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CS अनुराग जैन का कड़ा संदेश: कलेक्टर-SP को दिया अल्टीमेटम, अब नहीं चलेगी मनमानी

भोपाल  मध्यप्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी को मुख्य सचिव अनुराग जैन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है – अफसर सुधरें, जनता के काम रुकने नहीं चाहिए, नहीं तो अंजाम ठीक नहीं होगा।” कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के तहत वर्चुअल समीक्षा के दौरान CS जैन ने संभागायुक्त, कलेक्टर, DIG, पुलिस कमिश्नर और SP को दो-टूक निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि जिलों में किसी भी तरह का अवैध काम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, खासकर अवैध खनन पर तत्काल और सख़्त कार्रवाई हो। उन्होंने यह भी साफ किया कि CM हेल्पलाइन की शिकायतों के निपटारे में लापरवाही मुख्यमंत्री को नाराज़ कर रही है। अवैध खनन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर फटकार CS जैन ने समीक्षा में पाया कि कई जिलों में अवैध खनन धड़ल्ले से चल रहा है। भिंड जिले का उदाहरण देते हुए उन्होंने SP से सीधा सवाल किया – पुलिस का डर कहां है? ऐसे नहीं चलेगा। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को लेकर भी नाराज़गी जताई। भिंड से बड़ी संख्या में नवजातों को ग्वालियर रेफर किए जाने पर कलेक्टर को निर्देश दिए कि जिले में ही बेहतर इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। एयर एंबुलेंस में भी बड़ा अंतर समीक्षा में सामने आया कि रीवा (44), जबलपुर (21), भोपाल (14), छतरपुर (11) और ग्वालियर (5) ने एयर एंबुलेंस सेवा का उपयोग किया जबकि 32 जिलों ने एक भी बार सेवा नहीं ली, जिसे CS ने गंभीर लापरवाही माना जिलों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड ST-SC मामलों में मुआवजा वितरण अव्वल: जबलपुर, सीहोर, राजगढ़ पिछड़े: विदिशा, मऊगंज, भोपाल शहरी सड़क हादसों में कमी आगे: बैतूल, रतलाम, आगर मालवा   पिछड़े: गुना, डिंडौरी, मैहर, मुरैना, श्योपुर, सीधी, अनूपपुर, दमोह, इंदौर, विदिशा, टीकमगढ़ नामांतरण प्रकरण निपटारा अव्वल: दतिया, हरदा, बड़वानी, बालाघाट, खंडवा पीछे: दमोह, सीधी सीमांकन व बंटवारा प्रकरण  आगे: मंडला, बड़वानी, छतरपुर, अशोकनगर पीछे: मैहर, टीकमगढ़, सीधी एक बगिया मां के नाम योजना आगे: खंडवा, सिंगरौली  पीछे: सतना, मुरैना राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम  टॉप: इंदौर, देवास पिछड़े: भोपाल, ग्वालियर नर्मदा परिक्रमा पथ सीवरेज योजना आगे: अनूपपुर, नरसिंहपुर, खंडवा पीछे: खरगोन, नर्मदापुरम साफ संदेश: अब बहाने नहीं चलेंगे मुख्य सचिव अनुराग जैन ने स्पष्ट कर दिया कि अब कामकाज में लापरवाही, जनता की अनदेखी और अवैध गतिविधियों पर सीधे एक्शन होगा। अच्छा काम करने वाले अफसरों की पीठ थपथपाई गई, लेकिन पिछड़े जिलों को अंतिम चेतावनी भी दे दी गई।

स्वास्थ्य मंत्रालय का खुलासा: दिसंबर में 167 दवाओं के नमूने फेल

नई दिल्ली देश भर में बिक रहीं 167 दवाओं के नमूने फेल पाए गए हैं। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन की ओर से की गई जांच में यह बात सामने आई है कि इनकी गुणवत्ता खराब है। दिसंबर 2025 को लेकर यह अलर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी किया गया है। मिनिस्ट्री का कहना है कि दवाओं के 74 सैंपल तो केंद्रीय ड्रग्स एजेंसी ने फेल किए हैं और 93 सैंपल राज्यों की अथॉरिटीज ने खराब बताए हैं। इस तरह देश भर में कुल 167 दवाओं को फेल घोषित किया गया है। इन दवाओं की CDSCO ने अपने पोर्टल पर जारी की है। हर महीने ही संस्था की ओर से ऐसी दवाओं की सूची जारी की जाती है, जिनके नमूने फेल पाए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार जिन दवाओं के नमूने फेल किए गए हैं, उन्हें एक या उससे अधिक पैरामीटर्स पर स्टैंडर्ड से कमजोर पाया गया। इन दवाओं को NSQ यानी नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वॉलिटी पाया गया। नोटिस में यह भी कहा गया है कि सरकारी लैब में दवाओं के जिस बैच को टेस्ट किया गया, उन्हें फेल पाया गया। इसका अर्थ यह नहीं है कि बाजार में उपलब्ध दवाओं को लेकर किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। हर महीने ऐसा एक रूटी क्वॉलिटी टेस्ट होता है, जिसमें दवाओं के परीक्षण किया जाता है और उनकी लिस्ट जारी की जाती है। उत्तर भारत में गाजियाबाद की लैब में 4 ऐसे सैंपल पाए गए। इसके अलावा अहमदाबाद, बिहार और महाराष्ट्र से भी कई नमूने फेल मिले। इन दवाओं को अनऑथराइज्ड संस्थाओं की ओर से तैयार किया जा रहा था। इसके लिए दूसरे ब्रांड्स का नाम भी इस्तेमाल गैर-कानूनी तरीके से किया जा रहा था। फिलहाल इस मामले की जांच की जा रही और कानून के अनुसार कार्रवाई भी होगी। राज्य स्तरीय रेगुलेटरीज के साथ मिलकर हर महीने ही इस तरह की टेस्टिंग की जाती है। इसी दौरान ऐसी दवाएं भी कई बार सामने आती हैं, जो नकली होती हैं और किसी कंपनी के उत्पाद की नकल करके तैयार की जाती हैं।

पंचायत का अजीब फैसला: दो पत्नियों के बीच पति के तीन-तीन दिन बंटे, रविवार को अवकाश

सैदनगर  यूपी के रामपुर के अजीमनगर थाना क्षेत्र में दो पत्नियों के बीच पति के बंटवारे का एक बेहद ही दिलचस्प मामला सामने आया है। आए दिन होने वाले झगड़े से परेशान पति के लिए पंचायत ने अनोखा समझौता कराया। अब पति सप्ताह में तीन-तीन दिन दोनों पत्नियों के पास रहेगा, जबकि रविवार का दिन पति के लिए सुरक्षित रखा गया है, जिस दिन वह दोनों से दूर एकांत में रहेगा। पंचायत का यह अनूठा फैसला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला नगलिया आकिल गांव का है। यहां मुस्लिम समुदाय के एक युवक की दो पत्नियां हैं। पहली अरेंज मैरिज से और दूसरी लव मैरिज से। दोनों ही पत्नियां पति को अपने पास रखने की जिद पर अड़ी रहती थीं, जिसके कारण घर में आए दिन लड़ाई होती थी। विवाद जब पुलिस तक पहुँचा, तो मामला सुलझाने की जिम्मेदारी गांव की पंचायत को सौंपी गई। पंचायत ने दोनों पक्षों और पति की बात सुनने के बाद बीच का रास्ता निकालते हुए दिनों का बंटवारा कर दिया। पंचायत के फैसले के मुताबिक, पति सप्ताह के शुरुआती तीन दिन (सोमवार, मंगलवार और बुधवार) पहली पत्नी के साथ बिताएगा। वहीं, गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार का दिन दूसरी पत्नी के नाम रहेगा। रविवार के दिन पति को 'साप्ताहिक अवकाश' की तर्ज पर दोनों से दूर एकांत में रहने की छूट दी गई है। पंचों ने विशेष परिस्थितियों में एक दिन आगे-पीछे करने की भी गुंजाइश रखी है। इस लिखित समझौते पर पति और दोनों पत्नियों के हस्ताक्षर कराए गए हैं, ताकि भविष्य में फिर से क्लेश न हो। पहले भी सामने आए हैं ऐसे मामले ऐसा ही एक मामला पिछले साल फरवरी में बिहार के पूर्णिया से सामने आया था। वहां एक शख्स ने अपनी पहली पत्नी को तलाक दिए बगैर ही दो शादियां कर ली थीं। हंगामा होने के बाद पति का बंटवारा कर दिया गया था। वह बंटवारा भी एक हफ्ते में आने वाले सात दिनों के आधार पर किया गया था। खास बात यह थी कि बंटवारे में एक दिन पति की छुट्टी भी तय की गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला सबसे पहले पुलिस परिवार परामर्श केंद्र में पहुंचा था। पहली पत्नी ने पुलिस से अपने पति की शिकायत की थी। परिवार परामर्श केंद्र के सदस्यों ने कहा कि इस मामले में युवक को अब जेल जाना होगा। इसके बाद दोनों पत्नियों में झगड़ा शुरू हो गया। इस झगड़े के निपटारे में यह तय हुआ था कि पति हफ्ते में तीन दिन पहली पत्नी और तीन दिन दूसरी पत्नी के साथ रहेगा। एक दिन अपनी मर्जी से किसी पत्नी के साथ रह सकता है। 

गणतंत्र दिवस के दिन शुष्क दिवस पर शराब दुकानें रहेंगी बंद

कोरिया. गणतंत्र दिवस के अवसर पर 26 जनवरी 2026 को कोरिया, रायपुर जिले सहित प्रदेशभर में शुष्क दिवस रहेगा। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट चंदन संजय त्रिपाठी ने छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार 26 जनवरी 2026 (सोमवार) को जिले की समस्त देशी, विदेशी एवं कम्पोजिट मदिरा की फुटकर दुकानें, एफ.एल.3(ग) पर्यटन बार, एफ.एल.4 (क) व्यवसायिक क्लब तथा सभी अहाते पूर्णतः बंद रहेंगे। यह आदेश आबकारी आयुक्त, छत्तीसगढ़ रायपुर के निर्देशों के परिपालन में जारी किया गया है। जिला प्रशासन ने संबंधित संचालकों एवं अनुज्ञापत्र धारकों को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

लुधियाना में आज तेज बारिश के साथ गिरेंगे ओले

लुधियाना. लगातार हाड़ कंपा देने वाली पड़ रही भयानक सर्दी और घने कोहरे की मार झेल रहे लुधियानवियो को अब आने वाले 2 दिनों तक बरसात होने के कारण सूखी ठंड में राहत मिलेगी। मौसम वैज्ञानिकों द्वारा जारी किए गए अपडेट के मुताबिक 22 और 23 जनवरी को शहर में आंधी तूफान, आसमानी बिजली की ग़रज़ चमक के साथ ही ओलावृष्टि होने की संभावना है। वही भारी बरसात को लेकर मौसम वैज्ञानिकों द्वारा ऑरैंज और यैलो अलर्ट भी जारी किया गया है। शहर में पिछले कई दिनों से पड़ रही कड़ाके की सर्दी के साथ ही सुबह और शाम के समय आसमान से गने वाले घने कोहरे ने जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर रखा है l अधिकतर इलाकों में हालात यह बने हुए हैं कि सुबह और शाम के समय सड़कों पर घना कोहरा गिरने के कारण पूरी तरह से सन्नाटा पसर कर रह जाता है जबकि इस बीच दोपहर के समय आसमान में खिलने वाली धूप भी लोगों को ठंड के प्रकोप से कोई खास राहत नहीं दिलवा पा रही है। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से धूप खिलने के कारण दिन के समय के तापमान में बढ़ोतरी हुई है लेकिन इस बीच शाम ढलते ही तापमान गिरने से सर्दी अपना प्रचंड रूप दिखाने लगती है और शहर की भागती दौड़ती जिंदगी मानो जैसे थम सी जाती है l पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी में तैनात मौसम विभाग की माहिर डॉक्टर पवनीत कौर किंगरा ने बताया कि 22 और 23 जनवरी को शहर में आंधी-तूफान, बारिश और कई इलाकों में ओलावृष्टि होने के बाद 24 और 25 जनवरी को पंजाब के कई हिस्सों में घना कोहरा छा सकता है।

बीजापुर में इंद्रावती नदी पर नाव पलटने से परिवार के 4 लोग लापता

बीजापुर. बीजापुर में इंद्रावती नदी में डोंगी पलटने से एक ही परिवार के 4 लोग तेज बहाव में बह गए। लापता लोगों में दो महिलाएं और दो बच्चों शामिल हैं। डोंगी में कुल छह लोग सवार थे, जिनमें से दो को स्थानीय लोगों ने बचा लिया। यह घटना शाम करीब 5 बजे उसपरी झिल्ली घाट पर हुई। सभी पीड़ित इंद्रावती नदी पार स्थित बोड़गा गांव के निवासी थे। वे बाजार से अपने घर लौट रहे थे, तभी डोंगी अनियंत्रित होकर पलट गई, जिससे यह हादसा हुआ। तहसीलदार सूर्यकांत ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि राजस्व और स्वास्थ्य विभाग की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गई थीं। नगर सेना (होमगार्ड) को भी सूचित कर दिया गया है। नगर सेना की टीम आज सुबह मोटर बोट की सहायता से लापता लोगों की तलाश शुरू कर दी है। इंद्रावती नदी के पार स्थित दर्जनों गांवों के निवासियों के लिए पीडीएस राशन लाने या बाजार आने-जाने के लिए डोंगी ही एकमात्र साधन है। इस नदी के घाटों पर डोंगी पलटने से हर साल कई लोगों की जान चली जाती है।

जीतू पटवारी के खिलाफ वारंट जारी, पुलिस तलाश में जुटी, जानें पूरा मामला

ग्वालियर  मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री जीतू पटवारी के खिलाफ एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने जमानती वारंट जारी कर दिया है। वारंट की राशि 500 रुपये है। पुलिस को पटवारी की तलाश है, क्योंकि वे कोर्ट में पेश नहीं हो रहे। मामला लोकसभा चुनाव 2024 से जुड़ा है। 4 मई 2024 को भिंड जिले के उमरी थाना पुलिस ने जीतू पटवारी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप था कि चुनाव प्रचार के दौरान पटवारी ने बसपा प्रत्याशी देवाशीष जरारिया पर भाजपा से साठगांठ करने का आरोप लगाया था। 16 जनवरी 2026 को कोर्ट ने पटवारी को प्रकरण में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया था।पटवारी गैरहाजिर रहे, इसलिए कोर्ट ने अब जमानती वारंट जारी किया। पुलिस को पटवारी नहीं मिल रहे हैं। अगली सुनवाई: 20 फरवरी 2026 को तय की गई है। यह वारंट जमानती है, यानी पटवारी 500 रुपये जमा करके या जमानत पर रिहा हो सकते हैं, लेकिन कोर्ट में पेश होना अनिवार्य है। जीतू पटवारी के खिलाफ दोबारा वारंट  कोर्ट ने 16 जनवरी को इस मामले में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए तलब किया था, लेकिन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पेश नहीं हुए। इसके बाद एमपी-एमएलए कोर्ट ने 500 रुपये का जमानती वारंट जारी करते हुए एक बार फिर उन्हें तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को निर्धारित की गई है।   यह प्रकरण लोकसभा चुनाव के दौरान का है। चुनाव प्रचार के समय कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने बसपा प्रत्याशी देवाशीष जरारिया पर भाजपा से सांठगांठ करने का आरोप लगाया था। इस बयान के बाद बसपा प्रत्याशी के निर्वाचन अभिकर्ता अशोक गुप्ता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। इस प्रकरण में केवल जीतू पटवारी को ही आरोपी बनाया गया है। इससे पहले भी करीब आठ महीने पूर्व कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया जा चुका है। कोर्ट में पेश होने पर जारी हुआ जमानती वारंट अब इस मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने पटवारी को गुजरी 16 जनवरी 2026 को न्यायालय में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया था। लेकिन, पटवारी कोर्ट में पैश नहीं हुए। ऐसे में अब एमएलए कोर्ट ने उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। पुलिस को पटवारी नहीं मिल रहे हैं। 20 फरवरी को अगली सुनवाई इस मामले में जीतू पटवारी की अगली सुनवाई 20 फरवरी 2026 को होनी है। ये वारंट जमानती है, यानी जीतू पटवारी 500 रुपए जमानत राशि कोर्ट में जमा करके जमानत पर रिहा हो सकते हैं, लेकिन सुनवाई के दौरान उन्हें कोर्ट में पेश होना अनिवार्य है।

मुंबई की मेयर पद के लिए बड़ा ऐलान: महिला ही होगी मेयर, उद्धव गुट में मचा बवाल

मुंबई  बीएमसी के मेयर पद को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. लॉटरी सिस्टम के जरिए तय हुए आरक्षण के अनुसार इस बार मुंबई का मेयर पद ‘ओपन महिला’ कैटेगरी में आ गया है. इसका मतलब है कि अब बीएमसी की मेयर सिर्फ कोई महिला ही बन सकती है. जीती हुई महिला नगरसेवकों में से ही कोई एक इस पद पर पहुंचेगी. महाराष्ट्र के स्थानीय निकायों में मेयर पद के लिए आरक्षण की व्यवस्था हर बार लॉटरी से तय की जाती है. इसी प्रक्रिया में बीएमसी का मेयर पद महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हो गया. इससे पहले कई बार यह पद सामान्य या अन्य श्रेणियों में आता रहा है, लेकिन इस बार लॉटरी में महिला कैटेगरी निकल आई है. अब बीएमसी में बहुमत वाली पार्टी या गठबंधन अपनी महिला पार्षद को मेयर पद के लिए आगे करेगा. हालांकि इस फैसले पर शिवसेना (यूबीटी) ने आपत्ति जताई है. पार्टी ने आरोप लगाया कि मुंबई को ओबीसी आरक्षण के ड्रॉ से बाहर रखा गया है. शिवसेना यूबीटी के नेताओं का कहना है कि मुंबई जैसे महानगर में ओबीसी समुदाय की आबादी को ध्यान में रखते हुए आरक्षण में उनका हिस्सा होना चाहिए था, लेकिन लॉटरी में ऐसा नहीं हुआ. पार्टी ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे पक्षपातपूर्ण बताया है. मुंबई में मेयर का पोस्ट महिला कोटे में गया… अन्य सीटों का क्या हुआ? बीएमसी के मेयर पद का पोस्ट लॉटरी सिस्टम के जरिए महिला कोटे में गया है. शिवसेना-UBT ने मुंबई आरक्षण पर लॉटरी को लेकर आपत्ति जताई है. ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने सवाल उठाया था कि OBC आरक्षण ड्रॉ से मुंबई को क्यों बाहर रखा गया.  इसके अलाना पुणे, धुले, बीएमसी, नांदेड़, नवी मुंबई, मालेगांव, मीरा भयंदर, नासिक और नागपुर में मेयर की सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हुई है. मेयर आरक्षण लॉटरी के बाद बदले सियासी समीकरण, लातूर-जालना SC महिला और ठाणे SC के लिए आरक्षित महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों के मद्देनजर आरक्षण लॉटरी की घोषणा के बाद राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव आया है. लातूर, जालना और ठाणे सहित कुल पांच नगर निगमों की मेयर सीटें अब अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित कर दी गई हैं. इनमें से लातूर और जालना नगर निगम की सीटें विशेष रूप से अनुसूचित जाति (SC) की महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं. वहीं, राज्य के महत्वपूर्ण नगर निगमों में से एक ठाणे को अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है.  महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के मेयर आरक्षण का ऐलान, मुंबई-पुणे सहित बड़े शहरों में महिला सीट महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार, 22 जनवरी को राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के लिए मेयर पद के आरक्षण की आधिकारिक घोषणा कर दी है. मंत्रालय में आयोजित आरक्षण लॉटरी के मुताबिक, 29 में से 16 सीटें तमाम श्रेणियों के लिए आरक्षित की गई हैं, जबकि 13 सीटें सामान्य वर्ग के लिए हैं. इस बार महिलाओं का दबदबा देखने को मिला है, जहां कुल 17 सीटों पर महिला मेयर चुनी जाएंगी.  मुंबई (बृहन्मुंबई), पुणे, नागपुर और नाशिक जैसी प्रमुख महानगरपालिकाएं 'सामान्य महिला' (Open Woman) श्रेणी के लिए आरक्षित हुई हैं. वहीं, ठाणे को अनुसूचित जाति (SC) और कल्याण-डोंबिवली को अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है. जालना और लातूर की सीटें अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए सुरक्षित हैं. ओबीसी (OBC) वर्ग के लिए 8 सीटें आवंटित की गई हैं, जिनमें अहिल्यानगर और अकोला जैसी जगहों पर महिला मेयर होंगी. इस आरक्षण ने आने वाले मेयर चुनावों के लिए पार्टियों के चुनावी गणित को पूरी तरह बदल दिया है. प्रमुख महानगरों में आरक्षण की स्थिति आरक्षण लॉटरी के परिणामों ने राज्य के बड़े राजनीतिक केंद्रों में नई स्थिति पैदा कर दी है. मुंबई, पुणे, नागपुर, नाशिक और नवी मुंबई जैसी हाई-प्रोफाइल सीटें 'सामान्य महिला' वर्ग के लिए आरक्षित हुई हैं. इसका मतलब है कि इन शहरों में अब केवल महिला उम्मीदवार ही मेयर पद के लिए चुनाव लड़ सकेंगी. वहीं, वसई-विरार, पिंपरी-चिंचवड और सोलापूर जैसी सीटें पूरी तरह 'ओपन' रखी गई हैं, जहाँ किसी भी वर्ग का उम्मीदवार मेयर बन सकता है. SC, ST और OBC वर्गों का कोटा सामाजिक संतुलन को देखते हुए लॉटरी में अनुसूचित जाति (SC) के लिए 3 सीटें (जालना, लातूर और ठाणे) आरक्षित की गई हैं. अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए केवल कल्याण-डोंबिवली की सीट आरक्षित हुई है. ओबीसी (OBC) वर्ग के हिस्से में 8 सीटें आई हैं, जिनमें चंद्रपूर, कोल्हापुर और अहिल्यानगर शामिल हैं. इस रोटेशन पद्धति के जरिए सरकार ने सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है, जिससे अब नगर निकायों में नेतृत्व की नई तस्वीर साफ हो गई है. सामान्य महिला (Open Woman): मुंबई, पुणे, नागपुर, नाशिक, नाशिक, धुळे, नागपुर, मालेगांव, नवी मुंबई. सामान्य (Open): वसई-विरार, पिंपरी-चिंचवड, अमरावती, छ. संभाजीनगर, सांगली-मिरज-कुपवाड, सोलापूर. SC/SC महिला: ठाणे (SC), जालना और लातूर (SC महिला). ST: कल्याण-डोंबिवली. OBC/OBC महिला: चंद्रपूर (OBC), अहिल्यानगर, अकोला और जळगांव (OBC महिला). कांग्रेस ने उठाया सवाल इसी तरह कांग्रेस पार्टी ने भी परभणी नगर निगम के आरक्षण ड्रॉ पर सवाल खड़े किए हैं. कांग्रेस का कहना है कि कई जगहों पर लॉटरी की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी दिख रही है और कुछ शहरों को जानबूझकर बाहर रखा जा रहा है. दोनों पार्टियां राज्य सरकार पर आरोप लगा रही हैं कि वह आरक्षण व्यवस्था का दुरुपयोग कर रही है. बीएमसी चुनाव में शिवसेना (शिंदे गुट), भाजपा और अन्य सहयोगी दलों के गठबंधन महायुती को बहुमत मिला है. बहुमत होने के कारण मेयर पद पर उनका ही दावा मजबूत माना जा रहा है. अब गठबंधन अपनी किसी महिला पार्षद को मेयर बनाकर पद संभाल सकता है. दूसरी ओर महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के नेता इस फैसले को राजनीतिक खेल बताकर विरोध जता रहे हैं.

सीएम योगी का बड़ा बयान: ‘धर्म की आड़ में कालनेमि सनातन धर्म को कमजोर कर रहे

 लखनऊ प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य से जुड़े हालिया विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धर्म, राष्ट्र और सनातन पर तीखा और स्पष्ट संदेश दिया है. बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा कि आज के समय में धर्म की आड़ लेकर सनातन धर्म को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं और ऐसे लोगों से समाज को सतर्क रहने की जरूरत है. सीएम योगी ने ऐसे तत्वों को 'कालनेमि' करार देते हुए कहा कि ये लोग बाहर से धार्मिक दिखते हैं, लेकिन भीतर से धर्मविरोधी एजेंडे पर काम कर रहे हैं. सीएम योगी ने कहा कि एक योगी, संत या संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि संन्यासी की कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती, उसकी असली संपत्ति धर्म होता है और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो व्यक्ति धर्म के खिलाफ आचरण करता है, चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो, उसे सनातन परंपरा का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता. कौन है कालनेमि  सीएम योगी के बयान में इस्तेमाल किया गया कालनेमि शब्द अपने आप में गहरा अर्थ रखता है. कालनेमि का उल्लेख रामायण में मिलता है. वह एक मायावी असुर था, जिसने साधु का वेश धारण कर हनुमान को भ्रमित करने की कोशिश की थी. बाहर से वह धर्मात्मा और तपस्वी दिखाई देता था, लेकिन भीतर से उसका उद्देश्य भगवान राम के कार्य में बाधा डालना था. अंततः हनुमान ने उसके छल को पहचान लिया और उसका वध कर दिया. शंकराचार्य विवाद के बीच आया बयान सीएम योगी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब शंकराचार्य को अपने अनुयायियों के साथ रथ से मौनी अमावस्या पर स्थान करने जाने से रोकने के बाद बहस तेज है. हालांकि मुख्यमंत्री ने किसी व्यक्ति या संस्था का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके शब्दों को मौजूदा विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है. उनका संदेश यह था कि सनातन धर्म की रक्षा केवल परंपराओं से नहीं, बल्कि आचरण की शुद्धता से होती है. धर्म आचरण में दिखना चाहिए सीएम योगी ने यह भी कहा कि धर्म केवल वेश या शब्दों में नहीं, बल्कि आचरण में दिखाई देना चाहिए. उन्होंने समाज से अपील की कि धर्म के नाम पर फैलाए जा रहे भ्रम और दिखावे से सावधान रहें. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म ने हमेशा सत्य, संयम और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है और इसी मार्ग पर चलना ही उसकी सच्ची सेवा है.  

चंडीगढ़ में बिजली बिलों को लेकर नया नियम लागू

चंडीगढ़. चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (सीपीडीएल) ने शहर के घरेलू और गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली बिलिंग चक्र में बड़ा बदलाव करते हुए अब हर महीने बिल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 19 जनवरी से प्रभावी इस फैसले के साथ लंबे समय से चली आ रही द्वि-मासिक (दो महीने में एक बार) बिलिंग प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है। संयुक्त विद्युत नियामक आयोग (जेईआरसी) के दिशा-निर्देशों के तहत लिए गए इस निर्णय का उद्देश्य उपभोक्ताओं को एक साथ भारी बिलों के बोझ से बचाना और बिलिंग प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाना है। कंपनी का मानना है कि अब निवासी हर महीने मीटर रीडिंग और खपत का सटीक हिसाब रख सकेंगे। इससे घरेलू बजट बिगड़ने का जोखिम कम होगा। सीपीडीएल के अनुसार यह बदलाव बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और नई तकनीक को अपनाने का हिस्सा है। इस प्रणाली से न केवल मीटर रीडिंग में शुद्धता आएगी, बल्कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का निपटारा भी तेजी से हो सकेगा। कंपनी ने स्पष्ट किया कि मासिक बिलिंग से उपभोक्ताओं को बिल भुगतान में सुविधा होगी और वे मोबाइल के माध्यम से भी डुप्लीकेट बिल प्राप्त कर सकेंगे। व्हाट्सएप नंबर 9240216666 पर करें बिजली संबंधी शिकायत बिजली से संबंधित किसी भी जानकारी या शिकायत के लिए 24 घंटे संचालित कॉल सेंटर नंबर 19121 या व्हाट्सएप नंबर 9240216666 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा, सीपीडीएल ऐप और वेबसाइट के माध्यम से भी सेवाएं ली जा सकती हैं। शहर में स्थित 14 शिकायत केंद्र और 10 सब-डिवीजन कार्यालय भी उपभोक्ताओं की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहेंगे। कंपनी ने लोगों को सतर्क किया है कि वे अपनी व्यक्तिगत जानकारी या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। सीपीडीएल ने इस सुधार के माध्यम से चंडीगढ़ में बिजली वितरण प्रणाली को अधिक जवाबदेह बनाने का दावा किया है।