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पाकिस्तान के खिलाफ ऑस्ट्रेलियाई टीम में नए चेहरे, महली बियर्डमैन और जैक एडवर्ड्स शामिल

नई दिल्ली पाकिस्तान के खिलाफ 29 जनवरी से 1 फरवरी के बीच लाहौर में खेली जाने वाली तीन टी20 मैचों की सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलिया ने अपनी 17 सदस्यीय टीम का ऐलान कर दिया है। मिशेल मार्श की कप्तानी में घोषित टीम में बिग बैश लीग में शानदार प्रदर्शन कर रहे महली बियर्डमैन और जैक एडवर्ड्स को भी मौका दिया गया है। यह सीरीज उन खिलाड़ियों के लिए खास मौका है जो विश्व कप टीम में जगह बनाने की होड़ में हैं। चयनकर्ताओं ने अनुभव और युवा प्रतिभा के संतुलन को प्राथमिकता दी है। विश्व कप संभावित टीम के 10 खिलाड़ी इस दौरे का हिस्सा होंगे, जबकि कुछ सीनियर खिलाड़ी चोट से उबरने के बाद सीधे श्रीलंका में टीम से जुड़ेंगे। इनमें नाथन एलिस, टिम डेविड, जोश हेजलवुड, ग्लेन मैक्सवेल और पैट कमिंस शामिल हैं। पैट कमिंस को एशेज के दौरान एक टेस्ट खेलने के बाद आराम दिया गया था, जबकि टिम डेविड बिग बैश के दौरान हैमस्ट्रिंग इंजरी के चलते ज्यादा मैच नहीं खेल सके। जोश हेजलवुड नवंबर के बाद से प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर रहे हैं और रिहैब के दौरान अकिलीज की समस्या के कारण पूरी एशेज सीरीज नहीं खेल पाए थे। इन सभी खिलाड़ियों को पूरी तरह फिट रखने के उद्देश्य से उन्हें पाकिस्तान सीरीज से दूर रखा गया है। इस बीच सीन एबॉट, बेन ड्वारशुइस, मिच ओवेन, जोश फिलिप और मैथ्यू रेनशॉ जैसे खिलाड़ी टीम में शामिल किए गए हैं। महली बियर्डमैन और जैक एडवर्ड्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनकैप्ड हैं, लेकिन दोनों पहले भी ऑस्ट्रेलिया की व्हाइट-बॉल स्क्वॉड का हिस्सा रह चुके हैं। बियर्डमैन भारत के खिलाफ T20I टीम में शामिल थे, जबकि एडवर्ड्स को वनडे टीम के साथ अनुभव मिला है। मुख्य चयनकर्ता जॉर्ज बेली ने कहा कि यह सीरीज युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय माहौल में परखने और विश्व कप से पहले जरूरी अनुभव देने का बेहतरीन अवसर है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो खिलाड़ी अभी बीबीएल में खेल रहे हैं, वे टूर्नामेंट समाप्त होने के बाद पाकिस्तान में टीम से जुड़ेंगे। पाकिस्तान दौरे के लिए ऑस्ट्रेलिया की टीम : मिशेल मार्श (कप्तान), सीन एबॉट, जेवियर बार्टलेट, महली बियर्डमैन, कूपर कोनोली, बेन ड्वारशुइस, जैक एडवर्ड्स, कैमरून ग्रीन, ट्रेविस हेड, जोश इंग्लिस, मैथ्यू कुहनेमन, मिच ओवेन, जोश फिलिप, मैथ्यू रेनशॉ, मैथ्यू शॉर्ट, मार्कस स्टोइनिस और एडम जम्पा।  

भारत की ग्रोथ को लेकर IMF का सकारात्मक दृष्टिकोण, FY26 में 7.3% की वृद्धि का अनुमान

नई दिल्ली.  भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने एक बार फिर भरोसा जताया है. ताजा वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में IMF ने भारत के आर्थिक विकास अनुमान को बढ़ाया है. रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा और अगले वित्त वर्ष में भारत की ग्रोथ पहले के आकलन से तेज रहने की उम्मीद है. बेहतर आर्थिक प्रदर्शन, मजबूत घरेलू मांग और लगातार बढ़ती गतिविधियों ने भारत को दुनिया की तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखा है. वहीं निजी संस्था मूडीज रेटिंग्स ने सोमवार को अनुमान लगाया कि भारत मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में 7.3 प्रतिशत की ग्रोथ हासिल करेगा. मूडीज ने कहा कि मजबूत आर्थिक विस्तार से औसत घरेलू आय को सपोर्ट मिलेगा और इंश्योरेंस प्रोटेक्शन की मांग बढ़ेगी. FY26 और FY27 के लिए ग्रोथ अनुमान बढ़ा IMF ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. यह अक्टूबर में दिए गए अनुमान से 0.7 प्रतिशत ज्यादा है. वहीं, FY27 के लिए ग्रोथ अनुमान को 6.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया गया है. IMF का कहना है कि FY28 में भी विकास दर लगभग 6.4 प्रतिशत के आसपास स्थिर रह सकती है, हालांकि अस्थायी और चक्रीय समर्थन धीरे-धीरे कम होंगे. मजबूत तिमाही प्रदर्शन से बढ़ा भरोसा IMF के अनुसार, साल की तीसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजे और चौथी तिमाही में मजबूत रफ्तार ने ग्रोथ अनुमान को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई. रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुकूल आधार प्रभाव और अल्पकालिक कारकों से फिलहाल अर्थव्यवस्था को सहारा मिला है. साल की पहली छमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 8 प्रतिशत से ज्यादा की दर से बढ़ी, जिसने वैश्विक एजेंसियों को सकारात्मक संकेत दिया. सरकार और वर्ल्ड बैंक के अनुमान से मेल भारत सरकार ने 6 जनवरी को जारी अपने पहले अग्रिम अनुमान में FY26 की ग्रोथ 7.4 प्रतिशत रहने की बात कही थी, जो IMF के नए अनुमान के काफी करीब है. इससे पहले वर्ल्ड बैंक भी भारत को लेकर अपना अनुमान बढ़ा चुका है. वर्ल्ड बैंक ने FY26 में 7.2 प्रतिशत ग्रोथ और उसके बाद करीब 6.5 प्रतिशत विकास दर का अनुमान लगाया है. इसकी वजह मजबूत घरेलू मांग और उपभोक्ता खर्च में स्थिरता बताई गई है. वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की भूमिका IMF ने सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर भी उम्मीदें बढ़ाई हैं. 2026 के लिए वैश्विक ग्रोथ अनुमान 3.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.3 प्रतिशत कर दिया गया है. अमेरिका की ग्रोथ 2.4 प्रतिशत और चीन की 4.5 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है. IMF का मानना है कि व्यापार नीतियों से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, निवेश और निजी क्षेत्र की अनुकूलन क्षमता दुनिया की अर्थव्यवस्था को संतुलन में बनाए हुए है.

CM योगी का कड़ा कदम: नोएडा में इंजीनियर की मौत पर SIT जांच, जल्द मांगी रिपोर्ट

नोएडा नोएडा में सॉफ्टफेयर इंजीनियर की मौत मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। उन्होंने इस मामले में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है और कहा है कि उन्हें पांच दिनों के अंदर एसाईटी की रिपोर्ट चाहिए। नोएडा के सेक्टर 150 में युवराज मेहता की गाड़ी पानी से भरे गड्ढे में गिर गई थी। काफी कोशिशों के बाद भी युवराज को बचाया नहीं जा सका। परिवारवालें और घटना के समय मौजूद लोग रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप लगा रहे हैं। इस बीच कुछ अधिकारियों पर ऐक्शन लिए जाने और बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की भी खबर है।   वहीं मामला बढ़ता देख अब खुद सीएम योगी ने इस पर संज्ञान लिया है। सीएम के निर्देश पर घटना की जांच के लिए 3 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है। इस एसआईटी का नेतृत्व मेरठ मंडलायुक्त करेंगे। मंडलायुक्त मेरठ के अलावा, मेरठ के एडीजी जोन व चीफ इंजीनियर पीडब्लूडी भी एसीआईटी में शामिल होंगे। ये एसआईटी पांच दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सीएम योगी को सौंपेगी।  

कोको गॉफ की जीत, राखीमोवा को हराकर ऑस्ट्रेलियन ओपन में आगे

मेलबर्न अमेरिकी स्टार कोको गॉफ ने ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 में अपने अभियान की शानदार शुरुआत करते हुए दूसरे दौर में प्रवेश कर लिया है। मेलबर्न के रॉड लेवर एरिना में 1 घंटे 39 मिनट तक चले मुकाबले में गॉफ ने उज्बेकिस्तान की कामिला राखीमोवा को सीधे सेटों में 6-2, 6-3 से हराया। इस जीत के साथ कोको गॉफ ने अपने करियर का 75वां ग्रैंड स्लैम मैच जीता और ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट्स में पहले राउंड का उनका रिकॉर्ड 23 जीत और 4 हार का हो गया। मैच के दौरान उनकी सर्विस पूरी तरह धारदार नहीं दिखी और उन्होंने सात डबल फॉल्ट किए, लेकिन उनकी रिटर्न गेम, कोर्ट कवरेज, और कंसिस्टेंसी ने उन्हें निर्णायक बढ़त दिलाई। पहले सेट में राखीमोवा ने संघर्ष करते हुए 2-5 पर सर्व करते समय तीन सेट पॉइंट बचाए और मुकाबले को खींचने की कोशिश की। इसके बावजूद गॉफ ने धैर्य नहीं खोया और एक बेहतरीन सर्व के जरिए पहला सेट अपने नाम किया। दूसरे सेट में उज्बेक खिलाड़ी ने लॉब और ड्रॉप शॉट्स का सहारा लेकर मैच में वापसी की कोशिश की, जिससे उन्हें दर्शकों का भी समर्थन मिला। हालांकि, गॉफ की निरंतरता और ताकतवर बेसलाइन खेल के सामने राखीमोवा ज्यादा देर टिक नहीं सकीं। दूसरे सेट में गॉफ ने 5-1 की मजबूत बढ़त बना ली। एक गेम में डबल फॉल्ट और कुछ गलतियों के कारण राखीमोवा को वापसी का हल्का सा मौका मिला, लेकिन अमेरिकी खिलाड़ी ने तुरंत ब्रेक हासिल करते हुए मैच का छठा ब्रेक अपने नाम किया और सीधे सेटों में जीत दर्ज कर ली। यह जीत गॉफ के ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब के इरादों को साफ तौर पर दर्शाती है। मैच के बाद गॉफ ने कहा कि वह पहले राउंड में खुद पर ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहतीं और उनका एकमात्र लक्ष्य टूर्नामेंट जीतना है। उन्होंने यह भी माना कि एक मजबूत रिटर्नर होने का फायदा यह है कि लगभग हर सर्विस गेम में ब्रेक का मौका बनता है। दूसरे दौर में गॉफ का सामना लेफ्ट-हैंडेड सर्बियाई खिलाड़ी ओल्गा डैनिलोविच से होगा, जिन्होंने पहले दौर में सात बार की ग्रैंड स्लैम चैंपियन वीनस विलियम्स को तीन सेटों में हराया था।  

‘साइबरटेक ग्लोबल तेल अवीव-2026’ में साइबर टेक्नोलॉजी समझाएंगे यूपी के सुपर कॉप

इज़राइल में दिखेगी यूपी की साइबर शक्ति, दुनिया सीखेगी यूपी से साइबर सुरक्षा का भारतीय मॉडल 'साइबरटेक ग्लोबल तेल अवीव-2026' में साइबर टेक्नोलॉजी समझाएंगे यूपी के सुपर कॉप  इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ साइबर सिक्योरिटी सपोर्ट पर होगा फोकस साइबर सिक्योरिटी बिजनेस के लिए भारत में संभावनाएं तलाशेंगे दुनिया के दिग्गज वैज्ञानिक अमेरिका, यूरोप, एशिया से 20 देशों के साइबर एक्सपर्ट्स जुटेंगे सम्मेलन में लखनऊ  दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित साइबर सुरक्षा मंचों में शुमार 'साइबरटेक ग्लोबल तेल अवीव-2026' में इस बार भारत और विशेष तौर पर उत्तर प्रदेश की साइबर ताकत पूरी दुनिया के सामने होगी। 26 से 28 जनवरी 2026 तक तेल अवीव, इज़राइल में आयोजित होने जा रहे इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यूपी के साइबर सिंघम वैश्विक मंच पर भारत की साइबर सुरक्षा क्षमता, तकनीक व अनुभव साझा करेंगे। सम्मेलन में भारत से दो दिग्गज चीफ मेंटर के रूप में शामिल हो रहे हैं। इनमें भारत सरकार के पूर्व राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक माधवन उन्नीकृष्णन नायर और उत्तर प्रदेश से एशिया के साइबर कॉप कहे जाने वाले प्रो. त्रिवेणी सिंह शामिल हैं। दोनों विशेषज्ञ दुनिया के शीर्ष साइबर वैज्ञानिकों व नीति निर्माताओं के समक्ष साइबर सुरक्षा की बारीकियां और अपनाई जा रही तकनीक को प्रस्तुत करेंगे। इन देशों से आएंगे विशेषज्ञ तेल अवीव में होने जा रहे इस वैश्विक जमावड़े में अमेरिका, जापान, स्पेन, इटली, इंग्लैंड, जर्मनी, साइप्रस, स्कॉटलैंड, वेल्स व उत्तरी आयरलैंड, रोमानिया, फिलीपींस, संयुक्त अरब अमीरात, बेल्जियम, लातविया, नीदरलैंड, अल्बानिया, उरुग्वे, हंगरी समेत अन्य देशों के दिग्गज जुटेंगे। सीएम योगी के विजन के अनुरूप चल रहा साइबर सेफ यूपी अभियान उत्तर प्रदेश में साइबर सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार एआई व साइबर सिक्योरिटी को प्रशासनिक तथा शैक्षणिक ढांचे का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग, दुष्प्रचार, डीपफेक, डार्क वेब, साइबर अपराध और आतंकी नेटवर्क जैसी चुनौतियों से सख्ती से निपटने के निर्देश दिए हैं। इस क्रम में प्रो. त्रिवेणी सिंह जागरूकता के लिए 'साइबर सेफ उत्तर प्रदेश' अभियान चला रहे हैं। अब इज़राइल में 20 से अधिक देशों के बीच वह यूपी में साइबर सिक्योरिटी को लेकर किए जा रहे इनोवेटिव उपायों की जानकारी देंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर सिक्योरिटी सपोर्ट पर चर्चा करेंगे। यूपी में टेक्नोलॉजी संबंधित अपराधों से निपटने का मजबूत सिस्टम समझेंगे अन्य देश प्रो. त्रिवेणी सिंह अपने 25 वर्षों से अधिक के अनुभव के आधार पर बताएंगे कि किस तरह उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में साइबर अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी और टेक्नोलॉजी आधारित अपराधों से निपटने के लिए मजबूत सिस्टम खड़ा किया है। वहीं, माधवन उन्नीकृष्णन नायर भारत के राष्ट्रीय साइबर फ्रेमवर्क और नीति अनुभव को वैश्विक मंच पर साझा करेंगे। साइबर सहयोग, टेक्नोलॉजी साझेदारी और बिजनेस पर होगा मंथन सम्मेलन में इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल होंगे। इस दौरान भारत और दुनिया के अन्य 20 देशों के बीच साइबर सिक्योरिटी सहयोग, टेक्नोलॉजी साझेदारी और साइबर बिजनेस की संभावनाओं पर भी व्यापक मंथन होगा। देश को भविष्य का ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी हब बनाने की दिशा में अहम कदम सम्मेलन में अमेरिका से यूरोप और एशिया तक के साइबर एक्सपर्ट्स का जमावड़ा रहेगा। यह सम्मेलन भारत की साइबर शक्ति को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ देश को भविष्य का ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी हब बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा। इसमें भारत के लिए नए अवसर, साइबर सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और बिजनेस संभावनाओं पर विशेष तौर पर चर्चा की जाएगी।

23 करोड़ लोग प्रभावित: गंगा, ब्रह्मपुत्र और गोदावरी क्षेत्र डूबने के कगार पर

  नई दिल्ली एक नई वैश्विक स्टडी के अनुसार भारत के कई बड़े नदी डेल्टा क्षेत्र तेजी से डूब रहे हैं. यह डूबना समुद्र के बढ़ते जल स्तर से भी तेज है. गंगा-ब्रह्मपुत्र, महानदी, ब्राह्मणी और गोदावरी जैसे डेल्टा सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि अत्यधिक भूजल निकासी इस समस्या का मुख्य कारण है, जिससे लाखों लोगों को बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है. डेल्टा क्षेत्र क्या हैं और क्यों महत्वपूर्ण? नदी डेल्टा वो जगहें हैं जहां नदियां समुद्र में मिलती हैं. ये क्षेत्र सिर्फ 1 प्रतिशत भूमि पर फैले हैं, लेकिन दुनिया की लगभग 6 प्रतिशत आबादी (35 से 50 करोड़ लोग) यहां रहती है. भारत में गंगा-ब्रह्मपुत्र, महानदी, ब्राह्मणी, गोदावरी, कावेरी और कबनी जैसे डेल्टा लाखों लोगों का घर हैं. ये डेल्टा कृषि, मछली पालन, बंदरगाहों और व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. वे आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक रूप से जरूरी हैं. लेकिन ये बहुत नाजुक हैं क्योंकि ज्यादातर हिस्से समुद्र तल से सिर्फ 2 मीटर ऊपर हैं. जलवायु परिवर्तन से बढ़ते समुद्र स्तर, तूफान, बाढ़ और मौसम में बदलाव इन क्षेत्रों को खतरे में डाल रहे हैं. समस्या क्या है: भूमि का डूबना (सब्सिडेंस) स्टडी 'नेचर' जर्नल में प्रकाशित हुई है. इसमें 29 देशों के 40 बड़े डेल्टाओं का विश्लेषण किया. इनमें से आधे से ज्यादा डेल्टा सालाना 3 मिलीमीटर से ज्यादा डूब रहे हैं. 13 डेल्टाओं में डूबने की गति समुद्र स्तर के बढ़ने (लगभग 4 मिलीमीटर प्रति वर्ष) से भी तेज है.     ब्राह्मणी और महानदी डेल्टा: सबसे तेज डूब रहे हैं. ब्राह्मणी के 77 प्रतिशत और महानदी के 69 प्रतिशत क्षेत्र डूब रहे हैं. कई हिस्सों में गति 5 मिलीमीटर प्रति वर्ष से ज्यादा है.      गंगा-ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कावेरी और कबनी: इनमें भी बड़े पैमाने पर डूबना हो रहा है. 90 प्रतिशत से ज्यादा क्षेत्र प्रभावित है. दुनिया भर में लगभग 4.6 लाख वर्ग किलोमीटर डेल्टा भूमि डूब रही है, जो कुल डेल्टा क्षेत्र का 54-65% है. बड़े डेल्टा जैसे गंगा-ब्रह्मपुत्र, नील, मेकॉन्ग आदि कुल डूबते क्षेत्र का 57 प्रतिशत हिस्सा हैं. मुख्य कारण: भूजल की अत्यधिक निकासी मानवीय गतिविधियां डूबने का मुख्य कारण हैं. भारत में गंगा-ब्रह्मपुत्र और कावेरी डेल्टा में भूजल निकासी सबसे बड़ा दोषी है. कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए पानी निकाला जा रहा है, जो रिचार्ज होने से तेज है. इससे जमीन के नीचे की मिट्टी सिकुड़ जाती है. सतह नीचे चली जाती है. अन्य कारण…     बांध और बैराज: महानदी और कबनी जैसे डेल्टाओं में ऊपरी इलाकों के बांध नदियों की गाद (सिल्ट) को रोक देते हैं. पहले ये गाद डेल्टा को ऊंचा रखती थीं, लेकिन अब कमी से डूबना बढ़ रहा है.     जनसंख्या और भूमि उपयोग: ज्यादा लोग रहने से भूमि पर दबाव बढ़ता है.     समुद्र स्तर बढ़ना: जलवायु परिवर्तन से समुद्र ऊंचा हो रहा है, जो डूबने के साथ मिलकर खतरा दोगुना कर देता है. 18 डेल्टाओं में जैसे भारत के ब्राह्मणी, महानदी, गंगा-ब्रह्मपुत्र और गोदावरी, डूबना समुद्र स्तर बढ़ने से तेज है. इससे बाढ़ का खतरा बढ़ता है, भले समुद्र में बड़ा बदलाव न हो. लाखों लोगों का खतरा इन डेल्टाओं में रहने वाले 23 करोड़ से ज्यादा लोग बाढ़ के खतरे में हैं. शहर जैसे कोलकाता (गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में) तेजी से डूब रहे हैं, जिससे बाढ़, खेती की हानि, नमक का पानी घुसना और बुनियादी ढांचे को नुकसान हो रहा है.     कृषि और जल संसाधन: खेत बर्बाद हो रहे हैं. मीठा पानी कम हो रहा है.     पर्यावरण: वेटलैंड्स (गीली भूमि) नष्ट हो रहे हैं, जो बाढ़ से बचाव करती हैं.     समाज: गरीब और ग्रामीण समुदाय सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. वे निचले इलाकों में रहते हैं. पलायन मुश्किल है. इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है. स्टडी कहती है कि ये समस्याएं एक-दूसरे को मजबूत करती हैं, जिससे डेल्टा पृथ्वी के सबसे नाजुक परिदृश्य बन गए हैं. दुनिया का परिदृश्य यह समस्या सिर्फ भारत की नहीं है. नील (मिस्र), चाओ फ्राया (थाईलैंड), मेकॉन्ग (वियतनाम) जैसे डेल्टा भी प्रभावित हैं. शहर जैसे ढाका, शंघाई, बैंकॉक डूब रहे हैं. लेकिन भारत के कई डेल्टा अनप्रिपेयर्ड हैं – मतलब खतरा ज्यादा है लेकिन तैयारी कम, क्योंकि संस्थागत और आर्थिक संसाधन कम हैं. क्या किया जा सकता है? शोधकर्ता चेतावनी देते हैं कि अगर भूजल निकासी को नियंत्रित नहीं किया, गाद प्रवाह को बहाल नहीं किया और अनुकूलन योजनाएं नहीं बनाईं, तो आने वाले दशकों में बाढ़, भूमि हानि और विस्थापन बढ़ेगा.     भूजल प्रबंधन: निकासी पर रोक, रिचार्ज को बढ़ावा.     बांधों का प्रबंधन: गाद को डेल्टा तक पहुंचने दें.     अनुकूलन: बाढ़ रोधी दीवारें, मैनग्रूव लगाना.     नीतियां: स्थानीय समुदायों को शामिल करें, विशेषकर आदिवासी और ग्रामीणों को. यह अध्ययन हमें याद दिलाता है कि डेल्टा क्षेत्रों की रक्षा जरूरी है, वरना लाखों जीवन खतरे में पड़ जाएंगे. वैश्विक स्तर पर सहयोग और तत्काल कदम उठाने की जरूरत है.  

CII की राय: Budget 2026 में ये सुधार आम बजट को बनाएंगे असरदार

मुंबई   भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) एक शानदार खबर लेकर आया है. दरअसल CII  बिजनेस आउटलुक सर्वे के अनुसार, देश में बिजनेस करने वाली कंपनियों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है. लोकल मार्केट में सामान की डिमांड मजबूत है, जिससे कंपनियां भविष्य को लेकर पॉजिटिव हैं. CII के बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स में बड़ा इजाफा देखा गया है. वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में यह इंडेक्स बढ़कर 66.5 हो गया है, जो पिछले 5 तिमाहियों में सबसे ज्यादा है. सर्वे में शामिल 72% कंपनियों का मानना है कि त्योहारी सीजन और जीएसटी (GST) दरों में सुधार की वजह से आने वाले समय में डिमांड और बढ़ेगी. बजट 2026-27 के लिए CII के सुझाव सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि, "बढ़ते आत्मविश्वास से उद्योग की वैश्विक चुनौतियों से निपटने की क्षमता उजागर होती है, जिसे मजबूत घरेलू मांग और घरेलू सुधारों से सपोर्ट मिल रहा है. सरकार को भारत की तेज रफ्तार बनाए रखने के लिए बजट में कुछ कदम उठाने की जरूरत है, जिसमें शामिल हैं-     इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश (NIP 2.0) CII ने सुझाव दिया कि सरकार 150 लाख करोड़ रुपये की संशोधित 'राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन' (National Infrastructure Pipeline 2.0) के जरिए बुनियादी ढांचे पर खर्च जारी रखे. इससे ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता मिले जो तुरंत शुरू हो सकें और कमाई कर सकें.     इंडिया डेवलपमेंट एंड स्ट्रैटेजिक फंड घरेलू और विदेशी निवेश जुटाने के लिए एक विशेष फंड बनाने का सुझाव दिया गया है. यह फंड छोटे और मध्यम उद्योगों के साथ, ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स, युवाओं के कौशल विकास पर निवेश को बढ़ाने पर काम आएगा.     बिजनेस करना होगा और आसान कंपनियों पर कागजी कार्रवाई और नियमों का बोझ कम करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का डिजिटलीकरण कोष बनाने का प्रस्ताव है. इसका लक्ष्य डिजिटल रिकॉर्ड और रियल-टाइम कंप्लायंस सिस्टम को लागू करना है.     इनोवेशन और रिसर्च पर फोकस भविष्य की तकनीक के लिए CII ने 10 नए 'उन्नत शिक्षा और अनुसंधान केंद्र' खोलने की सिफारिश की है. हर केंद्र के लिए 1,000 करोड़ रुपये का बजट रखने का सुझाव है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ क्वांटम टेक्नोलॉजी और क्लीन एनर्जी और बायोटेक्नोलॉजी पर काम करेंगे. भारतीय उद्योग जगत चाहता है कि सरकार बजट में ऐसे कदम उठाए जिससे न केवल व्यापार करना आसान हो, बल्कि भारत नई तकनीकों और मजबूत बुनियादी ढांचे के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहे.

मैच के फैसलों पर बवाल, मेसी इवेंट से पहले रेफरी मामले में IFA सख्त

कोलकाता कोलकाता में अर्जेंटीना के फुटबॉल सुपरस्टार लियोनेल मेसी के इवेंट से पहले खेले गए एक फुटबॉल मैच को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। 13 दिसंबर को साल्ट लेक स्टेडियम (युवा भारती क्रीड़ांगन) में हुए इस मैच में रेफरी का काम करने वाले चार रेफरी अब जांच के दायरे में आ गए हैं। फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था इंडियन फुटबॉल एसोसिएशन (आईएफए) ने इन चारों रेफरी को अपनी आंतरिक अनुशासन कमिटी के सामने पेश होने के लिए बुलाया है। इन रेफरी पर आरोप है कि उन्होंने इंडियन फुटबॉल एसोसिएशन या कलकत्ता रेफरी एसोसिएशन से पूर्व अनुमति लिए बिना इस हाई-प्रोफाइल मैच में अंपायरिंग की। सूत्रों के मुताबिक, नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया गया है और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। इंडियन फुटबॉल एसोसिएशन की अनुशासन कमिटी की बैठक 20 जनवरी को होने वाली है, जहां रेफरी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। यह मामला उस बड़े विवाद से जुड़ा है जो लियोनेल मेसी के कोलकाता दौरे के दौरान सामने आया था। मेसी के आगमन से पहले ही स्टेडियम खचाखच भर गया था और हजारों प्रशंसक अपने पसंदीदा फुटबॉलर की एक झलक पाने के लिए बेसब्र थे। हालांकि, मेसी के स्टेडियम में पहुंचते ही स्थिति बेकाबू हो गई। भीड़ फोटो लेने के लिए आगे बढ़ी, जिससे सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई। मेसी केवल 22 मिनट तक मैदान पर मौजूद रहे और इसके बाद स्टेडियम छोड़कर चले गए। उनके जाने के बाद हालात और बिगड़ गए। दर्शकों ने गुस्से में स्टेडियम के अंदर तोड़-फोड़ की। कुर्सियां और बोतलें मैदान में फेंकी गईं, गेट तोड़ दिए गए, और कई लोग पिच पर घुस गए। स्टेडियम की गैलरी और रेस्ट रूम में भी नुकसान की खबरें सामने आईं। इस घटना के बाद राज्य सरकार ने जांच कमेटी का गठन किया। इवेंट के आयोजक सतद्रु दत्ता को गिरफ्तार कर लिया गया और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। इसके अलावा, अरूप ने राज्य के खेल मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जबकि पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार समेत कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। मेसी के इवेंट से पहले खेले गए मोहन बागान और डायमंड हार्बर लेजेंड्स के बीच मैच में अंपायरिंग करने वाले ये चार रेफरी अब नियमों के उल्लंघन के आरोपों का सामना कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इंडियन फुटबॉल एसोसिएशन की जांच यह तय करेगी कि उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।  

अब और तेज़ होगा इंटरनेट अनुभव, Airtel ने इन राज्यों में बढ़ाया 5G नेटवर्क

नई दिल्ली भारत की टेलीकॉम कंपनी एयरटेल ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के यूजर्स को बड़ी सौगात दी है. कंपनी का कहना है कि पिछले 12 महीनों में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 2400 से अधिक नए 5 जी साइट्स लगाए गए हैं. इससे 3.6 करोड़ से अधिक ग्राहकों को फास्ट स्पीड और बेहतर नेटवर्क कवरेज मिलने लगा है. एयरटेल का दावा है कि अब शहरों के साथ-साथ कस्बों और गांवों में भी हाई-स्पीड इंटरनेट का अनुभव पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगा. 87 जिलों में फैला 5G नेटवर्क कंपनी का कहना है कि इस बड़े नेटवर्क विस्तार का फायदा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 87 जिलों को मिल रहा है. कंपनी के मुताबिक, अब व्यस्त शहरों के साथ-साथ तेजी से बढ़ते कस्बों और दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में भी मजबूत 5G कवरेज उपलब्ध है. इस नेटवर्क से 3.6 करोड़ ग्राहक सीधे तौर पर जुड़े हैं. कंपनी के अनुसार, एयरटेल हर दिन औसतन छह नए 5G साइट्स लाइव कर रहा है, जिससे कवरेज लगातार और मजबूत होती जा रही है. स्ट्रीमिंग से पढ़ाई तक सब होगा आसान तेज 5G नेटवर्क के चलते यूजर्स को हाई-क्वालिटी वीडियो स्ट्रीमिंग, फास्ट डाउनलोड और बिना रुकावट ऑनलाइन काम करने का अनुभव मिलेगा. छात्र ऑनलाइन क्लास और डिजिटल स्टडी प्लेटफॉर्म्स का बेहतर उपयोग कर पाएंगे. इसके साथ ही डिजिटल पेमेंट्स और ऑनलाइन सेवाएं भी ज्यादा भरोसेमंद बनेंगी. एयरटेल का कहना है कि यूजर्स चाहे सफर में हों या घर पर, उन्हें हर जगह समान नेटवर्क अनुभव मिलेगा. इन शहरों और जिलों को सीधा फायदा कंपनी के अनुसार, इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, उज्जैन, सागर, रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, देवास, कोरबा और राजनांदगांव जैसे बड़े जिलों में एयरटेल का 5G नेटवर्क और मजबूत हुआ है. इन इलाकों में रहने वाले नागरिकों, छात्रों, छोटे कारोबारियों और सरकारी संस्थानों को हाई-स्पीड इंटरनेट का सीधा लाभ मिलेगा. ग्रामीण इलाकों पर खास फोकस एयरटेल ने साफ किया है कि उसका फोकस सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है. कंपनी ने ग्रामीण इलाकों, गांवों, हाईवे, सीमावर्ती क्षेत्रों और आर्थिक गलियारों में भी नेटवर्क घनत्व बढ़ाने के लिए बड़ा निवेश किया है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए Airtel के CEO रितेश अग्रवाल ने कहा कि ये राज्य कंपनी के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं. एयरटेल आगे भी नेटवर्क विस्तार और बेहतर डिजिटल अनुभव देने के लिए निवेश जारी रखेगा.

अवैध निर्माण मामले में विजिलैंस के रडार पर नामचीन इलाकों की बिल्डिंगें

जालंधर. नगर निगम का बिल्डिंग विभाग एक बार फिर विवाद का केंद्र बनता दिख रहा है क्योंकि विजिलैंस ने शहर की कई अवैध बिल्डिंगों विरुद्ध जांच तेज कर दी है। गौरतलब है कि आर.टी.आई. एक्टिविस्ट रविन्द्रपाल सिंह चड्ढा पिछले कई महीनों से अवैध और नियमों के विरुद्ध बनी कमर्शियल इमारतों को लेकर लगातार शिकायतें दर्ज करवा रहे हैं। इन शिकायतों के आधार पर नगर निगम द्वारा संबंधित बिल्डिंगों को नोटिस जारी किए गए थे और कुछ इमारतों को सील भी किया गया था। हालांकि, निगम की कार्रवाई यहीं तक सीमित रह गई। हैरानी की बात यह है कि जिन इमारतों को नियमों के उल्लंघन पर सील किया गया था, आज वे सभी सीलें खुल चुकी हैं और उनमें धड़ल्ले से कमर्शियल गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इसके चलते निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं। रविन्द्रपाल सिंह चड्ढा ने अपनी शिकायतों में आरोप लगाया कि संबंधित निगम अधिकारियों और सेवादारों की मिलीभगत के चलते इन मामलों में आगे कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। सूत्रों के अनुसार विजिलैंस ब्यूरो ने अब इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए रविन्द्रपाल सिंह चड्ढा को बयान दर्ज करवाने के लिए तलब किया है। बताया जा रहा है कि जिन इमारतों को लेकर शिकायतें की गई हैं, वे सभी अभी भी जांच के दायरे में हैं। विजीलैंस में जिन बिल्डिंगों की जांच चल रही है उनमें पटेल चौक के निकट ढाबे, टैगोर अस्पताल के पास चांप के साथ वाली इमारत, आहूजा चना भटूरा वाली गली में स्थित कमर्शियल बिल्डिंग्स, मेहरा ट्रांसपोर्ट के पास, सतनाम कार वाश के निकट, गुलाबदेवी रोड ईदगाह के पास तथा भगवानदास पुरा में बनी दो मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग शामिल हैं। अब सभी की निगाहें विजीलैंस ब्यूरो की जांच पर टिकी हैं कि इन मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों पर कब और क्या कार्रवाई होती है? और ये भी पढ़े जेपी नगर व आदर्श नगर बनते जा रहे कमर्शियल हब जालंधर इम्प्रूवमैंट ट्रस्ट द्वारा कई वर्ष पूर्व जे.पी. नगर और आदर्श नगर को रिहायशी कॉलोनियों के रूप में विकसित किया गया था, लेकिन समय के साथ यह पूरा क्षेत्र तेजी से कमर्शियल हब में तब्दील होता जा रहा है। जे.पी. नगर और आदर्श नगर की मेन रोड पर स्थित अधिकांश कोठियों को तोड़कर अब वहां कमर्शियल बिल्डिंग्स खड़ी की जा चुकी हैं और धड़ल्ले से दुकानें व कमर्शियल प्रतिष्ठान बनाए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि लंबे समय से इस अवैध निर्माण पर नगर निगम द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। रिहायशी क्षेत्र को नियमों के विपरीत कमर्शियल उपयोग में बदला जा रहा है, जिससे न केवल ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या बढ़ रही है, बल्कि कॉलोनी की मूल योजना भी पूरी तरह बिगड़ चुकी है। अब इस मामले को लेकर आर.टी.आई. एक्टिविस्ट रवि छाबड़ा ने नगर निगम कमिश्नर को लिखित शिकायत भेजी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि आदर्श नगर गुरुद्वारा के निकट आज भी अवैध रूप से कमर्शियल बिल्डिंग का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन निगम अधिकारी इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले एडवोकेट बृजेश चोपड़ा भी जे.पी. नगर की मेन रोड को कमर्शियल किए जाने के विरोध में नगर निगम को लीगल नोटिस भेज चुके हैं। इसके बावजूद न तो अवैध निर्माण रोका गया और न ही नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाया गया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते निगम ने कार्रवाई नहीं की, तो पूरा क्षेत्र अनियंत्रित कमर्शियल गतिविधियों की चपेट में आ जाएगा। अब देखना यह है कि निगम प्रशासन इन शिकायतों पर कब तक संज्ञान लेकर ठोस कार्रवाई करता है।