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नए फीचर्स के साथ 2026 Jeep Meridian एसयूवी लॉन्च, जानें इसकी कीमत और प्रमुख अपडेट्स

मुंबई   प्रीमियम एसयूवी निर्माता कंपनी Jeep India ने 2026 के लिए अपनी Jeep Meridian SUV का अपडेटेड वर्नज लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस एसयूवी को 23.33 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत पर उतारा है. एक बड़ा बदलाव यह भी है कि इस SUV में स्लाइडिंग सेकंड रो सीट्स तक होंगी, लेकिन यह अपडेट SUV के कुछ तीन-रो वेरिएंट तक ही सीमित है, जिनमें Limited और Overland वेरिएंट शामिल हैं. Jeep Meridian को क्या मिला अपडेट जहां पहले वाले वेरिएंट की कीमत 30.01 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है, जबकि इसके टॉप-स्पेक Overland ट्रिम की कीमत 35.61 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है. कार की दूसरी लाइन की सीटों में 60:40 स्प्लिट और रिक्लाइन फंक्शन पहले की तरह ही मिलने वाले हैं, हालांकि अब इनमें स्लाइडिंग फंक्शन जोड़ा गया है, जिसके चलते यह सीट 140/130 mm तक आगे-पीछे की जा सकती है. इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आपकी सभी सात सीटें भरी हुई हैं, तो अब आपके पास दूसरी लाइन की सीटों की पोज़िशन को एडजस्ट करने और तीसरी लाइन में बैठने वालों को ज़्यादा आराम देने के लिए ज़्यादा फ्लेक्सिबिलिटी है. इससे तीसरी पंक्ति में बैठना और उतरना भी आसान हो जाएगा. Stellantis India के बिजनेस हेड और डायरेक्टर – ऑटोमोटिव ब्रांड्स, कुमार प्रियेश ने कहा कि, "Limited और Overland वेरिएंट में स्लाइडिंग सेकंड-रो सीटों की शुरुआत कस्टमर फीडबैक का सीधा जवाब है, जिसमें तीसरी रो में ज़्यादा आराम की मांग की गई थी, खासकर साथ यात्रा करने वाले परिवारों के लिए. यह अपडेट Jeep Meridian की प्रीमियम पोजीशनिंग को पूरा करता है और सोच-समझकर, कस्टमर से प्रेरित सुधार देने पर हमारे फोकस को मज़बूत करता है." Jeep Meridian के फीचर्स इसके अलावा, लुक या फीचर्स के मामले में कार में और कोई बदलाव नहीं किए गए हैं. वेरिएंट के हिसाब से, इस SUV में पैनोरमिक सनरूफ, डुअल-ज़ोन ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, 12-वे पावर्ड फ्रंट वेंटिलेटेड सीटें और प्रीमियम अपहोल्स्ट्री मिलती रहेगी. कार में 10.25-इंच का फुल डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और 10.1-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम भी मिलता है, और इसके साथ ही ADAS समेत कई स्टैंडर्ड सेफ्टी टेक्नोलॉजी भी मिलती हैं. Jeep Meridian का इंजन इंजन की बात करें तो, इस SUV में पहले वाला ही 2.0-लीटर टर्बो-डीजल इंजन इस्तेमाल किया गया है, जो 168 bp की पावर और 350 Nm का टॉर्क जेनरेट करता है. ग्राहकों को मैनुअल और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन दोनों का ऑप्शन मिलता है, और इसके साथ ही हायर ट्रिम्स में Jeep का सेलेक्ट-टेरेन 4×4 सिस्टम भी मिलता है.

रेखा सरकार का बड़ा कदम: यमुना को फिर से दिल्ली की जीवनरेखा बनाने का वादा

नई दिल्ली  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यमुना को फिर से स्वच्छ और प्रवाहमान बनाने के लिए मिशन-मोड में ठोस एक्शन प्लान लागू करने के निर्देश दिए हैं। यमुना बनेगी फिर से दिल्ली की जीवनरेखा, एक्शन मोड में रेखा सरकार मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ये निर्देश  दिल्ली सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में यमुना की मौजूदा हालत, सीवेज ट्रीटमेंट, नालों की सफाई और अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर लाइन बिछाने जैसे कामों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना केवल नदी नहीं, बल्कि दिल्ली की जीवनरेखा है। सरकार वैज्ञानिक योजना, तय समय-सीमा और पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर इसे फिर से साफ और जीवंत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। बैठक में सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह सहित दिल्ली जल बोर्ड, पीडब्ल्यूडी, दिल्ली नगर निगम, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, डीडीए व अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में अभी 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) मिलकर रोजाना 814 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) गंदा पानी साफ कर रहे हैं, जो मौजूदा जरूरत के हिसाब से काफी है। लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार ने इस क्षमता को बढ़ाकर 1500 एमजीडी करने का बड़ा लक्ष्य रखा है। इसके लिए पुरानी मशीनों को सुधारकर दिसंबर 2027 तक 56 एमजीडी और 35 नए छोटे डिसेन्ट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीएसटीपी) लगाकर 170 एमजीडी अतिरिक्त क्षमता बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही नालों के पास नए बड़े प्लांट लगाकर दिसंबर 2028 तक 460 एमजीडी क्षमता और जोड़ी जाएगी, ताकि दिल्ली के सीवेज मैनेजमेंट को पूरी तरह चाक-चौबंद किया जा सके। मुख्यमंत्री ने बताया कि इससे सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिना साफ किया गया गंदा पानी अब यमुना में नहीं जाएगा। जैसे-जैसे सीवेज ट्रीटमेंट की क्षमता बढ़ेगी, शहर का ज्यादा से ज्यादा गंदा पानी पहले साफ होगा और फिर नदी में छोड़ा जाएगा। इससे यमुना का पानी धीरे-धीरे साफ होगा, बदबू और प्रदूषण कम होगा और नदी में दोबारा जीवन लौटेगा। लंबे समय में इससे पीने के पानी के स्रोत सुरक्षित होंगे, शहर की सेहत सुधरेगी और दिल्ली को भविष्य की बढ़ती आबादी के लिए बेहतर और टिकाऊ सीवेज व्यवस्था मिलेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि अनधिकृत कॉलोनियों और जेजे क्लस्टर्स में सीवर लाइन बिछाने का काम तेजी से किया जा रहा है। 675 जेजे क्लस्टर्स में से 574 में काम पूरा हो चुका है, जबकि 65 क्लस्टर्स में सीवेज इकट्ठा करने के लिए सिंगल पॉइंट कलेक्शन की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा, 1799 अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर नेटवर्क का काम दिसंबर 2026 से दिसंबर 2028 तक चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। इससे गंदा पानी बिना साफ हुए यमुना में जाने से रुकेगा। मुख्यमंत्री का मानना है कि जब तक दिल्ली के हर घर का कनेक्शन सीवर लाइन से नहीं होगा, तब तक गंदा पानी यमुना में गिरना बंद नहीं होगा और नदी पूरी तरह साफ नहीं हो पाएगी। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि अब दिल्ली के नालों की निगरानी के लिए पहली बार पुख्ता सिस्टम बनाया गया है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की टीमें 47 तय जगहों पर हर महीने पानी की जांच कर रही हैं। नजफगढ़ और शाहदरा नालों से जुड़े सभी छोटे नालों की पहचान और जांच ड्रोन सर्वे के जरिए जनवरी 2026 तक पूरी कर ली जाएगी, जबकि बाकी नालों का सर्वे दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) जून 2026 तक पूरा करेगा। इस पूरी कवायद का मकसद यह पता लगाना है कि कहां से और कितना प्रदूषण नदी में मिल रहा है ताकि उसे रोका जा सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यमुना को निर्मल करने के लिए पड़ोसी राज्यों से भी समन्वय बनाना होगा। बैठक में बताया गया कि नजफगढ़ ड्रेन में हरियाणा राज्य के छह नाले आकर मिलते हैं, जो कुल दूषित पानी का 33 प्रतिशत है। इसके अलावा, शाहदरा ड्रेन में उत्तर प्रदेश के चार बड़े नाले आकर गिरते हैं, जो कुल दूषित पानी का करीब 40 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मसले को लेकर वह दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री से समाधान पर बात करेंगी। मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि वर्ष 2028 तक यमुना पुनर्जीवन मिशन के अंतर्गत दिल्ली में सभी प्रमुख नालों और सीवर से जुड़े कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व और निगरानी में दिल्ली सरकार और एमसीडी के सभी संबंधित विभाग एकीकृत, समयबद्ध कार्ययोजना के तहत कार्य कर रहे हैं। डीडीए भूमि सहित पूरे शहर में सीवर नेटवर्क के विस्तार का कार्य पूर्ण समन्वय के साथ तेजी से प्रगति पर है।

अशोकनगर के कलेक्टर आदित्य सिंह की अचानक बर्खास्तगी, शिकायत दिल्ली तक पहुंची थी

अशोकनगर   मोहन सरकार ने  देर रात अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह का ट्रांसफर कर दिया है. आनंदपुर ट्रस्ट के पदाधिकारी की शिकायत पर अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह को हटाया गया है. उनकी जगह अब साकेत मालवीय अशोकनगर कलेक्टर का पद संभालेंगे. आदित्य सिंह को हटाकर भोपाल गैस त्रासदी राहत व पुनर्वास विभाग में उपसचिव के पद पर भेजा गया है. सामान्य प्रशासन विभाग ने देर रात तबादले के ये आदेश जारी कर दिए हैं. संगठन से शिकायत के बाद हटाए गए आदित्य सिंह आनंदपुर ट्रस्ट के पदाधिकारी ने दिल्ली भाजपा हाई कमान से अशोकनगर में पदस्थ कलेक्टर आदित्य सिंह की शिकायत की थी. निर्वाचन आयोग की मंजूरी के बाद प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कलेक्टर आदित्य सिंह को हटाया गया, जबकि उनकी जगह पर साकेत मालवीय को अशोकनगर जिले की कमान सौंपी गई है. बुधवार देर शाम नए कलेक्टर के नाम की घोषणा कर दी गई है. आनंदपुर ट्रस्ट के प्रतिनिधि मंडल ने कलेक्टर आदित्य सिंह को लेकर सीधे भाजपा हाई कमान दिल्ली से शिकायत की थी. शिकायत सामने आते ही सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया.और कलेक्टर को हटाने के लिए अंदरूनी स्तर पर प्रयास तेज कर दिए. आदित्य सिंह पर क्या आरोप? अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह को हटाए जाने का प्रमुखा कारण आनंदपुर ट्रस्ट विवाद है. आनंदपुर ट्रस्ट ने कथित तौर पर आदित्य सिंह द्वारा 3 करोड़ रु मांगने के आरोप लगाए थे, जिसके बाग ये कार्रवाई की गई है. हालांकि, ट्रस्ट द्वारा किसी भी प्रकार की शिकायत या आधिकारिक पत्र जारी नहीं किया गया है. कलेक्टर को हटाने से पहले चुनाव आयोग से क्यो पूछा गया? दरअसल, मध्य प्रदेश में चुनावी प्रक्रिया SIR का काम अंतिम चरण में चल रहा है. इसे लेकर सरकार 21 फरवरी तक सीधे कलेक्टरों को हटाने का फैसला नहीं दे सकती, जिसके कारण वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर सरकार ने तीन आईएएस का पैनल तैयार किया और चुनाव आयोग को भेजा गया. इसमें आयोग ने साकेत मालवीय के नाम पर अपनी मोहर लगाई है. कलेक्टर मालवीय को व्यापम भोपाल से अशोकनगर कलेक्टर बनाया गया है. मालवीय भी आदित्य सिंह की तरह 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. 25 जनवरी को होना है सम्मान, हो गया ट्रांसफर इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आईएएस आदित्य सिंह का 25 जनवरी को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मान होना है, उसके पहले ही उनका कई आरोपों के साथ ट्रांसफर हो गया. दरअसल, वोटर लिस्ट में एसआईआर के काम में सबसे अच्छा परफॉर्म करने पर अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह को राज्यपाल मंगुभाई पटेल के हाथों 25 जनवरी को सम्मान मिलना तय किया गया था.

शिक्षकों ने समृद्धि यात्रा के बीच उठाईं लंबित मांगें

मुजफ्फरपुर. मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा के बीच में राज्य के शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया है। तिरहुत परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ की ओर से मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव से समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की गई है। संघ के प्रमंडलीय संगठन प्रभारी लखन लाल निषाद ने कहा कि शिक्षकों से जुड़ी कई समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं। इससे शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहा है। ज्ञापन में नियोजित शिक्षकों की कालबद्ध, स्नातक एवं प्रधानाध्यापक प्रोन्नति में हो रही देरी को दूर करने की मांग की गई है। अंतर राशि भुगतान की भी मांग इसके साथ ही डीएलएड प्रशिक्षण के बाद विरमन तिथि से ग्रेड पे देने, वेतन संरक्षण के साथ एरियर भुगतान, 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता एवं आवास भत्ता के अंतर राशि के भुगतान की भी मांग उठाई गई है। शिक्षकों के EPFO में समय पर अंशदान नहीं होने, जिला अंतर्गत स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू करने, शिक्षा भवन की जर्जर स्थिति की जांच, बच्चों के आधार सुधार के लिए विद्यालयों में कैंप लगाने और अपार योजना की जिम्मेदारी प्रखंड संसाधन केंद्र को सौंपने की मांग की है। इसके अलावा ई-शिक्षाकोष की गड़बड़ियों के कारण कटे वेतन की समीक्षा कर भुगतान, उच्च शिक्षा और पीएचडी के लिए अनुमति व अवकाश, शिशु देखभाल और पितृत्व अवकाश के लंबित आवेदनों की स्वीकृति तथा परिवीक्षा अवधि समाप्त शिक्षकों से संबंधित आदेश जारी करने की भी अपील की गई है। संघ ने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं का समय पर समाधान होने से शैक्षणिक वातावरण बेहतर होगा और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।

हरियाणा के 7 जिलों में आज से आंधी-तूफान के साथ होगी बारिश

हिसार. पहाड़ों पर मौसम बदलने, पश्चिमी विक्षोभ के एक्टिव होने के साथ ही प्रदेश में वीरवार से वर्षा की संभावना बन रही है। प्रदेश के सात जिलों में वर्षा का यलो अलर्ट जारी करने के साथ वहां पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। इसके अलावा प्रदेश के बाकी जिलों में भी हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। मौसम विज्ञानियों ने 25 जनवरी को फिर से एक पश्चिमी विक्षोभ के एक्टिव होने और वर्षा की संभावना व्यक्त की है। वहीं मौसम में बदलाव से रात और दिन के तापमान में हल्की गिरावट आई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मौसम बदल रहा है। वीरवार को प्रदेश के पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल और सिरसा में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। इनमें वर्षा का यलो अलर्ट जारी किया गया है। इसी प्रकार महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, झज्जर, गुरुग्राम, मेवात, पलवल, फरीदाबाद, रोहतक, सोनीपत, पानीपत, फतेहाबाद, हिसार, जींद, भिवानी और चरखी दादरी में भी वर्षा की संभावना बनी हुई है।

रेलवे की बंपर कमाई: वंदे भारत स्लीपर के पहले सफर में ही हाउसफुल, टिकट 24 घंटे में बिके

नई दिल्ली असम के कामाख्या और पश्चिम बंगाल के हावड़ा के बीच चलने वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन रेलगाड़ी (रेलगाड़ी संख्या 27576) की पहली व्यावसायिक यात्रा को यात्रियों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। इस ट्रेन के सभी श्रेणियों की टिकट बुकिंग शुरू होने के बाद 24 घंटे से कम समय में ही बिक गई। रेलवे ने मंगलवार को बताया कि 22 जनवरी को कामख्या से चलने वाली वंदे भारत शयनयान रेलगाड़ी में यात्रा के लिए पीआरएस और अन्य साइटों के माध्यम से टिकट बुकिंग शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर सभी सीटें बुक हो गईं। सीटों की इतनी जल्दी बुकिंग होना यात्रियों की उस उत्सुकता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। गौरतलब है कि अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित देश की पहली वंदे भारत शयनयान को 17 जनवरी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। रेलवे के अनुसार, यह रेलगाड़ी 22 जनवरी से कामाख्या से और 23 जनवरी से हावड़ा से अपनी पहली व्यावसायिक यात्रा शुरू करेगी। एजेंसी वार्ता की रिपोर्ट के अनुसार, इस नई रेल सेवा के लिए टिकट बुकिंग 19 जनवरी को सुबह 8:00 बजे शुरू हुई और 24 घंटे से भी कम समय में सभी श्रेणियों के टिकट पूरी तरह बिक गए। कामाख्या-हावड़ा वंदे भारत स्लीवर एक्सप्रेस से पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के बीच यातायात में काफी सुधार होने की उम्मीद है। यह ट्रेन आधुनिक सुविधाएं, बेहतर यात्रा समय और विश्व स्तरीय रात्रिकालीन यात्रा का अनुभव प्रदान करेगी। टिकट के लिए कड़े नियम वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस और अमृत भारत 2 ट्रेनों के यात्री यदि निर्धारित प्रस्थान समय से आठ घंटे से पहले, अपने ‘कंफर्म’ टिकट रद्द करते हैं तो एक भी पैसा वापस नहीं मिलेगा। रेल मंत्रालय द्वारा 16 जनवरी को जारी एक अधिसूचना के अनुसार, इन ट्रेनों के टिकट रद्द करने का शुल्क किराये का 25 प्रतिशत होगा, बशर्ते कि ‘कंफर्म’ टिकट 72 घंटे से पहले रद्द किए जाएं। मंत्रालय ने रेल यात्री (टिकट रद्द करना और किराया वापसी) नियम, 2015 में संशोधन किया है और वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस के साथ-साथ अमृत भारत 2 ट्रेनों के लिए सख्त नियमों को अधिसूचित किया है। अन्य ट्रेनों के मामले में, यदि ‘कंफर्म’ टिकट निर्धारित प्रस्थान समय से चार घंटे से कम समय पहले रद्द किए जाते हैं, तो धनवापसी के लिए पात्र नहीं होंगे।

झारखंड में मुठभेड़ में 1 करोड़ के इनामी समेत 10 से 12 माओवादी ढेर!

पश्चिमी सिंहभूम/चाईबासा. झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले स्थित सारंडा के घने जंगलों से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। गुरुवार सुबह से छोटानागरा थाना क्षेत्र के कुंभडीह गांव के पास सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ जारी है। इसमें अब तक करीब 10 से 12 माओवादियों के ढेर होने की सूचना है। इसके साथ ही 1 करोड़ का इनामी माओवादी नेता अनल भी मारा गया है। अनल दस्ते के साथ आमना-सामना प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, इस कार्रवाई में 5 से 7 माओवादी मारे गए हैं। बताया जा रहा है कि यह मुठभेड़ प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के कुख्यात अनल दस्ते के साथ हुई है। सुरक्षाबलों को खुफिया जानकारी मिली थी कि इलाके में नक्सली बड़ी घटना की साजिश रच रहे हैं, जिसके बाद घेराबंदी शुरू की गई। गुरुवार सुबह से ही पूरे क्षेत्र में रुक-रुक कर फायरिंग जारी है। कौन है मारा गया माओवादी अनल?     नाम: अनल उर्फ तूफान उर्फ पतिराम मांझी उर्फ पतिराम मरांडी उर्फ रमेश     पिता: टोटो मरांडी उर्फ तारू मांझी     निवासी: ग्राम झरहाबाले, थाना पीरटांड, जिला गिरिडीह अनल भाकपा (माओवादी) संगठन का सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) था और लंबे समय से सुरक्षाबलों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था। सूत्रों के अनुसार, इस भीषण मुठभेड़ में अब तक 10 से 12 माओवादियों के मारे जाने की सूचना है। हालांकि, सुरक्षाबलों की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। इलाके में अब भी सर्च ऑपरेशन जारी है और सुरक्षाबलों ने पूरे क्षेत्र को घेर रखा है। बड़े इनामी नक्सली के मारे जाने की संभावना सूत्रों के हवाले से खबर है कि इस मुठभेड़ में 1 करोड़ रुपये के इनामी एक शीर्ष माओवादी कमांडर को भी ढेर कर दिया गया है। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने अभी तक मारे गए नक्सलियों की संख्या और उनकी पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कोल्हान प्रमंडल के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि सुरक्षाबलों का ऑपरेशन फिलहाल जारी है। क्षेत्र की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सावधानी बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन समाप्त होने के बाद ही विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। मुठभेड़ के बाद सारंडा के पूरे जंगली क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। अतिरिक्त सुरक्षा बलों और बैकअप टीम को मौके पर रवाना किया गया है ताकि नक्सलियों के भागने के सभी रास्ते बंद किए जा सकें। खबर लिखे जाने तक सर्च ऑपरेशन और मुठभेड़ की स्थिति बनी हुई है।

राजनांदगांव में 31 तक नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के कारण 14 यात्री ट्रेनें रद्द

राजनांदगांव. राजनांदगांव नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के कारण 24 से 31 जनवरी तक कई यात्री ट्रेनें कैंसिल रहेगी। राजनांदगांव-कलमना तीसरी रेल लाइन को तुमसर यार्ड से जोड़ने कार्य चलेगा। इस कारण कई ट्रेनें कैंसिल रहेगी तो वहीं कुछ देरी से रवाना होगी और गंतव्य से पहले समाप्त होगी। ऐसे में दुर्ग से नागपुर के बीच रेल यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है। सप्ताहभर रेल यात्रियों को अपनी यात्रा पूरी करने दूसरे विकल्पों का सहारा लेना पड़ेगा। वहीं जो ट्रेनें चलेगी उसमें दबाव बढ़ने के कारण यात्रियों को कष्टदायक यात्रा करनी पड़ सकती है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर रेल मंडल में राजनांदगांव-कलमना तीसरी रेल लाइन परियोजना अंतर्गत अधोसंरचना विकास कार्य प्रगति पर है। यह परियोजना भविष्य में यात्री सुविधाओं के विस्तार, नई ट्रेनों के परिचालन तथा ट्रेनों की समय बद्धता बढ़ाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसी क्रम में तुमसर रोड यार्ड पर राजनांदगांव-नागपुर तीसरी लाइन परियोजना से संबंधित नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य किया जाएगा। इस कार्य के कारण 24 से 31 जनवरी तक कुछ यात्री गाड़ियों के परिचालन पर प्रभाव पड़ेगा। जिससे यात्रियों की परेशानी और बढ़ सकती है। दुर्ग से गोंदिया और इतवारी तक इन ट्रेनों को किया रद्द रेलवे ने 24 से 31 जनवरी तक गाड़ी संख्या 58817 तुमसर रोड-तिरोडी पैसेंजर, 58816 तिरोडी-तुमसर रोड पैसेंजर, 58815 इतवारी-तिरोडी पैसेंजर, 58818 तिरोडी-तुमसर रोड पैसेंजर, 68715 बालाघाट- इतवारी तिरोडी मेमू, 68714 इतवारी- बालाघाट मेमू कैंसिल रहेगी। 28 से 31 जनवरी तक 68741 दुर्ग-गोंदिया मेमू, 68743 गोंदिया-इतवारी मेमू, 68744 इतवारी- गोंदिया मेमू, 68742 गोंदिया-दुर्ग मेमू, 68711 डोंगरगढ़- गोंदिया मेमू, 68713 गोंदिया- इतवारी मेमू, 68716 इतवारी- गोंदिया मेमू, 68712 गोंदिया-डोंगरगढ़ मेमू को कैंसिल किया गया है।

ट्रंप ने कहा- मोदी मेरे अच्छे दोस्त, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता होगा शानदार

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की है. उन्होंने पीएम मोदी को अपना शानदार दोस्त बताते हुए भारत और अमेरिका के बीच एक अच्छी ट्रेड डील की उम्मीद जताई है. स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान हमारी सहयोगी न्यूज पोर्टल मनीकंट्रोल से एक्सक्लूसिव बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी उनके शानदार दोस्त हैं. बहुत जल्द भारत के साथ अमेरिका की अच्छी डील होने जा रही है. ट्रंप ने कहा- ‘हम प्रधानमंत्री मोदी का सम्मान करते हैं, मोदी शानदार इंसान और मेरे अच्छे दोस्त हैं’. उन्होंने कहा वह कि ‘भारत के साथ जल्द अच्छी डील करने जा रहे हैं’. किन मुद्दों पर अटकी है बातचीत? वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के 56वें वार्षिक समिट के मौके पर ट्रंप ने मनी कंट्रोल के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत की. ट्रंप ने भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बेहद आशावादी बातें कही है. उनका यह बयान उस वक्त आया है जब भारत और अमेरिका के वार्ताकार इस डील पर अटके हुए हैं. दोनों देशों के वार्ताकार कई मसलों पर आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं. इसमें टैरिफ की दरों से लेकर बाजार तक पहुंच के मुद्दे शामिल हैं. इनके बीच ऊर्जा और कृषि से जुड़े मसलों पर असहमति है. अब तक कितने दौर की हुई बातचीत? भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की संभावना को लेकर पूछे गए सीधे सवाल पर उन्होंने सकारात्मक बातें कहीं. उन्होंने कहा कि हम एक अच्छी डील करने जा रहे हैं. भारत और अमेरिका ने व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते और पारस्परिक टैरिफ दरों को कम करने के लिए एक अंतरिम व्यवस्था बनाने को लेकर अब तक छह दौर की बातचीत की है. दोनों पक्ष लंबे समय से चले आ रहे इस गतिरोध को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं. इस संभावित ट्रेड डील पर बातचीत को बीते साल फरवरी में गति मिली थी. उस वक्त पीएम मोदी ने अमेरिका का दौरा किया था. उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की थी. फिर दोनों शासनाध्यक्षों ने ‘मिशन 500’ की घोषणा की थी. इस मिशन का लक्ष्य दोनों देशों के बीच 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाकर दोगुना करने का था. कब तक हो सकती है डील? इस रोडमैप के तहत ही भारत और अमेरिका ने तय किया था कि 2025 के बीतते-बीतते एक मल्टी-सेक्टर पारस्परिक रूप से लाभकारी ट्रेड डील को अमलीजामा पहना देंगे. लेकिन, यह समय बीत गया लेकिन डील नहीं हो पाई. हालांकि भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी अनंत नागेश्वरन ने संकेत दिया है कि मार्च 2026 तक दोनों देशों के बीच अंतरिम ट्रेड डील पर मुहर लग सकती है. भारत के लिए कितना जरूरी है यह डील? भारत के लिए यह ट्रेड डील बहुत जरूरी हो गया है. क्योंकि भारत के 48.2 बिलियन डॉलर के निर्यात को भारी अमेरिकी टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है. भारत की कोशिश है कि इस विषम परिस्थिति में भी अमेरिका को भारतीय निर्यात में बढ़ोतरी बनी रहे. हालांकि, उच्च टैरिफ दरों का असर अन्य सेक्टर पर पड़ा है. पीएम मोदी ने बीते साल फरवरी में अमेरिका का दौरा किया था. उसके बाद दोनों देशों के बीच ट्रेड वार्ता शुरू हुई थी. दोनों देशों के बीच कितने का कारोबार? टैरिफ की चुनौतियों के बीच दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ा है. सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि बीते साल अप्रैल से दिसंबर के बीच भारत से अमेरिका को निर्यात 9.8 फीसदी बढ़कर 65.9 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया. इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत के लिए बतौर एक ट्रेड पार्टनर अमेरिका की क्या भूमिका है. भारत और अमेरिका अब भी द्विपक्षीय ट्रेड समझौते को लेकर प्रतिबद्ध हैं. अभी क्या है भारत का रुख? भारत के विदेश मंत्रालय ने नौ जनवरी को कहा था कि दोनों देशों के बीच करीब एक साल साल से बातचीत चल रही है. विदेश मंत्रालय ने कहा था- भारत और अमेरिका द्विपक्षीय ट्रेड वार्ता के लिए प्रतिबद्ध हैं. दोनों देशों के बीच बीते साल 13 फरवरी से बातचीत चल रही है. उसके बाद ही दोनों देशों ने एक संतुलित और दोनों को फायदा पहुंचाने वाले एक ट्रेड डील को लेकर कई दौर की वार्ता कर चुके हैं.

भोजशाला की 700 साल पुरानी त्रासदी: 271 साल तक ज्ञान का केंद्र रही, जानें इतिहास

धार  क्या काशी की ज्ञानवापी के बाद अब मध्य प्रदेश के धार की भोजशाला में हिंदुओँ को पूजा का हक मिलेगा? दरअसल ज्ञानवापी की तरह ही भोजशाला में मुस्लिम मस्जिद है. ज्ञानवापी की तरह ही भोजशाला में हिंदू मंदिर होने की मान्यता है.ज्ञानवापी की तरह ही भोजशाला में हिंदू पक्ष पूजा अर्चना की इजाजत मांग रहा है. ज्ञानवापी के सर्वे के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंदुओं को ज्ञानवापी में पूजा की इजाजत दे दी थी. ज्ञानवापी की तरह ही भोजशाला के भी ASI सर्वे का आदेश कोर्ट ने दिया था. अब भोजशाला में भी हिंदू पक्ष को उम्मीद है कि पूजा की इजाजत मिल जाएगी. 23 जनवरी को बसंत पंचमी के आयोजन को लेकर धार भोजशाला पर एक बार फिर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। दरअसल, इस बार बसंत पंचमी शुक्रवार को है। हिंदू संगठनों ने दिन भर माता सरस्वती की पूजा- अर्चना की प्रशासन से इजाजत मांगी है।  इससे पहले 2003 से लेकर 2016 के बीच तीन बार ऐसा मौका आया जब बसंत पंचमी शुक्रवार को ही थी। तीनों ही बार विवाद की स्थिति बनी। इस बार ऐसा न हो इसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। वहीं हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पूरे दिन पूजा के अधिकार की मांग है। इस पर आज यानी 22 जनवरी को सुनवाई है। धार की भोजशाला का इतिहास करीब 990 साल पुराना है। 1034 ई. में राजा भोज ने इसका निर्माण कराया था और यहां मां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित की थी। 200 सालों से ज्यादा समय तक भोजशाला का वैभव कायम रहा, लेकिन 1305 ई में मोहम्मद खिलजी ने भोजशाला पर आक्रमण कर इसे नेस्तनाबूत करने की कोशिश की। इसके बाद कई बार मुस्लिम आक्रांताओं ने भोजशाला पर हमले किए। कई सालों तक मां सरस्वती की प्रतिमा भोजशाला में दबी रही। इसके बाद अंग्रेज आए। वे यहां से खुदाई कर वाग्देवी की प्रतिमा को लंदन के म्यूजियम ले गए। खिलजी के आक्रमण से लेकर अब तक भोजशाला को उसकी पहचान दिलाने के लिए संघर्ष जारी है। खिलजी ने कईं बार किया आक्रमण  भोजशाला का निर्माण परमार वंश के महान राजा राजा भोज ने 1034 ईस्वी के आसपास किया था. वह एक महान योद्धा के साथ ही कला साहित्य और विज्ञान के संरक्षक भी थे. उन्होंने ही यहां वाग्देवी यानी मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित की थी. उस समय यह एक शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन चुका था. जहां दुनिया भर से लोग व्याकरण और खगोल विज्ञान पढ़ने आते है. ‌ वाग्देवी की यही प्रतिमा लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी हुई है. कहा जाता है कि 1875 के आसपास खुदाई के दौरान यहां से सरस्वती माता की एक अत्यंत सुंदर प्रतिमा मिली थी. जिसे एक अंग्रेज अफसर मेजर किनकैड अपने साथ लंदन ले गया. लंबे समय इसे वहां से वापस लाकर भोजशाला में ससम्मान स्थापित करने की मांग की जा रही है. भोजशाला विवाद के दौरान भी यही मूर्ति इसका सबसे बड़ा प्रमाण बनती है. दरअसल खिलजी के धार पर आक्रमण कर भोजशाला को काफी नुकसान पहुंचाया था. इसके बाद मुस्लिम शासकों ने इसके ढांचे में भी कई बदलाव किए. 15 सी सदी के आसपास मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी ने यहां कुछ उसको मस्जिद के रूप में भी इस्तेमाल किया था. उसी दौरान यहां कुछ दरगाह और मस्जिद भी बनाई गई. मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद मानता है. बसंत पंचमी पर यहां भव्य आयोजन होते रहे हैं जबकि कईं बार विवाद की स्थिति भी बन चुकी है. धार में पहले कई बार धार्मिक तनाव रह चुका है. लेकिन धार्मिक गुरु और प्रशासन की सहमति से अब सब कुछ शांत वातावरण में होता है. भोजशाला में पूजा और नमाज दोनों होते है. मंगलवार को हिंदू पूजा करते है जबकि शुक्रवार को मुस्लिम नमाज पढ़ते है. बाकी दिनों के लिए यह स्थल पर्यटकों के लिए खुला रहता है. यहां बड़ी संख्या में पुरानी मूर्तियां और कलाकृति देखने को मिलती है. ‌ भोजशाला की बनावट देखते ही आपको उस समय की हिंदू संस्कृति और कलाकृति की झलक मिलती है. ‌यहां के खंभों पर संस्कृत में कई शिलालेख खुदे हुए है. जिनमें व्याकरण और काव्य के नियम लिखे गए है. दीवारों पर परमार काली मूर्तियां, श्लोक और संरचनाएं दिख जाती है. भोजशाला काफी बड़े क्षेत्र में फैली हुई है जानकार मानते है कि इसकी संरचना किसी मस्जिद जैसी नहीं बल्कि एक पारंपरिक भारतीय पाठशाला या मंदिर जैसी है. एक बार फिर वसंत पंचमी से पहले भोजशाला का मुद्दा गरमा गया है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण 2024 में ही यहां वैज्ञानिक सर्वे करने के बाद अपनी रिपोर्ट बनाई है. इस सर्वे का मकसद यह पता लगाना था कि मौजूदा ढांचे के नीचे क्या कोई मंदिर के अवशेष मौजूद है. फिलहाल इस‌ सर्वे की रिपोर्ट आना बाकि है. अगर आप भी भोजशाला जाना चाहते है तो मंगलवार और शुक्रवार छोड़कर कभी भी जाकर इसके इतिहास को और करीब से देख सकते हैं. अब जानिए कोर्ट में क्या है भोजशाला के मामले का स्टेटस भोजशाला मंदिर या मस्जिद, साइंटिफिक सर्वे पूरा हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने 1 मई 2022 को इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि भोजशाला का पूर्ण आधिपत्य हिंदुओं को सौंपा जाए। ये मंदिर है या मस्जिद इसका कैरेक्टर तय करने के लिए एएसआई से साइंटिफिक सर्वे कराया जाए। 11 मार्च 2024 को इंदौर हाईकोर्ट ने एएसआई को भोजशाला का साइंटिफिक सर्वे कर 6 हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा। एएसआई ने और समय मांगा जिसपर 2 जुलाई 2024 तक का समय दिया गया। एएसआई ने फिर समय मांगा जिसपर कोर्ट ने 15 जुलाई तक की तारीख दी। इस तारीख को एएसआई ने साइंटिफिक रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर दी। एएसआई ने ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार और कार्बन डेटिंग मेथड की मदद से अपना सर्वे शुरू किया। मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा दूसरी तरफ हाईकोर्ट के 11 मार्च के 2024 के आदेश के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में 16 मार्च 2024 को विशेष अनुमति याचिका लगाई। इसमें पूरा पक्ष सुनने की मांग की गई। 1 अप्रैल 2024 को सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर दिया। जिसमें साइंटिफिक सर्वे पर रोक नहीं लगाई, लेकिन सर्वे रिजल्ट के आधार पर बिना सुप्रीम … Read 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