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तेल-गैस के कुओं से निकला क्रूड बनाता है ये 50 आम चीजें: प्लास्टिक से लेकर वैसलीन तक

 नई दिल्ली ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जंग से सिर्फ तेल और गैस का संकट ही नहीं बढ़ा है. इस जंग से हमारी रोजमर्रा की जरूरतों के समान पर भी संकट मंडराने लगा है. क्योंकि, हम हर दिन, हर वक्त कोई न कोई ऐसी चीज का इस्तेमाल करते रहते हैं, जो पेट्रो केमिकल्स या पेट्रोलियम मैटेलियल से बना होता है. ऐसे में जानते हैं कि  पेट्रोलियम बेस्ड उन छोटी-छोटी चीजों के बारे में, जिनका हम हर रोज इस्तेमाल करते हैं।   हम हर जो रोज जिस बोतल से पानी पीते हैं, उसकी प्लास्टिक या फिर जिस गाड़ी से चलते हैं, उसके टायर की रबड़ या जो लोशन चेहरे और शरीर पर लगाते हैं, उसमें मिला केमिकल कहां से आता है. ये सब पेट्रो केमिकल उत्पाद हैं और मिडिल ईस्ट की जंग से  सिर्फ गैस और तेल ही नहीं, पेट्रोलियम से बनने वाले इन छोटे-छोटे प्रोडक्ट्स पर भी संकट गहरा रहा है।   हमारी सुबह की शुरुआत ही पेट्रोकेमिकल से बने टूथपेस्ट ट्यूब से होती है. इसके बाद बाथरूम में मौजूद शैम्पू , शैम्पू की बोतलें, साबुन, लोशन, बॉडी वॉश और सिंथेटिक कपड़ों की बारी आती है. पेट्रोलियम का मतलब सिर्फ पेट्रोल, डीजल और गैस नहीं होता है. इससे और भी कई तरह की चीजें निकलती है, जो हमारी कई छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करती है।  1. प्लास्टिक और पैकेजिंग मैटेरियल पानी की बोतलें फूड कंटेनर, टिफिन बॉक्स पॉलिथीन बैग, रैपर मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान की पैकेजिंग नोट – इन सबमें ज्यादातर प्लास्टिक, पॉलिथीन और पॉलीप्रोपेलीन पेट्रोकेमिकल से बनते हैं.  पेट्रो केमिकल्स​ 2. कपड़े और टेक्सटाइल पॉलिएस्टर  नायलॉन  स्पोर्ट्स वियर क्लोथिंग मैटेरियल कारपेट और परदे नोट- ये सभी  सिंथेटिक कपड़े हैं और  पूरी तरह पेट्रोकेमिकल बेस्ड हैं. 3. पर्सनल केयर और कॉस्मेटिक्स साबुन, शैम्पू क्रीम, लोशन टूथपेस्ट परफ्यूम नोट – इन प्रोडक्ट्स को बनाने में ग्लीशरीन और दूसरे पेट्रो केमिकल्स यूज होते हैं. पेट्रो केमिकल्स​ 4. घरेलू सामान डिटर्जेंट और क्लीनिंग लिक्विड प्लास्टिक फर्नीचर किचन के कुछ नॉन स्टीक बर्तन  फोम, मैट्रेस और कुशन 5. ऑटोमोबाइल और ट्रांसपोर्ट टायर (Synthetic rubber) कार के डैशबोर्ड, सीट कवर लुब्रिकेंट (Engine oil) पेंट और कोटिंग नोट – इन उत्पादों का निर्माण विशुद्ध पेट्रो केमिकल्स से होता है. 6. इलेक्ट्रॉनिक्स मोबाइल फोन के पार्ट्स लैपटॉप/टीवी का बॉडी वायर और केबल (इंसुलेशन) 7. दवाइयां और मेडिकल प्रोडक्ट कई दवाओं के केमिकल कंपोनेंट सिरिंज, बैग मेडिकल प्लास्टिक उपकरण 8. कंस्ट्रक्शन मैटेलियल PVC पाइप पेंट और वार्निश इन्सुलेशन मटेरियल फ्लोरिंग विनायल 9. खिलौने और स्पोर्ट्स मैटेलियल प्लास्टिक टॉय फुटबॉल, हेलमेट जिम इक्विपमेंट 10. फूड पैकेजिंग मैटेलियल फूड पैकेजिंग फिल्म बोतलें और कैन फूड स्टोरेज कंटेनर पेट्रो केमिकल्स​ कच्चे तेल और गैस को रिफाइन करने के दौरान अलग-अलग स्टेज पर उससे अलग-अलग कैमिकल निकलते हैं और उनका इस्तेमाल कई तरह की जरूरी चीजों को बनाने में होता है. कच्चे तेल और गैस का शोधन या डिस्टिलेशन के अलग-अलग चरणों में होता है और हर स्टेज में अलग-अलग पेट्रो केमिकल्स या हाईड्रोकार्बन प्राप्त होते हैं.  पहले चरण में ही इससे एथेन, मीथेन, प्रोपेन, ब्यूटेन जैसे गैस निकलते हैं. इनमें से प्रोपेन और ब्यूटेन से एलपीजी, पीएनजी और अन्य गैस बनाए जाते हैं,जिनका इस्तेमाल किचन से लेकर ऑटोमोबाइल तक में होता है.  इसके साथ ही ब्यूटाडाइन, बेंजीन, टोल्यून, मेथनॉल, ग्लिसरीन जैसे तत्व निकलते हैं, जिससे प्लास्टिक, पेंट, रबर, फॉर्मास्यूटिकल उत्पाद, कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स, लोशन, क्रीम जैसी चीजें बनती हैं. आगे के स्टेज में एथिलीन, प्रोपिलीन, ब्यूटिलीन जैसे पदार्थ निकलते हैं, जिनसे प्लास्टिक, पॉलिथीन, रबड़ और ऐसे ही अन्य मैटेरियल बनाए जाते हैं.  शोधन प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ती जाती है – एक्रिलोनाइट्राइल और आइसोब्यूटिलीन जैसे पेट्रो केमिकल प्राप्त होते हैं, जिससे फोम, रेजिन, पेंट और कोटिंग्स जैसे मेटेलियल बनते हैं. इन हाईड्रोकार्बन का इस्तेमाल पैकेजिंग मैटेरियल, चिपकने वाले पदार्थ, विस्फोटक, गोंद, औद्योगिक रसायन, सिंथेटिक रबर, टायरों, साबुन और डिटर्जेंट, रंग, दवाई, क्लीनिंग मैटेरियल और कई तरह के मेडिकल उपकरणों बनाने में होता है. पेट्रोलियम को रिफाइन करने के दौरान ही अमोनिया और यूरिया जैसे उर्वरक बनाने वाले तत्व भी निकलते हैं. 

BAP का राज्यसभा चुनाव में कदम, कमलेश्वर डोडियार ने मोदी और राहुल से समर्थन की अपील की

रतलाम  मध्य प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय आदिवासी पार्टी भी मैदान में उतर आई है. मध्य प्रदेश विधानसभा में केवल एक विधायक वाली बाप(BAP) पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर नई सियासी हलचल पैदा कर दी है. पार्टी के एकमात्र विधायक कमलेश्वर डोडियार ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित अन्य बड़े राजनेताओं से समर्थन भी मांगा है. विधायक कमलेश्वर डोडियार ने अपने आधिकारिक लेटर हेड पर प्रधानमंत्री और राहुल गांधी को पत्र लिखकर आगामी राज्यसभा चुनाव में भारतीय आदिवासी पार्टी के उम्मीदवार को समर्थन देने की मांग की है. सैलाना से विधायक कमलेश्वर डोडियार ने कहा कि जब भाजपा और कांग्रेस आदिवासी क्षेत्रों में जाकर वोट मांगते हैं और सरकार बना लेते हैं. तो आदिवासियों का भी अधिकार है कि राज्यसभा की उम्मीदवारी के लिए उन्हें भी दोनों प्रमुख पार्टियों का समर्थन मिले. डोडियार ने पत्र में लिखा है कि भारतीय आदिवासी पार्टी देश भर में आदिवासी समाज के अधिकार, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के लिए कार्य कर रही है और राज्यसभा में प्रतिनिधित्व चाहती है. मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर होना है चुनाव दरअसल मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होना है. वर्तमान में बीजेपी के केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन, डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और दिग्विजय सिंह का कार्यकाल जून, 2026 में समाप्त होना है. संख्या बल के हिसाब से बीजेपी 2 राज्यसभा सीटों पर कब्जा करने की स्थिति में है. वहीं, कांग्रेस को अपनी एक सीट बचाने के लिए क्रॉस वोटिंग से बचना होगा. लेकिन भारतीय आदिवासी पार्टी द्वारा भी राज्यसभा के लिए उम्मीदवार उतारे जाने की स्थिति में कांग्रेस के उम्मीदवार को क्रॉस वोटिंग का खतरा भी झेलना पड़ सकता है. कमलेश्वर डोडियार ने भाजपा और कांग्रेस सहित कई बड़े नेताओं से उनकी पार्टी के लिए समर्थन मांगा है. गौरतलब है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में भारतीय आदिवासी पार्टी ने सैलाना विधानसभा सीट से अपना खाता खोला था. वहीं, पड़ोसी राज्य राजस्थान में भी भारतीय आदिवासी पार्टी के चार विधायक और एक सांसद है. बाप पार्टी का प्रभाव राजस्थान और मध्य प्रदेश के करीब 20 जिलों में है. इसके बाद अब भारतीय आदिवासी पार्टी की नजर राज्यसभा में भी सांसद भेजने पर है. बहरहाल मध्य प्रदेश में केवल एक विधायक वाली भारतीय आदिवासी पार्टी राज्यसभा की सीट जीतने की स्थिति में तो नहीं है. लेकिन राज्यसभा उम्मीदवारी की घोषणा के बाद इससे कांग्रेस का गणित जरूर बिगड़ सकता है. वहीं, कमलेश्वर डोडियार के अनुसार राज्यसभा में आदिवासी समाज का उम्मीदवार भेजने के लिए दोनों प्रमुख पार्टियों के बड़े नेताओं के साथ ही आदिवासी विधायकों से भी समर्थन की मांग की जा रही है.

राज्यसभा में क्रॉस वोटिंग का खतरा, कांग्रेस ने बढ़ाई विधायकों की बाड़ेबंदी, हरियाणा, ओडिशा और बिहार की घटनाओं के बाद टेंशन

भोपाल  मध्य प्रदेश में जून 2026 को खाली होने वाली राज्यसभा सीटों पर अप्रैल मई में चुनाव होने की संभावना है। इससे पहले राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है। वर्तमान में इन सीटों पर डॉ सुमेर सिंह सोलंकी (भाजपा), जॉर्ज कुरियन (भाजपा) और दिग्विजय सिंह (कांग्रेस) सांसद हैं। कांग्रेस को क्यों सता रहा डर? कांग्रेस पार्टी को इस चुनाव से पहले अपने ही विधायकों की क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है। हाल ही में हरियाणा, बिहार और ओडिशा में हुए राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग के उदाहरण सामने आए हैं, जिससे पार्टी सतर्क हो गई है। सूत्रों के अनुसार, इसी आशंका के चलते कांग्रेस अपने विधायकों की “बाड़ेबंदी” (रिसॉर्ट पॉलिटिक्स) की तैयारी में है, ताकि किसी तरह की टूट-फूट से बचा जा सके। किन विधायकों पर संशय? कांग्रेस के पास फिलहाल 65 विधायक हैं, लेकिन निर्मला सप्रे को लेकर स्थिति साफ नहीं है। निर्मला सप्रे लगातार भाजपा के कार्यक्रमों में नजर आ रही हैं। वहीं अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में वोटिंग नहीं कर सकते। इसके अलावा पार्टी को आशंका है कि 5–6 विधायक भाजपा के संपर्क में आ सकते हैं। क्या कहता है चुनावी गणित? 230 सदस्यीय विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास 165 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 65। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होती है। इस हिसाब से भाजपा को 2 सीट और कांग्रेस को 1 सीट मिलना तय माना जा रहा है। कहां फंस सकता है पेंच? सियासी समीकरण तब बिगड़ सकते हैं, अगर कांग्रेस के कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर दें या अनुपस्थित रहें। खासकर अगर निर्मला सप्रे भाजपा के पक्ष में जाती हैं और अन्य 5–6 विधायक भी टूटते हैं, तो कांग्रेस अपनी तय मानी जा रही एक सीट भी गंवा सकती है। पार्टी का दावा कांग्रेस नेता पीसी शर्मा का कहना है कि सभी विधायक एकजुट हैं और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हालांकि अंदरखाने चल रही हलचल ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी दावा किया है कि पार्टी में सबकुछ ठीक है और सभी विधायक एकजुट है। संगठन को धार देने की तैयारी, जिला स्तर पर शुरू किया विस्तार दिल्ली में हुई अहम बैठक के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस ने संगठन विस्तार की प्रक्रिया तेज कर दी है। लंबे इंतजार के बाद अब जिला कार्यकारिणी की घोषणा शुरू हो गई है और नवरात्र के अंदर अधिकांश जिलों में नई टीम सामने आ जाएगी। दो दिन तक चली मंथन बैठक में संगठन को मजबूत करने की रणनीति तय हुई। इसके तुरंत बाद जिला कार्यकारिणी घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पार्टी नेतृत्व ने साफ संकेत दिए हैं कि अब देरी बर्दाश्त नहीं होगी।  लंबे समय से लटका था मामला जिला अध्यक्षों की नियुक्ति तो पहले ही हो चुकी थी, लेकिन कार्यकारिणी घोषित न होने से सवाल उठ रहे थे। कुछ जिलों में सूची जारी हुई भी, लेकिन पदों की संख्या ज्यादा होने पर उन्हें निरस्त करना पड़ा। अब नई गाइडलाइन के तहत संतुलित टीम बनाई जा रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक नवरात्रि के भीतर अधिकांश जिलों की कार्यकारिणी घोषित कर दी जाएगी। इसे आगामी चुनावों की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। जबलपुर ग्रामीण, श्योपुर, कटनी शहर और बड़वानी जिलों की नई कार्यकारिणी घोषित की जा चुकी है। ये नियुक्तियां प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर की गई हैं। AICC की गाइडलाइन के मुताबिक गठन बड़े जिलों में अधिकतम 51 सदस्य छोटे जिलों में 31 सदस्य की सीमा तय इसी मानक के अनुसार नई कार्यकारिणियां तैयार की जा रही हैं। जमीनी स्तर पर भी संगठन मजबूत संगठन विस्तार के तहत 88 नगर अध्यक्ष और 21 मंडल अध्यक्षों की भी नियुक्ति की गई है। इसका मकसद बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करना है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और संगठन प्रभारी हरीश चौधरी लगातार प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। उनका फोकस बूथ स्तर पर नेटवर्क मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर है। 

भारत में लॉन्च हुई Mini Cooper S Victory Edition, कीमत और डिजाइन पर एक नजर

मुंबई   कार निर्माता कंपनी Mini India ने भारतीय बाजार में अपनी MINI Cooper S Victory Edition लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस कार को 57.50 लाख रुपये की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत पर उतारा है।  गौरतलब है कि इस मॉडल की बुकिंग फरवरी के आखिर में शुरू हुई थी, और इसे भारत में पूरी तरह से CBU इम्पोर्ट के तौर पर सीमित संख्या में लाया जा रहा है. इस स्पेशल एडिशन का डिजाइन 1965 की Monte Carlo Rally जीतने वाली Mini Cooper S से प्रेरित है।  MINI Cooper S Victory Edition का डिजाइन MINI Cooper S John Cooper Works Pack पर आधारित, नया Victory Edition विशेष रूप से Chili Red कलर स्कीम में पेश किया गया है, जिसमें रूफ का कलर ब्लैक रखा गया है और कार की पूरी लंबाई में एक सफ़ेद धारी बनी हुई है. वहीं इसके किनारों पर '52' नंबर के ग्राफ़िक्स भी बने हुए हैं, जो रैली जीतने वाली कार के रेस नंबर को दर्शाते हैं।  वहीं रियर प्रोफाइल की बात करें तो, इस एडिशन में रूफ पर लगा हुआ एक स्प्लिट स्पॉइलर और बीच में लगा एग्जॉस्ट दिया गया है. कार में बाहर की तरफ, इसमें C-पिलर पर '1965' की बैजिंग, व्हाइट कलर के हब कैप और JCW Lap Spoke 2-tone डिज़ाइन वाले 18-इंच के अलॉय व्हील्स जैसे अतिरिक्त फ़ीचर्स भी दिए गए हैं।  MINI Cooper S Victory Edition का इंटीरियर केबिन के इंटीरियर पर नजर डालें तो, यहां ब्लैक और रेड कलर की थीम दी गई है, और इसमें ड्राइवर-साइड के दरवाज़े पर 'Rallye Monte-Carlo' का स्टिकर, Victory Edition के दरवाज़े की सिल्स, और स्टीयरिंग व्हील के रिम और बीच के स्टोरेज बॉक्स पर '1965' की बैजिंग जैसे एलिमेंट्स दिए गए हैं।  MINI Cooper S Victory Edition का पावरट्रेन मैकेनिकल तौर पर नए Victory Edition में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसमें पहले की तरह ही 2.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन इस्तेमाल किया गया है, जो 201 bhp की पावर और 300 Nm का टॉर्क जेनरेट करता है. इस इंजन को डुअल-क्लच ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है। 

भा.ज.पा के केरल प्रचार अभियान की कमान संभालेंगे पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह

तिरुवनंतपुरम   9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अभियान निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा केरल में एक आक्रामक अभियान की तैयारी कर रही है। इसमें ऐतिहासिक सफलता हासिल करने के प्रयास में पार्टी अपनी शीर्ष राष्ट्रीय नेतृत्व टीम को तैनात कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री समेत अन्य वरिष्ठ नेता केरल पहुंचने वाले हैं, जो 140 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा का खाता खोलने की पार्टी की दृढ़ता को दर्शाता है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो त्वरित दौरों पर प्रमुख जिलों का दौरा करेंगे। इस दौरान वह रैलियों को संबोधित करेंगे और कार्यकर्ताओं को उत्साहित करेंगे। भाजपा के अभियान का खाका राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे कसर्गोड, पलक्कड़, तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और त्रिशूर में उच्च दृश्यता वाली पहुंच पर केंद्रित है। पार्टी अपने हाल के चुनावी लाभों से आत्मविश्वास ले रही है। सबसे प्रमुख है अभिनेता से राजनीतिज्ञ बने सुरेश गोपी की त्रिशूर लोकसभा सीट पर 70,000 से अधिक मतों से हासिल की गई जीत शामिल है। इसके बाद दिसंबर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा ने तिरुवनंतपुरम निगम पर नियंत्रण हासिल किया, जो इस राज्य में पार्टी के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है, जहां उसे परंपरागत रूप से स्थान पाने में कठिनाई रही है। हालांकि आंकड़े मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने 15.64 प्रतिशत वोट शेयर प्राप्त किया जबकि 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों में यह थोड़ी गिरकर 14.71 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद, पार्टी उत्साहित बनी हुई है और 2021 विधानसभा चुनावों में नौ सीटों पर दूसरे स्थान पर आने को बढ़ती पकड़ का सबूत मानते हुए लगातार सक्रिय है। केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने विश्वास जताया है कि पार्टी न केवल लंबे समय से चली आ रही चुनावी बाधा को तोड़ेगी बल्कि आगामी विधानसभा में कई सीटें भी जीतेगी। हालांकि, चुनौतियाँ बरकरार हैं। केरल की अद्वितीय जनसांख्यिकीय संरचना, जहां अल्पसंख्यक जिनमें मुस्लिम और ईसाई शामिल हैं, लगभग 42 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और यह एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। पार्टी रणनीतिकार मानते हैं कि समुदाय के नेताओं के साथ सतत संपर्क महत्वपूर्ण होगा क्योंकि राष्ट्रीय नेता आने वाले दिनों में अधिक जुड़ाव बढ़ाएंगे। जैसे-जैसे अभियान तीव्र होता जा रहा है, भाजपा का यह उच्च-ऊर्जा अभियान यह संकेत देता है कि पार्टी केरल में क्रमिक लाभ को ऐतिहासिक चुनावी पकड़ में बदलने के लिए दृढ़ प्रयास कर रही है।

मुंबई में घर की कीमतों में इजाफा, ईरान-इजरायल तनाव का पड़ा असर

मुंबई मुंबई में प्रॉपर्टी की कीमतें पहले से ही आसमान छू रहीं हैं और अब इनके रेट्स में और तेजी आ सकती है.  Anarock Group की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मुंबई और उसके आसपास के इलाकों (MMR) में घरों की कीमतें बढ़ सकती हैं. इसका मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में चल रहा तनाव है, जिसकी वजह से निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सामान को लाने-ले जाने का खर्च और कच्चे माल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं।  रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंची इमारतों को बनाने का खर्च पहले ही करीब ₹50 प्रति वर्ग फुट तक बढ़ चुका है. जानकारों का मानना है कि बिल्डर्स अब इस बढ़े हुए खर्च की भरपाई घर खरीदारों से करेंगे, जिसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो बजट होम या मध्यम आय वर्ग के घर तलाश रहे हैं।  निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख इनपुट्स की कीमतों में भी तीखी वृद्धि देखी गई है. स्टील की कीमतें लगभग 20 प्रतिशत बढ़कर ₹62 से ₹72 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई हैं, जबकि हॉट रोल्ड कॉइल की कीमतें ₹51 से ₹56 प्रति किलोग्राम के बीच बनी हुई हैं, जिनमें आगे और बढ़ोतरी की आशंका है।  खाड़ी देशों में उत्पादन में कटौती के चलते एल्युमीनियम की कीमतें ₹3.5 लाख प्रति टन तक जा पहुंची हैं, जिसका उपयोग इमारतों के बाहरी हिस्सों और मेट्रो स्टेशनों जैसे बुनियादी ढांचे में प्रमुखता से होता है. साथ ही, सड़क निर्माण के लिए अनिवार्य बिटुमेन की कीमतें भी बढ़कर ₹48 से ₹51 प्रति किलोग्राम हो गई हैं।  लॉजिस्टिक्स में आ रही हैं बाधाएं लागत में इस अप्रत्याशित वृद्धि का सबसे बड़ा कारण लॉजिस्टिक्स में आने वाली बाधाएं हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बाधित होने के कारण शिपमेंट्स को अब 'केप ऑफ गुड होप' के लंबे रास्ते से भेजा जा रहा है, जिससे समुद्री मार्ग की दूरी 6,000 से 10,000 समुद्री मील बढ़ गई है और डिलीवरी में 10 से 20 दिनों की देरी हो रही है. इस बदलाव ने प्रति कंटेनर माल ढुलाई की लागत में ₹1.5 से ₹3.5 लाख की बढ़ोतरी कर दी है. इसके अलावा, ₹1 लाख प्रति टन के पार पहुंचे समुद्री ईंधन के ऊंचे दाम, युद्ध अधिभार (War surcharges) और बढ़ते बीमा प्रीमियम ने डेवलपर्स की वित्तीय चुनौतियों को और अधिक गंभीर बना दिया है।  

किसानों को मिलेगा ₹4000 का लाभ, खाते में एक साथ आएगी राशि, जानें पूरी जानकारी

भोपाल मध्य प्रदेश के किसानों के लिए मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना (CM Kisan Kalyan Yojana) को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। इस योजना के तहत किसानों को हर साल ₹6000 की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन किस्तों में ₹2000-₹2000 के रूप में सीधे बैंक खातों में भेजी जाती है। हालांकि, राज्य के किसानों को अब तक 14वीं किस्त का इंतजार है, जबकि केंद्र की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी हो चुकी है। क्यों अटकी है 14वीं किस्त? पिछली 13वीं किस्त अगस्त 2025 में जारी की गई थी। इसके बाद से अब तक योजना के तहत अगली किस्त किसानों के खातों में नहीं आई है। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही 14वीं और 15वीं किस्त को एक साथ जारी कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो किसानों के खाते में एक साथ ₹4000 ट्रांसफर किए जा सकते हैं। किन किसानों को नहीं मिलेगा लाभ? जिनकी e-KYC पूरी नहीं है जिनका बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है जिनका भूमि रिकॉर्ड सत्यापित नहीं है जिनका नाम पीएम किसान सूची से हट चुका है कैसे चेक करें अपना नाम? किसान अपना स्टेटस देखने के लिए SAARA पोर्टल (saara.mp.gov.in) पर जाकर “Chief Minister Kisan Kalyan Yojana Beneficiary Status” विकल्प चुन सकते हैं। फिलहाल, सरकार की ओर से किस्त जारी करने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही किसानों के खाते में राहत की रकम पहुंच सकती है।

मिडिल ईस्ट तनाव के कारण ड्यूक्स गेंदों की कमी, इंग्लैंड में घरेलू क्रिकेट पर संकट, ECB का बयान

लंदन  इंग्लैंड के आगामी घरेलू क्रिकेट सीजन की शुरुआत से पहले एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है. इसकी वजह है मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष. जिसका असर अब क्रिकेट पर पड़ने लगा है।  'डेली मेल' की र‍िपोर्ट के मुताब‍िक- इंग्लैंड में टेस्ट और फर्स्ट-क्लास क्रिकेट के लिए इस्तेमाल होने वाली ड्यूक्स (Dukes) गेंदों की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है।  1760 से संचालन कर रही ड्यूक्स (Dukes) कंपनी  हर साल लगभग 4,000 से 5,000 लाल गेंदें तैयार करती है, जिनका इस्तेमाल इंग्लैंड के समर सीजन (जो 3 अप्रैल से शुरू हो रहा है) में किया जाता है. लेकिन इस बार हालात सामान्य नहीं हैं।  कंपनी के मालिक दिलीप जाजोदिया जो पिछले करीब 40 साल से इस बिजनेस से जुड़े हैं, उन्होंने बताया कि सप्लाई चेन में आई दिक्कतों के चलते उन्हें काउंटी क्लब्स को सीजन की शुरुआत में केवल 50 प्रतिशत गेंदें ही देनी पड़ रही हैं।  जाजोदिया ने कहा- हम इस समय बड़े संकट से जूझ रहे हैं. हमें क्लब्स को आधी गेंदें देकर शुरुआत करनी पड़ रही है और हालात संभालने की कोशिश कर रहे हैं।  दरअसल, ड्यूक्स गेंदों के निर्माण की प्रक्रिया कई देशों से होकर गुजरती है. गेंद के लिए चमड़ा ब्रिटेन की गायों से लिया जाता है और उसे चेस्टरफील्ड में प्रोसेस किया जाता है. इसके बाद सिलाई के लिए यह मटेरियल दक्षिण एशिया भेजा जाता है और फिर तैयार गेंदें वापस यूके लाई जाती हैं।  लेकिन इस बार वापसी की प्रक्रिया सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है. जाजोदिया के मुताबिक, साउथ एशिया में तैयार माल फैक्ट्रियों में पड़ा है, लेकिन एयरलाइंस कार्गो नहीं उठा रही हैं. मिडिल ईस्ट के रास्तों पर तनाव के चलते उड़ानों में भारी रुकावट आई है।  उन्होंने बताया- आमतौर पर 120 गेंदों के एक बॉक्स की एयर फ्रेट लागत करीब 5 डॉलर प्रति किलो होती थी, लेकिन अब यह बढ़कर 15 डॉलर प्रति किलो तक पहुंच गई है. ज्यादातर शिपमेंट मिडिल ईस्ट से होकर जाती है, और वहां हालात खराब होने से बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।  इस संकट का सीधा असर काउंटी क्रिकेट पर पड़ सकता है, जहां टीमों को सीजन की शुरुआत में सामान्य से कम गेंदों के साथ काम चलाना पड़ सकता है।  इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने ड्यूक्स गेंदों के संकट पर क्या कहा?  इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने फिलहाल स्थिति को लेकर चिंता से इनकार किया है. ECB ने अपने बयान में कहा कि प्रोफेशनल काउंटी क्लब्स को सीजन शुरू होने से पहले उतनी ही Dukes गेंदें मिल चुकी हैं, जितनी आमतौर पर दी जाती हैं. Dukes गेंदों का इस्तेमाल सिर्फ इंग्लैंड ही नहीं, बल्कि आयरलैंड और वेस्टइंडीज में खेले जाने वाले टेस्ट क्रिकेट में भी किया जाता है। 

उज्जैन में नैवेद्य लोक है लजीज व्यंजनों का नया ठिकाना, मिलेगा इंदौर की छप्पन दुकान जैसा स्वाद

उज्जैन   इंदौर की छप्पन दुकान की तरह उज्जैन में भी नैवेद्य लोक की शुरुआत हुई है। सीएम मोहन यादव ने नैवेद्य लोक का लोकार्पण किया है। भव्य नैवेद्य लोक उज्जैन के नानाखेड़ा में स्थित है। यहां 34 दुकानें बनाई गई हैं। नैवेद्य लोक में आपको शुद्ध शाकाहारी और लजीज व्यंजन मिलेंगे। यह उज्जैन वासियों के लिए बड़ी सौगात है। 18 करोड़ रुपए से हुआ है निर्माण वहीं, नैवेद्य लोक में बने इन दुकानों की साइज 62 वर्गफीट से लेकर 180 वर्गफीट तक है। इन सभी दुकानों की निर्माण लागत 18 करोड़ रुपए बताई जा रही है। दुकानों का निर्माण उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा किया गया है। 28 हजार स्क्वायर फिट में बने नैवेद्य लोक में दुकानों के साथ ही यहां विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए सुसज्जित ओपन थियेटर, साउंड सिस्टम, महिला, पुरुष, दिव्‍यांग जनों के उपयोगार्थ नवीन सेंसर उपकरण के साथ प्रसाधन कक्ष, सीसीटीवी कैमरा-सर्वर रूम, आपातकालीन विद्युत व्यवस्था के लिए डीजी सेट, पार्किंग, अंडर ग्राउंड विद्युत व्यवस्था, सीवरेज और लैंडस्केपिंग आदि सुविधाएं विकसित की गई हैं। लजीज व्यंजनों के साथ रोजगार भी मिलेगा वहीं, नैवेद्य लोक के लोकार्पण के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मीडिया से चर्चा में कहा कि इस नैवेद्य लोक में व्यंजनों के स्वाद के साथ ही रोजगार भी मिलेगा। इस कार्य के लिए मेरी ओर से सभी को बधाई। अति पिछड़े इलाके को किया गया विकसित नैवेद्य लोक की विशेषता बताते हुए उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी ने बताया कि यहां अति पिछड़े इलाके को विकसित किया गया है। पहले यहां काफी गंदगी हुआ करती थी। इस नैवेध लोक के माध्यम से उज्जैन में महाकाल दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक विशेष सुविधा प्रदान करेगा। श्रद्धालु यहां मालवा के व्यंजनों का लुत्फ उठा सकेंगे। सीईओ संदीप सोनी ने कहा कि इसे पूरी तरह से मॉल वाला लुक दिया गया है। लोग आएंगे तो उन्हें शानदार एंबियंस मिलेगा। गौरतलब है कि लोकार्पण के दिन ही वहां के लोगों की भीड़ उमड़ी है। इसके साथ ही सीएम मोहन यादव ने भी यहां व्यंजनों का स्वाद चखा है।

टाइगर कॉरीडोर बरेठा घाट को फोर-लेन बनाने के लिए मिली केंद्र से मंजूरी, 51 हादसों में 18 मौतें

बैतूल  मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के बरेठा घाट से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-46 (NH-46) के महत्वपूर्ण हिस्से को अब फोरलेन बनाने की मंजूरी मिल गई है। यह वही इलाका है, जहां पिछले दो साल में सड़क हादसे हुए और 18 लोगों की जान चली गई। लगातार बढ़ते हादसों और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इस सड़क को चौड़ा और सुरक्षित बनाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। यह सड़क ग्वालियर से बैतूल तक करीब 634 किलोमीटर लंबा एक अहम हाईवे है, जो पूरी तरह मध्यप्रदेश के अंदर आता है। यह राज्य के उत्तर और दक्षिण हिस्सों को जोड़ने वाला बड़ा मार्ग है और भोपाल से नागपुर जाने वाले कॉरिडोर का भी हिस्सा है। इस पर ज्यादातर काम पूरा हो चुका है, लेकिन बरेठा घाट समेत करीब 21 किलोमीटर का हिस्सा बाकी था।  हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू होगा काम  दरअसल, यह इलाका टाइगर कॉरिडोर में आता है, यानी यहां से जंगली जानवरों की आवाजाही होती है। इसी कारण 1 अप्रैल 2022 को हाईकोर्ट ने यहां सड़क निर्माण पर रोक लगा दी थी। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को वन्यजीव और पर्यावरण से जुड़ी कई मंजूरियां लेनी पड़ीं। अब वाइल्डलाइफ बोर्ड और केंद्र सरकार से सभी जरूरी अनुमति मिल चुकी है। जैसे ही हाईकोर्ट से स्टे हटाने का अंतिम आदेश आएगा, निर्माण काम शुरू कर दिया जाएगा। संकरी और घुमावदार सड़क, लगता है जाम  बरेठा घाट का यह हिस्सा अभी केवल दो लेन का है, जो बहुत संकरा और घुमावदार है। यहां भारी वाहनों का दबाव ज्यादा रहता है, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। साथ ही, दो जगह ऐसे ब्लैक स्पॉट हैं, जहां बार-बार हादसे होते हैं। कम चौड़ाई, तेज मोड़, ढलान और कम विजिबिलिटी इस रास्ते को और खतरनाक बनाते हैं। ब्लैक स्पॉट को ठीक करने भी बनाया प्लान  पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच यहां 51 एक्सीडेंट हुए, जिनमें 18 लोगों की मौत हुई और करीब 62 लोग घायल हुए। कई छोटे हादसे तो रिकॉर्ड में भी नहीं आ पाते, जिससे असली स्थिति और गंभीर हो सकती है। अब इस पूरे हिस्से को 4 लेन में बदला जाएगा, जिससे सड़क चौड़ी होगी और ट्रैफिक आसानी से चल सकेगा। इसके साथ ही ब्लैक स्पॉट्स को ठीक करने के लिए खास प्लान बनाया गया है। यहां 3 छोटे पुल (माइनर ब्रिज), 38 बॉक्स कलवर्ट, 1 रेलवे अंडरब्रिज, 2 रोड ओवरब्रिज और 1 व्हीकल अंडरपास बनाए जाएंगे। इससे ट्रैफिक सुचारू होगा और दुर्घटनाओं में कमी आएगी। वन्य जीवों की सुरक्षा का ख्याल, बनेंगे 10 अंडरपास, 1 ओवरपास  सबसे खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में वन्यजीवों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। जानवरों की आवाजाही के लिए 10 अंडरपास और 1 ओवरपास बनाए जाएंगे, ताकि वे बिना खतरे के सड़क पार कर सकें। इसके अलावा सड़क पर क्रैश बैरियर, साइन बोर्ड, रंबल स्ट्रिप, नॉइज बैरियर और फेंसिंग जैसी सुविधाएं भी लगाई जाएंगी, जिससे यात्रियों और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा हो सके। पर्यटन स्थलों पर पहुंच भी बेहतर होगी  इस परियोजना के पूरा होने से न सिर्फ सड़क हादसे कम होंगे, बल्कि व्यापार, पर्यटन और आवागमन भी आसान हो जाएगा। सांची, भीमबेटका, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर होगी। साथ ही, उद्योगों और व्यापार को भी इसका बड़ा फायदा मिलेगा। कुल मिलाकर, बरेठा घाट का यह फोरलेन प्रोजेक्ट आम लोगों के लिए सुरक्षित और आसान सफर की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।