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महावीर जयंती पर जानें क्यों जैन दिगंबर मुनि नहीं पहनते वस्त्र और क्या है इसके पीछे का धार्मिक तर्क

आज 30 मार्च को महावीर जयंती है. जैन धर्म में कई परंपराएं ऐसी हैं जो आश्चर्य करती हैं. आपने हिंदू धर्म में नागा साधु को बिना कपड़ों के देखा होगा, उसी तरह जैन धर्म के कई मुनिजन भी बिना वस्त्रों के नजर आते हैं. जैन धर्म के दो पंथ हैं श्वेताम्बर और दिगंबर. कुछ महात्मा सफेद कपड़े पहनते हैं और दूसरे निर्वस्त्र रहते हैं. जो बिना कपड़ों की अवस्था में रहते हैं वह दिगंबर मुनि हैं. इन महात्मा की दिनचर्या बेहद कठिन होती है. क्या आप जानते हैं आखिर क्यों जैन साधु बिना कपड़ों के नजर आते हैं. क्यों कपड़े नहीं पहनते जैन मुनि दिगंबर साधुओं की दिनचर्या कठिन होती है. कितनी भी सर्दी हो, वे बिना वस्त्र के रहते हैं और रजाई या गर्म कपड़े का सहारा नहीं लेते. हर मौसम में वे हमेशा बिना कपड़ों के होते हैं. दरअसल जैन मुनियों को सारी सांसारिक चीजों को त्यागना होता है. दिंगबर साधु का मानना है कि वस्त्रों की जरूरत तब पड़ती है जब व्यक्ति विकारों से घिरा होता है. उनके अनुसार, वस्त्र विकारों को छुपाने का साधन होते हैं.  दिगंबर मुनि मानते हैं कि उनके मन में कोई खोट नहीं इसलिए वे तन पर लंगोट नहीं रखते. दिगंबर जैन संप्रदाय के अनुसार, संसार के सभी वस्त्र और सामग्री आसक्ति का कारण बनते हैं, जो मोक्ष की प्राप्ति के मार्ग में बाधा उत्पन्न करते हैं, इसलिए इन्होंने दिशाओं को ही अपना वस्त्र माना है. क्यों नहीं नहाते जैन साधु-साध्वियां दीक्षा लेने के बाद जैन साधु और साध्वियां कभी नहीं नहाते क्योंकि वे अपने शरीर को अस्थायी और नश्वर मानते हैं और उनका मानना है कि आत्मा की शुद्धि और पवित्रता केवल ध्यान, तपस्या, और ज्ञान से ही संभव है, न कि शरीर की सफाई से.

मौसम का बदलेगा मिजाज: तपती गर्मी के बीच छत्तीसगढ़ में बारिश की संभावना

रायपुर. छत्तीसगढ़ में फिलहाल मौसम शुष्क बना हुआ है और अधिकतम तापमान सामान्य स्तर पर दर्ज किया जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिनों तक तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है, लेकिन इसके बाद प्रदेश में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। रविवार को प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 16.5 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में रहा। प्रदेश में फिलहाल कहीं भी वर्षा दर्ज नहीं की गई है। सिनोप्टिक सिस्टम मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर के अनुसार, (1) एक निम्न दबाव क्षेत्र बिहार से पश्चिम बंगाल के गंगा क्षेत्र तक झारखंड के ऊपर 1.5 किमी ऊंचाई तक फैला हुआ है। (2) एक द्रोणिका/पवन असातत्य उत्तरी ओडिशा के ऊपर स्थित चक्रवाती परिसंचरण से दक्षिणी छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंतरिक कर्नाटक होकर दक्षिणी तमिलनाडु तक समुद्र तल से 0.9 किमी ऊपर तक स्थित है। आज कैसा रहेगा मौसम प्रदेश के एक-दो स्थानों पर हल्की वर्षा होने की संभावना है। इसके साथ ही गरज-चमक के साथ वज्रपात और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं दो दिनों के बाद भी प्रदेश में एक-दो स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की वर्षा होने की संभावना है। वहीं कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ वज्रपात और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। रायपुर में मौसम का हाल रायपुर में आज आसमान आंशिक रूप से मेघमय रहने की संभावना है। इस दौरान गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। यहां अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

भोपाल: मामूली विवाद में युवक की हत्या, होटल मालिक पर चाकू से हमला; परिजनों का थाने घेराव और चक्काजाम

भोपाल  भोपाल के अशोका गार्डन इलाके में मामूली विवाद ने रविवार देर रात खौफनाक रूप ले लिया। ‘बेटा’ कहकर समझाने की कोशिश करने पर आरोपियों ने 35 साल के युवक की चाकू घोंपकर हत्या कर दी।सोमवार सुबह गुस्साए परिजन और स्थानीय लोगों ने सुभाष कॉलोनी में चक्काजाम कर दिया। पुलिस की समझाइश के बाद करीब आधे घंटे में जाम खुल सका। इस दौरान परिजन का पुलिस से विवाद भी हुआ। परिजन हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ थाना परिसर में धरना दे रहे हैं। होटल बंद कर लौटते वक्त कर्मचारियों का विवाद पुलिस के अनुसार, विजय मेवाड़ा अशोका गार्डन और कोलार इलाके में चाय की दो होटलें चलाता था। रविवार रात करीब 1:30 बजे वह होटल बंद कर कर्मचारियों को प्रगति नगर छोड़ने के बाद लौट रहा था। यहां मुख्य आरोपी आसिफ उर्फ बम अपने साथियों फरमान, कालू और इमरान के साथ मौजूद था। आरोपियों ने विजय के कर्मचारियों से अभद्रता की, जिन्होंने सुबह काम का हवाला देकर मना कर दिया। विरोध करने पर आसिफ ने ‘बेटा’ कहकर समझाने वाले विजय पर गुप्ती से कई वार किए। साथियों ने भी मारपीट की और सभी फरार हो गए। अस्पताल में तोड़ा दम, भारी पुलिस बल तैनात लहूलुहान विजय को स्थानीय लोगों ने हमीदिया अस्पताल पहुंचाया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। सूचना पर आधी रात को अशोका गार्डन और कोहेफिजा थाने की पुलिस भारी संख्या में पहुंची। पुलिस ने हत्या के मामले में दो-तीन संदेहियों को हिरासत में ले लिया, लेकिन मुख्य आरोपी आसिफ उर्फ बम फरार है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 30 हजार रुपए का इनाम घोषित किया। एडिशनल पुलिस कमिश्नर अवधेश गोस्वामी समेत कई थानों के टीआई, एसीपी और एडिशनल डीसीपी मामले की जांच में जुटे हैं। परिजनों में आक्रोश, थाने का घेराव और चक्काजाम सोमवार सुबह गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों ने अशोका गार्डन थाने का घेराव कर हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। हिंदू संगठनों ने प्रदर्शनकारियों को समर्थन दिया। इसी क्रम में सुभाष कॉलोनी में चक्काजाम भी किया गया, जो पुलिस की समझाइश पर आधे घंटे बाद हटा। हमीदिया मॉर्चरी के बाहर भी हंगामा हुआ, जहां पुलिस बल तैनात है। होटल बंद कर लौट रहा था, रास्ते में हुआ विवाद पुलिस के मुताबिक, मृतक विजय मेवाड़ा सुभाष कॉलोनी का रहने वाला था। वह अशोका गार्डन और कोलार इलाके में चाय की दो होटल चलाता था। रविवार देर रात करीब 1:30 बजे वह होटल बंद कर कर्मचारियों को छोड़ने प्रगति नगर गया था। यहां मुख्य आरोपी आसिफ उर्फ बम अपने साथियों फरमान, कालू और इमरान के साथ बैठा था। सभी मृतक के कर्मचारियों के पुराने दोस्त बताए जा रहे हैं। कर्मचारियों से बदसलूकी, विरोध करने पर हमला आरोपियों ने कर्मचारियों को अपने साथ चलने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने सुबह जल्दी काम होने का हवाला देकर मना कर दिया। इस पर आरोपियों ने उनसे अभद्रता शुरू कर दी। विजय ने इसका विरोध किया। उसने आसिफ को ‘बेटा’ कहकर समझाने की कोशिश की। इसी बात पर विवाद बढ़ गया। पुलिस के अनुसार, गुस्साए आसिफ ने चाकू निकालकर विजय के पेट में घोंप दिया। उसके साथियों ने भी मारपीट की। वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। घायल विजय को कर्मचारी और स्थानीय लोग फौरन निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

नीतीश कुमार और नितिन नवीन का इस्तीफा, राज्यसभा में उनके नए सफर की शुरुआत

पटना  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज से अपने राजनीतिक जीवन के एक नए चैप्टर की शुरुआत किए। बिहार विधान परिषद की सदस्यता से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया। उनके साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी अपनी विधानसभा सदस्यता छोड़ दिया। 16 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद, इन दोनों नेताओं का अब उच्च सदन में जाना का फैसला किया। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना इसलिए भी खास है क्योंकि वो अब उन गिने-चुने नेताओं की श्रेणी में शामिल हो गए, जिन्होंने लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद इन चारों सदनों का प्रतिनिधित्व किया है। चारों सदनों के सदस्य बनने का गौरव नीतीश कुमार का विधायी सफर 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से शुरू हुआ था। इसके बाद 1989 में वे नौवीं लोकसभा के सदस्य बने। 2006 से वे लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। अब पहली बार राज्यसभा सदस्य के रूप में वे अपनी नई पारी की शुरुआत करने वाले है।इस्तीफे से ठीक पहले रविवार शाम को मुख्यमंत्री आवास पर सरगर्मी तेज रही। जदयू के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी जैसे कद्दावर नेता मौजूद रहे। सीएम आवास में भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की गई। नीतीश कुमार का राजनीति करियर     नीतीश कुमार ने 1985 में हरनौत (नालंदा) से पहली बार विधायक बनकर करियर की शुरुआत की। 1989 में बाढ़ (पटना) से पहली बार लोकसभा पहुंचे।     नीतीश कुमार ने केंद्र में रेल मंत्री, कृषि मंत्री और भूतल परिवहन मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे, जहां उन्होंने रेलवे में व्यापक सुधार लागू किए।     साल 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाल रहे हैं। नीतीश कुमार ने 'सुशासन बाबू' के रूप में अपनी पहचान बनाई।     शराबबंदी, साइकिल योजना और पंचायती राज में महिलाओं को 50% आरक्षण जैसे क्रांतिकारी फैसलों का श्रेय नीतीश कुमार को दिया जाता है।     2026 में राज्यसभा निर्वाचित होने के साथ ही उन नेताओं में शामिल हो गए, जो विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा चारों के सदस्य रहे हैं। नितिन का बांकीपुर से राज्यसभा तक का सफर भाजपा नेता नितिन नवीन भी आज विधानसभा की सदस्यता त्याग दिया। साल 2006 से लगातार बांकीपुर सीट (पटना) का प्रतिनिधित्व करते आ रहे थे। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के कारण अब वे राज्य की राजनीति से केंद्र की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे बांकीपुर सीट पर अब उपचुनाव की स्थिति बनेगी। माना जा रहा है कि इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। उनका वर्तमान विधान परिषद कार्यकाल 2030 तक था, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका के लिए उन्होंने समय से पहले ये पद छोड़ने का फैसला लिया। नीतीश कुमार का अनोखा रिकॉर्ड इस इस्तीफे के साथ ही नीतीश कुमार ने भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ उपलब्धि हासिल कर ली है। वह अब देश के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं जिन्होंने संसद और राज्य विधानमंडल के चारों सदनों (लोकसभा, राज्य सभा, विधानसभा और विधान परिषद) की सदस्यता ग्रहण की है। नितिन नवीन ने भी छोड़ी विधायकी इधर, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी अपनी बांकीपुर विधानसभा सीट से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्याग पत्र भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को रविवार को ही दे दिया था, जो संजय सरावगी आज विधानसभा में जमा कराएंगे। नितिन नवीन ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि वह अब राज्य सभा में नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। उनके इस्तीफे के साथ ही बांकीपुर सीट अब रिक्त हो गई है, जहां जल्द ही उपचुनाव कराए जाएंगे। नितिन नवीन का राजनीतिक करियर     नितिन नवीन ने अपने पिता स्वर्गीय नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा की राजनीतिक विरासत को संभाला और पटना की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई।     2006 में पहली बार बांकीपुर सीट से विधायक बने। तब से लेकर 2026 में राज्यसभा के लिए चुने जाने तक, वे लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे।     नितिन नवीन ने भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर संगठन का अनुभव हासिल हुआ।     बिहार में पथ निर्माण मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे और छत्तीसगढ़ के प्रदेश सह-प्रभारी के रूप में भी सक्रिय रहे, जहां जबर्दस्त कामयाबी मिली।     मार्च 2026 में बिहार से राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद, अब वे विधानसभा की सदस्यता छोड़कर उच्च सदन में अपनी नई पारी शुरू कर रहे हैं। रविवार को इस्तीफे का प्रोग्राम नितिन ने टाला नितिन नवीन के रविवार को ही इस्तीफा देने की सूचना थी। इसके लिए बिहार विधानसभा सचिवालय ने मीडिया को सूचना भी जारी कर दी। इसमें कहा गया कि सुबह 8:40 बजे नितिन नवीन विधानसभा अध्यक्ष के ऑफिस में इस्तीफा सौपेंगे। मीडिया में खबरें भी आ गई। नितिन नवीन के इस्तीफे के लिए विधानसभा ऑफिस को रविवार को खोला गया।  नीतीश अब भी 6 महीने रह सकते हैं सीएम संविधान के मुताबिक राज्यसभा सदस्य बनने के 14 दिन में राज्य की सदस्यता छोड़नी होती है. इस हिसाब से उन्हें विधान परिषद से इस्तीफा देना पड़ रहा, क्योंकि अगर वह इस्तीफा नहीं देते तो फिर उनकी एक सदस्यता खुद ही समाप्त हो जाती. एमएलसी पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार सीएम की कुर्सी पर बने रह सकते हैं. एक सांसद मुख्यमंत्री बन सकता है, लेकिन 6 महीने के भीतर राज्य की सदस्यता लेना जरूरी होता है।  बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा, संविधान के अनुसार कोई व्यक्ति बिना निर्वाचन के भी 6 महीने तक बिहार का मुख्यमंत्री रह सकता है.नीतीश कुमार को केवल विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देना जरूरी है, मुख्यमंत्री पद से नहीं. वे चाहें तो अगले छह महीने तक सीएम पद पर बने रह सकते हैं. बावजूद इसके नीतीश ने अब दिल्ली की राजनीति करने का फैसला कर लिया है।  बीजेपी को लेना होगा तुरंत फैसला नीतीश के विधान परिषद से इस्तीफा देने के साथ ही उनके सियासी उत्तराधिकारी के चुनने … Read more

6 अप्रैल से जम्मू-छपरा के बीच शुरू होगी विशेष ट्रेन, गर्मियों में पठानकोट-जालंधर के यात्रियों को मिलेगा लाभ

 पठानकोट यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे ने जम्मू तवी से छपरा के बीच एक स्पेशल रिजर्व ट्रेन सेवा शुरू करने का फैसला किया है. यह ट्रेन अप्रैल से जुलाई तक चलेगी और खासतौर पर उन यात्रियों को राहत देगी, जो इस रूट पर सफर करने में दिक्कतों का सामना कर रहे थे।  रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन नंबर 05194 जम्मू तवी से हर बुधवार रात 01:20 बजे 8 अप्रैल से 15 जुलाई तक चलेगी और गुरुवार सुबह 09:15 बजे छपरा पहुंचेगी. इस दौरान कुल 15 ट्रिप पूरे किए जाएंगे. वहीं वापसी में ट्रेन नंबर 05193 छपरा से हर सोमवार दोपहर 14:12 बजे 6 अप्रैल से 13 जुलाई तक रवाना होगी और मंगलवार रात 11:00 बजे जम्मू तवी पहुंचेगी. यह भी कुल 15 फेरे लगाएगी।  इस ट्रेन का ठहराव कठुआ, पठानकोट कैंट, जालंधर कैंट, लुधियाना, अंबाला कैंट, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, सीतापुर, गोंडा, बस्ती, गोरखपुर, कप्तानगंज, पाडरौना, थावे, दिघवा डुबौली और छपरा कचहरी समेत कई प्रमुख स्टेशनों पर होगा। 6 अप्रैल से होगी शुरूआत रेलवे के अनुसार, यह विशेष ट्रेन दोनों तरफ में कुल 15-15 फेरे लगाएगी। ट्रेन संख्या 05194, 8 अप्रैल से 15 जुलाई तक प्रत्येक बुधवार रात 1:20 बजे जम्मू तवी से रवाना होकर गुरुवार सुबह 9:15 बजे छपरा पहुंचेगी। वहीं, ट्रेन संख्या 05193, 6 अप्रैल से 13 जुलाई तक प्रत्येक सोमवार दोपहर 2:12 बजे छपरा से चलकर मंगलवार रात 11 बजे जम्मू तवी पहुंचेगी। ट्रेन में एसी, स्लीपर और सामान्य श्रेणी के कोच उपलब्ध रहेंगे, जिससे हर वर्ग के यात्रियों को सुविधा मिल सकेगी। बुकिंग शुरू, आईआरसीटीसी या रेलवे काउंटर से करें बुक वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक उचित सिंघल ने बताया कि अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। यह सेवा जम्मू, पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार के यात्रियों को सीधी और आरामदायक कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि यात्री असुविधा से बचने के लिए अपनी टिकट आईआरसीटीसी या रेलवे काउंटर से पहले ही बुक कर लें। उन्होंने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी टिकट पहले से ही आईआरसीटीसी या रेलवे काउंटर से बुक कर लें, ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।

डीडवाना निवासी और पूर्व प्रदेश मंत्री सरोज प्रजापत के निधन से राजस्थान भाजपा में शोक

जयपुर भाजपा की पूर्व प्रदेश मंत्री एवं प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सरोज प्रजापत का जयपुर के एक निजी अस्पताल में आकस्मिक निधन हो गया। जानकारी के अनुसार वे घुटनों के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हुई थीं और उनका ऑपरेशन भी हुआ था, लेकिन सर्जरी के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। हार्ट फेलियर के चलते उनका निधन बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के बाद उनका शुगर लेवल बढ़ गया, जिससे उनकी स्थिति गंभीर हो गई। इसके बाद उन्हें दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां वे पिछले तीन दिनों से वेंटिलेटर पर थीं। इलाज के दौरान उनकी दोनों किडनी फेल हो गईं और अंततः हार्ट फेलियर के चलते उनका निधन हो गया।  2019 में नागौर लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा सरोज प्रजापत मूल रूप से डीडवाना की निवासी थीं, लेकिन लंबे समय से नागौर में अपने परिवार के साथ रह रही थीं। उनके पति राजेंद्र कुमार सरकारी अकाउंटेंट पद से सेवानिवृत्त हैं। वे अपने पीछे दो बेटे और दो बेटियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। वर्ष 2019 में उन्होंने भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर नागौर लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव भी लड़ा था संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने उनके निधन को पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि सरोज प्रजापत एक समर्पित, कर्मठ और निष्ठावान कार्यकर्ता थीं, जिन्होंने संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका निधन पार्टी परिवार के लिए गहरी क्षति है। इसके अलावा भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों ने भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है। नागौर और डीडवाना सहित विभिन्न क्षेत्रों में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच शोक की लहर है।

राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने छोड़ी एमएलसी की सदस्यता

बिहार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद सदस्य यानी एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया है. नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा सदस्य चुने गए हैं और नियमानुसार एमएलसी पद छोड़ना जरूरी है. सीएम नीतीश कुमार ने सोमवार को एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया सुबह सवा 10 बजे इसकी आधिकारिक पुष्टि हो गई है. उनके इस इस्तीफे को लेकर सुबह से गहमा-गहमी का माहौल बना हुआ था. पहले JDU की ओर से कहा गया था कि उनका इस्तीफा हमारे पास है. बाद में JDU नेता इस्तीफा लेकर सभापति के पास पहुंचे. उन्होंने कहा- सभापति आएंगे तो इस्तीफा उन्हें सौंपा जाएगा. सामने आया है कि नीतीश के इस्तीफ़े वाला लेटर लेकर एमएलसी संजय गांधी विधान परिषद पहुंचे थे और विधान परिषद में इस्तीफे का पत्र दिया. जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि, जेडीयू एमएलसी संजय गांधी इस्तीफे का पत्र लेकर परिषद पहुंचे हैं. उन्होंने मीडिया के सामने इस्तीफे वाला लेटर भी दिखाया था. नीतीश कुमार आगे आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा देंगे. हालांकि नियम के तहत वह अभी छह महीने सीएम रह सकते हैं. क्यों बना हुआ है सस्पेंस? असल में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने पर सस्पेंस बना हुआ है. राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के बाद नियम के मुताबिक उन्हें परिषद की सदस्यता छोड़नी होती है. एमएलसी पद से इस्तीफा देने के बाद भी नीतीश कुमार छह महीने तक मुख्यमंत्री रह सकते है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी तक बिहार विधान परिषद के सदस्य थे. वह हाल ही में राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हो चुके हैं. ऐसे में नीतीश कुमार को नियमानुसार एमएलसी पद से इस्तीफा देना अनिवार्य था. वह राज्यसभा की सदस्यता को अपने पास रखेंगे. मुख्यमंत्री पद कब छोड़ेंगे यह सवाल बना हुआ है. बता दें कि सीएम नीतीश कुमार का एमएलसी पद से इस्तीफा देने की बात से रविवार शाम से ही बिहार की राजनीति में चर्चाएं होने लगी थीं. उनसे मिलने जेडीयू के कई नेता मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे. जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, मंत्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री विजेंद्र यादव मंत्री, अशोक चौधरी सीएम हाउस पहुंचे थे.

सपा की नोएडा रैली फ्लॉप, मिनी सीएम और वसूली मॉडल को जनता ने किया खारिज: ब्रजेश पाठक

नोएडा में सपा की रैली फ्लॉप, मिनी सीएम और वसूली मॉडल को जनता ने किया खारिज: ब्रजेश पाठक खाली कुर्सियों ने खोली सपा की जमीनी हकीकत अंधविश्वास छोड़ सत्ता की चाह में पहुंचे अखिलेश, नहीं मिला जनसमर्थन मोदी-योगी के नेतृत्व में बदला नोएडा-दादरी का चेहरा सपा राज में अराजकता, अब निवेश और रोजगार का बड़ा केंद्र बना दादरी बीमारू छवि से बाहर निकल तेज़ी से आगे बढ़ रहा उत्तर प्रदेश लखनऊ  नोएडा में अखिलेश यादव की हालिया रैली फ्लॉप साबित हुई, जहां खाली पड़ी कुर्सियों ने सपा की जमीनी स्थिति को उजागर कर दिया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि जिस नोएडा को समाजवादी पार्टी ने अपने शासनकाल में कई मिनी सीएम देकर ठेका, पट्टा और वसूली का अड्डा बना दिया था, उसी नोएडा की जनता ने आज सपा को पूरी तरह नकार दिया है। ब्रजेश पाठक ने कहा कि रैली में अपेक्षित भीड़ का न जुटना यह साफ संकेत है कि सपा अब जमीन से कट चुकी है। जनसभा में खाली कुर्सियां यह बता रही हैं कि जनता अब जातिवादी और अवसरवादी राजनीति से दूर जा चुकी है और विकास को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वर्षों तक अपशकुन और अंधविश्वास के कारण नोएडा से दूरी बनाए रखने वाले अखिलेश यादव अब सत्ता की लालसा में वहां पहुंचे, लेकिन जनता ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। “यह वही नोएडा है, जहां सपा सरकार के दौरान कानून व्यवस्था बदहाल थी और आम लोग असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर थे,” उन्होंने कहा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा शासन में नोएडा और दादरी क्षेत्र गुंडागर्दी और अराजकता का केंद्र बन गए थे। माताएं, बहनें, व्यापारी और युवा तक वहां जाने से कतराते थे। आज वही क्षेत्र विकास, निवेश और रोजगार का बड़ा केंद्र बन चुका है। यह बदलाव सरकार की नीतियों और मजबूत इच्छाशक्ति का परिणाम है। ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नोएडा-दादरी क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है। जेवर में बना अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा प्रदेश को वैश्विक पहचान दिला रहा है और आने वाले समय में यह क्षेत्र देश के सबसे बड़े निवेश केंद्रों में शामिल होगा। ब्रजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने बीते वर्षों में बीमारू राज्य की छवि से बाहर निकलकर विकास की नई दिशा तय की है। प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और प्रदेश तेजी से देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना रहा है। उन्होंने कहा कि सपा आज भी समाज को जाति में बांटने और संकीर्ण राजनीति में उलझी हुई है, जबकि भाजपा विकास, सुशासन और सबका साथ-सबका विकास के सिद्धांत पर काम कर रही है। जनता अब काम और परिणाम देख रही है, यही कारण है कि सपा की राजनीति अब असरहीन होती जा रही है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब रुकने वाला नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश तेजी से प्रगति के पथ पर अग्रसर है और आने वाले वर्षों में यह देश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ बनकर उभरेगा।

बड़ा एक्शन: हिसार के सरकारी स्कूलों को CBI नोटिस, प्रोत्साहन राशि की जांच शुरू

हिसार. चंडीगढ़ स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने जिले के चार सरकारी स्कूलों को नोटिस भेजा है। जिसमें कुलेरी, लाडवा, शाहपुर व उकलाना गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। उपरोक्त चारों स्कूलों से 2014 से 2016 के बीच विद्यार्थियों की कुल संख्या, स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (एसएलसी), विद्यार्थी प्रोत्साहन राशि, खाते का विवरण, मिड-डे मील से संबंधित दस्तावेजों पर रिपोर्ट मांगी है। बता दें कि 2014 में सीबीआई ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को सुवाधाओं के नाम पर पैसे डकारने का मामला दर्ज किया था। जिसकी पड़ताल चल रही है। प्रदेश के हर जिले के ऐसे सरकारी स्कूलों से पूछताछ की जा रही है। प्रथम चरण में हिसार जिले के 45 सरकारी स्कूलों में 3455 विद्यार्थियों फर्जी दिखाकर सुविधाओं के नाम पर पैसे डकारने के आरोप लगे हैं। कोर्ट के आदेश पर सीबीआई संबंधित स्कूलों से रिपोर्ट मंगवाकर जांच कर रही है। एडमिशन घोटाले में CBI ने कस दिया शिकंजा हरियाणा में एडमिशन में घोटाले में CBI ने शिकंजा और कस दिया है। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में दाखिले के नाम पर हुए फर्जीवाड़ा हुआ था। हरियाणा में फर्जी एडमिशन दिखाकर सरकारी धन का गबन किया गया। यह फर्जीवाड़ा साल 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार में शुरू हुआ था जो सत्ता परिवर्तन के बाद भी वर्ष 2016 तक भाजपा सरकार में जारी रहा। इस मामले में हाई कोर्ट के आदेश पर CBI जांच शुरू हुई और 3 FIR रजिस्टर्ड की गई थी। अब एक बार फिर CBI ने इस मामले में 4 नई एफआईआर दर्ज की गई है। सीबीआई ने धारा 120-B, 167, 218, 409, 418, 420, 477-A के तहत केस दर्ज किया गया है। यह मामला हिसार, सोनीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, करनाल, झज्जर, रोहतक से जुड़ा हुआ है। त्वरित रिपोर्ट पेश आदेश  सीबीआई ने जिले के चार सरकारी स्कूलों को नोटिस भेजा है। संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि वे त्वरित रिपोर्ट पेश करें। -वेद सिंह दहिया, जिला शिक्षा अधिकारी, हिसार।

उद्योगों को राहत: पंजाब सरकार ने लीजहोल्ड प्लॉट को फ्रीहोल्ड बनाने की नीति पास की

चंडीगढ़. पंजाब कैबिनेट ने लीजहोल्ड औद्योगिक प्लॉटों/शेडों को फ्रीहोल्ड में बदलने के लिए नीति में संशोधनों को भी मंजूरी दी है। इन संशोधनों के अनुसार, बैंकों या वित्तीय संस्थाओं के पास गिरवी रखे गए औद्योगिक प्लॉट फ्रीहोल्ड में बदले जा सकते हैं, बशर्ते संबंधित बैंक द्वारा प्राप्त ‘नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ जमा करवाया गया हो और निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन किया गया हो। ऐसे मामलों में जहां मौजूदा टाइटल दस्तावेजों में अनार्जित वृद्धि संबंधी कोई धारा नहीं है, 5 प्रतिशत की कन्वर्जन फीस लागू होगी। कुछ प्रतिबंधात्मक शर्तों पर जताई थी आपत्ति मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि पहले हस्तांतरण नीति 2008, 2016 और 2021 में लाई गई थी। औद्योगिक संगठनों ने 2021 में लाई गई नीति की कुछ प्रतिबंधात्मक शर्तों पर आपत्ति जताई थी। इसके जवाब में एक कमेटी ने उद्यमियों की मांगों की समीक्षा की और फ्री होल्ड प्लॉटों पर लागू होने वाले परिवर्तनों का प्रस्ताव दिया। संशोधित नीति के अनुसार औद्योगिक प्लॉट की आरक्षित कीमत का 12.5 प्रतिशत हस्तांतरण शुल्क लागू होगा। कैबिनेट ने विशेष रूप से पीएसआईईसी के प्रबंधन वाले लीजहोल्ड औद्योगिक प्लॉटों और शेड्स को फ्री होल्ड में बदलने की नीति को भी मंजूरी दे दी। ये प्लॉट और शेड मूल रूप से लीजहोल्ड आधार पर आवंटित किए गए थे, जिनमें परिवर्तन संबंधी जटिल धाराएँ शामिल थीं, जिसके कारण संपत्ति के लेन-देन में कठिनाइयां आ रही थी। इस नई नीति का उद्देश्य औद्योगिक प्लॉटों के प्रबंधन को सुचारू करना, कारोबार में सुगमता बढ़ाना, आवंटियों के बीच मुकदमेबाजी और अनिश्चितता को कम करना है। इसके अलावा, इस हस्तांतरण से राज्य के लिए अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न होने की उम्मीद है। कैबिनेट ने एमएसएमई डेवलपमेंट एक्ट, 2006 के तहत एमएसई फैसिलिटेशन काउंसिल नियम-2021 में संशोधनों को मंजूरी दे दी। वर्तमान में जिला स्तर पर माइक्रो और स्मॉल इंटरप्राइजेज फैसिलिटेशन काउंसिल संबंधित डिप्टी कमिश्नरों के नेतृत्व में काम कर रही हैं। हालांकि, इस एक्ट के तहत अवार्ड्स से संबंधित भुगतानों में देरी हो रही है।