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इंदौर में नर्मदा लाइन का अड़चन: सड़क के बीच बिछी लाइन से एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने में होगी परेशानी

इंदौर  इंदौर में छह किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की कवायद की जा रही है, लेकिन उसे बनाना इतना आसान भी नहीं होगा, क्योंकि जब बीआरटीएस कॉरिडोर पंद्रह साल पहले बनाया गया था, तब नर्मदा लाइन सड़क के बीच वाले हिस्से में डाली गई थी। इसके अलावा हर चौराहे पर सीवरेज के बड़े पाइप भी क्रॉस हुए हैं। यदि एबी रोड पर एलिवेटेड कॉरिडोर बनता है तो जगह-जगह लाइनों को शिफ्ट करना होगा। इसमें काफी समय लगेगा।  बीआरटीएस निर्माण की समयसीमा दो साल तय की गई थी, लेकिन उसके बनने में पांच साल से अधिक का समय लगा, क्योंकि एबी रोड पर ट्रैफिक का दबाव काफी रहता है। ट्रैफिक को दूसरे रूटों पर भी ज्यादा डायवर्ट नहीं किया जा सकता है। यह परेशानी एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने में भी आएगी। व्हाइट चर्च चौराहे पर पथरीली जमीन एलिवेटेड कॉरिडोर के कॉलम बनाने के लिए जमीन में गहरी खुदाई करना होगी। इसमें सबसे ज्यादा समय गीता भवन से जीपीओ के बीच लगेगा। यहां पथरीला हिस्सा है। सीवरेज लाइन बिछाने के लिए इस हिस्से में चट्टानें तोड़ने के लिए विस्फोट का इस्तेमाल किया गया था। यहां लाइन शिफ्ट करना पड़ी तो उसके लिए भी अलग से खुदाई करना होगी। लंबी दूरी का ट्रैफिक और होगा कम एलआईजी से भंवरकुआं या राजीव गांधी चौराहे तक शहरवासियों को जाना हो तो वे अब रिंग रोड का उपयोग करने लगे हैं, क्योंकि खजराना चौराहा, बंगाली चौराहा, वर्ल्ड कप चौराहा, पालदा चौराहा पर ब्रिज बनने से अब रिंग रोड पर समय कम लगता है। इस मार्ग पर मुसाखेड़ी और आईटी चौराहे पर भी ब्रिज बन रहे हैं। इसके बाद ट्रैफिक और आसान हो जाएगा। एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर याचिका लगाने वाले अतुल शेठ का कहना है कि रिंग रोड के कारण वैसे ही एबी रोड के ट्रैफिक का दबाव कम हो जाएगा। इस कारण एलिवेटेड कॉरिडोर ज्यादा उपयोगी साबित नहीं होगा। पहले जब इसे लेकर सर्वे हुआ था, तब ट्रैफिक चार प्रतिशत आया था।

इंदौर नगर निगम की पहल: 72 घंटे में मृत्यु प्रमाण पत्र अब होगा ईमेल पर उपलब्ध

इंदौर  इंदौर नगर निगम ने नागरिकों को बड़ी राहत देने वाली नई व्यवस्था लागू की है। अब घर पर होने वाली मृत्यु के मामलों में मृत व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र 72 घंटे के भीतर परिजनों के ईमेल पर भेजा जाएगा। इसके लिए नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगाने या किसी तरह का आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी।  पहले घर भेजा जाता था प्रमाण पत्र महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि पहले नगर निगम की ओर से मृत्यु होने पर 72 घंटे के भीतर शोक संदेश के साथ मृत्यु प्रमाण पत्र मृतक के घर भिजवाया जाता था। बाद में जन्म–मृत्यु के राष्ट्रीय पोर्टल से नगर निगम पोर्टल के जुड़ने के कारण यह व्यवस्था बंद हो गई थी। संशोधित रूप में फिर लागू हुई व्यवस्था महापौर ने बताया कि अब राष्ट्रीय पोर्टल से जुड़े रहते हुए इस व्यवस्था को संशोधित स्वरूप में फिर से लागू किया गया है। मुक्तिधाम पर अंतिम संस्कार के समय यदि यह जानकारी दी जाती है कि संबंधित व्यक्ति की मृत्यु घर पर हुई है, तो परिजनों द्वारा दिए गए ईमेल एड्रेस पर 72 घंटे के भीतर मृत्यु प्रमाण पत्र भेज दिया जाएगा। नगर निगम आने की जरूरत नहीं इस नई व्यवस्था के तहत मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए परिजनों को नगर निगम कार्यालय आने, आवेदन करने या किसी तरह का शुल्क जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। नगर निगम ने ईमेल के माध्यम से प्रमाण पत्र भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अस्पताल में मृत्यु पर लागू नहीं होगी सुविधा प्रश्न के उत्तर में महापौर ने स्पष्ट किया कि अस्पताल में होने वाली मृत्यु के मामलों में यह सुविधा फिलहाल लागू नहीं हो पाएगी। इसका कारण यह है कि अस्पतालों से मृत्यु की जानकारी नगर निगम को विलंब से प्राप्त होती है, जिससे 72 घंटे के भीतर प्रमाण पत्र जारी करना संभव नहीं हो पाता। जन्म प्रमाण पत्र की व्यवस्था पहले से लागू जन्म प्रमाण पत्र को लेकर उन्होंने बताया कि जिन अस्पतालों में प्रसूति होती है, वहां से जन्म प्रमाण पत्र देने की व्यवस्था पहले से ही लागू है। इसे तत्काल व्यवस्था में परिवर्तित करना अभी संभव नहीं है। हर साल जारी होते हैं हजारों मृत्यु प्रमाण पत्र इंदौर नगर निगम द्वारा हर वर्ष औसतन 14 हजार मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं। वर्ष 2026 में अब तक 1084 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। वर्ष 2025 में 15314, 2024 में 14119, 2023 में 13461 और 2022 में 14237 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए थे।

जबलपुर में रेल यात्रियों को मिलेगा बड़ा तोहफा, पैसेंजर ट्रेनों में 20 कोच होंगे शामिल

जबलपुर   पैसेंजर ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को जल्द ही बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। रेलवे बोर्ड ने पैसेंजर ट्रेनों की लंबाई बढ़ाने पर सहमति दिए जाने के बाद रेल प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। बोर्ड ने सभी रेल जीनों से उन पैसेंजर ट्रेनों की जानकारी मांगी है, जिनमें अतिरिक्त कोच जोड़े जा सकते है। वर्तमान में अधिकांश पैसेंजर ट्रेनें 10 से 12 कोच के साथ संचालित हो रही है। योजना के तहत अब इन ट्रेनों में 12 से 20 कोच तक लगाए जाने की तैयारी है। इसके साथ ही मेमू और डेमू ट्रेनों में भी कोचों की संख्या बढ़ाकर 8 से 12 करने का प्रस्ताव है।  पमरे जोन को मिलेगा विशेष लाभ सूत्रों के अनुसार रेलवे बोर्ड के निर्देश के बाद पश्चिम मध्य रेलवे (पमरे) जोन में संचालित करीब 40 पैसेंजर ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़े जाएंगे। अभी सीमित कोच होने के कारण सामान्य श्रेणी के यात्रियों को भारी परेशानी होती है और कई बार उन्हें खड़े होकर यात्रा करना पड़ती है। कोचों की संख्या बढ़ने से ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ कम होगी, वहीं स्टेशनों पर भी भीड़भाड़ नियंत्रित होने की उम्मीद है। जबलपुर मंडल में 10 जोड़ी मेमू ट्रेनों का संचालन जबलपुर रेल मंडल में वर्तमान में 10 जोड़ी मेमू ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से जबलपुर-नैनपुर पैसेंजर, रीवा-जबलपुर पैसेंजर, जबलपुर-रीवा पैसेंजर, कटनी-चौपन पैसेंजर, कटनी-भुसावल पैसेंजर, बीना-कटनी पैसेंजर सहित अन्य ट्रेनें शामिल है। सीमित कोच होने के कारण कई बार 100 से 150 यात्री मजबूरी में भीड़भाड़ के बीच यात्रा करते है। छुट्टियों और त्योहारों के दौरान मेमू और डेमू ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ देखने को मिलती है। बड़ी संख्या में एमएसटी धारक यात्री यात्रा करते है, जिससे कई बार ट्रेन में चढ़ने तक में कठिनाई होती है। रीवा-रानी कमलापति के बीच स्पेशल ट्रेन रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए रीवा रानी कमलापति के बीच होली स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन दोनों दिशाओं में एक एक ट्रिप संचालित की जाएगी। यह ट्रेन दोनों दिशाओं में सतना, मैहर, कटनी मुड़वारा, दमोह, सागर, बीना एवं विदिशा स्टेशनों पर रुकेगी। रीवा-रानी कमलापति सुपरफास्ट होली स्पेशल ट्रेन 28 फरवरी को रीवा से दोपहर 12:30 बजे प्रस्थान करेगी। इसी तरह रानी कमलापति-रीवा सुपरफास्ट होली स्पेशल ट्रेन रानी कमलापति से रात 22:15 बजे प्रस्थान करेगी।

छत्तीसगढ़ की पंचायतों में हाई-स्पीड इंटरनेट का विस्तार, केंद्र से 3,500 करोड़ के प्रस्ताव की मांग

रायपुर  केंद्र सरकार की भारत नेट योजना के तीसरे चरण (फेज-थ्री) में प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों में आप्टिकल फाइबर केबल पहुंचाई जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की सुविधा लोगों को मिलेगी। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को 3,500 करोड़ का प्रस्ताव भेजा है। इसके साथ प्रदेश में पांच हजार नए मोबाइल टावर भी लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। 11,693 ग्राम पंचायतें हैं त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था के तहत 11,693 ग्राम पंचायतें हैं। वर्ष 2024-25 की स्थिति में पहले और दूसरे चरण को मिलाकर भारत नेट परियोजना के तहत राज्य की 9,804 ग्राम पंचायतों को आप्टिकल फाइबर केबल से जोड़ा जा चुका है। इसके रखरखाव एवं संचालन के लिए 66 करोड़ की पूल निधि के गठन का भी प्रविधान किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में वाई.फाई के माध्यम से हाट-स्पाट स्थापित कर प्रदेश भर में इंटरनेट की पहुंच बढ़ाई जाएगी। इसके लिए प्रथम चरण में 1,000 ग्राम पंचायतों में वाईफाई की सुविधा के लिए पीएमवाणी परियोजना अंतर्गत 37 करोड़ का प्रविधान किया गया है। राज्य सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा उपयोग किए जा रहे ई. परिसंपत्ति, मोबाइल एप और वेबसाइट की साइबर सुरक्षा के लिए आवश्यक जांच एवं सर्टिफिकेशन की व्यवस्था की जाएगी। बस्तर के माओवाद प्रभावित 735 गांवों में पहुंचाना है कनेक्टिविटी बस्तर संभाग में कुल 3,791 एलडब्ल्यूई प्रभावित क्षेत्रों में से 3,056 स्थानों पर मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध है, जबकि 735 ग्राम अब भी इससे वंचित हैं। शेष इलाकों में नेटवर्क विस्तार के लिए 481 नए मोबाइल टावरों की आवश्यकता चिन्हित की गई है, जिन्हें स्वीकृति मिल चुकी है। केंद्र सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी है। योजना के अनुसार दिसंबर 2026 तक सभी स्वीकृत मोबाइल टावर स्थापित कर दिए जाएंगे। वर्तमान में टावर स्थलों का सर्वे कार्य प्रगति पर है। इन टावरों की स्थापना और संचालन का कार्य भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) द्वारा किया जा सकता है। फेज टू की कंपनी के साथ कानूनी विवाद जानकारी के मुताबिक पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा चिप्स और टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के बीच 3,056 करोड़ रुपये का अनुबंध हुआ था, जिसका लक्ष्य 6,000 गांवों तक ब्राडबैंड पहुंचाना था। हालांकि, जमीनी स्तर पर काम न होने के कारण मई 2025 में टाटा प्रोजेक्ट्स ने अनुबंध समाप्त कर दिया गया था। कंपनी ने खुदाई में आने वाली बाधाओं और प्रशासनिक दिक्कतों को इसका मुख्य कारण बताया था। यह मामला अब न्यायालय में विचाराधीन है। इस कानूनी विवाद और काम की धीमी गति के कारण फेज-दो का काम भी बाधित हुआ। अधिकारियों का क्या कहना अंकित आनंद, सचिव, इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी का कहना है कि राज्य के हर गांव तक मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए राज्य सरकार काम कर रही है। भारत नेट योजना के तीसरे चरण में हम सभी ग्राम पंचायतों को कवर कर सकेंगे। इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।

सीहोर के लिए खुशखबरी: रुद्राक्ष महोत्सव से पहले दो एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टॉपेज मिला

 सीहोर  रुद्राक्ष महोत्सव के आयोजन से पहले सीहोरवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। सांसद आलोक शर्मा के प्रयासों से सीहोर रेलवे स्टेशन पर दो महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टॉपेज स्वीकृत हुआ है। इससे धार्मिक, सामाजिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहरों तक सीधी रेल यात्रा संभव हो सकेगी।  सीहोर शहर के लिए यह निर्णय किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है। कुबेरेश्वर धाम में 14 फरवरी से 20 फरवरी तक आयोजित होने वाले रुद्राक्ष महोत्सव से पहले रेलवे द्वारा दो प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों का सीहोर स्टेशन पर स्टॉपेज स्वीकृत किया गया है। इस फैसले से देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी। अब श्रद्धालु बिना भोपाल या अन्य बड़े स्टेशनों पर भटके सीधे सीहोर उतर सकेंगे। सांसद आलोक शर्मा के प्रयास रंग लाए भोपाल-सीहोर सांसद आलोक शर्मा द्वारा लंबे समय से उठाई जा रही सीहोर की रेल कनेक्टिविटी की मांग आखिरकार पूरी हो गई। सांसद शर्मा ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से व्यक्तिगत मुलाकात कर सीहोर को बड़े शहरों से जोड़ने का आग्रह किया था। रेल मंत्री ने इस मांग को जनहित में स्वीकार करते हुए दो महत्वपूर्ण ट्रेनों के स्टॉपेज को मंजूरी दी। सांसद आलोक शर्मा ने दोनों एक्सप्रेस ट्रेनों के सीहोर रेलवे स्टेशन पर स्टापेज के संबंध में सोशल मीडिया पर पोस्ट भी जारी की है। प्रयागराज और वाराणसी जाने वालों को मिली बड़ी राहत सीहोर से प्रयागराज और वाराणसी जाने की मांग वर्षों से की जा रही थी। विशेष रूप से अस्थि विसर्जन जैसे धार्मिक कार्यों के लिए लोगों को पहले भोपाल जाकर ट्रेन पकड़नी पड़ती थी। अब सीधे सीहोर से प्रयागराज और वाराणसी तक यात्रा संभव हो सकेगी। यह निर्णय आम नागरिकों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है और उनके लिए बड़ी राहत लेकर आया है। अहमदाबाद-गोरखपुर एक्सप्रेस का विस्तृत लाभ गाड़ी संख्या 19489/19490 अहमदाबाद–गोरखपुर एक्सप्रेस सप्ताह में छह दिन सीहोर स्टेशन पर रुकेगी। यह ट्रेन अहमदाबाद, सूरत, रतलाम, उज्जैन, मैहर, सतना, प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ती है। सीहोर के व्यापारियों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह ट्रेन विकास की नई राह खोलेगी। गाड़ी सं. 19489 अहमदाबाद-गोरखपुर एक्सप्रेस अहमदाबाद से सोमवार को छोड़कर प्रतिदिन चलेगी। अहमदाबाद से एक्सप्रेस ट्रेन सुबह 9.17 बजे से चलकर आणंद, छायापुरी, दाहोद, रतलाम, नागदा, उज्जैन होती हुई रात आठ बजे के करीब सीहोर स्टेशन पहुंचेगी। इसके बाद संत हिरदाराम नगर, विदिशा, बीना, सागर, दमोह, कटनी, मैहर, सतना, प्रयासराज, वाराणसी, मउ, भटनी, देवरिया होते हुए अगले दिन शाम 6.15 बजे गोरखपुर स्टेशन पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी सं. 19490 गोरखपुर स्टेशन से मंगलवार को छोड़कर प्रतिदिन रात 9.20 बजे रवाना होकर सीहोर स्टेशन गंतव्य दिवस के अगले दिन रात पौने छह बजे के करीब पहुंचेगी और फिर अहमदाबाद के लिए रवाना हो जाएगी। मुंबई बांद्रा-गोरखपुर हमसफर एक्सप्रेस से बढ़े अवसर सप्ताह में एक दिन चलने वाली मुंबई बांद्रा-गोरखपुर हमसफर एक्सप्रेस भी अब सीहोर स्टेशन पर रुकेगी। इससे मुंबई और सूरत जैसे औद्योगिक शहरों तक सीधी पहुंच संभव होगी। यह ट्रेन रोजगार, व्यापार और शिक्षा के लिए महानगरों से जुड़ने का सशक्त माध्यम बनेगी। एक्सप्रेस ट्रेन 19091 मुंबई बांद्रा से सोमवार को सुबह 5.10 चलकर बोरोवली, वापी, सूरत, बडोदरा, दाहोद, रतलाम, नागदा, उज्जैन, शुजालपुर स्टेशनों से होती हुई रात आठ बजे के करीब सीहोर रेलवे स्टेशन पहुंचेगी। इसके बाद संत हिरदाराम नगर, विदिशा, बीना,सागर, दमोह, कटनी, मैहर, सतना, प्रयागराज, वाराणसी, मउ, भटनी, देवरिया स्टेशन होती हुई अगले दिन मंगलवार को गोरखपुर स्टेशन पहुंचेगी। इसी तरह एक्सप्रेस ट्रेन 19092 गोरखपुर से मंगलवार को रात 9.20 बजे से चलकर वापस उन्हीं स्टेशनों से होती हुई बुधवार की शाम पौने छह बजे के करीब सीहोर रेलवे स्टेशन पहुंचेगी और फिर विभिन्न स्टेशनों से होती हुई गुरुवार की सुबह साढे़ आठ बजे मुंबई बांद्रा पहुंचेगी। श्रद्धालुओं और सीहोर के विकास को नई दिशा इन ट्रेनों के स्टॉपेज से कुबेरेश्वर धाम में कथा सुनने आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी। प्रसिद्ध कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा की कथा के दौरान सीहोर की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। यह निर्णय न केवल यात्रा सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि सीहोर के सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक विकास को भी नई गति देगा।  

एमपी में जहर मुक्त खेती का ऐतिहासिक महायज्ञ, देशभर से किसान लेंगे हिस्सा

नीमच  भारतीय कृषि के इतिहास में ये संभवतः पहला अवसर है, जब देश का कोई जनप्रतिनिधि किसानों को 'आत्मनिर्भर' और खेती को 'जहर मुक्त' बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर इतना बड़ा बीड़ा उठा रहा है। रासायनिक खाद के बोझ और कर्ज के चक्रव्यूह में फंसे अन्नदाता को उबारने के लिए मध्य प्रदेश के नीमच जिले की जावद तहसील, देशव्यापी बदलाव का केंद्र बिंदु बनने जा रही है। पूर्व मंत्री और क्षेत्रीय विधायक ओमप्रकाश सखलेचा की अनूठी पहल पर 28 से 31 मार्च 2026 तक जावद में 04 दिवसीय 'राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती शिविर' का आयोजन होने जा रहा है। इस महासंगम में 'कृषि ऋषि' कहे जाने वाले पद्मश्री डॉ. सुभाष पालेकर स्वयं मौजूद रहेंगे। वे कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के कोने-कोने से आने वाले किसानों को ये समझाएंगे कि, कैसे बाजार के फंदे से निकलकर स्वाभिमान की खेती की जा सकती है। शिविर का मूल मंत्र ये है कि, एक किसान को अपनी खेती के लिए बाजार से एक रुपए की भी खाद या कीटनाशक खरीदने की जरूरत नहीं है। डॉ. पालेकर बताएंगे कि, सिर्फ एक देसी गोमाता के सहारे 10 से 15 एकड़ जमीन पर शून्य लागत (जीरो बजट) में भरपूर और विषमुक्त फसल कैसे की जा सकती है। संसाधन आड़े न आएं, इसलिए विधायक ने की ठहरने-खाने की चिंता अक्सर आर्थिक तंगी और संसाधनों का अभाव किसानों को ऐसे ज्ञानवर्धक आयोजनों से दूर कर देता है। इस पीड़ा को समझते हुए विधायक ओमप्रकाश सखलेचा ने एक मिसाल पेश की है। देश में अपनी तरह के इस पहले आयोजन में भाग लेने वाले प्रत्येक किसान के लिए आवास, नाश्ता और भोजन की व्यवस्था पूरी तरह निःशुल्क रखी गई है। विधायक का आह्वान: 'मिट्टी और पीढ़ियों को बचाने का ये अंतिम अवसर' इस ऐतिहासिक आयोजन के सूत्रधार विधायक ओमप्रकाश सखलेचा का कहना है कि 'जावद अब देशभर के किसानों के लिए प्राकृतिक खेती का तीर्थ बनने जा रहा है। ये शिविर उन किसानों के लिए है, जो कर्ज और रसायनों के चक्रव्यूह से बाहर निकलना चाहते हैं। जो अपनी मिट्टी, अपने पानी और अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करना चाहते हैं। जावद में होने जा रहा ये आयोजन किसान के आत्मसम्मान, स्वास्थ्य और समृद्धि की ओर बढ़ता एक मजबूत कदम है।' आयोजकों ने बताया कि, ये मॉडल किसानों की लागत घटाकर और आय बढ़ाकर खेती में नई उम्मीद जगाएगा।

मैनपाट महोत्सव 2026 में बिखरेगा संगीत का जादू, मनोज तिवारी और कनिका कपूर समेत नामी कलाकारों की प्रस्तुति

रायपुर  छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मैनपाट महोत्सव 2026 का आयोजन 13 से 15 फरवरी तक किया जाएगा। यह महोत्सव तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें भोजपुरी स्टार मनोज तिवारी, बॉलीवुड गायिका कनिका कपूर सहित कई नामी कलाकार होंगे शामिल होंगे।  महोत्सव के दौरान एडवेंचर गेम्स, बोटिंग, झूले, भव्य मेला और दंगल जैसे आकर्षक आयोजन भी किए जाएंगे। मैनपाट महोत्सव का शुभारंभ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे। आयोजन की तैयारियां जोरों पर हैं। लंबे समय बाद इस महोत्सव की रौनक फिर से लौटती नजर आ रही है। पिछले कुछ सालों में आयोजन औपचारिकता तक सीमित रह गया था, लेकिन इस बार इसे भव्य रूप दिया जा रहा है। राज्य शासन द्वारा इस महोत्सव के लिए 10 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। आयोजन का मुख्य उद्देश्य मैनपाट में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना और सैलानियों को आकर्षित करना है। पहले दिन भोजपुरी स्टार मनोज तिवारी बांधेगे शमा 13 फरवरी (शुक्रवार) को महोत्सव का शुभारंभ होगा। पहले दिन भाजपा सांसद और भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार मनोज तिवारी मंच पर प्रस्तुति देंगे। इसके अलावा पहले दिन छत्तीसगढ़ी गायक सुनील सोनी और ओडिशा के प्रसिद्ध छउ नृत्य कलाकार हरिपद मोहंता भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। साथ ही स्थानीय कलाकार भी रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। दूसरा दिन छत्तीसगढ़ के कलाकार देंगे प्रस्तुति आयोजन के दूसरे दिन 14 फरवरी शनिवार को सरगुजा के मशहूर गायक स्वप्निल जायसवाल, छत्तीसगढ़ी गायिका अलका चंद्राकर, इंडियन आइडल और सारे-गा-मा-पा जैसी रियलिटी शोज की फेम वैशाली रायकवार अपनी प्रस्तुति देंगे। ओडिशा के कलाकारों की भागीदारी भी इस दिन विशेष रहेगी। अन्य रंगारंग कार्यक्रम माहौल को मनोरंजक बनाएंगे। तीसरे दिन कनिका कपूर बिखेरेंगी जादू महोत्सव का समापन 15 फरवरी रविवार को होगा। अंतिम दिन बॉलीवुड की मशहूर सिंगर कनिका कपूर अपनी प्रस्तुति देंगी। उनके अलावे रायगढ़ घराने की कत्थक नृत्यांगना ज्योतिश्री वैष्णव, छत्तीसगढ़ के उभरते गायक आयुष नामदेव भी अपनी प्रस्तुति देंगे। एडवेंचर करेगा सैलानियों को आकर्षित मैनपाट की सुरम्य वादियां सैलानियों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करती हैं। सालभर यहां सैलानी पहुंचते हैं। खासकर ठंड के दिनों में मैनपाट में सैलानियों की सर्वाधिक संख्या होती है। बसंत के आगमन के बावजूद मैनपाट में रातें सर्द हैं। मैनपाट महोत्सव में सैलानियों को रोमांचक गेम्स भी आकर्षित करेंगे। पैरा सेलिंग, नौका विहार के साथ एडवेंचर एक्टिविटी का आयोजन किया गया है। इसके अलावे यहां आयोजित भव्य मेला भी सैलानियों को आकर्षित करेगा। स्थानीय कलाकारों को दें अधिक अवसर मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि, आयोजन में स्थानीय कलाकारों, स्कूल कॉलेज के छात्र-छात्राओं को अधिक से अधिक अवसर मिले। उन्होंने स्थानीय दुकानदारों को कार्यक्रम स्थल पर स्टॉल के लिए स्थान देने का निर्देश दिया। इसमें निजी संस्थान भाग ले सकते हैं। मंत्री ने कहा कि मनोरंजन एवं खेल गतिविधियों, स्टॉल आदि के लिए स्थान प्रदान किया जाएगा। मंत्री अग्रवाल ने लोक निर्माण विभाग, वन विभाग सहित अन्य विभागों को गरिमामयी आयोजन के लिए सहभागिता के निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर अजीत वसंत, एसपी राजेश अग्रवाल, जिला पंचायत सीईओ विनय अग्रवाल, अपर कलेक्टर सुनील नायक सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित थे। महोत्सव के लिए मिलेंगे 50 लाख मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि, महोत्सव के लिए 50 लाख रुपए की घोषणा की गई है। पिछले साल चुनाव के कारण मैनपाट महोत्सव का आयोजन नहीं किया गया था। पहले मैनपाट महोत्सव के लिए प्रशासन की तरफ से अधिकारियों और व्यापारिक संगठनों से वसूली की जाती थी। मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि इस साल ऐसी स्थिति नहीं बनेगी। राज्य सरकार मैनपाट महोत्सव के लिए राशि देगी। कुछ राशि की व्यवस्था डीएमएफ और अन्य मदों से किए जाएंगे।

भारत से दोस्ती का दौर तेज, अमेरिका के बाद चीन ने भी बढ़ाया मित्रता का हाथ, वर्ल्ड डिप्लोमेसी में U टर्न

नई दिल्ली  साल 2026 भारत की विदेश नीति के लिए एक नई सुबह लेकर आया है. जहां एक तरफ भारत को रोज धमक‍ियां देने वाले ट्रंप को भारत पर से टैर‍िफ हटाने के ल‍िए मजबूर होना पड़ा. वहीं, हिमालय के उस पार से भी शांति और मेल-मिलाप के संकेत मिल रहे हैं. भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग का रव‍िवार का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि बीजिंग अब नई दिल्ली के साथ अपने रिश्तों को शत्रुता के बजाय सहयोग के तराजू पर तौलने को मजबूर है. चीन के राजदूत जू फेइहोंग ने एक्‍स पर ल‍िखा, चीन भारत के साथ मिलकर उस महत्वपूर्ण आम सहमति को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है, जिसमें दोनों देश एक-दूसरे के लिए सहयोग के भागीदार और विकास के अवसर हैं. यह बयान पिछले कुछ वर्षों के कड़वे और तनावपूर्ण संबंधों के बाद एक बड़ी नरमी की ओर इशारा करता है. उन्होंने पारस्परिक लाभ के दायरे को और अधिक विस्तार देने की बात कही है. इसका सीधा अर्थ यह है कि दोनों देशों की आर्थिक रणनीतियों को एक दिशा में लाकर व्यापारिक और व्यावहारिक सहयोग को गहरा किया जाए. ब्रिक्स में भारत का साथ चीन ने ब्रिक्स की अध्यक्षता के लिए भारत की भूमिका का पुरजोर समर्थन किया है. बहुपक्षीय मंचों पर भारत की बढ़ती ताकत को स्वीकार करना चीन की कूटनीतिक विवशता और रणनीति दोनों का हिस्सा है. राजदूत ने दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर जोर दिया है, ताकि दोनों देशों के लोग एक-दूसरे के करीब आ सकें. बीजिंग के इस हृदय परिवर्तन के पीछे की असली वजह आखिर चीन, जो कल तक सीमा पर आक्रामक रुख अपनाए हुए था, आज दोस्ती की बात क्यों कर रहा है? इसके पीछे वजह है.     चीन की अपनी अर्थव्यवस्था इस समय मंदी और आंतरिक चुनौतियों से जूझ रही है. भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार को लंबे समय तक छोड़ना चीन के लिए आत्मघाती साबित हो रहा है. व्यापारिक घाटे और भारतीय कड़े रुख के कारण चीनी कंपनियों को भारी नुकसान हुआ है.     अमेरिका ने जिस तरह से भारत के साथ अपने रक्षा और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत किया है, उसने चीन को बेचैन कर दिया है. हाल ही में भारत को शुल्कों में मिली छूट इस बात का प्रमाण है कि भारत अब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का केंद्र बन रहा है. चीन को डर है कि अगर वह अब भी अड़ा रहा, तो भारत पूरी तरह से पश्चिमी गुट के पाले में चला जाएगा.     रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जिस तरह से वैश्विक व्यवस्था बदली है, उसमें भारत एक ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बनकर उभरा है. चीन जानता है कि एशिया की राजनीति में बिना भारत के सहयोग के वह अपनी धाक नहीं जमा सकता. भारत की गजब ड‍िप्‍लोमेसी चीन के इस शांति प्रस्ताव को भारत बड़े ही सतर्क नजरिए से देख रहा है. भारतीय विदेश नीति के रणनीतिकारों के लिए यह स्थिति किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. इसल‍िए भारत बहुत सोच समझकर आगे बढ़ रहा है. 2020 की गलवान घाटी की घटना के बाद भारत और चीन के बीच जो ‘विश्वास का संकट’ पैदा हुआ है, वह महज बयानों से दूर नहीं हो सकता. भारत का रुख साफ है क‍ि जब तक सीमा पर शांति और यथास्थिति बहाल नहीं होती, तब तक व्यापार और संबंधों का सामान्य होना मुश्किल है. अमेरिका या चीन कौन बेहतर दोस्‍त भारत इस समय उस स्थिति में है जहां वह दुनिया की दो बड़ी शक्तियों के साथ अपनी शर्तों पर संवाद कर रहा है. एक तरफ अमेरिका है जो भारत को रक्षा तकनीक दे रहा है, और दूसरी तरफ चीन है जो व्यापारिक लाभ का लालच दे रहा है. भारत की असली चुनौती इन दोनों के बीच अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ को बचाए रखने की है. राजदूत जू फेइहोंग का बयान निश्चित रूप से स्वागत योग्य है, लेकिन इसे जमीन पर उतरने में अभी समय लगेगा. 2026 की यह बदली हुई कूटनीति दिखाती है कि भारत अब किसी का ‘पिछलग्गू’ नहीं, बल्कि वह केंद्र है जिसके इर्द-गिर्द महाशक्तियों की नीतियां घूम रही हैं. वहीं भारत का लक्ष्य स्पष्ट है. साझेदारी में अवसर तो तलाशने हैं, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की कीमत पर नहीं. चीन के साथ ‘सहयोग के दायरे’ को बढ़ाने से पहले पुरानी कड़वाहटों और सीमा विवादों का स्थायी समाधान जरूरी है.

भारत से दोस्ती का दौर तेज, अमेरिका के बाद चीन ने भी बढ़ाया मित्रता का हाथ, वर्ल्ड डिप्लोमेसी में U टर्न

महाशक्तियों में भारत से दोस्ती की होड़, अमेरिका के बाद अब चीन ने भी बढ़ाया हाथ भारत से दोस्ती का दौर तेज, अमेरिका के बाद चीन ने भी बढ़ाया मित्रता का हाथ, वर्ल्ड डिप्लोमेसी में U टर्न महाशक्तियों के बीच भारत से दोस्ती की होड़, चीन ने भी बढ़ाया दोस्ती का हाथ, वर्ल्ड डिप्लोमेसी में नया मोड़ नई दिल्ली  साल 2026 भारत की विदेश नीति के लिए एक नई सुबह लेकर आया है. जहां एक तरफ भारत को रोज धमक‍ियां देने वाले ट्रंप को भारत पर से टैर‍िफ हटाने के ल‍िए मजबूर होना पड़ा. वहीं, हिमालय के उस पार से भी शांति और मेल-मिलाप के संकेत मिल रहे हैं. भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग का रव‍िवार का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि बीजिंग अब नई दिल्ली के साथ अपने रिश्तों को शत्रुता के बजाय सहयोग के तराजू पर तौलने को मजबूर है. चीन के राजदूत जू फेइहोंग ने एक्‍स पर ल‍िखा, चीन भारत के साथ मिलकर उस महत्वपूर्ण आम सहमति को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है, जिसमें दोनों देश एक-दूसरे के लिए सहयोग के भागीदार और विकास के अवसर हैं. यह बयान पिछले कुछ वर्षों के कड़वे और तनावपूर्ण संबंधों के बाद एक बड़ी नरमी की ओर इशारा करता है. उन्होंने पारस्परिक लाभ के दायरे को और अधिक विस्तार देने की बात कही है. इसका सीधा अर्थ यह है कि दोनों देशों की आर्थिक रणनीतियों को एक दिशा में लाकर व्यापारिक और व्यावहारिक सहयोग को गहरा किया जाए. ब्रिक्स में भारत का साथ चीन ने ब्रिक्स की अध्यक्षता के लिए भारत की भूमिका का पुरजोर समर्थन किया है. बहुपक्षीय मंचों पर भारत की बढ़ती ताकत को स्वीकार करना चीन की कूटनीतिक विवशता और रणनीति दोनों का हिस्सा है. राजदूत ने दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर जोर दिया है, ताकि दोनों देशों के लोग एक-दूसरे के करीब आ सकें. बीजिंग के इस हृदय परिवर्तन के पीछे की असली वजह आखिर चीन, जो कल तक सीमा पर आक्रामक रुख अपनाए हुए था, आज दोस्ती की बात क्यों कर रहा है? इसके पीछे वजह है.     चीन की अपनी अर्थव्यवस्था इस समय मंदी और आंतरिक चुनौतियों से जूझ रही है. भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार को लंबे समय तक छोड़ना चीन के लिए आत्मघाती साबित हो रहा है. व्यापारिक घाटे और भारतीय कड़े रुख के कारण चीनी कंपनियों को भारी नुकसान हुआ है.     अमेरिका ने जिस तरह से भारत के साथ अपने रक्षा और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत किया है, उसने चीन को बेचैन कर दिया है. हाल ही में भारत को शुल्कों में मिली छूट इस बात का प्रमाण है कि भारत अब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का केंद्र बन रहा है. चीन को डर है कि अगर वह अब भी अड़ा रहा, तो भारत पूरी तरह से पश्चिमी गुट के पाले में चला जाएगा.     रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जिस तरह से वैश्विक व्यवस्था बदली है, उसमें भारत एक ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बनकर उभरा है. चीन जानता है कि एशिया की राजनीति में बिना भारत के सहयोग के वह अपनी धाक नहीं जमा सकता. भारत की गजब ड‍िप्‍लोमेसी चीन के इस शांति प्रस्ताव को भारत बड़े ही सतर्क नजरिए से देख रहा है. भारतीय विदेश नीति के रणनीतिकारों के लिए यह स्थिति किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. इसल‍िए भारत बहुत सोच समझकर आगे बढ़ रहा है. 2020 की गलवान घाटी की घटना के बाद भारत और चीन के बीच जो ‘विश्वास का संकट’ पैदा हुआ है, वह महज बयानों से दूर नहीं हो सकता. भारत का रुख साफ है क‍ि जब तक सीमा पर शांति और यथास्थिति बहाल नहीं होती, तब तक व्यापार और संबंधों का सामान्य होना मुश्किल है. अमेरिका या चीन कौन बेहतर दोस्‍त भारत इस समय उस स्थिति में है जहां वह दुनिया की दो बड़ी शक्तियों के साथ अपनी शर्तों पर संवाद कर रहा है. एक तरफ अमेरिका है जो भारत को रक्षा तकनीक दे रहा है, और दूसरी तरफ चीन है जो व्यापारिक लाभ का लालच दे रहा है. भारत की असली चुनौती इन दोनों के बीच अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ को बचाए रखने की है. राजदूत जू फेइहोंग का बयान निश्चित रूप से स्वागत योग्य है, लेकिन इसे जमीन पर उतरने में अभी समय लगेगा. 2026 की यह बदली हुई कूटनीति दिखाती है कि भारत अब किसी का ‘पिछलग्गू’ नहीं, बल्कि वह केंद्र है जिसके इर्द-गिर्द महाशक्तियों की नीतियां घूम रही हैं. वहीं भारत का लक्ष्य स्पष्ट है. साझेदारी में अवसर तो तलाशने हैं, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की कीमत पर नहीं. चीन के साथ ‘सहयोग के दायरे’ को बढ़ाने से पहले पुरानी कड़वाहटों और सीमा विवादों का स्थायी समाधान जरूरी है.

मध्य प्रदेश में बोर्ड परीक्षा की शुरुआत, 16 लाख छात्र परीक्षा देंगे, 3800 सेंटरों पर ‘तीसरी आंख’ रहेगा अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं का दौरआज से  शुरू होने जा रहा है। 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में इस बार 16 लाख से ज्यादा छात्र शामिल होंगे। राज्यभर में बनाए गए 3856 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा होगी, जहां नकल रोकने के लिए तकनीक और प्रशासन दोनों का कड़ा पहरा रहेगा।इस बार बोर्ड परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी और अनुशासित बनाने पर जोर दिया गया है। सभी परीक्षाएं सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक एक ही शिफ्ट में आयोजित होंगी। परीक्षा केंद्रों पर CCTV कैमरों से निगरानी, फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा तक हर स्तर पर सख्ती की गई है।  10 फरवरी से 12वीं, 13 फरवरी से 10वीं की परीक्षा माध्यमिक शिक्षा मंडल के अनुसार 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं आज 10 फरवरी से शुरू हो रही , जबकि 10वीं की परीक्षाएं 13 फरवरी 2026 से प्रारंभ होंगी। इस बार करीब 9.07 लाख छात्र 10वीं और लगभग 7 लाख छात्र 12वीं की परीक्षा देंगे। हर जिले में उड़नदस्ते, संवेदनशील केंद्रों पर तीसरी आंख प्रदेश के हर जिले में चार-चार फ्लाइंग स्क्वॉड बनाए गए हैं, जो परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण करेंगे। संवेदनशील केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। यहां CCTV कैमरों के जरिए भोपाल स्थित बोर्ड कार्यालय से सीधी मॉनिटरिंग होगी। इसके अलावा थानों से प्रश्नपत्र निकालने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य की गई है। प्रदेश भर में 16 लाख से ज्यादा छात्र देंगे बोर्ड परीक्षा इस बार प्रदेश में 10वीं और 12वीं की परीक्षा में करीब 16 लाख छात्र परीक्षा में शामिल होंगे। इनमें 9 लाख 7 हजार विद्यार्थी कक्षा 10वीं की परीक्षा देंगे, जबकि करीब 7 लाख छात्र 12वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठेंगे। इतने बड़े स्तर पर होने वाली परीक्षाओं को शांतिपूर्ण, नकलमुक्त और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन और शिक्षा विभाग ने महीनों पहले से तैयारियां शुरू कर दी थीं। 3856 परीक्षा केंद्र, हर जिले में सख्त निगरानी बोर्ड परीक्षाओं के लिए पूरे प्रदेश में 3856 परीक्षा केंद्र बनाए हैं। राजधानी भोपाल की बात करें तो यहां 10वीं के 30 हजार 746 और 12वीं के 26 हजार 627 छात्र परीक्षा देंगे। इन छात्रों के लिए भोपाल में कुल 104 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। हर जिले में चार-चार फ्लाइंग स्क्वॉड गठित किए गए हैं। इनमें से दो स्क्वॉड विकासखंड स्तर पर और दो जिला स्तर पर काम करेंगे। हर स्क्वॉड में तीन सदस्य होंगे और तीनों पुलिस या प्रशासनिक स्तर के अधिकारी होंगे, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई हो सके। संवेदनशील केंद्रों पर ‘तीसरी आंख’ का पहरा नकल और अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए इस बार तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन ने संवेदनशील परीक्षा केंद्रों की पहचान कर वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। इन केंद्रों पर होने वाली गतिविधियों पर भोपाल स्थित बोर्ड कार्यालय से सीधी निगरानी रखी जाएगी। इसके अलावा, थानों से प्रश्न-पत्र निकालने के दौरान भी वीडियोग्राफी अनिवार्य की गई है और सुरक्षा गार्ड्स की तैनाती की गई है। इसका मकसद है कि परीक्षा प्रक्रिया की हर कड़ी पारदर्शी और सुरक्षित बनी रहे। स्कूलों को सख्त निर्देश… एक भी छात्र न छूटे माध्यमिक शिक्षा मंडल ने सभी सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संशोधित टाइमटेबल की जानकारी हर हाल में छात्रों और अभिभावकों तक पहुंचे। स्कूलों को कहा गया है कि नोटिस बोर्ड, मॉर्निंग असेंबली और अभिभावक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए यह सूचना तुरंत साझा करें। शिक्षकों को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कोई भी छात्र पुरानी तारीखों के भरोसे परीक्षा से वंचित न रह जाए। परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश के सख्त नियम जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार ने बताया कि बोर्ड परीक्षाओं को लेकर जिले में सख्त व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। परीक्षार्थियों को सुबह 8:30 बजे के बाद किसी भी हालत में परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। परीक्षा केंद्रों के आसपास अनावश्यक भीड़ रोकने के लिए निर्धारित दूरी के बाद प्रवेश निषेध रहेगा। सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। चयनित केंद्रों पर भोपाल से सीधी मॉनिटरिंग माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा प्रदेश के हर जिले में पांच-पांच परीक्षा केंद्रों को विशेष मॉनिटरिंग के लिए चुना गया है। इन केंद्रों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की निगरानी सीधे भोपाल स्थित बोर्ड कार्यालय से की जाएगी। इसके अलावा, औचक निरीक्षण के लिए उड़नदस्ते भी लगातार सक्रिय रहेंगे, जिनमें शिक्षा विभाग के साथ प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे। अब बात बच्चों की सेहत की परीक्षाओं की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे छात्रों पर पढ़ाई का दबाव बढ़ता जा रहा है। 10 फरवरी से 12वीं और 13 फरवरी से 10वीं की बोर्ड परीक्षाएं शुरू होनी हैं। ऐसे में छात्र घंटों एक ही जगह बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। कम समय में ज्यादा सिलेबस पूरा करने की दौड़ में बच्चे अपनी सेहत को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिसका असर अब उनके शरीर पर साफ दिखाई देने लगा है। राजधानी भोपाल में 104 परीक्षा केंद्र भोपाल में 10वीं के 30,746 और 12वीं के 26,627 छात्र परीक्षा देंगे। इसके लिए शहर में कुल 104 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। यहां भी हर केंद्र पर सख्त सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था लागू रहेगी।बोर्ड ने पहले ही संशोधित टाइम टेबल जारी कर दिया है। किसी भी तरह की गलतफहमी से बचने के लिए सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि यह टाइम टेबल हर छात्र और अभिभावक तक अनिवार्य रूप से पहुंचे। इसके लिए नोटिस बोर्ड, असेंबली और व्हाट्सएप ग्रुप जैसे माध्यमों का इस्तेमाल करने को कहा गया है। एग्जाम के दौरान सख्त नियम परीक्षार्थियों को सुबह 8:30 बजे तक परीक्षा केंद्र पहुंचना अनिवार्य होगा। इसके बाद प्रवेश नहीं मिलेगा। परीक्षा केंद्रों के आसपास भीड़ और अनावश्यक गतिविधियों पर रोक रहेगी। फिजियोथेरेपी सेंटरों में बढ़ी बच्चों की संख्या फिजियोथेरेपी विशेषज्ञों के अनुसार, आजकल बच्चों में फिजिकल एक्टिविटी लगभग खत्म हो गई है। लगातार 3 से 4 घंटे बिना ब्रेक पढ़ने से गर्दन और कंधों में दर्द, हाथों में झुन्नझुनी, सुन्नपन और कभी-कभी उल्टी जैसा मन होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। फिजियोथेरेपी सेंटर्स में 13 से 17 साल की उम्र के बच्चों की संख्या करीब 30 प्रतिशत … Read more