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दलित महिला हत्याकांड: मेरठ में सड़क पर उतरे परिजन, 5 घंटे से प्रदर्शन, बुलडोजर एक्शन की मांग

मेरठ यूपी के मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित महिला की हत्या और बेटी के अपहरण के मामले के विरोध में शुक्रवार को पांच घंटे बीत जाने के बाद भी स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आ सका है। मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा जारी है। पीड़ित परिजन आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, उनके घरों पर बुलडोजर चलाने और कड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। परिजनों का कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं की जातीं, तब तक वे सुनीता का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। अधिकारी उन्हें समझा रहे है, लेकिन वे उनकी किसी बात की मानने के लिए राजी नहीं है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद है। वहीं सपा की महिला नेता ने एसपी को चूड़ियां सौंपकर विरोध जताया है।   उधर, अधिकारियों ने समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान, आजाद समाज पार्टी के जिला अध्यक्ष व कार्यकर्ताओं सहित अन्य नेताओं को गांव में प्रवेश की अनुमति दे दी। सभी नेता पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर उनसे मुलाकात कर रहे हैं और उन्हें न्याय का भरोसा दिला रहे हैं। गांव में तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी परिजनों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई सहमति नहीं बन सकी थी।प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि परिजन तत्काल कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। यूपी के मेरठ में दलित युवती का अपहरण के बाद उसकी मां की हत्या के मामले बवाल बढ़ गया है। पांच घंटे से हंगामा जारी है। संजीव बालियान पहुंचे कपसाड़ कपसाड़ गांव में युवती के अपहरण व विरोध पर उसकी मां की हत्या को लेकर बवाल मचा हुआ है। सभी दलों के नेता पीड़ितो का दर्द बांटने गांव पहुंच रहे है। भाजपा की तरफ से शुक्रवार दोपहर में पूर्व सांसद संजीव बालियान गांव पहुंचे। उन्होंने पीड़ित पक्ष को कार्यवाही का भरोसा दिलाया। सपा नेत्री ने एसपी को सौंपी चूड़ियां कपसाड़ पहुंची सपा नेत्री नेहा गौड़ ने पुलिस प्रशासन को आड़े हाथ लिया। उन्होंने एसपी देहात अभिजीत सिंह को चूड़ियां भेट की। एसपी चूड़ियां साथ लेकर चले गए।  

शिकायत अनसुनी पड़ी तो युवक ने उठाया अनोखा कदम, पुलिस की बाइक चुराकर भागा

केरल केरल में शिकायत दर्ज कराने तिरुवनंतपुरम नगर पुलिस कमिश्नर के कार्यालय में आया एक व्यक्ति अधिकारी की मोटरसाइकिल लेकर फरार हो गया। सीनियर पुलिस ऑफिसर ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आरोपी की पहचान अमल सुरेश के रूप में हुई है, जिसे एक अधिकारी की बाइक चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उक्त अधिकारी ने गुरुवार को ड्यूटी पर आने से पहले अपनी मोटरसाइकल आयुक्त कार्यालय में खड़ी की थी।   पुलिस के अनुसार, यह घटना दोपहर करीब 1 बजे हुई। उन्होंने बताया कि जब अधिकारी कार्यालय पहुंचे और अपनी मोटरसाइकिल खड़ी की। जल्दबाजी में वह अपना बैग वाहन पर ही भूल गए, जिसमें चाबी रखी हुई थी। जब अधिकारी दोपहर करीब 3 बजे वापस लौटे, तो बाइक गायब थी। पुलिस ने बताया कि परिसर के सीसीटीवी फुटेज में सुरेश को वाहन ले जाते हुए देखा गया। इसके बाद, छावनी पुलिस ने शिकायत के आधार पर इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) के तहत चोरी का मामला दर्ज किया। पूछताछ में आरोपी ने क्या बताया पुलिस के अनुसार, चोरी के मामलों का पुराना रिकॉर्ड रखने वाला सुरेश अपने पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने आयुक्त कार्यालय आया था। पुलिस ने बताया कि उसे बाद में उसी रात मनावीयम वीधि से गिरफ्तार किया गया और चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की गई। पूछताछ के दौरान, सुरेश ने पुलिस को बताया कि उसने बाइक ले जाने का फैसला इसलिए किया क्योंकि कार्यालय में उसकी शिकायत स्वीकार नहीं की गई थी। पुलिस ने कहा कि रिमांड की कार्यवाही के तहत आरोपी को अदालत में पेश किया जाएगा।

सुबह की ठंड नहीं बनी बाधा, सीएम नीतीश ने जेपी गंगापथ पहुंचकर विकास कार्यों की समीक्षा की

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को अधिकारियों को जे.पी पार्क को लोगों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए इसे विकसित कराये जाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज जे.पी. गंगापथ पर कराए जा रहे लैंड स्केपिंग, पौधा रोपण एवं सौंदर्गीकरण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विकसित किए जा रहे पार्क का निरीक्षण किया। निरीक्षण के क्रम में अधिकारियों ने विकसित किए जा रहे पार्क के संबंध में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों को दिए ये बड़े  निर्देश मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि यह पार्क गंगा नदी के किनारे स्थित है, इसलिए लोगों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए इसे विकसित कराएं। यहां काफी अच्छा काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि जे.पी.गंगा पथ पर पार्क विकसित होने से हरियाली बढ़ेगी साथ ही यहां आनेवाले लोग अपने परिवार के साथ कुछ समय व्यतीत कर सकेंगे। उन्होंने अधिकारियो को निर्देश दिया कि इस काम को जल्द पूर्ण कराएं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस दौरान कहा कि पौधारोपण होने से यह क्षेत्र हरा-भरा दिखेगा। उन्होंने कहा कि जे.पी. गंगापथ एक अछ्वुत परियोजना है जिसका सौंदर्याकरण बेहतर ढंग से कराया जा रहा है। आनेवाले समय में यह क्षेत्र लोगों के आकर्षण का केन्द्र बनेगा। जे.पी. गंगा पथ पर लोगों के लिए सड़क सुरक्षा और निर्बाध आवागमन भी जरूरी है, इसका पूरा ध्यान रखें। निरीक्षण के दौरान राज्यसभा सांसद और जनता दल यूनाईटेड ( जदयू) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह, पटना प्रमंडल के आयुक्त अनिमेश परासर, पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम एवं वरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

बंदूक नहीं, संवाद और विकास ही स्थायी समाधान: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। दंतेवाड़ा जिले में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के अंतर्गत 36 इनामी सहित कुल 63 माओवादियों— जिनमें 18 महिलाएं और 45 पुरुष शामिल हैं — ने हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया है। यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि बस्तर के भविष्य के लिए एक निर्णायक परिवर्तन है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी की स्पष्ट, बहुआयामी सुरक्षा एवं विकास रणनीति का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह घटना प्रमाण है कि “बंदूक नहीं, संवाद और विकास ही स्थायी समाधान हैं।” मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की संवेदनशील पुनर्वास नीति, सटीक सुरक्षा रणनीति और सुशासन आधारित प्रशासनिक दृष्टिकोण के कारण नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। माओवादी नेटवर्क का प्रभावी विघटन हो रहा है और बस्तर के सुदूर अंचलों में अब तेज़ी से सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को सरकार द्वारा सम्मानजनक पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण, आजीविका और सामाजिक पुनर्स्थापन की समुचित व्यवस्था दी जाएगी ताकि वे आत्मनिर्भर नागरिक बनकर समाज की मुख्यधारा में स्थायी रूप से स्थापित हो सकें। उन्होंने कहा कि बस्तर अब भय नहीं, भविष्य की भूमि बन रहा है — जहां शांति, सुशासन और विकास मिलकर एक स्वर्णिम कल की नींव रख रहे हैं।

बांग्लादेश की बुनियाद में भारत की भूमिका, फिर भी यूनुस सरकार के तेवरों पर सवाल

नई दिल्ली भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में आए तनाव के बीच यूनुस सरकार के रवैए से विशेषज्ञ भी हैरान हैं। भारत के पूर्व राजनयिक सुरेंद्र कुमार ने एक बयान में कहा है कि भारत के प्रति बांग्लादेश का रवैया बहुत निराशाजनक है। उन्होंने कहा है कि पड़ोसी देश भारत के बिना अस्तित्व में ही नहीं होता लेकिन मौजूदा अंतरिम सरकार इस बात को भूल चुकी है।   पूर्व राजनयिक ने कहा, "यह बहुत निराशाजनक और दुखद है। बांग्लादेश जिसके लिए भारत ने इतना कुछ किया। भारत के बिना बांग्लादेश नहीं था। यहां तक ​​कि खालिदा जिया के बेटे ने भी रिकॉर्ड पर कहा है कि 1971 में जो हुआ उसे हम नहीं भूल सकते। लेकिन मौजूदा सरकार के मुख्य सलाहकार का अपना तरीका है।” उन्होंने कहा कि इस बर्ताव के बाद भी भारत ने अपना धैर्य नहीं खोया और शांत रहा है जो काबिलेतारीफ है। ‘पाक के जख्मों को कैसे भूला दिया?’ सुरेन्द्र कुमार ने आश्चर्य जताया कि बांग्लादेश पाक के दिए जख्मों को इतनी जल्दी कैसे भूल गया। उन्होंने कहा, "अब बांग्लादेश पाकिस्तान के साथ इस तरह के संबंध बना रहा है। यह वही पाकिस्तान है जिसकी सेना ने जनरल जिया के नेतृत्व में लगभग 30 लाख लोगों को मार डाला, 3 लाख महिलाओं का बलात्कार किया…। वे समझदारी की बात नहीं कर रहे हैं।” बांग्लादेश को किया आगाह पूर्व राजनयिक ने आगे बांग्लादेश को आगाह भी किया। उन्होंने कहा है कि अगर बांग्लादेश प्रगति करना चाहता है तो उसे भारत के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने होंगे। उन्होंने कहा, “आप भारत के साथ अच्छे रिश्ते रखना चाहते हैं, लेकिन यह अच्छे रिश्तों का तरीका नहीं है। हम अच्छे रिश्ते चाहते हैं। आप खुद देखिए। यहां से बिजली जा रही है। हमने बॉर्डर एग्रीमेंट साइन किया है, और पानी शेयर करने की व्यवस्था भी चल रही है। लेकिन इस तरह की कार्रवाई लंबे समय में बांग्लादेश के हित में नहीं है।” उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि जब चुनाव होंगे, तब कोई भी सरकार सत्ता में आए, उसे एहसास होगा कि उनका लॉन्ग-टर्म हित भारत के साथ अच्छे रिश्तों में है।" उन्होंने इसके लिए मालदीव का हवाला भी दिया।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय गोवा में आयोजित आदि लोकोत्सव पर्व–2025 में हुए शामिल

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज गोवा के आदर्श ग्राम अमोन, पोंगुइनिम, गोवा में आयोजित 'आदि लोकोत्सव' पर्व–2025 में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने लोकोत्सव को संबोधित करते हुए सभी प्रतिभागियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में गोवा के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. रमेश तावड़कर उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 'आदि लोकोत्सव' के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि यह लोकोत्सव देश की आदिम संस्कृति से जुड़ने का एक जीवंत उत्सव है, जो भारत की लोक-सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत गांवों का देश है और गांव हमारी आत्मा हैं। गांवों की संस्कृति ही देश की संस्कृति है, जिसे लोकगीतों, लोकनृत्यों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और परंपराओं के माध्यम से जीवंत रखना अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गोवा सरकार पिछले 25 वर्षों से इस सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने का कार्य कर रही है, जो प्रशंसनीय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में आदि लोकोत्सव और भी भव्य तथा व्यापक स्वरूप में आयोजित होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भगवान बिरसा मुंडा को नमन करते हुए कहा कि जनजातीय इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। भगवान बिरसा मुंडा ने महज 25 वर्ष की अल्पायु में अंग्रेजों को चुनौती दी और अपने अदम्य साहस से इतिहास रच दिया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के अनेक महापुरुष ऐसे हैं, जिन्हें देश के इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय सेनानियों को देशभर में सम्मान और पहचान दिलाने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री साय ने रानी दुर्गावती के बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि वे जनजातीय समाज की महान वीरांगना थीं। प्रधानमंत्री मोदी ने उनके गौरव को स्थायी स्वरूप देते हुए मध्यप्रदेश के जबलपुर में एक भव्य संग्रहालय का निर्माण कराया है, जो उनके शौर्य और बलिदान की अमिट स्मृति है। मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ के जनजातीय सेनानियों के योगदान को विशेष रूप से स्मरण किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लगभग 32 प्रतिशत जनजातीय आबादी निवास करती है और यहां के 14 जनजातीय महापुरुषों ने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। उन्होंने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह, वीर गुण्डाधुर, गेंद सिंह जैसे महापुरुषों ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष कर देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान दिया। शहीद वीर नारायण सिंह को अंग्रेजों ने राजधानी रायपुर के जय स्तंभ चौक में फांसी दी थी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन जनजातीय नायकों की स्मृति को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक उनके बलिदान की गाथा पहुंचाने के उद्देश्य से नया रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह डिजिटल संग्रहालय का निर्माण किया गया है। यह देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है, जिसका उद्घाटन छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करकमलों से हुआ। मुख्यमंत्री साय ने आदि लोकोत्सव में उपस्थित सभी लोगों को छत्तीसगढ़ आकर इस डिजिटल संग्रहालय को देखने का आमंत्रण भी दिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनजातीय समाज के लिए इससे बड़ा गौरव क्या हो सकता है कि आज देश के सर्वोच्च पद महामहिम राष्ट्रपति के रूप में भी जनजातीय समाज की बेटी सुशोभित हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में आदिवासी समाज का मुख्यमंत्री बनना प्रधानमंत्री मोदी की समावेशी सोच का प्रमाण है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनमन योजना जैसी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार जनजातीय समाज के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने श्रद्धेय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के योगदानों का स्मरण किया और कहा कि उनके कार्यकाल में ही पहली बार देश में आदिम जाति कल्याण मंत्रालय का गठन हुआ, जिसके माध्यम से आज 12 करोड़ से अधिक जनजातीय नागरिकों के विकास के लिए बड़े पैमाने पर बजट और योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल में उन्हें उनके साथ कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला, जिसे वे अपना सौभाग्य मानते हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान पहले नक्सल प्रभावित राज्य के रूप में होती थी, लेकिन आज वह तेजी से बदल रही है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और राज्य अब शांति, विकास और निवेश के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। जिन क्षेत्रों में पहले निवेश नहीं आते थे, वहां अब उद्योग आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि नई औद्योगिक नीति के तहत अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव छत्तीसगढ़ को प्राप्त हो चुके हैं, जो राज्य के आर्थिक भविष्य की नई दिशा तय कर रहे हैं।  

योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद जारी की गई जीसीसी की एसओपी

जीसीसी इकाइयों को भूमि पर मिलेगी फ्रंट-एंड सब्सिडी पूर्वांचल और बुंदेलखंड में 50% तक भूमि सब्सिडी का प्रावधान गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में 30%, पश्चिमांचल–मध्यांचल में 40% सब्सिडी किराये या को-वर्किंग स्पेस पर नहीं मिलेगी कोई सब्सिडी समय पर परियोजना पूरी न होने पर वसूली जाएगी 12% ब्याज के साथ सब्सिडी की राशि लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम आउठाया है। इसके तहत पात्र इकाइयों को भूमि खरीद पर फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी दी जाएगी। यह व्यवस्था हाल ही में कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई एसओपी में शामिल की गई है। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग दर पर सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। पूर्वांचल और बुंदेलखंड में निवेश को प्रोत्साहन योगी सरकार की नीति के अनुसार गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद जनपदों में स्थापित होने वाली पात्र जीसीसी इकाइयों को 30 प्रतिशत भूमि सब्सिडी मिलेगी। पश्चिमांचल (गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद को छोड़कर) तथा मध्यांचल क्षेत्र में यह सब्सिडी 40 प्रतिशत होगी। वहीं पूर्वांचल और बुंदेलखंड में निवेश को और प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से 50 प्रतिशत तक भूमि सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है। इससे इन क्षेत्रों में नए निवेश और रोजगार के अवसरों में तेजी आने की उम्मीद है। सरकारी भूमि पर इकाई की स्थापना को प्राथमिकता यह सब्सिडी केवल उन्हीं इकाइयों को मिलेगी, जो राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण, विकास प्राधिकरण, शहरी निकायों या किसी अन्य सरकारी एजेंसी से भूमि प्राप्त करेंगी। इस व्यवस्था का स्पष्ट उद्देश्य सरकारी भूमि के माध्यम से औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है। यदि कोई इकाई किराये के परिसर या को-वर्किंग स्पेस में कार्य करेगी तो ऐसी परियोजनाओं को भूमि सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा। निर्धारित समय सीमा में प्रोजेक्ट पूरा करने पर जोर सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सब्सिडी लेने के बाद परियोजना निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करनी होगी। पात्र इकाइयों को दी गई भूमि निर्धारित अवधि तक या वाणिज्यिक संचालन शुरू होने तक संबंधित सरकारी निकाय के पक्ष में मॉर्टगेज रहेगी। यदि समयसीमा में परियोजना पूरी नहीं होती है तो दी गई भूमि सब्सिडी की राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस वसूल की जा सकती है। सब्सिडी का व्यय औद्योगिक विकास विभाग द्वारा वहन किया जाएगा। जीसीसी इकाइयों की स्थापना में आएगी तेजी सरकार का मानना है कि इस प्रोत्साहन नीति से प्रदेश में जीसीसी इकाइयों की स्थापना तेज होगी, आईटी और सेवा आधारित उद्योगों में विस्तार होगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। नीति में क्षेत्रवार सब्सिडी दरें तय कर पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में अधिक निवेश आकर्षित करने पर विशेष जोर दिया गया है।

2026 का सत्ता योग: ग्रहों के अनुसार कौन बनेगा राजा और कौन मंत्री

अंग्रेजी कैलेंडर में नया साल 1 जनवरी से आरंभ होता है, जबकि सनातन परंपरा में नववर्ष की गणना अलग विधि से की जाती है। हिंदू धर्म के अनुसार, नवसंवत्सर की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से मानी जाती है। वर्ष 2026 में हिंदू नववर्ष का आरंभ गुरुवार, 19 मार्च से होगा। इस दिन से विक्रम संवत 2083 की शुरुआत होगी, जिसे रौद्र संवत्सर कहा गया है। इस बार का नववर्ष कई मायनों में खास रहने वाला है क्योंकि यह सामान्य 12 महीनों का नहीं बल्कि 13 महीनों का होगा। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ मास दो बार आएगा, जिस कारण इसे अधिकमास वाला वर्ष भी कहा जा रहा है। हर साल कैसे तय होते हैं राजा और मंत्री? ज्योतिष शास्त्र में हिंदू नववर्ष के राजा और मंत्री का विशेष महत्व होता है। ग्रहों की स्थिति और पंचांग की गणना के आधार पर यह निर्धारित किया जाता है कि किस ग्रह को राजा और किसे मंत्री का पद मिलेगा। ये दोनों ग्रह पूरे वर्ष की दिशा तय करते हैं और इनका असर राजनीति, अर्थव्यवस्था, मौसम, सामाजिक जीवन और वैश्विक परिस्थितियों पर देखा जाता है। 2026 में ग्रहों की चाल क्या संकेत दे रही है ? ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, वर्ष 2026 को बदलावों से भरा साल माना जा रहा है। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार, यह वर्ष कई बड़े परिवर्तन लेकर आ सकता है। इस साल गुरु ग्रह राजा और मंगल ग्रह मंत्री की भूमिका में रहेंगे। गुरु के प्रभाव से धार्मिक गतिविधियों, आध्यात्मिक आयोजनों और सामाजिक सुधारों को बल मिलेगा, वहीं मंगल के प्रभाव के कारण वैश्विक स्तर पर तनाव, संघर्ष और अस्थिरता की आशंका भी बनी रहेगी। गुरु के राजा बनने से क्या होगा असर ? गुरु को ज्ञान, धर्म और नीति का कारक माना जाता है। उनके राजा बनने से वर्ष 2026 में आध्यात्मिक सोच मजबूत होगी। शिक्षा, धार्मिक गतिविधियों और तीर्थ यात्राओं में वृद्धि देखने को मिल सकती है। समाज में न्याय और नैतिक मूल्यों को लेकर जागरूकता बढ़ेगी। आर्थिक क्षेत्र में प्रगति भले ही धीमी रहे, लेकिन स्थिरता बनी रहने की संभावना है। गुरु का प्रभाव मंगल की उग्रता को काफी हद तक संतुलित करेगा, जिससे हालात पूरी तरह बिगड़ने से बच सकते हैं। मंगल के मंत्री बनने से बढ़ेगी हलचल मंगल अग्नि तत्व का ग्रह है, जो साहस, ऊर्जा और आक्रामकता का प्रतीक माना जाता है। मंत्री पद पर मंगल के होने से वर्ष 2026 में राजनीतिक उथल-पुथल, सत्ता परिवर्तन और बड़े फैसलों का दौर देखने को मिल सकता है। देशों के बीच तनाव, युद्ध और संघर्ष की संभावनाएं बनी रहेंगी। इसके अलावा, सेना, सुरक्षा, ऊर्जा और अग्नि से जुड़े क्षेत्रों में तेजी आ सकती है। मौसम में अत्यधिक गर्मी, सूखा और प्राकृतिक असंतुलन भी देखने को मिल सकता है। दुनिया के कई हिस्सों में अचानक घटनाएं और अप्रत्याशित बदलाव संभव हैं।  

चिकनकारी की कहानी कहने वाली लखनऊ की फिल्म ‘अंजुमन’ का राष्ट्रीय संरक्षण

  लखनऊ प्रसिद्ध फिल्मकार मुज़फ़्फ़र अली ने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान देते हुए अपनी पुरस्कार-विजेता हिंदी फिल्म अंजुमन (1986) की दुर्लभ 35 मिमी रिलीज़ प्रिंट नेशनल फ़िल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) – नेशनल फ़िल्म आर्काइव ऑफ़ इंडिया (NFAI) को दान की है। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में श्री मुज़फ़्फ़र अली ने यह प्रिंट NFDC के प्रबंध निदेशक श्री प्रकाश मगदूम को औपचारिक रूप से सौंपी। फिल्म अंजुमन का उत्तर प्रदेश, विशेषकर लखनऊ से गहरा सांस्कृतिक संबंध है। फिल्म की अधिकांश शूटिंग पुराने लखनऊ में की गई थी और यह शहर की तहज़ीब, नफ़ासत और पारंपरिक हस्तशिल्प परंपरा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। यह फिल्म लखनऊ की प्रसिद्ध चिकनकारी कारीगरी से जुड़ी महिलाओं के जीवन को संवेदनशीलता के साथ चित्रित करती है तथा उनकी उत्कृष्ट कला के बावजूद उन्हें झेलनी पड़ने वाली सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को उजागर करती है। वर्ष 1986 में अंजुमन इंडियन पैनोरमा की आधिकारिक चयनित फिल्मों में शामिल रही। इसके साथ ही फिल्म को वैंकूवर फ़िल्म फ़ेस्टिवल और तेहरान फ़िल्म फ़ेस्टिवल जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रदर्शित किया गया। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय सराहना के बावजूद फिल्म को व्यावसायिक रूप से सिनेमाघरों में प्रदर्शित नहीं किया जा सका। इस अवसर पर श्री मुज़फ़्फ़र अली ने कहा कि राष्ट्रीय फ़िल्म विरासत मिशन के अंतर्गत NFDC–NFAI द्वारा किया जा रहा संरक्षण कार्य फ़िल्म जगत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सेल्युलॉइड माध्यम अत्यंत नाज़ुक होता है और समय के साथ रंगों व छवियों का नष्ट होना अत्यंत पीड़ादायक है। उनके अनुसार, फ़िल्म संरक्षण का यह कार्य व्यवसाय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक सेतु का निर्माण है, जिसे केवल राष्ट्र की व्यापक दृष्टि से ही संभव बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अंजुमन जैसी फिल्म, जो लखनऊ और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा को दर्शाती है, उसका सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना आवश्यक है। NFDC के प्रबंध निदेशक श्री प्रकाश मगदूम ने कहा कि देश की सिनेमाई विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना अत्यंत आवश्यक है। भारत सरकार का राष्ट्रीय फ़िल्म विरासत मिशन, जिसे NFDC–NFAI द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है, इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने अंजुमन की प्रति दान करने के लिए श्री मुज़फ़्फ़र अली का आभार व्यक्त करते हुए फ़िल्म उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों से अपील की कि वे भी फिल्मों और फ़िल्म से संबंधित सामग्री को संरक्षण हेतु आगे आएँ। उल्लेखनीय है कि फिल्म अंजुमन भारतीय सिनेमा में कई कलात्मक उपलब्धियों के लिए जानी जाती है। फिल्म की मुख्य अभिनेत्री शबाना आज़मी ने संगीतकार ख़य्याम के निर्देशन में अपने स्वयं के प्लेबैक गीत गाए थे, जिनके बोल शायर शाहरीयार और दिवंगत फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने लिखे थे। इस प्रकार, अंजुमन न केवल एक महत्वपूर्ण सिनेमाई कृति है, बल्कि उत्तर प्रदेश—विशेषकर लखनऊ—की सांस्कृतिक, सामाजिक और कलात्मक विरासत का एक अमूल्य दस्तावेज़ भी है।

राज्यपाल रमेन डेका ने प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी का किया शुभारंभ

  युवाओं से राष्ट्र निर्माण में योगदान का आह्वान रायपुर,  राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में जिला मुख्यालय बालोद के समीपस्थ ग्राम दुधली में प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी का आज भव्य शुभारंभ हुआ। राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि जंबूरी केवल एक शिविर ही नहीं बल्कि एकता, विविधता, भाईचारा और साझा उद्देश्यों का उत्सव है। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल जैन, मुख्य राज्य आयुक्त इंदरजीत सिंह खालसा, राष्ट्रीय व राज्य स्तर के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में देश के विभिन्न राज्यों से आए रोवर-रेंजर उपस्थित थे। राज्यपाल डेका एवं अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर एवं आसमान में गुब्बारा छोड़कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। समारोह में राज्यपाल एवं अतिथियों द्वारा जंबूरी पत्रिका एवं नए बैज का विमोचन भी किया गया। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने इस अवसर पर कहा कि स्काउट-गाइड युवाओं को नेतृत्व कौशल, अनुशासन और सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे समाज के लिए कम से कम एक सकारात्मक कार्य अवश्य करें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। देश में पहली बार आयोजित हो रही यह राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी पूरे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि स्काउट-गाइड युवाओं को जीवन मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक दायित्वों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि रोवर-रेंजर देश के वे युवा हैं, जो समाज, राष्ट्र और विश्व के लिए कुछ अच्छा करने का जज्बा रखते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए इस आयोजन को छत्तीसगढ़ और देश के युवाओं के लिए सौभाग्यपूर्ण अवसर बताया। इस अवसर पर स्वागत उद्बोधन करते हुए भारत स्काउट गाइड के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त डॉ. केके खण्डेलवाल ने ग्राम दुधली में इस प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी आयोजन को एतिहासिक एवं अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। मुख्य राज्य आयुक्त इंदरजीत सिंह खालसा ने कहा कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ के स्वर्णिम अध्याय में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। विभिन्न राज्यों से उपस्थित रोवर एवं रेंजरों द्वारा आकर्षक मार्चपास्ट कर राज्यपाल डेका एवं अतिथियों को सलामी दी गई। इस प्रथम नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी के शुभारंभ अवसर पर विभिन्न राज्यों से उपस्थित रोवर रेंजरों ने नैनाभिराम सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुति से भारतीय संस्कृति की बहुरंगी छटा बिखेरी। उल्लेखनीय है कि इस 5 दिवसीय आयोजन में देश के सभी राज्यों के अलावा रेल्वे, नवोदय विद्यालय सहित कुल 33 राज्यों के प्रतिभागी रोवर रेंजर शामिल हो रहे हैं। भारत स्काउट्स गाइड्स के अधिकारी, रोवर रेंजर के अलावा अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आम नागरिकगण उपस्थित थे।