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‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर अंतरराष्ट्रीय IVR कॉल से ठगी, राजस्थान पुलिस ने लोगों को किया अलर्ट

जयपुर राजस्थान पुलिस ने प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका अपनाया है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय आईवीआर कॉल के जरिए लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ठगा जा रहा है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक वीके सिंह के निर्देश पर साइबर अपराध प्रकोष्ठ द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी दौरान साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट ने इस खतरनाक ट्रेंड का खुलासा किया है। एसपी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह के अनुसार अपराधी सबसे पहले विदेशी नंबरों से ऑटोमेटेड आईवीआर कॉल करते हैं। फोन उठाने पर रिकॉर्डेड आवाज खुद को पुलिस, भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण, फेडएक्स या दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताती है। इसके बाद पीड़ित को बताया जाता है कि उसके मोबाइल नंबर या उसके नाम से भेजा गया कोई पार्सल अवैध गतिविधि में पकड़ा गया है। अपराधी गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ित को मानसिक दबाव में लेते हैं और डिजिटल अरेस्ट का नाटक करते हैं। डर के माहौल में वे बैंक डिटेल्स, ओटीपी या सीधे पैसे ट्रांसफर करवाकर ठगी कर लेते हैं। इन नंबरों से रहें सावधान जांच में सामने आया है कि अपराधी अपनी पहचान छिपाने के लिए सैटेलाइट और विदेशी नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेष रूप से इनमारसैट (+870) सैटेलाइट नेटवर्क का दुरुपयोग ज्यादा देखा गया है। इसके अलावा पाकिस्तान (+92), बांग्लादेश (+880), नेपाल (+977), अफगानिस्तान (+93), दक्षिण कोरिया (+82), ईरान (+98), कंबोडिया (+855), सऊदी अरब (+966), संयुक्त अरब अमीरात (+971), यूनाइटेड किंगडम (+44), ऑस्ट्रेलिया (+61) सहित कई देशों के कोड से आने वाली कॉल संदिग्ध हो सकती हैं। क्या करें नागरिक पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अनजान अंतरराष्ट्रीय नंबर से आने वाली कॉल को तुरंत काट दें और इसकी सूचना संचार साथी पोर्टल या ऐप पर दें। किसी भी अनजान व्यक्ति को अपनी निजी या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई जा सकती है।

राष्ट्रपति पद का अपमान किया ममता बनर्जी ने: मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आरोप

राष्ट्रपति पद का अपमान किया सुश्री ममता बनर्जी ने : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राष्ट्रपति पद का अपमान किया ममता बनर्जी ने: मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आरोप डॉ. यादव ने ममता बनर्जी पर लगाया राष्ट्रपति पद का अपमान करने का आरोप मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की कड़ी निंदा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के पश्चिम बंगाल प्रवास के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी द्वारा जो अमर्यादित व्यवहार किया गया है जो निंदनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकतंत्र के सर्वोच्च और प्रतिष्ठित राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और ऐसे समय में जब राष्ट्रपति उनके राज्य के दौरे पर हैं, तब उनको राष्ट्र के सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्तित्व की गरिमा का पूरा ध्यान रखना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसे हालात बनाना, जिसमें दुनिया में हमारे राष्ट्रपति के पद का अपमान होता हो, यह किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देता। मैं इसकी कटु शब्दों में निंदा करता है। आश्चर्य की बात यह है कि इसको हल्की राजनीति का हिस्सा बनाते हुए स्थानीय और दलीय राजनीति में घसीटने का कृत्य भी हुआ है जो घृणित मानसिकता का उदाहरण है। मैं इसकी निंदा करता हूं। इसके लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को माफी माँगना चाहिए।

अब रेल यात्रा होगी और आसान! टिकट बुकिंग के साथ मिल रही है ‘All-in-One’ सुविधा

नई दिल्ली रेलवे में यात्रियों के सफर को अधिक सुविधाजनक और आरामदायक बनाने के लिए रेलवे ने अपने आधिकारिक ‘सुपर ऐप’ रेलवन की शुरुआत की है। इस ऐप के माध्यम से यात्रियों को एक ही मंच पर रेलवे की कई सेवाएं प्रदान करना है। ई-कैटरिंग सुविधा के तहत यात्री इस ऐप का उपयोग कर सकते हैं और सीधे फूड एग्रीगेटर ऐप जोमैटो और स्विग्गी के जरिए भी अपना मनपसंद खाना अपने पसंदीदा रेस्टोरेंट्स से ऑर्डर कर सकते हैं। ऐप की सुविधा जम्मू मंडल के महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों जम्मू, कटरा, पठानकोट जैसे स्टेशनों पर मिलेगी। RailOne App के जरिए यात्री को टिकट बुकिंग, फूड डिलीवरी, या ट्रेन स्टेटस के लिए अलग-अलग ऐप्स का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है। रेलवन ऐप में ये सभी सुविधाएं एकीकृत हैं। यात्री अपने पी.एन.आर. नंबर का उपयोग करके RailOne App में जाकर जोमैटो या स्विगी से खाना चुन सकते हैं। भोजन सीधे यात्री की सीट या बर्थ पर पहुंचाया जाएगा। यह सेवा जम्मू मंडल के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध है, जहां यात्री प्रसिद्ध रेस्तरां के भोजन का आनंद ले सकते हैं। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, उचित सिंघल ने कहा कि हमारा प्राथमिक लक्ष्य रेल यात्रियों के सफर को अधिक सुखद और बाधारहित बनाना है। इस ऐप के माध्यम से हमने टिकट बुकिंग, लाइव ट्रैकिंग और अब प्रीमियम फूड डिलीवरी सेवाओं को एकीकृत किया है। हम यात्रियों को प्रोत्साहित करते हैं कि वे अलग-अलग ऐप्स के बजाय इस ऑल-इन-वन' समाधान को अपनाएं।

FD करने वालों के लिए खुशखबरी! HDFC बैंक ने बढ़ाया ब्याज

नई दिल्ली सुरक्षित निवेश के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) आज भी लोगों की पसंदीदा स्कीम है। इसी को देखते हुए HDFC Bank ने अपनी कुछ एफडी योजनाओं पर ब्याज दर बढ़ा दी है। नई दरें 6 मार्च 2026 से लागू हो गई हैं और यह बदलाव 3 करोड़ रुपये से कम की रिटेल FD पर लागू होगा। इस अवधि की FD पर ज्यादा ब्याज बैंक ने 3 साल 1 दिन से लेकर 4 साल 7 महीने से कम की एफडी पर ब्याज दर 0.10% बढ़ाई है। पहले सामान्य ग्राहकों को 6.40% ब्याज मिलता था, अब 6.50% मिलेगा। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह दर 6.90% से बढ़कर 7% हो गई है। अन्य FD पर ब्याज दर नई व्यवस्था के बाद बैंक में सामान्य ग्राहकों को लगभग 2.75% से 6.50% तक ब्याज मिलेगा, जबकि सीनियर सिटीजन को 3.25% से 7% तक ब्याज मिल सकता है। निवेश से पहले ध्यान रखें FD को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन पैसा लगाने से पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करना जरूरी है। साथ ही अपनी जरूरत और समय के हिसाब से ही FD की अवधि चुननी चाहिए, ताकि बेहतर रिटर्न मिल सके।

सीएम करेंगे टॉप-100 महिला उद्यमियों का सम्मान, 25 हजार रुपये का नकद इनाम भी

चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर महिला उद्यमशीलता की भावना का जश्न मनाने के लिए शुरू किए गए भगवंत मान सरकार के महिला उद्यमी सम्मान कार्यक्रम को राज्य भर की महिलाओं से ज़बरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है। यह पहल आप सरकार के महिला मज़बूती को बढ़ावा देने और महिलाओं को उद्यमशीलता के ज़रिए अपनी पहचान बनाने में मदद करने के प्रतिबद्धता को दिखाती है।   प्रोग्राम का पहला फेज़ 2 मार्च से 6 मार्च तक पंजाब के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों में हुआ था, जहां व्यापार और स्वंय रोजगार अलग-अलग रूपों में काम कर रहीं महिलाओं को उनकी उपलब्धियों और योगदान के लिए सम्मानित किया गया था। हर चुनाव क्षेत्र में, गांवों या शहरी इलाकों की 100 महिला उद्यमियों को आत्मनिर्भरता की दिशा में उनके प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया। इस कैंपेन को ज़बरदस्त रिस्पॉन्स मिला है, जिस के तहत पंजाब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन पोर्टल के ज़रिए 28 हजार से ज़्यादा नॉमिनेशन मिले हैं। इतनी बड़ी संख्या में नॉमिनेशन उद्यमशीलता में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने के उनके पक्के इरादे को उजागर करती है। अब तक, चुनाव क्षेत्र स्तर पर सम्मान समारोह सफलतापूर्वक आयोजित किए गए हैं, जहां स्थानीय प्रतिनिधियों और समुदाय के सदस्यों की मौजूदगी में महिला उद्यमियों को सम्मानित किया गया। इसके बाद ज़िला और राज्य स्तर के कार्यक्रम होंगे, जिनमें छोटे व्यापार, घरेलू उद्योगों, कृषि से जुड़े काम और अलग-अलग सर्विस सेक्टर में अपनी पहचान बनाने वाली महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाया जाएगा। इस प्रोग्राम के तहत अवॉर्ड देने की प्रक्रिया कई पड़ावों में चलाई जा रही है। चुनाव क्षेत्र लेवल पर लगभग 11,700 महिला उद्यमियों को सम्मानित किया गया है। इनमें से 23 जिलों में 2,300 महिलाओं को जिला लेवल पर पहचान के लिए चुना जाएगा, जहां हर जिले से 100 महिलाओं को उनके शानदार योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। प्रोग्राम का अंतिम पड़ाव 18 मार्च को राज्य स्तरीय समारोह में होगा, जहां पंजाब भर की टॉप 100 महिला उद्यमियों को मुख्यमंत्री भगवंत मान सम्मानित करेंगे। इन चुनी गई हर महिला को उनकी एंटरप्रेन्योरशिप की उपलब्धियों के लिए 25,000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। पंजाब सरकार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को सिर्फ़ 8 मार्च को एक दिन के समरोह के तौर पर नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण को समर्पित महीने भर चलने वाले जश्न के तौर पर मना रही है। महिला उद्यमी सम्मान जैसी पहलों के ज़रिए, सरकार का मकसद ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को उद्यमशीलता के क्षेत्र में आने और अपने समुदायों में आर्थिक बदलाव की लीडर बनने के लिए प्रोत्साहित करना है। राज्य की अर्थव्यवस्था में महिलाओं के योगदान को पहचानने और हज़ारों अन्य लोगों को आत्मनिर्भरता और इनोवेशन को बढ़ावा देने की दिशा में उठाए गए इस कदम की हर तरफ तारीफ हो रही है।

मतदाता सूची की होगी विशेष जांच: झारखंड में SIR अभियान जल्द, ऐसे होगा वेरिफिकेशन

रांची झारखंड में इस महीने से ही एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को कराने की तैयारी के अंतिम चरण में है और इसके लिए जिलों को दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। आयोग का लक्ष्य है कि अधिसूचना जारी होने के लगभग 100 दिनों के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। लगभग 2.65 करोड़ मतदाता पंजीकृत एसआईआर एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मतदाता सूची में दर्ज सभी नामों का सत्यापन किया जाता है। इसका उद्देश्य है फर्जी, मृत, स्थानांतरित या दो जगहों पर दर्ज मतदाताओं के नाम हटाना और सही मतदाताओं को सूची में शामिल करना। राज्य में वर्तमान में लगभग 2.65 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें से अब तक 73% से अधिक मतदाताओं का सत्यापन हो चुका है। शेष मतदाताओं का सत्यापन और सुधार एसआईआर प्रक्रिया के दौरान किया जाएगा। प्रारंभिक जांच में ही करीब 12 लाख मतदाता ऐसे पाए गए हैं जिनके नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरी प्रविष्टि की श्रेणी में आ सकते हैं। प्रारंभिक जांच में 6.72 लाख गलतियां पाई गई एसआईआर की तैयारी के तहत अब तक 1.61 करोड़ मतदाताओं का पुराने रिकॉर्ड से मिलान किया जा चुका है और मतदाता सूची में मिली गलतियों को ठीक किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में 6.72 लाख गलतियां पाई गई हैं, जिनमें फोटो, नाम और पते की गड़बड़ियां शामिल हैं। जिलों में बैठक कर रणनीति बनाई जा रही है। बीएलओ को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, डिजिटल डेटा अपडेट किया जा रहा है और मतदाताओं की पैरेंटल मैपिंग का काम भी तेजी से चल रहा है। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को निम्न कार्य करने पड़ सकते हैं: पहचान के दस्तावेज़ जैसे आधार कार्ड, पहचान पत्र या अन्य प्रमाण पत्र दिखाना।   अगर नाम, उम्र, फोटो या पते में कोई गलती है तो निर्धारित फॉर्म भरकर सुधार के लिए आवेदन देना।       18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवा अपना नाम मतदाता सूची में जोड़वा सकते हैं।  

डॉ. अजय खरे के 12वें स्मृति व्याख्यान का आयोजन भोपाल में हुआ

जन स्वास्थ्य अभियान, मध्यप्रदेश(संबद्ध जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया) भोपाल में आयोजित हुआ डॉ. अजय  खरे का 12वां स्मृति व्याख्यान  जन स्वास्थ्य को केवल इलाज नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता से जोड़कर देखने की जरूरत: सुनील कौल भोपाल  7 मार्च 2026 को भोपाल में 12वां डॉ. अजय खरे स्मृति व्याख्यान आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय, टी.टी. नगर, भोपाल में जन स्वास्थ्य अभियान, मध्य प्रदेश और मध्यप्रदेश मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। इस वर्ष के स्मृति व्याख्यान के मुख्य वक्ता डॉ. सुनील कौल थे, जिन्होंने “स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारक: स्वास्थ्य और चिकित्सा पर पुनर्विचार” विषय पर व्याख्यान दिया। यह व्याख्यान जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अजय खरे की स्मृति में आयोजित किया जाता है, जो जन-स्वास्थ्य और विज्ञान आंदोलन से गहराई से जुड़े रहे थे। इस अवसर पर जन स्वास्थ्य सम्मान 2025 भी प्रदान किए गए जिसकी घोषणा डॉक्टर अनंत भान द्वारा की गई। जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिवंगत डॉ. सी. एम. गुलाठी को मरणोपरांत विशेष जन स्वास्थ्य सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्होंने दवाओं और दवा नीतियों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया था। इसके साथ ही डॉ. सी. सत्यामाला, वरिष्ठ जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ, तथा विवेक पवार, जन स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यकर्ता, को स्वास्थ्य और उससे जुड़े सामाजिक कारकों पर उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अपने व्याख्यान में डॉ. सुनील कौल ने कहा कि जन स्वास्थ्य को केवल इलाज के दायरे में नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और व्यापक सामाजिक संदर्भों के साथ जोड़कर देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि पानी पर टैक्स लगाने की सोच विकसित होती है तो वह दिन दूर नहीं जब हवा पर भी टैक्स लगाया जाने लगे। उन्होंने कहा कि जब राजनीति खराब होती है तो उसका सीधा असर जन स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। उन्होंने डॉ. अनुराग भार्गव द्वारा टीबी (तपेदिक) पर किए गए महत्वपूर्ण शोध का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने टीबी और भूख के बीच के संबंध को वैज्ञानिक रूप से स्थापित किया। आज पूरी दुनिया यह मानती है कि दवा के साथ-साथ पर्याप्त और पोषक भोजन भी टीबी के इलाज में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद आज भी देश में लगभग 4 लाख लोग हर साल टीबी से मर रहे हैं। पहले जहां टीबी से मौतों में 50 प्रतिशत तक कमी का लक्ष्य था, आज हम केवल लगभग 25 प्रतिशत कमी ही हासिल कर पा रहे हैं, जबकि टीबी की दवाएं मुफ्त उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि जन स्वास्थ्य में लोगों को बचाने के लिए केवल स्वास्थ्य बजट ही नहीं, बल्कि पोषण, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और समानता जैसे अन्य कारक भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि आज शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी पैसों का खेल बढ़ता जा रहा है, जिसका उदाहरण नीट (NEET) जैसी परीक्षाओं में दिखाई देता है। “हम जिस रास्ते पर जा रहे हैं, वह भटकाव का रास्ता है,” उन्होंने कहा। मध्यप्रदेश में कुपोषण की गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आंगनवाड़ी मॉडल पर्याप्त है या उसमें बदलाव की जरूरत है। उन्होंने पहले 1000 दिनों (गर्भधारण से दो वर्ष तक) के पोषण और देखभाल के मॉडल पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता बताई। उन्होंने यह भी कहा कि देश के बजट का बड़ा हिस्सा गृह मंत्रालय और सेना पर खर्च होता है, जबकि सामाजिक क्षेत्र और जन स्वास्थ्य पर पर्याप्त निवेश नहीं किया जाता। महिलाओं के खिलाफ हिंसा को उन्होंने एक गंभीर जन स्वास्थ्य संकट बताया। उनके अनुसार सरकारी आंकड़ों के हिसाब से देश में हर साल लगभग 35 हजार महिलाएं दहेज या घरेलू हिंसा के कारण जलकर मर जाती हैं, जबकि गैर सरकारी संस्थाओ के अनुसार करीब 75 हजार महिलाएं दहेज या घरलू हिंसा के कारण जलने से अपनी जान गंवाती हैं। उन्होंने कहा कि मातृ मृत्यु को रोकने के प्रयासों के साथ-साथ महिलाओं के खिलाफ हिंसा को भी जन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से गंभीरता से लेना होगा। उन्होंने असम में किए गए एक सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि 58 प्रतिशत पुरुषों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी पत्नी के साथ किसी न किसी प्रकार की हिंसा की है। इसलिए हिंसा को केवल महिला का मुद्दा नहीं, बल्कि समाज और जन स्वास्थ्य का मुद्दा मानना होगा। उन्होंने कहा कि घृणा, जातिवाद और सांप्रदायिक हिंसा भी जन स्वास्थ्य पर गहरा असर डालते हैं। 2020 में अमेरिका की एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्था ने भी घृणा को जन स्वास्थ्य का मुद्दा माना है। सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) के संदर्भ में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था का मूल विचार सभी के लिए समान उपचार का था, लेकिन आज स्थिति यह हो गई है कि “अगर आपके पास पैसा नहीं है तो इलाज भी नहीं मिलेगा।” इससे अमीर और गरीब दोनों ही असुरक्षित महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में जाति और वर्ग आधारित भेदभाव से ऊपर उठना होगा और लोगों की स्वायत्तता और सम्मान को मजबूत करना होगा। जलवायु परिवर्तन को भी उन्होंने एक बड़ा जन स्वास्थ्य संकट बताते हुए कहा कि हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और कई अध्ययन बताते हैं कि आने वाले वर्षों में इनमें भारी कमी आ सकती है। उन्होंने कहा, “हम बेहतर की उम्मीद कर सकते हैं, लेकिन हमें सबसे खराब स्थिति के लिए भी तैयारी करनी चाहिए।” उन्होंने विकेंद्रीकृत स्वास्थ्य मॉडल की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि समुदाय आधारित स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आशा कार्यकर्ताओं को दवाएं देने और प्राथमिक उपचार की अधिक ट्रेनिंग दी जा सकती है, ताकि संकट की स्थिति में समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं टिकाऊ बन सकें। दवाओं की कीमतों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि दवाओं की निर्माण लागत से कई गुना अधिक कीमत पर बिक्री होती है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था में असमानता को बढ़ाती है। उन्होंने कहा कि जन स्वास्थ्य को केवल डॉक्टरों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसमें एंथ्रोपोलॉजी, मनोविज्ञान और अन्य सामाजिक विज्ञानों के विशेषज्ञों की भी भागीदारी जरूरी है। अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा— "एक जिंगई ढूंढ लाओ, वो भीगी हुई चिंगारी ढूंढ लाओ।" कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. रजनीश जोशी ने कहा कि हर … Read more

क्या बढ़ने वाले हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? LPG के बाद सरकार का नया बयान

नई दिल्ली हाल ही में LPG गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। गैस की इन कीमतों में वृद्धि के बाद अब ऐसा कहा जा रहा था कि पेट्रोल और डीज़ल के दाम भी बढ़ सकते हैं। आपको बता दें कि सरकारी गलियारों से ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी अभी नहीं होगी।   पेट्रोल-डीजल के दाम पर सरकार का रुख पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद, भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहेंगी। सूत्रों का कहना है कि Strait of Hormuz से कार्गो जहाजों की आवाजाही जल्द ही सुचारू रूप से शुरू होने की उम्मीद है, जिससे आपूर्ति बाधित नहीं होगी। ऐसे में कीमतों में इजाफे की संभावना न के बराबर है। LPG की कीमतों में क्यों हुआ इजाफा? लगभग 11 महीने के अंतराल के बाद सरकार ने रसोई गैस के दामों में बदलाव किया है। घरेलू उपयोग वाले 14.2 किलो के सिलेंडर पर 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, वहीं 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये का इजाफा हुआ है। आंकड़ों की मानें तो पिछले 12 वर्षों में एलपीजी के दाम कुल 110 रुपये बढ़े हैं। सरकार ने अब तेल कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपना पूरा ध्यान एलपीजी के उत्पादन को अधिकतम करने पर लगाएं ताकि भविष्य में कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके। भारत के पास सुरक्षित भंडार: हरदीप सिंह पुरी केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश को विश्वास किया है कि ईंधन की कमी को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ (हवाई ईंधन) का भरपूर भंडार है। देश के पास अगले 50 से 60 दिनों के लिए पर्याप्त बैकअप मौजूद है। सप्लाई चेन और रसद के मोर्चे पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की स्थिति पश्चिम एशिया के संघर्ष ने वैश्विक बाजार को हिलाकर रख दिया है। पिछले एक सप्ताह में ही कच्चे तेल की कीमतों में 39% का जबरदस्त उछाल आया है। शुक्रवार को कीमतें अपने एक साल के उच्चतम स्तर (52-week high) पर पहुंच गईं, जिसमें एक ही दिन में 3.50% की तेजी देखी गई। इसके बावजूद, भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता के बल पर घरेलू कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रहा है।

फाइनल से पहले पिच में बदलाव! अहमदाबाद में किसके पक्ष में जाएगी T20 वर्ल्डकप 2026 की जंग

अहमदाबाद आईसीसी मेंस T20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताबी मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा। ये वही मैदान है, जहां भारतीय टीम को पिछली दो आईसीसी इवेंट की हार झेलनी पड़ी है। हालांकि वो दोनों मुकाबले काली मिट्टी से तैयार की गई पिच पर खेले गए थे लेकिन आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्डकप 2026 के फाइनल के लिए खास मिट्टी से पिच तैयार की गई है। इस बार अलग मिट्टी से बनाई गई है पिच फाइनल के लिए जो पिच बनाई गई है, उस पर इस टूर्नामेंट में अब तक सिर्फ साउथ अफ्रीका और कनाडा के बीच मुकाबला खेला गया है, जहां साउथ अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 213 रन बनाए थे। जवाब में कनाडा की टीम 156 रन ही बना सकी थी। इसका मतलब है कि अगर पिच इसी तरह व्यवहार करती है तो हाई-स्कोरिंग मुकाबला देखने को मिल सकता है। अगर उस मुकाबले पर नजर डालें तो दो बातें सामने निकलकर आती हैं। पहली, गेंदबाजों के लिए यह पिच कब्रगाह बनती नजर आ सकती है और दूसरी, बल्लेबाज यहां बड़ी पारियां खेल सकते हैं।   अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में जो फाइनल के लिए पिच तैयार की गई है, उसमें मिक्स मिट्टी का इस्तेमाल किया गया है। मतलब गेंद को उछाल मिलेगी और बल्लेबाज बड़े शॉट आसानी से खेल पाएंगे। आपको बता दें कि भारतीय टीम T20 वर्ल्ड कप के इतिहास में आज तक न्यूजीलैंड को हरा नहीं सकी है। दोनों टीमें तीन बार आमने-सामने हुई हैं और तीनों बार भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा है। हालांकि एक रिकॉर्ड यह भी है कि आज तक न्यूजीलैंड की टीम T20 वर्ल्ड कप नहीं जीत पाई है। दूसरी ओर भारतीय टीम दो बार चैंपियन रही है और चौथा फाइनल खेल रही है, जबकि न्यूजीलैंड का यह सिर्फ दूसरा फाइनल है। इस टूर्नामेंट में भी भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा है और फाइनल में जब दोनों टीमें मैदान पर उतरेंगी तो टीम इंडिया जीत की प्रबल दावेदार के रूप में उतरेगी। किसका टूटेगा सपना? हालांकि न्यूजीलैंड के कप्तान ने साफ कर दिया है कि अगर ट्रॉफी जीतने के लिए कुछ लोगों का दिल तोड़ना पड़े, तो उन्हें कोई एतराज नहीं है। अब देखना यह होगा कि भारतीय क्रिकेट फैंस का दिल टूटता है या न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम का सपना। मुकाबला शाम 7:00 बजे शुरू होगा, जबकि 6:30 बजे टॉस होगा। भारत में स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क और जियोहॉटस्टार पर इस मैच को लाइव देखा जा सकता है। साथ ही डीडी स्पोर्ट्स पर भी इस मैच का सीधा प्रसारण किया जाएगा।

मध्यप्रदेश में बढ़ा खसरे का खतरा: 4 जिलों में 12 केस मिले, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया अलर्ट

भोपाल मध्य प्रदेश में एक बार फिर संक्रामक बीमारी खसरे (मीजल्स) ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। फरवरी 2024 के बाद, अब 2026 में प्रदेश के चार जिलों- अलीराजपुर, दतिया, शिवपुरी और बुरहानपुर में खसरे के 12 नए मामले सामने आए हैं। इन क्षेत्रों में बुखार, शरीर पर दाने और खांसी के लक्षणों वाले मरीजों की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया है। गौरतलब है कि साल 2024 में मैहर में खसरे से दो बच्चों की मौत हो गई थी, जिसके बाद अब मिल रहे नए केस ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। प्रभावित जिलों की स्थिति: कहां कितने मरीज? स्वास्थ्य विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) ने प्रभावित गांवों का दौरा कर सैंपल लिए, जिसकी रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है:     बुरहानपुर (बरौली गांव): यहां स्थिति सबसे गंभीर है, जहां भेजे गए सभी 5 सैंपल पॉजिटिव पाए गए हैं। संक्रमितों की उम्र 2 से 25 वर्ष के बीच है।     दतिया (आगोरा गांव): यहां 8 में से 3 मरीज पॉजिटिव मिले हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यहां संक्रमितों की आयु सीमा 0 से 40 वर्ष तक है।     शिवपुरी (गुदर गांव): खनियाधाना क्षेत्र में 5 में से 3 केस पॉजिटिव आए हैं (उम्र 4 से 15 वर्ष)।     अलीराजपुर (कांडा-चुलिया): जोबट क्षेत्र में 6 में से 1 केस पॉजिटिव मिला है। संक्रमण फैलने का मुख्य कारण 'टीकाकरण में चूक' खसरे के दोबारा उभरने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं।     विमुक्त और घुमक्कड़ समुदायों के लगातार स्थान बदलने के कारण बच्चों का नियमित टीकाकरण चक्र टूट जाता है।     महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने से कई बच्चे वैक्सीन की अनिवार्य डोज से वंचित रह गए थे। बच्चों के लिए जानलेवा हो सकता है खसरा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, खसरा न केवल श्वसन तंत्र पर हमला करता है, बल्कि बच्चों में अंधेपन (Blindness) का भी एक बड़ा कारण है। दुनिया भर में हर साल करीब 60 हजार बच्चे इसके कारण अपनी आंखों की रोशनी खो देते हैं। प्रमुख लक्षण और जटिलताएं     तेज बुखार, खांसी और शरीर पर लाल चकत्ते।     उल्टी, डायरिया और गंभीर डिहाइड्रेशन।     जटिल मामलों में निमोनिया और मस्तिष्क में सूजन (Encephalitis)। बचाव और सरकारी प्रयास     नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) और स्वास्थ्य संचालनालय ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और घर-घर सर्वे शुरू कर दिया है।     मरीजों को लक्षणों के आधार पर दवाइयां और विटामिन-ए सॉल्यूशन दिया जा रहा है। विटामिन-ए की दो डोज संक्रमण की गंभीरता को कम करने में सहायक होती हैं।     विशेषज्ञों का कहना है कि मीजल्स-रुबेला (MR) वैक्सीन की दोनों डोज समय पर लगवाना ही इससे बचने का एकमात्र प्रभावी तरीका है।     ग्रामीणों और शिक्षकों को सलाह दी गई है कि संक्रमित मरीज को अलग (Isolate) रखें और साफ-सफाई व पोषण का विशेष ध्यान दें।