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सरगुजा जिला वुडबॉल संघ के खिलाड़ियों का राष्ट्रीय मंच पर जलवा, जीते सिल्वर मेडल

रायपुर भोपाल में आयोजित ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी वुडबॉल प्रतियोगिता 2025-26 में सरगुजा जिला वुडबॉल संघ के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिले को गौरवान्वित किया। संघ के प्रतिभाशाली खिलाड़ी संदीप सिन्हा एवं साक्षी कुमारी ने संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा की टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए मिक्स डबल इवेंट में शानदार प्रदर्शन कर सिल्वर मेडल अपने नाम किया।  राष्ट्रीय कोच  राजेश प्रताप सिंह ने बताया कि स्ट्रोक इवेंट मिक्स डबल इवेंट में संदीप सिन्हा और साक्षी कुमारी ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीतकर सरगुजा को गौरवान्वित किया है। विगत कई वर्षों से सरगुजा के खिलाड़ी वुडबॉल प्रतियोगिताओं में निरंतर पदक जीतते आ रहे हैं, जो संघ की नियमित प्रशिक्षण व्यवस्था और खिलाड़ियों की मेहनत का परिणाम है। दोनों खिलाड़ी के.आर. टेक्निकल कॉलेज में अध्ययनरत हैं। प्रतियोगिता में प्रीतम जायसवाल, प्रियांशु कुशवाहा, दीपक, निखिल गुप्ता एवं निशांत भगत तथा महिला वर्ग में अंजिल प्रीति टोप्पो, स्नेहा जायसवाल, जल जायसवाल, मोनालिसा तिग्गा एवं उर्मिला एक्का ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में निर्णायक की महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करने वाले सरगुजा के राष्ट्रीय रेफरी  रजत सिंह एवं  आकाश दुबे को आयोजकों द्वारा सम्मानित किया गया।  

तापसी पन्नू बोलीं- इंडस्ट्री में अकेली पड़ गई हूं, हीरो नहीं करना चाहते काम

मुंबई तापसी पन्नू इन दिनों फिल्म अस्सी को लेकर छाई हुई हैं। तापसी ने हमेशा एक बोल्ड और सोसाइटी के महत्वपूर्ण सब्जेक्टस पर बनी फिल्मों में काम किया है। तापसी उन सेलेब में से हैं जो किसी भी मुद्दे पर बात करने से झिझकती नहीं हैं। अब तापसी ने हाल ही में कहा कि कई बार हीरो उनके साथ काम नहीं करना चाहते थे। हीरो काम नहीं करना चाहते साथ दरअसल, सोनल कालरा के साथ इंटरव्यू में तापसी से पूछा गया कि सब जानते हैं कि आप अपने दिमाग की बात करते हैं। लेकिन क्या आपको कभी इस वजह से काम खोना पड़ा है? तो तापसी ने कहा, ‘मुझे सच में पहले नहीं पता था। बस ऐसा था कि कोई बोलता कि नहीं नहीं मैं उसके साथ काम नहीं करना चाहता क्योंकि ऐसी-ऐसी वजह है और फिर आप जानते हो चीजें आपके पास खुद नहीं आती। बस मुझे फिर पता चला कि हीरो तुम्हारे साथ काम नहीं करना चाहता। मुझे लगता है सब जानते हैं कि हीरो डिसाइड करते हैं फिल्म में ज्यादातर जब तक कि कोई बड़ा डायरेक्टर ना हो। दरअसल, कुछ डायरेक्टर्स स्टार डायरेक्टर्स हैं और जब वे कहते हैं कि उन्हें कोई चाहिए तो वो उसे ही लेते हैं।’ जब राजकुमार ने तापसी को लिया डंकी में तापसी ने फिर उदाहरण देते हुए कहा कि जब राजू सर को मैं चाहिए थी डंकी में तो मैं ही थी। ये सबके लिए बड़ा शॉक होगा क्योंकि मैं उस स्पेशल सर्किट कि नहीं हूं। इस तरह की फिल्में या शाहरुख खान सर की रेगुलर पेयर ऑनस्क्रीन। तो ये बहुत बड़ा शॉक था, कई लोगों के लिए बड़ा शॉक था। वो सब इसलिए क्योंकि डायरेक्टर श्योर थे कि उन्हें मुझे लेना है। लोगों ने कहा मेरे साथ काम करना मुश्किल तापसी ने आगे कहा, ‘कई बार मैंने सुना कि लोग बोलते हैं कि मेरे साथ काम करना मुश्किल है। मुझे यह समझ नहीं आता है क्योंकि अगर कोई मेरी फिल्मोग्राफी खोलेगा तो वो देखेंगे कि मैंने कई डायरेक्टर्स के साथ कई बार काम किया है और ऐसा तो आप किसी ऐसे इंसान के साथ नहीं कर सकते ना जिसके साथ काम करना मुश्किल है। कोई भी मुसीबत बार-बार नहीं चाहता है। तो वही है कि जिन्होंने मेरे साथ कभी काम नहीं किया वो ही ऐसा कह रहे हैं क्योंकि वे मुझे जानते नहीं हैं और ना मैं सोशल पर्सन हूं। मैं दिखा नहीं सकती सबके पास जाकर कि मैं कैसी इंसान हूं। मैं चाहती हूं कि मेरा काम बात करे।’ तापसी की फिल्म अस्सी तापसी की फिल्म अस्सी की बात करें तो इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक टीचर के साथ कुछ लड़के जबरदस्ती करते हैं और इसके बाद पुलिस स्टेशन और कोर्ट में जो उसे झेलना पड़ता है बस वही फिल्म में दिखाया है। फिल्म को क्रिटिकली काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला था।  

राज्यसभा चुनाव को लेकर लालू ने बुलाई बड़ी बैठक, क्या तेजस्वी यादव छोड़ेंगे विधायकी?

पटना बिहार के नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के राज्यसभा जाने की चर्चा तेज हो गई है। सियासी गलियारों में अटकलें चल रही हैं कि तेजस्वी खुद विपक्ष के राज्यसभा उम्मीदवार हो सकते हैं। हालांकि, इस बारे में पार्टी की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है। दूसरी ओर, राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार खड़ा करने के लिए आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने रविवार को अहम बैठक बुलाई है। आरजेडी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड और राज्य संसदीय बोर्ड की यह बैठक रविवार को पटना में 10 सर्कुलर रोड स्थित पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर होगी। इस बैठक की अध्यक्षता लालू यादव करेंगे। इसमें नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, पार्टी के सभी सांसद, विधायक, एमएलसी और वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। राबड़ी आवास में शाम 7 बजे से होने वाली बैठक में आगामी राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवार चयन पर मंथन किया जाएगा। इससे पहले शनिवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के राज्यसभा चुनाव लड़ने की चर्चा तेज रही। हालांकि, पार्टी के तमाम वरीय नेताओं ने इससे साफ इनकार किया। कोई भी नेता इस दावे की पुष्टि नहीं कर सके। चर्चाओं में कहा जा रहा है कि तेजस्वी यादव संसद जा सकते हैं। उनकी विधानसभा सीट राघोपुर से परिवार के किसी अन्य सदस्य को उपचुनाव में लड़ाया जा सकता है। हालांकि, रविवार को आरजेडी की बैठक के बाद ही इस पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। बिहार की 5 राज्यसभा सीटें हो रहीं खाली बिहार की पांच राज्यसभा सीटें रिक्त होने जा रही हैं, जिन पर चुनाव की घोषणा हो चुकी है। जो सीटें खाली हो रही हैं उन पर वर्तमान में एनडीए के 3 और आरजेडी के दो सांसद हैं। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के अनुसार एनडीए की चार सीटों पर जीत पक्की मानी जा रही है। हालांकि, पांचवीं सीट पर जीत के लिए ना तो एनडीए के पास पर्याप्त विधायक हैं और ना ही विपक्षी दलों के महागठबंदन के पास नंबर हैं। अगर आरजेडी या विपक्ष की ओर से राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारा जाता है तो क्रॉस वोटिंग हो सकती है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पहले ही राज्यसभा में विपक्ष से प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर चुके हैं। अब लालू यादव ने उम्मीदवार चयन के लिए पार्टी की बैठक भी बुला दी है। इससे साफ है कि महागठबंधन एनडीए के खिलाफ प्रत्याशी उतारने के पूरे मूड में है। तेजस्वी को चाहिए ओवैसी और मायावती का साथ बिहार विधानसभा में अभी आरजेडी के 25 समेत महागठबंधन के कुल 35 विधायक ही हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों का समर्थन चाहिए। ऐसी स्थिति में लालू-तेजस्वी को अपने उम्मीदवार को जीताने के लिए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के 5 और मायावती की बसपा के एक विधायक का समर्थन चाहिए। हालांकि, ओवैसी की पार्टी ने खुद अपना प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर आरजेडी से समर्थन मांगा था। शुक्रवार को पटना में तेजस्वी यादव और AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान की सीक्रेट मीटिंग होने की भी बात सामने आई। इसमें दोनों दलों के बीच फिलहाल कोई समझौता नहीं हो पाया है।

विनोद जाखड़ ने सचिन पायलट की मौजूदगी में NSUI के नए कप्तान की थामी ज़िम्मेदारी

नई दिल्ली/जयपुर. राजस्थान की छात्र राजनीति के चमकते सितारे विनोद जाखड़ ने आज आधिकारिक तौर पर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में शपथ ली। दिल्ली स्थित NSUI राष्ट्रीय कार्यालय, 5 रायसीना रोड पर आयोजित इस भव्य समारोह में राजस्थान कांग्रेस के दिग्गज नेता और युवाओं के चहेते सचिन पायलट ने शिरकत की। जाखड़ को कार्यकर्ताओं ने कंधों पर बैठाकर दफ्तर तक पहुँचाया, जो उनकी ज़मीनी लोकप्रियता का प्रमाण था। सचिन पायलट का हुंकार: "पद नहीं, ज़िम्मेदारी मिली है" AICC महासचिव सचिन पायलट ने समारोह में उपस्थित हज़ारों युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि विनोद जाखड़ की नियुक्ति उन हज़ारों कार्यकर्ताओं के लिए उम्मीद की किरण है जो बिना किसी राजनीतिक विरासत के ज़मीन पर संघर्ष करते हैं। पायलट का संदेश: "विनोद ने राजस्थान विश्वविद्यालय की सड़कों से लेकर प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर जो संघर्ष किया, उसी का फल है कि आज राहुल गांधी जी ने उन्हें यह बड़ी ज़िम्मेदारी दी है।" पायलट के भाषण के दौरान 'सचिन पायलट', 'विनोद जाखड़', 'छात्र शक्ति ज़िंदाबाद' के नारों से पूरा NSUI मुख्यालय गूंज उठा। MP संजना जाटव का 'विदाई' तिलक और दही-चूरमा शपथ ग्रहण के लिए रवानगी से पहले एक भावुक और पारंपरिक दृश्य देखने को मिला। भरतपुर की युवा सांसद और विनोद जाखड़ को सांसद संजना जाटव ने तिलक लगाया और रक्षा सूत्र बांधा। संजना जाटव ने विनोद को दही-चूरमा खिलाकर जीत का आशीर्वाद दिया और पदभार ग्रहण के लिए रवाना किया। सोशल मीडिया पर भाई-बहन की ये तस्वीरें राजस्थान के गौरव का प्रतीक बनकर उभरी हैं। दिग्गज नेताओं की मौजूदगी: कांग्रेस का 'यूथ पावर' शपथ ग्रहण के दौरान विनोद जाखड़ के साथ कांग्रेस के कई कद्दावर युवा चेहरे मौजूद रहे, जो राजस्थान और देश की राजनीति में दखल रखते हैं: यूथ कांग्रेस अध्यक्ष: श्रीनिवास बीवी। प्रमुख नेता: वरुण चौधरी, कन्हैया कुमार। AICC सचिव नेटा डिसूज़ा, AICC सचिव कुणाल चौधरी, पूर्व सांसद डॉ उदित राज और पूर्व NSUI अध्यक्ष फ़िरोज़ खान    राजस्थान से साथी: अभिमन्यु पूनिया (NSUI प्रदेशाध्यक्ष), अनिल चोपड़ा, विधायक रामनिवास गांवरिया और सुरेश मोदी। राजस्थान विश्वविद्यालय से दिल्ली तक का सफ़र विनोद जाखड़ का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। वे राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे और बाद में NSUI के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने पेपर लीक और छात्र हितों के मुद्दों पर कई आंदोलन किए। ऐतिहासिक नियुक्ति: राजस्थान से पहली बार किसी नेता को NSUI का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है, जिसे आगामी छात्रसंघ चुनावों और लोकसभा समीकरणों के लिहाज़ से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सड़कों पर लड़ेंगे छात्रों की लड़ाई : विनोद जाखड़ पदभार ग्रहण करने के बाद विनोद जाखड़ ने भावुक होते हुए कहा कि वे एक साधारण किसान परिवार से आते हैं और छात्र संगठन को नए मुकाम पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य कैंपस से लेकर सड़क तक छात्रों की आवाज़ को बुलंद करना है।

शर्टलेस फैन के कारण मचा हंगामा, लियोनेल मेसी पिच पर गिर पड़े

 बायामोन  इंटर मियामी और इंडिपेंडिएंट डेल वैले के बीच हुए दोस्ताना मैच के दौरान स्टार फुटबॉलर लियोनेल मेसी पिच पर गिर गए. एक अति उत्साही फैन की वजह से ऐसा हुआ, जो मेसी से मिलने के लिए उनके करीब आ गया. वो शर्टलेस फैन सुरक्षा को तोड़कर सीधे मेसी की ओर दौड़ा और उन्हें गले लगाने की कोशिश की. सुरक्षा गार्ड ने फैन को रोकते समय गलती से मेसी को भी गिरा दिया. हालांकि, मेसी तुरंत उठकर सामान्य स्थिति में लौट आए और कोई चोट नहीं आई. प्यूर्टो रिको के बायामोन स्थित जुआन रामोन लौब्रिएल स्टेडियम में यह फ्रेंडली मैच खेला गया. मैच एक घंटे की देरी से शुरू हुआ. लियोनेल मेसी  हाफटाइम के बाद इंटर मियामी के लिए मैदान पर उतरे और 70वें मिनट में पेनल्टी गोल कर इंटर मियामी को 2-1 की जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई. टीम के दूसरे गोल का श्रेय संतियागो मोरालेस को जाता है. यह मैच पहले 13 फरवरी को होना निर्धारित था, लेकिन लियोनेल मेसी को लगी हल्की चोट के कारण स्थगित किया गया था. इस घटना के अलावा इस मैच के दौरान दो और फैन्स पिच पर आ पहुंचे. इनमें से एक ने सेल्फी ली और दूसरा खिलाड़ी के करीब गया, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत उन्हें हटा दिया. इस मैच के दौरान जब-जब लियोनेल मेसी ने गेंद को टच किया, तो दर्शकों की ओर से जोरदार तालियों की गूंज सुनाई दी. यह मेसी को देखने के लिए उनकी टीम के मूल रूप से स्थगित मैच के बाद दर्शकों की बेसब्री का प्रतीक भी था. इंटर मियामी ने इस सीजन की शुरुआत लॉस एंजेलिस एफसी (LAFC) के हाथों 0-3 से हार के साथ की थी. अब इस टीम का ध्यान अगले सप्ताह Orlando City SC के खिलाफ होने वाले मैच पर केंद्रित रहेगा. लियोनेल मेसी की उपस्थिति टीम के लिए मैदान पर और फैन्स के लिए ऑफ-फील्ड दोनों जगह महत्वपूर्ण साबित हो रही है.  

रांची नगर निगम की 53 में से 32 वार्डों में महिला प्रत्याशियों ने जीता चुनाव

रांची. नगर निगम चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि शहर की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है। 53 वार्डों में हुए चुनाव (Ranchi Municipal Election) में 32 वार्डों में महिला प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की, जबकि 21 वार्डों में पुरुष उम्मीदवार विजयी रहे। यानी इस बार भी निगम बोर्ड में महिलाओं की संख्या अधिक रहेगा। कई वार्डों में महिलाओं ने निर्णायक बढ़त हासिल की, तो कई जगह बेहद करीबी मुकाबले में जीत दर्ज की गई। इन नतीजों से स्पष्ट है कि रांची नगर निगम की नई परिषद में महिलाओं की भागीदारी निर्णायक रहेगी। कई वार्डों में महिलाओं ने मजबूत जनाधार के साथ जीत दर्ज की है, जिससे आने वाले कार्यकाल में निगम की राजनीति में ‘नारी शक्ति’ की भूमिका और प्रभावी होने की संभावना है। उनके पक्ष में योजनाएं भी बनेंगी। कांटे की टक्कर वाले वार्ड कई वार्डों में मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। वार्ड 38 में मात्र 26 वोट का अंतर रहा। वार्ड 33 में 74 वोट, वार्ड 14 में 96 वोट और वार्ड 2 में 97 वोट का अंतर रहा। इन परिणामों ने यह दिखाया कि मतदाताओं ने कई जगह आखिरी वोट तक मुकाबला बनाए रखा। इन वार्डों में महिलाओं की हुई जीत वार्ड 2 से सविता कच्छप ने 97 वोट के मामूली अंतर से जीत दर्ज की। वार्ड 14 में अंजू देवी ने सिर्फ 96 वोट से बाजी मारी। वार्ड 33 में पुष्पा टोप्पो ने 74 वोट से जीत हासिल की। वार्ड 38 में हालांकि पुरुष प्रत्याशी जीते, लेकिन वहां भी महज 26 वोट का अंतर रहा। वार्ड 9 से प्रीति रंजन ने 1907 वोट, वार्ड 10 से संगीता देवी ने 1668 वोट। वार्ड 11 से आलिया नाज ने 1789 वोट और वार्ड 23 से फरहा नाज ने 4370 वोट के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। वार्ड 43 में शशि सिंह ने 2910 वोटों से जीत हासिल कर बड़ी बढ़त दर्ज की। वार्ड 52 में पुरुष प्रत्याशी पीटर खोया ने 4673 वोट से जीत दर्ज कर सबसे बड़ी जीत में से एक अपने नाम की।  पुरुष प्रत्याशियों की क्या रही स्थिति पुरुष उम्मीदवारों ने 21 वार्डों में जीत दर्ज की। वार्ड 12 से कुलभूषण डुंगडुंग ने 2632 वोट, वार्ड 26 से प्रदीप कुमार ने 2781 वोट और वार्ड 31 से नीरज कुमार ने 2693 वोट के बड़े अंतर से जीत हासिल की।

पंजाब के बरनाला से कांग्रेस का चुनावी आगाज: राहुल-खरगे की रैली में 2027 पर नजर

बरनाला (पंजाब) कांग्रेस नेता राहुल गांधी बरनाला रैली में पहुंच गए हैं। अनाज मंडी में मनरेगा मजदूर किसान बचाओ महा रैली में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, सुखजिंदर सिंह रंधावा, डॉ. राजकुमार वेरका, बरनाला के विधायक कुलदीप सिंह काला ढिल्लों, प्रताप सिंह बाजवा, सुखपाल सिंह खैरा, बीबी राजिंदर कौर भट्ठल, डॉक्टर धर्मवीर गांधी, गुरजीत सिंह औजला, पूर्व मंत्री व कांग्रेसी विधायक राणा गुरजीत सिंह समेत कई सीनियर लीडर भी मंच पर पहुंच चुके हैं। राहुल की रैली के लिए सियासी रणनीति के तहत मालवा क्षेत्र को चुना गया है। इस क्षेत्र के बरनाला में जिले में यह रैली होगी, क्योंकि यह जिला मालवा का केंद्र है। पार्टी सूत्रों के अनुसार रैली में करीब एक लाख लोगों की भीड़ एकत्रित करने का लक्ष्य रखा गया है। कांग्रेस मालवा से अपना सूखा खत्म करना चाहती है। इसलिए राहुल गांधी यही से चुनाव हुंकार भरेंगे। मनरेगा के संशोधन बिल और अमेरिका-भारत के बीच ट्रेड डील पर केंद्र सरकार को घेरते हुए मजदूरों और किसानों को साधेंगे। शिरोमणि अकाली दल को घेरेंगे जबकि आप सरकार में बढ़े रहे गैंगस्टरवार, नशीले पदार्थों की तस्करी के मामलों समेत अन्य मुद्दों पर आप सरकार पर भी निशाना साधेंगे। वरिष्ठ कांग्रेसियों को लगता है कि साल 2027 में कांग्रेस इस क्षेत्र में अपना खोया जनाधार वापस पाएगी। मान और बादल दोनों मालवा से अमूमन यह कहा जाता है कि पंजाब में सीएम मालवा क्षेत्र से ही निकलता है। मौजूदा सीएम भगवंत सिंह मान संगरूर से एमपी थे और अब धुरी से विधायक हैं। पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल भी श्री मुक्तसर साहिब से थे। उनके बेटे व पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल भी इसी क्षेत्र से हैं। मौजूदा सीएम के अलावा आप के तीन मंत्री हरपाल सिंह चीमा, बरिंदर सिंह गोयल व अमन अरोड़ा और आप के सांसद मीत हेयर  भी इसी क्षेत्र से आते हैं। 

लोअर बर्थ पर चाय बनाने वाली महिला का वीडियो वायरल, ट्रेन में बनी ‘किचन’

नई दिल्ली सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला ट्रेन के कोच में इलेक्ट्रिक केतली का इस्तेमाल करती दिखाई दे रही है. वीडियो एक सह-यात्री ने रिकॉर्ड किया और इसमें महिला को लोअर बर्थ पर बैठकर केतली को कोच के सॉकेट में लगाकर चाय बनाते हुए दिखाया गया है. जैसे ही यह क्लिप सामने आई, सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई. वीडियो में साफ दिखता है कि महिला आराम से केतली चला रही है और उसके आसपास मौजूद यात्री भी बिना किसी आपत्ति के बैठे हुए हैं. लेकिन तथ्य यह है कि इलेक्ट्रिक केतली जैसे हाई-वॉटेज उपकरण ट्रेन में चलाना नियमों के खिलाफ है. रेलवे के कोचों में लगे सॉकेट केवल मोबाइल, लैपटॉप जैसे लो-वॉटेज इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस चार्ज करने के लिए बनाए गए हैं, न कि भारी उपकरण चलाने के लिए. ‘नियम पता हैं, लोग मानते नहीं’ वीडियो X पर साझा किया गया, जिसमें पोस्ट करने वाले ने रेलवे सेवा और रेल मंत्रालय को टैग कर चेतावनी दी कि ऐसी हरकत से शॉर्ट सर्किट या आग लगने जैसी घटना हो सकती है. उन्होंने कहा कि रेलवे को इसके लिए जागरूकता अभियान शुरू करना चाहिए. इसके बाद सोशल मीडिया पर टिप्पणियों की बाढ़ आ गई. कई यूजर्स ने इसे खतरनाक हरकत बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की. एक यूजर ने लिखा कि ट्रेन में इलेक्ट्रिक केतली चलाना पहले से ही प्रतिबंधित है. जागरूकता है, लोग पालन नहीं करते. एक अन्य ने कहा कि जागरूकता अभियान की जरूरत नहीं, नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जरूरत है. किसी ने तंज कसते हुए लिखा, नाइट सूट और केतली के साथ इन्होंने तो कोच को ही घर बना लिया है.. वहीं एक टिप्पणी थी कि लोग सोचते हैं नुकसान रेलवे का होगा, लेकिन हादसा होगा तो सबसे बड़ा नुकसान उनका ही होगा.. रेलवे सेवा हुई सक्रिय, शिकायत मांगी गई वीडियो वायरल होते ही रेलवे सेवा ने इस पर प्रतिक्रिया दी और साझा करने वाले व्यक्ति से यात्री का पीएनआर नंबर और मोबाइल नंबर मांगते हुए कहा कि वह तुरंत कार्रवाई के लिए जानकारी उपलब्ध कराएं. रेलवे ने यह भी बताया कि शिकायत सीधे RailMadad या 139 नंबर पर भी दर्ज कराई जा सकती है. गौरतलब है कि इससे पहले भी इसी तरह की घटना सामने आ चुकी है, जब एक महिला ट्रेन में इलेक्ट्रिक केतली से मैगी पकाते हुए दिखी थी. उस समय भी केंद्रीय रेलवे ने कार्रवाई की थी. क्यों हैं ये खतरनाक? भारतीय रेलवे के कोच में लगी मोबाइल/लैपटॉप चार्जिंग सॉकेट से इलेक्ट्रिक केतली चलाना बेहद खतरनाक है.ये रेलवे नियमों के खिलाफ है, क्योंकि ट्रेन की सॉकेटें केवल लो-पावर डिवाइस (50-100 वाट) के लिए बनी होती हैं, जबकि इलेक्ट्रिक केतली 1000-2000 वाट तक पावर खींचती है. इस वजह से ओवरलोडिंग, शॉर्ट सर्किट और आग लगने का बड़ा जोखिम बढ़ जाता है. यही कारण है कि रेलवे ने केतली, हीटर, इंडक्शन, इमर्शन रॉड जैसे उपकरणों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है. ऐसे उपकरण इस्तेमाल करते पकड़े जाने पर रेलवे एक्ट की धारा 153, 154 के तहत भारी जुर्माना और 6 महीने से 2 साल तक की जेल हो सकती है, और नुकसान होने पर सजा और भी बढ़ जाती है. रेलवे लगातार एडवाइजरी जारी करता है कि ऐसे डिवाइस ट्रेन में कभी न चलाएं.  

तेजस्वी के करीबी देवा गुप्ता ने सुबह की पोस्ट और शाम को STF ने किया गिरफ्तार

पटना. देवा गुप्ता ने सोशल मीडिया पर पत्नी के साथ शादी की सालगिरह का भावुक संदेश साझा किया। कुछ ही घंटों बाद बिहार एसटीएफ ने पटना में छापेमारी कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई पाटलिपुत्र थाना क्षेत्र स्थित राधिका अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 301 में हुई। गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने दबिश दी और हिरासत में लिया। देवा को राजद नेता तेजस्वी यादव का करीबी माना जाता है।गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। पुलिस के अनुसार देवा गुप्ता पर हत्या, लूट, रंगदारी और जमीन कब्जे सहित 28 केस दर्ज हैं। मोतिहारी पुलिस की 100 अपराधियों की सूची में उनका नाम सबसे ऊपर था। एसपी ने उन पर एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। दो मामलों में वह लंबे समय से फरार बताए जा रहे थे। उन्हें 10 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद गिरफ्तारी से पहले उन्होंने कानूनी राहत ली थी। हाईकोर्ट से मिली थी अंतरिम राहत करीब दो महीने पहले पटना हाईकोर्ट ने सख्त कार्रवाई पर रोक लगाई थी। देवा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई लंबित रहने तक कार्रवाई टालने को कहा गया था। इसके बाद पुलिस की सीधी कार्रवाई कुछ समय के लिए रुकी रही। देवा ने अपने खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों का हवाला देते हुए याचिका दायर की थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सुनवाई पूरी होने तक दंडात्मक कदम नहीं उठाए जाएंगे। अब STF की कार्रवाई के बाद कानूनी स्थिति फिर चर्चा में है। पत्नी मेयर, राजनीति में सक्रियता देवा गुप्ता की पत्नी प्रीति कुमारी मोतिहारी नगर निगम की मेयर हैं। 2022 में मेयर चुनाव से उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई। 2025 में राजद ने देवा को चुनावी मैदान में उतारा था। इससे पहले लोकसभा टिकट की भी दावेदारी की गई थी। गिरफ्तारी के बाद प्रीति कुमारी ने कार्रवाई को बेवजह बताया। उन्होंने कहा कि कई मामलों में बेल और स्टे मिल चुका है। तेजस्वी का नाम चर्चा में, सियासत गरम गिरफ्तारी के बाद तेजस्वी यादव का नाम राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। विपक्ष इसे कानून-व्यवस्था से जोड़कर सवाल उठा रहा है। राजद खेमे में इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बताया जा रहा है। एसटीएफ की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान की प्रतीक्षा है। मामले ने राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। अब नजरें जांच एजेंसी और अदालत की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

मिशन चीता: बोत्सवाना से 9 चीते कूनो पहुंचे, भारत में कुल संख्या 48

श्योपुर  श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में शनिवार एक और ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। बोत्सवाना से अफ्रीकी महाद्वीप के 9 नए चीते विशेष विमान से भारत पहुंचे हैं। यह चीतों का तीसरा बड़ा जत्था है, जो 'प्रोजेक्ट चीता' के तहत भारत लाया गया है। भारतीय वायुसेना के विमान से रात में ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन पर लैंडिंग के बाद सुबह भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों से इन्हें कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया गया। केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इन चीतों को क्वारंटाइन बाड़ों में रिलीज किया। इनके आने से भारत में चीतों की कुल संख्या 48 हो गई है। कूनो में पहले से मौजूद चीतों की सफल प्रजनन दर और शावकों का जन्म इस प्रोजेक्ट की मजबूती दिखाता है। यह कदम न सिर्फ चीता संरक्षण की दिशा में बड़ा है, बल्कि भारत में विलुप्त हो चुके इस राजसी जानवर को वापस लाने की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। पार्क में विशेष तैयारियां की गई, जहां चीतों को एक महीने तक क्वारंटाइन में रखकर स्वास्थ्य जांच और अनुकूलन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद इन्हें मुख्य बाड़े में छोड़ दिया जाएगा। बोत्सवाना से लाये चीते कूनो में किए रिलीज बता दें कि, बोत्सवाना से कूनो लाए गए सभी 9 चीतों में से 6 मादा हैं, जबकि 3 नर चीते। इस तरह अब कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या 45 हो चुकी है। खास बात ये है कि, इनमें से 28 चीते भारत में पैदा हुए हैं। इसके अलावा 3 चीते कूनो से ही गांधीसागर वन्य क्षेत्र में छोड़े गए हैं। इस तरह देशभर में इनकी संख्या बढ़कर कुल 48 हो गई है। फिलहाल, बोत्सवाना से लाए गए सभी 9 चीतों को एक महीने के लिए पहले क्वारंटीन किया जाएगा। इके बाद ही इन्हें मुख्य क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। वयस्क चीतों में बदला समीकरण कूनो में 12 महीने से अधिक उम्र के चीतों का गणित अब साफ तौर पर बदल गया है। पहले यहां 26 वयस्क चीते थे 14 नर और 12 मादा। अब 9 नए चीतों के जुड़ने से वयस्कों की संख्या 35 हो गई है। मादा: 18 नर: 17 यानी अब मादाओं का पलड़ा थोड़ा आगे है। वन्यजीव विशेषज्ञ इसे बेहद अहम मान रहे हैं। उनका कहना है कि मादाओं की संख्या बढ़ने से क्षेत्रीय टकराव कम होगा और शावकों के जन्म की संभावना बढ़ेगी। एक माह का क्वारंटीन, फिर खुले जंगल का टिकट आए हुए सभी 9 चीतों को एक महीने तक क्वारंटीन बाड़ों में रखा जाएगा। इस दौरान उनकी सेहत, व्यवहार और अनुकूलन क्षमता पर लगातार नजर रहेगी। इसके बाद चीता स्टीयरिंग समिति तय करेगी कि किन चीतों को खुले जंगल में छोड़ा जाए और किन्हें निगरानी में रखा जाए। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, हर चीते को जंगल में उतारने से पहले उसके मूवमेंट, शिकार प्रवृत्ति और इंसानी दखल से दूरी जैसे पहलुओं की बारीकी से जांच की जाती है। मजबूत हुई जेनेटिक ताकत अब कूनो एक पार्क नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जेनेटिक प्रयोगशाला बन चुका है। यहां नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और अब बोत्सवाना तीन अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के चीते मौजूद हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अलग-अलग मूल के चीतों के मेल से इनब्रीडिंग का खतरा घटता है और शावकों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। यही वजह है कि भारत में चीता पुनर्वास को लंबे समय तक टिकाऊ माना जा रहा है। भारत में चीतों की मौजूदा तस्वीर कुल चीते: 48 कूनो नेशनल पार्क: 36 गांधी सागर अभयारण्य: 3 नामीबियाई मूल (स्थापित + शावक): 20 दक्षिण अफ्रीकी मूल (स्थापित + शावक): 19 भारत में जन्मे शावक: 28 आज आए (बोत्सवाना): 9