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रानी तालाब मंदिर परिसर में माँ भगवती जागरण कार्यक्रम में हुए शामिल

भोपाल नवरात्रि के उपलक्ष्य में महा अष्टमी पर गत रात्रि रीवा के रानी तालाब मंदिर परिसर में विशाल माँ भगवती जागरण का आयोजन किया गया। उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि माँ के आशीर्वाद से ही सभी कार्य सफल होते हैं। हम सभी पर माता का आशीर्वाद बना रहे और हमारा रीवा हर क्षेत्र में नित नई उपलब्धियाँ हासिल करता रहे। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि माँ भगवती के जागरण से देवी माँ प्रसन्न होती हैं। प्रतिवर्ष यह आयोजन होता रहे और माता का आशीर्वाद हमको मिलता रहे। उन्होंने कहा कि इस समय मानवता संकट में है। इस संकट से सिर्फ माँ ही उबार सकती हैं। उन्होंने कहा कि माता के दरबार एवं रानी तालाब के चमकने के साथ ही रीवा भी चमकने लगा है। हम सब की प्रार्थना है कि माँ हमें आशीर्वाद देती रहें और रीवा की चमक बरकरार रहे। उप मुख्यमंत्री ने देवी जागरण में भजन की प्रस्तुति देने वाली गायिका यशस्वी की भावपूर्ण प्रस्तुति की सराहना की। कार्यक्रम में नगर निगम अध्यक्ष  व्यंकटेश पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।  

चुनावी रण में CM हेमंत की कमान, असम में रहकर साधेंगे वोटरों को

रांची झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के अध्यक्ष हेमंत सोरेन असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सीधे चुनावी अभियान की कमान संभालेंगे। वे 28 मार्च से असम में रहकर पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाएं करेंगे। पार्टी का लक्ष्य स्थानीय मुद्दों, आदिवासी अस्मिता और क्षेत्रीय अधिकारों को प्रमुख चुनावी एजेंडा बनाना है। झामुमो ने अपने सभी स्टार प्रचारकों को निर्देश दिया है कि वे 27 मार्च तक असम पहुंच जाएं और चुनावी अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएं। पार्टी की असम में सक्रियता केवल चुनावी उपस्थिति तक सीमित नहीं है। झामुमो राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करना चाहती है और खासकर पूर्वोत्तर के आदिवासी बहुल इलाकों में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है। झारखंड मॉडल, जिसमें स्थानीय संसाधनों पर अधिकार, भूमि संरक्षण और सामाजिक न्याय शामिल हैं, असम में भी प्रचारित किया जाएगा। पार्टी अब केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहना चाहती पार्टी महासचिव विनोद पांडेय पहले से ही असम में रहकर चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दे रहे हैं। उनका काम स्थानीय संगठन को सक्रिय करना, बूथ स्तर तक नेटवर्क तैयार करना और उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाना है। झामुमो ने भारत निर्वाचन आयोग को 20 स्टार प्रचारकों की सूची भी सौंप दी है। इस सूची में हेमंत सोरेन के अलावा डॉ. सरफराज अहमद, सुप्रियो भट्टाचार्य, जोबा मांझी, अभिषेक प्रसाद, पंकज मिश्रा, दीपक बिरुवा, विजय हांसदा और अन्य नेता शामिल हैं। असम में झामुमो की यह सक्रियता संकेत देती है कि पार्टी अब केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहना चाहती। हेमंत सोरेन का सीधा नेतृत्व इस अभियान को और मजबूत बनाता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि झामुमो का यह प्रयास चुनावी नतीजों पर कितना असर डालता है और पार्टी के लिए नए राजनीतिक अवसर खोलता है या नहीं।  

बंदरों की हरकत बनी आफत: बलौदा बाजार में ट्रांसफार्मर फटा, चिंगारी से कई दुकानें जलीं

बलौदा बाजार. जिले के प्रमुख धार्मिक स्थल गिरौदपुरी में आज आग ने कहर बरपाया. आग से दस से बारह दुकानें पूरी तरह जलकर खाक हो गई, जिससे दुकानदारों को लाखों रूपए का नुक़सान हुआ है. जानकारी के अनुसार, बंदरों की उछल-कूद से ट्रांसफार्मर शॉर्ट सर्किट हो गया, जिससे निकली आग ने देखते ही देखते आस-पास स्थित दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया. दुकानदारों ने ग्रामीणों के सहयोग से आग पर काबू पाया. आग लगने के करीबन एक घंटे बाद दमकल वाहन पहुंचे, तब तक दुकानें जल चुकी थी. घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची गिरौदपुरी पुलिस जांच में जुट गई है. बता दें कि गिरौदपुरी में बाबा गुरू घासीदास के मंदिर जाने वाले मार्ग में झोपड़ीनुमा दुकानें हैं, जहां छोटे-छोटे दुकानदार अपना व्यवसाय करते हैं. आग इन्हीं दुकानों में लगी. गमीमत रही कि समय रहते लोगों ने पानी का इंतजाम कर लिया और आग पर काबू पा लिया नहीं तो आग मंदिर परिसर तक पहुंच सकती थी. भविष्य में इस तरह की घटना न हो इसको देखते हुए इन दुकानदारों के लिए पक्के दुकान बनाये जाने की आवश्यकता है. अब यह देखना होगा कि इस घटना के बाद जिला प्रशासन के साथ ही समाज प्रमुख और मेरा समिति तथा ग्राम पंचायत क्या कदम उठाते हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हो.

जन्म-मृत्यु पंजीयन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने हेतु राज्य स्तरीय बैठक संपन्न

रायपुर मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर (अटल नगर) में योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी तथा बीस सूत्रीय कार्यक्रम कार्यान्वयन विभाग द्वारा जन्म-मृत्यु पंजीयन कार्य की समीक्षा हेतु राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समन्वय समिति (IDCC) की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विभागीय सचिव श्री भुवनेश यादव ने की।  बैठक में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की उप महानिदेशक श्रीमती पी. संगीता, संयुक्त महारजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) एवं जनगणना निदेशक, छत्तीसगढ़ श्री कार्तिकेय गोयल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सचिव श्री भुवनेश यादव ने निर्देशित किया कि राज्य में प्रत्येक जन्म एवं मृत्यु का शत-प्रतिशत एवं समयबद्ध पंजीयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सटीक एवं अद्यतन आंकड़े उपलब्ध हो सकें। आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय की संचालक श्रीमती रोक्तिमा यादव ने जन्म एवं मृत्यु पंजीयन की वर्तमान स्थिति एवं प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुति दी। बैठक में पंजीयन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। समीक्षा के दौरान वर्ष 2025 में जन्म पंजीयन का सकल पंजीयन दर 108.4 प्रतिशत एवं शुद्ध दर 71.7 प्रतिशत तथा मृत्यु पंजीयन का सकल दर 102.6 प्रतिशत एवं शुद्ध दर 92.5 प्रतिशत दर्ज किया गया। कम प्रगति वाले जिलों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।

अन्नामलाई का बड़ा बयान, सीट बंटवारे से नाराज होकर चुनाव नहीं लड़ने का संकेत, BJP को तमिलनाडु में झटका

  चेन्नई तमिलनाडु में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है. तमिलनाडु बीजेपी के कद्दावर नेता और राज्य के पूर्व अध्यक्ष अन्नामलाई ने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. सूत्रों के अनुसार तमिलनाडु बीजेपी के नेता के. अन्नामलाई ने चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बीच सीट-बंटवारे के तौर तरीकों पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने दिल्ली में पार्टी आलाकमान को चिट्ठी लिखी है।  अन्नामलाई कुछ चुनिंदा सीटों को AIADMK को दिए जाने पर नाराजगी जाहिर की है. सूत्रों के अनुसार अन्नामलाई ने दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को पत्र लिखकर गठबंधन समझौते के तहत BJP को मिली सीटों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं।  बताया जा रहा है कि वह इस बात से नाराज हैं कि AIADMK ने उन सीटों को BJP को नहीं दिया जिन्हें BJP के लिए जीत के लिहाज से आसान माना जा रहा था. इसमें किनाथुकडावु सीट भी शामिल है. अन्नामलाई ने निर्वाचन क्षेत्रों का विश्लेषण करने के बाद कथित तौर पर चुनाव न लड़ने का फैसला किया है।  पलानीस्वामी AIADMK का प्लान राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सीट शेयरिंग में एडापड्डी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) ने अपनी शर्तें मनवाई। तमिलनाडु में AIADMK को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर ईपीएस ने सीटों के बंटवारे पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। इसी के चलते यहां तक ​​कि एक ऐसी सीट जिसे बीजेपी की तमिलनाडु इकाई के पूर्व प्रमुख के. अन्नामलाई के लिए एक संभावित सीट माना जा रहा था। बीजेपी को वह सीट भी नहीं मिली। सूत्रों की मानें तो उन्हें बीजेपी की कई मांगें भी ठुकरा दीं। बीजेपी ने तमिलनाडु के लिए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को प्रभारी नियुक्त किया है। राज्य में बीजेपी की कमान नैनार नागेंद्रन के हाथाें में है। एनडीए के अन्य प्रमुख नेताओं में ए. रामदास और दिनाकरण हैं। सीट शेयरिंग में किसे कितनी सीटें?  4-25 मार्च को फाइनल हुए तमिलनाडु एनडीए सीट शेयरिंग के तहत एआईएडीएमके को राज्य की 234 विधानसभा सीटों में से 169 सीटें मिली हैं, जबकि शेष 65 सीटें उसके सात एनडीए सहयोगियों को आवंटित की गई हैं। बीजेपी को 27 सीटें, पट्टाली मक्कल काची (PMK) को 18 सीटें और अम्मा मक्कल मुनेत्र कझगम (AMMK) को 11 सीटें दी गई हैं। बाकी सीटें छोटी पार्टियों जैसे तमिल मनीला कांग्रेस (मूपनार), इंडिया जननायक काची (IJK), तमिलगा मक्कल मुनेत्र कझगम (TMMK) और पुराची भारतम के बीच बांटी गई हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने एआईएमडीएके के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से लिखा है कि यह बंटवारा एक ऐसी बातचीत को दिखाता है जिसमें पार्टी ने अपनी निर्णायक पकड़ बनाए रखी। भले ही यह गठबंधन बीजेपी नेतृत्व के दबाव में बना हुआ माना जाता हो। सिर्फ प्रचार कर सकते हैं अन्नामलाई अन्नामलाई से उम्मीद की जा रही थी कि वे पूरे राज्य में एनडीए गठबंधन के लिए प्रचार करेंगे। इस साल की शुरुआत में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे पूछा गया कि क्या वे चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने जवाब दिया था कि मैं कोई भी फैसला लेने से पहले नेतृत्व से बात करूंगा। तमिलनाडु में चुनाव आयोग ने एक ही चरण में चुनाव रखा है। 23 अप्रैल को राज्य की सभी सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे मतों की गिनती 4 मई को होगी। राज्य विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को खत्म हो रहा है। राज्य में 9 अप्रैल तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। ऐसे में आने वाले एक हफ्ता तमिलनाडु की राजनीति के लिए काफी अहम माना जा रहा है। बीजेपी और एआईएडीएमके की दोस्ती अन्नामलाई की आक्रामक और मीडिया फ्रेंडली छवि से अलग नागेंद्रन एक व्यावहारिक, संतुलित और अलग तरह के नेता हैं. वो अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) छोड़कर बीजेपी में आए हैं. वो जे जयललिता और ओ पनीरसेल्वम की सरकारों में मंत्री रहे हैं. वो ओबीसी के थेवर समुदाय से आते हैं. उनकी राजनीति द्रविड़ परंपरा से गहराई से जुड़ी रही है.उनकी नियुक्ति एआईएडीएमके को संतुष्ट करने और मुक्कुलाथोर वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा थी. बीजेपी के इस कदम से यह संकेत भी मिला कि बीजेपी बीजेपी फिलहाल एआईएडीएमके के साथ गठबंधन के तहत ही काम कर रही है. वह एक तरह से एआईएडीएमके से आए नेताओं के नेतृत्व को स्वीकार कर रही है।  नागेंद्रन के अलावा,तमिलनाडु में बीजेपी का नेतृत्व पुराने नेताओं के हाथों में है. इन नेताओं की जड़ें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में हैं. तमिलसाई सुंदरराजन, सीपी राधाकृष्णन और एल मुरुगन जैसे नेता संगठनात्मक रूप से मजबूत हैं. लेकिन वे अब अपने राजनीतिक शिखर पर नहीं हैं. उनमें द्रविड़ राजनीति की स्थापित धारणाओं को चुनौती देने के लिए जरूरी करिश्मा की कमी है. यहीं पर अन्नामलाई की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. उन्होंने, भले ही अपनी ही पार्टी के कई शक्तिशाली नेताओं को नाराज किया हो, लेकिन वे बीजेपी के लिए एक अलग पहचान पेश करते हैं. तमिलनाडु की राजनीति में उन्होंने एक 'कल्ट फॉलोइंग' बनाने की कोशिश की, हालांकि कभी-कभी वे इसमें जरूरत से ज्यादा आक्रामक हो गए। 

सूत्रों का दावा: CM नीतीश कुमार 30 तारीख को विधान परिषद से इस्तीफा दे सकते हैं

पटना  बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होने की अटकलें तेज हो गई हैं. सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 मार्च को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं. बताया जा रहा है कि 29 मार्च तक विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही अवकाश पर है, जिसके बाद 30 मार्च सोमवार को वे अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।  बिहार में कौन होगा अगला मुख्यमंत्री ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार नालंदा के बिहारशरीफ स्थित सर्किट हाउस पहुंचे और मीडिया से बातचीत में कहा कि 9 अप्रैल तक का समय है, उसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी. उन्होंने यह भी कहा कि नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला एनडीए की बैठक में लिया जाएगा और नीतीश कुमार की इच्छा के अनुसार ही अगला मुख्यमंत्री चुना जाएगा. हालांकि अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और राजनीतिक हलकों में इसे लेकर केवल अटकलें ही लगाई जा रही हैं।  नियम क्या कहते हैं? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद राज्यसभा जा रहे हैं. सवाल यह है कि वह राज्यसभा में कब शपथ लेंगे. राज्यसभा का मौजूदा सत्र 2 अप्रैल तक चलेगा. उम्मीद है कि वह इसी दौरान शपथ ले सकते हैं. ऐसे में उनका दिल्ली जाना भी तय माना जा रहा है. संविधान के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति राज्यसभा का सदस्य बनता है, तो उसे 14 दिनों के अंदर अपनी राज्य की सदस्यता छोड़नी होती है. इस हिसाब से माना जा रहा है कि नीतीश कुमार को 30 मार्च तक विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा।  कब सामने आएगा अगले मुख्यमंत्री का नाम नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं. 14 दिनों के अंदर इस्तीफा नहीं देने पर नियमानुसार राज्य सभा की सदस्यता खुद खत्म हो जाती है. नए सीएम की बात की जाए तो, माना जा रहा है कि खड़मास खत्म होने के बाद, यानी 14 अप्रैल के बाद ही नई सरकार को लेकर फैसला हो सकता है. फिलहाल मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. हालांकि, पिछले कुछ समय से नीतीश कुमार इशारों में सम्राट चौधरी का नाम आगे बढ़ाते नजर आए हैं। 

वेस्ट से वेल्थ: भोपाल के आदमपुर छावनी में 220 करोड़ का आधुनिक कोयला प्लांट चालू

भोपाल राजधानी भोपाल में सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट की दिशा में बड़ी पहल करते हुए आदमपुर छावनी में स्थापित टोरिफाइड चारकोल प्लांट का ट्रायल रन शुरू हो गया है। NTPC Limited द्वारा 220 करोड़ रुपये की लागत से पीपीपी मोड पर तैयार इस प्लांट में सूखे कचरे को कोयले (चारकोल) में बदला जाएगा। तीन दिन में 800 टन कचरा पहुंचा ट्रायल के शुरुआती तीन दिनों में ही प्लांट में 800 टन सूखा कचरा पहुंचाया गया है। अधिकारियों के अनुसार ट्रायल के दौरान कुल 1800 टन कचरे का उपयोग किया जाएगा हर दिन 400 टन कचरे की प्रोसेसिंग 15 एकड़ में फैले इस प्लांट में प्रतिदिन 400 टन सूखे कचरे को प्रोसेस कर टोरिफाइड चारकोल तैयार किया जाएगा। यह तकनीक कचरा निपटान के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन के लिए भी उपयोगी साबित होगी। आयुक्त ने किया निरीक्षण नगर निगम आयुक्त Sanskriti Jain ने प्लांट का दौरा कर कार्यप्रणाली का निरीक्षण किया। उन्होंने इसे भोपाल के लिए गौरव का क्षण बताते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम बताया। एक नजर में प्रोजेक्ट 12 अक्टूबर 2021 को हुआ अनुबंध 220 करोड़ रुपये की लागत 15 एकड़ में स्थापित प्लांट प्रतिदिन 400 टन कचरे की प्रोसेसिंग क्षमता पर्यावरण को मिलेगा फायदा यह प्रोजेक्ट कचरे के वैज्ञानिक निपटान के साथ कोयले के विकल्प के रूप में उपयोगी होगा। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और भोपाल देश के चुनिंदा शहरों में शामिल हो सकेगा, जहां कचरे का शत-प्रतिशत उपयोग किया जा रहा है।  

अश्वनी शर्मा ने किया PM मोदी का धन्यवाद, वैश्विक संकट के बीच केंद्र सरकार ने दिया राहत पैकेज

जालंधर दुनियाभर में बने युद्ध जैसे हालातों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद, केंद्र सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। पंजाब  भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर महंगाई का बोझ कम करने की कोशिश की गई है। पीएम मोदी के इस फैसले की सराहना करते हुए अश्वनी शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में सरकार का यह कदम आम लोगों के हित में है और इससे महंगाई से राहत मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा जनता की भलाई को प्राथमिकता देते हैं और यह निर्णय भी उसी सोच का प्रतीक है। आपको बता दें कि, प्रधानमंत्री मोदी ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि डीजल पर यह 10 रुपये से घटाकर जीरो कर दी गई है। 

मुख्य फ़ोकस नक्सल मुक्त क्षेत्रों में स्थायी एवं समावेशी विकास

रायपुर राज्य में नक्सलवाद से मुक्त हुए क्षेत्रों में तीव्र, स्थायी एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आज मुख्य सचिव  विकास शील की अध्यक्षता में इन जिलों के आजीविका संवर्धन हेतु राज्यस्तरीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया।          कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव  ऋचा शर्मा, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास  निहारिका बारीक, प्रमुख सचिव कृषि  सहला निगार, प्रमुख सचिव  सोनमणि वोरा, सचिव  भीम सिंह सहित संबंधित जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, गृह एवं जेल विभाग, आदिम जाति कल्याण विभाग, ग्रामोद्योग विभाग तथा ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यशाला में ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर  अनीश कुमार द्वारा इन क्षेत्रों के लिए तैयार समन्वित नीति पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई।         इस अवसर पर मुख्य सचिव  विकास शील ने कहा कि जैसे-जैसे छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त होता जा रहा है, हमारी जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। जिन क्षेत्रों में अब तक विकास नहीं पहुंच सका, वहां पहुंचकर हमें सतत एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करना होगा। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की मंशानुरूप सभी विभागों को समन्वित दृष्टिकोण के साथ आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना तैयार कर कार्य करना होगा।        स्थानीय संसाधनों के आधार पर आजीविकामूलक गतिविधियों के संचालन एवं संवर्धन पर विशेष जोर दिया जाए। कार्यशाला में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए। जिला स्तर के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान क्लस्टर आधारित एवं ब्लॉक केंद्रित आजीविका मॉडल पर विस्तार से चर्चा की गई। इस मॉडल के अंतर्गत कृषि, पशुपालन, वनोपज, मत्स्य पालन, हस्तशिल्प एवं सूक्ष्म उद्यमों को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की योजना है। इसमें विभिन्न विभागों की योजनाओं का एकीकृत क्रियान्वयन एवं बेहतर कन्वर्जेंस सुनिश्चित किया जाएगा।           कार्यशाला में जिला, विकासखंड एवं क्लस्टर स्तर पर त्रिस्तरीय योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन की रूपरेखा पर चर्चा की गई। स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार कर उन्हें तेजी से लागू किया जाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आय में वास्तविक वृद्धि सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया।           कार्यशाला में यह भी बताया गया कि उत्पादन से लेकर विपणन तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे उत्पादकों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि अगले चरण में प्रत्येक विकासखंड में संभावित आजीविका क्लस्टरों की पहचान कर 60 दिनों के भीतर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए, जिसमें सर्वेक्षण, योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन की रूपरेखा शामिल होगी। कार्यशाला में प्रस्तुत रणनीति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का मजबूत आधार बनेगी। यह पहल ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।           कार्यशाला में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित जिलों में आजीविका परिवर्तन एवं जीवन स्तर में सुधार हेतु परिवारों की आय बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। एनसीएईआर (NCAER) के सर्वेक्षण के अनुसार इन क्षेत्रों के 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने अगले ढाई से तीन वर्षों में इसे बढ़ाकर न्यूनतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।          प्रमुख सचिव  निहारिका बारीक ने इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु विविधीकरण, सामूहिकीकरण, प्रौद्योगिकी एवं संतृप्ति के चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित रणनीति पर प्रकाश डाला। इसके अंतर्गत प्रत्येक परिवार को कम से कम तीन आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाएगा तथा प्रत्येक जिले में चार प्रमुख आजीविका क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।          यह पहल क्लस्टर आधारित एवं बाजार उन्मुख दृष्टिकोण पर आधारित होगी, जिसमें सशक्त मूल्य श्रृंखला तंत्र विकसित किया जाएगा। मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन को सक्रिय नेतृत्व सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। नाबार्ड, एफईएस तथा प्रदान जैसे सहयोगी संगठनों द्वारा एनटीएफपी (लघु वनोपज) मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने एवं एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) को बढ़ावा देने संबंधी सुझाव प्रस्तुत किए गए। कार्यशाला में “ट्राइपॉड मॉडल” को योजना निर्माण के आधार के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें परिवार, क्षेत्र एवं गतिविधियों का समेकित दृष्टिकोण शामिल है।

दिल दहला देने वाली घटना: कुरुक्षेत्र में आवारा कुत्तों के हमले में 50 से अधिक भेड़ों की मौत

कुरुक्षेत्र. कुरुक्षेत्र में झांसा गांव के सरकारी अस्पताल के पास कुत्तों के झुंड ने भेड़ों पर हमला बोल दिया। इसमें 50 से अधिक भेड़ें मारी गईं। घटना से चरवाहा परिवार पर लगभग पांच लाख रुपये का आर्थिक संकट टूट पड़ा है। गांव सलपानी कलां निवासी कुलदीप ने बताया कि 10 महीने पहले उसने ब्याज पर पैसे लेकर 70 भेड़ें खरीदी थीं। रोज की तरह वह अपने चचेरे भाई बीरा राम और साथियों बलदेव व मनीष के साथ झांसा व शांति नगर क्षेत्र में भेड़ें चरा रहा था। रात अधिक होने पर वे सतलुज-यमुना लिंक नहर के किनारे रुक गए। रात करीब दो बजे 10 से 12 कुत्ते आए, जिन्हें उन्होंने भगा दिया। लेकिन आधे घंटे बाद कुत्तों का एक बड़ा झुंड दोबारा हमला करने लौटा, तब तक वे चारों सो चुके थे। हमले में 25 भेड़ें मौके पर ही मर गईं, जबकि 25 से 30 भेड़ें डरकर नहर में कूद गईं और बह गईं। कई भेड़ें घायल भी हैं। पशुपालक कुलदीप ने बताया कि कुत्तों ने भेड़ को खाया नहीं, सिर्फ मारकर छोड़ दिया। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से आर्थिक मदद की मांग की है, ताकि वे फिर से अपना रोजगार संभाल सकें।