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प्रशासनिक सर्जरी: पंजाब पुलिस के 4 अधिकारियों का ट्रांसफर, जानें किसे कहां भेजा गया

पंजाब पुलिस विभाग के सब-डिवीजन सुलतानपुर लोधी के अंतर्गत आने वाले चार पुलिस थानों के सभी एस.एच.ओ. अचानक बदल दिए गए हैं। एक साथ सभी एस.एच.ओ. के स्थानांतरण से पुलिस विभाग में हैरानी का माहौल है। जानकारी के अनुसार, जिला कपूरथला के एस.एस.पी. गौरव तूर के आदेश पर थाना फत्तूढींगा के एस.एच.ओ. इंस्पेक्टर हरिंदर सिंह को थाना सुलतानपुर लोधी का नया एस.एच.ओ. नियुक्त किया गया है। थाना तलवंडी चौधरी के एस.एच.ओ. इंस्पेक्टर निर्मल सिंह को थाना कबीरपुर का एस.एच.ओ. नियुक्त किया गया, थाना साइबर कपूरथला की एस.एच.ओ. इंस्पेक्टर अमनदीप कौर को थाना फत्तूढींगा का एस.एच.ओ. बनाया गया, और पुलिस लाइन से इंस्पेक्टर अनिल कुमार को थाना तलवंडी चौधरी का एस.एच.ओ. नियुक्त किया गया। इसके अलावा, थाना सुलतानपुर लोधी की पहली एस.एच.ओ. इंस्पेक्टर सोनमदीप कौर को थाना सदर फगवाड़ा का एस.एच.ओ. नियुक्त किया गया।  

रायपुर साहित्य उत्सव 2026 : वाचिक परम्परा में साहित्य पर हुई सार्थक परिचर्चा

वाचिक परम्परा केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि यह समकालीन साहित्य और समाज को समझने की एक सशक्त कुंजी रायपुर रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के अंतर्गत “आदि से अनादि तक” थीम पर आयोजित साहित्यिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में लाला जगदलपुरी मण्डप में द्वितीय सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में “वाचिक परम्परा में साहित्य” विषय पर गहन, विचारोत्तेजक एवं सार्थक परिचर्चा संपन्न हुई, जिसमें भारतीय साहित्य की मौखिक परम्पराओं की ऐतिहासिक भूमिका और समकालीन प्रासंगिकता पर व्यापक विमर्श किया गया। इस परिचर्चा में प्रख्यात साहित्यकार रुद्रनारायण पाणिग्रही, शिव कुमार पांडे, डॉ. जयमती तथा सुधीर पाठक ने अपने विचार साझा किए। सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. महेन्द्र मिश्र ने की। वक्ताओं ने अपने संबोधन में वाचिक परम्परा की विविध विधाओं और उनके साहित्यिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. महेन्द्र मिश्र ने कहा कि वाचिक परम्परा केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि यह समकालीन साहित्य और समाज को समझने की एक सशक्त कुंजी है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में वाचिक परम्पराओं का संरक्षण, दस्तावेजीकरण और नई पीढ़ी तक उनका संवेदनशील हस्तांतरण आज की एक महत्त्वपूर्ण आवश्यकता बन गया है। वक्ताओं ने वाचिक परम्परा को भारतीय साहित्य की मूल धारा बताते हुए कहा कि लोकगीत, लोककथाएँ, कहावतें, मिथक और जनश्रुतियाँ सदियों से समाज की सांस्कृतिक स्मृति को संरक्षित करती आई हैं। उन्होंने कहा कि लिखित साहित्य के उद्भव से पूर्व वाचिक परम्परा ही ज्ञान, इतिहास, जीवन मूल्यों और सामाजिक अनुभवों के संप्रेषण का प्रमुख माध्यम रही है, जिसने पीढ़ी दर पीढ़ी सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने साहित्य उत्सव को बताया समृद्ध सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक

रायपुर . साहित्य आशा, साहस और सामाजिक चेतना जागृत करने का सबसे सशक्त माध्यम : उप सभापति श्री हरिवंश राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आज रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह राज्यसभा के उप सभापति श्री हरिवंश के मुख्य आतिथ्य और मुख्यमंत्री विष्णु श्री देव साय की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। समारोह का आयोजन विनोद कुमार शुक्ल मंडप में किया गया, जिसमें उपमुख्यमंत्री अरुण साव, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा तथा सुप्रसिद्ध रंगकर्मी एवं अभिनेता मनोज जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा, वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय तथा छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। उद्घाटन अवसर पर अतिथियों के करकमलों से छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आधारित पुस्तिका, एक कॉफी टेबल बुक छत्तीसगढ़ राज्य के साहित्यकार, जे. नंदकुमार द्वारा लिखित पुस्तक नेशनल सेल्फहुड इन साइंस, प्रो. अंशु जोशी की पुस्तक लाल दीवारें, सफेद झूठ तथा राजीव रंजन प्रसाद की पुस्तक तेरा राज नहीं आएगा रे का विमोचन किया गया। उप सभापति श्री हरिवंश ने अपने संबोधन की शुरुआत छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी साहित्य की एक समृद्ध और प्राचीन परंपरा रही है तथा इस प्रदेश ने अपनी स्थानीय संस्कृति को सदैव मजबूती से संजोकर रखा है। रायपुर साहित्य उत्सव के आयोजन में अत्यंत रचनात्मक दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने कबीर के काशी से गहरे संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के कवर्धा से भी उनका विशेष जुड़ाव रहा है। उप सभापति श्री हरिवंश ने कहा कि एक पुस्तक और एक लेखक भी दुनिया को बदलने की शक्ति रखते हैं।  उन्होंने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य समाज को दिशा देता है, आशा जगाता है, निराशा से उबारता है और जीवन जीने का साहस प्रदान करता है। उपसभापति श्री हरिवंश ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और 2047 तक विकसित भारत का संकल्प हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि भारत आज स्टील, चावल उत्पादन और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। देश की आत्मनिर्भरता से दुनिया को नई दिशा मिली है और इस राष्ट्रीय शक्ति के पीछे साहित्य की सशक्त भूमिका रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल है और इस पावन भूमि पर तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव का शुभारंभ होना हम सभी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने देशभर से आए साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों का स्वागत करते हुए कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव 2026 साहित्य का एक महाकुंभ है, जिसमें प्रदेश और देश के विभिन्न राज्यों से आए 120 से अधिक ख्यातिप्राप्त साहित्यकार सहभागिता कर रहे हैं। आयोजन के दौरान कुल 42 सत्रों में समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों पर गहन विमर्श होगा। यह समय गणतंत्र के अमृतकाल और छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष का है, इसी भाव के अनुरूप इस उत्सव का आयोजन किया गया है। मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम की तुलना समुद्र मंथन से करते हुए कहा कि जिस प्रकार समुद्र मंथन में विष और अमृत दोनों निकले, उसी प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन में हमारे सेनानियों ने विष रूपी कष्ट स्वयं सहकर आने वाली पीढ़ियों को आज़ादी का अमृत प्रदान किया। उन्होंने कहा कि हमारे अनेक स्वतंत्रता सेनानी लेखक, पत्रकार और वकील भी थे। माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा बिलासपुर जेल में रचित पुष्प की अभिलाषा जैसी रचनाओं ने देशवासियों को प्रेरित किया। माधवराव सप्रे की कहानी एक टोकरी भर मिट्टी को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है।  मुख्यमंत्री ने पंडित लोचन प्रसाद पांडेय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और गजानन माधव मुक्तिबोध जैसे साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी स्मृतियों को सहेजना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। राजनांदगांव में त्रिवेणी संग्रहालय का निर्माण इसी भावना का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव के मंडपों को विनोद कुमार शुक्ल, श्यामलाल चतुर्वेदी, लाला जगदलपुरी और अनिरुद्ध नीरव जैसे महान साहित्यकारों को समर्पित किया गया है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ की संस्कृति और साहित्य को नई पहचान दी। उन्होंने कहा कि कविता अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध करना सिखाती है और यही साहित्य की वास्तविक शक्ति है। मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में आयोजित काव्यपाठ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि अटल जी कवि हृदय थे और उनकी कविताओं ने करोड़ों लोगों को प्रेरणा दी। “हार नहीं मानूंगा…” जैसी पंक्तियाँ आज भी जनमानस को संबल देती हैं। मुख्यमंत्री ने इमरजेंसी काल के दौरान साहित्यकारों की भूमिका को रेखांकित करते हुए दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख किया और कहा कि आज जब बड़ी संख्या में युवा साहित्यप्रेमी इस उत्सव में शामिल हो रहे हैं, तब यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश में साहित्य का वातावरण उजला और सशक्त है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह तीन दिवसीय आयोजन एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। इस अवसर पर उन्होंने स्वर्गीय सुरेंद्र दुबे को भी नमन किया। उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने बसंत पंचमी के पावन अवसर पर आयोजित इस उत्सव को साहित्य का महाकुंभ बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती ने हिंदी साहित्य को अनेक महान पुरोधा दिए हैं। वहीं डॉ. कुमुद शर्मा ने कहा कि अमृतकाल में आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी का संकल्प हमारे उज्ज्वल भविष्य की नींव है। उन्होंने साहित्य को आत्मबोध और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त माध्यम बताया तथा भारत को मानवीय संस्कृति की टकसाल कहा। आयोजन के पश्चात अतिथियों एवं साहित्यकारों ने विभिन्न सत्रों में सहभागिता करते हुए समकालीन साहित्य, संस्कृति, लोकतंत्र और समाज से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।  कार्यक्रम के दौरान साहित्य प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही और विशेष रूप से युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का यह शुभारंभ साहित्यिक संवाद, विचारों के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक चेतना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है।

अमेरिका का नया ‘पीस बोर्ड’, पर भारत सतर्क! ट्रंप के प्रस्ताव पर दिल्ली क्यों नहीं दिखा रही जल्दबाज़ी?

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को दावोस में बोर्ड ऑफ पीस के गठन का ऐलान कर दिया। उनकी ओर से इसका जो प्रस्ताव दिखाया गया, उसमें 8 मुसलमान मुल्कों समेत कई देशों की ओर से सहमति का पत्र था। गाजा को फिर से खड़ा करने के लिए तैयार इस बोर्ड को लेकर मुसलमान देश तो जुड़ गए हैं, लेकिन यूरोपियन यूनियन के देश हिचक रहे हैं। इसके अलावा भारत, रूस और चीन जैसे बड़े देशों ने भी अब तक इससे दूरी ही बनाकर रखी है। इस बीच सवाल है कि आखिर भारत की इस संबंध में क्या रणनीति है और वह डोनाल्ड ट्रंप के इस प्रोजेक्ट से जुड़ने से हिचक क्यों रहा है। इसकी तीन वजहें हैं।   पहला कारण तो यही है कि भारत की नीति देखो और इंतजार करो की है। भारत चाहता है कि पहले यह देखा जाए कि दुनिया के कौन-कौन से देश इससे जुड़ने को तैयार हैं। अब तक रूस और चीन इसका हिस्सा नहीं बने हैं। इसके अलावा फ्रांस, इटली और ब्रिटेन जैसे देश भी दूर ही हैं। ऐसी स्थिति में भारत नहीं चाहता कि वह आगे बढ़कर इसकी मेंबरशिप ले। इसके अलावा गाजा का मसला भारत की आंतरिक राजनीति के लिहाज से भी संवेदनशील रहा है। इसीलिए भारत तुरंत इससे जुड़ने से बच रहा है और फिलहाल इंतजार करने के मूड में है। UN को कमजोर होते नहीं देखना चाहते ये देश दूसरा कारण, अब तक इस समूह से इजरायल, जॉर्डन, इंडोनेशिया, मिस्र, बुल्गारिया, बेलारूस, कजाखस्तान, कोसोवो, मोरक्को, मंगोलिया, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात जुड़े हैं। ये ज्यादातर ऐसे देश हैं, जो इस्लामी मुल्क हैं। गाजा में शांति और वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कराने में इनकी दिलचस्पी है। लेकिन यूरोप के देश तो दूर ही रहे हैं। असल में इसकी वजह यह है कि अमेरिका के करीबी रहे यूरोप के देशों को भी डर है कि कहीं अमेरिका का ही वर्चस्व ना हो जाए। विशेष तौर पर संयुक्त राष्ट्र की जगह लेने वाले डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने भी आशंकाएं बढ़ा दी हैं। कोई देश नहीं चाहता कि यूएन जैसे बहुदेशीय संगठन की जगह अमेरिका के एकतरफा वर्चस्व वाले बोर्ड ऑफ पीस को ताकत मिले। डोनाल्ड ट्रंप हट जाएंगे तो बोर्ड ऑफ पीस का क्या होगा? तीसरा यह कि इसके अलावा बोर्ड ऑफ पीस के भविष्य को लेकर भी भारत में चिंता है। वजह यह कि डोनाल्ड ट्रंप इसके लिए जुनून रखते हैं, लेकिन उनके राष्ट्रपति पद से हटने के बाद इसका भविष्य क्या रहेगा। इसे लेकर अनिश्चितता की स्थिति है। डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल तो तीन साल के बाद खत्म हो जाएगा। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप की विश्वसनीयता को लेकर भी भारत में चिंताएं हैं। भारत ने हमेशा ही संयुक्त राष्ट्र संघ और बहुपक्षीयवाद को महत्व दिया है। ऐसे में भारत नहीं चाहता कि डोनाल्ड ट्रंप की पहल शुरू हुआ कोई संगठन संयुक्त राष्ट्र की जगह लेने की स्थिति में आए।  

श्री रमेन डेका और श्री विष्णुदेव साय ने 10वीं-12वीं परीक्षा के टॉपर छात्रों को किया सम्मानित

रायपुर. प्रशस्ति पत्र और डेढ़-डेढ़ लाख की सम्मान राशि से 239 विद्यार्थी सम्मानित राज्यपाल श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में 10वीं एवं 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। ये 2024 एवं 2025 के टॉप 10 मेधावी और विशेष पिछडी जनजाति के टॉप 01 विद्यार्थी है। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे।   लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित इस प्रतिभा सम्मान समारोह में पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना के तहत विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।  प्रशस्ति पत्र और डेढ़-डेढ़ लाख की सम्मान राशि से 239 विद्यार्थी सम्मानित इस अवसर पर राज्यपाल श्री डेका ने सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बोर्ड परीक्षाएं हमारे जीवन के लक्ष्य की ओर बढ़ने की प्रथम सीढ़ी है। आपने एक पड़ाव पार किया है अब अगले पड़ाव की ओर जा रहे है। जहां एक ओर इस सफलता की प्रेरणा आपको नवीन ऊर्जा के साथ प्रगति का रास्ता प्रशस्त करती है और वहीं यह सम्मान अन्य विद्यार्थियों को मेहनत, लगन एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है।  राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपार संभावनाओं का प्रदेश है। ‘‘धान का कटोरा‘‘ कहा जाने वाला हमारा राज्य अब शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति बहुत उन्नत है। हमें अपने राज्य की सनातन संस्कृति पर गर्व का भाव होना चाहिए।  श्री डेका ने कहा कि विद्यार्थी आईआईटी, नीट की परीक्षा देकर इंजीनियरिंग और मेडिकल मे जाना चाहते है लेकिन सभी को सफलता नहीं मिलती है। इसके लिए निराश होने की जरूरत नहीं हैं। नए-नए विषय है जहां आप कैरियर की ऊची उड़ान भर सकते है। धैर्य के साथ आगे बढ़े। गिरना बडी बात नहीं है गिर कर खड़े होना महत्वपूर्ण है। सपना बड़ा होना चाहिए। सपनें को पूरा करने के लिए साधना और अभ्यास करना होता है। उन्होंने मौलिकता और नवाचार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग के बच्चें शिक्षा में आगे बढ़ रहे है, यह बहुत सराहनीय है।    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विद्यार्थियों से कहा कि आप सभी हमारे देश एवं प्रदेश के भविष्य हो। आप लोगों के कंधे पर देश की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। आज जो सफलता आप सभी छात्रों को मिली है निश्चित ही इस सफलता के पीछे आपके शिक्षक गुरुओं एवं माता पिता के आशीर्वाद है। उनके आशीर्वाद के बिना यह संभव नहीं है। इस दौरान उन्होंने सभी प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को उत्कृष्ट प्रदर्शन और बसंत पंचमी पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा हम सब पर सदैव मां सरस्वती का आशीर्वाद बना रहें। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने बताया कि सत्र 2024 एवं 2025 के 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के 239 मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहन स्वरूप मेडल, प्रशस्ति पत्र और प्रत्येक विद्यार्थी को डेढ़-डेढ़ लाख की राशि सीधे उनके खाते में दी गई है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को दिए इस प्रोत्साहन सेे शिक्षा के प्रति उनका रूझान बढ़ेगा और दूसरे विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिलेगी। कार्यक्रम में वर्ष 2024 के 110 और वर्ष 2025 के 129  टापर विद्यार्थियों को पुरस्कार दिए गए। हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल के प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सिल्वर मेडल प्रदान किया गया साथ ही विशेष पिछड़ी जनजाति के विद्यार्थियों को भी पुरस्कृत किया गया। स्वागत उद्बोधन छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल की अध्यक्ष श्रीमती रेणु जी. पिल्ले ने दिया एवं आभार प्रदर्शन सचिव श्रीमती पुष्पा साहू ने किया।  इस अवसर पर विधायक श्री मोतीलाल साहू, श्री आशाराम नेताम, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।  

शिवराज ने निभाया वादा: दिव्यांग दोस्त को दी मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल, अब बहुदिव्यांगों की करेंगे तलाश

विदिशा केन्द्रीय कृषि मंत्री और विदिशा सांसद शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) एक ओर जहां जनसेवा से जुड़े अपने कदमों को लेकर चर्चा में हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने संसदीय बहस और विपक्ष के रुख पर भी टिप्पणी की है. शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर अपनी संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को लेकर सुर्खियों में हैं. उन्होंने दिव्यांग पन्नालाल को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल भेंट कर न सिर्फ अपना वादा निभाया, बल्कि उनके आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में एक अहम कदम भी बढ़ाया. शिवराज बोले: जो भाई बहन परेशान हैं उनकी मदद करनी चाहिए पन्नालाल को मोटराइज्ड साइकिल भेंट करने के पहले शिवराज ने कहा मैं मानता हूं हम सब एक परिवार हैं परिवार के वो भाई-बहन जो पीछे रह गए, कोई कष्ट परेशानी है तो मदद करनी चाहिए। चार-पांच दिन पहले मैं विदिशा गया था तो मैंने पन्नालाल को देखा था वे खजूर हाथ में उठाकर मेरी गाड़ी तरफ दौड़ पडे़ थे। मैं उनके पास गया, तब मन में यह भाव पैदा हुआ कि गरीबी और परिस्थितियों के कारण कई साथी जिंदगी कष्ट में गुजारते हैं। क्या है मामला? कुछ दिन पहले विदिशा प्रवास के दौरान शिवराज सिंह चौहान की मुलाकात पन्नालाल से हुई थी. बातचीत के दौरान पन्नालाल ने चलने-फिरने और दैनिक कार्यों में होने वाली कठिनाइयों के बारे में बताया था. उसी समय शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था. अपने वादे को निभाते हुए शिवराज सिंह चौहान ने आज पन्नालाल को अपने निवास पर उन्हें मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल भेंट की. इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, पन्नालाल बेहतर जीवन जिएं, आत्मनिर्भर बनें और उन्हें किसी प्रकार का कष्ट न हो यही ईश्वर से प्रार्थना है. पन्नालाल से दोस्ती हुई तो उन्होंने मोटराइज्ड साइकिल मांगी थी शिवराज ने कहा- पन्नालाल से मैंने दोस्ती कर ली। दोस्ती के बाद उन्होंने एक ही बात कही कि चलने फिरने में दिक्कत होती है तो मुझे एक मोटराइज्ड साइकिल दे दो। दोस्त के लिए तो करना ही पड़ता है। ट्रेन से गंजबासौदा पहुंचे शिवराज अपने संसदीय क्षेत्र के गंजबासौदा ट्रेन से पहुंचे। सफर के दौरान उन्होंनें यात्रियों से चर्चा की। बच्चों और युवाओं के साथ सेल्फी निकलवाई। वीबी – जी राम जी पर राहुल को घेरा शिवराज सिंह चौहान ने इस मुद़्दे पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि "गजब के ज्ञानी हैं राहुल जी! वीबी – जी राम जी पर दोनों सदनों में देर रात तक घंटों चर्चा हुई. पक्ष और विपक्ष ने हर पहलू पर गंभीर बहस की. देश देख रहा था, सुन रहा था. लेकिन उस समय नेता प्रतिपक्ष विदेश भ्रमण में व्यस्त थे. अब अधिनियम पर कांग्रेस संग्राम का नाटक कर रही है, जबकि स्वयं नेता प्रतिपक्ष को अभी तक बिल का नाम तक ज्ञात नहीं. सुना है, कल एक दिन के मज़दूर भी बने थे राहुल जी; गमछा कोई और पहना रहा था, और कुदाल कैसे उठानी है, यह खड़गे जी समझा रहे थे. धन्य हैं आप राहुल जी, और धन्य है आपकी 'प्रखर बुद्धि'! आपके इसी अद्भुत ज्ञान के सहारे कांग्रेस का परम कल्याण सुनिश्चित है."

नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों की बड़ी जीत, धमतरी में 9 इनामी नक्सलियों ने IG के समक्ष डाले हथियार

धमतरी जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान को आज एक बड़ी और निर्णायक सफलता मिली है। आईजी अमरेश मिश्रा और धमतरी एसपी सूरज सिंह परिहार के समक्ष आज एक साथ 9 सक्रिय हार्डकोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 05 महिला और 04 पुरुष नक्सली शामिल हैं। ये सभी लंबे समय से सीतानदी क्षेत्र सहित नगरी, मैनपुर और गोबरा इलाकों में सक्रिय थे और कई घटनाओं में शामिल रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली प्रतिबंधित संगठन ओडिशा स्टेट कमेटी के धमतरी–गरियाबंद–नुआपाड़ा डिवीजन से जुड़े हुए थे और संगठन में डीवीसीएम, एसीएम, एसडीके एरिया कमेटी कमांडर एवं डिप्टी कमांडर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे हैं। इन सभी नक्सलियों पर कुल 47 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने बड़ी संख्या में हथियार और सामग्री भी सुरक्षा बलों को सौंपी। इन नक्सलियों ने किया सरेंडर     ज्योति उर्फ जैनी उर्फ रेखा डीव्हीसीएम सीतानदी एरिया कमेटी सचिव, 08 लाख के इनामी     उषा उर्फ बालम्मा डीव्हीसीएम टेक्निकल (डीजीएन), 08 लाख के इनामी     रामदास मरकाम उर्फ आयता उर्फ हिमांशु, पूर्व गोबरा एलोएस कमांडर / वर्तमान नगरी एसीएम, 05 लाख के इनामी     रोनी उर्फ उमा सीतानदी एरिया कमेटी कमांडर, 05 लाख के इनामी     निरंजन उर्फ पोदिया सीनापाली एससीएम टेक्निकल (डीजीएन), 05 लाख के इनामी     सिंधु उर्फ सोमड़ी एसीएम, 05 लाख के इनामी     रीना उर्फ चिरो एसीएम सीनापाली एरिया कमेटी / एलजीएस, 05 लाख के इनामी     अमीला उर्फ सन्नी एसीएम / मैनपुर एलजीएस, 05 लाख के इनामी     लक्ष्मी पूनेम उर्फ आरती उषा की बॉडी गार्ड, 01 लाख के ईनामी नक्सलियों ने सौंपा ये हथियार     इंसास राइफल – 02     एसएलआर राइफल – 02     कार्बाइन – 01     भरमार बंदूक – 01     कुल राउंड – 67     मैगजीन – 11     वॉकी-टॉकी (रेडियो सेट) – 01     अन्य दैनिक उपयोग की सामग्री पुलिस दबाव और पुनर्वास नीति का दिखा असर धमतरी पुलिस, डीआरजी, राज्य पुलिस बल और सीआरपीएफ द्वारा चलाए जा रहे निरंतर नक्सल विरोधी अभियानों, बढ़ते दबाव और शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर इन नक्सलियों ने हिंसा और विनाश का रास्ता छोड़ने का फैसला किया। पुलिस द्वारा दूरस्थ नक्सल प्रभावित गांवों में पोस्टर, बैनर, पाम्फलेट, आत्मसमर्पित नक्सलियों की अपील और सिविक एक्शन कार्यक्रमों के जरिए लगातार संदेश पहुंचाया जा रहा था। युवाओं को जोड़ने के लिए खेल प्रतियोगिताएं भी कराई गईं, जिसका सकारात्मक असर दिखा। खोखली विचारधारा से हुआ मोहभंग आत्मसमर्पित नक्सलियों ने बताया कि संगठन की खोखली विचारधारा, जंगलों में लगातार कठिन जीवन, शासन की पुनर्वास सुविधाएं और पहले आत्मसमर्पण कर चुके साथियों के सुरक्षित व खुशहाल जीवन से प्रेरित होकर उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। नगरी एरिया कमेटी, सीतानदी एरिया कमेटी, मैनपुर एलजीएस और गोबरा एलओएस के इन सक्रिय नक्सलियों के आत्मसमर्पण में धमतरी पुलिस, डीआरजी, राज्य बलों और केंद्रीय सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई और रणनीति की अहम भूमिका रही। आईजी अमरेश मिश्रा ने कहा, जिले को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में अभियान लगातार जारी रहेगा। अन्य सक्रिय माओवादियों से भी आत्मसमर्पण की अपील की जा रही है।

भोजशाला: 2034 तक मंदिर निर्माण और सरस्वती मूर्ति की लंदन से वापसी का ऐलान

धार  वसंत पंचमी के मौके पर राजा भोज वसंतोत्सव समिति ने शुक्रवार को यहां एक धर्मसभा का आयोजन किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 2034 में भोजशाला के निर्माण को एक हजार साल पूरे हो रहे हैं। इस बीच भोजशाला का मुकदमा हमें जीतना है और यहां मां सरस्वती के भव्य मंदिर का निर्माण करना है। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि लंदन के एक म्यूजियम में मां सरस्वती की मूर्ति है। उसे देश में वापस लाना है। भोजशाला मामले में जो याचिका लगी है उसका मुकदमा जीतना है।  मथुरा, काशी और धार में बने भव्य मंदिर : आलोक कुमार आलोक कुमार ने कहा कि भोजशाला में 992 साल पहले मंदिर बना था। 2034 में जब इसके एक हजार साल जब पूरे होंगे तब इसका निर्माण भी राम मंदिर की तर्ज पर होना चाहिए। यहां मां सरस्वती की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होनी चाहिए। अब समय आ गया है कि मथुरा काशी और धार में भव्य मंदिर बने। देश के केंद्र में स्थित धार को ज्ञान का केंद्र बनाना है। सभी ये संकल्प लें।  मौलाना कमाल की मौत अहमदाबाद में हुई विहिप प्रमुख ने कहा कि मुगलकाल में इस मंदिर को तोड़ा गया। हिंदुओं को अपमानित किया गया। देश की तीन हजार कब्रों में कुछ नहीं है। वे खाली हैं। धार में भी ऐसा ही है। मौलाना कमाल की मौत अहमदाबाद में हुई। उनकी मौत के 200 साल बाद भोजशाला में उनकी कब्र होने की बात कही गई। इस भोजशाला की लड़ाई हिंदू समाज की है। इसे सभी को मिलकर लड़ना है। आलोक कुमार ने कहा कि जो भी इस देश में रहते हैं, उन्हें देश का सम्मान करना चाहिए। कुछ लोगों को वंदे मातरम बोलने में हिचकिचाहट होती है। देश के लिए कई क्रांतिकारियों ने वंदे मातरम बोलकर फांसी के फंदे को चूमा। हिंदू धर्म सभी धर्मों का सम्मान करता है। शांति में विश्वास रखता है। यह हमारी ताकत है, कमजोरी नहीं। जिन्हें भोजशाला से ज्यादा प्रेम वो हिंदू धर्म अपना लें : अवधेशानंद गिरि स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि भोजशाला की पावन भूमि हिंदुओं की भूमि है। यहां का मंदिर और परिसर भी हमारा है। यहां पर कोई कब्जा नहीं कर सकता। राजा भोज ने यहां भोजशाला का निर्माण कराया था, ये कभी भी मुगलों की भूमि नहीं हो सकती। जिसे भोजशाला से ज्यादा प्रेम है तो वे हिंदू धर्म अपना लें और हर मंगलवार पूजा करने आ जाएं। देश के मुस्लिम कोई अरब से नहीं आए हैं, उनके पूर्वजों का धर्मांतरण किया गया है। वे भी हमारे भाई हैं। उन्होंने कहा कि 2014 को देश सही मायने में आजाद हुआ है। उसने पहले हिंदुओं को दबाया जाता रहा है। जो सनातन की बात करेगा, वही अब देश पर राज करेगा। हमने जो हिंदू राष्ट्र का सपना देखा है वो पूरा होने जा रहा है। 

विश्व कप की तैयारी पर संकट! दक्षिण अफ्रीका के 5 खिलाड़ी चोटिल, मौरिस बोले– हालात चिंताजनक

नई दिल्ली भारत और श्रीलंका में होने वाले आगामी टी20 विश्व कप के लिए एसए20 लीग को तैयारी के अच्छे मंच के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि पूर्व ऑलराउंडर क्रिस मौरिस ने बृहस्पतिवार को जोहानिसबर्ग में कहा कि इस प्रतिष्ठित आईसीसी प्रतियोगिता से पहले खिलाड़ियों का चोटिल होना ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ है। एसए20 लीग में प्रत्येक टीम ने कम से कम 10 मैच खेले जबकि इसके तुरंत बाद दक्षिण अफ्रीकी टीम वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैच की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला भी खेलेगी। उसे टी20 विश्व कप में अपना अभियान नौ फरवरी को कनाडा के खिलाफ शुरू करना है। दक्षिण अफ्रीका को टी20 स्क्वाड में करने पड़े 2 बदलाव दक्षिण अफ्रीका को टी20 विश्व कप की अपनी 15 सदस्यीय टीम में दो बदलाव करने के लिए बाध्य होना पड़ा जब उसने चोटिल टोनी डि जॉर्जी और डोनोवन फरेरा की जगह बृहस्पतिवार को रेयान रिकल्टन और ट्रिस्टन स्टब्स को टीम में शामिल किया। डि जॉर्जी की पैर की मांसपेशियों में दिसंबर में भारत दौरे के दौरान चोट लगी थी और वह उससे पूरी तरह से उबर नहीं पाए हैं जबकि फरेरा के कंधे में एसए20 लीग में खेलते हुए फ्रेक्चर हो गया। SA20 के दौरान मिलर, एनगिडी और ब्रेविस हुए चोटिल इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका की टी20 विश्व कप टीम में शामिल डेविड मिलर, लुंगी एनगिडी और डेवाल्ड ब्रेविस भी चोटिल हैं। मिलर पार्ल रॉयल्स के लिए जोबर्ग सुपरकिंग्स के खिलाफ एलिमिनेटर मैच नहीं खेले जबकि एनगिडी सनराइजर्स ईस्टर्न केप के खिलाफ क्वालीफायर में प्रिटोरिया कैपिटल्स के लिए सिर्फ दो ओवर फेंक पाए थे। कैपिटल्स के लिए खेलने वाले ब्रेविस की अंगुली में भी मैच जिताने वाली 75 रन की पारी के दौरान चोट लगी। मौरिस ने चुनिंदा भारतीय पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान बेहद व्यस्त कार्यक्रम के कारण खिलाड़ियों के शरीर पर पड़ने वाले असर के बारे में ‘भाषा’ के सवाल का जवाब देते हुए कहा, ‘मुझे लगता है कि सबूत सामने है। बदकिस्मती से हमारे कुछ खिलाड़ी चोटिल हो गए हैं। कार्यक्रम काफी व्यक्त है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन यही तो खेल की प्रकृति है और खिलाड़ियों को पता था कि क्या हो सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘बेशक आप दिन-रात खेल रहे हैं। यह आईपीएल जैसा ही है। क्योंकि आपको यात्रा करनी पड़ती है, आपको मैच खेलने होते हैं, कड़े मुकाबले। आप रात को देर से सोते हैं और अगली सुबह आप यात्रा कर रहे होते हैं।’ हो सकता है प्लेइंग इलेव को रोटेट करना पड़े: मौरिस दक्षिण अफ्रीका के लिए 42 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय, 23 टी20 अंतरराष्ट्रीय और चार टेस्ट खेलने वाले मौरिस ने कहा, ‘अगले दिन आपको ट्रेनिंग और रिकवरी वगैरह करनी होती है। तो यह सब खिलाड़ियों के प्रबंधन के बारे में है। बेशक कोचिंग स्टाफ मौजूद है और उन्हें पता है कि उन्हें क्या करना है।’ उन्होंने कहा, ‘हो सकता है एकादश को रोटेट करना पड़े लेकिन जब आपके पास एक अच्छी टीम हो जो जीत रही हो और प्ले ऑफ में जाने की कोशिश कर रही हो तो आप सच में ऐसा नहीं करना चाहते इसलिए यह मुश्किल है।' एसए20 में कमेंटेटर की भूमिका निभा रहे मौरिस ने कहा कि यह शारीरिक के साथ-साथ मानसिक रूप से भी काफी मुश्किल होता है लेकिन आप कोई ना कोई हल ढूंढ ही लेते हैं। उन्होंने कहा, ‘यह शरीर के लिए बेहद मुश्किल होता है। यह आपको मानसिक रूप से बेहद थका देता है। लेकिन अंत में आप कोई रास्ता निकाल ही लेते हैं। पेशेवर क्रिकेटर के तौर पर आप कुछ करने का तरीका ढूंढ ही लेते हैं। आप मैच जीतने का तरीका ढूंढ ही लेते हैं।’ 'उम्मीद है बहुत बुरा नहीं होगा' मौरिस ने मजाकिया लहजे में कहा, ‘ खुशकिस्मती से हमारे पास कुछ फिट खिलाड़ी हैं। कुछ खिलाड़ी चोटिल भी हैं। उम्मीद है बहुत बुरा नहीं होगा और मुझे विश्व कप के लिए तैयार हो जाना चाहिए।' मौरिस हालांकि टी20 विश्व कप के लिए दक्षिण अफ्रीका टीम में शामिल खिलाड़ियों के एसए20 लीग में प्रदर्शन से खुश हैं। इस पूर्व ऑलराउंडर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि टीम में शामिल खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। यहां तक कि जो खिलाड़ी टीम में नहीं हैं उन्होंने भी अच्छा प्रदर्शन किया है और इससे बड़े टूर्नामेंट से पहले आत्मविश्वास मिलेगा।’ आईपीएल 2021 में राजस्थान रॉयल्स के साथ 16 करोड़ 25 लाख रुपये में जुड़कर उस समय टूर्नामेंट इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी बने मौरिस ने कहा कि उन्हें खुशी है कि पसलियों में लगी चोट के बाद कागिसो रबाडा एक बार फिर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। चोट के बाद वापसी कर रहे हैं रबाडा उन्होंने कहा, ‘मुझे खुशी है कागिसो रबाडा एक बार फिर अच्छा कर रहे हैं। बेशक वह चोट के बाद वापसी कर रहे हैं। शुरुआती कुछ मैच में वह बहुत नर्वस थे। चोट के साथ ऐसा होना आम बात है। लेकिन उन्हें फिर से पूरी गति के साथ गेंदबाजी करते हुए देखना, सटीक लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करते हुए देखना। रबादा को देखकर बहुत खुशी हुई।’ मौरिस का मानना है कि आगामी टी20 विश्व कप में स्पिनरों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। उन्होंने कहा कि केशव महाराज और जॉर्ज लिंडे के रूप में दक्षिण अफ्रीका के पास दो अच्छे स्पिनर हैं जो प्रभावी प्रदर्शन कर रहे हैं। मौरिस को स्पिनरों से काफी उम्मीद मौरिस ने कहा, ‘मुझे लगता है कि केशव महाराज ने बहुत अच्छी गेंदबाजी की है। प्रिटोरिया कैपिटल्स के अच्छे प्रदर्शन में उनकी अहम भूमिका रही है। उसने वास्तव में बहुत अच्छी गेंदबाजी की है।

साइना नेहवाल को विराट कोहली की बधाई,称 किया भारतीय खेल का गर्व

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली और दो बार बैडमिंटन में ओलंपिक पदक जीतने वाली स्टार शटलर पीवी सिंधु ने दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल को बैडमिंटन से संन्यास लेने पर उनके बेहतरीन करियर के लिए बधाई दी। विराट कोहली ने एक्स पर लिखा, "साइना नेहवाल, आपके शानदार करियर के लिए बधाई। आपने भारतीय बैडमिंटन को दुनिया भर में पहचान दिलाई। आपको एक खुशहाल, संतोषजनक और अच्छे संन्यास की शुभकामनाएं। भारत को आप पर गर्व है।" पीवी सिंधु ने एक्स पर लिखा, "सायना, आपको संन्यास की शुभकामनाएं। इंडियन बैडमिंटन में आपने जो कुछ भी दिया है, उसके लिए धन्यवाद। जिंदगी के इस अगले पड़ाव के लिए आपको शांति, खुशी और ढेर सारी शुभकामनाएं।" पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह ने भी साइना नेहवाल को उनके संन्यास पर बधाई देते हुए लिखा था, "बहुत बढ़िया खेला, साइना। शानदार करियर के लिए बधाई। आपने भारतीय बैडमिंटन को आगे बढ़ाया और एक पीढ़ी को प्रेरित किया। आगे जो भी हो, उसके लिए आपको शुभकामनाएं।" इंजरी की वजह से लंबे समय तक बैडमिंटन से दूर रहने के बाद साइना ने बैडमिंटन को अलविदा कह दिया है। संन्यास की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा, "आप दुनिया में बेस्ट बनने के लिए आठ से नौ घंटे ट्रेनिंग करते हैं। अब, मेरे घुटने एक या दो घंटे में ही जवाब दे जाते थे। सूजन आ गई थी, और उसके बाद जोर लगाना बहुत मुश्किल हो गया था। इसलिए मुझे लगा कि बस बहुत हो गया। मैं अब और जोर नहीं लगा सकती। मेरा कार्टिलेज पूरी तरह से खराब हो गया है। आर्थराइटिस है, और वापसी बेहद मुश्किल है। इसलिए अपने परिवार और कोच से बात करने के बाद मुझे यह मुश्किल फैसला लेना पड़ा।" साइना ओलंपिक में बैडमिंटन में भारत को पदक दिलाने वाली पहली खिलाड़ी हैं। 2012 में उन्होंने लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। हिसार की इस बैडमिंटन खिलाड़ी ने 2008 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतकर और बीजिंग 2008 ओलंपिक्स में एकल क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रचा था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई थी। 2009 में, उन्होंने इंडोनेशिया ओपन जीतकर बीडब्ल्यूएफ सुपर सीरीज टूर्नामेंट जीतने वाली पहली भारतीय बनकर इतिहास रच दिया। एक साल बाद, उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन का दर्जा हासिल किया। 2015 में, उन्होंने एकल बैडमिंटन रैंकिंग में दुनिया की नंबर 1 बनकर एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया, जिससे वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं और प्रकाश पादुकोण के बाद शीर्ष पर पहुंचने वाली दूसरी भारतीय शटलर बनीं। उस साल, वह बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में भी पहुंचीं, ऐसा करने वाली वह भारत की पहली खिलाड़ी थीं। भारतीय बैडमिंटन को मजबूती से अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने में अहम भूमिका निभाने वाली साइना को पद्मश्री, पद्मभूषण, खेल रत्न और अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।