samacharsecretary.com

PAK की साजिश का खुलासा, दिल्ली से कश्मीर तक सेना की जासूसी के लिए CCTV कैमरे लगवा रहा था

गाजियाबाद ऑपरेशन सिंदूर के तहत गाजियाबाद पुलिस ने पाकिस्तान की ISI से जुड़े जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. अब तक इस मामले में कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि दो आरोपियों नौशाद अली और समीर की तलाश जारी है. आरोपियों ने पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के इशारे पर भारतीय सेना की जासूसी की योजना बनाई थी।  जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क दिल्ली और सोनीपत रेलवे स्टेशन समेत कई महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रतिष्ठानों में सोलर पावर्ड CCTV कैमरे लगाकर लाइव फीड पाकिस्तान भेजने की योजना बना रहा था. इन कैमरों के जरिए सेना की मूवमेंट, हथियार और अन्य संवेदनशील जानकारी भेजी जानी थी।  पाकिस्तान ISI का जासूसी रैकेट का खुलासा  जासूसी नेटवर्क का संचालन सुहैल मलिक उर्फ रोमियो, नौशाद अली और समीर उर्फ शूटर कर रहे थे. सुहैल मलिक को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जबकि साने इरम उर्फ महक इस नेटवर्क को चलाने में सक्रिय भूमिका निभा रही थी. इसके अलावा प्रवीन, राज वाल्मीकि, शिवा वाल्मीकि और रितिक गंगवार भी गिरफ्तार हुए हैं. पूछताछ में पता चला कि नेटवर्क का विस्तार उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और नेपाल तक फैला हुआ था।  CCTV और GPS लोकेशन का इस्तेमाल आरोपियों ने रेलवे स्टेशन और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की लाइव वीडियो और GPS लोकेशन विदेश में बैठे हैंडलर्स को भेजी. इसके लिए मोबाइल फोन में एक खास एप्लिकेशन इंस्टॉल किया गया था, जिसकी ट्रेनिंग ऑनलाइन पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स ने दी थी. नेटवर्क के कई आरोपियों ने दिल्ली कैंट और सोनीपत रेलवे स्टेशन पर कैमरे छिपाकर लगाये. पुलिस ने इन्हें बरामद कर लिया है।  14 मार्च से SIT की कार्रवाई इस मामले की शुरुआत 14 मार्च 2026 को हुई, जब थाना कौशांबी पुलिस को भोवापुर इलाके में कुछ युवकों की संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली. इसके बाद BNS की धारा 61(2)/152 और ऑफिशियल एक्ट की धारा 3/5 के तहत केस दर्ज किया गया. 5 युवक और 1 महिला को गिरफ्तार किया गया।  पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच की, जिसमें कई आपत्तिजनक वीडियो, फोटो और महत्वपूर्ण लोकेशन मिलीं. इनके खिलाफ जांच के लिए एसआइटी गठित की गई. SIT में एसीपी रैंक के दो अधिकारी और चार इंस्पेक्टर शामिल हैं. इसमें अपराध शाखा, खुफिया विभाग, साइबर क्राइम टीम और SWAT टीम की मदद ली जा रही है।  20 मार्च को 9 और आरोपी गिरफ्तार SIT ने 20 मार्च को 9 और आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें 5 नाबालिग भी शामिल थे. गिरफ्तार आरोपियों में गणेश, विवेक, गगन कुमार प्रजापति और दुर्गेश निषाद के नाम सामने आए. पूछताछ में पता चला कि आरोपी विदेश में बैठे हैंडलर्स के निर्देश पर रेलवे और सुरक्षा ठिकानों की रेकी करते और फोटो, वीडियो व GPS लोकेशन भेजते थे।  जासूसी नेटवर्क ने भारतीय मोबाइल नंबरों के OTP विदेश भेजकर व्हाट्सएप और सोशल मीडिया अकाउंट संचालित करने की योजना बनाई थी. इसके लिए आरोपी 500 से 5000 रुपये तक लेते थे. सिम कार्ड हासिल करने के लिए स्नैचिंग, एजेंट्स से प्री-एक्टिवेटेड सिम खरीदना और अपने या परिवार के नाम पर सिम लेना जैसे तरीके अपनाए गए. पैसे के लेन-देन के लिए UPI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया, लेकिन सीधे खाते में पैसे नहीं लिए. इसके बजाय जन सेवा केंद्रों या दुकानों के जरिए ट्रांसफर कर नकद राशि हासिल की जाती थी।  मोबाइल, OTP और सिम कार्ड के जरिए जासूसी जांच में यह भी पता चला कि नेटवर्क ने तकनीकी रूप से सक्षम युवाओं को अपने साथ जोड़ा था, जैसे मोबाइल मैकेनिक, CCTV ऑपरेटर और कंप्यूटर से जुड़े लोग. इन युवाओं को पैसों के लालच और विदेश में बैठे हैंडलर्स के निर्देशों के तहत शामिल किया गया. पुलिस फिलहाल फरार आरोपियों नौशाद अली और समीर की तलाश में लगी हुई है. जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और इसके पीछे की साजिश की गहनता से जांच कर रही हैं. यह मामला देश की सुरक्षा के लिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। 

राज्यपाल रमेन डेका से रक्षा महाविद्यालय के अध्ययन दल ने रायपुर में की सौजन्य भेंट

रायपुर  राज्यपाल रमेन डेका से आज रक्षा महाविद्यालय (NDC) नई दिल्ली के अध्ययन दल ने सौजन्य भेंट की। रक्षा महाविद्यालय द्वारा "National Security and Strategic Studies" विषय पर Understanding India Study Tour (UIST)  के अंतर्गत 16 सदस्यों का दल 15 से 20 मार्च तक छत्तीसगढ़ भ्रमण पर था। अपनी यात्रा के अंतिम दिन आज इस दल ने राज्यपाल डेका से मुलाकात की। अध्ययन दल में भारतीय सशस्त्र सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारीगण, मित्र देशों के सेनाधिकारी तथा कुछ सिविल सेवाओं के अधिकारीगण शामिल थे। इस दल ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न पर्यटक स्थलों, जैसे-बारनवापारा अभ्यारण्य, ट्राइबल म्यूजियम, पुरखैती मुक्तांगन, बस्तर के विभिन्न जलप्रताप, कोन्डागांव के शिल्पग्राम इत्यादि का भ्रमण किया।            राज्यपाल डेका ने अध्ययन दल के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ एक सुंदर प्रदेश है। आप सभी दोस्तों और परिवार के सदस्यों को अपने भ्रमण और छत्तीसगढ़ की खूबसूरती के बारे में बताएं, ताकि वे भी पर्यटक के रूप में यहां आ सकें। उन्होंने छत्तीसगढ़ की विशेषताओं के बारे में अध्ययन दल से चर्चा की। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और यहां पर धान की प्रजातियों को संरक्षित करके रखा गया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की शिल्प कला जैसे ढोकरा आर्ट, वुडन आर्ट, बैम्बु आर्ट के बारे मंे भी चर्चा की। इस प्रदेश में प्रतिभाशाली लोगों की भी कमी नही है, अमेरिका के ह्यूस्टन में छत्तीसगढ़ के हजारों सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपनी सेवाएं दे रहे है। इसके अलावा अमेरिका में बसे छत्तीसगढ़ के प्रवासी लोगों की संस्था नार्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन (NACHA) अमेरिका में स्वदेशी मेले का आयोजन करते है, जहां पर छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और परंपराओं का प्रदर्शन किया जाता है। उन्होंने इस दौरान ऊर्जा के नवीनीकृत स्रोतों को बढ़ावा देने, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने की बात कही। डेका ने छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के बारे में भी अध्ययन दल को अवगत कराया।           अध्ययन दल के सदस्यों ने अपने अनुभव साझा करते हुए छत्तीसगढ़ की सुंदर, संस्कृति, कला और परंपराओं की सराहना की। अध्ययन दल ने छत्तीसगढ़ के आतिथ्य की तारीफ करते हुए कहा कि यहां के लोग सीधे सरल और आत्मीय है। हम सभी को यहां आकर बहुत अच्छा लगा। अध्ययन  दल के सदस्यों ने प्रदेश में संचालित लोककल्याणकारी योजनाओं जैसे महतारी वंदन, कृषक उन्नति योजना, नक्सल पुनर्वास नीति आदि की सराहना की। 

Holiday Alert! पंजाब में कल से तीन दिन तक बंद रहेंगे स्कूल और सरकारी दफ्तर

जालंधर. पंजाब में मार्च महीने में त्योहारों और ऐतिहासिक दिवसों के चलते कुछ सार्वजनिक छुट्टियों का एलान किया गया है. हाल ही में होली की छुट्टी के बाद अब 23 मार्च और 31 मार्च को भी सार्वजनिक अवकाश रहेगा. इस दौरान सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और दूसरे सार्वजनिक संस्थानों में छुट्टी रहेगी. हालांकि इस साल 23 मार्च को रविवार के दिन पड़ रहा है, लेकिन भारतीय इतिहास में यह दिन केवल एक तिथि नहीं, बल्कि बलिदान और देशभक्ति का प्रतीक है, जिसे पूरे देश खासकर पंजाब में महत्त्वपूर्ण माना जाता है. 23 मार्च को मनाया जाता है शहीदी दिवस 23 मार्च को भारत के तीन महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान दिवस के अवसर पर पंजाब सरकार ने सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है. यह दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. 1931 में इसी दिन ब्रिटिश हुकूमत ने इन वीर सेनानियों को फांसी दी थी. उनकी शहादत को याद करने और नई पीढ़ी को उनके बलिदान से प्रेरित करने के लिए यह अवकाश दिया गया है. इस मौके पर पंजाब के कई हिस्सों में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जाती हैं, विशेष रूप से हुसैनीवाला, फिरोजपुर और शहीद भगत सिंह नगर में विशेष कार्यक्रम होते हैं. 31 मार्च को ईद-उल-फितर का पर्व 31 मार्च को पंजाब सरकार ने ईद-उल-फितर के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है. रमजान के पवित्र महीने के समापन पर मनाया जाने वाला यह त्योहार मुस्लिम समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है. इस दिन लोग मस्जिदों में विशेष नमाज अदा करते हैं और एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की बधाइयां देते हैं. पंजाब में मल्टी-कल्चरल समाज होने के कारण सभी समुदाय इस त्योहार की खुशियों में शामिल होते हैं. मार्च के इन अवकाशों से जहां सरकारी और निजी कर्मचारियों को राहत मिलेगी, वहीं स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी आराम का अवसर मिलेगा. इससे पहले भी मार्च में होली के अवसर पर अवकाश था, जिससे लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ त्योहार का आनंद उठा सके. अब 23 मार्च और 31 मार्च को भी सार्वजनिक अवकाश मिलने से पंजाब के लोगों को और भी राहत मिलेगी.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, ‘मातृभूमि की रक्षा में रानी अवंतीबाई का बलिदान हमेशा याद रहेगा

मातृभूमि की रक्षा की लिए रानी अवंतीबाई का बलिदान सदियों तक रहेगा अविस्मरणीय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव रानी अवंतीबाई की स्मृति में डिंडोरी में एक करोड़ रूपए से निर्मित संग्रहालय का किया लोकार्पण सागर में रानी अवंतीबाई के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना कर हमने दी है वीरांगना को श्रद्धांजलि रानी अवंतीबाई बलिदान दिवस पर डिंडोरी में हुआ कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से किया संबोधित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश वीरांगनाओं की धरती है। रानी दुर्गावती से लेकर रानी कमलापति और रानी अवंतीबाई तक हमारी लोकनायिकाओं और वीरांगनाओं ने विदेशी आक्रांताओं के छक्के छुड़ा दिए थे। मातृभूमि की रक्षा के लिए रानी अवंतीबाई ने जो बलिदान दिया, वह सदियों-सदियों तक अविस्मरणीय रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को रानी अवंतीबाई के बलिदान दिवस के अवसर पर डिंडोरी जिले में आयोजित कार्यक्रम को मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रानी अवंतीबाई के अटल साहस और अमर त्याग को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए उनकी स्मृति में डिंडोरी में एक करोड़ रुपए की लागत से नवनिर्मित भव्य संग्रहालय का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संग्रहालय हमें रानी अवंतीबाई के बल और बलिदान की याद दिलाता रहेगा। इस संग्रहालय में उनकी फोटो गैलरी और उनके शस्त्र हमारी आने वाली पीढ़ियों को युगों-युगों तक प्रेरित करते रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम विरासत से विकास की ओर बढ़ते हुए अपने नायकों के पराक्रम को भी याद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रानी अवंतीबाई का जन्म तत्कालीन सिओनी (वर्तमान सिवनी) जिले के मनकेहणी गांव में हुआ था। कहते हैं कि रणभूमि में उनकी तलवार जब चलती थी, तो अंग्रेजों के हौसले पस्त हो जाते थे। सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में डिंडोरी में रानी अवंतीबाई की भूमिका ठीक वैसी ही थी, जैसी झांसी में रानी लक्ष्मीबाई की। जब अंग्रेजों ने राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह को तोप से उड़ाकर कायरता दिखाई, तब इस पूरे क्षेत्र में क्रांति की मशाल रानी अवंती बाई ने अपने हाथ में ली थी। सन् 1857 की क्रांति में रानी अवंतीबाई ने रेवांचल में मुक्ति आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई। इसके बाद सन् 1858 में जब अंग्रेजों ने एक विशाल सेना के साथ उन पर हमला किया, त‍ब भी रानी ने झुकना स्वीकार नहीं किया। अपने मान-सम्मान और देश की अस्मिता के लिए उन्होंने लड़ते-लड़ते, हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने रानी अवंती बाई की शहादत को अविस्मरणीय बनाए रखने के लिए सागर में उनके नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना कर श्रद्धांजलि दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिंडोरी जिला उनके हृदय के करीब है। उन्होंने प्रसन्नता जताई कि एनीमिया मुक्त भारत के संकल्प के साथ जिला प्रशासन डिंडोरी ने एक ही दिन में 50 हजार से ज्यादा महिलाओं और बेटियों की स्वास्थ्य जांच की। इस उपलब्धि के लिए डिंडोरी का नाम 'एशिया बुक ऑफ रिकार्ड्स' और 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में दर्ज हुआ है। यह हमारे लिए गौरव की बात है। 14 से 15 साल की बेटियों को टीकाकरण (एचपीवी अभियान) में भी डिंडोरी जिला प्रदेश में प्रथम स्थान पर आया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों के सपनों को पंख देने के लिए डिंडोरी जिले में 'पंखिनी अभियान' चलाया जा रहा है। इसमें बेटियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की नि:शुल्क तैयारी कराई जा रही है। यह एक अभिनव प्रयास है। मुख्यमंत्री ने इस अभियान के लिए जिला प्रशासन डिंडोरी को बधाई भी दी। डिंडोरी जिले के ग्राम बालपुर में हुए रानी अवंती बाई बलिदान दिवस कार्यक्रम में क्षेत्रीय लोकसभा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, विधायक ओमप्रकाश धुर्वे, जिला पंचायत अध्यक्ष रूदेश परस्ते, उपाध्यक्ष श्रीमती अंजू ब्यौहार, जनपद पंचायत डिंडोरी की अध्यक्ष श्रीमती आशा सिंह, उपाध्यक्ष श्रीमती राजकुमारी बाई ठाकुर, जिलाध्यक्ष चमरू सिंह नेताम, नरेन्द्र राजपूत सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।  

ग्रामीण जल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम – मुख्यमंत्री साय

छत्तीसगढ़ में जल क्रांति का नया अध्याय: जल जीवन मिशन 2.0 पर ऐतिहासिक एमओयू ग्रामीण जल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम – मुख्यमंत्री साय रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केन्द्र और राज्य के बीच एमओयू कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल की वर्चुअल मौजूदगी में अधिकारियों ने एमओयू पर हस्ताक्षर कर एक्सचेंज किया।           मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य की ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में यह पहल ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि “हर घर जल” के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जल जीवन मिशन 2.0 के तहत हुये एमओयू से इन कार्यों में गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन के विस्तारित चरण, जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी दी है। इस चरण में जल सेवा वितरण प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ जनभागीदारी को भी सुनिश्चित किया जाएगा।               मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अब तक 41 लाख 30 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों, यानी लगभग 82.66 प्रतिशत घरों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है। साय ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत दूरस्थ, वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों तक शुद्ध पेयजल पहुंचने से महिलाओं को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें पहले पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था।            उन्होंने कहा कि मिशन 2.0 के तहत ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही जल संवर्धन, पुनर्भरण तथा योजनाओं के संचालन और रखरखाव को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि इस एमओयू के माध्यम से पारदर्शी और तकनीक आधारित जल सेवा प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल वितरण और अधिक व्यवस्थित एवं सुदृढ़ होगा।              मुख्यमंत्री ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री से 1300 करोड़ रुपये की विशेष स्वीकृति का आग्रह भी किया। इस स्वीकृति से 70 समूह जल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के 3 हजार से अधिक गांवों तक पेयजल पहुंचाने में मदद मिलेगी। अंत में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि सभी के सहयोग से छत्तीसगढ़ न केवल “हर घर जल” का लक्ष्य हासिल करेगा, बल्कि सतत जल प्रबंधन और ग्रामीण जल शासन में भी नए मानक स्थापित करेगा।                केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने कहा कि आज का दिन अत्यधिक महत्वपूर्ण है और इस एमओयू के बाद छत्तीसगढ़ में पाइप लाइन एवं संरचनाओं के माध्यम से प्रत्येक घर में पानी की पहुँच सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों को इसके तहत सशक्त अधिकार प्राप्त होंगे और इन संरचनाओं के रख रखाव के लिए वे जिम्मेदार होंगे। पाटिल ने कहा कि जिला प्रशासन के जरिये पंचायत के कार्यों पर निगरानी रखी जाएगी एवं आवश्यकता होने पर सहायता भी करेंगे। उन्होंने बताया कि आज का यह एमओयू जल शक्ति मंत्रालय और छत्तीसगढ़ शासन का साझा प्रयास का परिणाम है। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर घर स्वच्छ एवं निर्बाध पानी की पहुँच का सपना साकार होगा।            कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश टोप्पो सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

नक्सलवाद पर CM साय का बड़ा बयान: NDC अधिकारियों संग चर्चा में ‘डबल इंजन’ की सफलता का जिक्र

 रायपुर छत्तीसगढ़ की हमारी धरती सघन वन, प्राकृतिक संसाधन, खनिज संपदा के विपुल भंडार, लोक संस्कृति की अमूल्य विरासत और नैसर्गिक सौन्दर्य का अद्भुत संगम है. इस सुंदर धरती के विकास की सबसे बड़ी बाधा नक्सलवाद को हमारे डबल इंजन की सरकार ने अब दूर कर दिया है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में नेशनल डिफेंस कॉलेज के सैन्य और सिविल सेवा अधिकारियों के अध्ययन दल से मुलाकात कर आत्मीय संवाद किया. इस दौरान उन्होंने देश-विदेश से आए अधिकारियों का स्वागत करते हुए शाल और प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया. अध्ययन दल का नेतृत्व कर रहे एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी ने छत्तीसगढ़ प्रवास के अनुभव साझा करते हुए राज्य की भौगोलिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक विशेषताओं की सराहना की. उन्होंने मुख्यमंत्री को सैन्य स्मृति चिन्ह भी भेंट किया. मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ सघन वनों, खनिज संपदा, समृद्ध लोक संस्कृति और नैसर्गिक सौंदर्य का अद्वितीय संगम है. उन्होंने बताया कि राज्य का लगभग 46 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है, जिसमें “एक पेड़ मां के नाम” अभियान और कैम्पा योजना का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. सीएम साय ने कहा कि राज्य खनिज संसाधनों से परिपूर्ण है, कोयले से लेकर हीरे तक यहां उपलब्ध हैं. छत्तीसगढ़ वर्तमान में विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में सरप्लस राज्य है, जहां लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे आने वाले समय में इतनी ही अतिरिक्त उत्पादन क्षमता विकसित होगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से अब नक्सल समस्या समाप्ति की ओर है. इससे प्रदेश में शांति और विकास की गति और तेज होगी. कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” कहा जाता है और यहां किसानों के लिए प्रभावी धान खरीदी नीति लागू है. प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है. महिला सशक्तिकरण की दिशा में ‘महतारी वंदन योजना’ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके तहत 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को प्रदान की जा चुकी है. इसके अलावा 05 लाख 30 हजार से अधिक भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है. उन्होंने छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति, खान पान, रीति रिवाज परंपरा पर खुलकर बातें की और अपने राजनीतिक और सामाजिक अनुभव भी उनके साथ साझा किए. विदेशी मेहमानों ने कहा- अद्भुत है छत्तीसगढ़, सुंदर स्मृतियों के साथ पूरी हुई यात्रा  अध्ययन दल में शामिल विदेश के सैन्य अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ प्रवास को “अद्भुत और यादगार” बताते हुए कहा कि राज्य भौगोलिक विविधताओं और उर्वर भूमि से समृद्ध है. उन्होंने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य की प्रशंसा की. एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी ने कहा कि स्पष्ट नेतृत्व और सशक्त नीति के कारण प्रदेश में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है. उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों का मनोबल बढ़ा है, जिससे नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी कार्य हुआ है. उन्होंने आगे कहा कि राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं, जैसे महिला सशक्तिकरण और आवास योजनाओं का जमीनी स्तर पर सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है. उन्होंने छत्तीसगढ़ के समग्र विकास को कुशल नेतृत्व का परिणाम बताया. इस दौरान मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, आईजी ओ पी पाल, अध्ययन दल में आईपीएस अमनदीप सिंह कपूर, म्यांमार कर्नल लू जॉ आंग, ब्रिगेडियर मोहम्मद शाहिद अहमद, जापान के कर्नल उचीनो तोमोफुमी, ब्रिगेडियर कुंवर मान विजय सिंह राणा, सुप्रिया घाघ, ब्रिगेडियर शिशिर थमैय्या, बांग्लादेश के ब्रिगेडियर जनरल फिरदौस आरिफ अहमद, ब्रिगेडियर केतन अरुण मोहिते, ब्रिगेडियर अनिरुद्ध चौहान, एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी, एयर कमोडोर मूलनाथ गिरीश, डॉ. राजेश कुमार अस्थाना, भूटान के कर्नल समतेन चेनोर, ग्रीस के कर्नल कॉन्सटेंटिनॉस नीरस शामिल है. उल्लेखनीय है कि नेशनल डिफेंस कॉलेज द्वारा प्रतिवर्ष एक साल का कोर्स आयोजित किया जाता है. इस वर्ष 66वां प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसमें 120 सैन्य और गैर सैन्य अधिकारियों का दल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है. प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 15 अधिकारियों का दल आर्थिक सुरक्षा और रणनीति विषय पर अध्ययन के लिए छत्तीसगढ़ पहुंचा, जिसमें 05 विदेशी सैन्य अधिकारी भी शामिल है. प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने नया रायपुर में शहर की व्यवस्था और प्लान, कृषि और वन विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा, कांकेर के जंगल वारफेयर कॉलेज और कृषि विज्ञान केंद्र का अवलोकन किया. इसके साथ ही बस्तर में सुरक्षा संबंधी विषयों से जुड़ी विशेष चर्चा, सुरक्षाबलों के साहसिक कार्य, पर्यटन स्थल, विभिन्न शासकीय आयोजनों में बस्तर की कला-संस्कृति, चित्रकोट जलप्रपात, कोंडागांव में शिल्पग्राम का भ्रमण किया. अगले दिन उन्होंने भिलाई स्टील प्लांट और भिलाई के पुलिस थाना का भ्रमण कर कानून व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की.

ईरान के दो प्रमुख कमांडरों की हत्या, इजरायल का एक ही दिन में IRGC और बासिज फोर्स पर हमला

तेहरान  इजरायल के ताजा हमले में ईरान को 2 तगड़े झटके लगे हैं. ईरान ने कहा है कि इजरायली हवाई हमले में इस्लामिक रिव्यूलेशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी की मौत हो गई है. इसके अलावा एक दूसरे हमले में ईरान के बासिज फोर्स के खुफिया प्रमुख जनरल इस्माइल अहमदी की मौत हो गई है।  ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नैनी ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता और जनसंपर्क के उप-प्रमुख थे. उन्हें जुलाई 2024 में IRGC के कमांडर-इन-चीफ़ हुसैन सलामी ने इस पद पर नियुक्त किया गया था. 1957 में जन्मे नैनी ईरान-इराक युद्ध के अनुभवी सैनिक थे. इस जंग के दौरान वह जख्मी भी हुए थे।  नैनी के पास उनके पास सेकेंड ब्रिगेडियर जनरल का पद था. नैनी अक्सर IRGC की ओर से बयान जारी करते थे, जिनमें ईरान की सैन्य तत्परता, मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं के बारे में चेतावनियां होती थीं।  IRGC के प्रवक्ता थे अली मोहम्मद नैनी मार्च 2026 के मध्य में बढ़ते संघर्ष के बीच उन्होंने दावा किया कि ईरान कम से कम छह महीने तक चलने वाले हाई इंटेंसिटी वाले युद्ध के लिए पूरी तरह से तैयार है. उन्होंने कहा कि कई नई पीढ़ी की मिसाइलों और ड्रोनों का अभी तक उपयोग नहीं किया गया है।  मोहम्मद नैनी ईरान-इराक जंग (1980-88) की पूरी अवधि के दौरान फ्रंटलाइन पर रहे. लगभग 8 साल तक उन्होंने जंग में अलग अलग रोल में काम किया।  युद्ध के पहले साल उन्होंने क़द्र बटालियन के जनसंपर्क प्रमुख के रूप में सेवा की. उन्होंने सर्पोल-ए जहाब में अबूजर बैरक में भी जनसंपर्क और ऑपरेशंस की जिम्मेदारी संभाली. बाद में वे नजफ मुख्यालय में फ्रंटलाइन प्रचार के डिप्टी के रूप काम कर रहे थे।  इजरायल ने कहा है कि उसने ईरानी शासन से जुड़ी 130 से ज़्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर साइटों पर हमला किया है. इन टारगेट में पश्चिमी और मध्य ईरान में बैलिस्टिक मिसाइल साइटें, UAV और डिफेंस सिस्टम शामिल थीं।  इजरायल ने बयान में कहा गया, "इजरायल वायु सेना पश्चिमी और मध्य ईरान में हमले जारी रखे हुए है, ताकि वहां से इजरायल की ओर होने वाली गोलाबारी के दायरे को जितना हो सके कम किया जा सके और ईरान पर अपनी हवाई श्रेष्ठता का विस्तार किया जा सके।  बासिज फोर्स के इंटेलिजेंस चीफ थे जनरल इस्माइल अहमदी बासिज के खुफिया विभाग के प्रमुख जनरल इस्माइल अहमदी IRGC से जुड़े एक अधिकारी थे. वे संगठन में सुरक्षा और खुफिया भूमिका निभाते थे. वे बुशहर प्रांत के मूल निवासी थे।  उनकी भूमिका बासिज में सुरक्षा और खुफिया से जुड़ी थी. वे  कई बार IRGC कमांडर हुसैन सलामी द्वारा सम्मानित किए गए थे. वे बासिज के कमांडर शहीद घुलामरज़ा सुलेमानी के सहयोगी और डिप्टी थे. बासिज के खुफिया प्रमुख के रूप में संगठन में उनकी भूमिका आंतरिक सुरक्षा, जासूसी-रोकथाम और वैचारिक निगरानी की थी।  17  मार्च को अली लारिजानी मारे गए इससे पहले इजरायल के हमले में ईरान के डी फैक्टो लीडर अली लारिजानी की 17 मार्च 2026 को मौत हो गई थी. यह हमला रात में हुआ था जब वे अपनी बेटी के घर पर थे. इस हमले में उनके बेटे, कुछ अंगरक्षक और अन्य साथी भी मारे गए।  लारिजानी को खामेनेई की मौत के बाद ईरान का अस्थायी प्रमुख माना जा रहा था. उनकी मौत ने ईरान के नेतृत्व में बड़ा संकट पैदा किया है। 

जमानत मिलने के बाद असलम को फिर जेल से उठाया पुलिस ने, गौमांस विवाद पर लगा NSA

भोपाल  बहुचर्चित भोपाल स्लॉटर हाउस मामले में 24 घंटे के भीतर ऐसा जबरदस्त मोड़ आया कि सब दंग रह गए। कोर्ट से जमानत मिलने की खुशी अभी अधूरी ही थी कि जेल की चौखट पर ही असलम कुरैशी की आजादी छिन गई। पुलिस ने कानून व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देते हुए उसे फिर से हिरासत में ले लिया है और अब उस पर एनएसए यानी रासुका के तहत कार्रवाई की जा रही है। जेल के बाहर मची अफरातफरी असलम के परिजनों का आरोप है कि बुधवार रात करीब 10 बजे जैसे ही वह जेल से बाहर निकला, उसे जबरन एक लाल रंग की गाड़ी में बिठाकर ले जाया गया। परिजनों ने भौंरी बाईपास तक गाड़ी का पीछा भी किया, लेकिन पुलिस की फुर्ती के आगे वे नाकाम रहे। जब वे गांधी नगर थाने पहुंचे, तब जाकर पता चला कि यह कोई किडनैपिंग नहीं बल्कि पुलिस की प्रिवेंटिव एक्शन थी। जेल के बाहर 100 प्रदर्शनकारी हो गए इकट्ठा असलम की रिहाई की खबर मिलते ही जेल के बाहर 50 से 100 के करीब प्रदर्शनकारी जमा हो गए थे। नारेबाजी और बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस को डर था कि त्योहारों के इस मौसम में शहर की शांति भंग हो सकती है। इसी इनपुट के आधार पर कलेक्टर ने तत्काल डिटेंशन वारंट जारी कर दिया। गो-मांस मिलने पर हुआ था हंगामा यह पूरा मामला भोपाल के एक स्लॉटर हाउस से जुड़ा है जहां भारी मात्रा में संदिग्ध प्रतिबंधित मांस मिलने का आरोप है। असलम कुरैशी इस स्लॉटर हाउस का ऑपरेटर है। उसे पहले गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बुधवार को सेशन कोर्ट ने उसे जमानत दे दी थी। अब एनएसए लगने के बाद उसकी मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।

इंदौर मेट्रो के दूसरे फेज का फाइनल टेस्ट संपन्न, इमरजेंसी ब्रेक और स्टेशन मैनेजमेंट की हुई परख

इंदौर  मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के दूसरे चरण का काउंटडाउन शुरू हो गया है. मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) के अनुसार, मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (CMRS) की टीम ने 15 से 18 मार्च 2026 तक 17.5 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर का विस्तृत निरीक्षण पूरा कर लिया है।  MPMRCL की ओर से बताया गया कि मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (CMRS) की टीम ने 15 से 18 मार्च तक 17.5 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर का निरीक्षण किया और स्टेशन मैनेजमेंट, यात्रियों की सुविधाओं, गति, ब्रेकिंग सिस्टम, सिग्नलिंग और आपातकालीन स्थितियों जैसे पैमानों पर प्रोजेक्ट का मूल्यांकन किया।  मेट्रो रेल प्रायोरिटी कॉरिडोर के 6 किलोमीटर लंबे रूट पर कमर्शियल ऑपरेशन 31 मई 2025 को शुरू किए गए थे।  MPMRCL के मैनेजिंग डायरेक्टर एस कृष्णा चैतन्य ने कहा, "CMRS से हरी झंडी मिलने के बाद मेट्रो के दूसरे चरण के कमर्शियल ऑपरेशन जल्द ही शुरू हो सकते हैं।  मूल योजना के अनुसार, शहर में 31.32 किलोमीटर लंबा मेट्रो रेल कॉरिडोर 7500.8 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाना है।   इसका निर्माण कार्य 2019 में शुरू हुआ था, लेकिन घनी आबादी वाले आवासीय और कमर्शियल इलाकों में आई बाधाओं के कारण प्रोजेक्ट में देरी हुई, और अब इसकी लागत बढ़ने की उम्मीद है।   

अब नहीं होगी परीक्षा में धांधली: नया कानून पास, ईमानदार प्रतिभाओं को मिलेगा न्याय

रायपुर  छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और घोटालों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक-2026 सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया. सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के समर्थन से यह विधेयक पारित किया गया. नए कानून के तहत नकल माफिया, फर्जी अभ्यर्थियों और तकनीकी माध्यमों से धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं. दोषी पाए जाने पर 3 से 10 वर्ष तक की सजा और अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. वहीं नकल में संलिप्त अभ्यर्थियों को तीन वर्षों तक किसी भी भर्ती परीक्षा से वंचित (ब्लैकलिस्ट) किया जाएगा. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा कि युवा राज्य के विकास के केंद्र में होते हैं, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में उनके भविष्य के साथ अन्याय हुआ. उन्होंने आरोप लगाया कि पीएससी जैसी संस्थाओं में भ्रष्टाचार हुआ. प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर घोटाले हुए. साय ने कहा कि उनकी सरकार ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी, जिसके चलते कई आरोपी जेल तक पहुंचे हैं. उन्होंने कहा कि यह कानून नकल गिरोहों पर निर्णायक कार्रवाई के लिए बनाया गया है. संगठित अपराध की स्थिति में आरोपियों की संपत्ति जब्त करने और कुर्की करने का भी प्रावधान किया गया है. साथ ही इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के जरिए नकल करने वालों पर विशेष रूप से सख्ती बरती जाएगी. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि कानून का दायरा व्यापक होगा और यह पीएससी, व्यापमं, निगम-मंडल समेत सभी भर्ती और व्यावसायिक परीक्षाओं पर लागू होगा. जांच की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रावधान किया गया है कि ऐसे मामलों की जांच पुलिस उप निरीक्षक (SI) स्तर से नीचे का अधिकारी नहीं करेगा. आवश्यकता पड़ने पर सरकार अन्य एजेंसियों से भी जांच करा सकेगी. उन्होंने कहा कि कानून में प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन से जुड़े सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही भी तय की गई है. परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कठोर कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है. विपक्ष का समर्थन, राजनीतिक टिप्पणी पर आपत्ति नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को सीधा लाभ मिलेगा और व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी. हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व सरकार पर की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई और कहा कि ऐसे मुद्दों पर अनावश्यक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से बचना चाहिए तथा ध्यान केवल छात्रों के हित पर केंद्रित रहना चाहिए.