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मैच के बाद David Miller ने खोला राज, भारत के सबसे बड़े हथियार को कैसे किया फेल

नई दिल्ली भारत के खिलाफ टी20 विश्व कप 2026 सुपर 8 मुकाबले में स्पिनर वरूण चक्रवर्ती को साउथ अफ्रीका की टीम ने कैसे बेअसर किया? इस रणनीति के बारे में आक्रामक बल्लेबाज डेविड मिलर ने मैच के बाद बताया, जो प्लेयर ऑफ द मैच भी रहे। उन्होंने कहा कि इसके लिये बस शांत दिमाग, सीमित मूवमेंट और मजबूत इरादे की जरूरत थी। दक्षिण अफ्रीका ने भारत को रविवार को इस अहम मुकाबले में 76 रन से हराया। फॉर्म में चल रहे वरुण चक्रवर्ती भारत के 'ट्रंपकार्ड' माने जा रहे थे, लेकिन उन्होंने चार ओवरों में 47 रन दिये। मिलर (35 गेंदों में 63 रन) और डेवाल्ड ब्रेविस (29 गेंदों में 45 रन ) ने उनकी गेंदों की जमकर धुनाई की। मिलर ने मैच के बाद पत्रकारों से कहा ,'' मुझे लगता है कि यह पक्का करने के बारे में है कि अगर वह खराब गेंद डालता है तो हम उसे दूर खेल सकें। गेंद ज्यादा स्पिन भी नहीं हो रही थी तो यह सही रणनीति थी। एक बार फिर हमें लगा कि उस पर दबाव बनाना जरूरी है, क्योंकि वह हर विरोधी टीम के लिये खतरा साबित होता है। हमने इस पर बात की थी।'' अपनी पारी के बारे में मिलर ने कहा कि उन्होंने 'बेसिक्स' पर अमल किया जिससे अब तक उन्हें सफलता मिलती आई है। उन्होंने कहा ,'' यह सुनिश्चित करना था कि आप सरल चीजों पर और अपनी तैयारियों के बेसिक्स पर अडिग रहें। मेरा यही इरादा था। मेरी श्वास, विकेटों के बीच दौड़ , सीमित मूवमेंट , ये सब छोटी छोटी बातें हैं लेकिन मैं इन पर फोकस करता हूं।'' इस जीत के बारे में उन्होंने कहा ,'' भारत को हराया जा सकता है। भारतीय टीम बेहतरीन है लेकिन हम इस तरह के टूर्नामेंट में सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सरल चीजों पर ध्यान दें और लक्ष्य से भटके नहीं। हमारी टीम काफी परिपक्व है और हमने साथ में काफी क्रिकेट खेला है।''

बिजली व्यवस्था की पड़ताल: जायका टीम ने MP Transco के प्रोजेक्ट्स का लिया जायजा

एसएलडीसी और स्काडा सेंटर की प्रशंसा भोपाल जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जायका) द्वारा मध्यप्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण हेतु मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) में संचालित जायका-2 वित्त पोषित विभिन्न परियोजनाओं के अंतर्गत किए गए कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया गया।जायका जापान की इवैल्यूएटर सुश्री हिसाए ताकाहाशी एवं जायका के भारतीय प्रतिनिधि श्री कुनाल गुप्ता ने निर्माण कार्यों, उनकी गुणवत्ता, उपयोगिता तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप क्रियान्वयन की बारीकी से जांच-पड़ताल की। ढीमरखेडा लाइन एवं सब स्टेशन का किया निरीक्षण निरीक्षण के दौरान टीम ने सर्वप्रथम 132 केवी सब स्टेशन ढीमरखेड़ा तथा इसके लिए निर्मित 132 केवी पनागर–ढीमरखेड़ा ट्रांसमिशन लाइन का अवलोकन किया। इवैल्यूएटर सुश्री ताकाहाशी ने लोन स्वीकृति के समय प्रस्तुत प्रारंभिक योजना, परियोजना के क्रियान्वयन, स्थापित उपकरणों की गुणवत्ता, लागत एवं रखरखाव से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण उपरांत उन्होंने सब स्टेशन एवं ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पाए जाने पर संतोष व्यक्त किया। उपयोगिता जानने के लिए स्थानीय नागरिकों से भी की चर्चा जायका द्वारा वित्त पोषित फंड से निर्मित सब स्टेशन की उपयोगिता के संबंध में अधिकारियों से जानकारी लेने के साथ-साथ जायका टीम ने स्थानीय महिलाओं को बुलाकर उनका प्रत्यक्ष फीडबैक भी लिया। महिलाओं ने बताया कि सब स्टेशन के निर्माण से क्षेत्र में बिजली आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब उन्हें पर्याप्त एवं निर्बाध बिजली मिल रही है, जिससे सिंचाई के लिए भी पर्याप्त विद्युत उपलब्ध हो रही है। इससे उनके आर्थिक एवं सामाजिक स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है। स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर और स्काडा का भी किया अवलोकन जायका टीम ने एमपी ट्रांसको के स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी )एवं स्वदेशी तकनीकी एवं उपकरणों से निर्मित स्काडा कंट्रोल सेंटर का भी अवलोकन किया और उसकी कार्य प्रणाली की प्रशंसा की। ये अधिकारी रहे उपस्थित निरीक्षण के दौरान एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता श्री के.एम. सिंघल, अधीक्षण अभियंता श्री आर.सी. शर्मा, कार्यपालन अभियंता श्री ए.पी.एस. चौहान, श्री शशि शेखर, श्री रविराज पटेल, सहायक अभियंता श्री जितेन्द्र तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

वास्तु दोष से सुरक्षा चाहिए? होलाष्टक की एंट्री से पहले घर में करें ये खास परिवर्तन

होलाष्टक का समय हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। होली से आठ दिन पहले शुरू होने वाले इस समय को 'होलाष्टक' कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इन आठ दिनों में सभी ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं, जिसके कारण वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। यही कारण है कि इस दौरान कोई भी शुभ कार्य वर्जित होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि आप होलाष्टक शुरू होने से पहले अपने घर और जीवन से जुड़ी कुछ खास तैयारियों को पूरा कर लेते हैं तो आप आने वाली परेशानियों और वास्तु दोषों से बच सकते हैं। आइए जानते हैं विस्तार से कि वे कौन से काम हैं जिन्हें समय रहते निपटा लेना चाहिए। घर की गहरी सफाई और कबाड़ का निपटारा वास्तु में स्वच्छता का सीधा संबंध सकारात्मकता से है। होलाष्टक के दौरान नकारात्मक शक्तियां प्रभावी होती हैं, इसलिए घर के कोनों में जमा धूल-मिट्टी और मकड़ी के जाले वास्तु दोष को निमंत्रण देते हैं।  घर में पड़ी टूटी हुई क्रॉकरी, बंद घड़ियां या इलेक्ट्रॉनिक कचरा तुरंत बाहर करें। ये चीजें राहु और शनि के नकारात्मक प्रभाव को बढ़ाती हैं। मुख्य द्वार के पास पुराने फटे जूते न रखें। होलाष्टक से पहले इन्हें हटा दें ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश सुगम हो सके। ईशान कोण को दोषमुक्त करना घर का उत्तर-पूर्वी कोना यानी ईशान कोण देवताओं का स्थान माना जाता है। होलाष्टक शुरू होने से पहले यह सुनिश्चित करें कि इस दिशा में कोई भारी सामान या गंदगी न हो। यदि यहां कोई भारी अलमारी रखी है, तो उसे दक्षिण या पश्चिम दिशा में खिसका दें। इस कोने में गंगाजल का छिड़काव करें ताकि ग्रहों की उग्रता का असर आपके घर की शांति पर न पड़े।  रसोई और नमक का उपाय वास्तु शास्त्र में रसोई को घर की समृद्धि का केंद्र माना गया है। होलाष्टक से पहले रसोई की सफाई अनिवार्य है। होलाष्टक शुरू होने से एक दिन पहले पूरे घर में सेंधा नमक मिले हुए पानी से पोंछा लगाएं। नमक नकारात्मक ऊर्जा को सोखने का काम करता है। यह नियम बना लें कि होलाष्टक के दौरान रात को रसोई में जूठे बर्तन न रहें। इससे अन्नपूर्णा दोष लगता है। मुख्य द्वार का सौंदर्यीकरण वास्तु के अनुसार घर का मुख्य द्वार ही भाग्य का द्वार होता है। होलाष्टक में ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को रोकने के लिए मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाएं। द्वार के दोनों ओर सिंदूर से स्वास्तिक बनाएं। यह चिन्ह सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और बुरी शक्तियों को घर के अंदर प्रवेश करने से रोकता है। धन स्थान और तिजोरी की व्यवस्था होलाष्टक के दौरान आर्थिक तंगी से बचने के लिए अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान को व्यवस्थित करें। तिजोरी में लाल कपड़ा बिछाएं और उसमें कुछ गोमती चक्र या कौड़ियां रखें। ध्यान रहे कि होलाष्टक शुरू होने के बाद निवेश या बड़े आर्थिक लेनदेन से बचना चाहिए, इसलिए जो भी निवेश संबंधी कागजी कार्यवाही है, उसे पहले ही पूरा कर लें। पूजा घर की शुद्धि होलाष्टक में भक्ति का विशेष महत्व है क्योंकि भक्त प्रहलाद को इसी दौरान प्रताड़ित किया गया था। अपने मंदिर की सफाई करें और भगवान की मूर्तियों को गंगाजल से स्नान कराएं। खंडित मूर्तियों या तस्वीरों को विसर्जित कर दें। होलाष्टक शुरू होने से पहले शुद्ध घी का दीपक जलाने का संकल्प लें, ताकि घर का आभामंडल शुद्ध रहे।

विश्व चिंतन दिवस के शताब्दी वर्ष पर स्काउट-गाइड का एकता और भाईचारे का संकल्प

बिलासपुर भारत स्काउट एवं गाइड्स जिला संघ बिलासपुर द्वारा विश्व चिंतन दिवस के 100 वर्ष पूर्ण होने पर एक गरिमामय एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम ओल्ड कंपोजिट बिल्डिंग, डीईओ कार्यालय स्थित स्काउट विभाग कक्ष क्रमांक-16 के प्रांगण में संपन्न हुआ, जिसमें राज्य एवं जिला स्तर के पदाधिकारियों सहित जिले भर के स्काउट-गाइड, रोवर्स और रेंजर्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ सर्वधर्म प्रार्थना के साथ हुआ। प्रार्थना के माध्यम से सर्वधर्म समभाव, अनुशासन, सेवा और भाईचारे का संदेश दिया गया, जो स्काउट-गाइड आंदोलन की मूल भावना को दर्शाता है। इसके बाद कक्ष क्रमांक-6 स्थित सभा हॉल में मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां सभी सदस्य एकत्रित हुए। विश्व चिंतन दिवस के उपलक्ष्य में स्काउट, गाइड, रोवर्स एवं रेंजर्स द्वारा तैयार स्लोगन, पोस्टर और बैनरों का प्रदर्शन एवं मूल्यांकन किया गया। प्रतिभागियों ने विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, सेवा और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर रचनात्मक प्रस्तुतियाँ दीं। उत्कृष्ट प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस परेड, राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं तथा विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों में सक्रिय सेवा देने वाले स्काउट-गाइड, रोवर्स एवं रेंजर्स को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संयुक्त राज्य सचिव बीना यादव, अध्यक्षता पदेन जिला आयुक्त (गाइड) सुनीता ध्रुव ने की। विशिष्ट अतिथियों में सहायक राज्य आयुक्त स्काउट विजय कुमार यादव, भूपेंद्र शर्मा तथा सहायक राज्य आयुक्त गाइड डॉ. भारती दुबे उपस्थित रहे। इसके अलावा जिला संघ के अनेक पदाधिकारी, स्काउटर-गाइडर एवं सदस्य भी बड़ी संख्या में मौजूद थे।  समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि विश्व चिंतन दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन और सेवा भावना को सुदृढ़ करने का अवसर है। उन्होंने संगठन के सिद्धांतों का पालन करते हुए समाज सेवा में निरंतर सक्रिय रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम अनुशासन, उत्साह और संगठनात्मक एकता का उत्कृष्ट उदाहरण रहा तथा शताब्दी वर्ष का यह आयोजन स्काउट-गाइड आंदोलन के प्रति समर्पण और सेवा भावना को और मजबूत करने वाला सिद्ध हुआ। कार्यक्रम में जिला सचिव सुश्री लता यादव, जिला संगठन आयुक्त स्काउट महेन्द्र बाबू टंडन, जिला संगठन आयुक्त गाइड डॉ पूनम सिंह, एल.टी.स्काउट देवब्रत मिश्रा, डॉ.नवनीत कौशिक, शत्रुघन सूर्यवंशी, सूर्यकांत खूंटे, निखिल सिंह, शशांक विश्वकर्मा, गाइडर के रूप में प्री.ए.एल.टी गाइड पुष्पा शर्मा, लक्ष्मी बृजवासी, रागिनी चौधरी, मिंदु साडे, डॉ.शीला शर्मा, शशिकला साहू, सुश्री निशा साहू, सुश्री कौशल्या साहू, स्काउट-गाइड रोवर्स-रेंजर्स, स्काउटर-गाइडर मुख्य रूप से उपस्थित रहें।  

सरस मेले में झूला जाम होने से एक दर्जन बच्चे हवा में लटके

पटियाला. पटियाला के सरस मेले में आज उस समय हाहाकार मच गया, जब यहां एक बड़ा झूला ऊपर जाकर लगभग 70-80 फुट की ऊंचाई पर जाम हो गया। इस झूले में एक दर्जन से अधिक बच्चे फंस गए, जिससे मेले में अफरा-तफरी मच गई। बच्चों के माता-पिता ने रोना धोना और गुहार लगानी शुरू कर दी। अचानक हड़कंप मचने से मेले का माहौल बिगड़ गया, जिसके बाद जिला प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके को संभाला। ए.डी. सी. डिवैल्पमैंट दमनजीत मान की अगुवाई में एक टीम ने एक-एक कर बच्चों को नीचे उतारा और उन्हें उनके माता-पिता के हवाले किया। पूरा दिन इस बात को लेकर चर्चा होती रही कि आखिर इन झूलों की टेस्टिंग क्यों नहीं हुई। यह झूले कहां से आए हैं और इन्हें चलाने वाले लोग कौन हैं। लोग पहले से ही इस बात से नाराज थे कि झूलों के लिए बहुत अधिक शुल्क वसूला जा रहा है। सरकारी मेला होने के कारण हर चीज का रेट तय होना चाहिए, लेकिन यहां ऐसी कोई व्यवस्था नजर नहीं आई। लोगों ने कहा कि एक दर्जन बच्चों को लगभग एक घंटे में नीचे उतारा गया। भगवान का शुक्र है कि सभी बच्चों को सुरक्षित नीचे उतारकर उनके माता-पिता को सौंप दिया गया। यदि कोई बड़ा हादसा हो जाता तो यह कभी न भूलने वाला हादसा बन सकता था लेकिन इस लापरवाही के लिए किसी को माफ नहीं किया जाना चाहिए। लोगों का कहना है कि ऐसे झूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

जल जीवन मिशन: 522 घरों में नल कनेक्शन से पानी के लिए हैंडपंपों और कुओं पर निर्भरता खत्म

बिलासपुर. भारत जैसे भौगोलिक विविधताओं से भरे देश में विषमताएं विकास की राह में अक्सर चुनौती बनती रही हैं। पठारी और पाट क्षेत्रों से घिरे दूरस्थ गांव पेयजल की समस्या से जूझते रहे हैं। लेकिन अब केंद्र सरकार और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन से दूरस्थ व दुर्गम अंचलों में भी सभी घरों में नल से स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल पहुंच रहा है। कोरबा जिला मुख्यालय से लगभग 53 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम मांगामार की तस्वीर अब बदल चुकी है। ढाई हजार से अधिक की आबादी वाले इस गांव में जल जीवन मिशन के तहत एक करोड़ 45 लाख 34 हजार रुपए की लागत से रेट्रोफिटिंग योजना क्रियान्वित की गई है। योजना के तहत 40 किलोमीटर क्षमता की एक उच्च स्तरीय पानी टंकी स्थापित की गई है। गांव के हर एक घर में पेयजल पहुंचाने के लिए 3700 मीटर पाइपलाइन बिछाकर 522 घरों में नल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। गर्मियों में विकराल हो जाती थी समस्या मांगामार की श्रीमती समारिन बाई खाण्डेल बताती है कि पहले पेयजल के लिए हैंडपंप, कुओं और अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता था। गर्मी के दिनों में भू-जल स्तर नीचे चला जाता था, जिससे पानी की किल्लत और भी बढ़ जाती थी। कई बार सुबह-सुबह पानी भरने के लिए लंबी कतारें लगती थीं। महिलाओं को घर के कामकाज के साथ पानी लाने घंटों मशक्कत करनी पड़ती थी। अब हर घर में नल, बदली दिनचर्या जल जीवन मिशन के तहत “हर घर जल” की सुविधा मिलने के बाद अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है। प्रत्येक घर तक नल कनेक्शन पहुंच चुका है और नियमित रूप से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति हो रही है। इससे न केवल जल संकट समाप्त हुआ है, बल्कि महिलाओं की दिनचर्या में भी सकारात्मक परिवर्तन आया है। अब महिलाओं को दूर-दूर तक पानी ढोने की मजबूरी नहीं रही। बचा हुआ समय वे परिवार, बच्चों की पढ़ाई और अन्य आयवर्धक गतिविधियों में लगा रही हैं। स्वास्थ्य के स्तर पर भी सुधार देखने को मिल रहा है, क्योंकि स्वच्छ पेयजल से जलजनित बीमारियों का खतरा कम हो गया है। दूरस्थ अंचलों में विकास की नई धारा जल जीवन मिशन ने मांगामार जैसे सुदूर गांवों में जीवन की बुनियादी आवश्यकता पेयजल को घर-घर तक पहुंचाकर विकास की नई इबारत लिखी है। अब बारहों महीने ग्रामीणों को घर पर ही शुद्ध पानी उपलब्ध हो रहा है। हैंडपंपों पर निर्भरता समाप्त हो चुकी है और मांगामार जल संकट से मुक्त हो गया है। जल जीवन मिशन दूरस्थ क्षेत्रों में न केवल लोगों, खासकर महिलाओं का जीवन आसान बना रही है, बल्कि ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में स्थायी सुधार भी ला रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीसी से ग्वालियर के कृषि मंथन में कृषि वैज्ञानिकों को दिया संदेश

कृषि में शोध बढ़ायेंगे, मंडी निर्यात नीति भी लायेंगे सरसों को भी लायेंगे भावांतर के योजना में दलहन-तिलहन, औषधीय और मसाला फसलों का भी बढ़ा रहे उत्पादन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान हमारे प्रदेश की अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। इनके अथक परिश्रम से ही हमारे बाजार गुलजार है। हम वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रहे हैं। यह वर्ष प्रदेश के इतिहास में किसानों के हित और समग्र कल्याण के मामले में मील का पत्थर साबित होगा।उन्होंने कहा कि यह वर्ष 'खेत से लेकर कारखाने तक और बाग से लेकर बाजार तक' की पूरी मूल्य संवर्धन श्रृंखला को एक सूत्र में जोड़ेगा। इस वर्ष हम क़ृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और इनमें वैल्यू एडिशन के लिए अधिकाधिक रोजगार आधारित उद्योगों के विकास, उन्नत किस्म के बीजोत्पादन, पशुपालन, दुग्धोत्पादन, मत्स्योत्पादन में वृद्धि सहित हर वो कदम उठाएंगे, जिनसे खेती और अन्नदाताओं का विकास हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास से कृषि विश्वविद्यालय परिसर, ग्वालियर में हो रहे 'कृषि मंथन एवं कृषि प्रौद्योगिकी मेला 2026' को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना संबंधी कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में तेज़ी से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। हमारी सरकार प्रदेश में औषधीय और मसाला फसलों का उत्पादन बढ़ाने के सभी प्रयास कर रही है। हम जल्द ही कृषि उत्पादन निर्यात नीति लाने वाले हैं। हम कृषि में शोध कार्य भी बढ़ायेंगे। उन्होंने कहा कि हम खेती-किसानी और फल-फूलों की खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए कोई कसर नहीं रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस कृषि मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह हमें किसानो के कल्याण के लिये प्रभावी और कारगर कदम उठाने में सहायक होगा। 'कृषि मंथन' राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर) नई दिल्ली और कृषि विभाग, म.प्र. शासन के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि "समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश" की थीम पर हो रहा कृषि मंथन निश्चित ही किसानों को खेती में जरूरी सुधार और बदलाव लाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आधुनिक कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्रों में मूल्य-श्रृंखला विकास, प्रोसेसिंग, तकनीक अपनाने और ग्रामीण युवाओं की उद्यमिता को बढ़ावा देकर व्यापक रोजगार सृजन करने पर फोकस कर रही है। तकनीकी नवाचार, विविधीकरण और नीतिगत समर्थन से इन क्षेत्रों में न केवल उत्पादकता बढ़ाई जा सकेगी, बल्कि विपणन एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में बाजार अनुरूप लाभकारी व्यवस्था कृषकों के लिए निर्मित होगी। हम कृषि के अलावा उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं सहकारिता क्षेत्र में भी नई सोच से आगे बढ़ रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज कृषि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते जोखिमों का सामना कर रही है। इस मंथन में देश के विभिन्न कृषि संस्थानों के वरिष्ठ वैज्ञानिक विचार मंथन कर नई तकनीकों के विकास की राह प्रशस्त करेंगे। वीडियो काँफ्रेंसिंग में सचिव कृषि एवं किसान कल्याण विभाग निशांत वरवड़े, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह ने भोपाल से सहभागिता की। यूनिवर्सिटी परिसर में हो रहे इस कृषि मंथन में कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के कुलगुरू प्रो. (डॉ.) अरविंद कुमार शुक्ला, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या के कुलपति डा. ब्रजेन्द्र सिंह, यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, धारवाड़, कर्नाटक के कुलपति डॉ. पी.एल पाटिल, भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम, मेरठ के निदेशक डॉ. सुनील कुमार, देश के विभिन्न कृषि संस्थानों से आये वैज्ञानिक, आईसीएआर के पदाधिकारी सहित कृषि अधिकारी भी उपस्थित थे।  

ग्रीन इन्वेस्टमेंट को लेकर सीएम योगी की सिंगापुर की वैश्विक निवेश कंपनी गोल्डन स्टेट कैपिटल (जीएससी) के निदेशक के साथ सफल बैठक

  स्वच्छ ऊर्जा आधारित ग्रीन इंडस्ट्रियल पार्क और क्लाइमेट फाइनेंस पर रहा सीएम का फोकस कौशल विकास और रोजगार सृजन के साथ सतत विकास मॉडल को बढ़ावा सिंगापुर/लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सिंगापुर दौरे के पहले दिन ही कई सफलताएं दर्ज की हैं। मुख्यमंत्री के साथ बैठक में सिंगापुर की वैश्विक निवेश कंपनी गोल्डन स्टेट कैपिटल (जीएससी) ग्रीन्स के निदेशक सुमित नंदा ने उत्तर प्रदेश में 100 मेगावाट के डेटा सेंटर की स्थापना के लिए ₹8000 करोड़ का निवेश करने की घोषणा की। बैठक में प्रदेश में हरित और सतत निवेश (ग्रीन एंड सस्टेनेबल इन्वेस्टमेंट्स) की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परियोजनाओं में सहयोग के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श हुआ। भविष्य की आवश्यकताओं को केंद्र में रखते हुए इस बैठक में रूफटॉप सोलर परियोजनाओं, बैटरी स्टोरेज और ग्रिड सपोर्ट सॉल्यूशंस, ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्वच्छ ऊर्जा संचालित ग्रीन इंडस्ट्रियल पार्कों के विकास पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही पर्यावरण संबंधित जरूरतों के लिए क्लाइमेट फाइनेंस, कार्बन उत्सर्जन में कमी और नवीकरणीय ऊर्जा संचालन से जुड़े कौशल विकास कार्यक्रमों पर भी बातचीत हुई। इन पहलों के माध्यम से रोजगार सृजन की संभावनाओं पर विशेष बल दिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ और व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक विकास मॉडल के प्रति प्रतिबद्ध है। प्रदेश में निवेश के अनुकूल नीतियां, सुदृढ़ औद्योगिक इकोसिस्टम और तेज निर्णय प्रक्रिया, हरित ऊर्जा क्षेत्र में निवेशकों के लिए आदर्श वातावरण प्रदान कर रही हैं। उन्होंने जीएससी ग्रीन्स को परियोजना विकास और निवेश के अन्य अवसरों का सक्रिय अन्वेषण करने का आमंत्रण भी दिया।

इंदिरा कॉलेज में चला ‘अभिमन्यु/सृजन/सम्मान’ अभियान, बालिकाओं को किया जागरूक

सतना पुलिस मुख्यालय महिला सुरक्षा भोपाल के निर्देशानुसार एवं पुलिस अधीक्षक महोदय के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक व उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) के मार्गदर्शन में महिला थाना प्रभारी निरीक्षक श्वेता मौर्या एवं स्टाफ द्वारा इन्द्रा कॉलेज में एकीकृत अभियान अभिमन्यु/सृजन/सम्मान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं को महिला सुरक्षा से जुड़े कानून, महिला अपराधों की जानकारी, हेल्पलाइन नंबर तथा साइबर फ्रॉड से बचाव के उपाय बताए गए। पुलिस अधिकारियों ने छात्राओं से संवाद कर उन्हें निर्भीक होकर शिकायत दर्ज कराने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल हेल्पलाइन का उपयोग करने की सलाह दी।

पुलिस तीरंदाजी प्रतियोगिता में देशभर की 29 टीमें लेंगी हिस्सा

दुर्ग. अखिल भारतीय पुलिस तीरंदाजी प्रतियोगिता की मेजबानी छत्तीसगढ़ को मिली है. अखिल भारतीय पुलिस कंट्रोल बोर्ड नई दिल्ली और छत्तीसगढ़ पुलिस के तत्वावधान में अखिल भारतीय तीरंदाजी प्रतियोगिता पुरुष-महिला का आयोजन छत्तीसगढ़ के भिलाई में होने जा रहा है. 14 वीं अखिल भारतीय तीरंदाजी प्रतियोगिता का आयोजन 27 फरवरी तक छत्तीसगढ़ के भिलाई में हो रहा है. छत्तीसगढ़ पुलिस को इसकी मेजबानी मिली है. इस खेलकूद प्रतियोगिता में देश के विभिन्न राज्यों, केंद्रीय शासित प्रदेश और केंद्रीय सुरक्षा बलों समेत आईबी, रॉ, सीबीआई जैसे पुलिस ऑर्गेनाइजशन की 29 टीमें शामिल हो रही हैं. जिसमें लगभग 450 टीम मैनेजर, कोच और खिलाड़ी प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं. प्रतियोगिता में तीरंदाजी के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी एवं कोच प्रतियोगिता में सम्मिलित हो रहे हैं. आर्चरी (तीरंदाजी) के तीनो इवेंटों का आयोजन खेल परिसर प्रथम वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल भिलाई में होना है. इन्वेंट के सफलतापूर्वक आयोजन और सारी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के डीआईजी सदानंद कुमार को जवाबदेही दी गई है. पुलिस के भी दर्जन भर अभ्यर्थी लेंगे भाग 14 वीं अखिल भारतीय प्रतियोगिता में इंडियन राउंड,रिकर्व और कंपाउंड के विभिन्न तीन इवेंटों के अलग– अलग भाग लेकर कुल 180 मेडलों के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे. जिसमें पुलिस के 12 खिलाड़ियों के द्वारा भाग लिया जाएगा. छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा गमछा गुलदस्ता देकर प्रतियोगिता में आ रहा है मैनेजर कोच एवं प्रतिभागियों को भविष्य स्वागत किया जा रहा है तथा इसकी विभिन्न स्थानों में आवास व्यवस्था तथा भोजन के लिए प्रथम वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र सवाल भिलाई के परिसर ग्राउंड में किया गया है. राजस्थान के 22,उत्तर प्रदेश के 31,जम्मू एंड कश्मीर के 13,पंजाब के 08, आईटीबीपी के 25, एसएसबी के 17 खिलाड़ियों के आगमन पर छत्तीसगढ़ पुलिस के द्वारा गमछा और गुलदस्ता देकर भव्य स्वागत किया गया. गृहमंत्री शर्मा करेंगे उद्घाटन, समापन में सीएम साय होंगे शामिल कल 23 फरवरी को गृह मंत्री विजय शर्मा कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे. 27 फरवरी को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय समापन करेंगे. प्रतियोगिता के भव्य आयोजन के लिए पुलिस मुख्यालय नया रायपुर के द्वारा विभिन्न समितियों का गठन किया गया है. जिसकी समीक्षा पुलिस का वरिष्ठ अधिकारी लगातार कर रहे हैं.