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झारखंड की हेमंत सरकार 20 हजार करोड़ का निवेश लाकर बढ़ाएगी रोजगार

रांची. झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को द्वितीय पाली में श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग व उद्योग विभाग के कटौती प्रस्ताव पर चर्चा हुई। डुमरी विधानसभा से झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के विधायक जयराम कुमार महतो ने सदन में उपरोक्त विभाग के बजट में कटौती का प्रस्ताव लाया था। सदन में चर्चा के बाद श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के 1168.73 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हो गया। सरकार के उत्तर में विभागीय मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि रोजगार, नौकरी व श्रमिकों के हित में हेमंत सोरेन की सरकार बेहतर कार्य कर रही है। हर हाथ को काम, हर चेहरे पर मुस्कान, हेमंत सोरेन की सरकार का संकल्प है। उसे पूरा करने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। उनकी सरकार राज्य में 20 हजार करोड़ का निवेश ला रही है, ताकि रोजगार को बढ़ावा मिल सके। राज्य में औद्योगिक विकास पर भी काम हो रहा है, ताकि यहां के लोगों को रोजगार मिल सके। सरकार ने गिनाए काम मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में जनवरी तक तीन लाख 89 हजार 568 निर्माण श्रमिकों का निबंधन किया गया है। झारखंड भवन व अन्य बोर्ड के माध्यम से 277582 निबंधित लाभुकों को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करने के लिए कुल 167.93 करोड़ रुपये का लाभ वितरित किया गया है। श्रमाधान पोर्टल पर अब तक निबंधित कुल असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की संख्या 15 लाख 57 हजार 373 है, जिन्हें विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करने के लिए 31 जनवरी 2026 तक कुल 83919 श्रमिकों को कुल 58 .19 करोड़ रुपये के समतुल्य योजनाओं का लाभ दिया गया है। बाल श्रमिकों की विमुक्ति के लिए अभियान चलाया जा रहा है और अब तक 80 बाल श्रमिकों को विमुक्त कराया गया है। इनमें से 22 बाल श्रमिकों का नामांकन विभिन्न विद्यालयों में कराया गया है, शेष के नामांकन की कार्रवाई चल रही है। उनके माता-पिता को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में 273 प्रवासी मजदूरों के आश्रितों को उनकी मृत्यु के बाद 225.50 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई है। सामान्य मृत्यु की स्थिति में 219 श्रमिकों के पार्थिव शरीर को पैतृक आवास तक लाने के लिए 106.55 लाख रुपये आश्रितों को सहायता दी गई है। चालू वित्तीय वर्ष में विदेश में दुर्घटना में छह मजदूर की मृत्यु होने पर उनके आश्रित को विभाग ने 30 लाख रुपये का अनुदान दिया। बेरोजगार युवकों को निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों में रोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 302 भर्ती कैंपों एवं 95 रोजगार मेलों का आयोजन कर 14748 युवाओं को रोजगार के लिए चयन किया गया। सीएम पर टिप्पणी को संसदीय कार्य मंत्री ने बताया गलत कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधायक जयराम महतो ने कहा कि धनबाद की एक सभा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा था कि अगर निजी संस्थान नौकरी नहीं देते हैं, तो लोग उसपर कब्जा कर लें। जयराम महतो ने कहा कि एक विधायक कहें तो शोभा देता है, लेकिन मुख्यमंत्री का पद एक शक्तिशाली पद है। उन्हें तमाम अधिकार प्राप्त है। उनका यह संबोधन उनके पद की गरिमा के विपरीत है। इसपर संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री से संबंधित इस तरह का कोई सबूत जयराम महतो के पास नहीं है, इसलिए इसे सदन की कार्यवाही से हटाया जाए। बाद में जयराम महतो ने इंटरनेट मीडिया से संबंधित फुटेज व छपी खबरों से संबंधित कतरन उन्हें मोबाइल पर भेजने का दावा किया। इन विधायकों ने भी रखी अपनी बातें कटौती प्रस्ताव के पक्ष में विधायक आलोक कुमार चौरसिया, जनार्दन पासवान, रागिनी सिंह व सरयू राय ने अपनी बात रखी। वहीं, कटौती प्रस्ताव के विपक्ष में व सरकार के पक्ष में विधायक दशरथ गगराई, प्रदीप यादव, सुरेश पासवान, अरुप चटर्जी, सुदीप गुड़िया व जगत मांझी ने अपनी बात रखी। विधायक सुदीप गुड़िया ने खूंटी, रनिया कोरिडोर को विकसित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि पर्यटन के साथ-साथ रोजगार भी बढ़ेगा। सरयू राय ने कहा कि यहां उद्योगों के विकास के लिए पर्याप्त संसाधन है। यहां के खनिज से दूसरे राज्यों में उद्योग-धंधे चल रहे हैं। सरकार को इसपर ध्यान देना चाहिए। उद्योग लगने से यहां के श्रमिकों को यहीं पर रोजगार मिलेगा। विधायक प्रदीप यादव ने भी कहा कि नए उद्योगों को लाकर सरकार झारखंड की बेरोजगारी दूर कर सकती है।

त्योहार सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हों, समाज विरोधी गतिविधियों व नई परंपरा की अनुमति नहीं: मुख्यमंत्री

त्योहारों और पुलिस भर्ती परीक्षा के दृष्टिगत मुख्यमंत्री सख्त, कानून-व्यवस्था व व्यवस्थाओं पर विशेष सतर्कता के निर्देश त्योहार सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हों, समाज विरोधी गतिविधियों व नई परंपरा की अनुमति नहीं: मुख्यमंत्री एसआई भर्ती परीक्षा में शामिल होंगे 15.75 लाख अभ्यर्थी, परीक्षा की शुचिता से कोई समझौता नहीं: मुख्यमंत्री बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के आवागमन को देखते हुए सुचारु रहे ट्रैफिक व्यवस्था, कहीं जाम या अव्यवस्था न हो: मुख्यमंत्री प्रत्येक परीक्षा केंद्र के बाहर पीआरवी-112 की तैनाती सुनिश्चित हो, सोशल मीडिया पर सतत निगरानी रखी जाए: मुख्यमंत्री नवरात्र के दौरान प्रमुख शक्तिपीठों में सुगम दर्शन, सुरक्षा, स्वच्छता व पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित हो: मुख्यमंत्री प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति और वितरण सामान्य, कहीं भी अभाव नहीं कहीं भी किसी प्रकार की घबराहट या कृत्रिम संकट की स्थिति न बने, जमाखोरी व कालाबाजारी पर होगी सख्त कार्रवाई: मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को आगामी पर्व-त्योहारों, उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा तथा अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों के दृष्टिगत कानून-व्यवस्था एवं प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सतर्कता और समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 13 मार्च को अलविदा की नमाज, 14-15 मार्च को उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा सब-इंस्पेक्टर एवं समकक्ष पदों की लिखित परीक्षा, 19 मार्च से चैत्र नवरात्र तथा 20-21 मार्च को ईद-उल-फितर मनाए जाने की संभावना है। ऐसे में यह अवधि कानून-व्यवस्था की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। सभी अधिकारी पूरी सतर्कता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हों। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की नई परंपरा शुरू करने की अनुमति न दी जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी धार्मिक कार्यक्रम के कारण आमजन को असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि समाज-विरोधी अथवा राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए। एसआई भर्ती परीक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 14 और 15 मार्च को प्रदेश के 1090 परीक्षा केंद्रों पर चार पालियों में परीक्षा आयोजित होगी, जिसमें 15 लाख 75 हजार से अधिक अभ्यर्थी पंजीकृत हैं। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के अन्य जिलों से आने की संभावना को देखते हुए प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए, ताकि कहीं भी जाम या अव्यवस्था की स्थिति न बने। उन्होंने कहा कि परीक्षा की शुचिता, और गोपनीयता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। सेक्टर मजिस्ट्रेट और स्टेटिक मजिस्ट्रेट पूरी जिम्मेदारी के साथ तैनात रहें तथा इंटेलिजेंस तंत्र पूरी तरह सक्रिय और सतर्क रहे। परीक्षा से पूर्व सभी जिलों में व्यवस्थाओं का पूर्वाभ्यास कराया जाए तथा सोशल मीडिया पर सतत निगरानी रखी जाए, ताकि किसी भी अफवाह या भ्रामक सूचना का तत्काल खंडन किया जा सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक परीक्षा केंद्र के बाहर पीआरवी-112 की गाड़ी अनिवार्य रूप से तैनात रहे और जिला प्रशासन भर्ती बोर्ड के साथ समन्वय बनाकर परीक्षा को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराए। चैत्र नवरात्र की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देवीपाटन मंदिर (बलरामपुर), शाकुम्भरी देवी (सहारनपुर), मां विंध्यवासिनी धाम (मीरजापुर), ललिता देवी (सीतापुर) सहित प्रमुख शक्तिपीठों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है। अयोध्या में 27 मार्च को रामनवमी के अवसर पर देशभर से श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम दर्शन, पेयजल, स्वच्छता और भीड़ प्रबंधन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नवरात्र के अवसर पर नगरों और गांवों में मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों के आसपास विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाए तथा आवश्यकतानुसार अतिरिक्त स्वच्छताकर्मी तैनात किए जाएं। पुलिस स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी भीड़ प्रबंधन और फुट पेट्रोलिंग की कार्ययोजना लागू करे। मुख्यमंत्री ने मीरजापुर, बलरामपुर, सीतापुर, अयोध्या, मथुरा और सहारनपुर के जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान से तैयारियों की जानकारी भी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 19 मार्च को ही माननीय राष्ट्रपति जी का अयोध्या और मथुरा आगमन प्रस्तावित है। इसके दृष्टिगत सभी आवश्यक प्रोटोकॉल व्यवस्थाएं समय से सुनिश्चित कर ली जाएं। मुख्यमंत्री ने हालिया वैश्विक परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में पेट्रोल- डीजल की उपलब्धता की समीक्षा भी की। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि वर्तमान में प्रदेश में कहीं भी पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। आपूर्ति और वितरण सामान्य है। मुख्यमंत्री ने खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो। कहीं भी किसी प्रकार की घबराहट या कृत्रिम संकट की स्थिति न बनने पाए। खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारी फील्ड में उतर कर निरीक्षण करते रहें। मुख्यमंत्री ने जमाखोरी और कालाबाजारी पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, अपर पुलिस महानिदेशक (जोन), पुलिस आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक (रेंज), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक सहित शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

ईंधन को लेकर राहत: छत्तीसगढ़ में गैस और पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त उपलब्धता

छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस एवं डीजल-पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक, आपूर्ति व्यवस्था पर सतत निगरानी के निर्देश खाद्य सचिव श्रीमती रीना कंगाले ने आयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर दिए आवश्यक दिशानिर्देश शिकायतों के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-3663 जारी रायपुर छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस तथा डीजल-पेट्रोल की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा के लिए आज मंत्रालय महानदी भवन में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने सभी ऑयल कंपनी के अधिकारियों के साथ बैठक कर राज्य में घरेलू एलपीजी गैस तथा डीजल-पेट्रोल की उपलब्धता एवं आपूर्ति व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य में संचालित सभी 5 एलपीजी बॉटलिंग प्लांटों में एलपीजी गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और घरेलू गैस की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है। इस अवसर पर संचालक खाद्य एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को राज्य में एलपीजी गैस की दैनिक आपूर्ति और वितरण व्यवस्था पर नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए गए, ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। बैठक में ऑयल कंपनी के अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि कमर्शियल एलपीजी सिलेण्डर वर्तमान में केवल विशेष अत्यावश्यक संस्थाओं, जैसे अस्पतालों एवं शैक्षणिक संस्थाओं को ही सप्लाई किए जा रहे हैं। इस पर खाद्य सचिव श्रीमती रीना कंगाले ने निर्देशित किया कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों की परीक्षाएँ चल रही हैं, इसलिए शैक्षणिक संस्थाओं एवं छात्रावासों को गैस सिलेण्डर की आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाए। बैठक के दौरान सचिव श्रीमती कंगाले ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर 15 प्रतिशत कमर्शियल सप्लाई होटलों आदि को भी दिए जाने पर विचार किया जाए, ताकि आवश्यक सेवाओं से जुड़े प्रतिष्ठानों को भी सीमित स्तर पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही जिलों में एलपीजी गैस के दुरुपयोग तथा अवैध गैस रिफिलिंग की रोकथाम के लिए भी कड़े निर्देश दिए गए। इस संबंध में जिला प्रशासन को आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या कालाबाजारी को रोका जा सके। बैठक में राज्य में डीजल, पेट्रोल एवं सीएनजी गैस की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। ऑयल कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि राज्य के तीनों डीजल-पेट्रोल डिपो में पर्याप्त मात्रा में स्टॉक उपलब्ध है। इस पर संचालक खाद्य एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि डीजल और पेट्रोल की दैनिक आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था पर भी नियमित निगरानी रखी जाए। खाद्य सचिव श्रीमती कंगाले ने राज्य के उपभोक्ताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रदेश में एलपीजी गैस तथा डीजल-पेट्रोल की उपलब्धता पर्याप्त मात्रा में है और इन पेट्रोलियम पदार्थों की किसी प्रकार की कमी या शॉर्टेज नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं को गैस एजेंसियों के माध्यम से गैस सिलेण्डर की आपूर्ति नियमानुसार नियमित रूप से की जा रही है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायत या जानकारी के लिए उपभोक्ता टोल फ्री कॉल सेंटर नंबर 1800-233-3663 पर संपर्क कर सकते हैं।

बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को मिलेगा पौष्टिक आहार, कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को मिलेगी मजबूती

रेसिपी आधारित पुष्टाहार व्यवस्था लागू करने वाला पहला राज्य बनेगा उत्तर प्रदेश बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को मिलेगा पौष्टिक आहार, कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को मिलेगी मजबूती गुणवत्तापूर्ण टेक होम राशन की आपूर्ति के लिए 301.19 करोड़ रुपये का फंड मंजूर पुष्‍टाहार वितरण हेतु चेहरा पहचान प्रणाली (फेस रिकग्निशन सिस्टम) होगा लागू, धांधली पर लगेगी रोक लखनऊ  योगी सरकार ने बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं के बेहतर पोषण के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में अप्रैल से रेसिपी आधारित अनुपूरक पुष्टाहार की नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। भारत सरकार की गाइडलाइन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत लागू की जा रही इस व्यवस्था के साथ उत्तर प्रदेश ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा। अनुपूरक पुष्‍टाहार वितरण हेतु चेहरा पहचान प्रणाली (फेस रिकग्निशन सिस्टम) लागू की जाएगी जिसके क्रम में प्रदेश में अनुपूरक पोषाहार का ऑफलाइन वितरण अमान्य कर केवल एफआरएस प्रणाली से ही वितरण मान्य किया गया है। इससे पुष्टाहार वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।  पौष्टिक भोजन से खिलेंगे नौनिहाल नई व्यवस्था के तहत प्रदेश में सात श्रेणी के लाभार्थियों को ध्यान में रखकर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से रेसिपी आधारित पुष्टाहार तैयार कर सीधे आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। जिन जिलों या परियोजनाओं में इसकी व्यवस्था नहीं होगी, वहां नैफेड के जरिए आंगनबाड़ी केंद्रों तक आपूर्ति की जाएगी। सरकार ने अलग अलग आयु वर्ग के बच्चों और महिलाओं के लिए अलग भोजन तय किया है। छह माह से एक वर्ष तक के बच्चों को आटा-बेसन का हलवा (मीठा) दिया जाएगा। एक से तीन वर्ष तक के बच्चों को भी आटा-बेसन हलवा (मीठा) मिलेगा, जबकि तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को आटा-बेसन बर्फी (मीठा) और दलिया-मूंग-सोया खिचड़ी (नमकीन) दी जाएगी। गर्भवती और धात्री महिलाओं को आटा-बेसन-सोया बर्फी और दलिया-मूंग-दाल खिचड़ी उपलब्ध कराई जाएगी। अतिकुपोषित बच्चों को विशेष आहार  अतिकुपोषित बच्चों के लिए पौष्टिक आहार का प्रावधान रखा गया है। इसके अंतर्गत 06 माह से 01 वर्ष तक के बच्चों को पौष्टिक हलवा, 01 वर्ष से 03 वर्ष तक के बच्चों को पौष्टिक हलवा “बाल संजीवनी” तथा 03 वर्ष से 06 वर्ष तक के बच्चों को पौष्टिक हलवा एवं पौष्टिक दलिया उपलब्ध कराया जाएगा। यह रेसिपी आधारित व्यवस्था बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को संतुलित और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। रेसिपी के पोषण मानकों में भारत सरकार के मानकों के अनुरूप कैलोरी और प्रोटीन के साथ-साथ 11 अन्य आवश्यक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स को भी शामिल किया गया है। सरकार ने 301.19 करोड़ रुपये का फंड किया स्वीकृत इस व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने वायबिलिटी गैप फंड भी मंजूर किया है। प्रदेश में अनुपूरक पुष्टाहार की आपूर्ति वर्ष 2017 के कॉस्ट नॉर्म्स पर की जा रही है। इसके कारण राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) के अंतर्गत रेसिपी आधारित पुष्टाहार का उत्पादन करने वाली इकाइयों को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा था। लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण टेक होम राशन (टीएचआर) उपलब्ध कराते हुए इसकी गुणवत्ता पर किसी प्रकार का समझौता न हो, इसे ध्यान में रखते हुए इन इकाइयों को होने वाली संभावित हानि की प्रतिपूर्ति के लिए वायबिलिटी गैप फंड (वीजीएफ) की आवश्यकता पाई गई। इसी क्रम में राज्य सरकार ने एसआरएलएम के माध्यम से संचालित उत्पादन इकाइयों को वित्तीय सहयोग प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मंत्रिपरिषद ने कुल 301.19 करोड़ रुपये की वीजीएफ स्वीकृत की है। इससे उत्पादन इकाइयों के संचालन को मजबूती मिलेगी और लाभार्थियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण अनुपूरक पुष्टाहार की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

लोहम कंपनी के सीईओ व चीफ ऑफ स्टाफ ने भी की मुलाकात

मुख्यमंत्री से मिले नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव लोहम कंपनी के सीईओ व चीफ ऑफ स्टाफ ने भी की मुलाकात  उत्तर प्रदेश को एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च और इंजीनियरिंग का प्रमुख हब बनाने की संभावनाओं पर हुई चर्चा  लखनऊ  नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव ने बुधवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस दौरान लोहम कंपनी के सीईओ रजत वर्मा और कंपनी के चीफ ऑफ स्टॉफ आयुष सबात भी मौजूद रहे। तीनों अतिथियों ने निवेश के लिए उत्तर प्रदेश के सकारात्मक माहौल की सराहना की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव, लोहम के सीईओ रजत वर्मा और चीफ ऑफ स्टाफ आयुष सबात का उत्तर प्रदेश में स्वागत किया। बैठक में उत्तर प्रदेश को देश में एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च और इंजीनियरिंग का प्रमुख हब बनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस क्रम में लोहम द्वारा प्रदेश में भारत की पहली “रेयर अर्थ टू मैग्नेट” इंटीग्रेटेड फैसिलिटी स्थापित करने की योजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इस फैसिलिटी के स्थापित होने से देश में उच्च तकनीक आधारित मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा। नोबेल पुरस्कार विजेता कोंस्टेंटिन नोवोसेलोव, जो ग्रैफीन की खोज के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं, लोहम कंपनी के साथ स्ट्रैटेजिक एडवाइजर और सहयोगी के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य उन्नत मटेरियल साइंस को औद्योगिक स्तर पर बैटरी तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र में लागू करना है। लोहम और नोवोसेलोव के सहयोग का मुख्य फोकस दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर है। पहला, 2D मटेरियल (जैसे ग्रैफीन) का उपयोग कर अगली पीढ़ी की लिथियम-आयन बैटरियों की क्षमता, सुरक्षा व लाइफ को बढ़ाना। दूसरा, बैटरियों और परमानेंट मैग्नेट का उन्नत रीसाइक्लिंग सिस्टम विकसित कर महत्वपूर्ण खनिजों की बेहतर रिकवरी सुनिश्चित करना, जिससे सर्कुलर इकॉनमी को मजबूती मिलेगी। यह सहयोग भारत के “मेक इन इंडिया” और ग्रीन एनर्जी विजन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यू-टर्न की खबर: अमेरिका पीछे हटा, ईरान की चेतावनी के बीच होर्मुज में टैंकरों की गति पर असर

वाशिंगटन मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के बीच एक सोशल मीडिया पोस्ट ने वैश्विक तेल बाजार में अचानक हलचल मचा दी. अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे एक तेल टैंकर को सुरक्षा देते हुए एस्कॉर्ट किया है, ताकि दुनिया तक तेल की आपूर्ति जारी रह सके. लेकिन यह दावा ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया. कुछ ही मिनटों बाद यह पोस्ट हटा दी गई और व्हाइट हाउस को आगे आकर सफाई देनी पड़ी। क्रिस राइट ने अपने पोस्ट में लिखा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान भी वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी नौसेना ने सफलतापूर्वक एक तेल टैंकर को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित बाहर निकलने में मदद की, ताकि वैश्विक बाजारों तक तेल की आपूर्ति बनी रहे। हालांकि, यह जानकारी सामने आते ही तेल बाजार में तेज प्रतिक्रिया देखने को मिली. कुछ ही देर में कीमतों में उतार-चढ़ाव शुरू हो गया. इसके बाद व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग में साफ किया कि अमेरिकी नौसेना ने फिलहाल किसी भी तेल टैंकर को एस्कॉर्ट नहीं किया है. उन्होंने कहा कि ऐसा करना एक विकल्प जरूर हो सकता है, लेकिन अभी ऐसा कोई मिशन नहीं चल रहा है। अमेरिकी मंत्री के दावे को IRGC ने नकारा इस मामले पर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने भी प्रतिक्रिया दी थी. ईरान के अधिकारियों ने अमेरिकी ऊर्जा मंत्री के दावे को पूरी तरह गलत बताया. उनका कहना था कि कोई भी अमेरिकी नौसैनिक जहाज होर्मुज स्ट्रेट के आसपास आने की हिम्मत तक नहीं कर पाया. बाद में अमेरिकी ऊर्जा विभाग के एक प्रवक्ता ने भी कहा कि ऊर्जा मंत्री के एक्स अकाउंट से जो वीडियो पोस्ट किया गया था, उसे विभाग के कर्मचारियों ने गलत कैप्शन के साथ साझा कर दिया था, इसलिए उसे हटा दिया गया। यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वैश्विक बाजार पहले से ही बेहद संवेदनशील स्थिति में हैं. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है. यहां से दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी की सप्लाई गुजरती है। ऑयल टैंकर पर हमले, शिपिंग कंपनियों ने बंद की सर्विस हाल ही में यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑर्गनाइजेशन और अन्य एजेंसियों के आंकड़ों में भी चिंता जताई गई है. 1 से 10 मार्च के बीच कम से कम 10 तेल टैंकरों पर हमले या हमले की कोशिशें दर्ज की गई हैं. इन घटनाओं के बाद कई शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से इस रास्ते से गुजरना बंद कर दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से फारस की खाड़ी में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है. इसके कारण खाड़ी क्षेत्र में तेल का भंडार बढ़ने लगा है. कई तेल उत्पादक देशों को मजबूर होकर उत्पादन कम करना पड़ा है. सऊदी अरब, कुवैत, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल उत्पादक देश रोजाना लाखों बैरल कम तेल निकाल रहे हैं। अगर बंद रहा होर्मुज स्ट्रेट तो वैश्विक बाजार पर पड़ेगा असर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही जल्दी बहाल नहीं हुई, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर और ज्यादा पड़ सकता है. हालांकि, ईरान ने साफ संकेत दिया है कि जब तक युद्ध जारी रहेगा, तब तक फारस की खाड़ी से तेल निर्यात सामान्य नहीं होने दिया जाएगा। युद्ध से पहले हर दिन औसतन करीब 138 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते थे, लेकिन अब यह संख्या लगभग शून्य के करीब पहुंच गई है. इसी बीच ट्रंप प्रशासन वैश्विक बाजार को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका ने शिपिंग कंपनियों को बीमा सुरक्षा देने और जरूरत पड़ने पर नौसेना से टैंकरों को एस्कॉर्ट करने का प्रस्ताव दिया है. इसके बावजूद तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। JPMorgan Chase के कमोडिटी विश्लेषकों ने मंगलवार को कहा, जब तक Strait of Hormuz से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक ऐसे नीतिगत फैसलों का तेल की कीमतों पर ज्यादा असर नहीं होगा। युद्ध के कारण सप्लाई प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया. सोमवार को कीमतें करीब 30 फीसदी बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं. हालांकि बाद में थोड़ी गिरावट आई, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है. लेकिन इसके अगले ही दिन अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि ईरान के अंदर अब तक के सबसे आक्रामक हमले किए जाएंगे, जिससे बाजार में फिर अनिश्चितता बढ़ गई।

सिलेंडर की भारी कमी, 25 दिन का नियम कागजों तक ही सीमित, महीने बाद ही मिलेगा नया

भोपाल  पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते संकट के बीच राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के लाखों रसोई गैस उपभोक्ता एक नई डिजिटल समस्या से जूझ रहे हैं। तेल कंपनियों द्वारा लागू किए गए 25 दिन के अंतराल के नियम ने व्यवहार में लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कागजों में यह नियम पारदर्शिता और जमाखोरी रोकने के लिए बनाया गया है, लेकिन हकीकत में उपभोक्ताओं को दूसरा सिलेंडर पाने के लिए लगभग एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। बुकिंग और डिलीवरी की तारीख के बीच बढ़ते अंतर ने डिजिटल सिस्टम को ऐसा जाल बना दिया है, जिसमें आम आदमी की रसोई फंसती नजर आ रही है। डिजिटल नियम बना परेशानी का कारण     राजधानी की विभिन्न गैस एजेंसियों से मिल रही शिकायतों के अनुसार उपभोक्ताओं को दूसरे सिलेंडर के लिए तय समय से अधिक इंतजार करना पड़ रहा है। नियम के अनुसार एक सिलेंडर की बुकिंग के बाद 25 दिन का अंतराल आवश्यक है, लेकिन सिस्टम की गणना का तरीका उपभोक्ताओं के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है।     तेल कंपनियां इस अंतराल की गणना बुकिंग की तारीख से नहीं बल्कि सिलेंडर की डिलीवरी की तारीख से कर रही हैं। यही कारण है कि उपभोक्ता समय पर बुकिंग करने के बावजूद अगला सिलेंडर समय पर नहीं ले पा रहे हैं। डिलीवरी में देरी बढ़ा रही इंतजार     गैस एजेंसियों द्वारा सिलेंडर पहुंचाने में होने वाली देरी भी इस समस्या को और गंभीर बना रही है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी उपभोक्ता ने 20 फरवरी को गैस बुक की और एजेंसी ने सिलेंडर 26 फरवरी को पहुंचाया, तो सिस्टम के अनुसार अगली बुकिंग 24 मार्च से पहले संभव नहीं होगी।     इस स्थिति में उपभोक्ता को लगभग एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। एजेंसियों की देरी का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जबकि डिजिटल सिस्टम उन्हें निर्धारित समय से पहले बुकिंग करने से रोक देता है। जरूरत के समय काम नहीं आ रहा सिस्टम     मध्यमवर्गीय परिवारों में अक्सर गैस की खपत स्थिति के अनुसार बदलती रहती है। घर में मेहमान आने, किसी आयोजन या अन्य कारणों से कई बार सिलेंडर 22–23 दिनों में ही खत्म हो जाता है। ऐसे समय में उपभोक्ता नया सिलेंडर बुक नहीं कर पाते।     मोबाइल एप और ऑनलाइन पोर्टल पर उपभोक्ताओं को ‘अभी बुकिंग संभव नहीं’ जैसा संदेश मिलता है। इससे लोगों में नाराजगी भी बढ़ रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि संकट के समय तकनीक सुविधा देने के बजाय बाधा बन रही है। पारदर्शिता के नाम पर बढ़ी दिक्कत     शहर के नागरिकों का कहना है कि पारदर्शिता और जमाखोरी रोकने के उद्देश्य से बनाया गया यह डिजिटल सिस्टम अब आम उपभोक्ता के लिए परेशानी का कारण बन गया है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण पहले ही गैस और ऊर्जा की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि इस नियम को व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। यदि डिलीवरी में देरी हो रही है तो उसकी गणना उपभोक्ता के खिलाफ नहीं होनी चाहिए। नियम में लचीलापन जरूरी     उपभोक्ता संगठनों का मानना है कि सरकार और तेल कंपनियों को इस डिजिटल व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार बुकिंग की गणना डिलीवरी की तारीख के बजाय बुकिंग की तारीख से होनी चाहिए या फिर विशेष परिस्थितियों में उपभोक्ताओं को अतिरिक्त छूट दी जानी चाहिए।     यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में यह डिजिटल नियम लाखों परिवारों की रसोई पर और भारी पड़ सकता है।  

आंखों की रोशनी छीन सकता है ‘ग्लूकोमा’, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

‘ग्लूकोमा’ आम ‘मोतियाबिंद या कैटारेक्ट’ नहीं है। इसमें केवल आंखों की रोशनी धुंधली नहीं पड़ती बल्कि पूरी दृष्टि चली जाती है। अगर समय पर इसकी पहचान हो जाए तो इसे रोक पाना संभव है वरना व्यक्ति अंधेपन का शिकार तक हो सकता है। कैसे होता है ग्लूकोमा? आंखों में एक तरफ से पानी भरता है और दूसरी ओर से निकलता है, जब यह प्रक्रिया बाधित होकर आई एंगल ब्लाक करने लगती है तब ग्लूकोमा की शुरुआत होती है। दरअसल, आंखों के अंदर मौजूद 'एक्वियस ह्यूमर' नामक तरल पदार्थ बाहर न निकलकर अंदर ही जमा होने लगता है। जिससे आंखों के पीछे की आप्टिक नर्व पर दबाव बढ़ता है और दृष्टि कम होने लगती है। इसके अलावा उम्र बढ़ना, रक्तचाप, मधुमेह, आनुवंशिकता या आंखों में लगी चोट को ग्लूकोमा होने के कारण बताए जाते हैं। लक्षण शुरुआत में ग्लूकोमा के लक्षण विशेष रूप से दिखते नहीं हैं। कई लोगों को सिरदर्द, आंखों के सामने इंद्रधनुष जैसे रंग बनना या उल्टियां होने जैसी परेशानियां होती हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में तो इस बीमारी में आंखों में दर्द तक नहीं होता। जब आंखों की साइड की नजर कमजोर होने लगती है तब जाकर ग्लूकोमा के लक्षण सामने आते हैं और फिर धीरे-धीरे केंद्र की रोशनी भी जाने लगती है। क्या है ऑप्टिक नर्व? आंख के पिछले हिस्से में दस लाख से अधिक तंत्रिका तंतुओं का एक समूह है, जो रेटिना द्वारा देखी गई छवियों को विद्युत संकेतों के रूप में मस्तिष्क तक पहुंचाने का काम करता है। यह नर्व आंख और मस्तिष्क के बीच एक महत्वपूर्ण कनेक्ट के रूप में काम करती है। ग्लूकोमा के प्रकार ग्लूकोमा भी दो तरह के होते हैं। पहला, ओपन-एंगल ग्लूकोमा, जो भारत में अधिकांश लोगों को होता है, इसमें व्यक्ति की दृष्टि धीरे-धीरे जाती है, लेकिन दूसरा, एंगल-क्लोजर ग्लूकोमा जिसमें बीमारी का पता चलते ही दृष्टि एक से दो दिन के अंदर ही चली जाती है। क्या है इलाज? मेडिकल साइंस में ग्लूकोमा का इलाज संभव है। पहले नसों के दबाव की जांच होती है और ग्लूकोमा का पता लगाया जाता है। आंखों की हालत देखकर डाक्टर आई ड्राप देते हैं, जिसे सारी जिंदगी लेना होता है। कई बार लोग लापरवाही के चलते इसे बीच में ही छोड़ देते हैं और ग्लूकोमा वापस आ जाता है। किन विटामिन्स का रखें खयाल? आंखों की रोशनी ठीक रखने के लिए विटामिन ए, सी और ई से भरपूर खाद्य पदार्थ लेने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही एंटी-आक्सीडेंट्स युक्त हरी पत्तेदार सब्जियां, फल और ओमेगा थ्री फैटी एसिड भी लेना चाहिए। ये हैं जरूरी बातें     अगर आंख का आपरेशन पहले से हुआ है, तो ग्लूकोमा होने की संभावनाएं अधिक होती हैं।     एक बार आई ड्राप शुरू होने पर सारी उम्र उसे लेना अनिवार्य होता है।     जरूरत पड़ने पर ग्लूकोमा की सर्जरी भी होती है।  

पिता की मृत्यु के बाद अमरीन-आफरीन ने संभाला सेक्स रैकेट, ईरानी डेरा से जुड़ा मामला सामने आया

भोपाल भोपाल के बागसेवनिया थाना क्षेत्र में सामने आए हाई प्रोफाइल धर्मांतरण और रेप केस में गिरफ्तार दो सगी बहनें अमरीन और आफरीन फिलहाल जेल में बंद हैं. इस मामले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं. पुलिस अब इस पूरे मामले की कई एंगल से जांच कर रही है ताकि सच्चाई तक पहुंचा जा सके. पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि दोनों बहनों के परिवार का संबंध भोपाल के ईरानी डेरे से जुड़ा बताया जा रहा है. इस जानकारी के सामने आने के बाद पुलिस ने इस एंगल से भी जांच तेज कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जब दोनों बहनें अपने परिवार के साथ अब्बास नगर की झुग्गियों में रहती थीं, उसी समय उनके परिवार की नजदीकियां ईरानी डेरे से बढ़ने लगी थीं. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ईरानी डेरे के आपराधिक छवि वाले लोगों से इन दोनों बहनों का कोई संपर्क था या नहीं. फिलहाल जांच एजेंसियां इस मामले से जुड़े सभी संभावित सबूतों को जोड़ने में जुटी हुई हैं ताकि पूरे नेटवर्क की सच्चाई सामने आ सके। ब्यूटी पार्लर की आड़ में चल रहा था रैकेट पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों बहनों ने ब्यूटी पार्लर की आड़ में अपना रैकेट फैलाया था. पुलिस का कहना है कि इस मामले में यह भी जांच की जा रही है कि अब तक कितनी युवतियां इस जाल का शिकार बनी हैं. जांच एजेंसियां पीड़िताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। पुलिस मामले की कई एंगल से जांच में जुटी  इस मामले में एडिशनल डीसीपी गौतम सोलंकी ने बताया कि पुलिस पूरे मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है. उन्होंने कहा कि ईरानी डेरे को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन उससे जुड़ी कड़ियों की तलाश की जा रही है. पुलिस का कहना है कि तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और मामले की गहराई से विवेचना जारी है।

पेट्रोल डीजल की कमी पर पंजाब विधानसभा में आया निंदा प्रस्ताव

चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा के चल रहे सत्र में बुधवार को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की संभावित कमी का मुद्दा जोरशोर से उठा। खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने सदन में केंद्र सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश कर कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात और केंद्र की गलत विदेश नीति के कारण देश में ईंधन और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है। निंदा प्रस्ताव पेश करते हुए मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने कहा कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कमी का सीधा असर पंजाब में गेहूं की खरीद प्रक्रिया पर पड़ सकता है। अगले महीने से राज्य में गेहूं की खरीद शुरू होने वाली है और इसके लिए बड़ी मात्रा में परिवहन की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि इस समय पंजाब के गोदाम पहले से ही भरे हुए हैं और अनाज की ढुलाई में दिक्कत आ रही है। यदि ईंधन की कमी हुई तो नई फसल को रखने में भी बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। शिक्षामंत्री ने इस मुद्दे को बताया गंभीर कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि गैस की कमी के कारण नंगल और बठिंडा स्थित उर्वरक संयंत्र बंद हो गए हैं। यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो किसानों के लिए यूरिया की कमी पैदा हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब के साथ पक्षपात कर रही है। उनका कहना था कि हरियाणा के पानीपत संयंत्र को पूरी गैस आपूर्ति दी जा रही है, जबकि पंजाब के संयंत्रों को पर्याप्त गैस नहीं मिल रही। इस दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी इस विषय को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस पर विस्तार से चर्चा होना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि निंदा प्रस्ताव पर वीरवार को सदन में विस्तृत बहस करवाई जाए। विधानसभा अध्यक्ष ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए इसे चर्चा के लिए सूचीबद्ध कर दिया। वीरवार को होगी प्रस्ताव पर चर्चा  सत्र के दौरान यह भी मुद्दा उठाया गया कि आने वाले गेहूं खरीद मौसम के लिए राज्य को लगभग पांच लाख जूट बेल की आवश्यकता है। लेकिन केंद्र सरकार की ओर से केवल तीन लाख बेल उपलब्ध कराने की बात कही गई है। शेष के लिए प्लास्टिक बेल लेने का सुझाव दिया गया है। मंत्रियों ने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण पेट्रोलियम आधारित कच्चे पदार्थ की आपूर्ति प्रभावित होती है तो प्लास्टिक बेल की उपलब्धता भी मुश्किल हो सकती है, क्योंकि प्लास्टिक दाना भी पेट्रोलियम पदार्थ से तैयार होता है। सदन में यह भी बताया गया कि बांग्लादेश के साथ संबंध ठीक न होने के कारण जूट की आपूर्ति में भी दिक्कत आ रही है। इससे आने वाले खरीद मौसम में अनाज की पैकिंग और भंडारण की समस्या बढ़ सकती है। उल्लेखनीय है कि जब यह प्रस्ताव सदन में पेश किया गया, उस समय कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के विधायक सदन में मौजूद नहीं थे। अब इस प्रस्ताव पर वीरवार को विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।