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भारत का क्रिकेट कैलेंडर ठसाठस, 18 महीने तक लगातार खेल, खिलाड़ियों को नहीं मिलेगा आराम

नई दिल्ली भारत का क्रिकेट कैलेंडर ठसाठस?… अब यह सवाल नहीं, हकीकत बन चुका है. आने वाले 15 से 18 महीनों में टीम इंडिया का शेड्यूल इतना व्यस्त है कि खिलाड़ियों के पास सांस लेने तक की फुर्सत नहीं दिखती. आईपीएल से लेकर द्विपक्षीय सीरीज, एशियन गेम्स और फिर वर्ल्ड कप- क्रिकेट का यह सिलसिला बिना ब्रेक के चलता नजर आ रहा है।  जून में आयरलैंड दौरे के ऐलान ने इस व्यस्तता पर आखिरी मुहर लगा दी है. दो टी20 मैचों की यह छोटी सी सीरीज भी बड़े कार्यक्रमों के बीच इस तरह फिट की गई है कि खिलाड़ियों के लिए आराम का स्पेस और सिकुड़ गया है।  पैसा, पावर और प्रेशर भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी ताकत उसकी बाजार वैल्यू है. यही वजह है कि दुनिया भर के क्रिकेट बोर्ड भारत के साथ सीरीज खेलने को प्राथमिकता देते हैं. हर कोई चाहता है कि टीम इंडिया उनके देश आए, क्योंकि इससे प्रसारण और कमाई दोनों बढ़ती है।  लेकिन इस ‘डिमांड’ का सीधा असर खिलाड़ियों पर पड़ता है. लगातार क्रिकेट, लंबी यात्राएं और अलग-अलग फॉर्मेट- यह सब मिलकर मानसिक और शारीरिक थकान को बढ़ाते हैं।  बीसीसीआई ने इस दबाव को कम करने के लिए तीन अलग-अलग टीमों का फॉर्मूला अपनाया है- टेस्ट, वनडे और टी20 के लिए अलग खिलाड़ी. इससे कुछ हद तक राहत जरूर मिलती है, लेकिन पूरी तरह नहीं।  स्टार खिलाड़ी, खासकर ऑल-फॉर्मेट प्लेयर्स, अब भी सबसे ज्यादा दबाव में रहते हैं. उन्हें एक सीरीज खत्म होते ही दूसरी के लिए तैयार रहना पड़ता है।  IPL से शुरू होगा मैराथन 28 मार्च से शुरू होने वाला आईपीएल इस मैराथन की शुरुआत है. 65 दिनों तक चलने वाले इस टूर्नामेंट के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट का सिलसिला शुरू हो जाएगा।  जून में अफगानिस्तान सीरीज, फिर आयरलैंड, उसके बाद इंग्लैंड दौरा… हर महीने टीम मैदान पर होगी. अगस्त-सितंबर में बांग्लादेश और श्रीलंका दौरे की संभावना है. फिर एशियन गेम्स और उसके बाद न्यूजीलैंड का लंबा दौरा. साल के अंत में घरेलू सीरीज और 2027 की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज- यह सब मिलकर कैलेंडर को पूरी तरह भर देते हैं।  इन सभी सीरीज का असली मकसद 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारी है. उससे पहले एशिया कप भी खेला जाना है. यानी टीम इंडिया के पास प्रयोग करने के मौके तो होंगे, लेकिन आराम के नहीं।  सबसे बड़ा सवाल इतने व्यस्त शेड्यूल के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या खिलाड़ी इस दबाव को झेल पाएंगे? वर्कलोड मैनेजमेंट, रोटेशन पॉलिसी और बेंच स्ट्रेंथ अब सिर्फ रणनीति नहीं, मजबूरी बन चुके हैं।  भारत का क्रिकेट कैलेंडर अब सिर्फ भरा हुआ नहीं, बल्कि ठसाठस है. मैदान पर रोमांच बढ़ेगा, रिकॉर्ड बनेंगे, लेकिन इसके पीछे खिलाड़ियों की थकान और दबाव की कहानी भी उतनी ही बड़ी होगी। 

एमपी के 61 युवाओं ने सरकारी स्कूलों से यूपीएससी परीक्षा में सफलता पाई, इतिहास रचा

भोपाल  संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) UPSC परीक्षा में इस बार मध्यप्रदेश ने इतिहास रच दिया। इसमें प्रदेश के 61 प्रतिभाशाली युवा चयनित हुए। खास बात यह है कि इनमें से अनेक युवाओं ने सरकारी स्कूलों-कॉलेजों में पढ़ाई की है। भारत की सबसे कठिन परीक्षा क्रेक कर इन युवाओं ने न सिर्फ मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश में अपना नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 23 मार्च को इन सभी सफल अभ्यर्थियों को सम्मानित करेंगे। सीएम सभी युवाओं से चर्चा भी करेंगे। यूपीएससी परीक्षा में प्रदेश के हर वर्ग के युवाओं का चयन हुआ। इनमें कई छोटे गांवों के हैं ​जहां 24 घंटे बिजली भी उपलब्ध नहीं रहती। मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट का भी अभाव बना रहता है। इसके बावजूद युवाओं ने अपना हौसला नहीं खोया और जज्बा, जुनून के बल पर कामयाबी हासिल की। चयनित 15 युवाओं ने सरकारी कॉलेजों में पढ़ाई की एमपी में शिक्षा के स्तर में लगातार इजाफा हो रहा है। चयनित युवाओं में अनेक सरकारी स्कूल, कॉलेजों में पढ़े हैं। यूपीएससी में चुने गए कुल 61 विद्यार्थियों में से 15 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने सरकारी कॉलेजों एवं यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त कर सफलता अर्जित की है। यह आंकड़ा प्रदेश के सरकारी शैक्षणिक संस्थानों की गुणवत्ता तथा विद्यार्थियों की प्रतिभा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यूपीएससी में चयनित आशीष शर्मा, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर के स्नातक हैं। पुलकित जैन, बीएससी उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान भोपाल, प्राची चौहान, बीएससी, सुभद्रा शर्मा, शासकीय कन्या महाविद्यालय गंजबासौदा, सौम्या जैन बीए गांधी पीआर कॉलेज, भोपाल, आयुष स्वामी, बीए जेएलएन कॉलेज सोहागपुर नर्मदापुरम, निकित सिंह बीए अर्थशास्त्र अटल बिहारी बाजपेयी महाविद्यालय इंदौर, दीपक बघेल बीए जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर, राजवर्धन सिंह सिसोदिया बीए गुजराती समाज कॉलेज, इंदौर, प्राची जैन बीकॉम सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय, भोपाल, रूपल बान बीएससी, एम उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल, रोहन जैन बीएससी मैथ्स शासकीय होल्कर साइंस कॉलेज इंदौर, अंकुश पाटीदार बीएससी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर, गौरव जाट बैचलर ऑफ आर्ट्स देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर, पवित्र मिश्रा बीएससी प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय विज्ञान महाविद्यालय रीवा, उज्ज्वल जैन बीए श्रीमंत माधवराव सिंधिया शासकीय महाविद्यालय कोलारस में पढ़े हैं। युवाओं ने अपना जज्बा, जुनून के बल पर कामयाबी हासिल की। 

मध्यप्रदेश में आंगनवाड़ी बच्चों के लिए पहली बार विद्यारंभ समारोह का आयोजन

मध्यप्रदेश में पहली बार आंगनवाड़ी बच्चों का विद्यारंभ समारोह मिलेगा ‘विद्यारंभ प्रमाण-पत्र’ 24 मार्च को पूरे प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों में होगा समारोह राज्य स्तरीय ‘ग्रेजुएशन सेरेमनी’ में मंत्री सुभूरिया करेंगी बच्चों को सम्मानित भोपाल मध्यप्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा को नई पहचान देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की जा रही है। राज्य में पहली बार आंगनवाड़ी केंद्रों में शाला पूर्व शिक्षा प्राप्त कर रहे 5 से 6 आयु वर्ष के बच्चों को “विद्यारंभ प्रमाण-पत्र” प्रदान कर उन्हें औपचारिक स्कूली शिक्षा की ओर अग्रसर किया जाएगा। प्रदेश में 24 मार्च को आयोजित होने वाले बाल चौपाल (ECCE Day)के अवसर पर प्रदेश के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में एक साथ समारोहपूर्वक प्रमाण-पत्र वितरण किया जाएगा, जिससे शाला पूर्व शिक्षा को सामाजिक और संस्थागत मान्यता मिल सके। इस पहल को राज्य स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए भोपाल में विशेष राज्य स्तरीय ‘ ग्रेजुएशन सेरेमनी ’ का आयोजन किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया बच्चों को प्रमाण-पत्र वितरित कर उनके उज्ज्वल शैक्षणिक भविष्य की शुभकामनाएँ देंगी। यह कार्यक्रम भोपाल जिले की बाणगंगा परियोजना के अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक 1061 और 859 में आयोजित होगा, जहां 35 बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। यह पहल केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप की जा रही है, जिसके अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 5-6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण पत्र देकर उनके शैक्षणिक जीवन की औपचारिक शुरुआत को मान्यता दी जाएगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों के अनौपचारिक शिक्षा से औपचारिक विद्यालयी प्रणाली में सुगम संक्रमण को सुनिश्चित करना, परिवार और समुदाय को शाला पूर्व शिक्षा के प्रति जागरूक करना तथा आंगनवाड़ी केंद्रों को प्रारंभिक शिक्षा के सशक्त केन्द्र के रूप में स्थापित करना है। कार्यक्रम के आयोजन में प्रारंभिक शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत संस्था रॉकेट लर्निंग का भी सहयोग प्राप्त हो रहा है। संस्था के साथ केंद्र और राज्य स्तर पर हुए समझौते के तहत वर्तमान में मध्यप्रदेश के 39 जिलों में गुणवत्तापूर्ण शाला पूर्व शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। विद्यारंभ प्रमाण-पत्र पहल से न केवल बच्चों की शैक्षणिक यात्रा में निरंतरता सुनिश्चित होगी बल्कि समुदाय में आंगनवाड़ी केंद्रों के प्रति विश्वास और सहभागिता भी बढ़ेगी। इससे बच्चों का स्कूल से जुड़ाव मजबूत होगा और भविष्य में ड्रॉपआउट दर कम करने में भी मदद मिलेगी।

जशपुर में ‘लखपति दीदी’ अभियान को मिली नई दिशा, बढ़ी रफ्तार

रायपुर : जशपुर में ‘लखपति दीदी’ अभियान को मिली नई रफ्तार लखपति दीदी 18 हजार से अधिक महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, गांवों की अर्थव्यवस्था को दे रहीं मजबूती रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में प्रभावी पहल की जा रही है। इसी कड़ी में जशपुर जिले में ‘लखपति दीदी’ अभियान ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, जहां 18 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध जशपुर की महिलाएं अब खेती, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और लघु उद्यमों के माध्यम से न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गांव की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। गांव-गांव में सक्रिय कृषि सखियां और पशु सखियां किसानों तक आधुनिक तकनीक और उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी पहुंचाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर रही हैं। जिले में वर्तमान में 12 हजार 808 स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे 1 लाख 37 हजार 912 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। सामूहिक प्रयासों से ये महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2024 से 2027 तक जशपुर जिले में 30 हजार 877 ‘लखपति दीदी’ तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें से अब तक 18 हजार 218 महिलाएं लखपति बन चुकी हैं, जबकि शेष महिलाओं को भी आगामी वर्षों में इस श्रेणी में लाने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। महिलाओं को आजीविका से जोड़ने के लिए ‘बिहान’ योजना के माध्यम से व्यापक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इसके तहत लगभग 14 करोड़ रुपये मुद्रा लोन, 76 करोड़ रुपये बैंक लिंकेज और 13 करोड़ रुपये सामुदायिक निवेश निधि के रूप में सहायता दी गई है। साथ ही लगभग 70 हजार महिलाओं को कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी गतिविधियों से जोड़ने की पहल की जा रही है। इसके अतिरिक्त करीब 8500 संभावित लखपति दीदियों को विभिन्न आजीविका गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया है और उनकी आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए निगरानी भी की जा रही है। महिलाएं डेयरी, बकरी पालन, पोल्ट्री और फूड प्रोसेसिंग जैसे व्यवसायों के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रही हैं। उल्लेखनीय है कि महिलाओं को नई तकनीकों और नवाचारों से जोड़ने के उद्देश्य से 23 से 25 मार्च 2026 तक कृषि महाविद्यालय, कुनकुरी में ‘कृषि क्रांति एक्सपो 2.0’ का आयोजन किया जा रहा है, जो महिलाओं के लिए नए अवसरों का द्वार खोल रहा है। जशपुर की यह पहल दर्शाती है कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो परिवार, गांव और पूरे राज्य की प्रगति सुनिश्चित होती है।

कुमनार में माओवादियों के ‘सेफजोन’ में पुलिस का अंतिम सुरक्षा कैंप स्थापित

नारायणपुर नारायणपुर पुलिस ने दशकों से माओवादियों का 'सेफजोन' माने जाने वाले दुर्गम क्षेत्र कुमनार में नवीन सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप स्थापित कर एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। 'माड़ बचाओ' अभियान के तहत स्थापित यह कैंप वर्ष 2026 का आठवां और क्षेत्र का अंतिम सामरिक पड़ाव है, जिससे अब अबूझमाड़ का सीधा संपर्क बीजापुर के भैरमगढ़ से जुड़ गया है। माओवादी साम्राज्य का अंत और विकास की नई राह कुमनार वही क्षेत्र है जहां कभी माओवादी सेंट्रल कमेटी का अघोषित शासन चलता था और जहां कुख्यात नक्सली बसवा राजू को सुरक्षाबलों ने ढेर किया था। नारायणपुर पुलिस, डीआरजी, बस्तर फाइटर्स और आईटीबीपी (38वीं, 44वीं, 41वीं, 45वीं, 53वीं और 29वीं वाहिनी) के संयुक्त प्रयासों से अब यहां तिरंगा निर्भीक होकर लहराएगा। ओरछा-कुमनार-भैरमगढ़ के बीच डायरेक्ट रोड कनेक्टिविटी इस कैंप की स्थापना से ओरछा-कुमनार-भैरमगढ़ के बीच डायरेक्ट रोड कनेक्टिविटी सुनिश्चित हुई है। इससे पूर्व, वर्ष 2025 तक ओरछा के भीतर का हिस्सा नक्सलियों के नियंत्रण में था, लेकिन अब यहां विकास की मुख्यधारा पहुंच चुकी है। 96 किलोमीटर दूर बीहड़ इलाके में मजबूत कदम नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 96 किलोमीटर दूर ओरछा क्षेत्र के सबसे दुर्गम और बीहड़ इलाकों में शामिल दिवालुर अब सुरक्षा बलों के नियंत्रण में है. यह वही इलाका है जहां कभी माओवादी सेंट्रल कमेटी के नेता रणनीतियां बनाते थे. कुख्यात नक्सली बसवा राजू जैसे आतंकियों की मौत का गवाह रहा यह क्षेत्र लंबे समय तक पुलिस की पहुंच से बाहर रहा, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. पुलिस कैंप की स्थापना माओवादियों के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में बड़ी कामयाबी मानी जा रही है. ‘माड़ बचाओ' अभियान के तहत 16 मार्च को स्थापना वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में ‘माड़ बचाओ' अभियान के तहत 16 मार्च को इस नए कैंप की स्थापना की गई. इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में नारायणपुर पुलिस के साथ डीआरजी, बस्तर फाइटर्स और आईटीबीपी की छह अलग-अलग वाहिनियां 38वीं, 44वीं, 41वीं, 45वीं, 53वीं और 29वीं बटालियन शामिल रहीं. जवानों को घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ों और कठिन रास्तों से गुजरते हुए लंबी दूरी तय करनी पड़ी, लेकिन मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया. सड़क कनेक्टिविटी से खुले विकास के रास्ते दिवालुर में कैंप खुलने से कांदुलनार-ओरछा से दिवालुर और कुमनार तक की महत्वपूर्ण सड़क कनेक्टिविटी का रास्ता साफ हो गया है. यह इलाका दशकों से अलग-थलग पड़ा था, जहां न तो पक्की सड़कें थीं और न ही प्रशासन की नियमित पहुंच. अब रेकापारा, कुमनार, गुण्डेकोट और लेकवाडा जैसे गांवों तक मोबाइल नेटवर्क, बिजली, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचने का रास्ता खुलेगा. स्थानीय लोगों के लिए यह कैंप उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है. मिलेंगी बुनियादी सुविधाएं जिला मुख्यालय से 102 किमी दूर स्थित इस कैंप के माध्यम से आसपास के आधा दर्जन गांवों (लेकवाडा, नेडअट्टे, डोडूम आदि) में सड़क एवं पुल-पुलिया निर्माण में तेजी आएगी। शिक्षा, चिकित्सा और मोबाइल नेटवर्क की पहुंच सुगम होगी। नक्सल विरोधी अभियानों को मजबूती मिलेगी। वरिष्ठ अधिकारियों का नेतृत्व बस्तर आईजी पी. सुन्दराज और नारायणपुर एसपी रोबिनसन गुरिया के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान ने अबूझमाड़ को पूरी तरह नक्सल मुक्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पुलिस प्रशासन का लक्ष्य 'शांतिपूर्ण एवं समृद्ध नारायणपुर' बनाना है, जहां दशकों से अलग-थलग पड़े ग्रामीणों को लोकतंत्र की बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल सके।   बसवा राजू सहित कई माओवादियों का हुआ था एनकाउंटर नारायणपुर जिले के थाना ओरछा क्षेत्र में दिवालूर गांव है. यहां 16 मार्च 2026 को नया कैंप स्थापित किया गया है. यही वह इलाका है, जहां सुरक्षा बलों ने कुख्यात माओवादी नेता बसवा राजू सहित कई बड़े माओवादियों को मार गिराया था. यह माओवादियों की सेंट्रल कमेटी का सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अब यहां कैंप खुलने से न केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि दशकों से उपेक्षित इस क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं भी खुलेंगी. माड़ बचाओ अभियान नारायणपुर पुलिस ने ''माड़ बचाओ अभियान'' के तहत यह कैंप स्थापित किया है. इस कैंप का उद्देश्य नक्सल प्रभाव को समाप्त कर क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ना है. नारायणपुर जिले में माड़ बचाओ अभियान के तहत लगातार नए कैंप स्थापित किए जा रहे हैं. इसके जरिए अंदरूनी गांवों तक सड़क, पुल-पुलिया, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. कैंप खुलने से फायदा पुलिस अधिकारी ने बताया कि नए कैंप के शुरू होने से दिवालूर के साथ ही आसपास के गांवों रेकापारा, कुमनार, गुण्डेकोट, लेकवाड़ा, नेडअट्टे में विकास की गति तेज होगी. अब इन क्षेत्रों में सड़क निर्माण, मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार संभव हो सकेगा. कुमनार से सोनपुर होते हुए भैरमगढ़ (जिला बीजापुर) तक सड़क संपर्क स्थापित होने से लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी. यह कनेक्टिविटी न केवल स्थानीय निवासियों के लिए सुविधाजनक होगी, बल्कि प्रशासनिक पहुंच भी आसान बनाएगी. संवेदनशील क्षेत्रों में नए कैंप से सुरक्षा नेटवर्क मजबूत नारायणपुर पुलिस ने साल 2025 में कुतुल सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में नए कैंप स्थापित किए थे. साल 2026 में जटवर, वाड़ापेंदा, कुरसकोड़ो, हच्चेकोटी, आदनार, बोटेर और अब दिवालूर में कैंप स्थापित कर सुरक्षा नेटवर्क को और मजबूत किया गया है. साल 2026 में अबूझमाड़ में खुले कैंप     जटवर     वाड़ापेंदा     कुरसकोड़ो     हच्चेकोटी     आदनार     बोटेर     दिवालूर साल 2025 में अबूझमाड़ में खुले कैंप कुतुल कोडलियार बेड़माकोटी पदमकोट कंडुलपार नेलांगुर पांगुड़ रायनार एडजूम ईदवाया आदेर कुडमेल कोंगे सितरम तोके जाटलूर धोबे डोडीमरका पदमेटा लंका परियादी काकुर बालेबेड़ा कोडेनार कोडनार आदिनपार मन्दोड़ा अबूझमाड़ के विकास पर फोकस दिवालूर में नया सुरक्षा कैंप स्थापित होना न केवल नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह अबूझमाड़ के दूरस्थ और पिछड़े इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में भी एक निर्णायक कदम है. 

चंबल अंचल के समीकरण बदलेंगे पवैया की ताजपोशी से, 8 साल बाद नया राजतिलक अध्याय

शिवपुरी   मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नया और अहम घटनाक्रम अब देखने को मिल रहा है । इस सियासी घटनाक्रम से  लंबे समय से चल रही सुस्ती अचानक सक्रियता में बदल गई है।  पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद प्रदेश की राजनीती में एक नई हलचल शुरु हो गई है। 8 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पवैया को किसी अहम पद से नवाजा गया लगभग 8 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पवैया को किसी अहम पद से नवाजा गया है और उनके समर्थक इसको पवैया की मजबूत राजनीतिक वापसी के तौर पर देख रहे हैं। वित्त आयोग का अध्यक्ष काफी अहम पद है। इस नियुक्ति के साथ ही  मध्य प्रदेश की सियासत  के केंद्र ग्वालियर-चंबल अंचल में एक नया समीकरण भी बनता दिख रहा है। जैसा की सभी जानते हैं कि  इस अंचल में  केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बढ़ता दबदबा और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की ताकत भी कम नहीं हैं। इसी बीच भाजपा ने जयभान सिंह पवैया को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाकर उन्हें मुख्यधारा में वापस लाकर और इस क्षेत्र में तीसरा बड़ा चेहरा बनाने किए लिए  दांव खेला है। दरअसल सिंधिया के पास इस अंचल में  प्रद्युम्न सिंह तोमर,प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट के साथ ही गोविंद सिंह राजपूत जैसे मंत्रियों का साथ है। वैसे नरेंद्र तोमर का कोई समर्थक मंत्री तो नही है, लेकिन उन्होंने  रामनिवास रावत को कांग्रेस से लाकर मंत्री भी बनाया लेकिन वो विधानसभा उपचुनाव नहीं जीत पाए। इसी बीच सिंधिया की बढ़ती ताकत के बीच जयभान सिंह पवैया की वापसी अंचल की राजनीति में संतुलन का समीकरण बना सकती है। जयभान सिंह पवैया सख्त हिंदुत्व चेहरा माने जाते हैं और सिंधिया परिवार के पारंपरिक राजनीतिक भी विरोधी रहे हैं। उनकी मुख्यधारा में वापसी को सिंधिया के बढ़ते प्रभाव को नियंत्रित करने की रणनीति के रूप में भी देखी जा रही है। आयोग में नियुक्ति मिलने के बाद जयभान सिंह अब राज्यसभा की रेस से करीब बाहर हो गए हैं। समझा जा रहा है कि  पार्टी उन्हें धरातल की राजनीति में सक्रिय बनाना चाहती है ताकि वो  कार्यकर्ताओं के बीच ही रहें और पार्टी को भी मजबूत करते रहें। सीएम के भरोसेमंद चेहरे बन सकते हैं पवैया माना जा रहा है कि राजनीतिक रूप से पवैया, सीएम मोहन यादव के लिए ग्वालियर-चंबल में एक भरोसेमंद चेहरे के तौर पर काम कर सकते हैं। सीएम और पवैया  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं, उनके बीच वैचारिक और पुराना समन्वय है।  अंचल में सिंधिया और तोमर के प्रभाव के बीच  पवैया अलग समीकरण बनाकर मुख्यमंत्री और संगठन के लिए ईक्का साबित हो सकते हैं। वैसे पवैया को महल विरोधी राजनीति का चेहरा माना जाता रहा है।  उनका कट्टर हिंदुत्व चेहरा और पुरानी भाजपाई निष्ठा सिधिंया औऱ तोमर के बीच के वर्चस्व को संतुलित करेगी। ग्वालियर चंबल अंचल में पवैया का प्रभाव काफी कुछ तय करेगा, उनका राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष के तौर पर राजतिलक उनकी राजनीति का नया अध्याय लिखेगा। 

एरियर भुगतान टला! मार्च वेतन में नहीं जुड़ेंगे पैसे, कर्मचारियों को करना होगा इंतजार

नई दिल्ली केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए अप्रैल का महीना बड़ी सौगात लेकर आ सकता है। महंगाई के आंकड़ों और पिछले सालों के ट्रेंड को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार जल्द ही महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का आधिकारिक ऐलान कर सकती है। हालांकि, मार्च की सैलरी आने में अब कुछ ही दिन शेष हैं, ऐसे में कर्मचारियों को बढ़े हुए भत्ते और एरियर के लिए अप्रैल के वेतन का इंतजार करना होगा। 60 फीसदी तक पहुंच सकता है आंकड़ा वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों को उनकी बेसिक पे (मूल वेतन) का 58 प्रतिशत डीए मिल रहा है। AICPI इंडेक्स के ताजा आंकड़ों और महंगाई की गणना के आधार पर इस बार 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है। यदि सरकार इस पर मुहर लगाती है, तो कुल डीए बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाएगा। कैलकुलेशन का गणित: उदाहरण: यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है। वर्तमान (58%): 10,440 रुपये डीए। बढ़ोतरी के बाद (60%): 10,800 रुपये डीए। सीधा लाभ: हर महीने सैलरी में 360 रुपये की अतिरिक्त वृद्धि। अप्रैल में मिलेगा एरियर का पैसा भले ही सरकार अगले हफ्ते डीए का ऐलान कर दे, लेकिन तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण यह पैसा मार्च की सैलरी में जुड़कर नहीं आएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद संबंधित विभाग और बैंक डेटा अपडेट करेंगे, जिसमें समय लगता है। ऐसे में उम्मीद है कि कर्मचारियों और पेंशनर्स को अप्रैल की सैलरी के साथ जनवरी से मार्च तक का एरियर भी मिल जाएगा। 8वें वेतन आयोग पर टिकी नजरें गौरतलब है कि 31 दिसंबर 2025 को 7वें वित्त आयोग का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग प्रभावी माना जा रहा है। हालांकि, नए वेतन आयोग की विस्तृत रिपोर्ट आने में अभी 14 से 18 महीने का समय लग सकता है, तब तक कर्मचारी अंतरिम राहत के रूप में डीए बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

नवा रायपुर का बड़ा कदम: देश का पहला डिजिटल हब बनेगा, एआई आधारित डेटा सेंटर होगा जल्द शुरू

रायपुर  छत्तीसगढ़ अब तकनीकी क्रांति की ओर बड़ा कदम बढ़ाने जा रहा है। नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला एआइ आधारित डेटा सेंटर अप्रैल से शुरू होने की तैयारी में है। सेक्टर-22 में 13.5 एकड़ में विकसित हो रहा यह प्रोजेक्ट न केवल प्रदेश की पहचान को नई ऊंचाई देगा, बल्कि आम जनता के लिए भी बड़े बदलाव लेकर आएगा। करीब एक हजार करोड़ रुपये के निवेश से तैयार हो रहा यह डेटा सेंटर आइटी, डेटा एनालिटिक्स और तकनीकी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। करियर के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा खास बात यह है कि अब प्रदेश के युवाओं को बेहतर करियर के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही एआइ तकनीक का फायदा किसानों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को भी मिलेगा। डिजिटल सेवाएं मजबूत होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं का लाभ दूरदराज के क्षेत्रों तक आसानी से पहुंच सकेगा। युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के रास्ते एआइ डेटा सेंटर के शुरू होने से प्रदेश में हजारों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है। इसमें आइटी इंजीनियर, डेटा एनालिस्ट, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट और नेटवर्क मैनेजर जैसे पदों पर भर्ती होगी। साथ ही आइटीआइ, इंजीनियरिंग और पालिटेक्निक संस्थानों के छात्रों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे स्थानीय युवाओं को तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा और उन्हें बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। छत्तीसगढ़ बनेगा डिजिटल हब नवा रायपुर में बन रहा यह डेटा सेंटर प्रदेश को एआइ और डिजिटल टेक्नोलाजी का बड़ा केंद्र बना सकता है। आने वाले समय में यहां स्टार्टअप, रिसर्च और टेक कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे, इससे निवेश बढ़ेगा। किसानों और आम लोगों को मिलेगा फायदा एआइ तकनीक के जरिये किसानों को स्मार्ट खेती, मौसम की सटीक जानकारी और फसल प्रबंधन में मदद मिलेगी। इससे उत्पादन बढ़ाने में सहूलियत होगी। वहीं आम लोगों को डिजिटल सेवाओं का लाभ मिलेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं की जानकारी अब ऑनलाइन और आसान तरीके से उपलब्ध होगी। दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक भी सुविधाएं तेजी से पहुंच सकेंगी। डिजिटल भारत की धड़कन बनेगा: साय मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ एक तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के भविष्य की नींव है। उन्होंने इसे राज्य के युवाओं, किसानों और आदिवासी समुदाय के लिए परिवर्तनकारी बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ अब डिजिटल भारत की धड़कन बनेगा। हेल्थटेक, डिफेंस जैसी मिलेंगी सेवाएं यहां न केवल स्टोरेज और प्रोसेसिंग की सुविधा उपलब्ध होंगी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हेल्थटेक, डिफेंस, फिनटेक और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में अत्याधुनिक सेवाएं भी दी जाएंगी। पार्क में एआई प्रॉसेसिंग जैसी विश्व स्तरीय सुविधाएं होंगी। छत्तीसगढ़ में ये होंगे बदलाव     रोजगार की नई राहें: आईटी, डाटा एनालिटिक्स और तकनीकी रखरखाव जैसे क्षेत्रों में हजारों नौकरियां पैदा करेगा। युवा दिल्ली-मुंबई जाए बिना यहीं करियर बना सकेंगे।     किसानों की मदद: किसानों को स्मार्ट खेती, मौसम की सटीक जानकारी और फसल प्रबंधन में मदद मिलेगी। इससे उनकी मेहनत का ज्यादा फल मिलेगा।     आदिवासियों को डिजिटल ताकत: आदिवासी इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाएं डिजिटल रूप से आसानी से पहुंचेंगी।     आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़: यह राष्ट्रीय और वैश्विक डाटा ट्रैफिक को संभालेगा, जिससे सरकारी सेवाएं तेज होंगी और राज्य डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनेगा।