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285 किमी का जबलपुर-गोंदिया रेल प्रोजेक्ट: नागपुर, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई से कनेक्टिविटी में इजाफा

जबलपुर  मध्यप्रदेश के लिए एक अहम रेल प्रोजेक्ट की घोषणा हुई। केंद्र सरकार ने छोटी लाइन को ब्रॉड गेज में बदलने का ऐलान किया तो प्रदेशवासी खुश हो उठे। बड़ी लाइन से उनका आवागमन और आसान होनेवाला था। हालांकि उनकी खुशी तब निराशा में बदल गई जब ब्रॉड गेज के लिए करीब 13 साल में नाममात्र का काम हुआ। संयोगवश उसी समय प्रगति पोर्टल चालू हो गया जिससे रेलवे प्रोजेक्ट में आती सभी दिक्कतें दूर होती चली गईं। 2021 में ब्रॉड गेज प्रोजेक्ट पूरा हो गया और इसे राष्ट्र को सम​र्पित कर दिया गया। 285 किमी लंबी यह रेल लाइन मानो वरदान बन गई। इससे प्रदेशवासियों की नागपुर, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई से कनेक्टिविटी बढ़ गई।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया को प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप की उपलब्धियां बताईं। प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रोएक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन (प्रगति) पर प्रेजेंटेशन दिया। इस मौके पर उन्होंने प्रगति पोर्टल की अहमियत भी प्रतिपादित की। पोर्टल की वजह से अटके प्रोजेक्ट को रफ्तार मुख्य सचिव अनुराग जैन ने इसके लिए रेलवे के जबलपुर गोंदिया ब्रॉड गेज प्रोजेक्ट का जिक्र किया। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को पूरा कराने का श्रेय प्रगति पो​र्टल को ही दिया। सीएस अनुराग जैन ने स्पष्ट कहा कि पोर्टल की वजह से ही अटके पड़े प्रोजेक्ट को रफ्तार मिल सकी थी। अन्यथा जबलपुर गोंदिया ब्रॉड गेज प्रोजेक्ट 2028 या 2030 तक पूरा हो पाता। सीएस अनुराग जैन ने बताया कि जबलपुर गोंदिया ब्रॉड गेज प्रोजेक्ट पर सन 2003 में काम शुरु हुआ। इसमें कई व्यवधान आए और 2016 तक नाममात्र का ही काम हुआ। प्रगति पोर्टल आया तो जबलपुर गोंदिया ब्रॉड गेज से संबंधित सभी समस्याएं तुरंत हल की जाने लगीं। इसके परिणामस्वरूप रेल लाइन के काम में तेजी आई और 2021 में इसका शुभारंभ कर दिया गया। सीएस ने कहा कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर के कामों को किस तरह गति मिली, इस उदाहरण से समझा जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी जबलपुर-गोंदिया गेज परिवर्तन परियोजना का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि रेलवे की 285 किमी लंबी इस रेल लाइन से मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच सीधा और अधिक क्षमता वाला रेल संपर्क स्थापित हो गया है। इतना ही नहीं, इस प्रोजेक्ट से प्रदेश के जबलपुर, बालाघाट, मंडला, सिवनी जिलों की नागपुर, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों से कनेक्टिविटी भी बढ़ गई है। अब जबलपुर से गोंदिया, कोलकाता और चेन्नई के लिए सीधी ट्रेन उपलब्ध हैं।

मोदी सरकार ने शुरू किया AI चैलेंज, वित्तीय रिपोर्टिंग को AI द्वारा परखने का ऐलान

नई दिल्ली. भारत सरकार और National Financial Reporting Authority (NFRA) ने वित्तीय रिपोर्टिंग की गुणवत्ता और पारदर्शिता को बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है, जिसका नाम IndiaAI Financial Reporting Compliance Challenge रखा गया है। यह चुनौती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)-संचालित समाधानों के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार की गई है, ताकि वित्तीय दस्तावेजों की गुणवत्ता, डेटा सत्यापन और जोखिम संकेतकों के ऑटोमेटेड विश्लेषण में सुधार किया जा सके। विजेता टीम को मेलगा ₹1.5 करोड़ का पुरस्कार इस पहल के तहत सरकार ने कुल ₹1.5 करोड़ का पुरस्कार पूल रखा है; प्रारंभिक वर्चुअल परिष्करण चरण में 10 टीमों को ₹5 लाख तक का समर्थन मिलेगा, और विजेता टीम के लिए दो साल की NFRA के साथ अनुबंध का अवसर हो सकता है, जिसकी मूल्य लगभग ₹1 करोड़ तक हो सकती है। इस अनुबंध के माध्यम से जीतने वाली टीम राष्ट्रीय स्तर पर AI समाधान लागू करने का मौका पाएगी। चैलेंज में भाग लेने के लिए भारतीय कंपनियों और DPIIT (Department for Promotion of Industry and Internal Trade) द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप्स को आमंत्रित किया गया है। इन प्रतिभागियों से अपेक्षा है कि वे ऐसे एडवांस्ड AI इंजन विकसित करें जो बहु-फॉर्मेट दस्तावेजों से डेटा निकाल सके, उसे निर्धारित मानकों और नियामक ढांचे के खिलाफ स्वचालित रूप से मान्य कर सके तथा जोखिम विश्लेषण और अनुपालन सत्यापन जैसे कार्य कर सके। प्रशासनिक ढांचे को मिलेगी मजबूती आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस पहल का लक्ष्य न केवल वित्तीय रिपोर्टों की मानकीकरण प्रक्रिया को बेहतर बनाना है, बल्कि निवेशकों के भरोसे, सार्वजनिक विश्वास और कॉर्पोरेट प्रशासनिक ढांचे की मजबूती को भी बढ़ावा देना है। AI आधारित प्रणाली रिपोर्टों में टेक्स्ट, तालिकाएँ, हाइपरलिंक और एम्बेडेड डेटा को अलग-अलग पहचान सकती है, दस्तावेज़ को तार्किक भागों में विभाजित कर पूर्णता, अखंडता और अनुपालन का मूल्यांकन कर सकती है। प्रतियोगिता में चुने गए कुछ प्रतिभागी AIKosh प्लेटफॉर्म पर दिए गए सैंपल डाटा सेट का उपयोग कर समाधान को विकसित और परिष्कृत करेंगे। चुनौतियों के अगले चरण में करीब तीन टीमों को पांच दिन के ऑन-प्रिमाइज़ डेवेलपमेंट राउंड के लिए चयनित किया जाएगा, जहां वे अपने सिस्टम को और उन्नत कर सकेंगे। वित्तीय पारदर्शिता को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों के अनुसार, वित्तीय क्षेत्र में AI के इस तरह के प्रयोग से डेटा सत्यापन की गति, सटीकता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार संभव है, जिससे समय-समय पर वित्तीय अनियमितताओं की पहचान और जोखिम प्रबंधन में तेजी आएगी। इस तरह की पहल से भारत AI-आधारित नियामक तकनीकी ढांचे को मजबूत करते हुए वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। इस चुनौती में आवेदन की अंतिम तिथि 22 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है, और इच्छुक भागीदार AIKosh पोर्टल के माध्यम से अपना पंजीकरण कर सकते हैं।

केंद्र सरकार की 5 लाख करोड़ रुपये की सौगात, एमपी में 101 प्रोजेक्ट्स से बदलेंगी सूरत और विकास

भोपाल  केंद्र में पीएम नरेंद्र मोदी और एमपी में सीएम मोहन यादव की बीजेपी की सरकारें हैं। देशभर में डबल इंजन की सरकारों के इस दौर में राज्य सरकार को खासा लाभ हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह तथ्य उजागर किया। उन्होंने प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप की उपलब्धियां मीडिया से साझा करते हुए बताया कि प्रदेश में केंद्र सरकार के 101 प्रोजेक्ट के काम चल रहे हैं। इन विकास कार्यों से प्रदेश की तस्वीर बदल जाएगी। सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग ग्रुप (पीएमजी) और प्रोएक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन (प्रगति) प्लेटफार्म से देशभर में अटकी हुई निवेश परियोजनाओं को पुन: सक्रिय किया गया है। प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रोएक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन (प्रगति) पर प्रेजेंटेशन दिया। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच परस्पर समन्वय ही हमारी सबसे शक्ति है। जब विभाग आपस में समन्वय से काम करते हैं, तो विकास की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। पहले सामान्यत: बड़ी योजनाएं कागजों पर तो बहुत भव्य दिखती थीं, लेकिन धरातल पर साकार होने से पहले ही विभागों के आपसी तालमेल की कमी के कारण निष्प्रभावी हो जाती थीं। पीएमजी और प्रगति पोर्टल से पुरानी प्रणाली को जड़ से खत्म कर असंभव दिखने वाली परियोजनाओं को साकार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि "प्रगति" पोर्टल से देश के विकास में भू-गर्भ संपदा का दोहन देशहित में अधिक प्रभावी तरीके से होगा। भारत सरकार के अधिकारी इस पोर्टल से राज्य तथा अन्य मंत्रालयों में आने वाली प्रक्रियागत कठिनाइयों को समय रहते दूर कर लेंगे। केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना पर पिछली सरकारों ने ध्यान नहीं दिया गया अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में 3 नदी परियोजनाओं पर काम हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश को विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों से 209 बड़े प्रोजेक्ट्स की सौगात मिली। इनमें से 108 केंद्रीय विकास परियोजनाएं पूरी भी हो चुकी हैं। ये 2 लाख 61 हजार 340 करोड़ निवेश वाले प्रोजेक्ट हैं। सीएम मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश में अभी 101 केंद्रीय प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। ये विकास प्रोजेक्ट 5 लाख 24 हजार 471 करोड़ रुपए से अधिक की लागत के हैं। इनमें रेल मंत्रालय के 14, सड़क परिवहन मंत्रालय के 13, विद्युत मंत्रालय के 5 और नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के भी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट हैं। केंद्र के सहयोग से राज्य सरकार वन्यजीव पर्यटन योजनाओं को आगे बढ़ा रही है। प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीते अपना घर बना चुके हैं। धार के पीएम मित्र पार्क से कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रेजेंटेशन दिया मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रेजेंटेशन में बताया कि प्रगति प्लेटफार्म की शुरूआत 25 मार्च 2015 को हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभारंभ अवसर पर कहा था कि " आज पूरा विश्व भारत को बड़ी उत्सुकता से देख रहा है। ऐसे समय में यह अत्यंत आवश्यक है कि भारत की शासन-व्यवस्था और अधिक प्रभावी, और अधिक संवेदनशील बने। इसी दिशा में 'प्रगति पोर्टल' महत्वपूर्ण कदम है।" प्रगति की 50वीं बैठक 31 दिसम्बर 2025 को हुई। पीएमजी और "प्रगति" पोर्टल से बुनियादी ढांचा विकास परियोजना और नागरिक शिकायतों का तेजी से समाधान सुनिश्चित हुआ। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने मध्यप्रदेश में केंद्रीय परियोजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कुल 209 परियोजाएं पीएमजी पोर्टल की निगरानी में हैं। इसमें प्रमुख रूप से ऊर्जा, परिवहन, दूरसंचार, बिजली उत्पादन, सड़क और राजमार्ग, रेलवे, कोयला, तेल और गैस, मेट्रो रेल, नवकरणीय ऊर्जा एवं शहरी अवसंरचना की परियोजनाएं शामिल हैं। एमपी ने 97 प्रतिशत समस्याओं को हल किया पीएमजी समीक्षा में सामने आए केंद्रीय परियोजनाओं के संबंधित 322 मुद्दों में से राज्य सरकार ने 312 का समाधान किया। इसी प्रकार 'प्रगति पोर्टल' से 39 परियोजनाओं की समीक्षा की गई। इसमें 124 मुद्दे सामने आए जिनमें से 120 का समाधान किया गया। पीएमजी और प्रगति दोनों की समीक्षा में एमपी ने 97 प्रतिशत समस्याओं को हल किया। प्रदेश ऊर्जा और परिवहन केंद्र के रूप में उभरा है, जिसमें सड़क, रेलवे और विद्युत परियोजनाओं का प्रभुत्व है।

Tesla की Model Y भारत में लॉन्च, लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे, कंपनी दे रही है डिस्काउंट

 नई दिल्ली  दुनिया के सबसे रईस शख्स एलन मस्क के नेतृत्व वाली अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार कंपनी Tesla ने बड़े ही जोर-शोर से भारत में एंट्री की थी. कंपनी ने बीते साल जो शुरुआती कारें भारत मंगाई थीं, उनमें से कई कारें अब तक ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाई है. हालात ऐसे हैं कि टेस्ला को अपनी ही मॉडल Y एसयूवी पर भारी छूट देनी पड़ रही है, ताकि स्टॉक में रखी हुई गाड़ियां बिक सकें. इंडिया में एंट्री के तकरीबन 6 महीनों के बाद भी टेस्ला की रफ्तार सुस्त ही है. ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टेस्ला ने पिछले साल भारत में Model Y एसयूवी के तकरीबन 300 यूनिट को इंपोर्ट किया था. इनमें से लगभग एक तिहाई यानी करीब 100 गाड़ियां चार महीने बाद भी बिना खरीदार के खड़ी हैं. कई ऐसे ग्राहक जिन्होंने पहले बुकिंग कराई थी, उन्होंने बाद में कार खरीदारी का मन बदल लिया और बुकिंग कैंसिल करा दी. इसी वजह से कंपनी पर स्टॉक साफ करने का दबाव बढ़ गया है. Tesla पर 2 लाख का डिस्काउंट रिपोर्ट्स की माने तो कारों की बिक्री को रफ्तार देने के लिए टेस्ला कुछ वेरिएंट्स पर 2 लाख रुपये तक की छूट दे रही है. यह ऑफर खास तौर पर पिछले साल आई Model Y स्टैंडर्ड रेंज पर दिया जा रहा है. हालांकि, कंपनी ने इस डिस्काउंट ऑफर कोई बड़ा प्रचार-प्रसार नहीं किया है. बल्कि सीधे चुनिंदा ग्राहकों और टेस्ट ड्राइव लेने वालों को बताया जा रहा है. ताकि वो डिस्काउंट का लाभ उठाते हुए कार खरीद सकें. हालांकि कार पर डिस्काउंट के बारे में टेस्ला की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं की गई है.  ऊंची कीमत और टैक्स  भारत में टेस्ला की एंट्री जुलाई में हुई थी. कंपनी ने अपनी पहली कार के तौर पर Model Y को भारतीय ग्राहकों के बीच लॉन्च किया. इस कार की शुरुआती कीमत 59.89 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तय की गई. शुरुआत मुंबई से हुई और आने वाले महीनों में कंपनी ने दिल्ली और गुरुग्राम में भी अपने शोरूम शुरू किए. इतना ही नहीं कंपनी ने देश भर के ग्राहकों के लिए कार की ऑनलाइन बुकिंग भी शुरू कर दी. टेस्ला को भरोसा था कि उसका ब्रांड नाम ग्राहकों को खींच लाएगा, लेकिन इंपोर्टेड कारों पर लगने वाला करीब 110 प्रतिशत तक का टैक्स कीमत को काफी बढ़ा देता है.  भारत में सुस्त शुरुआत ऐसे वक्त में हुई है, जब दुनियाभर में टेस्ला की हालत खस्ता है. बीते साल यानी 2025 में चीन की प्रमुख इलेक्ट्रिक कार कंपनी बिल्ड योर ड्रीम (BYD) ने बिक्री के मामले में टेस्ला को पीछे छोड़ दिया है. अब बीवाईडी दुनिया की सबसे बेस्ट सेलिंग इलेक्ट्रिक कार कंपनी बन चुकी है. अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे बड़े बाजारों में भी टेस्ला की पकड़ कमजोर हुई है. भारत में कई ग्राहक टेस्ट ड्राइव के बाद दूसरे ऑप्शन की ओर मुड़ रहे हैं. कुछ को बीएमडब्ल्यू की iX1 ज्यादा किफायती लग रही है, तो कुछ को बीवाईडी की सीलायन 7 में ज्यादा फीचर्स नजर आ रहे हैं. इन दोनों की शुरुआती कीमत मॉडल Y से कम है, जिससे टेस्ला को सीधी टक्कर मिल रही है. बुकिंग ज्यादा, डिलीवरी कम रिपोर्ट्स के अनुसार, टेस्ला को भारत में मॉडल Y के लिए करीब 600 बुकिंग मिली थीं. लेकिन इनमें से बड़ी संख्या अब तक डिलीवर नहीं हो पाई है. साल 2025 में पूरे देश में सिर्फ 227 टेस्ला कारों का रजिस्ट्रेशन हुआ है. भारत में टेस्ला की एंट्री तो जोर-शोर से हुई लेकिन अब कारों की बिक्री के आंकड़े ये साफ संकेत दे रहे हैं, भारत में टेस्ला की राह आसान नहीं है. कैसी है Tesla Model Y टेस्ला मॉडल वाई इंडियन मार्केट में दो वेरिएंट (लॉन्ग रेंज और स्टैंडर्ड) में आती है. इसमें लॉन्ग रेंज RWD वेरिएंट में 84.2kWh का बैटरी पैक दिया गया है. जो सिंगल चार्ज में 661 किमी की ड्राइविंग रेंज देती है. कंपनी का दावा है कि, ये वेरिएंट महज 5.6 सेकंड में ही 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ सकता है. सुपर-फास्ट DC चार्जर की मदद से इसकी बैटरी 15 मिनट में इतनी चार्ज हो जाती है कि, कार 267 किमी तक चल सकती है. इस हायर वेरिएंट की कीमत 67.89 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है. वहीं स्टैंडर्ड वेरिएंट थोड़ा किफायती है और इसमें छोटा बैटरी पैक मिलता है. इस वेरिएंट में कंपनी ने 64kWh की बैटरी दी है. जो सिंगल चार्ज में तकरीबन 500 किमी की ड्राइविंग रेंज देता है. यह वेरिएंट 5.9 सेकंड में 0-100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ता है. DC फास्ट चार्जर से इस वेरिएंट की बैटरी 15 मिनट में इतना चार्ज हो जाती है, जिससे चालक को 238 किमी की ड्राइविंग रेंज मिलती है. स्टैंडर्ड वेरिएंट की कीमत 59.89 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है.

2026 विधानसभा चुनाव: इन 5 राज्यों की सत्ता में कौन है, जानें हर राज्य की मौजूदा सरकार

नईदिल्ली  भारतीय राजनीति के लिए 2026 का साल बेहद अहम रहने वाला है। अगले कुछ ही महीनों में देश के 5 राज्यों असम, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ये चुनाव भले ही विधानसभा के लिए हो रहे हों, पर राष्ट्रीय राजनीति को भी बहुत मजबूती से प्रभावित करेंगे। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी अपनी सत्ता को कई नए राज्यों में स्थापित करने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ विपक्ष, खासकर कांग्रेस और क्षेत्रीय दल, देश की सबसे बड़ी पार्टी को कोई मौका नहीं देना चाहते हैं। ये विधानसभा चुनाव काफी हद तक ये भी बताने में कामयाब होंगे कि मोदी सरकार की नीतियां कितनी असरदार हैं और विपक्ष कितना एकजुट है। आइए, एक-एक करके इन राज्यों की मौजूदा सरकार, सियासी हालात और चुनावों की अहमियत पर नजर डालते हैं। 1: पश्चिम बंगाल में ममता के सामने बड़ी चुनौती पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस की सरकार है, जिसने 2021 के विधानसभा चुनावों में 213 सीटें जीतीं और 48% वोट शेयर हासिल किया। ममता की लोकप्रियता और कल्याण योजनाएं उनकी ताकत हैं, लेकिन आर्थिक चुनौतियां और गवर्नेंस के विवाद उनकी सरकार पर भारी पड़ सकते हैं। बीजेपी 2021 में 77 सीटों तक पहुंची थी और अब बिहार में बड़ी जीत के बाद काफी आक्रामक है। कांग्रेस यहां कमजोर हो चुकी है और नेतृत्व के अभाव से जूझ रही है। अगर बीजेपी बंगाल में कुछ अच्छा कर जाती है तो यह उसकी राजनीति के लिए एक बहुत बड़ा बूस्ट साबित हो सकता है। वहीं, TMC की हार उसे उन क्षेत्रीय पार्टियों की लिस्ट में डाल सकती है जो एक समय किसी राज्य में बहुत ताकतवर थीं लेकिन धीरे-धीरे कमजोर होती चली गईं। 2: असम में बीजेपी ने बनाई है मजबूत पकड़ असम में फिलहाल हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार है। 2021 के चुनाव में बीजेपी गठबंधन ने 75 सीटें जीतीं और अब लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की तैयारी कर रहा है। शर्मा ने पिछले कुछ सालों में बीजेपी के फायरब्रांड नेता के साथ-साथ एक ऐसे लीडर की छवि बनाई है जो विकास, सुरक्षा और पहचान की राजनीति पर जोर देता है। वहीं, विपक्ष में कांग्रेस गौरव गोगोई के नेतृत्व में अपनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। मुस्लिम वोटों के दम पर अपनी ताकत का प्रदर्शन करने वाली AIUDF जैसी पार्टियां भी आने वाले विधानसभा चुनावों में काफी कुछ तय करेंगी। ये चुनाव बीजेपी के लिए पूर्वोत्तर में अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका है, तो वहीं अगर कांग्रेस यहां अच्छा करती है तो विपक्ष के लिए बड़ा बूस्ट होगा। 3: तमिलनाडु में नए चेहरों से होगी DMK की जंग तमिलनाडु में एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी कि DMK सरकार है, जिसने 2021 में 234 में से 133 सीटें जीतीं थीं। इस सूबे में चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं से 1.86 करोड़ लोग लाभान्वित हुए हैं और पार्टी करीब 2.5 करोड़ वोटों का लक्ष्य लेकर चल रही है। हालांकि बेरोजगारी जैसे मुद्दे पार्टी पर भारी पड़ सकते हैं और एंटी-इनकंबेंसी फैक्टर तो है ही। वहीं, दूसरी तरफ AIADMK-बीजेपी गठबंधन भी अपना पूरा दम लगाए हुए है, जबकि विजय की TVK नई पार्टी के रूप में युवाओं को आकर्षित कर रही है। तमिलनाडु में जीत बीजेपी के लिए ऑर्गेनिक ग्रोथ का बड़ा मौका हो सकती है, जहां हिंदुत्व की सीमाएं हैं। वहीं, विपक्ष के लिए DMK की हार INDIA ब्लॉक को कमजोर करेगी। 4: केरल में फिर से जाग गई है कांग्रेस की उम्मीद केरला में पिनाराई विजयन की लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी कि LDF की सरकार है, जिसने 2021 में 99 सीटें जीतीं। यह गठबंधन एक बार फिर सत्ता में वापसी चाहता है लेकिन पिछले कुछ महीने इसके लिए अच्छे नहीं रहे हैं। विजयन सरकार का सामाजिक कल्याण और विकास पर जोर है, लेकिन आर्थिक चुनौतियां और मुख्यमंत्री की ऑटोक्रेटिक स्टाइल एक बड़ा माइनस पॉइंट है। 2025 स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस-UDF ने अच्छा प्रदर्शन किया, जो LDF के लिए चिंता की बात है। वहीं, बीजेपी ने भी इन चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया है और वह अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर करने की कोशिश में है। कुल मिलाकर इन चुनावों में लेफ्ट, कांग्रेस और बीजेपी, तीनों का बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है। 5: NDA के लिए आसान नहीं होगी पुडुचेरी में वापसी पुडुचेरी में एन. रंगासामी के नेतृत्व में ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस यानी कि AINRC और बीजेपी का गठबंधन सत्ता में है। 2021 में 30 सीटों वाली विधानसभा में AINRC ने 10 और बीजेपी ने 6 सीटें जीती थीं, लेकिन फिलहाल गठबंधन में सब कुछ अच्छा होता नहीं दिख रहा। विपक्ष में DMK और कांग्रेस जैसी पार्टियां इस छोटे लेकिन महत्वपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश की सत्ता पर अपना दावा मजबूती से पेश करती दिख रही हैं। लोकल गवर्नेंस और विकास के मुद्दे प्रमुख हैं, ऐसे में ये चुनाव बीजेपी के लिए दक्षिण में गठबंधन बचाने का टेस्ट है, जहां एंटी-इनकंबेंसी है। वहीं, अगर कांग्रेस और DMK की फिर से हार होती है तो उनके लिए पुडुचेरी में अपना संगठन बचाना मुश्किल हो सकता है। बीजेपी के लिए सुनहरा मौका हैं ये विधानसभा चुनाव कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इन 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए दक्षिण और पूर्व में विस्तार का सुनहरा मौका हैं, जहां वह हिंदुत्व और मोदी ब्रांड पर दांव लगा रही है। 2025 में दिल्ली और बिहार में जीत से उसका मनोबल ऊंचा है। विपक्ष के लिए ये बाउंस बैक का टेस्ट हैं, और लेफ्ट की हार से INDIA ब्लॉक कमजोर हो सकता है, जबकि कांग्रेस की जीत उसे नई ऊर्जा देगी। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि 2026 के नतीजे 2029 के लोकसभा चुनावों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

योगी सरकार का बड़ा कदम, यूपी के हर जिले का जायका अब पहुंचेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार तक

लखनऊ   उत्तर प्रदेश के पारंपरिक और प्रसिद्ध व्यंजन अब सिर्फ प्रदेश या देश तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि जल्द ही पूरी दुनिया उनकी खुशबू और स्वाद से रूबरू होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस माह ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) की तर्ज पर ‘एक जिला एक व्यंजन’ (ODODC) योजना का शुभारंभ करने जा रहे हैं। इस योजना के तहत प्रदेश के हर जिले के खास व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाई जाएगी और उनकी देश-विदेश में आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। 150 पारंपरिक व्यंजनों की सूची तैयार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग ने योजना के लिए प्रदेशभर से करीब 150 पारंपरिक व्यंजनों की सूची तैयार की है। प्रत्येक जिले से कम से कम एक प्रसिद्ध व्यंजन को शामिल किया गया है। चयनित व्यंजनों की सूची मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, यूपी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योजना का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। ODOP की सफलता के बाद ODODC पर दांव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 जनवरी 2018 को उत्तर प्रदेश दिवस के मौके पर एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना की शुरुआत की थी। निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 में प्रदेश से 1.70 लाख करोड़ रुपये का निर्यात हुआ, जिसमें 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी एक जिला एक उत्पादों की रही। इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए अब सरकार खाद्य उत्पादों पर फोकस कर रही है। विदेशी बाजार के लिए मिलेगा प्रमाणीकरण एक जिला एक व्यंजन (ODODC) योजना के तहत शामिल व्यंजनों को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से प्रमाणित कराया जाएगा, ताकि विदेशों में बिक्री के दौरान किसी तरह की दिक्कत न हो। इसके साथ ही सरकार व्यंजनों को GI टैग दिलाने में भी मदद करेगी। उल्लेखनीय है कि एक जिला एक व्यंजन योजना के तहत अब तक 77 उत्पादों को GI टैग मिल चुका है। पैकेजिंग, प्रमोशन और सस्ता ऋण सरकार कारोबारियों को भारतीय पैकेजिंग संस्थान के माध्यम से आधुनिक पैकिंग का प्रशिक्षण दिलाएगी। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगने वाले फूड फेयर और प्रदर्शनियों में इन उत्पादों के प्रचार-प्रसार में भी मदद करेगी। कारोबार को बढ़ावा देने के लिए व्यापारियों को 25 प्रतिशत सब्सिडी पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। दुनिया की जुबान पर चढ़ेगा यूपी का स्वाद यूनेस्को द्वारा हाल ही में लखनऊ को ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ का दर्जा दिया गया है। एक जिला एक व्यंजन योजना के बाद लखनऊ के व्यंजन वैश्विक पहचान हासिल करेंगे। सूची में लखनऊ की रेवड़ी, मक्खन मलाई और आम से बने उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा, वाराणसी की तिरंगा बर्फी, मलाई मिठाई, बलिया का सत्तू, आगरा का पेठा, मथुरा का माखन- मिस्री, बाराबंकी का चंद्रकला, फर्रुखाबाद का दालमोट, शाहजहांपुर की लौंग बर्फी, सिद्धार्थनगर का मखाना, गोरखपुर का लिट्टी-चोखा, कानपुर का लड्डू, मेरठ की रेवड़ी व गजक सहित प्रदेश के अन्य जिलों के पारंपरिक व्यंजनों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।  

नया इनोवेशन: AIIMS और IIT ने बनाई पोर्टेबल 3D एक्स-रे यूनिट, एआई तकनीक से होगी त्वरित जांच

भोपाल   भारत में सड़क हादसों और ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर इलाज न मिल पाना मौतों का सबसे बड़ा कारण है। विशेषकर सीटी स्कैन जैसी जांचों के लिए बड़े शहरों पर निर्भरता के चलते मरीज 'गोल्डन आवर' में दम तोड़ देते हैं। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए AIIMS भोपाल और IIT इंदौर ने हाथ मिलाया है। दोनों संस्थान मिलकर दुनिया की पहली ऐसी एआई-बेस्ड पोर्टेबल 3D एक्स-रे यूनिट विकसित कर रहे हैं, जो अस्पताल पहुंचने से पहले ही सीटी स्कैन जैसी हाई-डेफिनेशन रिपोर्ट दे सकेगी। ICMR ने दी 8 करोड़ की फंडिंग भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने इस क्रांतिकारी प्रोजेक्ट को अपनी मंजूरी दे दी है। देशभर से प्राप्त 1224 रिसर्च प्रस्तावों में से केवल 38 का चयन किया गया, जिनमें मध्य प्रदेश से एकमात्र इसी प्रोजेक्ट को चुना गया है। इसके विकास के लिए ICMR ने 8 करोड़ रुपये की फंडिंग स्वीकृत की है। कैसे काम करेगी यह तकनीक? वर्तमान में सीटी स्कैन मशीनें भारी और महंगी होती हैं, जिन्हें एंबुलेंस में नहीं ले जाया जा सकता। इसके उलट नई यूनिट पूरी तरह पोर्टेबल होगी। कम रेडिएशन: यह मशीन सामान्य सीटी स्कैन की तुलना में 500 गुना कम रेडिएशन उत्सर्जित करेगी। AI का कमाल: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से यह यूनिट एक्स-रे इमेज को मल्टी-एंगल से कैप्चर कर 3D इमेज में बदल देगी। तत्काल रिपोर्ट: जांच रिपोर्ट सीधे मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर देखी जा सकेगी, जिससे डॉक्टर मौके पर ही चोट की गंभीरता का मूल्यांकन कर सकेंगे। तीन चरणों में होगा विकास प्रोजेक्ट के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. बी.एल. सोनी और डॉ. अंशुल राय ने नवभारत टाइम्स डॉट कॉम को बताया कि इस मशीन को तीन चरणों में तैयार किया जाएगा। पहले चरण में सिर और चेहरे (फेस एंड हेड) की इमेजिंग, दूसरे में फुल-बॉडी स्कैनिंग और तीसरे चरण में कैंसर रेडिएशन मैपिंग के लिए यूनिट तैयार की जाएगी। बचेगी हजारों की जान अकेले मध्य प्रदेश में हर साल करीब डेढ़ लाख लोग सड़क हादसों का शिकार होते हैं। यह मशीन एंबुलेंस और आपदा स्थलों पर तैनात की जा सकेगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को बिना रेफर किए तत्काल सटीक इलाज मिल सकेगा। सफल परीक्षण के बाद इसे व्यावसायिक रूप से बाजार में उतारने की योजना है ताकि दुनिया भर में आपातकालीन चिकित्सा को सस्ता और सुलभ बनाया जा सके।  

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य तिलहन मिशन का गठन, कृषि क्षेत्र में नई पहल

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य तिलहन मिशन का गठन भोपाल राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (NMEO-OS) के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य तिलहन मिशन का गठन किया गया है।समिति में कृषि उत्पादन आयुक्त , सहकारिता, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण/ फूड प्रोसेंसिंग इंडस्ट्रीज, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वित्त, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, कुलपति, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर/ राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर, आयुक्त/ संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास, निदेशक भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इन्दौर म.प्र, प्रभारी अधिकारी नाबार्ड, समन्वयक स्टेट लेवल बैंकर समिति, तिलहन क्षेत्र में कार्यरत एफपीओ/ को-ऑपरेटिक्स के दो प्रतिनिधि (प्रत्येक से एक) , बीज एवं खाद्य तेल उत्पादक उद्योग से संबंधित दो प्रतिनिधि(प्रत्येक से एक-एक) , भारत सरकार, कृषि मंत्रालय द्वारा नामित अधिकारी (संयुक्त सचिव स्तर) सदस्य होंगे। किसान कल्याण तथा कृषि विकास (राज्य मिशन संचालक NMEO-OS) को सदस्य-सचिव नामित किया गया हैं।     राज्य तिलहन मिशन की बैठक का आयोजन कृषि उत्पादन आयुक्त, म.प्र. शासन की अध्यक्षता में किया जा सकेगा। मिशन के दायित्व अंर्तगत मिशन के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, मिशन में निहित समग्र नीति दिशा-निर्देशों के भीतर राज्य में मिशन कार्यान्वयन की समग्र निगरानी की जायेगी। राज्य को सौंपे गए क्षेत्र, उत्पादन,  और उत्पादकता लक्ष्यों और इसकी निगरानी के आधार पर तिलहन की खेती और उत्पादन के लिए राज्य तिलहन कार्य योजना को अंतिम रूप देना , कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार को प्रस्तुत करने से पहले मिशन के लक्ष्यों और उद्देश्यों के अनुरूप संभावित और वार्षिक राज्य कार्य-योजना को अंतिम रूप देना, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को प्रस्तुत नियमित रिपोर्टों के साथ प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों पर नजर रखकर राज्य स्तर पर मिशन की प्रगति की निगरानी की जायेगी। समिति द्वारा आवश्यक बुनियादी ढांचे (इंफास्ट्रक्चर) और कटाई के बाद प्रसंस्करण सुविधाओं आदि को विकसित करने के लिए राज्य स्तरीय वित्तीय संसाधन आवंटन की देखरेख करना, जिला मिशनों, मूल्य श्रृंखला भागीदारों और तकनीकी सहायता एजेंसियों के कामकाज और प्रगति की निगरानी करना और उनकी दक्षता बढ़ाने के लिए निर्देश जारी करना और एस.ओ.पी निर्धारित करना, प्रमुख मिशन के कार्यान्वयन को सुव्यवस्थित करने तथा इसे राज्य कृषि नीतियों और विकास योजनाओं के साथ जोडने के लिए संबंधित विभागों (कृषि, सिंचाई वित्त. ग्रामीण विकास आदि) के साथ समन्वय करके अन्य केन्द्रीय और राज्य योजनाओं के साथ अभिसरण सुनिश्चित करने के कार्य किए जाएंगे।  

आज लाड़ली बहनों के खाते में 32वीं किस्त, सीएम मोहन यादव करेंगे डिजिटल ट्रांसफर

 नर्मदापुरम  मध्यप्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए आज 16 जनवरी की सुबह खुशखबरी होगी। लाड़ली बहना योजना की 32वीं किस्त उनके खातों में ट्रांसफर की जाएगी। सीएम डॉ. मोहन यादव नर्मदापुरम के माखननगर दौरे पर रहेंगे और इस दौरान बहनों के खातों में 1500 रुपये सिंगल क्लिक के माध्यम से भेजे जाएंगे। यह राशि पहले 15 जनवरी को जारी होने वाली थी, लेकिन कार्यक्रम एक दिन के लिए स्थगित किया गया। सीएम डॉ.मोहन यादव करेंगे लोकार्पण और भूमिपूजन माखननगर के सांदीपनि स्कूल के पास खेल मैदान में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में सीएम डॉ.मोहन यादव उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा वे PWD गेस्ट हाउस का लोकार्पण करेंगे और कई अन्य विकास कार्यों का भूमिपूजन भी करेंगे। 31वीं किस्त कब जारी हुई थी मध्यप्रदेश के सीएम डॉ.मोहन यादव ने 1.26 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में 31वीं किस्त के 1500 रुपये 9 दिसंबर को छतरपुर के राजनगर से ट्रांसफर किए थे। अब 32वीं किस्त माखननगर से जारी की जाएगी। लाड़ली बहनों को 3 हजार रुपये कब मिलेंगे? लाड़ली बहना योजना से अब तक 1 करोड़ 29 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। मध्यप्रदेश सरकार के अनुसार आने वाले वर्षों में यह राशि बढ़ाकर 2028 तक 3000 रुपये प्रति माह करने का लक्ष्य रखा गया है। हर महीने मिलते हैं 1500 रुपये मध्य प्रदेश सरकार इस योजना के तहत हर पात्र महिला को हर महीने 1500 रुपये देती है. शुरुआत में यह रकम 1000 रुपये थी, फिर 1250 रुपये की गई और अब दिसंबर 2025 से इसे बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया गया है. यानी एक साल में एक महिला को करीब 18000 रुपये की सीधी मदद मिल रही है. 1 करोड़ 29 लाख से ज्यादा महिलाओं को मिल रहा लाभ इस योजना से अभी 1 करोड़ 29 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हुई हैं. मतलब साफ है कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को 32वीं किस्त का फायदा मिलेगा. सरकार का कहना है कि आने वाले सालों में इस रकम को और बढ़ाया जाएगा और 2028 तक इसे 3000 रुपये महीना करने का लक्ष्य है. लाडली बहना योजना क्या है ? बता दें कि लाडली बहना योजना की शुरुआत साल 2023 में की गई थी. इसका मकसद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि वे छोटे खर्चों के लिए किसी पर निर्भर न रहें. यह पैसा रोजमर्रा की जरूरतों, दवा, राशन और बच्चों की पढ़ाई में काफी मदद करता है. कौन महिलाएं योजना के लिए पात्र हैं? इस योजना का लाभ वही महिलाएं ले सकती हैं जो मध्य प्रदेश की निवासी हों. महिला विवाहित होनी चाहिए, जिसमें विधवा, तलाकशुदा और छोड़ी गई महिलाएं भी शामिल हैं. महिला की उम्र 21 साल से ज्यादा और 60 साल से कम होनी चाहिए. पैसा सीधे महिला के आधार लिंक बैंक खाते में भेजा जाता है. किन महिलाओं को नहीं मिलेगा पैसा?     अगर किसी महिला या उसके परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये से ज्यादा है, तो उसे योजना का लाभ नहीं मिलेगा. जिनके परिवार में कोई भी सदस्य इनकम टैक्स भरता है, उन्हें भी इस योजना से बाहर रखा गया है.      इसके अलावा जिनके परिवार में कोई सरकारी नौकरी करता है या पेंशन लेता है, उन्हें भी पैसा नहीं मिलेगा. आपके खाते में पैसा आएगा या नहीं, ऐसे करें चेक अगर आपको शक है कि आपका नाम लिस्ट में है या नहीं, तो इसे चेक करना बहुत आसान है.      इसके लिए आपको योजना की आधिकारिक वेबसाइट cmladlibahna.mp.gov.in पर जाना होगा.      वहां अंतिम सूची वाले विकल्प में अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालें     कैप्चा भरें और ओटीपी डालते ही पूरी डिटेल लिस्ट सामने आ जाएगी. मैसेज नहीं आया तो घबराएं नहीं कई बार बैंक की तरफ से मैसेज देर से आता है. ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है. आप अपने बैंक का बैलेंस मिनी स्टेटमेंट, मोबाइल बैंकिंग ऐप या *99# सर्विस से भी पैसे चेक कर सकती हैं. महिलाओं के लिए क्यों खासहै यह योजना अगर देखा जाए तो लाडली बहना योजना से हर महिला को महीने में 1500 रुपये मिलते हैं. यानी साल भर में यह रकम 18000 रुपये हो जाती है.आज के समय में जब महंगाई लगातार बढ़ रही है, तब यह योजना महिलाओं के लिए राहत बनकर आई है. यह पैसा सीधे खाते में आता है और किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं होती, जिससे भरोसा भी बना रहता है. गांव और छोटे शहरों में यह पैसा घर के छोटे खर्चों के लिए बहुत बड़ा सहारा बन चुका है. कब शुरू हुई थी लाड़ली बहना योजना     मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लाड़ली बहना योजना मई 2023 में शुरू की गई थी। योजना के उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना, परिवार में उनके निर्णय अधिकार को मजबूत करना तथा स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सतत सुधार सुनिश्चित करना है।     10 जून 2023 को योजना की पहली किस्त जारी की गई थी। योजना की शुरुआत में 1000 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती थी, जिसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 1,250 रुपये किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः 250 रुपये की वृद्धि की गई।     इसके अतिरिक्त अगस्त 2023, 2024 व 2025 में रक्षाबंधन के मौके पर 250 रुपये की विशेष सहायता राशि भी बहनों को प्रदान की गई। वर्तमान में सामान्य हितग्राही महिलाओं को 1500 रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रही महिलाओं को 900 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं।     योजना की शुरुआत (जून 2023) से लेकर दिसंबर 2025 तक लगभग 48,632 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में भेजी जा चुकी है। योजना में किसे मिलता है लाभ पात्रता:     मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी हो।     विवाहित महिला के साथ निर्धन, विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता महिलाएं भी शामिल हैं।     21 से 60 वर्ष तक की आयु की महिलाएं पात्रता के दायरे में आती हैं। अपात्र:     स्वयं/ परिवार की सम्मिलित रूप से स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख से अधिक हो या आयकरदाता हो।     ​जिनके पास संयुक्त रूप से 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि हो। ​जिनके परिवार के पास चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर … Read more

चुनौतियाँ तो बहुत, लेकिन भारत में है ताकत: वर्ल्ड बैंक और अब इस एजेंसी की अहम टिप्पणी

नई दिल्ली इंडियन इकोनॉमी लगातार दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं (India Fastest Growing Economy) में बना हुआ है. देश की ही नहीं, बल्कि तमाम ग्लोबल एजेंसियों ने भारत की तेज रफ्तार का लोहा माना है. एक ही दिन में मोदी सरकार के लिए विदेश से दो गुड न्यूज आईं. पहले वर्ल्ड बैंक (World Bank) ने भारत की जीडीपी ग्रोथ (India GDP Growth) के अनुमान में तगड़ा इजाफा किया, तो उसे तुरंत बाद विदेश से एक और खुश करने वाली खबर डेलॉयट ने दी और कहा कि Indian Economy रुकने वाली नहीं है, तमाम चुनौतियों के बाद भी इसकी रफ्तार तेज रहेगी.  इस रफ्तार से दौड़ेगी भारत की इकोनॉमी Deloitte ने वित्त वर्ष 2026 में इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ रेट 7.5% से 7.8% रहने का अनुमान जताया है. एजेंसी ने कहा है कि मजबूत घरेलू डिमांज और सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में मजबूती के चलते देश की रफ्तार तेज रहेगी.  डेलॉयट इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल ट्रेड टेंशन और ट्रंप टैरिफ की वजह से व्यापार में व्यवधान, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में नीतिगत बदलाव और अस्थिर कैश फ्लो समेत कई वैश्विक चुनौतियों के बावजूद FY26 की पहली छमाही में भारत नॉमिलन जीडीपी में 8% की ग्रोथ के साथ आर्थिक प्रदर्शन की दृष्टि से बेहतर बना हुआ है.  भारत पर भरोसा जताते हुए एजेंसी ने आगे कहा कि यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब भारत को रिकॉर्ड विदेशी निवेशकों की बिकवाली और करेंसी में गिरावट समेत तमाम महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, लेकिन घरेलू सुधारों और त्योहारी डिमांड ने पॉजिटिव आउटलुक को बल दिया है.  भारत की दनादन डील से राहत रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने नई फ्री ट्रेड डील्स (Free Trade Deals) के जरिए अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाई है. देश ने ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ समझौते किए हैं, जबकि इजराइल संग बातचीत शुरू ट्रेड और इन्वेस्टमेंट संबंधों का विस्तार किया है. डेलॉयट ने कहा कि बाहरी जोखिम अभी भी हाई हैं, लेकिन 2025-26 में इनका पूरा प्रभाव नहीं दिखेगा, हालांकि FY2026-27 में वैश्विक अनिश्चितताओं से ग्रोथ रेट में थोड़ी कमी आ सकती है और ये 6.6-6.9% रह सकती है.  World Bank ने भी दी खुशखबरी  डेलॉयट से पहले वर्ल्ड बैंक ने भी भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को बढ़ाते हुए (World Bank Rise India's GDP Growth Forecast) 7.2% कर दिया, इससे पहले जून 2025 में जताया गया अनुमान 6.3% था, जिससे ये 0.9 फीसदी ज्यादा है. विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई इंडियन इकोनॉमी की रफ्तार पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव बेहद सीमित रहेगा.  विश्व बैंक ने अमेरिकी टैरिफ में वृद्धि (US Tariff Hike) के बावजूद मजबूत घरेलू डिमांड का हवाला देते हुए FY2026 के लिए ग्रोथ अनुमान बढ़ाया है. रिपोर्ट में कहा गया कि घरेलू मांग में उम्मीद से अधिक मजबूती और उपभोग के बेहतर रुझानों के चलते भारत पर अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी का असर कम रहेगा. सरकार द्वारा की गई टैक्स कटौती (Govt Tax Cut) और ग्रामीण आय में वृद्धि से घरेलू खपत में मजबूती आई है, जिसके चलते भारत का आउटलुक बेहतर नजर आ रहा है.