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सॉफ्टवेयर मैचिंग में 5.70 लाख वोटर्स के पिता और जन्मतिथि व नाम में मिली गड़बड़ी

इंदौर. इंदौर जिले में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत दावे-आपत्ति की सुनवाई जारी है, लेकिन इस बीच मतदाता सूची को लेकर अजीब स्थिति सामने आई है। जिले में करीब 5.70 लाख मतदाता तार्किक त्रुटि श्रेणी में सामने आए हैं, जिनके रिकार्ड वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैप तो हो गए हैं, लेकिन विवरणों में विसंगतियों के कारण वे संदेह के घेरे में हैं। यह संख्या उन 1.33 लाख मतदाताओं से अलग है, जिनकी वर्ष 2003 से मैपिंग नहीं हुई। दरअसल, निर्वाचन आयोग के सॉफ्टवेयर द्वारा रिकॉर्ड मिलान के दौरान पांच प्रकार की तार्किक त्रुटियां चिह्नित की गई हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या उन मतदाताओं की है, जिनके पिता का नाम 2003 की सूची से मेल नहीं खा रहा। नाम की स्पेलिंग में गलती, नाम का अधूरा होना, सरनेम में बदलाव और जन्मतिथि में अंतर जैसी त्रुटियां भी सामने आई हैं। इन मतदाताओं को आयोग ने संदेह के घेरे में रखा है। हालांकि, इस श्रेणी के मतदाताओं के लिए राहत की बात यह है कि इनको किसी तरह से नोटिस जारी नहीं होंगे यानी यह सूची से बाहर नहीं होंगे। उप जिला निर्वाचन अधिकारी नवजीवन विजय पंवार का कहना है कि आयोग ने कुछ मतदाताओं को तार्किक त्रुटि में शामिल किया है। इनका सुधार बीएलओ द्वारा अपने मोबाइल लॉगिन से किया जाएगा। बीएलओ घोषणा पत्र भरकर उक्त मतदाता की पुष्टि करेंगे। यदि इसमें गलत मैपिंग हुई है तो उसमें सुधार कर नोटिस जारी होंगे। 24.20 मतदाताओं ने भरे फार्म इंदौर जिले की मतदाता सूची में शामिल 28.67 लाख मतदाताओं के फार्म भरने का कार्य चार नवंबर से 11 दिसंबर तक किया गया। इस दौरान 24 लाख 20 हजार 171 मतदाताओं के फार्म भरकर आए, इसलिए इनको प्रारंभ मतदाता सूची में शामिल किया गया है। इसमें एक लाख 33 हजार 696 मतदाताओं की मैपिंग नहीं हुई थी और अब इनसे दस्तावेज लिए जा रहे हैं। वहीं चार लाख 47 हजार 123 मतदाताओं के फार्म नहीं आने से इनका नाम प्रारंभ मतदाता सूची से हटाया गया है। इसमें स्थानांतरित, मृतक और पते पर नहीं मिलने वाले मतदाता शामिल हैं। ये त्रुटियां सामने आईं नाम में त्रुटि : वर्तमान मतदाता सूची में मतदाता का नाम रामलाल दर्ज है, जबकि 2003 की सूची में नाम राम था। पिता का नाम बेमेल : 2003 की सूची में पिता के नाम के साथ सरनेम नहीं था, लेकिन अब नाम के साथ सरनेम दर्ज है। मैपिंग की परेशानी : एक पालक की छह से अधिक नामों से मैपिंग नहीं होना चाहिए, लेकिन कुछ मामलों में अधिक हुई है। उम्र की परेशानी : बच्चों और पिता की उम्र में 15 साल से कम और 50 साल से अधिक का अंतर सामने आ रहा है। दादा की उम्र : कई मतदाताओं के दादा की उम्र में 40 साल से कम का अंतर दिखाई दे रहा है।

इंदौर में भागीरथपुरा कांड पर कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में निकली न्याय यात्रा

इंदौर. भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद कांग्रेस ताकत दिखाने के लिए आज फिर से सड़क पर उतरी है। आज शहर में न्याय यात्रा निकाली जा रही है। इसमें दिग्विजय सिंह, सज्जनसिंह, मीनाक्षी नटराजन सहित प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से कांग्रेस विधायकों सहित अन्य बड़े नेता पहुंचे हैं। जिला और शहर कांग्रेस दावा कर रही है कि भागीरथपुरा के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग लेकर निकाली जा रही यात्रा में बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं। जिला अध्यक्ष विपिन वानखेड़े और शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे के अनुसार सिर्फ कांग्रेस के कार्यकर्ता नहीं बल्कि आम लोग भी यात्रा में शामिल हो रहे हैं। बड़ा गणपति से मौन रैली के रूप में यात्रा शुरू हुई, जिसका राजवाड़ा पर देवी अहिल्या प्रतिमा पर समापन होगा।

शराब के नशे में स्कूल पहुंचे टीचर, किया गया निलंबित

खरगोन. खरगोन जिले के डोंगर चीचली गांव में माध्यमिक शिक्षक के शराब पीकर स्कूल में जाकर बच्चों को धमकाने और उनके घबराकर स्कूल छोड़कर भागने के मामले में जिला कलेक्टर भव्या मित्तल के निर्देश पर कार्रवाई की गई है। जहां संबंधित शिक्षक को निलंबित कर दिया गया है, वहीं इस मामले को वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में नहीं लाने पर चार अधिकारियों को शोकाज नोटिस दिया। घटना के मुताबिक 6 जनवरी को केशव शारदे शराब पीकर स्कूल में आए और उनकी हरसकतों से बच्चें घबराकर समय के पहले ही क्लास से बाहर निकल भागे। उल्लेखनीय है कि शिक्षक केशव शारदे ने क्लास में जाकर बच्चों को धमकाया था और कहा था कि 'मैं मेरे बेटे को भी नहीं छोड़ता, मैं छुट्टी पर हूं मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है, हेड मास्टर दारू पीते हैं यह किसने बताया है।' जब बच्चे घबरा कर भागने लगे तो केशव शारदे उनके पीछे गए और कहा कि अभी चार ही बजे हैं, फिलहाल छुट्टी नहीं हुई है। घटना का वीडियो सामने आने पर जिला कलेक्टर भव्या मित्तल ने जांच कर प्रतिवेदन सौंपने के निर्देश दिए थे। ग्रामीण और पंचायत प्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा भी बनाया था। टीचर को किया निलंबित सहायक आयुक्त आदिवासी विकास खरगोन इकबाल हुसैन आदिल ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर शासकीय एकीकृत माध्यमिक विद्यालय डोंगर चीचली के प्रधान पाठक केशव शारदे को जिला कलेक्टर भव्या मित्तल ने शुक्रवार को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही इस मामले में लापरवाही बरतने पर जन शिक्षक शैलेश वर्मा, ब्लाक रिसोर्स कोआर्डिनेटर (बीआरसी) रंजीत आर्य, ब्लाक एजुकेशन ऑफिसर विष्णु पाटीदार और संकुल प्राचार्य लोकेंद्र सिंह तोमर को शोकाज नोटिस जारी किया गया है। उनके द्वारा समय रहते प्रकरण को वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में नहीं लाया गया।

‘आभार प्रधानमंत्री जी, डबल इंजन सरकार ने बदल दी हम महिलाओं की जिंदगी’

यूपी की एक  आम महिला ने लिखी मोदी को भावनात्मक चिट्ठी, बताया कि उज्ज्वला योजना से कैसे आया उनकी जिंदगी में बदलाव जवाब में पीएम ने जताया आभार, कहा- ‘करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों का आशीर्वाद एवं नेह मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा, सबसे बड़ी ताकत’ लखनऊ, हमारे प्रयासों से आपके जीवन में जो सुखद बदलाव आए हैं, उन्हें पत्र के ज़रिये मुझसे साझा करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। देश की करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों का आशीर्वाद एवं नेह मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा, सबसे बड़ी ताकत है। मुझे विश्वास है कि आप सभी का सहयोग एवं योगदान विकसित भारत के निर्माण में बहुमूल्य सिद्ध होगा। ये शब्द हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पत्र के, जो उन्होंने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी ज़िले में रहने वाली एक सामान्य घरेलू महिला अरुणा श्री को उनके पत्र के उत्तर में आभार व्यक्त करते हुए लिखे। प्रधानमंत्री जी का यह पत्र अरुणा श्री के उस पत्र के आभार स्वरूप लिखा गया है, जिसमें अरुणा ने विकसित भारत की असली तस्वीर रखते हुए डबल इंजन सरकार की ओर से चलाई जा रही उज्ज्वला योजना से उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलाव के संदर्भ में लिखा था। अरुणा ने पत्र में भावनात्मक अनुभव व्यक्त करते हुए लिखा कि उनकी शादी वर्ष 2004 में हुई थी। उन दिनों रसोई गैस कनेक्शन और एलपीजी सिलेंडर मिलना आसान नहीं था। वर्षों इंतज़ार, सिफ़ारिशें, गैस बुकिंग के लिए लंबी कतारें और भरा सिलेंडर पाने के लिए एजेंसी के चक्कर आम बात थी। कई बार मजबूरी में ब्लैक में गैस ख़रीदनी पड़ती थी, जिससे आर्थिक बोझ और मानसिक तनाव दोनों बढ़ जाते थे। लेकिन 2014 के बाद उज्ज्वला योजना के आने से मुफ़्त गैस कनेक्शन, मोबाइल से बुकिंग, घर पर सिलेंडर डिलीवरी और सब्सिडी के सीधे बैंक खाते में आने जैसी व्यवस्थाओं से प्रदेश की सामान्य महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अरुणा श्री ने अपने पत्र में हाल की एक छोटी-सी लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण घटना का उल्लेख किया। एक दिन भोजन बनाते समय अचानक गैस खत्म हो गई। पहले ऐसे हालात में पूरा काम ठप हो जाता था, लेकिन उनके पति के एक फ़ोन पर मात्र 15 मिनट के भीतर भरा हुआ सिलेंडर घर पहुँच गया और भोजन समय पर तैयार हो सका। अरुणा जी ने पत्र में लिखा, भले ही यह छोटी घटना लगे, लेकिन इन छोटे-छोटे सुधारों ने आम महिलाओं के जीवन को कहीं अधिक सुरक्षित, सहज और सम्मानजनक बना दिया है। उन्होंने पत्र में लिखा कि उत्तर प्रदेश में डबल इंजन सरकार की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं, सुविधाओं और उनकी डिलीवरी ने आम लोगों के जीवन में आमूलचूल बदलाव ला दिया है। अरुणा श्री का पत्र 2014 के बाद के नए भारत की तस्वीर पेश करता है, जिसे हम अक्सर सरकारी विज्ञापनों या भाषणों में सुनते हैं, लेकिन रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कम ही महसूस कर पाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी की आम महिला अरुणा श्री के पत्र के उत्तर में कहा कि ऐसे आत्मीय पत्र उन्हें राष्ट्रसेवा के लिए नई ऊर्जा देते हैं। उन्होंने बिजली, पानी, शौचालय, पक्का मकान, उज्ज्वला योजना, बैंकिंग सुविधा और मुद्रा योजना जैसे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों से देश की महिलाएं सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। उन्होंने महिलाओं के नेतृत्व में आगे बढ़ते भारत पर गर्व व्यक्त किया और कहा कि देश की करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों का आशीर्वाद उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा है। अरुणा श्री का प्रधानमंत्री को धन्यवाद के लिए लिखा पत्र बताता है कि जब सरकारी नीतियां सही ढंग से आमजन तक पहुंचती हैं, तो वे सिर्फ़ योजनाएं नहीं रह जातीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन में संतोष और आत्मविश्वास लाती हैं। विकसित होते भारत की यही असली तस्वीर है।

सीएम योगी ने समीक्षा बैठक के दौरान किया माघ मेला सेवा एप का उद्घाटन

मेला क्षेत्र के सभी बिजली के खंभों पर लगाए गए क्यूआर कोड से मिलेगी मदद प्रयागराज माघ मेला क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए कई तरह के नवाचार इस बार मेला प्रशासन की तरफ से किए जा रहे हैं। माघ मेला आने वाले आगंतुकों के लिए मेला सेवा एप भी उसी सूची में शामिल हो गया है।  शनिवार को प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र पहुंचे सीएम योगी ने इसका उद्घाटन किया। प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के आगामी स्नान पर्वो की समीक्षा करने  माघ मेला क्षेत्र पहुंचे सीएम योगी ने इसे लेकर अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। सीएम योगी ने इस दौरान प्रयागराज में तीर्थयात्रियों को डिजिटल मार्गदर्शन देने के लिए माघ मेला सेवा एप का भी उद्घाटन किया। इस एप के जरिए मेले में आए श्रद्धालुओं को डिजिटल तरीके से सेवाएं उपलब्ध होंगी। मेला अधिकारी ऋषिराज बताते हैं कि इस एप को इस तरह डिजिटली डिजाइन किया गया है कि मेला क्षेत्र के किसी भी हिस्से में बैठा कोई भी श्रद्धालु या पर्यटक अपनी समस्या मेला प्रशासन को अवगत करा सकता है और मेला प्रशासन के कर्मचारी उसका समाधान कर सकेंगे। मेला क्षेत्र के सभी बिजली के खंभों में इसके लिए क्यूआर कोड चिपकाए गए हैं जिन्हें स्कैन करके उसमें खुलने वाले फॉर्म में अपनी समस्या बताकर प्रशासन के पास भेजा जा सकता है। मेला प्रशासन के विभिन्न विभागों की टीमें इसका संज्ञान लेते ही समस्या का निवारण कर देंगी। माघ मेला में पहली बार यह सुविधा दी गई है।

उमरिया में हथियारबंद बदमाशों ने दुकानदार से छीना ज्वैलरी से भरा बैग

उमरिया. इंदवार थाना क्षेत्र की अमरपुर चौकी अंतर्गत बड़ा तालाब के पास शनिवार की रात हथियारों से लैस नकाबपोश बदमाशों ने लूट की सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है। पीड़ित पुरुषोत्तम उर्फ जग्गी पिता फूलचंद सोनी उम्र करीब 43 वर्ष निवासी सोनी मोहल्ला अमरपुर है। उनकी सेंट्रल ग्रामीण बैंक के पास ज्वेलरी की दुकान है। लुटेरों ने लूट की इस घटना को शनिवार की रात उस समय अंजाम दिया, जब पीड़ित दुकान बंद करके घर की तरफ जा रहा था। दुकान से कुछ दूरी पर लूट खबर है कि कारोबारी शाम के समय दुकान बंद कर सोनी मोहल्ला स्थित अपने घर की ओर जा रहा था। जैसे ही वह बड़ा तालाब के पास पहुंचा, पहले से घात लगाए बैठे हथियारबंद नकाबपोश बदमाशों ने उसे घेर लिया। बदमाशों ने हथियारों की मदद से कारोबारी को जान से मारने की धमकी देते हुए ज्वेलरी से भरा बैग छीन लिया और मौके से फरार हो गए। हैरानी की बात यह है कि यह पूरी वारदात पीड़ित की दुकान से महज 500 मीटर की दूरी पर हुई, जिससे पूरा परिवार खासा दहशत में है। कर रहे थे रैकी वारदात की सूचना मिलते ही देर रात ही पुलिस हरकत में आ गई। बदमाशों को गिरफ्त में लेने गहन जांच शुरू कर दी गई। बदमाशों की तलाश में आसपास के इलाकों में पुलिस सघन सर्चिंग अभियान चला रही है, वहीं संभावित आरोपियों तक पहुंचने के लिए सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। इस पूरे वारदात को जिस तरह बदमाशों ने अंजाम दिया है, उससे साफ है कि बदमाश कई दिनों से कारोबारी की रेकी कर रहे थे और तय समय पर वारदात को अंजाम दिए है।

यूपी के शहरों का गंदा पानी अब बिना शोधन के गंगा-यमुना में नहीं जाएगा

प्रदेश में कुल 74 सीवर शोधन परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं, इनमें से 41 पूर्ण सीएम योगी के नेतृत्व में नदियों की स्वच्छता को मिली नई रफ्तार वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 152 एसटीपी संचालित हैं लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में गंगा और यमुना सहित प्रमुख नदियों की स्वच्छता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपशिष्ट जल का शोधन कर नदी प्रदूषण की रोकथाम को लेकर व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है। अब प्रदेश के शहरों से निकलने वाला गंदा पानी बिना शोधन के नदियों में नहीं जाएगा। नमामि गंगे मिशन फेज-2 के तहत सीवरेज इन्फ्रास्ट्रक्चर को व्यापक स्तर पर सुदृढ़ किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदेश में चार बड़ी सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का संचालन शुरू किया गया है। इसके अंतर्गत आगरा में 31 एमएलडी और 35 एमएलडी के दो बड़े एसटीपी स्टार्ट हुए हैं। 842 करोड़ रुपए की इस परियोजना से लगभग 25 लाख लोगों को फायदा होगा। वहीं, वाराणसी के अस्सी-बीएचयू क्षेत्र में 55 एमएलडी एसटीपी का संचालन किया गया है। 308 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस परियोजना से 18 लाख से अधिक लोगों को स्वच्छता और बेहतर अपशिष्ट जल प्रबंधन का लाभ मिलेगा। शुक्लागंज (उन्नाव) में 65 करोड़ रुपए से 5 एमएलडी एसटीपी शुरू हुआ है। इससे 3 लाख से अधिक लोगों को लाभ होगा और गंगा में प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगेगी। अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक तरीके से शोधन : जोगिन्दर सिंह राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक जोगिन्दर सिंह ने बताया कि प्रदेश में सीवर शोधन की कुल 74 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें से 41 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि बाकी परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से शहरी क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक तरीके से शोधन किया जा रहा है। सीवेज को शुद्ध कर बना रहे पर्यावरण के अनुकूल वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 152 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) संचालित हैं, जो बड़ी मात्रा में सीवेज को शुद्ध कर नदियों में प्रवाहित होने से पहले उसे पर्यावरण के अनुकूल बना रहे हैं। इन संयंत्रों के माध्यम से गंगा-यमुना की स्वच्छता के साथ-साथ जनस्वास्थ्य को भी सुरक्षित किया जा रहा है। परियोजनाओं का उद्देश्य नदियों की निर्मलता सुनिश्चित करना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य विभिन्न नालों के माध्यम से नदियों में पहुंचने वाले अपशिष्ट जल का शोधन कर पूरी तरह से नदी प्रदूषण की रोकथाम करना है। इससे नदियों की निर्मलता को सुनिश्चित किया जा रहा है। गंगा स्वच्छता के लक्ष्य को तेजी से हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ता यूपी राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक जोगिन्दर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। सीवर शोधन परियोजनाओं के माध्यम से उत्तर प्रदेश गंगा स्वच्छता के राष्ट्रीय लक्ष्य को तेजी से हासिल करने की दिशा में अग्रसर है। इन जिलों में हुआ काम सीवर शोधन की परियोजना प्रयागराज (नैनी, फाफामऊ, झूंसी), कन्नौज, नरोरा, गढ़ मुक्तेश्वर, अनूपशहर, कानपुर, बिठूर, अयोध्या, मथुरा-वृन्दावन, छाता (मथुरा), कोसीकला (मथुरा), वाराणसी, चुनार, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, कासगंज, इटावा, शुक्लागंज-उन्नाव, सुल्तानपुर, जौनपुर, बागपत, मुजफ्फरनगर, बुड़ाना, लखनऊ, गाजीपुर, मिर्जापुर, बरेली, कैराना, फर्रुखाबाद, मेरठ, देवबंद (सहारनपुर), सहारनपुर, शामली, हापुड़, गोरखपुर, आगरा, गुलावटी (बुलंदशहर), पंडित दीन दयाल नगर (मुगलसराय-चन्दौली), भदोही, राम नगर, हाथरस, अलीगढ़, डलमऊ (रायबरेली), मानिकपुर (प्रतापगढ़) में संचालित हैं।

डायल 112 में लगाया एंबुलेंस का साफ्टवेयर बता रहा गलत लोकेशन

भोपाल. आमजन को तत्काल पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रदेशभर में दौड़ रहे डायल 112 वाहनों के संचालन के लिए उपयोग होने साफ्टवेयर में फर्जीवाड़ा सामने आया है। संचालन करने वाली कंपनी जीवीके ने कंप्यूटर एडेड डिस्पैच (सीएडी) सिस्टम निविदा शर्तों के अनुसार न लगाकर, ऐसा सिस्टम लगाया है, जिसे 108 एंबुलेंस के लिए तैयार किया गया था। कंपनी ने उसे 112 के हिसाब से बदला है, जिससे समस्याएं आ रही हैं। सीएडी में कोडिंग और डाटा फीडिंग ठीक से नहीं होने के कारण सिस्टम यही पता नहीं कर पा रहा है कि घटनास्थल के पास कौन सा वाहन है और कौन दूरी पर है। पास के वाहन की जगह 40 से 80 किलोमीटर दूर तक के वाहन को घटनास्थल पर पहुंचने के लिए मैसेज पहुंच रहा है, जिसमें गाड़ी के पहुंचने में कई बार आधे घंटे से भी अधिक लग रहे हैं। एक ही वाहन को दो से तीन इवेंट एक साथ मिल रहे हैं। इसका नुकसान जनता को उठाना पड़ रहा है। बता दें कि इसी कंपनी को पहले 108 एंबुलेंस सेवा के संचालन की जिम्मेदारी मिली थी। कंपनी अभी 1200 गाड़ियों का संचालन कर रही है। अब पुलिस मुख्यालय की दूरसंचार शाखा जीवीके कंपनी द्वारा लगाए गए सिस्टम की जगह खुद अपनी जरूरत के अनुसार सीएडी लगाने जा रहा है। इसमें 10 से 11 करोड़ रुपये तक खर्च आएगा। जीवीके कंपनी को किए जाने वाले भुगतान में से ही यह राशि काटी जाएगी। जीवीके कंपनी ने इसी वर्ष अगस्त से काम संभाला था। पांच वर्ष के लिए काम दिया गया है, जिसमें लगभग 972 करोड़ रुपये खर्च होंगे। केस 1 – भोपाल के एमपी नगर जोन एक में पार्किंग विवाद होने पर छह जनवरी को शाम 4: 33 बजे डायल 112 को काल किया गया। 4:48 बजे बजे वाहन में तैनात पुलिसकर्मी की काल आई, लेकिन रास्ते से ही यह कहकर लौट गई कि घटनास्थल हमारे थाना क्षेत्र में नहीं आता, हम काल दूसरे थाने को ट्रांसफर कर रहे हैं। इसके बाद दूसरी गाड़ी आई तब तक लगभग आधे घंटे गुजर गए। केस 2- जबलपुर के गढ़ा से नौ जनवरी को दोपहर दो बजे पूजा पयासी ने फोन कर डायल 112 की मदद मांगी। तीन मिनट में वाहन चालक से संपर्क हुआ। पूजा गढ़ा में थीं, लेकिन एफआरवी मदन महल की भेजी गई। इसमें समय लगा तो कंट्रोल रूम से संदेश देकर गढ़ा थाने के करीब की गाड़ी को टास्क देने की बात लिखकर भेजी गई। जबलपुर में पुलिस सहायता के लिए रोजाना औसतन 300 सूचनाएं आती हैं। इनमें दस प्रतिशत ऐसी होती हैं जिनमें घटना स्थल के पास की जगह दूर की गाड़ी भेजी जाती है। केस 3- रिस्पांस टाइम 12 मिनट बताया, पर 22 मिनट बाद भी नहीं पहुंचा 112 वाहन 19 अक्टूबर को ग्वालियर के सिटी सेंटर स्थित कैलाश विहार में रात करीब साढ़े 12 बजे बदमाश दो युवकों को बुरी तरह पीट रहे थे। घटना के प्रत्यक्षदर्शी ने मोबाइल एप 112 से सूचना दी। रिवर्ट मैसेज में रिस्पांस टाइम 12 मिनट बताया। करीब 22 मिनट बाद सूचनाकर्ता को काल आई कि लोकेशन क्या है। लोकेशन बताने के लगभग पांच मिनट बाद पुलिस पहुंची 112 से पहुंची। तब तक पीटने वाले भाग चुके थे। अच्छे से काम नहीं कर रहा अभी जो साफ्टवेयर उपयोग हो रहा है वह उतना अच्छे से काम नहीं कर रहा है। कुछ कमियां थीं। इसलिए सीएडी में परिवर्तन कर रहे हैं, जिससे जनता को बेहतर इमरजेंसी सेवा मिल सके। नीतू ठाकुर, एसपी, डायल 112

भारत में 100 करोड़ की ‘डिजिटल डकैती’ का भंडाफोड़

नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने शनिवार को एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इसमें हजारों लोगों को कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डरा-धमकाकर लगभग 100 करोड़ रुपये की ठगी की गई। आरोप है कि यह ठगी करने वाला गिरोह खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) का अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करता था और कहता था कि उनके मोबाइल नंबर आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों में इस्तेमाल हुए हैं। इस सिंडिकेट के तार पाकिस्तान समेत कई देशों तक फैले हुए हैं। पुलिस ने अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कैसे दिया जाता था ठगी को अंजाम दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (IFSO) विनीत कुमार ने बताया कि सितंबर 2025 से शुरू हुई इस ठगी में फ्रॉडस्टर्स पीड़ितों को फोन कर पहलगाम हमला और दिल्ली के रेड फोर्ट ब्लास्ट जैसे आतंकी मामलों से उनके फोन नंबरों के जुड़े होने का आरोप लगाते थे। उन्हें तत्काल गिरफ्तारी की धमकी दी जाती थी और 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था। इस पूरे नेटवर्क का संचालन चीन, नेपाल, कंबोडिया, ताइवान और पाकिस्तान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों द्वारा किया जा रहा था। अब तक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें एक ताइवान का नागरिक भी शामिल है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिंडिकेट ने अवैध SIMBOX डिवाइसों का इस्तेमाल किया, जो कई SIM कार्ड रखकर अंतरराष्ट्रीय कॉल्स को भारतीय नंबरों के रूप में दिखाते हैं। ये कॉल्स विदेशों (खासकर कंबोडिया) से आती थीं, लेकिन SIMBOX के जरिए स्थानीय दिखाई देती थीं। यानी विदेशी कॉल भी भारत की लोकल कॉल जैसी दिखाई देती है। फ्रॉडस्टर्स ने जानबूझकर 2G नेटवर्क का उपयोग किया ताकि रीयल-टाइम ट्रैकिंग मुश्किल हो जाए। SIMBOX में IMEI नंबरों को ओवरराइट और रोटेट किया जाता था, जिससे एक ही नंबर एक दिन में कई शहरों से आता दिखता था, जिससे जांच एजेंसियां भ्रमित हो जाती थीं। फॉरेंसिक जांच में 5,000 से ज्यादा कम्प्रोमाइज्ड IMEI नंबर और करीब 20,000 SIM कार्ड इस नेटवर्क से जुड़े पाए गए। पुलिस ने दिल्ली, मुंबई और मोहाली से 22 SIMBOX डिवाइस, मोबाइल फोन, लैपटॉप, राउटर, CCTV कैमरे, पासपोर्ट और विदेशी SIM कार्ड बरामद किए। जांच और गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट के डिप्टी कमिश्नर विनीत कुमार ने बताया कि सितंबर में कई शिकायतें मिलने के बाद मामला दर्ज किया गया और करीब 25 पुलिसकर्मियों की एक विशेष टीम बनाई गई। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) और डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) की मदद से तकनीकी जांच शुरू की गई। सबसे पहला SIM बॉक्स इंस्टॉलेशन गॉयला डेयरी, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में ट्रेस किया गया। इसके बाद एक महीने की गोपनीय निगरानी में दिल्ली के चार अलग-अलग इलाकों में सक्रिय ठिकानों का पता चला। छापेमारी में शशि प्रसाद (53) और परविंदर सिंह (38) को गिरफ्तार किया गया, जो कथित तौर पर दिल्ली में पांच जगहों पर इस अवैध इंफ्रास्ट्रक्चर को संभाल रहे थे। ताइवानी कनेक्शन और अंतरराष्ट्रीय साजिश फॉरेंसिक जांच से खुलासा हुआ कि SIM बॉक्स डिवाइस ताइवानी नागरिकों द्वारा सप्लाई और कॉन्फिगर किए गए थे। इनका समन्वय एन्क्रिप्टेड टेलीग्राम चैनलों के जरिए किया जा रहा था। पुलिस ने रणनीतिक जाल बिछाकर ताइवान के नागरिक आई-त्सुंग चेन (30) को भारत बुलाया और 21 दिसंबर 2025 को दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, चेन इस पूरे नेटवर्क का तकनीकी मास्टरमाइंड था और कथित तौर पर ताइवान-आधारित अपराधी गिरोह के लिए काम कर रहा था, जिसका नेतृत्व गैंगस्टर शांगमिन वू करता है। पाकिस्तान, क्रिप्टो और दक्षिण भारत तक फैला नेटवर्क जांच आगे बढ़ने पर मोहाली (पंजाब) में SIM बॉक्स हब मिला, जहां से सरबदीप सिंह और जसप्रीत कौर को गिरफ्तार किया गया। दोनों पहले कंबोडिया स्थित स्कैम कॉल सेंटर्स में काम कर चुके थे। आरोप है कि एक पाकिस्तानी हैंडलर इस नेटवर्क को फंडिंग और दिशा-निर्देश दे रहा था। जांच में पाकिस्तान-ऑरिजिन IMEI नंबरों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है, जिसे पुलिस राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंता मान रही है। तमिलनाडु के कोयंबटूर में क्रिप्टोकरेंसी के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल का खुलासा हुआ, जहां से दिनेश के. को गिरफ्तार किया गया। वहीं मुंबई के मलाड इलाके से एक और SIM बॉक्स सेटअप बरामद हुआ और अब्दुस सलाम की गिरफ्तारी हुई। पुलिस ने बताया कि यह ऑपरेशन काफी विस्तृत और अत्याधुनिक था। जांच में क्रिप्टो ट्रांजेक्शन, मनी लॉन्ड्रिंग चैनलों और बाकी घरेलू व अंतरराष्ट्रीय ऑपरेटरों की तलाश जारी है। यह मामला भारतीय नागरिकों के खिलाफ भय और आतंक के नाम पर चलाए गए संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराध को उजागर करता है। दिल्ली पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और ऐसी धमकियों पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत करने की अपील की है।

भोपाल गोकशी कांड में ‘सफेद झूठ’ वाली क्लीन चिट देकर पुलिस अब खुद फंसी

भोपाल. राजधानी के स्लाटर हाउस में गोकशी का मामला अब प्रशासनिक भ्रष्टाचार और संदिग्ध संरक्षण की एक ऐसी परतदार कहानी बन गया है, जिसमें पुलिस और नगर निगम के दावे एक-दूसरे की जड़ें काट रहे हैं। जिस मुख्य आरोपित असलम चमड़ा को पुलिस ने अक्टूबर 2025 में 'दूध का धुला' बताकर क्लीनचिट दी थी, आज वही सलाखों के पीछे है और पुलिस अब नगर निगम के गलियारों में जिम्मेदार तलाश रही है। तत्कालीन डीसीपी की रिपोर्ट ने सब कुछ 'ओके' था बता दें कि अक्टूबर 2025 में तत्कालीन डीसीपी आशुतोष गुप्ता की रिपोर्ट ने सब कुछ 'ओके' करार दिया था। तब पुलिस ने केवल बयानों को आधार मानकर जांच की फाइल बंद कर दी थी। आज सवाल खड़ा है कि क्या वह जांच महज औपचारिकता थी? एक्स पर पुराना पत्र साझा हुआ, बैकफुट पर आया प्रशासन राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने इंटरनेट मीडिया के माध्यम एक्स पर जब पुराना पत्र साझा किया तो प्रशासन बैकफुट पर आ गया। पत्र में न केवल गोकशी, बल्कि बांग्लादेशी रोहिंग्याओं के जुड़ाव और संदिग्ध गतिविधियों की चेतावनी भी थी, जिसे दरकिनार कर दिया गया। निगम ने पल्ला झाड़ा और अब पुलिस की नई 'थ्योरी' नगर निगम अब इस पूरे मामले से पल्ला झाड़ रहा है। निगमायुक्त संस्कृति जैन का कहना है कि निगम ने केवल पीपीपी मोड पर जमीन दी है, संचालन का काम नहीं कर रहा था। दूसरी ओर, जहांगीराबाद पुलिस अब उन डॉक्टरों और अफसरों की सूची मांग रही है जो मांस को प्रमाणित करते थे। सूत्रों की मानें तो रोजाना चार कंटेनर मांस विदेशों में सप्लाई होता था। सवाल यह है कि क्या प्रमाणित करने वाले डॉक्टरों को कंटेनरों में जा रहे 'गोमांस' की भनक नहीं थी? जांच पर सवाल उठे जांच पर सबसे बड़ा सवालिया निशान तब लगा, जब हिंदूवादी संगठनों द्वारा पकड़े गए संदिग्ध कंटेनर को पुलिस ने रिपोर्ट आने से पहले ही छोड़ दिया। जब तक मथुरा से लैब रिपोर्ट आई, तब तक वह मांस मुंबई के रास्ते विदेश रवाना हो चुका था। आखिर किसके दबाव में उस रात कंटेनर को 'एग्जिट' दिया गया?