samacharsecretary.com

यौन उत्पीड़न केस में गिरफ्तारी पर संत अविमुक्तेश्वरानंद बोले—सच्चाई जल्द आएगी सामने

वाराणसी पॉक्सो मामले में फंसे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। अदालत ने खुद इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया, लेकिन अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का मानना है कि उन्हें गिरफ्तारी से डर नहीं लगता, लेकिन पुलिस गिरफ्तारी के लिए पुख्ता सबूत तो लाए। उन्होंने यह तक कह डाला कि रामचरितमानस में पहले ही कहा गया है कि कुछ धर्म के ठेकेदार शंकराचार्य और धर्म से जुड़े साधुओं को परेशान करने आएंगे। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पॉस्को एक्ट में गिरफ्तारी के सवाल पर कहा, "जो भी आएंगे उनका स्वागत किया जाएगा और जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा। जितनी जल्दी पुलिस को मामले को विस्तारित करने की है, उतनी ही हमें है। हम भी इस कलंक का निपटान जल्द से जल्द करना चाहते हैं। अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर कहा, "रामचरितमानस में लंका कांड के दौरान विभीषण ने रावण को सलाह देते हुए कहा था कि जो कोई भी धर्मधारी, कपटी और पाखंडी ज्यादा समय तक ठीक नहीं पाएगा और उसका जल्द ही पर्दाफाश होगा। जैसे रावण ने साधु का वेश लेकर मां सीता का अपहरण किया था, राहु देवता बनकर अमृत पीने के लिए घुस आया था, लेकिन ज्यादा समय तक टिक नहीं पाया। वैसे ही कथाकथित धर्म के ठेकेदारों का भी पर्दाफाश भी जरूर होगा। हम निश्चिंत हैं। मामले की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस कर रही है, लेकिन हमारे लोगों को भरोसा नहीं है कि जांच निष्पक्ष तरीके से होगी। अगर जांच दूसरे राज्य की पुलिस करे, जहां भाजपा की सरकार न हो, तभी मामले की सच्चाई सामने आएगी, लेकिन हमें तो इससे भी कोई समस्या नहीं है। उन्होंने मामले में गिरफ्तारी पर कहा कि गिरफ्तारी कुछ परिस्थितियों में होती है। अब हम कहीं भागे नहीं जा रहे हैं और अब मेडिकल टेस्ट का कोई औचित्य नहीं बनता, क्योंकि बहुत महीने बीत चुके हैं और सबसे बड़ी बात मुकदमा झूठा है, इसलिए गिरफ्तारी का सवाल ही नहीं उठता है। फिर भी अगर हमारी गिरफ्तारी होती है तो समझ लेना कि कालनेमि हमें बदनाम करने के लिए यह सब कर रहा है, लेकिन हमें ईश्वर पर पूरा विश्वास है। कालनेमि का भी पर्दाफाश होगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि जनता का सपोर्ट उनके साथ है और उन्हें अंतरमन से पता है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है, तो चिंता की बात नहीं है।

स्कूलों की लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त, पंजाब शिक्षा विभाग का सख्त आदेश

लुधियाना पंजाब के स्कूल शिक्षा महानिदेशक-सह-राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा अभियान प्राधिकरण (पंजाब) ने स्कूलों में चल रहे विभिन्न निर्माण और विकास परियोजनाओं की धीमी प्रगति को लेकर जिलों के शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। विभाग ने बताया कि साल 2024-25 और 2025-26 के तहत स्वीकृत सभी प्रोजेक्ट्स, जैसे ACR, LARS, लाइब्रेरी, आर्ट एंड क्राफ्ट रूम, लड़के/लड़कियों के टॉयलेट और मेजर/माइनर रिपेयर, का निर्माण तेजी से पूरा किया जाना चाहिए। 10 फरवरी 2025 को माननीय सेक्रेटरी स्कूल एजुकेशन ने सभी डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर्स (DEOs) के साथ समीक्षा बैठक की थी, जिसमें कई जिलों में धीमी प्रगति और फंड के इस्तेमाल में कमी को गंभीरता से लिया गया। निर्देशों के अनुसार, साल 2024-25 के तहत स्वीकृत सभी कार्य अगले एक हफ्ते में पूरा करने होंगे। इसके साथ ही फिजिकल और फाइनेंशियल प्रगति का प्रमाण-पत्र और पोर्टल पर डिपॉजिट कर फंड का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना अनिवार्य है। विभाग ने चेतावनी दी कि अगर 2025-26 के बचे हुए कार्य समय पर पूरे नहीं हुए, तो फंड रिलीज़ नहीं किया जाएगा। इसलिए जिलों के स्कूलों में चल रहे निर्माण कार्यों पर नियमित निगरानी रखने और समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश भी दिया गया है।

डच सियासत में नया अध्याय: रॉब जेटन ने ली पीएम पद की शपथ, युवा नेतृत्व पर भरोसा

नीदरलैंड नीदरलैंड में नई गठबंधन सरकार ने आधिकारिक रूप से शपथ ग्रहण कर ली है। देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में Rob Jetten ने पदभार संभाला। यह नई सरकार कई दलों के गठबंधन से बनी है और राजनीतिक स्थिरता तथा सहमति की नई शुरुआत का संकेत देती है। पिछले कुछ वर्षों में डच संसद में गुटबाजी और राजनीतिक खींचतान देखने को मिली थी, जिससे निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हुई थी।प्रधानमंत्री जेटन ने संकेत दिया है कि उनकी प्राथमिकता संसद में सहयोग और सहमति का माहौल बनाना होगा। वे देश के भीतर राजनीतिक संतुलन स्थापित करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीदरलैंड की मजबूत भूमिका बहाल करना चाहते हैं।   नई सरकार का लक्ष्य यूरोपीय संघ में नीदरलैंड की प्रभावशाली भूमिका को फिर से स्थापित करना है। जेटन ने कहा है कि वे यूरोपीय सहयोग को मजबूत करने के लिए अपने समकक्ष नेताओं से जल्द बातचीत करेंगे।सरकार ने स्पष्ट किया है कि रूस के खिलाफ युद्ध लड़ रहे यूक्रेन को डच समर्थन जारी रहेगा। यह समर्थन राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग के रूप में बना रहेगा। नई कैबिनेट में विभिन्न गठबंधन दलों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। विदेश नीति, रक्षा और वित्त जैसे अहम मंत्रालयों में अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का संतुलित तरीके से सामना किया जा सके।   कौन हैं रॉब जेटन?  रॉब जेटन  डेमोक्रेट्स 66 (D66) पार्टी से जुड़े हैं और पहले जलवायु व ऊर्जा मंत्री रह चुके हैं। यूरोपीय सहयोग, हरित नीतियों और सहमति की राजनीति उनके प्रमुख एजेंडा हैं। वे यूक्रेन समर्थन और मजबूत EU भूमिका के पक्षधर हैं। Rob Jetten नीदरलैंड के एक प्रमुख उदारवादी नेता हैं, जिन्होंने कम उम्र में ही राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी पहचान बनाई। रॉब जेटन का जन्म 1987 में हुआ। उन्होंने सार्वजनिक प्रशासन (Public Administration) की पढ़ाई की और छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे।  रॉब जेटन के नेतृत्व में गठित यह सरकार डच राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का प्रतीक मानी जा रही है। युवा नेतृत्व, यूरोपीय सहयोग पर जोर और वैश्विक मुद्दों पर सक्रिय रुख इन सबके जरिए नीदरलैंड आने वाले वर्षों में अपनी अंतरराष्ट्रीय स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेगा।  

ऐतिहासिक समझौते की आहट: कार्नी विजिट से पहले भारत-कनाडा रिश्तों में नई उड़ान

कनाडा भारत के कनाडा में उच्चायुक्त Dinesh Patnaik ने उम्मीद जताई है कि भारत और कनाडा अगले एक वर्ष के भीतर व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यह बयान कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले आया है। दोनों देशों ने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में हुए G20 Summit के दौरान बातचीत को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, CEPA का उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। भारत-कनाडा के बीच CEPA पर बातचीत 2010 में शुरू हुई थी, लेकिन कई बार रुक गई। अब बदलते वैश्विक हालात और रणनीतिक जरूरतों को देखते हुए दोनों देश तेजी से आगे बढ़ना चाहते हैं। दिनेश पटनायक ने कहा कि दोनों देशों ने पिछले कुछ वर्षों में कई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं, इसलिए अनुभव के आधार पर समझौता जल्दी संभव है।    किन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस?     प्रधानमंत्री कार्नी की यात्रा के दौरान इन क्षेत्रों पर विशेष जोर रहने की संभावना है:     यूरेनियम और ऊर्जा सहयोग     महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals)     आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)     डिजिटल व्यापार     कृषि और निवेश     नई दिल्ली और मुंबई में वरिष्ठ अधिकारियों और व्यापारिक नेताओं से बैठकें प्रस्तावित हैं।  पूरक अर्थव्यवस्थाएं, कम प्रतिस्पर्धा पटनायक ने कहा कि कनाडा कमोडिटी निर्यातक देश है, जबकि भारत बड़ा उपभोक्ता बाजार है। इसलिए दोनों देशों के उद्योगों में सीधी प्रतिस्पर्धा कम है और सहयोग की संभावनाएं अधिक हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फाइटोसैनिटरी नियम, सरकारी खरीद या कस्टम प्रक्रियाएं जैसे सामान्य मुद्दे इस बार बड़ी बाधा नहीं बन रहे। CEPA के तहत वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश, कृषि, डिजिटल कॉमर्स और हाई-टेक क्षेत्रों में व्यापक सहयोग का रास्ता खुलेगा। यह समझौता वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत और कनाडा के आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती देगा और दोनों देशों को रणनीतिक रूप से करीब लाएगा।

हैरान कर देने वाली मन्नत: ‘अगले साल तक सास मर जाए’, नोट पर लिखकर मंदिर में चढ़ाया

बेंगलुरु कर्नाटक के बेलगावी जिले के एक मंदिर से हैरान कर देने वाली बात सामने आई है। यहां के मंदिर के दानपात्र से पैसों की गिनती के दौरान एक चिट्ठी मिली, जिस पर भगवान से एक अजीबोगरीब दुआ मांगी गई। अधिकारी जब दानपात्र में पैसों की गिनती कर रहे थे, तब उन्हें 100 रुपये के नोट के अंदर मुड़ी हुई एक चिट्ठी मिली, जिसे पढ़कर हर कोई दंग रह गया। सुख-समृद्धि के बजाय मांगी सास की मौत मंदिर में जहां लोग आमतौर पर भगवान से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं, वहीं बेलगावी के इस मंदिर में किसी ने अपनी ही सास की मृत्यु की दुआ मांग डाली। 100 रुपये के नोट के भीतर छिपी इस चिट्ठी में लिखा था – 'हे भगवान, मेरे दुख दूर करो और अगली यात्रा से पहले मेरी सास की मृत्यु हो जाए।' नाम गुप्त, पर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल दानपात्र में मिली इस चिट्ठी पर लिखने वाले का नाम दर्ज नहीं था, जिससे यह पता नहीं चल सका कि यह 'अनोखी प्रार्थना' किसने की है। इस घटना ने मंदिर प्रशासन और दर्शनार्थियों, दोनों को ही अचरज में डाल दिया है। फिलहाल, इस चिट्ठी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

पीएम मोदी बोले- ‘राजाजी उत्सव’ देशभक्ति और सेवा भावना का प्रतीक

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में सोमवार को 'राजाजी उत्सव' का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'राजाजी उत्सव' को एक अद्भुत पहल बताया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राष्ट्रपति भवन से जुड़ी पोस्ट की रीपोस्ट करते हुए लिखा कि 'राजाजी उत्सव' एक अद्भुत पहल है, जो राष्ट्र के प्रति राजाजी के समृद्ध योगदान के विभिन्न पहलुओं को उजागर करता है। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि आप इस उत्सव में अवश्य शामिल हों और इससे प्रेरणा लें! इससे पहले 22 फरवरी को पीएम मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में कहा कि देश गुलामी के प्रतीकों को पीछे छोड़कर भारत की संस्कृति से जुड़ी चीजों को महत्व देने लगा है। इस दिशा में 'राजाजी उत्सव' के रूप में हमारे राष्ट्रपति भवन ने भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान मैंने लाल किले से पंच प्राणों की बात कही थी। उनमें से एक है गुलामी की मानसिकता से मुक्ति। आज देश गुलामी के प्रतीकों को पीछे छोड़कर भारत की संस्कृति से जुड़ी चीजों को महत्व देने लगा है।" उन्होंने बताया कि सी. राजगोपालाचारी स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल थे। वे उन लोगों में थे, जिन्होंने सत्ता को पद की तरह नहीं, सेवा की तरह देखा। सार्वजनिक जीवन में उनका आचरण, आत्मसंयम और स्वतंत्र चिंतन आज भी हमें प्रेरित करता है। पीएम मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश प्रशासकों की मूर्तियां तो लगी रहने दी गईं, लेकिन देश के महान सपूतों को जगह नहीं दी गई। ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा भी राष्ट्रपति भवन में लगी हुई थी। उन्होंने कहा कि ये प्रदर्शनी 24 फरवरी से 1 मार्च तक चलेग चलेगी।"

दीदी का बड़ा दांव! चुनाव से पहले BJP सांसद को सम्मान देकर क्या साधना चाहती हैं ममता बनर्जी

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली 25 विशिष्ट हस्तियों को राज्य के नागरिक पुरस्कारों से सम्मानित किया है। 'अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस' के अवसर पर शनिवार को कोलकाता के देशप्रिय पार्क में आयोजित एक कार्यक्रम में इन हस्तियों को सम्मानित किया गया। ये सम्मान कला, संस्कृति, साहित्य, लोक प्रशासन और पब्लिक सर्विस में खास योगदान के लिए दिए जाते हैं। इस मौके पर सभी हस्तियों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न भेंट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "मैं आप सभी के प्रति अपना सर्वोच्च सम्मान प्रकट करती हूं और आपको बधाई देती हूं।" कौन हैं नगेन रॉय? अप्रैल में संभावित विधानसभा चुनावों से पहले मातृभाषा दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बंग विभूषण’ नगेन रॉय को दिया गया है, जिससे सियासी हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। दरअसल, नगेन रॉय जिन्हें उनके समुदाय में अनंता महाराज के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद हैं। 2023 में ही भाजपा ने उन्हें उच्च सदन के लिए नामित किया था। इस सम्मान को ममता बनर्जी द्वारा स्वयं प्रदान किया गया, जिसमें उन्हें अंगवस्त्र और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान के जरिए क्या सियासी संदेश? यह सम्मान ऐसे समय में दिया गया है जब राज्य में अप्रैल-मई के दौरान विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में एक विपक्षी दल के सांसद को सम्मानित करना राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। खासकर इसलिए भी क्योंकि नगेन रॉय राजबंशी समुदाय के प्रभावशाली नेता हैं, जिसका उत्तर बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण प्रभाव है। यह वही क्षेत्र जहां हाल के चुनावों में भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन किया है और तृणमूल कांग्रेस को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ममता ने सम्मान देते हुए क्या कहा? सम्मान समारोह में बोलते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि नगेन रॉय को यह सम्मान राजबंशी भाषा और संस्कृति के संरक्षण में उनके योगदान के लिए दिया गया है और उम्मीद जताई कि वे आगे भी समाज के लिए काम करते रहेंगे। वहीं, नगेन रॉय ने इस सम्मान पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि उन्होंने कभी इसकी कल्पना भी नहीं की थी। राजनीतिक अटकलों के बीच जब उनसे दल बदल की संभावना पर सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि वे किसी पार्टी में शामिल नहीं हो रहे हैं और राजनीति में उनकी दिलचस्पी सीमित है। राजबंशी समुदाय में उनकी पकड़ मजबूत नगेन रॉय लंबे समय से ‘ग्रेटर कूच बिहार’ राज्य की मांग से जुड़े रहे हैं और राजबंशी समुदाय में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस समुदाय का वोट काफी हद तक उनके रुख से प्रभावित होता है। इस सम्मान के समय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस पिछले 15 वर्षों से सत्ता में है, जबकि भाजपा राज्य में उसकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरी है। उत्तर बंगाल में राजबंशी समुदाय का प्रभाव निर्णायक माना जाता है, ऐसे में नगेन रॉय को दिया गया यह सम्मान चुनावी रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। पहले टीएमसी के करीब माने जाते थे गौरतलब है कि नगेन रॉय पहले तृणमूल कांग्रेस के करीब माने जाते थे, लेकिन बाद में भाजपा के साथ जुड़े। हाल ही में उन्होंने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर भी असंतोष जताया था, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे अपने समुदाय के मुद्दों पर खुलकर बोलते रहे हैं। नगेन रॉय के अलावा राज्य का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'बंग विभूषण' चित्रकार गणेश हलुई, गायक शिवाजी चट्टोपाध्याय, श्रीराधा बंद्योपाध्याय, नचिकेता चक्रवर्ती, लोपामुद्रा मित्रा, बाबुल सुप्रियो, इमान चक्रवर्ती और कवि श्रीजतो बंद्योपाध्याय को प्रदान किया गया। राज्य का एक अन्य प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'बंग भूषण' गायक मनोमय भट्टाचार्य, राघव चट्टोपाध्याय, रूपंकर बागची, अदिति मुंशी, बाउल कलाकार कार्तिक दास बाउल, गायक विवेक कुमार और अभिनेता परमब्रत चट्टोपाध्याय सहित अन्य हस्तियों को प्रदान किया गया।

Sukhpal Singh Khaira के ठिकाने पर बुलडोजर एक्शन, समर्थकों का हंगामा, पुलिस तैनात

चंडीगढ़ कपूरथला की भुलत्थ विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा के रामगढ़ गांव के पुश्तैनी घर से जुड़े कथित अवैध निर्माण को प्रशासन ने बुलडोजर से गिरा दिया दिया। इससे रामगढ़ गांव में तनावपूर्ण माहौल बन गया। कार्रवाई के दौरान विधायक सुखपाल खैरा भी मौक पर मौजूद रहे। खैरा की अपील के बाद बड़ी संख्या में समर्थक उनके घर के बाहर जमा हो गए। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। खैरा ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए कहा कि यह कदम बिना नोटिस और सुनवाई के उठाया जा रहा है। खैरा ने आरोप लगाया कि सीएम भगवंत मान के गैर-कानूनी आदेश पर पुलिस और ब्यूरोक्रेसी द्वारा रामगढ़ में मेरे घर के कुछ हिस्से को बिना किसी नोटिस या सुनवाई के जबरदस्ती गिराने की कार्रवाई की जा रही है। बुलडोजर के आगे धरने पर बैठ गए विधायक विधायक खैहरा अपने समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बुलडोजर के आगे धरने पर बैठ गए। इस दौरान पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। पुलिस ने विधायक को हटाने की कोशिश की, लेकिन समर्थकों के विरोध के चलते हालात तनावपूर्ण बने रहे। खैहरा के घर से जुड़े कथित अवैध निर्माण पर प्रशासन ने बुलडोजर चला दिया। गेट का पिलर गिरा दिया गया। प्रशासन बोला, घर नहीं, अवैध कंस्ट्रक्शन गिराया प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि घर नहीं, बल्कि घर से जुड़े कथित अवैध कंस्ट्रक्शन को गिराने की कार्रवाई की गई है। दूसरी ओर, खैहरा ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम बिना किसी नोटिस या सुनवाई के उठाया जा रहा है। वहीं, इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। पंजाब कांग्रेस ने इस कार्रवाई को बदला बताते हुए मुख्य मंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी सरकार पर हमला बोला है। पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा कि विधायक सुखपाल सिंह खैहरा के घर की दीवार का पिलर गिराए जाने की निंदा की है। उन्होंने इस कार्रवाई को भगवंत मान सरकार और पुलिस की खुली गुंडागर्दी बताया है। पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने खैहरा के घर हुई तोड़-फोड़ की कार्रवाई की सख्त शब्दों में निंदा की है। उन्होंने सत्ताधारी पार्टी को घेरते हुए कहा कि सियासी ताकत हमेशा के लिए नहीं होती पर किए गए कामों की जवाबदेही स्थाई होती है। बाजवा ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को निशाने पर लेते हुए कहा कि अन्यायपूर्ण आदेशों की पालना करने वाले हर अधिकारी और हर कार्रवाई को आने वाले समय में याद रखा जाएगा। मजीठिया बोले, आप सरकार की खुलेआम गुंडागर्दी शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा के घर पर पीला पंजा चलाने को लेकर पंजाब सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कड़ी निंदा की है। मजीठिया ने सुखपाल सिंह खैहरा से फोन पर बातचीत कर पंजाब सरकार और पुलिस द्वारा की जा रही कथित धक्केशाही की जानकारी ली। मजीठिया ने सरकार पर आरोप लगाया कि पंचायत विभाग ने बिना कोई नोटिस दिए जेसीबी मशीन से तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी। उन्होंने इस कार्रवाई को खुलेआम गुंडागर्दी करार दिया। मजीठिया ने कहा कि वह इस कठिन समय में सुखपाल सिंह खैहरा के साथ खड़े हैं।

तिरुपति लड्डू केस में बड़ा फैसला, जांच खत्म; स्वामी की अर्जी पर सुनवाई से इंकार

आंध्र प्रदेश तिरुपति लड्डू विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तिरुपति मंदिर में मिलावटी घी से लड्डू बनाए जाने के मामले में एसआईटी ने जांच पूरी कर ली है। राज्य सरकार ने अगर अगल से जांच करवाई है तो इसमें भी कुछ गलत नहीं है। स्वामी ने राज्य सरकार की एक सदस्यीय जांच समिति के खिलाफ कोर्ट का रुख किया था। पर्याप्त आधार नहीं स्वामी ने राज्य सरकार की एक सदस्यीय समिति के गठन को चुनौती दी थी। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि याचिका के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं हैं। एक सदस्यीय समिति और सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित की गई एसआईटी की जांच एक दूसरे को ओवरलैप नहीं कर रही हैं। दोनों जांचों का दायरा अलग-अलग है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक जांच और चार्जशीट से जुड़ी आपराधिक प्रक्रिया में कोई टकराव नहीं हैं। ऐसे में दोनों प्रक्रियाएं एक साथ चल सकती हैं। एसआईटी की जांच में क्या पाया गया एसआईटी की जांच में कहा गया है कि भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में प्रसाद बनाने के लिए जिस घी का इस्तेमाल होता था उसमें केमिकल और पामोलिन तेल का इस्तेमाल किया जाता था। ईडी पता लगाएगी कि इस तरह का मिलावटी घी बेचकर किसने कितने पैसे कमाए हैं। हालांकि रिपोर्ट में कहीं भी चर्बी वाले घी की बात नहीं कही गई थी। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) नेताओं पर तिरुपति में लड्डू (प्रसाद) बनाने में इस्तेमाल घी में कथित मिलावट के मामले में दूसरों पर दोष मढ़कर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करने का शनिवार को आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री ने पलनाडु जिले के विनुकोंडा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए दावा किया कि वाईएसआरसीपी नेताओं ने तिरुपति लड्डू में मिलावट की जांच में कई बाधाएं खड़ी कीं और यहां तक ​​कि उच्चतम न्यायालय का रुख भी किया। आंध्र सरकार ने एसआईटी की जांच रिपोर्ट की समीक्षा करने के लिए भी एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की है। आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार के नेतृत्व में एक सदस्यीय समिति गठित की जो दोषी लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की सिफारिश करेगी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त सीबीआई नीत विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जांच पूरी करने और आरोपपत्र दाखिल करने के बाद इस समिति का गठन किया गया है।  

गैस टैंकर हादसे से लगा 33 घंटे का जाम, अब सरकार देगी राहत—FASTag में वापस आएगा टोल पैसा

मुंबई मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 3 फरवरी को लगे भीषण जाम में अगर आप भी फंसे थे आपके लिए एक खुशखबरी है। कभी भी आपके अकाउंट में टोल टैक्स रिफंड हो सकता है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर एक गैस टैंकर दुर्घटना के बाद भीषण यातायात जाम में फंसे एक लाख से अधिक वाहन चालकों को कुल मिलाकर 5.16 करोड़ रुपये का टोल रिफंड मिलेगा। जानकारी के मुताबिक कुल 1.2 लाख यात्रियों को टोल रिफंड होगा। 33 घंटे का भीषण जाम तीन फरवरी को एक्सप्रेसवे के खोपोली खंड पर एक गैस टैंकर पलट गया, जिससे 33 घंटे तक यातायात ठप रहा और कई किलोमीटर तक यातायात अवरूद्ध रहा, जिससे कई वाहन चालकों और यात्रियों को पानी, भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ा। दुर्घटना के बाद, प्रशासन ने टोल वसूली को तत्काल निलंबित करने का आदेश दिया था। हालांकि, तब तक कई वाहन चालकों के फास्टैग खातों से टोल शुल्क पहले ही काटे जा चुके थे। अधिकारी ने बताया, 'टोल वसूली रोकने का आदेश जारी होने के बावजूद वाहन मालिकों से वसूल की गई पूरी राशि वापस करने का निर्णय लिया गया है। 5.16 करोड़ रुपये की यह वापसी राशि एमएसआरडीसी द्वारा भुगतान की जाएगी। यह राशि अगले कुछ दिनों में, प्रभावित वाहन मालिकों के फास्टैग खातों में सीधे जमा कर दी जाएगी।' रिपोर्ट के मुताबिक आईआरबी इन्फ्रास्ट्रक्चर से फास्टैग कटौती का डेटा मांगा गया था। एमएसआरडीसी ने आईआरबी से पूछा था कि आखिर टोल कलेक्शन रोकने का आदेश होने के बाद भी टोल क्यों वसूल जा रहा था। इस भीषण ट्रैफिक जाम में सभी यात्रियों और खासकर बुजुर्गों और महिलाओं को बड़ी मुसीबत उठानी पड़ी थी। कई लोग वापस जाने का विचार कर रहे थे लेकिन उनके पास गाड़ी मुड़ाने का भी ऑप्शन नहीं था। वहीं जब टोल कलेक्शन की बात सामने आई तो लोगों को गुस्सा और बढ़ गया। कब मिल सकता है टोल का रिफंड टोल रिफंड करने को लेकर कुछ नियम हैं। अगर ज्यादा लंबा जाम होता है और ज्यादा देर तक यह खुल नहीं पाता है तब टोल रिफंड किया जा सकता है। अगर फास्टैग की गड़बड़ी की वजह से गलत पैसे कटते हैं तब भी पैसे रिफंड किए जाते हैं। इसके अलावा बिना टोल प्लाजा से गुजरे ही अगर टोल कटता है तो इसे रिफंड किया जाता है। एक बार गुजरने पर दो बार डिडक्शन होने पर भी रिफंड करने का नियम है।