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छत्तीसगढ़ में व्यापारियों को 31 मार्च तक ट्रेड लाइसेंस लेना अनिवार्य

कोंडागांव. जिले के फरसगांव नगर पंचायत क्षेत्र में अब बिना ट्रेड लाइसेंस व्यापार करना मुश्किल होने वाला है। प्रशासन ने व्यापारिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। छत्तीसगढ़ व्यापार अनुपालन नियम 2025 लागू होने के बाद अब छोटे गुमटी संचालकों से लेकर बड़े प्रतिष्ठानों तक सभी के लिए ट्रेड लाइसेंस अनिवार्य कर दिया गया है। नगर पंचायत प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि 31 मार्च तक लाइसेंस नहीं लेने वाले व्यापारियों पर 25 से 50 प्रतिशत तक आर्थिक दंड लगाया जाएगा। मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने बताया कि शासन के निर्देश के तहत नगरीय निकाय क्षेत्र में संचालित हर व्यवसाय को अब नगर पंचायत की अनुज्ञप्ति के दायरे में लाना अनिवार्य है। व्यापारियों की सुविधा के लिए आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और राजस्व शाखा के माध्यम से दस्तावेज जमा करने की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का कहना है कि समय सीमा के बाद नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इंदौर में तेज रफ्तार स्कार्पियो की टक्कर से युवक की मौत और दूसरा गंभीर घायल

इंदौर. सेहरी के बाद घर के बाहर खड़े दो युवकों को स्कार्पियों चालक कुचलकर फरार हो गया। एक युवक ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। लोगों ने कार चालक को पकड़ने का प्रयास किया, मगर वह चकमा देकर धार रोड की ओर भाग गया। छत्रीपुरा पुलिस ने मर्ग कायम किया है। टक्कर मारने वाली गाड़ी का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार घटना तड़के करीब चार बजे की सिलावटपुरा (गणेश मंदिर के समीप) की है। टाटपट्टी बाखल निवासी 19 वर्षीय तनवीर पुत्र सरताज मंसूरी की मौत हुई है। 22 वर्षीय फैजान पुत्र शरीफ मंसूरी गंभीर रूप से घायल हो गया है। प्रत्यक्षदर्शी इमरान के अनुसार तनवीर और फैजान सेहरी के बाद घर से बाहर निकले थे। दोनों नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद जाने वाले थे। पेट पर चढ़ गया पहिया फैजान स्कूटर पर बैठा था और तनवीर उससे बात कर रहा था। तभी नर्सिंग बाजार की तरफ से तेज रफ्तार में स्कार्पियो आई और दोनों को टक्कर मार दी। गंभीर अवस्था में घायल फैजान और तनवीर को निजी अस्पताल में भर्ती किया गया मगर तनवीर की दोपहर को मौत हो गई। उसके पेट पर वाहन का पहिया चढ़ा था। हवा में उछले और दूर जाकर गिरे युवक घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। तनवीर खड़ा है और फैजान स्कूटर पर बैठा हुआ है। तेज रफ्तार में आए वाहन ने ऐसी टक्कर मारी कि दोनों हवा में उछले और दूर जाकर गिरे। आवाज सुनकर लोग दौड़े, मगर वाहन चालक फरार हो गया। इमरान और इरफान ने कार का पीछा किया तो वह गंगवाल बस स्टैंड की ओर चला गया। होटल शिवानी के पास से स्कार्पियो मोड़ी और महूनाका से फूटी कोठी चौराहा जा पहुंचा। इसके बाद वह चंदननगर होकर धार रोड चला गया। अंधेरा होने के कारण उसके नंबर नहीं देख पाए। पुलिस के अनुसार अन्य स्थानों से भी सीसीटीवी फुटेज निकाले जा रहे हैं। कार में तीन व्यक्ति बैठे हुए थे।

ईरान की इस हरकत से आगबबूला हुआ सऊदी अरब

ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान ने बीते 10 दिनों से खाड़ी देशों पर लगातार हमले किए हैं। इन हमलों में ना सिर्फ अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया गया है, बल्कि ईरान ने सऊदी अरब और अन्य देशों के अन्य तेल और रिहायशी ठिकानों पर भी मिसाइलें बरसाई हैं। वहीं खाड़ी देशों ने अब तक संयम से काम लेते हुए दोनों पक्षों से बातचीत की अपील की है। हालांकि अब इन देशों के सब्र का बांध टूटता नजर आ रहा है। रविवार को अपने तेल ठिकानों और एक रिहायशी इलाके पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए सऊदी अरब ने ईरान को चेतावनी दे दी है। सऊदी अरब ने सोमवार को ईरान को आगाह किया है कि अगर वह अरब देशों पर हमले करता रहा तो उसे अब तक का 'सबसे बड़ा नुकसान' उठाना पड़ेगा। सऊदी अरब का यह बयान उस नए ड्रोन हमले के बाद आया, जिसमें उसके बड़े शायबा तेल क्षेत्र को निशाना बनाया गया था। सऊदी अरब ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन द्वारा शनिवार को दिए गए इस बयान को भी खारिज कर दिया कि ईरान ने खाड़ी अरब देशों पर अपने हमले रोक दिए हैं। भविष्य में संबंधों पर गंभीर असर पड़ेगा- सऊदी सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "देश इस बात की पुष्टि करता है कि ईरानी पक्ष ने इस बयान पर अमल नहीं किया, ना तो राष्ट्रपति के भाषण के दौरान और ना ही उसके बाद। ईरान ने बिना किसी ठोस वजह के अपना आक्रमण जारी रखा है।" बयान में आगे कहा गया कि ईरानी हमले का मतलब है तनाव में और वृद्धि, जिसका वर्तमान और भविष्य में संबंधों पर गंभीर असर पड़ेगा। UAE ने किया अटैक वहीं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ईरान पर हमला बोल दिया है। UAE ने अपने पहले हमले में ईरान के एक विलवणीकरण संयंत्र पर हमला किया है। यह अमीरात और ईरान के बीच शत्रुता में एक अहम वृद्धि का संकेत है। अगर इस हमले की पुष्टि हो जाती है, तो यह हमला ना केवल फारस की खाड़ी के एक और देश को ईरान के साथ सीधे सैन्य संघर्ष में शामिल करेगा, बल्कि ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों के खिलाफ अबू धाबी का पहला जवाबी हमला भी होगा। ईरानी अधिकारियों और उसके सरकारी मीडिया के अनुसार, केशम द्वीप पर स्थित एक विलवणीकरण संयंत्र पर कथित तौर पर रात भर में हमला किया गया, जिससे आसपास के लगभग 30 गांवों में पानी की आपूर्ति बाधित हो गई। ईरान के हमले जारी इस बीच ईरान ने अपने पड़ोसी मुल्कों को रविवार को भी निशाना बनाया। कुवैत के सैन्य अधिकारियों के अनुसार, ईरानी ड्रोनों ने कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के ईंधन टैंकों को निशाना बनाया। कुवैती वायु रक्षा प्रणालियों ने कई ड्रोनों को मार गिराया, लेकिन मलबे गिरने से हवाई अड्डे के टर्मिनल को आंशिक नुकसान पहुँचा है। इसके अलावा, कुवैत सिटी स्थित 'पब्लिक इंस्टीट्यूशन फॉर सोशल सिक्योरिटी' की बहुमंजिला इमारत में भी ईरानी ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई। कुवैती सेना ने बताया कि पिछले 48 घंटों में उन्होंने 12 ड्रोनों और 14 मिसाइलों को सफलतापूर्वक गिरा दिया है।

MP में राज्य अधिवक्ता परिषद चुनाव की 12 मई को होगी वोटिंग

इंदौर. राज्य अधिवक्ता परिषद के पांच वर्ष में एक बार होने वाले चुनाव के लिए अधिसूचना जारी हो गई है। इसके मुताबिक 12 मई को पूरे प्रदेश में एक साथ मतदान होगा। मतगणना 16 जून से शुरू होगी। कार्यकारिणी सदस्य के 25 में से सात पद इस बार महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ पांच पद के लिए ही चुनाव होगा। शेष दो पदों पर मनोनयन किया जाएगा। प्रदेशभर के लगभग 87 हजार वकील इस चुनाव में हिस्सा लेंगे। राज्य अधिवक्ता परिषद के लिए प्रारंभिक मतदाता सूची 16 मार्च को जारी कर दी जाएगी। 24 मार्च तक इस प्रारंभिक मतदाता सूची को लेकर दावे-आपत्तियां प्रस्तुत किए जा सकेंगे। एक अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची जारी हो जाएगी। सिर्फ उन्हीं वकीलों को मतदान का अधिकार प्राप्त होगा, जिन्होंने प्रविधानों के तहत अपना सत्यापन करवा लिया है। नामांकन फार्म जमा करने के लिए प्रत्याशियों को तीन दिन मिलेंगे। मतपेटियों को जबलपुर भेजा जाता है 8, 9 और 10 अप्रैल को नामांकन फार्म जमा कराया जा सकेगा। 15 और 16 अप्रैल को नामांकन फार्म की जांच होगी। 20 से 22 अप्रैल शाम चार बजे तक नाम वापस लिया जा सकेगा। 22 अप्रैल को शाम पांच बजे प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी। मतदान के बाद सभी मतपेटियों को सीलबंद कर जबलपुर भेजा जाता है। वहां 16 जून से मतगणना शुरू होगी। सामान्यत: राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव की मतगणना दो माह लगभग चलती है। बढ़ेगी महिलाओं की हिस्सेदारी इस बार राज्य अधिवक्ता परिषद में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ना तय है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस बार 25 में से सात पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। राज्य अधिवक्ता परिषद की निवृत्तमान कार्यकारिणी के 25 सदस्यों में से सिर्फ एक महिला थी, लेकिन इस बार यह संख्या सात गुना बढ़ जाएगी। आसान नहीं होगा चुनाव पिछले चुनाव के मुकाबले इस चुनाव में प्रत्याशियों के लिए चुनौती मुश्किल होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि इस बार पुरुषों प्रत्याशियों के लिए 25 नहीं बल्कि सिर्फ 18 पद होंगे। एक अनुमान के मुताबिक प्रथम वरीयता के 2500 मत लाने वाले प्रत्याशी खुद को सुरक्षित मान सकते हैं। इंदौर से दो दर्जन से ज्यादा मैदान में चुनाव के लिए नामांकन का काम भले ही अब तक शुरू नहीं हुआ, लेकिन संभावित प्रत्याशियों ने प्रचार शुरू कर दिया है। यह प्रचार सोशल मीडिया के साथ-साथ प्रत्यक्ष भी चल रहा है। संभावित प्रत्याशी वकीलों के कार्यालय और घर तक पहुंचकर खुद प्रथम वरीयता का मत देने की गुहार लगा रहे हैं। इस बार राज्य अधिवक्ता परिषद में अकेले इंदौर से 30 से ज्यादा प्रत्याशी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें वर्तमान कार्यकारिणी के पांच सदस्य शामिल हैं।

नवा रायपुर तहसील बनाने अधिसूचना जारी, 39 गांवों के लोगों नहीं लगाएंगे शहर के चक्कर

रायपुर. नवा रायपुर के रहवासियों के लिए सुकून भरी खबर है. अब उन्हें जमीन, मुआवजा या राजस्व संबंधित कामों के लिए बार-बार रायपुर शहर या आसपास की तहसीलों में नहीं जाना पड़ेगा. राज्य सरकार ने नवा रायपुर को तहसील बनाने की अधिसूचना जारी कर दी है. नवा रायपुर के साथ अब रायपुर जिले में रायपुर, मंदिर हसौद अभनपुर, धरसींवा, तिल्दा-नेवरा भी नई तहसील होगी. अभी तक वहां के गांवों के लोगों को राजस्व और प्रशासन संबंधित कामों के लिए रायपुर समेत आसपास के तहसीलों में जाना पड़ता था. लेकिन अब वहां के लोग वहीं की नई तहसील में अपने काम निपटा सकेंगे. राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने नई तहसील बनाने की अधिसूचना जारी की है. इससे पहले नई तहसील की सीमाओं को लेकर दावा-आपत्ति मंगाई गई थी. इसमें कुछ ही आपत्तियां मिली थी, जिनका निराकरण कर दिया गया है. नई तहसील में इन गांवों को किया शामिल राजस्व निरीक्षक मंडल के 20 पटवारी हल्के में कुल 39 ग्रामों को शामिल किया गया है. इसमें फ्लौद – परसदा 20, पलौद 21, रीको, सेंध 21, चींचा 23, बरौंदा, 23, रमचंडी 23, कयाबांधा 24, झांझ 24, नवागांव 24, खपरी 24, कुहेरा 25, राखी 25, कोटनी 26, कोटराभाटा 26, तांदुल 26, मंदिर हसौद – छतौना 22, नवागांव 15, केंद्री- केंद्री 13, परसठ्ठी 13, निमोरा 14, उपरवारा 15, तूता 15, केंद्री 16, झांकी 16, खंडवा 18, भेलवाडीह 18, पचेड़ा 19, तोरला चेरिया 1, पाँता 1, बंजारी 1, तेंदुआ 1, कुरूं 2 सेरीखेड़ी में सेरीखेड़ी 16. नकटी 16, टेमरी 39, धरमपुरा 39, बनरसी 40, रायपुर 18, कांदुल माना 51 शामिल हैं. रहवासियों को होंगे फायदे नए तहसील के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र के लोगों को राजस्व प्रशासनिक कामों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा. इससे समय के साथ पैसे भी बचेंगे. जमीन नामांतरण, खसरा सुधार, बटांकन, डायवर्सन समेत अन्य संबंधित काम में तेजी आएगी. मूल निवासी, जाति, आय समेत कोई भी प्रमाण-पत्र बनाने लोगों को फायदा मिलेगा. सरकारी कामों के लिए लंबी दूरी तय कर जिला मुख्यालय या बड़ी तहसील नहीं जाना पड़ेगा. इसके साथ प्रशासन की उपस्थिति से इलाकों में सुरक्षा कानून व्यवस्था पहले से और बेहतर होती है.

नर्क से भी भयावह था हिटलर का यह कैंप, हजारों बेगुनाहों की मौत की डरावनी कहानी

दाचाऊ एडोल्फ हिटलर ने नाजी जर्मनी में अपने राज के दौरान यहूदियों समेत लाखों लोगों को मौत के घाट उतारा। इस इतिहास से तो हर कोई परिचित है, लेकिन क्या आपको मालूम है कि हिटलर की क्रूरताओं के किस्सों में मार्च का महीना काफी अहम है। ये वही महीना है, जब हिटलर ने नाजी कैंपों की नींव रखना शुरू किया था, जो आगे चलकर यहूदियों समेत उन तमाम लोगों की मौत की वजह बनें, जिन्हें सरकार नापसंद करती थी। इसी महीने हिटलर ने पहले 'जहन्नुम' यानी नाजी कैंप की नींव रखी थी, जिसे दाचाऊ कैंप के तौर पर जाना जाता है। दाचाऊ कैंप का इतिहास इतना दर्दनाक है, जिसे जानकर लोगों की रूह कांप जाती है। क्या बच्चे, क्या बूढ़े, क्या महिलाएं और जवान, हिटलर जिसको भी नापसंद करता था, उन्हें कैंपों में ठेल दिया जाता था, जहां उनकी जिंदगी जहन्नुम से कम ना थी। एडोल्फ हिटलर ने जनवरी 1933 में नाजी जर्मनी की कमान संभाली और इसी साल मार्च में दाचाऊ कंसन्ट्रेशन कैंप खोला गया। ये कैंप दक्षिणी जर्मनी के दाचाऊ शहर में स्थित था। वैसे तो इस कैंप को राजनीतिक बंदियों के लिए बनाया गया था, लेकिन फिर यहां यहूदियों को कैद किया जाने लगा। दाचाऊ कैंप में क्या होता था? नेशनल म्यूजिम के मुताबिक, शुरुआत में यहां उन राजनीतिक बंदियों को कैद किया गया, जो हिटलर की नीतियों के खिलाफ थे। यहां कैद किए जाने वाले ज्यादातर लोग समाजवादी और कम्युनिस्ट थे। मगर नाजी सरकार का इरादा तो कुछ और ही था। राजनीतिक कैदियों के बाद नंबर आया कलाकारों, बुद्धिजीवियों, शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांगों, रोमानी लोगों और समलैंगिकों का, जिन्हें नाजी सरकार हीन भावना से देखती थी। फिर यहां यहूदियों को भी कैद किया जाने लगा। इस कैंप को चलाने का जिम्मा हिलमार वैकरले को मिला हुआ था, जो नाजी अर्धसैनिक संगठन SS का एक अधिकारी था। कैंप में कैद किए गए लोगों के साथ अमानवीय व्यवहार होता था। इसका अंदाजा कुछ यूं लगाया जा सकता है कि हिटलर ने एक फरमान जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि कैंप के अंदर जर्मनी का कानून लागू नहीं होगा। इसका मतलब था कि कैदियों के साथ मारपीट की जाए या उन्हें मौत के घाट उतारा जाए, ऐसा करने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। इससे कैंप के नाजी अधिकारियों को अपने मनमुताबिक सजा देने का अधिकार मिल गया। हिलमार वैकरले के बाद कैंप का जिम्मा थियोडोर आइके के पास आ गया, जिसने यहां वो बर्बरता फैलाई, जो रूह कंपा देती है। सबसे पहले थियोडोर आइके ने एक रेगुलेशन जारी किया, जिसमें ये बताया गया कि कैंप किस तरह चलेगा। इसके तहत अगर कोई कैदी छोटी सी भी गलती कर देता था, तो उसकी बेहरमी से पिटाई होती थी। अगर किसी ने यहां से भागने की हिम्मत की या फिर उसकी राजनीतिक विचारधारा सरकार के खिलाफ है, तो फिर उसे तुरंत मौत के घाट उतार दिया जाता था। कैदियों को खुद का बचाव करने या अपने साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार के खिलाफ बोलने की आजादी नहीं थी। अगर कोई कुछ कहता, तो उसे पहले पीटा जाता और फिर उसकी हत्या कर दी जाती। थियोडोर आइके ने यहां पर जो रेगुलेशन बनाई थी, उसको एक ब्लूप्रिंट के तौर पर देखा गया। इसके बाद जितने भी नाजी कैंप बनाए गए, वहां इसी आधार पर सजा देने का प्रावधान किया गया। यहां कैद किए लोगों को समय पर खाना नहीं मिलता था। उनसे कई-कई घंटों तक काम करवाया जाता था। जब 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत हुई, तो दाचाऊ में कैद किए गए लोगों से हथियार और अन्य चीजें बनवाई जाने लगीं। इसके अलावा हजारों ऐसे कैदी भी थे, जिनके ऊपर नाजी वैज्ञानिक और डॉक्टर मेडिकल एक्सपेरिमेंट किया करते थे। दाचाऊ में कितने लोग मारे गए थे? यूएस होलोकॉस्ट मेमोरियल म्यूजिम के अनुसार, 1940 तक दाचाऊ एक कंसन्ट्रेशन कैंप का रूप धारण कर चुका था, जहां के हालात बेहद क्रूर और भीड़भाड़ भरे थे। इसे लगभग 6,000 बंदियों को रखने के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन आबादी लगातार बढ़ती रही और 1944 तक लगभग 30,000 कैदियों को शिविर में ठूंस दिया गया। द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत में, हिटलर को यह विश्वास हो गया कि जर्मनी और नाजियों द्वारा कब्जा किए गए देशों में यहूदियों की दैनिक गतिविधियों पर बैन लगाने भर से 'यहूदी समस्या' का समाधान नहीं होगा। उस लगने लगा कि ये समस्या तभी सुलझेगी, जब सारे यहूदियों का सफाया कर दिया जाए। इसके बाद 1941 से लेकर 1944 तक जहां हजारों यहूदियों और उन लोगों को भेजा जाने लगा, जिन्हें सरकार पसंद नहीं करती थी। फिर यहां उन्हें जहरीली गैस देकर मारने का सिलसिला शुरू हुआ। 1933 से 1945 तक दाचाऊ के हजारों कैदी बीमारी, कुपोषण और अत्यधिक काम की वजह से जान गंवा बैठे। कैंप के नियमों के उल्लंघन के लिए हजारों लोगों को फांसी दे दी गई। 1942 में इस कैंप में बैरक एक्स का निर्माण शुरू हुआ, जो एक श्मशानगृह था और इसमें शवों को जलाने के लिए इस्तेमाल होने वाली चार बड़ी भट्टियां शामिल थीं। नाजियों ने दाचाऊ के कैदियों पर खूब मेडिकल एक्सपेरिमेंट भी किए। उदाहरण के लिए, नाजी वैज्ञानिक ये पता लगाना चाहते थे कि क्या बर्फीले पानी में डूबे व्यक्ति को जीवित किया जा सकता है। इस संभावना का पता लगाने के लिए कैदियों को बर्फीले पानी में डुबोकर परीक्षण किया जाता था। उन्हें घंटों तक बर्फीले पानी से भरे टैंकों में जबरन डुबोया जाता था। इस दौरान भी कैदी मारे जाते रहे। यहां कैद हुए लोगों को आजादी तब मिली, जब 29 अप्रैल 1945 को अमेरिकी सेना ने दाचाऊ कैंप पर अपना कंट्रोल जमाया। 1933 से लेकर 1945 तक यहां 2 लाख से ज्यादा कैदियों को रखा गया था, जिसमें से हजारों ने अपनी जान गंवाई।

दतिया में बच्ची की छोटे भाई-बहनों के साथ खेलते समय साइलेंट अटैक से मौत

दतिया. भांडेर अनुभाग के ग्राम तालगांव निवासी 15 वर्षीय दसवीं की छात्रा उर्वांगी दुबे उर्फ गुनगुन पुत्री विनय दुबे की हाल निवास आलमपुर जिला भिंड स्थित अपने घर पर साइलेंट अटैक की वजह से शनिवार को अचानक मौत हो गई। कम उम्र में अचानक हुई इस मौत ने परिजन को विचलित और हैरान कर दिया। भांडेर क्षेत्र में इतनी कम उम्र में साइलेंट अटैक से मौत का यह पहला और इकलौता मामला बताया जा रहा है। इस घटना के बारे में उर्वांगी के पिता विनय ने बताया कि वे भिंड जिले के आरुषि में बतौर शिक्षक पदस्थ होकर आलमपुर में किराए के मकान में अपने परिवार के साथ रहते हैं। शनिवार को सामान्य दिन की तरह सुबह करीब दस बजे अपने दो अन्य बच्चों सहित उर्वांगी को हंसता खेलते छोड़ गए थे। करीब पौने तीन बजे उन्हें घर से मोबाइल पर सूचना मिली कि उर्वांगी की तबियत अचानक से बिगड़ गई है। घर पहुंचकर डॉक्टर को बुलाया, लेकिन डॉक्टर के आने से पहले ही उसने दमतोड़ दिया। परीक्षण करने वाले डॉक्टर भी इसे साइलेंट अटैक का केस मान रहे हैं। शनिवार शाम को ही भांडेर के तालगांव में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उर्वांगी कक्षा 10 की छात्रा थीं और शुक्रवार को ही उसकी वार्षिक परीक्षा संपन्न हुई थी। वह तीन भाई बहिनों में सबसे बड़ी थी। क्या कोरोना वैक्सीन साइलेंट अटैक की वजह – इस मामले में सीएचसी भांडेर पर पदस्थ एवं पूर्व बीएमओ डा.आरएस परिहार ने बताया कि साइलेंट हार्ट अटैक को साइलेंट मायोकार्डियल इंफार्क्शन (एसएमआई) के नाम से जाना जाता है। यह तब होता है जब हृदय को रक्त की आपूर्ति बंद हो जाती है, लेकिन लक्षण इतने हल्के या असामान्य होते हैं कि अधिकांश व्यक्तियों को यह अहसास ही नहीं होता कि कोई जानलेवा घटना घट रही है। हाल के समय में साइलेंट अटैक के चलते कम उम्र एवं युवाओं में मौत के कई मामले सामने आ रहे हैं, जिसे लेकर कोरोना और उसकी वैक्सीन को लेकर भी कथित तौर पर आशंका जताई जाती है। इस घटना को लेकर भी परिजन ने आशंका जताई कि कोरोना काल में उर्वांगी को भी वैक्सीन लगी थी, कहीं उसका कोई प्रभाव तो नहीं पड़ा। इस मामले में विशेषज्ञ राय ली गई तो डा.आरएस परिहार ने बताया कि साइलेंट अटैक की वजह कोरोना या कोरोना वैक्सीन की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन खानपान और दैनिक दिनचर्या भी ऐसी मौतों की एक वजह हो सकती है।  

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए नई सौगात: योगी सरकार देगी साड़ी-यूनिफॉर्म और बीमा लाभ

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को साड़ी-यूनिफॉर्म, बीमा और आयुष्मान कार्ड की सौगात दी। डीबीटी के जरिये कुल 38.49 करोड़ रुपये की धनराशि सीधे उनके खातों में भेजी गई। सीएम ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने का वादा भी किया। सीएम ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साड़ी-यूनिफॉर्म के लिए डीबीटी के माध्यम से 29.59 करोड़ रुपये की धनराशि स्थानांतरित की। उन्होंने मंच पर नेहा दुबे, मानसी साहू, पूनम तिवारी, मनोरमा मिश्रा को साड़ी भेंट की तो सेवा मित्र आकांक्षा (ब्यूटीशियन) और रत्ना भारती को यूनिफॉर्म सौंपी। इसके अलावा बीमा प्रीमियम की 8.90 करोड़ रुपये की धनराशि भी स्थानांतरित की। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए उन्हें प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से जोड़ा। इसके तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की पात्र कार्यकर्ताओं की मृत्यु होने पर परिजनों को 2 लाख रुपये मिला है, जिसका वार्षिक प्रीमियम 436 रुपये है। वहीं 18 से 59 वर्ष आयु वर्ग की पात्र कार्यकर्ताओं को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण स्थायी विकलांगता होने पर 2 लाख रुपये तथा आंशिक स्थायी विकलांगता पर 1 लाख रुपये का बीमा कवर मिलता है, जिसका वार्षिक प्रीमियम 20 रुपये है। इसके अलावा सीएम ने पांच आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं गुड़िया सिंह, प्रियंका सिंह, सुधा अवस्थी, उमा सिंह और लालावती को मंच पर बुलाकर आयुष्मान कार्ड प्रदान किए। सफल महिला उद्यमियों से किया संवाद सीएम ने कार्यक्रम के दौरान वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर की 600 से अधिक महिलाओं के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये संवाद भी किया। वाराणसी की सीता देवी ने बताया कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना से उन्होंने ई-रिक्शा चलाकर और क्षेत्र की 250 महिलाओं को ई-रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया। गाजीपुर की प्रमिला देवी ने बताया कि वे प्राथमिक विद्यालय में रसोइया हैं। चंदौली जिले की सोनी कुमारी ने बताया कि वे फूलों की खेती करती हैं और महिला समूहों के माध्यम से क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी इस कार्य से जोड़कर स्वावलंबन की ओर प्रेरित करती हैं। जौनपुर की दुर्गा मौर्य ने बताया कि उन्होंने वह ड्रोन दीदी के रूप में भी कार्य करती हैं। उद्योग विभाग से ऋण लेकर नमकीन बनाने की फैक्ट्री स्थापित की है, जिससे अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है।  

Ferrari 849 Testarossa हाइपरकार 14 मार्च को भारत में होगी लॉन्च, कीमत ₹10 करोड़ से ज्यादा

मुंबई  भारत में महंगी और उच्च प्रदर्शन वाली कारों के शौकीनों के लिए जल्द ही एक बड़ी पेशकश आने वाली है। इटली की प्रसिद्ध कार निर्माता कंपनी फेरारी अपनी नई कार Ferrari 849 Testarossa को भारतीय बाजार में 14 मार्च को लॉन्च करने जा रही है। यह कार कंपनी की अत्याधुनिक तकनीक और शानदार रफ्तार का बेहतरीन उदाहरण मानी जा रही है। भारत में इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत करीब 10.37 करोड़ रुपये बताई जा रही है। दमदार क्षमता और आकर्षक बनावट के कारण यह कार लग्जरी स्पोर्ट्स कार सेगमेंट में खास पहचान बना सकती है और अन्य प्रीमियम कारों को कड़ी टक्कर देने वाली है। शक्तिशाली इंजन और जबरदस्त रफ्तार Ferrari 849 Testarossa में उन्नत हाइब्रिड तकनीक का उपयोग किया गया है। इसमें 4 लीटर क्षमता वाला ट्विन-टर्बो V8 पेट्रोल इंजन दिया गया है, जिसके साथ तीन इलेक्ट्रिक मोटर भी जोड़ी गई हैं। इनमें से दो मोटर आगे के पहियों के पास और एक इंजन तथा गियरबॉक्स के बीच लगाई गई है। यह पेट्रोल इंजन अकेले लगभग 830 हॉर्सपावर की ताकत पैदा करता है, जबकि तीनों इलेक्ट्रिक मोटरों के साथ मिलकर इस कार की कुल क्षमता लगभग 1050 हॉर्सपावर तक पहुंच जाती है। इसमें 8-स्पीड ड्यूल-क्लच ऑटोमैटिक गियरबॉक्स दिया गया है, जो चारों पहियों तक ताकत पहुंचाता है। कंपनी के अनुसार यह कार केवल 2.3 सेकेंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है। इसकी अधिकतम रफ्तार लगभग 330 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जा रही है। सीमित दूरी तक केवल इलेक्ट्रिक शक्ति पर चलने की क्षमता इस कार में 7.45 kWh क्षमता की बैटरी भी दी गई है। इसकी मदद से Ferrari 849 Testarossa कुछ दूरी तक केवल इलेक्ट्रिक शक्ति पर भी चल सकती है। कंपनी के अनुसार यह कार केवल इलेक्ट्रिक मोड में लगभग 16 से 25 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है। इससे कार के प्रदर्शन के साथ-साथ ईंधन की खपत को भी संतुलित करने में मदद मिलती है। आकर्षक और दमदार बाहरी बनावट नई Ferrari 849 Testarossa को बेहद आकर्षक और आधुनिक रूप में तैयार किया गया है। कार के सामने की ओर एल-आकार की एलईडी हेडलाइट्स दी गई हैं, जो बोनट पर मौजूद चमकदार काली पट्टी से जुड़ी हुई दिखाई देती हैं। यह बनावट फेरारी के पुराने लोकप्रिय मॉडलों से प्रेरित मानी जा रही है। इसके आगे के हिस्से में बड़ा हवा प्रवेश मार्ग और उभरा हुआ फ्रंट लिप दिया गया है, जो कार को अधिक आक्रामक रूप देता है। साइड प्रोफाइल में बड़े अलॉय व्हील्स, काले रंग की छत और पीछे की ओर बड़े हवा प्रवेश मार्ग इसे बेहद स्पोर्टी रूप देते हैं। कार के पिछले हिस्से में दो भागों वाला टेल सेक्शन, पतली एलईडी टेललाइट्स, ऊपर की ओर लगाया गया दोहरी एग्जॉस्ट पाइप और बड़ा डिफ्यूजर देखने को मिलता है। चालक पर केंद्रित आधुनिक केबिन Ferrari 849 Testarossa का केबिन पूरी तरह चालक को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें ऊंचा सेंटर कंसोल और पुल जैसी बनावट वाला डिवाइडर दिया गया है, जो दोनों स्पोर्ट्स सीटों को अलग करता है और अंदर बैठने पर एक खास स्पोर्टी अनुभव देता है। डैशबोर्ड में पारंपरिक टचस्क्रीन सिस्टम नहीं दिया गया है। इसके स्थान पर चालक के सामने लगभग 16 इंच का बड़ा डिजिटल डिस्प्ले मौजूद है, जिसमें वाहन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दिखाई देती है। साथ ही सामने बैठने वाले यात्री के लिए करीब 9 इंच की पतली स्क्रीन भी दी गई है। इसके अलावा इसमें वायरलेस Apple CarPlay और Android Auto जैसी कनेक्टिविटी सुविधाएं तथा 7-स्पीकर वाला ऑडियो सिस्टम भी दिया गया है। Ferrari की यह नई कार अपनी तेज रफ्तार, दमदार क्षमता और आधुनिक तकनीक के कारण भारत के प्रीमियम स्पोर्ट्स कार बाजार में खास आकर्षण का केंद्र बन सकती है।

छोटा निवेश, बड़ा फायदा! पोस्ट ऑफिस स्कीम से मिलेगा ₹90 हजार तक ब्याज

नई दिल्ली बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव और निवेश से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच अधिकांश लोग ऐसे विकल्प की तलाश करते हैं, जहां उनका पैसा सुरक्षित भी रहे और अच्छा रिटर्न भी मिल सके। ऐसे निवेशकों के लिए डाकघर की बचत योजनाएं एक भरोसेमंद विकल्प मानी जाती हैं। नेशनल डेस्क: बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव और निवेश से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच अधिकांश लोग ऐसे विकल्प की तलाश करते हैं, जहां उनका पैसा सुरक्षित भी रहे और अच्छा रिटर्न भी मिल सके। ऐसे निवेशकों के लिए डाकघर की बचत योजनाएं एक भरोसेमंद विकल्प मानी जाती हैं। इन्हीं योजनाओं में पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट स्कीम (POTD) इन दिनों काफी चर्चा में है। यह योजना भारत सरकार की संप्रभु गारंटी के साथ आती है, इसलिए इसमें निवेश को बेहद सुरक्षित माना जाता है। खास बात यह है कि इस योजना में निवेश करके बिना किसी बाजार जोखिम के अच्छा रिटर्न प्राप्त किया जा सकता है। बैंक एफडी जैसी योजना पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट स्कीम का ढांचा काफी हद तक बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) योजना जैसा है। इसमें निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार एक, दो, तीन या पांच साल की अवधि के लिए पैसा जमा कर सकते हैं। मौजूदा ब्याज दरों के अनुसार:     एक साल के लिए जमा राशि पर 6.9 प्रतिशत ब्याज मिलता है     दो और तीन साल की अवधि पर 7 प्रतिशत ब्याज मिलता है     पांच साल के निवेश पर 7.5 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जाता है 2 लाख के निवेश पर संभावित कमाई यदि कोई निवेशक इस योजना में पांच साल के लिए 2 लाख रुपये का निवेश करता है, तो मौजूदा 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर के हिसाब से पांच साल बाद उसका कुल फंड लगभग 2,89,990 रुपये हो सकता है। इसमें 2 लाख रुपये मूल निवेश होगा, जबकि करीब 89,990 रुपये ब्याज के रूप में मिल सकते हैं। यानी केवल ब्याज से ही लगभग 90 हजार रुपये की कमाई संभव है। ज्यादा निवेश पर ज्यादा फायदा अगर कोई व्यक्ति अधिक रकम निवेश करता है, तो उसे उसी अनुपात में अधिक रिटर्न भी मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई निवेशक पांच साल के लिए 5 लाख रुपये जमा करता है, तो अवधि पूरी होने पर उसे लगभग 2,24,974 रुपये ब्याज के रूप में मिल सकते हैं। इस तरह कुल राशि करीब 7,24,974 रुपये तक पहुंच सकती है। टैक्स में भी मिलती है राहत इस योजना का एक और बड़ा फायदा यह है कि पांच साल की अवधि वाली टाइम डिपॉजिट पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स छूट का लाभ भी मिलता है। निवेशक 1.5 लाख रुपये तक की राशि पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। खाता खोलना आसान पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट स्कीम में खाता खोलना भी काफी आसान है। इसमें न्यूनतम 1,000 रुपये से निवेश शुरू किया जा सकता है और अधिकतम निवेश की कोई सीमा तय नहीं है। निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार सिंगल या जॉइंट अकाउंट भी खुलवा सकते हैं। हर साल मिलने वाला ब्याज निवेशक के खाते में जुड़ता रहता है, जिससे समय के साथ निवेश की कुल राशि बढ़ती जाती है। सुरक्षित निवेश और स्थिर रिटर्न की वजह से यह योजना उन लोगों के लिए खास तौर पर उपयोगी मानी जाती है जो बिना जोखिम के अपनी बचत बढ़ाना चाहते हैं।