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महंत नृत्य गोपाल दास की हालत नाजुक, राम मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष को लखनऊ मेदांता अस्पताल भेजा गया

अयोध्या राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष और प्रख्यात संत महंत नृत्य गोपाल दास महाराज की तबीयत बुधवार को अचानक खराब हो गई। सांस लेने में तकलीफ और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शिकायत के बाद डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल लखनऊ के मेदांता अस्पताल ले जाने की सलाह दी। मणिराम दास छावनी स्थित उनके निवास पर डॉक्टरों की एक टीम ने उनके स्वास्थ्य की जांच की। बताया जा रहा है कि बढ़ती ठंड और गलन के कारण उन्हें सीने में जकड़न और सांस लेने में कठिनाई महसूस हो रही थी। उनकी उम्र और पुरानी बीमारियों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और उनके अनुयायियों ने बिना देरी किए उन्हें लखनऊ रेफर करने का फैसला लिया। लखनऊ मेदांता में डॉक्टरों की टीम तैयार महंत नृत्य गोपाल दास को एम्बुलेंस के जरिए ग्रीन कॉरिडोर बनाकर लखनऊ लाया जा रहा है। मेदांता अस्पताल के क्रिटिकल केयर विभाग के विशेषज्ञों को पहले ही सूचित कर दिया गया है और वहां उनके इलाज के लिए विशेष मेडिकल टीम तैनात की गई है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वे लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। भक्तों और संतों में चिंता की लहर महंत जी की तबीयत बिगड़ने की खबर मिलते ही अयोध्या के संत समाज और देश-दुनिया में फैले उनके करोड़ों भक्तों में चिंता की लहर दौड़ गई है। हनुमानगढ़ी के संतों और राम मंदिर ट्रस्ट के अन्य सदस्यों ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। पहले भी मेदांता में चला इलाज बता दें कि महंत नृत्य गोपाल दास पिछले काफी समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं और समय-समय पर उन्हें रूटीन चेकअप और इलाज के लिए मेदांता लाया जाता रहा है। 80 वर्ष से अधिक की आयु होने के कारण उनका स्वास्थ्य अक्सर संवेदनशील बना रहता है।  

गणतंत्र दिवस पर शासकीय भवनों एवं महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों पर रोशनी करने के निर्देश

भोपाल राज्य शासन ने 26 जनवरी 2026 गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में समस्त शासकीय भवनों एवं महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों पर 25 एवं 26 जनवरी 2026 को रात्रि में प्रकाश की व्यवस्था करने के दिशा-निर्देश दिये। उक्त व्यवस्था पर होने वाला व्यय संबंधित प्रशासकीय विभाग अपने विभागीय बजट से वहन करेंगे।  

नुपुर शर्मा केस: बयान के बाद की गई हत्या अब आतंकवाद की श्रेणी में, बॉम्बे HC का बड़ा फैसला

मुंबई बॉम्बे हाई कोर्ट ने अमरावती के फार्मासिस्ट उमेश कोल्हे की 2022 में हुई नृशंस हत्या के मामले में आरोपी पशु चिकित्सक युसूफ खान की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह केवल एक हत्या नहीं थी, बल्कि जनता के मन में दहशत पैदा करने के इरादे से बनाया गया एक आतंकी गिरोह का कृत्य था। जस्टिस ए.एस. गडकरी और जस्टिस श्याम सी. चांडक की खंडपीठ ने यूएपीए के तहत खान की अपील को खारिज करते हुए कहा, "आरोपियों ने अपने धर्म के कथित अपमान का बदला लेने के लिए एक गिरोह बनाया। इनका उद्देश्य उमेश कोल्हे की बेरहमी से हत्या करना और आम जनता के मन में डर पैदा करना था, चाहे वे नुपुर शर्मा की टिप्पणियों का समर्थन करते हों या नहीं।"   अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह पूरा मामला मई 2022 में भाजपा की तत्कालीन प्रवक्ता नुपुर शर्मा द्वारा एक टीवी डिबेट के दौरान दी गई विवादित टिप्पणी से शुरू हुआ था। उमेश कोल्हे ने पशु चिकित्सकों के एक व्हाट्सऐप ग्रुप में नुपुर शर्मा के समर्थन वाला एक संदेश साझा किया था। युसूफ खान उस ग्रुप का एकमात्र मुस्लिम सदस्य था। उसने उस मैसेज का स्क्रीनशॉट लिया। खान ने कथित तौर पर कोल्हे का मोबाइल नंबर थोड़ा बदलकर और एक उकसाने वाला कैप्शन लिखकर उसे व्यापक रूप से प्रसारित कर दिया। कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर युसूफ खान की भूमिका को साजिश में महत्वपूर्ण माना। कोल्हे की दुकान के पते का जिक्र करना और संदेश को ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में भेजने का आह्वान यह दर्शाता है कि कोल्हे को जानबूझकर निशाना बनाया गया था। कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) के मुताबिक, हत्या से पहले और बाद में खान और अन्य आरोपियों के बीच 25 बार बातचीत हुई थी। अदालत ने गौर किया कि खान ने संदेश के जरिए गुस्सा भड़काने के बाद खुद को अन्य आरोपियों से दूर कर लिया था ताकि वह कानून की पकड़ से बच सके, लेकिन वह पृष्ठभूमि से लगातार सक्रिय था। अदालत ने कहा कि साजिशें गुप्त रूप से रची जाती हैं और उनके लिए प्रत्यक्ष साक्ष्य मिलना कठिन होता है, लेकिन परिस्थितिजन्य साक्ष्य खान की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं। बेंच ने निष्कर्ष निकाला कि इस कृत्य ने समाज की अंतरात्मा को झकझोर दिया है, इसलिए आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती। आपको बता दें कि अमरावती के उमेश कोल्हे की जून 2022 में तब हत्या कर दी गई थी जब वे अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है।  

आदर्श है यूपी विजन डॉक्यूमेंट: हरिवंश

86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का समापन सतीश महाना ने कहा, सीएम योगी ने अनुशासन व जनता के साथ निरंतर संवाद से बदलते उत्तर प्रदेश की छाप देश के सामने रखी लखनऊ, देशभर की विधायी संस्थाओं के अनुभव, संवाद और संकल्प का केंद्र बने 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का समापन लखनऊ में गरिमामय वातावरण में हुआ। समापन समारोह में लोकतंत्र की मजबूती, जनहित की सर्वोच्चता और बदले हुए उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक पहचान प्रमुख रूप से उभरकर सामने आई। इस अवसर पर राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने उत्तर प्रदेश के विजन 2047 डॉक्यूमेंट की जमकर तारीफ की और इसे सबके लिए प्रेरणादायी बताया। यूपी विधान सभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने त्याग, अनुशासन और जनता के साथ निरंतर संवाद के माध्यम से बदलते उत्तर प्रदेश और सशक्त प्रशासन की स्पष्ट छाप देश के सामने रखी है। 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने इसे एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी आयोजन बताया। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में देशभर से आए पीठासीन अधिकारियों, विधान सभाओं और लोकसभा के पदाधिकारियों के अनुभवों एवं उनके द्वारा अपनाए गए नवाचारों से हम सभी को सीखने का अवसर मिला है, जो भविष्य में देश की संसदीय और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने में मार्गदर्शक सिद्ध होंगे। चाहे विधानमंडल हो या सरकार, हम सभी का उद्देश्य संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से देश के विकास में योगदान देना है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना की सराहना करते हुए कहा कि जिस तरह से उत्तर प्रदेश सरकार ने लगातार गहन विचार-विमर्श के बाद विकसित उत्तर प्रदेश-2047 का विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया, वो हम सभी के लिए प्रेरणादायी है। ये विजन डॉक्यूमेंट, लोकतांत्रिक संवाद और सहभागिता के माध्यम से विकास की रूपरेखा तय करने का उत्कृष्ट उदाहरण है। राज्यसभा के उपसभापति ने कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान के विधानसभा अध्यक्षों के विधानसभा की कार्यवाही में विधायकों की उपस्थिति बढ़ाने और सोशल मीडिया के प्रयोग से सदन की कार्यवाही को आमजन तक पहुंचाने की पहल को अनुकरणीय बताया। साथ ही उन्होंने देश भर से आए विधानसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के साझा किए अनुभवों और नवाचार पहलों को देश में संसदीय और विधायी कार्यवाही को अधिक प्रभावी बनाने के लिए मार्गदर्शक बताया। अपने संबोधन में प्रदेश विभानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के मार्गदर्शन से सभी को संबल और दिशा मिलती है। श्री महाना ने विभिन्न राज्यों से आए पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि विधायिका लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तंभ है। यहां जनता के बीच से चुनकर आया प्रतिनिधि होता है। जनहित की बात करना, प्रदेश को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाना और जनता की अपेक्षाओं को सरकार तक पहुंचाना विधायिका की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यहां का प्रशासनिक मॉडल और लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुभव अपने राज्य में साझा करें सतीश महाना ने कहा कि सम्मेलन के दौरान पीठासीन अधिकारियों की ओर से कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए हैं। विगत वर्षों में सरकार ने प्रभावी ढंग से कार्य किया है। भले ही सभी का एजेंडा अलग-अलग हो, लेकिन लक्ष्य एक ही है जनहित और विकास। आप सभी के आगमन से उत्तर प्रदेश का स्वरूप पूरे देश में जाएगा। यहां की कार्यसंस्कृति, प्रशासनिक मॉडल और लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुभव आप सभी अपने-अपने प्रदेशों में साझा करें।

ट्रंप का ईरान को सख्त संदेश: ‘मेरी हत्या हुई तो अंजाम भुगतना पड़ेगा’

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अगर ईरान ने उनकी हत्या कराई तो अमेरिका ईरान का नामोनिशान मिटा देगा। इससे पहले ईरान ने ट्रंप को देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई करने पर चेतावनी दी थी। दरअसल ट्रंप ने खामेनेई के लगभग 40 वर्षों के शासन को समाप्त करने का आह्वान किया था जिसके कुछ दिनों बाद ईरान ने ट्रंप को यह चेतावनी दी।   ट्रंप ने ‘न्यूजनेशन’ के कार्यक्रम ‘केटी पॉवलिच टुनाइट’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, 'मेरे बहुत सख्त निर्देश हैं कि अगर कुछ होता है, तो वे उन्हें नक्शे से मिटा देंगे।’’ ईरान के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता जनरल अबुलफजल शेकारची ने कहा, 'ट्रंप जानते हैं कि अगर हमारे नेता की ओर हाथ भी बढ़ाया गया तो हम न केवल उस हाथ को काट देंगे बल्कि उनकी दुनिया में आग लगा देंगे।' ट्रंप ने पूर्व में कहा था कि उन्होंने अपने सलाहकारों को निर्देश दिया है कि अगर ईरान उनकी हत्या कराता है तो ईरान को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए। राष्ट्रपति ने भी दी थी चेतावनी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने हाल ही में कहा था, 'अगर ईरान के लोगों को अपने जीवन में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, तो इसकी वजह अमेरिकी सरकार और उसके सहयोगियों की तरफ से लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी और अमानवीय प्रतिबंध हैं। हमारे देश के सुप्रीम लीडर के खिलाफ कोई भी हमाल ईरान के खिलाफ पूर्ण युद्ध के बराबर होगा।' अमेरिकी राष्ट्रपति ने शनिवार को ‘पॉलिटिको’ को दिए एक साक्षात्कार में खामेनेई को ‘एक बीमार व्यक्ति’ बताया था और कहा था कि ‘उन्हें अपने देश को ठीक से चलाना चाहिए और लोगों की हत्या करना बंद करना चाहिए’। ट्रंप ने कहा था कि ईरान में नए नेतृत्व की तलाश का समय आ गया है। ईरान की खराब अर्थव्यवस्था को लेकर 28 दिसंबर को शुरू हुए प्रदर्शनों पर अधिकारियों द्वारा की गई हिंसक कार्रवाई के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है।

विदेशों में भारत का स्ट्रैटेजिक नेटवर्क! मिडिल ईस्ट से यूरोप तक दुश्मन की हर चाल होगी बेनकाब

नई दिल्ली भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए अंतरिक्ष-आधारित निगरानी प्रणाली का बड़े पैमाने पर विस्तार करने जा रहा है। इस योजना के तहत 50 से अधिक नए जासूसी सैटेलाइट जल्द लॉन्च किए जाएंगे, जिनमें रात और बादलों के बीच भी साफ तस्वीरें लेने की क्षमता होगी। इस फैसले के पीछे पिछले साल पाकिस्तान के साथ संघर्ष के दौरान सामने आई निगरानी संबंधी कमियां प्रमुख वजह बताई जा रही हैं।   ब्लूमबर्ग ने मामले से परिचित लोगों के हवाले से लिखा है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार विदेशों में ग्राउंड स्टेशन स्थापित करने की भी योजना पर काम कर रही है। संभावित स्थानों में मध्य पूर्व, दक्षिण-पूर्व एशिया और स्कैंडिनेवियाई देश शामिल हैं। इन स्टेशनों से सैटेलाइट से मिलने वाली सूचनाओं को तेज और व्यापक तरीके से रिले किया जा सकेगा, हालांकि इसके लिए मेजबान देशों की मंजूरी जरूरी होगी। रात और खराब मौसम में भी निगरानी भारत अपने मौजूदा सैटेलाइटों में भी तकनीकी अपग्रेडेशन करने जा रहा है। इसके तहत इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम से आगे बढ़ते हुए सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) तकनीक अपनाई जाएगी, जो अंधेरे और बादलों जैसी परिस्थितियों में भी हाई-रिजॉल्यूशन इमेज कैप्चर करने में सक्षम है। इसके अलावा, सैटेलाइटों के बीच सीधे डेटा ट्रांसफर (इंटर-सैटेलाइट लिंक) की व्यवस्था विकसित की जा रही है, ताकि हर बार ग्राउंड स्टेशन पर निर्भर न रहना पड़े। स्पेस-बेस्ड सर्विलांस-3 पर फोकस सूत्रों के मुताबिक, स्पेस-बेस्ड सर्विलांस-3 (SBS-3) कार्यक्रम के तहत पहले चरण में 52 सैटेलाइट को तेजी से लॉन्च करने की तैयारी है। पहला बैच अप्रैल तक अंतरिक्ष में भेजा जा सकता है। इस प्रणाली से भारत उन संवेदनशील क्षेत्रों पर कहीं ज्यादा बार नजर रख सकेगा, जहां मौजूदा तकनीक के चलते निगरानी अंतराल कई दिनों का होता है। यानी उस जगह की जानकारी जुटाने में कई दिन लग जाते हैं। इससे पहले मिंट ने अप्रैल में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन, यानी ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन के चेन्नई में एक इवेंट में दिए बयान का हवाला देते हुए बताया था कि भारत अपनी सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 150 नए सैटेलाइट तैनात करने की योजना बना रहा है। उन्होंने बताया कि 150 सैटेलाइट को लॉन्च करने की अनुमानित लागत लगभग 260 बिलियन रुपये (2.8 बिलियन डॉलर) है। हालिया संघर्ष से मिली सीख ये व्यापक कदम मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिन के सैन्य टकराव से मिले सबक को भी दर्शाते हैं। उस दौरान लक्ष्य पहचान और निगरानी में सैटेलाइट की अहम भूमिका रही। रक्षा मंत्रालय से जुड़े एक रिसर्च समूह ने पिछले साल कहा था कि चीन ने पाकिस्तान को सैटेलाइट कवरेज देने में मदद की थी। स्पेसक्राफ्ट ट्रैकर N2YO.com के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के पास इस समय 100 से अधिक सैटेलाइट कक्षा में हैं, जबकि पाकिस्तान के पास महज आठ सैटेलाइट हैं। हालांकि अभी भारत के सैटेलाइट रात और बादलों में निगरानी करने में सीमित क्षमता रखते हैं। निगरानी अंतराल होगा कुछ घंटों का फिलहाल किसी क्षेत्र की दोबारा निगरानी में कई दिनों का अंतराल आ जाता है। इसी कारण भारत को पिछले साल पाकिस्तान के खिलाफ अभियानों की योजना बनाने के लिए अमेरिका की निजी कंपनियों से सैटेलाइट डेटा खरीदना पड़ा। नए जासूसी सैटेलाइट की तैनाती से यह अंतराल घटकर कुछ घंटों का रह सकता है। रॉकेट लॉन्च में चुनौतियां और निजी क्षेत्र की भूमिका इन सैटेलाइट को लॉन्च करने के लिए ISRO अपने मौजूदा रॉकेटों का इस्तेमाल करेगा। हालांकि, हाल के महीनों में एजेंसी को सफलता और असफलता दोनों का सामना करना पड़ा है। इस महीने एक रॉकेट लॉन्च विफल रहा- पिछले एक साल में यह दूसरी ऐसी घटना थी। इसके बावजूद, ISRO ने 24 दिसंबर को अमेरिकी कंपनी AST SpaceMobile के BlueBird Block-2 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया था। सरकार की इस व्यापक अंतरिक्ष निगरानी रणनीति में निजी स्टार्टअप्स भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। Skyroot Aerospace Pvt. जैसी कंपनियां भारत की स्पेस-बेस्ड मॉनिटरिंग क्षमताओं को मजबूत करने और सरकारी प्रयासों को समर्थन देने के लिए आगे आ रही हैं। कुल मिलाकर, भारत का यह आक्रामक अंतरिक्ष विस्तार न केवल सीमा सुरक्षा को नई धार देगा, बल्कि भविष्य के सैन्य और रणनीतिक परिदृश्य में उसकी स्थिति को भी कहीं अधिक मजबूत बनाएगा।

इतिहास की झलक: राहुल गांधी को मिला फिरोज गांधी का पुराना ड्राइविंग लाइसेंस, मां सोनिया को किया फॉरवर्ड

रायबरेली उत्तर प्रदेश के रायबरेली के दो दिवसीय दौरे पर आए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के लिए मंगलवार का दिन बेहद खास रहा। उन्हें उनके दादा और पूर्व सांसद फिरोज गांधी का दशकों पुराना ड्राइविंग लाइसेंस भेंट किया गया, जो वर्षों से गुमनाम था। रायबरेली प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान आयोजन समिति के सदस्य विकास सिंह ने राहुल गांधी को यह ऐतिहासिक दस्तावेज सौंपा।   विकास सिंह ने बताया कि उनके ससुर को यह लाइसेंस कई साल पहले एक कार्यक्रम के दौरान मिला था। उनके निधन के बाद उनकी सास ने इसे एक अमानत की तरह सुरक्षित रखा था। विकास सिंह ने कहा, "हमें लगा कि यह गांधी परिवार की धरोहर है और राहुल जी के रायबरेली दौरे के दौरान इसे उन्हें सौंपना हमारा कर्तव्य है।" जैसे ही राहुल गांधी को यह लाइसेंस मंच पर सौंपा गया, उन्होंने इसे बहुत ध्यान से देखा। पुरानी यादों से जुड़ा यह दस्तावेज देखकर राहुल गांधी काफी प्रभावित नजर आए। उन्होंने तुरंत अपने मोबाइल से लाइसेंस की फोटो खींची और व्हाट्सऐप के जरिए अपनी मां सोनिया गांधी को भेज दी। आपको बता दें कि फिरोज गांधी का जन्म दिसंबर 1912 में हुआ था। उन्होंने 1952 में भारत के पहले आम चुनाव में रायबरेली सीट का प्रतिनिधित्व किया था। 7 सितंबर 1960 को उनका निधन हो गया था। आपको बता दें कि रायबरेली न केवल राहुल गांधी का वर्तमान निर्वाचन क्षेत्र है, बल्कि उनके दादा फिरोज गांधी और मां सोनिया गांधी का भी कार्यक्षेत्र रहा है।  

मिलिंद सोमन की जगह ‘लकड़बग्घा 2’ में शामिल हुए आदिल हुसैन, जानवरों के अधिकारों के लिए उठाएंगे आवाज

मुंबई, आज के समय में बॉलीवुड में सीक्वल और फ्रेंचाइजी की मांग तेजी से बढ़ रही है। दर्शक अब सिर्फ कहानी या स्टार कास्ट नहीं, बल्कि फिल्म की सामाजिक पहचान और संदेश भी देखना चाहते हैं। ऐसे में ‘लकड़बग्घा’ जैसी फिल्में लोगों के बीच खास बन जाती हैं, जो एक्शन और मनोरंजन के साथ जानवरों के अधिकारों पर भी जोर देती हैं। पहली फिल्म की सफलता और इसकी थीम ने दर्शकों का ध्यान खींचा और अब इसके दूसरे पार्ट को लेकर कई उम्मीदें लगाई जा रही हैं। इसी कड़ी में अभिनेता आदिल हुसैन अपने शिक्षक वाले किरदार के जरिए फ्रेंचाइजी में शामिल होंगे। यह किरदार पहले मिलिंद सोमन निभा रहे थे, लेकिन सीक्वल में आदिल हुसैन इसे निभाएंगे। आदिल हुसैन ने कहा, ”जब मैंने पहली बार ‘लकड़बग्घा’ देखी, तो मैं इससे काफी प्रेरित हुआ। यह फिल्म जानवरों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली फिल्म है। साथ ही, यह पिछले दशक में बॉलीवुड में आने वाली फिल्मों से काफी अलग है। शायद 1970 के दशक की फिल्म ‘हाथी मेरे साथी’ के बाद इतनी मजबूती से जानवरों के पक्ष में कोई फिल्म नहीं बनी। इस तरह की थीम और संदेश मेरे दिल को भा गए और यही वजह रही कि मैंने इस फ्रेंचाइजी का हिस्सा बनने का फैसला किया।” आदिल हुसैन ने बताया, ”फिल्म में मार्शल आर्ट्स ट्रेनिंग और एक्शन सीक्वेंस करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अभिनेता अंशुमन झा की मदद और समर्थन से यह अनुभव आसान और सीखने योग्य बन गया। उन्होंने शूटिंग के दौरान सहायक रवैया दिखाया, जिससे काम करना मजेदार रहा। मुझे पहले से ही अंशुमन झा के साथ काम करने का अनुभव रहा है। उन्होंने निर्देशक और सह-अभिनेता दोनों रूप में मेरे साथ काम किया है।’ ‘लकड़बग्घा 2: द मंकी बिजनेस’ को ‘एनिमल लवर विजिलांटे यूनिवर्स’ फिल्म बताया जा रहा है, यानी यह फिल्म एक ऐसे हीरो के इर्द-गिर्द घूमती है, जो समाज में जानवरों के साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता है। फिल्म की शूटिंग जून 2025 में पूरी हो चुकी है, और इसके साथ ही पिछली फिल्म की तुलना में इस बार स्टोरीलाइन, एक्शन और विजुअल्स को और बड़ा बनाया गया है। इस फिल्म में अंशुमन झा फिर से अपने किरदार अर्जुन बख्शी के रूप में नजर आएंगे, जो एक आम इंसान है, लेकिन वह जानवरों के पक्ष में समाज से लड़ता है।  

चहल और आरजे महवश के रिश्ते में दरार? दोनों ने इंस्टाग्राम पर तोड़ा कनेक्शन

नई दिल्ली इंडियन क्रिकेटर युजवेंद्र चहल और कंटेंट क्रिएटर आरजे महवश ने इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो कर दिया है। उन्होंने ऐसा क्यों किया? इसका जवाब तो अभी तक नहीं मिला है। हालांकि, सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि दोनों की लड़ाई हो गई है। बता दें, जब से युजवेंद्र चहल का तलाक हुआ तब से यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि युजवेंद्र चहल और आरजे महवश एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों को अक्सर साथ में स्पॉट किया जाता है। धनश्री का दावा पिछले साल रिएलिटी शो ‘राइज एंड फॉल’ में युजवेंद्र चहल की एक्स वाइफ धनश्री वर्मा ने दावा किया था कि शादी के दो महीने बाद युजवेंद्र चहल ने उन्हें धोखा दिया था। उन्होंने कहा था, “मैंने सगाई के बाद से ही उनके बिहेवियर में बदलाव नोटिस कर लिया था, लेकिन मैंने उन पर और अपने रिश्ते पर भरोसा रखा। मेरी समस्या ये है कि मैं अपने आस-पास के लोगों को बहुत ज्यादा मौके देती हूं। लेकिन मैं मौके दे देकर थक गई। मैंने अपनी तरफ से हर कोशिश की थी और अपना 100% दिया था। हालांकि, चीजें ठीक नहीं हुईं।” युजवेंद्र चहल का रिएक्शन बाद में, युजवेंद्र चहल ने धनश्री के दावों पर रिएक्ट करते हुए हिंदुस्तान टाइम्स से कहा था, “मैं एक खिलाड़ी हूं और मैं धोखा नहीं देता। अगर कोई दो महीने में ही धोखा देता तो इतना लंबा रिश्ता चलता क्या? मेरे लिए, यह चैप्टर खत्म हो गया है। मैं अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गया हूं और दूसरों को भी ऐसा ही करना चाहिए।”  

पाक उछला, लेकिन भारत ने UAE के साथ कर लिया मास्टरस्ट्रोक समझौता, जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली भारत और यूएई के बीच हाल ही में हुए समझौते पाकिस्तान की बौखलाहट बढ़ा सकते हैं। इस सप्ताह यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भारत पहुंचे थे जहां दोनों देशों के बीच कई अहम साझेदारियां हुई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नाहयान ने दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार को 2032 तक 200 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी की योजना भी पेश की है, जिसे बेहद अहम माना जा रहा है।   दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षर किए गए पांच दस्तावेजों में सबसे अहम दस्तावेज रणनीतिक रक्षा साझेदारी स्थापित करने की प्रतिबद्धता रही। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब महज 4 महीने पहले पाकिस्तान और सऊदी अरब ने अपने रक्षा समझौतों को मजबूत करने की योजना बनाई है। दोनों देशों के बीच एक ऐसा समझौता भी हुआ है जिसके तहत एक देश पर हमले को दूसरे के विरुद्ध भी हमला माना जाएगा। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी और यूएई के राष्ट्रपति के बीच यमन की स्थिति पर भी चर्चा हुई। यह वही मुद्दा है, जिस पर सऊदी अरब और यूएई के रिश्तों में हाल के समय में खटास आई है। इसके अलावा गाजा की स्थिति और ईरान की स्थिति को लेकर भी बातचीत हुई। रक्षा समझौते में क्या? रक्षा साझेदारी के तहत भारत और यूएई रक्षा औद्योगिक सहयोग और उन्नत प्रौद्योगिकियों, साइबरस्पेस प्रशिक्षण, विशेष अभियानों, अपनी सेनाओं के संचालन और आतंकवाद रोधी गतिविधियों में सहयोग पर ध्यान केंद्रित करेंगे। दोनों पक्षों ने उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने का भी फैसला किया है, जिसमें बड़े परमाणु रिएक्टर और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर का विकास तथा उन्नत रिएक्टर प्रणालियों, परमाणु ऊर्जा संयंत्र संचालन और रखरखाव एवं परमाणु सुरक्षा में सहयोग शामिल है। इस दौरान एक और समझौते पर हस्ताक्षर किए गए जिसके तहत हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) 2028 से शुरू होने वाले 10 वर्षों में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी गैस से 0.5 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी (तरल प्राकृतिक गैस) खरीदेगी। इस डील के बाद भारत, अबू धाबी का सबसे बड़ा LNG ग्राहक बन गया है। बदलते क्षेत्रीय समीकरण भारत-यूएई समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब तुर्की सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए रक्षा समझौते में शामिल होने की कोशिश कर रहा है। इससे मध्य पूर्व में एक नया सैन्य गुट बनने की आशंका जताई जा रही है। इस बीच पाकिस्तान, नाटो की तर्ज पर इस्लामिक नाटो के सपने भी देख रहा है। वहीं सऊदी अरब और यूएई, जो लंबे समय तक करीबी सहयोगी रहे हैं, अब क्षेत्रीय नीतियों को लेकर अलग रास्तों पर नजर आ रहे हैं। दोनों देश यमन और सूडान में अलग-अलग पक्षों का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में यूएई संग भारत का समझौता पाक के लिए झटका हो सकता है।