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योगी सरकार की सतत पर्यटन की नीति के तहत विकसित हो रहा है श्रावस्ती में बुद्धवनम पार्क

लखनऊ श्रावस्ती देश-प्रदेश का ही नहीं, विश्व में बौद्ध धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। यही कारण है कि श्रावस्ती में श्रीलंका, म्यांमार, नेपाल, भूटान, थाईलैंड, चीन और जापान सहित कई देशों से बौद्ध श्रद्धालु और पर्यटक आते रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सतत पर्यटन के विजन के अनुरूप श्रावस्ती में बुद्धवनम पार्क का निर्माण किया जा रहा है। बुद्धवनम पार्क का निर्माण कार्य इस वर्ष जून के अंत तक पूरा होने की संभावना है। इस परियोजना के पूरा होने से प्रदेश में बौद्ध पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है, साथ ही यह पार्क राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिए एक आकर्षक केंद्र के रूप में विकसित होगा। बुद्धवनम पार्क में लैंडस्केप कार्य लगभग पूरा उत्तर प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के नए आयाम विकसित करने के उद्देश्य से केंद्र एवं राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से जनपद श्रावस्ती में बुद्धवनम पार्क का निर्माण कार्य किया जा रहा है। जिसके तहत पार्क के लैंडस्केप क्षेत्र में कई प्रमुख संरचनाओं का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। परियोजना के अंतर्गत धर्म चक्र से संबंधित आठ संरचनाओं के आरसीसी फाउंडेशन का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। साथ ही म्यूरल वॉल के लिए भी आरसीसी स्ट्रक्चर बन चुका है। इस पर सौंदर्यीकरण का कार्य किया जा रहा है। परिसर में बनाए जा रहे सेंटर पाथ-वे और स्टेप गैलरी के लिए ब्रिक वर्क का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। इससे पार्क का मुख्य संरचनात्मक स्वरूप स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। पार्क के आसपास स्ट्रीट ब्यूटीफिकेशन के तहत सड़क के दोनों किनारों पर आरसीसी रिटेनिंग वॉल का निर्माण, केबल ट्रेंच, स्टोन बोलार्ड, विशेष लैंप पोस्ट और पाथ-वे पर स्टोन क्लैडिंग जैसे कार्य किए जा रहे हैं। इंटरप्रिटेशन सेंटर, डॉर्मेट्री और गेट पिलर के निर्माण कार्य जल्द होंगे पूरे बुद्धवनम पार्क में आने वाले पर्यटकों को बौद्ध धर्म और क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से बनाए जा रहे इंटरप्रिटेशन सेंटर के कॉलम ढलाई का कार्य प्रगति पर है, जो जल्द ही बनकर तैयार हो जाएगा। इसके अतिरिक्त तैयार की जा रही डॉर्मेट्री के आंतरिक प्लास्टर और फ्लोरिंग का कार्य भी अंतिम चरण में है। साथ ही पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पार्किंग व्यवस्था भी विकसित की जा रही है। दोपहिया वाहनों के लिए पार्किंग का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जबकि चारपहिया वाहनों के लिए पार्किंग क्षेत्र का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इन व्यवस्थाओं के पूरा होने के बाद क्षेत्र की सुंदरता और पर्यटन अनुभव में उल्लेखनीय सुधार होगा। बुद्धवनम पार्क के विकसित होने से श्रावस्ती में बौद्ध पर्यटन को नया आयाम मिलेगा साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।

विश्वभर के विद्वान जुटेंगे ब्रैम्पटन में, तीन दिन तक चलेगा पंजाबी विचारों का महोत्सव

चंडीगढ़ कनाडा के ब्रैम्पटन में 17 से 19 जुलाई तक 12वां विश्व पंजाबी सम्मेलन आयोजित होगा। इसमें दुनिया भर के लेखक, विद्वान और सामाजिक चिंतक पंजाबी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण तथा वैश्विक विस्तार पर चर्चा करेंगे। ब्रैम्पटन में होगा विश्व पंजाबी सम्मेलन कनाडा के शहर Brampton में 17 से 19 जुलाई तक 12वां विश्व पंजाबी सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। यह तीन दिवसीय आयोजन पंजाबी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। सम्मेलन में विभिन्न देशों से लेखक, शिक्षाविद, कलाकार और सामाजिक चिंतक भाग लेंगे और पंजाबी समाज से जुड़े अहम मुद्दों पर विचार साझा करेंगे। सम्मेलन को पंजाबी चिंतकों और रचनाकारों के बड़े मंच के रूप में देखा जा रहा है, जहां भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम में साहित्यिक सत्र, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और संवाद आयोजित किए जाएंगे, जिनमें प्रवासी पंजाबी समुदाय के योगदान और बदलते वैश्विक परिदृश्य में पंजाबी संस्कृति की भूमिका पर विशेष फोकस रहेगा। भाषा और संस्कृति के संरक्षण पर मंथन इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य पंजाबी भाषा के संरक्षण, प्रचार और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी विरासत पहुंचाने के उपायों पर विचार करना है। विशेषज्ञ इस बात पर चर्चा करेंगे कि डिजिटल युग और प्रवासी समाज के बढ़ते प्रभाव के बीच पंजाबी भाषा को कैसे मजबूत बनाया जा सकता है और इसे शिक्षा तथा सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से कैसे आगे बढ़ाया जाए। सम्मेलन में दुनिया के कई देशों से पंजाबी समुदाय के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो अपने अनुभव और पहल साझा करेंगे। आयोजकों का मानना है कि विदेशों में बसे पंजाबी समाज ने भाषा और संस्कृति को जीवित रखने में अहम योगदान दिया है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से विभिन्न देशों में रहने वाले पंजाबी समुदाय के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा मिलता है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों से बढ़ेगा उत्साह तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान साहित्यिक चर्चाओं के साथ-साथ संगीत, कविता पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से पंजाबी कला और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि भाषा और संस्कृति के प्रति जुड़ाव और मजबूत हो सके।

कौन सी मंजिल बनाती है घर को भाग्यशाली? वास्तु के अनुसार जानिए कीमती चीजें रखने की सही जगह

वास्तुशास्त्र के प्राचीन विज्ञान में केवल दिशाओं का ही नहीं, बल्कि ऊंचाई और धरातल का भी विशेष महत्व बताया गया है। जब हम बहुमंजिला इमारतों की बात करते हैं, तो अक्सर मन में यह सवाल आता है कि कौन सा फ्लोर हमारे लिए सौभाग्य लेकर आएगा और किस मंजिल पर अपनी गाढ़ी कमाई या कीमती सामान रखना सुरक्षित और समृद्धशाली होगा। वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार, पृथ्वी की ऊर्जा और चुंबकीय क्षेत्र का प्रभाव हर मंजिल पर अलग-अलग होता है। आइए जानते हैं मंजिलों का रहस्य और कीमती सामान रखने की सही जगह। कौन सी मंजिल है सबसे भाग्यशाली ? वास्तुशास्त्र में धरातल और प्रथम तल को सबसे अधिक ऊर्जावान माना गया है। इसका कारण यह है कि ये मंजिलें पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र और गुरुत्वाकर्षण बल के सबसे करीब होती हैं। पृथ्वी से मिलने वाली धैर्य और स्थिरता की ऊर्जा यहां रहने वालों को मानसिक शांति और आर्थिक मजबूती प्रदान करती है। हालांकि, आधुनिक वास्तु के अनुसार, यदि आप किसी ऊंची इमारत में रह रहे हैं, तो चौथी, नौवीं और ग्यारहवीं मंजिल को भी शुभ माना जाता है। लेकिन यहाँ एक महत्वपूर्ण नियम यह है कि आप जिस भी फ्लोर पर रहें, वहां की ढलान और दिशाओं का संतुलन सही होना चाहिए। यदि आप ऊंचे फ्लोर पर रहते हैं, तो आपको अपने घर में अधिक से अधिक प्राकृतिक रोशनी और हवा का प्रबंधन करना चाहिए क्योंकि ऊंचाई पर वायु तत्व प्रधान हो जाता है, जिससे कभी-कभी स्वभाव में अस्थिरता आ सकती है। कीमती सामान और धन रखने का वास्तु रहस्य दक्षिण-पश्चिम कोना अपनी कीमती ज्वेलरी, जमीन के कागजात और नकदी रखने के लिए घर का दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) हिस्सा सबसे उपयुक्त होता है। यह कोना पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जो स्थिरता देता है। इस दिशा में रखी गई संपत्ति में फिजूलखर्ची कम होती है और संचय बढ़ता है। उत्तर दिशा उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा माना जाता है। यदि आप अपनी तिजोरी या अलमारी को उत्तर दिशा की दीवार से सटाकर रखते हैं और उसका मुख उत्तर की ओर ही खुलता है, तो यह धन के नए अवसर पैदा करता है। ध्यान रखें कि तिजोरी के सामने कोई शीशा न हो और वह सीधे मुख्य द्वार के सामने न दिखाई दे। किस फ्लोर पर क्या रखने से बचेगा पैसा  ? यदि आप ग्राउंड फ्लोर पर रहते हैं, तो अपनी तिजोरी को फर्श से थोड़ा ऊपर स्टैंड पर रखें। जमीन से सीधे सटाकर धन रखना ऊर्जा को 'ग्राउंड' कर सकता है, जिससे पैसा टिकता नहीं है। यदि आप ऊपरी मंजिलों पर रहते हैं, तो वहां आकाश तत्व की अधिकता होती है। यहां धन को सुरक्षित रखने के लिए भारी लकड़ी की अलमारी का उपयोग करना चाहिए। भारीपन स्थिरता का प्रतीक है जो ऊपरी मंजिलों की चंचलता को संतुलित करता है। भूलकर भी न करें ये गलतियां सीढ़ियों के नीचे का स्थान: कई लोग जगह बचाने के लिए सीढ़ियों के नीचे स्टोर रूम या अलमारी बना देते हैं। वास्तु के अनुसार, यहाँ कीमती सामान रखने से कर्ज बढ़ता है और व्यापार में घाटा हो सकता है। अंधेरा कोना: जहां आप धन रखते हैं, वहां कभी भी अंधेरा नहीं होना चाहिए। वहां एक छोटा सा बल्ब या रोशनी की व्यवस्था अवश्य रखें ताकि लक्ष्मी का आगमन स्पष्ट हो सके।

प्रयागराज के परेड मैदान से केशव मौर्य का हुंकार, 2027 में ‘साइकिल पंचर’ का दिया नारा

प्रयागराज उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भाजपा की ओर से परेड मैदान पर आयोजित होली व वसंतोत्सव में शामिल हुए। उन्होंने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए कमर कस लें। हमें साइकिल पंचर करके 2017 से बड़ी जीत हासिल करनी है। प्रधानमंत्री मोदी हैं, इसलिए आप चिंता न करिए डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा कि रसोई गैस की देश में कमी नहीं है। सपाई और कांग्रेसी अफवाह फैला रहे हैं। आपकी देखभाल के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं इसलिए आप किसी प्रकार की चिंता न करिए। सरकार गरीब को अमीर बनाने का रास्ता बना रही है, उसमें सहयोग करिए। उन्होंने कहा कि आपके ईवीएम बटन दबाने से अयोध्या में प्रभु श्रीराम का मंदिर बना, काशी सजी और धारा 370 को उखाड़ फेंका गया।  

पांच राज्यों में चुनाव का ऐलान, बंगाल में दो फेज तो चार राज्यों में एक फेज में वोटिंग

नई दिल्ली  पश्चिम बंगाल, असम समेत पांच राज्यों/केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो गई है। पश्चिम बंगाल में दो चरण में मतदान होंगे, जबकि तमिलनाडु, असम, पुडुचेरी और केरल में सभी सीटों पर एक ही फेज में वोट डाले जाएंगे। सभी राज्यों के नतीजों का ऐलान चार मई को होगा। बंगाल में पहले चरण के तहत 23 अप्रैल को वोटिंग होगी, जबकि दूसरे फेज में 29 अप्रैल को मतदान होगा। असम, केरल और पुडुचेरी की सभी सीटों पर 9 अप्रैल को वोटिंग होगी, जबकि तमिलनाडु की सभी विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। पांच राज्यों में कुल 17.4 करोड़ वोटर्स मतदान करेंगे और कुल विधानसभा सीटें 824 हैं। इन राज्यों में चुनाव को सफलतापूर्वक संपन्न करवाने के लिए चुनाव आयोग 25 लाख कर्मचारियों की तैनाती करेगा। इस महीने की शुरुआत में चुनाव आयोग ने इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश का दौरा किया था और चुनावी तैयारियों का जायजा लिया था। आयोग ने इन राज्यों में राजनीतिक दलों, सुरक्षा एजेंसियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया है। किस राज्य में कब होगा मतदान पश्चिम बंगाल-दो फेज- 23 अप्रैल और 29 अप्रैल- चार मई रिजल्ट तमिलनाडु- एक फेज- 23 अप्रैल- चार मई रिजल्ट असम- एक फेज- 9 अप्रैल- चार मई रिजल्ट केरल- एक फेज- 9 अप्रैल- चार मई रिजल्ट पुडुचेरी- एक फेज- 9 अप्रैल- चार मई रिजल्ट संवाददाता सम्मेलन में चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधु और विवेक जोशी भी उपस्थित थे। ज्ञानेश कुमार ने कहा, "आयोग प्रत्येक मतदाता का मतदान केंद्र पर स्वागत करने के लिए तैयार है। हम खासकर पहली बार वोट डालने वाले और युवा मतदाताओं से अपील करते हैं कि वे अपने मताधिकार का उत्साह, आत्म सम्मान और विवेक के साथ प्रयोग कर लोकतंत्र में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।" 17.4 करोड़ वोटर्स डालेंगे वोट मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि पांच राज्यों में 17.4 करोड़ वोटर्स मतदान करेंगे। इन सभी राज्यों को मिलाकर कुल 824 विधानसभा सीटें हैं। 2.19 लाख पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। सीईसी के अनुसार, असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में प्रति पोलिंग बूथ पर मतदाताओं की औसत संख्या 750-900 है। उन्होंने मतदाताओं के बारे में ब्योरा देते हुए बताया कि अंतिम सूची के अनुसार असम में लगभग 2.25 करोड़, केरल में 2.7 करोड़, पुडुचेरी में 9.44 लाख, तमिलनाडु में 5.67 करोड़ मतदाता होंगे। और पश्चिम बंगाल में, 28 फरवरी को जारी अंतिम सूची में 6.44 करोड़ मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा, माननीय न्यायाधीशों के निर्णय के बाद जो भी पूरक सूची आएगी, उसे भी इसमें जोड़ दिया जाएगा।" किस राज्य में कब खत्म हो रहा कार्यकाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC) ने कहा, ''असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के मतदाता। पिछले कुछ दिनों के दौरान, आयोग ने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए चुनाव वाले सभी राज्यों का दौरा किया। इन दौरों के दौरान, आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से मुलाकात की और उनके सुझाव प्राप्त किए। आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों, एसपी, आईजी, डीआईजी और सभी प्रवर्तन एजेंसियों के नोडल अधिकारियों से भी मुलाकात की। आयोग ने संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, मुख्य सचिवों और डीजीपी के साथ भी बैठकें कीं।" असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को, केरल विधानसभा का 23 मई को, तमिलनाडु विधानसभा का 10 मई को और पश्चिम बंगाल विधानसभा का सात मई को तथा पुडुचेरी विधानसभा का कार्यकाल 15 जून को समाप्त हो रहा है। इन तारीखों से पहले ही यहां नई विधानसभा का गठन होना है।  

नीरा साहू ने आत्मविश्वास के साथ संभाल रहीं अपनी दुकान

रायपुर ग्रामीण अंचल की महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास और स्वावलंबन का नया सवेरा छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं ने लाया है। सरगुजा जिले के ग्राम गुमराकलां की रहने वाली  नीरा साहू इसका जीवंत उदाहरण हैं। बिहान (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) और महतारी वंदन योजना के संगम ने उन्हें एक साधारण गृहिणी से एक सफल उद्यमी बना दिया है। समूह से जुड़ाव और स्वरोजगार की शुरुआत             नीरा साहू बताती हैं कि उनकी सफलता की कहानी सरस्वती स्व-सहायता समूह से जुड़ने के साथ शुरू हुई। समूह के माध्यम से उन्होंने 17,000 का ऋण प्राप्त किया, जिसे उन्होंने अपनी छोटी सी दुकान में निवेश किया। धीरे-धीरे दुकान चल पड़ी और उनकी आय में वृद्धि होने लगी। महतारी वंदन योजना का मिला संबल          नीरा के हौसलों को तब और उड़ान मिली जब उन्हें शासन की महतारी वंदन योजना का लाभ मिलना शुरू हुआ। उन्होंने इस सहायता राशि का सदुपयोग अपनी दुकान के विस्तार के लिए किया। आज वे न केवल अपनी दुकान का कुशलतापूर्वक संचालन कर रही हैं, बल्कि खेती-बाड़ी के कार्यों में भी हाथ बंटाकर परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही हैं। बच्चों की शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य     आर्थिक स्वतंत्रता का सबसे बड़ा प्रभाव उनके बच्चों की शिक्षा पर पड़ा है। नीरा अपने तीनों बच्चों को मॉडल स्कूल में पढ़ा रही हैं। उनका कहना है कि पहले वे केवल घर तक सीमित थीं, लेकिन अब वे पूरे आत्मविश्वास के साथ व्यवसाय और परिवार दोनों की जिम्मेदारी निभा रही हैं। शासन की योजनाओं का जताया आभार        अपनी प्रगति से उत्साहित नीरा साहू कहती हैं कि बिहान योजना महिलाओं में बदलाव ला रही है। आज  ग्रामीण महिलाओं में आत्मविश्वास से आत्मनिर्भरता की ओर बढ रही हैं, इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का सहृदय आभार व्यक्त किया, उन्होंने कहा कि हम जैसी ग्रामीण महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर और संबल प्रदान किया है।

“स्कूटी दीदी” एनु की उड़ान

रायपुर सपनों को उड़ान देने के लिए पंख नहीं, साहस और संकल्प की जरूरत होती है। इसी बात को सत्य साबित किया है छत्तीगसढ के धमतरी की एक साधारण लेकिन जुझारू युवती एनु ने, जो आज “स्कूटी दीदी” के नाम से जानी जाती हैं। संसाधनों की कमी, सामाजिक दबाव और सीमित अवसरों के बावजूद एनु ने न केवल आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को भी सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई।           एनु का जन्म एक सामान्य ग्रामीण परिवार में हुआ, जहाँ आर्थिक स्थिति सशक्त नहीं थी। परिवार में आय के सीमित स्रोत थे, और लड़कियों की शिक्षा को लेकर अब भी संकोच और संकीर्ण सोच (prevalent ) थी। परन्तु एनु की सोच इससे बिल्कुल अलग थी। वे हमेशा कुछ नया करने और अपने पैरों पर खड़े होने की इच्छा रखती थीं। कठिनाइयों और प्रतिकूलताओं के बीच भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अर्थशास्त्र में परास्नातक(Post Graduation inEconomics) की उपाधि हासिल की। यह उपलब्धि ही अपने आप में उनके संघर्ष और लगन का प्रतीक थी।           एनु का लक्ष्य केवल डिग्री लेनी ही मंज़िल नहीं थी। एनु जानती थीं कि केवल शिक्षा से रोजगार नहीं मिलेगा, जब तक उनके पास कोई कौशल न हो। इसी सोच के साथ उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान से जुड़कर सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण लिया। इस प्रशिक्षण ने उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में पहला मजबूत कदम उठाने का अवसर दिया। लेकिन उनका सपना सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं था।          एनु का अगला कदम था -मोबिलिटी यानी गतिशीलता की। वे चाहती थीं कि खुद स्कूटी चला सकें, ताकि गांव-गांव जाकर महिलाओं से मिलें, प्रशिक्षण दें और उनके जीवन को बदलने में योगदान दे सकें, लेकिन एक ग्रामीण युवती के लिए दोपहिया वाहन चलाना समाज के लिए असामान्य बात थी। इसके लिए उन्हें न केवल आत्मसंदेह से लड़ना पड़ा, बल्कि समाज की रूढ़िवादी सोच से भी लडना पडा। यही पर ‘प्रथम संस्था’ (PRATHAM Foundation) ने उन्हें स्कूटी चलाने का प्रशिक्षण दिया। पहले-पहले जब उन्होंने स्कूटी की चाबी हाथ में ली, तो लोगों ने ताने दिए – “लड़की होकर गाड़ी चलाएगी?”, “क्या ज़रूरत है इधर-उधर घूमने की?”, लेकिन एनु अडिग रहीं। उन्होंने अपने आत्मविश्वास के साथ इन बातों को अनसुना कर, प्रैक्टिस जारी रखी और जल्द ही स्कूटी चलाने में दक्ष हो गईं।           धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास और कौशल दोनों बढ़ने लगे। अब वे गांवों में स्वतंत्र रूप से घूमने लगीं, महिलाओं से जुड़ीं, उन्हें मोटिवेट करने लगीं और अपनी यात्रा की कहानी सुनाकर उनमें भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देने लगीं। यही वह मोड़ था जब उन्होंने तय किया कि अब वह खुद एक ड्राइविंग स्कूल शुरू करेंगी, ताकि अन्य महिलाओं को भी गाड़ी चलाना सिखा सकें। यह पहल ग्रामीण परिवेश में महिलाओं की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम था।           सन 2023 में एनु अपने सीमित संसाधनों के साथ “महिला दोपहिया प्रशिक्षण केंद्र” की शुरुआत की। शुरू में केवल 2-3 महिलाओं ने प्रशिक्षण लिया, लेकिन जल्द ही यह संख्या बढ़ती चली गई। आज उनकी पहचान पूरे ब्लॉक और जिले में “स्कूटी दीदी” के रूप में हो गई है। उन्होंने अब तक 30 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को दोपहिया वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया है, जिनमें से कई महिलाएं अब स्वयं स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र या बैंक जैसी जगहों पर काम करने के लिए आत्मनिर्भर रूप से आने-जाने लगी हैं।            एनु की यह पहल न केवल महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास और स्वतंत्रता लाई है, बल्कि सामाजिक सोच को भी बदला है। अब गांवों में लोग अपनी बेटियों और बहुओं को एनु के पास भेजते हैं, यह सीखने कि कैसे वे भी “अपने सपनों की सवारी” कर सकती हैं। उनकी इस उपलब्धि के लिए विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों ने उन्हें सम्मानित भी किया है। हाल ही में उन्हें जिला प्रशासन द्वारा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया गया। एनु का सपना है कि वे आने वाले वर्षों में 1000 महिलाओं को ड्राइविंग सिखाएं और इसके लिए वे जल्द ही चारपहिया ड्राइविंग स्कूल भी शुरू करने की योजना बना रही हैं।           एनु का जीवन इस बात का प्रमाण है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। उनकी कहानी हर उस महिला के लिए प्रेरणा है, जो समाज की जंजीरों को तोड़कर आगे बढ़ना चाहती है। स्कूटी दीदी एनु ने दिखा दिया कि सच्ची ताकत बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि भीतर के आत्मबल और दृढ़ निश्चय में होती है।  

उच्च शिक्षा में बड़ा कदम: बिहार के 54 कॉलेजों में खुलेंगी AI लैब, बनेंगे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

पटना. राज्य में 54 पुराने अंगीभूत महाविद्यालयों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने चयनित संबंधित संस्थानों को एडवाइजरी जारी किया है। यूं कहें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की घोषणा को अप्रैल से जमीन पर उतारने की विभागीय प्रक्रिया तेज हो गई है। विभाग ने अपने दिशा-निर्देश में स्पष्ट कहा है कि चयनित महाविद्यालयों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय करें। लक्ष्य की प्राप्ति हेतु अत्याधुनिक तकनीक और मानकीकृत सर्वोत्तम प्रथाओं (वेस्ट प्रैक्टिक्स) को अपनाना आवश्यक है। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के साथ नवाचार, अनुसंधान और नवीन शिक्षण विधियों को सुनिश्चित करना है। दो चरणों में पूरा होगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का काम उच्च शिक्षा विभाग के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि अभी से चयनित उच्च शिक्षण संस्थानों को दिशा-निर्देश इसलिए दिया गया है ताकि तैयार रोडमैप के आधार पर नये वित्तीय वर्ष 2026-27 से तेजी से कार्यारंभ हो सके। उच्च शिक्षा में सुधार की दिशा में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम करना बड़ा फैसला है। विभाग ने 54 शिक्षण संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने का रोडमैप तैयार कर लिया है। इसके आधार पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने का काम दो चरणों में पूरा होगा। प्रथम चरण में वर्ष 2026-27 के लिए 30 शिक्षण संस्थानों का चयन किया गया है। द्वितीय चरण 2027-30 के 24 संस्थानों के बीच कार्य होगा। इन संस्थानों में अनुभवी शिक्षक, शोध को बढ़ावा और कौशल विकास को लेकर अत्याधुनिक संसाधन उपलब्ध कराये जाएंगे। इंडस्ट्री पार्टनरशिप को भी बढ़ावा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में जब चयनित संस्थान विकसित हो जाएंगे तब उनमें इंडस्ट्री पार्टनरशिप को भी बढ़ावा देने का फैसला लिया गया है। इसके तहत पाठ्यक्रम को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप लागू किया जाएगा। छात्र-छात्राओं को इंटर्नशिप से लेकर प्लेसमेंट के अवसर दिया जाएगा। विभाग के रोडमैप के मुताबिक चयनित शैक्षणिक संस्थातों को उच्च स्तरीय शिक्षा, आधुनिक बुनियादी ढांचे, उन्नत अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास का केंद्र विकसित करने की प्राथमिकता दी जाएगी। यह केवल डिग्री देने वाला संस्थान नहीं, बल्कि कौशल-आधारित शिक्षा के माध्यम से छात्रों को उद्योग-योग्य बनाने वाला एक आदर्श संस्थान बनाया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इन कदमों को अपनाकर एक सामान्य कालेज को एक शोध-आधारित, उच्च प्रदर्शन करने वाले सेंटर आफ एक्सीलेंस में बदला जा सकता है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए लिया गया महत्वपूर्ण निर्णय शिक्षण संस्थानों को विशिष्ट बनाने पर फोकस करना हर संस्थान को डेवलपमेंट प्लान तैयार करना एआई लैब, डिजिटल लाइब्रेरी, इनोवेशन प्रोग्राम, रिसर्च प्लान एवं नॉलेज मैनेजमेंट को प्राथमिकता देना स्मार्ट क्लासेज, अत्याधुनिक प्रयोगशाला, हाई स्पीड इंटरनेट और तकनीकी उपकरण की सुविधा प्रदान करना हर संकाय और छात्रों को व्यावहारिक अनुसंधान और नवाचार करने के लिए प्रोत्साहित करना

नवरात्रि में राशि अनुसार करें ये 9 उपाय, बदलेगी किस्मत

पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगी. हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना के लिए बेहद पवित्र माना जाता है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और भक्त व्रत रखकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर नवरात्रि में अपनी राशि के अनुसार कुछ खास उपाय किए जाएं तो मां दुर्गा की विशेष कृपा मिलती है और जीवन की परेशानियां दूर होने लगती हैं. आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी राशि वालों के लिए नवरात्रि के सरल उपायों के बारे में. मेष राशि नवरात्रि के दौरान मेष राशि के जातक मां दुर्गा को लाल फूल और लाल चुनरी अर्पित करें. साथ ही ॐ दुं दुर्गायै नमः मंत्र का जाप करें. इससे साहस और सफलता में वृद्धि होती है. वृषभ राशि वृषभ राशि के लोग मां दुर्गा को सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाएं. शुक्रवार के दिन गरीबों को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है. इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होती है. मिथुन राशि मिथुन राशि वाले नवरात्रि में हरे रंग के फल या हरी इलायची मां को अर्पित करें. साथ ही दुर्गा चालीसा का पाठ करें. इससे बुद्धि और निर्णय क्षमता मजबूत होती है. कर्क राशि कर्क राशि के जातक मां दुर्गा को दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं और कन्याओं को भोजन कराएं. इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है. सिंह राशि सिंह राशि वालों को मां दुर्गा को गुड़ और गेहूं अर्पित करना चाहिए. रविवार के दिन जरूरतमंद लोगों को दान करना लाभदायक माना जाता है. कन्या राशि कन्या राशि के लोग नवरात्रि में पीले फूल और केले मां दुर्गा को चढ़ाएं. साथ ही दुर्गा सप्तशती का पाठ करना भी शुभ माना जाता है. तुला राशि तुला राशि के जातक मां दुर्गा को सुगंधित इत्र या गुलाब के फूल अर्पित करें. इससे जीवन में संतुलन और खुशियां बढ़ती हैं. वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि वाले नवरात्रि में लाल चंदन और गुड़ मां दुर्गा को अर्पित करें. साथ ही रोजाना दुर्गा मंत्र का जाप करें. धनु राशि धनु राशि के लोग मां दुर्गा को पीले फल और हल्दी अर्पित करें. गुरुवार के दिन गरीबों को दान करना बहुत शुभ माना जाता है. मकर राशि मकर राशि के जातक मां दुर्गा को तिल और तेल का दीपक जलाकर पूजा करें. इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. कुंभ राशि कुंभ राशि के लोग नवरात्रि में नीले या काले रंग के कपड़े दान करें और मां दुर्गा को नारियल अर्पित करें. मीन राशि मीन राशि के जातकों को मां दुर्गा को पीले फूल और बेसन के लड्डू चढ़ाने चाहिए. इससे घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है. नवरात्रि का महत्व नवरात्रि को शक्ति की साधना का पर्व माना जाता है. इन नौ दिनों में श्रद्धा और भक्ति से मां दुर्गा की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है. मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान किए गए छोटे-छोटे उपाय भी बड़े फल दे सकते हैं.

चुनावी शेड्यूल जारी: बंगाल में दो चरण, बाकी चार राज्यों में एक चरण में वोटिंग

नई दिल्ली चुनाव आयोग आगामी विधानसभा चुनावों के लिए आज शाम 4 बजे दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा है। इस दौरान पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होगी। इन पांच राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं का कार्यकाल मई-जून 2026 में समाप्त हो रहा है। पश्चिम बंगाल की विधानसभा 7 मई, तमिलनाडु की 10 मई, असम की 20 मई, केरल की 23 मई और पुडुचेरी की 15 जून 2026 को खत्म होगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लेंगे। चुनाव आयोग ने इन राज्यों में मतदाता सूची, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य तैयारियों का आकलन पूरा कर लिया है, जिसके बाद यह ऐलान किया जाएगा। यह चुनाव राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इनमें सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच कड़ी टक्कर होने की संभावना है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, तमिलनाडु में डीएमके, केरल में वाममोर्चा, असम में भाजपा और पुडुचेरी में एनआर कांग्रेस जैसी पार्टियां सत्ता बचाने या हासिल करने की कोशिश करेंगी। चुनाव आयोग ने सभी राज्यों में आचार संहिता लागू होने के साथ ही निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, ‘असम, केरल, पुदुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल—इन पांच राज्यों में कुल 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने वाले हैं, जहां 2.19 लाख मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं। 25 लाख ईवीएम मशीनों के माध्यम से 824 विधानसभा सीटों पर चुनाव कराया जा रहा है।’ मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, ‘असम, केरल, पुदुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के मतदाताओं के लिए सूचना है कि पिछले कुछ दिनों में निर्वाचन आयोग ने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा के लिए सभी मतदान वाले राज्यों का दौरा किया। इन दौरों के दौरान आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से मुलाकात की और उनके सुझाव प्राप्त किए। आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों, एसपी, आईजी, डीआईजी तथा सभी प्रवर्तन एजेंसियों के नोडल अधिकारियों से भी भेंट की। साथ ही, संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, मुख्य सचिवों तथा डीजीपी के साथ भी बैठकें की गईं।’ चुनाव आयोग ने पहले असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी का दौरा पूरा किया, उसके बाद केरल (6-7 मार्च) और पश्चिम बंगाल (9-10 मार्च) का निरीक्षण किया। इन दौरों में राजनीतिक दलों, प्रशासनिक अधिकारियों और प्रवर्तन एजेंसियों से मुलाकात की गई ताकि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें। कितने चरणों में होगा चुनाव चुनावों की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो जाएगी, जिससे विकास कार्यों और सरकारी घोषणाओं पर रोक लग जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव एक से अधिक चरणों में हो सकते हैं, खासकर पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्य में जहां हिंसा की आशंका रहती है।