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प्रधानमंत्री आवास योजना: 10 माह में जिले में कुल 27 हजार 441 आवासों का निर्माण पूर्ण

महासमुंद महासमुंद जिले ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के प्रभावी एवं त्वरित क्रियान्वयन के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत मात्र 10 माह की अवधि में जिले में कुल 27 हजार 441 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। जिसके आधार पर महासमुंद जिला राज्य स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया है। जिले में निर्मित कुल 27,441 आवासों में विभिन्न विकासखंडों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पिथौरा विकासखंड में सर्वाधिक 7,193 आवास, बागबाहरा विकासखंड में 6,102 आवास, महासमुंद विकासखंड अंतर्गत 5,775 आवास, सरायपाली विकासखंड अंतर्गत 5,062 आवास तथा बसना विकासखंड में 3,309 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप जिला प्रशासन द्वारा गरीब, वंचित एवं जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसी दिशा में प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं स्थायी आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उनके जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। योजना के क्रियान्वयन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। जिले में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार के सतत निरीक्षण में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, जनप्रतिनिधियों तथा मैदानी अमले के सतत प्रयासों, नियमित निगरानी एवं प्रभावी समन्वय के चलते यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। हितग्राहियों को समय पर तकनीकी मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता एवं निर्माण सामग्री उपलब्ध कराकर कार्यों में गति लाई गई। जिले में आवास निर्माण की इस उपलब्धि से हजारों परिवारों का पक्के मकान का सपना साकार हुआ है। लाभान्वित परिवारों ने केन्द्र एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसके लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है। जिला प्रशासन द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के लक्ष्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने निरंतर समन्वय के साथ क्रियान्वयन किया जा रहा है। ताकि कोई भी पात्र परिवार आवास सुविधा से वंचित न रहे।

एक्सेल एंटरटेनमेंट ने रणवीर सिंह के ‘डॉन 3’ छोड़ने पर बतौर मुआवजा 40 करोड़ रुपये की मांग की

नई दिल्ली,  रणवीर सिंह ने 'डॉन 3' फिल्म छोड़ दी है और इसके बाद एक्सेल एंटरटेनमेंट ने उनसे 40 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग की है। सूत्रों ने 'वैरायटी इंडिया' को बताया कि 'डॉन 3' के प्रोजेक्ट से अचानक से अभिनेता के बाहर होने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। फिल्म जगत के कई सूत्रों ने बताया कि एक्सेल एंटरटेनमेंट का दावा है कि सिंह के फिल्म छोड़ने से उन्हें भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। इसमें विकास कार्य पर हुआ खर्च और शेड्यूलिंग, प्लानिंग तथा अन्य प्री-प्रोडक्शन प्रतिबद्धताओं से जुड़ी देरी शामिल है। 'वैरायटी इंडिया' को एक ऐसा पत्र भी मिला है, जिससे पता चलता है कि प्रोडक्शन हाउस ने विभिन्न विभागों के प्रमुखों से इस प्रोजेक्ट के बाहर काम खोजने को कहा है। सूत्रों का कहना है कि बैनर का मानना है कि रणवीर सिंह को कंपनी के हुए नुकसान की भरपाई करनी चाहिए। हालांकि, कहा जा रहा है कि सिंह इस दावे का कड़ा विरोध कर रहे हैं और उनका तर्क है कि वह किसी भी राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। अभिनेता के करीबी लोगों ने कहा है कि रणवीर का तर्क है कि उन्होंने अतीत में भी कई प्रोजेक्ट छोड़े हैं और तब ऐसी मुआवजे की मांग का सामना नहीं करना पड़ा, इसलिए इस मामले को अलग तरह से नहीं देखा जाना चाहिए। नाम न छापने की शर्त पर, एक सूत्र ने 'वैरायटी इंडिया' को बताया, "रणवीर का दावा है कि उन्होंने यह प्रोजेक्ट इसलिए छोड़ा, क्योंकि वे पटकथा से खुश नहीं थे। वे लगातार बदलावों की मांग कर रहे थे और उन्हें फाइनल ड्राफ्ट पसंद नहीं आया। दूसरी ओर एक्सेल का दावा है कि उन्होंने प्री-प्रोडक्शन का काम रणवीर सिंह की हरी झंडी मिलने के बाद ही शुरू किया था। पिछले शुक्रवार को सिंह और एक्सेल एंटरटेनमेंट के प्रतिनिधियों के बीच दो घंटे की बैठक के दौरान विवाद पर चर्चा हुई, लेकिन कथित तौर पर बातचीत बिना समाधान के समाप्त हो गयी। अंदरूनी सूत्रों ने इस बैठक को 'विवादास्पद' बताया, जिसमें दोनों पक्षों ने प्रोजेक्ट के पटरी से उतरने के लिए जवाबदेही और वित्तीय जिम्मेदारी पर असहमति जतायी। फिलहाल दोनों पक्षों में बढ़ते तनाव को कम करने और मामला सुलझाने के लिए 'प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया' (पीजीआई) मध्यस्थता कर रही है।  

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने 283 जोड़ों को दिया आशीर्वाद

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की सराहनीय पहल छत्तीसगढ़ की साय सरकार की संवेदनशील और कल्याणकारी सोच का प्रतीक बनी मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत मंगलवार को राजिम के नवीन मेला मैदान में 283 जोड़ों का सामूहिक विवाह धूमधाम से संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक आयोजन के मुख्य अतिथि प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल रहे, जिन्होंने नवदंपतियों को आशीर्वाद प्रदान किया। अध्यक्षता राजिम विधायक  रोहित साहू ने की। राज्य सरकार की इस योजना ने जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक बोझ से मुक्ति दिलाई है, जो समाज के हर वर्ग के लिए वरदान साबित हो रही है। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि आज के दौर में बेटी की शादी हर परिवार के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई है, लेकिन छत्तीसगढ़ की साय सरकार की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ने इसे सुलझा दिया है। इस योजना के तहत प्रति जोड़े 50 हजार रुपये की सहायता दी जाती है, जिसमें 35 हजार रुपये वधु के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित होते हैं। शेष 15 हजार रुपये श्रृंगार सामग्री, व्यवस्था और अन्य खर्चों पर व्यय किए जाते हैं।  अग्रवाल ने कहा कि यह योजना जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक तरीके से बेटी का विवाह करने में सहारा देती है। पूरे रीति-रिवाजों के साथ एक साथ इतने जोड़ों का विवाह होना समाज के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग की सराहना की तथा नवदंपतियों को सुखी वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दीं। इस भव्य समारोह में राजिम विधानसभा क्षेत्र के 94, बिन्द्रनवागढ़ के 181 तथा कुरूद विधानसभा के 8 जोड़े शामिल हुए। राज्य सरकार की इस दूरदर्शी योजना ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को नई उम्मीद दी है। विधायक  रोहित साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना सरकार की जनकल्याणकारी भावना का जीवंत उदाहरण है। विवाह का आर्थिक बोझ अब बोझ नहीं, बल्कि खुशी का अवसर बन गया है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार माना। कलेक्टर  बीएस उइके ने बताया कि यह आयोजन पूरे प्रदेश में एक साथ हो रहा है, जो विश्व रिकॉर्ड के रूप में दर्ज होगा। 4 आत्मसमर्पित नक्सली बंधे विवाह बंधन में, मुख्यधारा में लौटकर सराहा राज्य सरकार की योजना योजना की सबसे प्रेरणादायक कहानी रही चार आत्मसमर्पित नक्सली जोड़ों की। कांकेर, सुकमा और बीजापुर जिले से इन जोड़ों ने मुख्यधारा में लौटकर नई जिंदगी अपनाई है। इनमें दिलीप उर्फ संतु, मंजुला उर्फ लखमी, दीपक उर्फ भीमा मंडावी, सुनीता उर्फ जुनकी, कैलाश उर्फ भीमा, रनीता उर्फ पायकी कारम तथा राजेंद्र उर्फ कोसा मुरिया, जैनी उर्फ देवे मड़कम शामिल हैं। विवाह मंत्रोचार के बीच विवाह बंधन में बंधे इन नवदंपतियों ने राज्य सरकार की पुनर्वास नीतियों की तारीफ की। नक्सली जोड़ों ने मीडिया से कहा कि मुख्यधारा में जुड़ने के बाद हमें नई जिंदगी मिली है। इस योजना से जीवनसाथी के साथ खुशहाल भविष्य का सपना साकार हो रहा है। इस अवसर पर कलेक्टर  बीएस उइके, पुलिस अधीक्षक  वेदव्रत सिरमौर, जिला पंचायत सीईओ  प्रखर चंद्राकर, जिला कार्यक्रम अधिकारी  अशोक पाण्डेय के अलावा पूर्व विधायक  संतोष उपध्याय, राजिम नगर पालिका अध्यक्ष  महेश यादव, विभिन्न जनपद पंचायतों के अध्यक्षगण मती इंद्राणी साहू, मती मीरा ठाकुर,  सोहन धु्रव तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। जिला पंचायत अध्यक्ष  गौरीशंकर कश्यप ने भी संबोधित किया। राज्य सरकार की यह योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि सामाजिक एकता को मजबूत करने का कार्य भी कर रही है।

पंजाब पंचायत का नया फैसला: लव मैरिज पर रोक, नियम तोड़ने वालों के लिए सख्त कदम

अमृतसर  अमृतसर जिले के गांव धारीवाल में पंचायत ने लव मैरिज को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए गांव की सीमा में ऐसे विवाहों पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। पंचायत ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर स्पष्ट किया है कि यदि गांव का कोई युवक-युवती आपसी सहमति से लव मैरिज करते हैं तो उन्हें गांव से बाहर कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, संबंधित परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा और पंचायत की ओर से मिलने वाली सरकारी व सामाजिक सुविधाएं भी समाप्त कर दी जाएंगी।  पंचायत के प्रस्ताव में कहा गया है कि लव मैरिज करने वाले युवक-युवती या उनके परिवार को किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी। गांव के लोगों का तर्क है कि इससे पहले भी गांव में पांच से छह लव मैरिज के मामले सामने आ चुके हैं, जिनके बाद गांव का माहौल बिगड़ा। आपसी झगड़े, रंजिश, मारपीट और धमकियों की घटनाएं हुईं। कई मामलों में पुलिस थानों और अदालतों के चक्कर लगाने पड़े, जिससे गांव में तनाव का माहौल बना रहा। गांव के सरपंच मुख्तार सिंह ने बताया कि पंचायत ने यह फैसला गांव के सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने के लिए लिया है। उन्होंने कहा कि अब लव मैरिज से जुड़े किसी भी मामले में न तो गांव का कोई व्यक्ति अदालत में गवाही देगा और न ही पुलिस थानों में जाकर आरोपियों की जमानत कराएगा। ऐसे मामलों में लव मैरिज करने वालों का समर्थन करने वालों पर भी पंचायत कार्रवाई करेगी और परिवार को इसके परिणाम भुगतने होंगे। सरपंच ने यह भी कहा कि पंचायत समय-समय पर ऐसे मामलों में दोषियों को सजा देने जैसे कदम भी उठाएगी। यह निर्णय किसी एक वर्ग के दबाव में नहीं, बल्कि गांव के धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। पंचायत का दावा है कि इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को भटकाव से बचाना और गांव का माहौल शांतिपूर्ण बनाए रखना है। हालांकि, पंचायत के इस फैसले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे गांव की परंपराओं और सामाजिक अनुशासन से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कई इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मामला बता रहे हैं। बावजूद इसके, फिलहाल धारीवाल पंचायत अपने फैसले पर अडिग नजर आ रही है और गांव में इसका सख्ती से पालन कराने की बात कह रही है।

बठिंडा कोर्ट का एक्शन: कंचन कुमारी हत्याकांड में मुख्य आरोपी अमृतपाल सिंह मेहरों भगोड़ा

बठिंडा  डिजिटल कंटेंट क्रिएटर कंचन कुमारी उर्फ कमल कौर भाभी की हत्या के मामले में बठिंडा की एक स्थानीय अदालत ने सिख कट्टरपंथी नेता अमृतपाल सिंह मेहरों को भगोड़ा (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर – पीओ) घोषित कर दिया है। आरोपित बार-बार समन जारी होने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुआ, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई। अदालत ने बीती 7 फरवरी को मामले की सुनवाई करते हुए फरार आरोपित अमृतपाल सिंह मेहरों को पीओ घोषित किया। मेहरों इस हत्याकांड का मुख्य आरोपित है और वारदात के बाद जून 2025 में देश छोड़कर फरार हो गया था। पुलिस के अनुसार उसके वर्तमान में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में छिपे होने की आशंका है। इससे पहले अदालत ने बीती 1 दिसंबर 2025 को अमृतपाल सिंह मेहरों और उसके साथी व आरोपित रंजीत सिंह को गिरफ्तारी से बचने के आरोप में भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। मामले में मेहरों के तीन सहयोगी व आरोपित जसप्रीत सिंह, निर्मतजीत सिंह और रंजीत सिंह को गिरफ्तार किए जा चुके हैं। बठिंडा कैंट थाने के एसएचओ दलजीत ढिल्लों ने बताया कि उन्हें अदालत का आदेश प्राप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि अमृतपाल सिंह मेहरों के यूएई में छिपे होने की जानकारी है। राज्य सरकार व केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही है, ताकि इंटरपोल की मदद से उसे भारत प्रत्यर्पित करवाया जा सके। इंटरपोल को आवश्यक विवरण भेजे जा चुके हैं और आधिकारिक जवाब का इंतजार है। अधिकारिक सूत्रों ने स्पष्ट किया कि फिलहाल अदालत ने फरार आरोपित की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने का कोई आदेश जारी नहीं किया है। मेहरों मोगा जिले के मेहरों गांव का रहने वाला है। सूत्रों के अनुसार भगोड़ा घोषित किए जाने से इंटरपोल के जरिए रेड कार्नर नोटिस जारी करवाने में पुलिस को और मदद मिलेगी। पुलिस जांच के अनुसार आरोपित अमृतपाल सिंह मेहरों, जसप्रीत सिंह और निर्मतजीत सिंह ने साल 2025 की 9-10 जून की रात को कंचन कुमारी की गला घोंटकर हत्या कर दी थी। पुलिस का दावा है कि यह हत्या कंचन द्वारा इंटरनेट मीडिया पर डाली गई कथित आपत्तिजनक सामग्री को लेकर की गई, जिसे आरोपितों ने सिख समुदाय की भावनाओं के खिलाफ बताया। हत्या के बाद आरोपितों ने कंचन का शव बठिंडा के भुच्चों मंडी स्थित आदेश मेडिकल कालेज एवं अस्पताल की पार्किंग में उसकी कार में छोड़कर फरार हो गए थे। 11 जून की शाम शव बरामद हुआ, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस ने बताया कि फरार अमृतपाल सिंह मेहरों की मदद करने वाले रंजीत सिंह को बीती 6 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया है। रणजीत इस समय तीन दिन के पुलिस रिमांड पर है और उसे अदालत में पेश किया जाएगा। जसप्रीत सिंह और निर्मतजीत सिंह पहले ही गिरफ्तार होकर न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस के अनुसार रंजीत ने अमृतपाल सिंह मेहरों को अमृतसर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंचाने में मदद की थी, जहां से वह यूएई फरार हो गया।  

भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई: लाखों रुपये के घोटाले में तत्कालीन जनपद CEO गिरफ्त में

बलरामपुर जनपद पंचायत वाड्रफनगर के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्रवण मरकाम को पुलिस ने लाखों रुपये की शासकीय राशि हेराफेरी के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। बता दें कि आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे। पूरा मामला वाड्रफनगर पुलिस चौकी क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार वर्ष 2013-14 में श्रवण मरकाम वाड्रफनगर जनपद पंचायत में CEO के पद पर पदस्थ थे। इस दौरान कुटरचित दस्तावेज तैयार कर शासकीय राशि गबन का मामला सामने आया था। जांच में दोषी पाए जाने के बाद उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई। इस मामले में पूर्व में चार अन्य आरोपियों को भी जेल भेजा जा चुका है, जबकि अन्य संलिप्त आरोपियों की तलाश अभी जारी है। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इस प्रकरण को लेकर वाड्रफनगर पुलिस की जांच आगे भी जारी है। शासकीय धन के दुरुपयोग से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सान्निध्य में 6,412 जोड़ों का विवाह

रायपुर. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना छत्तीसगढ़ में सामाजिक समरसता, अंत्योदय और संवेदनशील शासन की भावना को साकार करने वाली ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि एक समय गरीब परिवारों के लिए बेटी का विवाह बड़ी चिंता का विषय होता था, जिसे इस योजना ने सम्मान और भरोसे में बदल दिया है। मुख्यमंत्री  साय राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय सामूहिक विवाह कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना : सामाजिक समरसता का विश्व रिकॉर्ड मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में रायपुर सहित पूरे प्रदेश में कुल 6,412 जोड़े विभिन्न धार्मिक परंपराओं एवं रीति-रिवाजों के अनुसार वैवाहिक जीवन में बंधे। साइंस कॉलेज मैदान में 1,316 नवविवाहित जोड़ों को मुख्यमंत्री ने प्रत्यक्ष रूप से आशीर्वाद प्रदान किया, जबकि अन्य जिलों के जोड़े वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। योजना के अंतर्गत प्रत्येक नवविवाहित दंपति को 35 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई। उल्लेखनीय है कि इस अभूतपूर्व आयोजन को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना : सामाजिक समरसता का विश्व रिकॉर्ड मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह आयोजन केवल विवाह समारोह नहीं, बल्कि सर्वधर्म समभाव और सामाजिक एकता का उत्सव है। इस वृहद आयोजन में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध तथा विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के जोड़े अपने-अपने रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह सूत्र में बंधे, जो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समरसता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सरगुजा एवं बस्तर संभाग के आठ जिलों में इस अभियान की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ और सुपोषित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए शासन के साथ-साथ समाज की सहभागिता आवश्यक है तथा अभियान की सफलता के बाद इसे पूरे प्रदेश में विस्तारित किया जाएगा। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेशवासियों के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने दो वर्षों में  ही मोदी की गारंटी के अधिकांश वादों को पूरा किया है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत 70 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता दी जा रही है। उन्होंने तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में मानक बोरा मूल्य में वृद्धि, चरण पादुका योजना का पुनः प्रारंभ, रामलला दर्शन योजना तथा भूमिहीन मजदूरों को आर्थिक सहायता जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का भी उल्लेख भी किया। महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में की गई थी, जिसे मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सतत प्रयासरत है और कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लक्ष्य में जनसहभागिता आवश्यक है। कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि एक ही दिन में हजारों जोड़ों का विवाह मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता और सर्वसमावेशी सोच का प्रमाण है। कार्यक्रम में विधायक  सुनील सोनी,  पुरंदर मिश्रा,  अनुज शर्मा,  मोतीलाल साहू,  संपत अग्रवाल, छत्तीसगढ़ बीज निगम के अध्यक्ष  चंद्रहास चंद्राकर तथा बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव मती शम्मी आबिदी, संचालक डॉ. रेणुका वास्तव अनेक जनप्रतिधि और अधिकारी कर्मचारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

नई दिल्ली में 17 फरवरी को होगी ‘एमपी की समीक्षा’, अमित शाह करेंगे समीक्षा सत्र

भोपाल  'केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 17 फरवरी को नई दिल्ली में सहकारिता सम्मेलन में समीक्षा करेंगे। इसमें राज्यों के सहकारिता विभागों के क्रियाकलापों की समीक्षा के साथ उनके नवाचारों पर भी चर्चा होगी।प्रदेश के सहकारिता विभाग ने भी इसकी तैयारी शुरू कर दी है।सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग भी इसमें शामिल होंगे। प्रजेंटेशन तैयार करने के निर्देश उन्होंने विभाग में किए गए नवाचार एवं उपलब्धियों से संबंधित प्रजेंटेशन तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा चाही गई बिन्दुवार जानकारी तैयार की जाए।  दी हिदायत भी इस बात का रखा जाए खास ख्याल जानकारी पूर्णत: अद्यतन हो, इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए। मंत्री ने कहा कि प्रजेंटेशन में सहकारिता विभाग की उपलब्धियों के साथ सीपीपीपी मॉडल, चीता, बीज और नवाचारों का भी समावेश किया जाए।

मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर. मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से कल यहां उनके निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार द्वारा जमीन की गाइडलाइन का पुनर्मूल्यांकन कर उसमें रियायत प्रदान करने के निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।  मुख्यमंत्री को गजमाला पहनाकर प्रतिनिधिमंडल ने उनका सम्मान किया। एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि इस निर्णय से रियल एस्टेट क्षेत्र को नई गति मिलेगी तथा आम नागरिकों को भी राहत प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार जनता के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। भूमि गाइडलाइन दरों में संशोधन करते हुए इस बात का ध्यान रखा गया है कि इससे आम नागरिकों, किसानों, व्यवसायियों सहित सभी वर्ग के लोगों को सहूलियत मिले। उन्होंने कहा कि नई गाडलाइन दरों से आर्थिक विकास को गति मिलेगी।  इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री महेंद्र आहूजा, श्री दीपक रहेजा, श्री राजीव अग्रवाल, श्री विजय पिंजानी, श्री अजय अग्रवाल, श्री प्रतीक अग्रवाल, श्री मुलकराज शर्मा, श्री रजत चाबड़ा, श्री विलास सुतार, श्री विनोद छितिजा, श्री विजय मोटवानी, श्री सनी सेवलानी तथा श्री गौरव खेतपाल सहित अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे।

कोरोना वॉरियर्स को बड़ी राहत: छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने जारी की वेरिफाइड लिस्ट

जगदलपुर छत्तीसगढ़ में शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और कोरोना काल के संकट मोचकों को उनके समर्पण का समुचित अवसर देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाया है। इस महत्वपूर्ण फैसले के तहत उन हजारों अभ्यर्थियों के अनुभव प्रमाण पत्रों की सत्यापित सूची सार्वजनिक कर दी गई है, जिन्होंने महामारी के कठिन दौर में छह माह से अधिक का समय अस्पतालों में निरंतर सेवा देते हुए व्यतीत किया था। संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा जारी इस ताजा अपडेट के बाद अब भर्ती प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ अपने अगले चरण में प्रवेश कर चुकी है। विभागीय जानकारी के अनुसार संभाग स्तरीय समितियों द्वारा 30 जनवरी से 8 फरवरी के बीच किए गए गहन भौतिक सत्यापन के परिणामों को आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जा रहा है। इस सूची के सार्वजनिक होते ही अब अभ्यर्थियों के लिए दावा-आपत्ति की खिड़की खुल गई है, जिसके तहत वे 16 फरवरी तक अपने संबंधित संभाग के संयुक्त संचालक कार्यालय में जाकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभ्यर्थी उसी क्षेत्र में अपना पक्ष रखें जहाँ से उनका अनुभव प्रमाण पत्र संबद्ध है, ताकि प्रक्रिया में किसी प्रकार की त्रुटि की गुंजाइश न रहे। यह प्रक्रिया आगामी 19 मार्च को अपने अंतिम मुकाम तक पहुँचेगी। संशोधित समय-सारणी के मुताबिक, 20 फरवरी तक प्राप्त आपत्तियों का त्वरित निराकरण किया जाएगा, जिसके पश्चात 3 मार्च को पहली मेरिट सूची का प्रकाशन होगा। इस चरण में भी अभ्यर्थियों को पुनर्विचार का मौका देने के बाद, आगामी 19 मार्च 2026 को आधिकारिक रूप से अंतिम चयन सूची वेबसाइट https://www.cghealth.nic.in/public/#/ पर साझा कर दी जाएगी।