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फिर सजे शादी के मंडप: 14 तक शुभ मुहूर्त, 15 मार्च से खरमास के कारण थमेंगे विवाह

ग्वालियर आठ दिनों तक चले होलाष्टक के समापन के बाद सहालग सीजन की शुरुआत के साथ ही शहनाइयों की गूंज सुनाई देने लगी है। हालांकि यह शुभ समय अधिक दिनों तक नहीं रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 6 से 14 मार्च तक ही लगातार विवाह के मुहूर्त हैं। इसके बाद 15 मार्च से खरमास शुरू हो जाएगा। यह 14 अप्रेल तक चलेगा। इस कारण मार्च में अब पांच दिन ही विवाह समारोह होंगे। इस छोटे से सहालग सीजन में करीब 200 शादियां होने का अनुमान है। विवाह मुहूर्त शुरू होते ही शहर के सराफा, कपड़ा और किराना बाजार फिर से गुलजार हो चले हैं। शहर के महाराज बाड़ा और उससे सटे बाजारों में खरीदारों की भीड़ दिखने लगी है। कैटङ्क्षरग कारोबारी खुशी जैन ने बताया कि कम मुहूर्त होने के बाद भी शादियों के लिए बुङ्क्षकग है। मार्च में 5 और अप्रेल माह में विवाह के 8 मुहूर्त मार्च माह में 8, 9, 10, 11 और 12 मार्च को विवाह के मुहूर्त हैं। वहीं, अप्रेल में आठ दिन (15, 20, 21, 25, 26, 27, 27 और 29 अप्रेल) को विवाह के शुभ मुहूर्त रहेंगे। सराफा बाजार में शादियों के लिए हल्के जेवरों की पूछ-परख सराफा बाजार में सोना-चांदी के भाव ऊंचाई पर होने के बावजूद विवाह से जुड़ी खरीदारी पर खास असर नहीं पड़ा है। सोना-चांदी व्यवसायी संघ लश्कर के अध्यक्ष पुरुषोत्तम जैन के अनुसार सहालग सीजन शुरू होते ही सोने के हार, मंगलसूत्र, चांदी की पायल और बिछिया की मांग बढ़ गई है। हालांकि भारी जेवरों की जगह अब हल्के डिजाइन वाले आकर्षक आइटम खरीदे जा रहे हैं। ग्राहक उपयोगी और फैशनेबल ज्वेलरी को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं।

कैंसर से संघर्ष और तीन नौकरियों का त्याग, दृष्टिबाधित संजय दहरिया ने UPSC को किया क्रैक

महासमुंद जुनून, लगन और हार न मानने की जिद। इन सबका जीता जागता उदाहरण हैं संजय दहरिया। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के संजय दहरिया ने छह साल तक कैंसर से जूझने और तीन नौकरियां छोड़ने के बाद अपने तीसरे प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 946वीं रैंक हासिल की है। बेलटुकरी के एक किसान के 38 साल के इस पुत्र ने अपने परिवार और गांव के लोगों को अपार गर्व और खुशी दी है। दहरिया की शैक्षणिक यात्रा एक स्थानीय सरकारी स्कूल से शुरू हुई। कक्षा 5 में जवाहर नवोदय विद्यालय, माना (रायपुर) में चयन होने के बाद इसमें एक महत्वपूर्ण मोड़ आया। दहरिया के लिए सिविल सेवाओं तक का सफर पेशेवर और व्यक्तिगत दोनों ही दृष्टि से चुनौतियों से भरा था। पश्चिम बंगाल में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में 2009 से 2011 तक काम करने के बाद उन्होंने उच्च लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए इस्तीफा दे दिया। हालांकि, 2012 में उन्हें लार ग्रंथियों के कैंसर का पता चला, जिसके कारण छह साल तक उनका कठिन इलाज चला। दृष्टिबाधित होने के बावजूद दहरिया ने हार नहीं मानी और सिविल सेवाओं में अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार प्रयास जारी रखा। उन्होंने रायपुर के एक बैंक और महासमुंद डाकघर में काम करते हुए अपने करियर को आगे बढ़ाया। उन्होंने 2022 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में भाग लेना शुरू किया और अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित होकर 2025 में तीसरे प्रयास में सफलता प्राप्त की। दहरिया ने अपनी सफलता का श्रेय बीमारी के दौरान अपने परिवार और मार्गदर्शकों के अटूट समर्थन को दिया। उन्होंने कहा कि मैं सिविल सेवाओं के माध्यम से देश की सेवा करने की आशा रखता हूं। चाहे मुझे आईएएस कैडर मिले या कोई अन्य सेवा, लोक सेवा के प्रति मेरी प्रतिबद्धता दृढ़ रहेगी। महासमुंद के कलेक्टर विनय कुमार लांगेह और जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे ने दहरिया को बधाई देते हुए उनकी उपलब्धि की सराहना की, जो साहस और दृढ़ता का एक उदाहरण है।

मध्य प्रदेश के इस शहर की बदलेगी तस्वीर, 1000 करोड़ के निवेश से युवाओं को मिलेगी बड़ी नौकरी की सौगात

उज्जैन प्रदेश के औद्योगिक मानचित्र पर उज्जैन को नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। एमपीआइडीसी के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा विकसित किए जा रहे विक्रम् उद्योगपुरी फेज-2 का श्रीगणेश हो गया हैं। लगभग 488 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होने जा रहे सबसे पहले एल्केम लेबोरेट्रीज लिमिटेड (Alkem Laboratories Limited) को 30 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। कंपनी यहां टैबलेट, कैप्सूल और इंजेक्शन जैसे फार्मास्यूटिकल उत्पादों के निर्माण के लिए अत्याधुनिक इकाई स्थापित करेगी। यह उज्जैन को औषधि निर्माण के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। इस इकाई के शुरू होने से लगभग 2000 युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, जबकि परिवहन, पैकेजिंग, सप्लाई चेन और अन्य सहायक गतिविधियों के माध्यम से बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित होंगे। 382 हेक्टेयर भूमि निर्धारित विक्रम उद्योगपुरी फेज-2 में औद्योगिक इकाइयों के लिए 382 हेक्टेयर भूमि निर्धारित की गई है, जहां सैकड़ों औद्योगिक भूखंड विकसित किए जाएंगे। इस औद्योगिक क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के विकास पर करीब 455 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। डीएमआईसी विक्रम उद्योगपुरी लिमिटेड के बोर्ड से इन विकास कार्यों को मंजूरी मिल चुकी है। परियोजना के तहत यहां सड़क नेटवर्क, स्ट्रीट लाइट, स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज, पेयजल आपूर्ति नेटवर्क, एलिवेटेड सर्विस रिजरवॉयर, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, 33 केवी और 11 केवी विद्युत लाइन, सबस्टेशन, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट तथा आईसीटी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।   उल्लेखनीय है कि विक्रम उद्योगपुरी फेज-1 को करीब 773 एकड़ में विकसित किया गया था, जिसका उद्घाटन अक्टूबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। यह औधोगिक टाउनशिप देश की महत्वाकांक्षी विल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना का हिस्सा है। फेज-1 में सभी भूखंड आवंटित हो चुके हैं, जहां पेप्सिको, अमूल, वोल्वो-आयशर, फेना, सुधाकर पाइप्स और इस्कॉन बालाजी जैसी प्रतिष्ठित कंपनियां आ चुकी हैं। फार्मा हब की नई पहचान मिलेगी विक्रम उद्योगपुरी फेज-2 उज्जैन जिले के औधोगिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा। यह परियोजना न केवल बड़े निवेश को आकर्षित करेगी बल्कि आने वाले समय में उज्जैन को प्रवेश के प्रमुख औधोगिक और फार्मा हब के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।- राजेश राठौड़, कार्यकारी संचालक, एमपीआइडीसी

चपरासी पिता की बेटी ने UPSC में 113वीं रैंक हासिल कर रच दिया इतिहास

बुलंदशहर उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने मेहनत, संघर्ष और हौसले की नई मिसाल पेश की है. यहां की बेटी ने सिविल सेवा परीक्षा में 113वीं रैंक हासिल कर न केवल परिवार का बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया है. शिखा एक ऐसे परिवार से आती हैं, जहां सुविधाएं बेहद कम और हौसले बहुत बड़े. उनके पिता चपरासी हैं. शिखा का रिजल्ट देखते उनके परिवार वालों के खुशी का कोई ठिकाना नहीं था।  चपरासी की बेटी बनी अधिकारी  बता दें कि बुलंदशहर में ही एक इंटर कॉलेज में शिखा के पिता चपरासी का काम करते हैं. ऐसे में शिखा का सिविल सेवा परीक्षा पास करना बहुत कठिन था. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटी की पढ़ाई में कभी किसी तरह की कमी नहीं होने दी. उनकी शुरुआती पढ़ाई बुलंदशहर के गांधी बाल निकेतन कन्या इंटर कॉलेज से हुई है. इसके बाद उन्होंने IP कॉलेज से BSC की परीक्षा पास की।   पहले प्रयास में मिली निराशा  कॉलेज पूरी करने के बाद से शिखा ने दिल्ली में रहकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की. दो साल तैयारी करने के बाद जब उन्होंने पहला अटेम्प्ट दिया तो उन्हें निराशा हाथ लगी. लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने 113वीं रैंक हासिल की।  रिजल्ट देख खूब रोए दादा  पोती को UPSC एग्जाम में मिली सफलता की खबर जब शिखा के दादा को लगी तो, वह फूट-फूटकर रोने लगे. वहीं, शिखा के बड़े भाई ने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा पास कर बहन ने पूरे परिवार का नाम रोशन कर दिया है. उनके माता-पिता अपनी बेटी के सफलता पर गर्व कर रहे हैं. एक बार निराशा हाथ आने के बाद भी शिखा ने हार नहीं मानी और लगातार अपने लक्ष्य के लिए मेहनत करती रहीं। 

अग्निवीर भर्ती रैली: बरेली में 11 मार्च से आयोजन, 12 जिलों के उम्मीदवार शामिल होंगे

बरेली भारतीय सेना 11 मार्च से अग्निवीरों की भर्ती करेगी। इसके लिए 12 जिलों के अभ्यर्थी स्थानीय जाट रेजीमेंट सेंटर पहुंचेंगे। 23 मार्च तक चलने वाली इस भर्ती के अभ्यर्थियों को तिथिवार बुलाया गया है। वे तय तिथि से एक शाम पहले जाट रेजीमेंट सेंटर पहुंचेंगे। सैन्य अधिकारी एवं जिला प्रशासन इससे संबंधित तैयारियों में जुटा है। बरेली सेना भर्ती क्षेत्र के बरेली, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर, सीतापुर, संभल, पीलीभीत, हरदोई, फर्रुखाबाद और बदायूं के अभ्यर्थी भर्ती में शामिल होंगे। 11 मार्च की सुबह छह बजे से दौड़ शुरू होगी। ये काम करना जरूरी बरेली के सेना भर्ती कार्यालय ने अभ्यर्थियों से अपील की कि अपने प्रवेश पत्र डाउनलोड करके रखें। जिनके प्रवेश पत्र पंजीकृत ई-मेल आइडी पर नहीं मिले, वे अभ्यर्थी सेना भर्ती कार्यालय में सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे के बीच संपर्क कर सकते हैं। 11 मार्च को शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को 10 मार्च की शाम से ही जाट रेजीमेंट सेंटर परिसर में प्रवेश दिया जाएगा। वहां प्रशासन की ओर से भोजन-शयन की व्यवस्थाएं की गई हैं। अग्निवीर भर्ती रैली का कार्यक्रम     11 मार्च – टेक्निकल (सभी 12 जिले के अभ्यर्थियों के लिए)।     12 मार्च – ट्रेड्समैन (आठवीं व दसवीं) (सभी 12 जिले के अभ्यर्थियों के लिए तथा अग्निवीर (क्लर्क/एसकेटी) (सभी 12 जिले के अभ्यर्थियों के लिए)।     13 मार्च – जनरल ड्यूटी-बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती और लखीमपुर खीरी जिले के अभ्यर्थियों के लिए।     14 मार्च – जनरल ड्यूटी-शाहजहांपुर और सीतापुर जिले के अभ्यर्थियों के लिए।     15 मार्च – जनरल ड्यूटी- संभल और पीलीभीत जिले के अभ्यर्थियों के लिए।     16 मार्च – जनरल ड्यूटी- हरदोई जिले के अभ्यर्थियों के लिए।     17 मार्च – जनरल ड्यूटी- फर्रुखाबाद जिले के अभ्यर्थियों के लिए।     18 मार्च – जनरल ड्यूटी- बदायूं जिले के अभ्यर्थियों के लिए।     19 मार्च – जनरल ड्यूटी- बरेली जिले के अभ्यर्थियों के लिए  

न्यायपालिका को अदृश्य दुश्मनों से खतरा, इंटरपोल से सहयोग की अपील

रायपुर अदालतों को मिल रहे लगातार धमकी भरे ई-मेल ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। अदालत परिसरों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है, लेकिन जांच एजेंसियों के हाथ अब तक खाली होने से उनके साइबर सुरक्षा तंत्र और तकनीकी क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसे देखते हुए अब इन अदृश्य दुश्मनों का सुराग लगाने के लिए ही इंटरपोल से मदद ली जा रही है। राज्य साइबर सेल की ओर से इस संबंध में अब पहल की गई है। जिला अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी भरे ई-मेल देश के विभिन्न राज्यों की अदालतों के साथ ही बिलासपुर हाई कोर्ट, रायपुर, दुर्ग और कोरबा जैसी जिला अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी भरे ई-मेल भेजे गए थे। एक महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी स्थिति यह है कि जांच एजेंसियों के पास ठोस सुराग के नाम पर कुछ भी नहीं है। अत्याधुनिक डिजिटल हथियारों का उपयोग किया राज्य पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामले तो दर्ज किए हैं, लेकिन एनआइए से लेकर साइबर सेल तक की सक्रियता के बावजूद नतीजा सिफर (शून्य) है। जांच में यह बात सामने आई है कि ई-मेल भेजने वाले ने अपनी पहचान छिपाने के लिए वीपीएन (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) और टोर (ओपन-सोर्स साफ्टवेयर) ब्राउजर जैसे अत्याधुनिक डिजिटल हथियारों का उपयोग किया है। विदेशी सर्वर पर स्थित कंपनियों से डेटा प्राप्त करने में होने वाली महीनों की देरी और इंटरपोल की लंबी कागजी प्रक्रिया ने जांच की रफ्तार को पूरी तरह कुंद कर दिया है। संसाधनों का अभाव बनी चुनौती पुलिस मुख्यालय के अधिकारी यह स्वीकार करते हैं कि हमारे पास फिलहाल ऐसी कोई स्पेशल रिस्पांस टीम नहीं है, जो अंतरराष्ट्रीय सर्वर के पीछे छिपे अपराधियों को 24 घंटे के भीतर बेनकाब कर सके। अदालतों के बाहर सघन चेकिंग, बैग स्कैनिंग और अतिरिक्त सुरक्षा घेरे के कारण लोग और वकील परेशान हैं। सिर्फ शरारत मान लेना बड़ी चूक अब तक कोई अप्रिय घटना नहीं होने के कारण जांच एजेंसियां इसे सिर्फ डराने वाली शरारत के रूप में देख रही हैं। लेकिन विदेशी धरती से बैठकर देश की संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती देना किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है। मामले की तह तक जाना राज्य की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। विशेषज्ञों की कमी पर हाई कोर्ट जता चुका है नाराजगी बिलासपुर हाई कोर्ट ने पिछले दिनों साइबर एक्सपर्ट्स की नियुक्तियां न होने पर नाराजगी जताई थी। गृह विभाग की ओर से जवाब दिया गया कि भर्ती प्रक्रिया जारी है, लेकिन बम की इन धमकियों ने यह साफ कर दिया है कि डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में हम कितने पीछे हैं। जब तक राज्य में उच्चस्तरीय साइबर विशेषज्ञ और त्वरित डेटा रिकवरी तंत्र नहीं होगा, तब तक अदृश्य अपराधी इसी तरह हमारी व्यवस्था को चुनौती देते रहेंगे। भविष्य में ऐसी धमकियां और गंभीर रूप ले सकती हैं विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं केवल सुरक्षा एजेंसियों की तकनीकी क्षमता ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर सहयोग की आवश्यकता को भी रेखांकित करती हैं। यदि समय रहते अत्याधुनिक उपकरण, प्रशिक्षित विशेषज्ञ और त्वरित डेटा एक्सेस व्यवस्था विकसित नहीं की गई, तो भविष्य में ऐसी धमकियां और गंभीर रूप ले सकती हैं।

भीषण गर्मी का अलर्ट: देश के 417 जिले हाई रिस्क में, दिन ही नहीं रातें भी दे रहीं राहत नहीं

नई दिल्ली भारत में क्लाइमेट चेंज का असर अब सिर्फ "चिलचिलाती दोपहर" तक ही सीमित नहीं है, बल्कि "घुटन भरी रातें" और "बढ़ती नमी" भी बड़ी आबादी के लिए जानलेवा खतरा बन रही हैं। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) की तरफ से जारी की गई नई स्टडी, "बहुत ज्यादा गर्मी भारत पर कैसे असर डाल रही है: जिला-लेवल हीट रिस्क का आकलन 2025", ने चौंकाने वाले तथ्य सामने लाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 57 प्रतिशत ज़िले, जहां देश की 76 प्रतिशत आबादी रहती है, अब बहुत ज़्यादा से लेकर बहुत ज्यादा गर्मी के खतरे का सामना कर रहे हैं। यह स्टडी पहली बार 35 इंडिकेटर्स के आधार पर 734 ज़िलों का डिटेल्ड एनालिसिस करती है, जो 1982 से 2022 तक बदलते ट्रेंड्स को दिखाता है। हीट 'हॉटस्पॉट': दिल्ली और महाराष्ट्र लिस्ट में सबसे ऊपर CEEW डेटा के मुताबिक, देश के 417 जिले 'हाई रिस्क' कैटेगरी में हैं, जबकि 201 जिलों में मीडियम रिस्क है। सबसे ज्यादा गर्मी के खतरे वाले टॉप 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की लिस्ट इस तरह है: दिल्ली, आंध्र प्रदेश, गोवा, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश दिलचस्प और चिंता की बात यह है कि यह खतरा सिर्फ़ शहरी इलाकों तक ही सीमित नहीं है। जहाँ दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे आर्थिक केंद्र खतरे में हैं, वहीं महाराष्ट्र, केरल, उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामीण ज़िले, जहाँ खेती करने वाले मज़दूर खुले आसमान के नीचे काम करने को मजबूर हैं, भी ज़्यादा खतरे में हैं। रातें दिनों से ज्यादा खतरनाक स्टडी की सबसे डरावनी बात 'गर्म रातों' (बहुत ज़्यादा गर्म रातें) में बढ़ोतरी है। रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले एक दशक (2012-2022) में, लगभग 70 प्रतिशत ज़िलों में हर गर्मी के मौसम में कम से कम पाँच और बहुत ज़्यादा गर्म रातें दर्ज की गई हैं। "साइंस साफ़ है—हम अब बहुत ज़्यादा, लंबे समय तक चलने वाली गर्मी और खतरनाक रूप से गर्म रातों के दौर में आ गए हैं।" जब रात का टेम्परेचर नॉर्मल से काफ़ी ज़्यादा रहता है, तो इंसान के शरीर को दिन की गर्मी से उबरने का समय नहीं मिलता, जिससे हीट स्ट्रोक और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। डेटा के मुताबिक, गर्म दिनों के मुकाबले गर्म रातें बहुत तेज़ी से बढ़ रही हैं। उत्तर भारत में बढ़ती ह्यूमिडिटी उत्तर भारत के ज़िले, जिन्हें पहले सूखा माना जाता था, अब तटीय इलाकों के बराबर ह्यूमिडिटी महसूस कर रहे हैं। पिछले दस सालों में इंडो-गैंगेटिक मैदानों में रिलेटिव ह्यूमिडिटी में 10 परसेंट की बढ़ोतरी देखी गई है। बदलाव: कानपुर, जयपुर, दिल्ली और वाराणसी जैसे शहरों में ह्यूमिडिटी का लेवल 30-40 परसेंट से बढ़कर 40-50 परसेंट हो गया है। असर: ज्यादा ह्यूमिडिटी की वजह से महसूस होने वाला टेम्परेचर असल टेम्परेचर से 3-5 डिग्री सेल्सियस ज़्यादा हो जाता है। इससे शरीर के पसीना निकलने के नैचुरल कूलिंग प्रोसेस में रुकावट आती है, जिससे नॉर्मल टेम्परेचर भी जानलेवा हो जाता है। आगे का रास्ता: डिस्ट्रिक्ट लेवल पर हीट एक्शन प्लान CEEW में सीनियर प्रोग्राम लीड, डॉ. विश्वास चिताले ने ज़ोर दिया कि लोकल लेवल पर हीट एक्शन प्लान लागू करने का समय आ गया है। महाराष्ट्र, ओडिशा और गुजरात जैसे राज्यों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं, लेकिन इसे नेशनल लेवल पर बढ़ाने की जरूरत है। मुख्य सुझाव:     फाइनेंशियल मदद: 2024 में हीटवेव को डिजास्टर कैटेगरी में शामिल किए जाने के साथ, राज्य अब स्टेट डिज़ास्टर मिटिगेशन फंड का इस्तेमाल कर सकते हैं।     समाधान: नेट-जीरो कूलिंग शेल्टर, कूल रूफ और अर्ली वार्निंग सिस्टम को ज़रूरी करें।     डेटा अपडेट: हीट एक्शन प्लान में सिर्फ टेम्परेचर ही नहीं, बल्कि रात में होने वाली गर्मी और ह्यूमिडिटी का डेटा भी शामिल करें।     यह रिपोर्ट साफ करती है कि बहुत ज़्यादा गर्मी अब भविष्य की चेतावनी नहीं है, बल्कि आज की एक त्रासदी है, जिससे निपटने के लिए पॉलिसी और स्ट्रक्चरल बदलावों की जरूरत है।  

भोपाल से मुंबई जाने वालों को झटका: 29 मार्च से समर शेड्यूल में फ्लाइट नहीं

भोपाल राजा भोज इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 29 मार्च से शुरू हो रहे समर शेड्यूल में इस बार फ्लाइट बढ़ाने की बजाए कम होने जा रही हैं। एयर इंडिया एवं इंडिगो एयरलाइंस ने मुंबई के लिए एक उड़ान बंद करने की घोषणा की है। इसके अलावा इंडिगो एयरलाइंस ने गोवा और अहमदाबाद के डायरेक्ट फ्लाइट की जल्द समीक्षा कर इसे भी बंद करने के संकेत दिए हैं। इंडिगो एयरलाइंस एकमात्र नई उड़ान नवी मुंबई के लिए शुरू करने जा रही है। गर्मियों की छुट्टी में जब लोग टूरिस्ट डेस्टिनेशन जाने के लिए अपना प्रोग्राम बना रहे हैं, उसी वक्त विमानन कंपनियों द्वारा भोपाल से फ्लाइट कनेक्टिविटी कम किए जाने से निराशा का माहौल है। एयरपोर्ट प्रबंधन के मुताबिक युद्ध की आशंका के चलते और कमजोर यात्री संख्या के कारण फिलहाल विमानन कंपनियां किसी भी फ्लाइट एक्सटेंशन पर विचार नहीं कर रही हैं। इंडिगो ने नवी मुंबई के लिए स्लॉट, किराया 5 हजार इंडिगो ने नवी मुंबई के लिए स्लॉट भी ले लिया है और फ्लाइट का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। यात्रियों के लिए इस उड़ान की बुकिंग भी शुरू कर दी गई है। इस नई उड़ान का शुरुआती किराया लगभग चार से पांच हजार रुपए के बीच रखा गया है। नवीं मुंबई के लिए नई उड़ान शुरू करने के साथ ही इंडिगो ने भोपाल से मुंबई जाने वाली अपनी एक उड़ान बंद करने का निर्णय लिया है। इसके बाद 29 मार्च से भोपाल और मुंबई के बीच इंडिगो की केवल एक ही उड़ान संचालित होगी।   पर्याप्त यात्रियों के बावजूद कटौती भोपाल से गोवा और अहमदाबाद की उड़ानों को बंद करने का प्रस्ताव भी सामने आया है। गोवा की उड़ान करीब छह महीने पहले ही शुरू की गई थी, इसलिए इसे बंद किए जाने के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। ट्रेवल एजेंटों के अनुसार गोवा की इस उड़ान को लगभग 80 प्रतिशत यात्रियों का लोड मिल रहा था।

असम में सीट शेयरिंग पर BJP की चिंता, क्या NDA के साथी देंगे चुनौती?

गुवाहाटी असम में 2026 की चुनावी बिसात बिछ चुकी है, लेकिन सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही खेमों के भीतर सीटों के गणित को लेकर तनातनी कम होने का नाम नहीं ले रही है। गठबंधन की राजनीति के इस दौर में सहयोगी दलों की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं ने रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है। हालात यह हैं कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में गठबंधन के सहयोगियों के बीच ही 'मैत्रीपूर्ण मुकाबला' होने की संभावना प्रबल हो गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार एक तरफ विकास के दावों के साथ मैदान में है, वहीं दूसरी ओर उसे अपने सहयोगियों असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) को संतुष्ट रखने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। असम गण परिषद (AGP) 2014 से भाजपा की वफादार साथी रही है। इस बार अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए दबाव बना रही है। पिछले 2021 के चुनावों में एजीपी ने 29 सीटों पर दांव आजमाया था, जिनमें से 26 पर उसने अकेले चुनाव लड़ा और 3 सीटों पर भाजपा के साथ दोस्ताना मुकाबला किया था। अंततः पार्टी 9 सीटें जीतने में सफल रही थी। इस बार एजीपी के जमीनी कार्यकर्ताओं की मांग है कि पार्टी को अधिक सीटों पर मौका मिलना चाहिए, जिससे भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने संकेत दिया है कि एजीपी के साथ शुरुआती दौर की चर्चा शुरू हो चुकी है और 9 या 10 मार्च तक सीटों का अंतिम खाका तैयार हो सकता है। हालांकि, जब उनसे सहयोगियों की बढ़ती मांगों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी औपचारिक मांग से अवगत नहीं हैं, लेकिन उन्होंने 'फ्रेंडली फाइट' की संभावना से इनकार भी नहीं किया। बोडोलैंड का पेच गठबंधन की सबसे पेचीदा स्थिति बोडोलैंड क्षेत्र में देखने को मिल रही है। यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) ने अपनी आक्रामक रणनीति का ऐलान करते हुए 21 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। इनमें से 15 सीटें बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC) क्षेत्र की हैं और 6 सीटें उससे बाहर की हैं। सबसे बड़ी बाधा यह है कि बीपीएफ (BPF) और यूपीपीएल (UPPL) के बीच की कड़वाहट खत्म होने का नाम नहीं ले रही। दोनों दलों ने साफ कर दिया है कि वे न तो साथ चुनाव लड़ सकते हैं और न ही किसी सीट-शेयरिंग फॉर्मूले पर सहमत होंगे। यह स्थिति भाजपा के लिए सिरदर्द बन गई है, क्योंकि उसे इन दोनों क्षेत्रीय ताकतों के बीच संतुलन बनाना है। विपक्ष की एकजुटता दूसरी ओर सत्ता से बाहर कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर चार प्रमुख विपक्षी दलों ने हाथ मिलाया है और संयुक्त अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने गठबंधन की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि सभी सहयोगी दल जल्द ही पूरे राज्य में समन्वयित अभियान बैठकें करेंगे। गोगोई ने कहा, "हमारे पास केवल 30 दिन बचे हैं और ये 30 दिन असम के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमें एकजुट होकर जनता के बीच जाना होगा।" विपक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे कितनी जल्दी अपनी सीटों का बंटवारा कर पाते हैं, ताकि प्रचार के आखिरी दिनों में कोई आंतरिक कलह सामने न आए। जैसे-जैसे नामांकन की तारीखें नजदीक आ रही हैं, असम की राजनीति में गठबंधन धर्म और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के बीच का संघर्ष गहराता जा रहा है। जहां भाजपा के लिए अपने सहयोगियों की नाराजगी को दूर करना एक बड़ी परीक्षा है, वहीं विपक्ष के लिए 30 दिनों के भीतर एक साझा और प्रभावी नैरेटिव तैयार करना आसान नहीं होगा।