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गिद्ध संरक्षण के लिए नई पहल: MP में एप के जरिए होगी 7 प्रजातियों की मॉनिटरिंग

भोपाल   वल्चर स्टेट की उपाधि रखने वाले मध्य प्रदेश में इस बार फिर गिद्धों की गणना का काम शुरु होने वाला है। खास बात ये है कि, इस बार मोबाइल एप की मदद से गिद्धों की गिनती की जाएगी। प्रदेश के शहडोल, अनूपपुर, उमरिया और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के करीब 50 से अधिक अधिकारी – कर्मचारियों को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। ये प्रदेशव्यापी शीतकालीन गिद्ध गणना साल 2025-26 के लिए आयोजित की गई है। इस नई तकनीक से गिद्धों की गणना में पारदर्शिता आएगी और समय की बचत होगी। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ईको सेंटर ताला में आयोजित इस कार्यशाला में वन वृत्त शहडोल के उत्तर शहडोल, दक्षिण शहडोल, उमरिया, अनूपपुर और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व उमरिया के सभी उप वन मण्डलाधिकारी और परिक्षेत्र अधिकारी शामिल हुए। वल्चर कमेटी के सदस्य और मास्टर ट्रेनर दिलशेर खान ने मध्य प्रदेश में पाए जाने वाले गिद्धों की प्रजातियों और उनके रहवास के बारे में जानकारी दी। मोहन नागवानी ने गिद्ध गणना में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल एप्लीकेशन Epicollect5 Data के संचालन का प्रशिक्षण दिया। 20 से 22 फरवरी के बीच होगी गणना क्षेत्र संचालक बांधवगढ टाईगर रिजर्व, डॉक्टर अनुपम सहाय ने गिद्ध संरक्षण में प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि, वो मैदानी अमले को भी इस नई तकनीक का प्रशिक्षण दें। मध्य प्रदेश में 20 फरवरी से 22 फरवरी तक मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग करके गिद्धों की गिनती की जाएगी। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय अधिकारियों और वन कर्मचारियों को गणना की नई पद्धतियों से परिचित कराना था। कर्मचारियों को दी गई विशेष ट्रेनिंग प्रशिक्षण के दौरान, विशेषज्ञों ने एसडीओ, रेंजर और वन कर्मचारियों को ऐप के संचालन, डेटा अपलोड करने और फोटो के माध्यम से जानकारी दर्ज करने की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों को बताया गया कि गणना के समय कर्मचारी मौके पर ही गिद्धों की फोटो खींचकर ऐप में जरूरी जानकारी भरेंगे। इससे काम में और भी ज्यादा पारदर्शिता आएगी और समय भी बचेगा। बांधवगढ़ में चार तरह के गिद्ध बता दें कि, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में चार तरह के गिद्ध पाए जाते हैं। भारतीय गिद्ध (लॉन्ग बिल्ड वल्चर), सफेद पूंछ वाला गिद्ध (व्हाइट बेक्ड वल्चर), राज गिद्ध (रेड हेडेड वल्चर) और इजिप्शियन वल्चर। इस बार तीन और प्रजातियों के गिद्धों के दिखने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयन ग्रिफन, यूरेशियन ग्रिफन और सिनेरियस गिद्ध भी इस बार देखे जा सकते हैं। गिद्धों की प्रकृति में अहम भूमिका क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि सभी को ऐप आधारित गणना का प्रशिक्षण मिल चुका है और अब यह पूरा काम डिजिटल तरीके से होगा। उन्होंने यह भी बताया कि गिद्ध हमारे पर्यावरण को साफ रखने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मरे हुए जानवरों को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं। इस बार गिद्धों की गिनती के लिए 150 कर्मचारी फील्ड में काम करेंगे और लगभग 100 अधिकारी और कर्मचारी उन पर नजर रखेंगे। इस तरह कुल मिलाकर करीब 250 लोग इस गणना कार्य में शामिल होंगे। डिजिटल ऐप के इस्तेमाल से यह प्रक्रिया और भी आसान हो जाएगी।

तापमान में उछाल का असर, गेहूं की पैदावार पर संकट के बादल

 ग्वालियर  ग्वालियर-चंबल अंचल में इस बार मौसम के मिजाज ने एक बार फिर किसानों की चिंता बढ़ा दी है। फरवरी के मध्य में ही जिस तरह से पारा चढ़ना शुरू हुआ है, उसने सर्दी की विदाई और गर्मी की जल्द दस्तक के संकेत दे दिए हैं। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी दो से तीन दिनों में तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की और बढ़ोतरी होने की आशंका है। हालांकि बीच में एक दिन हल्की बूंदाबांदी का अंदेशा जरूर है, लेकिन यह बढ़ती गर्माहट को रोकने में नाकाफी साबित होगी। अचानक बढ़ते तापमान का सबसे नकारात्मक असर रबी सीजन की गेहूं की फसल पर पड़ता दिखाई दे रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक यदि गर्मी इसी तरह बढ़ती रही, तो गेहूं के उत्पादन में गिरावट आ सकती है। क्यों खतरनाक है गेहूं के लिए यह गर्मी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र कुशवाह के अनुसार, वर्तमान में गेहूं की फसल अपनी उस अवस्था में है जहां दाने बनने और उनके परिपक्व होने की प्रक्रिया चल रही है। गेहूं की फसल के लिए इस समय हल्की ठंडक की जरूरत होती है, ताकि दाना धीरे-धीरे और पूरी तरह विकसित हो सके। तापमान अधिक होने से गेहूं का दाना अपनी प्राकृतिक अवधि पूरी करने से पहले ही परिपक्व होने लगता है। इसे वैज्ञानिक भाषा में 'फोर्स्ड मैच्योरिटी' कहते हैं। जब दाना समय से पहले पकता है, तो वह पूरी तरह फूल नहीं पाता। इसके परिणामस्वरूप गेहूं का दाना छोटा, पतला और हल्का रह जाता है। दानों का वजन कम होने और उनके सिकुड़ जाने से प्रति हेक्टेयर होने वाली पैदावार काफी कम हो सकती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होगा। अंचल की दूसरी प्रमुख फसल सरसों की बात करें, तो बढ़ते तापमान का असर इस पर भी पड़ेगा, लेकिन गेहूं की तुलना में यह काफी कम होगा। जानकारों का कहना है कि सरसों का दाना अब तक लगभग परिपक्व हो चुका है और फसल कटाई की ओर बढ़ रही है। यह कर सकते हैं किसान     हल्की सिंचाई : फसल में नमी बनाए रखने के लिए शाम के समय हल्की सिंचाई करें। इससे जमीन का तापमान कम रहेगा और फसल को हीट शाक नहीं लगेगा।     निगरानी : गेहूं के पौधों में पीलापन या दानों के सूखने की स्थिति पर नजर रखें।     पोटेशियम का छिड़काव : विशेषज्ञों की सलाह लेकर पोटैशियम जैसे तत्वों का प्रयोग करें जो पौधों को गर्मी सहने की शक्ति प्रदान करते हैं। मौसम विभाग बता रहा हल्की बारिश का अनुमान     मौसम में आए बदलाव और बढ़ते तापमान से गेहूं की फसल अधिक प्रभावित होगी। हालांकि मौसम विभाग अभी हल्की बारिश का अनुमान बता रहा है। ऐसे में उम्मीद है कि कम से कम फरवरी में तो ठंडक रहेगी। तापमान यदि बढ़ता है तो गेहूं के दाने की ग्रोथ प्रभावित होगी। –आरबीएस जाटव, उप संचालक, कृषि विकास व किसान कल्याण विभाग।  

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बड़ा फायदा, 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों से मिलेगी राहत

नई दिल्ली   केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बड़ी खबर। सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। अगर इसे जनवरी 2026 से प्रभावी मानकर 2027 में लागू किया जाता है, तो कर्मचारियों को लाखों रुपये का एरियर एकमुश्त मिल सकता है। कब से लागू होगा नया वेतन? सरकार की ओर से संकेत हैं कि आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जा सकती हैं। व्यावहारिक रूप से इसे 2027 में लागू किया जा सकता है। इसके बाद कर्मचारियों को 12–20 महीने तक का एरियर एक साथ मिलेगा। फिटमेंट फैक्टर और संभावित बढ़ोतरी फिटमेंट फैक्टर लगभग 2.57 माना जा रहा है। इससे सैलरी में 30% से 50% तक बढ़ोतरी संभव है। अनुमानित एरियर राशि लेवल    संभावित एरियर (₹) लेवल-1     3.60 लाख – 5.65 लाख   लेवल-2      3.98 लाख – 6.25 लाख लेवल-4     5.10 लाख – 8.01 लाख एरियर की गणना कैसे होगी? पुरानी और नई बेसिक सैलरी का अंतर निकाला जाएगा। अंतर को लागू होने तक के महीनों से गुणा किया जाएगा। महंगाई भत्ता (DA) भी बढ़ेगा, जिससे एरियर में अतिरिक्त लाभ जुड़ जाएगा। भेदभाव का कोई प्रावधान नहीं पेंशनर्स के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि नियम कहते हैं कि सिर्फ इस आधार पर कि कोई व्यक्ति 31 दिसंबर 2025 से पहले रिटायर हुआ है या उसके बाद, उनके साथ अलग तरह का व्यवहार नहीं किया जाएगा. 8वें वेतन आयोग से क्या बदलेगा? अगर 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू होता है, तो इसका असर दो तरह से पड़ेगा. पहले यहा कि जो 1 जनवरी 2026 के बाद रिटायर होंगे, उनकी पेंशन की कैलकुलेशन सीधे नए बेसिक पे के आधार पर होगी. साथ ही पुराने पेंशनर्स, जो 31 दिसंबर 2025 तक रिटायर हो चुके होंगे, उनकी पेंशन को एक फिक्स फिटमेंट फैक्टर के जरिए रिवाइज किया जाएगा. सरकार के जवाब से यह साफ है कि 31 दिसंबर 2025 की तारीख कोई डेडलाइन नहीं है जो आपको बढ़ी हुई पेंशन के फायदे से बाहर कर दे. पिछले समय की तरह हर वेतन आयोग ने पुराने पेंशनभोगियों की पेंशन को भी रिवाइज किया है, जिससे वह महंगाई के दौर में पीछे न छूटें. किन्हें मिलेगा फायदा? केंद्रीय कर्मचारी रक्षा कर्मी ऑल इंडिया सर्विसेज अधिकारी पेंशनर कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत लंबे समय से वेतन संशोधन की मांग कर रहे कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ी राहत है। बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को देखते हुए यह कदम जरूरी माना जा रहा है।

छत्तीसगढ़ सरकार की बड़ी राहत, 82 लाख परिवारों को मिलेगा दो महीने का राशन

रायपुर छत्तीसगढ़ में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। विष्णु देव साय सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत प्रदेश के करीब 82 लाख राशन कार्डधारकों को फरवरी 2026 में ही फरवरी और मार्च दो महीने का राशन एक साथ देने का फैसला लिया है। इस फैसले से लाखों परिवारों को समय से पहले राहत मिलेगी और राशन वितरण व्यवस्था और भी सुचारू होगी। खाद्य विभाग के निर्देश पर सभी जिलों में गोदामों से चावल का उठाव तेज कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि NFSA योजना के तहत आने वाले अंत्योदय और प्राथमिकता कार्डधारकों को फोर्टिफाइड चावल दिया जाएगा, जबकि राज्य योजना के APL कार्डधारकों को उनकी पात्रता अनुसार चावल मिलेगा। इसके अलावा फरवरी महीने के लिए नमक, शक्कर और गुड़ का भी वितरण किया जाएगा, ताकि उपभोक्ताओं को सभी जरूरी सामान एक साथ मिल सके। राशन वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए ई-पॉस मशीन से बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है। दो महीने का राशन एक साथ मिलने के कारण हितग्राही को मशीन पर दो बार अंगूठा लगाना होगा। चावल के अतिरिक्त, फरवरी माह के लिए नमक, शक्कर और गुड़ का आबंटन भी जारी किया गया है, ताकि उपभोक्ताओं को सभी आवश्यक सामग्री एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें।राशन वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने ई-पास (e-PoS) मशीन के माध्यम से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को अनिवार्य रखा है। चूंकि इस बार दो महीने का राशन एक साथ दिया जा रहा है, इसलिए हितग्राहियों को मशीन पर दो बार (पृथक-पृथक) अंगूठा लगाकर प्रमाणीकरण करना होगा। एईपीडीएस (AePDS) सॉफ्टवेयर में इसके लिए आवश्यक तकनीकी बदलाव किए गए हैं। दुकानदारों को भी निर्देशित किया गया है कि वे उपभोक्ताओं को इस प्रक्रिया के बारे में पहले से जानकारी दें ताकि दुकानों पर अनावश्यक भीड़ न लगे।भंडारण और निगरानी के कड़े निर्देशसरकार ने स्पष्ट किया है कि दो महीने का राशन एकमुश्त (CG News) देने के कारण उचित मूल्य की दुकानों में पर्याप्त स्टॉक होना अनिवार्य है। सरकार ने दुकानदारों को निर्देश दिए हैं कि उपभोक्ताओं को पहले से जानकारी दें, ताकि राशन दुकानों पर भीड़ न लगे। खाद्य विभाग के अनुसार, मिलिंग में देरी की चर्चा जरूर है, लेकिन सरकार का दावा है कि हर पात्र परिवार को समय पर पूरा राशन मिलेगा। खाद्य विभाग के नियंत्रकों ने पुष्टि की है कि गोदामों से चावल का उठाव तेजी से किया जा रहा है और वितरण की निगरानी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। हालांकि, मिलिंग की धीमी गति के कारण कुछ क्षेत्रों में स्टॉक की चुनौतियों की चर्चा थी, लेकिन विभाग ने दावा किया है कि वितरण में कोई बाधा नहीं आएगी और प्रत्येक पात्र परिवार को उनका हक समय पर मिलेगा।

रूस की रणनीति से सोने की कीमतें धड़ाम, 1 लाख रुपये से नीचे जाने की आशंका

इंदौर   भारत में सोने की कीमतों ने वर्ष 2025 में शानदार रिटर्न दिया था. 2026 की शुरुआत में भी तेजी का सिलसिला जारी रहा और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम के शिखर तक पहुंच गया. हालांकि, हाल के सत्रों में इसमें तेज करेक्शन भी देखने को मिला है. पिछले सप्ताह के अंत में MCX पर सोना लगभग ₹1,56,200 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जो अपने उच्चतम स्तर से करीब 13 प्रतिशत नीचे है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी यही रुझान दिखा. COMEX पर सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से लगभग 10 प्रतिशत नीचे कारोबार करता नजर आया. अब बाजार में यह चर्चा तेज है कि अगर भू राजनीतिक समीकरण बदलते हैं तो सोना 3,000 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकता है. दरअसल, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सोने की तेजी को अब नई चुनौतियां मिल रही हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस अमेरिका के साथ डॉलर आधारित व्यापार समझौते की संभावनाएं तलाश रहा है. यदि ऐसा होता है तो यह BRICS देशों की ‘डीडॉलराइजेशन' रणनीति के लिए बड़ा झटका हो सकता है. रूस-अमेरिका गठजोड़  अब तक BRICS देशों द्वारा व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कम करने और सोने का भंडार बढ़ाने की कोशिशें की जा रही थीं. इसी कारण वैश्विक स्तर पर सोने की मांग मजबूत बनी हुई थी. लेकिन रूस के संभावित रुख में बदलाव से यह धारणा कमजोर पड़ सकती है, जिसका सीधा असर सोने की कीमतों पर दिख सकता है. अमेरिकी आर्थिक संकेतक भी बने कारण दरअसल, सोने की कीमतें केवल भू राजनीतिक घटनाओं पर ही निर्भर नहीं करतीं, बल्कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. हाल में अमेरिका में महंगाई के आंकड़े मजबूत आए हैं, जिससे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हुई हैं. ऐसे में अगर फेड दरों में कटौती टालता है, तो डॉलर मजबूत रह सकता है. मजबूत डॉलर आमतौर पर सोने के लिए नकारात्मक माना जाता है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना महंगा हो जाता है और मांग घटती है. निवेशकों के लिए क्या है संकेत? मौजूदा परिस्थितियों में कीमती धातुओं के बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि सोने में लंबी अवधि के निवेशक घबराएं नहीं, लेकिन अल्पकालिक निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए. यदि रूस-अमेरिका व्यापार में डॉलर की वापसी की खबरें पुख्ता होती हैं और फेड दरों में कटौती नहीं करता, तो सोना ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम के नीचे भी आ सकता है. हालांकि अंतिम दिशा वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी. सोना परंपरागत रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है. लेकिन जब वैश्विक जोखिम कम होते हैं और डॉलर मजबूत होता है, तो इसमें मुनाफावसूली बढ़ जाती है. फिलहाल, बाजार इसी दोराहे पर खड़ा है. आने वाले हफ्तों में रूस की आधिकारिक प्रतिक्रिया, अमेरिकी आर्थिक डेटा और वैश्विक बाजार का रुख तय करेगा कि सोना फिर से चमकेगा या कीमतों में और गिरावट देखने को मिलेगी.

इंदौर मेट्रो परियोजना: बड़ा गणपति स्टेशन के लिए 16 मकान अगले हफ्ते हटेंगे, 28 फ्लैट के लिए दावा

इंदौर  बड़ा गणपति भूमिगत मेट्रो स्टेशन के निर्माण में बाधक पीलियाखाल क्षेत्र के 16 मकानों को अगले सप्ताह हटाया जाएगा। मेट्रो प्रबंधन द्वारा अभी यहां रहने वाले लोगों को रंगवासा क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने ताप्ती परिसर के फ्लैट में शिफ्ट करने का प्रस्ताव जिला प्रशासन को दिया है। मेट्रो प्रबंधन द्वारा अभी यहां रहने वाले 16 परिवारों को दिए जाने वाले फ्लैट के लिए प्रशासन को 1.29 करोड़ रुपये की राशि दी है। 28 परिवारों को 28 फ्लैट की मांग हालांकि रहवासियों की मांग है कि यहां बने 16 घरों में 28 परिवार रहते है। ऐसे में 28 परिवारों को 28 फ्लैट दिए जाएं। इस पर कलेक्टर की अध्यक्षता में आगामी दिनों में होने वाली बैठक में ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। रहवासियों की मांग है कि उनके पास राजीव गांधी आश्रय मिशन के तहत मिले हुए जमीन के पट्टे है। ऐसे में उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए। रहवासियों की परेशानी मकान शिफ्ट हो जाएंगे लेकिन बच्चे के स्कूल का क्या होगा पीलियाखाल में रहने वाले लोगों की परेशानी यह है कि उन्हें रंगवासा शिफ्ट किया जा रहा है। ऐसे में अभी यहां के परिवारों के कई बच्चे शिक्षा के अधिकार के तहत बड़ा गणपति व कालानी नगर के निजी स्कूलों में पढ़ते है। ऐसे में उनकी पढ़ाई में मुश्किल आएगी। रंगवासा से दूरी ज्यादा होने पर बच्चों को बड़ा गणपति क्षेत्र के स्कूलों में लाना मुश्किल होगा। रहवासी भूमि यादव के मुताबिक हमारे क्षेत्र अराध्या, आरव, वंशिका पाल सहित कई बच्चे आरटीई के तहत निजी स्कूलों में पढ़ते है। ऐसे में उनके लिए परेशानी होगी रंगवासा में जिस मल्टी में हमें फ्लैट दिए जा रहे है, वहां लोग नशाखोरी करते है। मेरे पापा हम्माली करते है और मैं भी इस क्षेत्र में काम करती है। ऐसे में हमें भी कामकाज के लिए ज्यादा दूर से आना पड़ेगा। रहवासी बलराम वर्मा के मुताबिक मेरे दो बच्चे कालानी नगर क्षेत्र के स्कूलों में आरटीई के तहत पढ़ते है। ऐसे में रंगवासा जाने पर बच्चों की पढ़ाई छूट जाएगी। इस वजह से हमें बड़ा गणपति क्षेत्र के पास ही आवास दिए जाना चाहिए। विस्थापन के नियमों के तहत ही रंगवास क्षेत्र में दिए जा रहे फ्लैट     मेट्रो प्रबंधन द्वारा अभी पीलिया खाल में रहने वाले 16 परिवारों को रंगवासा में फ्लैट देना तय किया गया है। इन्हें शिफ्ट करने की कार्रवाई जल्द की जाएगी। यहां रहने वाले लोगों जो बच्चे आरटीई के तहत निजी स्कूलों में पढ़ते है। उन्हें उस क्षेत्र के निजी स्कूलों में इसी योजना के तहत पढ़ाने की व्यवस्था करेंगे। पट्टाधारकों के विस्थापन के नियमों के तहत ही उन्हें रंगवासा क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के फ्लैट दिए जा रहे है। नगर निगम व मेट्रो प्रबंधन जल्द ही लोगों के फ्लैट के नंबर तय करेंगे। निधि वर्मा, एसडीएम  

घर-घर दस्तक देने जाएंगे जनगणना कर्मचारी, प्रशासन ने साफ किया – यह 1 चीज पूछी नहीं जाएगी

भोपाल  एमपी के भोपाल जिले में अब जनगणना 2027 की हलचल तेज हो गई है। जिले में लोग मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए प्रशासन को दस्तावेज देने की जद्दोजहद करते नजर आए थे, लेकिन अब जनगणना में स्थिति पूरी तरह से उलट होगी। यह मौखिक होगी। कोई दस्तोवज नहीं लिया जाएगा। आधार नंबर मांगा जा सकता हैं। हालांकि ये केंद्र की सूची में नहीं है, इसलिए वैकल्पिक ही रहेगा। मोबाइल नंबर जरूर जनगणना के लिए लिया जाएगा। जनगणना फार्म डिजिटली भरा जाएगा। इसके बाद आप डिजिटल रसीद दी जाएगी। ये 1 चीज नहीं पूछेगा प्रशासन अभी पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक कार्यालयों में ट्रेनिंग-तैयारियों के तौर पर हो रही है। अप्रैल से हर घर दस्तक देना शुरू होगी। एसआइआर में साढ़े चार लाख मतदाताओं के नाम हटाए थे, जनगणना में सिर्फ 33 हजार को ही मृत श्रेणी में रखा जाएगा। जनगणना में बैकिंग की डिटेल नहीं मांगी जाएगी। जनधन खातों व यूपीआइ के तहत हर व्यक्ति की बैकिंगग डिटेल सरकार के पास है। इंटरनेट की पहुंच, स्मार्टफोन के साथ घरेलू उपयोग में एलपीजी/पीएनजी की उपलब्धता व कनेक्शन को लेकर सवाल जरूर होंगे। स्वगणना के लिए 15 दिन मिलेंगे जनगणना में एक अप्रेल 2026 से सितंबर 2026 तक घर का सर्वे-मैपिंग होगी। 30 दिन गहन काम होगा। इससे पंद्रह दिन पहले लोगों को खुद ही ऑनलाइन फार्म भरकर स्वगणना का विकल्प खोला जाएगा। यानी नागरिक खुद ही अपना डिजिटल फार्म डिटेल के साथ जमा कर सकेंगे। 10 लाख घरों होगी मैपिंग 1 मई से शुरू होने वाली जनगणना को लेकर मध्यप्रदेश में तैयारियां तेज हो गई हैं। जिला प्रशासन ने इस महाअभियान के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी पूरी कर ली है। इस बार जनगणना प्रक्रिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे नागरिक स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज कर सकेंगे। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि नागरिक इंडियन सेंसस डाटा कलेक्शन पोर्टल पर लॉग-इन कर अपनी जानकारी उपलब्ध करा सकेंगे। इसके साथ ही पारंपरिक तरीके से डोर-टू-डोर सर्वे भी किया जाएगा। जनगणना कार्य के लिए करीब 8000 कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। 16 फरवरी से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होगा। अभियान के तहत लगभग 10 लाख घरों की जियो-टैगिंग और मैपिंग की जाएगी। मैपिंग पूरी होने के बाद कर्मचारियों को सर्वे कार्य के लिए तैनात किया जाएगा। कितने सवाल पूछे जाएंगे 2 मई से 31 मई 2026 के बीच लोगों से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे. इन सवालों का सही और स्पष्ट जवाब देना अनिवार्य होगा. सबसे पहले घर से जुड़े सवाल होंगे, जैसे मकान नंबर, मकान की स्थिति, दीवार और छत की सामग्री, घर का उपयोग और फर्श की स्थिति आदि. इसके बाद परिवार से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे. इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, घर में रहने वाले लोगों की जानकारी, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग और जाति (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य) जैसी जानकारी ली जाएगी. साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि घर अपना है या किराए का, कितने कमरे हैं और कितने विवाहित परिवार उसमें रहते हैं. घर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल भी शामिल हैं. जैसे पीने के पानी का सोर्स, शौचालय है या नहीं, बिजली की सुविधा, खाना पकाने का ईंधन और गंदे पानी के निकालने की व्यवस्था. इसके अलावा घरेलू समानों की जानकारी भी ली जाएगी. जैसे घर में रेडियो, टीवी, इंटरनेट, लैपटॉप या कंप्यूटर, मोबाइल फोन, साइकिल, मोटरसाइकिल, कार है या नहीं. मोबाइल नंबर भी दर्ज किया जाएगा, लेकिन यह केवल जनगणना से जुड़ी सूचना के लिए होगा. ये 33 प्रमुख सवाल पूछे जाएंगे? जनगणना के दौरान नागरिकों से घर की स्थिति, निर्माण सामग्री (फर्श, दीवार, छत), परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम व लिंग, सामाजिक वर्ग (SC/ST/अन्य), स्वामित्व की स्थिति, कमरों की संख्या, विवाहित जोड़ों की संख्या, पेयजल स्रोत, बिजली की उपलब्धता, शौचालय की स्थिति व प्रकार, रसोई और ईंधन का प्रकार, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन, अपशिष्ट जल निकास, स्नान सुविधा, इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों की उपलब्धता, वाहन, मुख्य खाद्यान्न और मोबाइल नंबर सहित अन्य जानकारियां ली जाएंगी। जनगणना-2027 पर सीएम का बयान? भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ऐतिहासिक जनगणना होने जा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि मध्यप्रदेश इस प्रक्रिया में देश के लिए आदर्श मॉडल बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया है। इसी के आधार पर सरकारी योजनाएं, संसाधनों का वितरण और विकास की रणनीतियां तय की जाती हैं। एसआइआर में इन्हें हटाया, जनगणना में शामिल होंगे -1.01 लाख के फार्म संग्रहित नहीं किए जा सके -2.86 लाख स्थायी तौर पर शिफ्ट हो गए -14171 दोहरे नाम थे -33791 मृत हो गए नोट नोट: मृत पाए मतदाताओं को छोड़े तो परिजनों के कहने पर बाकी का नाम जनगणना में शामिल रहेगा। धूप तीखी हुई तो बड़ा तालाब स्थित बोट क्लब पर सन्नाटा पसर गया। आग से फैक्ट्री खाक होने के बाद संचालक के बेटा और बेटी विलाप करते हुए।