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भारत में धूप की कमी नहीं, फिर भी लोग विटामिन-डी से वंचित क्यों? जानिए वजह

भारत एक ऐसा देश है जहां साल के ज्यादातर महीनों में सूरज की भरपूर रोशनी रहती है। इसके बावजूद, ज्यादातर भारतीयों में विटामिन-डी की कमी देखने को मिलती है। यह चौंकाने वाला जरूरी है, लेकिन सच है। इसलिए यह सवाल करना जरूरी है कि ऐसा क्यों है? जिस देश में धूप की कोई कमी नहीं है, वहां लोगों में विटामिन-डी की कमी क्यों पाई जा रही है। आइए जानें इसके पीछे छिपे कारणों के बारे में। भारतीयों में विटामिन-डी की कमी के कारण     मेलानिन– भारतीयों की त्वचा का रंग प्राकृतिक रूप से गेहुआं या गहरा होता है। हमारी त्वचा में मेलानिन नाम का पिगमेंट ज्यादा मात्रा में होता है। मेलानिन सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है, जो त्वचा को जलने से तो बचाता है, लेकिन विटामिन-डी के निर्माण की प्रक्रिया को धीमा कर देता है। गोरी त्वचा की तुलना में गहरी त्वचा को उतना ही विटामिन-डी बनाने के लिए धूप में ज्यादा समय बिताना पड़ता है।     बदलती लाइफस्टाइल- आज की ज्यादातर आबादी घर के अंदर रहने लगी है। सुबह 9 से शाम 6 की डेस्क जॉब, बंद दफ्तर और एसी के कमरों ने हमें सूरज से दूर कर दिया है। शहरी इलाकों में ऊंची इमारतों के कारण घरों तक सीधी धूप नहीं पहुंच पाती।     प्रदूषण- महानगरों में बढ़ता वायु प्रदूषण भी एक बड़ा कारण है। हवा में मौजूद धूल के कण और धुएं के कारण सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों हम तक पहुंच नहीं पाती हैं, जिसके कारण विटामिन-डी बनाने की प्रक्रिया रुक जाती है। खान-पान में बदलाव- खान-पान में विटामिन-डी के नेचुरल सोर्स बहुत सीमित हैं, जैसे- फैटी फिश, अंडे की जर्दी और डेयरी प्रोडक्ट्स। भारत की एक बड़ी आबादी शाकाहारी है, जिससे खाने के जरिए इस विटामिन की पूर्ति करना मुश्किल हो जाता है।  

राशन घोटाले की आशंका: सरकारी दुकान से चावल की हेराफेरी, ग्रामीणों ने वाहन पकड़कर खोली पोल

बलौदा बाजार. जिले के ग्राम रसेड़ी में संचालित उचित मूल्य की दुकान में राशन की गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। ग्रामीणों के आरोप के बाद सरपंच की सूचना पर खाद्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए चावल से भरे एक वाहन को जब्त कर लिया है। मामले की जांच की जा रही है। जानकारी के अनुसार ग्राम रसेड़ी में संचालित उचित मूल्य की दुकान के संचालक पर ग्रामीणों ने राशन में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि दुकान संचालक द्वारा हितग्राहियों को निर्धारित मात्रा से कम राशन दिया जा रहा था और बचा हुआ चावल इकट्ठा कर बेचा जा रहा था। ग्रामीणों को जब इस बात की जानकारी मिली कि दुकान के सामने एक वाहन में बड़ी मात्रा में चावल लोड किया जा रहा है, तब उन्होंने इसकी सूचना ग्राम सरपंच को दी। सूचना मिलते ही सरपंच मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के साथ मिलकर वाहन को रोक दिया। वाहन की जांच करने पर उसमें 50 से अधिक बोरियों में चावल भरा हुआ पाया गया। इसके बाद सरपंच द्वारा इसकी सूचना तत्काल खाद्य विभाग को दी गई। मामले की सूचना मिलने पर खाद्य विभाग के खाद्य निरीक्षक मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। सरपंच और ग्रामीणों के बयान दर्ज किए गए। प्राथमिक जांच के बाद चावल से भरे उक्त वाहन को जब्त करने की कार्रवाई की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि दुकान संचालक द्वारा लोगों को कम राशन देकर बचा हुआ चावल इकट्ठा किया गया था और उसे वाहन के माध्यम से बाहर भेजा जा रहा था। ग्रामीणों ने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं उचित मूल्य दुकान के संचालक झमकलाल साहू ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि वाहन में जो चावल लोड किया जा रहा था, वह उन्होंने राशन कार्डधारी उपभोक्ताओं से खरीदा था। इस संबंध में खाद्य निरीक्षक ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। जब्त किए गए चावल और वाहन से संबंधित पूरी जानकारी एकत्र कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी और इसे एसडीएम के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। सेल्समैन ने यह स्वीकार किया है कि एपीएल कार्डधारकों से चावल खरीदकर बिक्री करने ले जा रहा था। सेल्समैन का यह कृत्य शासकीय दृष्टि से उचित नहीं है। मामले की जांच कर उच्चाधिकारियों के निर्देश अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में अधिकांश सोसायटियों में इस तरह के काम हो रहे हैं और चावल की अफरातफरी हो रही है, वहीं बाहरी दुकानदार इन चावलों को खरीद रहे हैं। आपको बता दें कि शासन की योजना है कि कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए, पर यहां इसका गलत उपयोग हो रहा है। देखना होगा कि शासन अब आगे क्या कार्रवाई करता है।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत, 8वें वेतन आयोग से 35% सैलरी बढ़ोतरी, जनवरी से एरियर मिलेगा

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन के साथ ही लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह आयोग फिलहाल लागू 7वें वेतन आयोग की जगह लेगा, जो साल 2016 से लागू है। नए वेतन आयोग का मकसद कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और भत्तों की पूरी संरचना की समीक्षा करके उसे मौजूदा आर्थिक हालात के हिसाब से अपडेट करना है। मांगे गए हैं सुझाव वित्त मंत्रालय ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए कर्मचारियों, पेंशनर्स, कर्मचारी संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव भी मांगे हैं। इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया है, जहां लोग अपनी राय और सुझाव भेज सकते हैं। यह सुविधा 30 अप्रैल 2026 तक खुली रहेगी। सरकार ने आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट देने के लिए करीब 18 महीने का समय दिया है। इसके बाद सरकार रिपोर्ट का अध्ययन करके अंतिम फैसला लेगी। कितनी बढ़ेगी सैलरी अगर पिछली वेतन आयोगों की बात करें तो हर बार वेतन में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है। 7वें वेतन आयोग के लागू होने पर केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दी गई थी, जबकि अधिकतम बेसिक सैलरी 2.5 लाख रुपये प्रति माह तय की गई थी। अब 8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों में उम्मीद है कि इस बार भी सैलरी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिटमेंट फैक्टर पर चर्चा सबसे बड़ी चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। फिटमेंट फैक्टर वही गुणांक होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा करके नई सैलरी तय की जाती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर 2.4 से 3.0 के बीच हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो कर्मचारियों की सैलरी में लगभग 20% से 35% तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा। एरियर को लेकर भी कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर सामने आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही सरकार आयोग की सिफारिशों को मंजूरी देने में समय ले, लेकिन वेतन संशोधन का असर 1 जनवरी 2026 से माना जाएगा। यानी जब भी नया वेतन लागू होगा, कर्मचारियों को उस तारीख से लेकर लागू होने तक का एरियर भी मिल सकता है। एनालिस्ट ने क्या कहा फाइनेंस एनालिस्ट का कहना है कि अंतिम वेतन बढ़ोतरी कई आर्थिक कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें महंगाई की स्थिति, सरकार की वित्तीय क्षमता, टैक्स कलेक्शन और 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें शामिल हैं। ऐसे में सरकार कोशिश करेगी कि कर्मचारियों को अच्छा वेतन बढ़ोतरी पैकेज मिले, लेकिन साथ ही सरकारी खजाने पर ज्यादा बोझ भी न पड़े। इसलिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी अंतिम तस्वीर अगले 12–18 महीनों में ही साफ हो पाएगी।

नेपाल में श्रद्धालुओं की बस खाई में गिरी, 7 भारतीयों की मौत, मंदिर से लौट रहे थे यात्री

कपिलवस्तु गोरखा जिले के प्रसिद्ध मनकामना मंदिर में दर्शन कर लौट रहे भारतीय श्रद्धालुओं की माइक्रो बस शनिवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य यात्री घायल हो गए।  प्रारंभिक जानकारी के अनुसार टूरिस्ट माइक्रो बस में 14 यात्री सवार होकर गोरखा में मनकामना मंदिर दर्शन के लिए गए थे। दर्शन के बाद लौटते समय कपिलवस्तु बॉर्डर से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर कांटार जिले के शहीद लखन गाऊ पालिका वार्ड नंबर-3 के पास बस अचानक अनियंत्रित हो गई और करीब 200 फुट गहरी खाई में जा गिरी। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और राहत टीम मौके पर पहुंच गई और बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस सुपरिटेंडेंट भारत बहादुर बीका ने बताया कि मृतकों में पांच पुरुष और तीन महिलाएं शामिल हैं। अभी उनके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाई है। कहा कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।  इससे पहले अगस्त 2024 में भी अनबुखैरेनी क्षेत्र में भारतीय श्रद्धालुओं से भरी एक बस हादसे का शिकार हो गई थी, जिसमें कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई थी. नेपाल में हाल के वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में वृद्धि देखी गई है. नेपाल ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक एक दशक पहले देश में 4,999 सड़क हादसे दर्ज किए गए थे, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 7,669 हो गई. विश्व बैंक की एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाला आर्थिक नुकसान 2007 के बाद से तीन गुना बढ़ चुका है और यह अब देश के सकल राष्ट्रीय उत्पाद का लगभग 1.5 प्रतिशत हो गया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सड़क हादसों का सबसे ज्यादा असर कमजोर वर्गों पर पड़ता है. नेपाल में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में 70 प्रतिशत से अधिक लोग पैदल यात्री, साइकिल चालक और मोटरसाइकिल सवार जैसे संवेदनशील सड़क उपयोगकर्ता होते हैं.

मंडीदीप में LPG एजेंसी पर छापा, 200 से ज्यादा सिलेंडर जब्त; जबलपुर में पुलिस ने हॉकर के घर से 10 सिलेंडर और 47 गैस बुक बरामद

मंडीदीप  मंडीदीप क्षेत्र में एक एलपीजी एजेंसी द्वारा अनुज्ञप्ति की शर्तों का उल्लंघन करने पर प्रशासन ने कार्रवाई की है। जांच के दौरान बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर नियमों के विपरीत खुले में रखे पाए गए। प्राप्त जानकारी के अनुसार सेक्टर-सी, प्लाट नंबर 15 स्थित एजेंसी के संचालक विनोद कुमार जैन, जो एचपीसीएल कंपनी के कमर्शियल सिलिंडरों के अधिकृत डीलर हैं, उनके परिसर में निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान 47.2 किलोग्राम क्षमता के 85 सिलिंडर ट्रक में रखे पाए गए। निर्धारित स्थान पर भेजने के बजाय परिसर में ही रखा ये सिलेंडर 13 मार्च को सिक्योरिटी पेपर मिल होशंगाबाद को सप्लाई के लिए प्राप्त हुए थे, लेकिन उन्हें निर्धारित स्थान पर भेजने के बजाय परिसर में ही रखा गया था। इसके अलावा परिसर में 19 किलोग्राम के 115 सिलिंडर तथा 5 किलोग्राम के 10 सिलेंडर (5 भरे और 5 खाली) भी पाए गए, जिन्हें गोदाम में रखने के बजाय खुले में रखा गया था। सिलिंडरों को जब्त कर पंचनामा तैयार किया इसे अनुज्ञप्ति की शर्तों का उल्लंघन माना गया। मौके पर सिलिंडरों को विधिवत जब्त कर पंचनामा तैयार किया गया तथा उन्हें एजेंसी संचालक के सुपुर्द किया गया। यह कार्रवाई कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा के निर्देशन में राजस्व अधिकारी चंद्रशेखर श्रीवास्तव, जिला आपूर्ति अधिकारी राजू कातुलकर, तहसीलदार हेमंत शर्मा, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी प्रताप सिंह, सहायक आपूर्ति अधिकारी संगीता तथा थाना प्रभारी रंजीत सराठे की उपस्थिति में की गई। हॉकर के घर पुलिस की छापेमारी भेड़ाघाट थाना क्षेत्र में गैस एजेंसी से जुड़े एक हॉकर द्वारा घर में अवैध रूप से गैस सिलिंडर रखने का मामला सामने आया है। राजस्व और खाद्य विभाग की टीम ने पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए आरोपी के घर पर छापेमारी की। इस दौरान घर से दस गैस सिलिंडर और 47 उपभोक्ताओं की गैस बुक बरामद की गईं। पुलिस ने मामले में आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। संयुक्त टीम ने की छापेमारी पुलिस के अनुसार रात राजस्व एवं खाद्य विभाग की टीम के साथ भेड़ाघाट पुलिस ने मीरगंज क्षेत्र के झिन्ना मोहल्ला स्थित सुनील पटेल के घर पर दबिश दी। टीम को सूचना मिली थी कि घर में बड़ी संख्या में गैस सिलिंडर अवैध रूप से रखे गए हैं। तलाशी के दौरान घर से छह घरेलू और चार व्यावसायिक गैस सिलिंडर बरामद हुए। इसके साथ ही 47 उपभोक्ताओं की गैस बुक भी मौके से मिलीं। पूछताछ में नहीं दे पाया संतोषजनक जवाब कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद सुनील पटेल से सिलिंडरों और गैस बुक के संबंध में पूछताछ की गई। हालांकि वह इस संबंध में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इसके बाद टीम ने जब्त सामग्री को अपने कब्जे में ले लिया और मामले की जानकारी पुलिस को दी। गैस एजेंसी में हॉकर के रूप में करता है काम पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह गुलौआ चौक, संजीवनी नगर स्थित दीप गैस एजेंसी में हॉकर के रूप में काम करता है। उसका काम झिन्ना, मीरगंज, आमा हिनौता, कूडन, शिल्पी नगर और भेड़ाघाट क्षेत्र में उपभोक्ताओं को गैस सिलिंडर पहुंचाना है। उपभोक्ताओं की गैस बुक रख ली थीं अपने पास पुलिस के अनुसार इसी कारण उसने इन क्षेत्रों के 47 उपभोक्ताओं की गैस बुक अपने पास रख ली थीं। फिलहाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और पूरे मामले की जांच जारी है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर कार्रवाई होगी।

दवाओं की ताकत बढ़ाने का ‘सीक्रेट’ मिला, कैंसर उपचार में बड़ी कामयाबी

क्या आपने कभी सोचा है कि बिना किसी बाहरी गर्मी, रोशनी या केमिकल के कोई रासायनिक प्रतिक्रिया अपने आप सेकंडों में पूरी हो सकती है? वैज्ञानिकों ने एक ऐसी ही अद्भुत और दुर्लभ खोज की है। इस नई खोज ने दवा निर्माण, प्रोटीन विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विकास के नए दरवाजे खोल दिए हैं। आइए, इस अहम वैज्ञानिक खोज को डिटेल में समझते हैं। क्या है यह नई रिसर्च? शोधकर्ताओं ने एक पूरी तरह से नई रासायनिक प्रक्रिया की खोज की है, जिसे 'ट्राइसल्फाइड मेटाथेसिस प्रतिक्रिया' नाम दिया गया है। इसके बारे में मशहूर विज्ञान पत्रिका 'नेचर केमिस्ट्री' में प्रकाशित किया गया है। इस प्रतिक्रिया की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सामान्य कमरे के तापमान पर, बिना किसी बाहरी एजेंट या उत्तेजना (जैसे गर्मी या रोशनी) के अपने आप काम करती है। यह प्रतिक्रिया कुछ ही सेकंडों में पूरी हो जाती है और इसके परिणाम बेहद साफ, सटीक और कुशल होते हैं। सल्फर-सल्फर बांड्स का खेल इस पूरी खोज के केंद्र में 'सल्फर-सल्फर बांड' हैं। ये बांड पेप्टाइड्स, प्रोटीन, दवा के अणुओं और वल्कनाइज्ड रबर जैसे पॉलिमर्स में मौजूद होते हैं। बता दें, ये प्रोटीन को उसकी संरचनात्मक मजबूती और स्थिरता देने के लिए बहुत जरूरी होते हैं। अब तक, बिना किसी बाहरी रसायन या गर्मी के इन बांड्स को अपनी मर्जी से बनाना या तोड़ना बहुत मुश्किल माना जाता था, लेकिन यह नई प्रतिक्रिया इसे स्वचालित रूप से कर सकती है। कैसे हुई यह खोज? इस अनोखी खोज की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया के फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जस्टिन चाल्कर और यूके के लिवरपूल विश्वविद्यालय के उनके सहयोगी टॉम हैसेल के काम से हुई। उन्होंने शुरुआत में कुछ खास सॉल्वेंट्स में S-S बांड्स के अजीब और हैरान करने वाले व्यवहार पर ध्यान दिया। इसके बाद, उन्होंने एक मॉडल तैयार किया जो यह समझाता है कि ये बांड कैसे टूटते हैं, कैसे फिर से बनते हैं और यह हमारे लिए कैसे उपयोगी हो सकता है। भविष्य के लिए इसके शानदार उपयोग फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस नई प्रतिक्रिया के कई बेहतरीन फायदे बताए हैं, जिनकी मदद से कई क्षेत्रों में क्रांति आ सकती है:     कैंसर की दवाओं में सुधार: चाल्कर लैब के शोधकर्ता हर्षल पटेल के अनुसार, इस प्रतिक्रिया का सफलतापूर्वक इस्तेमाल कैंसर रोधी दवाओं और दवाइयों की खोज से जुड़े केमिकल को संशोधित करने के लिए किया गया है।     रीसायकल होने वाला प्लास्टिक: इस तकनीक से ऐसे नए और बेहतरीन प्लास्टिक बनाए जा सकते हैं जिन्हें आसानी से आकार दिया जा सकता है, इस्तेमाल किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर रीसायकल करने के लिए तोड़ा जा सकता है। दवा और विज्ञान में तेज विकास: प्राकृतिक उत्पादों और दवाओं के अणुओं को बदलने में यह बेहद काम आ रही है। इसके उच्च प्रतिक्रिया दर की वजह से चिकित्सा से जुड़े यौगिकों को तेजी से तैयार किया जा सकता है। फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के वरिष्ठ लेखक प्रोफेसर जस्टिन चाल्कर के शब्दों में कहें तो, किसी पूरी तरह से नई प्रतिक्रिया की खोज होना अपने आप में बहुत दुर्लभ है। और यह उससे भी ज्यादा दुर्लभ है कि एक ही खोज इतने सारे अलग-अलग क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो। शोधकर्ताओं की टीम इस बात को लेकर बेहद उत्साहित है कि आने वाले समय में इस रसायन विज्ञान को उन तरीकों से भी इस्तेमाल किया जाएगा, जिनकी अभी हमने कल्पना भी नहीं की है।  

कोर्ट का अहम फैसला: लेफ्टिनेंट कर्नल की याचिका पर एफआईआर रद्द, आपसी सहमति से बने संबंध को रेप नहीं माना जा सकता

जबलपुर  वो युवती जो कि पहले तो लव रिलेशन में रहती है,आपसी सहमति से संबंध बनाती है, और फिर बाद में रेप का आरोप लगाते हुए पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवाती है, उसे रेप की श्रेणी में नही माना जा सकता है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक मामले पर सुनवाई करते हुए कहा।  13 साल तक रिलेशनशिप में रही युवती एमपी पुलिस में पदस्थ एक महिला आरक्षक ने एफआईआर दर्ज करवाते हुए आरोप लगाया कि वह सेना में पदस्थ लेफ्टिनेंट कर्नल वरुण प्रताप सिंह के साथ 13 साल तक रिलेशनशिप में रही है। वह कहता था कि पत्नी बेकार है, तलाक होते ही तुमसे शादी कर लूंगा। मध्यप्रदेश पुलिस में कॉन्स्टेबल शीना (परिवर्तित नाम) ने सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल वरुण प्रताप सिंह के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज कराया। महिला का कहना था कि – मेरी वरुण ही नहीं, उसके मम्मी-पापा और भाई-बहन से भी बातचीत होती थी। दोनों के परिवारों के बीच संबंध मजबूत हो गए। वरुण ने कहा था कि जल्द ही हम शादी कर लेंगे, इसलिए मैं उसके साथ रिलेशन में आ गई। ऐसे ही समय बीतता गया, लेकिन भोपाल से ट्रांसफर के दौरान मुझे पता चला कि उसकी शादी तो पहले ही हो चुकी है। बच्चा भी है। अलग-अलग नामों से अकाउंट, कई लड़कियों से दोस्ती शीना ने पुलिस को एफआईआर में बताया कि वरुण की पोस्टिंग असम में हो गई थी। बाद में पता चला कि वहां एक असमिया लड़की से भी उसकी दोस्ती हो गई। उससे पूछा तो वो टालता रहा। इस बीच पता चला कि वरुण नाम से सोशल मीडिया पर आईडी तो है ही, साथ ही एक आईडी आदित्य प्रताप और एक आदित्य राज नाम से भी बना रखी है। इसमें उसकी फोटो लगी है, चैटिंग भी करता रहता है। इन सोशल मीडिया अकाउंट का उपयोग वह नई-नई लड़कियों को तलाशने और उन्हें अपने प्रभाव में लेने के लिए करता है। हनी ट्रैप का शिकार हो सकता है वरुण शीना ने अपनी एफआईआर में बताया कि वरुण सेना की जिम्मेदारी वाली नौकरी में रहकर कई सोशल मीडिया अकाउंट चला रहा है, यह खतरनाक हो सकता है। वो लड़कियों की फोटो लगी आईडी से आने वाली अनजान रिक्वेस्ट पर रिस्पॉन्स करता है। चैटिंग करने लगता है। मुझे डर है कि जिस तरह की उसकी एक्टिविटी है, वह आसानी से हनी ट्रैप का शिकार हो सकता है या हो चुका होगा। वरुण ने जो काम भोपाल में किया, वही असम में किया। पठानकोट जैसी संवेदनशील पोस्टिंग में रहते हुए भी उसकी आदत नहीं सुधरी। सेना को इसकी जांच करानी चाहिए, मैंने इसकी शिकायत भी की है। जिला कोर्ट ने याचिका खारिज की युवती की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। भोपाल कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई तो, वरुण की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। पीड़िता के वकील ने आरोपी की जमानत याचिका पर आपत्ति लगाते हुए अदालत को बताया कि यदि उन्हें जमानत मिलती है तो वो सबूतों को मिटा सकते हैं। साक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी की याचिका खारिज कर दी। आपसी संबंध रेप की श्रेणी नहीं मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने करीब 13 साल तक चले आपसी संबंधों को दुष्कर्म की श्रेणी में रखने से इनकार करते हुए सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को निरस्त कर दिया है। जस्टिस विनय सराफ की एकलपीठ ने मामले पर सुनवाई की है। महिला पुलिस आरक्षक ने याचिका पर बताया कि सेना अधिकारी ने स्वयं को अविवाहित बताते हुए उससे विवाह का वादा किया और इसी भरोसे पर दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि दोनों के बीच लंबे समय तक आपसी सहमति से संबंध रहे, इसलिए इसे दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द कर दिया।

आदि परब में छाया जशप्योर स्टॉल: महुआ की खासियत ने बटोरी सराहना

रायपुर. आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI), नवा रायपुर द्वारा 13–14 मार्च 2026 को आयोजित आदि परब–2026 कार्यक्रम “From Tradition to Identity” थीम के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। भारत सरकार के सहयोग से आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान, हस्तशिल्प और वन आधारित उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागियों, शोधकर्ताओं, अधिकारियों तथा बड़ी संख्या में आगंतुकों ने भाग लिया। इस आयोजन में जशपुर जिले के ब्रांड जशप्योर  द्वारा भी स्टॉल लगाया गया, जिसे आगंतुकों, अधिकारियों और विशेषज्ञों से व्यापक सराहना प्राप्त हुई। स्टॉल पर प्रदर्शित उत्पादों की उच्च गुणवत्ता, पारंपरिक प्रसंस्करण पद्धति और प्रीमियम पैकेजिंग को लेकर लोगों ने विशेष रुचि दिखाई। स्टॉल का मुख्य आकर्षण महुआ आधारित उत्पाद रहे। बड़ी संख्या में आगंतुकों ने महुआ के पारंपरिक उपयोगों के साथ-साथ उसे पोषण से भरपूर एक प्राकृतिक सुपरफूड के रूप में प्रस्तुत करने की पहल की सराहना की। जय जंगल  द्वारा महुआ को केवल पारंपरिक मद्य से जोड़कर देखने की धारणा से बाहर निकालते हुए उसे स्वास्थ्य, पोषण और पारंपरिक खाद्य प्रणाली के रूप में स्थापित करने का प्रयास लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करता दिखाई दिया। जशप्योर, जशपुर जिले से शुरू हुई एक पहल है, जिसका उद्देश्य जंगल और जनजातीय समुदायों से जुड़े पारंपरिक खाद्य संसाधनों को सम्मानपूर्वक मुख्यधारा तक पहुँचाना है। यह पहल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की  दूरदर्शी सोच से प्रेरित है जिसमें महुआ को केवल शराब तक सीमित न रखकर उसे पोषण, स्वास्थ्य और जनजातीय आजीविका के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है। आदि परब–2026 में जशप्योर का प्रतिनिधित्व अनिश्वरी भगत एवं प्रभा साय द्वारा किया गया, जिन्होंने आगंतुकों को उत्पादों की विशेषताओं, पारंपरिक प्रसंस्करण विधियों तथा महुआ के पोषण महत्व के बारे में जानकारी दी। स्टॉल पर बड़ी संख्या में लोगों ने उत्पादों के बारे में विस्तार से जानकारी ली और जशपुर से जुड़ी इस पहल की सराहना की। जशप्योर के माध्यम से महुआ, मिलेट्स और पारंपरिक रूप से संसाधित चावल जैसे उत्पादों को आधुनिक उपभोक्ताओं तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें जनजातीय महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह पहल न केवल पारंपरिक खाद्य प्रणालियों को पुनर्जीवित करने का प्रयास है बल्कि स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी सशक्त बना रही है।

उच्च शिक्षा को बढ़ावा: गोड्डा के बोआरीजोर में डिग्री कॉलेज बनाने की घोषणा

गोड्डा. राज्य सरकार ने बोआरीजोर प्रखंड के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा मुहैया कराने के लिए डिग्री कॉलेज का तोहफा दिया है। बीते दिनों कैबिनेट के फैसले के बाद बोआरीजोर में डिग्री कॉलेज के निर्माण के लिए सरकार ने 40.19 करोड़ रुपये का आवंटन जारी कर दिया। अब यहां के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। बोरियो विधायक धनंजय सोरेन के प्रयास के बाद यह काम हुआ है। कैबिनेट के फैसले के बाद अब बोआरीजोर में डिग्री कॉलेज खुलने का रास्ता साफ हो गया है। छात्रों को नहीं जाना पड़ेगा बाहर झारखंड सरकार ने कॉलेज निर्माण के लिए 40 करोड़ 19 लाख 1800 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। अनुसूचित जन जाति बहुल और ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण इंटर स्तरीय शिक्षा हासिल करने के बाद बच्चों को गांव से बाहर जाकर उच्च शिक्षा हासिल करनी पड़ती थी। डिग्री कॉलेज की स्वीकृति के बाद अब आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे गांव में ही डिग्री की पढ़ाई हासिल कर सकेंगे। इसकी स्वीकृति मिलने पर क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। लोगों ने सरकार और विधायक को धन्यवाद दिया है। लोगों ने बताया कि डिग्री कालेज खुलने पर ग्रामीण क्षेत्र में शैक्षणिक विकास को और गति मिलेगी। झारखंड सरकार द्वारा उच्च शिक्षा ढांचा को सशक्त बनाने एवं छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा की ओर अग्रसर करने में यह महत्वाकांक्षी योजना मील का पत्थर साबित होगा। लोगों ने सरकार की इस पहल को स्वागत योग्य बताया है। 2 लाख से अधिक आबादी वाला है प्रखंड जिला समिति सदस्य दिलीप ठाकुर, अनुसील हेमब्रम,दिनेश, चांद नारायण मुर्मू, दीनबंधु मंडल आदि सामाजिक चिंतकों ने बताया कि बोआरीजोर एक कृषि आधारित क्षेत्र है। करीब 2 लाख से अधिक की आबादी वाला यह प्रखंड है। प्रखंड में कॉलेज नहीं रहने से अधिकतर छात्र एवं छात्राएं उच्च शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाती थी। उच्च शिक्षा के लिए जिला मुख्यालय जाना पड़ता था, जो प्रखंड से लगभग 55 किलोमीटर दूर है। लेकिन अब सरकार की पहल से कॉलेज निर्माण होने के बाद हर बच्चे उच्च शिक्षा हासिल कर सकेंगे। ग्रामीणों ने कॉलेज को प्रखंड के आस-पास बनाने की मांग की है।

लुधियाना में एक्साइज पॉलिसी लागू: 32 शराब ग्रुप का रिन्यूअल, बढ़ी लाइसेंस फीस

लुधियाना. पंजाब सरकार की नई एक्साइज पॉलिसी के तहत वर्ष 2026-27 के लिए शराब के ठेकों की अलॉटमैंट रिन्यू प्रक्रिया के माध्यम से शुरू हो गया है। शुक्रवार को लुधियाना में कई लाइसैंसधारी ठेकेदारों ने सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करते हुए अपने-अपने ठेकों को सफलतापूर्वक रिन्यू करवा लिया। विभागीय जानकारी के अनुसार इस वर्ष रिन्यूअल प्रक्रिया के तहत लाइसैंस फीस में लगभग 6.5 प्रतिशत वृद्धि की गई है, जबकि अन्य शुल्कों को मिलाकर कुल 7.1 प्रतिशत तक बढ़ौतरी तय की गई है। इसी आधार पर ठेकेदारों द्वारा अपने-अपने ग्रुप रिन्यू करवाए गए हैं। सूत्रों के अनुसार नई नीति के तहत इस बार लुधियाना जिले में शराब ठेकों के कुल 44 ग्रुप बनाए गए हैं। इनमें से 31 ग्रुप नगर निगम (एम.सी.) क्षेत्र से संबंधित हैं, जबकि 13 ग्रुप ग्रामीण क्षेत्रों के लिए निर्धारित किए गए हैं। शुक्रवार तक प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग 32 ग्रुपों के ठेके रिन्यू हो चुके हैं, जबकि 12 ग्रुप अभी रिन्यू प्रक्रिया से बाहर हैं। विभाग का कहना है कि जो ग्रुप रिन्यू नहीं हुए हैं, उन्हें अब ई-टैंडरिंग प्रक्रिया के माध्यम से अलॉट किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार ई-टैंडरिंग के जरिए पारदर्शिता बनी रहेगी और प्रतिस्पर्धा के आधार पर सरकार को बेहतर राजस्व मिलने की संभावना है। जानकारों का मानना है कि 7.1 प्रतिशत फीस वृद्धि के बावजूद कई पुराने ठेकेदारों ने अपने ग्रुप रिन्यू करवाना ही बेहतर समझा है। उनका कहना है कि यदि ठेके ई-टैंडरिंग में जाते हैं तो नई बोली प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं। उधर एक्साइज विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नई पॉलिसी के तहत सभी लाइसैंसधारियों को सरकार द्वारा तय नियमों और शर्तों का सख्ती से पालन करना होगा। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में ई-टेंडरिंग के माध्यम से शेष ग्रुपों की अलॉटमैंट भी पूरी कर ली जाएगी जिसके बाद जिले में वर्ष 2026-27 के लिए शराब बिक्री व्यवस्था पूरी तरह लागू हो जाएगी। देसी शराब 20–30 रुपए तक महंगी होने की संभावना  नई एक्साइज पॉलिसी के तहत एक्साइज फीस में हुई बढ़ौतरी के कारण आने वाले समय में शराब की कीमतों में इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है। कारोबार से जुड़े सूत्रों के अनुसार बढ़ी हुई फीस और संचालन खर्च को देखते हुए देसी शराब की एक बोतल पर करीब 20 से 30 रुपए तक बढ़ौतरी की गई है। कारोबारियों का कहना है कि नई पॉलिसी के तहत सरकार द्वारा ड्यूटी में वृद्धि की गई है, वहीं शराब कंपनियों ने भी अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि देसी शराब के साथ-साथ अंग्रेजी शराब और बीयर की कीमतों में भी बढ़ौतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि अंतिम कीमतों का फैसला कंपनियों और बाजार की स्थिति को देखते हुए किया जाएगा। दीप नगर इलाके में नए ठेके के विरोध में प्रदर्शन महानगर के दीप नगर इलाके के पास नए शराब ठेके के खुलने पर स्थानीय निवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया। लोगों का कहना था कि रिहायशी क्षेत्र में ठेका खुलने से माहौल प्रभावित होगा। विरोध के बाद फिलहाल बताया जा रहा है कि ठेके को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।