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आ गई रिलीज डेट, ‘बॉर्डर 2’ के बाद अब ‘लाहौर 1947’ में धमाल मचाने को तैयार सनी देओल

मुंबई, सनी देओल की फिल्म ‘बॉर्डर 2’ का जादू बॉक्स ऑफिस पर जारी है। इस बीच मेकर्स ने उनकी मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘लाहौर 1947’ की रिलीज डेट अनाउंस कर दी है। ‘लाहौर 1947’ 13 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इस फिल्म के जरिए पहली बार सनी देओल, डायरेक्टर राजकुमार संतोषी और प्रोड्यूसर आमिर खान एक साथ काम करने जा रहे हैं। आमिर खान प्रोडक्शंस द्वारा बनाई गई यह फिल्म साल 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्याय में से एक को खास अंदाज में पर्दे पर पेश करेगी। आमिर खान ने बताया कि यह दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र की पसंदीदा स्क्रिप्ट थी। उन्होंने फिल्म को लेकर बताया, “यह धरम जी (धर्मेंद्र) की सबसे पसंदीदा स्क्रिप्ट्स में से एक थी। मुझे बहुत खुशी है कि यह फिल्म उसी अंदाज में रिलीज होगी और इसे उनका प्यार मिलेगा।” अपकमिंग फिल्म की कहानी असगर वजाहत के नाटक ‘जिस लाहौर नई देख्या, ओ जम्याई नई’ से प्रेरित है। यह नाटक विभाजन की बड़ी राजनीति के बजाय सांप्रदायिक हिंसा और विस्थापन से टूटे हुए रिश्तों पर फोकस करता है। कहानी एक हिंदू परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे लाहौर से भारत आने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्हें एक मुस्लिम परिवार द्वारा छोड़ी गई हवेली मिलती है, लेकिन वहां एक बूढ़ी मुस्लिम महिला अभी भी रह रही होती है। इसके बाद विभाजन के उथल-पुथल भरे दिनों में पहचान, नुकसान और नैतिक जिम्मेदारी जैसे गहरे सवाल उठते हैं। फिल्म तमाशे वाली देशभक्ति कहानियों से अलग हटकर विभाजन के स्थायी जख्मों, सहानुभूति और साझा दर्द पर रोशनी डालती है। यह एक भावुक और गंभीर पीरियड ड्रामा है। फिल्म में सनी देओल मुख्य भूमिका में हैं, जिसमें शबाना आजमी, प्रीति जिंटा और करण देओल भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। संगीत को एआर रहमान ने तैयार किया है और गीतों के बोल जावेद अख्तर ने लिखे हैं।  

कल पेश होगा राजस्थान सरकार का बजट, शिव से विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने गिनाईं प्राथमिकताएँ

जयपुर राजस्थान सरकार अपना वार्षिक बजट कल विधानसभा में पेश करेगी। उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी बजट प्रस्तुत करेंगी। बजट से पहले पश्चिमी राजस्थान में विभिन्न वर्गों की उम्मीदें सामने आ रही हैं, जिनमें शिक्षा, सड़क, चिकित्सा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को लेकर विशेष अपेक्षाएं जताई जा रही हैं। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी की प्राथमिकताएं शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने बजट से पहले पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बजट से बहुत सारी उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, सड़क और चिकित्सा पर प्रदेश सरकार का विशेष फोकस रहना चाहिए। साथ ही युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर किस प्रकार दिए जा सकें, इस दिशा में ठोस प्रावधानों की आवश्यकता है।   रोजगार और औद्योगिक अवसरों पर जोर विधायक भाटी ने कहा कि सरकार ने एक एनुअल कैलेंडर जारी किया है, लेकिन उसमें तमाम लोगों को शामिल नहीं किया जा सका। मल्टीनेशनल कंपनियों के माध्यम से रिफाइनरी आ रही है, साथ ही अन्य फैक्टरियां और इंडस्ट्रीज भी स्थापित होंगी। इन सभी क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को किस तरह अवसर मिल सकें, इस पर ध्यान देना जरूरी है।   सड़क और चिकित्सा ढांचे की जरूरत उन्होंने सड़कों पर विशेष रूप से गांवों की इंटरनल सड़कों और हाईवे के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। हाल ही में एक बस दुर्घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इलाके में 1 यूनिट की सुविधा नहीं होने के कारण घायलों को जोधपुर तक ले जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि चिकित्सा व्यवस्था को किस तरह मजबूत किया जाए, इस पर बजट में ध्यान दिया जाना चाहिए, क्योंकि गांव और ढाणियां दूर-दूर स्थित हैं।   खेल जगत से जुड़ी उम्मीदें खेल जगत से जुड़े हेमंत शर्मा ने भी राज्य सरकार के बजट से काफी उम्मीदें जताईं। उन्होंने कहा कि जोधपुर की मूलभूत सुविधाओं जैसे पानी, सड़क और बिजली पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। जोधपुर में पानी की गंभीर समस्या है, जहां हर सातवें और आठवें दिन पानी की कटौती की जा रही है।   पानी और सीवरेज की समस्या हेमंत शर्मा ने कहा कि जोधपुर में सीवरेज की समस्या भी काफी बढ़ गई है। यदि बजट में इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रावधान किए जाएं, तो प्रदेश के दूसरे बड़े शहर जोधपुर के लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।   संजय गौड ने उम्मीद जताई कि पूर्ववर्ती गहलोत सरकार द्वारा लागू की गई योजनाओं को उचित बजट जारी कर प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जाए, ताकि आम जनता को फायदा मिल सके। उन्होंने कहा कि यह बजट युवाओं के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है।   महंगाई और चिकित्सा योजनाओं पर नजर संजय गौड ने यह भी कहा कि चिकित्सा क्षेत्र की योजनाएं फिर से रफ्तार पकड़ें, इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। महंगाई अपने चरम स्तर पर है, ऐसे में बजट में इसे लेकर भी कुछ ठोस कदम उठाए जाने की अपेक्षा की जा रही है।

बाबरी ढांचे का सपना देखने वालों से सीएम योगी की दो टूक, कभी नहीं आने वाला कयामत का दिन

बाराबंकी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबरी ढांचे का सपना देखने वालों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने दो टूक कहा कि कयामत का दिन कभी आने वाला नहीं है, जो लोग इसका सपना देख रहे हैं, सड़-गल जाएंगे। हिंदुस्तान में कायदे में रहने वाले फायदे में रहेंगे। अगर कोई कानून तोड़कर जन्नत जाने का सपना देख रहा है तो उसका यह सपना कभी पूरा नहीं होने वाला। कानून तोड़ने वाले का रास्ता कहीं और नहीं, सीधे जहन्नुम की तरफ ले जाता है। मुख्यमंत्री ने पूरी दृढ़ता के साथ कहा कि यह डबल इंजन सरकार पीएम मोदी के मार्गदर्शन में जो बोलती है, वह करके दिखाती है और जितना करती है, उतना ही बोलती है। हमने कहा कि रामलला आएंगे…। अब मंदिर भी बन गया है। हम विरासत को सम्मान देते हुए भारत व सनातन धर्म की गौरवशाली परंपरा को अक्षुण्ण रखेंगे। पीएम मोदी ने 25 नवंबर को अयोध्या में सनातन के प्रतीक श्रीराम मंदिर में भव्य केसरिया ध्वज का आरोहण किया था,  यह ध्वज सदा भारत व सनातन के गौरव को आगे बढ़ाएगा।  मुख्यमंत्री मंगलवार को हिंद केसरी ब्रह्मलीन महंत बाबा हरिशंकर दास जी महाराज की पुण्य स्मृति में श्रीराम जानकी मंदिर, दुल्हदेपुर कुटी (बाराबंकी) में आयोजित दशम श्री हनुमत विराट महायज्ञ एवं श्री रामार्चा पूजन में सम्मिलित हुए। सीएम ने केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाएं व उपलब्धियां गिनाने के साथ ही कहा कि बाराबंकी में जल्द ही विकास प्राधिकरण प्रारंभ होगा। सीएम की दो टूक, कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे  सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या में 500 वर्ष पश्चात यह गौरवशाली क्षण आया। इतने वर्षों में अनेक राजा-महाराजा आए। 1952 के बाद से अनेक सरकारें बनीं, लेकिन किसी से मन में यह नहीं आया कि भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या पर भव्य मंदिर निर्माण हो। राम सबके हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जो अवसरवादी रवैया अपनाते हैं। जब संकट आता है तो उन्हें राम याद आते हैं, बाकी समय राम को भूल जाते हैं। ऐसे लोगों को भगवान राम भी भूल चुके हैं, अब उनकी नैया कभी पार नहीं होनी है। रामभक्तों पर गोली चलाने वालों और रामकाज में बाधक रामद्रोहियों के लिए कोई जगह नहीं है। बाबरी ढांचे का सपना देखने वालों को योगी ने चेताया कि कयामत का दिन कभी नहीं आने वाला। कयामत के दिन के लिए मत जियो। हिंदुस्तान में कायदे से रहना सीखो। यहां का कानून मानो, कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे। कानून तोड़ने वालों का रास्ता जन्नत नहीं, सीधे जहन्नुम की तरफ जाएगा।  यह देश कभी कमजोर नहीं था सीएम योगी ने कहा कि यह देश कभी कमजोर नहीं था। हमारे पास सब कुछ था। उन्होंने 2017 के पहले यूपी में फैली असुरक्षा का जिक्र किया। कहा, हर तीसरे-चौथे दिन किसी न किसी जनपद व शहर में कर्फ्यू-दंगे होते थे। परिवार का कोई सदस्य बाहर गया है और सूर्यास्त होते यदि घऱ नहीं आया तो घरवाले सशंकित रहते थे। गरीबों की जमीन पर कब्जा हो जाता था। सैकड़ों पहलवान तैयार करने वाले बाबा हरिशंकर दास का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि श्रीराम जानकी मंदिर की जमीन पर भी कब्जा करने का प्रयास हुआ। बाबा जी को गोली मार दी गई, लेकिन सरकार बदलते ही यूपी में सारी अराजकता गायब हो गई। 2013 कुंभ में 12 करोड़ श्रद्धालु आए थे और इस वर्ष माघ मेला में अब तक 21 करोड़ श्रद्धालु डुबकी लगा चुके हैं। अयोध्या व वाराणसी में पहले लाखों श्रद्धालु आते थे, अब वह संख्या करोड़ों में पहुंच गई है। 2024-25 में 122 करोड़ श्रद्धालु यूपी के धार्मिक स्थलों पर दर्शन करने आए। महाकुम्भ में 66 करोड़ श्रद्धालु आए, यह संख्या बताती है कि यूपी में अब सुरक्षा और सुविधा है। बेटी सुरक्षित होगी तो समाज सुरक्षा का अहसास कर लेगा, व्यापारी सुरक्षित होगा तो उत्तर से दक्षिण तक सेतुबंध के रूप में कार्य करेगा।  पहले भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया था विकास मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी समृद्धि की नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है। पहले यूपी में वेतन देने का पैसा नहीं था, लेकिन आज पैसे का उपयोग हर तबके के हित के लिए हो रहा है। छात्रों को बिना भेदभाव छात्रवृत्ति दी जा रही है। यूपी में अच्छे संस्थान खुल रहे हैं, हर तीर्थ स्थल का विकास हो रहा है। सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्य कर रही है। कानून को ठेंगा दिखाने वालों को ऐसा मजा चखाएंगे कि सात पीढ़ियां याद करेंगी। सीएम ने विकास कार्यों को गिनाया और कहा कि 8-9 साल पहले तक जो पैसा भ्रष्टाचार में खर्च होता था, वह आज विकास में खर्च हो रहा है।  यूपी अब ‘बीमारू’ नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था का मजबूत राज्य  सीएम योगी ने कहा कि यूपी देश की तीन बड़ी अर्थव्यवस्था में शामिल है। यूपी अब ‘बीमारू’ नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था का मजबूत राज्य बनकर उभरा है। गांव की बेटी, सबकी बेटी मानते हुए सरकार बेटी के जन्म लेने से लेकर स्नातक की पढ़ाई, शादी आदि की जिम्मेदारी उठा रही है। दिव्यांगजन, वृद्धजन व निराश्रित महिलाओं के रूप में 1.6 करोड़ परिवारों को सरकार 12 हजार रुपये सालाना की पेंशन दे रही है। यूपी में 15-16 करोड़ लोग राशन की सुविधा पा रहे हैं। आयुष्मान भारत के अंतर्गत अब तक 5.46 करोड़ से अधिक गरीबों के लिए पांच लाख रुपये निशुल्क स्वास्थ्य सुविधा वाले गोल्डन कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार बिना भेदभाव सबके विकास के लिए कार्य कर रही है।  दुनिया भर से सनातन, भारत-भारतीयता पर प्रहार मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि हर भारतीय का दायित्व सकारात्मक सोच के साथ भारत का विकास होना चाहिए। सभी भारतीय मिलकर ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के लिए कार्य करें। जीवन का संकल्प होना चाहिए कि हमारा देश वैभवशाली व विकसित हो। हर संत की साधना देश, धर्म के लिए होती है और धर्म भी देश के लिए समर्पित होता है। एक शरीर है तो दूसरा उसकी आत्मा। भारत और सनातन एक-दूसरे के पूरक हैं, इसे अलग करके नहीं रखा जा सकता। वर्तमान में दुनिया भर से सनातन, भारत-भारतीयता पर प्रहार हो रहे हैं। अंदर-बाहर से होने वाले इन प्रहारों से सचेत रहना होगा। जिन्हें भारत की प्रगति अच्छी नहीं लग रही है, विकसित भारत की संकल्पना पचती नहीं … Read more

जमानत मिलने के बाद पप्पू यादव होंगे रिहा

  पटना बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव को पटना सिविल कोर्ट ने जमानत दे दी है. पप्पू यादव अब बेउर जेल से बाहर आएंगे. 9 फरवरी को ही पटना सिविल कोर्ट स्थित एमपी-एमएलए की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन बम की धमकी के बाद परिसर खाली करा दिया गया था और ये सुनवाई टाल दी गई थी. पप्पू यादव समेत तीन लोगों पर 31 साल पुराने एक मामले में केस दर्ज है. 6 फरवरी को पप्पू यादव दिल्ली में थे, उसी दिन देर शाम पटना स्थित आवास पहुंचने पर उनकी गिरफ्तारी हुई थी. इसके बाद उन्हें बेउर जेल भेज दिया गया था.  बता दें कि पप्पू यादव के खिलाफ 1995 में पटना के गर्दनीबाग थाने में एक मामला दर्ज किया गया था. इस मामले में जब पुलिस पप्पू यादव को गिरफ्तार करने गई तो उनके 20 अज्ञात समर्थकों ने पुलिस के सरकारी काम में बाधा डालने की कोशिश की.  बुद्धा कॉलोनी थाने में थानेदार पल्लव के बयान पर पप्पू यादव के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की गई. इसमें पप्पू यादव और उनके समर्थकों पर पुलिस को धमकाने का आरोप लगाया.

बेटियों के सशक्तिकरण की पहल: दिल्ली में रेखा गुप्ता सरकार का बड़ा ऐलान

दिल्ली दिल्ली की भाजपा सरकार ने लखपति बिटिया योजना का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुआई में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई गई। इसके साथ ही 2008 में लॉन्च की गई लाडली योजना को बंद कर दिया गया है। लखपति बिटिया योजना के तहत ग्रेजुएशन करने के बाद बेटियों को एक लाख रुपये की राशि दी जाएगी। इससे पहले महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी महिला केंद्रित योजनाएं चलाई जा चुकी हैं जिनमें प्रतिमाह अथवा सालाना आर्थिक सहायता महिलाओं को दी जाती है। अब दिल्ली में भाजपा सरकार ने बेटियों को एकमुश्त रकम देकर लखपति बनाने की पहल की है। कैबिनेट में मुहर के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 31 मार्च तक लाडली योजना बंद कर दी जाएगी और इसकी जगह दिल्ली लखपति बिटिया योजना की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने कहा हर परिवार से दो बिटिया को इस योजना का लाभ दिया जाएगा। दिल्ली में जन्मी हर बच्ची को इस योजना से जोड़ा जाएगा और ग्रेजुएशन पूरा होने पर मिनिमम एक लाख रुपये दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, 'दिल्ली लखपति बिटिया योजना के तहत हर बच्ची को, जो दिल्ली की निवासी है, जिसका परिवार दिल्ली में रहता होगा, घर में दो बच्चियों को इसका लाभ दिया जाएगा। हर बच्ची पर 20-20 हजार रुपये बढ़ाया जाएगा। पहले 36 हजार था, उसे हमने 56 हजार किया है। 12वीं में जाने पर नहीं, हमने मोटिवेट किया है कि ग्रेजुएशन करने पर मैच्योरिटी मिलती है। मेच्योरिटी पर मिनिमम एक लाख रुपये मिलेंगे।' दिल्ली लखपति बिटिया योजना की क्या-क्या शर्तें मुख्यमंत्री ने योजना की कुछ शर्तों की जानकारी देते हुए बताया कि योजना की लाभार्थी बच्चियों का वैक्सीनेशन होना जरूरी है। मान्यताप्राप्त स्कूल से पढ़ना जरूरी है और यदि 18 साल के उम्र से पहले शादी की जाती है तो लाभ नहीं मिलेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इसकी अनुमानित लागत 160 करोड़ रुपये आएगी, लेकिन यदि इससे अधिक भी लगे तो सरकार फंड को बढ़ाएगी। लाडली योजना क्यों बंद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली की बेटियों से जुड़ी लाडली योजना 2008 में शुरू हुई थी। बच्ची को अलग-अलग फेज में पैसे दिए जाते थे। उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार ने जब पता किया तो सामने आया कि करोड़ों रुपये बैंक के पास अनक्लेम्ड हैं। लाभार्थी को मिले ही नहीं। 1.86 लाख बेटियों को यह पैसा नहीं मिला। सरकार ने उन्हें खोजा। एक साल में ऐसी तीस हजार बच्चियों को खोजकर 90 करोड़ राशि दी है। अब 41 हजार बच्चियां और मिली हैं जिन्हें लगभग 100 करोड़ का फंड दिया जाएगा।  

केंद्र सरकार की योजना में उत्तर प्रदेश से 4 एक्सेलेरेटरों का चयन, राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी पहचान

लखनऊ.  केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेटी) की महत्वाकांक्षी “स्टार्टअप एक्सेलेरेटर ऑफ मेटी फॉर प्रोडक्ट इनोवेशन, डेवलपमेंट एंड ग्रोथ” (SAMRIDH) योजना में उत्तर प्रदेश ने प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। स्टार्टअप्स को नवाचार, उत्पाद विकास और विस्तार के लिए तैयार करने वाली इस योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश से चयनित एक्सेलेरेटरों और स्टार्टअप्स की संख्या यह संकेत देती है कि प्रदेश तेजी से देश के प्रमुख स्टार्टअप हब के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपनाई गई नीतियों का असर अब राष्ट्रीय स्तर पर साफ दिखने लगा है। योगी सरकार द्वारा केंद्र की योजनाओं का लाभ जमीन तक पहुंचाने के लिए प्रदेश स्तर पर लगातार समन्वय किया जा रहा है। एक्सेलेरेटरों और स्टार्टअप्स की निगरानी, मेंटरशिप और बाजार से जोड़ने की प्रक्रिया को मजबूत किया गया है, ताकि युवा उद्यमियों को केवल फंडिंग ही नहीं बल्कि स्थायी विकास का रास्ता भी मिल सके। समृद्ध को लेकर उत्तर प्रदेश से कुल 10 एक्सेलेरेटरों ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जमा किया था। इनमें से 4 एक्सेलेरेटरों का चयन किया गया। इन चयनित एक्सेलेरेटरों के माध्यम से प्रदेश के 35 स्टार्टअप्स को एक्सेलेरेशन सपोर्ट दिया गया, जिनमें से 27 स्टार्टअप्स फंडिंग प्राप्त करने में सफल रहे। उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप्स को इस योजना के तहत कुल 9.91 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई। यह राशि स्टार्टअप्स को उनके उत्पाद के विकास, बाजार विस्तार और तकनीकी मजबूती के लिए दी गई है। केंद्र सरकार की इस योजना में स्टार्टअप्स को अधिकतम 40 लाख रुपये तक की मैचिंग फंडिंग का प्रावधान है, जबकि प्रत्येक स्टार्टअप के लिए एक्सेलेरेटरों को भी वित्तीय सहयोग दिया जाता है। प्रदेश सरकार का मानना है कि बीते कुछ वर्षों में स्टार्टअप्स के लिए बनाए गए अनुकूल माहौल का ही यह परिणाम है कि उत्तर प्रदेश अब केवल उपभोक्ता राज्य नहीं बल्कि नवाचार और उद्यमिता का मजबूत केंद्र बन रहा है। नई स्टार्टअप नीति, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को बढ़ावा, इन्फ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास और सिंगल विंडो सिस्टम जैसी पहल युवाओं को उद्यम के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। समृद्ध योजना के अंतर्गत हेल्थ टेक, एजुकेशन टेक, एग्री टेक, फिनटेक, सॉफ्टवेयर सर्विस और कंज्यूमर टेक जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे स्टार्टअप्स को समर्थन दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप्स की इन सेक्टर्स में सक्रिय भागीदारी यह दिखाती है कि राज्य की अर्थव्यवस्था अब पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर ज्ञान और तकनीक आधारित मॉडल की ओर अग्रसर है।

राजस्थान में सर्दी हुई फीकी, तापमान सामान्य से अधिक

जयपुर  कुछ दिनों पहले तक राजस्थान के मौसम की तस्वीरों में बर्फ से जमे खेत-खलिहान दिखाई दे रहे थे लेकिन अब यहां भर सर्दी में गर्मी के जैसा एहसास होने लगा है। यहां मौसम अब धीरे-धीरे गर्म होने लगा है। प्रदेश के कई हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से 2 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है। दिन में तेज धूप के कारण लोगों को हल्की गर्मी का एहसास होने लगा है। सोमवार को बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर समेत प्रदेश के 8 शहरों में अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया गया। बाड़मेर में सबसे अधिक तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। इसके अलावा जैसलमेर, जोधपुर और बीकानेर में 30.6 डिग्री, फलोदी और जवाई (पाली) में 30.2, डूंगरपुर में 30.1, जालौर में 30 और चित्तौड़गढ़ में 30.6 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। अन्य शहरों की बात करें तो भीलवाड़ा में 29.3, जयपुर में 27, अजमेर में 28.4, पिलानी में 26.9, सीकर में 27.4, उदयपुर में 29.5, कोटा में 27.9, चूरू में 29.8, गंगानगर में 26.3 और नागौर में 29.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इन सभी स्थानों पर तापमान औसत से करीब 2 डिग्री अधिक रहा। रात की सर्दी से मिलने लगी राहत दिन के साथ-साथ अब रात के तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। जैसलमेर, फलोदी और बीकानेर में न्यूनतम तापमान 14 से 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। डूंगरपुर में 14.9, बीकानेर में 15.3, जैसलमेर में 14.6, जयपुर में 13.7 और प्रतापगढ़ में 13.6 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज हुआ। सबसे ठंडा इलाका पाली रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। अगले कुछ दिन मौसम साफ मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार प्रदेश में अगले 3 से 4 दिनों तक मौसम साफ रहेगा और तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। पिछले 24 घंटों में उत्तरी जिलों को छोड़कर अधिकांश इलाकों में आसमान साफ रहा और तेज धूप खिली रही।

बिहान योजना से पंचबाई की बदली तकदीर, बनी सफल व्यवसायी

रायपुर. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी क्रम में  मुंगेली जिले के विकासखण्ड लोरमी के ग्राम खपरीडीह निवासी श्रीमती पंचबाई साहू ने बिहान योजना से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में सफलता प्राप्त की है। बिहान योजना से जुड़कर उन्होंने अपनी तकदीर बदली है, अब वे सफल व्यसायी बन चुकी है। स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पूर्व पंचबाई साहू की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर थी। परिवार की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उन्हें साहूकारों से ऊँचे ब्याज दर पर ऋण लेना पड़ता था। आर्थिक निर्भरता के कारण न केवल परिवार की बुनियादी ज़रूरतें अधूरी रह जाती थीं, बल्कि आत्मसम्मान भी प्रभावित होता था।        श्रीमती  पंच बाई ने बताया कि बिहान योजना के अंतर्गत माँ सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से उन्हें वित्तीय साक्षरता, सामूहिक सहयोग और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला। उन्होंने व्यवसाय के लिए रिवॉल्विंग फंड से 15 हजार रूपए, बैंक ऋण 01 लाख 50 हजार रूपए और 60 हजार रूपए सीआईएफ राशि प्राप्त हुई। साथ ही समूह के स्तर पर उन्हें 30 हजार रूपए का अतिरिक्त सहयोग भी मिला। प्राप्त राशि से उन्होंने फर्नीचर दुकान की शुरुआत की। परिश्रम, सही योजना और समूह के सहयोग से उनका व्यवसाय निरंतर आगे बढ़ता गया। आज उनकी मासिक आय लगभग 2.5 लाख रूपए से 03 लाख रूपए तक पहुँच चुकी है। इससे उनके बच्चों की शिक्षा बेहतर होने के साथ-साथ जीवन स्तर में सुधार आया है। श्रीमती पंचवाई साहू आज केवल स्वयं सफल नहीं हैं, बल्कि ग्राम की अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

सबक्लेवियन आर्टरी कटने के बावजूद अत्यंत जटिल सर्जरी से बचाया गया मरीज का हाथ

रायपुर. मेडिकल कॉलेज अस्पताल रायपुर के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग की एक और बड़ी सफलता, चाकू से कटी मुख्य धमनी, सबक्लेवियन आर्टरी को जोड़कर बचाया युवक का हाथ पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा), रायपुर के डॉक्टरों ने एक बार फिर जटिल और जानलेवा केस की जटिल एवं सफलतापूर्वक  सर्जरी कर घायल मरीज के हाथ को कटने से बचाया। डॉक्टरों के अनुसार, यदि मरीज को समय पर इस प्रकार की जटिल शल्य- चिकित्सा की सुविधा नहीं मिलती तो मरीज के हाथ कटने की नौबत आ जाती और मरीज दिव्यांग हो जाता।  हार्ट- चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में एक युवक के कंधे पर चाकू से हुए हमले में बुरी तरह क्षतिग्रस्त मुख्य रक्त नली (सबक्लेवियन आर्टरी) को जोड़कर डॉक्टरों की टीम ने न केवल मरीज की जान बचाई, बल्कि उसका हाथ कटने से भी बचा लिया। इस सर्जरी की एक और विशेष बात यह रही कि इसमें ऑर्थोपेडिक सर्जन भी शामिल रहे जिनकी मदद से कॉलर बोन को काटा गया एवं ऑपरेशन के बाद वापस प्लेट लगाकर जोड़ दिया गया।   इस केस की विस्तृत जानकारी देते हुए विभागाध्यक्ष (हार्ट- चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी) डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि :- अम्बेडकर अस्पताल के ट्रॉमा यूनिट में 34 वर्षीय एक मरीज अत्यधिक रक्तस्राव और मरणासन्न अवस्था में लाया गया। मरीज  इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी में काम करता है और अमलेश्वर का निवासी है। परिजनों के अनुसार, मरीज अपने परिवार के साथ मोटरसाइकिल से रायपुर रेलवे स्टेशन की ओर जा रहा था, तभी इलेक्ट्रिक रिक्शा से टक्कर हो गई। विवाद के दौरान रिक्शा चालक ने मरीज के बाएं कंधे पर धारदार चाकू से हमला कर दिया। घाव इतना गहरा था कि कंधे की हड्डी (क्लेविकल बोन) के पीछे से गुजरने वाली मुख्य धमनी सबक्लेवियन आर्टरी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। चोट लगते ही धमनी से खून का तेज फव्वारा निकलने लगा और कुछ ही देर में मरीज बेहोश हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह उसे अम्बेडकर अस्पताल के आपातकालीन विभाग पहुंचाया, जहां घाव में कॉटन गॉज भरकर रक्तस्राव को अस्थायी रूप से रोका गया। हालांकि रक्तस्राव रुकने के साथ ही बाएं हाथ में रक्त प्रवाह भी बंद हो गया, जिससे हाथ काला पड़ने लगा और ताकत खत्म होने लगी। समय पर ऑपरेशन न होने की स्थिति में हाथ काटने की नौबत आ सकती थी। प्रारंभिक उपचार के बाद मरीज के परिजन उसे अपनी इच्छा से अन्य अस्पतालों में लेकर गए, लेकिन चोट की गंभीरता और धमनी के क्षतिग्रस्त होने के कारण अन्य अस्पतालों ने इलाज से मना कर दिया। इसके बाद मरीज को पुनः अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में लाया गया, जहां मेरे (डॉ. कृष्णकांत साहू के) नेतृत्व में तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया गया। अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी सबक्लेवियन आर्टरी की सर्जरी विशेष रूप से उसके दूसरे भाग (सेकंड पार्ट) में बेहद चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि यह धमनी छाती के भीतर कॉलर बोन के पीछे स्थित रहती है। पट्टी हटाते ही अत्यधिक रक्तस्राव की आशंका बनी हुई थी, जिसके लिए वैस्कुलर कंट्रोल अत्यंत आवश्यक था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निर्णय लिया गया कि मरीज की कॉलर बोन को काटकर धमनी तक पहुंच बनाई जाए। कॉलर बोन को काटने के बाद पाया गया कि धमनी लगभग 3 सेमी तक पूरी तरह क्षत-विक्षत हो चुकी थी। इसे जोड़ने के लिए 7×30 मिमी. साइज का डेक्रॉन ग्राफ्ट (कृत्रिम नस) लगाया गया। सर्जरी के दौरान लगभग 5 यूनिट रक्त चढ़ाया गया और करीब 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हाथ में पुनः रक्त प्रवाह शुरू हो सका। इस दौरान ब्रैकियल प्लेक्सस (तंत्रिका तंत्र) को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया, क्योंकि इसमें क्षति होने पर हाथ में स्थायी लकवे की संभावना रहती है। ऑपरेशन के बाद कॉलर बोन को प्लेट लगाकर वापस जोड़ दिया गया अब पूरी तरह स्वस्थ, काम पर लौटा मरीज सफल ऑपरेशन और समय पर उपचार के चलते मरीज का हाथ बच गया और गैंगरीन की स्थिति टल गई। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और अपने रोजमर्रा के कार्यों में वापस लौट चुका है। इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने वाली टीम में हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू, ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. प्रणय वास्तव, डॉ लोमेश साहू,  एनेस्थेटिस्ट डॉ. संकल्प दीवान, डॉ. बालस्वरूप साहू, जूनियर डॉक्टर – डॉ. आयुषी खरे, ख्याति, , आकांक्षा साहू, संजय त्रिपाठी, डॉ. ओमप्रकाश शामिल रहे। नर्सिंग स्टाफ में राजेन्द्र, नरेन्द्र, मुनेश, चोवा, दुष्यंत तथा एनेस्थेसिया तकनीशियन भूपेन्द्र और हरीश ने अहम भूमिका निभाई। यह सफलता न केवल अम्बेडकर अस्पताल बल्कि सभी के लिए गर्व का विषय है, जो यह साबित करती है कि समय पर सही निर्णय, समेकित प्रयास और विशेषज्ञ चिकित्सा से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। डॉ. विवेक चौधरी, डीन, पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर यह सर्जरी अत्यंत जटिल और जोखिम भरी थी। सबक्लेवियन आर्टरी जैसी बड़ी और महत्वपूर्ण धमनी की मरम्मत प्रत्येक अस्पताल में संभव नहीं होती। अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग, ट्रॉमा यूनिट और एनेस्थेसिया टीम के समन्वित प्रयास से यह संभव हो सका। यह प्रयास यह दर्शाती है कि सरकारी अस्पतालों में भी उच्चस्तरीय और जीवन रक्षक उपचार सुविधा उपलब्ध है। डॉ. संतोष सोनकर, अधीक्षक, अम्बेडकर अस्पताल

तेज भूकंप से नेपाल में दहशत, प्रशासन अलर्ट

ताप्लेजंग, नेपाल पूर्वी नेपाल के ताप्लेजंग जिले में मंगलवार तड़के चार तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र (NEMRC) के अनुसार, भूकंप मंगलवार सुबह 2 बजकर 47 मिनट पर आया।भूकंप का केंद्र ताप्लेजंग जिले के कंचनजंगा क्षेत्र में स्थित था। झटकों के बाद स्थानीय लोगों में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई और कई लोग घरों से बाहर निकल आए। अधिकारियों के मुताबिक, भूकंप के झटके ताप्लेजंग के अलावा पूर्वी नेपाल के अन्य जिलों में भी महसूस किए गए। हालांकि, अब तक किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान या संपत्ति क्षति की कोई सूचना नहीं मिली है। प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। नेपाल भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आता है, जहां समय-समय पर इस तरह की गतिविधियां दर्ज की जाती रही हैं।