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ग्रीन ट्रांसपोर्ट की ओर कदम: जालंधर में शुरू होंगी 97 इलेक्ट्रिक बसें

जालंधर. जालंधर. शहर में प्रस्तावित प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के लिए ऐप भी डेवलप की जाएगी। लोगों को इस ऐप के जरिये हर बस की रीयल टाइम लोकेशन पता चलती रहेगी। ऐप बताएगी कि कौन-सी बस किस बस स्टॉप पर कब पहुंचेगी। बस की रीयल टाइम लोकेशन पता होने से यात्री बस स्टॉप पहुंचने के लिए अपना शेड्यूल तय कर सकेंगे। ऐप पर सभी रूट का मैप रहेगा। यही नहीं ऐप और बस सर्विस को इंटेग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से भी जोड़ा जाएगा। इससे कंट्रोल रूम में हर बस की जानकारी रहेगी और कहीं कोई मुश्किल आती है तो तुरंत सहायता उपलब्ध करवाना, रूट डायवर्ट करना आसान रहेगा। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत 220 बस स्टॉप भी बनाए जाने हैं। विभिन्न कंपनियों से हो सकता है करार प्रत्येक बस स्टॉप पर करीब एक लाख रुपये खर्च आने का अनुमान है। बस स्टॉप निर्माण के लिए विभिन्न कंपनियों से करार किया जा सकता है। इसके बदले कंपनियां बस स्टॉप पर अपना विज्ञापन लगा सकेंगी। यह योजना अभी फाइनल नहीं हुई है। बस स्टॉप के निर्माण के लिए केंद्र फंड नहीं दे रहा है, इसलिए फंड का इंतजाम स्थानीय स्तर पर ही करना होगा। शहर में कई सालों से बस सर्विस बंद है। शहर में लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट देने के लिए यह प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। बस सर्विस के लिए रूट फाइनल हो चुके हैं और इन रूटों पर दिक्कतों को दूर करने के लिए निगम का जोर लगाना होगा। यहीं नहीं सिटी बस सर्विस बंद होने का बड़ा कारण बनी ऑटो यूनियनों को भी संभालना होगा। अब ऑटो के साथ ही शहर में बड़ी गिनती में ई-रिक्शा भी चल पड़े हैं। शहर में सिर्फ दो ही बस डिपो-चार्जिंग को मंजूरी प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के लिए अब तीन के बजाय दो जगह चार्जिंग स्टेशन होंगे। बस स्टैंड पर चार्जिंग स्टेशन को केंद्र सरकार ने मंजूरी नहीं दी है। अब सिर्फ नगर निगम के लम्मा पिंड चौक स्थित वर्कशाप और निगम मुख्यालय के साथ खाली जमीन पर ही बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन बनेगा। इन दोनों जगह पर बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए एनआइटी ने सर्वे रिपोर्ट भी फाइनल कर दी है। दोनों साइट्स पर बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का खर्च भी दोगुना हो गया है। नगर निगम ने दोनों साइट्स पर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के लिए चार करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाया था। एनआइटी की टीम ने जो सर्वे किया है उसमें बेहतर मटीरियल प्रस्तावित है और इसी वजह से बस डिपो-चार्जिंग स्टेशन का खर्च 9.25 करोड़ तक पहुंच गया है। इसमें 60 प्रतिशत पैसा केंद्र देगा और 40 प्रतिशत पंजाब सरकार और नगर निगम के हिस्से में है। स्मार्ट सिटी कंपनी ने फंड रिलीज करने के लिए केंद्र को पत्र भी लिख दिया है। यह पैसा केंद्र सरकार पहले ही सैंक्शन कर चुकी है और जैसे ही पैसा पहुंचेगा तो उसके हिसाब से टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। सात, नौ और 12 मीटर की केंद्र से मिलेंगी ई-बसें बता दें कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के लिए केंद्र सरकार ने नगर निगम जालंधर को 97 बसें देने की मंजूरी दी है। यह बसें तीन साइज सात मीटर, नौ मीटर और 12 मीटर की होंगी। तंग इलाकों में भी ये छोटी बसें आसानी से चल सकेंगी।

ड्रग्स माफिया पर सख्त प्रहार: साय सरकार ने बनाई SOG और एंटी नारकोटिक्स सेल

रायपुर. छत्तीसगढ़, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, प्राकृतिक संसाधनों और शांत सामाजिक जीवन के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देश के अन्य हिस्सों की तरह यहाँ भी अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति ने चिंतनीय स्थिति पैदा की है। नशीले पदार्थ केवल कानून-व्यवस्था की दृष्टि से ही समस्या नहीं हैं बल्कि यह समाज, परिवार और युवाओं के भविष्य के लिए भी गंभीर चुनौती है। इसका सामना करने के लिए छत्तीसगढ़ की सरकार ने कुछ निर्णायक कदम उठाए हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान समूह (एसओजी) और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के गठन का फ़ैसला किया है। राज्य सरकार पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने से साथ ही साथ प्रदेश को नशामुक्त बनाने की व्यापक रणनीति तैयार की है। साय सरकार का स्पष्ट संदेश है कि छत्तीसगढ़ में नशे के व्यापार के लिए कोई जगह नहीं है और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर अब क़ानून का शिकंजा कसा जाएगा। नशे की समस्या बन रही समाज के लिए गंभीर चुनौती दुनिया के कई देशों की तरह भारत भी आज नशे की समस्या से जूझ रहा है। तरह-तरह के मादक पदार्थों जैसे गांजा, चरस, हेरोइन, ब्राउन शुगर, अफीम, डोडा और सिंथेटिक ड्रग्स समाज के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में बहुत से क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क सक्रिय हो रहा है। विधानसभा में उठाए गए प्रश्नों और विभिन्न सर्वेक्षणों के आधार पर कहा जा सकता है कि राज्य में नशे के सेवन करने वालों की संख्या चिंताजनक हो सकती है। राष्ट्रीय स्तर पर किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार छत्तीसगढ़ में लगभग 1.5 से 2 लाख लोग अफीम और इंजेक्टेबल ड्रग्स का सेवन कर रहे हैं। 3.8 से 4 लाख लोग गांजा का उपयोग कर रहे हैं। 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के 40,000 से अधिक किशोर इनहेलेंट और कफ सिरप जैसी नशीली चीजों के आदी हो रहे हैं। यह आंकड़े उस सामाजिक चुनौती का संकेत हैं जिसका सामना समाज और सरकार दोनों को मिलकर करना होगा। नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने के अलावा अपराध, हिंसा, मानसिक तनाव और सामाजिक अस्थिरता भी बढ़ाने वाला होता है। नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं होती बल्कि यह समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। सरकार की सक्रियता और कड़े अभियान आंकड़ों में दिखाई दे रहा छत्तीसगढ़ सरकार का दावा है कि राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लगातार और प्रभावी कार्रवाई की जारी है। इसका नतीजा हाल के वर्षों में हुई गिरफ्तारियों और जब्तियों के आंकड़ों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। पिछले 13 महीनों में 1,434 मामले दर्ज किए गए, 2,599 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, 20,089 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया और 3,00,408 नशीली गोलियां और कैप्सूल बरामद किए गए राज्य सरकार की यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय रूप से नशे के नेटवर्क को तोड़ने में सलगन हैं। साल 2025 में मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान में और भी तेज़ी लाई गई। इस साल 1,288 मामले दर्ज हुए और 2,342 आरोपी गिरफ्तार किए गए। अभियान में जब्त किए गए पदार्थों में शामिल थे 16,999.7 किलोग्राम गांजा,141 ग्राम ब्राउन शुगर,1,259 ग्राम अफीम, 2.039 किलोग्राम हेरोइन, 27.68 ग्राम चरस, 23.56 ग्राम कोकीन, 70.46 ग्राम एमडीएमए, 1,524 किलोग्राम डोडा, और 2,41,138 नशीली दवाएं यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि राज्य सरकार नशे के खिलाफ व्यापक, सख़्त और संगठित कार्रवाई कर रही है। 2026 की शुरुआत में भी जारी अभियान साल 2026 की शुरुआत में भी यह अभियान जारी है। 31 जनवरी 2026 तक नशे के ख़िलाफ़ 146 मामले दर्ज हुए जिसमें 257 आरोपी गिरफ्तार किए गए और बरामदगी की सूची इस प्रकार से है 3,090 किलोग्राम गांजा, 8.85 ग्राम ब्राउन शुगर, 277.2 ग्राम अफीम, 123.8 ग्राम हेरोइन, 15.29 किलोग्राम डोडा और 59,270 नशीली दवाएं इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सरकार के द्वारा नशे के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई कितनी सख़्त है। एसओजी और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स साबित हो रहा है एक रणनीतिक कदम छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने अब मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराधों से निपटने के लिए नई संस्थागत व्यवस्था बनाने का फ़ैसला किया है।प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दो महत्वपूर्ण कदम उठाए गए जिसमें पहला है विशेष अभियान समूह (SOG) एसओजी का गठन पुलिस मुख्यालय के अंतर्गत किया गया इसका उद्देश्य है आतंकवादी खतरों से निपटना और संगठित अपराधों पर कार्रवाई करना अचानक उत्पन्न होने वाली सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए यह समूह आधुनिक तकनीक और विशेष प्रशिक्षण से लैस होगा। दूसरा कदम है एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स, नशे के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए 10 जिलों में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स बनाई जा रही है। इसके लिए 100 नए पदों के लिए मंजूरी दे दी गई है।इस फ़ोर्स से खुफिया जानकारी जुटाने में तेजी आएगी, तस्करी के नेटवर्क को जल्दी पकड़ा जा सकेगा और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ेगा। राज्य सरकार का यह कदम दर्शाता है कि सरकार समस्या की गंभीरता को समझते हुए दीर्घकालिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है। एनडीपीएस अधिनियम से किया जा रहा है आर्थिक नेटवर्क पर भी प्रहार नशे का कारोबार केवल ड्रग्स की बिक्री तक सीमित नहीं होता। इसके पीछे कई बड़े आर्थिक नेटवर्क भी काम करते हैं जिसको ध्यान में रखते हुए सरकार ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत वित्तीय जांच को भी प्राथमिकता देने का काम किया है। इसके तहत 2025 में 16 आरोपियों की 13.29 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त या फ्रीज की गई इसके अलावा 145 आदतन अपराधियों के खिलाफ PIT-NDPS कानून के तहत कार्रवाई की गई। छत्तीसगढ़ के साय सरकार की यह रणनीति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जब तक अपराधियों के आर्थिक स्रोतों को खत्म नहीं किया जाएगा तब तक नशे के कारोबार को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है। ड्रग उपयोग के उपकरणों पर भी हो रही कार्रवाई छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने यह भी समझा है कि नशे के नेटवर्क को खत्म करने के लिए ड्रग्स के अलावा उससे जुड़े उपकरणों पर भी नियंत्रण जरूरी है। यही वजह है कि … Read more

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ‘विकसित राजस्थान रन 2026’ को दी हरी झंडी, युवाओं का उमड़ा उत्साह

जयपुर  राजस्थान सरकार ने राजस्थान दिवस से पहले युवाओं के लिए सार्वजनिक भागीदारी वाली मैराथन 'विकसित राजस्थान रन 2026' का आयोजन किया। राज्य खेल परिषद द्वारा आयोजित 'विकसित राजस्थान रन 2026' को मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने रविवार की सुबह हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मैराथन में बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया। इस मैराथन में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और विद्यालयों के विद्यार्थी, एनएसएस के स्वयंसेवक, एनसीसी के कैडेट, भारत स्काउट एंड गाइड, हिंदुस्तान स्काउट एंड गाइड, एनवाईकेएस सदस्य के इसके अलावा विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों के युवा और खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। मैराथन में पहुंचे भाजपा विधायक गोपाल शर्मा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "'विकसित राजस्थान 2047' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के तहत राजस्थान के विकास की यात्रा का प्रतीक है, जो राज्य के ऐतिहासिक नेताओं के प्रयासों और विरासत को प्रतिबिंबित करता है।" इस मौके पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा, "आपका हौसला, आपकी उमंग निश्चित रूप से विकसित राजस्थान के संकल्प को पूरा करेगी। फिट इंडिया अभियान के माध्यम से प्रधानमंत्री ने स्वस्थ रहने का संदेश दिया है। हमारे देश में चार जातियां हैं, युवा, महिला, किसान और मजदूर। अगर ये आगे बढ़ेंगे तो देश प्रगति पथ पर आगे बढ़ेगा।" मुख्यमंत्री ने आगे कहा, "पिछली सरकार ने युवाओं के साथ विश्वासघात किया। हमारी सरकार ने लोगों को जेल भेजने का काम किया है। सवा दो साल में सवा लाख की वेकेंसी निकालने का काम हमारी सरकार ने किया है। इस दौरान एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है। आप सपनों की उड़ान के लिए तैयार रहिए, राजस्थान सरकार आपके साथ है। प्रदेश में व्यापार की अपार संभावनाएं हैं। युवा नीति के जरिए युवाओं को काम का अवसर दिया जा रहा है।" गौरतलब है कि राजस्थान दिवस के अवसर पर इस बार राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में कई सांस्कृतिक, सामाजिक और खेलकूद से जुड़े कार्यक्रमों की योजना बनाई है। इसके तहत 14 मार्च से 19 मार्च तक आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का उद्देश्य संस्कृति, विकास और युवाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

IAS मनु की संपत्ति सबसे बड़ी, मुख्य सचिव से 4 गुना ज्यादा; MP के 12 कलेक्टरों के पास नहीं है अपना घर

भोपाल   प्रदेश में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) मनु श्रीवास्तव एमपी में तैनात एसीएस स्तर के अफसरों में सबसे अमीर आइएएस हैं। उनके पास 19.50 करोड़ की अचल संपत्ति है। जबकि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा एसीएस अशोक बर्णवाल पगार के अलावा अपनी संपत्तियों से सबसे अधिक कमाने वाले अफसर हैं। बर्णवाल के पास 7.50 करोड़ की संपत्ति है। इससे उन्हें हर साल 23.68 लाख रुपए आय हो रही है।  MP में 391 IAS अधिकारियों में अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव सबसे अमीर हैं। उनके पास 19 करोड़ 50 लाख रुपए की संपत्ति है, जबकि मुख्य सचिव अनुराग जैन के पास 4 करोड़ 15 लाख रुपए की संपत्ति है। इस तरह मनु श्रीवास्तव की संपत्ति अनुराग जैन से लगभग 4.7 गुना अधिक है। इसके अलावा प्रदेश के 55 जिलों के कलेक्टरों में से 12 जिलों के कलेक्टरों के पास न तो अपना घर है और न ही खेती की जमीन है। इन अधिकारियों ने अपनी अचल संपत्ति निल बताई है। वहीं 17 कलेक्टर ऐसे भी हैं, जिनके पास मकान और दुकान के साथ-साथ खेती की जमीन भी है। कलेक्टरों में किशोर कन्याल सबसे अमीर जिला कलेक्टरों में गुना कलेक्टर किशोर कन्याल सबसे अधिक संपत्ति वाले अधिकारी हैं। उनके पास करीब 3 करोड़ 18 लाख रुपए की संपत्ति है। उनके पास दो मकान, एक प्लॉट और कृषि भूमि है, जो भोपाल, उत्तर प्रदेश और नोएडा में स्थित है। विवेक अग्रवाल के पास सबसे अधिक जमीन केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी विवेक अग्रवाल के पास सबसे अधिक जमीन है। उनके पास भटिंडा, गंगानगर, सिरसा, मुक्तसर, पंचकुला, मुल्लानपुर, इंदौर और भोपाल में मिलाकर करीब 65 एकड़ किसान जमीन है। इसके अलावा इंदौर के अपर कलेक्टर नवजीवन पवार के पास सबसे अधिक 20 अलग-अलग प्रॉपर्टी दर्ज हैं। 16 साल में 4.5 लाख का प्लॉट घटकर 1 लाख का हुआ इन सबके बीच नर्मदापुरम कलेक्टर सोनिया मीणा का मामला अलग नजर आता है। वर्ष 2010 में उन्होंने 4.5 लाख रुपए में एक प्लॉट खरीदा था। आमतौर पर समय के साथ प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ती है, लेकिन इस मामले में उल्टा हुआ। 4 लाख 50 हजार रुपए का वह प्लॉट अब घटकर केवल 1 लाख रुपए का रह गया है। यानी करीब 16 साल में उस प्लॉट की कीमत लगभग 4.5 गुना कम हो गई है। मुख्य सचिव अनुराग जैन के पास कुल 4.14 करोड़ की संपत्ति मध्य प्रदेश के प्रशासनिक मुखिया यानी प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन के पास कुल 4.14 करोड़ कीमत की अचल संपत्ति है. हालांकि उनके पास 3 राज्यों में संपत्ति है. इसमें भोपाल के प्रेमपुरा नगर में भूखंड, उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में 79 लाख कीमत का एक अंडरकंस्ट्रक्शन फ्लैट, जयपुर में एक फ्लैट और शिवाजी नगर भोपाल में 2 करोड़ 72 लाख कीमत का एक मकान है। अलका उपाध्याय के पास करोड़ों की संपत्ति,नहीं दर्शाई कीमत राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में सेक्रेटरी और मध्य प्रदेश कैडर की 1990 बैच की आईएएस अलका उपाध्याय के पास दिल्ली, गुडगांव और भोपाल में मकान, भूखंड हैं. गुडगांव में 2930 स्क्वायर फीट का फ्लैट, दिल्ली में 3244 स्क्वायर फीट पर निर्मित मकान, भोपाल में करीब 1 हजार स्क्वायर मीटर का प्लॉट है. इसके अलावा नर्मदापुरम जिले में 2 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जो उन्हें अपने पिता से मिली है. उन्होंने प्रॉपर्टी की मौजूदा कीमत नहीं बताई है।  अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा भी करोड़पति 1990 बैच के आईएएस अधिकारी और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण में अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा के पास भोपाल के मिंडोरी में 163.4 एकड़ कृषि भूमि है. इसकी कीमत उन्होंने 48 लाख रुपए बताई है. गुजरात के अहमदाबाद में 50 लाख रुपए कीमत का एक ऑफिस, मिंडोरी में 0.25 एकड़ भूमि इसकी कीमत 27 लाख रुपए दिखाई गई है. भोपाल के सेमरी बजाफ्त में 0.580 हेक्टेयर भूमि कीमत 28.92 लाख और मिडोरी में 0.25 एकड़ कृषि भूमि है. इसकी कीमत 20 लाख दिखाई गई है।  अशोक वर्णवाल के पास 7 करोड़ 50 लाख की संपत्ति वर्ष 1990 बैच के अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल के पास कुल अचल संपत्ति 7 करोड़ 50 लाख है. भोपाल के बिसनखेड़ी में 0.202 हेक्टेयर कृषि भूमि, झारखंड के डुमरी में 1200 स्क्वायर फीट का दो मंजिला मकान, बिसनखेड़ी में 0.202 हेक्टेयर कृषि भूमि और बावड़िया कला में फ्लैट भी है. इसके अलावा बावड़िया कला भोपाल में 2 फ्लैट हैं. इनकी कीमत 4.50 करोड़ रुपए है।  मनोज गोविल के पास 2 करोड़ 64 लाख की अचल संपत्ति 1991 बैच के आईएएस अधिकारी दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ मनोज गोविल ने कुल अचल संपत्ति 2 करोड़ 64 लाख दशाई है. भोपाल के तुलसी नगर में उनका एक फ्लैट, गुडगांव, हरियाणा में एक फ्लैट है।  अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव के पास 20 करोड़ की अचल संपत्ति 1991 बैच के नवकरर्णीय ऊर्जा में अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव का प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में पुस्तैनी 699.86 स्क्वायर मीटर का मकान है, इसकी कीमत 16 करोड़ रुपए है. इसके अलावा गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश में 3.50 करोड़ रुपए कीमत का एक प्लॉट है।  आशीष श्रीवास्तव भी करोड़पति, नहीं दर्शाई संपत्ति की कीमत 1992 बैच के आईएएस और दिल्ली में केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ आशीष श्रीवास्तव के पास भोपाल के गौंदरमऊ में 240 स्क्वायर मीटर प्लॉट और हरियाणा गुरूग्राम में 2 फ्लैट हैं. इसकी खरीद के समय कीमत 66 लाख रुपए दर्शाई गई है. अपर मुख्य सचिव कैलाश चंद्र गुप्ता के पास करोड़ों की संपत्ति 1992 बैच के आईएएस अपर मुख्य सचिव कैलाश चंद्र गुप्ता के पास जाटखेड़ी, भोपाल में 3858 स्क्वायर फीट पर निर्मित मकान, कटारा, भोपाल में 0.1़6 हेक्टेयर कृषि भूमि, गौहरगंज रायसेन में 220 स्क्वायर मीटर का प्लॉट, इंदौर में 6877 स्क्वायर फीट का प्लॉट और अरेरा कॉलोनी, भोपाल में 588 स्क्वायर मीटर पर मकान है, जिसकी खरीद के समय कीमत 3.95 करोड़ रुपए थी।  वीएल कांताराव के पास भोपाल, तमिलनाडु में करोड़ों की संपत्ति 1992 बैच के आईएएस और केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में पदस्थ वीएल कांताराव का कटारा हिल्स, भोपाल में 0.75 एकड़ भूमि और कांजीपुरम, तमिलनाडु में 2500 स्क्वायर फीट का प्लॉट है।  अनिरूद्ध मुखर्जी के पास 8 करोड़ 45 लाख की संपत्ति 1993 बैच … Read more

LPG सिलेंडर कालाबाजारी पर कड़ी नजर, 2,554 जगहों पर की गई छापेमारी और निरीक्षण

LPG सिलेंडरों की कालाबाजारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी, 2,554 स्थानों पर निरीक्षण व छापेमारी 40 एफआईआर, 8 गिरफ्तार, 37 व्यक्तियों को किया गया अभियोजित आपूर्ति व्यवस्था पर कड़ी निगरानी, सभी जनपदों में स्थापित किए गए 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम उपभोक्ताओं को बुकिंग के सापेक्ष 4,108 एलपीजी वितरकों के माध्यम से सुनिश्चित कराई गई रिफिल डिलीवरी वितरकों के यहां आवश्यतानुसार एलपीजी सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर खाद्य एवं रसद विभाग तथा जिला प्रशासन द्वारा आम नागरिकों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आवश्यतानुसार उपलब्धता सुनिश्चित कराने के साथ ही एलपीजी गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी/अवैध बिक्री रोकने के लिए लगतार निरीक्षण व छापेमारी की कार्रवाई की जा रही है। कालाबाजारी पर कसा कानून का शिकंजा इसी क्रम में जनपद स्तर पर प्रवर्तन टीमों द्वारा विगत दो दिनों में कुल 2,554 स्थानों पर निरीक्षण और छापेमारी की कार्रवाई की गई। इस दौरान एलपीजी वितरकों के विरुद्ध 5 एफआईआर दर्ज कराई गईं। इसके साथ ही एलपीजी गैस की कालाबाजारी में संलिप्त अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध 35 एफआईआर दर्ज की गईं। मौके से 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 37 व्यक्तियों को अभियोजित किए जाने की कार्रवाई की गई है। मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम सुनिश्चित किए जाएं। प्रदेशभर में आपूर्ति व्यवस्था की लगातार निगरानी के साथ निरीक्षण व छापेमारी की कार्रवाई की जा रही है, जिससे कहीं भी किसी प्रकार की कमी या अव्यवस्था न होने पाए। सुनिश्चित कराई गई एलपीजी रिफिल डिलीवरी प्रदेश के 4,108 एलपीजी गैस वितरकों के यहां एलपीजी सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और उपभोक्ताओं को वितरकों के माध्यम से बुकिंग के सापेक्ष आवश्यकतानुसार एलपीजी रिफिल की डिलीवरी सुनिश्चित कराई गई है। भारत सरकार ने कमर्शियल सिलेंडरों की कुल खपत के 20 प्रतिशत तक आवंटन की अनुमति प्रदान की है, जिससे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी गैस आपूर्ति प्रभावित न हो। 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम, फील्ड में सक्रिय प्रशासन आपूर्ति व्यवस्था की लगातार निगरानी और किसी भी समस्या के त्वरित समाधान के लिए खाद्यायुक्त कार्यालय में 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जिसमें खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों को तैनात किया गया है। होम कंट्रोल रूम में भी विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी जिलों में भी कंट्रोल रूम बनाए गए हैं, जो लगातार कार्य कर रहे हैं। जिला पूर्ति कार्यालय और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी उपभोक्ताओं को एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार फील्ड में भ्रमण कर रहे हैं।

ICC ने पाकिस्तानी बल्लेबाज सलमान अली आगा को दी फटकार, खाते में डिमेरिट पॉइंट जुड़ा

ढाका  बांग्लादेश के खिलाफ दूसरे वनडे मैच के दौरान अपना आपा खोना पाकिस्तानी क्रिकेटर सलमान अली आगा को भारी पड़ गया है। आईसीसी (ICC) ने आचार संहिता के उल्लंघन के लिए उन्हें आधिकारिक तौर पर फटकार लगाई है। शुक्रवार को ढाका में खेले गए मैच के दौरान सलमान आगा को बांग्लादेशी कप्तान मेहदी हसन मिराज ने रन आउट किया था। इस विवादित रन आउट को आगा ने 'खेल भावना के खिलाफ' माना। आउट होकर पवेलियन लौटते समय उन्होंने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए हेलमेट और ग्लव्स सीमा रेखा (बाउंड्री) के पास फेंक दिए थे। अनुच्छेद 2.2 का उल्लंघन: उन्हें आईसीसी आचार संहिता के अनुच्छेद 2.2 का दोषी पाया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान खेल सामग्री या उपकरणों के साथ दुर्व्यवहार से संबंधित है। सजा: फटकार के साथ-साथ आगा के 'डिसिप्लिनरी रिकॉर्ड' में एक डिमेरिट अंक (Demerit Point) जोड़ दिया गया है। स्वीकारोक्ति: मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में सलमान ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माना कि उन्होंने यह कृत्य गुस्से में किया था। जय शाह ने पाकिस्तान-बांग्लादेश ड्रामे पर तोड़ी चुप्पी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के अध्यक्ष जय शाह ने टी20 विश्व कप 2026 से पहले हुए विवाद पर पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। शाह ने कहा है कि कोई भी देश या टीम संगठन से बड़ी नहीं होती। आईसीसी सभी सदस्य टीमों के सामूहिक प्रयास से चलता है। एक अवॉर्ड समारोह में जय शाह ने कहा, "विश्व कप से पहले काफी अटकलें लगाई जा रही थीं कि कुछ टीमें हिस्सा लेंगी या नहीं। आईसीसी अध्यक्ष के तौर पर मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि कोई भी टीम संगठन से बड़ी नहीं होती। कोई एक टीम मिलकर संगठन नहीं बनाती, बल्कि सभी टीमों के साथ मिलकर ही संगठन चलता है।" जय शाह ने बताया कि इस विश्व कप ने दर्शकों के मामले में इतिहास रच दिया। कुल व्यूअरशिप के सभी पुराने रिकॉर्ड टूट गए। एसोसिएट टीमों ने शानदार प्रदर्शन किया। यूएसए ने भारत को, नीदरलैंड ने पाकिस्तान को और नेपाल ने इंग्लैंड को कड़ी टक्कर दी। जिम्बाब्वे जैसी छोटी टीम ने ऑस्ट्रेलिया को हरा दिया। आईसीसी अध्यक्ष ने भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर और टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव को भविष्य के लिए लगातार मेहनत करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि टीम को 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक सहित आने वाले बड़े टूर्नामेंटों को ध्यान में रखते हुए अभी से तैयारी करनी चाहिए। विश्व कप से पहले विवाद तब शुरू हुआ था, जब बांग्लादेश क्रिकेट टीम ने भारत आने से इनकार कर दिया था। इसके बाद आईसीसी ने बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया था और उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया था। पाकिस्तान ने इसके बाद बांग्लादेश के समर्थन में विश्व कप के बहिष्कार की धमकी दी थी। पाकिस्तान का कहना था कि आईसीसी बांग्लादेश के साथ गलत व्यवहार कर रही है। पाकिस्तान ने पहले पूरे टूर्नामेंट के बहिष्कार की बात कही, फिर भारत के साथ ग्रुप स्टेज का मुकाबला न खेलने की बात कही। आईसीसी की मध्यस्थता और बांग्लादेश पर किसी तरह का बैन न लगाए जाने के वादे के बाद पाकिस्तान ने यू-टर्न ले लिया और भारत के खिलाफ मैच खेला। पाकिस्तान सुपर-8 से आगे नहीं बढ़ सकी, जबकि भारतीय टीम ने लगातार दूसरा टी20 विश्व कप जीता। 

बादशाह को मिली बिश्नोई गैंग से धमकी, लॉरेंस ने कहा- अगली बार गोली माथे पर

चंडीगढ़  पिछले कुछ समय से कई सेलेब्स को धमकियां मिल रही हैं। अब खबर आ रही है कि इंडियन रैपर और सिंगर बादशाह को जान से मारने की धमकी मिली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह धमकी, लॉरेंस बिश्नोई गैंग की तरफ से मिली है और फोन कॉल के जरिए धमकी मिली है। फेसबुक पर एक पोस्ट वायरल हो रहा है। रंदीप मलिक अनिल पंडित नाम का अकाउंट है जिसमें यह दावा किया गया है कि वो बिश्नोई गैंग से हैं। इसी पोस्ट में सिंगर को धमकी दी गई है। पोस्ट में क्या धमकी दी गई है उसी पोस्ट में बिश्नोई गैंग ने गैरी और शैंकी के पानीपत ऑफिस में शटिंग की जिम्मेदारी भी ली। शूटिंग के पीछे की वजह बताते हुए उस पोस्ट में दावा किया गया कि वो हवाला में शामिल थे। उन्होंने फिर बाकी सबको वॉर्न किया जो हवाला एक्टिविटीज में शामिल हैं। 2024 में बादशाह के क्लब में हुए हमले पर भी कहा पोस्ट में लिखा गया है, सिंगर बादशाह ने हरियाणा के कल्चर को खराब करने की कोशिश की। इससे पहले 2024 में हमने आपको एक ट्रेलर दिखाया था आपके क्लब में, इस बार हम आपको डायरेक्टली आपके माथे पर शूट करेंगे। क्यों हो रहा है विवाद ऐसा कहा जा रहा है कि बादशाह को उनके हाल ही में रिलीज हुए हरियाणा गाने टटीरी को लेकर धमकी दी जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस गाने की एक लाइन को लेकर विवाद हो रहा है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि लिरिक्स में महिलाओं के लिए गलत शब्दों का यूज किया गया है। सिंगर के खिलाफ हरियाणा में एक्शन हरियाणा में सिंगर के खिलाफ लीगल एक्शन भी लिया गया है। वहीं अब गाने को प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया गया है। बादशाह ने मांगी माफी वहीं बादशाह ने फिर विवाद के बाद सोशल मीडिया पर माफी भी मांगी है। उन्होंने कहा कि वह काफी दुखी हैं कि उनके गाने से हरियाणा के लोगों की फीलिंग्स काफी हर्ट हुई है। वह बोले, आप हरियाणा का बेटा समझ कर माफ करेंगे। पुलिस कर रही है जांच पुलिस इन्वेस्टिगेशन कर रही है इस धमकी को लेकर। ऑफिशियल्स का कहना है कि वे चेक कर रहे हैं कि ये बिश्नोई गैंग के मेंबर का ही मैसेज है। सिक्योरिटी एजेंसी भी सोशल मीडिया पोस्ट को मॉनिटर कर रहे हैं। वैसे बता दें कि बादशाह ने अब तक इस धमकी को लेकर कोई स्टेटमेंट नहीं दिया है। देखते हैं सिंगर क्या कहते हैं।

लुधियाना का साइकिल हब बदलेगा तस्वीर: अब ‘सवारी’ नहीं, लाइफस्टाइल प्रोडक्ट बनेगी साइकिल

चंडीगढ़. “पुर्जों से प्लेटफार्म तक विश्व बाजार के लिए पंजाब की अगली पीढ़ी की साइकिलें” विषय पर आयोजित “साइकिल और ई-बाइक्स” सत्र में पंजाब के साइकिल उद्योग के विकास व विस्तार पर चर्चा हुई। एवन साइकिल के चेयरमैन और प्रबंधकीय निदेशक ओंकार सिंह पाहवा ने कहा कि पंजाब एक व्यवसाय अनुकूल वातावरण तैयार कर रहा है, जिससे उद्यमियों को अपने लक्ष्यों को साकार आसानी हो रही है। एमएसई के लिए विस्तारित स्व-प्रमाणीकरण और सिंगल-पाइंट रजिस्ट्रेशन जैसी प्रक्रिया प्रोजेक्ट को लगाने में तेजी लाएगी और निवेश को रोजगार, निर्यात तथा औद्योगिक उत्पादन में बदल देगी। उन्होंने कहा कि राज्य में 4,000 से अधिक एमएसएमई निर्माता और 100 से अधिक मध्यम और बड़े साइकिल निर्माता प्रतिवर्ष लगभग 2.2 मिलियन साइकिलों का उत्पादन करते हैं, जिससे भारत दुनिया के सबसे बड़े साइकिल उत्पादक देशों में शामिल हो गया। उन्होंने कहा कि पंजाब के पास कंपोनेंट्स और कच्चे माल की बड़ी क्षमता है तथा विश्वस्तरीय टायर निर्माण क्षमता इस क्षेत्र को और मजबूती प्रदान करती है। रॉलसन इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक संजीव पाहवा ने साइकिल उद्योग के ऐतिहासिक विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 1970 और 1980 के दशक में स्वदेशी तकनीक और सहायक ईकोसिस्टम ने टायर और ट्यूब निर्माण उद्योग के विकास को संभव बनाया, जो आज घरेलू और विश्व बाजारों में अपनी पहचान बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि बदलते परिवहन पैटर्न, आर्थिक समृद्धि और मोटरसाइकिलों की बढ़ती प्राथमिकता के कारण साइकिलों का मुख्य परिवहन साधन के रूप में महत्व कम हुआ है और उद्योग अब एक नए मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने सुझाव दिया कि साइकिलों को खेल, मनोरंजन, स्वास्थ्य और टिकाऊ शहरी परिवहन के साधन के रूप में पुनः स्थापित करके इस उद्योग को नया जीवन दिया जा सकता है।

SSP का जंबो ट्रांसफर ऑर्डर: रायगढ़ में 219 पुलिसकर्मी इधर से उधर, कई ASI बदले गए

रायगढ़. पुलिस विभाग में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया है। एसएसपी शशि मोहन सिंह ने लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ पुलिसकर्मियों को हटाते हुए जंबो ट्रांसफर आदेश जारी किया है। इस आदेश में एक एसआई, करीब एक दर्जन एएसआई सहित कुल 219 पुलिसकर्मियों को अलग-अलग थानों और इकाइयों में नई जिम्मेदारी दी गई है। प्रशासनिक व्यवस्था होगी मजबूर एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और जिले में लॉ एंड ऑर्डर को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह तबादला सूची जारी की गई है। इसके तहत कई पुलिसकर्मियों को नई जगहों पर पदस्थ किया गया है। विभिन्न विभागों में प्रशासनिक कसावट और कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर स्थानांतरण किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बिलासपुर जिले में एक बार फिर पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल किया गया है। पुलिस विभाग में प्रशासनिक कसावट लाने और लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ पुलिसकर्मियों को बदलने के उद्देश्य से तबादले किए गए हैं। इस संबंध में एसएसपी रजनेश सिंह ने आदेश जारी किया है। 130 पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण जारी आदेश के अनुसार, जिले में कुल 130 पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण किया गया है। इनमें 3 उप निरीक्षक (SI), 10 सहायक उप निरीक्षक (ASI), 23 प्रधान आरक्षक और 94 आरक्षक शामिल हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस फेरबदल का उद्देश्य कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाना तथा व्यवस्था में कसावट लाना है।

बलरामपुर में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: अफीम की अवैध खेती के बाद वर्षों से जमे 58 पटवारी हटाए गए

बलरामपुर. जिले में हाल ही में सामने आए अवैध अफीम की खेती के मामलों के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए राजस्व विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। कलेक्टर राजेंद्र कुमार कटारा ने एक साथ 58 पटवारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। इस निर्णय के तहत कई तहसीलों में वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ पटवारियों को हटाकर अन्य स्थानों पर भेजा गया है। जारी आदेश के अनुसार राजपुर, रामानुजगंज, कुसमी, वाड्रफनगर, शंकरगढ़, रघुनाथनगर और बलरामपुर सहित कई तहसीलों के पटवारियों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण किया गया है। प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य राजस्व व्यवस्था में कसावट लाना, कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और लंबे समय से एक ही जगह पदस्थ कर्मचारियों के कारण बन रही प्रशासनिक ढिलाई को दूर करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सूत्रों के अनुसार हाल के दिनों में जिले के विभिन्न इलाकों में अवैध अफीम की खेती के मामले सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठ रहे थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने राजस्व तंत्र में सख्ती दिखाते हुए यह बड़ा फैसला लिया है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पटवारियों के तबादले को प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी स्थानांतरित पटवारियों को 13 मार्च 2026 से तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाएगा। साथ ही सभी संबंधित पटवारियों को 16 मार्च 2026 तक अपने नए पदस्थापना स्थल पर अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर कार्यभार ग्रहण करना होगा। जिला प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि आदेश का पालन नहीं करने या निर्धारित समय में नई पदस्थापना स्थल पर जॉइन नहीं करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने और लापरवाही पर अंकुश लगाने की दिशा में बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में प्रशासन राजस्व विभाग में और भी सख्ती बरत सकता है।