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ब्रह्मोस संग ताकत का संदेश, सीएम योगी ने पेश किया सशक्त भारत का विजन

सीएम योगी ने दिया ब्रह्मोस संग ‘हार्ड पावर’ विजन   मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर बदली कवर इमेज अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश करने वाली सरकार के मुखिया ने दिया ‘नए यूपी’ का संकेत   लखनऊ  उत्तर प्रदेश में अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश करने वाली सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने ‘नए यूपी’ की बढ़ती ताकत का संकेत दिया। बजट 2026-27 के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कवर इमेज बदल दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्रह्मोस संग अपनी फोटो लगाकर ‘हार्ड पावर’ विजन” का संदेश दिया।  सोशल मीडिया हैंडल पर मुख्यमंत्री का यह संदेश बताता है कि लखनऊ में ब्रह्मोस निर्माण के जरिए उत्तर प्रदेश एक तरफ रक्षा उत्पादन का उभरता वैश्विक हब हो गया है। वहीं दूसरी ओर 9.12 लाख करोड़ का बजट और सामरिक शक्ति के संगम का भी संकेत प्रदेशवासियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। बजट के जरिए सीएम योगी ने संदेश दिया कि यूपी की अर्थव्यवस्था “फर्श से अर्श तक पहुंच गई है, जो यूपी के विकास, सुरक्षा और निवेश के त्रिवेणी मॉडल को प्रदर्शित करता है। योगी का यह “‘सुपरसोनिक केसरिया’ संदेश बताता है कि उत्तर प्रदेश विकास का इंजन और प्रदेशवासियों की सुरक्षा का कवच भी बन गया है।

दो-तिहाई बहुमत के साथ BNP की वापसी, जमात को बड़ा झटका; मोदी ने तारिक रहमान को दी बधाई

ढाका  सत्ता के लिए 20 साल का इंतज़ार खत्म करते हुए, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) 13वें आम चुनावों में बहुमत का आंकड़ा पार करने के बाद अगली सरकार बनाने के लिए तैयार है. यह एक अहम जनादेश है, जो उथल-पुथल से जूझ रहे देश की सियासी दिशा में एक बड़ी तब्दीली की तरफ इशारा करता है.  तारिक रहमान के नेतृत्व वाली पार्टी ने आखिरी बार 2001 में चुनाव जीता था. आज पार्टी ने जीत का ऐलान कर दिया है क्योंकि गिनती के ट्रेंड्स में भारी जीत का इशारा मिल रहा था, जिससे दो दशकों के बाद सत्ता में उसकी वापसी पक्की हो गई. इस बीच, जमात-ए-इस्लामी को बड़ा झटका लगा है, जो नतीजों के धीरे-धीरे आने के बावजूद डबल-डिजिट सीटों तक ही सीमित रही. स्थानीय मीडिया ने बताया कि सुबह-सुबह हुई वोटिंग में BNP गठबंधन ने 209 सीटें जीतीं. कैसा रहा जमात-ए-इस्लामी का प्रदर्शन? BNP के प्रदर्शन ने उसे सिंपल मेजॉरिटी के लिए ज़रूरी 151 सीटों की लिमिट से आगे पहुंचा दिया, जिससे पार्टी अगली सरकार बनाने के लिए मज़बूत स्थिति में आ गई. कई चुनाव क्षेत्रों में वोटों की गिनती जारी रही, लेकिन कुल मिलाकर ट्रेंड्स से पता चला कि फ़ाइनल टैली में बड़े बदलाव की गुंजाइश कम है. सुबह करीब 4 बजे तक, जमात-ए-इस्लामी ने 56 सीटें जीत ली थीं. बांग्लादेश के रेफरेंडम के अनऑफिशियल नतीजों से जुलाई चार्टर के लिए लोगों के मज़बूत सपोर्ट का भी पता चलता है, जो 2024 के विद्रोह से बना एक सुधार डॉक्यूमेंट है जिसमें बड़े संवैधानिक बदलावों का प्रस्ताव है. The Daily Star के मुताबिक, गिने गए वोटों में से करीब 72.9 फीसदी चार्टर को अपनाने के पक्ष में थे, जबकि 27.1 परसेंट इसके खिलाफ थे.  जगह-जगह से हिंसा की खबरें लोकल मीडिया के मुताबिक, बांग्लादेश के कई हिस्सों में चुनाव के दौरान हिंसा की भी घटनाएं सामने आईं. वोटिंग से जुड़ी झड़पों में 70 से ज़्यादा लोग घायल बताए गए हैं. बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार ने कहा कि 14 अलग-अलग घटनाओं में करीब 72 लोग घायल हुए, जिनमें से कई पोलिंग स्टेशन के पास या अंदर हुए. पुलिस ने इस हंगामे के सिलसिले में कम से कम नौ लोगों को हिरासत में लिया. सबसे बुरी हिंसा नोआखली जिले के हटिया में हुई, जहां BNP और नेशनल सिटीजन पार्टी के समर्थकों के बीच हुई झड़प में 31 लोग घायल हो गए. वोटिंग सुबह 7:30 बजे शुरू हुई और नौ घंटे तक बिना रुके चलती रही. वोटरों ने दो अलग-अलग बैलेट पेपर इस्तेमाल किए- एक पार्लियामेंट्री चुनाव के लिए और दूसरा रेफरेंडम के लिए, जिन्हें देश भर के 42,659 पोलिंग स्टेशनों पर ट्रांसपेरेंट बैलेट बॉक्स में रखा गया था. देश के 300 में से 299 चुनाव क्षेत्रों में चुनाव हुए. शेरपुर-3 में एक पार्लियामेंट्री उम्मीदवार की मौत के बाद वोटिंग टाल दी गई. बांग्लादेश इलेक्शन कमीशन (EC) के मुताबिक, देश भर में 60.69 फीसदी वोटिंग हुई, जिसमें पोस्टल बैलेट का इस्तेमाल 80.11 परसेंट और कुल वैलिड वोट रेट 70.25 परसेंट रहा. कई वोटरों ने कहा कि 2008 के पार्लियामेंट्री चुनावों के बाद यह पहला शांतिपूर्ण और खुशी वाला चुनाव था जो उन्होंने देखा. वोटों की गिनती के बीच, जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश के चीफ, शफीकुर रहमान ने कहा कि उनकी पार्टी अपने फायदे के लिए 'विपक्ष की राजनीति' नहीं करेगी, जिससे गिनती जारी रहने पर चुनाव के नतीजों को मानने का संकेत मिला. उन्होंने रिपोर्टर्स से कहा, "हम पॉजिटिव पॉलिटिक्स करेंगे." PM मोदी ने तारिक रहमान को दी बधाई विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान को बांग्लादेश चुनावों में उनकी पार्टी की बड़ी जीत के बाद बधाई देते हुए PM मोदी का बयान दोबारा पोस्ट किया. PM मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और सबको साथ लेकर चलने वाले बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा. मैं हमारे कई तरह के रिश्तों को मजबूत करने और हमारे साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ काम करने का इंतजार कर रहा हूं." बांग्लादेश में हुए 13वें संसदीय चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रचंड जीत के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को गर्मजोशी से बधाई दी है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया (X) पर साझा किए अपने संदेश में इस जीत को बांग्लादेश की जनता का उनके नेतृत्व पर अटूट विश्वास बताया. प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, "संसदीय चुनावों में बीएनपी को निर्णायक जीत दिलाने के लिए मैं तारिक रहमान को हार्दिक बधाई देता हूं. यह जीत आपके नेतृत्व में बांग्लादेशी लोगों के भरोसे को दर्शाती है." उन्होंने आगे कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा और दोनों देशों के साझा विकास लक्ष्यों को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने को उत्सुक है. शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद यह बांग्लादेश में पहला बड़ा चुनाव था. 17 साल के वनवास के बाद तारिक रहमान की पार्टी की सत्ता में वापसी दक्षिण एशिया की राजनीति के लिए एक बड़ा 'टर्निंग पॉइंट' है. भारत ने इस बधाई संदेश के जरिए स्पष्ट संकेत दिया है कि वह नई सरकार के साथ भी मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को प्राथमिकता देगा. आपको बता दें कि बांग्लादेश में गुरुवार को आम चुनाव के लिए वोट डाले गए थे और शाम को ही मतगणना शुरू हो गई है. अभी तक जो नतीजे सामने आए हैं उसमें रहमान की पार्टी वाले गठबंधन ने 209 सीटें जीतकर 300 सदस्यों वाले जातीय संसद या देश के सदन में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है.  बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने चुनाव में जीत का दावा करते हुए देशवासियों को बधाई दी है लेकिन समर्थकों से जश्न न मनाने की अपील की है.पार्टी ने कहा कि विजय उत्सव के बजाय कार्यकर्ता और समर्थक पूरे देश में शुक्रवार की नमाज़ अदा करें और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को याद करें.  तारिक रहमान को ऐतिहासिक जीत पर US ने दी बधाई बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव में ऐतिहासिक जीत के लिए तारिक रहमान और BNP को बधाई देने वाला यूनाइटेड स्टेट्स पहला देश बन गया. बांग्लादेश में US के राजदूत ने सोशल मीडिया पर लिखा, "बांग्लादेश के लोगों को सफल चुनाव के लिए और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और तारिक रहमान … Read more

PAN नियमों में बड़ा बदलाव, 50 हजार से अधिक ट्रांजैक्शन पर नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से

नई दिल्ली भारत सरकार ने 7 फरवरी को नए आयकर नियम 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है. नए आयकर नियम, 2026 में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं. अब कई कामों के लिए PAN कार्ड बताने की जरूरत की सीमा बढ़ाई जा रही है. जैसे मोटर व्हीकल खरीदना, बैंक से बड़ी रकम निकालना या जमा करना, प्रॉपर्टी खरीदना और होटल में बड़ा बिल चुकाना आदि के लिए पैन कार्ड की जरूरत नहीं होगी. नए नियमों में यह भी प्रस्ताव है कि कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं का मूल्य बढ़ा दिया जाए. साथ ही, क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए यह जरूरी होगा कि वे अपनी जानकारी आयकर विभाग के साथ साझा करें. इसके अलावा डिजिटल रुपया (CBDC) को भी अब आधिकारिक तौर पर इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के एक मान्य तरीके के रूप में शामिल किया गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट 2026 की घोषणा के कुछ दिनों बाद, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने नए आयकर कानून 2025 से जुड़े ड्राफ्ट नियम और फॉर्म जारी किए हैं. इन पर आम लोग अपनी राय दे सकते हैं. नए ड्राफ्ट Income Tax Rules 2026 के मुताबिक, कई जगहों पर PAN नंबर बताना अनिवार्य कर दिया गया है. भारत सरकार ने 7 फरवरी को नए आयकर नियम 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है. नए आयकर नियम, 2026 में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं. अब कई कामों के लिए PAN कार्ड बताने की जरूरत की सीमा बढ़ाई जा रही है. जैसे मोटर व्हीकल खरीदना, बैंक से बड़ी रकम निकालना या जमा करना, प्रॉपर्टी खरीदना और होटल में बड़ा बिल चुकाना आदि के लिए पैन कार्ड की जरूरत नहीं होगी. नए नियमों में यह भी प्रस्ताव है कि कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं का मूल्य बढ़ा दिया जाए. साथ ही, क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए यह जरूरी होगा कि वे अपनी जानकारी आयकर विभाग के साथ साझा करें. इसके अलावा डिजिटल रुपया (CBDC) को भी अब आधिकारिक तौर पर इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के एक मान्य तरीके के रूप में शामिल किया गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट 2026 की घोषणा के कुछ दिनों बाद, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने नए आयकर कानून 2025 से जुड़े ड्राफ्ट नियम और फॉर्म जारी किए हैं. इन पर आम लोग अपनी राय दे सकते हैं. नए ड्राफ्ट Income Tax Rules 2026 के मुताबिक, कई जगहों पर PAN नंबर बताना अनिवार्य कर दिया गया है. बैंक में कैश जमा या निकासी अब प्रस्ताव है कि अगर कोई व्यक्ति एक वित्त वर्ष में कुल 10 लाख या उससे अधिक की कैश जमा या निकासी करता है. चाहे एक खाते में या कई खातों में तो PAN बताना जरूरी होगा. वर्तमान नियमों के अनुसार, एक ही दिन में बैंक या कोऑपरेटिव बैंक में 50,000 से अधिक का कैश जमा करने पर PAN देना अनिवार्य है. मोटर वाहन खरीदने पर PAN मौजूदा नियमों में अगर खरीदी जाने वाली गाड़ी (कार या बाइक) की कीमत 5 लाख से ज्यादा होती थी, तो PAN बताना जरूरी था. दोपहिया वाहनों के लिए PAN बताने का कोई नियम नहीं था. नए ड्राफ्ट नियम में किसी भी मोटर वाहन की खरीद पर, कीमत चाहे जो भी हो, PAN बताना अनिवार्य होगा यानी दोपहिया वाहन भी अब इस दायरे में आ जाएंगे. बैंक में कैश जमा या निकासी अब प्रस्ताव है कि अगर कोई व्यक्ति एक वित्त वर्ष में कुल 10 लाख या उससे अधिक की कैश जमा या निकासी करता है. चाहे एक खाते में या कई खातों में तो PAN बताना जरूरी होगा. वर्तमान नियमों के अनुसार, एक ही दिन में बैंक या कोऑपरेटिव बैंक में 50,000 से अधिक का कैश जमा करने पर PAN देना अनिवार्य है. मोटर वाहन खरीदने पर PAN मौजूदा नियमों में अगर खरीदी जाने वाली गाड़ी (कार या बाइक) की कीमत 5 लाख से ज्यादा होती थी, तो PAN बताना जरूरी था. दोपहिया वाहनों के लिए PAN बताने का कोई नियम नहीं था. नए ड्राफ्ट नियम में किसी भी मोटर वाहन की खरीद पर, कीमत चाहे जो भी हो, PAN बताना अनिवार्य होगा यानी दोपहिया वाहन भी अब इस दायरे में आ जाएंगे.

AI की दुनिया में अगला धमाका: OpenAI लॉन्च करेगा अपना स्पेशल डिवाइस

नई दिल्ली OpenAI का नाम आते ही लोगों के जेहन में एक सॉफ्टवेयर का ख्याल आता है. मगर कंपनी अब हार्डवेयर सेक्टर में एंट्री करना चाहती है. कंपनी ने कुछ वक्त पहले ही ऐलान किया है कि वो इस साल के अंत तक AI इनेबल हार्डवेयर प्रोडक्ट लॉन्च कर सकते हैं. कंपनी इससे पहले एक नया प्रोडक्ट लॉन्च कर सकती है.  2026 के अंत में कंपनी AI इनेबल डिवाइस को लॉन्च करेगी, जो लोगों के लिए 2027 में मिलेगा. अब एक लीक सामने आई है, जिसमें कंपनी के अपकमिंग हार्डवेयर की जरूरी डिटेल्स हैं. ये एक नॉन-AI डिवाइस हो सकता है. आइए जानते हैं इसकी डिटेल्स.  क्या होगा कंपनी का पहला डिवाइस? टिप्स्टर स्मार्ट पिकाचू के मुताबिक, OpenAI का पहला हार्डवेयर ईयरबड्स होंगे. इन ईयरबड्स का नाम Dime हो सकता है. हालांकि, कंपनी इसका बेसिक वर्जन रिलीज करेगी. ये संभवतः कंपनी के अपने ड्रीम डिवाइस के लॉन्च से पहले का वॉर्मअप हो सकता है.  OpenAI से जुड़ी एक पेटेंट फाइलिंग चीन में पब्लिक की गई है. इस फाइलिंग के मुताबिक प्रोडक्ट का नाम Dime होगा. टिप्स्टर का कहना है कि कंपनी पहले सिंपल ईयरबड्स लॉन्च करेगी. इसके अलावा OpenAI के स्मार्टफोन जैसे डिवाइस को लॉन्च होने में वक्त लगेगा.  फोन जैसा डिवाइस भी लाएगी कंपनी इसकी वजह HBM स्टोरेज है जो मैटेरियल की कीमत को बढ़ा सकती है. कंपनी का स्मार्टफोन जैसा डिवाइस कंप्यूटर जैसी पावर के साथ आएगा. इससे पहले OpenAI के चीफ ग्लोबल अफेयर ऑफिसर क्रिस लेहेन ने बताया था कि इस साल के अंत तक वे पहला AI डिवाइस लॉन्च करेंगे. हालांकि, लॉन्च की निश्चित तारीख की जानकारी अभी तक सामने नहीं आई हैं. OpenAI ने हाल में ही नया AI मॉडल एजेंटिक कोडिंग को लॉन्च किया है, जिसका नाम GPT-5.3-Codex है. ये मॉडल सभी पेड यूजर्स के लिए उपलब्ध है. कंपनी का कहना है कि ये डिवाइस पिछले वर्जन के मुकाबले 25 परसेंट फास्ट होगा.

रहस्यमयी मसान होली: आखिर क्या है वो परंपरा जिसमें महिलाओं की मनाही है?

भारत में होली के सैकड़ों रंग देखने को मिलते हैं, लेकिन मोक्ष की नगरी काशी (वाराणसी) में एक ऐसी होली खेली जाती है जिसे देख दुनिया दंग रह जाती है. इसे कहते हैं मसाने की होली. जहां पूरी दुनिया रंगों और गुलाल से सराबोर होती है, वहीं काशी के मणिकर्णिका घाट पर धधकती चिताओ के बीच राख (भस्म) से होली खेली जाती है. इस साल मसान होली 28 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी. आइए जानते हैं इस अद्भुत परंपरा के पीछे की कहानी और वह कारण जिसकी वजह से महिलाओं को इस आयोजन से दूर रखा जाता है. क्या है मसान होली? मसान होली को भस्म होली या भभूत होली के नाम से भी जाना जाता है. मसान शब्द का अर्थ है श्मशान. काशी की मान्यता है कि भगवान शिव (महादेव) अपने भक्तों के साथ श्मशान में होली खेलते हैं. यहां न तो पिचकारी होती है और न ही रंग-गुलाल यहां बस होती है चिता की राख और महादेव के जयकारे. इस दिन भक्त भूत-पिशाच का रूप धरकर श्मशान घाट पर जुटते हैं और जलती चिताओं के बीच भस्म उड़ाकर उत्सव मनाते हैं. क्यों महिलाओं को रखा जाता है इस परंपरा से दूर? मसान होली को लेकर कुछ कड़े धार्मिक और आध्यात्मिक नियम हैं, जिसके चलते महिलाओं का वहां जाना वर्जित माना जाता है. नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्मशान घाट पर कई तरह की सूक्ष्म शक्तियां और नकारात्मक ऊर्जाएं सक्रिय होती हैं. इसलिए सुरक्षा के लिहाज से महिलाओं और बच्चों को इन ऊर्जाओं से बचाने के लिए वहां जाने से रोका जाता है. वैराग्य का प्रतीक श्मशान को वैराग्य और मृत्यु का प्रतीक माना जाता है. अखाड़ों और विद्वानों के अनुसार, यह स्थान गृहस्थ जीवन और कोमल मन वाले बच्चों के लिए सही नहीं माना गया है. शारीरिक और मानसिक संवेदनशीलता प्राचीन परंपराओं के अनुसार, महिलाओं को भावनात्मक रूप से अधिक संवेदनशील माना जाता है. श्मशान की भयानक शांति और वहां का नजारा उनके मन पर गहरा प्रभाव डाल सकता है, इसलिए उन्हें इस उत्सव से दूर रहने की सलाह दी जाती है. कैसे हुई मसान होली की शुरुआत? पौराणिक कथाओं के अनुसार, मसान होली की शुरुआत खुद भगवान शिव ने की थी. कहा जाता है कि रंगभरी एकादशी के दिन महादेव माता पार्वती का विदाई कराकर काशी लाए थे. तब उन्होंने अपने गणों, देवताओं और भक्तों के साथ गुलाल से होली खेली थी. लेकिन महादेव के सबसे प्रिय भक्त, भूत, प्रेत, पिशाच और अघोरी उस उत्सव में शामिल नहीं हो पाए थे. इसलिए, अगले दिन महादेव ने श्मशान घाट पर जाकर अपने इन भक्तों के साथ चिता की भस्म से होली खेली. तभी से यह परंपरा मसाने की होली के रूप में प्रसिद्ध हो गई. विश्व प्रसिद्ध है काशी का यह रूप काशी की यह होली देखने के लिए आज केवल देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी भारी संख्या में पर्यटक आते हैं. यह उत्सव जीवन और मृत्यु के बीच के उस अटूट संबंध को दर्शाता है, जिसे काशी की संस्कृति में महाशमशान का आनंद कहा जाता है.

साइबर ठगी के शिकार ग्राहकों के लिए बड़ी खबर, RBI देगा 25 हजार रुपये तक मुआवजा

नई दिल्ली केंद्रीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने साइबर फ्रॉड के शिकार ग्राहकों के लिए बड़ी योजना बनाई है। अब ऐसे ग्राहकों को धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन के मामले में 25,000 रुपये तक का हर्जाना मिल सकेगा। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद जारी बयान में इसके बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कम मूल्य के धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन के मामलों में 25,000 रुपये तक का हर्जाना देने के लिए एक फ्रेमवर्क लाने का प्रस्ताव है। 50 हजार रुपये तक के फ्रॉड मामले शामिल इसमें 50 हजार रुपये या उससे कम की धोखाधड़ी के मामलों को शामिल किया जाएगा। आरबीआई गवर्नर ने बताया कि "बिना कोई सवाल पूछे" ग्राहकों को 85 प्रतिशत राशि (अधिकतम 25 हजार रुपये) वापस की जायेगी। धोखाधड़ी की राशि में से 15 प्रतिशत का नुकसान ग्राहक को उठाना होगा और 15 प्रतिशत का नुकसान संबंधित बैंक उठाएगा। शेष 70 प्रतिशत राशि आरबीआई देगा। हालांकि, किसी भी स्थिति में ग्राहक को 25,000 रुपये से अधिक का हर्जाना नहीं मिलेगा। एक बार ही ले सकेंगे लाभ आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया कि ग्राहक इस सुविधा का लाभ अपने जीवनकाल में सिर्फ एक बार उठा सकेंगे। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि ग्राहक एक बार की गलती से सीख लें।" एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने साफ किया कि भले ही ग्राहक ने खुद ही ठगों को ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) बताया हो, तब भी वे हर्जाना राशि पाने के हकदार होंगे। मल्होत्रा ने कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी में 50 हजार रुपये तक की राशि वाले मामले 65 प्रतिशत हैं, हालांकि मूल्य के हिसाब से उनका अनुपात काफी कम है। यह पहली बार है जब आरबीआई ने साइबर फ्रॉड मामले में पीड़ित को हर्जाने देने की पहल की है। RBI के डेटा के मुताबिक भारतीय बैंकों ने वित्त वर्ष 2024-25 में कार्ड और इंटरनेट-आधारित ट्रांजैक्शन से जुड़े धोखाधड़ी के 13,469 मामले दर्ज किए, जिससे 520 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। वहीं, 2023-24 में 29,080 धोखाधड़ी और 1,457 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। साइबर फ्रॉड की शिकायत सबसे पहले बैंक/पेमेंट ऐप को सूचित करें। इसके बाद 1930 पर कॉल करें। यह नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन का ऑफिशियल नंबर है। ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। इसके लिए वेबसाइट https://cybercrime.gov.in पर विजिट करें। यहां सभी डिटेल भरने के बाद Acknowledgement नंबर मिलेगा। इसे सेव करके रखना जरूरी है। इस नंबर को लेकर नजदीकी साइबर सेल/पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। आप शिकायत का स्टेटस cybercrime.gov.in पर ट्रैक कर सकते हैं।

सिर्फ 300 रुपये का निवेश, 600 करोड़ में डोमेन बेचकर बना अरबपति

 नई दिल्ली 1993 में 10 साल के एक लड़के ने AI.com नाम की वेबसाइट खरीदी थी. तब यह सिर्फ एक आम इंटरनेट एड्रेस था. उस समय AI कोई ट्रेंड नहीं था. न सोशल मीडिया था, न चैटबॉट्स, न लोग रोज AI की बातें करते थे. उस वक्त इस डोमेन की कीमत कुछ सौ रुपये से ज्यादा नहीं थी. आज वही AI.com डोमेन करीब 70 मिलियन डॉलर में बिक चुका है. भारतीय रुपये में देखें तो यह रकम 600 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है. यह सिर्फ एक डोमेन की बिक्री नहीं है. यह बताता है कि इंटरनेट पर नाम की कीमत कैसे बदलती है. डोमेन खरीद फरोख्त की पूरी कहानी  जिस शख्स ने AI.com खरीदा था, उसका नाम अरस्यान इस्माइल है. वह मलेशिया का टेक एंटरप्रेन्योर हैं. 1993 में जब इंटरनेट नया-नया आया था, तब उन्होंने यह डोमेन सिर्फ शौक में रजिस्टर करा लिया था. उस वक्त किसी को अंदाजा नहीं था कि AI एक दिन इतना बड़ा ट्रेंड बनेगा. उस समय डोमेन खरीदने की फीस बहुत कम होती थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक अरस्यान इस्माइल ने AI.com बहुत ही मामूली कीमत पर लिया था. आज के पैसों में देखें तो कुछ सौ रुपये से ज्यादा नहीं. तब यह एक आम टेक-टर्म जैसा नाम था. बीच के सालों में AI.com कई बार लीज पर भी दिया गया. अलग-अलग कंपनियों ने इस डोमेन को कुछ समय के लिए इस्तेमाल किया. लेकिन डोमेन की असली मालकिनी अरस्यान के पास ही रही. 80 करोड़ में दुबारा हासिल किया डोमेन 2025 में एक दिलचस्प मोड़ आया. AI.com कुछ समय के लिए उनके कंट्रोल से बाहर चला गया था. रिपोर्ट्स में बताया गया कि डोमेन पर कंट्रोल वापस पाने के लिए अरस्यान को करीब 10 मिलियन डॉलर चुकाने पड़े. यानी करीब 80 करोड़ रुपये से ज्यादा. मतलब जिस डोमेन को उन्होंने कभी मामूली रकम में खरीदा था, उसी को वापस पाने के लिए करोड़ों खर्च करने पड़े. लेकिन तब तक AI पूरी दुनिया में ट्रेंड बन चुका था. उन्हें पता था कि यह नाम आगे चलकर और बड़ा बन सकता है. Crypto.com के सीईओ ने खरीदा डोमेन डोमेन वापस लेने के बाद उन्होंने इसे कुछ समय तक होल्ड किया. फिर 2026 में यह डोमेन Crypto.com के CEO को करीब 70 मिलियन डॉलर में बेच दिया गया. AI.com को अब Crypto.com के CEO ने खरीदा है. Crypto.com पहले से डिजिटल फाइनेंस की दुनिया में बड़ा नाम है. अब कंपनी AI की तरफ भी कदम बढ़ा रही है. माना जा रहा है कि AI.com को एक नए AI प्लेटफॉर्म या सर्विस के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा. पिछले दो साल में AI अचानक हर जगह दिखने लगा है. लोग AI से फोटो बना रहे हैं. वीडियो बना रहे हैं. ऑफिस का काम कर रहे हैं. AI अब सिर्फ टेक का टूल नहीं रहा. AI एक ब्रांड बन चुका है. इसी वजह से AI.com जैसे नाम की कीमत अचानक आसमान पर पहुंच गई. जो कंपनी AI से जुड़ी सर्विस बनाना चाहती है, उसके लिए ऐसा नाम बहुत काम का होता है. यूजर को भी ऐसा नाम देखकर भरोसा जल्दी होता है. यह डील यह भी दिखाती है कि आने वाले समय में इंटरनेट पर ब्रांडिंग कितनी अहम होने वाली है. आज जमीन और फ्लैट की कीमत बढ़ती है. वैसे ही अब डिजिटल नामों की कीमत बढ़ रही है. आज जो डोमेन आम लगते हैं, कल वही करोड़ों में बिक सकते हैं. AI.com की कहानी सिर्फ किस्मत की कहानी नहीं है. यह आने वाले डिजिटल ट्रेंड की झलक भी है.  

कंगारुओं के खिलाफ बड़ा दांव! जिम्बाब्वे रचेगा इतिहास?

कोलंबो ग्रुप बी में सबकी नजरें अब क्लासिक डेविड बनाम गोलियथ मुकाबले पर टिकी हैं, जब शुक्रवार को यहां आर. प्रेमदासा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में टी20 वर्ल्ड कप 2026 में जिम्बाब्वे का मुकाबला टूर्नामेंट की फेवरेट टीम ऑस्ट्रेलिया से होगा। ऑस्ट्रेलिया इस मुकाबले में जीत की जबरदस्त संभावना और दुनिया भर में दबदबे के साथ उतर रहा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्बाब्वे इस एडिशन का पहला बड़ा उलटफेर कर सकता है? सिकंदर रजा की टीम ने चुपचाप मोमेंटम बना लिया है। ओमान पर उनकी आठ विकेट की बड़ी जीत ने गेंद से डिसिप्लिन और बल्ले से धैर्य दिखाया। लेकिन शुक्रवार का मुकाबला एक बिल्कुल अलग चुनौती पेश करता है – ऑस्ट्रेलियाई टीम का सामना करना जिसमें पावर-हिटर्स, अच्छे ऑलराउंडर्स और कोलंबो के हालात के हिसाब से एक मजबूत स्पिन अटैक है। जिम्बाब्वे की उम्मीदें निडर रवैये पर टिकी होंगी। ब्रायन बेनेट, जिन्होंने पिछले गेम में 48 रन बनाए, पिछले साल उनके सबसे लगातार परफॉर्मर रहे हैं और टॉप पर अहम होंगे। अगर बेनेट और तदीवानाशे मारुमानी नई गेंद को संभालकर एक मजबूत प्लेटफॉर्म तैयार कर पाते हैं, तो ब्रेंडन टेलर, रज़ा और रयान बर्ल की अनुभवी तिकड़ी बीच के ओवरों में स्कोरिंग को आगे बढ़ा सकती है। असली मौका गेंद के साथ हो सकता है। ब्लेसिंग मुजराबानी और रिचर्ड नगारवा ने अपने पिछले मैच में छह विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया था। एक ऐसी सतह पर जिससे शुरू में स्विंग और बाद में टर्न मिलने की उम्मीद है, ज़िम्बाब्वे का पेस-स्पिन कॉम्बिनेशन ऑस्ट्रेलिया के आक्रामक टॉप ऑर्डर की परीक्षा ले सकता है। आयरलैंड के खिलाफ थोड़ी कमज़ोरी दिखाने वाले मिडिल ऑर्डर को बेनकाब करने के लिए शुरुआती ब्रेकथ्रू जरूरी होंगे। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया अभी भी मजबूत है। कप्तान ट्रैविस हेड लीडर के तौर पर पहली जीत हासिल करने के बाद आगे से लीड करने के लिए बेताब होंगे। जोश इंग्लिस, ग्लेन मैक्सवेल, मार्कस स्टोइनिस और कैमरन ग्रीन की मौजूदगी पूर्व चैंपियन को ऐसी गहराई देती है जिसका मुकाबला कुछ ही टीमें कर सकती हैं। एडम जम्पा और मैथ्यू कुहनेमन की उनकी स्पिन जोड़ी भी कोलंबो की धीमी होती पिच का फ़ायदा उठा सकती है। प्रेमदासा की पिच ने हमेशा लक्ष्य का पीछा करने वाली टीमों को फ़ायदा पहुँचाया है, पिछले दस में से आठ मैच बाद में बैटिंग करने वाली टीम ने जीते हैं। मैच के दिन बादल छाए रहने का अनुमान है, जिससे गेंदबाजों को शुरुआत में और मदद मिल सकती है, जिससे मुकाबले में एक और अप्रत्याशित बात जुड़ जाएगी। ज़िम्बाब्वे के लिए, यह सिर्फ़ ग्रुप-स्टेज का मैच नहीं है। यह सोच को बदलने और खुद को सिर्फ़ हिस्सा लेने वाले के बजाय असली दावेदार के तौर पर पेश करने का मौका है। उलटफेर टी20 वर्ल्ड कप की धड़कन रहे हैं, और सबसे छोटे फ़ॉर्मेट में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होती। कागज़ पर ऑस्ट्रेलिया शायद बहुत ज़्यादा पसंदीदा हो, लेकिन अगर ज़िम्बाब्वे खास मौकों का फ़ायदा उठाता है – खासकर पावरप्ले और डेथ ओवरों में – तो कहानी एक बड़ा मोड़ ले सकती है। मंच तैयार है। पसंदीदा टीमें पक्की हैं। लेकिन टी20 क्रिकेट में, भरोसा भी नाम जितना ही ताकतवर हो सकता है।  

AI क्रिएटर्स के लिए बड़ा झटका? सरकार का नया नियम सोशल मीडिया का नियम बदल देगा

 नई दिल्ली सरकार ने AI से बने कंटेंट को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं. अब सोशल मीडिया पर जो भी फोटो, वीडियो या ऑडियो AI टूल्स से बनेगा, उस पर साफ लेबल दिखाना जरूरी होगा. इसके लिए कंपनियों को 20 फरवरी तक का डेडलाइन मिला है.  प्लेटफॉर्म्स को यह भी पक्का करना होगा कि यूज़र सच बता रहा है या नहीं कि कंटेंट AI से बना है. भ्रामक या गैरकानूनी AI कंटेंट को तीन घंटे के अंदर हटाने का नियम भी लाया गया है. मतलब डीपफेक और फेक वीडियो पर अब ढील नहीं चलेगी. ये बदलाव 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे. सोशल मीडिया कंपनियों के लिए असली चुनौती इन नियमों के बाद इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स का काम करने का तरीका बदलेगा. अभी तक AI कंटेंट अक्सर बिना पहचान के घूमता रहा है. कई बार यूज़र को पता भी नहीं चलता कि वीडियो या फोटो असली है या मशीन से बना है. अब अपलोड के वक्त ही यह जानकारी लेनी होगी कि उस वीडियो में कितना AI यूज हुआ है. यहां अब सिर्फ यूज़र की बात पर भरोसा नहीं चलेगा. प्लेटफॉर्म्स को टेक्निकल तरीके से भी चेक करना होगा. दिक्कत यह है कि हाई क्वालिटी डीपफेक आज इतने रियल लगते हैं कि सिस्टम भी कन्फ्यूज हो जाता है. ऊपर से तीन घंटे में कंटेंट हटाने की डेडलाइन बहुत टाइट है. इतने बड़े प्लेटफॉर्म पर हर केस में इतनी तेजी से एक्शन लेना आसान नहीं होगा. AI कंटेंट क्रिएटर्स के लिए क्या मुश्किलें बढ़ेंगी इन नियमों का सबसे सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो AI से रील्स, फेसस्वैप वीडियो, फेक वॉइस या जनरेटेड क्लिप्स बनाकर ग्रो कर रहे थे. अब कंटेंट पर AI का लेबल दिखेगा. मतलब जो लोग जानबूझकर रियल जैसा दिखाकर वीडियो वायरल करते थे, उनकी ट्रिक पकड़ी जाएगी. इससे क्लिकबेट और शॉक वैल्यू कम होगी. अगर नोटिस के बावजूद कोई कंटेंट क्रिएटर इसे इग्नोर करेगा तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स उन्हें हमेशा के लिए बैन कर सकती हैं. क्योंकि सरकार की तरफ से सख्त हिदायत मिल चुकी है.  AI क्रिएटर्स को अब यह भी ध्यान रखना होगा कि किसी असली इंसान का चेहरा या आवाज बिना परमिशन यूज न करें. आज जो मजाक या ट्रेंड लग रहा है, वही कल कानूनी परेशानी बन सकता है. अगर प्लेटफॉर्म ने पकड़ लिया कि आपने जानबूझकर AI कंटेंट को छुपाया है, तो अकाउंट पर स्ट्राइक या बैन का रिस्क भी रहेगा. यानी अब AI से कंटेंट बनाना सिर्फ क्रिएटिव काम नहीं रहेगा. उसमें जिम्मेदारी भी जुड़ जाएगी. यूज़र का एक्सपीरियंस कैसे बदलेगा नए नियम यूज़र की आदतें भी बदलेंगे. अब फीड में दिखने वाले वीडियो या फोटो पर लेबल देखना पड़ेगा. अगर AI लिखा है, तो समझना होगा कि यह असली घटना या असली व्यक्ति का वीडियो नहीं है. इससे लोग थोड़ा रुककर सोचेंगे. अभी तक बहुत से लोग डीपफेक को सच मानकर शेयर कर देते थे. अब शायद वह आदत बदले. हालांकि एक खतरा यह भी है कि अगर हर दूसरी पोस्ट पर AI टैग दिखने लगे, तो लोग उसे इग्नोर करना शुरू कर दें. तब लेबल का असर धीरे धीरे कम हो सकता है. प्लेटफॉर्म्स के बिजनेस पर असर यह बदलाव सिर्फ टेक्निकल नहीं है. यह बिजनेस का भी सवाल है. AI कंटेंट आज सोशल मीडिया की ग्रोथ का बड़ा हिस्सा बन चुका है. रील्स और शॉर्ट्स में AI ट्रेंड्स खूब चलते हैं. अब अगर हर AI कंटेंट पर सख्त लेबल और चेकिंग होगी, तो एंगेजमेंट पैटर्न बदल सकता है. कुछ यूज़र AI कंटेंट से दूरी बना सकते हैं. वहीं ब्रांड्स और एडवर्टाइज़र ज्यादा सेफ फील करेंगे क्योंकि फेक और भ्रामक कंटेंट पर कंट्रोल बढ़ेगा. प्लेटफॉर्म्स को अब ग्रोथ और रेगुलेशन के बीच बैलेंस बनाना होगा. आगे क्या बदलेगा आने वाले वक्त में सोशल मीडिया पर कुछ भी चलेगा वाला माहौल खत्म होगा. डीपफेक, फेक डॉक्यूमेंट और बिना सहमति वाली तस्वीरों पर पहले जैसी ढील नहीं मिलेगी. सरकार साफ कह चुकी है कि प्लेटफॉर्म्स को जिम्मेदारी लेनी होगी. इसका मतलब ज्यादा मॉडरेशन टीम, बेहतर टेक और भारत के हिसाब से अलग सिस्टम बनाना पड़ेगा. कुल मिलाकर, नए AI कंटेंट नियम सोशल मीडिया को ज्यादा जिम्मेदार बनाने की कोशिश हैं. यह बदलाव एकदम परफेक्ट नहीं होगा. शुरुआत में टेक्निकल दिक्कतें आएंगी. गलतियां भी होंगी. लेकिन लंबे वक्त में सोशल मीडिया का माहौल बदलेगा. कंटेंट बनाना अब सिर्फ क्रिएटिविटी का खेल नहीं रहेगा. उसमें जवाबदेही भी जुड़ जाएगी. यही इस पूरे बदलाव की असली दिशा है. रास्ता आसान नहीं है भले ही सरकार ने डेडलाइन दे दी है, लेकिन टेक्निकल तौर पर बात करें तो ये तुरंत इंप्लिमेंट करना आसान नहीं है. क्योंकि लेबल लगाए हुए वीडियो को डाउनलोड करके फिर से अपलोड किया जा सकता है. AI डिटेक्शन सिस्टम भी पूरी तरह ठीक से काम नहीं करते हैं. कई बार वो असली को नकली और नकली को असली समझने की भी गलती कर रहे हैं.  

मध्यप्रदेश में सोने की बड़ी खोज, कटनी में मिला गोल्ड रिजर्व; जल्द शुरू होगी माइनिंग

कटनी  मध्यप्रदेश के कटनी जिले की धरती अब सोना-चांदी उगलेगी. दरअसल, कटनी जिले के इमलिया गांव की पहचान अब जल्द ही सुनहरी होने जा रही है, क्योंकि इस गांव में साढ़े 6 हेक्टेयर धरती में खनन कर करीब 7 लाख टन सोना-चांदी सहित मिनरल्स निकाले जाएंगे.यह काम मुंबई की निजी कंपनी प्रोस्पेक्ट रिसोर्स मिनिरल्स प्राइवेट लिमिटेड स्लीमनाबाद करेगी. इसके लिए जिला प्रशासन के साथ 50 साल के लिए करार किया गया है, जहां कटनी जिले को कंपनी से टैक्स के रूप में करीब 100 करोड रुपए से अधिक का राजस्व मिलेगा. करीब 50 साल की लंबी खोज और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बाद, जिले की ढीमरखेड़ा तहसील के इमलिया गांव में सोने का खनन शुरू होने की तैयारी अंतिम चरण में है। अनुमान है कि मार्च के दूसरे पखवाड़े से खनन का काम शुरू हो जाएगा। एक साल की तेज प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद स्वर्ण खनन की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, मार्च से खनन कार्य शुरू होने का अनुमान है, जो मध्यप्रदेश के खनिज इतिहास में नया अध्याय लिखेगा, 121 करोड़ की ऐतिहासिक बोली ने इमलिया को राष्ट्रीय मानचित्र पर ला खड़ा किया है। अब कटनी सिर्फ जिला नहीं, स्वर्ण नगरी बनने की दहलीज पर खड़ी है…। जिले के इतिहास में एक ऐसी उपलब्धि जुडऩे जा रही है, जो न केवल जिले बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की पहचान बदल देगी। ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम इमलिया में स्वर्ण खनन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं और मार्च माह के दूसरे पखवाड़े से खनन कार्य शुरू होने का अनुमान है। यह मध्यप्रदेश की पहली सक्रिय स्वर्ण खदान होगी, जिससे राज्य को राष्ट्रीय खनिज मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। ई-नीलामी प्रक्रिया के तहत मुंबई की कंपनी प्रॉस्पेक्ट रिसोर्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड खनन कंपनी ने 121 करोड़ रुपए की ऊंची बोली लगाकर इमलिया गोल्ड ब्लॉक की खनन लीज हासिल की। कंपनी और कलेक्टर आशीष मिवारी के बीच खनन अनुबंध (एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते के साथ ही जिले में विकास, निवेश और रोजगार की संभावनाओं के नए द्वार खुल गए हैं। यह परियोजना न केवल कटनी को ‘स्वर्ण नगरी’ के रूप में एक नई पहचान देगी, बल्कि यह मध्य प्रदेश की पहली सक्रिय स्वर्ण खदान भी होगी। इस ऐतिहासिक कदम से राज्य का नाम देश के खनिज मानचित्र पर प्रमुखता से अंकित हो गया है। 121 करोड़ की ऐतिहासिक बोली इस स्वर्ण खदान के लिए हुई ई-नीलामी प्रक्रिया में मुंबई की कंपनी ‘प्रॉस्पेक्ट रिसोर्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड’ ने सबसे ऊंची बोली लगाई। कंपनी ने 121 करोड़ रुपए की बोली के साथ इमलिया गोल्ड ब्लॉक की खनन लीज हासिल की। इसके बाद, कंपनी और कटनी के कलेक्टर आशीष तिवारी के बीच खनन अनुबंध (एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे खनन का रास्ता आधिकारिक तौर पर साफ हो गया। 50 साल की खोज का अंत इमलिया में सोने की मौजूदगी की खोज पिछले पांच दशकों से चल रही थी। बीते एक साल में प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी लाई गई, जिसके परिणामस्वरूप यह परियोजना अब हकीकत बनने की दहलीज पर है। इस समझौते ने जिले में बड़े निवेश, विकास और रोजगार की नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। बदलेगी जिले की पहचान अब तक कटनी की पहचान चूना पत्थर और संगमरमर जैसे खनिजों से होती थी, लेकिन अब यह सोने की चमक से भी जाना जाएगा। इस परियोजना से न केवल राज्य सरकार को राजस्व का लाभ होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। यह मध्यप्रदेश के खनिज इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने दिया था बड़ा संकेत इस परियोजना को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी लगातार सक्रियता रही। 18 सितंबर को बड़वारा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंच से कटनी को कनकपुरी की संज्ञा देते हुए इमलिया गांव में स्वर्ण भंडार की सार्वजनिक जानकारी दी थी। इसके बाद नवरात्रि के पहले दिन ही खनन से जुड़ा एग्रीमेंट होना, इस परियोजना की प्राथमिकता और गंभीरता को दर्शाता है। यह है सोना व उत्पादन का स्तर खनन विभाग की तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार इमलिया गोल्ड ब्लॉक से प्रतिवर्ष लगभग 33,214 टन अयस्क उत्पादन का अनुमान है। यहां कुल स्वर्ण खनिज भंडार 3,57,789 टन बताया गया है, जिसमें से 3,35,059 टन खानयोग्य है। तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, प्रति टन अयस्क से औसतन 1.13 ग्राम सोना निकलने की संभावना है। इसके अलावा तांबा 2,71,632 टन, लेड-जिंक 3,88,726 टन, चांदी 3,86,468 टन का अनुमान है। रोजगार और विकास की नई उम्मीद गांव और आसपास के क्षेत्र में इस परियोजना को लेकर उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि खनन शुरू होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार, बेहतर सडक़, बिजली, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। इमलिया की पहचान अब सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जानी जाएगी। अब तक देश में बड़े पैमाने पर स्वर्ण खनन कर्नाटक के कोलार और हत्ती क्षेत्रों तक सीमित था, लेकिन इमलिया खदान के शुरू होते ही मध्यप्रदेश भी स्वर्ण उत्पादक राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा। मार्च से शुरू होने वाला यह खनन न केवल कटनी को स्वर्ण नगरी के रूप में स्थापित करेगा, बल्कि प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास को भी नई ऊंचाई देगा।