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टेंडर से अवॉर्ड तक पूरी प्रक्रिया की समय-सीमा तय करने के निर्देश

रायपुर सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता को लेकर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ताहीन कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कहीं भी निर्माण कार्य में कमी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी और दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। मुख्यमंत्री  साय ने यह निर्देश आज मंत्रालय महानदी भवन में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यों और गतिविधियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव  उपस्थित थे। मुख्यमंत्री  साय ने अधिकारियों से कहा कि सड़क निर्माण के बाद निरीक्षण करने के बजाय निर्माण के दौरान ही नियमित रूप से फील्ड में जाकर गुणवत्ता की निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि सड़कों का निर्माण केवल तकनीकी कार्य नहीं बल्कि आमजन की सुविधा से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण अधोसंरचनात्मक कार्य है और इससे सरकार की छवि भी बनती है। यदि सड़क बनने के कुछ वर्षों के भीतर ही खराब हो जाए तो इससे सरकार की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। बैठक में बागबहार–कोतबा सड़क की खराब स्थिति पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह सड़क कुछ वर्ष पहले ही बनी थी, लेकिन उसकी स्थिति तेजी से खराब हो गई है। यदि सड़क चार वर्ष भी नहीं चले तो इसका कोई औचित्य नहीं रह जाता। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस सड़क के निर्माण में हुई कमियों की गंभीरता से जांच की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता की सख्त निगरानी की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण कार्य हो रहे हैं, लेकिन आमजन को इन कार्यों की जानकारी नहीं मिल पाती जिससे सकारात्मक नैरेटिव नहीं बनता। उन्होंने निर्देश दिए कि बड़ी सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास और भूमिपूजन मुख्यमंत्री और मंत्रियों के हाथों से कराए जाएं तथा उन्हें व्यापक रूप से आमजन के सामने प्रस्तुत किया जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़क निर्माण के टेंडर जारी होने से लेकर कार्य आवंटन (अवॉर्ड) तक की पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए। उन्होंने कहा कि कई ठेकेदार बहुत कम दर यानी बिलो रेट पर टेंडर प्राप्त कर लेते हैं, जिसके कारण कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। यदि ठेकेदार बिलो रेट पर टेंडर लेता है तो यह उसकी जिम्मेदारी होगी कि वह कार्य को निर्धारित गुणवत्ता और समय-सीमा में पूरा करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियमावली तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अन्य राज्यों में लागू बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में भी उपयुक्त प्रावधान लागू किए जाएं। साथ ही टेंडर और डीपीआर जैसे तकनीकी कार्यों के लिए एक अलग इकाई बनाने पर भी गंभीरता से विचार किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगभग 300 ऐसे गांव चिन्हित किए गए हैं, जहां बरसात के दौरान संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे गांवों तक पहुंचने के लिए लोगों को कई बार बीमार मरीजों को खाट में उठाकर ले जाना पड़ता है, जो अत्यंत चिंता का विषय है। खाद्य विभाग से प्राप्त सूची के आधार पर चिन्हित इन गांवों को सड़कों और पुल-पुलियों के माध्यम से जोड़ने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जाए। मुख्यमंत्री  साय ने लैलूंगा–कुंजारा–तोलगेपहाड़–मिलूपारा–तमनार मार्ग के निर्माण की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़ी आबादी निवास करती है और यहां सड़क का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। इस मार्ग के कुछ हिस्से में वन स्वीकृति की आवश्यकता होगी, लेकिन शेष हिस्सों में निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए। बैठक में मनेंद्रगढ़–सूरजपुर–अंबिकापुर–पत्थलगांव–कुनकुरी–जशपुर–झारखंड सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-43 की प्रगति की भी समीक्षा की गई। लगभग 353 किलोमीटर लंबाई वाली इस सड़क परियोजना की स्थिति पर चर्चा की गई।पत्थलगांव-कुनकुरी खंड में भू-अर्जन का मुआवजा दिए जाने की जानकारी भी बैठक में साझा की गई। इसके अलावा अंबिकापुर–सेमरसोत–रामानुजगंज–गढ़वा मार्ग, गीदम–दंतेवाड़ा मार्ग, चांपा–सक्ती–रायगढ़–ओडिशा सीमा मार्ग, रायपुर–दुर्ग मार्ग तथा चिल्फी क्षेत्र की सड़कों सहित कई अन्य परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।  बैठक में बस्तर में पुल-पुलिया निर्माण सहित 17 सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही राज्य द्रुतगामी सड़क संपर्क मार्ग की आगामी कार्ययोजना की विस्तृत रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई। मुख्यमंत्री ने भवन निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में शासकीय भवनों के डिजाइन बहुत पुराने और एक जैसे दिखाई देते हैं। अब समय आ गया है कि शासकीय भवनों का निर्माण आधुनिक डिजाइन और तकनीक के आधार पर किया जाए। उन्होंने कहा कि भवनों का डिजाइन उनकी उपयोगिता के अनुरूप होना चाहिए और भूमि के बेहतर उपयोग के लिए हॉरिजॉन्टल की जगह वर्टिकल संरचना को बढ़ावा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने राजभवन में बन रहे गेस्ट हाउस को भी आधुनिक और गरिमामय स्वरूप में तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें आमजन के जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं और लोग सड़क की गुणवत्ता को बहुत महत्व देते हैं। अन्य कई विकास कार्य भले दिखाई न दें, लेकिन सड़कें सीधे लोगों को दिखाई देती हैं और सरकार की छवि भी उसी के आधार पर बनती है। इसलिए लोक निर्माण विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है और इसमें होने वाले कार्यों को समयबद्धता और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसा तंत्र विकसित किया जाए जिससे सड़कों में बनने वाले गड्ढों की जानकारी समय पर मिल सके और उन्हें तुरंत ठीक किया जा सके। बैठक में मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत तथा लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।।  

उप मुख्यमंत्री ने क्रिकेट खिलाड़ियों का किया उत्साहवर्धन

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने ग्राम पंचायत पुर्वा में स्व. लालमणि विश्वकर्मा स्मृति क्रिकेट टूर्नामेंट में सहभागिता कर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि खेल भावना से प्रतिस्पर्धा करें। जीतने वाली टीम बधाई की पात्र है और जो नहीं जीत सके वह जीतने का पूरा प्रयास करें।  शुक्ल ने खिलाड़ियों को पुरस्कार वितरित किये।  

आकार में छोटा लेकिन हौसले में बड़ा ईरान: अमेरिका के सामने कैसे टिकती है उसकी सैन्य ताकत

वाशिंगटन अमेरिका के मुकाबले ईरान सैन्य ताकत, आबादी और क्षेत्रफल समेत सभी पैमानों पर कमजोर दिखता है। इसके बाद भी बीते एक सप्ताह से वह अमेरिका और इजरायल के खिलाफ संयुक्त जंग में लड़ रहा है। यही नहीं ईरान का कहना है कि अमेरिका और इजरायल ने रेड लाइन पार कर दी है और उन्हें इसका खामियाजा भुगतना होगा। ऐसी स्थिति में यह सवाल उठता है कि आखिर 9 करोड़ की आबादी वाले ईरान के पास इतनी ताकत कहां से आती है। इस सवाल का जवाब ईरान की सेना है। ईरान की आबादी भले ही 9 करोड़ है, लेकिन उसके सैनिकों की संख्या बड़े-बड़े देशों से कहीं अधिक है। ईरान की सेना की बात करें तो वह मुख्य रूप से दो हिस्सों में विभाजित है। पहली है नियमित सेना, जिसे Artesh कहा जाता है। दूसरी है IRGC यानी इस्लामिक रिवॉलूशनरी गार्ड कॉर्प्स। इसे स्पेशल फोर्सेज भी कहा जाता है। ईरान की रेग्युलर आर्मी में थल सेना, नेवी और एयर फोर्स आते हैं। इसके अलावा ईरान एयर डिफेंस फोर्स भी है। अब संख्या की बात करें तो ईरान की थल सेना में 3 लाख 50 हजार सैनिक हैं। नेवी में 18 हजार हैं और वायुसेना में 37 हजार सैनिक शामिल हैं। इसी तरह एयर डिफेंस फोर्स में 15000 सैनिक शामिल हैं। अब बात करते हैं ईरान की रिवॉलूशनरी गार्ड कॉर्प्स की। इसमें 1 लाख 50 हजार जमीनी सैनिक हैं। नेवी में 20 हजार जवान हैं और एयरोस्पेस 15,000 हैं। इसी तरह कुद्स फोर्स में 5 हजार सैनिक हैं। इसके बाद नंबर आता है रिजर्व फोर्स का, जिसमें 4 लाख 50 हजार सैनिक शामिल हैं। इस तरह सब मिलाकर ईरान की सैन्य संख्या 10 लाख 60 हजार हो जाती है। यह एक बड़ा आंकड़ा है। 25 करोड़ की आबादी वाले पाकिस्तान की सैन्य संख्या भी 6 लाख 50 हजार ही है। सबसे बड़ी फौज चीन की मानी जाती है, जिसमें करीब 20 लाख सैनिक हैं। इसके बाद दूसरे नंबर और तीसरे नंबर पर अमेरिका और भारत हैं। दोनों मुल्कों की संख्या 13 लाख से अधिक है। ईरान की ताकत की यह भी एक वजह है कि वह अमेरिका और इजरायल से मुकाबले में पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। यही नहीं एक्सपर्ट मान रहे हैं कि अब ईरान तो खुद ही चाहता है कि यह जंग थोड़ी लंबी खिंचे। ऐसा होने पर अमेरिका को ही निकलने का बहाना खोजना पड़ेगा। ईरान की लीडरशिप नहीं चाहती कि वह किसी भी हाल में अमेरिका या इजरायल से समझौता करती दिखे। बता दें कि लंबे युद्धों में अकसर अमेरिका को ही परेशानी का सामना करना पड़ा है। अमेरिका को वियतनाम, इराक और अफगानिस्तान से बीच में ही निकलना पड़ा था।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 50 क्यूआरटी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

लखनऊ पहली बार लोकतंत्र में कानून व्यवस्था किसी चुनाव में मुद्दा बनी और इसी का परिणाम है कि आजादी के बाद पहली बार किसी सरकार ने अपना 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा सरकार बनायी। पुलिस विभाग ने वर्ष 2017 के बाद बिगड़े, अराजक, दंगाग्रस्त और कर्फ्यूग्रस्त राज्य को बदल करके सेफ यूपी के रूप में स्थापित किया। उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य से भारत की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनाने की शुरुआत कड़ी सुरक्षा से ही होती है। विकास की पहली शर्त सुरक्षा है। इसे उत्तर प्रदेश पुलिस ने साबित किया है। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लोकभवन सभागार में कहीं। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 50 क्यूआरटी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने होंडा इंडिया फाउंडेशन द्वारा उत्तर प्रदेश पुलिस को 50 क्यूआरटी दोपहिया वाहन प्रदान किए जाने की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी। यह समारोह उसी विश्वास और सहयोग का प्रतीक है, जिसमें शासन, प्रशासन और उद्योग जगत मिलकर प्रदेश के विकास और सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं।    मॉडल पुलिसिंग के तीन महत्वपूर्ण स्तंभ इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और मोबिलिटी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी का परसेप्शन चेंज करने के लिए कई कदम उठाए गए तो कुछ रिफॉर्म किये गये। इसके नतीजे हम सबके सामने हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस में वर्ष 2017 में पीआरवी के वाहन 9,500 थे। आज इनकी संख्या प्रदेश में 15,500 से अधिक है। वहीं वर्ष 2017 में टू व्हीलर मात्र 3,000 थे। आज इनकी संख्या 9,200 से अधिक है। यह केवल संख्या नहीं है, इसने पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम को न्यूनतम लाने में सफलता प्राप्त की है। आपातकालीन स्थिति में जितनी त्वरित कार्रवाई और सहायता पहुंचाएंगे, वही ट्रस्ट में बदलती है। वह ट्रस्ट ही ट्रांसफॉर्मेशन का कारण बनता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मॉडल पुलिसिंग के तीन महत्वपूर्ण स्तंभ बताएं हैं। इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और मोबिलिटी शामिल है। वर्ष 2017 से पहले पुलिस विभाग का बजट अटकते-अटकते 16,000 करोड़ तक पहुंच पाता था और वह भी खर्च नहीं हो पाता था। वर्षों पहले जिले बने थे, लेकिन जिला मुख्यालय, पुलिस लाइन भी नहीं बनी थी। ऐसे में पुलिस क्या परिणाम देती? पुलिस के पास पुराने असलहे थे, कोई सुविधा नहीं थी। उस दौरान अवस्थापना सुविधाएं जीरो थीं।। टूटे हुए बैरक में पुलिसकर्मी रहने को मजबूर थे। आज प्रदेश के 55 जिलों में सबसे ऊंची इमारत उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों की बैरक है। यहां बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही प्रदेश में लगातार मॉडल थानों और मॉडल फायर स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे पुलिस और आपदा सेवाओं को आधुनिक स्वरूप दिया जा सके। पहले प्रदेश में पुलिस प्रशिक्षण की क्षमता केवल 3 हजार थी मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में जब सरकार ने बड़े स्तर पर पुलिस भर्ती की प्रक्रिया शुरू की तो उस समय उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रशिक्षण की क्षमता बहुत सीमित थी। एक साथ लगभग 3000 पुलिसकर्मियों को ही प्रशिक्षण दिया जा सकता था। सरकार के सामने चुनौती थी कि लंबे समय से पुलिस भर्ती नहीं हुई थी और युवाओं में भर्ती को लेकर उत्सुकता थी, लेकिन प्रशिक्षण क्षमता सीमित होने के कारण भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाना कठिन था। किसी भी भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने में लगभग 9 महीने का समय लग जाता था। ऐसे में राज्य सरकार ने अन्य राज्यों से संपर्क किया। दो-तीन राज्यों ने सहयोग के लिए सहमति दी। इसके अलावा सेना और अर्द्धसैनिक बलों से भी बातचीत की गई, जिन्होंने सहयोग देने की बात कही। इन सभी प्रयासों के बाद किसी तरह प्रशिक्षण क्षमता को बढ़ाकर लगभग 17 से 20 हजार तक पहुंचाया गया। इसके बाद अन्य राज्यों तथा सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों की मदद से इसे करीब 30 हजार तक ले जाया गया, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। आज प्रदेश में 60,244 पुलिस कांस्टेबलों की भर्ती की गई है और इन सभी को उत्तर प्रदेश के अपने प्रशिक्षण केंद्रों में ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रदेश में विकसित किए गए नए पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों और इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण यह संभव हो पाया है। हर जिले में तैनात की गईं दो-दो मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष जुलाई में देश में तीन नए आपराधिक कानून लागू किए गए। इन कानूनों के तहत सात वर्ष से अधिक की सजा वाले मामलों में फॉरेंसिक साक्ष्य अनिवार्य किए गए हैं। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल दो फॉरेंसिक लैब थीं, लेकिन अब उनकी संख्या बढ़कर 12 हो गई है। इसके साथ ही प्रदेश में विश्वस्तरीय स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट भी स्थापित किया गया है, जो उत्तर प्रदेश पुलिस के अधीन संचालित हो रहा है। इस संस्थान में डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं। इसके माध्यम से पुलिस कर्मियों के साथ-साथ उन युवाओं को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिनकी रुचि फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में है। प्रत्येक जिले में ए-ग्रेड की छह फॉरेंसिक लैब निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा हर जिले में दो-दो मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट भी तैनात की गई हैं, जो घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य संग्रह और जांच में मदद कर रही हैं। प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को और सशक्त बनाने के लिए कई नई इकाइयों का गठन किया गया है। राज्य में स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (एसएसएफ) का गठन किया गया है और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। इसके अलावा पहली बार पीएसी में महिला बटालियन का गठन किया गया है। अब तक तीन महिला बटालियन गठित की जा चुकी हैं और तीन नई बटालियनों के गठन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। सुरक्षित बेटियां और व्यापारी प्रदेश और देश के विकास में ग्रोथ इंजन की भूमिका निभा रहे मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस व्यवस्था में इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और मोबिलिटी को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास प्रारंभ किए गए। इन सभी को मिलाकर जब टेक्नोलॉजी और ट्रांसफॉर्मेशन एक साथ काम करते हैं तो रिजल्ट आता है। यही कॉमन मैन के ट्रस्ट का आधार बनता है। आज देश और दुनिया के बड़े निवेशक उत्तर प्रदेश में निवेश करना चाहते हैं। … Read more

फाइनल में कीवी दीवार! T20 वर्ल्ड कप में न्यूजीलैंड से कभी नहीं जीता भारत

नई दिल्ली टी20 विश्व कप 2026 का फाइनल भारत और न्यूजीलैंड के बीच 8 मार्च को नरेंद्र मोदी स्टेडियम, अहमदाबाद, में होना है। मैच शाम 7 बजे से खेला जाएगा। सेमीफाइनल में भारत ने इंग्लैंड को और न्यूजीलैंड ने दक्षिण अफ्रीका को हराकर फाइनल में जगह बनाई है। भारत के लिए फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाला मुकाबला बेहद मुश्किल है। इसकी वजह टी20 विश्व कप का इतिहास है, जो न्यूजीलैंड के पक्ष में है। भारतीय टीम टी20 विश्व कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ कभी नहीं जीती है। दोनों देशों के बीच अब तक 3 मैच खेले गए हैं और तीनों ही मैचों में न्यूजीलैंड को जीत मिली है। दोनों देशों के बीच पहला मुकाबला टी20 विश्व कप 2007 के दौरान खेला गया था। पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने सभी विकेट खोकर 190 रन बनाए थे। भारतीय टीम 180 रन बना सकी थी और 10 रन से मैच हार गई। दूसरा मैच टी20 विश्व कप 2016 में खेला गया था। न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 7 विकेट पर 126 रन बनाए थे। भारतीय टीम 79 रन पर सिमट गई और 47 रन से मैच हार गई। दोनों टीमों की टी20 विश्व कप की तीसरी और आखिरी मुलाकात 2021 विश्व कप के दौरान हुई थी। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 7 विकेट पर 110 रन बनाए थे। न्यूजीलैंड ने 2 विकेट के नुकसान पर 111 रन बनाकर मैच 8 विकेट से जीत लिया था। इस तरह टी20 विश्व कप में भारतीय टीम को न्यूजीलैंड के खिलाफ पहली जीत का इंतजार है। ओवरऑल आंकड़े पर गौर करें तो टी20 में भारतीय टीम का न्यूजीलैंड के खिलाफ पलड़ा भारी है। दोनों देशों के बीच अब तक 30 मैच खेले गए हैं। भारतीय टीम ने 18 मैच जीते हैं, जबकि न्यूजीलैंड को 11 मैचों में सफलता मिली है। 1 मैच टाई रहा है। विश्व कप से पहले भी न्यूजीलैंड और भारत के बीच 5 मैचों की द्विपक्षीय टी20 सीरीज खेली गई थी। भारतीय टीम ने अपने घर में हुई इस सीरीज में न्यूजीलैंड को 4-1 से मात दी थी। टीम इंडिया के पास न्यूजीलैंड को 8 मार्च को हराकर जीत का इंतजार समाप्त करने और बैक-टू-बैक टी20 विश्व कप का खिताब जीतने वाली पहली टीम बनने का अवसर है।

ड्रोन तकनीक से किसानों की मदद कर आत्मनिर्भर बनीं सीमा

रायपुर ड्रोन तकनीक से किसानों की मदद कर आत्मनिर्भर बनीं सीमा कभी सीमित संसाधनों और आर्थिक परेशानियों के बीच जीवन बिताने वाली बिलासपुर जिले के ग्राम पंचायत पौंड़ी, जनपद पंचायत मस्तूरी की सीमा वर्मा आज अपने साहस, मेहनत और नई तकनीक को अपनाने की लगन से सफलता की नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर उन्होंने न केवल अपने जीवन की दिशा बदली, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। गांव में आज ड्रोन दीदी कहलाती हैं। वर्ष 2014 में सीमा वर्मा ने जय मां गायत्री स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी नई यात्रा की शुरुआत की। शुरुआत में उन्होंने समूह के साथ बचत और छोटे-छोटे कार्यों के माध्यम से आर्थिक स्थिति मजबूत करने का प्रयास किया। ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार के अवसर मिले और उन्होंने पैरा मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू किया। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने इस कार्य को आगे बढ़ाया, जिससे उन्हें नियमित आय मिलने लगी।    कुछ नया सीखने और आगे बढ़ने की इच्छा ने सीमा को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद शासन की सहायता से उन्हें ड्रोन सेट, जनरेटर और ई-वाहन उपलब्ध कराया गया। इसके बाद उन्होंने किसानों के खेतों में ड्रोन के माध्यम से कीटनाशक का छिड़काव करना शुरू किया। आज सीमा वर्मा ड्रोन तकनीक के माध्यम से किसानों की खेती को आसान बना रही हैं और सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं। गांव में लोग उन्हें अब स्नेहपूर्वक ‘ड्रोन दीदी’ के नाम से पुकारते हैं। सीमा वर्मा की यह प्रेरक यात्रा साबित करती है कि सही अवसर, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी अपने हौसले के दम पर नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं। ‘बिहान’ योजना ने उनके जीवन को नई दिशा दी और उनके सपनों को नई उड़ान प्रदान की।

दिल्ली एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी, 104 इंटरनेशनल फ्लाइट कैंसिल; हजारों यात्री परेशान

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य तनाव और कई देशों द्वारा अपने हवाई क्षेत्र को बंद करने का सीधा असर देश की राजधानी के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डे पर पड़ा है। शुक्रवार को सुरक्षा कारणों और रूट डायवर्जन के चलते दिल्ली से संचालित होने वाली 104 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद कर दी गईं, जिससे हजारों यात्रियों का सफर अधर में लटक गया। वैकल्पिक उड़ानों की मांग रहे जानकारी प्राप्त जानकारी के अनुसार, रद की गई कुल उड़ानों में 62 प्रस्थान और 42 आगमन की उड़ाने शामिल हैं। विशेष रूप से खाड़ी देशों की ओर जाने वाली उड़ानों पर इसका व्यापक असर देखा जा रहा है। टर्मिनल-3 पर सुबह से ही यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई और एयरलाइंस के काउंटरों पर लोग वैकल्पिक उड़ानों की जानकारी के लिए जद्दोजहद करते नजर आए। प्रमुख एयरलाइंस की 168 उड़ानें प्रभावित हुईं पश्चिम एशिया के एयरस्पेस में लगी पाबंदियों के कारण भारत की प्रमुख एयरलाइंस को अपनी सेवाएं सीमित करनी पड़ी हैं। इसके कारण देश की प्रमुख एयरलाइंस की 168 उड़ानें प्रभावित हुईं, इन उड़ानों ने अपने निर्धारित समय से या तो देर से उड़ान भरी या उन्हें डायवर्ट कर दिया गया या रूट बदलकर दूसरे रूट से सफर करनी पड़ी जिससे गंतव्य तक पहुंचने में अधिक समय लगा। इसका खामियाजा यात्रियों को भोगना पड़ा। इसमें इंडिगो एयरलाइन की लगभग 72 उड़ानें, एयर इंडिया समूह की करीब 31 और एयर इंडिया एक्सप्रेस की लगभग 55 उड़ानें देरी का शिकार हुई हैं। ये उड़ानें मुख्य रूप से दुबई, अबू धाबी, दोहा, कुवैत और बहरीन जैसे शहरों के लिए निर्धारित थीं। यूरोप जाने वाले यात्रियों की बढ़ी दूरी हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण यूरोप और अमेरिका जाने वाली उड़ानों को अब लंबे और वैकल्पिक रास्तों से भेजा जा रहा है। इस मार्ग परिवर्तन की वजह से यात्रा के समय में 3 से 5 घंटे की वृद्धि हो गई है। ईंधन की अधिक खपत और क्रू मेंबर्स के वर्किंग आवर्स के चलते कई लंबी दूरी की उड़ानों के समय में भी बदलाव किया गया है। अचानक उड़ानें रद होने से उपजी स्थिति को देखते हुए एयरलाइंस ने यात्रियों को फ्री री-शेड्यूलिंग (बिना अतिरिक्त शुल्क के टिकट बदलने) या फुल रिफंड का विकल्प दिया है। हालांकि, यात्रियों के लिए परेशानी का कारण है कि पीक सीजन होने के कारण दूसरी उड़ानों में सीटें मिलना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का शेड्यूल अस्थिर उधर, दिल्ली एयरपोर्ट प्रबंधन (डायल) ने एक आधिकारिक एडवायजरी जारी कर यात्रियों से अपील की है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी संबंधित एयरलाइन की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर लाइव फ्लाइट स्टेटस जरूर चेक करें। अधिकारियों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का शेड्यूल अस्थिर रह सकता 

नीतीश कुमार के 10 क्रांतिकारी कदम: बिहार में बदलाव की कहानी, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों ने किया फॉलो

पटना नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के रूप में बिहार के सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अपने कार्यकाल में खासकर महिलाओं के सशक्तीकरण को लेकर कई ठोस कदम उठाए गए, जिसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सराहना हुई। उनकी योजनाओं ने बिहार की महिलाओं के साथ ही पिछड़ा,अति पिछड़ा, दलित, महादलित और अल्पसंख्यक समाज की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को बेहतर करने में काफी मदद की। पंचायती राज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण नीतीश सरकार ने देश में पहली बार बिहार की महिलाओं को त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था और नगर निकायों में 50 फीसदी आरक्षण दिया। इससे निचले स्तर पर राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 55 फीसदी तक हो गई है। बाद में आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, त्रिपुरा, उत्तराखंड आदि ने भी इस फैसले का अनुसरण किया। नौकरी/पढ़ाई में महिलाओं को 35 प्रतिशत रिजर्वेशन 2013 में नीतीश कुमार ने बिहार पुलिस में 35 फीसदी महिला आरक्षण लागू किया। इसका प्रभाव हुआ कि आज बिहार में कुल पुलिस बल का लगभग 30 फीसदी महिलाएं हैं और महिला पुलिस की संख्या 31 हजार से अधिक हो गई है। नीतीश सरकार ने 2016 से सभी सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 35 फीसदी क्षैतिज आरक्षण लागू कर दिया। राज्य के इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों के नामांकन में भी लड़कियों को 33 फीसदी आरक्षण लागू है। जीविका योजना ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण और गरीबी उन्मूलन के लक्ष्य के साथ 2006 में बिहार में जीविका (बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी) परियोजना की शुरुआत की। आज इससे एक करोड़ 40 लाख से अधिक महिलाएं जुड़कर ‘जीविका दीदी’ के रूप में कार्य कर रही हैं। यह महिलाएं 11.03 लाख स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में गोलंबद हैं। इसकी तर्ज पर केंद्र सरकार ने पूरे देश में आजीविका मिशन लागू किया है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 2025 में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की शुरुआत की गई। इसके तहत अब तक 1.81 करोड़ महिलाओं को उनके बैंक खाते में 10-10 हजार रुपये भेजे गए हैं। इनमें रोजगार बढ़ाने की इच्छा रखने वाली महिलाओं को दो-दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। कन्या उत्थान/ जननी बाल सुरक्षा योजना स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी नीतीश कुमार ने काफी काम किया। उनके कार्यकाल के दौरान 2008-09 में कन्या उत्थान योजना शुरू की गई। इसके परिणाम स्वरूप जन्म पंजीकरण में भारी वृद्धि हुई। एनएफएचएस के आंकड़ों के मुताबिक, जन्म पंजीकरण दर 54.9% बढ़कर 5.8 से 60.7 हो गया है। जननी बाल सुरक्षा योजना से संस्थागत प्रसव में वृद्धि हुई। आशा और ममता जैसी प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्य कर्ताओं से गर्भवतियों व स्तनपान कराने वाली माताओं को स्वास्थ्य सुरक्षा दी गई। वर्ष 2006-07 में केवल चार प्रतिशत महिलाएं ही संस्थागत प्रसव के लिए अस्पताल आती थीं, जो बढ़कर 50 प्रतिशत से अधिक हो गया है। वर्ष 2016 में पूर्ण शराबबंदी, कड़े कानून बनाए अप्रैल 2016 से पूरे राज्य में देशी शराब और विदेशी शराब पर प्रतिबंध लगाने का कड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया। गांधी जयंती पर दो 2 अक्टूबर, 2016 को नया मद्य निषेध अधिनियम पूरे राज्य में लागू किया गया। यह सामाजिक सुधार की दिशा में बहुत बड़ा कदम रहा। शराबबंदी ने महिलाओं के लिए सामाजिक क्रांति लाई। इससे घरेलू हिंसा में 35 से 40 फीसदी कमी आई और परिवारों में शांति स्थापित हुई। महिलाओं की बचत बढ़ी। अपराध की दर घटी। कानून व्यवस्था से बदली बिहार की छवि नीतीश कुमार ने 2005 के बाद अपराध पर नियंत्रण के लिए स्पीडी ट्रायल और सख्त पुलिसिंग को बढ़ावा दिया। इससे बिहार की छवि में बड़ा बदलाव आया। बाहुबलियों को जेल भेजा गया और शाम होते ही घरों में दुबक जाने वाले लोग रात-बेरात सड़कों पर निकलने लगे। मुख्यमंत्री ने चुनाव प्रचार के दौरान भी अपनी इस उपलब्धि का लगातार बखान किया। बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ अभियान बाल विवाह और दहेज प्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए 2017 से एक व्यापक राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत की। शुरुआत में ही करीब ढाई करोड़ लोगों ने बाल विवाह और दहेज प्रथा को समाप्त करने की शपथ ली। इसमें पंचायत प्रतिनिधि, स्कूली छात्रों, सरकारी अधिकारी, गैर-सरकारी कार्यकर्ता व आम जनता भी शामिल हुए। लड़कियों की शैक्षणिक स्थिति में सुधार, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा उपायों के चलते पिछले वर्षों में बाल विवाह की दर में भारी कमी आई है। मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के तहत राज्य के सभी 38 जिलों में महिला हेल्पलाइन स्थापित किया। यह हेल्पलाइन घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न और अन्य सामाजिक बुराइयों से पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक परामर्श, चिकित्सा और कानूनी सहायता प्रदान करती है। पिछड़ा वर्ग की साक्षरता को चलाया अभियान 2009-10 से अक्षर अंचल योजना चलायी, जिससे 67 लाख से अधिक महिलाएं साक्षर हुईं। 2013 में महादलित, अल्पसंख्यक और अति पिछड़ा वर्ग को भी इस योजना से जोड़ा गया। इसके कारण बिहार में महिलाओं और एससी-एसटी की साक्षरता में पूरे देश की तुलना में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई। इस उपलब्धि के कारण बिहार को राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार प्राप्त हुआ। हुनर और औजार ‘हुनर’ के तहत अल्पसंख्यक समुदायों की हजारों लड़कियों को विभिन्न व्यवसायों का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया गया है। फिर उन्हें ‘औजार’ कार्यक्रम के तहत टूल-किट दी गई, ताकि वे स्वरोजगार शुरू कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। महादलित टोलों के विकास को लेकर इनकी बहुलता वाली पंचायत और शहरी वार्डों में समुदाय से ही विकास मित्र बहाल किए गए।

योगी सरकार का कीर्तिमान, पहली बार गो संरक्षण के लिए खर्च होंगे 2100 करोड़

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विशेष अभिरुचि के कारण प्रदेश के ‘गो संरक्षण मिशन’ को नई दिशा मिलने जा रही है। पहली बार ग्रामीण महिलाएं और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) इस महत्त्वाकांक्षी अभियान में प्रत्यक्ष रूप से जुड़ेंगे। योगी सरकार ने गोसेवा और गो संरक्षण को ग्रामीण समृद्धि का जरिया बनाने का जो विजन रखा था, अब वह जमीनी हकीकत में बदलने जा रहा है। गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अभूतपूर्व रूप से अभियान चलाकर गो माता का संरक्षण किया जा रहा है। इसके तहत गो सेवा में रुचि रखने वाले महिला स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को भी अब जल्द ही गोआश्रय स्थलों के संचालन में शामिल किया जा सकेगा। इससे गोवंश की देखरेख के साथ-साथ महिलाओं और किसान उत्पादक संगठनों को रोजगार और आय का बेहतर साधन मिलेगा। ग्रामीण महिलाओं को इस मिशन की भागीदार बनाकर गो संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने की तैयारी है। योगी सरकार का गो संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योगी सरकार ने इस दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए गोसंरक्षण पर अब तक का सबसे बड़ा 2000 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। इनमें से 100 करोड़ रुपये वृहद गो संरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए अलग से रखे गए हैं। इस प्रकार कुल 2100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। अभी तक प्रदेश भर में लगभग 7,500 गो आश्रय स्थलों के माध्यम से 12,38,547 गोवंश को सुरक्षित आश्रय दिया जा चुका है। इसके अलावा 155 वृहद गो संरक्षण केंद्रों का निर्माण भी प्रगति पर है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था हुई सशक्त, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के साथ बढ़ी पारदर्शिता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन के अंतर्गत अब तक 1,13,631 पशुपालकों को 1,81,418 गोवंश सुपुर्द किए गए हैं। इसके साथ ही गोवंश के भरण-पोषण के लिए 50 रुपये प्रतिदिन प्रति गोवंश की दर से सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे पशुपालकों के बैंक खातों में भेजी जा रही है। इस व्यवस्था से भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के साथ पारदर्शिता भी बढ़ी है। सांस्कृतिक/धार्मिक परंपरा ही नहीं, आत्मनिर्भर भारत के लिए है बड़ा कदम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि गो संरक्षण केवल सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा का हिस्सा नहीं, बल्कि यह आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की दिशा में बड़ा कदम साबित हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि गोवंश आधारित प्राकृतिक खेती, जैविक खाद, गोमूत्र निर्मित कीट नियंत्रक और गोबर से बनने वाले उत्पादों के माध्यम से गो आश्रय केंद्रों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाए।  चयनित महिला समूहों को गोवंश की देखभाल, पोषण और उत्पाद प्रबंधन का जिम्मा देने की योजना आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि आगे चलकर हर जिले में चयनित महिला समूहों को प्रशिक्षण देकर गोवंश की देखभाल, पोषण और उत्पाद प्रबंधन का जिम्मा देने की योजना है। इससे महिलाओं को रोजगार मिलेगा, गांवों में आय के नये स्रोत विकसित होंगे।  योगी सरकार ने बीते कुछ वर्षों में गो संरक्षण के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय कदम उठाए हैं। निराश्रित गोवंश की समस्या जहां पूर्व में चुनौती बनी हुई थी, वहीं अब यह ग्रामीण सशक्तीकरण का माध्यम बन रही है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में प्रत्येक जिले में कम से कम एक बड़ा गो संरक्षण केंद्र आत्मनिर्भर मॉडल के रूप में स्थापित हो। महत्वपूर्ण प्वाइंट गो संरक्षण के लिए सबसे ज्यादा काम करने वाला यूपी देश का पहला राज्य वृहद गो संरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए अलग से 100 करोड़ रुपए की व्यवस्था प्रदेश में गो-संरक्षण के लिए 7,500 गो आश्रय स्थलों में 12,38,547 गोवंश संरक्षित हैं इसके अतिरिक्त 155 वृहद गो-संरक्षण केंद्र निर्माणाधीन हैं मुख्यमंत्री सहभागिता योजना तथा पोषण मिशन के अन्तर्गत 1,13,631 पशुपालकों को 1,81,418 गोवंश सुपुर्द किए गए गोवंश के भरण पोषण के लिए प्रतिदिन 50 रुपए प्रति गोवंश की दर से डीबीटी के माध्यम से किया जा रहा सीधे भुगतान

देशभर की 25 महिला बाइकर्स करेंगी भोपाल से खजुराहो की 1,400 किमी लंबी बाइक ट्रेल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को मुख्यमंत्री निवास से सुबह 9 बजे ‘क्वींस ऑन द व्हील्स’ के तीसरे संस्करण को फ्लैग ऑफ करेंगे। प्रदेश के समृद्ध व ऐतिहासिक पर्यटन गंतव्यों को देश-दुनिया में प्रचारित करने के उद्देश्य से 25 महिला सुपर बाइकर्स को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। ‘क्वींस ऑन द व्हील्स’ के पिछले दो संस्करणों की सफलता के बाद, महिला सशक्तिकरण, स्वतंत्रता एवं विरासत का यह 7 दिवसीय आयोजन भोपाल से खजुराहो तक लगभग 1,400 किलोमीटर लंबी बाइक ट्रेल को पूरा करेगा।   सचिव पर्यटन और प्रबंध संचालक मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड डॉ. इलैयराजा टी ने बताया कि एमपी टूरिज्म बोर्ड की पहल क्वींस ऑन द व्हील्स’ केवल एक बाइक राइड नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, साहस और मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पर्यटन धरोहर का उत्सव है। हमें गर्व है कि देशभर से आईं 25 महिला सुपरबाइकर्स इस अनूठी यात्रा के माध्यम से भोपाल से खजुराहो तक प्रदेश के विविध पर्यटन स्थलों का अनुभव करेंगी और उन्हें देश-दुनिया तक पहुंचाने में सहभागी बनेंगी। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड का उद्देश्य ऐसे नवाचारपूर्ण आयोजनों के माध्यम से प्रदेश को एक सुरक्षित, रोमांचक और विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है। 13 मार्च को भोपाल में होगा समापन भोपाल से शुरू होकर यह 7-दिन की यात्रा सांची, उदयगिरि, चंदेरी, शिवपुरी, कूनो, ग्वालियर, दतिया, ओरछा और खजुराहो से होते वापस भोपाल में 13 मार्च को समाप्त होगी। मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के इस कदम से राज्य की ऐतिहासिक और पुरातात्विक विरासत को प्रमुखता देगा, साथ ही मध्य प्रदेश को महिलाओं के लिए सुरक्षित और समृद्धिशाली पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित किया जाएगा। यह अभियान कम-ज्ञात स्थलों का प्रचार करेगा, रूरल टूरिज्म सर्किट्स को मजबूत करने और राज्य भर में रिस्पॉन्सिबल ट्रैवल को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम बनेगा।