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ग्वालियर-चंबल में मौसम हुआ बेहद गर्म, 15 मार्च से गर्मी का असर और बढ़ेगा

भोपाल  मध्य प्रदेश में मार्च के दूसरे सप्ताह की शुरुआत के साथ ही गर्मी ने तेज तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। राज्य के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है, जबकि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में यह औसत से करीब 6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 15 मार्च के बाद गर्मी का असर और तेज हो सकता है। यह आज की ताज़ा ख़बरों में मौसम से जुड़ा बड़ा अपडेट माना जा रहा है। धार में सबसे अधिक 39 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज मंगलवार को प्रदेश के कई जिलों में तापमान 38 डिग्री के पार पहुंच गया। धार में सबसे अधिक 39 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इसके अलावा सागर में 38.9 डिग्री, रतलाम और नर्मदापुरम में 38.8 डिग्री, खजुराहो में 38.3 डिग्री, गुना में 38.1 डिग्री तथा दमोह और टीकमगढ़ में 38 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पांच बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर सबसे गर्म रहा, जहां पारा 37.2 डिग्री तक पहुंच गया। उज्जैन में 37 डिग्री, इंदौर में 36.8 डिग्री, जबलपुर में 36.6 डिग्री और भोपाल में 36.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। अधिकांश शहरों में अधिकतम तापमान 34 डिग्री से ऊपर बना हुआ है। हवा की दिशा बदलने से बढ़ी गर्मी मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में हवा की दिशा में बदलाव आया है। पहले जहां हवाएं उत्तर-पूर्व से आ रही थीं, वहीं अब पश्चिम और उत्तर-पश्चिम की ओर से चल रही हैं। इन हवाओं में नमी कम है और ये राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों से होकर मध्यप्रदेश तक पहुंचती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ रहा है। 15 मार्च के बाद मौसम में बदलाव संभव मौसम विभाग के मुताबिक 15 मार्च के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इसके असर से प्रदेश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में बादल छाने और हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई जा रही है।मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मार्च में लू चलने की संभावना नहीं है, लेकिन अप्रैल और मई में भीषण गर्मी पड़ सकती है। इस दौरान 15 से 20 दिनों तक हीट वेव का असर देखने को मिल सकता है। ग्वालियर-चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में भी तेज गर्मी पड़ने के संकेत हैं।  मंगलवार को प्रदेश के कई शहरों में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया। धार में सबसे अधिक 39 डिग्री तापमान दर्ज किया गया, जबकि सागर में 38.9 डिग्री, रतलाम और नर्मदापुरम में 38.8 डिग्री, खजुराहो में 38.3 डिग्री और गुना में 38.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। दमोह और टीकमगढ़ में भी पारा 38 डिग्री तक पहुंच गया। प्रदेश के लगभग सभी प्रमुख शहरों में अधिकतम तापमान 34 डिग्री या उससे ऊपर रिकॉर्ड किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर में तापमान 37.2 डिग्री, उज्जैन में 37 डिग्री, इंदौर में 36.8 डिग्री, जबलपुर में 36.6 डिग्री और भोपाल में 36.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च की शुरुआत में इतनी तेजी से तापमान बढ़ना सामान्य ट्रेंड से अलग है। मौसम विभाग के अनुसार, तापमान बढ़ने की मुख्य वजह हवा की दिशा में बदलाव है। फिलहाल प्रदेश में हवाएं उत्तर-पूर्व की बजाय पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा से आ रही हैं। इन हवाओं में नमी कम है और ये रेगिस्तानी क्षेत्रों से होकर आती हैं, जिससे तापमान में तेजी से वृद्धि हो रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च का मौसम संक्रमण और एलर्जी के लिहाज से संवेदनशील होता है। दिन में तेज गर्मी और सुबह-रात हल्की ठंड रहने के कारण सर्दी-जुकाम, एलर्जी और अस्थमा के मरीज बढ़ सकते हैं। डॉक्टरों ने खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को सुबह और देर रात ठंडी हवा से बचने की सलाह दी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 15 मार्च के बाद प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम में हल्का बदलाव भी देखने को मिल सकता है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्रों में बादल छाने और हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। हालांकि इससे गर्मी में ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस साल अप्रैल और मई के महीने सबसे अधिक गर्म रह सकते हैं। ग्वालियर, चंबल, सागर, रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की संभावना जताई गई है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग में भी गर्मी का असर तेज रहने का अनुमान है। पिछले वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में प्रदेश में दिन गर्म और रातें अपेक्षाकृत ठंडी रहती हैं, जबकि कभी-कभी बारिश भी होती है। इस बार भी ऐसा ही मौसम देखने को मिल सकता है, लेकिन शुरुआती दिनों में ही तापमान में तेजी से बढ़ोतरी ने लोगों को गर्मी का अहसास जल्दी करा दिया है।

बुध की बदली चाल का असर: 21 मार्च से इन राशियों को रहना होगा सतर्क

ज्योतिष शास्त के अनुसार, जब कोई ग्रह अपनी गति बदलता है तो उसका प्रभाव सभी राशियों के जीवन पर पड़ता है. इसी कड़ी में बुध ग्रह की चाल में बदलाव फिर से कुछ राशि वालों पर अलग- अलग प्रकार से प्रभाव डाल सकता है. आपको बता दें 26 फरवरी 2026 से बुध की उल्टी चाल यानी वक्री अवस्था शुरू हुई थी, जो 21 मार्च 2026 को समाप्त होने जा रही है. इस दिन से ही बुध फिर से सीधी चाल चलेंगे यानी मार्गी होने वाले हैं. मान्यता के अनुसार, बुध का मार्गी होना सामान्य रूप से शुभ माना जाता है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह कुछ राशियों के लिए चुनौतियां भी लेकर आ सकता है. आइए सबसे पहले समझते हैं बुध के व्रकी और मार्गी होने क्या राशियों पर क्या प्रभाव पड़ता है. बुध के मार्गी होने का ज्योतिषीय महत्व ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क, व्यापार, संचार, तकनीक और गणना का कारक ग्रह माना जाता है. जब बुध की चाल बदलती है तो इसका सीधा असर व्यक्ति की सोच, निर्णय क्षमता, बातचीत और कामकाज पर पड़ सकता है. वक्री अवस्था में जहां कई काम अटक सकते हैं, वहीं मार्गी होने पर अक्सर चीजें धीरे-धीरे सामान्य होने लगती हैं. हालांकि यदि ग्रह की स्थिति कमजोर हो या वह अशुभ प्रभाव में हो तो मार्गी अवस्था में भी कुछ राशियों के लिए तनाव और रुकावटें बनी रह सकती हैं. इन राशियों के लिए बढ़ सकती हैं परेशानियां! तुला राशि     तुला राशि के जातकों के लिए बुध की सीधी चाल कुछ मामलों में चुनौतीपूर्ण हो सकती है.     कार्यक्षेत्र में गलतफहमियां बढ़ सकती हैं.     सहकर्मियों के साथ संवाद में सावधानी रखें.     व्यापार से जुड़े लोगों को कागजी कार्यों में विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी.     आर्थिक फैसले सोच-समझकर लें. कुंभ राशि     कुंभ राशि वालों के लिए यह समय थोड़ा उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है.     कामकाज में अचानक बाधाएं आ सकती हैं.     योजनाएं पूरी होने में देरी हो सकती है.     तकनीकी या ऑनलाइन कार्यों में परेशानी आ सकती है.     यात्रा से जुड़े मामलों में भी विलंब संभव है. मीन राशि     मीन राशि के जातकों को इस दौरान मानसिक दबाव महसूस हो सकता है.     निर्णय लेने में असमंजस की स्थिति बन सकती है.     धन से जुड़े मामलों में सावधानी जरूरी है.     किसी बात को लेकर गलतफहमी या विवाद की स्थिति बन सकती है.     कामकाज में ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है.  

पंजाब विधानसभा में बच्चों की मोबाइल लत पर गंभीर चर्चा

चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा में बुधवार को बच्चों में बढ़ती मोबाइल और इंटरनेट मीडिया की लत का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। विधायक राणा इंद्र प्रताप सिंह ने काल अटेंशन नोटिस के जरिए सरकार का ध्यान इस गंभीर विषय की ओर दिलाते हुए कहा कि कम उम्र के बच्चों में मोबाइल फोन और इंटरनेट मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से उनके मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या पंजाब में भी बच्चों की ओर से इंटरनेट मीडिया के उपयोग को सीमित करने या इसके लिए उम्र सीमा तय करने पर विचार किया जा रहा है। राणा इंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी मात्रा में ऐसी सामग्री प्रसारित हो रही है जो बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं होती। इसके कारण अभिभावकों और शिक्षकों में चिंता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कई देशों और राज्यों ने इस खतरे को देखते हुए बच्चों के लिए इंटरनेट मीडिया के उपयोग को सीमित करने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इस मुद्दे पर जवाब देते हुए कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि यह केवल आईटी विभाग का मामला नहीं है, बल्कि ऐसा विषय है जिस पर हेल्थ, एजुकेशन, पुलिस और सोशल वेलफेयर विभाग सहित कई विभागों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार भी इस मुद्दे को गंभीरता से देख रही है और बच्चों के हित में आवश्यक कदमों पर विचार किया जा रहा है। कई देश इस पर बना चुके सख्त नियम अमन अरोड़ा ने कहा कि पूरी दुनिया में बच्चों पर इंटरनेट मीडिया के प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ रही है। अधिकतर इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अकाउंट बनाने की अनुमति नहीं देते, लेकिन इसके बावजूद बच्चे आसानी से इन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी वजह से कई देशों में सख्त नियम बनाने पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग को सीमित करने के नियमों पर विचार किया जा रहा है, जबकि अमेरिका के कुछ राज्यों—जैसे यूटा और आर्कांसस—में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के लिए अभिभावकों की अनुमति जरूरी करने जैसे कानून बनाए गए हैं। अमन अरोड़ा ने यह भी कहा कि भारत में भी इस दिशा में चर्चा शुरू हो चुकी है। कर्नाटक, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में स्कूलों में मोबाइल फोन के उपयोग को नियंत्रित करने और बच्चों में डिजिटल एडिक्शन को कम करने के लिए नीति बनाने पर विचार किया जा रहा है। कुछ राज्यों में स्कूलों के भीतर मोबाइल फोन के उपयोग पर पहले ही सख्ती की गई है। अत्यधिक गलत इस्तेमाल नुकसानदायक उन्होंने कहा कि नई तकनीक के फायदे और नुकसान दोनों होते हैं। इंटरनेट मीडिया के जरिए जहां जानकारी तक तेजी से पहुंच, शिक्षा के नए अवसर और दुनिया से जुड़ने की सुविधा मिलती है, वहीं इसका अत्यधिक और गलत इस्तेमाल बच्चों के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि सरकार के साथ-साथ समाज भी बच्चों को इसके जिम्मेदार उपयोग के लिए जागरूक करे। इस दौरान सेहत मंत्री डा बलबीर सिंह ने भी कहा कि यह विषय उनके विभाग से भी जुड़ा हुआ है क्योंकि मोबाइल और इंटरनेट मीडिया की बढ़ती लत बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि आज के समय में मोबाइल एडिक्शन एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, जिसके कारण बच्चों में एंग्जायटी, डिप्रेशन और स्लीप डिसऑर्डर जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। चाइल्ड साइकोलॉजी से जुड़े प्रशिक्षण के जरिए लोग हो रहे जागरुक डाॅ. बलबीर सिंह ने बताया कि सरकार इस समस्या से निपटने के लिए जिलों में मनोवैज्ञानिकों को प्रशिक्षण दे रही है ताकि जरूरत पड़ने पर बच्चों और उनके अभिभावकों को सही मार्गदर्शन मिल सके। इसके अलावा चाइल्ड साइकोलॉजी से जुड़े प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान सदस्यों ने कहा कि बच्चों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग को लेकर ठोस नीति और व्यापक जागरूकता अभियान चलाना समय की बड़ी जरूरत बन गया है।

सफलता से ठीक पहले क्यों रुक जाते हैं काम? प्रेमानंद महाराज से जानें कहां हो रही गलती

जीवन में कई बार आपको भी ऐसा लगा होगा कि आपके हर काम बनते हुए भी बिगड़ जाते हैं। अक्सर होता है कि कोई काम बिल्कुल अंत तक पहुंच जाता है और अचानक सब कुछ बिगड़ जाता है। कई बार तो चीजें शुरू होते ही खराब हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में समझ नहीं आता कि भाग्य को दोष दें या कर्मों को। प्रेमानंद महाराज से पूछा गया सवाल प्रेमानंद जी महाराज के सत्संग में आए एक श्रद्धालु का भी ठीक यही प्रश्न था। उन्होंने कहा कि महाराज जी मेरे बनते हुए काम आखिर में क्यों बिगड़ जाते हैं। ऐसा बार-बार होने के पीछे आखिर क्या वजह है। इसपर प्रेमानंद जी महाराज का उत्तर हर किसी को जरूर जानना चाहिए। पूर्व कर्मों के फल हैं प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि ऐसा होने के पीछे सबसे बड़ी वजह आप पूर्व जन्मों के पाप होते हैं। ये पूर्व के पाप ही हमें इस जीवन में भी दुख का अनुभव कराते हैं। वहीं हमारे अच्छे कर्म हमें सफलता प्रदान करते हैं। सफलता की ओर ले जाती हैं ये चीजें महाराज जी कहते हैं कि पूर्व जन्म के पाप ही असफलता का कारण होते हैं। इन्हें नष्ट करने का एक ही उपाय है कि आप सद्मार्ग की ओर बढ़ें। प्रभु का नाम जप करें, कीर्तन करें, अच्छे इंसान बनें, तीर्थयात्रा करें और लोगों की सेवा करें। ये सभी चीजें आपके पाप कर्म नष्ट कर के सफलता की ओर ले जाती हैं। आध्यात्म से जुड़ना है जरूरी प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि इसी कारण आध्यात्म से जुड़ना बहुत जरूरी है। अन्यथा आपकी कामनाएं तो रहेंगी लेकिन वो कभी पूरी नहीं होंगी। जिस वजह से शोक, दुख, चिंता, भय आदि लगे ही रहेंगे। मन की शांति है जरूरी प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि मन की शांति बहुत जरूरी है। अगर कोई इंसान गरीब भी है लेकिन धर्म के रास्ते पर चलता है, तो आप देखेंगे कि वो शांत है और जीवन में खुश है। वहीं अगर आप धनवान भी हैं लेकिन वासनाओं में लिप्त हैं, तो आपका जीवन हमेशा दुख, शोक, पीड़ा, चिंता आदि से भरा रहेगा। भजन से ही संभव है मन की शांति महाराज जी कहते हैं कि मन की शांति सिर्फ भजन से ही संभव है। आप धन, पद और प्रतिष्ठा से सब कुछ खरीद सकते हैं लेकिन मन की शांति नहीं। इसलिए अच्छे कर्म करें, भगवान का भजन करें; सफलता और सुख-शांति अपने आप ही आपके जीवन में प्रवेश करेंगे।

इनकम टैक्स का बड़ा एक्शन, माइनिंग बिजनेसमैन दिलीप गुप्ता के ठिकानों पर रेड, करोड़ों के दस्तावेज खंगाले जा रहे

भोपाल  राजधानी भोपाल में बुधवार सुबह उस समय हलचल मच गई जब आयकर विभाग की विशेष टीम ने शहर के बड़े माइनिंग कारोबारी दिलीप गुप्ता से जुड़े ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू कर दी। दिल्ली से पहुंची आयकर विभाग की टीम ने तड़के चूना भट्टी क्षेत्र में स्थित उनके आवास और एमपी नगर इलाके में मौजूद व्यावसायिक कार्यालयों पर कार्रवाई की। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह अभियान केवल भोपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि विभाग की अलग-अलग टीमें कानपुर, छतरपुर और दिल्ली समेत कई शहरों में गुप्ता से जुड़े प्रतिष्ठानों और कार्यालयों की जांच कर रही हैं, जिससे पूरे मामले को बड़े पैमाने की समन्वित कार्रवाई माना जा रहा है। आयकर विभाग की इस कार्रवाई के पीछे मुख्य रूप से टैक्स चोरी और वित्तीय लेन-देन में संभावित अनियमितताओं की जांच को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। विभाग को लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे कि माइनिंग कारोबार से होने वाली आय का पूरा विवरण आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरण अपने कब्जे में लिए हैं। इन सभी रिकॉर्ड्स की जांच कर वास्तविक आय और घोषित आय के बीच अंतर का आकलन किया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की कर चोरी या वित्तीय हेरफेर का पता लगाया जा सके। जांच एजेंसियों के रडार पर पहले भी रह चुके है दिलीप गुप्ता गौरतलब है कि दिलीप गुप्ता पहले भी जांच एजेंसियों के रडार पर रह चुके हैं। पिछले वर्ष नवंबर में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने भी उनके ठिकानों पर कार्रवाई की थी, जिसमें करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की गई थी। उस समय तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, जिंदा कारतूस और कई संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज बरामद होने की जानकारी सामने आई थी। आरोप लगाए गए थे कि निवेश योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये जुटाकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए शेयर आवंटन किया गया। अब आयकर विभाग की नई कार्रवाई ने इस मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है। अधिकारियों से सांठगांठ की जानकारी मौजूदा जांच में अधिकारियों द्वारा बेनामी संपत्तियों और हवाला से जुड़े लेन-देन के पहलुओं की भी जांच की जा रही है। आयकर विभाग की टीम दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन कर रही है और घर के सदस्यों तथा कार्यालय के कर्मचारियों से पूछताछ भी की जा रही है। छापेमारी के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और जांच पूरी होने तक बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। इस कार्रवाई के बाद भोपाल के व्यापारिक और माइनिंग क्षेत्र में भी हलचल देखी जा रही है, क्योंकि कारोबारियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में और भी जांच या खुलासे सामने आ सकते हैं। माइनिंग सेक्टर में सक्रिय दिलीप गुप्ता के खिलाफ यह कार्रवाई प्रदेश में आर्थिक अनियमितताओं पर नियंत्रण के प्रयासों के रूप में देखी जा रही है। हालांकि आयकर विभाग ने अभी तक आधिकारिक रूप से जब्त की गई संपत्तियों या दस्तावेजों का विस्तृत विवरण जारी नहीं किया है, लेकिन जिस स्तर पर यह अभियान चलाया जा रहा है उससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि जांच में बड़े वित्तीय लेन-देन और संभावित अघोषित संपत्ति से जुड़े तथ्य सामने आ सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे किस प्रकार की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  

स्वास्थ्य मुख्यालय में तुरंत मदद के लिए दो नर्सें और एंबुलेंस रहेगी तैनात

पटना. स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को बेहतर चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके तहत मुख्यालय में दो प्रशिक्षित ग्रेड-ए नर्सों की तैनाती की जाएगी। इस संबंध में विभाग की ओर से आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के उप सचिव विनोद कुमार पाठक ने इस संबंध में असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, पटना को पत्र भेजा है। पत्र में मुख्यालय में चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है। साथ ही इस व्यवस्था को शीघ्र लागू करने का अनुरोध भी किया गया है। कार्यालय अवधि में रहेंगी तैनात नर्सें पत्र के अनुसार स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय में दो प्रशिक्षित ग्रेड-ए नर्सों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी। ये नर्सें कार्यालय अवधि के दौरान वहां मौजूद रहेंगी। उनका मुख्य कार्य अधिकारियों और कर्मचारियों की दैनिक और आकस्मिक स्वास्थ्य जांच करना होगा। आपात स्थिति में मिलेगी तुरंत मदद स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य यह है कि किसी भी कर्मचारी या अधिकारी की तबीयत अचानक बिगड़ने पर तुरंत प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध हो सके। इसके लिए मुख्यालय परिसर में ही स्वास्थ्य सहायता की व्यवस्था की जा रही है। इससे आपात स्थिति में इलाज में देरी की संभावना कम हो जाएगी। सचिवालय के पास तैयार रहेगी एंबुलेंस इसके अलावा आपातकालीन स्थिति को ध्यान में रखते हुए सचिवालय के आसपास एक एंबुलेंस भी तैयार रखने का निर्देश दिया गया है। जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस के माध्यम से मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा। इस व्यवस्था से कर्मचारियों को त्वरित चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। शीर्ष प्राथमिकता पर लागू होगी व्यवस्था पत्र में इस पूरी व्यवस्था को शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर लागू करने का अनुरोध किया गया है। विभाग का मानना है कि इससे मुख्यालय में कार्यरत कर्मियों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिलेगी। साथ ही जरूरत पड़ने पर मुख्यालय में ही तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।

कांकेर में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने ली नेशनल लोक अदालत की तैयारी बैठक

कांकेर. आगामी शनिवार 14 मार्च को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत की तैयारियों एवं अधिक से अधिक प्रकरणों के निराकरण के लिए जिला न्यायालय कांकेर में बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री संजीव कुमार टामक द्वारा की गई। बैठक में बैंक, नगरपालिका, विद्युत एवं दूरसंचार विभाग के अधिकारियों से न्यायालयों में लंबित प्रकरणों को अधिकतम संख्या में राजीनामा, समझौते के माध्यम से नेशनल लोक अदालत में निराकृत कराने पर विशेष बल दिया गया। प्रधान जिला न्यायाधीश द्वारा संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि जिन प्रकरणों में समझौते की संभावना है, उनकी सूची शीघ्र तैयार कर संबंधित न्यायालयों में प्रस्तुत करें, ताकि पक्षकारों को समय पर नोटिस जारी किया जा सके। साथ ही प्री-लिटिगेशन प्रकरणों को भी समय पर प्रस्तुत करने हेतु विभागीय अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए, जिससे अधिकतम मामलों का त्वरित एवं प्रभावी निराकरण संभव हो सके। बैठक में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कांकेर की सचिव श्रीमती शांति प्रभु जैन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

बिहार में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए होगी 1080 नए डॉक्टरों की नियुक्ति

पटना. बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। सात निश्चय-3 (2025-2030) के तहत प्रखंड स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए नेत्र रोग और ईएनटी (कान-नाक-गला) के 1080 विशेषज्ञ चिकित्सा पदाधिकारियों के अतिरिक्त पद सृजित करने का प्रस्ताव सरकार ने स्वीकृत किया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य के 534 प्रखंड स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ 6 अन्य सीएचसी, यानी कुल 540 केंद्रों में यह व्यवस्था की जाएगी। प्रत्येक केंद्र पर एक नेत्र रोग विशेषज्ञ और एक ईएनटी विशेषज्ञ को तैनात किया जाएगा। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को इन रोगों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था को किया जा रहा मजबूत उल्लेखनीय है कि कि भारतीय लोक स्वास्थ्य मानक (आइपीएचएस) के अनुरूप सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पहले से ही जनरल सर्जन, फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ और एनेस्थेटिस्ट के पद सृजित हैं। अब सात निश्चय-3 के तहत स्वास्थ्य सेवाओं के दायरे को बढ़ाते हुए नेत्र रोग और ईएनटी विशेषज्ञों की भी नियुक्ति की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को आंख तथा कान-नाक-गला से संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा और उन्हें बेहतर व गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा अपने ही प्रखंड में उपलब्ध हो सकेगी।

हरियाणा सरकार ने गेहूं की 160 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाई MSP

चंडीगढ़. हरियाणा में गेहूं की खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय हो गया है। किसानों को पिछले साल से इस बार 160 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा मिलेंगे। रबी-2026 सीजन में गेहूं के लिए सरकार ने एमएसपी 2585 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है। पिछली बार 2425 रुपए प्रति क्विंटल एमएसपी था। सूबे में एक अप्रैल से सरकार गेहूं की खरीद करने जा रही है। गेहूं खरीद की तैयारियों व लक्ष्य आदि मामलों को लेकर शनिवार को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के मंत्री राजेश नागर की उपस्थिति में बैठक होगी। आगामी निर्णय इसी में लिए जाएंगे। 560 मंडियों में होगी खरीद हरियाणा में रबी फसलों की खरीद की तैयारियां शुरू कर दी हैं। फिलहाल 560 मंडियों और खरीद केंद्रों पर व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। रबी-2026 की खरीद प्रक्रिया को लेकर हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने मंडी सचिवों और संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षण देना भी शुरू कर दिया है। खरीद व्यवस्था की तैयारियों की समीक्षा के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेश नागर ने शनिवार को अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में खरीद की तिथि, लक्ष्य, भंडारण की उपलब्धता और मंडियों में व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी। गेटपास व्यवस्था में होगा बदलाव इस सीजन में किसानों के लिए गेटपास व्यवस्था में बदलाव करने की भी तैयारी है। फिलहाल योजना है कि जियो-फेंसिंग तकनीक के जरिए किसानों के गेटपास जारी किए जाएं। खरीफ-2025 के दौरान किसानों को घर बैठे गेटपास काटने की सुविधा दी गई थी, लेकिन धन बेचने के बाद सरकार ने जियो-फेंसिंग जैसे विकल्प अपनाने का निर्णय लिया है। पारदर्शिता के लिए इस बार सख्त नियम इस बार सरसों की खरीद के लिए एमएसपी पोर्टल पर पंजीकृत किसानों को ही टोकन नंबर दिया जाएगा। किसान के अंगूठे से बारकोड स्कैन किया जाएगा। गेटपास जारी करने के लिए क्यूआर कोड मंडी गेट पर ही जनरेट किया जाएगा। किसान जिस वाहन में सरसों लेकर आएगा, उसका नंबर दर्ज करना भी अनिवार्य होगा, अन्यथा गेटपास जारी नहीं किया जाएगा। यह सभी नियम फसल खरीद को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू किए जा रहे हैं। नई अनाज मंडी में 28 मार्च से सरसों की खरीद शुरू होने की संभावना है।

नवरात्रि से पहले कर लें ये जरूरी सफाई: इन 5 चीजों को घर में रखने से रूठ जाती हैं मां दुर्गा

चैत्र नवरात्रि केवल उपवास और पूजा-पाठ का पर्व नहीं है, बल्कि यह अपने अंतर्मन और परिवेश को शुद्ध करने का एक पावन अवसर भी है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिनों में आदिशक्ति मां दुर्गा स्वयं धरती पर पधारती हैं और अपने भक्तों के घर में वास करती हैं। माता रानी के स्वागत के लिए केवल मन की शुद्धि ही काफी नहीं है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमारे घर में रखी कुछ चीजें नकारात्मक ऊर्जा का संचय करती हैं, जो सुख-समृद्धि के मार्ग में अदृश्य बाधाएं उत्पन्न कर सकती हैं। यदि घर में वास्तु दोष हो या भारी मात्रा में नकारात्मक ऊर्जा जमा हो, तो कठिन पूजा-अर्चना के बाद भी वह शुभ फल प्राप्त नहीं हो पाता जिसकी हम कामना करते हैं। 19 मार्च 2026 से शुरू हो रहे नव-संवत्सर और चैत्र नवरात्रि से पहले यह अत्यंत आवश्यक है कि हम अपने आशियाने को उन वस्तुओं से मुक्त करें जो दरिद्रता और अशांति को निमंत्रण देती हैं। घर के कोनों में छिपा कबाड़ या टूटी-फूटी वस्तुएं न केवल धन के प्रवाह को रोकती हैं, बल्कि परिवार के सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालती हैं। तो आइए जानते हैं, वास्तु के उन 5 खास नियमों के बारे में जिन्हें अपनाकर आप नवरात्रि से पहले अपने घर का कायाकल्प कर सकते हैं। खंडित मूर्तियां या फटे हुए धार्मिक चित्र अक्सर हम अनजाने में घर के मंदिर में ऐसी मूर्तियां रखे रहते हैं जो कहीं से खंडित होती हैं या देवी-देवताओं के चित्र फटे हुए होते हैं। वास्तु के अनुसार, ऐसी मूर्तियां घर में दुख और अशांति का कारण बनती हैं। नवरात्रि शुरू होने से पहले इन्हें पूरे सम्मान के साथ किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें या पीपल के पेड़ के नीचे रख आएं। खराब या बंद पड़ी घड़ियां वास्तु में रुकी हुई घड़ी को 'ठहरे हुए भाग्य' का प्रतीक माना जाता है। बंद पड़ी घड़ियां घर की प्रगति को रोकती हैं और नकारात्मक ऊर्जा पैदा करती हैं। यदि आपके घर में कोई ऐसी घड़ी है जो काफी समय से बंद है या टूटी हुई है, तो उसे तुरंत ठीक कराएं या घर से बाहर निकाल दें। टूटे हुए कांच और बर्तन टूटे हुए शीशे या चटके हुए बर्तन घर में दरिद्रता (गरीबी) को न्योता देते हैं। नवरात्रि के दौरान माता का भोग लगाने के लिए साफ और अखंडित बर्तनों का ही उपयोग होना चाहिए। इसलिए, रसोईघर या श्रृंगार दान में रखे टूटे हुए कांच के सामान को हटाना ही श्रेयस्कर है। फटे-पुराने जूते और चप्पल वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार या अलमारी के नीचे रखे फटे-पुराने जूते-चप्पल नकारात्मकता का सबसे बड़ा स्रोत होते हैं। यह शनि दोष का भी कारण बन सकते हैं। नवरात्रि से पहले घर के कोनों की सफाई करें और जो जूते उपयोग में नहीं हैं, उन्हें हटा दें ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे। कबाड़ और बेकार का सामान घर की छत या स्टोर रूम में रखा पुराना कबाड़, जंग लगा लोहा या रद्दी कागज मानसिक तनाव का कारण बनते हैं। माता अंबे की कृपा पाने के लिए घर के वातावरण को हल्का और खुला रखना जरूरी है। कबाड़ हटाने से घर में 'प्राण ऊर्जा' का संचार बढ़ता है और आर्थिक तंगी दूर होती है।