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4 टेस्ट मैचों की ऐतिहासिक सीरीज में भिड़ेंगे ऑस्ट्रेलिया-न्यूज़ीलैंड

मेलबर्न न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ पहली बार चार-मैच की टेस्ट सीरीज और बांग्लादेश के ख़िलाफ दो-टेस्ट सीरीज ऑस्ट्रेलिया की बिज़ी इंटरनेशनल गर्मियों की खास बातें हैं, जिसमें 14 जगहों पर पुरुषों और महिलाओं के क्रिकेट के 27 इंटरनेशनल मैच शामिल हैं। सीज़न की शुरुआत उत्तर में बांग्लादेश के अगस्त में डार्विन और मैके में दो टेस्ट मैचों के दौरे से होगी, जिसके बाद महिलाओं की टीम के लिए तीन वनडे और तीन टी20 मैचों का एक व्हाइट-बॉल लेग होगा, जो सभी ब्रिस्बेन और सिडनी में होस्ट किए जाएँगे। नवंबर में इंग्लैंड का व्हाइट-बॉल टूर होगा, जिसमें तीन मेन्स वनडे और पांच मैचों की टी20 सीरीज़ शामिल है। वनडे पर्थ, एडिलेड और होबार्ट में खेले जाएंगे, जबकि टी20 मेलबर्न, गोल्ड कोस्ट, ब्रिस्बेन, सिडनी और कैनबरा में होंगे। गर्मियों का सबसे खास समय न्यूज़ीलैंड के खिलाफ ऐतिहासिक चार-टेस्ट सीरीज़ के आसपास रहेगा, जो दिसंबर की शुरुआत से जनवरी की शुरुआत तक चलेगी। चार टेस्ट पर्थ, एडिलेड, मेलबर्न और सिडनी में खेले जाएंगे। इसके बाद महिला टीम फरवरी और मार्च में तीन टी20 और तीन वनडे के लिए न्यूज़ीलैंड की मेजबानी करेगी, जिसके बाद गर्मियों का अंत 11 से 15 मार्च तक एमसीजी में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की मेन्स टीमों के बीच एक बार के 150वीं एनिवर्सरी टेस्ट के साथ होगा।  

आज शेयर बाजार में धमाकेदार तेजी, सेंसेक्स ने 1000 अंक बढ़ाए, निफ्टी 22850 तक पहुंचा!

मुंबई  शेयर बाजार में तेजी के साथ शुरुआत हुई है. गिफ्ट निफ्टी सुबह तेजी के साथ भारतीय बाजार खुलने के संकेत मिल रहे थे. सेंसेक्स 1065 अंक की बढ़त के साथ 73761 पर खुला है और निफ्टी 336 अंक की तेजी के साथ 22849 पर ओपन हुआ है. ईरान और इजराइल वॉर के चलते सभी सेक्टोरल इंडेक्स में बिकवाली हावी रही लेकिन आज ऑटो, मेटल, कैपिटल मार्केट, पीएसयू बैंक. डिफेंस में खरीदारी देखी जा रही है. डिफेंस सेक्टर में 2 फीसदी से ज्यादा की बढ़त आई है. इसके अलावा निफ्टी ऑटो और मेटल में भी 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी है।  निफ्टी गेनर्स में एशियन पेंट्स, श्रीराम फाइनेंस, टाइटन, जियो फाइनेंशियल, एल एंड टी और Interglobe Aviation के शेयर्स शामिल हैं. वहीं, पावर ग्रिड के शेयर्स 1 फीसदी की गिरावट देखी जी रही है. लेकिन क्या आज जानते हैं कि इस ताबड़तोड़ तेजी के पीछे की वजह क्या है? इन वजहों से आई शेयर बाजार में तेजी इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह ये है कि पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि 5 दिन के लिए पावर प्लांट पर हमले के प्लान को टाल दिया गया है. ट्रंप के इस बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. अमेरिका में डाउ 600 पॉइंट से ज्यादा चढ़ा और तेल की कीमतें भी काफी गिर गईं, हालांकि बाद में दोनों में थोड़ी गिरावट भी देखी गई. फिलहाल तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं और करेंसी में बदलाव पर भी नजर रखना जरूरी है. सीएनबीसी के एनालिस्ट के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,000 एक अहम सपोर्ट लेवल है, जबकि 23,200–23,300 का लेवल आगे रेजिस्टेंस की तरह काम कर सकता है। बैंकिंग शेयर्स में खरीदारी रिकवरी में बैंकिंग शेयरों ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है. HDFC Bank, ICICI Bank और State Bank of India जैसे शेयरों में तेजी आई, जिससे पूरा बाजार को मजबूती मिली है. साथ ही ऑटो, कैपिटल गुड्स और टेलीकॉम सेक्टर में भी खरीदारी देखने को मिली, जो दिखाता है कि तेजी सिर्फ एक सेक्टर तक सीमित नहीं है।  गिफ्ट निफ्टी ने दिए तेजी के संकेत GIFT Nifty जोकि भारतीय बाजार की शुरुआत का शुरुआती संकेत देता है, शुरुआती कारोबार में करीब 520 अंक तक उछल गया. इससे भी संकेत मिल रहा था कि बाजार 12 महीने के निचले स्तर के आसपास से रिकवरी दिखा सकता है. इसके अलावा एशियन मार्केट में भी तेजी के साथ कारोबार होते हुए नजर आया।  मंगलवार को रुपये में थोड़ी मजबूती देखने को मिली है, क्योंकि तेल की कीमतों में गिरावट आई थी और ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत के संकेत दिए थे. रुपया डॉलर के मुकाबले 93.64 पर खुला, जो पिछले सेशन के 93.9750 से बेहतर था, जब यह अपने रिकॉर्ड निचले स्तर 93.98 तक पहुंच गया था. हालांकि, ईरान द्वारा बातचीत से इनकार करने से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और आगे की दिशा अभी साफ नहीं है. वोलैटिलिटी इंडेक्स (VIX), जोकि बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव का संकेत देता है, 4% से ज्यादा गिरकर 25.60 पर आ गया है. निवेशकों के बीच अनिश्चितता कम हुई है और बाजार में डर थोड़ा कम हो गया है. जिससे तेजी का मूड देखा जा रहा है। 

शासकीय सेवकों और पेंशनर्स के लिए 3 प्रतिशत मंहगाई भत्ता दिए जाने की मंजूरी

मंत्रि-परिषद ने 6,940 करोड़ रुपये के विभिन्न निर्माण और विकास कार्यों की दी मंजूरी शासकीय सेवकों और पेंशनर्स के लिए 3 प्रतिशत मंहगाई भत्ता दिए जाने की मंजूरी रीवा जिले की महाना माइक्रो सिंचाई परियोजना स्वीकृत दिव्यांगता के क्षेत्र में संचालित संस्थाओं के अतिथि शिक्षकों को 18 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय को स्वीकृति शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना के संचालन की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक सोमवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद ने 6,940 करोड़ रुपये के विभिन्न निर्माण और विकास कार्यों और उनकी निरंतरता की स्वीकृति दी गयी है। मंत्रि-परिषद ने रीवा जिले की महाना माइक्रो सिंचाई परियोजना के निर्माण के लिए 82 करोड़ 39 लाख रूपये की स्वीकृति के अलावा शासकीय सेवकों और पेंशनर्स के लिए 1 जुलाई 2025 से 3 प्रतिशत महंगाई भत्ते की वृद्धि करते हुए 58 प्रतिशत के मान से महंगाई भत्ता स्वीकृत किया है। मंत्रि-परिषद ने अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना के संचालन की स्वीकृति सहित अनेक कल्याणकारी प्रस्तावों को मंजूरी दी है। शासकीय सेवकों और पेंशनर्स के लिए 3 प्रतिशत मंहगाई भत्ता दिए जाने की मंजूरी मंत्रि-परिषद द्वारा राज्य शासन के सातवें वेतनमान प्राप्त कर रहे शासकीय सेवकों को 1 जुलाई, 2025 से 03 प्रतिशत की वृद्धि करते हुये कुल 58 प्रतिशत के मान से मंहगाई भत्ता स्वीकृत किया गया। छठवें वेतनमान के कार्मिकों एवं निगम / मंडल / उपक्रम के राज्य शासन में प्रतिनियुक्ति पर राज्य शासन में कार्यरत पांचवें एवं चौथे वेतनमान अंतर्गत कार्मिकों को समानुपातिक आधार पर मंहगाई भत्ता में वृद्धि के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया। स्वीकृति अनुसार 1 जुलाई, 2025 से 31 मार्च, 2026 तक की एरियर राशि का भुगतान छः समान किश्तों में किया जायेगा। प्रथम किश्त का भुगतान मई माह में, द्वितीय किश्त का भुगतान माह जून में, तृतीय किश्त का भुगतान माह जुलाई में, चतुर्थ किश्त का भुगतान माह अगस्त में, पांचवी किश्त का भुगतान माह सितम्बर में और छठवी किश्त का भुगतान माह अक्टूबर में किया जायेगा। एक जनवरी, 2025 से 31 मार्च, 2026 की अवधि में सेवानिवृत और मृत शासकीय सेवकों के संबंध में उन्हें अथवा नामांकित सदस्य को एरियर राशि का भुगतान एकमुश्त किया जायेगा। राज्य शासन के पेंशनर्स और परिवार पेंशनर्स को 01 जनवरी, 2026 से सातवें वेतनमान अंतर्गत 58 प्रतिशत एवं छठवें वेतनमान अंतर्गत 257 प्रतिशत पेंशन राहत स्वीकृत करते हुये छत्तीसगढ़ शासन के 9 फरवरी, 2026 के पत्र पर सहमति प्रदान की गई। रीवा जिले की महाना माइक्रो सिंचाई परियोजना स्वीकृत मंत्रि-परिषद द्वारा रीवा जिले की महाना माईक्रो सिंचाई परियोजना की लागत 82 करोड़ 39 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान किये जाने का निर्णय लिया गया है। इस परियोजना से कुल 4500 हैक्टेयर में सिंचाई सुविधा का लाभ होगा। रीवा जिले की जवा एवं त्योंथर तहसील के 18 ग्रामों के लगभग 950 कृषक परिवार लाभान्वित होंगे। शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना के संचालन की स्वीकृति मंत्रि-परिषद् द्वारा प्रदेश के अन्य पिछड़े वर्ग के युवक-युवतियों को सैन्य बल एवं अन्य समकक्ष सुरक्षा बलों/पुलिस/होमगार्ड एवं निजी सुरक्षा एजेंसियों में भर्ती के लिए सक्षम बनाने लिए शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना 2026 का संचालन किये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृति अनुसार प्रतिवर्ष अन्य पिछड़े वर्ग के 4000 युवाओं को सैन्य बल एवं अन्य समकक्ष सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए आवासीय प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण अवधि में पात्र पुरूष अभ्यर्थी को 1 हजार रूपये प्रति माह तथा महिला अभ्यर्थी को 1100 रूपये प्रति माह की दर से शिष्यवृत्ति भी उपलब्ध कराई जायेगी। स्वीकृति अनुसार प्रदेश के 10 स्थानों पर स्थापित 40 केन्द्रों पर महिला एवं पुरूष अभ्यर्थियों को पृथक-पृथक प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा। इसमें न्यूनतम 35 प्रतिशत सीट महिला अभ्यर्थियों द्वारा भरी जायेगी। इसके अंतर्गत नि:शुल्क आवासीय एवं भोजन व्यवस्था तथा अध्ययन सामग्री प्रदान की जायेगी। दिव्यांगता के क्षेत्र में संचालित संस्थाओं के अतिथि शिक्षकों को 18 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय को स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग अंतर्गत दिव्यांगता के क्षेत्र में संचालित संस्थाओं में अतिथि शिक्षकों को स्कूल शिक्षा विभाग के अतिथि शिक्षक वर्ग-1 के समरूप प्रतिमाह 18 हजार रूपये मानदेय दिया जाने का निर्णय लिया गया है। आंगनवाड़ी में अति कम वजन (SUW)के बच्चों के लिए पूरक पोषण आहार में वृदि्ध की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा भारत सरकार द्वारा आंगनवाड़ी केंद्र में पूरक पोषण आहार में की गयी वृद्धि के अनुरूप, प्रदेश के समस्त संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों में 06 माह से 06 वर्ष आयुवर्ग के अति कम वजन (SUW) के बच्चों के लिए पूर्व निर्धारित प्रतिदिन प्रति हितग्राही राशि 8 रूपये से बढ़ाकर 12 रूपये किये जाने की स्वीकृति प्रदान की गयी है। मंत्रि-परिषद ने 6,940 करोड़ रुपये के विभिन्न निर्माण और विकास कार्यों की दी मंजूरी मंत्रि-परिषद ने 6,940 करोड़ रुपये के विभिन्न निर्माण और विकास कार्यों की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार वाणिज्य कर विभाग अंतर्गत ग्रामीण आवास एवं परिवहन अधोसंरचना विकास के लिए 2,933 करोड़,वाणिज्यिक कर ट्रिब्यूनल और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 37 करोड़ रूपये, सूचना प्रौद्योगिकी और स्थापना व्यय अंतर्गत 162 करोड़ रूपये सहित 9 योजनाओं की वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतरता की स्वीकृति दी गई है। लोक निर्माण विभाग अंतर्गत मंत्रालय भवन के निर्माण, विधानसभा एवं विधायक विश्राम गृह, नवीन विधायक विश्राम गृह के निर्माण के लिए 691 करोड़ रूपये, शासकीय आवास गृह, स्टेट गेस्ट हाउस और कार्यालय निर्माण के लिए 731 करोड़ रूपये, परियोजना क्रियान्वयन इकाई सम्बन्धित कार्य के लिए 565 करोड़ रूपये और राजधानी परियोजना का स्थापना व्यय के लिए 379 करोड़ रूपये सहित संबंधित 17 योजनाओं की वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतरता की स्वीकृति दी गई है। जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत 3 विभागीय योजनाओं अनुसूचित जनजाति संस्कृति का सवंर्धन, अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं विकास योजना, अनुसूचित जनजाति संस्कृति का सवंर्धन, अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं विकास संबंधी योजनाओं को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिये वित्तीय राशि 102 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग अंतर्गत लोक कल्याण से संबंधित विभिन्न योजनाओं स्मार्ट पीडीएस, मुख्यमंत्री राशन आपके ग्राम, उज्जवला, प्रधानमंत्री गतिशक्ति, मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना सहित अन्य योजनाओं के लिए 865 करोड़ रूपये, विभागाध्यक्ष कार्यालय म.प्र. राज्य … Read more

RBSE रिजल्ट आज आएगा: परिणाम से पहले शिक्षा मंत्री ने कही अहम बात

अजमेर राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) 10वीं कक्षा का रिजल्ट मंगलवार, 24 मार्च को घोषित करेगा। बोर्ड प्रशासन ने परिणाम जारी करने की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बार का रिजल्ट कई मायनों में ऐतिहासिक है, क्योंकि पहली बार 10वीं का परिणाम 12वीं से पहले जारी किया जा रहा है और यह भी पहली बार है जब बोर्ड मार्च महीने में ही रिजल्ट घोषित कर रहा है। खास बात यह है कि राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने रिजल्ट को लेकर बड़ा बयान दिया है। जानें राजस्थान की बोर्ड परीक्षा के परिणामों पर क्या बोले शिक्षा मंत्री? राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि 24 मार्च को कक्षा दसवीं, आठवीं और पांचवीं बोर्ड का रिजल्ट जारी होगा। 12वीं बोर्ड को लेकर शिक्षा मंत्री ने बताया कि 31 मार्च को संभवतः इसका भी रिजल्ट आएगा। अभी हम लोग तय कर रहे हैं। कुल 10 लाख 68 हजार 109 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे दरअसल, राज्य सरकार ने 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज करते हुए समय से पहले रिजल्ट जारी करने का फैसला लिया, ताकि विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इस वर्ष 10वीं की परीक्षाएं 12 फरवरी से 28 फरवरी के बीच आयोजित हुई थीं, जिनमें कुल 10 लाख 68 हजार 109 छात्र-छात्राएं शामिल हुए। वहीं 12वीं की परीक्षाएं 11 मार्च तक चलीं, जिनमें 9 लाख 10 हजार 9 विद्यार्थी बैठे। पूरे प्रदेश में 6 हजार 170 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षाएं कराई गईं। बोर्ड की कोशिश है कि 12वीं (आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स) का रिजल्ट भी इसी महीने जारी कर दिया जाए। अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो RBSE आमतौर पर 10वीं का रिजल्ट मई या जून महीने में जारी करता रहा है। वर्ष 2025 में 10वीं का परिणाम जून के पहले सप्ताह में घोषित हुआ था, जबकि 2024 में भी नतीजे मई के अंतिम सप्ताह में आए थे। 2023 में रिजल्ट जून में जारी किया गया था। इससे पहले 2022 में भी परिणाम जून के महीने में घोषित हुआ था। यानी इस बार लगभग डेढ़ से दो महीने पहले रिजल्ट जारी किया जा रहा है, जो बोर्ड की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव दर्शाता है। पिछले वर्षों के परिणाम प्रतिशत की बात करें तो 2025 में कुल पास प्रतिशत करीब 93% रहा था, जबकि 2024 में यह लगभग 93.03% था। 2023 में पास प्रतिशत 90.49% और 2022 में करीब 82.89% दर्ज किया गया था। इन आंकड़ों से साफ है कि पिछले कुछ वर्षों में छात्रों का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है। जानें क्या है ‘बेस्ट ऑफ टू अटेम्प्ट’ फॉर्मूला? इसी के साथ बोर्ड ने भविष्य के लिए भी बड़ा निर्णय लिया है। साल 2027 से 10वीं बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाएगी। पहला चरण फरवरी और दूसरा मई में होगा। दोनों परीक्षाएं पूरे सिलेबस पर आधारित होंगी और परीक्षा पैटर्न में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। नए सिस्टम के तहत छात्र दूसरे चरण में अधिकतम 3 विषयों में अपने अंक सुधार सकेंगे। वहीं जो विद्यार्थी पहले चरण की परीक्षा नहीं दे पाए, वे वैध मेडिकल सर्टिफिकेट या जिला शिक्षा अधिकारी (सेकंडरी) की अनुमति से दूसरे चरण में शामिल हो सकेंगे। खास बात यह है कि दोनों प्रयासों में से बेहतर अंक को ही अंतिम परिणाम में जोड़ा जाएगा। इसे ‘बेस्ट ऑफ टू अटेम्प्ट’ फॉर्मूला कहा गया है, जो छात्रों को बेहतर प्रदर्शन का दूसरा मौका देगा।

भारत ने चीन-पाकिस्तान सीमा पर तैनात किए दो नए ब्रह्मास्त्र, छुटकू मिसाइल-ड्रोन होगा नष्ट

बेंगलुरु  क्या दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की तरफ बढ़ रही है. ईरान की अमेरिका और इजरायल के खिलाफ चल रहे महायुद्ध ने इस चिंता को बढ़ा दिया है. इस वैश्विक तनाव और पाकिस्तान-चीन सीमा पर बढ़ते खतरे के बीच भारतीय सेना ने अपनी रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की तैयारी तेज कर दी है. सूत्रों के अनुसार, भारतीय सेना ने एक और पिनाका रॉकेट लॉन्चर रेजिमेंट को ऑपरेशनल कर लिया है और इस साल के अंत तक एक और रेजिमेंट को शामिल करने की तैयारी में है. इससे सेना के पास अब 7 पिनाका रेजिमेंट हो गए हैं, जो पाकिस्तान और चीन सीमा पर तैनात हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट ने रक्षा सूत्रों ने हवाले से बताया गया है कि पिनाका के आठवें रेजिमेंट के लिए अब आधे से ज्यादा उपकरण प्राप्त किए चुके हैं और 2026 के अंत तक पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाएगा. अगले साल दो और रेजिमेंट को शामिल करने की योजना है, जिससे कुल संख्या 10 हो जाएगी. भारतीय सेना का लक्ष्य 22 पिनाका रेजिमेंट बनाने का है, जिसमें नई लंबी दूरी वाली गाइडेड मिसाइलों से लैस संस्करण शामिल किए जाएंगे. ये पुरानी सिस्टम की जगह लेंगे और छोटे मिसाइल-ड्रोन के हमलों का मुंहतोड़ जवाब देंगे. चीन-पाक सीमा पर भारत की कैसी सैन्य तैयारी? भारत की पाकिस्तान से सटी पश्चिमी सीमा और चीन से सटी उत्तरी सीमा पर हालात लंबे समय से संवेदनशील रही है. खासतौर पर वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद सेना ने अपनी आर्टिलरी ताकत को तेजी से मजबूत करने का फैसला लिया था. भारतीय सेना ने तब भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड, टाटा पॉवर और लार्सन एंड तुबरो के साथ करीब 2,580 करोड़ रुपये के छह पिनाका रेजिमेंट के लिए समझौता किया था. अब इनका तेजी से उत्पादन और तैनाती की जा रही है. ईरान-अमेरिका जंग के दौरान ड्रोन और मिसाइल स्वार्म अटैक की रणनीति देखते हुए सेना ने पिनाका को और महत्वपूर्ण हथियार मान लिया है. इस जंग में बड़े पैमाने पर रॉकेट, ड्रोन और प्रिसिजन स्ट्राइक सिस्टम का इस्तेमाल हो रहा है. यही वजह है कि भारत भी अपनी सेना को ऐसे हथियारों से लैस कर रहा है जो एक साथ कई लक्ष्यों को तेजी से निशाना बना सकें. ‘देसी ब्रह्मास्त्र’ क्यों कहा जाता है पिनाका? पिनाका भारत का स्वदेशी मल्टी-बारेल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है, जिसे डीआरडीओ ने विकसित किया है. इस भारतीय सेना का ‘देसी ब्रह्मास्त्र’ कहा जाता है, क्योंकि यह कम समय में भारी तबाही मचाने की क्षमता रखता है. यह 122 मिमी रॉकेटों की तुलना में ज्यादा शक्तिशाली और सटीक है. पिनाका 12 रॉकेट एक साथ दाग सकता है, और कुछ ही सेकंड में दुश्मन के बड़े इलाके को निशाना बना सकता है. इसकी रेंज 40 से 75 किलोमीटर तक है, जबकि इसके नए गाइडेड वर्जन इससे भी ज्यादा दूर 120 किमी तक तक सटीक हमला करने में सक्षम हैं.   यह सिस्टम GPS और INS गाइडेंस से लैस है, जिससे सटीकता बहुत बढ़ गई है. यह सिस्टम खासतौर पर दुश्मन के ठिकानों, बंकर, कमांड सेंटर और आर्टिलरी पोजीशन को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी ‘शूट एंड स्कूट’ क्षमता है… यानी हमला करने के तुरंत बाद अपनी पोजीशन बदल लेना, जिससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचा जा सके. ड्रोन और ‘छुटकू मिसाइल’ का भी तोड़ आधुनिक युद्ध में छोटे ड्रोन और लो-कॉस्ट मिसाइलें बड़ा खतरा बनकर उभरी हैं. पिनाका का अपग्रेडेड वर्जन ऐसे लक्ष्यों के खिलाफ भी प्रभावी माना जा रहा है. इसकी एक रेजिमेंट में 18-24 लॉन्चर होते हैं, जो मिनटों में सैकड़ों रॉकेट दाग सकते हैं. यह छोटे ड्रोन और क्रूज मिसाइलों के स्वार्म अटैक का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है. ईरान की तरह दुश्मन अगर सस्ते ड्रोन और मिसाइलों से हमला करे तो पिनाका का सैल्वो दुश्मन के लॉन्चर और कमांड सेंटर को पहले ही नष्ट कर सकता है. इसकी लागत भी दूसरी हाईटेक मिसाइलों की तुलना में काफी कम है. इसका एक रॉकेट महज कुछ लाख रुपये में आ जाता है, जबकि दुश्मन की महंगी मिसाइल को रोकने वाले सिस्टम करोड़ों में हैं. ईरान-इजरायल संघर्ष ने यह साफ कर दिया है कि भविष्य के युद्ध पारंपरिक नहीं होंगे, बल्कि टेक्नोलॉजी आधारित होंगे, जहां मिसाइल, ड्रोन और रॉकेट सिस्टम अहम भूमिका निभाएंगे. भारत इसी दिशा में अपनी सेना को तैयार कर रहा है, ताकि किसी भी संभावित खतरे का मुकाबला प्रभावी तरीके से किया जा सके. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की रणनीति देखते हुए भारत ने सही समय पर कदम उठाया है. पिनाका की बढ़ती संख्या न सिर्फ रक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि दुश्मन को भी संदेश देगी कि भारत अब किसी भी स्वार्म अटैक का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है. पिनाका की क्या है खूबियां?     मल्टी-बैरल लॉन्च सिस्टम – एक साथ 12 रॉकेट दागने की क्षमता, जिससे बड़े इलाके में एकसाथ हमला संभव.     तेज फायरिंग क्षमता – कुछ ही सेकंड में पूरा सल्वो (12 रॉकेट) फायर कर सकता है, जिससे दुश्मन को संभलने का मौका नहीं मिलता.     लंबी मारक क्षमता – शुरुआती वर्जन की रेंज 40 किमी तक, जबकि आधुनिक गाइडेड वर्जन 70–75 किमी या उससे अधिक दूरी तक सटीक हमला कर सकते हैं.     उच्च सटीकता – नए गाइडेड रॉकेट्स GPS/INS आधारित नेविगेशन से लैस, जिससे टारगेट पर सटीक प्रहार.     शूट एंड स्कूट तकनीक – हमला करने के तुरंत बाद पोजीशन बदल सकता है, जिससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचाव.     सैचुरेशन फायर क्षमता – एक बड़े क्षेत्र में भारी मात्रा में रॉकेट बरसाकर दुश्मन के ठिकानों, बंकर और सैनिक जमावड़े को नष्ट कर सकता है.     मोबाइल और ऑल-टेरेन क्षमता – हाई मोबिलिटी व्हीकल पर लगा होने के कारण पहाड़, रेगिस्तान और कठिन इलाकों में भी आसानी से तैनात.     कम समय में तैनाती – सिस्टम को जल्दी से तैयार कर फायर किया जा सकता है, जिससे युद्ध के दौरान तेजी मिलती है.     ड्रोन और हल्के लक्ष्यों के खिलाफ प्रभावी – बड़े पैमाने पर फायरिंग के कारण ड्रोन स्वार्म और छोटे मिसाइल सिस्टम को भी निष्क्रिय करने में सक्षम.     स्वदेशी तकनीक – पूरी … Read more

भारतीय घरों में छिपे हैं कुबेर के खजाने, 450 लाख करोड़ रुपये की कीमत, जीडीपी से भी बड़ी वैल्यू

नई दिल्‍ली  भारतीयों का सोने के प्रति प्रेम जगजाहिर है. सोने की कीमतों में आई रिकॉर्ड तोड़ तेजी के कारण भारतीय घरों में रखे सोने का कुल मूल्य अब 5 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 450 लाख करोड़ रुपये) के पार निकल गया है. भारतीय घरों में रखे सोने की वैल्‍यू अब भारत की जीडीपी का लगभग 125% हो गई है. आईएमएफ के वर्ल्‍ड इकोनॉमिक आउटलुट के अनुसार, 2025-26 के लिए भारत की नॉमिनल जीडीपी 4.125 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया है।  कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी, 2026 तक भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने का मूल्‍य अब बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के कुल मार्केट कैप के करीब पहुंच गया है. जहां बीएसई का कुल बाजार पूंजीकरण 460 लाख करोड़ रुपये है, वहीं घरों में रखे सोने की कीमत 445 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है. रिपोर्ट के लेखक संजीव प्रसाद, अनिंद्य भौमिक और सुनीता बलदावा का कहना है कि अब यह सोना भारतीय परिवारों की गैर-रियल एस्टेट संपत्ति का लगभग 65% हिस्सा बन चुका है।  सोने पर सबसे ज्‍यादा भरोसा भारतीय अब बैंक या शेयर बाजार से ज्यादा सोने पर भरोसा कर रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, घरों में रखे सोने का मूल्य उनके कुल बैंक डिपॉजिट और इक्विटी निवेश के संयुक्त मूल्य का लगभग 175% है. पिछले पांच वर्षों में भारतीय घरों में रखे सोने की वैल्‍यू में जोरदार इजाफा हुआ है. मार्च 2019 में जिस सोने की वैल्यू 109 लाख करोड़ रुपये थी, वह जनवरी 2026 तक चार गुना से अधिक बढ़कर 445 लाख करोड़ रुपये हो गई है।  अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती कोटक की रिपोर्ट भारतीय घरों में रखे सोने को अर्थव्यवस्था के लिए एक चुनौती के रूप में देखती है. विशेषज्ञों का कहना है कि हर साल भारी मात्रा में सोने की खरीद असल में वित्तीय बचत जैसे बैंक जमा को भौतिक संपत्तियों में बदलने जैसा है. इसे एक प्रकार का घरेलू पूंजी का निर्यात माना जा सकता है क्योंकि भारत अपनी सोने की अधिकांश मांग आयात के जरिए पूरी करता है। 

गंगा नदी बेसिन में 1300 साल का सबसे भयंकर सूखा, स्थिति हुई भयावह

बनारस भारत में सूखे की समस्या अब बहुत गंभीर हो गई है. गंगा के मैदानी इलाके के कुछ हिस्से 2009 से ही सूखे के बड़े हॉटस्पॉट बन चुके हैं. दिसंबर 2025 में जारी एक अध्ययन ने 1971 से 2020 तक छह बड़े क्षेत्रों – पश्चिमी और मध्य भारत, हिमालय, गंगा के मैदान, प्रायद्वीपीय और उत्तर-पूर्व भारत में सूखा बढ़ा है।  DTE की रिपोर्ट के मुताबिक स्टैंडर्डाइज्ड प्रेसिपिटेशन इवैपोट्रांसपिरेशन इंडेक्स जैसे साधारण मौसम सूचक का इस्तेमाल किया गया. नतीजा चौंकाने वाला है – गंगा के मैदान, हिमालय और उत्तर-पूर्व भारत में सूखे की रफ्तार बहुत तेज बढ़ रही है. कमजोर मानसून और बढ़ते तापमान ने इस समस्या को और गहरा कर दिया है।  क्यों हो रहा है इतना सूखा? मानसून के समय बारिश कम हो रही है, जबकि गर्मी के मौसम में भाप बनने की रफ्तार बढ़ गई है. दिन और रात दोनों समय तापमान बढ़ रहा है. भूजल का ज्यादा दोहन और खेतों में ज्यादा पानी वाली फसलें लगाने से पानी की कमी और तेज हो रही है. उत्तर-पूर्व भारत में पहले बहुत बारिश होती थी, लेकिन अब वहां भी कमजोर मानसून और गर्मी ने पानी की समस्या पैदा कर दी है।  सितंबर 2025 में जारी एक और अध्ययन ने दिखाया कि गंगा नदी घाटी ने 1991-2020 के बीच पिछले 1300 सालों का सबसे तेज सूखा देखा. पेड़ों की छल्लों से पता चला कि यह सूखा 16वीं सदी के सूखों से भी 76% ज्यादा तीव्र था. यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के वैज्ञानिक कहते हैं कि यह सूखा सिर्फ प्राकृतिक नहीं, बल्कि इंसानी गतिविधियों का नतीजा है।  पानी का दिवालियापन सूखा अब सिर्फ पानी की समस्या नहीं रह गया. यह पानी का दिवालियापन कहलाता है. यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट कहती है कि पानी अब राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन गया है. अगर सही प्रबंधन नहीं हुआ तो देशों के बीच भी पानी पर लड़ाई हो सकती है. रिपोर्ट चेतावनी देती है कि पानी का संकट तब तक रहेगा जब तक पृथ्वी पर इंसान और दूसरे जीव हैं।  समाधान क्या हैं? वैज्ञानिक कहते हैं कि सिर्फ नई तकनीक काफी नहीं. ड्रिप इरिगेशन, सौर पंप, पानी को साफ करके दोबारा इस्तेमाल और खारे पानी से नमक हटाने वाले प्लांट मदद कर सकते हैं. लेकिन हर उपाय के साथ खतरा भी जुड़ा है. ज्यादा पानी वाली फसलें लगाने से भूजल और तेज खत्म हो सकता है।  इजरायल और कैलिफोर्निया के उदाहरण से सीख सकते हैं. दोनों ने सूखे के बावजूद अपनी अर्थव्यवस्था को पानी पर कम निर्भर बनाया. इजरायल ने खेती के अलावा सर्विस और उद्योग क्षेत्र को मजबूत किया. कैलिफोर्निया में 2014 के सूखे में भी अर्थव्यवस्था ज्यादा प्रभावित नहीं हुई क्योंकि कृषि का हिस्सा कम था. क्या करना चाहिए? भारत में कृषि में 85% पानी इस्तेमाल होता है. इसलिए सबसे पहले खेती के तरीके बदलने चाहिए. बिजली सब्सिडी में सुधार करके भूजल का अंधाधुंध निकालना रोकना जरूरी है. सीधी बुवाई, मिट्टी में नमी बचाने की तकनीक और जल प्रबंधन को आम बनाना होगा।   प्राचीन प्रणालियां भी मदद कर सकती हैं, लेकिन उन्हें आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ना पड़ेगा. वैज्ञानिक कहते हैं कि डेटा की बहुत कमी है. ज्यादा कुओं में नियमित मॉनिटरिंग जरूरी है। 

पांढुर्णा में हनुमान लोक का निर्माण, मोहन यादव करेंगे लोकार्पण, अनोखी प्रतिमा का होगा उद्घाटन

पांढुर्णा  आस्था के बड़े केंद्र जामसांवली हनुमानजी लोक के लोकार्पण की बारी आ गई है. मध्य प्रदेश के मुखिया डॉ मोहन यादव 26 मार्च को हनुमान लोक का लोकार्पण करेंगे. उज्जैन में महाकाल लोक की तर्ज पर हनुमान लोक का भी विस्तार किया जा रहा है. जिसके चलते अलग-अलग फेज में काम होने हैं. तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हनुमान लोक बनाने की घोषणा की थी. 314 करोड़ की लागत से 30 एकड़ में बन रहा है हनुमान लोक मंदिर समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने बताया कि "करीब 30 एकड़ में बन रहे हनुमान लोक के पहले फेज का काम पूरा हो गया है. पहले फेज में करीब 35 करोड़ की लागत से यहां चिरंजीवी पथ, श्रद्धालुओं व पर्यटकों के बैठने की व्यवस्था, फूड कोर्ट, हनुमानजी की बाल लीलाओं को प्रदर्शित करती प्रतिमाएं, महाराष्ट्रीयन संस्कृति को दर्शाता स्वागत द्वार और परिसर में लाइटिंग की व्यवस्था की गई है. दूसरे फेज में होगा गर्भ गृह का निर्माण  हनुमान लोक के सेकंड फेज का काम अभी बाकी है. बताया जा रहा है कि हनुमान लोक प्रोजेक्ट का निर्माण 10 साल में पूरा होना है. जिसके तहत अभी पहले फेज का काम पूरा हुआ है. सेकंड फेज का निर्माण अभी बाकी है. सेकंड फेज के लिए भी शासन द्वारा दो भागों में फंड दिया जाना है. सेकंड फेज में मंदिर से लगे नाले का संरक्षण व सौंदर्यीकरण, चिरंजीवी पथ का निर्माण होना है. श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और आस्था को देखते हुए एमपी शासन द्वारा मंदिर परिसर में सुविधाओं का विस्तार करते हुए 'हनुमान लोक' का निर्माण किया जा रहा है. जिसे उज्जैन के 'महाकाल लोक' की तर्ज पर भव्य रूप दिया जा रहा है. मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा लगभग 30 एकड़ क्षेत्र में बनाए जा रहे इस भव्य 'हनुमान लोक' परियोजना पर 314 करोड़ रुपए की लागत आएगी." दूसरे फेज में होगा गर्भ गृह का निर्माण हनुमान लोक के दूसरे चरण में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा. जिसमें भक्ति सागर एवं प्रवचन हॉल का निर्माण, यज्ञशाला का निर्माण, दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों के लिए पार्किंग का निर्माण, संस्कृत महाविद्यालय का निर्माण, भोजशाला का निर्माण, धर्मशाला का निर्माण, चिकित्सा केंद्र की स्थापना, अष्ट सिद्धि केंद्र का निर्माण, ओपन एयर थिएटर का निर्माण, वाटर फ्रंट पाथवे का निर्माण, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम की स्थापना, शेष बचे पाथ वे का निर्माण एवं परिसर का सौंदर्यीकरण का कार्य शामिल है. श्री हनुमान लोक परियोजना के दूसरे चरण में श्री मूर्ति गर्भगृह का निर्माण भी प्रस्तावित है, जो मंदिर की पारंपरिक आस्था और आधुनिक सुविधा दोनों का समन्वय होगा. मंदिर न्यास द्वारा इस गर्भगृह की डिजाइनिंग और योजना तैयार की जा रही है. यह निर्माण कार्य श्रद्धालुओं को करीब से दिव्य दर्शन की अनुभूति देगा. ऐतिहासिक मान्यताएं और रहस्य मंदिर के पुजारी कमलेश तिवारी ने बताया कि "इस स्थान पर हनुमानजी की श्रीमूर्ति स्वयंभू प्रकट हुई थी. इस तरह की लेटी हुई और ऊर्ध्वमुखी प्रतिमा पूरे भारतवर्ष में कहीं और देखने को नहीं मिलती है, जो इसे अत्यंत विशिष्ट बनाती है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, प्रारंभ में हनुमानजी की प्रतिमा खड़ी अवस्था में थी. वर्षों पूर्व कुछ चोरों ने प्रतिमा के नीचे खजाना छिपे होने की अफवाह के कारण इसे हटाने का प्रयास किया. इस दौरान मूर्ति अपने स्थान से हिली नहीं, बल्कि अपने-आप विश्राम अवस्था में लेट गई. कई प्रयासों के बावजूद मूर्ति को हिलाया नहीं जा सका, यहां तक कि 20 बैलों की सहायता से भी मूर्ति को टस से मस नहीं किया जा सका. मंदिर के इतिहास के बारे में कोई प्रमाणिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, लेकिन लगभग 100 वर्ष पहले के राजस्व अभिलेखों में यहां हनुमान जी की उपस्थिति का उल्लेख मिलता है. कुछ लोगों का मानना है कि भगवान श्रीराम इस स्थान पर पीपल के पेड़ के रूप में विराजमान हैं, जबकि हनुमान जी उनके चरणों में लेटे हुए हैं."

25 मार्च से छत्तीसगढ़ में पहली बार खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 का आयोजन, 2000 खिलाड़ी होंगे शामिल

रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर एक बार फिर बड़े खेल आयोजन की मेजबानी के लिए तैयार है। 25 मार्च से 3 अप्रैल तक आयोजित होने जा रहे खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स 2026 को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। देशभर से आने वाले 1069 खिलाड़ी और ऑफिशियल्स के ठहरने, आवागमन और प्रतियोगिताओं के सुचारू संचालन के लिए प्रशासन और खेल विभाग ने व्यापक इंतजाम किए हैं। 25 मार्च से शुरू होने वाले ये खेल छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल इलाकों की विविधता और गहराई को दर्शाते हुए तीन सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण शहरों – रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा में आयोजित किए जाएंगे। एक विज्ञप्ति के अनुसार, 25 मार्च से 3 अप्रैल तक छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाले केआईटीजी 2026 में 2300 से अधिक एथलीट और 3700 प्रतिभागी भाग लेंगे। छत्तीसगढ़ की 32% से अधिक आबादी आदिवासी समुदायों से संबंधित है और यहाँ की स्वदेशी संस्कृति, परंपराओं और खेल उत्कृष्टता की जीवंत विरासत इसे न केवल एक मेजबान राज्य बनाती है, बल्कि इन खेलों का स्वाभाविक घर भी बनाती है। रायपुर के मैदानी इलाकों से लेकर बस्तर के समृद्ध आदिवासी परिदृश्य और अंबिकापुर के ऊंचे इलाकों तक, खेल लंबे समय से रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न अंग रहा है, जो परंपरा, दृढ़ता और समुदाय द्वारा आकारित है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स इस चिरस्थायी विरासत का जश्न मनाते हैं, और छत्तीसगढ़ की मेजबानी भारत की आदिवासी पहचान में इसके केंद्रीय स्थान को रेखांकित करती है। 7 होटलों में ठहरेंगे खिलाड़ी और ऑफिशियल्स इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में शामिल होने वाले खिलाड़ियों और उनके ऑफिशियल्स को रायपुर के 7 अलग-अलग होटलों में ठहराया जाएगा। खासतौर पर वीआईपी रोड और आसपास के प्रमुख होटलों में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, जहां सुरक्षा, भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। इन खेलों में दिखेगा जनजातीय प्रतिभा का दम ट्राइबल गेम्स में इस बार स्विमिंग, वेटलिफ्टिंग, हॉकी, फुटबॉल और तीरंदाजी जैसी प्रमुख प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इन खेलों में केवल जनजातीय वर्ग के खिलाड़ी ही हिस्सा लेंगे, जिससे देशभर की पारंपरिक और उभरती खेल प्रतिभाओं को मंच मिलेगा। छत्तीसगढ़ से 200 खिलाड़ी लेंगे हिस्सा मेजबान राज्य छत्तीसगढ़ की ओर से करीब 200 खिलाड़ियों का दल इस आयोजन में भाग लेगा। स्थानीय खिलाड़ियों को अपने घरेलू मैदान पर प्रदर्शन का मौका मिलेगा, जिससे राज्य के खेल प्रतिभाओं को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। पहली बार लद्दाख की टीम भी शामिल इस बार आयोजन की खास बात यह है कि पहली बार लद्दाख की टीम भी इसमें हिस्सा लेने रायपुर पहुंचेगी। इससे खेलों का दायरा और अधिक व्यापक हो गया है और विभिन्न क्षेत्रों की जनजातीय खेल संस्कृति का संगम देखने को मिलेगा। खिलाड़ियों का आगमन शुरू, कंट्रोल रूम स्थापित खिलाड़ियों के रायपुर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है। अरुणाचल प्रदेश की वेटलिफ्टिंग टीम 22 मार्च को राजधानी पहुंच गई है। वहीं, 24 मार्च की सुबह तक सभी टीमों के पहुंचने की संभावना है। खिलाड़ियों की सुविधा के लिए रेलवे स्टेशन पर विशेष कंट्रोल रूम भी बनाया गया है, जिससे आवागमन और समन्वय में किसी तरह की परेशानी न हो। 10 दिनों तक चलेगा खेल महाकुंभ करीब 10 दिनों तक चलने वाले इस खेल आयोजन का उद्घाटन 25 मार्च को रायपुर में होगा। वहीं, समापन समारोह अंबिकापुर में आयोजित किए जाने की संभावना है। यह आयोजन इस वर्ष राजधानी में स्कूल नेशनल के बाद दूसरा बड़ा स्पोर्ट्स इवेंट है। व्यापक तैयारियों में जुटा प्रशासन इस बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रशासन और खेल विभाग पूरी तरह सक्रिय है। खिलाड़ियों के ठहरने से लेकर प्रतियोगिता स्थलों की तैयारी, सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री मांडविया बोले- आदिवासी बच्चों को मिलेगा बड़ा फायदा केंद्रीय मंत्री मांडविया ने कहा कि यह आयोजन युवाओं को अवसर देने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत” विजन का हिस्सा है, जिसमें खेलों की महत्वपूर्ण भूमिका है। मांडविया ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों से प्रतिभाओं को सामने लाना बेहद जरूरी है। सरकार का फोकस है कि प्रतिभाओं की जल्दी पहचान हो, उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण मिले और राष्ट्रीय खेल ढांचे में शामिल किया जाए।

दिल्ली में बिजली के दामों में होगी वृद्धि, अप्रैल से लागू होगा नया प्लान

नई दिल्ली दिल्लीवासियों के लिए बड़ी खबर है. अप्रैल से बिजली की दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है. दावा किया जा रहा है कि ऐसा इसलिए होगा, क्योंकि दिल्ली सरकार तीन बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को 38000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के बकाया का भुगतान करने की तैयारी कर रही है।  एक एजेंसी के मुताबिक सरकार बिजली की दरों में बढ़ोतरी पर सब्सिडी देने की भी योजना बना रही है, ताकि उपभोक्ताओं पर इसका असर कम हो सके. पिछले साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को एक निर्देश दिया था. जिसमें कहा गया था कि सरकार तीन निजी डिस्कॉम BRPL, BYPL और TPDDL – को 27200 करोड़ रुपये की कैरिंग कॉस्ट (ब्याज) सहित रेगुलेटरी एसेट्स का भुगतान 7 साल के अंदर करे।  रेगुलेटरी एसेट्स वे लागतें हैं जिनकी वसूली भविष्य में होने की उम्मीद होती है. आम आदमी पार्टी के शासन के पिछले एक दशक में बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी न होने के कारण तेज़ी से बढ़ी हैं. दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) ने जनवरी में केंद्रीय एजेंसी, अपीलीय बिजली न्यायाधिकरण (APTEL) को सूचित किया कि दिल्ली में कुल रेगुलेटरी एसेट्स 38,552 करोड़ रुपये हैं।  जानें किस डिस्कॉम की है कितनी राशि डीईआरसी की फाइलिंग के अनुसार बकाया राशि में BRPL के लिए 19,174 करोड़ रुपये, BYPL के लिए 12,333 करोड़ रुपये और TPDDL के लिए 7,046 करोड़ रुपये शामिल हैं. ये राशि डिस्कॉम द्वारा बिजली की आपूर्ति के लिए किए गए अनुमोदित खर्च है. वसूली में देरी के कारण ब्याज जमा होने से मूल रेगुलेटरी एसेट्स की राशि बढ़ गई है।  अदालत ने DERC को एक वसूली योजना तैयार करने, कैरिंग कॉस्ट (ब्याज) का हिसाब रखने और लागत वसूली में हुई लंबी देरी की व्याख्या करते हुए एक विस्तृत ऑडिट करने का भी निर्देश दिया था. यह वसूली 7 साल की अवधि में बिजली के बिलों में रेगुलेटरी एसेट सरचार्ज बढ़ाकर किए जाने की संभावना है।  दिल्ली के बिजली मंत्री आशीष सूद ने पिछले साल मार्च में कहा था कि डिस्कॉम को रेगुलेटरी एसेट्स के रूप में जमा हुए 27,000 करोड़ रुपये वसूलने का अधिकार दिया गया है. जिससे यह संकेत मिला था कि शहर में बिजली की दरें बढ़ सकती हैं।