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करोड़ों की ठगी का खुलासा: इंदौर में लग्जरी कार रेंटल के नाम पर आरोपी गिरफ्तार, 39 कारें जब्त

 इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में लग्जरी कारों के नाम पर की जा रही करोड़ों रुपए की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है. अन्नपूर्णा थाना पुलिस ने आरोपी संजय कालरा को गिरफ्तार कर अब तक 39 महंगी और लग्जरी कारें बरामद की हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 6 करोड़ रुपए बताई जा रही है. आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं और जांच लगातार आगे बढ़ रही है. दरअसल, पिछले दिनों एक फरियादी की शिकायत पर आरोपी संजय कालरा के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में पुलिस ने मामला दर्ज किया था. जब आरोपी की गिरफ्तारी हुई तो उसके बाद कई लोग एक के बाद एक थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ आवेदन दिए. इसमें बताया गया कि संजय कालरा उनकी महंगी और लग्जरी कार किराए पर ले लेता था और हर महीने उन्हें मोटा मुनाफा देने का लालच भी देता था लेकिन कई महीनों तक आरोपी द्वारा कार का किराया तक नहीं दिया गया. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अलग-अलग स्थान से 24 लग्जरी कार बरामद कीं.  साथ ही पुलिस ने आरोपी को रिमांड में लिया जिसमें और भी खुलासे हुए. वहीं कालरा पर दो और धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है जिसके बाद पुलिस ने कुल 39 महंगी और लग्जरी कारें बरामद कर ली हैं. फिलहाल आरोपी की रिमांड अवधि और भी बढ़ाई जाएगी जिससे मामले का खुलासा हो सके. वहीं शिकायतकर्ताओं का थाने पहुंचना अब तक जारी है. आरोपी से जब्त की गई कारों की कीमत 6 करोड़ रुपए बताई जा रही है जो उसने किराए पर ली थीं और उन्हें कहीं और  गिरवी रख दिया था.

हरियाणा में जल्द लगेंगे स्मार्ट बिजली मीटर

हिसार. हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि प्रदेशभर में चरणबद्ध तरीके से सभी पुराने बिजली मीटर बदले जाएंगे और उनकी जगह आधुनिक स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। जैसे मोबाइल सेवाओं में प्रीपेड और पोस्टपेड विकल्प उपलब्ध होते हैं, उसी तर्ज पर स्मार्ट मीटर व्यवस्था भी लागू की जाएगी, जिससे उपभोक्ता अपनी सुविधा अनुसार प्रीपेड अथवा पोस्टपेड प्रणाली का चयन कर सकेंगे। इससे न केवल बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी पारदर्शी और सुविधाजनक सेवा मिलेगी। भूमिगत बिजली तारें बिछाने की प्रक्रिया गुरुग्राम और फरीदाबाद में प्रारंभ कर दी गई है। परिस्थितियों के अनुसार अन्य क्षेत्रों में भी अंडरग्राऊंड केबल डाली जाएंगी, जिससे खंभे गिरने या ऊपर से तार टूटने जैसी समस्याओं से निजात मिलेगी और बिजल आपूर्ति अधिक सुरक्षित एक विश्वसनीय बनेगी। विजने कहा कि लगभग पूरे प्रदेश में बिजली आपूति संतोषजनक रही है और केवल 6 अधीक्षण अभियंताओं से ही स्पष्टीकरण मांगा गया है। खेदड़ में लगेगी बिजली की नई यूनिट कोल आबंटन की मिली मंजूरी: विज ने कहा कि हिसार के खेदड़ में बिजली की नई यूनिट लगाई जाएगी। इसके लिए हमें कोल आबंटन की मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा बरसात के समय जिन सब स्टेशनों में पानी भर जाता है, उनको उंचा उठाया जाएगा। अनिल विज ने कहा कि कोई भी थर्मल लगाना है तो उसके लिए कोल की मंजूरी जरूरी होती है और यह हमें मिल चुकी है। ऐसे में अब ये प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी। उन्होंने कहा कि बरसात के दिनों में कई जगह ये सामने आया कि कई सब स्टेशनों में पानी भर गया और पूरे इलाके की बिजली काटनी पड़ी। ऐसे में हमने निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी सब स्टेशनों को उंचा उठाया जाए। बस ट्रैकिंग सिस्टम औरएप से मिलेगी यात्रियों को सुविधाः हरियाणा रोडवेज के आधुनिकीकरण को लेकर विज ने बताया कि परिवहन विभाग द्वारा लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए बसों में ट्रैकिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है जिससे बसों की आवाजाही की सटीक जानकारी मिल सकेगी। वहीं उन्होंने कहा राज्य में होने वाले नगर निकाय चुनावों में भाजपा एक बार फिर प्रचंड जीत दर्ज कर विजयी पताका फहराएगी। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर अनिल विज ने कहा कि मैं पार्टी का एक बहुत छोटा सा कार्यकर्ता हूं। प्रदेशाध्यक्ष कौन बनेगा, इसका निर्णय पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही करेगा।

पूर्व मंत्री मनजीत मन्ना को मारपीट मामले में कोर्ट ने किया भगौड़ा घोषित

चंडीगढ़. अकाली-भाजपा सरकार के दौरान विधायक व मंत्री रह चुके मनजीत सिंह मन्ना और उनके भाई रणजीत सिंह को भगौड़ा घोषित कर दिया गया है। यह फैसला 2015 के एक मारपीट मामले में अदालत में पेश न होने के कारण आया। पीड़ित पूरन सिंह ने राजनीतिक प्रभाव के बावजूद न्याय के लिए लंबी लड़ाई लड़ी, जिसके बाद अदालत ने यह सख्त कदम उठाया। जानकारी के मुताबिक, 18 सितंबर 2015 को अकाली सरकार के दौरान एक नॉन-कस्टोडियल केस में विवाद होने के बाद, उस समय के अकाली विधायक मनजीत सिंह मन्ना और उनके भाई रणजीत सिंह ने अपने समर्थकों संग अपनी ही पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता पूरन सिंह को बुरी तरह पीटा था। आरोप यह भी लगे थे कि उन्होंने पीड़ित पर तेजधार हथियारों से हमला किया था और उसकी पगड़ी उतार दी थी। इसके बाद विधायक और उसके साथियों के अत्याचार का शिकार हुए पूरन सिंह के बेटे ने इस घटना की जानकारी थाने में दी। उन्होंने मारपीट के बारे में मेडिकल जांच करवाने की मांग की, लेकिन उस समय पुलिस ने पूरन सिंह की एक नहीं सुनी। पीड़ित के बेटे ने इस बारे में पंजाब पुलिस के हेल्पलाइन नंबर 181 पर भी शिकायत दी, जिसका नंबर एएमआर-आरआर 814229 तारीख 18 सितंबर 2015 है। हरदीप सिंह ने पूरन सिंह को गुरु नानक देव अस्पताल अमृतसर में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज हुआ और डॉक्टर ने पूरन सिंह की मेडिकल रिपोर्ट बनाकर उसे थाना खलचिया भेज दिया। पीड़ित ने इस मामले की जानकारी पुलिस के बड़े अधिकारियों को दी, लेकिन आरोपियों के राजनीतिक अप्रोच के कारण पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। इसके बाद पीड़ित पूरन सिंह ने वकील वीके जसवाल के जरिए ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, बाबा बकाला साहिब की अदालत में 156 (3) सीआरपीसी के तहत शिकायत दी, जिसमें थाना खलचिया को आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश देने की गुहार लगाई गई, लेकिन जज ने इस शिकायत को केस में बदल दिया। इस केस में जज ने शिकायतकर्ता, मौके पर मौजूद गवाहों, मेडिकल रिपोर्ट के बारे में डॉक्टरों और पुलिस को दी गई शिकायत के बारे में सरकारी गवाहों समेत कुल 9 गवाहों के बयान दर्ज किए और वकील वीके जसवाल की दलीलों से सहमत हुए। इस बीच रंजीवपाल सिंह चीमा, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, बाबा बकाला साहिब ने 12 जुलाई 2019 को सभी आरोपियों को धारा 326,324,323,341,148,149 के तहत समन जारी किए और सभी आरोपियों को 8 अगस्त 2019 को अदालत में पेश होने का आदेश दिया। इस केस में मनजीत सिंह मन्ना के पर्सनल असिस्टेंट हरप्रीत सिंह और बलदेव सिंह के वकील मनिंदरजीत सिंह गहरी खुद पेश हुए, लेकिन बाकी आरोपियों ने केस को आज तक पेंडिंग रखा और कोर्ट के आदेशों को नजरअंदाज़ करते हुए कोर्ट में पेश नहीं हुए। इस पर जज रमनदीप कौर ज्यूडिशियल, मजिस्ट्रेट बाबा बकाला ने 29 जुलाई 2025 को आरोपी पूर्व विधायक मनजीत सिंह मन्ना, उसके भाई रणजीत सिंह और एक साथी हरजीत सिंह के लिए पुलिस को अरेस्ट वारंट जारी किए और उन्हें 12 जून 2025 को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया। लेकिन मनजीत सिंह मन्ना और उसका भाई हरजीत सिंह जानबूझकर कोर्ट में पेश नहीं हुए, जिस पर जज रमनदीप कौर ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट जूनियर डिवीज़न बाबा बकाला ने 31 जनवरी 2026 को उन्हें भगौड़ा घोषित कर दिया और इस बारे में थाना मुखी खिलचिया को भी सूचित कर दिया गया है। जज ने बाकी आरोपियों के खिलाफ गवाही के लिए 16 फरवरी की तारीख तय की है।

ढाई लाख को ढाई करोड़ बनाने वाले तांत्रिक की पिटाई

बिलासपुर. शख्स ने 2.50 लाख को 2.50 करोड़ बनाने का झांसा दिया। कथित तांत्रिक विजय कुमार राज (48 साल) ने बिल्हा के सबंलपुरी में कांग्रेस समर्थित सरपंच पति के घर अनुष्ठान का वीडियो बनाया। जिसमें पैसों की गड्डी के सामने नारियल, अगरबत्ती रख पूजा की। फिर अचानक ऊपर से पैसों की बारिश होने लगी। वीडियो देख झांसे में आकर कोरिया के 4 लोगों ने पैसा दे दिया। लेकिन जब उन्हें ठगी का एहसास हुआ, तो वे अपना पैसा वापस मांगने गए। तब तक तांत्रिक और उसके 4 साथी भाग गए। पीड़ितों ने उन्हें हाईवे में बीच सड़क रोककर पिटाई कर दी। मामला रतनपुर थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने दोनों पक्ष के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ठगी में कथित तांत्रिक संग 3 महिलाएं और 1 सरपंच पति भी शामिल हैं। आरोपी रिखीराम नवरंग बिल्हा के गांव संबलपुर से सरपंच पति है और कांग्रेस समर्थित है। यह तांत्रिक के अनुष्ठान में सहयोग देता था। विजय कुमार राज खुद को तांत्रिक बताता था। तीनों महिलाएं लोगों को झांसे में लाने का काम करती थी। लाखों रुपयों को करोड़ों में बदलने का दावा करती थी। इसी दावे के साथ 30 जनवरी को कोरिया निवासी 4 युवकों को बिल्हा बुलाया गया, जहां आरोपियों ने ‘पैसों की बारिश’ का नाटक रचा और उनसे ढाई लाख रुपए ठग लिए। तांत्रिक विजय कुमार राज (48) कोरबा जिले के दीपका का रहने वाला है। वह 31 जनवरी को ठगी के पैसों को लेकर जा रहा था। इसी दौरान रात करीब साढ़े 3 बजे रतनपुर में एक ढाबे के पास टॉयलेट के लिए उसने अपनी कार रोकी। तभी 2 कार वहां आकर रुकी। जिसमें से ठगी के शिकार हुए 4 पीड़ित युवक उतरे और फिल्मी स्टाइल में विजय के साथ मारपीट शुरू कर दी। जिसके बाद हमलावर उसकी कार, 3 मोबाइल और करीब 8 हजार रुपए कैश लूटकर भाग गए। इस घटना की सूचना मिलते ही SSP रजनेश सिंह के निर्देश पर विशेष टीम गठित की। टेक्निकल साक्ष्यों और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस की टीम आरोपियों की तलाश में अंबिकापुर और कोरिया पहुंची। जहां टीम ने 2 फरवरी को लूट मारपीट के चारों आरोपियों सरगुजा और कोरिया से गिरफ्तार कर बिलासपुर लाया। पुलिस ने आरोपियों के पास से लूटी गई कार, मोबाइल, कैश और वारदात में इस्तेमाल की गई क्रेटा-अर्टिगा कार को भी जब्त कर लिया है।

उधमपुर मुठभेड़: सुरक्षा बलों ने दो आतंकवादियों को किया समाप्त, इलाके में कड़ी सुरक्षा

 उधमपुर   जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के बंसंतगढ़ इलाके में सुरक्षा बलों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दो आतंकवादियों को मार गिराया। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, यह मुठभेड़ J&K पुलिस, भारतीय सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के संयुक्त ऑपरेशन के दौरान हुई। सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने जोफर रामनगर क्षेत्र में घेराबंदी और तलाशी अभियान (कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन) शुरू किया था। तलाशी के दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में दोनों आतंकवादी मारे गए। अधिकारियों ने बताया कि इलाके में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है, ताकि किसी अन्य आतंकी के छिपे होने की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सके। मुठभेड़ स्थल से हथियार और गोला-बारूद बरामद होने की भी सूचना है।  जम्मू और कश्मीर के उधमपुर जिले के अंतर्गत आने वाले जोफर इलाके में सुरक्षा बलों ने जैश-ए-मोहम्मद के दो सक्रिय कमांडरों को मुठभेड़ में मार गिराया गया है. सेना की व्हाइट नाइट कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की ज्‍वाइंट टीम ने सटीक इनपुट के आधार पर यह ऑपरेशन शुरू किया था. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह इलाका पिछले करीब एक महीने से उनके रडार पर था और यहां हो रही संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार उनकी निगाह बनी हुई थी. यह 15 दिसंबर के बाद उधमपुर में दूसरी मुठभेड़ थी, जब सौन गांव में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी। हालांकि, घने जंगल और अंधेरे का फायदा उठाकर आतंकवादी भागने में कामयाब रहे थे। जनवरी में कठुआ जिले में तीन और किश्तवाड़ के चतरू वन क्षेत्र में चार मुठभेड़ें हुईं जिनके परिणामस्वरूप कठुआ में जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तानी आतंकवादी उस्मान को ढेर किया गया और किश्तवाड़ में एक पैराट्रूपर शहीद हो गया। ये मुठभेड़ जम्मू क्षेत्र के ऊपरी इलाकों में छिपे आतंकवादियों को पकड़ने के लिए चलाए जा रहे गहन अभियानों के बीच हुईं। उस्मान उसी गिरोह का हिस्सा था जो उधमपुर जिले में फंसा हुआ है। वह पिछले कई वर्षों से उस क्षेत्र में सक्रिय था। 'ऑपरेशन केया' के तहत भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर इस अभियान को अंजाम दिया. मंगलवार को सुरक्षाबलों को आतंकियों की संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली, जिसके बाद एक व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया. जैसे ही सुरक्षाबल इलाके में पहुंचे, आतंकियों ने घने जंगलों में छिपकर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई. दो जैश-ए-मोहम्मद आतंकी मुठभेड़ में ढेर  सुरक्षाबलों ने आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए दो आतंकवादियों को मार गिराया, जो जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हुए थे. इस मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने हाई अलर्ट घोषित कर दिया और इलाके में एडिशनल फोर्स डिप्लॉइड की गई.  जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ऑपरेशन की निगरानी की. रात तक दोनों तरफ से गोलीबारी होती रही, लेकिन सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घेरने में आखिरकार कामयाबी हासिल की.  सुरक्षाबलों ने इस ऑपरेशन को 'ऑपरेशन केया' नाम दिया, जो खुफिया सूचना पर आधारित था. इलाके में ऑपरेशन के बाद भी पहाड़ी और जंगली क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि क्षेत्र में किसी भी तरह के खतरे से निपटा जा सके.

किसानों के लिए राहत का पैकेज: 1061 करोड़ सीधे खातों में, विष्णु सरकार की पहल

राजनांदगांव छतीसगढ़ की साय सरकार ने राजनांदगांव जिले के किसानों को बड़ा सौगात दी है। साय सरकार ने किसानों के खाते में 1061 करोड़ डाल दिए हैं। राजनांदगांव जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का यह सीजन किसानों के लिए आर्थिक राहत बनकर सामने आया है। इस बार धान विक्रय के बाद किसानों के खातों में 1061 करोड़ रुपए से अधिक की राशि पहुंची है। इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है, बल्कि स्थानीय बाजारों में भी बहार लौटने का संकेत है एक लाख से ज्यादा किसानों ने बेचा धान जिला सहकारी बैंक के अनुसार इस खरीफ सीजन में जिले के 1 लाख 24 हजार 95 किसानों ने धान खरीदी केंद्रों में अपनी फसल बेची। केंद्र सरकार से घोषित 2369 रुपए प्रति क्विंटल की दर से किसानों को कुल 1483 करोड़ 51 लाख रुपए का भुगतान किया गया। धान बिक्री की कुल राशि में से 42245.15 लाख रुपये की कटौती लिंकिंग के तहत की गई थी। कटौती के बाद किसानों के खातों में 1061 करोड़ की राशि जमा हुई। किसानों के खातों में राशि  पहुंच गई और अब बाजारों में भी रौनक लौट सकती है। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा जैसे क्षेत्रों से जुड़े व्यापारियों व्यापार में लाभ होने की उम्मीद है। व्यापारियों का कहना है कि धान खरीदी के बाद बाजार में उछाल आता है, इसका बाजार में असर भी दिखने लगा है। विवाह से जुड़े सामग्री की बिक्री शुरू हो गई है तो वहीं ट्रैक्टर सहित मोटर साइकिल, कार की बुकिंग हो रही है।  लिहाजा साय सरकार की सौगात से किसानों की स्थिति में सुधार आएगा । 

नशे के खिलाफ सरकार का बड़ा एक्शन: 10 जिलों में एंटी नार्कोटिक्स टीम, कैबिनेट ने लिए कई अहम फैसले

रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णदेव साय की अध्यक्षता में बुधवार 4 फरवरी को मंत्रिमंडल की बैठक की गई. कैबिनेट सदस्यों के बीच कई विषयों पर चर्चा हुई, जिसके बाद अहम मुद्दों पर मुहर लगाई गई. इस बैठक में नशे पर शिकंजा कसने 10 जिलों में एंटी नार्कोटिक्स टीम के गठन किए जाने का फैसला लिया गया है. साथ ही पुलिस मुख्यालय के विशेष शाखा स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) का गठन होगा, जिसके लिए 44 नए पद स्वीकृत किए गए हैं. साय कैबिनेट की बैठक में लिए गए कई महत्वपूर्ण निर्णय 1. मादक पदार्थाें की रोकथाम की दिशा में बड़ा निर्णय लेते हुए मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के 10 जिलों में जिला स्तरीय एन्टी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स के गठन हेतु वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुख्य बजट में प्रावधानित 100 नवीन पदों की स्वीकृति प्रदान की गई. इसमें रायपुर, महासमुंद, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर, सरगुजा, कबीरधाम, जशपुर, राजनांदगांव एवं कोरबा जिला शामिल हैं. 2. मंत्रिपरिषद की बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुख्य बजट में पुलिस मुख्यालय के विशेष शाखा अंतर्गत एस.ओ.जी. (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) के गठन के लिए प्रावधानित 44 नवीन पदों की स्वीकृति प्रदान की गई है. एसओजी का काम किसी भी बड़ी या अचानक हुई घटना में तुरंत मौके पर पहुँचकर हालात को संभालना और आतंकी हमला या गंभीर खतरे को जल्दी खत्म करना होता है. एसओजी एक खास तरह की प्रशिक्षित टीम होती है, जिसे ऐसे खतरनाक कामों के लिए तैयार किया जाता है. 3. मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य के विभिन्न एयरपोर्ट एवं हवाई पट्टियों में उड़ान प्रशिक्षण संगठन (एफटीओ) की स्थापना का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया तथा इसके संचालन के दिशा-निर्देशों का अनुमोदन किया गया. जिसके तहत छत्तीसगढ़ में पायलट प्रशिक्षण की सुविधा के लिए राज्य में उड़ान प्रशिक्षण संगठन की स्थापना की जाएगी. विमानन क्षेत्र में बढ़ती मांग को देखते हुए और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए यह संस्थान उपयोगी होगा. इससे एयरक्राफ्ट रिसाइकिलिंग, हेलीकॉप्टर बंकिंग तथा एयरो स्पोर्ट्स जैसी सुविधाएं विकसित होगी. फ्लाइट ट्रेनिग ऑर्गनाइजेशन की स्थापना निजी सहभागिता से किया जाएगा. 4. मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-26 का अनुमोदन किया गया. इस नीति से स्टार्टअप ईको सिस्टम के साथ-साथ इन्क्यूबेटर्स एवं अन्य हितधारकों का विकास होगा. छत्तीसगढ़ को देश में एक प्रमुख नवाचार केन्द्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा. भारत सरकार के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग द्वारा जारी स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग में सुधार होने से राज्य में निवेश का आकर्षण बढ़ेगा. 5. मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल और रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा बनाई गई और पूरी हो चुकी 35 आवासीय कॉलोनियों को नगर निगम और नगर पालिकाओं को सौंपने का निर्णय लिया गया है. इन कॉलोनियों में खुले भू-खंड, उद्यान और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं शामिल होंगी. हालांकि, आवासीय, व्यावसायिक और अर्द्धसार्वजनिक बिक्री योग्य संपत्तियां इसमें शामिल नहीं होंगी. अभी इन कॉलोनियों का हस्तांतरण नहीं होने के कारण वहां रहने वाले लोगों को कई मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. कॉलोनियों के रखरखाव के लिए निवासियों को दोहरा खर्च उठाना पड़ रहा है. एक ओर वे नगर निगम को संपत्ति कर दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गृह निर्माण मंडल को भी रखरखाव शुल्क देना पड़ता है. इन कॉलोनियों के हस्तांतरण से नगरीय निकायों द्वारा यहां पानी, बिजली, सड़क, सफाई जैसी सुविधाएं दी जा सकेंगी और कॉलोनीवासियों को अतिरिक्त रखरखाव शुल्क से राहत मिलेगी. 6. मंत्रिपरिषद द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में शासकीय विभागों तथा निगम मंडल के कार्यालयों के लिए नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण द्वारा एक वृहद बहुमंजिला भवन बनाने का निर्णय लिया गया है और यहां विभागों को स्पेस आबंटित किया जाएगा, ताकि भूमि का पूर्ण उपयोग किया जा सके. 7. मंत्रिपरिषद द्वारा सिरपुर एवं अरपा क्षेत्र में सुनियोजित विकास और विकास कार्यों को गति देने के लिए संबंधित क्षेत्र में शासकीय भूमि के आबंटन का अधिकार संबंधित जिले के कलेक्टर को प्रदान किया गया है. गौरतलब है कि सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण एवं अरपा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का उद्देश्य संबंधित नदी तटीय क्षेत्रों का योजनाबद्ध और समग्र विकास करना है. इसके लिए मास्टर प्लान के क्रियान्वयन, भूमि नियोजन एवं नगर विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना आवश्यक है. विकास कार्यों को गति देने के लिए शासकीय भूमि का आबंटन जरूरी था. वर्तमान में दोनों प्राधिकरणों की वित्तीय स्थिति को देखते हुए शासकीय भूमि का आबंटन रु. 1/- प्रीमियम एवं भू-भाटक पर किए जाने का निर्णय लिया गया है. साथ ही, भूमि आबंटन के अधिकार संबंधित जिला कलेक्टरों को दिया गया है. 8. मंत्रिपरिषद ने ‘‘छत्तीसगढ़ क्लाउड फर्स्ट नीति‘‘ को प्रदेश में लागू किए जाने की स्वीकृति प्रदान की है. छत्तीसगढ़ क्लाउड फर्स्ट नीति का प्रस्ताव छत्तीसगढ़ शासन के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया. छत्तीसगढ़ क्लाउड फर्स्ट नीति के अनुसार राज्य शासन के सभी विभाग, उपक्रम एवं स्वायत्त संस्थाएं केवल भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा अनुमोदित क्लाउड सेवा प्रदाताओं या भारत में स्थित सुरक्षित डेटा सेंटर एवं डिजास्टर रिकवरी सेंटर से ही क्लाउड सेवाएं लेंगी. किसी विशेष या असाधारण आवश्यकता के लिए राज्य क्लाउड परिषद से अनुमति लेना अनिवार्य होगा. नीति के तहत कम प्राथमिकता वाले एप्लिकेशन एवं आर्काइव डेटा का क्लाउड माइग्रेशन वर्ष 2027-28 तक तथा उच्च प्राथमिकता सेवाओं का माइग्रेशन 2029-30 तक किया जाएगा. सभी नए एप्लिकेशन क्लाउड-नेटिव तकनीक पर विकसित किए जाएंगे. कैबिनेट ने इस नीति में भविष्य में आवश्यक संशोधन करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को अधिकृत किया है. इस नीति से आईटी ढांचे में लागत में कमी, संचालन में दक्षता, बेहतर साइबर सुरक्षा, आपदा के समय सेवाओं की निरंतरता तथा नागरिक सेवाओं की 24×7 उपलब्धता सुनिश्चित होगी. साथ ही नागरिकों के डेटा की सुरक्षा, पारदर्शिता और ट्रैकिंग व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी. 9. मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में डिजिटल अवसंरचना को विस्तार देने के लिए मोबाइल टावर योजना का अनुमोदन किया गया है. भौगोलिक विषमता और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी सीमित होने से शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन बाधित हो रहा है. इस योजना से मोबाइल टावर स्थापना हेतु चयनित सेवा प्रदाताओं को अनुमति और प्रशासनिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध किया जाएगा. मोबाइल टावर योजना के अंतर्गत चयनित मोबाइल नेटवर्क विहीन बसाहटों … Read more

सभी पात्र आवंटियों तक ओटीएस योजना की जानकारी पहुंचे, मुख्यमंत्री ने व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए

लंबित आवास मामलों के निस्तारण हेतु ‘एकमुश्त समाधान योजना’ लागू करें: मुख्यमंत्री सभी पात्र आवंटियों तक ओटीएस योजना की जानकारी पहुंचे, मुख्यमंत्री ने व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए लंबित देयों का मानवीय व न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री डिफॉल्टर मामलों के निस्तारण में गति लाएं, प्रक्रिया को पूरी तरह यूजर-फ्रेंडली बनाएं: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की बैठक में लंबित आवासीय और व्यावसायिक आवंटनों के त्वरित निस्तारण के लिए एक नई ‘एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस-2026)’ लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्षों से लंबित देयों और विवादित मामलों के कारण न केवल योजनाओं की प्रगति प्रभावित होती है, बल्कि आम नागरिकों को भी अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था लागू करना है, जिसमें समाधान तेज, पारदर्शी और सभी के लिए व्यावहारिक हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की किसी भी योजना में लंबित भुगतान या विवादित आवंटन राज्य की विकास गति को धीमा करते हैं। इसलिए आवास विभाग को ऐसी समाधान-प्रधान व्यवस्था लागू करनी चाहिए, जिससे विभाग को आवश्यक राजस्व प्राप्त हो और आवंटियों को भी राहत मिले। उन्होंने कहा कि यह योजना जन-केंद्रित होनी चाहिए, जिसमें हर वास्तविक आवंटी को स्पष्ट और सरल विकल्प उपलब्ध हों। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2020 में लागू की गई ओटीएस-2020 योजना से बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण हुआ था, लेकिन कोविड-19 के कारण कई आवंटी अंतिम भुगतान नहीं कर पाए। विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों में प्रदेश के विभिन्न आवासीय और व्यावसायिक परिसरों में मौजूद ऐसे सभी डिफॉल्ट मामलों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओटीएस-2026 योजना को अधिक व्यावहारिक और लाभकारी स्वरूप दिया जाए। एकमुश्त भुगतान करने वाले आवंटियों को देयों पर उपयुक्त छूट दी जाए। साथ ही, किस्तों में भुगतान की सुविधा हो। उन्होंने कहा कि योजना के प्रावधानों को अंतिम रूप देते समय यह ध्यान रहे कि योजना के मूल में आम आदमी को राहत देने का ही भाव निहित हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि विभाग द्वारा प्रत्येक आवेदन का निस्तारण निर्धारित समयसीमा में कर दिया जाए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि नई योजना लागू होने से हजारों आवंटियों को राहत मिलेगी और विभाग को राजस्व भी प्राप्त होगा।  मुख्यमंत्री ने विभाग को निर्देश दिया कि योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार की विशेष व्यवस्था की जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे अवगत हो सकें। उन्होंने कहा, 'एकमुश्त समाधान योजना' के बारे में आम जनता के बीच सक्रिय रूप से जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि सभी पात्र लोग इसका लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि योजना की संपूर्ण प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल होनी चाहिए।

किराए पर ली कारें गिरवी रखी, फर्जी एग्रीमेंट बनाकर विभागों को चकमा दिया—पुलिस ने 17 कारें जब्त की

ग्वालियर  ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने विभागों में लग्जरी वाहनों के अटैचमेंट के नाम पर फर्जी एग्रीमेंट कर कारें हायर करके हड़पने वाले 23 वर्षीय जालसाज को गिरफ्तार किया है। आरोपी बीए पास है और दो साल पहले तक टिफिन सेंटर चलाता था। इसके बाद उसने विभागों में गाड़ियों का अटैचमेंट कराने के नाम पर ठगी शुरू की। आरोपी अभय भदौरिया खुद को अवंटेक्स इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड में मैनेजर बताकर लोगों पर इंप्रेशन डालता था। फर्जी दस्तावेज बनाकर कंपनियों और विभागों के नाम पर लग्जरी कार हायर करने के बाद वह इन्हें दो से पांच लाख रुपए में गिरवी रख देता था। इसके लिए वह फेक मालिक बनाकर दस्तावेज तैयार करता था। एक 7 सीटर कार का वह 85 हजार रुपए तक किराया देता था। इस तरह अब तक उसने 50 से अधिक कारें ठगने की कोशिश की। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर 17 कारें बरामद की हैं। कारों का किराया नहीं दिया तो पता चली ठगी शहर के शताब्दीपुरम फेस-1 निवासी भास्कर शर्मा ने सोमवार क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी। भास्कर अपने ट्रेवल एजेंसी श्री मधुवन जी ट्रेवल्स के माध्यम से अन्य लोगों को वाहन सेवाएं देते हैं। उनके अनुसार, अभय भदौरिया ने खुद को अवंटेक्स इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड में मैनेजर बताकर उन्हें 7 सीटर कार के बदले 85 हजार रुपए और 5 सीटर कार के बदले 50 हजार रुपए देने का लालच दिया। भास्कर ने आरोपी को 19 कारें किराए पर दी, लेकिन अभय ने कारें सर्विस पर नहीं भेजीं और किराया भी नहीं दिया। जब भास्कर ने कंपनी में जाकर सत्यापित किया, तो पता चला कि अभय भदौरिया नाम का कोई भी व्यक्ति वहां काम नहीं करता है। बाद में भास्कर को पता हुआ कि अभय ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनकी कारें अन्य व्यक्तियों को गिरवी रखवा दी हैं। काफी दबाव डालने पर आरोपी ने कुछ कारें वापस की। इसी तरह रघुवीर रजक ने भी 20 कारें ठगे जाने की शिकायत की। पुलिस ने 1.5 करोड़ की कारें बरामद की है। पुलिस ने 1.5 करोड़ की कारें बरामद की है। 24 घंटे में गिरफ्तारी, 17 कारें बरामद मामला दर्ज होने के बाद क्राइम ब्रांच ने आरोपी की लोकेशन और मोबाइल ट्रैकिंग के आधार पर उसे गिरफ्तार किया। पुलिस मंगलवार को घटना का खुलासा किया। पहले आरोपी ने अपनी कहानी जारी रखी, लेकिन ट्रेवल एजेंसी के संचालक को सामने खड़े करने पर वह चुप हो गया। पुलिस ने जीपीएस ट्रैकिंग के माध्यम से 17 कारें बरामद की, जिनकी कीमत लगभग 1.5 करोड़ रुपए बताई गई है। आरोपी ने कुल 39 कारें ठगी का दावा किया है, पुलिस को संदेह है कि 50 से अधिक कारों से उसने ठगी की है।     भास्कर शर्मा की कारें: मारूति अर्टिगा, टाटा अल्ट्रोज, मारूति सियाज, टोयोटा अर्बन क्रूजर, महिंद्रा बोलेरो, मारूति स्विफ्ट, महिंद्रा स्कॉर्पियो – कुल 8 वाहन     रघुवीर रजक की कारें: मारूति स्विफ्ट, रेनॉल्ट ट्रायवर, मारूति अर्टिगा, महिंद्रा बोलेरो – कुल 7 वाहन     कुल बरामद वाहन: 15, कीमत लगभग 1.5 करोड़ रुपए कार का मालिक बताने वालों पर भी होगी कार्रवाई एसएसपी ग्वालियर धर्मवीर सिंह ने बताया कि जिन लोगों ने कारें गिरवी रखीं, वे भी एक तरह से पीड़ित हैं। उनके साथ भी ठगी हुई है। कुछ लोगों ने खुद को कार का मालिक बताया था। उनके दस्तावेज जुटाकर उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।

सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की मौत, 15 साल पहले पिता की हत्या का इतिहास दोहराया गया?

गद्दाफी लीबिया के पूर्व शासक मुअम्मर गद्दाफी का बेटा सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी, मंगलवार को एक हमले में मारा गया। समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने उनकी टीम के एक बयान का हवाला देते हुए बताया कि मुअम्मर गद्दाफी के बेटे की मंगलवार को पश्चिमी लीबिया में हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक सैफ अल-इस्लाम के घर में घुस आए चार अज्ञात बंदूकधारियों के साथ उनकी सीधी मुठभेड़ हुई और इस दौरान उनकी मौत हो गई। गद्दाफी के करीबी नेता अब्दुल्ला ओथमान अब्दुर्रहीम ने फेसबुक पर इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि चार नकाबपोश बंदूकधारियों ने दोपहर में जिंटान शहर में गद्दाफी के आवास पर धावा बोल दिया। हमलावरों ने कथित तौर पर मुठभेड़ से पहले सीसीटीवी कैमरों को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे हमलावरों की पहचान पता नहीं चल पाई। वहीं सैफ अल-इस्लाम की मौके पर ही मौत हो गई। घटना को लेकर ज्यादा जानकारी फिलहाल सामने नहीं आ पाई है। सैफ की टीम ने लीबियाई कोर्ट और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से हमले की जांच करने, अपराधियों की पहचान करने और इस ऑपरेशन की योजना बनाने वालों को जवाबदेह ठहराने की अपील की है। कौन थे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी? लीबिया में 2011 में नाटो समर्थित विद्रोह के बाद भी सैफ यहां एक अहम नेता बने रहे। बता दें कि इस विद्रोह में उनके पिता मुअम्मर गद्दाफी मारे गए थे। गद्दाफी ने चार दशकों से अधिक समय तक लीबिया में राज किया था। सैफ ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई पूरी की थी और उन्हें कभी कई सरकारों द्वारा लीबिया का स्वीकार्य, पश्चिमी-अनुकूल चेहरा माना जाता था। कोई आधिकारिक पद ना होने के बावजूद, सैफ अल-इस्लाम को एक समय मेरा तेल समृद्ध उत्तरी अफ्रीकी देश में अपने पिता मुअम्मर गद्दाफी के बाद सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माना जाता था।रिपोर्ट्स के मुताबिक सैफ अल-इस्लाम ने कई उच्च-स्तरीय, संवेदनशील राजनयिक मिशनों में मध्यस्थता की। उन्होंने पश्चिम के साथ संबंध बनाए और खुद को एक सुधारक के रूप में पेश किया। साथ ही सैफ ने संविधान और मानवाधिकारों के सम्मान का भी आह्वान किया। हालांकि जब 2011 में गद्दाफी के लंबे शासन के खिलाफ विद्रोह हुआ, तो सैफ अल-इस्लाम ने अपनी दोस्ती के बजाय परिवार और कबीले की वफादारी को चुना और विद्रोहियों पर क्रूर कार्रवाई का मास्टरमाइंड बन गया। 2015 में, त्रिपोली की एक अदालत ने सैफ अल-इस्लाम को युद्ध अपराधों के लिए फायरिंग स्क्वाड द्वारा मौत की सजा सुनाई। इसके बाद 2017 में एक माफी कानून के तहत मिलिशिया द्वारा रिहा किए जाने के बाद से, सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी अंडरग्राउंड होकर जिंटान में रह रहे थे।