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शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू: 9वीं से 12वीं तक बच्चों को प्रतिदिन 200 ग्राम दूध मिलेगा

चंडीगढ़ देसां म्ह देस हरियाणा, जित दूध-दही का खाना यह कहावत हरियाणा की खानपान संस्कृति और पौष्टिकता को दर्शाती है। हरियाणा में पहली बार सरकारी स्कूलों में 9वीं से 12वीं कक्षा के प्रति बच्चे को 200 ग्राम दूध सप्ताह में चार दिन मिलेगा। इसके अतिरिक्त एक मिल्कबार या पिन्नी भी शामिल की जाएगी। देश के भविष्य बच्चों के स्वास्थ्य के हितकारी कदम उठाने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मंजूरी के बाद यह लाभकारी योजना सरकारी स्कूलों में आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू हो जाएगी।  मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा के मार्गदर्शन में योजना को अमलीजामा पहनाने का ब्योरा तैयार किया गया है। अब योजना को बच्चों तक पहुंचाने के लिए आखिरी मंजूरी सीएम नायब सिंह सैनी ने दे दी है। मिड-डे-मील के तहत सरकारी स्कूलों में पोषण पदार्थ बच्चों को देने की व्यवस्था आठवीं कक्षा तक लागू है। 6.20 लाख बच्चों को मिलेगा लाभ प्रदेशभर में तकरीबन 14,300 सरकारी स्कूल संचालित है। वर्तमान में 9वीं से 12वीं कक्षा तक तकरीबन 6.20 लाख विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ऐसे में इस योजना का लाभ सभी बच्चों को मिलेगा। हालांकि, आगामी शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों की संख्या में कमी या वृद्धि होने के मद्देनजर योजना को लागू करने की तैयारी की गई है। 35 से 40 करोड़ रुपये की सालाना लागत शिक्षा विभाग के अनुसार इस योजना को लागू करने के लिए पैक्ड दूध की खरीद की जाएगी। इसके लिए खाद्य व आपूर्ति विभाग के साथ एमओयू साइन किया जाएगा। ताकि दूध की आपूर्ति की जिम्मेदारी विभाग की ओर से निर्धारित की जा सके। साथ ही स्कूल स्तर पर सप्ताह में चार दिन तक बच्चों को दूध के वितरण की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों की ओर से तय की जाएगी। बढ़ती उम्र में दूध के अनेक फायदे सप्ताह में चार दिन तक किसी बच्चे को 200 ग्राम (लगभग एक गिलास) दूध देने से कई महत्वपूर्ण फायदे मिल सकते हैं, खासकर बढ़ती उम्र में यह और भी आवश्यक है। यदि किसी बच्चे को दूध से एलर्जी या पाचन समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। दूध में कैल्शियम और विटामिन डी होता है जो हड्डियों की मजबूती और सही लंबाई बढ़ाने में मदद करता है। प्रोटीन, विटामिन-बी और अच्छे फैट्स बच्चों की याददाश्त, एकाग्रता और मानसिक विकास में सहायक होते हैं। दूध से मिलने वाला प्रोटीन मांसपेशियों के विकास और रोजमर्रा की ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। वहीं, दूध में मौजूद पोषक तत्व बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाते हैं जिससे वे जल्द बीमार नहीं पड़ते और नियमित दूध से जरूरी पोषण मिलता है जिससे कमजोरी व पोषण की कमी कम होती है। -डॉ. सनी मेहता, जीएमएसएच-16, चंडीगढ़।

छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक दिन: बस्तर में 280 जोड़े बने हमसफ़र, सिटी ग्राउंड में बना विश्व कीर्तिमान

जगदलपुर बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर का प्रतिष्ठित सिटी ग्राउंड मंगलवार 10 फरवरी को एक ऐतिहासिक और भव्य नजारे का गवाह बना, जहां मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 280 जोड़ों ने एक ही मंडप के नीचे अपने नव-दाम्पत्य जीवन की सामूहिक शुरुआत की। जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित इस गरिमामय समारोह ने उस वक्त और भी गौरव हासिल कर लिया, जब पूरे प्रदेश में एक साथ 6,412 जोड़ों का विवाह संपन्न कराकर छत्तीसगढ़ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। इसी कड़ी में जगदलपुर का यह आयोजन अपनी पारंपरिक भव्यता और सांस्कृतिक छटा के कारण आकर्षण का केंद्र रहा। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना समारोह का आगाज एक भव्य बारात के साथ हुआ, जिसमें 280 वरों के साथ उनकी माताएं हाथों में कलश और दीप लेकर परंपरा अनुसार चल रही थीं। बस्तर की पारंपरिक बाजा मोहरी की सुमधुर स्वर लहरियों के बीच निकली इस बारात ने पूरे शहर को उल्लास से भर दिया। विवाह मंडप में हरिद्रालेपन, सप्तपदी और जयमाला जैसी रस्में पूरी श्रद्धा के साथ संपन्न हुईं और हवन से उठने वाले सुगंधित द्रव्यों ने समूचे वातावरण को महका दिया। नव-वधुओं ने वरों के साथ एकसूत्र में बंधकर नए जीवन का संकल्प लिया, जिससे सिटी ग्राउंड का माहौल अत्यंत भावुक और उत्साहजनक हो गया। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़कर नव विवाहित जोड़ों को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में योजना की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह योजना गरीब माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ा सहारा है। उन्होंने पुरानी यादों को साझा करते हुए बताया कि पूर्व में निर्धन परिवारों को बेटियों के सम्मानजनक विवाह के लिए अपनी संपत्ति तक गिरवी रखनी पड़ती थी, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन ने 2005 में इस जिम्मेदारी को उठाया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्ष 2005 में मात्र 5 हजार रुपये की सहायता राशि से शुरू हुई यह योजना आज 50 हजार रुपये तक पहुँच चुकी है, जो गरीब परिवारों के सशक्तिकरण का प्रतीक है। कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि और विशिष्ट अतिथि इस पुनीत कार्य के साक्षी बने, जिनमें महापौर श्री संजय पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, नगर निगम सभापति श्री खेमसिंह देवांगन, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री बलदेव मंडावी और जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री पदलाम नाग शामिल थे। इन सभी ने नव-दंपत्तियों को सुखमय दाम्पत्य जीवन की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर सुश्री नंदिनी साहू, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग श्री मनोज सिन्हा सहित अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की सक्रिय मौजूदगी में यह विशाल आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

अमृतपाल फाजिल्का जल्द भारत लौटेंगे, पिता का खुलासा: पाकिस्तान में सिर्फ 20 मिनट हुई बातचीत

फाजिल्का फाजिल्का जिले के जलालाबाद के साथ लगते गांव खैरे की उताड़ का रहने वाला अमृतपाल अब भारत वापिस लौट रहा है। इस बात की पुष्टि उसके पिता जगराज सिंह ने की है। उनका कहना है कि पाकिस्तान जेल में बंद उसके बेटे से उनकी 20 मिनट बात हुई है। फाजिल्का सेक्टर के किसान अमृतपाल की जल्द रिहाई की खबर सामने आ रही है। सरहदी गांव खैरेके उताड़ का किसान अमृतपाल 21 जून, 2025 को अनजाने में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंच गया था। किसान के पिता जगराज सिंह के अनुसार, अमृतपाल खेत में चूहों को बेहोश करने वाली दवा का छिड़काव कर रहा था। दवा के असर और उसके बाद चाय पीने की वजह से उसे चक्कर आने लगे और बेहोशी की हालत में वह गलती से पाक सीमा में दाखिल हो गया। वहां उसे पाकिस्तानी रेंजर्स ने हिरासत में लेकर कंगनपुर के अस्पताल में दाखिल कराया था। बीते दिन पाकिस्तान की जेल में बंद पंजाब के 7 लोगों की सजा पूरी होने के बाद रिहाई की गई है, जिनकी अंबेसी बुधवार को क्लीयर हो गई थी। जगराज सिंह के अनुसार अमृतपाल के केस की अंबेसी शुक्रवार को क्लीयर हो चुकी है और किसी भी समय अमृतपाल की रिहाई हो सकती है। पंजाब के 7 लोगों की सजा पूरी जगराज सिंह के अनुसार अमृतपाल खेत में चूहों को बेहोश करने वाली दवा का छिड़काव कर रहा था। दवा के असर और उसके बाद चाय पीने की वजह से उसे चक्कर आने लगे और बेहोशी की हालत में वह गलती से पाक सीमा में दाखिल हो गया। उसे पाकिस्तानी रेंजर्स ने हिरासत में ले लिया था। गत दिन पाकिस्तान की जेल में बंद पंजाब के 7 लोगों की सजा पूरी होने के बाद रिहाई की गई है, जिनकी एंबेसी बुधवार को क्लियर हो गई थी। जगराज सिंह के अनुसार अमृतपाल के की एंबेसी शुक्रवार को क्लियर हो चुकी है और किसी भी समय अमृतपाल की रिहाई हो सकती है। पाक की कोर्ट ने लगाया 50 हजार जुर्माना पाकिस्तानी पुलिस ने बॉर्डर क्रॉसिंग का केस दर्ज कर अमृतपाल को कोर्ट में पेश किया था। पाक की कोर्ट ने अमृतपाल को एक महीने के कारावास और 50 हजार के जुर्माने की सजा सुनाई थी, जो पूरी हो चुकी है। रिहाई की खबर मिलते ही अमृतपाल के परिवार ने इस खबर पर राहत की सांस ली। जेल अफसरों की निगरानी में हुई बात अमृतपाल के पिता जगराज सिंह के अनुसार 4 फरवरी को अमृतपाल ने पाक जेल से फोन पर जानकारी दी है कि उसकी एंबेसी क्लियर हो चुकी और शीघ्र ही रिहाई की संभावना है। उन्होंने बताया कि पाक जेल में बंद भारतीय कैदियों को जेल अफसरों की निगरानी में परिवार के साथ हर बुधवार को 20 मिनट तक बात करने की इजाजत होती है, इसी के तहत अमृतपाल से उनकी बात हुई है। एक महीने की जेल, 50 हजार जुर्माने की सजा पाकिस्तानी पुलिस ने बॉर्डर क्रॉसिंग का केस दर्ज कर अमृतपाल को अदालत में पेश किया था। पाक की अदालत ने अमृतपाल को एक महीने के कारावास और 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी, जो अब पूरी हो चुकी है। पाकिस्तानी वकील सुहैल अंसारी अमृतपाल का केस नि:शुल्क लड़ रहे हैं। उन्होंने हाल ही में किसान से जेल में मुलाकात कर उनका एक 15 सेकेंड का वीडियो परिवार को भेजा था, जिसमें अमृतपाल ने खुद के बिल्कुल ठीक होने की बात कही थी। अमृतपाल की सजा की अवधि और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अब उसकी रिहाई और वतन वापसी का रास्ता साफ होता दिख रहा है। ताजा घटनाक्रम के अनुसार, कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद किसी भी समय उसे बीएसएफ के हवाले किया जा सकता है, जिससे उसके परिवार का लंबा इंतजार खत्म होगा। कोट लखपत जेल में बंद है अमृतपाल पिछले कुछ समय से पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में बंद है। उसकी गिरफ्तारी के बाद से ही भारतीय सीमा सुरक्षा बल और स्थानीय प्रशासन निरंतर पाकिस्तानी अधिकारियों के संपर्क में थे। फ्लैग मीटिंग और कूटनीतिक बातचीत के जरिए उसकी रिहाई के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे थे। रिहाई की खबर मिलते ही फाजिल्का सेक्टर में सुरक्षा और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। परिजनों में खुशी की लहर अमृतपाल के परिवार ने इस खबर पर राहत की सांस ली है और उनके स्वागत की भव्य तैयारी शुरू कर दी है। जगराज सिंह के अनुसार 4 फरवरी को अमृतपाल ने पाक जेल से फोन पर जानकारी दी है कि उसकी अंबेसी क्लीयर हो चुकी है और शीघ्र ही रिहाई की संभावना है। उन्होंने बताया कि पाक जेल में बंद भारतीय कैदियों को जेल अफसरों की निगरानी में परिवार के साथ हर बुधवार 20 मिनट बात करने की इजाजत होती है।

बजरंगपुरी में आग का तांडव: कबाड़ दुकान समेत उत्सव हॉल राख, भारी आर्थिक नुकसान

पटना पटना सिटी के आलमगंज थाना क्षेत्र के बजरंगपुरी में मंगलवार की सुबह एक कबाड़ की दुकान में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग पास के उत्सव हॉल तक फैल गई। आसपास के लोगों के मुताबिक, इस आग में लाखों रुपये की संपत्ति जलकर नष्ट हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत डायल 112 पुलिस को इसकी सूचना दी। जानकारी मिलते ही अग्निशमन दस्ते की छोटी-बड़ी करीब 10 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने में जुट गईं। जानें क्या कहा अधिकारी गयानंद सिंह ने इस मामले में अग्निशमन दस्ते के अधिकारी गयानंद सिंह ने बताया कि दमकल के सभी कर्मचारी आग पर काबू पाने में लगे हुए हैं। आग कैसे लगी, इसकी वजह का भी पता लगाया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बजरंगपुरी मोहल्ले में एक कबाड़ की दुकान के पीछे से अचानक तेज धुआं उठने लगा। पहले लोगों को लगा कि शायद कबाड़ की दुकान में कोई सामान जलाकर बेचने का काम हो रहा है। लेकिन कुछ ही देर में आग की लपटें तेज हो गईं और पास के कम्युनिटी हॉल को भी अपनी चपेट में ले लिया।   मचा इलाके में हड़कंप कम्युनिटी हॉल में आग लगते ही आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। आसपास रहने वाले लोग अपने-अपने घरों से सामान निकालने लगे, खासकर गैस सिलेंडर को सुरक्षित जगह पर ले जाने में जुट गए। इसी बीच लोगों ने डायल 112 को फोन कर आग लगने की जानकारी दी। सूचना मिलते ही डायल 112 की गाड़ी मौके पर पहुंची। इसके बाद स्थानीय लोगों ने पटना सिटी के अग्निशमन कार्यालय को भी इसकी जानकारी दी। बताया जा रहा है कि अग्निशमन विभाग की छोटी-बड़ी करीब 10 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिश में जुट गईं। स्थानीय निवासी मुकेश कुमार ने बताया कि चंद्रमणि उत्सव पैलेस में शादी-ब्याह के मौसम में अक्सर कार्यक्रम होते रहते हैं, लेकिन सोमवार की रात वहां कोई कार्यक्रम नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर उस समय कोई शादी का कार्यक्रम चल रहा होता, तो नुकसान और भी ज्यादा हो सकता था।  

गरीबी से कारोबार तक का सफर: बिहान योजना से सशक्त बनी पंचबाई, हर महीने कमा रही ₹3 लाख

रायपुर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी क्रम में  मुंगेली जिले के विकासखण्ड लोरमी के ग्राम खपरीडीह निवासी पंचबाई साहू ने बिहान योजना से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में सफलता प्राप्त की है। बिहान योजना से जुड़कर उन्होंने अपनी तकदीर बदली है, अब वे सफल व्यसायी बन चुकी है।  स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पूर्व पंचबाई साहू की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर थी। परिवार की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उन्हें साहूकारों से ऊँचे ब्याज दर पर ऋण लेना पड़ता था। आर्थिक निर्भरता के कारण न केवल परिवार की बुनियादी ज़रूरतें अधूरी रह जाती थीं, बल्कि आत्मसम्मान भी प्रभावित होता था। पंच बाई ने बताया कि बिहान योजना के अंतर्गत माँ सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से उन्हें वित्तीय साक्षरता, सामूहिक सहयोग और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला। उन्होंने व्यवसाय के लिए रिवॉल्विंग फंड से 15 हजार रूपए, बैंक ऋण 01 लाख 50 हजार रूपए और 60 हजार रूपए सीआईएफ राशि प्राप्त हुई। साथ ही समूह के स्तर पर उन्हें 30 हजार रूपए का अतिरिक्त सहयोग भी मिला।  प्राप्त राशि से उन्होंने फर्नीचर दुकान की शुरुआत की। परिश्रम, सही योजना और समूह के सहयोग से उनका व्यवसाय निरंतर आगे बढ़ता गया। आज उनकी मासिक आय लगभग 2.5 लाख रूपए से 03 लाख रूपए तक पहुँच चुकी है। इससे उनके बच्चों की शिक्षा बेहतर होने के साथ-साथ जीवन स्तर में सुधार आया है। पंचवाई साहू आज केवल स्वयं सफल नहीं हैं, बल्कि ग्राम की अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

दिल्ली-अंबाला रेल मार्ग में सुधार: Indian Railways के सिग्नल सिस्टम के लिए 421.41 करोड़ का बजट मंजूर

अंबाला  रेलवे ने अपने नेटवर्क को हाई-टेक बनाने और रेल हादसों पर लगाम लगाने की दिशा में पहल करते हुए रेल मंत्रालय ने उत्तर रेलवे के अंतर्गत दो महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। इस योजना के तहत दिल्ली और अंबाला रेल मंडल के व्यस्त रूटों पर सिग्नलिंग सिस्टम को आधुनिक बनाया जाएगा। मंत्रालय ने इसके लिए 421.41 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है।  रेलवे के उच्च घनत्व (एचडीएन) और अत्यधिक उपयोग वाले नेटवर्क (एचयूएन) पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की सुविधा दी जाएगी। खास बात यह है कि यह अपग्रेड उन स्टेशनों पर किया जा रहा है जहां स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच पहले से ही स्वीकृत है। दिल्ली रेल मंडल के अधीन हाई डेंसिटी रूट के 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाया जाएगा। इसके लिए 292.24 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसी प्रकार अंबाला रेल मंडल के अधीन 13 स्टेशनों को इस आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा। इस पर 129.17 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पिंक बुक से मिली रफ्तार ये सभी कार्य उत्तर रेलवे के लिए निर्धारित 1,547 करोड़ रुपये के व्यापक प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं, जिसे वर्ष 2024-25 के पिंक बुक (कार्य, मशीनरी और रोलिंग स्टॉक कार्यक्रम) में शामिल किया गया था। अंबाला रेल मंडल के प्रबंधक विनोद भाटिया ने बताया कि पारंपरिक मैकेनिकल इंटरलॉकिंग की जगह अब कंप्यूटर आधारित इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लेगा। इससे सिग्नल और पॉइंट को डिजिटल तरीके से नियंत्रित किया जाएगा, इससे मानवीय गलती की संभावना शून्य हो जाएगी। कवच और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से न केवल सफर सुरक्षित होगा, बल्कि व्यस्त रूटों पर ट्रेनों की रफ्तार और संख्या भी बढ़ाई जा सकेगी। इस बदलाव से ट्रेनों का परिचालन सुरक्षित होने के साथ-साथ समयबद्धता में भी सुधार होगा, इससे यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।  

वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण में बड़ा कदम: एमपी की 1,178 संपत्तियां बाहर, 24,696 दावे खारिज

भोपाल  वक्फ संपत्तियों के रख-रखाव और उनके जनहित में उपयोग के लिए केंद्र सरकार की ओर से लाए गए वक्फ संशोधन कानून के परिणाम सामने आने लगे हैं। वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया के बीच सरकार ने अब तक 24,696 वक्फ दावे खारिज (अस्वीकार) कर दिए हैं। यानी इन दावों में शामिल संपत्तियों को फिलहाल वक्फ संपत्तियां नहीं माना गया है। अस्वीकार होने वाले मामलों में सबसे अधिक 4,802 दावे राजस्थान में हैं। तेलंगाना 4,458 खारिज मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश में 1,178 दावे निरस्त किए गए हैं। संशोधित कानून में वक्फ संपत्तियों के अनिवार्य पंजीकरण के प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद केंद्र ने जून में 'उम्मीद' पोर्टल शुरू कर वक्फ संपत्तियों का डिजिटल पंजीकरण अनिवार्य किया था। देश में 8,72,802 वक्फ अचल संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें से 5,82,541 का विवरण अपलोड किया जा चुका है। 1. डीड या घोषणा का अभाव यदि किसी संपत्तियों को वक्फ घोषित करने का विधिवत दस्तावेज उपलब्ध नहीं है या रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। 2. राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज न होना राज्य के भू-राजस्व अभिलेख (खसरा, खतौनी, जमाबंदी आदि) में संपत्ति वक्फ के नाम दर्ज नहीं हो, या निजी/सरकारी भूमि के रूप में दर्ज हो  3. स्वामित्व विवाद यदि संपत्ति पर निजी व्यक्ति का दावा हो, कोर्ट में मामला लंबित हो, सरकारी भूमि के रूप में दर्ज होने पर 4. डुप्लीकेट या ओवरलैप एंट्री एक ही संपत्ति को दो बार दर्ज या सीमांकन स्पष्ट न होना 5. अधूरी जानकारी पोर्टल पर दस्तावेज अधूरे, नक्शा या सर्वे विवरण न हो, क्षेत्रफल में विसंगति क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया? अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण पारदर्शिता बढ़ाने, फर्जी दावों पर रोक लगाने और वक्फ संपतियों के बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से किया जा रहा है।

मस्क और जकरबर्ग की तस्वीरें सामने आईं, एपस्टीन की ‘Wild’ पार्टी में थे शामिल

वाशिंगटन  जेफरी एपस्टीन मामले में हर दिन कोई ना कोई नया खुलासा हो रहा है. एक नई फोटो सामने आई है, जिसमें जेफरी एपस्टीन की लैविश डिनर पार्टी में एलॉन मस्क और मार्क जकरबर्ग नजर आए हैं. ये तस्वीर उस वक्त की है, जब जेफरी एपस्टीन यौन अपराध में दोषी साबित हो चुका था. यानी मस्क और मार्क ये जानते हुए पार्टी में शामिल हुए थे कि जेफरी किस तरह के काम में शामिल था. एपस्टीन ने बाद में दावा किया था कि इस पार्टी में LinkedIn को-फाउंडर रीड हॉफमैन और PayPal को-फाउंडर पीटर थिएल भी शामिल हुए थे. एक अन्य मेल में इस पार्टी को 'वाइल्ड' बताया गया था.  सामने आई तस्वीर में मस्क और जकरबर्ग एक साथ टेबल पर बैठे दिख रहे हैं. टेस्ला और SpaceX के CEO एलॉन मस्क कैमरा पर्सन की ओर देख रहे हैं, जो संभवतः एपस्टीन ने ही क्लिक की हो. वहीं तस्वीर में जकरबर्ग भी हैं, जो थोड़े सीरियस दिख रहे हैं.  मस्क ने क्या किया था दावा? जेफरी ने ये तस्वीर खुद को ही 3 अगस्त 2015 को भेजी थी. इस तस्वीर के आने के बाद इसलिए भी हंगामा मचा है क्योंकि मस्क ने दावा किया था कि वो कभी-भी जेफरी एपस्टीन की पार्टियों का हिस्सा नहीं रहे हैं. इतना ही नहीं मस्क ने जेफरी के साथ क्राइम करने वालों पर भी मुकदमा चलाने की बात कही थी.  मस्क ने इस बारे में 31 जनवरी को ट्वीट किया था. एपस्टीन की पार्टियों में सिर्फ एलॉन मस्क या मार्क जकरबर्ग नहीं बल्कि कई दूसरे बड़े चेहरे भी दिख चुके हैं. यहां तक की माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स भी इन पार्टियों का हिस्सा थे और उन्होंने शादी से बाहर भी लड़कियों से संबंध बनाया था. बिल गेट्स का नाम भी आया है सामने एपस्टीन फाइल्स की मानें तो बिल गेट्स रूसी लड़कियों से मिले थे. इसमें STD का जिक्र भी मिलता है. एक नोट में लिखा है कि एपस्टीन ने गेट्स के लिए दवाओं का इंतजाम किया था, जिससे उन्हें संबंध बनाने के बाद होने किसी बीमारी का सामना ना करना पड़े.  गेट्स के अलावा गूगल के को-फाउंडर सर्गेई ब्रिन का नाम भी एपस्टीन फाइल्स में सामने आया है. डॉक्यूमेंट्स की मानें तो ब्रिन ने एपस्टीन के प्राइवेट आईलैंड का दौरा किया था, जहां उन्होंने घिसलेन मैक्सवेल से मुलाकात की थी. 2003 में भेजे एक ईमेल में मैक्सवेल ने डिनर को सामान्य और आरामदायक बताया था.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व. शुक्ल की जयंती पर किया नमन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व. शुक्ल की जयंती पर किया नमन मध्यप्रदेश विधानसभा भवन में की पुष्पांजलि अर्पित विधानसभा अध्यक्ष  तोमर ने भी किया स्मरण भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष  नरेंद्र सिंह तोमर ने मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल की जयंती पर विधानसभा परिसर में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। विधायक  रामेश्वर शर्मा, पूर्व मंत्री  पी.सी. शर्मा, पूर्व विधायक  सुदर्शन गुप्ता और विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व. शुक्ल के परिजन ने भी चित्र पर पुष्पांजलि की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 10 फरवरी 1930 को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जन्मे  राजेंद्र प्रसाद शुक्ल, वर्ष 1985 से 1990 तक मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे। उन्होंने छत्तीसगढ़ क्षेत्र में पदयात्राओं के माध्यम से जन जागरण का कार्य किया। लोकप्रिय जन नेता रहे  शुक्ल राज्य सरकार में विधि-विधायी एवं सामान्य प्रशासन मंत्री भी रहे। छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के बाद, उन्होंने 14 दिसंबर 2000 से 19 दिसंबर 2003 तक छत्तीसगढ़ के प्रथम विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल ने 'असंसदीय अभिव्यक्तियां' नामक पुस्तक की संकल्पना की, जो विधायी कामकाज पर एक महत्वपूर्ण संदर्भ है। उन्होंने संसदीय मामलों सहित कई पुस्तक लिखीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष रहे व्यक्तित्वों की जयंती और पुण्यतिथि पर मध्यप्रदेश विधानसभा भवन में उन्हें स्मरण करने की परंपरा स्थापित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष  तोमर की सराहना करते हुए उनका आभार माना।  

4 साल की अमायरा की जान बचाई डॉक्टरों ने, आंत में फंसी 3 सेंटीमीटर लंबी कील को निकाला

पानीपत  पानीपत की 4 साल की नन्हीं अमायरा को क्या पता था कि खेल-खेल में निगली गई लोहे की कील उसके लिए जानलेवा साबित होगी। 3 सेंटीमीटर लंबी यह नुकीली कील बच्ची के पेट से होते हुए आंतों के एक बेहद संवेदनशील हिस्से में जा फंसी। दर्द इतना भयावह था कि बच्ची ने खाना-पीना छोड़ दिया और वह सिर्फ तड़प रही थी। घबराए माता-पिता बच्ची को लेकर एक के बाद एक तीन अस्पतालों में पहुंचे, लेकिन हर जगह से उन्हें निराशा हाथ लगी। डॉक्टरों ने कील की लोकेशन और बच्ची की मासूम उम्र को देखते हुए रिस्क लेने से मना कर दिया।  कील जरा सी भी खिसकती तो आंत पंक्चर हो सकती थी, जिससे संक्रमण पूरी बॉडी में फैल जाता और स्थिति जानलेवा हो सकती थी। तभी परिवार उम्मीद की आखिरी किरण लेकर पानीपत के एक सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पहुंचा। यहाँ वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. माधव और उनकी टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला। बिना सर्जरी के निकाली कील एक्स-रे की जटिल रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टरों ने बिना सर्जरी किए ही इस कील को बाहर निकालने का साहसिक फैसला लिया। डॉक्टरों ने बताया कि अगर कील आंत को चीर देती तो इन्फेक्शन यानी पेरिटोनिटिस का खतरा था। लेकिन विशेषज्ञ टीम ने अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया और बिना किसी चीर-फाड़ के, सफलतापूर्वक उस लोहे की कील को बाहर निकाल लिया। कील निकलते ही न सिर्फ बच्ची को दर्द से राहत मिली, बल्कि उसके माता-पिता के चेहरे पर भी मुस्कान लौट आई।  डॉक्टरों की अभिभावकों को चेतावनी जानकारी के अनुसार डॉक्टरों ने इस घटना के माध्यम से सभी अभिभावकों को चेतावनी दी है कि बच्चों के आसपास छोटी और नुकीली चीजें न रखें। फिलहाल अमायरा अब खतरे से बाहर है और खेल-कूद रही है। डॉक्टरों की इस तत्परता और विशेषज्ञता ने पानीपत में एक जांबाज मेडिकल रेस्क्यू की कहानी लिख दी है।