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राहुल गांधी ने इंदौर के भागीरथपुरा की संकरी गलियों में पैदल चलकर दूषित जल पीड़ितों से की मुलाकात

इंदौर भागीरथपुरा दूषित जल कांड से प्रभावित लोगों और मृतकों के परिजनों से मिलने के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को पहुंचे। उन्होंने बॉम्बे अस्पताल में भर्ती मरीजों से मुलाकात की और फिर भागीरथपुरा बस्ती जाकर पीड़ित परिवारों से मिले। इस दौरान उन्होंने मृतक गीता बाई और जीवन माली के परिजनों से भी मुलाकात की। सुरक्षा कारणों से कुछ बड़े नेताओं को अस्पताल के बाहर ही रोक दिया गया था। 15 मिनट अस्पताल में रहे राहुल गांधी ने बॉम्बे अस्पताल में करीब 15 मिनट बिताए। वहां उन्होंने भर्ती मरीजों से मिलकर उनका हालचाल जाना। उनके साथ दिग्विजय सिंह, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार और कमल नाथ भी मौजूद थे। मृतकों के घर जाकर दी सांत्वना इसके बाद राहुल गांधी भागीरथपुरा बस्ती के लिए रवाना हुए। वहां उन्होंने दूषित पानी से जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने सबसे पहले मृतक गीता बाई के घर जाकर उनके परिजनों से बात की। फिर वे मृतक जीवन माली के घर पहुंचे, जिनकी मौत भी दूषित पानी के कारण हुई थी। इस दौरान भीड़ की धक्का-मुक्की से वे थोड़े नाराज भी हुए। मासूम के परिजनों से भी मिले राहुल गांधी संस्कार गार्डन में 5 महीने के अव्यान के परिजन और अन्य पीड़ित परिवारों से भी मिलेंगे। कांग्रेस ने प्रशासन को पीड़ित परिवारों से मिलने के लिए चार घरों की सूची सौंपी है। कांग्रेस ने घोषणा की है कि दूषित जल कांड में जान गंवाने वाले सभी 24 मृतकों के परिवारों को एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।  

ड्रग फैक्ट्री की मास्टरमाइंड दिलावर की बेटी, पिता की दो पत्नियां, और याकूब का गुजरात पुलिस का मोस्ट वांटेड होना

रतलाम   रतलाम जिले में पकड़ी गई एमडी ड्रग्स बनाने वाली फैक्ट्री के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, सामने आया है कि दिलावर खान यूपी के नगीना से सांसद चंद्रशेखर का करीबी है। वह कई बार उनके घर पर मिलने पहुंचा है। वह सांसद की पार्टी का सदस्य है। जावरा से चुनाव लड़ चुका है दिलावर  रतलाम जिले में पकड़ी गई एमडी ड्रग्स बनाने वाली फैक्ट्री के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, सामने आया है कि दिलावर खान यूपी के नगीना से सांसद चंद्रशेखर का करीबी है। वह कई बार उनके घर पर मिलने पहुंचा है। वह सांसद की पार्टी का सदस्य है। जावरा से चुनाव लड़ चुका है दिलावर बता दें कि आरोपी दिलावर पठान जावरा से सांसद चंद्रशेखर की पार्टी का सदस्य है। आरोपी दिलावर पठान 2023 में जावरा से भी विधान सभा चुनाव लड़ चुका है। जांच में सामने आया है कि दिलावर खान की बेटी बखमीना पति याकूब खान केमेस्ट्री की छात्रा रही है। पुलिस के अनुसार एमडी ड्रग बनाने के फॉर्मूले की मास्टरमाइंड वही है। ड्रग निर्माण से लेकर पूरे अवैध कारोबार में उसकी अहम भूमिका बताई जा रही है, जिसमें उसके पति और पिता भी शामिल थे। बताया गया है कि बखमीना राजस्थान के देवलजी में भी अपने पति के एमडी ड्रग के नेटवर्क को संभालती थी। उसका पति याकूब खान गुजरात पुलिस का मोस्ट वांटेड फरार आरोपी बताया जा रहा है, जो लंबे समय से अपने ससुराल चिकलाना में छिपकर रह रहा था। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान उसे घर से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस सभी आरोपियों को आज (17 जनवरी) को कोर्ट में पेश करेगी। आरोपियों का पुलिस रिमांड मांगा जाएगा, ताकि इनसे आगे की पूछताछ हो सके। इनके लिंक कहां-कहां तक हैं, पुलिस ये पता करने की कोशिश करेगी। बता दें पुलिस ने गुरुवार (15 जनवरी) देर रात फैक्ट्री में छापा मारकर करीब दस करोड़ कीमती करीब 11 किलो एमडी ड्रग्स बरामद किया था। जानिए दिलावर खान ने कैसे खुद को बचाने की प्लानिंग कर रखी थी…? मकान के बाहर दो अलग-अलग नेम प्लेट दिलावर खान ने अपने मकान के बाहर दो अलग-अलग नेम प्लेट लगा रखी थीं। एक नेम प्लेट में उसने अपने नाम के साथ जय भीम, जय भारत लिखते हुए खुद को अखिल भारतीय अनुसूचित जाति युवजन समाज का संभाग अध्यक्ष बताया रखा था। वहीं दूसरी नेम प्लेट में उसने खुद को पत्रकार लिखा था। मकान में 4 अलग-अलग एंट्री और एग्जिट मकान को इस तरह तैयार किया गया था कि उसमें चार अलग-अलग प्रवेश और निकासी के रास्ते थे। हर रास्ते पर सीसीटीवी कैमरे लगाए, ताकि आने-जाने वालों पर लगातार नजर रखी जा सके। ग्रामीणों को पहले से ही जानकारी थी कि दिलावर खान अनैतिक गतिविधियों में लिप्त है, लेकिन उसका इतना भय था कि कोई खुलकर विरोध या शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। पुलिस की कार्रवाई के दौरान जब परिवार के सदस्यों को हिरासत में लिया जा रहा था, तब गांव में लोगों ने जय-जय श्रीराम के नारे लगाए। रात ढाई बजे दबिश, महिलाओं ने किया विरोध पुलिस ने गुरुवार रात करीब ढाई बजे मकान की दीवारों पर सीढ़ी लगाकर अंदर प्रवेश किया। इस दौरान घर की महिलाओं ने विरोध किया और पुलिस के साथ झूमाझटकी तक की स्थिति बन गई। पुलिस ने इस मामले में दिलावर खान समेत उसकी पत्नी, बेटे, बहू और नौकर सहित कुल 16 लोगों को आरोपी बनाया है। सभी के खिलाफ एमडी ड्रग निर्माण और अवैध गतिविधियों से जुड़े आरोपों की जांच जारी है। पुलिस वर्दी और राइफल और आर्मी की आईडी मिली पुलिस की दबिश के दौरान दिलावर के घर से पुलिस की वर्दी भी बरामद हुई, जिस पर दो स्टार लगे हुए हैं। इसके अलावा इंडियन आर्मी राइफल से संबंधित एक आईडी कार्ड भी मिला है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये वर्दी और पहचान पत्र किसके हैं और इन्हें किस मकसद से रखा गया था। ड्रग पाउडर को लिक्विड में मिलाकर नष्ट करने की कोशिश पुलिस ने बताया कि जब रात में मकान पर दबिश दी गई, उस वक्त एमडी ड्रग बनाने का काम चल रहा था। पुलिस को देखकर आरोपियों ने ड्रग पाउडर को लिक्विड में मिलाकर नष्ट करने की कोशिश की, ताकि सबूत मिटाए जा सकें। हालांकि पुलिस ने मौके से उस लिक्विड को भी जब्त कर लिया है। उसकी जांच कराई जा रही है। 1985-86 में दिलावर खान हत्या भी कर चुका है गांव के लोगों व पुलिस की मानें तो दिलावर के खिलाफ पूर्व से कई आपराधिक केस दर्ज है। हालांकि कई मामले में वह बरी हो चुका है। 1985-86 में दिलावर गांव के वरिष्ठ रुघनाथ धाकड़ की हत्या भी कर चुका है। परिवार की भी गांव में दबंगई है। पुलिस ने जिन 16 लोगों को आरोपी बनाया है उनमें सभी घर के सदस्य हैं। गांववाले बोले- दिलावर शुरू से आपराधिक प्रवृत्ति का चिकलाना के सरपंच प्रतिनिधि गड्‌डू सिंह चंद्रावत बताते है कि दिलावर खान शुरू से आपराधिक प्रवृत्ति का रहा है। वह जुआ-सट्‌टा, समेत कई गतिविधियों में शामिल रहा। 2023 में गांव में भगवान देवनारायण के जुलूस को मस्जिद के बाहर से निकलने के दौरान इसने और इसके भतीजे इमरान ने रोका था। पत्थरबाजी भी की थी। ब्याज पर रकम देकर कई लोगों की जमीनें हड़प रखी हैं गड्‌डू सिंह चंद्रावत कहते हैं, गांव में दिलावर का खौफ था। ब्याज से पैसा चलाता था। दस से 20 गुना वसूलने समेत कई लोगों की जमीनें हड़प रखी हैं। इसमें पूरा परिवार शामिल है। एक बार पंचायत की ओर से इसे नोटिस दिया गया था। तब मेरे ऊपर भी गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की। पुलिस ने कार्रवाई की है तो गांव के लोग खुशी मना रहे हैं। इससे प्रताड़ित होकर 10 से 20 लोग गांव छोड़कर भी जा चुके हैं। बड़ी-बड़ी गाड़ियां इसके यहां आती हैं। पहली पत्नी की उम्र 62 साल, दूसरी 25 साल की मुख्य आरोपी दिलावर खान (65) ने साल 2023 में जावरा विधानसभा सीट से आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव भी लड़ा था। दिलावर की दो शादियां सामने आई हैं। उसकी पहली पत्नी की उम्र करीब 62 साल बताई जा रही है, जबकि दूसरी पत्नी महज … Read more

क्या है किचन में सिंक और चूल्हा पास-पास रखने का वास्तु दोष? जानें इसका कारण और सही दिशा

वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन केवल भोजन बनाने की जगह नहीं, बल्कि घर की ऊर्जा और स्वास्थ्य का केंद्र होता है. किचन में मौजूद हर चीज का सही स्थान घर की सुख-शांति और आर्थिक स्थिति पर सीधा असर डालती है. इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण चीज है किचन सिंक, जिसका सही दिशा में होना बेहद जरूरी माना जाता है. आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार सिंक कहां होना चाहिए और किन बातों से बचना जरूरी है. किचन सिंक की शुभ दिशा वास्तु शास्त्र में किचन के सिंक के लिए ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को सबसे सही माना गया है. इस दिशा में रखा गया सिंक घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और समृद्धि को बढ़ावा देता है. साथ ही यह भी ध्यान रखें कि सिंक इस तरह से लगाया जाए कि बर्तन धोते समय व्यक्ति का मुंह उत्तर दिशा की ओर रहे. ऐसा करने से मानसिक शांति बनी रहती है और घर में खुशहाली आती है.  सिंक लगाने की गलत दिशाएं वास्तु के अनुसार दक्षिण-पश्चिम दिशा में किचन सिंक का होना अशुभ माना जाता है. इस दिशा में रखा सिंक पारिवारिक तनाव बढ़ा सकता है और घर में आपसी मतभेद की स्थिति पैदा कर सकता है. इसके अलावा इससे आर्थिक समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे धन का असंतुलन बना रहता है. गैस चूल्हे के पास न रखें सिंक वास्तु शास्त्र के अनुसार अग्नि और जल तत्व एक-दूसरे के विपरीत होते हैं. गैस चूल्हा अग्नि तत्व से जुड़ा होता है, जबकि किचन का सिंक जल तत्व का प्रतीक माना जाता है. अगर चूल्हा और सिंक एक-दूसरे के बहुत पास रखे हों, तो इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है और परिवार की शांति और खुशहाली पर असर पड़ता है. इसलिए वास्तु के अनुसार सिंक और चूल्हे के बीच थोड़ी दूरी रखना जरूरी माना जाता है. सिंक के नीचे डस्टबिन रखने से बचें किचन सिंक के नीचे डस्टबिन रखना भी वास्तु के लिहाज से सही नहीं माना जाता. इससे नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ सकता है, इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. बेहतर होगा कि डस्टबिन को किचन के किसी अलग और ढके हुए स्थान पर रखा जाए.

शंख भस्म: हड्डियों और जोड़ों के लिए अमृत, कैल्शियम से भरपूर लाभकारी तत्व

 आयुर्वेद में उपचार के लिए सदियों से दुर्लभ जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल होता आया है। जड़ी-बूटियों के गुण बड़े से बड़े रोग से मुक्ति दिलाने की शक्ति रखते हैं, लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि आयुर्वेद में भस्म के जरिए भी रोगों को दूर करने का काम पहले से होता आया है। हम बात कर रहे हैं शंख भस्म की, जिसे आयुर्वेद में चमत्कारी भस्म के नाम से जाना जाता है। शंख भस्म एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याओं के उपचार में किया जाता है। इसमें अम्लरोधी गुण होते हैं जो सीने में जलन और दर्द जैसे लक्षणों से राहत प्रदान करते हैं। रसशास्त्र में शंख को शुद्ध वर्ग के अंतर्गत एक खनिज के रूप में वर्णित किया गया है। शंख भस्म आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा दैनिक अभ्यास में उपयोग की जाने वाली महत्वपूर्ण भस्मों में से एक है। शंख भस्म का उपयोग पेट से जुड़े विकारों से लेकर हड्डियों और जोड़ों के विकारों को ठीक करने में किया जाता है, लेकिन ध्यान रखने वाली बात ये है कि बिना चिकित्सक के शंख भस्म का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इसे सीधा खाया नहीं जाता है, बल्कि किसी न किसी चीज में मिक्स कर इसका सेवन किया जाता है। ये स्वाद में तीखी होती है और रोग के अनुसार इसके सेवन की मात्रा तय की जाती है। अगर पेट की पाचन अग्नि कमजोर हो गई है, पेट में दर्द रहता है, गैस बनने की वजह से उल्टी की परेशानी या सिर में दर्द होता है, तो शंख भस्म का इस्तेमाल किया जा सकता है। शंख भस्म पाचन अग्नि को रीसेट करती है, जिससे खाना अच्छे से पचता है और पाचन की प्रक्रिया में सुधार आता है। शंख भस्म मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट होता है। यह हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने, ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने और दांतों की मजबूती को बनाए रखने में मदद करता है। अगर शरीर में कैल्शियम की कमी है, तब भी शंख भस्म का सेवन किया जा सकता है, लेकिन गर्भवती महिलाएं सेवन से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लें। शंख भस्म शरीर में वात और कफ दोषों को संतुलित करने का काम भी करती है। अगर ये दोनों ही दोष शरीर में असंतुलित हैं तो कई बीमारियों का जन्म होता है। इससे पेट से लेकर स्किन से जुड़ी परेशानियां होने लगती हैं। इसके अलावा, चेहरे के मुहांसों और दाग धब्बों से छुटकारा पाने के लिए भी शंख भस्म का लेपन और सेवन कर सकते हैं।

इंदौर में मेट्रो सेवा 25 जनवरी तक बंद, मार्च में रेडिसन चौराहे तक होगी नई शुरुआत

इंदौर इंदौर और भोपाल मेट्रो में ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। पहले यह जिम्मेदारी तुर्की की कंपनी असीस गार्ड को दी गई थी, लेकिन भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और पाकिस्तान द्वारा तुर्की ड्रोन के इस्तेमाल के बाद इस ठेके को निरस्त कर दिया गया था। दिल्ली मेट्रो को सौंपी गई जिम्मेदारी अब इंदौर और भोपाल मेट्रो में ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन का जिम्मा Delhi Metro Rail Corporation को सौंपा गया है। फिलहाल यात्री संचालन के दौरान टिकट स्थानीय स्तर पर मैनुअल और कंप्यूटर आधारित प्रणाली से जारी किए जा रहे थे। 11 दिन के लिए यात्री संचालन बंद रहेगा एलिवेटेड कॉरिडोर पर शेष तकनीकी कार्य और टेस्टिंग को पूरा करने के लिए मेगा ब्लॉक लिया गया है। इसके चलते 15 जनवरी से 25 जनवरी तक गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर के बीच 6 किलोमीटर के हिस्से में मेट्रो का यात्री संचालन पूरी तरह बंद रहेगा। वर्तमान में इसी हिस्से में सीमित यात्री संचालन हो रहा था। 17 किलोमीटर के कॉरिडोर की तैयारी तेज अधिकारियों के अनुसार पूरे 17 किलोमीटर के एलिवेटेड कॉरिडोर को फरवरी-मार्च तक व्यावसायिक संचालन के लिए तैयार किया जाना है। इस दौरान गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक के 16 स्टेशनों पर सिग्नलिंग, टेलीकम्युनिकेशन और अन्य तकनीकी कार्य पूरे किए जाएंगे। इसके बाद परीक्षण और कमिशनिंग की प्रक्रिया होगी। अंडरग्राउंड रूट पर अब भी फैसला बाकी Madhya Pradesh Metro Rail Corporation अभी तक इंदौर के अंडरग्राउंड रूट को लेकर अंतिम निर्णय नहीं ले सकी है। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार खजराना चौराहे से मेट्रो को अंडरग्राउंड किया जाना है, लेकिन इसके लिए कैबिनेट मंजूरी, सर्वे और पहले से स्वीकृत एलिवेटेड टेंडरों को निरस्त करने जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। एलिवेटेड कॉरिडोर पर फोकस अंडरग्राउंड रूट पर निर्णय लंबित रहने के बीच एयरपोर्ट, रीगल चौराहा सहित अन्य स्थानों पर स्टेशनों के लिए खुदाई का काम जारी है। वहीं 17 किलोमीटर के एलिवेटेड कॉरिडोर को जल्द से जल्द व्यावसायिक संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है। 

नेशनल हाईवे पर हादसे में फॉर्च्यूनर सवार पांच लोगों की मौत

बठिंडा. बठिंडा-बीकानेर नेशनल हाईवे पर आज सुबह दिल दहला देने वाली हादसा हो गया। घने कोहरे के कारण घटे दर्दनाक हादसे में महिला सहित कुल 5 लोगों की मौत हो जाने की खबर मिली है। बताया जा रहा है कि गांव गुरथड़ी के पास गुजरात नंबर की फॉर्च्यूनर बेकाबू होकर डिवाइडर से टकरा गई। इस दौरान गाड़ी में सवार सभी 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि इस हादसे की मुख्य वजह घने कोहरे के कारण कम विजिबिलिटी थी। वहीं जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने राहत कार्य शुरू किए। मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर एम्स अस्पताल के मुर्दाघर में रखवाया गया है और आगे की जांच की जा रही है।

चाइनीज मांझे के खिलाफ हाई कोर्ट की कड़ी कार्रवाई, पतंगबाजी पर हो सकती है प्रतिबंध

इंदौर  चाइनीज मांझे को लेकर हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई हुई। प्रतिबंधित नायलॉन थ्रेड (चाइनीज मांझा) शुक्रवार को अदालत में वकीलों ने पेश कर दिया। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की कोर्ट ने मांझा हाथ में लिया। पेंसिल पर इस्तेमाल किया तो पेंसिल कट गई। जजेस ने कहा कि पेंसिल कितनी मजबूत होती है, वो इस मांझे से कट गई। इस पर रोक जरूरी है। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की, यदि आप लोग कुछ नहीं कर पा रहे हैं तो हमें पतंगबाजी पर ही रोक लगानी पड़ सकती है। मौतों से नाराज कोर्ट ने स्वत: लिया संज्ञान इंदौर में 30 नवंबर को 17 वर्षीय किशोर की मौत हो गई थी। 7 दिसंबर को एक व्यक्त का गला कट गया था। घटनाओं से नाराज कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर याचिका दायर की थी। 12 जनवरी को किशोर गुलशन के परिजन की ओर से इंटरविनर याचिका दायर की गई थी। घायलों के फोटो देख दहल गया दिल- कोर्ट सुनवाई की शुरुआत में ही कोर्ट ने कहा, मांझे के कारण एक्सीडेंट और इससे घायलों के फोटो देख दिल दहल जाता है। हमारे स्टाफ ने जानकारी दी है कि कई जगह चाइनीज मांझे का इस्तेमाल हुआ। साफ समझ आता है कि आदेश का पालन नहीं हो पा रहा। सभी जब्त स्टॉक को माना जाए खतरनाक प्लास्टिक – चोट या मृत्यु की स्थिति में पीडि़तों या उनके परिवारों को मुआवजे के लिए नीति। – साइबर सेल को सभी प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और बी2बी प्लेटफॉर्म को नोटिस देने का निर्देश दिया जा सकता है। -सुनिश्चित किया जाए कि नायलॉन मांझा (चाइनीज मांझा), मोनो-काइट या सिंथेटिक स्ट्रिंग के रूप में सूचीबद्ध कोई भी उत्पाद राज्य में डिलीवर न हो। – निर्माण, भंडारण, बिक्री या उपयोग के संबंध में कार्रवाई योग्य जानकारी देने पर नाम गुप्त रखते हुए संबंधित को इनाम दिया जा सकता है। – यह मांझा गैर-बायोडिग्रेडेबल है और खुले में जलाने पर जहरीला धुआं निकलता है। -सभी जब्त स्टॉकों को खतरनाक प्लास्टिक कचरा माना जाना चाहिए। मालखानों में अनिश्चितकाल तक संग्रहित नहीं किया जाना चाहिए। अधिकृत संयंत्रों में भेजा जा सकता है। -कोई भी ट्रांसपोर्टर, कुरियर सेवा या परिवहन एजेंसी जो प्रतिबंधित मांझे वाले कार्टन ले जाते पाई जाती है, उसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा। – ऐन मौके पर कदम उठाने के बजाय संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को काफी पहले से प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। – अफसर चीनी नायलॉन धागे (मांझा) के निर्माण, बिक्री, भंडारण और उपयोग पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू करना सुनिश्चित करें। – संबंधित अथॉरिटी यह जांच और निगरानी करे कि उक्त धागा बाजार में न बेचा जाए। – राज्य सरकारें प्रिंट और सोशल मीडिया के ज़रिए आम जनता को जागरूक करने के लिए सामाजिक जागरुकता अभियान चलाएं। ई-कॉमर्स साइट पर बिक रहा इंटरविनर करने वाले वकील धर्मेन्द्र गुर्जर और लखन सिंह पंवार कोर्ट के समक्ष मांझा रखते हुए बताया कि ये मांझा 14 तारीख को उनके घर की छत पर पतंग के जरिए आया था। न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक शरण ने कहा कि कई ई-कॉमर्स साइट पर उक्त मांझा उपलब्ध है। वहां से लोग ऑर्डर कर रहे हैं। कोर्ट ने अपने पुराने सभी अंतरिम फैसलों का सख्ती से पालन कराने निर्देश जारी किए। नीति बनाने को दिया डेढ़ महीने का समय अदालत ने मुख्य सचिव को आदेश दिया कि वे इससे जुड़े सभी विभागों से समन्वय कर चाइनीज मांझे की बिक्री पर रोक लगाने एक नीति बनाएं। अमल करवाएं। कोर्ट ने अंतरिम निर्देश जारी कर सरकार को डेढ़ महीने का समय दिया है। अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी। केस- हाईनेक टी-शर्ट ने बचाई जान, होंठ कटा राजगढ़. छापीहेड़ा में शुक्रवार दोपहर बाइक सवार भारतसिंह राजपूत मांझे की चपेट में आ गया। उसके होंठ और चेहरा लहूलुहान हो गया। गनीमत रही कि युवक ने हाईनेक टीशर्ट पहन रखी थी, जिससे गला कटने से बच गया। युवक के होंठ पर पांच टांके लगे। सारस घायल, पंख पर मिले कट के निशान जबलपुर. मझौली थाना क्षेत्र में चाइनीज मांझे की चपेट में आने से सारस पक्षी घायल हो गया। वन अमले के अधिकारी उसे पशु चिकित्सालय ले गए। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार कर पट्टी बांधी। बताया कि चाइनीज मांझे से पंख पर कट के निशान मिले हैं।

पंजाब में कोहरे की आड़ में सक्रिय पाक ड्रोन बने BSF की चुनौती

गुरदासपुर. पाकिस्तानी तस्करों द्वारा घने कोहरे का फायदा उठाकर भारतीय सीमा में भेजे जा रहे ड्रोन एक बार फिर बीएसएफ, पंजाब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बन गए हैं। बीते वर्ष दिसंबर तक पंजाब की 553 किलोमीटर अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ ने लगभग 300 ड्रोन पकड़े थे, जिनमें गुरदासपुर सेक्टर की 134 किलोमीटर सीमा से सबसे अधिक गतिविधि देखी गई। इसके साथ बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ और हथियार भी बरामद किए गए थे। वीरवार रात कड़ाके की ठंड और कोहरे के बीच ड्रोन गतिविधि दो स्थानों पर दर्ज हुई, एक बीएसएफ की 27 बटालियन की बीओपी चंदू वडाला और दूसरी 113 बटालियन की बीओपी आबाद पोस्ट पर। आसमान में ड्रोन की आवाज सुनाई दी, लेकिन कोहरा इतना घना था कि कोई ड्रोन दिखाई नहीं दिया। सूचना मिलते ही थाना कलानौर और डेरा बाबा नानक के एसएचओ तथा बीएसएफ जवानों ने खेतों में व्यापक सर्च अभियान चलाया, परंतु कोई बरामदगी नहीं हुई। कोहरे के कारण दिक्कतें आ रही सीमा पर एंटी-ड्रोन डिवाइस तैनात होने के बावजूद कोहरे में आने वाले ड्रोन सुरक्षा तंत्र को चकमा दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी तस्कर चाइना मेड ड्रोन सहित 5 से 15 किलो भार वहन करने वाले हाई-रेंज ड्रोनों का प्रयोग करते हैं। बीएसएफ ने कई बार इन मंसूबों को नाकाम किया है और जवान लगातार सतर्क हैं। ड्रोन गतिविधि के दौरान बीएसएफ आकाश में आईएलएलयू बम (इल्युमिनेशन बम) का इस्तेमाल करती है, जो 300, 700 और 900 मीटर की ऊंचाई पर 35–45 सेकंड तक तेज रोशनी फैलाते हैं, ताकि संदिग्ध गतिविधि स्पष्ट दिखाई दे सके। गांवों में विलेज डिफेंस कमेटियां एक्टिव एसएसपी आदित्य ने बताया कि सीमा से सटे गांवों में पंजाब पुलिस ने विलेज डिफेंस कमेटियां गठित की हैं, जिनके सहयोग से कई बार तस्करों को पकड़ा गया है। उन्होंने कहा कि रात के समय नाकाबंदी और गश्त और अधिक कड़ी कर दी गई है, ताकि किसी भी नापाक हरकत को रोका जा सके।

राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई में आए उत्पीड़न के 35 प्रकरण

दुर्ग. छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में आज प्रेरणा सभा कक्ष, बालगृह परिसर महिला एवं बाल विकास कार्यालय, दुर्ग में महिला उत्पीड़न से संबंधित मामलों पर जनसुनवाई आयोजित की गई। इस अवसर पर प्रभारी सदस्य ओजस्वी मंडावी और सह प्रभारी लक्ष्मी वर्मा उपस्थित रहीं। आज की जनसुनवाई में जिले के कुल 35 प्रकरणों पर सुनवाई की गई। इसमें विभिन्न प्रकार के महिला उत्पीड़न, परिवारिक विवाद, संपत्ति बंटवारा और सामाजिक न्याय से जुड़े मामले शामिल थे। Also Read – रेरा में पंजीयन के बगैर जमीन की हो रही खरीदी-बिक्री एक प्रकरण में आवेदिका की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई को रायपुर स्थानांतरित किया गया। वहीं, एक अन्य प्रकरण जिसमें उच्च न्यायालय द्वारा पहले खारिज किया गया था, आयोग द्वारा सुनवाई के आदेश के बाद पुनः सुनवाई की गई। इसमें पुलिस जांच दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। उक्त मामले की अगली सुनवाई 11 फरवरी 2026 को रायपुर में निर्धारित की गई है।जनसुनवाई के दौरान एक गंभीर प्रकरण सामने आया जिसमें पति-पत्नी के बीच विवाद था और अवैध संबंधों के आरोप भी थे। आयोग की समझाइश के बाद पति ने पत्नी और पुत्र के समक्ष माफी मांगी, और दोनों पक्षों को पुनः साथ रहने का अवसर दिया गया। इसके पालन की निगरानी सखी केंद्र द्वारा की जाएगी। Also Read – रायपुर की बाल लेखिका को जानिए, बनना चाहती है IPS एक अन्य मामले में शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत वापस लेने और संबंधित व्यक्तियों की मृत्यु होने के कारण प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया। पारिवारिक संपत्ति विवाद के एक प्रकरण में आयोग की टीम ने मौके पर जाकर आवेदिका को भूमि का कब्जा दिलाने और सुलहनामा कराने का निर्णय लिया। न्यायालय में लंबित प्रकरणों को आयोग द्वारा नस्तीबद्ध किया गया। जनहित की शिकायत पर दर्ज एफआईआर को लेकर अनावेदक को एक माह में एफआईआर वापस लेने के निर्देश दिए गए, जिसकी अगली सुनवाई रायपुर में होगी। Also Read – बीजापुर में पुलिस और नक्सलियों में जबरदस्त मुठभेड़, 2 नक्सली ढेर संपत्ति बंटवारे से जुड़े एक प्रकरण में विधवा महिला को अपनी संपत्ति बेचने और बच्चों में समान रूप से वितरण करने की स्वतंत्रता दी गई, जिस पर सभी पक्ष सहमत पाए गए। जनसुनवाई के माध्यम से राज्य महिला आयोग ने कई मामलों में त्वरित समाधान, सुलह और महिला हित में निर्णय दिए, जिससे महिलाओं को राहत और न्याय प्राप्त हुआ। आयोग ने उपस्थित सभी आवेदिकाओं को भरोसा दिलाया कि उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी और महिलाओं के खिलाफ होने वाले उत्पीड़न के मामलों में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को PM मोदी ने दी हरी झंडी, राजधानी के मुकाबले सुपर फास्ट

नईदिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखा दी है. पश्चिम बंगाल के हावड़ा से असम के गुवाहाटी (कामाख्या) के बीच चलने वाली यह ट्रेन 958 किलोमीटर की दूरी को महज 14 घंटे में तय कर लेगी, जबकि अभी यह दूरी तय करने में करीब 17 घंट लग जाते हैं. इस ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे, जिनमें 11 थर्ड एसी, 4 सेकंड एसी और 1 फर्स्ट एसी कोच शामिल होगा. इस ट्रेन का किराया राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों से थोड़ा ज्यादा है. गुवाहाटी से हावड़ा तक थर्ड एसी का किराया करीब 2,300 के आसपास है. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को भारतीय रेलवे के इतिहास में एक बड़ा और खास कदम माना जा रहा है. अब तक वंदे भारत ट्रेनें सिर्फ चेयरकार में चल रही थीं, लेकिन स्लीपर वर्जन के शुरू होने से लंबी दूरी की रात की यात्रा पूरी तरह बदलने वाली है. खासकर उन यात्रियों के लिए यह ट्रेन बड़ी राहत होगी, जो रात में आरामदायक और तेज सफर चाहते हैं. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में क्या-क्या सुविधा? वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को पूरी तरह आधुनिक तकनीक और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसके इंटीरियर को भारतीय संस्कृति से प्रेरित डिजाइन दिया गया है, जिससे ट्रेन के अंदर का माहौल न सिर्फ आरामदायक बल्कि देखने में भी आकर्षक होगा. बर्थ, लाइटिंग और कोच की बनावट इस तरह की गई है कि लंबा सफर भी थकाने वाला न लगे. स्वच्छता और हेल्थ को लेकर वंदे भारत स्लीपर में खास इंतजाम किए गए हैं. इसमें डिसइंफेक्टेंट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. रेल मंत्रालय के मुताबिक, कोच में यूवीसी तकनीक लगाई गई है, जो हवा में मौजूद वायरस और बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करती है. यह सिस्टम कोच की हवा को फिल्टर करके साफ करता है और फिर ताजी हवा अंदर छोड़ता है. यानी अगर आसपास किसी यात्री को सर्दी-जुकाम हो, तो भी बाकी यात्रियों को ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं होगी. रेल हादसों से सुरक्षा देगा कवच सुरक्षा के मामले में भी यह ट्रेन काफी एडवांस है. इसमें ‘कवच’ ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लगाया गया है, जो ट्रेन की स्पीड और सिग्नल पर नजर रखता है और हादसों की आशंका को काफी हद तक कम करता है. इसके अलावा, इमरजेंसी टॉक-बैक यूनिट भी दी गई है, जिससे किसी भी परेशानी की स्थिति में यात्री सीधे ट्रेन स्टाफ से बात कर सकेंगे. ड्राइवर के केबिन में भी आधुनिक कंट्रोल और सेफ्टी सिस्टम लगाए गए हैं. ट्रेन का बाहरी लुक भी काफी आधुनिक और एयरोडायनामिक होगा. इसका फायदा यह होगा कि ट्रेन ज्यादा स्मूद तरीके से चलेगी और ऊर्जा की खपत भी कम होगी. इसके दरवाजे ऑटोमैटिक होंगे, जो स्टेशन पर रुकने और चलने के समय अपने आप खुलेंगे और बंद होंगे. राजधानी से भी तेज रफ्तार अगर रफ्तार की बात करें तो वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की अधिकतम गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, जबकि सामान्य परिचालन में यह करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी. इस ट्रेन में यात्रियों को कई प्रीमियम सुविधाएं भी मिलेंगी. सफर के दौरान हाई क्वालिटी कंबल, कवर और एडवांस्ड बेडरोल दिए जाएंगे. साथ ही यात्रियों के लिए कैटरिंग सर्विस भी उपलब्ध होगी, जिससे खाने-पीने की सुविधा रहेगी. आराम का खास ध्यान रखते हुए ट्रेन में बेहतर कुशनिंग वाली एर्गोनोमिक बर्थ लगाई गई हैं और शोर कम करने की तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, ताकि रात की यात्रा शांत और सुकून भरी हो. सभी ऑनबोर्ड स्टाफ तय यूनिफॉर्म में मौजूद रहेंगे, जिससे यात्रियों को बेहतर सेवा मिल सके. वंदे भारत स्लीपर, चेयर कार वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सेमी हाई-स्पीड है और इसमें कुल 16 कोच हैं: 11 थर्ड एसी, 4 सेकंड एसी और 1 फर्स्ट एसी। कुल 823 यात्री इस ट्रेन में सफर कर सकेंगे। अधिकतम गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा है और 958 किलोमीटर का सफर सिर्फ 14 घंटे में पूरा होगा। इसमें बस कन्फर्म टिकट मिलेंगे, RAC या वेटिंग लिस्ट नहीं। क्या बिहार में रुकेगी ट्रेन ? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह ट्रेन बिहार में रुकेगी या बिहार के किसी स्टेशन से होकर गुजरेगी? बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले यह चर्चा जरूर थी कि पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन पटना–दिल्ली के बीच चलेगी, लेकिन फिलहाल उसका रूट बदल दिया गया है। रेलवे की ओर से बिहार में ठहराव या गुजरने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। भविष्य में रूट विस्तार या ठहराव जोड़े जाने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है, लेकिन अभी बिहार के यात्रियों को इस ट्रेन का सीधा लाभ नहीं मिलेगा। आधुनिक और लग्जरी सुविधाएं     आरामदायक स्लीपर बेड और बेहतर कुशनिंग     ऊपरी बर्थ पर चढ़ने के लिए नई डिजाइन वाली सीढ़ी     ऑटोमैटिक स्लाइडिंग दरवाजे     सुरक्षा के लिए KAVACH एंटी-कोलिजन सिस्टम     हर कोच में CCTV, इमरजेंसी टॉक-बैक और फायर डिटेक्शन     बायो-वैक्यूम टॉयलेट और टच-फ्री फिटिंग्स     क्षेत्रीय खाने की कैटरिंग (बंगाली और असमिया व्यंजन)     कोच की कीटाणुमुक्त सफाई और डिसइन्फेक्टेंट तकनीक वंदे भारत स्लीपर का किराया     AC थ्री-टियर: ₹2,000–₹2,300     AC टू-टियर: ₹2,500–₹3,000     फर्स्ट AC: ₹3,000–₹3,600 राजधानी एक्सप्रेस से थोड़ी महंगी, लेकिन तेज और आरामदायक सफर। रूट और प्रमुख स्टेशन्स हावड़ा से कामाख्या के बीच ट्रेन रुकेगी इन स्टेशनों पर: बंदेल, नवद्वीप धाम, कटवा, अजीमगंज, न्यू फरक्का, मालदा टाउन, अलुआबारी रोड, न्यू जलपाईगुड़ी, जलपाईगुड़ी रोड, न्यू कूच बिहार, न्यू अलीपुरद्वार, न्यू बोंगाईगांव, रंगिया। टाइम शेड्यूल     हावड़ा से रवाना: शाम 6:20 बजे     कामाख्या पहुंचने का समय: सुबह 8:20 बजे     वापसी: कामाख्या से शाम 6:15 बजे, हावड़ा सुबह 8:15 बजे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि साल 2026 में और भी वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें शुरू होंगी, जिससे लंबी दूरी की यात्रा और भी आसान और आरामदायक होगी।