदा ने बताया कि मेस में परोसे गए भोजन में मृत मेंढक मिलने की शिकायत की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि संस्था को समय-समय पर साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखने की हिदायत दी जाती है। हालांकि, उन्होंने एक्सपायरी खाद्य पदार्थ मिलने की जानकारी से इनकार किया। अन्य राज्यों के स्टूडेंट भी पढ़ने आते हैं कॉलेज में अलग-अलग राज्यों से आए विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं, जो खाने के लिए पूरी तरह मेस पर निर्भर रहते हैं। ये मामला सामने आने के बाद अब स्वास्थ्य से खिलवाड़ को लेकर सवाल उठ रहे है। छात्रों ने कहा है कि दूषित भोजन और उसमें मृत जीव मिलने से फूड पॉइजनिंग और बैक्टीरियल इन्फेक्शन जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। कमियों को लेकर नोटिस जारी इस संबंध में जिला खाद्य अधिकारी तरुण बिरला ने बताया की डेंटल कॉलेज के भोजन में मेंढक पाए जाने की शिकायत पर जांच टीम पहुंची थी वहां से खाद्य पदार्थों का सैंपल लिया गया है कुछ कमियों को लेकर नोटिस भी जारी किया गया है। एक्सपायरी खाद्य पदार्थ जब्त नहीं की गई है। अधिकारियों का बयान: सख्त कार्रवाई होगी खाद्य विभाग के अधिकारी तरुण बिरला ने बताया कि छत्तीसगढ़ डेंटल कॉलेज की मेस में मेंढक मिलने का मामला सामने आया है. हमारी टीम ने मौके पर जाकर जांच की. कुछ अनियमितताएं मिली हैं, जिन पर नोटिस जारी किया गया है. हम सख्ती से कार्रवाई करेंगे ताकि भविष्य में ऐसे मामले दोबारा न हों. फिलहाल जांच जारी कॉलेज प्रबंधन ने भी जांच शुरू कर दी है. यह पता लगाया जा रहा है कि मेस में सफाई और गुणवत्ता नियंत्रण में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर सुधार नहीं हुआ तो आगे कड़ी कार्रवाई की जाएगी. कॉलेज प्रशासन को भेजा नोटिस खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी तरुण बिरला ने कहा कि हमारे संज्ञान में कल मामला आया था कि छत्तीसगढ़ डेंटल कॉलेज की मेस में छात्रों को जो खाना परोसा जाता है, उसमें मेंढक निकला था. यूथ फाउंडेशन ऑफ इंडिया नाम की संस्था मेस चलाती है. हमारी टीम ने फौरन वहां जाकर जांच की है और वहां मेस का पूरा निरीक्षण किया गया और खाने के सैंपल लिए गए हैं. वहां कुछ अनियमितताएं मिली हैं, उसको लेकर नोटिस जारी किया जा रहा है. एक्सपायरी खाद्य सामग्री भी मिली है, उसका जिक्र भी नोटिस में किया गया है. उन्होंने कहा कि खाने में मेंढक कैसे आया, इसकी जांच कॉलेज प्रबंधन को करनी चाहिए. जब उनसे पूछा गया कि इससे पहले भी मेस में इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है.

ED बनाम ममता बनर्जी: CBI जांच को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा, आज अहम सुनवाई

कोलकाता प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। इसके जरिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका की सीबीआई जांच का अनुरोध किया है। ED ने राजनीतिक परामर्श फर्म I-PAC तथा उसके निदेशक के खिलाफ कोलकाता में की गई छापेमारी के दौरान कथित तौर पर बाधा डालने के आरोप लगाए हैं। याचिका में उसने यह भी अनुरोध किया है कि तलाशी के दौरान जिन सभी डिजिटल उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और दस्तावेजों को 'अवैध और जबरन' तरीके से हटा लिया गया था। इन्हें तुरंत जब्त कर सील किया जाए, फॉरेंसिक रूप से सुरक्षित रखा जाये और फिर ED को सौंपा जाए। उच्च न्यायालय द्वारा शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई किए जाने की उम्मीद है। कोयला घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले के तहत गुरुवार को आई-पैक के सॉल्ट लेक स्थित कार्यालय और इसके संस्थापक तथा निदेशकों में से एक प्रतीक जैन के आवास पर तलाश अभियान चलाया गया। राज्य और दिल्ली में भी कुछ अन्य स्थानों पर छापेमारी की गई थी। ED ने गुरुवार को एक प्रेस बयान में आरोप लगाया था कि बनर्जी छापेमारी के दौरान कोलकाता के लाउडन रोड स्थित जैन के आवास पर आईं और 'महत्वपूर्ण सबूत ले गईं' और आई-पैक के कार्यालय में भी उन्होंने ऐसा ही किया। ED ने याचिका में दावा किया कि पश्चिम बंगाल में कोयले की कथित चोरी से प्राप्त हवाला राशि के लगभग 20 करोड़ रुपये आई-पैक तक पहुंचे। यह संगठन 2021 से टीएमसी और राज्य सरकार को राजनीतिक परामर्श सेवाएं प्रदान कर रहा है। इसमें कहा गया है, 'जांच के दौरान मिले ठोस सबूतों से पता चलता है कि हवाला चैनलों के माध्यम से आई-पैक को कम से कम 20 करोड़ रुपये की आपराधिक आय हस्तांतरित की गई थी।' याचिका में कहा गया है, 'जांच को जारी रखते हुए और अपराध से प्राप्त धनराशि और उसके उपयोग का पता लगाने के लिए, कोयला तस्करी मामले के संबंध में आई-पैक और कुछ अन्य संस्थाओं के खिलाफ तलाश अभियान शुरू किया गया था।' इसमें कहा गया, 'पीएमएलए के तहत जारी तलाशी अभियान में हस्तक्षेप न करने के लिए (ED अधिकारियों द्वारा) स्पष्ट अनुरोध किए जाने के बावजूद मुख्यमंत्री ने परिसर में प्रवेश किया।' याचिका में कहा गया है, 'कानून-व्यवस्था से जुड़े सभी नियमों का उल्लंघन करते हुए, सुश्री ममता बनर्जी ने पुलिसकर्मियों की सहायता से अधिकृत अधिकारी के कब्जे से सभी डिजिटल उपकरणों के साथ-साथ महत्वपूर्ण आपत्तिजनक दस्तावेजों को जबरन अपने कब्जे में ले लिया और दोपहर लगभग 12:15 बजे परिसर से चली गईं।' ED ने कहा कि उसके अधिकारियों को 'अपने कानूनी कर्तव्यों का पालन नहीं करने दिया गया और उनके कामकाज में बाधा डाली गई।' एजेंसी ने उच्च न्यायालय से आग्रह किया कि वह जब्त किये गये डिजिटल उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों तक किसी भी प्रकार की पहुंच बनाये जाने, इन्हें मिटाने या छेड़छाड़ को रोकने के लिए अंतरिम आदेश पारित करे।  

रायगढ़ में कुत्तों को नसबंदी के बाद बिरयानी? कांग्रेस और मेयर के बीच सत्ता-विपक्ष की भिड़ंत

रायगढ़ रायगढ़ नगर निगम के आवारा कुत्तों की नसबंदी और उनके आहार को लेकर शहर में विवाद खड़ा हो गया है। महापौर जीवर्धन चौहान ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में आवारा कुत्तों का बधियाकरण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान उन्हें बताया गया कि नसबंदी के बाद कुत्ते दो दिन तक कुछ नहीं खाते। ऐसे कमजोर कुत्तों को विशेष आहार के तौर पर बिरयानी खिलाई जाती है। महापौर का यह बयान अलग तरीके से तोड़-मरोड़कर पेश किया जाने लगा, जिसके बाद विपक्ष के नेताओं ने इसे भ्रष्टाचार और अनावश्यक खर्च बताया। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी आवारा कुत्तों के आहार और खर्च पर पारदर्शिता नहीं दिखा रही है। वहीं कुत्तों को बिरयानी खिलाने को लेकर निगम के नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया ने बीजेपी मेयर जीवर्धन चौहान को घेरा है। उन्होंने ने कहा कि अब आवारा कुत्ते भी बिरयानी खाएंगे। कुत्तों को चिकन या मटन किसकी बिरयानी खिलाई जाएगी। इसके लिए फंड किस मद से खर्च किया जाएगा। जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, रायगढ़ में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और डॉग बाइट को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी अभियान शुरू किया गया है। पिछले दिनों रायगढ़ के महापौर जीवर्धन चौहान खुद नसबंदी केंद्र पहुंचे। वहां की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। कुत्तों की देखभाल और दिए जाने वाले भोजन की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान महापौर जीवर्धन चौहान ने कुत्तों को पौष्टिक आहार देने की बात कही। उन्होंने अपने बयान में कुत्तों को खिचड़ी, दलिया और बिरयानी का जिक्र किया। महापौर के इसी बयान को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। चिकन या मटन की खिलाएंगे बिरयानी- कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया ने कहा कि, अगर आवारा कुत्तों को बिरयानी खिलाई जाएगी, तो यह स्पष्ट किया जाए कि वह चिकन की होगी या मटन की। साथ ही सवाल उठाया कि इसके लिए शासन से कोई आदेश आया है या नहीं। खर्च किस मद से किया जाएगा। नगर निगम ने इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए भिलाई के एक एनजीओ को जिम्मेदारी सौंपी है। एनजीओ कुत्तों को ट्रांसपोर्ट नगर लाकर नसबंदी करता है और दो दिनों तक उन्हें वहां रखकर स्वास्थ्य स्थिति की जांच करता है। नसबंदी और स्वास्थ्य देखभाल की निगरानी के लिए तीन डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है। महापौर जीवर्धन चौहान ने स्पष्ट किया, “मैं बधियाकरण का निरीक्षण करने गया था। टीम ने मुझे कुत्तों की नसबंदी, खान-पान और उपचार की जानकारी दी। कुछ कुत्ते नसबंदी के बाद एक-दो दिन तक खाना नहीं खाते हैं, इसलिए उनको बिरयानी दी जाती है। इस बयान को अलग तरीके से तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।” नगर निगम रायगढ़ ने आवारा कुत्तों की बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए बजट भी तय किया है। इस राशि के तहत एनजीओ को समुचित व्यवस्था करने और कुत्तों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने का निर्देश दिया गया है। शहर में इस समस्या को लेकर अभी भी बहस जारी है और राजनीतिक बयानबाजी तेज़ है।     शहर में आवारा कुत्तों की नसबंदी की जा रह है। इसके लिए बजट भी तय किया गया है। इस राशि में एनजीओ को समुचित व्यवस्था करना है। बधियाकरण का निरीक्षण करने मैं गया था, वहां टीम से कुत्तों की नसबंदी, खान-पान व उपचार की जानकारी दी। यह भी बताया गया कि कुछ कुत्ते नसबंदी के बाद एक-दो दिन खाना नहीं खाते है, तो उनको बिरयानी खिलाया जाता है। बिरयानी खिलाने वाले बयान को अलग तरीके से तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है।     – जीवर्धन चौहान महापौर, नगर निगम रायगढ़।  

रायपुर रेलवे स्टेशन पर हेल्दी वेटिंग लाउंज की शुरुआत, 30 रुपये में मिलेगा योग, मेडिटेशन और हेल्थ चेकअप

रायपुर  रायपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 1 पर पहली बार हेल्दी वेटिंग लाउंज की सुविधा यात्रियों को मिलने जा रही है. भारतीय रेलवे में नई, अभिनव गैर-किराया राजस्व विचार योजना (NINFRIS )के तहत इसकी प्लानिंग की गई है. गुरुवार को इस सुविधा का शुभारंभ यात्रियों ने किया. रायपुर से बड़ोदरा जा रहे यात्री चंद्रकांत बलावंत और उज्जैन जा रही 2 रेलयात्री ओजस्वी एवं आरुषि के हाथों इस लाउंज का शुभारंभ कराया गया. ट्रेन का इंतजार अब नहीं लगेगा बोरिंग रायपुर रेल मंडल के सीनियर डीसीएम अवधेश कुमार त्रिवेदी ने बताया "स्वस्थ वेटिंग लाउंज शुरू होने से यात्रियों को ट्रेनों का इंतजार करते समय आरामदायक सुविधा मिलेगी. जिससे यात्रियों को काफी फायदा मिलेगा.  हेल्दी फूड और स्वास्थ्य जांच लाउंज में मिलेट्स आधारित हेल्दी फूड, सामान्य स्वास्थ्य जांच (वजन, ब्लड प्रेशर), शुल्क आधारित एंबुलेंस सुविधा, मोबाइल-लैपटॉप चार्जिंग प्वाइंट, लाइव ट्रेन इंफॉर्मेशन डिस्प्ले और फ्री हाई-स्पीड वाई-फाई भी उपलब्ध रहेगा। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग बाथरूम व टॉयलेट की व्यवस्था की गई है। यात्रियों से कराया गया शुभारंभ यह सुविधा भारतीय रेलवे की नई और अभिनव गैर-किराया राजस्व योजना NINFRIS (न्यू, इनोवेटिव नॉन-फेयर रेवेन्यू आइडिया स्कीम) के तहत विकसित की गई है। इस अनूठी सुविधा का शुभारंभ रायपुर से बड़ोदरा जा रहे यात्री चंद्रकांत बलावंत और रायपुर से उज्जैन यात्रा कर रहीं ओजस्वी व आरुषि ने किया। शुल्क विवरण     वेटिंग लाउंज प्रवेश- 1 घंटे के लिए ₹30, 2 घंटे के लिए ₹60, 4 घंटे के लिए ₹80     योग और ध्यान क्षेत्र: ₹50 प्रति 30 मिनट     फिटनेस कॉर्नर: ₹50 प्रति 30 मिनट हेल्दी रिफ्रेशमेंट की बिक्री रेलवे प्रशासन द्वारा अनुमोदित सूची के अनुसार होगी, जो पूरी तरह FSSAI मानकों के अनुरूप रहेगी। अधिकारी रहे मौजूद इस अवसर पर रायपुर रेल मंडल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. के.पी. काशीपथी, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अवधेश कुमार त्रिवेदी, वरिष्ठ सामग्री प्रबंधक, मंडल वाणिज्य प्रबंधक राकेश सिंह, सहायक वाणिज्य प्रबंधक अविनाश कुमार आनंद सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

अयोध्या बायपास के लिए 8 हजार पेड़ों की कटाई पर NGT की रोक, भोपाल की सांसे अब नहीं थमेंगी

भोपाल   विकास बनाम पर्यावरण की जंग में हरियाली की जीत होती दिख रही है. भोपाल के अयोध्या बायपास रोड को 10 लेन बनाने के लिए प्रस्तावित पेड़ों की कटाई पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है. एनजीटी ने इस प्रोजेक्ट पर लगी रोक को बरकरार रखा है. इसके साथ ही एनजीटी ने इस मुद्दे को केवल भोपाल तक सीमित न रखते हुए पूरे देश में लागू होने वाली एक समान नीति बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है, जिससे विकास कार्यों की आड़ में पेड़ों का अंधाधुंध सफाया न हो. विकास के साथ पर्यावरण संतुलन जरूरी यह फैसला नितिन सक्सेना बनाम राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) प्रकरण में सुनाया गया. न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने कहा कि सड़क, पुल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर पूरे देश में एक समान और सख्त नीति होना आवश्यक है. इससे आर्थिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जा सकेगा. इसी के साथ इस प्रकरण को एनजीटी की प्रधान पीठ, नई दिल्ली स्थानांतरित करने के निर्देश भी दिए गए हैं. अयोध्या बायपास रोड के लिए कटने हैं हजारों पेड़ सड़कों के विस्तार और शहरों की बढ़ती जरूरतों के बीच पर्यावरण संरक्षण का सवाल अब राष्ट्रीय स्तर पर भी उठने लगा है. भोपाल के अयोध्या बायपास पर प्रस्तावित 10 लेन सड़क परियोजना के कारण हजारों पेड़ों की कटाई का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल तक पहुंचा, जहां कटाई पर स्टे बरकरार रखा गया है. एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसके नाम पर प्रकृति की बलि स्वीकार्य नहीं है. यह पेड़ नहीं भोपाल की सांसें हैं सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ताओं ने दलील दी कि ये पेड़ केवल लकड़ी नहीं, बल्कि भोपाल के नागरिकों की सांसों की सुरक्षा हैं. दूसरी ओर एनएचएआई ने परियोजना की आवश्यकता और समयबद्धता का हवाला दिया. इस बीच यह भी सामने आया कि पहले दिए गए स्थगन आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील को वापस ले लिया गया है. हालांकि, इस दौरान कोई आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, जिसके बाद एनजीटी ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग अपील का स्टेटस साफ नहीं होता, तब तक ट्रिब्यूनल इस मामले में आगे कोई सुनवाई नहीं करेगा और पहले से कटाई पर लगाई गई रोक बरकरार रहेगी. पूरे देश में मिसाल बनेगा ये फैसला बता दें की एनजीटी ने भोपाल में काटे जाने वाले 8 से 12 हजार पेड़ों को शहर के फेफड़े बताया. आसाराम तिराहा से करोंद होते हुए रत्नागिरी तिराहा तक प्रस्तावित 16 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए इतने ही पेड़ों को काटे जाने की योजना थी. एनजीटी ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को भी दोहराया, जिसके तहत किसी भी तरह की कटाई या छंटाई से पहले एनजीटी की समिति की अनुमति अनिवार्य है. शहर के पर्यावरणविदों का मानना है कि इस फैसले के साथ यह स्पष्ट संदेश गया है कि अब देश में विकास की राह हरियाली को कुचलकर नहीं, बल्कि उसे साथ लेकर ही तय होगी.

एमपी में घना कोहरा और शीतलहर, भोपाल-इंदौर ट्रेनें लेट, ग्वालियर में पारा 5 डिग्री तक लुढ़का

भोपाल  मध्यप्रदेश के उत्तरी हिस्से में सर्दी ने इस सीजन का सबसे सख्त रूप दिखाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार सुबह ग्वालियर, चंबल, सागर, रीवा और शहडोल संभाग के 17 जिलों में मध्यम से घना कोहरा छाया रहा। दृश्यता बेहद कम होने से दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने-जाने वाली करीब एक दर्जन ट्रेनें देरी से चल रही हैं। कोहरे के साथ-साथ ठंड ने भी रफ्तार पकड़ ली है। दतिया, रीवा समेत 7 जिलों में मौसम विभाग ने शीतलहर (कोल्ड वेव) का अलर्ट जारी किया है। हालात ऐसे हैं कि कई जगह दिन और रात के तापमान में फर्क लगभग खत्म हो गया है। ग्वालियर-दतिया में दिन भी रात जितना ठंडा गुरुवार को ग्वालियर और दतिया में दिन का तापमान 12 डिग्री से नीचे चला गया। यह इस सीजन में पहली बार हुआ, जब अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच मामूली अंतर दर्ज किया गया। ग्वालियर में पारा एक ही दिन में 7.8 डिग्री लुढ़ककर 10.4 डिग्री तक पहुंच गया, जो न्यूनतम तापमान से महज 4.3 डिग्री ज्यादा रहा।  गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात छतरपुर जिले का खजुराहो प्रदेश में सबसे ठंडा दर्ज किया गया, जहां न्यूनतम तापमान 3.4 डिग्री सेल्सियस रहा। दतिया में पारा 3.9 डिग्री, शिवपुरी में 4 डिग्री और राजगढ़ में 5 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 5.8 डिग्री, मंडला में 5.9 डिग्री, रीवा में 6 डिग्री, उमरिया में 6.4 डिग्री और सीधी व टीकमगढ़ में 6.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। इन जिलों में शीतलहर का असर मौसम विभाग के अनुसार दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, रीवा, मऊगंज और शहडोल में कोल्ड वेव का प्रभाव बना रहेगा। शहडोल में ‘कोल्ड डे’ की स्थिति भी दर्ज की गई है, यानी दिनभर ठंड का असर बरकरार रहेगा। मौसम विभाग का कहना है कि शनिवार को भी ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा और मऊगंज में कोहरा छाया रहेगा। इसके बाद मौसम साफ होने के संकेत हैं और अधिकतम-न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है। बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे ठंडा बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले गुरुवार को यहां दिन का तापमान 10.4 डिग्री रहा था। राजधानी भोपाल में रात का तापमान 8 डिग्री, इंदौर में 9.4 डिग्री, उज्जैन में 8.3 डिग्री और जबलपुर में 8.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल ठंड और कोहरे से राहत के आसार कम हैं। आने वाले दिनों में भी सुबह-शाम कोहरा छाए रहने और तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं होने की संभावना है, जिससे रेल और सड़क यातायात पर असर बना रह सकता है। मुरैना में आठवीं तक के बच्चों की आज और कल छुट्‌टी वहीं मुरैना में रात का न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पूरे जिले में घना कोहरा छाया हुआ है और कंपकंपाने वाली सर्दी लोगों को परेशान कर रही है। हालात को देखते हुए कलेक्टर ने 9 और 10 जनवरी तक कक्षा 1 से 8 तक के सभी स्कूलों की छुट्टियां बढ़ा दी हैं। खजुराहो सबसे ठंडा, कई शहर 10 डिग्री से नीचे प्रदेश में गुरुवार को छतरपुर का खजुराहो सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 3.2 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। रीवा में 4.1 डिग्री, दतिया में 4.2 डिग्री, नौगांव और शिवपुरी में 5 डिग्री, उमरिया में 5.4 डिग्री और पचमढ़ी में 5.8 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। अधिकतर शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे ही बना रहा।  रिकॉर्ड तोड़ सर्दी की राह पर जनवरी इस बार मध्यप्रदेश में सर्दी लगातार रिकॉर्ड बना रही है। नवंबर में 84 साल और दिसंबर में 25 साल का ठंड का रिकॉर्ड टूटा। जनवरी की शुरुआत भी उसी ट्रेंड पर चल रही है। भोपाल में ठंड ने 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार जनवरी में ‘माइनस जैसी’ ठंड महसूस की जा रही है, जिसमें घना कोहरा और शीतलहर दोनों साथ चल रहे हैं। जनवरी क्यों होती है सबसे सर्द? मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि जैसे मानसून में जुलाई-अगस्त सबसे अहम होते हैं, वैसे ही सर्दी के लिहाज से दिसंबर और जनवरी सबसे प्रभावी महीने हैं। इन दिनों उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा सक्रिय रहती हैं। पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) के चलते जनवरी में मावठा पड़ने की संभावना भी रहती है। पिछले साल कई जिलों में बारिश हुई थी, जबकि इस साल जनवरी के पहले दिन ही बादलों ने दस्तक दे दी थी।  इस बार कड़ाके की ठंड का दौर इस बार मध्यप्रदेश में नवंबर-दिसंबर की सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। नवंबर में 84 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी तो दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूटा। नवंबर-दिसंबर की तरह ही जनवरी में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इससे भोपाल में ठंड का 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। एक्सपर्ट की माने तो जनवरी में प्रदेश में माइनस वाली ठंड गिर चुकी है। अबकी बार भी तेज सर्दी, घना कोहरा छाने के साथ शीतलहर भी चल रही है। ठंड के लिए इसलिए खास जनवरी मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं। इसलिए टेम्प्रेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से जनवरी में मावठा भी गिरता है। पिछले साल कई जिलों में बारिश हुई थी। इस बार साल के पहले ही दिन बादल भी छाए रहे।

मध्य प्रदेश में खुद को सीएम का रिश्तेदार बताने वाले एसडीएम को हटाया, पंडितों से विवाद के कारण कार्रवाई

 नलखेड़ा मध्यप्रदेश में खुद को सीएम का रिश्तेदार बताकर आगर मालवा के नलखेड़ा में स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर के पंडितों से भिड़ना सुसनेर के एसडीएम को महंगा पड़ गया है। पंडितों के विरोध और आंदोलन के बाद कलेक्टर ने एक्शन लेते हुए सुसनेर एसडीएम को प्रभार से हटा दिया है। पंडितों ने आरोप लगाया था कि एसडीएम खुद को सीएम का रिश्तेदार बताते हुए उन्हें धमकाते हैं और अभद्र भाषा का प्रयोग भी करते हैं। इतना ही नहीं एसडीएम के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पंडितों ने मंदिर में अनुष्ठान और हवन बंद कर दिए थे। पंडितों ने एसडीएम के खिलाफ खोला मोर्चा मां बगलामुखी मंदिर के पंडितों ने सुसनेर एसडीएम सर्वेश यादव के खिलाफ गुरुवार को मोर्चा खोल दिया था। मंदिर पहुंचे एसडीएम का घेराव करते हुए पंडितों ने उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की थी और मंदिर में होने वाले अनुष्ठान और हवन अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए थे। विरोध प्रदर्शन करने वाले पंडितों ने आरोप लगाया था कि मंदिर समिति से बिना कोई बातचीत किए एसडीएम सर्वेश यादव रोजाना नए-नए नियम बना देते हैं। इतना ही नहीं लंबे समय से मंदिर में पूजा अर्चना करने वाले पंडितों को हटाने की धमकी भी देते हैं। अभद्र भाषा के इस्तेमाल का लगाया था आरोप पंडित एसोसिएशन अध्यक्ष देवेंद्र शास्त्री ने बताया एसडीएम स्वयं को मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बताकर दबाव बनाते हैं। पंडितों का कहना है कि मंदिर समिति को विश्वास में लिए बिना रोज नए-नए नियम लागू किए जा रहे हैं जिससे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। साथ ही बातचीत के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग भी किया जाता है। अभा ब्राह्मण समाज प्रदेशाध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्र ने मामले में कहा है कि ब्राह्मण समाज को लेकर जिस तरह से लगातार अधिकारियों द्वारा बयानबाजी की जा रही है इससे समाज बेहद व्यथित और आक्रोशित है। पंडितों ने मोर्चा खोलते हुए अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरु किया और हवन-अनुष्ठान बंद किए तो बात वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची। कुछ घंटों बाद ही कलेक्टर के निर्देश पर एडीएम ने मां बगलामुखी मंदिर के प्रभार से एसडीएम सर्वेश यादव को हटा दिया। एसडीएम से मंदिर समिति का प्रभार लेते हुए डिप्टी कलेक्टर कमल मंडलोई को सौंपा गया है। वहीं एसडीएम सर्वेश यादव ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार बताया है।

वर्ल्ड कप वेन्यू बदलने के लिए बांगलादेश ने ICC को भेजा दूसरा पत्र, सुरक्षा चिंताओं का किया हवाला

 नई दिल्ली बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने गुरुवार को आईसीसी को औपचारिक रूप से दूसरी चिट्ठी भेजी, जिसमें टी20 वर्ल्ड कप के लिए भारत की यात्रा को लेकर अपनी विशिष्ट सुरक्षा चिंताओं को स्पष्ट किया गया और साथ ही श्रीलंका में वेन्यू बदलने की अपनी मांग को दोहराया गया. वर्ल्ड कप की शुरुआत 7 फरवरी से होनी है और बांग्लादेश को भारत में चार मैच खेलने हैं (तीन कोलकाता में और एक मुंबई में). बीसीबी ने भारत यात्रा से इनकार कर दिया है, यह तब हुआ जब तेज गेंदबाज मुस्ताफिज़ुर रहमान को बीसीसीआई के निर्देश पर आईपीएल से रिलीज़ कर दिया गया. आईसीसी को भेजा दूसरा लेटर बीसीबी से जुड़े एक सूत्र ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर पीटीआई से कहा, 'खेल मंत्रालय के सलाहकार आसिफ़ नज़रुल के साथ चर्चा के बाद बीसीबी ने एक बार फिर आईसीसी को पत्र भेजा है. आईसीसी यह जानना चाहता था कि सुरक्षा को लेकर किन क्षेत्रों में चिंता है और बीसीबी ने उन्हें स्पष्ट किया है.' हालांकि, सूत्र ने पत्र के विवरण के बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया. यह घटनाक्रम बीसीबी और आईसीसी के बीच बांग्लादेश की भागीदारी को लेकर चल रही लगातार रस्साकशी के बीच सामने आया है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने अब तक इस मुद्दे पर संयमित चुप्पी बनाए रखी है और ढाका स्थित बोर्ड द्वारा जताई जा रही सुरक्षा आशंकाओं की सटीक प्रकृति पर स्पष्टता मांगी है. दो धड़े में बंटा बीसीबी यह भी समझा जाता है कि इस मुद्दे पर खुद बीसीबी के भीतर मतभेद हैं. बोर्ड का एक धड़ा इस मामले में आसिफ़ नज़रुल के सख्त रुख का समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा समूह आईसीसी और भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखने के पक्ष में है. दूसरा धड़ा भारत में बांग्लादेश टीम के पूरे प्रवास के दौरान कड़े और अभेद्य सुरक्षा इंतजामों की आवश्यकता पर जोर दे रहा है. नज़रुल, जो अतीत में भारत की आलोचना को लेकर मुखर रहे हैं, इस मुद्दे पर अधिक कठोर रुख अपनाने के पक्षधर बताए जा रहे हैं. यह बीसीबी और बीसीसीआई के बीच पारंपरिक रूप से सौहार्दपूर्ण कार्य संबंधों से एक स्पष्ट अलगाव माना जा रहा है. मुस्ताफिज़ुर को आईपीएल से रिलीज़ किया जाना बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों की घटनाओं के बाद सामने आया था. फिलहाल आईसीसी की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि वह बांग्लादेश के कोलकाता और मुंबई में होने वाले मैचों को कोलंबो शिफ्ट करेगा. हालांकि, बीसीबी ने यह दावा किया है कि आईसीसी ने उसकी सुरक्षा चिंताओं का आकलन करने में उसके साथ मिलकर काम करने की इच्छा दिखाई है.

इंदौर में अजय बनकर सलमान ने की इंस्टाग्राम दोस्ती, शादी का झांसा देकर रेप और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव

इंदौर   इंदौर के तिलक नगर थाना क्षेत्र में लव जिहाद का एक मामला सामने आया है. यूपी के बरेली निवासी एक युवती ने आरोप लगाया है कि एक युवक ने धोखे से पहचान छिपाकर उसके साथ जबरन शारीरिक शोषण किया और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया. युवती की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. तिलक नगर थाने से मिली जानकारी के अनुसार पीड़िता इंदौर में रहकर एक प्राइवेट जॉब करती है. उसकी इंस्टाग्राम पर आकाश नाम के युवक से पहचान हुई थी. बातचीत बढ़ने के बाद मुलाकातें होने लगीं और पीड़िता का आरोप है कि युवक ने दबाव बनाकर कई बार जबरन शारीरिक संबंध बनाए. बाद में पता चला कि युवक का असली नाम सलमान है, जिससे वह खुद को ठगा हुआ महसूस करने लगी. सख्त कार्रवाई की मांग इसके बाद पीड़िता ने बजरंगदल के कार्यकर्ताओं से संपर्क किया. संगठन के जिला संयोजक लक्की रघुवंशी ने बताया कि युवती की शिकायत पर कार्यकर्ताओं ने आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले किया. उनका कहना है कि युवती के साथ छल किया गया, उसकी भावनाओं और विश्वास का दुरुपयोग हुआ है, इसलिए आरोपी पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है. सोनीपत में खुला राज धोखे का खुलासा तब हुआ जब आरोपी पीड़िता को हरियाणा के सोनीपत ले गया। वहां आरोपी के भाई के जरिए महिला को पता चला कि जिसे वह अजय समझ रही है, वह सलमान खान है और तीन बच्चों का पिता है। आरोपी ने उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। जब महिला ने बात करना बंद किया तो आरोपी फर्जी आइडी बनाकर फोटो वायरल करने की धमकी देने लगा। होटल में किया गलत काम पीड़िता को उसने 1 सितंबर 2025 को स्कीम-140 स्थित एक होटल में बुलाया और दुष्कर्म किया। पीड़िता ने हिंदू संगठन के पदाधिकारियों आपबीती सुनाई, जिसके बाद मामला थाने पहुंचा। टीआइ मनीष लोधा के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। युवती को दी धमकी  बाइट में लक्की रघुवंशी ने बताया कि युवती ने रात में संपर्क कर शिकायत की थी कि एक युवक उसे परेशान कर रहा है. प्रारंभिक बातचीत में पता चला कि युवती एक प्राइवेट अस्पताल में काम करती है और पिछले दो साल से आरोपी उसे परेशान कर रहा था. आरोप है कि आरोपी ने शारीरिक शोषण किया, पैसे लिए और फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी दी. जांच में आरोपी के मोबाइल से कई फर्जी आईडी भी सामने आई हैं. युवती का शोषण किया बताया गया कि आरोपी ने इंस्टाग्राम पर अजय यादव नाम से फर्जी आईडी बनाकर युवती से दोस्ती की थी. बाद में जब युवती उसके प्रभाव में आ गई, तब उसने अपना असली नाम सलमान बताया और खुद को बरेली का निवासी बताया. इंस्टाग्राम के माध्यम से शुरू हुई इस दोस्ती के बाद कथित तौर पर युवती का शोषण किया गया. जांच में जुटी पुलिस वहीं तिलक नगर थाना प्रभारी मनीष लोधा ने बताया कि युवती की शिकायत के आधार पर आरोपी सलमान के खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है. युवती का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उसके बयान दर्ज कर लिए गए हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी. 

हाईकोर्ट ने यासीन मछली को नहीं दी जमानत, विधानसभा में फर्जी पास लगाने का मामला

भोपाल /जबलपुर  भोपाल के गैंगस्टर यासीन अहमद मछली को फर्जी विधानसभा एंट्री पास मामले में हाईकोर्ट से झटका लगा है. उच्च न्यायालय ने अपराध की गंभीरता तथा अपीलकर्ता के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए उसे जमानत का लाभ देने से इंकार कर दिया है. हाईकोर्ट जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ये फैसला सुनाया. भोपाल के गैंगस्टर यासीम अहमद मछली की तरफ से निजी वाहन में फर्जी विधानसभा एंट्री पास का उपयोग किये जाने के मामले में अरेरा थाने में धारा 318(4), 319(2), 336(3) और 340(2) के तहत मुकदमें में जमानत के लिए आवेदन किया था. अपीलकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि क्राइम ब्रांच ने उसे 23 जुलाई 2025 को एक अन्य अपराध में हिरासत में लिया था. इस अपराध में वह 1 अगस्त 2025 से अभिरक्षा में है. दरअसल भोपाल पुलिस की गिरफ्तारी के बाद आरोपी ने जमानत याचिका हाईकोर्ट में दायर की थी। आरोपी मछली विधानसभा का फर्जी पत्रकार पार्किंग पास निजी वाहन में इस्तेमाल करता था, जिस पर भोपाल पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने कहा कि यह मामला सीधे विधानसभा की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। भोपाल के अरेरा हिल्स थाना क्षेत्र में दर्ज अपराध क्रमांक 131/2025 से संबंधित है। अभियोजन के मुताबिक, 25 जुलाई 2025 को प्राप्त शिकायत के बाद जांच शुरू की गई थी। जांच में सामने आया कि दिसंबर 2024 के विधानसभा सत्र के लिए पत्रकार गौरव शर्मा के नाम से जारी पार्किंग पास क्रमांक 433 को आरोपी यासीन अहमद उर्फ मछली ने कथित रूप से छेड़छाड़ कर अपनी निजी कार (एमपी 04 जेड एल 0999) में लगा लिया। जबकि यह पास किसी अन्य वाहन के लिए वैध रूप से जारी किया गया था। अपीलकर्ता ने कहा, विधानसभा में एंट्री के लिए नहीं किया इस पास का इस्तेमाल शिकायतकर्ता के अनुसार अगस्त 2024 तक उसने अपनी गाड़ी पर इस पास का इस्तेमाल किया था. अपीलकर्ता ने विधानसभा में एंट्री के लिए इस पास का इस्तेमाल नहीं किया है. अपीलकर्ता का अपराधिक रिकॉर्ड है परंतु वह अधिकांश मामलों में दोषमुक्त हो गया है. शासन की तरफ से जमानत अर्जी का विरोध करते हुए बताया गया कि विधानसभा ऑफिस ने ब्रेकिंग न्यूज के एडिटर गौरव शर्मा के वाहन नंबर एमपी-04-टीबी-3950 लिए “जर्नलिस्ट” विधानसभा पार्किंग पास नंबर 433 जारी किया था. अपीलकर्ता फर्जी पास का उपयोग अपने वाहन क्रमांक एमपी 04-डेजएल 0999 में कर रहा था. आवेदक एक क्रिमिनल हिस्ट्रीशीटर है और वह पास वाली गाड़ी का इस्तेमाल गैर-कानूनी कामों के लिए कर रहा था. कोर्ट ने कहा, जुर्म की गंभीरता और आवेदक के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए नहीं दी जा सकती जमानत आवेदक ने जाली पास बनाकर अपनी गाड़ी पर लगाया है, जिसका इस्तेमाल सिर्फ विधानसभा में एंट्री के लिए किया जाता था. यह विधानसभा के विधायकों और मंत्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा था. एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि जुर्म की गंभीरता और आवेदक के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता है. शासन की तरफ से अधिवक्ता सीएम तिवारी ने पैरवी की.