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सरकार कर सकती है मोबाइल डेटा पर नया टैक्स, हर GB डेटा के लिए एक्स्ट्रा चार्ज का सुझाव

 नई दिल्ली सरकार इंटरनेट को महंगा करने की तैयारी में है। दरअसल रिपोर्ट्स की मानें, तो अब हर GB डेटा के इस्तेमाल के साथ आपकी जेब से ज्यादा पैसे कट सकते हैं। फिलहाल सरकार में इस पर मंथन किया जा रहा है। गौरतलब है कि सरकार की कमाई को बढ़ाने के अनोखे तरीके के रूप में 'डेटा यूसेज टैक्स' लाने का प्रस्ताव चर्चा में है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई एक हालिया समीक्षा बैठक में इस पर चर्चा हुई। इस बारे में पता चलते ही टेक जगत में हलचल मच गई है। एक्सपर्ट्स का दावा है कि इसका सीधा असर लोगों के मोबाइल रिचार्ज प्लान के बजट पर पड़ सकता है। भारत में आने वाले समय में मोबाइल इंटरनेट इस्तेमाल करना महंगा हो सकता है. सरकार मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर नया टैक्स लगाने के विकल्प को देख रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में Department of Telecommunications (DoT) से कहा गया है कि वह इस पर स्टडी करे और बताए कि क्या डेटा यूज़ पर टैक्स लगाना संभव है या नहीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में टेलीकॉम सेक्टर की एक रिव्यू मीटिंग में यह मुद्दा सामने आया. इसके बाद DoT को कहा गया कि वह यह जांच करे कि मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर टैक्स लगाया जा सकता है या नहीं और अगर लगाया जाए तो उसका मॉडल क्या होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार जिस विकल्प को देख रही है उसमें ₹1 प्रति GB डेटा पर टैक्स लगाया जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो हर बार जब कोई यूजर मोबाइल डेटा इस्तेमाल करेगा तो उस पर यह अतिरिक्त चार्ज जुड़ सकता है। बताया जा रहा है कि अगर ₹1 प्रति GB का टैक्स लागू होता है तो इससे सरकार को हर साल लगभग ₹22,900 करोड़ तक की कमाई हो सकती है. हालांकि अभी यह सिर्फ एक प्रस्ताव है और इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। भारत दुनिया के उन देशों में है जहां मोबाइल डेटा काफी सस्ता है. सस्ते इंटरनेट की वजह से भारत में डेटा की खपत बहुत तेजी से बढ़ी है. वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और रील्स देखने की वजह से मोबाइल डेटा का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। एक और अहम बात यह है कि अभी भी मोबाइल रिचार्ज और पोस्टपेड बिल पर 18% GST लिया जाता है. यानी यूजर्स पहले से ही टेलीकॉम सर्विस पर टैक्स दे रहे हैं. अगर भविष्य में डेटा पर अलग से टैक्स लगाया जाता है तो यह मौजूदा टैक्स के अलावा एक नया चार्ज हो सकता है। सरकार यह प्रस्ताव इस मकसद से ला रही है कि इंटरनेट का इस्तेमाल सकारात्मक कामों के लिए हो। दूरसंचार विभाग DoT को सितंबर 2026 तक रिपोर्ट सबमिट कर यह बताने के लिए कहा गया है कि ऐसा कर पाना संभव है या नहीं? इस टैक्स का एक मकसद बच्चों और युवाओं में बढ़ते 'स्क्रीन टाइम' को कम करना है। सरकार एक ऐसा मॉडल बनाना चाह रही है जिससे पॉजिटिव डेटा कंजम्पशन बढ़े। इस टैक्स के जरिए सरकार इंटरनेट की लत और बढ़ते स्क्रीन-ऑन टाइम पर काबू पाना चाहती है। हालांकि यह देखना होगा कि सरकार शिक्षा और मनोरंजन के बीच डेटा के इस्तेमाल पर अंतर कैसे तय करेगी। क्या ऐसा कर पाना मुमकिन है? भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण TRAI के पूर्व प्रधान सलाहकार सत्या एन. गुप्ता ने इस प्रस्ताव पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि डेटा पर टैक्स लगा पाना न सिर्फ नामुमकिन है बल्कि यह देश में डिजिटल सेवाओं को बाधित भी कर सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार,(REF.) इससे डिजिटल इनोवेशन रुक जाएंगे और डिजिटल क्षेत्र में भारत की वैश्विक बढ़त खतरे में पड़ सकती है। गौर करने वाली बात है कि फिलहाल मोबाइल रिचार्ज पर 18% GST लगता है, ऐसे में डेटा पर अलग से कर लगाना यूजर्स के लिए दोहरी मार जैसा साबित हो सकता है। अगर टैक्स लगा, तो होगी कितनी कमाई? रिपोर्ट्स के अनुसार अब स्पेक्ट्रम नीलामी और लाइसेंस फीस के अलावा सरकार कमाई का नया तरीका तलाश रही है। आंकड़ों के अनुसार 2025 में भारत की मोबाइल डेटा खपत लगभग 229 अरब GB थी। ऐसे में अगर हर GB पर सरकार 1 रुपये का मामूली टैक्स भी लगाती है, तो इससे सरकार को सीधे 22,900 करोड़ रुपये का फायदा होगा। ऐसे में एक तर्क है कि यह रकम देश के विकास के काम आ सकती है, वहीं सच ये भी है कि इससे महंगे इंटरनेट का बोझ आम लोगों पर पड़ सकता है। फिलहाल सरकार ने DoT से कहा है कि वह इस प्रस्ताव की पूरी स्टडी करे और इसके फायदे-नुकसान को समझे. रिपोर्ट आने के बाद ही सरकार तय करेगी कि भारत में मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर नया टैक्स लगाया जाएगा या नहीं। सराकर की तरफ से हालांकि अभी इसे लेकर कोई भी ऑफिशियल स्टेटमेंट नहीं आया है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से रेडिट से लेकर तमाम सोशल मीडिया पर सूत्रों के हवालें से ये खबर चल रही है। 

क्यों रखा जाता है गणगौर का व्रत? माता पार्वती को मिला था यह विशेष वरदान

हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन गणगौर का व्रत रखा जाता है. इस साल 21 मार्च को ये व्रत रखा जाएगा. गणगौर दो शब्दों गण और गौर से मिलकर बना है. गण का अर्थ भगवान शिव है और गौर माता पार्वती को कहा जाता है. ये व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित किया गया है. सुहागिन महिलाएं गणगौर का व्रत करती हैं. प्रमुख तौर पर राजस्थान और हरियाणा समेत उत्तर भारतीय राज्यों में गणगौर व्रत किया जाता है. हिंदू मान्यता है कि गणगौर का व्रत रखने और विधि-विधान से शिव और पार्वती की पूजा करने से पति की उम्र लंबी होती है और वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है. अविवाहित कन्याएं भी गणगौर का व्रत रखती हैं. मान्यता ये भी है कि इस व्रत को रखने से मनचाहा वर प्राप्त होता है, लेकिन आइए जानते हैं कि गणगौर का व्रत करने से माता पार्वती को कौन सा फल मिला था? साथ ही जानते हैं इस व्रत की कथा. पार्वती को शिव मिले पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी पार्वती ने गणगौर का व्रत किया था. उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. तप के साथ-साथ उन्होंने ये व्रत भी किया था. तभी से गणगौर व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है. माना जाता है कि गणगौर व्रत के फल स्वरूप से ही देवों के देव महादेव देवी पार्वती को पति रूप में प्राप्त हुए. गणगौर व्रत की कथा पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव और माता पार्वती नारद मुनि के साथ भ्रमण पर निकले. चलते-चलते वे चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि के दिन एक गांव में पहुंचे. वहां की गरीब महिलाओं ने श्रद्धा के साथ माता पार्वती का पूजन किया. माता पार्वती ने उनकी भक्ति और पूजन से प्रसन्न होकर उनको अटल सौभाग्य का आशीर्वाद दिया. इसके बाद गांव की अमीर महिलाएं सोने-चांदी की थालियों में पकवान लेकर आईं. उस समय माता ने उन महिलाओं पर प्रसन्न होकर अपनी उंगली से रक्त की कुछ बूंदें उन पर छिड़ दीं और उनको स्वयं जैसी सौभाग्यवती बनने का आशीर्वाद दे दिया. इसके बाद पार्वती जी नदी में स्नान करने चली गईं. वहां उन्होंने बालू मिट्टी से शिव जी की प्रतिमा बनाई और पूजा की. तब शिव जी प्रकट हुए और माता पार्वती से कहा कि जो स्त्री इस दिन तुम्हारी तरह मेरा पूजन और व्रत करेगी, उसके पति की आयु लंबी होगी. पूजा करते हुए माता पार्वती को आने में देरी हो गई. जब वो शिव जी के पास पहुंची तो उन्होंने माता से देरी की वजह पूछी. इस पर माता पार्वती ने बताया कि उनको उनके भाई-भाभी मिले और दूध-भात खाने के लिए दिया, जिसमें समय लग गया. यह सुनकर शिव जी को भी वहां जाने का मन हुआ. फिरपार्वती जी ने मन ही मन भगवान शिव से उनकी लाज बचाने की प्रार्थना की. इसके बाद जब वे नदी तट पर पहुंचे, तो वहां एक मायावी महल नजर आया. वहां शिव-पार्वती का खूब आदर-सत्कार हुआ. वो तीन दिन महल में रहे. शिव जी का मन महल में ही रहने का था, लेकिन पार्वती जी चल पड़ीं तो उनको भी माता के पीछे आना पड़ा. रास्ते में भगवान शिव को याद आया कि वो महल में अपनी माला भूल आए हैं. माला लाने के लिए उन्होंने नारद जी को भेजा. नारद जी ने वहां जाकर देखा तो कोई महल नहीं था. बस पेड़ पर एक माला लटकी पड़ी थी. यह देखकर नारद जी हैरान रह गए.फिर नारद जी माला लेकर शिवजी के पास गए. माला देकर उन्होंने शिव जी से कहा कि प्रभु यह कैसी माया है जब मैं माला लेने गया तो वहां पर भवन नहीं था. इस पर शिव पार्वती मुस्कुराए और बोले कि यह सब तो देवी पार्वती की माया थी. इस पर देवी पार्वती ने कहा कि यह मेरी नहीं भोलेनाथ की माया थी. इसके बाद नारद जी ने कहा कि आप दोनों की माया को आपके अलावा को दूसरा नहीं समझ सकता. आप दोनों की जो भक्ति भाव से पूजा करेगा, उसके जीवन में भी आपकी तरह प्रेम बना रहेगा.

WhatsApp में बड़ी अपडेट, नया AI ऑप्शन सिर्फ सिंपल स्टेप्स में इस्तेमाल करें

 नई दिल्ली  WhatsApp ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप के अंदर एक न्यू टैब दिखाया गया है, जिसका नाम Meta AI Tab है, जिसकी मदद से यूजर्स आसानी से AI फीचर्स को एक्सेस कर पाएंगे। लेटेस्ट अपडेट की जानकारी Wabetainfo ने शेयर की है. रिपोर्ट में बताया है कि न्यू टैब की मदद से यूजर्स आसानी से AIसे इंटरैक्ट कर सकेंगे. इसमें टेक्स्ट और वॉयस कमांड से बातचीत की जा सकेगी. साथ ही यहां एनीमेटेड इमेज आदि को तैयार किया जा सकेगा। इस एंड्रॉयड बीटा वर्जन में दिखा नया टैब  Wabetainfo ने पोस्ट करके बताया है कि WhatsApp बीटा के Android 2.26.6.5 वर्जन में न्यू टैब दिखाई दिया है. यह एक सेंटरलाइज AI पावर्ड टूल है। Wabetainfo ने पोस्ट किया एंड्रॉयड यूजर्स को टेस्टिंग के लिए मिला  WhatsApp ने अभी सीमित एंड्रॉयड यूजर्स के साथ इसकी टेस्टिंग शुरू की है. कई यूजर्स इस फीचर्स को यूज कर रहे हैं. Wabetainfo ने इसको लेकर एक स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किया है, जहां बताया है कि न्यू AI टैब कैसा नजर आएगा। Meta AI के लिए एक नया टैब पोस्ट में एम्बेड इमेज की मदद से आप देख सकते हैं कि कुछ बीटा टेस्टर्स को बॉटम पर Meta AI के लिए एक नया टैब दिया है. मैसेजिंग ऐप में नया टैब जोड़ने के लिए मैसेजिंग ऐप में मुख्य इंटरफेस से कम्युनिटीस टैब को रिमूव कर दिया है। एक पुराने पोस्ट में पहले ही बताया जा चुका था कि इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप में  कम्युनिटीज टैब की जगह AI पावर्ड चैट्स के लिए एक नया सेक्शन आ रहा है।  

25 साल बाद खुलासा: वीवीएस लक्ष्मण ने किस बैट से खेली थी ऐतिहासिक 281 रन की पारी

बेंगलुरु  पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण टीम इंडिया के उस फैब-4 का हिस्सा थे, जिसमें सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली जैसे दिग्गज शामिल थे। इन चार खिलाड़ियों ने भारत को टेस्ट क्रिकेट में अलग पहचान दिलाई और कई ऐतिहासिक पारियां खेली। ऐसे में वीवीएस लक्ष्मण की 281 रनों की वो पारी तो हर किसी को याद होगी, जो उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ईडन गार्डन्स के मैदान पर खेली थी। उनकी इस पारी के दम पर ही भारत ने अनहोनी को होनी करके दिखाया था और ऑस्ट्रेलिया के मुंह से जीत छीन ली थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लक्ष्मण ने यह पारी अपने नहीं बल्कि किसी और के बैट से खेली थी? जी हां, 25 साल बाद उस क्रिकेट ने खुद इसका खुलासा किया है। इस खिलाड़ी का नाम ‘वेंकटपति राजू’ है, जिन्होंने भारत के लिए 28 टेस्ट मैच खेले हैं। 2 साल के लंबे इंतजार के बाद वेंकटपति राजू की उसी मैच में टीम इंडिया में वापसी हुई थी और वह उनके करियर का आखिरी मुकाबला भी थी।  वेंकटपति राजू ने बताया, “लगभग दो साल बाद मैं वापसी कर रहा था और टीम के आस-पास सब कुछ बदल चुका था: फिटनेस का स्तर, रवैया और सोच। मुझे आज भी वह शाम याद है जब ऑस्ट्रेलिया ने हमें फॉलो-ऑन खेलने पर मजबूर कर दिया था। नेशनल सिलेक्टर मदन लाल ने हमसे कहा कि हम हार न मानें और लड़ते रहें। तब लक्ष्मण ने कुछ ऐसा कहा जिसने मुझे हैरान कर दिया। उन्होंने कहा, 'हो सकता है हम यह मैच जीत जाएं।' उस समय यह सोचना भी मुश्किल लग रहा था, लेकिन उन्हें खुद पर पूरा भरोसा था। राहुल द्रविड़ नंबर 6 पर बैटिंग करने आए, जबकि लक्ष्मण बैटिंग ऑर्डर में ऊपर आ गए। यह फैसला कोच जॉन राइट और कप्तान सौरव गांगुली के बीच हुई बातचीत के बाद लिया गया था। यह एक बहुत ही समझदारी भरा कदम साबित हुआ। लक्ष्मण और द्रविड़ एक-दूसरे को सालों से जानते थे—अपने साउथ ज़ोन और U-19 के दिनों से। एक बार जब वे क्रीज़ पर जम गए, तो उन्होंने पूरे दिन जिस तरह से बैटिंग की, उससे मैच का रुख ही पूरी तरह बदल गया। ड्रेसिंग रूम के अंदर काफी तनाव था। अगर एक भी विकेट गिर जाता, तो निचले क्रम के बल्लेबाज़ों की बारी आ जाती। लेकिन जिस तरह से उन्होंने बैटिंग की, उससे हमारी उम्मीदें बनी रहीं। दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलिया को जीतने की इतनी आदत हो चुकी थी कि वे मैच ड्रॉ कराने के बारे में सोच भी नहीं रहे थे। इसी वजह से उनके लिए चीज़ें और भी मुश्किल हो गईं। इस सीरीज़ का ज़्यादातर श्रेय हरभजन सिंह को जाता है। लेकिन पांचवें दिन सचिन तेंदुलकर की गेंदबाज़ी का स्पेल बहुत ही अहम साबित हुआ। उन्हें दबाव में गेंदबाज़ी करने का काफी अनुभव था—जैसे 1993 के हीरो कप का वह मशहूर आखिरी ओवर—और जब टीम को उनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी, तब उन्होंने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन किया। लक्ष्मण की वह पारी सचमुच असाधारण थी। वे शेन वॉर्न की गेंद पर क्रीज़ से आगे निकलकर शॉट लगा रहे थे, और स्पिन के विपरीत दिशा में भी गेंद को बाउंड्री के पार भेज रहे थे। यह आत्मविश्वास उन्हें हैदराबाद की टर्निंग पिचों पर सालों तक घरेलू क्रिकेट खेलने से मिला था। मेरे लिए कोलकाता टेस्ट इसलिए भी खास था, क्योंकि यह मेरे करियर का आखिरी मैच साबित हुआ। मार्क वॉ का विकेट लेना इस मैच को और भी ज़्यादा यादगार बना गया। यह मेरे लिए एक बेहतरीन विदाई थी। इससे भी ज़्यादा अहम बात यह है कि इस टेस्ट मैच ने भारतीय क्रिकेट की पूरी तस्वीर ही बदल दी। इस मैच ने टीम के अंदर यह विश्वास जगाया कि हम किसी भी मुश्किल हालात से उबरकर जीत हासिल कर सकते हैं। एक और छोटी सी निजी याद भी जुड़ी है: जिस बल्ले से लक्ष्मण ने वह मशहूर 281 रनों की पारी खेली थी, वह असल में मेरा ही था। तो इस तरह, एक छोटे से रूप में ही सही, उस ऐतिहासिक पारी में मेरा भी कुछ योगदान रहा।”

31 मार्च तक करें ये काम, वरना सुकन्या समृद्धि खाता हो सकता है निष्क्रिय

नई दिल्ली अपनी बेटियों के भविष्य को सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए माता पिता अक्सर छोटी उम्र से ही निवेश शुरू कर देते हैं. इसी सोच के साथ सरकार की सुकन्या समृद्धि योजना काफी फेमस स्कीम बन चुकी है. इस योजना में निवेश करने पर अच्छी ब्याज दर मिलती है और लंबे समय में अच्छा फंड तैयार हो सकता है. लेकिन इस खाते से जुड़ा एक जरूरी नियम भी है। जिसे नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है. अगर आपने इस फाइनेंशियल ईयर में अपने खाते में जरूरी रकम जमा नहीं की है. तो 31 मार्च से पहले यह काम जरूर कर लें. अगर ऐसा नहीं किया गया तो खाता इनएक्टिव हो सकता है. इसलिए बेहतर यही है कि समय रहते खाते का स्टेटस चेक कर लें। 31 मार्च से पहले करना होगा यह जरूरी काम सुकन्या समृद्धि योजना में खाता चालू बनाए रखने के लिए हर वित्त वर्ष में न्यूनतम रकम जमा करना जरूरी होता है. कई लोग साल भर में पैसे जमा करना भूल जाते हैं, लेकिन वित्त वर्ष खत्म होने से पहले इसे ठीक किया जा सकता है। ध्यान रखने वाली जरूरी बातें:     हर वित्त वर्ष में खाते में न्यूनतम 250 रुपये जमा करना जरूरी है.     अगर पूरे साल में पैसा जमा नहीं हुआ है तो 31 मार्च से पहले जमा करना होगा.     समय पर राशि जमा करने से खाता सक्रिय बना रहता है.     छोटी राशि होने के कारण कई लोग इसे टाल देते हैं, लेकिन यही नियम खाते की स्थिति तय करता है.     समय रहते जमा करने से आगे की निवेश प्रक्रिया बिना रुकावट जारी रहती है. पैसे जमा नहीं किए तो देना पड़ सकता है जुर्माना अगर किसी फाइनेंशियल ईयर में सुकन्या समृद्धि खाते में न्यूनतम राशि जमा नहीं की जाती है. तो खाता इनएक्टिव हो सकता है. और बाद में इसे फिर से चालू कराने के लिए अलग से पूरी प्रोसेस दोहरानी पड़ती है। जरूरी बातें जो आपको जाननी चाहिए:     न्यूनतम रकम जमा न होने पर खाता इनएक्टिव हो सकता है.     खाते को दोबारा सक्रिय करने के लिए 50 रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है.     साथ में छूटी हुई न्यूनतम राशि भी जमा करनी होती है.     फिलहाल इस योजना में करीब 8.2 प्रतिशत सालाना ब्याज मिल रहा है.     नियमित निवेश करने पर बेटी की पढ़ाई और भविष्य के लिए अच्छा फंड तैयार हो सकता है.  

31 मार्च तक छुट्टियां रद्द: वित्तीय वर्ष समाप्ति तक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी टले

जयपुर राजस्थान सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन को देखते हुए राज्य के सभी विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों के अवकाश व प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर अस्थायी रोक लगा दी है।मुख्य सचिव वी श्री निवास की ओर से जारी आदेश के अनुसार 31 मार्च 2026 तक राज्य के समस्त शासकीय विभागों, कार्यालयों और अधीनस्थ संस्थानों में अवकाश या प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वीकृत नहीं किए जाएंगे। यह निर्णय कार्यालयी कार्यों के समयबद्ध और सुचारु निपटान को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। आदेश में कहा गया है कि केवल अत्यावश्यक या आपातकालीन परिस्थितियों में ही अवकाश की अनुमति दी जाएगी। जिन अधिकारियों या कर्मचारियों को पहले से अवकाश स्वीकृत है, उन्हें भी आवश्यकता होने पर ही उसका उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार ने सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है, ताकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले लंबित कार्यों का समय पर निस्तारण किया जा सके। राजस्थान के सरकारी विश्राम गृहों की दरें बढ़ीं सरकार ने अपने विश्राम गृहों को आधुनिक सुविधाओं और लक्जरी लुक देने के बाद अब वहां ठहरने की दरों में भी बड़ा इजाफा कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए नई श्रेणियां निर्धारित की हैं और कई पुरानी दरों को संशोधित किया है। नई व्यवस्था के तहत राजस्थान के सरकारी विश्राम गृहों और दिल्ली स्थित राजस्थान हाउस में निजी रूप से ठहरने के लिए अब लोगों को पहले से ज्यादा भुगतान करना होगा। विभाग ने डी श्रेणी के विश्राम गृहों सहित विभिन्न श्रेणियों में कमरों की दरों में वृद्धि की है। दर बढ़ोतरी के तहत अलग-अलग श्रेणियों में 800 रुपये से लेकर 4500 रुपये तक का इजाफा किया गया है। इसमें 800, 1300, 1400, 2300, 2700, 2800, 3300, 3700 और 4500 रुपये तक की वृद्धि शामिल है। सरकार का कहना है कि विश्राम गृहों में बेहतर सुविधाएं और उन्नत व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने के मद्देनजर यह संशोधन किया गया है।

राज्य सरकार का महा फेरबदल, मंत्रियों के बदले जाने की खबरें और नए नाम सामने

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजनीति में महा फेरबदल का बिगुल बज गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की दिल्ली में हुई अहम बैठकों के बाद अब कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, सरकार चार से पांच नए मंत्रियों को मौका देने की तैयारी में है।  कौन-कौन हो सकते हैं शामिल? गोपाल भार्गव: नौ बार के विधायक, अनुभव के साथ मजबूत दावेदार। मालिनी गौड़: इंदौर की प्रभावी महिला नेता। बृजेंद्र सिंह यादव: सिंधिया खेमे से संभावित। शैलेंद्र कुमार जैन, प्रदीप लारिया, अर्चना चिटनीस, कमलेश शाह: लगातार चर्चा में बने हुए। आदिवासी कोटे से भी किसी वरिष्ठ विधायक को मौका मिलने की संभावना। खाली पद और रणनीति मध्य प्रदेश में फिलहाल 31 सदस्यीय मंत्रिमंडल है, और चार पद खाली हैं। नई नियुक्तियों के जरिए क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को मजबूत करने की कोशिश होगी। संगठन में बदलाव कुछ मौजूदा मंत्रियों को संगठन में राष्ट्रीय जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं, जबकि नॉन-परफॉर्मिंग मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। नजर: नई नियुक्तियां नवरात्रि के आसपास की जा सकती हैं। राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज, आने वाले दिनों में हो सकता है बड़ा राजनीतिक शिफ्ट।

महिला अधिकारियों का वर्चस्व बढ़ा मोहन सरकार में, अब उन्हें मिल रही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन सरकार में महिला अफसरों पर भी खासा भरोसा जताया जा रहा है। प्रदेश में उन्हें अहम जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। प्रशासनिक ढांचे में महिला अफसरों का दबदबा बढ़ रहा है। ये बात ऐसी ही नहीं कही जा रही है बल्कि आंकड़े इसकी गवाही दे रहे है। मध्य प्रदेश राज्य में पहली बार बड़ी संख्या में महिला आईएएस अधिकारियों को जिलों का दायित्व सौंपा गया है। मध्य  प्रदेश के 55 जिलों में से 17 की कमान महिला IAS अधिकारियों के पास अगर हम वर्तमान स्थिति की बात करें तो प्रदेश के 55 जिलों में 17 जिलों की कमान महिला आईएएस अधिकारियों के पास अगर गौर किया जाए तो पहले कभी भी प्रदेश में ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिली है।जब इतने बड़े स्तर पर महिला अफसरो को कमान सौंपी गई हो। स्थिति ये है कि  मोहन यादव सरकार में महिला अधिकारियों पर भरोसा जताकर कई जिलों में उन्हें कलेक्टर के तौर पर भी नियुक्त किया गया है। ये आंकड़े बताते हैं कि महिला अधिकारियों पर भरोसा बढ़ा है। बात करें बड़वानी, झाबुआ और डिंडोरी की तो यहां पर लगातार महिला कलेक्टर को जिम्मेवारी सौंपी जा रही है। प्रदेश में महिला कलेक्टरों का बढ़ा दबदवा  मध्य प्रदेश  के खरगोन, बड़वानी, झाबुआ आलीराजपुर ऐसे जिले हैं जो ये मुहर लगा रहे हैं, इंदौर संभाग में महिला अधिकारियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। उज्जैन संभाग के रतलाम, शाजापुर, आगर मालवा मंदसौर में भी महिला आईएएस अधिकारियों का जलवा है। रीवा, पन्ना, निवाड़ी, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, सिवनी जिलों में महिला कलेक्टर अपनी योग्यता का बखूबी प्रदर्शन कर रही है।वहीं उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में कई दूसरी महिला आईएएस अधिकारियों को भी पहली बार कलेक्टर बनने का मौका मिल सकता है। आने वाले समय में 2011 से 2017 बैच तक की महिला अधिकारियों को मौके की उम्मीद बात करें तो वर्ष 2014 बैच की महिला अधिकारियों की संख्या सबसे अधिक है। 2016 बैच की भी कई अधिकारी जिलों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। अब उम्मीद है कि 2011 से 2017 बैच तक की दूसरी महिला आईएएस अधिकारियों को पहली बार कलेक्टर बनने का अवसर मिल सकता है। लिहाजा महिला अधिकारियों को मोहन सरकार में काफी महत्व दिया जा रहा है।

MP निगम-मंडल नियुक्ति अपडेट: लिस्ट जल्द जारी, जानें इंतजार की वजह

भोपाल  मध्य प्रदेश में निगम-मंडल की नियुक्तियों की सूची लंबे समय से प्रतीक्षित है, लेकिन अभी तक इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है। जानकारी के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व से हरी झंडी न मिलने के कारण फैसला टला हुआ है। प्रदेश के कई भाजपा नेता और कार्यकर्ता इस सूची का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। प्रदेश नेतृत्व ने संभावित नामों की सूची तैयार करके केंद्रीय स्तर पर भेज दी थी, लेकिन दिल्ली में अंतिम स्वीकृति अभी तक नहीं मिली है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृहमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक के जरिए अंतिम निर्णय होना था, लेकिन वैश्विक और राष्ट्रीय घटनाओं के चलते यह बैठक स्थगित हो गई। इससे एमपी निगम-मंडल की सूची जारी करने में और देरी हुई। इस देरी से प्रदेश के नेताओं और कार्यकर्ताओं में बेचैनी बढ़ गई है। अब सभी की निगाहें केंद्रीय नेतृत्व द्वारा जल्द सूची जारी करने पर टिकी हैं।

क्रिकेट अपडेट: विराट और रोहित चाहते हैं ज्यादा वनडे, टी-20 को नहीं प्राथमिकता

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट के दो सबसे बड़े सितारे रोहित शर्मा और विराट कोहली अपने शानदार करियर के अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं. माना जा रहा है कि दोनों दिग्गज 2027 में होने वाले वर्ल्ड कप  के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह सकते हैं. ऐसे में क्रिकेट जगत के पास लगभग डेढ़ साल का समय है, जब तक प्रशंसक इन महान खिलाड़ियों को मैदान पर खेलते हुए देख सकते हैं। यही वजह है कि कई क्रिकेट बोर्ड चाहते हैं कि भारत के साथ होने वाली आगामी सीरीज में ज्यादा से ज्यादा वनडे मैच खेले जाएं, क्योंकि फिलहाल रोहित शर्मा और विराट कोहली सिर्फ इसी फॉर्मेट में भारत के लिए खेल रहे हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए न्यूजीलैंड, श्रीलंका और आयरलैंड के क्रिकेट बोर्ड ने बीसीसीआई से अनुरोध किया है कि आगामी दौरों के कार्यक्रम में बदलाव करते हुए वनडे मैचों की संख्या बढ़ाई जाए। आयरलैंड और श्रीलंका ने टी20 की जगह वनडे कराने की मांग की एक सूत्र के अनुसार Cricket Ireland और बीसीसीआई आयरलैंड दौरे के कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत कर रहे हैं.  जुलाई में भारतीय टीम इंग्लैंड का दौरा करेगी, और इसी दौरान टीम इंडिया के आयरलैंड के खिलाफ भी खेलने की संभावना है. यह सीरीज साउथैम्प्टन या आयरलैंड में आयोजित हो सकती है.  क्रिकेट आयरलैंड चाहता है कि जुलाई की शुरुआत या अंत में भारत के साथ वनडे सीरीज खेली जाए.  हालांकि बीसीसीआई ने अभी तक इस मांग को मंजूरी नहीं दी है.  अगर वनडे सीरीज पर सहमति नहीं बनती, तो दोनों टीमों के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज खेली जा सकती है। वहीं Sri Lanka Cricket ने पहले बताया था कि अगस्त में भारत और श्रीलंका के बीच दो टी20 मैच खेले जाएंगे.  यह मुकाबले 2025 में आए चक्रवात ‘डिटवाह’ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए बीसीसीआई की ओर से सद्भावना के तौर पर आयोजित किए जाने थे लेकिन अब श्रीलंका क्रिकेट चाहता है कि इन मैचों को तीन वनडे मुकाबलों में बदला जाए, क्योंकि संभव है कि यह आखिरी बार हो जब रोहित शर्मा और विराट कोहली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के रूप में श्रीलंका दौरे पर आएं। न्यूजीलैंड भी चाहता है ज्यादा वनडे मैच उधर New Zealand Cricket ने भी भारत के साथ अपनी आगामी सीरीज के कार्यक्रम में बदलाव का प्रस्ताव रखा है.  पहले इस दौरे में दो टेस्ट, तीन वनडे और पांच टी20 मैच होने थे लेकिन यह जानते हुए कि भारतीय टीम शायद अगले पांच साल तक न्यूजीलैंड का दौरा नहीं करेगी, न्यूजीलैंड क्रिकेट ने सीमित ओवरों के मुकाबलों का संतुलन बदलने का फैसला किया है. इस फैसले के तहत वनडे मैचों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है ताकि भारतीय टीम को भी विश्व कप की तैयारी में मदद मिल सके.  बीसीसीआई ने इस मांग को स्वीकार कर लिया है, क्योंकि टीम इंडिया को भी वनडे विश्व कप 2027 की तैयारी के लिए अधिक से अधिक 50 ओवर के मैच खेलने की जरूरत है।