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दिग्विजय सिंह अयोध्या में करेंगे रामलला के दर्शन, संकल्प पूरा करने का लिया निर्णय

भोपाल  मध्यप्रदेश के कद्दावर कांग्रेस नेता, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह के संबंध में बड़ी खबर सामने आई है। वे रामलला के दर्शन करने जाएंगे। राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह अयोध्या जाकर राम मंदिर जाएंगे और दर्शन के साथ विधिवत पूजा अर्चना करेंगे। वे अयोध्या की विख्यात हनुमानगढ़ी भी जाएंगे और दर्शन-पूजन करेंगे। अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनने के बाद दिग्विजय सिंह Digvijaya Singh का यह पहला दौरा है। इसी के साथ वे अपना संकल्प भी पूरा करेंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह राम मंदिर के मुद्दे पर बीजेपी व हिंदूवादी संगठनों के निशाने पर रहे हैं। उनपर श्रीराम विरोधी व सनातन विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि दिग्विजय सिंह ने ऐसे आरोपों को हमेशा नकारा है। उनका कहना है कि वे बीजेपी व अन्य संगठनों द्वारा राम मंदिर के मामले का राजनीतिकरण किए जाने का विरोध करते हैं। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार दिग्विजय सिंह 26 मार्च यानि गुरुवार को अयोध्या जाएंगे। वे राम मंदिर जाकर राम लला के दर्शन करेंगे। दिग्विजय सिंह अयोध्या में हनुमानगढ़ी भी जाएंगे। यहां वे हनुमानजी के दर्शन कर विधिविधान से पूजन करेंगे। मंदिर का निर्माण पूरा हो जाने पर राम लला के दर्शन करने का संकल्प लिया था अयोध्या में श्रीराम मंदिर में राम लला के दर्शन करने के साथ ही दिग्विजय सिंह अपना एक प्रण भी पूरा करेंगे। उन्होंने राम मंदिर का निर्माण पूरा हो जाने पर राम लला के दर्शन करने का संकल्प लिया था। 26 मार्च को अयोध्या में राम लला के दर्शन के साथ ही दिग्विजय सिंह का यह प्रण पूरा हो जाएगा। राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में दर्शन पूजन के बाद वे अयोध्या से लखनऊ के लिए रवाना हो जाएंगे। बता दें कि दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख 11 हजार 111 रु की निधि समर्पित की थी। दिग्विजय सिंह का कहना है कि उन्होंने खुद को हमेशा राम भक्त ही कहा है लेकिन राजनीति और आस्था को अलग रखते हैं। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का अयोध्या का आधिकारिक दौरा कार्यक्रम घोषित हो गया है। वे 26 मार्च (गुरूवार) को दिल्ली से अयोध्या के लिए रवाना होंगे। दिग्विजय सिंह का अयोध्या का आधिकारिक कार्यक्रम 8.10 प्रस्थान – दिल्ली (BY AIR INDIA EXPRESS, IX – 1285) 9.40 आगमन – अयोध्या, उत्तरप्रदेश श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दर्शन 13.30 प्रस्थान – अयोध्या (कार से दूरी लगभग 135 किमी) 16.00 आगमन – लखनऊ, उत्तरप्रदेश स्थानीय कार्यक्रम 19.40 प्रस्थान – लखनऊ (BY AIR INDIA EXPRESS, IX – 1618) 21.00 आगमन – दिल्ली रात्रि विश्राम दिल्ली।  

ईरान युद्ध का प्रभाव: हल्दी के दाम ₹3,500 प्रति क्विंटल कम, किसान परेशान

 मराठवाड़ा महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में उगाई जाने वाली प्रसिद्ध हल्दी का निर्यात ईरान के युद्ध की वजह से पूरी तरह ठप हो गया है. इससे घरेलू बाजार में हल्दी की कीमतें तेजी से गिर गई हैं. कुछ ही दिनों में हल्दी की कीमत 16,500 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 13,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गई है. यानी एक क्विंटल हल्दी पर किसानों को 3,500 रुपये का नुकसान हो रहा है।   शिवसेना नेता और विधान परिषद सदस्य हेमंत पाटील ने मंगलवार को बताया कि मराठवाड़ा की हल्दी मुख्य रूप से खाड़ी देशों (गल्फ) और अफ्रीकी देशों में निर्यात की जाती है. पिछले महीने शुरू हुए अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के कारण निर्यात पूरी तरह बंद हो गया है. निर्यात रुकने से माल घरेलू बाजार में ही सड़ रहा है, जिससे दाम तेजी से गिर रहे हैं।  बता दें कि मराठवाड़ा क्षेत्र पूरे देश के हल्दी निर्यात का लगभग आधा हिस्सा संभालता है. यहां की हल्दी गुणवत्ता में बेहतरीन मानी जाती है. हिंगोली जिले में ही लगभग 2 लाख एकड़ जमीन पर हल्दी की खेती होती है. हिंगोली की वासमत हल्दी को साल 2024 में GI टैग मिला था. यह हल्दी अपनी खास खुशबू, रंग, स्वाद के लिए जानी जाती है. आयुर्वेद, दवा, खाने-पीने और सौंदर्य प्रसाधनों में इसका खूब इस्तेमाल होता है।  टेंशन में किसान निर्यात बंद होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. हल्दी व्यापारी प्रकाश सोनी ने बताया कि अगर युद्ध जल्दी नहीं रुका तो कीमतें और भी गिर सकती हैं.  किसान पहले से ही महंगाई और अन्य समस्याओं से परेशान हैं, अब हल्दी जैसी नकदी फसल पर यह झटका उनके लिए बहुत बड़ा नुकसान साबित हो रहा है।  मराठवाड़ा के किसान उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्दी कोई राहत पैकेज या वैकल्पिक बाजार का इंतजाम करे, ताकि उनकी मेहनत बर्बाद न हो. फिलहाल युद्ध की वजह से न सिर्फ हल्दी बल्कि कई अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात पर भी असर पड़ रहा है। 

AIIMS Bhopal में OPD पर्चा बनाने की प्रक्रिया में बदलाव, लाइन में खड़ा होने की जरूरत नहीं

भोपाल  एम्स में इलाज कराने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिलने वाली है। उपचार और जांच के लिए एम्स की ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक मरीजों की कतार और भटकाव से मुक्ति मिलने वाली है। संस्थान ने अपनी सेवाओं को डिजिटलाइजेशन करने के लिए नई तकनीक अपनाने जा रहा है। इसके तहत व्हाट्सएप से ही डॉक्टर का अपॉइंटमेंट और जांच का भुगतान किया जा सकेगा। उसी व्हाट्सएप पर जांच रिपोर्ट भी प्राप्त होगी। इसका पायलट प्रोजेक्ट इस सप्ताह के अंत या अप्रेल के प्रारंभ में शुरू होने वाला है। यह सेवा जून तक लागू होगी। ओपीडी की लाइन में लगने वाले लोगों को राहत मिलेगी। ऑनलाइन भुगतान और तुरंत रिफंड आइआइटी इंदौर इस तकनीक को तैयार कर रहा है। इस प्रणाली में जांच और अन्य सेवाओं का भुगतान ऑनलाइन होगा। भूल से यदि मरीज अधिक राशि जमा कर देगा, तो अतिरिक्त धनराशि उसे उसी प्लेटफॉर्म के जरिए मिल जाएगा। इससे काउंटर पर भीड़ कम होगी और प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी। मरीजों को मिलेंगी ये स्मार्ट सुविधाएं     व्हाट्सएप पर अपॉइंटमेंट स्लॉट चुनने की सुविधा     डिस्प्ले बोर्ड पर विभागवार प्रतीक्षा समय दिखेगा     नेविगेशन फीचर से विभाग तक पहुंचना आसान     जांच रिपोर्ट की पीडीएफ व्हाट्सएप पर प्राप्त होगी     ओपीडी में क्यू मैनेजमेंट ऐप से टोकन नंबर मिलेगा     डिजिटल ट्रैकिंग से हर प्रक्रिया पर नजर रखी जाएगी सिस्टम बताएगा कहां है कौन विभाग इस तकनीक के नेविगेशन फीचर से यह पता चलेगा कि परिसर में कौन विभाग कहां हैं और कहां कौन सी जांच होती है। ए्स के एक हिस्से में इसका पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा। सफल होने पर इसे पूरे परिसर में लागू किया जाएगा। हम इसका पायलट प्रोजेक्ट मार्च के अंत तक शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसे पूरी तरह से लागू करने में तीन महीना लगेगा। इससे कामकाज अधिक व्यवस्थित होगा, मरीजों और उनके परिजन परेशानी से बचेंगे। – डॉ. केतन मेहरा, एसोसिएट प्रोफेसर, यूरोलॉजी विभाग और प्रवक्ता, एम्स भोपाल बच्चों के किडनी ट्रांसप्लांट की तैयारी एम्स में पीडियाट्रिक किडनी ट्रांसप्लांट शुरू करने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। संस्थान के अनुसार तीन बच्चों को चिन्हित किया गया है और उनके डोनर की जांच व प्री-वर्कअप जारी है। सब कुछ अनुकूल रहा तो अगले माह प्रदेश का पहला बाल किडनी प्रत्यारोपण संभव हो सकेगा।

IPL 2026 का सबसे बड़ा सीजन: 84 मैचों का आयोजन, हर टीम खेलेगी 16 मुकाबले, 28 मार्च से शुरुआत

मुंबई  इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का 19वां सीजन इस बार अब तक का सबसे बड़ा और विस्तारित संस्करण होने जा रहा है। टूर्नामेंट की शुरुआत 28 मार्च से होगी, जबकि फाइनल मुकाबला 31 मई को खेला जाएगा। इस सीजन में कुल 84 मैच खेले जाएंगे, जिसमें 10 टीमें हिस्सा लेंगी और हर टीम 16 मुकाबले खेलेगी। सीजन का उद्घाटन मुकाबला डिफेंडिंग चैंपियन टीम और हैदराबाद की टीम के बीच बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाएगा। शुरुआती चरण में 12 अप्रैल तक के 20 मैचों का शेड्यूल जारी किया गया है। अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनावों के कारण पूरा कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से घोषित किया जा रहा है। इस बार लीग का आयोजन देश के 13 अलग-अलग शहरों में किया जाएगा। सात टीमों के पास एक-एक होम ग्राउंड है, जबकि तीन टीमों को दो-दो घरेलू मैदान दिए गए हैं। खास बात यह है कि रायपुर का शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम 13 साल बाद IPL मैच की मेजबानी करेगा, जिसे एक टीम ने सेकेंड होम वेन्यू के रूप में चुना है। फॉर्मेट के लिहाज से इस बार लीग पहले से अधिक प्रतिस्पर्धी होगी। सभी टीमों को 16-16 मैच खेलने का मौका मिलेगा, जिससे प्लेऑफ की दौड़ और दिलचस्प हो जाएगी। प्लेऑफ मुकाबले मई के अंतिम सप्ताह में खेले जाने की संभावना है, जिसमें क्वालिफायर, एलिमिनेटर और फाइनल शामिल होंगे। इस सीजन में कुछ नए नियम भी लागू किए गए हैं। मैच के दिन किसी भी टीम को नेट प्रैक्टिस की अनुमति नहीं होगी और एक टीम दूसरी टीम के प्रैक्टिस एरिया का उपयोग नहीं कर सकेगी। खिलाड़ियों की यात्रा, सुरक्षा और अनुशासन से जुड़े दिशा-निर्देश भी सख्त किए गए हैं। टीम स्टाफ के लिए आईडी कार्ड अनिवार्य किया गया है, वहीं डगआउट में सीमित लोगों को ही प्रवेश मिलेगा। ब्रॉडकास्ट और ड्रेस कोड को लेकर भी बदलाव किए गए हैं। खास कैप धारण करने वाले खिलाड़ियों को मैच के दौरान नियमों का पालन करना होगा और पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन में निर्धारित ड्रेस कोड लागू रहेगा। पिछले सीजन में पहली बार खिताब जीतने वाली टीम इस बार डिफेंडिंग चैंपियन के रूप में मैदान में उतरेगी। वहीं ऑक्शन में विदेशी और घरेलू खिलाड़ियों पर बड़ी बोली लगी, जिससे टीमों का संतुलन और मजबूत हुआ है। IPL 2026 के मुकाबले टीवी पर प्रसारित होंगे, जबकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी लाइव स्ट्रीमिंग उपलब्ध रहेगी। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह सीजन लंबे समय तक रोमांच बनाए रखने वाला साबित हो सकता है। प्लेऑफ कब से होंगे? अभी पूरा शेड्यूल जारी नहीं हुआ है, लेकिन BCCI ने इतनी जानकारी दे दी है कि फाइनल 31 मई को बेंगलुरु में खेला जाएगा। इस हिसाब से 26 मई को पहला क्वालिफायर, 27 मई को एलिमिनेटर और 29 मई को दूसरा क्वालिफायर खेला जा सकता है। कितने ग्राउंड्स पर मैच होंगे IPL 2026 के मुकाबले इस बार भारत के 13 अलग-अलग शहरों में खेले जाएंगे। 10 टीमों में 7 ने 1-1 होमग्रउंड चुना, वहीं बेंगलुरु, पंजाब और राजस्थान के पास 2-2 होमग्राउंड हैं। रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम में 13 साल बाद कोई IPL मैच खेला जाएगा। RCB ने इसे अपना सेकेंड होम वेन्यू बनाया है। रायपुर स्टेडियम में आखिरी बार 2013 में दिल्ली कैपिटल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच मैच हुआ था। इस बार क्या नया? मैच वाले दिन प्रैक्टिस नहीं: किसी भी टीम को मैच के दिन नेट प्रैक्टिस करने की परमिशन नहीं होगी। कोई टीम दूसरी टीम के नेट्स का इस्तेमाल नहीं कर सकती। अगर एक टीम जल्दी प्रैक्टिस खत्म कर दे, तो भी दूसरी टीम उस पिच पर नहीं खेल पाएगी। यात्रा और सुरक्षा नियम: खिलाड़ियों को टीम बस से ही सफर करना होगा। परिवार के सदस्यों को केवल हॉस्पिटैलिटी जोन में ही रहने की परमिशन होगी। खिलाड़ी और टीम अनुशासन: सभी स्टाफ मेंबर्स को हर समय अपना आईडी कार्ड साथ रखना होगा। डगआउट और मैदान में बच्चों या बिना परमिशन वाले फैमिली मेंबर्स को लाने की मनाही रहेगी। ब्रॉडकास्ट और ड्रेस कोड: ऑरेंज और पर्पल कैप रखने वाले खिलाड़ियों को मैच के दौरान कैप पहनना ही होगा। अगर फील्डिंग के दौरान कैप उतारने का मन करे तो भी पारी के शुरुआती 2 ओवर कैप पहननी पड़ेगी। पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन के दौरान स्लीवलेस जर्सी नहीं पहन सकेंगे। पिछली चैंपियन कौन? IPL 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) डिफेंडिंग चैंपियन है। RCB ने पिछले सीजन शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना पहला IPL खिताब जीता था। टीम ने 2025 के फाइनल में पंजाब किंग्स को 6 रन से हराया था। सबसे महंगे खिलाड़ी IPL 2026 के ऑक्शन में ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर कैमरन ग्रीन सबसे महंगे खिलाड़ी रहे, जिन्हें कोलकाता नाइट राइडर्स ने ₹25.20 करोड़ में खरीदा। वहीं भारतीय अनकैप्ड खिलाड़ियों में प्रशांत वीर और कार्तिक शर्मा को चेन्नई सुपर किंग्स ने 14.20-14.20 करोड़ में अपनी टीम में शामिल किया।

2029 में लागू होगा महिला आरक्षण, 50% सीटें बढ़ाने की योजना हुई तैयार

नई दिल्ली बीजेपी सरकार 2034 के बजाय, देश में महिला आरक्षण अधिनियम को 2029 से लागू करने के बारे में सोच रही है. केंद्र (लोकसभा) और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लाने पर विचार-विमर्श जारी है।  इंडिया टुडे/आज तक को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सीटों में बढ़ोतरी के लिए 50% 'स्ट्रेट जैकेट फॉर्मूला' प्रस्तावित है. गृह मंत्री अमित शाह 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लागू करने की प्रक्रियाओं को पारित कराने के लिए पार्टियों के छोटे समूहों के साथ बैठकें कर रहे हैं।  23 मार्च को, गृह मंत्री ने NCP-SP, शिवसेना (UBT), AIMIM और YSRCP के सदस्यों के साथ बैठक की. BRS आखिरी समय में सूचना मिलने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सकी।  सुप्रिया सुले, अरविंद सावंत, असदुद्दीन ओवैसी और मिधुन रेड्डी उन सदस्यों में शामिल थे जिन्होंने गृह मंत्री के साथ बैठक में भाग लिया. सरकार तीन बड़े संशोधन की तैयारी में है. सरकार की राय है कि 2034 की समय सीमा के बजाय, महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनावों से ही लागू किया जाना चाहिए।  सदस्यों को बताया गया कि केंद्र को 2027 तक जनगणना पूरी होने की उम्मीद थी. इससे 2028 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी हो जाती और दूसरी प्रक्रियाएं उसके बाद होतीं. हालांकि, अब 2011 की जनगणना को आधार माना जा सकता है।   50% सीटें बढ़ाने का फॉर्मूला तैयार! इसके तहत 50% स्ट्रेट जैकेट फॉर्मूला, महिलाओं के लिए वर्टिकल आरक्षण हो. अहम बात ये है कि सरकार ने लोकसभा और विधानसभा सीटों में सीधे 50% की बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव दिया है. इससे लोकसभा की वर्तमान संख्या में 50% का इजाफा हो सकता है और संबंधित राज्यों में विधानसभाओं की संख्या में भी 50% की बढ़ोतरी की जाएगी। महिला आरक्षण लागू होने के बाद लोकसभा की बढ़ी हुई संख्या (लगभग 813/814) में से 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. इन 33% आरक्षित सीटों के भीतर एससी/एसटी (SC/ST) आरक्षण को अलग से लागू किया जाएगा।  संवैधानिक संशोधनों के पारित होने के बाद लोकसभा और विधानसभा सीटों की परिसीमन प्रक्रिया शुरू हो सकती है. यूबीटी, एनसीपी-एसपी, वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियों के सदस्यों को सूचित किया गया कि देश में परिसीमन की प्रक्रिया लंबित है. पिछले परिसीमन के 25 साल पूरे होने के बाद, सीटों के परिसीमन (और पुनरीक्षण) की प्रक्रिया शुरू की जानी थी।  2029 में लागू हो सकता है 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' लोकसभा और विधानसभा के लिए परिसीमन प्रक्रिया एक साथ शुरू की जा सकती है. बैठक में शामिल सदस्यों ने राज्यों पर प्रभाव, विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन के मानदंडों के संबंध में कई सवाल उठाए. सूत्रों ने बताया कि एनसीपी-एसपी ने पूछा कि क्या ये बदलाव 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले होने वाले विधानसभा चुनावों में भी लागू किए जाएंगे? कहा जा रहा है कि वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा सीटों के इजाफे के बारे में इन बदलावों के प्रभाव पर सवाल उठाए हैं. एआईएमआईएम ने उस फॉर्मूले पर चिंता जाहिर की जिसका इस्तेमाल नए निर्वाचन क्षेत्रों को बनाने के लिए किया जा सकता है, विशेष रूप से उन मामलों में जहां आदिवासी, एससी और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी ज्यादा है।  दक्षिण भारत का परिसीमन पर ऐतराज दक्षिण भारत के राजनीतिक दलों को जनसंख्या से जुड़े लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन पर कड़ा ऐतराज रहा है. डीएमके, टीडीपी, वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियों की राय है कि केंद्र सरकार के परिवार नियोजन कार्यक्रमों के बेहतर तरीके से लागू करने के लिए दक्षिण के राज्यों को सजा नहीं दी जानी चाहिए।  इसके अलावा, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और उनकी पार्टी डीएमके ने 2026 के जनसंख्या आधारित परिसीमन योजनाओं का विरोध करने के लिए JAC (संयुक्त कार्रवाई समिति) मंच बनाया था. सीएम स्टालिन ने इस पर विचार-विमर्श के लिए पंजाब के सीएम भगवंत मान सहित गैर-बीजेपी हितधारकों को बुलाया था।  महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सीटों में 50 प्रतिशत की सीधी बढ़ोतरी का फॉर्मूला और उससे जुड़ी परिसीमन प्रक्रिया इन चिंताओं को कम कर सकती है. दक्षिण के राज्यों के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'अगर ये जनसंख्या से जुड़ा नहीं है, तो दक्षिण के राज्यों और क्षेत्रीय दलों को परिसीमन का विरोध नहीं करना चाहिए. वरना आपने हमें बेहतर परिवार नियोजन के लिए सजा नहीं दी होती. हालांकि, परिसीमन फॉर्मूले के लागू होने से जुड़े सवाल अभी भी बने हुए हैं।   

AI स्टार्टअप की बड़ी योजना, 2,347 करोड़ से भारतीय बाजार में खुलेंगे नए रास्ते

 नई दिल्ली भारतीय आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) स्टार्टअप Sarvam AI मालामाल होने जा रहा है. कंपनी 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 2,347 करोड़ रुपये) की इनवेस्टमेंट के लिए AI जगत की दिग्गज कंपनियों से बातचीत कर रही है।  सरवम AI अभी एनवीडिया, वेंचर कैपिटल फर्म एसेल, इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी जगत की दिग्गज कंपनी HCL Tech के साथ बातचीत कर रही है।  यह बातचीत सफल होती है, तो यह सरवम एआई की ग्रोथ के लिए सकारात्मक साबित होगी. डील पर सहमति बन जाती है तो Sarvam की यह फंडिंग इस साल किसी भारतीय स्टार्टअप के लिए प्राइवेट मार्केट में सबसे बड़ा निवेश राउंड बन सकती है।  Sarvam AI पहले ही Nvidia के चिप्स का यूज कर रहा है Sarvam AI पहले से ही Nvidia के चिप्स का यूज कर रहा है. HCLTech को बतौर इनवेस्टर्स के रूप में शामिल करने से आईटी कंपनी को Sarvam की AI काबिलियत का फायदा उठाने का मौका मिलेगा।  साथ ही Accel जैसा बड़ा वेंचर कैपिटल फंड भारतीय AI स्टार्टअप में इनवेस्टमेंट करता है तो सरवम AI दुनिया के दूसरे देशों में भी अपनी पहुंच बना सकेगा।  Sarvam AI क्या है?  Sarvam AI, असल में एक बेंगलुरु बेस्ड AI स्टार्टअप है. हाल ही में उसके दो टूल्स चर्चा में रहे हैं, जिनके नाम Sarvam Vision और Bulbul हैं. हाल ही में इन भारतीय AI मॉडल ने बड़े प्लेयर्स को पछाड़ चुका है.  Sarvam Vision AI ने ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) में सबसे शानदार परफॉर्म किया था।  एक बेंचमार्क पर देसी AI ने चैटजीपीटी, गूगल जेमिनाई और Anthropic Claude जैसे बड़े और पॉपुलर AI मॉडल्स को पछाड़ दिया दिया था. इसकी जानकारी Sarvam AI के को-फाउंडर प्रत्युष कुमार दे चुके हैं. को-फाउंडर ने X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) पर पोस्ट करके इसकी जानकारी दी थी। 

नक्सल लीडर का जाल: एक छिपा, दूसरा फरार, कई ने सरेंडर किया, बस अंतिम चोट बाकी

  बस्तर छत्तीसगढ़ में बस्तर के घने जंगलों से इस समय जो खबरें सामने आ रही हैं, वे नक्सल आंदोलन के इतिहास में निर्णायक मोड़ का संकेत दे रही हैं. वर्षों तक सुरक्षाबलों के लिए चुनौती बने शीर्ष नक्सली नेताओं का नेटवर्क अब तेजी से कमजोर पड़ता दिख रहा है. ताजा घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संगठन के भीतर दबाव बढ़ चुका है और नेतृत्व स्तर पर अस्थिरता साफ दिखाई दे रही है।  सूत्रों के अनुसार, नक्सल आंदोलन का बड़ा चेहरा माने जाने वाले गणपति के बारे में देश छोड़कर नेपाल में भागने  की ख़बर है, जबकि उसका करीबी सहयोगी मिशिर झारखंड में छिपा हुआ बताया जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन दोनों तक पहुंच बनते ही नक्सल संगठन के शीर्ष नेतृत्व को बड़ा झटका लगेगा. इसी दिशा में केंद्रीय और राज्य स्तर की एजेंसियां समन्वित रणनीति के साथ लगातार अभियान चला रही हैं।  इसी बीच बस्तर से एक और बड़ी खबर सामने आई है. लंबे समय से सक्रिय और प्रभावशाली नक्सली कमांडर पापा राव बुधवार को अपने 18 साथियों के साथ सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर रहा है. यह घटनाक्रम केवल औपचारिक आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि नक्सल आंदोलन के कमजोर पड़ते मनोबल का स्पष्ट संकेत है. वर्षों तक संगठन में सक्रिय रहे पापा राव पर कई गंभीर मामलों में संलिप्तता रही और वह सुरक्षाबलों की वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था। सुरक्षा बलों की रणनीति में बदलाव पिछले कुछ वर्षों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. अब केवल मुठभेड़ों पर निर्भर रहने के बजाय खुफिया तंत्र को मजबूत किया गया. स्थानीय लोगों के साथ विश्वास का रिश्ता बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है. इसका परिणाम यह हुआ कि संगठन के भीतर दरारें उभरने लगी हैं. कई नक्सली अब मुख्यधारा में लौटने का निर्णय ले रहे हैं।  सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हाल के समय में सैकड़ों नक्सली मारे गए हैं. हजारों ने आत्मसमर्पण किया और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां भी हुई हैं. इन आंकड़ों से साफ है कि नक्सल संगठन की ताकत लगातार घट रही है. अब स्थिति यह है कि शीर्ष स्तर के नेता भी खुद को सुरक्षित नहीं मान रहे हैं।  एक समय था जब दंतेवाड़ा, नारायणपुर, बीजापुर और सुकमा जैसे जिले नक्सल गतिविधियों के गढ़ माने जाते थे. अब इन क्षेत्रों में विकास कार्यों ने नई तस्वीर पेश की है. सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़ने से स्थानीय युवाओं का रुझान हिंसा से हटकर मुख्यधारा की ओर बढ़ रहा है।  क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट? विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के पीछे दो मुख्य कारण हैं- सुरक्षाबलों की सटीक और निरंतर कार्रवाई, सरकार की पुनर्वास और विकास आधारित नीतियां. सरेंडर करने वाले नक्सलियों को नई शुरुआत का अवसर देने की पहल ने भी इस दिशा में सकारात्मक प्रभाव डाला है।  हालांकि, यह भी सच है कि नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. अभी भी कुछ दूरदराज के इलाकों में इसकी उपस्थिति बनी हुई है. लेकिन जिस तरह से शीर्ष नेतृत्व बिखर रहा है और कैडर टूट रहा है, उससे यह संकेत स्पष्ट है कि संगठन अपने सबसे कमजोर दौर से गुजर रहा है।  सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इस मौके को निर्णायक सफलता में बदला जाए. इसके लिए खुफिया तंत्र को और मजबूत करना, स्थानीय जनता का विश्वास बनाए रखना और विकास कार्यों की गति को लगातार बनाए रखना आवश्यक होगा।  बस्तर से लेकर झारखंड तक के हालिया घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है. यदि इसी तरह प्रयास जारी रहे, तो निकट भविष्य में इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।  फिलहाल, पापा राव का आज अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण और गणपति-मिशिर जैसे शीर्ष नेताओं की तलाश ने पूरे नक्सल नेटवर्क में हलचल मचा दी है. आने वाले दिन इस संघर्ष की दिशा तय करने में बेहद अहम साबित होंगे।  नक्सल नेतृत्व तेजी से खत्म देश में चल रहे नक्सल विरोधी ऑपरेशन के चलते अब नक्सली संगठन का टॉप नेतृत्व तेजी से खत्म हो रहा है. सुरक्षा एजेंसियों के ऑपरेशन में कई बड़े नक्सली कमांडर मारे गए हैं. कई बड़े नेता सरेंडर भी कर चुके हैं. स्थिति यह है कि अब कई इलाकों में नक्सलियों के बड़े नेता ही नहीं बचे हैं।  सुरक्षा बलों की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी के 11 सदस्य मारे गए, जो संगठन के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं. यह नक्सल संगठन के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।  ये टॉप नक्सली कमांडर ढेर सुरक्षा बलों की  रिपोर्ट के अनुसार जिन बड़े नक्सली नेताओं को ऑपरेशन में मारा गया, उनमें प्रमुख नाम शामिल हैं: सुधाकर हिडमा दामोदर विकास सुदर्शन अनिल रवि मोहन रमेश शंकर अन्य सेंट्रल कमेटी सदस्य (इनमें कई सेंट्रल कमेटी और स्टेट कमेटी स्तर के नेता शामिल थे) गिरफ्तार और सरेंडर रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, अब तक 463 नक्सली मारे गए हैं. 1600 गिरफ्तार किए जा चुके हैं और करीब 2500 ने सरेंडर किया है. ये आंकड़े बताते हैं कि संगठन कमजोर हो रहा है।  बड़े नक्सलियों का सरेंडर 2025-26 में कई बड़े नक्सली नेताओं ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें प्रमुख हैं- पापा राव आज 18 नक्सलियों के साथ  सरेंडर कर रहा (बड़ा नक्सली कमांडर) है. इसके अलावा, कई स्टेट कमेटी, एरिया कमेटी और डिविजनल कमांडर स्तर के नक्सली सरेंडर कर चुके हैं. इनमें  टॉप 5 बड़े नक्सली नेता शामिल हैं।  सुरक्षा बलों की रिपोर्ट के अनुसार, दंतेवाड़ा और नारायणपुर में अब बड़े नक्सली लीडर नहीं बचे. कांकेर-बीजापुर में भी कई एरिया कमेटी खत्म किए जा चुके हैं. बड़े नेता नेपाल और झारखंड भाग रहे हैं. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि जल्द ही नक्सल नेतृत्व पूरी तरह खत्म हो जाएगा. इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से 31 मार्च 2026 तक की गई है, जिसका मात्र 6 दिन बचा हुआ है।   

6th जेनरेशन वॉरफेयर: F-35 और Su-57 जैसे जेट चक्रव्‍यूह में उलझेंगे, भारत का नई रणनीति का खुलासा

बेंगलुरु  डिफेंस टेक्‍नोलॉजी में लगातार नए बदलाव आ रहे हैं. जो देश खुद को इसके अनुरूप नहीं ढाल पा रहे हैं, उनकी नेशनल सिक्‍योरिटी पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है. ईरान और अफगानिस्‍तान पर किए गए हमले इसके ताजा उदाहरण हैं. अमेरिका और इजरायल की तुलना में ईरान की डिफेंस टेक्‍नोलॉजी कमजोर है. यही वजह है कि एयर स्‍ट्राइक में ईरान को व्‍यापक नुकसान उठाना पड़ा है. तेहरान के फर्स्‍ट लाइन टॉप लीडरशिप का तकरीबन खात्‍मा हो चुका है. दूसरी तरफ, ईरानी अटैक में अमेरिका और इजरायल को भी व्‍यापक नुकसान हुआ है. THAAD और आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस सिस्‍टम के होते हुए भी ईरान ने गहरे जख्‍म दिए हैं. वहीं, अफगानिस्‍तान पर पाकिस्‍तान की ओर से किए गए अटैक में भारी नुकसान हुआ है. बता दें कि काबुल के पास डिफेंसिव और ऑफेंसिव फायर पावर की बेहद कमी है. इन दोनों वॉर सिनेरियो से एक बात साबित होती है- एयर पावर और डिफेंस सिस्‍टम को और मजबूत करने की जरूरत है. भारत इसको बखूबी समझता है. यही वजह है कि 5th और 6th जेनरेशन की टेक्‍नोलॉजी में महारात हासिल करने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है. भारतीय वैज्ञानिक अब 6th जेनरेशन वॉरफेयर को लेकर नए प्रोजेक्‍ट पर काम कर रहे हैं. प्रोजेक्‍ट के सफल रहने पर पांचवीं पीढ़ी के F-35 और Su-57 जैसे सुपर फाइटर जेट आसमानी चक्रव्‍यूह में उलझ कर रह जाएंगे. साथ ही दक्षिण एशिया का पावर बैलेंस भी भारत की तरफ झुक जाएगा. दरअसल, भारत ने छठी पीढ़ी के हवाई युद्ध की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए इंटीग्रेटेड इंडियन कॉम्बैट एरियल सिस्टम (I²CAS) के विकास की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारतीय वायुसेना के भविष्य के कॉम्‍बैट इंफ्रास्‍ट्रक्चर को पूरी तरह बदलने की दिशा में अहम मानी जा रही है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य 2040 के दशक के मध्य तक एक अत्याधुनिक, नेटवर्क सेंट्रिक सिस्टम ऑफ सिस्टम्स तैयार करना है, जिसमें मानव चालित लड़ाकू विमान, ऑटोनोमस ड्रोन और एडवांस डिजिटल कॉम्‍बैट नेटवर्क एक साथ काम करेंगे. I²CAS का कॉन्‍सेप्‍ट कन्‍वेंशनल एयर कॉनफ्लिक्‍ट से अलग है, जहां अब सिंगल फाइटर जेट को स्वतंत्र प्लेटफॉर्म के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक नेटवर्क का हिस्सा माना जा रहा है. इस ढांचे में प्रत्येक विमान एक कमांड नोड के रूप में काम करेगा, जो एक साथ कई ड्रोन, सेंसर और वेपन सिस्‍टम्‍स को कंट्रोल कर सकेगा. यह पहल वैश्विक स्तर पर चल रहे छठी पीढ़ी के कार्यक्रमों जैसे Future Combat Air System (FCAS) और Global Combat Air Programme (GCAP) के समान है. इन कार्यक्रमों में भी AI, ड्रोन और हाई-स्पीड डेटा नेटवर्क को इंटीग्रेट करने पर जोर दिया जा रहा है. क्‍या है I²CAS? I²CAS के केंद्र में एक मानव चालित स्टील्थ फाइटर होगा, जो मदरशिप के रूप में कामय करेगा और कई मानव रहित प्लेटफॉर्म को नियंत्रित करेगा. भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) के इस सिस्टम की रीढ़ बनने की उम्मीद है. इसके उन्नत संस्करण जैसे AMCA Mk2 और संभावित छठी पीढ़ी के मॉडल, युद्धक्षेत्र में कमांड और कंट्रोल हब की भूमिका निभा सकेंगे. इस ढांचे में पायलट की भूमिका भी बदल जाएगी. वह केवल विमान उड़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बैटल मैनेजर के रूप में काम करेगा, जो रियल-टाइम में ड्रोन, सेंसर और स्ट्राइक एसेट्स को ऑपरेट करेगा. I²CAS का एक महत्वपूर्ण स्तंभ लॉयल विंगमैन ड्रोन और मानव रहित कॉम्बैट एरियल व्हीकल्स (UCAVs) होंगे. इस दिशा में भारत पहले ही कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है. HAL CATS Warrior, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम (CATS) का हिस्सा है, जिसे मानव चालित विमानों के साथ उड़ान भरने और सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉर इक्विपमेंट या हथियार ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है. इसी तरह DRDO Ghatak UCAV एक स्टील्थ फ्लाइंग-विंग यूसीएवी है, जिसे गहराई में जाकर सटीक हमले करने के लिए विकसित किया जा रहा है. इसकी कम रडार विजिबिलिटी इसे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम से बचने में मदद करेगी. कॉम्‍बैट क्‍लाउड क्‍यों है गेमचेंजर? I²CAS का एक और महत्वपूर्ण पहलू कॉम्बैट क्लाउड है, जो एक सुरक्षित और AI बेस्‍ड डिजिटल नेटवर्क होगा. यह नेटवर्क विमान, ड्रोन, सैटेलाइट और कमांड सेंटर को जोड़कर एक साझा युद्धक्षेत्र सूचना प्रणाली तैयार करेगा. इसके माध्यम से सभी प्लेटफॉर्म रियल टाइम में डेटा साझा कर सकेंगे, जिससे लक्ष्य की पहचान और हमले की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी.उदाहरण के तौर पर यदि कोई स्टील्थ ड्रोन दुश्मन के रडार को पहचानता है, तो वह जानकारी कॉम्बैट क्लाउड के जरिए दूर मौजूद फाइटर जेट तक पहुंचा सकता है, जिससे वह बिना खुद को खतरे में डाले हमला कर सके. क्‍या है फ्यूचर प्‍लान? भविष्य में I²CAS में कई उन्नत तकनीकों को शामिल किए जाने की योजना है. इनमें डायरेक्टेड एनर्जी वेपन जैसे एयरबोर्न लेजर सिस्टम शामिल हैं, जिनका उपयोग मिसाइल डिफेंस और ड्रोन इंटरसेप्शन में किया जा सकता है. इसके अलावा ड्रोन स्वार्म तकनीक भी विकसित की जा रही है, जिसमें कई छोटे ड्रोन मिलकर दुश्मन की सुरक्षा प्रणाली को भेद सकते हैं. इसके साथ ही एडैप्टिव इलेक्ट्रॉनिक कैमोफ्लाज तकनीक पर भी काम चल रहा है, जो विमान की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नेचर को बदलकर उसे रडार से बचाने में सक्षम बनाएगी. यह तकनीक भविष्य के युद्धक्षेत्र में विमान की जीवित रहने की क्षमता को काफी बढ़ा सकती है. हालांकि, भारत इस परियोजना को स्वदेशी रूप से विकसित करने पर जोर दे रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सहयोग के विकल्प भी खुले रखे गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इंजन, सेंसर और नेटवर्किंग तकनीकों के क्षेत्र में वैश्विक साझेदारी से इस कार्यक्रम को गति मिल सकती है. I²CAS भारत की रक्षा रणनीति में एक दीर्घकालिक परिवर्तन का संकेत है, जो देश को भविष्य के नेटवर्क सेंट्रिक और कटिंग एज टेक्‍नोलॉजिकल वॉरगेम के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.