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वास्तु के अनुसार घर की घंटियां और विंड चाइम: जानें किस दिशा में लटकाना है सबसे शुभ

हवा के झोंकों के साथ जब घर में विंड चाइम या छोटी घंटियों की सुरीली आवाज गूंजती है, तो मन को एक अजीब सा सुकून मिलता है। लेकिन, क्या आपको पता है कि यह प्यारी सी आवाज सिर्फ सुनने में अच्छी नहीं लगती, बल्कि आपके जीवन से नकारात्मकता को दूर कर सुख-समृद्धि के द्वार भी खोल सकती है? वास्तु शास्त्र में ध्वनि तरंगों का बहुत महत्व है। सही दिशा में लगी विंड चाइम सोई हुई किस्मत को जगाने का काम करती है। वहीं, गलत दिशा में लगी घंटी मानसिक तनाव का कारण बन सकती है। दिशाओं का रखें खास ख्याल विंड चाइम खरीदते समय सबसे पहले उसकी दिशा और धातु पर ध्यान देना चाहिए। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आप पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में विंड चाइम लगाना चाहते हैं, तो धातु से बनी विंड चाइम का चुनाव करें। यह दिशा बच्चों के करियर और सौभाग्य के लिए उत्तम मानी जाती है। वहीं, अगर आप घर की पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा को सजाना चाहते हैं, तो लकड़ी या बांस से बनी विंड चाइम सबसे शुभ फल देती है। ऐसा माना जाता है कि लकड़ी का तत्व विकास और उन्नति का प्रतीक है। छड़ों की संख्या का जादुई अंक विंड चाइम में छड़ों  की संख्या का भी अपना महत्व है। घर में शांति और क्लेश दूर करने के लिए 7 या 8 छड़ों वाली विंड चाइम लगानी चाहिए। वहीं, अगर आप अपनी लोकप्रियता या सामाजिक दायरे को बढ़ाना चाहते हैं, तो 6 छड़ों वाली विंड चाइम को उत्तर-पश्चिम दिशा में लटकाना लाभकारी होता है। प्रवेश द्वार पर घंटी का महत्व सिर्फ विंड चाइम ही नहीं, घर के मुख्य द्वार पर छोटी पीतल की घंटी लटकाना भी सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है। जब भी कोई दरवाजा खोलता है, तो घंटी की आवाज से घर की 'डेड एनर्जी' (रुकी हुई ऊर्जा) एक्टिव हो जाती है। यह आवाज घर में प्रवेश करने वाली नकारात्मक शक्तियों को बाहर ही रोक देती है। कहां न लगाएं विंड चाइम? वास्तु के अनुसार, कभी भी ऐसी जगह विंड चाइम न लगाएं, जहां उसके नीचे कोई बैठता हो या सोता हो। इसके अलावा, किचन या स्टोर रूम के अंधेरे कोनों में भी इसे लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि वहां इसकी ऊर्जा का सही प्रवाह नहीं हो पाता।  

क्रिकेटर और निजी जीवन की चर्चाएँ: ब्रेट ली की पत्नी को लेकर सोशल मीडिया में उथल-पुथल

मेलबर्न  क्रिकेट के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली का लंबे समय तक दबदबा रहा. लंबे रनअप, स्मूद एक्शन के साथ तूफानी रफ्तार ब्रेट ली की गेंदबाजी में डेडली कॉम्बिनेशन था. पिच चाहे जैसी भी हो ब्रेट ली के हाथ में गेंद आते ही वह आग उगलने लगती थी, लेकिन क्रिकेट के मैदान का ये हीरो अपनी पर्सनल लाइफ में काफी उतार-चढ़ाव से गुजरे. खास तौर से पहली शादी टूटने के बाद तो वह सदमें थे. उनकी लाइफ में ये सब तब हुआ था जब वह अपने करियर के पीक पर थे. हालांकि, अच्छी बात ये थी कि ब्रेट ली ने कभी जाहिर नहीं होने दिया कि उनकी पर्सलन में क्या चल रहा है. क्रिकेट फैंस को शायद ही पता होगा कि ब्रेट ली की पहली शादी सिर्फ तीन साल में ही टूट गई थी और उनकी शादी टूटने की वजह थी क्रिकेट से उनका प्यार. जिस खेल ने ब्रेट ली को दौलत और शोहरत दिलाई उसी खेल के कारण उनकी पहली वाइफ एलिजाबेथ कैंप ने उन्हें धोखा दिया. क्यों हुआ था ब्रेट ली का तलाक? ब्रेट ली की पहली शादी क्यों टूटी इसे लेकर अलग-अलग कहानियां है. ऑस्ट्रेलियाई मीडिया के मुताबिक ब्रेट ली की पहली वाइफ एलिजाबेथ की एक रग्बी प्लेयर से अफेयर था, जिसके कारण उनका तलाक हुआ. तलाक के पीछे की वजह चाहे जो भी, लेकिन ये बात सच है कि ब्रेट ली और उनकी वाइफ के बीच क्रिकेट को लेकर ही मतभेद हुआ था. क्योंकि ब्रेट ली ने जब एलिजाबेथ से साल 2006 में शादी की थी तो वह अपने करियर पर शिखर पर थे. उस दौर में ऑस्ट्रेलिया विश्व क्रिकेट पर राज करती थी, जिसमें ब्रेट ली की भी अहम भूमिका थी. माना जाता है कि इंटरनेशनल टूर और मैचों के कारण ब्रेट ली लगातार कई महीने घर से दूर रहते थे. इसी दूरी ने ब्रेट ली और एलिजाबेथ के रिश्ते में तनाव पैदा कर दिया था. ब्रेट ली के लगातार दौरों की वजह से एलिजाबेथ को अपने करियर और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने में काफी मुश्किल हो रही थी. शादी के बाद उनका एक प्यारा सा बच्चा भी हुआ, जिसके कारण एलिजाबेथ अकेली पड़ गईं थी. 2014 में ब्रेट ली ने की दूसरी शादी ब्रेट ली और एलिजाबेथ के बेटे का नाम प्रेस्टन है. तलाक के बाद दोनों ने मिलकर उसकी परवरिश करने का फैसला लिया था. कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया था कि ब्रेट ली का क्रिकेट के प्रति प्यार और एलिजाबेथ को समय नहीं देने के कारण दोनों के बीच वैचारिक मतभेद बढ़ गए थे. इस वजह से दोनों ने अलग होने का फैसला किया. तलाक के बाद ब्रेट ली लगभग पांच साल तक सिंगल रहे और साल 2014 में उन्होंने लाना एंडरसन से दूसरी रचाई.

‘जीरो’ टैरिफ एंट्री से भारत का फायदा, India-EU डील से Vedanta, UPL, SRF समेत 28 स्टॉक्स में तेजी का मौका

नई दिल्ली भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-EU FTA) हो गया है. मंगलवार को इस 'मदर ऑफ ऑल डील्स' (Mother Of All Deals) कहे जा रहे वाले समझौते का ऐलान किया गया. ये भारत के लिए कई मायने में बड़े फायदे का सौदा है और सबसे बड़ा लाभ टेक्सटाइल इंडस्ट्री को मिलता दिख रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि डील के तहत अब भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय संघ के देशों में जीरो टैरिफ एक्सपोर्ट (Zero Tariff Export) का एक्सेस मिलेगा. बता दें कि ईयू के कपड़ा बाजार का आकार 263.5 अरब डॉलर (करीब 22 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) है.  एफटीए से टैरिफ फ्री निर्यात India-EU FTA के तहत भारत को कपड़ा और परिधान सेक्टर में जीरो टैरिफ एंट्री का लाभ मिलेगा. अभी तक भारत से यूरोपीय देशों में भेजे जाने वाले कपड़ों पर अलग-अलग कैटेगरी में 9 से 12% तक का टैरिफ लागू होता है, जिसे डील में हुए समझौते के तहत या तो शून्य या महज 2-3 फीसदी तक सीमित किया जाएगा. इससे यूरोपीय संघ का का आयात बाजार भारतीय निर्यातकों के लिए आसान और फायदे वाला साबित होगा.  US के बाद दूसरा बड़ा बाजार EU गौरतलब है कि अमेरिका के बाद यूरोपीय संघ भारत के कपड़ा और परिधान निर्यात का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है. ऐसे में ये डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के लिए भी एक बड़ा झटका है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2024 में यूरोपीय संघ का इस सेक्टर में वैश्विक आयात 263.5 अरब डॉलर (करीब 22.9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) का रहा था. इस बड़े कपड़ा बाजार में Zero Tariff Entry से मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारत के निर्यात और रोजगार दोनों में तगड़ा उछाल देखने को मिलेगा.  भारत करता है कितना कपड़ा निर्यात? भारत ग्लोबली हर साल 36.7 अरब डॉलर (करीब 3.19 लाख करोड़ रुपये) के कपड़ों का निर्यात करता है. इसमें यूरोपीय संघ को 62.7 हजार करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है. इस समझौते से सूत, कपास और मानव निर्मित फाइबर कपड़े, रेडीमेड कपड़े समेत अन्य टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स के निर्यात में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है. वेदांता, UPL, SRF समेत ये 28 स्‍टॉक… India-EU डील से आएगी तेजी India-EU ट्रेड डील ऐलान के बाद कुछ शेयरों में अच्‍छी तेजी आने की उम्मीद है. ब्रोकरेज फर्म एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने बुधवार को कहा कि भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते से मैन्युफैक्‍चरिंग को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए मौके बनेंगे. ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि यह समझौता मध्यम से लंबी अवधि में डायरेक्‍ट विदेशी निवेश और विदेशी संस्थागत निवेशकों के निवेश को बढ़ाएगा, जिस कारण कुछ शेयरों में अच्‍छी तेजी आ सकती है.  एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने कहा कि केमिकल कंपनियों में PI इंडस्ट्रीज, रैलीस इंडिया, SRF लिमिटेड, सुमितोमो केमिकल इंडिया और यूपीएल लिमिटेड को लाभ मिल सकता है. वहीं हाउस मैटेरियल मैन्‍युफैक्‍चरिंग में ग्रीनलाम इंडस्ट्रीज और ग्रीनपैनल इंडस्ट्रीज को फायदा मिलने की उम्‍मीद है.  इंडस्ट्रियल सेक्‍टर की बात करें तो ABB India, अपार इंडस्ट्रीज, JE वर्नोवा टी एंड डी, Hitachi एनर्जी और सीमेंस एनर्जी इंडिया को इस व्यापार समझौते से लाभ मिलने की संभावना है. टेक्‍नोलॉजी कंपनियों में HCL Tech, कोफोर्ज लिमिटेड और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसी भारतीय आईटी फर्मों ने वित्त वर्ष 2025 में यूरोपीय संघ से अपने राजस्व का 30 प्रतिशत से ज्‍यादा  अर्जित किया. मेटल और माइनिंग सेक्‍टर में वेदांता जैसे शेयरों को लाभ मिल सकता है.                                                वहीं फार्मास्युटिकल क्षेत्र में सिप्ला, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और टॉरेंट फार्मास्यूटिकल्स का नाम शामिल है. केपीआर मिल और वेलस्पन लिविंग जैसे कपड़ा निर्यातकों को भी इस डील का लाभ मिल सकता है.  इससे दूसरा फायदा ये होगा कि यूरोप के बड़े बाजार में बेहतर और आसान पहुंच से लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को अपने परिचालन की ग्रोथ, रोजगार पैदा करने और एक विश्वसनीय सोर्स पार्टनर के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी. 4 करोड़ लोगों को रोजगार देता है ये सेक्टर भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट बांग्लादेश, पाकिस्तान और तुर्की जैसे अपने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारत को लंबे समय से चली आ रही टैरिफ असमानता को दूर करने का मौका देता है. यूरोपीय संघ को भारत के कपड़ा निर्यात में रेडीमेड गारमेंट्स का हिस्सा करीब 60% है, इसके बाद सूती वस्त्रों का 17% और मानव निर्मित फाइबर (MMF) वस्त्रों का 12% हिस्सा है. इसके साथ ही हस्तशिल्प और कालीनों का हिस्सा 4-4%, जूट प्रोडक्ट्स का 1.5% हिस्सा है. वहीं भारत में कपड़ा उद्योग प्रत्यक्ष रूप से करीब 4 करोड़ लोगों को रोजगार देता है.  भारतीय वस्‍तुओं पर इम्‍पोर्ट ड्यूटी समाप्‍त होगी एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने कहा कि यूरोपीय संघ भारतीय वस्तुओं पर औसतन लगभग 3.8 प्रतिशत का शुल्क लगाता है. हालांकि, इसने यह भी बताया कि श्रम प्रधान क्षेत्रों में लगभग 10 प्रतिशत का आयात शुल्क लगता है, जिसे समझौते के तहत शून्य तक कम किए जाने की संभावना है.  इन कारोबार को होगा फायदा  ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि कपड़ा, चमड़ा, जूते, कृषि और कीमती पत्थरों जैसे क्षेत्र ज्‍यादा प्रॉफिट में रहेंगे, क्योंकि भारत वर्तमान में इन श्रेणियों में यूरोपीय संघ के आयात का लगभग 4 प्रतिशत हिस्सा रखता है, जिससे आने वाले वर्षों में बाजार हिस्सेदारी में काफी ग्रोथ होने की गुंजाइश है.  ब्रोकरेज फर्म ने यह भी कहा कि यूरोपीय संघ भारत का दूसरा सबसे बड़ा आईटी खर्च मार्केट है, जो कुल इनकम टैक्‍स रेवेन्‍यू में करीब 16 प्रतिशत का योगदान देता है. फर्म ने आगे कहा कि भारत-यूरोपीय संघ व्‍यापार India EU FTAसमझौते के इनडायरेक्‍ट प्रॉफिट में अनुपालन संबंधी बाधाओं में कमी और भारतीय कारोबारियों के लिए बेहतर पहुंच और गतिशीलता शामिल है, जिससे आईटी कंपनियों को अमेरिकी बाजार पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है.  भारतीय एक्‍सपोर्ट को बड़ा लाभ  एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने कहा कि व्यापार समझौते के तहत तत्काल शुल्क हटाने से लगभग 33 अरब डॉलर प्राइस के भारतीय निर्यात को लाभ होगा. टेक्‍सटाइल पर टैरिफ 12 फीसदी से कम होकर शून्‍य हो जाएगा. जिसमें रेडीमेड वस्त्र, सूती धागा और घरेलू वस्त्र शामिल हैं. चमड़ा और जूते पर 17 प्रतिशत तक का शुल्क पूरी तरह से हटा दिया गया, … Read more

इंडिया स्क्वॉड में बड़ा फेरबदल: वर्ल्ड कप से पहले बडोनी–प्रियांश को मिला मौका

नई दिल्ली आयुष बडोनी और प्रियांश आर्या को दिल्ली रणजी ट्रॉफी टीम से रीलिज कर दिया गया है क्योंकि उनका चयन टी-20 विश्व कप से पहले सीनियर टीम के खिलाफ अभ्यास मैचों के लिए भारतीय ‘ए’ टीम में हो गया है. बडोनी ने चार दिवसीय और लिस्ट-ए दोनों फॉर्मेट में खेला है, जबकि आर्या ने अभी तक केवल सफेद गेंद वाले फॉर्मेट में ही खेला है. अब दिल्ली के आयुष दोजा मुंबई के खिलाफ रणजी ट्रॉफी के सातवें दौर में टीम की कप्तानी करेंगे. टी-20 विश्व कप की शुरुआत से पहले भारत कुल तीन मैच खेलेगा, जिसमें दो मैच इंडिया ‘ए’ खेलेगी जबकि एक मैच में सीनियर टीम शिरकत करेगी. इंडिया ‘ए’ दो और छह फरवरी को नवी मुंबई में अमेरिका और बेंगलुरु में नामीबिया के खिलाफ खेलेगी. ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड ने वार्म-अप मैचों में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है. दरअसल, विश्व कप से ठीक पहले ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच तीन मैच की टी-20 सीरीज होनी है जबकि इंग्लैंड श्रीलंका के खिलाफ खेलेगा. वॉर्म-अप मैच का शेड्यूल     2 फरवरी – अफगानिस्तान बनाम स्कॉटलैंड – बेंगलुरु – दोपहर 3 बजे     2 फरवरी – भारत ए बनाम यूएसए – नवी मुंबई – शाम 5 बजे     2 फरवरी – कनाडा बनाम इटली – चेन्नई – शाम 7 बजे     3 फरवरी – श्रीलंका ए बनाम ओमान – कोलंबो – दोपहर 1 बजे     3 फरवरी – नीदरलैंड्स बनाम जिम्बाब्वे – कोलंबो – दोपहर 3 बजे     3 फरवरी – नेपाल बनाम यूएई – चेन्नई – शाम 5 बजे     4 फरवरी – नामीबिया बनाम स्कॉटलैंड – बेंगलुरु – दोपहर 1 बजे     4 फरवरी – अफगानिस्तान बनाम वेस्ट इंडीज – बेंगलुरु – दोपहर 3 बजे     4 फरवरी – आयरलैंड बनाम पाकिस्तान – कोलंबो – शाम 5 बजे     4 फरवरी – भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका – नवी मुंबई – शाम 7 बजे     5 फरवरी – ओमान बनाम जिम्बाब्वे – कोलंबो – दोपहर 1 बजे     5 फरवरी – कनाडा बनाम नेपाल – चेन्नई – दोपहर 3 बजे     5 फरवरी – न्यूजीलैंड बनाम यूएसए – नवी मुंबई – शाम 5 बजे     6 फरवरी – इटली बनाम यूएई – चेन्नई – दोपहर 3 बजे पीएम     6 फरवरी – इंडिया ए बनाम नामीबिया – बेंगलुरु – शाम 5 बजे सातवें दौर के लिए दिल्ली रणजी ट्रॉफी टीम: आयुष डोसेजा (कप्तान), सनत सांगवाम, वैभव कांडपाल, सुमित माथुर, प्रणव राजवंशी, सिद्धांत शर्मा, ध्रुव कौशिक, राहुल डागर, अनुज रावत, दिविज मेहरा, आर्यन राणा, मनी ग्रेवाल, रोहन राणा, राहुल चौधरी.

iPhone में नेटवर्क की जरूरत नहीं, Starlink से डायरेक्ट सैटेलाइट इंटरनेट संभव

 नई दिल्ली Apple के लेटेस्ट iPhones में सैटेलाइट कनेक्टिविटी दी जाती है. इमरजेंसी में जहां नेटवर्क ना हो वहां इसे यूज किया जाता है. लेकिन अभी भी ये हर देश के लिए एवेलेबल नहीं है.  रिपोर्ट्स के मुताबिक Apple आने वाले iPhone 18 Pro सीरीज़ में एक नया सैटेलाइट-कनेक्टिविटी फीचर जोड़ने पर काम कर रहा है. दावा है कि फ्यूचर के iPhone सीधे Starlink सैटेलाइट नेटवर्क से जुड़कर डेटा कनेक्शन बना पाएंगे. गौरतलब है कि Starlink सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस है. ये कंपनी अरबति एलॉन मस्क की है और भारत में इसकी पहले से ही टेस्टिंग हो रही है. हाल ही मेंं वेबसाइट्स पर प्लान भी देखे गए थे, लेकिन बाद में बताया गया कि इसके प्लान बाद में आएंगे. भारत में लोग इसे यूज कब से कर पाएंगे फिलहाल साफ नहीं है.  IPhone 18 Pro में मिलेगा Starlink सपोर्ट?  अभी तक यह सिर्फ रिपोर्ट और इंडस्ट्री सूत्रों पर आधारित जानकारी है. Apple ने कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. आम तौर पर ऐसे रिपोर्ट्स को कभी ऐपल वेरिफाई नहीं करता है. लेकिन लॉन्च से पहले तक के ज्यादातर लीक्स और रूमर्स सही ही हो जाते हैं.   इस खबर ने इसलिए ध्यान खींचा है क्योंकि Apple पहले से ही iPhone में सैटेलाइट फीचर दे चुका है, लेकिन लिमिटेशन के साथ.  अभी iPhone में सैटेलाइट फीचर कैसे काम करता है? मौजूदा iPhone मॉडल्स में सैटेलाइट कनेक्शन सिर्फ Emergency SOS और सीमित टेक्स्ट मैसेजिंग के लिए इस्तेमाल होता है. यानी अगर मोबाइल नेटवर्क नहीं है, तब भी आप इमरजेंसी मैसेज भेज सकते हैं. लेकिन इससे इंटरनेट ब्राउज़िंग, वीडियो कॉल या ऐप्स चलाना संभव नहीं होता. नई रिपोर्ट्स का कहना है कि Apple अब डेटा-लेवल सैटेलाइट कनेक्टिविटी पर रिसर्च कर रहा है, जहां फोन सिर्फ SOS नहीं, बल्कि लिमिटेड इंटरनेट डेटा भी सैटेलाइट से भेज-रिसीव कर सके. Starlink से जुड़ने की चर्चा क्यों हो रही है Starlink, SpaceX का सैटेलाइट नेटवर्क है जो Low-Earth Orbit सैटेलाइट्स के ज़रिये इंटरनेट कवरेज देता है. अभी यह सर्विस डिश-बेस्ड टर्मिनल से चलती है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि Apple ऐसे हार्डवेयर और मॉडेम डिजाइन पर काम कर रहा है जो भविष्य में डायरेक्ट-टू-सैटेलाइट कनेक्शन को सपोर्ट कर सके. इसी वजह से Starlink का नाम चर्चाओं में है. हालांकि अभी तक Apple और SpaceX के बीच किसी पक्के कमर्शियल डील की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. इसलिए फिलहाल इसे टेक-इंडस्ट्री प्लानिंग और ट्रायल स्टेज की खबर माना जा रहा है. अगर ऐसा होता है तो फायदा क्या होगा? अगर फ्यूचर में iPhone में लिमिटेड सैटेलाइट डेटा सपोर्ट आता है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा उन इलाकों में होगा जहां मोबाइल नेटवर्क कमजोर है,  जैसे पहाड़ी क्षेत्र, समुद्र में सफर या रिमोट एरिया. लेकिन एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि सैटेलाइट डेटा स्पीड और लागत अभी मोबाइल नेटवर्क जैसी नहीं है. इसलिए शुरुआती दौर में यह फीचर बैकअप कनेक्टिविटी की तरह इस्तेमाल हो सकता है, न कि रेगुलर 5G रिप्लेसमेंट के तौर पर.

Property Alert: भोपाल के रियल एस्टेट में उछाल, कुछ इलाकों में कीमतें 20% तक बढ़ीं

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के प्रॉपर्टी रेट में एक बार फिर बढ़ोतरी करने की तैयारी है। इस बार शहर के साथ-साथ जिलेभर की प्रापर्टी 15 से 20 फीसदी तक महंगी करने की तैयारी की जा रही है। इसे लेकर जिलेभर में जिन स्थानों पर अधिक दामों पर रजिस्ट्रियां हुईं हैं, वहां के रिकॉर्ड पंजीयन विभाग ने राजस्व विभाग से मांगा है। इन क्षेत्रों में हुए विकास कार्यों और प्रापर्टी की खरीद-फरोख्त के आधार पर प्रापर्टी के नए दाम निर्धारित किए जाएंगे। बताया जा रहा है कि, उप जिला मूल्यांकन समिति की बैठक मंगलवार को तय थी, लेकिन किसी कारण से बैठक नहीं हो सकी। ऐसे में जल्द ही बैठक आयोजित कर गाइडलाइन के प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी। इसे अंतिम रूप देने के बाद जिला मूल्यांकन समिति को भेजा जाएगा। इस तरह जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। नई कलेक्टर गाइडलाइन को लेकर रजिस्ट्रेशन और राजस्व विभाग के अफसरों द्वारा सर्वे जारी है। पटवारियों से तैयार कर मांगा गया रिकॉर्ड भोपाल जिले की नगरीय और ग्रामीण सीमा में आने वाले क्षेत्रों में इन दिनों जमकर प्रापर्टी की खरीद-फरोख्त की गई है। ऐसे में इन इलाकों का रिकॉर्ड पटवारियों से तैयार कर मांगा गया है, जिससे पता चल सके कि, यहां कितनी जगह तय दाम से अधिक कीमत पर रजिस्ट्रियां हुईं हैं। अधिक दाम पर होने वाली रजिस्ट्रियों को ही दाम में वृद्धि करने का आधार बनाया जाएगा। इसके लिए हुजूर, कोलार, बैरसिया तहसील के एसडीएम, तहसीलदार द्वारा पटवारियों से सर्वे करवाकर जानकारी जुटाई जा रही है। इन इलाकों में खूब बिक रही प्रापर्टी भोपाल के कटारा हिल्स, अवधपुरी, खजूरी कलां, 11 मील, सहारा एस्टेट, सलैया, मिसरोद, समरधा, कोलार, नर्मदापुरम रोड, रातीबड़, नीलबड़, मुगालिया छाप, ईंटखेड़ी छाप, फंदा, खजूरी सड़क, भैंसाखेड़ी, कोलूखेड़ी, परवलिया सड़क, चंदूखेड़ी, गांधीनगर, जेल रोड, अयोध्या बायपास, आनंद नगर, बिलखिरिया, रायसेन रोड, कान्हासैया, ओंकारा सेवनियां, सूखी सेवनियां, भोपाल बायपास, जगदीशपुर, ईंटखेड़ी, लांबाखेड़ा, करोंद, पलाशी, मुबारकपुर, डोबरा, परेवाखेड़ा, अचारपुरा, पुरामनभावन, देवलखेड़ी, गोलखेड़ी, श्यामपुर समेत नगरीय और ग्रामीण सीमा में प्रापर्टी खरीदी जा रही है। फरवरी में तय होंगी नई दरें मीडिया रिपोर्ट्स में पंजीयन विभाग के एक अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने का हवाला देकर बताया कि, कलेक्टर गाइडलाइन को लेकर तैयारियां चल रही हैं, कुछ ही दिन में प्रस्ताव तैयार होगा, जिसे उप जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में रखा जाएगा। जिन क्षेत्रों में तय दाम से अधिक दाम पर रजिस्ट्रियां हुई हैं, वहां पर 15 से 20 फीसदी तक प्रापर्टी रेट में बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके लिए राजस्व विभाग से जानकारी मांगी गई है।

ग्रामीण किसानों को बड़ी राहत, 5 रुपये में मिले 1 लाख 57 हजार नए विद्युत कनेक्शन

अब तक एक लाख 57 हजार ग्रामीण कृषकों ने लिया मात्र 5 रुपये में नवीन विद्युत कनेक्शन भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अपने कार्यक्षेत्र में ग्रामीण एवं कृषि उपभोक्ताओं को अब मात्र 5 रुपये में स्थायी घरेलू एवं कृषि पंप कनेक्शन उपलब्ध करा रही है। दिसंबर 2024 से यह योजना शुरू हुई है तब से अब तक इस योजना का लाभ 01 लाख 57 हजार 359 ग्रामीण कृषकों को मिल चुका है। इनमें से 58 हजार 711 घरेलू तथा 98 हजार 648 कृषि पंप कनेक्शन शामिल हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि घरेलू तथा कृषि पम्पों के कनेक्शनों की संख्या बढ़ाए जाने के लिये ऐसे कृषक जो विद्युत की उपलब्ध लाइन के समीप स्थित हैं उनको सुविधानुसार आसानी से स्थाई कृषि पंप कनेक्शन दिया जा रहा है। नवीन घरेलू एवं कृषि पंप के लिये स्थायी विद्युत कनेक्शन का आवेदन सरल संयोजन पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है। इसके लिए portal.mpcz.in पर मांगी गई आवश्यक जानकारी देनी होती है। अधिक जानकारी के लिए कंपनी के टोल फ्री नंबर 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है।  

पीएम सूर्य घर योजना से बड़ा लाभ, 29 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं के खातों में पहुंचे ₹228+ करोड़

पीएम सूर्य घर योजना में अब तक 29 हजार 275 उपभोक्ताओं के खातों में पहुंची 228 करोड़ से अधिक की सब्सिडी योजना में तीन किलोवॉट के सौर संयन्त्र लगाने पर 78 हजार की सब्सिडी मिलेगी भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा अपने क्षेत्रान्तर्गत आने वाले भोपाल, नर्मदापुरम्, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों में पीएम सूर्यघर योजना के तहत अब तक कुल 29 हजार 273 उपभोक्ता पंजीकृत हुए हैं। इन्हें 228 करोड़ से अधिक की राशि सब्सिडी के रूप में उनके खातों में जमा कराई जा चुकी है। कंपनी ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से संबंधित कार्यों की प्रगति की समीक्षा के दौरान रजिस्टर्ड उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उपरांत विद्युत वितरण कंपनी में रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर से ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाएं। देश के करोड़ों घरों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पीएम सूर्य घर योजना प्रारंभ की गई है। लोगों को इस योजना का लाभ मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा प्रदान किया जा रहा है। इस योजना के तहत एक किलोवॉट सोलर संयन्त्र लगाने पर 30 हजार रूपये, दो किलोवॉट सोलर संयन्त्र लगाने पर 60 हजार रुपए तथा तीन किलोवॉट या उससे अधिक के सोलर संयन्त्र स्थापना पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही है। गौरतलब है कि पीएम सूर्यघर योजना का शुभारंभ 13 फरवरी 2024 को हुआ था। तब से लेकर आज दिनांक तक हजारों बिजली उपभोक्ताओं को योजना से जोड़ा गया है। योजना में शामिल होने के लिए आनलाइन आवेदन करना होगा। जिसके लिए पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाइट https://www.pmsuryaghar.gov.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए कंपनी की वेबसाइट www.portal.mpcz.in अथवा उपाय एप, वॉट्सएप चेटबॉट व टोल फ्री नं, 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है। कंपनी ने कहा कि उपभोक्ताओं को समय पर सब्सिडी मिले इसके लिए वेंडर और उपभोक्ता दोनों को ध्यान रखना होगा कि उनके बैंक खाते में नाम, आधार कार्ड में नाम तथा बिजली बिल में नाम एक समान होना चाहिए। गौरतलब है कि 1 दिसंबर 2024 से स्थापित होने वाले प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत सौर संयंत्रों में केवल स्मार्ट मीटर ही लगाए जा रहे हैं, जो कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा एस.ओ.आर. रेट पर उपभोक्ताओं को प्रदान किए जा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं द्वारा सोलर वेंडर को किए जाने वाले भुगतान में लगभग 6 से 8 हजार रूपये तक की कमी परिलक्षित हो रही है।  

खेती को राहत: रबी सीजन से पहले 400 केवी विद्युत टावर मजबूत किए गए

रबी सीजन में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने चार्ज 400 केवी टावरों में की गई स्ट्रेंथनिंग भोपाल ऊर्जा मंत्री  प्रद्युमन सिंह तोमर ने बताया कि मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने 400 केवी कटनी–दमोह एक्स्ट्रा हाई टेंशन ट्रांसमिशन लाइन के टावरों के सुदृढ़ीकरण का प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। इनमें से अनेक टावरों का काम चालू ट्रांसमिशन लाइन में ही किया गया ताकि प्रदेश में रबी सीजन के दौरान किसानों और उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होती रहे। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने बताया कि बिरसिंहपुर थर्मल पावर प्लांट से विद्युत की निर्बाध निकासी तथा रबी सीजन में बढ़ी हुई अधिकतम विद्युत मांग के बीच प्रदेश की आपूर्ति व्यवस्था को स्थिर बनाये रखने की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद 400 के वी ट्रांसमिशन लाइनों के टावरों की स्ट्रेंथनिंग का कार्य बिना शटडाउन लिए, चालू लाइन पर ही किया गया। इससे उत्पादन एवं आपूर्ति पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। इसलिए जरुरत पडी स्ट्रेथनिंग एवं रेट्रोफिटिंग की एम पी ट्रांसको के ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस विभाग के मुख्य अभियंता  दीपक कुमार अग्रवाल ने बताया कि समय के साथ कमजोर हुए कुछ टावरों को मजबूती प्रदान करने तथा बदलती मौसमीय परिस्थितियों और तेज हवाओं को ध्यान में रखते हुए एमपी ट्रांसको प्रबंधन द्वारा टावरों का टेक्निकल आडिट करवाने के बाद स्ट्रेंथनिंग एवं रेट्रोफिटिंग का निर्णय लिया गया था।  

झारखंड के नसबंदी डेटा पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, अन्य राज्यों को भी लगाई फटकार

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले पर साफ कहा कि राज्य सरकारें सिर्फ हवा में बातें कर रही हैं. धरातल पर कोई ठोस काम नहीं दिख रहा है. एमीकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने कोर्ट के सामने कई राज्यों की रिपोर्ट पेश की है. इस रिपोर्ट ने राज्यों की पोल खोलकर रख दी है. बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख राज्यों के प्रति बहुत सख्त नजर आया है. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लिया है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य के वकीलों को आगे बुलाया और दखल देने वालों को पीछे हटने को कहा. बेंच ने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि वकीलों को संभालना बहुत मुश्किल काम हो गया है. पहले सिस्टम को ठीक करना जरूरी है. सुनवाई के दौरान एमीकस क्यूरी ने चार मुख्य बिंदुओं पर अपना ध्यान केंद्रित रखा है. इसमें एबीसी सेंटर्स की कार्यप्रणाली और डॉग शेल्टर बनाने की बात शामिल है. संस्थानों से कुत्ते हटाने और हाईवे से मवेशी हटाने पर भी चर्चा हुई है. कोर्ट ने राज्यों के हलफनामों को देखने के बाद उन्हें ‘आई वॉश’ यानी आंखों में धूल झोंकने वाला बताया है. पढ़ें, आज की सुनवाई में क्या-क्या हुआ. असम और झारखंड के आंकड़ों में क्या है फर्जीवाड़ा? असम सरकार की रिपोर्ट ने कोर्ट को सबसे ज्यादा हैरान किया है. असम में डॉग बाइट यानी कुत्तों के काटने के आंकड़े बहुत डरावने हैं. साल 2024 में वहां कुत्तों के काटने के 1.66 लाख मामले सामने आए थे. साल 2025 के सिर्फ जनवरी महीने में ही 20900 मामले दर्ज हुए हैं. कोर्ट ने इन आंकड़ों को देखकर बहुत चिंता जाहिर की है. असम के पास कुत्तों के लिए पर्याप्त सेंटर भी मौजूद नहीं हैं. एमीकस क्यूरी ने बताया कि असम में 318 स्टेडियम हैं लेकिन कुत्तों के लिए व्यवस्था नहीं है. कोर्ट ने कहा कि असम के हलफनामे में मैनपावर की जानकारी ही गायब है. असम सरकार ने इसके लिए 6 महीने का समय मांगा है. वहीं, झारखंड के आंकड़ों ने तो कोर्ट को गुस्से से भर दिया. झारखंड सरकार ने दावा किया कि उन्होंने 1.89 लाख कुत्तों की नसबंदी की है. कोर्ट ने जब गहराई से देखा तो पता चला कि इसमें से 1.6 लाख नसबंदी सिर्फ 2 महीने में दिखाई गई है. कोर्ट ने इसे पूरी तरह फर्जी आंकड़ा करार दिया है. जजों ने पूछा कि एक गाड़ी में एक दिन में कितने कुत्ते पकड़े जा सकते हैं. झारखंड के इन आंकड़ों को कोर्ट ने पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है. शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों में कुत्तों का खतरा कैसे टलेगा? सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों और अस्पतालों जैसे संस्थानों से कुत्ते हटाने पर विशेष जोर दिया है. एमीकस क्यूरी ने बताया कि कर्नाटक ने संस्थानों में कुत्तों की पहचान तो की है लेकिन उन्हें हटाया नहीं गया है. कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक ने अब तक एक भी कुत्ता संस्थानों से बाहर नहीं निकाला है. जजों ने साफ किया कि हर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के पास बाउंड्री वॉल होनी चाहिए. सुरक्षा के लिहाज से यह बहुत जरूरी है. स्कूलों में बाउंड्री वॉल न होना बच्चों के लिए बड़ा खतरा है. कोर्ट ने राज्यों से पूछा कि उन्होंने इन संस्थानों से कुत्ते हटाने के लिए क्या किया है. हरियाणा जैसे राज्यों का हलफनामा इस मामले में पूरी तरह चुप है. कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य समय मांगते तो समझ आता. लेकिन गलत और अस्पष्ट जानकारी देना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. राज्यों को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि आप लोग सिर्फ हवा में महल बना रहे हैं. किसी भी राज्य ने डॉग बाइट के सही आंकड़े पेश नहीं किए हैं. केवल असम ने ही इस मामले में डेटा दिया है जो कि बहुत डराने वाला है. गोवा और केरल के टूरिज्म पर आवारा कुत्तों का क्या असर है? सुनवाई के दौरान गोवा और केरल के समुद्र तटों यानी बीचेस पर चर्चा हुई है. एमीकस क्यूरी ने बताया कि गोवा के बीचेस पर बहुत ज्यादा कुत्ते मौजूद हैं. वहां ये कुत्ते शैक और मछली के अवशेषों पर निर्भर रहते हैं. कोर्ट ने कहा कि इससे गोवा का टूरिज्म बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. हाल ही में एससीओआरए कॉन्फ्रेस के दौरान जजों ने खुद यह स्थिति देखी है. जजों का कहना है कि इन कुत्तों को वहां से हटाकर अच्छी जगह रखना होगा. इनके लिए कोई बहुत बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की जरूरत नहीं है. बस एक सुरक्षित जगह चाहिए जहां इनकी देखभाल हो सके. गुजरात सरकार ने बताया कि उन्होंने इसके लिए 60 करोड़ का बजट रखा है. अगले साल के लिए 75 करोड़ का बजट भी तय किया गया है. लेकिन कोर्ट गुजरात की रिपोर्ट से भी संतुष्ट नहीं दिखा है. वहां डॉग पाउंड्स के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है. कोर्ट ने राज्यों को चेतावनी दी है कि वे अगले हलफनामे में सही डेटा पेश करें. हाईवे पर आवारा पशुओं से होने वाले हादसों का जिम्मेदार कौन है? कोर्ट ने कुत्तों के साथ-साथ हाईवे पर आवारा मवेशियों के मुद्दे को भी उठाया है. एनएचएआई और राज्यों को इस पर मिलकर काम करने को कहा गया है. एमीकस क्यूरी ने हाईवे पर उन जगहों की पहचान करने को कहा है जहां मवेशी सबसे ज्यादा आते हैं. असम में राइनो यानी गैंडों के हाईवे पार करने की समस्या पर भी बात हुई है. इसके लिए वहां एलिवेटेड रोड बनाई गई है. कोर्ट ने कहा कि मवेशियों के हाईवे पर आने के कारणों का पता लगाना जरूरी है. आंध्र प्रदेश ने 14000 संस्थानों की पहचान की है जहां फेंसिंग का काम चल रहा है. लेकिन एमीकस क्यूरी का कहना है कि नसबंदी सेंटर्स की क्षमता का ऑडिट होना चाहिए. राज्यों को यह बताना होगा कि उनके पास मौजूद सेंटर पूरी तरह इस्तेमाल हो रहे हैं या नहीं. कोर्ट ने कहा कि पालतू कुत्ते भी कभी-कभी काट लेते हैं चाहे उन्हें वैक्सीन लगी हो. इसलिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए. कोर्ट अब इस मामले में राज्यों के खिलाफ सख्त आदेश पारित करने की तैयारी में है.